‘आंखों के सामने कार बही, लगा अब हमारी बारी है’:लोग बोले- जिस पुल से आए, वो डूब गया; नेपाल से रेस्क्यू 106 भारतीयों की आपबीती

‘काठमांडू से निकलते ही हमें अंदाजा हो गया था कि हालात बेहद खतरनाक हो चुके हैं। पानी का फ्लो अचानक तेजी से बढ़ गया था। हमारी गाड़ी से करीब 500 मीटर की दूरी पर देखते ही देखते एक कार पानी के तेज बहाव में बह गई। उस मंजर को देखकर हम लोग घबरा गए थे।’ उस वक्त लगा कि अब हम लोगों की बारी है। हमारी गाड़ी भी पानी में बह सकती है। हमें उम्मीद नहीं थी कि हम जिंदा बचकर यहां तक पहुंच पाएंगे। भगवान और बिहार सरकार ने ही हमारी जान बचाई है।’ नेपाल से रेस्क्यू किए गए भारतीयों ने ये बातें बताईं। 106 लोगों को शुक्रवार शाम बिहार सरकार की मदद से सुरक्षित सीतामढ़ी लाया गया। इसके बाद इन्हें बस की मदद से देर रात पटना भेजा गया। वहां से ट्रेन की मदद से सुरक्षित उनके राज्य महाराष्ट्र भेजा गया। नेपाल में भीषण बाढ़ से अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत और 2500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। इनमें बिहार के भी कई लोग शामिल हैं। नेपाल से बिहार लौटे भारतीयों ने क्या बताया? दो दिन उन्होंने किन हालात में गुजारे? अपनी आंखों के सामने उन्होंने क्या-क्या देखा? अब भी उनके मन में किस बात का डर है? पढ़िए नेपाल की आंखों देखी… नेपाल से सही सलामत लोग सीतामढ़ी पहुंचे, 3 फोटोज… ‘बचने की उम्मीद छोड़ चुके थे’ नेपाल घूमने और पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए गए महाराष्ट्र के करीब 106 यात्रियों का ग्रुप काठमांडू से भारत लौट आया। उन्हें अंदाजा नहीं था कि ये दो दिन उनकी जिंदगी के सबसे खौफनाक पलों में बदल जाएंगे। जब वे काठमांडू से बिहार आ रहे थे तो रास्ते में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया था। सड़कें टूट चुकी थीं। नदियां उफान पर थीं। जिस पुल को पार कर वे बिहार की सीमा में दाखिल हुए, उसका आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा हुआ था। हालांकि, बिहार प्रशासन की मदद से सभी लोग सुरक्षित बचाए लिए गए। इस बीच दैनिक भास्कर की टीम ने सभी सुरक्षित भारतीयों से बात की। नागपुर के रहने वाले योगेश गावंडे ने बताया, ‘नेपाल से बिहार में प्रवेश करने के लिए जिस पुल को हमने पार किया, उस समय उसका आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा हुआ था। पानी लगातार बढ़ रहा था और बहाव बेहद तेज था। डर के बीच हम लोगों ने किसी तरह पुल पार किया, लेकिन इसके करीब आधे घंटे बाद हमें खबर मिली की पानी का लेवल और बढ़ गया है। जिस पुल को हमने क्रॉस किया, वो पूरी तरह डूब चुका है।’ योगेश ने ये भी कहा कि जब हम नेपाल में फंसे थे, तब सच में लग रहा था कि हम बचेंगे भी या नहीं। सुरक्षित निकल पाएंगे, इसकी कोई उम्मीद नहीं थी। अगर कुछ देर वहां और रुकते तो शायद ही आज जिंदा होते। भारत सरकार ने हमारा बहुत साथ दिया। सरकार ने हमें वहां से सुरक्षित निकाला, इंडिया लाए और फिर हमारे घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की। इसके लिए बिहार के CM सम्राट चौधरी का बहुत-बहुत धन्यवाद। ‘महाराष्ट्र और बिहार अलग-अलग नहीं, हम सब भारतीय हैं’ योगेश ने कहा, बिहार प्रशासन और यहां के लोगों के व्यवहार से हमें बहुत अच्छा लगा। हम सभी भारतीय हैं। ऐसा नहीं है कि महाराष्ट्र अलग है और बिहार अलग। हम सब एक ही देश के हैं। आज यहां आकर यह बात और ज्यादा महसूस हो रही है कि मुश्किल वक्त में पूरा भारत एक साथ खड़ा होता है। हम लोगों का ग्रुप 19 अगस्त को महाराष्ट्र से नेपाल पहुंचा था। सबसे पहले हम लोग पोखरा गए, वहां से मुक्तिनाथ और फिर काठमांडू पहुंचे थे। इसी दौरान ग्लेशियर से आई तबाही और बाढ़ के कारण कई रास्ते पूरी तरह टूट गए और बंद हो गए। इसके चलते हमलोग भारत वापस नहीं आ पा रहे थे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से तत्काल मदद की गई और नेपाल से भारत तक पहुंचाने के लिए आवश्यक व्यवस्था कराई गई। ’50 सीटर बस पहाड़ में फंसी, छोटी गाड़ियों से निकाला’ पुणे निवासी नारायण रेशमा बाजपेयी ने बताया, हम लोगों का ग्रुप करीब 50 सीटर बस से नेपाल गया था। शुरुआत के 7-8 दिन यात्रा सामान्य रही, लेकिन वापसी के समय रास्ते बंद होने लगे। 