Maruti सहित इन 5 स्टॉक्स की कीमतें 52 हफ्ते के लो पर, क्या यह निवेश का बड़ा मौका है?

शेयर बाजार में गिरावट की मार कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों पर पड़ी है। इनमें मारुति सुजुकी जैसी कंपनी शामिल हैं। इन शेयरों की कीमतें 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। यह उन निवेशकों के लिए निवेश का बड़ा मौका है, जो लंबे समय से इन दिग्गज शेयरों में निवेश के मौके ढूंढ रहे थे।

मारुति का शेयर इस साल 28% गिरा है

Maruti Suzuki का शेयर 25 सितंबर को 0.68 फीसदी चढ़कर 12,071 रुपये पर बंद हुआ। इस साल यानी 2026 में यह शेयर करीब 28 फीसदी गिर चुका है। मारुति कार और एसयूवी बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी है। इसका मार्केट शेयर 50 फीसदी से थोड़ा ही कम है। इस शेयर ने निवेशकों को लंबी अवधि में काफी अच्छा रिटर्न दिया है।

टाटा समूह की कंपनी का शेयर भी फिसला

Tata Consumer Products का शेयर 25 सितंबर को 0.64 फीसदी गिरकर बंद हुआ। यह शेयर इस साल यानी 2026 में अब तक 17 फीसदी क्रैश कर चुका है। इससे इसकी वैल्यूएशन अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई है। टाटा समूह की यह कंपनी नमक सहित रोजाना इस्तेमाल होने वाली कई चीजें बनाती है। इसका ब्रांड भी काफी स्ट्रॉन्ग है।

दिग्गज बिस्कुट कंपनी का शेयर भी टूटा

Britannia Industries का शेयर 25 सितंबर को 0.61 फीसदी चढ़कर बंद हुआ। यह शेयर इस साल यानी 2026 में अब तक 18 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। यह बिस्कुट बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी है। इसका प्रोडक्ट पोर्टफोलियो काफी बड़ा है। इसका मार्केट शेयर भी जबर्दस्त है। इसका ब्रांड भी काफी मजबूत है।

बेयर क्रॉपसाइंस का शेयर भी 18 फीसदी गिरा

बेयर क्रॉपसाइंस का शेयर 25 सितंबर को 0.70 फीसदी गिरकर 3,710 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर इस साल 18 फीसदी से ज्यादा गिरा है। यह कंपनी हर्बिसाइड्स, पेस्टिसाइड्स और फंगिसाइड्स जैसे प्रोडक्ट्स बनाती है, जिनका इस्तेमाल फसलों को कीट के हमलों को बचाने के लिए होता है। इस अलावा यह हाई क्वालिटी के बीज भी बनाती है।

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यह रेलवे स्टॉक इस साल 33 फीसदी लुढ़का

Jupiter wagons का शेयर 25 सितंबर को 0.69 फीसदी गिरकर 226.50 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर 2026 में अब तक करीब 33 फीसदी गिरा है। पिछले कुछ समय से रेलवे से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव दिखा है। हालांकि, बीते चार साल में इस शेयर ने निवेशकों का पैसा करीब चार गुना किया है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

सरकार की इस कंपनी के शेयर में आ सकती है तूफानी तेजी, जेफरीज ने दी निवेश की सलाह

कोल इंडिया के शेयरों में 25 सितंबर को हल्की तेजी दिखी। इसकी वजह विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की एक रिपोर्ट है। उसने कोल इंडिया के शेयर पर ‘बाय’ की रेटिंग बनाए रखी है। इससे कोल इंडिया का शेयर 0.81 फीसदी चढ़कर 425.40 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, शेयर बाजारों में भी रिकवरी देखने को मिली।

जेफरीज ने दिया 500 रुपये का टारगेट प्राइस

जेफरीज ने कोल इंडिया के शेयरों के लिए 500 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। उसने रिपोर्ट में इसकी वजह बताई है। उसने कहा है कि पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक घटकर सिर्फ 7 दिनों के लिए रह गया है। 10 साल का यह औसत 15 दिन का है। इसकी वजह पावर की बढ़ती मांग है। FY26 में पावर डिमांड की ग्रोथ 1 फीसदी थी, जो इस साल अप्रैल से अगस्त के दौरान बढ़कर 9 फीसदी पहुंच गई।

दुनिया में कोयले की बढ़ती कीमतों का मिलेगा फायदा

ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि FY26-29 के दौरान कोल इंडिया के डिस्पैच की CAGR 5 फीसदी रह सकता है। उसने यह भी कहा है कि दुनिया में कोयले की ऊंची कीमतों से कोल इंडिया के ई-ऑक्शन प्राइसेज को सपोर्ट मिलेगा। यह 2027-2029 के बीच 3,000 से 3,200 रुपये के बीच रह सकता है। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म ने यह भी कहा है कि कोल इंडिया की अर्निंग्र प्रति शेयर (EPS) 2024-2026 के दौरान 12 फीसदी तक घटी है। लेकिन, 2026-2029 के बीच इसमें 6 CAGR का इम्प्रूवमेंट दिख सकता है।

कोल इंडिया की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव

ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि कोल इंडिया की वैल्यएशन अट्रैक्टिव है। इसमें एक साल के फॉरवर्ड एडजस्टेड प्राइस-टू-अर्निंग्स के 9 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। इसकी डिविडेंड यील्ड 7 फीसदी है। कंपनी जुलाई में पहली तिमाही के नतीजों का ऐलान किया था। इसका नेट प्रॉफिट इस दौरान साल दर साल आधार पर 0.63 फीसदी बढ़कर 8,852 रुपये पर पहुंच गया।

जून तिमाही में मिलाजुला प्रदर्शन

जून तिमाही में कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ साल दर साल आधार पर 7.8 फीसदी रही। हालांकि, EBITDA 4.1 फीसदी घटा। कंपनी ने FY27 के लिए प्रति शेयर 5.5 रुपये के अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया है। कोल इंडिया के शेयर को कवर करने वाले कुल 26 एनालिस्ट्स में से 16 की इस शेयर पर बाय यानी खरीदने की रेटिंग है। पांच ने इसे होल्ड करने और इतने ही एनालिस्ट्स ने इसे बेचने की सलाह दी है।

