ट्रम्प कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदल सकते हैं:कहा- ‘लेक ओंटारियो’ का नाम ‘लेक अमेरिका’ करने की सोच रहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदलने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ रखने पर विचार कर रहे हैं। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका और कनाडा ने एक-दूसरे पर 50% टैरिफ लगा दिया है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, लेक ओंटारिया का नाम बदलने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है और न ही औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने किसी जगह का नाम बदलने की बात कही हो। जनवरी 2025 में उन्होंने अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ को ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ कहने का आदेश दिया था। हालांकि, उस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली थी। क्यों अहम है लेक ओंटारियो? लेक ओंटारियो उत्तरी अमेरिका की पांच बड़ी झीलों (ग्रेट लेक्स) में से एक है। इसका उत्तरी किनारा कनाडा के ओंटारियो प्रांत और दक्षिणी किनारा अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य से जुड़ा है। यह झील दोनों देशों के लिए पीने के पानी, सामान की आवाजाही, मछली पालन और पर्यटन के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। सेंट लॉरेंस नदी के जरिए यह अटलांटिक महासागर से जुड़ती है, इसलिए यहां से सामान की आवाजाही भी होती है। झील की देखभाल और सुरक्षा के लिए अमेरिका और कनाडा मिलकर काम करते हैं और कई समझौते कर चुके हैं। लेक ओंटारियो को उसका नाम कैसे मिला? ‘ओंटारियो’ नाम मूलनिवासी ह्यूरॉन लोगों की भाषा से आया माना जाता है। इसका अर्थ ‘सुंदर झील’ है। बाद में यूरोपीय लोगों ने भी इस नाम का इस्तेमाल शुरू किया और यही नाम प्रचलित हो गया। इसी से कनाडा के ओंटारियो राज्य का नाम भी पड़ा। यूरोपीय मानचित्रों में यह नाम 17वीं सदी से दिखाई देने लगा था। यानी ‘ओंटारियो’ नाम नया नहीं है, बल्कि सदियों पुराना है। एक दिलचस्प बात यह भी है कि लेक ओंटारियो ग्रेट लेक्स में सबसे छोटी झील है, लेकिन इसका आर्थिक महत्व बहुत बड़ा है। क्या अमेरिका अकेले नाम बदल सकता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अपने सरकारी रिकॉर्ड, नक्शों और दस्तावेजों में किसी स्थान का नाम बदल सकता है। लेकिन यदि वह स्थान किसी दूसरे देश के साथ साझा है, तो नया नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार नहीं हो जाता। यानी अमेरिका अपने आधिकारिक दस्तावेजों में लेक ओंटारियो को कोई नया नाम दे सकता है, लेकिन कनाडा या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उसे मानने के लिए बाध्य नहीं होंगी। यही स्थिति पहले ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ मामले में भी देखने को मिली थी। जनवरी 2025 में ट्रम्प ने अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आदेश दिया था। अमेरिका ने इसे अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में लागू कर दिया, लेकिन मैक्सिको और दूसरे देशों ने पुराने नाम का इस्तेमाल जारी रखा। ————— यह खबर भी पढ़ें… कनाडाई PM बोले- अमेरिका और हमारे बीच जंग के हालात: ट्रम्प के टैरिफ को हमला बताया; US पर जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के साथ बढ़ते ट्रेड विवाद को लेकर कहा है कि “हम जंग में हैं, क्योंकि हम पर हमला हुआ है।” उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ को कनाडा पर हमला बताया। पूरी खबर पढ़ें…

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आ सकती है तूफानी तेजी! ईरान पर अमेरिका के इस एक फैसले से भारत में पड़ेगी महंगाई की मार?

US Sanctions on Iran: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’ करते हुए नए और कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए इसे ‘इकोनॉमिक डी-डे’ करार दिया है।

वैसे तो भारत सीधे तौर पर ईरान से कच्चा तेल आयात नहीं करता है, लेकिन ग्लोबल ऑयल मार्केट के जरिए भारत पर इसका बड़ा असर पड़ने की आशंका है। चीन के विकल्प ढूंढने से लेकर भारत के क्रूड बिल, फ्रेट चार्ज और रुपए पर पड़ने वाले असर की पूरी डिटेल जानिए।