50 सीटर बस के लिए पहाड़ी और टूटे हुए रास्तों से आगे बढ़ना संभव नहीं था। इसके बाद स्थानीय स्तर पर मदद मांगी गई। छोटी गाड़ियों की व्यवस्था की गई। इन्हीं छोटी गाड़ियों से यात्रियों को आगे निकाला गया। जिस जगह बाद में सबसे ज्यादा तबाही हुई, उसी जगह से हम लोग एक दिन पहले ही निकल चुके थे। इस वजह से हमने तबाही का सबसे भयानक रूप सामने से नहीं देखा, लेकिन वापसी के दौरान रास्तों की हालत देखकर हमें खतरे का अंदाजा हो गया था। काठमांडू में दो दिनों तक बिना खाए रहे लोग आशा पांडे ने बताया, हमलोग 2 दिनों से बहुत ही मुश्किल में थे। भूखे-प्यासे सिर्फ जान की परवाह कर रहे थे। समझ में नहीं आ रहा था कि कब और कैसे इस भयानक तबाही से निकल पाएंगे।’ एक अन्य यात्री सरला ने बताया, ‘नेपाल से निकलकर जब हम लोग भारतीय सीमा तक पहुंचे तो यहां प्रशासन और स्थानीय लोगों ने हमारी काफी मदद की। हमें बॉर्डर से आगे लाने, गाड़ी तक पहुंचाने और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था की गई। प्रशासन की ओर से पहले नाश्ता और भोजन कराया गया। रहने की भी व्यवस्था की गई। उन्होंने भावुक होकर कहा, ‘आज राखी का दिन है और ऐसा लग रहा है कि हमें यहां भाई मिल गए। हमारी बहुत बड़ी मदद हुई है। जिस तरह से प्रशासन और लोगों ने हमारा साथ दिया, वह हम कभी नहीं भूलेंगे।’ सरला की मौसेरी बहन निर्मला पांडे ने बताया, हम लोग नेपाल घूमने गए थे, लेकिन अचानक आई बाढ़ के कारण वहां फंस गए। इस बीच मेरी मां की तबीयत बिगड़ गई। नेपाल के हालात को देखकर वे घबरा गईं और उन्हें हार्ट अटैक आ गया। फिलहाल, उनका इलाज नेपाल के काठमांडू के एक अस्पताल में चल रहा है। वहां की सरकार और मेरा भाई उनका ध्यान रख रहे हैं।’ ये सभी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, लेकिन महाराष्ट्र के पुणे में नौकरी करते हैं। ‘नेपाल बॉर्डर पर यात्रियों को रिसीव किया, खाना दिया, आगे की व्यवस्था की’ आपदा के ADM बृज किशोर पांडेय ने कहा, भारत से नेपाल घूमने गए ये यात्री बाढ़ की तबाही में फंस गए थे। 28 अगस्त को करीब 3 बजे दोपहर में मुख्यमंत्री सचिवालय और आपदा प्रबंधन विभाग से सूचना मिली कि नेपाल से कुछ भारतीय बिहार बॉर्डर पर आ रहे हैं। जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने बॉर्डर पर पहुंचकर यात्रियों को रिसीव किया। गाड़ी नहीं होने पर प्रशासन ने अपने साधनों से उन्हें थाने तक पहुंचाया। थाने पहुंचने पर यात्रियों को नाश्ता, फल, पानी और भोजन उपलब्ध कराया गया। एक-दो यात्रियों ने कमजोरी और चक्कर की शिकायत की, जिनकी डॉक्टरों ने जांच की। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। प्रशासन के अनुसार करीब 110 यात्री लौट रहे थे, जिनमें कुछ निजी साधनों से आगे निकल गए। फिलहाल 106 यात्रियों का ग्रुप प्रशासन के पास पहुंचा है। सभी को उनकी जरूरत के मुताबिक मदद देने के साथ पटना आने-जाने की व्यवस्था भी की गई। महाराष्ट्र के CM ने सीतामढ़ी सांसद से किया कॉन्टैक्ट सभी यात्रियों ने गुरुवार, 27 अगस्त को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से संपर्क साधा था। इसके बाद फडणवीस ने तुरंत सीतामढ़ी सांसद देवेश चंद्र ठाकुर को पूरी स्थिति बताई। सांसद देवेश ठाकुर ने गुरुवार रात काठमांडू सांसद संदीप राणा से कॉन्टैक्ट किया, जिसके बाद शुक्रवार सुबह विशेष बसों की व्यवस्था कर सभी को वहां से रवाना किया गया। रास्ते में दो बसें बदलकर तीर्थयात्री किसी तरह सीतामढ़ी के भिट्ठामोड़ सीमा पहुंचे। यहां सीतामढ़ी जिला प्रशासन की टीम पहले से मुस्तैद थी। सीमा पर पुपरी एसडीओ गौरव कुमार, सीओ सतीश कुमार, बीडीओ कर्मवीर कुमार प्रभाकर, आरओ ब्रजेश मिश्र और भिट्ठा थानाध्यक्ष दीपक पटेल सहित अधिकारियों ने सभी का स्वागत किया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. लालू कुमार की देखरेख में सभी का हेल्थ चेकअप कराया गया। सभी को खाना खिलाया और आराम करने की व्यवस्था की। महाराष्ट्र की महिलाओं ने सीतामढ़ी SDM के साथ मनाई राखी ——————– ये खबर भी पढ़ें… नेपाल में तबाही के बीच बचा रहा घर:कई फीट तक पानी और मलबे से घिरा; बालकनी में खड़े 3 लोगों की जान बची, VIDEO नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बीच एक घर पानी के तेज बहाव के बावजूद खड़ा रहा। आसपास का इलाका उफनते पानी में डूब गया और कई इमारतें व मलबा बहते दिखे। इस घर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