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कमजोर बाजार में अच्छा प्रदर्शन

बीते एक साल में कोल इंडिया का शेयर 9.32 फीसदी चढ़ा है। इस दौरान सेंसेक्स 8.12 फीसदी गिरा है, जबकि निफ्टी में 6.14 फीसदी की गिरावट आई है। इसका मतलब है कि कमजोर बाजार में भी कोल इंडिया के शेयरों ने निवेशकों को पॉजिटिव रिटर्न दिया है। यह सरकार की कंपनी है, जिसका कोयले के उत्पादन में दबदबा है।

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IRDAI New Rules: पॉलिसीधारकों की बल्ले-बल्ले, डिस्ट्रीब्यूटर्स को झटका! जानिए IRDAI के नए प्रस्ताव से आपको कैसे होगा फायदा

IRDAI Commission & Expense Cap Impact: देश में बीमा सेक्टर तेजी से बढ़ा है, लेकिन जिस रफ्तार से लोगों की जेब से प्रीमियम का पैसा निकला है, उस रफ्तार से असली बीमा कवरेज का विस्तार नहीं हुआ है। दूसरी ओर, बीमा बेचने का खर्च और बिचौलियों का कमीशन इतनी तेजी से बढ़ा है कि यह सवाल उठने लगा था कि क्या ग्राहकों को उनके प्रीमियम का सही मूल्य मिल रहा है या नहीं?

इसी समस्या से निपटने के लिए भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म्स पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। नियामक ने बीमा कंपनियों के मैनेजमेंट खर्च (EoM) को घटाने के लिए 5 साल का रोडमैप प्रस्तावित किया है, साथ ही एजेंटों और कॉर्पोरेट एजेंटों के भारी-भरकम कमीशन पर नकेल कसने की तैयारी की है।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि IRDAI के इन कड़े प्रस्तावों से इंश्योरेंस सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा, क्यों पॉलिसीधारकों को इसका सीधा फायदा मिलेगा और कंपनियों-बिचौलियों के लिए यह कितना बड़ा झटका है।

क्यों पड़ी सुधारों की जरूरत?

IRDAI के आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि पिछले एक दशक में भारत में इंश्योरेंस की पैठ में कोई खास सुधार नहीं हुआ है:

पॉलिसी की संख्या जस की तस: वित्त वर्ष 2016 में देश में करीब 266 लाख नई इंडिविजुअल लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियां बिकी थीं, जो वित्त वर्ष 2025 में मामूली बढ़कर केवल 270 लाख हो पाईं। कुल इन-फोर्स पॉलिसियां भी 3,270 लाख के आसपास ही स्थिर बनी हुई हैं।

जीडीपी के बराबर ही ग्रोथ: देश की जीडीपी ग्रोथ दर पिछले 10 सालों में औसतन 10% रही है। इसी अवधि में लाइफ इंश्योरेंस 10% और जनरल इंश्योरेंस बिजनेस 13% की दर से बढ़ा है। यानी बढ़ती आमदनी के बावजूद इंश्योरेंस सेक्टर अर्थव्यवस्था से आगे निकलने में नाकाम रहा है।

2047 तक ‘सबके लिए बीमा’ का लक्ष्य काफी दूर: जनरल इंश्योरेंस में पॉलिसियों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन ‘2047 तक सबके लिए बीमा’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के हिसाब से यह रफ्तार काफी धीमी है।

बिजनेस का खर्च और कमीशन में भारी उछाल

जहां एक तरफ ग्राहकों की संख्या नहीं बढ़ रही थी, वहीं दूसरी तरफ बीमा कंपनियों और उनके एजेंटों के खर्च आसमान छू रहे थे:

ऊंचा कॉस्ट ऑफ डूइंग बिजनेस: लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का कॉस्ट ऑफ डूइंग बिजनेस (CoDB) 18% से 39% तक पहुंच गया है (LIC और SBI Life को छोड़कर, जिनका CoDB 10-12% है)। जनरल इंश्योरेंस में यह 20% से 48% के बीच है।

कमीशन में 125% से 173% का उछाल: वित्त वर्ष 2023 से 2025 के बीच कॉर्पोरेट एजेंटों (जैसे- बैंक और ऑनलाइन एग्रीगेटर्स) के जरिए आने वाला नया प्रीमियम 28% बढ़ा, लेकिन उनका कुल कमीशन और पेआउट 125% बढ़ गया! जनरल इंश्योरेंस ब्रोकर्स का प्रीमियम 37% बढ़ा, जबकि उनका कमीशन 173% तक उछल गया।

30-60% एक्स्ट्रा रिवॉर्ड्स: बेस कमीशन के अलावा ब्रोकर्स और एजेंटों को 30% से 60% तक का अतिरिक्त इंसेंटिव/रिवॉर्ड दिया जा रहा था, जिसका पूरा बोझ सीधे ग्राहकों के प्रीमियम पर पड़ रहा था।

IRDAI का नया फॉर्मूला: कितना घटेगा कंपनियों का खर्च?

IRDAI ने कंपनियों के मैनेजमेंट खर्च की सीमा घटाने का 5 साल का रोडमैप तैयार किया है:

लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां: मौजूदा 30% की सीमा को घटाकर 2 साल के अंदर 15% और 5 साल के अंदर 12.5% पर लाना होगा।

जनरल इंश्योरेंस कंपनियां: मौजूदा सीमा को घटाकर 2 साल में 25% और 5 साल में 20% तक सीमित करना होगा।

प्रीमियम पेइंग टर्म के हिसाब से तय होगा कमीशन

ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि अब पॉलिसी की अवधि के हिसाब से पहले साल का कमीशन फिक्स करने का प्रस्ताव है:

5 साल से कम पीपीटी (PPT): एजेंसियों के लिए अधिकतम कमीशन 5% और एजेंटों के लिए 6.25%।

5 साल का पीपीटी: एजेंसियों के लिए 10% और एजेंटों के लिए 12.5%।

6 से 8 साल का पीपीटी: एजेंसियों के लिए 14% और एजेंटों के लिए 17.5%।

10 साल या उससे अधिक का पीपीटी: एजेंसियों के लिए अधिकतम 20% और एजेंटों के लिए 25% तय होगा।

कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर असर: क्यों मची भगदड़?

