हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने पर नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने पर नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Supreme Court on Reservation: सुप्रीम कोर्ट ने देश में धर्म परिवर्तन और आरक्षण के अधिकार से जुड़े एक मामले में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाता है, तो वह केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर पिछड़ा वर्ग (Backward Class) के अंतर्गत आरक्षण या सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के लाभ का दावा नहीं कर सकता।

 

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की पीठ ने तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी। ALSO READ: OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी मोहन सरकार, सॉलिसिटर जनरल से CM की मुलाकात

मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को रखा बरकरार

दरअसल, यह मामला तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के उस सरकारी आदेश से संबंधित था, जिसमें यह व्यवस्था दी गई थी कि पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग (MBC), डिनोटिफाइड समुदायों और अनुसूचित जातियों (SC) से जुड़े लोग यदि इस्लाम अपनाते हैं, तो उन्हें ‘पिछड़ा वर्ग मुस्लिम’ (BCM) श्रेणी का दर्जा दिया जा सकता है।

 

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के इस आदेश को रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अब खारिज कर दिया है। ALSO READ: शिवसेना विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, चुनाव आयोग ने क्यों नहीं ‘फ्रीज’ किया धनुष-बाण?

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था से निकलकर किसी गैर-हिंदू सामाजिक व्यवस्था (जैसे इस्लाम) में जाने वाला व्यक्ति केवल इस आधार पर अनुच्छेद 16(4) के तहत आरक्षण नहीं मांग सकता कि वह धर्म परिवर्तन से पहले पिछड़े वर्ग का हिस्सा था। न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था में झेली गई पिछड़ेपन की स्थिति को अपने आप आगे बढ़ाकर नए धर्म में किसी पिछड़े वर्ग का दर्जा हासिल करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

‘घर वापसी’ पर भी स्थिति साफ

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि कानूनन केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानने वाले व्यक्ति को ही अनुसूचित जाति का सदस्य माना जा सकता है। इन धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाने पर व्यक्ति अपनी मूल जाति का दर्जा खो देता है और आरक्षण का लाभ नहीं मांग सकता। यदि कोई व्यक्ति इस्लाम अपनाने के बाद दोबारा हिंदू धर्म में लौटता है (घर वापसी), तो उसे उसका पुराना पिछड़े वर्ग का दर्जा अपने आप वापस नहीं मिलता।

क्या था पूरा मामला?

इस विवाद की शुरुआत थूथुकुडी जिले से हुई थी। वहां एक हिंदू दंपति के घर जन्मे परमसिवम नामक व्यक्ति ने धर्म परिवर्तन के बाद मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में अनुरोध किया गया था कि इस्लाम अपनाने के बावजूद उन्हें पिछड़े समुदाय का सदस्य माना जाए और उसी के अनुरूप लाभ प्रदान किए जाएं। इसी याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार के उस आदेश को निरस्त किया था, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मुहर लग गई है।

Updated Bajaj Pulsar NS160 spotted testing

Updated Bajaj Pulsar NS160 spotted testing
Pulsar NS160's new 5-inch TFT cluster, WP USD fork, and updated switchgear.

Another day, another new Pulsar that has been spotted testing. This time, it’s the NS160, and it appears to be getting a new WP USD fork and the same TFT display that we have already seen multiple other Pulsars gaining since August. If this feels really familiar to you, that’s because the elder sibling NS200 was also spotted last month with the exact two changes.

  1. NS160 is expected to share the 5-inch TFT display with the NS200 and the NS400Z
  2. Could get more features the updated NS200 is expected to get

New Bajaj Pulsar NS160: What’s not changing?

Most parts are expected to remain unchanged

Based on the images, let’s understand what Bajaj doesn’t seem to be changing with this new NS160. First up, it looks almost exactly the same as the current version, with no apparent changes to the decals, at least not on the Ebony Black colour in the images. At this time, we also expect the motorcycle to retain its 160.3cc single-cylinder liquid-cooled engine. The elder NS200 is purported to get 1hp extra power (claims a Bajaj dealer), and we’ll have to see if that’s extended to the middle child as well. Currently, the NS160’s engine makes 17hp and 14.6Nm.