Rashifal Today: आज के दिन अपने खर्चों पर रखें कंट्रोल, जानें क्या कहते हैं आपके सितारे

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार, हर इंसान की जन्मतिथि का अपना खास महत्व होता है। 29 अगस्त का दिन आर्थिक मामलों में सोच-समझकर फैसले लेने और भविष्य की तैयारी करने का संकेत दे रहा है। आज कुछ लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं, लेकिन बिना पूरी जानकारी के पैसा लगाना या अचानक खर्च करना नुकसान पहुंचा सकता है। अंक ज्योतिष के अनुसार, आज बजट, बचत और लंबे समय की आर्थिक योजनाओं पर ध्यान देना बेहतर रहेगा। जानिए मूलांक 1 से 9 तक के लिए आज का आर्थिक भविष्यफल।

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति को मजबूत करने पर ध्यान दें। आकर्षक ऑफर या अचानक मिलने वाले अवसर देखकर तुरंत पैसा खर्च न करें। निवेश और बचत की योजनाओं को दोबारा देखें। धैर्य और सही योजना के साथ आगे बढ़ने पर भविष्य में आर्थिक फायदा मिल सकता है।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों से जुड़े मामलों में भविष्य की योजना बनाने का समय है। अपने आर्थिक लक्ष्यों को ध्यान में रखें और बेवजह खर्च करने से बचें। बजट के अनुसार खर्च करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह लेकर फैसला करना भी मददगार हो सकता है।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में सावधानी जरूरी है। नए निवेश या कमाई के अवसरों के बारे में पूरी जानकारी जुटाएं। जरूरत के अनुसार अपने बजट में बदलाव करने के लिए तैयार रहें। रिसर्च और सही जानकारी के आधार पर लिया गया फैसला आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आर्थिक मामलों में आज का दिन सकारात्मक रह सकता है। बजट को व्यवस्थित करने से आपकी स्थिति बेहतर होगी। गैर-जरूरी खर्चों से दूरी बनाए रखें। नए आर्थिक अवसर सामने आएं तो उन्हें अच्छी तरह समझकर ही फैसला लें। आपकी व्यावहारिक सोच आपको सही दिशा देगी।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 15 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज घर और परिवार से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं। भावनाओं में आकर खरीदारी करने से बचें और जरूरी खर्चों को प्राथमिकता दें। अपने बजट को व्यवस्थित रखें और अचानक आने वाले खर्च के लिए कुछ रकम बचाकर रखें। सही योजना से आर्थिक दबाव कम किया जा सकता है।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज अपने पैसों का हिसाब व्यवस्थित करने पर ध्यान दें। जरूरी खर्चों को प्राथमिकता दें और गैर-जरूरी चीजों पर पैसा लगाने से बचें। बजट की समय-समय पर समीक्षा करते रहें। पुरानी गलतियों से सीखकर आगे की आर्थिक योजना बनाना आपके लिए लाभदायक रहेगा।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देने का दिन है। लग्जरी और महंगी चीजों पर जरूरत से ज्यादा खर्च न करें। अपने वित्तीय लक्ष्यों को दोबारा देखें और उसी के अनुसार निवेश की योजना बनाएं। उपलब्ध पैसों और संसाधनों का समझदारी से इस्तेमाल करना जरूरी होगा।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें। लंबे समय के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अपने निवेश और बजट की समीक्षा करें। अचानक होने वाले खर्च से बचें। सही जानकारी के आधार पर लिया गया फैसला भविष्य में आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों के मामले में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। नए अवसर मिल सकते हैं, लेकिन किसी भी फैसले में जल्दबाजी न करें। अपने पुराने वित्तीय लक्ष्यों की समीक्षा करें और जरूरत के अनुसार उनमें बदलाव करें। लंबे समय की आर्थिक सुरक्षा पर ध्यान देना आपके लिए बेहतर रहेगा।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