कमीशन और ऑपरेटिंग खर्चों पर नकेल कसने के प्रस्तावों से इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा।

शेयरों में भारी गिरावट: इस प्रस्ताव के सामने आते ही पीबी फिनटेक (पॉलिसीबाजार) और टर्टलमिंट जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के शेयरों व वैल्यूएशन में 35% से ज्यादा का भारी क्रैश दर्ज किया गया।

एजेंटों का उत्साह घट सकता है: आईआईएफएल (IIFL) की रिपोर्ट के अनुसार, कमीशन घटने से डिस्ट्रीब्यूटर्स का रुझान कम हो सकता है, जिससे नए बिजनेस वॉल्यूम और फ्रेश कैपिटल इनफ्लो पर अल्पकालिक असर देखने को मिल सकता है।

पॉलिसीधारकों को कैसे मिलेगा सीधा फायदा?

भले ही यह प्रस्ताव कंपनियों और एजेंटों के मार्जिन के लिए झटका हो, लेकिन आम ग्राहकों के लिए यह एक बहुत बड़ा वरदान साबित हो सकता है:

कम प्रीमियम और बेहतर रिटर्न: जब डिस्ट्रीब्यूशन और मैनेजमेंट कॉस्ट घटेगा, तो सेविंग्स पॉलिसियों (जैसे- एंडोमेंट या यूलिप) में ग्राहकों के प्रीमियम का बड़ा हिस्सा सीधे इन्वेस्टमेंट में जाएगा। इससे मैच्योरिटी पर ज्यादा रिटर्न मिलेगा।

सस्ती हो सकती हैं पॉलिसियां: ऑपरेटिंग कॉस्ट कम होने से कंपनियां इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के दाम यानी प्रीमियम रेट्स घटा सकती हैं।

क्लेम और सर्विस पर फोकस बढ़ेगा: अभी तक एजेंटों का ध्यान केवल नई पॉलिसी बेचने पर रहता था। IRDAI का जोर अब पॉलिसी पर्सिस्टेंसी, बेहतर सलाह और सुचारू क्लेम सेटलमेंट पर है।

शिकायतों में कमी: जनरल इंश्योरेंस में ‘बीमा भरोसा’ पोर्टल पर दर्ज शिकायतें FY23 में 78,347 से बढ़कर FY25 में 1,37,361 हो गई थीं, जिनमें से 69% शिकायतें केवल क्लेम से जुड़ी थीं। खर्चों पर लगाम लगने से कंपनियां क्लेम सर्विसिंग पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगी।

डॉलर, क्रूड, बॉन्ड यील्ड से सहमा बाजार! क्या बाजार बचा पाएगा 22800 का स्तर? जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा संकेत

Gift Nifty Indicator: पिछले सेशन में भारी बिकवाली के बाद, शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के लगभग सपाट खुलने की उम्मीद है। GIFT निफ्टी में बहुत कम हलचल दिख रही है, जबकि US ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार की धारणा पर दबाव बनाए हुए हैं। हालांकि की कीमतों में मामूली गिरावट और वॉल स्ट्रीट पर रात भर का स्थिर सेशन कुछ राहत दे सकता है, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली घरेलू बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

सुबह करीब 8 बजे GIFT निफ्टी 23,092 पर ट्रेड कर रहा था, जो 5 अंक या 0.02 फीसदी नीचे था। कमजोर ग्लोबल संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और US बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी के बीच गुरुवार को भारतीय इक्विटी बाजारों में भारी गिरावट आई। सेंसेक्स 1,247.71 अंक या 1.67 प्रतिशत गिरकर 73,580.54 पर आ गया, जबकि निफ्टी 383.70 अंक या 1.64 प्रतिशत गिरकर 23,063.10 पर बंद हुआ, जिससे मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 23,000 का स्तर चर्चा का विषय बन गया है।

बॉन्ड की बिकवाली ,एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख

शुक्रवार को एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा क्योंकि निवेशक लगातार हो रही ग्लोबल बॉन्ड बिकवाली से जूझ रहे थे। इस बिकवाली ने लंबी अवधि की US यील्ड को दो दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है और सभी बाजारों में कर्ज लेने की लागत बढ़ा दी है। ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी ने इक्विटी वैल्यूएशन को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, खासकर इसलिए क्योंकि 100 डॉलर से ऊपर कच्चे तेल की कीमतें महंगाई को ऊंचा रखने और US फेडरल रिजर्व द्वारा और मौद्रिक सख्ती की उम्मीदों को मजबूत करने का खतरा पैदा कर रही हैं।

जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स मोटे तौर पर सपाट रहा, हालांकि चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजार छुट्टियों के कारण बंद होने से ट्रेडिंग कम रही। जापान के निक्केई में 1 फीसदी की बढ़त हुई, जबकि हांगकांग के हैंग सेंग में 1 प्रतिशत की गिरावट आई। ऑस्ट्रेलिया के रिसोर्स-हैवी बाजार में 0.6 प्रतिशत की गिरावट आई।

इंडेक्स पर क्या हो रणनीति

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.20 प्रतिशत से ऊपर चली गई है और कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब बनी हुई है, जिससे ग्लोबल वित्तीय स्थितियां सख्त हो रही हैं और उभरते बाजारों की इक्विटी का आकर्षण कम हो रहा है।