The updated Bajaj Pulsar NS160 with the same styling as the current version

The N250, NS200 and RS200 were the last three Pulsars spotted testing – in that order. The N250 and NS200, specifically, are expected to get ride-by-wire, proper ride modes (versus the current ABS modes), a quickshifter and traction control. We are uncertain whether these features will reach the NS160 (and the RS200). What we can be certain about is that the NS160 has the 5-inch TFT cluster – which the Pulsar NS400Z was the last to get – and the WP USD fork. The WP fork was also spotted in an earlier test mule of the NS200, but it’s conspicuously missing from the feature set mentioned by the Bajaj dealer. As has been the trend, it’s likely that Bajaj will restrict the TFT display to the highest variant of the NS160. The lower variants could stick to the updated negative LCD screen present on the NS125 and the like.

Bajaj currently sells the Pulsar NS160 at Rs 1.26 lakh for the base variant and at Rs 1.35 lakh for the higher variant with a USD fork. As we’ve seen with other new Pulsars, the company will likely raise the NS160’s price, but we’ll have to wait for the official launch to see the extent of the hike.

Images: motomaniac_2161 via Rushlane

Mahindra XUV 3XO CNG vs rivals: price, specifications compared

Mahindra XUV 3XO CNG vs rivals: price, specifications compared
Mahindra XUV 3XO CNG vs rivals

Mahindra’s entry-level offering, the XUV 3XO, is now available with a factory-fitted CNG kit in certain trim levels. This allows the XUV 3XO to directly rival CNG variants of the Tata Nexon and Maruti Suzuki Brezza. We take a look at how Mahindra’s first non-commercial car with a factory-fitted CNG kit fares against its competitors, spec sheet to spec sheet.

Mahindra XUV 3XO CNG vs rivals: Dimensions

 XUV 3XOBrezzaNexon
Length (mm)3,9903,9953,995
Width (mm)1,8211,7901,804
Height (mm)1,6471,6851,620
Wheelbase (mm)2,6002,5002,498
Wheel size (inches)161616
Boot space (litres)270328321

The XUV 3XO is slightly shorter overall than the Nexon and Brezza, but ekes out the longest wheelbase and is the widest compact SUV here. In terms of height, the XUV 3XO falls just short of the Maruti, and all three SUVs offer 16-inch alloy wheels. Coming to boot space, though, the XUV 3XO lags substantially behind its rivals, despite having a similar boot-mounted twin-cylinder setup to the Nexon. The Brezza, meanwhile, has the highest boot space here due to its underbody CNG tank setup.

Mahindra XUV 3XO CNG vs rivals: Engine and gearbox

 XUV 3XOBrezzaNexon
Engine1.2 turbo-petrol1.5 petrol1.2 turbo-petrol
Cylinder count343
Power (hp)11188100
Torque (Nm)200121.5170
Gearbox6-speed manual6-speed manual6-speed manual
Claimed mileage (km/kg)24.726.924

Where CNG cars are usually weaker in CNG mode, the XUV 3XO flips the script by outputting identical power and torque figures in its petrol and CNG modes – Mahindra has achieved this by optimising the turbocharger calibration and ECU mapping. Therefore, the XUV 3XO CNG is the most powerful compact SUV here, beating the Nexon CNG by 11hp and 30Nm, and the Brezza CNG by a considerable 23hp and 78.5Nm margin.

That said, the Brezza CNG does claw a point in its favour by offering the biggest engine here and an additional cylinder over its rivals, which could make the driving experience feel smoother and more refined. Another big upside to the Brezza CNG is its segment-best claimed fuel efficiency. The XUV 3XO trails just behind the Brezza on the mileage front, while the Nexon CNG sports the lowest claimed figure.

Mahindra XUV 3XO CNG vs rivals: Price

 Price (Rs, lakh)
XUV 3XO9.99-12.27
Brezza*9.40-11.60
Nexon*8.35-13.42

*Excluding premiums for dual-tone paint finishes and/or cosmetic packages.

The XUV 3XO CNG carries the highest starting price compared to its rivals, with the Nexon CNG undercutting it by Rs 1.54 lakh and the Brezza CNG by Rs 59,000. Looking at top-spec variant prices, the order sees a rejig, with the Tata SUV commanding the highest price due to a broader spread of variants. At Rs 13.42 lakh, the range-topping variant of the Nexon CNG is Rs 1.15 lakh pricier than the XUV 3XO CNG’s equivalent version, and Rs 1.82 lakh more expensive than that of the Brezza CNG.