क्या RSS पर बैन लगाएंगे ट्रम्प:अमेरिका के धार्मिक कमीशन ने क्यों की ये सिफारिश; मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे पर हंगामा बढ़ा

संघ प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका के दौरे पर हैं। इस बीच वहां मांग उठ रही हैं- RSS पर बैन लगे। यह मांग अमेरिकी सरकार का धार्मिक स्वतंत्रता आयोग USCIRF के चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद और कमिश्नर जीन मिल्स ने की है। मार्च में इसी आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भी RSS पर प्रतिबंध की सिफारिश की थी। इस मांग का आधार क्या है, RSS पर क्या आरोप लगाए गए हैं और क्या ट्रम्प RSS पर बैन लगाएंगे; इसी पर आज का एक्सप्लेनर… सवाल-1: अमेरिका में RSS पर पाबंदी को लेकर कौन सवाल उठा रहा है? जवाब: मोहन भागवत 25 अगस्त से 19 दिन के विदेश दौरे पर हैं। पहला पड़ाव अमेरिका है, फिर कनाडा और ब्रिटेन। RSS पर प्रतिबंधों को लेकर तीन प्रमुख लोगों ने बयान दिए हैं- 19 अगस्त को USCIRF के कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा, ‘RSS नेता भले ही भारतीय सरकार से जुड़े हों, लेकिन उन्हें अमेरिका में हाई-लेवल मीटिंग्स और डिप्लोमेसी में तरजीह नहीं दी जानी चाहिए। अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के दोषी पाए गए RSS सदस्यों पर बैन लगाना चाहिए।’ USCIRF के चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद ने भी कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं। ये एक ऐसा भारतीय संगठन है, जिससे जुड़े समूहों ने ईसाई और मुस्लिम समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। अब RSS नेता मोहन भागवत अमेरिका आ रहे हैं।’ कमीशन की पूर्व चेयरपर्सन नादिन मेंजा ने भी अमेरिकी मैगजीन ‘प्रोविडेंस’ में लिखा, ‘भागवत जिस एकता और सद्भाव की बात करते हैं, वह संघ की जमीनी हरकतों से बिल्कुल अलग है। संघ के रवैये के लिए उसे बैन किया जाना चाहिए।’ सवाल-2: तो फिर इन बयानों का आधार क्या है और इसके पीछे की दलील क्या है? जवाब: RSS पर पाबंदी की बात मार्च 2026 से शुरू हुई। अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट जारी की। इसमें भारत से जुड़े 2 पन्ने हैं। इनमें 23 घटनाओं का जिक्र है- इन 10 प्रमुख घटनाओं के अलावा 13 और घटनाओं का जिक्र है, जिसमें 28 में से 12 राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानूनों, रेवरेंड फ्रैंकलिन ग्राहम का वीजा रद्द करने और गौ संरक्षण के नाम पर हत्या करने जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन घटनाओं में USCIRF ने विश्व हिंदू परिषद (VHP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) या उसकी सरकारों, हिंदू राष्ट्रवादी नेता और संगठन का जिक्र किया है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का सिर्फ एक जगह जिक्र है। वो भी Targeted Sanctions, यानी प्रतिबंध लगाने की सिफारिश के सेक्शन में। USCIRF का कहना है कि RSS की संपत्तियां जब्त कर लेनी चाहिए और उसके सदस्यों के अमेरिका आने पर रोक या वीजा रद्द कर देना चाहिए। सवाल-3: RSS पर बैन की मांग करने वाला ये USCIRF आखिर है क्या?
जवाब: USCIRF की शुरुआत 3 दशक पहले हुई… आयोग बनने की कहानी आयोग का स्ट्रक्चर USCIRF में संसद के जरिए नियुक्त 9 कमिश्नर होते हैं, जो दोनों पार्टियों से होते हैं। एक कमिश्नर को चेयरमैन बनाया जाता है। फिलहाल पाकिस्तानी मूल के डॉ. आसिफ महमूद इसके चेयरमैन हैं। आयोग का काम आयोग की ताकत आयोग अपनी सालाना रिपोर्ट अमेरिकी विदेश मंत्रालय को सौंपता जरूर है, लेकिन खुद कोई कार्रवाई नहीं कर सकता, सिर्फ सिफारिशें देता है। सवाल-4: क्या वाकई अमेरिका में RSS पर बैन लग सकता है?
जवाबः नहीं, फिलहाल ऐसा नहीं लगता। इसकी 4 बड़ी वजहें हैं… सवाल-5: पाबंदी की इस मांग पर भारत सरकार और RSS का क्या रुख है?
जवाबः भारत के विदेश मंत्रालय ने USCIRF को पूर्वाग्रह से ग्रसित और जीरो भरोसे वाली संस्था बताया है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 21 अगस्त को कहा, ‘USCIRF सालों से भारत के खिलाफ भ्रामक, गलत और भड़काऊ बयान देती रही है। हमें ऐसी संस्थाओं को नजरअंदाज करना चाहिए, क्योंकि ये अपने छिपे हुए एजेंडे के तहत काम करती हैं और इनकी कोई विश्वसनीयता नहीं बची है।’ वहीं RSS ने फिलहाल इस पर कोई बात नहीं कही है। हालांकि 24 अगस्त को VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया ‘X’ पर लिखा, ‘USCIRF के मन में सनातन धर्म, हिंदू समाज और भारत के प्रति गहरी नफरत है। हाल में RSS के प्रति जो नफरत दिखाई है, वह हिंदूफोबिया से प्रेरित उसके जाने-पहचाने एजेंडे का एक हिस्सा है।’ मार्च में भारत के पूर्व जजों और अधिकारियों ने एक बयान जारी कर USCIRF रिपोर्ट को दिमागी तौर पर दिवालिया और स्वार्थी बताया था। 275 अफसरों ने इस बयान पर दस्तखत किए थे, जिसमें 25 रिटायर्ड जज, 10 राजदूतों समेत 119 रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स और 131 आर्म्ड फोर्सेस के अधिकारी थे। सवाल-6: USCIRF पर क्यों उठ रहे हैं सवाल, पाकिस्तान से क्या है कनेक्शन?
जवाबः USCIRF के मौजूदा चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी हैं। वे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरात जिले के खारियान गांव में जन्मे। उन्होंने कराची के सिंध मेडिकल कॉलेज से मेडिकल डिग्री ली, फिर 1990 के दशक के आखिर में अमेरिका चले गए। अमेरिका के कैलिफोर्निया में महमूद प्रैक्टिस करने लगे। बाद में अमेरिका की नागरिकता मिल गई। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी से राजनीति भी की है। 2008 से 2016 तक डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन में डेलिगेट रहे। 2022 में कैलिफोर्निया से अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। फिर 2024 में डेमोक्रेटिक हाउस माइनॉरिटी लीडर हाकीम जेफ्रीज ने उन्हें USCIRF में नियुक्त हुए। जुलाई 2026 में चेयरमैन चुने गए। 2019 में जब भारत सरकार ने आर्टिकल 370 हटाया, तब महमूद ने जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए अमेरिकी संसदीय सुनवाई कराने के लिए लॉबिंग की थी। महमूद ने कहा था, ‘कश्मीरी अकेले नहीं हैं। हम तब तक उनके साथ खड़े रहेंगे, जब तक कि उन सभी के मानवाधिकार सुरक्षित नहीं हो जाते।’ महमूद पर सवाल उठते रहे हैं- ——————————–
ये भी पढ़ें- ‘मोहन भागवत का कार्यक्रम सिर्फ हिंदुओं के लिए नहीं’: आयोजक बोले- 16 धर्मों के लोग आएंगे, विरोध करने वाले भी आएं HSS के ग्लोबल कोऑर्डिनेटर सौमित्र गोखले ने 2019 में अमेरिका के ह्यूस्टन में हाऊडी मोदी कार्यक्रम करवाया था, जिसमें 50 हजार लोग जमा हुए थे। इस बार चीफ गेस्ट RSS प्रमुख मोहन भागवत हैं। कई संगठन उनका विरोध कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेंजमेंट एंड डायलॉग के डायरेक्टर सुदेश अग्रवाल और प्रवक्ता प्रिया सामंत से बात की। पढ़िए पूरी बातचीत…