सीधे नहीं, ‘चीन फैक्टर’ से बढ़ेगी भारत की सिरदर्दी

एनर्जी इंटेलिजेंस फर्म Kpler के अनुसार, भारत ईरान से सीधे क्रूड नहीं खरीदता, इसलिए भारत पर प्रत्यक्ष प्रभाव नगण्य रहेगा। असली खतरा चीन के रुख से है। चीन हर महीने ईरान से औसतन 5 से 8 लाख बैरल प्रति दिन तेल खरीदता है। अगर अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में चीन को ईरान के अलावा दूसरे देशों का रुख करना पड़ा, तो वह उन मार्केट बैरल्स पर कब्जा करने की कोशिश करेगा जिन पर भारत निर्भर है।

चीन के अचानक ग्लोबल मार्केट में आने से कच्चे तेल की मांग और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे बेंचमार्क क्रूड प्राइस उछलेगा और भारत का कुल आयात बिल बढ़ जाएगा।

क्या रूस से मिलेगा सहारा?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल (25 से 28 लाख बैरल प्रति दिन) रूस से खरीद रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस पहले से ही अपनी क्षमता के मुताबिक भारत को अधिकतम तेल सप्लाई कर रहा है। मार्केट में सप्लाई तंग होने से रूसी क्रूड पर मिलने वाली छूट कम हो रही है और प्रीमियम बढ़ रहा है, जिसका सीधा नुकसान भारतीय रिफाइनरीज को होगा।

महंगा मालभाड़ा और इंश्योरेंस का झटका

मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सिर्फ कच्चे तेल की कीमत ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत भी आसमान छू रही है। होर्मुज बंद होने के साथ ही फिलहाल लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घट गई है। मुख्य सप्लाई रूट्स पर फ्रेट दरें 137% से 411% तक बढ़ चुकी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए सिंगल ट्रिप का ‘वॉर-रिस्क इंश्योरेंस’ 7.5 से 10 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दूर-दराज से तेल मंगाने पर जहाजों का फ्रेट और वर्किंग कैपिटल कॉस्ट बढ़ जाएगी।

महंगाई, रुपए और अर्थव्यवस्था पर कैसे होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है। अगर ब्रेंट क्रूड के दाम में तेजी बनी रहती है, तो क्रूड का आयात बिल बढ़ने से देश का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ेगा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होगा। जुलाई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज डेफिसिट $32 अरब तक पहुंच गया था।

ट्रांसपोर्टेशन और शिपिंग महंगी होने से पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस (LPG) के साथ-साथ एविएशन, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं।

भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार पर सीमित प्रभाव

भारत-ईरान प्रत्यक्ष व्यापार पर इसका खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि 2018 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने मई 2019 से ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था।

भारत ईरान को बासमती चावल का बड़ा निर्यात करता है (अप्रैल-जून 2026 में $103 मिलियन का निर्यात)। यूएई के जरिए होने वाले पेमेंट और फ्रेट रूट में रुकावट से भारतीय बासमती एक्सपोर्टर्स को लॉजिस्टिक्स में थोड़ी दिक्कत आ सकती है।

ईरान ने हाल के सालों में अपनी घरेलू फार्मा मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा ली है, इसलिए भारतीय दवा निर्यातकों पर इसका बड़ा असर नहीं होगा।

कुल मिलाकर ईरान पर कसा गया अमेरिकी शिकंजा सीधे तौर पर भारत की तेल आपूर्ति को ठप नहीं करेगा, बल्कि यह ‘सेकंड-ऑर्डर इफेक्ट’ के रूप में सामने आएगा। चीन द्वारा वैकल्पिक तेल बाज़ारों पर निर्भरता बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल, शिपिंग भाड़ा और इंश्योरेंस महंगा होगा, जिससे आखिरकार भारत का इंपोर्ट बिल और घरेलू महंगाई प्रभावित हो सकती है।

POCO F9 Pro और F9 Ultra की लॉन्च डेट कंफर्म! 16GB RAM और 5x Optical Zoom के साथ होगी एंट्री

POCO के फैंस काफी समय से कंपनी की F9 सीरीज के लॉन्च का इंतजार कर रहे हैं। अब कंपनी ने आखिरकार पुष्टि कर दी है कि वह 1 सितंबर 2026 को POCO F9 सीरीज को दुनियाभर में लॉन्च करेगी। कंपनी ने यह भी बताया है कि वह POCO F9 Pro और POCO F9 Ultra को लॉन्च करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि ये दोनों फोन Redmi K100 सीरीज के रीब्रांडेड वर्जन हो सकते हैं, जिसे अभी सिर्फ चीन में लॉन्च किया गया है। यहां हम आपको आने वाले इन स्मार्टफोन्स के बारे में अब तक मिली सभी जानकारी बता रहे हैं।