All prices are ex-showroom, India.

असल जिंदगी में बिल्कुल नॉन-ड्रामैटिक हैं आदित्य धर: यामी गौतम

बॉलीवुड अभिनेत्री यामी गौतम ने अपने पति और फिल्मकार आदित्य धर को असल जिंदगी में बेहद शांत और सहज स्वभाव का बताया है। सोनी मराठी के कार्यक्रम ‘कोण होणार करोडपति’ के आगामी एपिसोड में यामी अपनी फिल्म ‘नयी नवेली’ के प्रचार के दौरान अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के साथ बातचीत में अपनी प्रेम कहानी से जुड़े दिलचस्प किस्से साझा करेंगी।

इस एपिसोड में यामी गौतम और अभिनेता आदिनाथ कोठारे माधुरी दीक्षित के सामने हॉट सीट पर नजर आएंगे। इस दौरान यामी बताएंगी कि माधुरी की फिल्मों में दिखाई गई प्रेम कहानियों ने उनके प्यार को लेकर नजरिये को किस तरह प्रभावित किया।

माधुरी की फिल्मों की प्रेम कहानियों को याद करते हुए यामी कहती हैं आपकी फिल्में देखकर हमें लगता था कि प्रेम कहानी हो तो ऐसी हो। हर लड़की ऐसे ही किसी लम्हे का सपना देखती है, जिसमें मन ही मन लगे-‘पलट, पलट!’ लेकिन असल जिंदगी में आदित्य और मुझमें एक बात एक जैसी है। हम दोनों ही बहुत कम खुलने वाले और बिल्कुल नॉन-ड्रामैटिक लोग हैं।

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यामी ने बताया कि उनकी पहली मुलाकात फिल्म ‘उरी’ के सेट पर हुई थी। उस समय आदित्य फिल्म का निर्देशन कर रहे थे और यामी अभिनय कर रही थीं। शूटिंग के दौरान दोनों के बीच ज्यादा बातचीत नहीं हुई, लेकिन फिल्म के प्रचार के दौरान साथ में इंटरव्यू देते हुए उन्हें एक-दूसरे को बेहतर ढंग से जानने का मौका मिला।

यामी के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि जिंदगी, परिवार और संस्कारों को लेकर दोनों की सोच काफी मिलती है। आदित्य का शांत स्वभाव, सभी के प्रति सम्मान और काम के प्रति जुनून उन्हें बेहद पसंद आया।

यामी ने कहा हमारी पहली मुलाकात ‘उरी’ के सेट पर हुई थी। शूटिंग के दौरान हमारी ज्यादा बातचीत नहीं हुई। लेकिन प्रमोशन के समय जब हम साथ इंटरव्यू देते थे, तो एक-दूसरे के जवाब भी सुनते थे। तभी मुझे लगा कि इनके उसूल और पारिवारिक संस्कार मेरे जैसे हैं। आदित्य की यही बात मुझे बहुत अच्छी लगी। सेट पर मैं पहले ही देख चुकी थी कि वह कैसे इंसान हैं। ऐसे लोग बहुत कम मिलते हैं। वह कभी किसी पर गुस्सा नहीं करते थे, सबकी इज्जत करते थे और अपने काम को लेकर बेहद जुनूनी थे। साथ ही, बहुत शांत और सुलझे हुए भी थे।

इस पर माधुरी दीक्षित ने मुस्कुराते हुए कहा बिल्कुल आपकी तरह। यामी ने अपने जीवनसाथी के बारे में कहा ऐसा साथी मिलना बहुत बड़ी बात होती है। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि आदित्य मेरे पति हैं। ‘कोण होणार करोडपति’ का यह विशेष एपिसोड सोनी मराठी पर सोमवार से शनिवार रात नौ बजे प्रसारित होता है। दर्शक इसे सोनी लिव पर भी देख सकते हैं।

Pic Credit : UNI

अंकिता भंडारी प्रकरण में धामी सरकार की संवेदनशीलता और सख्त कार्रवाई, न्याय की लड़ाई में हर स्तर पर उठाए कदम