पगड़ी पहने पंजाबी युवकों को होटल में नहीं मिली एंट्री:ऑस्ट्रिया में करवाया था बुक, बोले- पैसे भी रिफंड नहीं किए; प्रबंधन ने बताया ड्रेस कोड

पंजाब के सिख युवकों को ऑस्ट्रिया के साल्जबर्ग शहर में स्थित कूल मामा होटल ने एंट्री नहीं दी। मोहाली में ट्रेडिंग फर्म चलाने वाले सिख युवक जसप्रीत ने दावा किया कि होटल मैनेजमेंट ने कहा कि पगड़ी वाले यहां नहीं रह सकते। उन्होंने 27 अगस्त को होटल की ऑनलाइन बुकिंग कराई थी। जब निकालने का कारण पूछा तो बताया गया कि होटल का ड्रेस कोड है, यहां पगड़ी की इजाजत नहीं है। इनसे रिफंड मांगा तो पैसा रिफंड नहीं किया गया। जसप्रीत ने इसका वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। होटल मैनजमेंट ने कहा कि बुकिंग से पहले ही हमने अपनी वेबसाइट पर मेंशन किया है कि पगड़ी वालों के लिए होटल, रेस्टोरेंट और बार बुक नहीं होगा। 5 पॉइंट में जानें जसप्रीत ने क्या कहा.. होटल की वेबसाइट पर ड्रेस कोड का जिक्र
कूल मामा होटल ने अपनी वेबसाइट पर स्काई रेस्तरां और ब्रेकफास्ट के लिए ड्रेस कोड और कुछ सख्त नियम बताए हैं। होटल प्रबंधन के मुताबिक, रेस्तरां के शांत और खास माहौल को बनाए रखने के लिए मेहमानों से शालीन और उपयुक्त पहनावा रखने की उम्मीद की जाती है।