पोन्नमुडी का अनुमान है कि निफ्टी के लिए 23,200-23,300 का स्तर तुरंत रेजिस्टेंस ज़ोन का काम करेगा, जबकि 23,000 का स्तर अहम साइकोलॉजिकल सपोर्ट बना रहेगा। अगर निफ्टी 23,000 के नीचे निर्णायक रूप से टूटता है, तो गिरावट 22,900-22,800 तक बढ़ सकती है; वहीं, अगर यह 23,300 के ऊपर लगातार बंद होता है, तो 23,400-23,500 की ओर राहत भरी चाल (रिलीफ मूव) देखने को मिल सकती है।

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च VP सचिन गुप्ता ने कहा कि हाल ही में एक अहम सपोर्ट ज़ोन से नीचे गिरने के बाद, सेंसेक्स पर कुछ समय तक दबाव बना रह सकता है, क्योंकि टेक्निकल इंडिकेटर कमज़ोर मोमेंटम की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि, इंडेक्स ‘ओवरसोल्ड’ ज़ोन के करीब पहुंच रहा है, जिससे 73,000-73,250 का दायरा यह तय करने के लिए अहम हो गया है कि मौजूदा कमज़ोरी और बढ़ेगी या स्थिर होगी।

“हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए 73,000–73,250 का दायरा अहम होगा, जबकि 73,850–74,000 का स्तर तुरंत रुकावट का काम कर सकता है। अगर यह 74,000 के ऊपर लगातार बना रहता है तो कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन अगर यह 73,000 के नीचे निर्णायक रूप से टूटता है तो मौजूदा कमज़ोरी और बढ़ सकती है।”

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

NSE share Price : लिस्टिंग के बाद NSE के शेयरों में बढ़त जारी, ब्रोकरेज भी हुए बुलिश, जानिए क्या हैं इनके टारगेट

NSE share Price : नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (NSE) के शेयरों में गुरुवार के ट्रेडिंग सेशन में 5.21 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली है। इश्यू प्राइस से ज़्यादा कीमत पर लिस्ट होने के बाद भी शेयरों में तेज़ी जारी है। आज BSE पर NSE के शेयरों की ट्रेडिंग ₹1,800 प्रति शेयर के भाव से शुरू हुई,जो इसके ₹1,785 के इश्यू प्राइस से 0.84 प्रतिशत ज़्यादा थी। बाद में यह स्टॉक बढ़कर ₹1,878 पर पहुंच गया, जो इश्यू प्राइस से 5.21 प्रतिशत ज़्यादा है। इस बढ़त के साथ NSE दुनिया के 10 सबसे बड़े लिस्टेड एक्सचेंजों और मार्केट वैल्यू के हिसाब से भारत की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हो गया है।

मार्केट एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि इस स्टॉक में और बढ़त होगी। ब्रोकरेज फर्मों ने इसके लिए ₹1,965 प्रति शेयर तक का प्राइस टारगेट दिया है।

NSE पर पीएल कैपिटल की राय

PL Capital ने NSE को एक्युमुलेट (accumulate) रेटिंग देते हुए ₹1,950 प्रति शेयर का प्राइस टारगेट तय किया है। इसका मतलब है कि इश्यू प्राइस के मुकाबले इसमें लगभग 9.2 प्रतिशत की बढ़त की संभावना है। PL Capital ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि NSE का कैश और फ्यूचर्स मार्केट में दबदबा बना रहेगा। लेकिन इंडेक्स ऑप्शंस में हिस्सेदारी घटने से असर पड़ सकता है। FY26-29E के दौरान रेवेन्यू और PAT में लगभग 11 प्रतिशत सालाना ग्रोथ की उम्मीद है। वन-ऑफ खर्चों के एडजस्ट होने के बाद EBITDA मार्जिन 76 प्रतिशत पर आ सकती है।

ब्रोकरेज का कहना है रि NSE का एक्सचेंज मार्केट पर दबदबा है। कैश मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 93 प्रतिशत से ज़्यादा है और स्टॉक व इंडेक्स फ्यूचर्स में यह लगभग 100 प्रतिशत हिस्से पर काबिज है। हालांकि रेगुलेटरी दिक्कतों की वजह से इंडेक्स ऑप्शंस में NSE की मार्केट हिस्सेदारी घटकर लगभग 65 प्रतिशत रह गई है। इसके साथ ही CAS और प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग नियमों के लागू होने से वॉल्यूम पर भी असर पड़ा है।

हालांकि FY21-26 के दौरान रेवेन्यू में 25% सालाना की दर से बढ़ोतरी हुई, लेकिन PL Capital का अनुमान है कि इंडेक्स ऑप्शंस में हिस्सेदारी घटने के कारण FY26-29E के दौरान यह ग्रोथ धीमी होकर 11% सालाना पर आ जाएगी।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि NSE का EBITDA मार्जिन FY26 के 71% से बढ़कर FY29 तक 76% हो जाएगा,क्योंकि वन-ऑफ खर्चों का असर कम हो जाएगा। उम्मीद है कि इस दौरान कर बाद मुनाफे में 11% सालाना की दर से बढ़ोतरी होगी।

PL Capital ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा है कि NSE के IPO में कंपनी की वैल्यूएशन ₹4.4 लाख करोड़ आंकी गई है,जो FY29E की अर्निंग के आधार पर 32 गुना प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल है। कंपनी का कहना है कि इस वैल्यूएशन में प्रीमियम का बड़ा हिस्सा शामिल है।

इस रिपोर्ट में भारतीय एक्सचेंज मार्केट में NSE की लीडरशिप पोजीशन,इसके अलग-अलग तरह से हो रहे विकास और वन-टाइम खर्चों का असर कम होने के साथ EBITDA मार्जिन में सुधार की उम्मीद पर ज़ोर दिया गया है।

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NSE पर मैक्वेरी की राय

मैक्वेरी (Macquarie) ने NSE के लिए आउटपरफॉर्म रेटिंग और ₹1,965 प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ कवरेज शुरू की है। इस टारगेट प्राइस का मतलब है कि IPO के ₹1,785 के इश्यू प्राइस के मुकाबले इसमें लगभग 10 प्रतिशत की बढ़त की संभावना है।