अंकिता भंडारी प्रकरण में धामी सरकार की संवेदनशीलता और सख्त कार्रवाई, न्याय की लड़ाई में हर स्तर पर उठाए कदम

cm pushkar singh dhami

अंकिता भंडारी हत्याकांड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई, निष्पक्ष जांच, प्रभावी अभियोजन और पीड़ित परिवार को सहायता उपलब्ध कराने के स्तर पर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। घटना सामने आने के बाद आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी से लेकर विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन, अभियोजन की व्यवस्था और परिवार की मांगों पर निर्णय लेने तक सरकार ने इस संवेदनशील प्रकरण को गंभीरता से लिया।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुरुआत से ही स्पष्ट किया कि महिलाओं की सुरक्षा और अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सरकार की प्राथमिकता है। इसी क्रम में पुलिस को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए। घटना के सामने आने के 24 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। प्रकरण की गहन जांच के लिए एसआईटी गठित की गई, ताकि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

 

एसआईटी जांच और अभियोजन को मजबूत करने पर जोर

प्रकरण की जांच के दौरान साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में मामले की पैरवी की। आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई। मामले में न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। यह फैसला न्यायालय द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर दिया गया। सरकार की ओर से इस मामले में कानून के अनुरूप कार्रवाई और अभियोजन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। प्रकरण में जमानत संबंधी न्यायिक आदेशों ने भी अपनी भूमिका निभाई।

 

परिजनों की भावनाओं और मांगों को दिया सम्मान

अंकिता भंडारी प्रकरण में प्रदेश सरकार ने पीड़ित परिवार की भावनाओं और मांगों को भी महत्व दिया। परिजनों की मांग के अनुरूप सरकारी अधिवक्ताओं में बदलाव किए गए, ताकि वे अपनी बात और अपेक्षाएं न्यायिक प्रक्रिया के समक्ष रख सकें। इसके साथ ही अंकिता के माता-पिता द्वारा सीबीआई जांच की मांग उठाए जाने पर मुख्यमंत्री ने उनकी मांग पर निर्णय लेते हुए सीबीआई जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

 

सरकार का यह रुख दर्शाता है कि संवेदनशील मामलों में केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार का विश्वास बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। परिवार की आशंकाओं और मांगों को सुनना तथा कानून के दायरे में उन पर निर्णय लेना शासन की जवाबदेही का हिस्सा है।

 

परिवार को आर्थिक सहायता और रोजगार से मिला संबल

अंकिता के निधन के बाद परिवार को आर्थिक और सामाजिक संबल प्रदान करने के लिए प्रदेश सरकार ने ₹25 लाख की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। इसके अतिरिक्त परिवार के सदस्यों को रोजगार उपलब्ध कराने के कदम भी उठाए गए। सरकार ने इन निर्णयों के माध्यम से यह संदेश दिया कि किसी गंभीर अपराध से प्रभावित परिवार को न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ जीवन की कठिनाइयों से उबरने में भी सहयोग मिलना चाहिए।

 

महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता

अंकिता भंडारी प्रकरण ने महिलाओं की सुरक्षा, अपराधों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर व्यापक चर्चा को जन्म दिया। ऐसे मामलों में पुलिस जांच, अभियोजन, न्यायालय और शासन की अपनी-अपनी निर्धारित भूमिकाएं होती हैं। सरकार की जिम्मेदारी है कि जांच एजेंसियों को कानून के अनुरूप कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाए, अभियोजन की व्यवस्था प्रभावी रहे और पीड़ित परिवार को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई, जांच, परिवार की मांगों पर विचार और आर्थिक सहायता जैसे कदम उठाए। सरकार का संदेश स्पष्ट है कि महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को गंभीरता से लिया जाएगा और प्रत्येक मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

 

अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने का विषय केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की सुरक्षा, संवेदनशील शासन और कानून के प्रति विश्वास से भी जुड़ा है। इस प्रकरण में सरकार द्वारा उठाए गए कदम उसकी प्रशासनिक जवाबदेही और पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनशीलता को सामने रखते हैं।

 