भागवत न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन मंदिर पहुंचे:बोले- विश्व में कई तरह के संघर्ष, कृष्ण चेतना से ही शांति आ सकती है

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन सेंटर का दौरा किया। मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज दुनिया में कई तरह के संघर्ष हैं। ऐसे समय में ‘कृष्ण चेतना’ शांति ला सकती है। उन्होंने कहा कि दुनिया में भले ही अलग-अलग तरह की विविधताएं, मतभेद और संघर्ष हों, लेकिन अगर लोगों को यह समझ आने लगे कि सब कुछ कृष्ण का ही हिस्सा है, तो दुनिया में बेहतर और शांतिपूर्ण माहौल बनाया जा सकता है। भागवत 26 सेकंड एवेन्यू स्थित उस जगह पर भी पहुंचे, जहां स्वामी प्रभुपाद ने जुलाई 1966 में इस्कॉन की स्थापना की थी। इसे मैचलैस गिफ्ट्स भी कहा जाता है। इस्कॉन इस साल अपनी स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस्कॉन के 120 देशों में 1,300 मंदिर हैं। 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर में भागवत का कार्यक्रम RSS प्रमुख 25 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। वे RSS के 100 साल पूरे होने के मौके पर तीन देशों, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन दौरे पर हैं। इस दौरान वे भारतीय समुदाय और अलग-अलग संगठनों के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले हैं। भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। यह कार्यक्रम RSS के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों का हिस्सा है। यह कार्यक्रम रक्षाबंधन के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) फोरम आयोजक है। कार्यक्रम में भागवत का संबोधन भी होगा। कार्यक्रम से पहले विवाद, न्यूयॉर्क मेयर विरोध कर चुके न्यूयॉर्क में भागवत के कार्यक्रम को लेकर विरोध भी हुआ है। मेयर जोहरान ममदानी ने कहा कि वह RSS के इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि निजी तौर पर आयोजित कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने जारी की सुरक्षा सलाह कार्यक्रम से पहले हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। संगठन ने लोगों से सतर्क रहने, आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी विवाद से बचने की अपील की है। फाउंडेशन ने कार्यक्रम में आने वालों से दूसरों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करने को कहा है। कार्यक्रम में शामिल होने वाले आचार्य महामंडलेश्वर श्री स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि विरोध करने वालों को अपनी राय रखने और आलोचना करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम दुनिया को भाईचारे और शांति का संदेश देगा। RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इसे अंतरधार्मिक कार्यक्रम बताया। उनके मुताबिक, इसमें अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों को मानने वाले लोग शामिल होंगे। अमेरिकी आयोग ने RSS पर बैन की मांग की थी भागवत के अमेरिका दौरे से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने RSS पर बैन लगाने की मांग की है। आयोग ने 19 अगस्त को अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को हाई लेवल राजनयिक सुविधाएं नहीं देने और उनसे आधिकारिक मुलाकात नहीं करने की अपील भी की। भारत ने USCIRF की इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 20 अगस्त को आयोग को ‘पक्षपाती संस्था’ बताया था। उन्होंने कहा कि USCIRF लंबे समय से भारत को लेकर गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है, इसलिए उसकी बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। मार्च की रिपोर्ट में RSS और RAW पर कार्रवाई की सिफारिश USCIRF ने मार्च में अपनी सालाना रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भी चिंता जताई थी। रिपोर्ट में RSS और RAW समेत कुछ संगठनों और लोगों पर बैन लगाने की सिफारिश की गई थी। भारत ने रिपोर्ट को ‘विकृत और चुनिंदा’ बताते हुए खारिज कर दिया था। सरकार ने कहा था कि रिपोर्ट में ऐसे स्रोतों का इस्तेमाल किया गया है जिनकी विश्वसनीयता पर सवाल हैं और इसमें भारत की स्थिति की एकतरफा तस्वीर पेश की गई है। 2018 में भी अमेरिका गए थे भागवत मोहन भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे। उन्होंने शिकागो में 7 से 9 सितंबर 2018 तक आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों से करीब 2,500 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। भागवत ने कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था। 2018 के इस दौरे की उपलब्ध रिपोर्टों में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का जिक्र नहीं मिलता। उनका दौरा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित था।

₹67,999 में लॉन्च हुआ Acer का नया AI Laptop, 32GB RAM और 1TB स्टोरेज से है लैस

Acer ने भारत में Swift Neo AI लैपटॉप लॉन्च किया है। इसके साथ कंपनी ने भारत में AI से लैस लैपटॉप की अपनी रेंज को और बढ़ाया है। यह नया पतला और हल्का लैपटॉप Intel Core Ultra प्रोसेसर से लैस है। इसे खासतौर पर प्रोफेशनल्स, छात्रों और क्रिएटर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें AI की मदद से बेहतर परफॉर्मेंस, प्रीमियम मेटल डिजाइन और लेटेस्ट कनेक्टिविटी फीचर्स मिलते हैं।