मैक्वेरी ने NSE को द डोमिनेटर (बाज़ार पर दबदबा रखने वाली कंपनी) बताया है। इसके पीछे कंपनी का बड़ा मार्केट शेयर,सेवाओं की व्यापक रेंज, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और मज़बूत लिक्विडिटी जैसे कारण बताए गए हैं।

 

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Shah Rukh Khan Net Worth: एक साल में 2490 करोड़ कम हुई शाहरुख खान की नेटवर्थ, हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 में ये एक्टर्स के नाम भी शामिल

Shah Rukh Khan Net Worth: बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान भारत के सबसे अमीर एक्टर्स की लिस्ट में नंबर 1 पर हैं। लेकिन पिछले साल से उनकी अनुमानित संपत्ति में काफी कमी आई है। हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 के अनुसार एक्टर की संपत्ति ₹10,000 करोड़ है, जिससे वे अमिताभ बच्चन, सलमान खान और ऋतिक रोशन से आगे हैं।

शाहरुख खान की संपत्ति में गिरावट

यह नया आंकड़ा 2025 की हुरुन इंडिया रिच लिस्ट में शाहरुख की 12,490 करोड़ की नेट वर्थ से कम है। यानी एक साल में एक्टर की नेटवर्थ में 2,490 करोड़ का अंतर आया है। एक्टर की संपत्ति सिर्फ फिल्मों से हुई कमाई तक सीमित नहीं है। इसमें उनके बिजनेस भी शामिल हैं, खासकर रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और नाइट राइडर्स स्पोर्ट्स के जरिए कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ पार्टनरशिप।

हालांकि ये आंकड़े अनुमानित हैं और प्राइवेट कंपनियों, निवेश और अन्य एसेट्स की वैल्यू के आधार पर बदल सकते हैं। इस साल की शुरुआत में जारी हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट में शाहरुख की संपत्ति का अनुमान ₹10,800 करोड़ लगाया गया था।

अमिताभ बच्चन दूसरे स्थान पर

अमिताभ बच्चन 2026 की लिस्ट में ₹4,000 करोड़ की अनुमानित संपत्ति के साथ दूसरे सबसे अमीर एक्टर हैं। 2025 की लिस्ट में बताई गई ₹1,630 करोड़ की नेट वर्थ की तुलना में उनकी नेट वर्थ में काफी बढ़ोतरी हुई है। दिग्गज एक्टर की संपत्ति न केवल उनके दशकों लंबे फिल्मी करियर से जुड़ी है, बल्कि निवेश, रियल एस्टेट और उनके फैमिली ऑफिस के जरिए मैनेज की जाने वाली एसेट्स से भी जुड़ी है। उनकी लेटेस्ट वैल्यूएशन उन्हें टॉप नामों में शामिल अन्य एक्टर्स से काफी आगे रखती है।

सलमान खान-ऋतिक रोशन

भाईजान भी ₹3,000 करोड़ की अनुमानित संपत्ति के साथ लिस्ट में शामिल हुए हैं। ऋतिक रोशन ₹2,500 करोड़ के साथ उनके बाद हैं, जो 2025 में बताई गई उनकी ₹2,160 करोड़ की नेट वर्थ से अधिक है। उनका फिटनेस और लाइफस्टाइल ब्रांड HRX उनके बिजनेस का एक अहम हिस्सा बना हुआ है।

जूही चावला और करण जौहर लिस्ट से बाहर

पिछले साल की रैंकिंग में कुछ खास बदलाव भी हुए हैं। जूही चावला और करण जौहर, जो दोनों 2025 की हुरुन इंडिया रिच लिस्ट में शामिल थे, 2026 की लिस्ट में नहीं हैं। 2025 में जूही की अनुमानित नेट वर्थ ₹7790 करोड़ थी, जबकि करण जौहर की नेट वर्थ ₹1880 करोड़ थी।

इस लिस्ट में फिल्म इंडस्ट्री के बिज़नेस से जुड़े लोग भी शामिल हैं। ‘रामायण’ के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ​​के पिता नरेश मल्होत्रा ​​की अनुमानित संपत्ति ₹16,000 करोड़ है। भूषण कुमार, रॉनी स्क्रूवाला और कलानिधि मारन जैसे फिल्म प्रोड्यूसर भी इस लिस्ट में शामिल हैं।

LG Electronics Share Price: शेयर पर बुलिश हुआ BOB Capital, दिया 20% अपसाइड का टारगेट, क्या आप करेंगे निवेश

LG Electronics Share Price: घरेलू उपकरण, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनी LG Electronics India के शेयरों पर ब्रोकरेज फर्म BOB Capital बुलिश नजर आ रहा है। ब्रोकरेज ने स्टॉक पर 20 फीसदी अपसाइड टारगेट के साथ इसकी कवरेज शुरू की है। BOB Capital ने LG Electronics India पर’Buy’ रेटिंग के साथ इसके लिए ₹1,980 प्रति शेयर के टारगेट प्राइस तय किया है, जिसका मतलब है कि इसमें लगभग 20% की बढ़त की संभावना है। ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस में यह बढ़त कंपनी के वैल्यूएशन सितंबर 2028 की अनुमानित अर्निंग्स पर शेयर (EPS) के 50 गुना पर किया है।

BOB Capital Markets के अनुसार, देश में LG Electronics India की लगभग तीन दशकों की मौजूदगी ने इसे इन्वर्टर एयर कंडीशनर, ऑटोमैटिक वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर और टेलीविज़न जैसे प्रमुख कंज्यूमर अप्लायंस कैटेगरी में मज़बूत स्थिति बनाने में मदद की है।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि अगले तीन वर्षों में LG की मार्केट लीडरशिप बनी रहेगी, जिसे मज़बूत ब्रांड रिकॉल, प्रीमियम बनाने की रणनीति (प्रीमियमाइज़ेशन), बढ़ते डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और प्रीमियम व वैल्यू सेगमेंट में नए उत्पादों की लगातार पाइपलाइन से मदद मिलेगी।