विद्या बालन करेंगी पर्थ के पहले भारतीय फिल्म महोत्सव का उद्घाटन

भारतीय सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री विद्या बालन 22 से 24 जनवरी 2027 तक आयोजित होने वाले इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ पर्थ (आईएफएफपी) के पहले संस्करण का उद्घाटन करेंगी। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में पहली बार आयोजित हो रहे इस महोत्सव में वह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी।

इस महोत्सव का उद्देश्य पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के दर्शकों तक भारतीय सिनेमा की विविधता, समृद्ध कहानियों और विभिन्न भाषाओं की फिल्मों को पहुंचाना तथा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है।

इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ पर्थ, इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (आईएफएफएम) और इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ सिडनी (आईएफएफएस) की टीम की नई पहल है। मेलबर्न और सिडनी में भारतीय सिनेमा को मिले मंच की सफलता के बाद अब पर्थ में भी भारतीय फिल्मों, फिल्म निर्माताओं और दर्शकों को जोड़ने के लिए एक नया मंच तैयार किया जा रहा है।

महोत्सव की घोषणा पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के प्रीमियर रोजर कुक की भारत यात्रा के दौरान की गई थी। इस पहल को दोनों क्षेत्रों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक और रचनात्मक संबंधों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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विद्या बालन भारतीय सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने अपने करियर में महिला-केंद्रित फिल्मों और विविध विषयों पर आधारित कहानियों में उल्लेखनीय भूमिकाएं निभाई हैं। महोत्सव में उनकी उपस्थिति से भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने के प्रयासों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

महोत्सव की घोषणा पर फेस्टिवल डायरेक्टर मितु भौमिक लांगे एएम ने कहा कि पर्थ में भारतीय फिल्म महोत्सव की शुरुआत करना गर्व का क्षण है। मेलबर्न और सिडनी में सफल मंच तैयार करने के बाद अब पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के नए दर्शकों और फिल्म प्रेमियों तक पहुंचने का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि सिनेमा लोगों को जोड़ने, सीमाओं से परे जाने और एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझने का माध्यम है। विद्या बालन का पहले महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना विशेष है। महोत्सव के जरिए भारतीय कहानियों की विविधता का जश्न मनाने के साथ भारत और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ पर्थ में भारतीय सिनेमा की विभिन्न भाषाओं, शैलियों और विषयों पर आधारित फिल्मों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही फिल्म निर्माताओं, दर्शकों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच संवाद, सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अवसर भी उपलब्ध होंगे।

Pic Credit : UNI

मुख्य चयनकर्ता के लिए पार्थिव पटेल ने नहीं किया आवेदन प्रज्ञान ओझा के लिए रास्ता साफ

Pragyan Ojha

सितंबर माह में ऐसी खबरें थी कि पूर्व विकेटकीपर पार्थिव पटेल अगले मुख्य चयनकर्ता बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। ऐसा माना जा रहा था  कि अजीत आगरकर ने अपने कार्यकाल को बढ़ाने की कोई सिफारिश नहीं की है। ऐसे में पूर्व विकेटकीपर पार्थिव पटेल मुख्य चयनकर्ता बनने के करीब थे।

लेकिन उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड  के मुख्य चयनकर्ता की दौड़ से हटने का फैसला करते हुए आवेदन नहीं दिया। ऐसे में अंतिरम  मुख्य चयनकर्ता को पूर्णकालिक मुख्य चयनकर्ताबनाने का रास्ता साफ हो चुका है। हाल ही में प्रज्ञान ओझा ने न्यूजीलैंड दौरे के लिए भारतीय टी-20 टीम की घोषणा की थी और अब वह बतौर पूर्णकालिक मुख्य चयनकर्ता एकदिवसीय टीम की भी घोषणा जल्द करेंगें। ऐसा माना जा रहा है कि पार्थिव पटेल मुख्य चयनकर्ता बनने से ज्यादा गुजरात टाइटंस के लिए मेंटर करने में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं।