इस लैपटॉप में Microsoft Copilot इंटीग्रेशन, Intel AI Boost और हल्का डिजाइन भी है, जो इसे प्रोडक्टिविटी, कंटेंट क्रिएशन और रोजाना के मल्टीटास्किंग कामों के लिए बेहतरीन बनाता है।

कीमत और उपलब्धता

Acer Swift Neo AI लैपटॉप की शुरुआती कीमत ₹67,999 है। यह Flipkart, Acer E-store और पूरे भारत में दूसरे रिटेल चैनलों पर उपलब्ध होगा।

फीचर्स

Acer Swift Neo AI में लेटेस्ट Intel Core Ultra 5 और Intel Core Ultra 7 H प्रोसेसर के साथ Intel AI Boost दिया गया है, जो प्रोडक्टिविटी, कोलेबोरेशन और क्रिएटिव ऐप्स में AI-पावर्ड अनुभव देता है। बता दें कि तेज मल्टीटास्किंग और बेहतर सिस्टम रिस्पॉन्स के लिए इस लैपटॉप को 32GB तक LPDDR5 RAM और 1TB PCIe NVMe SSD स्टोरेज के साथ कॉन्फिगर किया जा सकता है।

इसके अलावा, इसमें 16:10 आस्पेक्ट रेशियो, 1920 x 1200 रिजॉल्यूशन और 300 निट्स तक की ब्राइटनेस वाला 14-इंच WUXGA IPS डिस्प्ले है, जबकि कुछ खास वेरिएंट्स में OLED डिस्प्ले का ऑप्शन भी मिलता है।

डिजाइन की बात करें तो लैपटॉप में ऊपर और नीचे प्रीमियम मेटल कवर दिया गया है। इसका वजन सिर्फ 1.25 किलोग्राम है और मोटाई 17.2mm है। इसमें 180-डिग्री हिंज, बैकलिट कीबोर्ड, प्रिसीजन टचपैड और फिंगरप्रिंट रीडर जैसे फीचर्स भी मिलते हैं।

कनेक्टिविटी के लिए, Swift Neo AI में चार्जिंग, डेटा ट्रांसफर और डिस्प्ले आउटपुट सपोर्ट वाले दो फुल-फंक्शन USB Type-C पोर्ट, HDMI, अतिरिक्त USB पोर्ट और Wi-Fi 6 की सुविधा है। इसमें फुल HD 1080p वेबकैम, डुअल स्पीकर और 52Wh की बैटरी भी है, साथ ही यह 65W USB Type-C फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है।

सॉफ्टवेयर की बात करें तो यह लैपटॉप Windows 11 Home पर चलता है और इसमें Microsoft Copilot का इंटीग्रेशन मिलता है। इसकी मदद से यूजर्स प्रोडक्टिविटी और क्रिएटिव कामों के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Acer के मुताबिक, Swift Neo AI को बेहतर परफॉर्मेंस, आसानी से साथ ले जाने वाले डिजाइन और AI फीचर्स का संतुलन देने के लिए बनाया गया है। कंपनी इसे ऐसे यूजर्स के लिए पेश कर रही है जो एक मॉडर्न AI लैपटॉप चाहते हैं।

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Fact Check: क्या दिल्ली समेत कई शहरों के डूबने की आशंका? भाखड़ा बांध की दीवार में झुकाव का दावा

बड़े बांधों की बनावट की निगरानी वैज्ञानिक तरीके से की जाती है और अलग-अलग मापदंडों के आधार पर उनकी सुरक्षा का आकलन किया जाता है। भाखड़ा बांध से जुड़े तनाव, खिंचाव, जल दाब और रिसाव के आंकड़े सुरक्षित सीमाओं में हैं।

कल का मौसम, 29 अगस्त: कानपुर समेत कई जिलों में छिटपुट बारिश, इस दिन यलो अलर्ट

कानपुर में बारिश का दौर फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है।  मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बन रहे नए कम दबाव क्षेत्र के असर से 31 अगस्त से तीन सितंबर तक अच्छी बारिश के आसार हैं, जिसके चलते यलो अलर्ट जारी किया गया है।

फेड चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई पर चेताया, बोले- 2% इंफ्लेशन का लक्ष्य हासिल करना जरूरी

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि महंगाई अभी इतनी नहीं घटी है कि फेड निश्चिंत हो सके। जब तक महंगाई के 2% लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ने का भरोसा नहीं होता, तब तक फेड को काम करना होगा।

यह मई में फेड चेयर बनने के बाद वार्श का पहला बड़ा भाषण था। उन्होंने शुक्रवार को अमेरिका के व्योमिंग में जैक्सन होल में फेड के सालाना सम्मेलन में यह बात कही। वार्श ने कहा कि 2% का महंगाई लक्ष्य तय है। फेड इसी लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करेगा। उनके मुताबिक, कीमतों में स्थिरता लाना फेड की जिम्मेदारी है।