ब्रोकरेज ने कहा कि छोटे बाज़ारों में LG की गहरी पैठ और लगातार नए उत्पाद लॉन्च करने से कंपनी को इंडस्ट्री की कुल ग्रोथ से बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

BOB Capital Markets को उम्मीद है कि बढ़ती लोकलाइज़ेशन (स्थानीय स्तर पर उत्पादन) और बैकवर्ड इंटीग्रेशन से LG Electronics India के मार्जिन को स्ट्रक्चरल सपोर्ट मिलेगा।

ब्रोकरेज ने कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग स्केल और आने वाली श्री सिटी फैसिलिटी पर जोर दिया, जिससे कंप्रेसर जैसे प्रमुख कंपोनेंट्स का इन-हाउस प्रोडक्शन और बेहतर हो सकता है। इससे इनपुट लागत पर बेहतर कंट्रोल मिलने और तांबे व एल्युमीनियम की ऊंची कीमतों और करेंसी में उतार-चढ़ाव से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

ब्रोकरेज को यह भी उम्मीद है कि क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) के नियम और सख्त होने पर ज़्यादा लोकलाइज़ेशन से LG को फ़ायदा होगा।

BOB Capital Markets का अनुमान है कि FY26–FY29E के दौरान LG Electronics India का रेवेन्यू, EBITDA और PAT क्रमशः 13%, 23% और 20% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि यह ग्रोथ भारत में कंज्यूमर अप्लायंस (मोबाइल फ़ोन को छोड़कर) की बढ़ती मांग और नए उत्पाद लॉन्च, मज़बूत डिस्ट्रीब्यूशन और स्थापित ब्रांड फ्रेंचाइजी के ज़रिए मार्केट शेयर हासिल करने की LG की क्षमता से प्रेरित होगी।

हालांकि एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर जैसे उत्पादों की घरेलू बिक्री मौसमी होती है, लेकिन BOB Capital Markets को उम्मीद है कि एक्सपोर्ट और B2B बिज़नेस ग्रोथ के अतिरिक्त इंजन के तौर पर काम करेंगे।

श्री सिटी, नोएडा और पुणे में LG की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज़ से पैरेंट कंपनी की “ग्लोबल साउथ” रणनीति को सपोर्ट मिलने और एक्सपोर्ट से योगदान बढ़ने की उम्मीद है। B2B सेक्टर में, कंपनी अपने इन्फॉर्मेशन डिस्प्ले और HVAC बिज़नेस (जिसमें VRF और कैसेट AC सिस्टम शामिल हैं) का विस्तार कर रही है। इसके सालाना मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (AMC) बिज़नेस से भी कंपनी को ऐसे रेवेन्यू सोर्स मिलते हैं जिनमें मार्जिन अपेक्षाकृत ज़्यादा होता है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Hero Motors Share Price: कमजोर लिस्टिंग के बाद रॉकेट बने शेयर, खरीदें, बेचें या होल्ड करें?

 Hero Motors Share Price: हीरो मोटर्स के शेयर 23 सितंबर को कमजोरी के साथ लिस्ट हुए। उसके बाद शेयर में जबर्दस्त तेजी दिखी। 11:45 बजे शेयर का प्राइस एनएसई पर 17.14 फीसदी चढ़कर 98.40 रुपये पर चल रहा था। कंपनी ने आईपीओ में इनवेस्टर्स को प्रति शेयर 84 रुपये की कीमत पर शेयर इश्यू किए थे। लेकिन, शेयर की लिस्टिंग 2.38 फीसदी डिस्काउंट के साथ 82 रुपये पर हुई।

लिस्टिंग जीएमपी के संकेतों के मुताबिक

23 सितंबर को Hero Motors के शेयर की लिस्टिंग जीएमपी के संकेतों के मुताबिक रही। जीएमपी से इस शेयर के इश्यू प्राइस से कम कीमत पर लिस्टिंग के संकेत मिल रहे थे। कंपनी के आईपीओ में इनवेस्टर्स ने अच्छी दिलचस्पी दिखाई थी। कंपनी ने 79-84 रुपये प्राइस बैंड तय किया था। 1000 करोड़ रुपये के आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (OFS) भी शामिल था।

शेयर में रॉकेट जैसी तेजी से इनवेस्टर्स दुविधा में

लिस्टिंग के बाद हीरो मोटर्स के शेयरों में आई तेजी ने इनवेस्टर्स को दुविधा में डाल दिया है। सवाल है कि क्या नए निवेशकों को यह शेयर सेकेंडरी मार्केट से खरीदना चाहिए, जिन निवेशकों को शेयर एलॉट हुए हैं, उन्हें इसे रखना चाहिए या प्रॉफिट बुक कर लेना चाहिए?

कंपनी का पावरट्रेन पोर्टफोलियो काफी डायवर्सिफायड

कांतिलाल छगनलाल सिक्योरिटीज के महेश एम ओझा का कहना है कि हीरो मोटर्स का पावरट्रेन पोर्टफोलियो काफी डायवर्सिफायड है। कंपनी टेक्नोलॉजी के मामले में भी स्ट्रॉन्ग है। इस वजह से ऑटोमोटिव सेक्टर में इसकी स्थिति काफी मजबूत है। उन्होंने कहा कि इन-हाउस इंजीनियरिंग कपैसिटी अच्छी है। दुनिया की कई बड़ी कंपनियां इसकी क्लाइंट्स हैं।

ज्यादा वैल्यूएशन चिंता की बड़ी वजह 

उन्होंने कहा कि कंपनी की मौजूदगी सीवीटी हब, ईवी ट्रांसमिशंस, इलेक्ट्रिक मोटर्स जैसे सेगमेंट्स में है। इस वजह से कंपनी की स्थिति काफी स्ट्रॉन्ग है। खासकर प्रीमियम आईसीई और ई-बाइक पावरट्रेन मार्केट्स में यह काफी मजबूत स्थिति में है। लेकिन, वैल्यूएशन चिंता की वजह है। आईपीओ से पहले शेयर की वैल्यूएशन FY26 की अर्निंग्स की करीब 74 गुना थी। इस सेगमेंट की दूसरी कंपनियों का औसत पीई करीब 50.2 गुना है। इससे कंपनी के शेयर में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं दिखती।