ऐसा रहा है करियर

ओझा ने 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ मुंबई में सचिन तेंदुलकर के विदाई टेस्ट में आखिरी बार भारत के लिए खेला था।ओझा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ इस टेस्ट की पहली पारी में 40 रन पर पांच विकेट और दूसरी पारी में 49 रन पर पांच विकेट लिए थे और वह ‘मैन ऑफ द मैच’ बने।उन्होंने 2009 से 2013 के बीच 24 टेस्ट में 113 विकेट लिए हैं।

उनका एकदिवसीय पदार्पण साल 2008 में हुआ था लेकिन 4 साल के करियर में उन्होंने उन्होंने 18 वनडे में 21 विकेट लिए।टी-20 अंतरराष्ट्रीय में उनको सबसे कम मौका मिला। उन्होंने कुल 6 मैच में 10 विकेट लिए।आईपीएल करियर की बात करें तो उन्होंने 92 मैचों में 89 विकेट लिए।आईपीएल में डेक्कन चार्जर्स और मुंबई इंडियंस के लिए खेल चुके ओझा के गेंदबाजी एक्शन की 2014 में शिकायत हुई थी। बाद में 2015 में उनके गेंदबाजी एक्शन को फिर वैध ठहराया गया।

बाएं हाथ के स्पिनर को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर गावस्कर टेस्ट सीरीज में वीवीएस लक्ष्मण के साथ साझेदारी के लिए जाना जाता है जब भारत को एक विकेट से करीबी जीत हासिल हुई थी।

मध्य प्रदेश सरकार का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हित में बड़ा निर्णय, 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को पदोन्नति में सीपीसीटी से मिलेगी छूट

मध्य प्रदेश सरकार का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हित में बड़ा निर्णय, 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को पदोन्नति में सीपीसीटी से मिलेगी छूट

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुरूप राज्य शासन ने मध्यप्रदेश के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए सहायक ग्रेड 3 और समकक्ष पदों पर पदोन्नति के लिए सीपीसीटी में छूट आदि से संबंधित समेकित निर्देश जारी किया है। अब जहां सहायक ग्रेड 3 के पद पर पदोन्नति के लिए 45 वर्ष से अधिक के कर्मियों को सीपीसीटी स्कोर कार्ड से पूरी छूट दी है वहां अन्य पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति के बाद निर्धारित कम्प्यूटर अर्हताएं प्राप्त करने के लिए अधिकतम 5 वर्ष का अवसर दिया गया है।

 

सामान्य प्रशासन विभाग ने म.प्र. लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के तहत सभी विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू होने के बाद आ रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए यह निर्देश जारी किए हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए कम्प्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा (CPCT) एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की अनिवार्यता के संबंध में संशोधित निर्देश जारी किए हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को CPCT स्कोर कार्ड की अनिवार्यता से छूट प्रदान की गई है। साथ ही अन्य पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति के बाद निर्धारित कम्प्यूटर अर्हताएं प्राप्त करने के लिए अधिकतम 5 वर्ष का अवसर दिया गया है। अब सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता रखने वाले ऐसे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, जिन्हें CPCT एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की अर्हता प्राप्त करना आवश्यक है, उन्हें पदोन्नति के बाद 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में CPCT परीक्षा उत्तीर्ण करना होगी तथा मान्यता प्राप्त संस्थान से एक वर्षीय कम्प्यूटर डिप्लोमा अथवा निर्धारित समकक्ष योग्यता प्राप्त करना होगी।

 

यदि कर्मचारी 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में आवश्यक अर्हताएं प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो उनकी परिवीक्षा अवधि अधिकतम 3 वर्ष और बढ़ाई जा सकेगी। इस प्रकार उन्हें पदोन्नति के बाद कुल 5 वर्ष के भीतर निर्धारित योग्यता प्राप्त करनी होगी। इस अवधि में आवश्यक योग्यता प्राप्त नहीं करने पर संबंधित कर्मचारी को उसके मूल चतुर्थ श्रेणी पद पर वापस पदस्थ कर दिया जाएगा।उक्त प्रावधान केवल विभागीय पदोन्नति के मामलों में लागू होंगे।

 

सीधी भर्ती आदि में नहीं मिलेगा लाभ-सीधी भर्ती अथवा अन्य किसी माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में CPCT एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की निर्धारित अर्हताएं यथावत अनिवार्य रहेंगी।

 