महंगाई में अभी बड़ा सुधार नहीं

वार्श ने कहा कि गर्मियों में PCE और CPI के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि महंगाई की मूल स्थिति में बड़ा सुधार आ गया है। उन्होंने कहा कि महंगाई अभी भी 2% से ऊपर है। इसलिए फिलहाल फेड का मुख्य फोकस कीमतों पर होना चाहिए।

ब्याज दर है फेड का बड़ा हथियार

वार्श के मुताबिक, मौजूदा वित्तीय स्थितियां अभी बहुत सख्त नहीं हैं। ऐसे में ब्याज दर फेड का सबसे अहम हथियार है। उन्होंने कहा कि महंगाई अपने आप 2% तक नहीं आएगी। इसे स्थिर करना फेड की जिम्मेदारी है।

ब्याज दर बढ़ाने पर बंटी राय

अब बड़ा सवाल ब्याज दरों को लेकर है। अर्थशास्त्रियों की राय बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि महंगाई को काबू करने के लिए आने वाले महीनों में दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं।

जुलाई की बैठक में फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा था। हालांकि, कई अधिकारियों ने दर बढ़ाने का समर्थन किया था। बैठक के मिनट्स में भी संकेत मिले थे कि अगर महंगाई कम नहीं हुई तो फेड को नीति और सख्त करनी पड़ सकती है।

पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर हुई थी आलोचना

जुलाई की बैठक के बाद वार्श की प्रेस कॉन्फ्रेंस की आलोचना भी हुई थी। आलोचकों का कहना था कि वह दरें स्थिर रखने की वजह साफ तरीके से नहीं बता पाए।

उसके बाद निवेशकों ने लंबी अवधि वाले अमेरिकी बॉन्ड बेचने शुरू किए। इससे उनकी यील्ड करीब दो दशक के उच्च स्तर तक पहुंच गई। इसे फेड के 2% महंगाई लक्ष्य को लेकर निवेशकों के भरोसे में कमी के संकेत के तौर पर देखा गया।

अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत

हालांकि, जुलाई की बैठक के बाद कुछ आंकड़ों से अर्थव्यवस्था में कमजोरी के संकेत मिले हैं। जुलाई में रिटेल बिक्री एक साल से ज्यादा समय में सबसे ज्यादा गिरी। कोर महंगाई भी सीमित रही। कंपनियों ने जुलाई में उम्मीद के उलट नौकरियां घटाईं। इससे पहले के दो महीनों के रोजगार आंकड़ों में भी कटौती की गई।

इन आंकड़ों के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद कम हुई है। शुक्रवार सुबह फेडरल फंड्स फ्यूचर्स के मुताबिक, सितंबर में दर बढ़ने की संभावना करीब 36% थी। जुलाई के अंत में यह 70% से ज्यादा थी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

महंगाई ने फिर बढ़ाया घर का बजट, मुंबई में दूध के दाम में इस दिन से होगा ₹9 का इजाफा

Mumbai milk Price: देश में अभी चीनी की महंगाई से जहां लोग उबरे नहीं हैं, वहीं अब 1 सितंबर, 2026 से दूध की कीमतें भी बढ़ने वाली हैं। जी हां, दरअसल मुंबई के स्थानीय दूध उत्पादकों ने 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस बढ़ोतरी के बाद से आम आदमी की जेब पर भारी असर पड़ सकता है।

फिलहाल, तबेले के दूध की कीमत अभी 93 रुपये प्रति लीटर है, जो बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह बढ़ोतरी त्योहारों के मौसम से ठीक पहले हो रही है और इससे उन ग्राहकों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है जो नियमित रूप से ताजा डेयरी दूध खरीदते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, दूध की नई कीमतें 1 सितंबर, 2026 से 28 फरवरी, 2027 तक लागू रहेंगी।

तबेले के दूध की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

दूध उत्पादकों ने इस बढ़ोतरी की वजह डेयरी पशुओं के रखरखाव में आने वाले ज्यादा खर्च और पशुओं के चारे व दाने की कीमतों में भारी वृद्धि को बताया है।

उत्पादकों का कहना है कि बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों के कारण डेयरी फार्मों के लिए 93 रुपये प्रति लीटर की मौजूदा दर बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। अनाज समेत पशुओं के दाने की कई चीजों की कीमतें 25% तक बढ़ गई हैं, जबकि महंगे चारे और खली (oil cakes) ने दूध उत्पादन की लागत को और बढ़ा दिया है।

लागत लगातार बढ़ने के कारण, दूध उत्पादकों का कहना है कि डेयरी का कामकाज जारी रखने के लिए कीमतों में बदलाव जरूरी हो गया था।

मुंबई के परिवारों पर असर

दूध के दाम में प्रति लीटर 9 रुपये की बढ़ोतरी से उन परिवारों के बजट पर असर पड़ने की उम्मीद है जो नियमित रूप से तबेले का दूध खरीदते हैं। यह बढ़ोतरी त्योहारों के मौसम से ठीक पहले हुई है, जब आमतौर पर घरों में खर्च बढ़ जाता है।

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