इनवेस्टर्स शेयर में प्रॉफिट बुक सकते हैं

ओझा का मानना है कि क्लाइंट्स के मामले में कंसंट्रेशन रिस्क दिख रहा है। कंपनी की कुल रेवेन्यू में टॉप 10 क्लाइंट्स की करीब 73-78 फीसदी हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि जिन इनवेस्टर्स को आईपीओ में शेयर इश्यू हुए हैं, वे प्रॉफिट बुक कर सकते हैं। नए निवेशकों को इस शेयर में निवेश करने के लिए प्राइस कसे मामले में सही एंट्री लेवल का इंतजार करना चाहिए।

नए निवेशकों को सही एंट्री प्वाइंट का इंतजार करना चाहिए

स्वस्तिका इनवेस्टमार्ट में हेड ऑफ वेल्थ शिवानी नयाती का भी मानना है कि शेयर की वैल्यूएशन अर्निंग्स की करीब 69-74 गुनी है, जो इस सेक्टर की दूसरी कंपनियों की वैल्यूएशन के मुकाबले काफी ज्यादा है। हालांकि, RoNW बढ़कर 8.53 फीसदी हो गया है लेकिन EBITDA मार्जिन करीब 10.2 फीसदी है, जो प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से कम है।

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शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में 

उन्होंने कहा कि नए इनवेस्टर्स इस शेयर में निवेश के लिए बेहतर प्राइस प्वाइंट का इंतजार कर सकते हैं। जिन निवेशकों को आईपीओ में Hero Motors के शेयर एलॉट हुए हैं, वे 75-77 रुपये पर स्टॉपलॉस के साथ इस शेयर को होल्ड यानी अपने पास बनाए रख सकते हैं। 23 सितंबर को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में रिकवरी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में थे।

L&T Target Price: मैनेजमेंट से मुलाकात के बाद JPMorgan ने सबसे बड़ा टारगेट दिया, 30% चढ़ सकता है स्टॉक

L&T Target Price: ब्रोकरेज फर्म JPMorgan ने दिग्गज इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Larsen and Toubro यानी L&T के शेयर पर ‘Overweight’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस ₹5,060 रखा है। इस टारगेट के हिसाब से मौजूदा स्तर से शेयर में करीब 30% की तेजी की गुंजाइश है।

मंगलवार को L&T का शेयर 0.7% गिरकर ₹3,877 पर बंद हुआ। इस साल अब तक शेयर करीब 6% नीचे है। JPMorgan का ₹5,060 का टारगेट L&T के लिए सबसे ऊंचे टारगेट में शामिल है।

पश्चिम एशिया में प्रोजेक्ट्स पर बड़ा अपडेट

JPMorgan ने L&T के मैनेजमेंट से मुलाकात की। इसके बाद ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट जारी की। मैनेजमेंट के मुताबिक पश्चिम एशिया में कंपनी के प्रोजेक्ट्स का काम अभी भी बिना किसी बड़ी रुकावट के चल रहा है।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण लागत बढ़ी है। हालांकि, कंपनी के ग्राहकों ने बड़े स्तर पर इस बढ़ी हुई लागत को स्वीकार किया है। L&T ने इस मुश्किल दौर में ग्राहकों के साथ अपने मजबूत रिश्ते बनाए रखने पर फोकस जारी रखने की बात कही है।

भारत में सरकारी खर्च बढ़ने की उम्मीद

L&T के मुताबिक भारत में सरकारी कैपेक्स कुछ समय तक सुस्त रहने के बाद फिर बढ़ सकता है। वहीं, निजी कंपनियों का कैपेक्स भी अब रफ्तार पकड़ रहा है। इसमें थर्मल पावर सेक्टर में मिले बड़े ऑर्डर की अहम भूमिका है।

कंपनी ने आगे के लिए कई नए क्षेत्रों पर भी फोकस किया है। इनमें डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं।

इसके अलावा L&T ने 2031 तक अपने डिफेंस कारोबार से होने वाले रेवेन्यू को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी का फोकस रिटर्न ऑन इक्विटी, कैश फ्लो और शेयरधारकों को मिलने वाले रिटर्न पर भी बना रहेगा।

मिड-टीन्स ग्रोथ की उम्मीद

JPMorgan के मुताबिक पश्चिम एशिया का संघर्ष L&T के शेयर के लिए एक जोखिम बना हुआ है। इसके बावजूद कंपनी के कारोबार को पारंपरिक और नए क्षेत्रों में मिड-टीन्स यानी सालाना करीब 13-16% की ग्रोथ के लिए तैयार किया जा रहा है।

ब्रोकरेज के मुताबिक कंपनी के रिटर्न ऑन इक्विटी में भी मजबूती बनी हुई है। JPMorgan ने यह भी कहा कि L&T का वैल्यूएशन 25 गुना से कम P/E पर है। ब्रोकरेज ने इसे आकर्षक बताया है।

₹5,000 के ऊपर टारगेट देने वाले ब्रोकरेज

JPMorgan के अलावा दो और ब्रोकरेज ने L&T के लिए ₹5,000 या उससे ज्यादा का टारगेट दिया है। Jefferies और ICICI Direct दोनों ने शेयर का टारगेट ₹5,000 रखा है।

L&T को कुल 32 एनालिस्ट कवर कर रहे हैं। इनमें 26 ने शेयर पर ‘Buy’, 5 ने ‘Hold’ और 1 एनालिस्ट ने ‘Sell’ रेटिंग दी है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SIP में नुकसान हो रहा है तो क्या बंद कर दें? म्यूचुअल फंड एक्सपर्ट ने दी ये खास सलाह

Mutual Fund SIP Investment Rules: शेयर बाजार में गिरावट आते ही म्यूचुअल फंड निवेशक अक्सर घबरा जाते हैं। खासकर जब SIP का रिटर्न 3 से 5 साल तक निगेटिव या बेहद मामूली दिखता है, तो मन में पहला सवाल यही आता है कि, क्या फंड में कोई खराबी आ गई है या यह सिर्फ बाजार की सुस्ती है?