Poco F9 सीरीज 1 सितंबर को होगी लॉन्च

Xiaomi के सब-ब्रांड POCO ने कंफर्म किया है कि Poco F9 Pro और Poco F9 Ultra को ग्लोबल मार्केट में 1 सितंबर को रात 8 बजे GMT (भारत में 2 सितंबर को रात 1:30 बजे) लॉन्च किया जाएगा। खास बात यह है कि कई लीक्स में दावा किया गया है कि कंपनी स्टैंडर्ड Poco F9 को लॉन्च नहीं करेगी।

Poco F9 सीरीज के कलर और स्पेसिफिकेशन्स

टीजर के मुताबिक, Poco F9 सीरीज को White और Dark Cherry कलर ऑप्शन में लॉन्च किया जाएगा, जो Redmi K100 सीरीज जैसा ही है। हैंडसेट के पीछे ‘Sound by Bose’ की ब्रांडिंग दिख रही है, जिससे पता चलता है कि इसकी ऑडियो ट्यूनिंग US कंपनी के साथ मिलकर की गई है।

स्पेसिफिकेशन की बात करें तो, Poco F9 Pro में 185Hz रिफ्रेश रेट वाला 6.59-इंच का QHD+ प्लास्टिक OLED डिस्प्ले होने की उम्मीद है। जबकि F9 Ultra में इससे भी बड़ी 6.85-इंच की स्क्रीन हो सकती है, जिसका रिजोल्यूशन 2608 × 1200 पिक्सल होगा।

दोनों फोन में Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट दिया जा सकता है। इनमें 16GB तक RAM और 512GB तक स्टोरेज भी मिल सकता है।

हालांकि, Pro मॉडल के प्रोसेसर को लेकर कुछ अनिश्चितता है। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि Poco F9 Pro में Snapdragon 8 Elite Gen 5 का एक खास वर्जन (binned version) इस्तेमाल हो सकता है, जिसे Snapdragon 8 Elite Gen 5 V कहा जा रहा है। बताया यह भी जा रहा है कि यही चिप चीन में Redmi K100 Pro में भी इस्तेमाल होगी।

कैमरे की बात करें तो, Poco F9 Pro में पीछे की तरफ ट्रिपल कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है। इसमें OIS के साथ 50MP का मेन कैमरा, 8MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 3x ऑप्टिकल जूम व OIS वाला 50MP टेलीफोटो कैमरा दिया जा सकता है।

वहीं, Poco F9 Ultra में ज़्यादा बेहतर ज़ूम सेटअप मिल सकता है। इसमें Pro मॉडल जैसा ही 50MP का प्राइमरी कैमरा होने की उम्मीद है, साथ ही 50MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 5x ऑप्टिकल ज़ूम को सपोर्ट करने वाला एक और 50MP का टेलीफोटो सेंसर भी हो सकता है।

यह भी पढ़ें: Flipkart पर ₹69,900 वाला iPhone 16 हुआ सस्ता! मिल रहा आधे से भी कम दाम में, जानें कीमत और ऑफर

Gold Price Today: विदेश में 3 महीने के हाई के करीब पहुंचा सोना, जैक्सन होल से पहले फेड के कदम पर बाजार की नजर

Gold Price Today: इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें 3 महीने के उच्चतम स्तर के करीब ट्रेड कर रहा है। ट्रेडर्स बॉन्ड मार्केट में US ट्रेजरी के आने वाले कदमों का आकलन कर रहे हैं। यह आकलन एक अप्रत्याशित दखल के बाद हो रहा है जिसने फिस्कल पॉलिसी (राजकोषीय नीति) को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं।

COMEX गोल्ड में 1% यानी 46.90 की बड़ी बढ़त हुई और यह पिछले क्लोज 4,710.10 से बढ़कर 4,744.70 पर पहुंच गया। दूसरी ओर, COMEX सिल्वर 1.26% या 0.861 बढ़कर 69.455 पर पहुंच गई, जबकि पिछला क्लोज 68.96 था।

ट्रेजरी द्वारा लॉन्ग-टर्म सरकारी कर्ज की बायबैक (वापसी खरीद) बढ़ाने के बाद लगातार चार सेशन में 7% से अधिक की बढ़त के साथ बुलियन की कीमत $4,680 प्रति औंस के करीब पहुंच गई है।

इस अप्रत्याशित कदम ने कर्ज लेने की बढ़ती लागत को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं और डॉलर पर दबाव डाला है। जिससे सोना (जिसकी कीमत डॉलर में तय होती है) कई खरीदारों के लिए सस्ता हो गया है।

ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने महंगे कर्ज की बायबैक को और बढ़ाने की अपनी तैयारी का संकेत दिया है, हालांकि सोमवार को उन्होंने कोई अतिरिक्त संकेत नहीं दिया।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इन्वेस्टर्स को उम्मीद है कि केविन वॉर्श शुक्रवार को सालाना जैक्सन होल कॉन्फ्रेंस में सेंट्रल बैंक के चेयरमैन के तौर पर लगातार बनी हुई महंगाई पर फेडरल रिजर्व को कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए, इस पर अपना नजरिया स्पष्ट करेंगे।

US कर्ज की लागत को मैनेज करने के हालिया कदमों ने महंगाई और डॉलर की कमजोरी को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। इससे उस ‘डीबेसमेंट नैरेटिव’ (मुद्रा के मूल्य में गिरावट की धारणा) की वापसी का संकेत मिलता है, जिसने 2025 में सोने की जबरदस्त तेजी में योगदान दिया था।

सोने की इस उल्लेखनीय रिकवरी ने धातु को महत्वपूर्ण 200-दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर पहुंचा दिया है, जिसे अक्सर तेजी का संकेत (बुलिश टेक्निकल इंडिकेटर) माना जाता है।

बढ़ते ग्लोबल ट्रेड टेंशन (व्यापारिक तनाव) से इस धातु की ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) वाली खासियत को भी चुनौती मिल रही है। US ने ईरान को अलग-थलग करने की रणनीति के तहत उसके साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई की धमकी दी है। इसके अलावा, पिछले हफ्ते बातचीत विफल होने के बाद दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कनाडा के साथ व्यापारिक संघर्ष की ओर बढ़ रही है।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Asian Market Today: टेक शेयरों में बिकवाली बढ़ने से एशिया में गिरावट, Nvidia के नतीजों से पहले KOSPI 3% से ज़्यादा लुढ़का

Asian Market Today:  आज एशिया मार्केट में गिरावट देखने को मिल रही है। निवेशकों ने टेक शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम की, क्योंकि आने वाली कमाई की रिपोर्ट से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रैली को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.4% गिर गया। शुरुआती एशियाई कारोबार में जापान और दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क इंडेक्स में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई। Kospi 3.37% और Nikkei 225 0.93% गिरे, जबकि Topix में मामूली 0.015% की बढ़त हुई। इसके उलट, Hang Seng फ्यूचर्स में 0.6% की बढ़त हुई।

यह क्षेत्रीय गिरावट चिप बनाने वाली कंपनियों में भारी बिकवाली के बाद आई, जिससे सोमवार को Nasdaq 100 लगभग 1% गिर गया था। Nvidia Corp के शेयरों में लगातार सातवें सेशन में गिरावट आई, जो 2022 के बाद से इस स्टॉक की सबसे लंबी गिरावट का दौर है।

चिप बनाने वाली कंपनी के शेयरों में और 2.9% की गिरावट आई, जब उसने ग्राहकों को बताया कि वह अगले साल की शुरुआत में शिप होने वाले AI सिस्टम की कीमतें बढ़ाएगी। शुरुआती एशियाई कारोबार में US इक्विटी-इंडेक्स फ्यूचर्स में भी मामूली गिरावट देखी गई।

निवेशकों का कहना है कि यह बिकवाली इस बढ़ती चिंता को दिखाती है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भारी खर्च से उतना ही मुनाफ़ा होगा। बुधवार को आने वाली Nvidia की कमाई की रिपोर्ट को इस भरोसे के लिए एक अहम परीक्षा माना जा रहा है। ट्रेडर्स इस बात पर नज़र रखे हुए हैं कि क्या चिप शेयरों में हालिया गिरावट जारी रहेगी।

मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ और यह $92 प्रति बैरल के आसपास बना रहा। US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश के खिलाफ़ आर्थिक दंड की चेतावनी दी थी।

सोमवार को बेंचमार्क में 2% से ज़्यादा की गिरावट आई थी, जिससे छह दिनों की लगातार बढ़त का सिलसिला टूट गया। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.3% बढ़कर $85.23 प्रति बैरल हो गया।

ऊर्जा की कीमतों में गिरावट से सोमवार को US ट्रेजरी बॉन्ड को सहारा मिला और 10-साल की यील्ड चार बेसिस पॉइंट गिरकर 4.70% हो गई।