45 वर्ष से अधिक वालों को बड़ी राहत-आदेश अनुसार शासकीय सेवक अपनी पदोन्नति की तिथि को 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं, उन्हें सहायक ग्रेड-3 पर पदोन्नति हेतु CPCT स्कोर कार्ड से छूट प्रदान की गई है, परंतु कम्प्यूटर दक्षता की अनिवार्यता बनी रहेगी।

सौरव जोशी ने पत्नी अवंतिका को दिया ऐसा चैलेंज, वीडियो देख भड़के लोग, यूपीएससी टीचर ने भी लगाई फटकार

सोशल मीडिया पर मनोरंजन के लिए बनाया गया वीडियो कब विवाद की वजह बन जाए, कहा नहीं जा सकता। मशहूर यूट्यूबर सौरव जोशी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। उनके एक पारिवारिक वीडियो की क्लिप इंटरनेट पर चर्चा में है, जिसमें उनकी पत्नी अवंतिका भट्ट को ऐसा चैलेंज दिया गया कि कई दर्शक नाराज हो गए। मामला केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों ने इसे रिश्तों में सम्मान से भी जोड़ दिया। इस बीच यूपीएससी शिक्षक अमित किल्होर ने भी सौरव के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।

आखिर वीडियो में क्या हुआ था?

वायरल क्लिप में सौरव जोशी अपने परिवार के सदस्यों पीयूष और साहिल के साथ सच या चुनौती वाला खेल खेलते नजर आते हैं। खेल के दौरान अवंतिका की बारी आती है और वह चुनौती चुनती हैं। इसके बाद सौरव उन्हें अपने पालतू कुत्ते ओरियो के पानी के बर्तन से पानी पीने को कहते हैं।

वीडियो में इस चुनौती को मजाकिया अंदाज में पेश किया जाता है। बातचीत के दौरान कहा जाता है कि उन्हें सिर्फ एक घूंट पीना है और पानी साफ है। हालांकि, कैमरे पर दिखाई देने वाला यह पल सोशल मीडिया पर पहुंचने के बाद कई लोगों को पसंद नहीं आया।

मजाक के नाम पर ऐसा चैलेंज क्यों?

क्लिप देखने के बाद कुछ लोगों ने पालतू जानवर के बर्तन से पानी पीने की चुनौती पर साफ-सफाई को लेकर चिंता जताई। वहीं, कुछ दर्शकों ने सवाल किया कि मनोरंजन के लिए अवंतिका को ऐसी स्थिति में डालने की जरूरत ही क्या थी।

लोगों की नाराजगी का एक कारण यह भी रहा कि किसी चुनौती को मजेदार बनाने के लिए दूसरे व्यक्ति को असहज करना कितना सही है। हालांकि, कुछ लोग इसे परिवार के बीच का सामान्य मजाक भी मान सकते हैं। इस तरह वीडियो को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं।

अमित किल्होर ने सौरव जोशी के बारे में क्या कहा?

इस विवाद में यूपीएससी शिक्षक, मार्गदर्शक और रिजॉल्व आईएएस के संस्थापक अमित किल्होर की प्रतिक्रिया ने भी ध्यान खींचा। उन्होंने वीडियो में सौरव के व्यवहार की आलोचना करते हुए उन्हें महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण सोच रखने वाला व्यक्ति बताया। उनकी इस टिप्पणी के बाद मामला और चर्चा में आ गया।

यह किल्होर की व्यक्तिगत राय है। वीडियो को लेकर उठे सवालों के बीच बहस अब इस बात पर भी है कि क्या यह महज एक मजाक था या इसमें पत्नी के प्रति असम्मान नजर आता है।

पारिवारिक वीडियो बनाने वालों के लिए क्या है सबक?