म्यूचुअल फंड में शेयर, सोना और एफडी के जरिए आखिर निवेशक संपत्ति क्यों बनाते हैं और इस सफर में किन गलतियों से बचना चाहिए? Moneycontrol के साथ खास बातचीत में DSP म्यूचुअल फंड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट साहिल कपूर ने एसआईपी, पोर्टफोलियो ओवरलैप, फंड मैनेजर के बदलने और फंड से निकलने के सही समय पर खुलकर बात की है।

3-5 साल तक SIP का रिटर्न खराब रहे, तो क्या फंड बेकार है?

साहिल कपूर के मुताबिक, सिर्फ कुछ सालों का खराब रिटर्न इस बात का सबूत नहीं है कि फंड खराब है। सबसे पहले आपको ‘बाजार की सुस्ती’ और ‘फंड की खराबी’ में फर्क समझना होगा।

DSP के एक ऐतिहासिक अध्ययन में पाया गया कि 10 साल की SIP चलाने वाले 95% निवेशकों को शुरुआती 5 सालों में कभी न कभी बुरे दौर का सामना करना पड़ा। वहीं 81% एसआईपी का रिटर्न किसी न किसी मोड़ पर निगेटिव भी हुआ। लेकिन राहत की बात यह है कि पूरे 10 साल का समय पूरा होने पर 99% एसआईपी ने डेट फंड्स (FDs) को पछाड़कर शानदार रिटर्न दिया।

खुद से ये सवाल पूछें कि क्या फंड अपने बेंचमार्क से लगातार पिछड़ रहा है? क्या फंड मैनेजर या निवेश का तरीका बदल गया है? अगर फंड की रणनीति सही है और सुस्ती केवल बाजार के चक्र की वजह से है, तो धैर्य बनाए रखना ही समझदारी है।

पैसों की तंगी हो तो क्या करें? SIP रोकें या पैसा निकालें

अगर अचानक आपकी आमदनी कम हो जाए या पैसों की जरूरत पड़े, तो साहिल कपूर का कहना है कि पहला मकसद वित्तीय रूप से सुरक्षित रहना है, न कि हर हाल में एसआईपी जारी रखना।

पहले से जमा पैसों को निकालने से कंपाउंडिंग का चक्र टूट जाता है। इसलिए पैसा निकालने के बजाय नई एसआईपी को कुछ समय के लिए रोकना ज्यादा बेहतर विकल्प है। अपने लॉन्ग-टर्म इक्विटी पोर्टफोलियो को इमरजेंसी के भरोसे न छोड़ें। हालांकि, अगर सच में पैसों की सख्त जरूरत है, तो पोर्टफोलियो आपके काम आने के लिए ही बना है।

हाल में तगड़ा रिटर्न देने वाले फंड्स में तुरंत पैसा लगाना सही है?

किसी फंड ने पिछले 1-2 सालों में 100% या 200% का रिटर्न दिया है, तो आंख मूंदकर उसमें पैसा न लगाएं। अमेरिका के इस फंड ने 1998 में 196% का रिटर्न दिया, जिसे देखकर 1999 में निवेशकों ने 731 मिलियन डॉलर उसमें झोंक दिए। नतीजा? 1998 से 2003 के बीच फंड ने तो 8.3% सालाना रिटर्न दिया, लेकिन देरी से घुसे आम निवेशकों को औसतन -11.9% का नुकसान उठाना पड़ा।

रिटर्न कहां से आया है कंपनी की कमाई से या सिर्फ बाजार की तेजी से? साथ ही हमेशा वैल्यूएशन देखकर ही एंट्री लें।

फ्लेक्सीकैप फंड के साथ दूसरे फंड लेना कितना सही?

अगर आपके पास पहले से फ्लेक्सीकैप फंड है, तो नया फंड लेने से पहले सावधान रहें। DSP के अध्ययन के अनुसार, एक औसत फ्लेक्सीकैप फंड का पोर्टफोलियो:

  • लार्जकैप फंड से: 63.8% मैच करता है।
  • लार्ज एंड मिडकैप से: 71.5% मैच करता है।
  • बैलेंस्ड एडवांटेज से: 75.3% मैच करता है।

यानी नया फंड खरीदने पर आपको सिर्फ 25 से 36% ही नए शेयर मिलते हैं। अलग नाम के फंड खरीदने के बजाय ऐसा फंड चुनें जो सच में आपके पोर्टफोलियो में विविधता लाए।

फंड मैनेजर बदल जाए तो किस ट्रैक रिकॉर्ड पर भरोसा करें?

अध्ययन के मुताबिक, अलग-अलग कैटेगरी में मौजूदा फंड मैनेजर्स का औसत कार्यकाल अभी भी 3 साल से कम है। फंड का 10 साल का इतिहास आपको म्यूचुअल फंड हाउस और उसकी प्रक्रिया के बारे में बताता है, मौजूदा मैनेजर के बारे में नहीं। नए मैनेजर के आने के बाद पोर्टफोलियो में क्या बदलाव हुए और उनका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड कैसा रहा है, इस पर नजर रखें।

म्यूचुअल फंड से बाहर निकलने का सही समय क्या है?

किसी फंड में 1 साल का खराब प्रदर्शन उसे बेचने की वजह नहीं होना चाहिए। आपको फंड से तब बाहर निकलना चाहिए जब:

  • फंड का मूल मकसद या निवेश का तरीका बदल जाए।
  • कोई प्रमुख फंड मैनेजर चला जाए जिस पर पूरी रणनीति टिकी थी।
  • फंड लगातार खराब फैसलों की वजह से पिछड़ रहा हो, न कि बाजार के चक्र की वजह से।
  • आपके पोर्टफोलियो में एक ही तरह के शेयरों की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा बढ़ जाए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।