ट्रेडर्स ने बढ़ते जियोपॉलिटिकल रिस्क और इस हफ़्ते आने वाले ढेर सारे इकोनॉमिक डेटा और कॉर्पोरेट नतीजों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। व्यापक मार्केट सेंटीमेंट के लिए टेक्नोलॉजी सेक्टर की चाल को अहम माना जा रहा है। लगातार महंगाई और फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटे) की चिंताओं के कारण यील्ड ऊंचे बने रहे, और बाजार फेड चेयर केविन वॉर्श से इस साल के बाकी समय के लिए फेडरल रिजर्व की संभावित राह के बारे में स्पष्ट गाइडेंस का इंतजार कर रहे थे।

CNBC की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेजरी को भी सपोर्ट मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि US ट्रेजरी डिपार्टमेंट उधार लेने की लागत को कम करने में मदद के लिए पुराने, अधिक यील्ड वाले सिक्योरिटीज़ को वापस खरीदने (बायबैक) के लिए अपने कैश रिजर्व का इस्तेमाल कर सकता है।

हालांकि, ब्लूमबर्ग के अनुसार, बेसेंट ने सोमवार को एक भाषण के दौरान कर्ज प्रबंधन रणनीति में किसी भी बदलाव की पुष्टि करने से इनकार कर दिया। बायबैक बढ़ाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से कहा कि विभाग ने “अभी तक एक भी बॉन्ड नहीं खरीदा है”।

दूसरी ओर, जापानी येन 159.11 प्रति डॉलर पर स्थिर रहा, जबकि ऑफशोर युआन 6.7201 प्रति डॉलर पर लगभग अपरिवर्तित रहा।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

H-1B वीजा पर US का नया प्लान, भारत पर क्या होगा असर?

H-1B वीजा पर US का नया प्लान, भारत पर क्या होगा असर?

डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार ने अत्यधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए नए H-1B वीजा आवेदन पर 1 लाख डॉलर से अधिक की फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी Department of Homeland Security (DHS) की ओर से जारी प्रस्ताव के तहत यह फीस बढ़ाकर 1,03,265 डॉलर की जा सकती है। सोमवार को Federal Register में प्रकाशित नोटिस के मुताबिक, यह फीस उन सभी H-1B वीजा कैप-सब्जेक्ट आवेदनों पर लागू होगी, जिनमें एडवांस्ड डिग्री यानी उच्च शिक्षा प्राप्त उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध छूट वाली श्रेणी भी शामिल है।

ALSO READ: 6 का वादा, अब सिर्फ 3 सिलेंडर, तमिलनाडु में LPG सिलेंडर योजना पर सियासी घमासान, BJP ने विजय सरकार पर साधा निशाना

H-1B फीस बढ़ाने का नया प्रस्ताव

 

DHS का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब H-1B वीजा फीस को लेकर अमेरिकी अदालतों में कानूनी विवाद चल रहा है। करीब एक महीने पहले एक संघीय अपीलीय अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जिला जज के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी, जिसने ट्रंप प्रशासन की 1 लाख डॉलर H-1B फीस लगाने की योजना को पलट दिया था।

ALSO READ: 6 का वादा, अब सिर्फ 3 सिलेंडर, तमिलनाडु में LPG सिलेंडर योजना पर सियासी घमासान, BJP ने विजय सरकार पर साधा निशाना

सितंबर 2025 में ट्रंप ने एक व्यापक घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत H-1B वीजा पर सालाना 1 लाख डॉलर की फीस लगाने का प्रावधान किया गया था। इसी दौरान अमीर लोगों के लिए अमेरिकी नागरिकता की राह के तौर पर 10 लाख डॉलर के ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा की योजना भी पेश की गई थी।

 

हालांकि, बाद में एक संघीय अदालत ने 1 लाख डॉलर की H-1B फीस को रद्द कर दिया था। वहीं, ‘गोल्ड कार्ड’ कार्यक्रम एक अलग पहल है।

 

भारतीय प्रोफेशनल्स पर सबसे ज्यादा असर की आशंका

नई प्रस्तावित फीस का सबसे ज्यादा असर भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ने की आशंका है। इसकी वजह यह है कि H-1B वीजा धारकों में भारतीय नागरिकों की संख्या काफी बड़ी है। H-1B वीजा मुख्य रूप से ऐसे विशेषज्ञ पेशों (Specialty Occupations) के लिए जारी किया जाता है, जिनमें आमतौर पर कम से कम स्नातक डिग्री या उसके समकक्ष योग्यता की आवश्यकता होती है।

 