आज सोशल मीडिया पर परिवार के साथ बिताए गए छोटे-छोटे पल भी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचते हैं। ऐसे में वीडियो बनाने वालों के लिए यह समझना जरूरी है कि जो बात उन्हें निजी तौर पर मजेदार लगती है, जरूरी नहीं कि दर्शक भी उसे उसी नजर से देखें।

सौरव जोशी के इस वीडियो ने मनोरंजन और व्यक्तिगत सम्मान के बीच की सीमा पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल, कुछ लोग इसे जरूरत से ज्यादा तूल देना मान रहे हैं, जबकि दूसरे दर्शकों को यह चुनौती अनुचित लगी। यही वजह है कि एक छोटे से खेल का हिस्सा बनी क्लिप अब सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गई है।

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बांग्लादेश प्रोटेस्ट वाले बयान पर घिरीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, बीजेपी बोली- यह राहुल गांधी की ‘पोस्टर गर्ल’

बांग्लादेश प्रोटेस्ट वाले बयान पर घिरीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, बीजेपी बोली- यह राहुल गांधी की 'पोस्टर गर्ल'

Pradeep Bhandari attacks rahul gandhi on Neha Bora controversial statement

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश में छात्र आंदोलन से प्रेरित होकर भारत में भी ऐसा आंदोलन खड़ा करने की बात कहकर बवाल खड़ा कर दिया। उनके बयान को लेकर भाजपा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष पर निशाना साधा है। भाजपा ने कहा कि राहुल और उनके साथी लोकतंत्र के लिए खतरा है। वे बांग्लादेश जैसा आंदोलन भारत में करना चाहते हैं। ALSO READ: दिल्ली इंटरनेट बैन पर सुप्रीम कोर्ट में झुकी सरकार: गृह सचिव गोविंद मोहन ने मांगी बिना शर्त माफी

 

क्या बोली नेहा बोरा?

नेहा बोरा का एक बयान सामने आया है, जिसमें वह बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलन और भारत में चल रहे जेन-जी आंदोलनों के बीच समानता बताती नजर आ रही हैं। इसमें वह कह रही हैं कि बांग्लादेश में हुए Gen-Z आंदोलन ने भारत के नौजवानों को भी रास्ता दिखाया है। नेहा ने बांग्लादेश के आंदोलन को लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकार से जोड़ते हुए कहा कि आज भारत में भी यही मुद्दे सामने हैं। ALSO READ: राहुल गांधी के घर चाय पर चर्चा की इनसाइड स्टोरी? CJP से नेहा बोरा तक कौन किसके साथ, कौन किसके खिलाफ?

 

प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर नेहा बोरा के बयान को साझा करते हुए राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने नेहा बोरा को राहुल गांधी की विचारधारा का समर्थन करने वाली प्रमुख चेहरों में से एक बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का विरोध केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सत्ता परिवर्तन करना है। भंडारी ने नेहा बोरा को ‘राहुल गांधी की पोस्टर गर्ल’ बताया और कहा कि वह बांग्लादेश के सत्ता परिवर्तन से प्रेरित हैं और वैसी ही स्थिति भारत में दोहराना चाहती हैं।

कौन है नेहा बोरा?

नेहा एक प्रमुख छात्र नेता, रंगकर्मी, सामाजिक कार्यकर्ता और शोधार्थी हैं। उन्होंने रंगमंच का उपयोग स्ट्रीट प्ले (नुक्कड़ नाटक) और जन-जागरूकता आंदोलनों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को उठाने के लिए किया है। वह वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और देश की युवा (Gen-Z) राजनीति में एक चर्चित चेहरा बनकर उभरी हैं। वे मूल रूप से उत्तराखंड के खटीमा (पिथौरागढ़/कुमाऊं क्षेत्र) की रहने वाली हैं। 

 

चूंकि उनके पिता भारतीय सेना में रहे, इसलिए उनका बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता और उनकी शुरुआती पढ़ाई सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) के दिल्ली पब्लिक स्कूल से हुई। हिंदू कॉलेज/दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से समाजशास्त्र (Sociology) में स्नातक किया। डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली से मास्टर डिग्री हासिल की। नेहा वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के ‘स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स’ (School of Arts and Aesthetics) में पीएचडी की शोधार्थी हैं। उनकी पीएचडी थियेटर और कला के सामाजिक अध्ययन पर केंद्रित है।

 

नीट पेपर लिक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अन्य छात्र नेताओं के साथ 23 दिनों तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की थी। इसके बाद से ही वे प्रदर्शनों में बड़ा चेहरा बन गई। वे अभिजीत दिपके और राहुल गांधी दोनों के ही साथ प्रदर्शन में दिखाई दी है।