यह वीजा लंबे समय से अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनियों और IT सर्विसेज कंपनियों के लिए विदेशी कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करने का प्रमुख माध्यम रहा है। हालांकि, आलोचकों का आरोप है कि कुछ कंपनियां H-1B कार्यक्रम का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम लागत वाले विदेशी श्रमिकों तक पहुंच बनाने के लिए करती हैं।

ALSO READ: Weather Forecast: 25 अगस्त को कौनसे राज्यों में होगी बारिश, IMD ने किन राज्यों के लिए जारी की चेतावनी

H-1B वीजा के लिए होता है लॉटरी सिस्टम

 

परंपरागत रूप से जब H-1B वीजा के लिए आवेदन वार्षिक सीमा से अधिक हो जाते थे, तो कैप-सब्जेक्ट वीजा आवेदनों का चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाता था। हालांकि, हाल के वर्षों में H-1B वीजा चयन प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं।

 

Amazon, Infosys और TCS समेत ये कंपनियां बड़ी नियोक्ता

H-1B कार्यक्रम के तहत Amazon लगातार सबसे बड़े नियोक्ताओं में शामिल रही है। इसके अलावा Cognizant, Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Microsoft और Google जैसी कंपनियां भी H-1B वीजा के प्रमुख नियोक्ताओं में शामिल हैं। अमेरिका का California राज्य भी H-1B मंजूरियों के मामले में प्रमुख राज्यों में बना हुआ है। इसकी बड़ी वजह राज्य में टेक्नोलॉजी कंपनियों की भारी मौजूदगी है।

ALSO READ: CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

नए प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलने पर अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे विदेशी कुशल कर्मचारियों और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों की लागत में बड़ा इजाफा हो सकता है। भारतीय IT प्रोफेशनल्स और अमेरिकी टेक कंपनियां इस प्रस्ताव से सबसे ज्यादा प्रभावित पक्षों में शामिल हो सकती हैं।

ईरान की सड़कों पर बदल गई तस्वीर! महिलाएं खुलेआम निकल रहीं बिना हिजाब, सरकार क्यों है परेशान?

Iran Hijab Controversy: ईरान की सड़कों पर हिजाब एक बार फिर सरकार और आम महिलाओं के बीच नए टकराव का केंद्र बनता जा रहा है। देश के रूढ़िवादी नेता महिलाओं को इस्लामिक ड्रेस कोड के दायरे में वापस लाने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं लेकिन शासन के लिए यह फैसला आसान नजर नहीं आ रहा है। अधिकारियों को डर है कि जबरन कार्रवाई करने से देश में एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों की नई लहर खड़ी हो सकती है और इसकी भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

सड़कों पर बदला नजारा और व्यवसायों पर सख्त कार्रवाई

सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की राजधानी तेहरान और दूसरे बड़े शहरों की सड़कों पर महिलाएं अब खुलेआम बिना अनिवार्य हिजाब के घूमती नजर आ रही हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने अब तक सीधे महिलाओं से टकराने के बजाय कैफे और रेस्टोरेंट जैसे व्यवसायों को निशाना बनाया है। ड्रेस कोड का पालन कराने में नाकाम रहने के आरोप में कई कैफे और रेस्टोरेंट को सील कर दिया गया है और दुकानदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। इसके बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर बिना सिर ढके निकलने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

रूढ़िवादी नेताओं का बढ़ता दबाव और सरकार की दुविधा

ईरान में दशकों से हिजाब इस्लामिक गणराज्य के सामाजिक नियमों का एक प्रमुख प्रतीक रहा है और कानूनन महिलाओं के लिए सार्वजनिक रूप से अपने बाल ढकना अनिवार्य है। हालांकि अब रूढ़िवादी राजनेता और धर्मगुरु सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वह ड्रेस कोड के इस खुले उल्लंघन के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करे। उनका तर्क है कि सरकार इस्लामिक मूल्यों के इस तरह क्षरण को चुपचाप नजरअंदाज नहीं कर सकती।

लेकिन तेहरान के लिए बड़े पैमाने पर इस कानून को लागू करना बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती है। ईरानी अधिकारियों को पता है कि हिजाब का मुद्दा सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह सरकार विरोधी जनाक्रोश का रूप ले सकता है।

2022 के प्रदर्शन और महसा अमीनी का मामला भी यादों में है

सड़कों पर फिर से गश्ती पुलिस की तैनाती 2022 के उन जख्मों को हरा कर सकती है जब 22 वर्षीय कुर्द-ईरानी महिला महसा अमीनी की हिरासत में मौत हो गई थी। अमीनी को हिजाब नियम का ठीक से पालन न करने के आरोप में मोरल पुलिस ने हिरासत में लिया था। महसा अमीनी की मौत के बाद पूरे ईरान में ‘महिला, जीवन, स्वतंत्रता’ आंदोलन छिड़ गया था। यह प्रदर्शन दशकों में ईरान के धार्मिक नेतृत्व के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया था जहां महिलाओं ने खुलेआम अपने हिजाब जलाए थे। अधिकारियों ने बाद में इन प्रदर्शनों को दबा दिया था लेकिन जनता के भीतर से अभी इसकी यादें मिटी नहीं हैं।

चार साल बाद आज कई महिलाएं फिर उसी राह पर हैं। तेहरान में युवा महिलाएं बिना सिर ढके स्कूटर चलाती, खरीदारी करती और सार्वजनिक समारोहों में शामिल होती देखी जा सकती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब नियमों को पहले जितना सख्त तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है। इस स्थिति ने सरकार को एक अजीब मोड़ पर खड़ा कर दिया है। अधिकारी किसी कैफे को बंद कर सकते हैं या किसी दुकान पर ताला लगा सकते हैं, लेकिन भारी संख्या में महिलाओं का सीधे सामना करना जोखिम भरा है। सोशल मीडिया के दौर में एक छोटी सी घटना भी तुरंत विरोध का प्रतीक बन सकती है।

क्या बल प्रयोग से बदलेगी सोच?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने भी इस बात पर सवाल उठाया है कि क्या लोगों के व्यवहार और मान्यताओं को बल प्रयोग के जरिए बदला जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया है कि बढ़ती वैचारिक खाई को पाटने के लिए दबाव बनाना एक स्थायी समाधान नहीं हो सकता। इसके उलट रूढ़िवादी गुट देश के इस्लामिक मूल्यों को बहाल करने के लिए कठोर कदम उठाने की मांग पर अड़े हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि एक तरफ महिलाएं अपने पहनावे की आजादी को लेकर आगे बढ़ रही हैं तो दूसरी तरफ सरकार इस सोच में पड़ी है कि बिना किसी नए संकट को जन्म दिए इस स्थिति पर कैसे नियंत्रण पाया जाए।

यह भी पढ़ें: Iran-US War Update: ‘एक बूंद भी तेल नहीं निकलेगा’; होर्मुज में तनाव के बीच ईरान की अमेरिका को सबसे बड़ी धमकी

LT Foods Share Price: 52 हफ्ते के हाई पर पहुंचा शेयर, जानिए क्या है वजह

LT Foods  Share Price: LT Foods के शेयरों में 24 अगस्त को जोरदार तेजी देखने को मिली। शेयर इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान एक साल की ऊंचाई ₹487 पर पहुंच गए। सोमवार को ट्रेडिंग के पहले हिस्से में 32 मिलियन से ज़्यादा शेयरों का लेन-देन हुआ। यह पिछले 10 दिनों के औसत वॉल्यूम से 86 गुना ज़्यादा है।

LT Foods के शेयर की कीमत इंट्रा-डे ट्रेडिंग में 13% बढ़कर ₹482.85 के 52-हफ़्ते के नए हाई पर पहुंच गए। इस स्टॉक ने 19 सितंबर, 2025 को बने अपने पिछले ₹479.80 के हाई को पार कर लिया। NSE और BSE पर कुल मिलाकर 13.14 मिलियन इक्विटी शेयरों का लेन-देन हुआ, जिससे काउंटर पर औसत ट्रेडिंग वॉल्यूम 10 गुना से ज़्यादा बढ़ गया। शेयर आज 7.34 फीसदी की बढत के साथ 459 रुपये पर बंद हुआ।

इस साल स्टॉक में यह दूसरी सबसे बड़ी एक-दिन की बढ़त थी, इससे पहले फरवरी में एक सेशन में इसमें 14% की तेज़ी आई थी। कंपनी के शेयरों में इस साल अब तक 25% से ज़्यादा और पिछले 12 महीनों में 13% से ज़्यादा की बढ़त हुई है।

LT Foods के शेयरों में यह तेजी चावल से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में आई आम बढ़त के बाद देखी गई। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान KRBL और AWL Agri Business जैसी कंपनियों के शेयरों में क्रमशः 6.39% और 1.63% की बढ़त हुई।

शेयरहोल्डिंग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रमोटरों के पास कंपनी के 51% से ज़्यादा शेयर थे, जबकि पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 29.95% शेयर थे। घरेलू संस्थागत निवेशकों के पास 10.84% ​​और विदेशी संस्थागत निवेशकों के पास 8.21% शेयर थे।

जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए LT Foods का रेवेन्यू 11.56% बढ़कर ₹1,172.08 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹1,050.56 करोड़ था। नेट प्रॉफ़िट 89.67% बढ़कर ₹70.16 करोड़ हो गया, जो पहले ₹36.99 करोड़ था। इस महीने की शुरुआत में रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, इसी अवधि में कुल आय 10.77% बढ़कर ₹1,176.11 करोड़ हो गई, जो पहले ₹1,061.73 करोड़ थी।

गुरुग्राम स्थित FMCG कंपनी मुख्य रूप से चावल का कारोबार करती है और अपने उत्पादों को US, UK और वेस्ट एशिया सहित 85 देशों में एक्सपोर्ट करती है। कंपनी अपना मुख्य चावल ब्रांड ‘दावत’ (Daawat) बनाती है और उसने पहले बताया था कि उसके FY25 के रेवेन्यू का 9% हिस्सा वेस्ट एशिया में एक्सपोर्ट से आया था।

वेस्ट एशियन मार्केट में कंपनी की मौजूदगी ने इस साल की शुरुआत में उसके शेयरों पर खास असर डाला था, जब उस क्षेत्र में चावल के एक्सपोर्ट पर मौजूदा जियोपॉलिटिकल तनाव का कुछ समय के लिए असर पड़ा था।

Apollo Tyres Share Price: ब्रोकरेज ने रेटिंग की अपग्रेड, शेयर 5% चढ़ा, दिया 34% अपसाइड का टारगेट

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

iPhone 18 Pro Max में होगा बड़ा अपग्रेड! कीमत से कैमरा-बैटरी तक सब कुछ बदलेगा

Apple के iPhone 18 Pro Max में इस बार कीमत से लेकर कैमरा और बैटरी तक कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। MacRumors की रिपोर्ट के मुताबिक, Apple सितंबर 2026 में इस प्रीमियम फोन को लॉन्च कर सकता है। हालांकि, इसका डिस्प्ले साइज पहले की तरह 6.9 इंच ही रहने की उम्मीद है। वहीं, फोन में Dynamic Island मिलेगा या नहीं, इसे लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है।

कीमत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है

कीमत में बढ़ोतरी सबसे अहम दावों में से एक है। IDC का कहना है कि iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत $1,399 हो सकती है, जो इसी तरह के iPhone 17 Pro Max से $200 ज्यादा है। अन्य अनुमानों के अनुसार, Pro मॉडल की कीमत में $300 तक की बढ़ोतरी हो सकती है, खासकर ज्यादा स्टोरेज क्षमता वाले मॉडल के मामले में।

यह संभावित बढ़ोतरी महंगे कंपोनेंट्स की वजह से हो सकती है, जिनमें मेमोरी और Apple का आने वाला A20-सीरीज प्रोसेसर शामिल है। माना जा रहा है कि यह प्रोसेसर TSMC की 2nm प्रोसेस पर बनाया जाएगा।

फिलहाल, Apple ने अभी तक iPhone 18 Pro Max की कीमत को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। भारत में इसकी कीमत डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत, इंपोर्ट ड्यूटी और स्थानीय टैक्स के हिसाब से अलग हो सकती है।

जाने-पहचाने डिजाइन के साथ, थोड़ा मोटा कैमरा सेक्शन

उम्मीद है कि iPhone 18 Pro Max का डिजाइन काफी हद तक इसके पिछले मॉडल जैसा ही होगा, जिसमें ट्रिपल-कैमरा सेटअप और पीछे की तरफ बड़ा कैमरा मॉड्यूल शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फोन थोड़ा मोटा और भारी हो सकता है, शायद बड़ी बैटरी और वेपर-चेंबर कूलिंग सिस्टम लगाने की वजह से।

कुछ लीक हुए डमी यूनिट्स में भी कैमरा मॉड्यूल पहले से ज्यादा मोटा दिखाई दिया है। Apple शायद इस बार फोन के पीछे दिए गए टू-टोन वाले फिनिश को बदलकर ऐसा ग्लास दे सकता है, जो मेटल फ्रेम से ज्यादा मैच करे। इससे फोन का लुक पहले के मुकाबले ज्यादा एक जैसा और स्मूद नजर आ सकता है।

रंगों की बात करें तो Apple dark cherry या deep red कलर ऑप्शन पर भी टेस्टिंग कर रहा है। इसके अलावा, light blue, dark gray और silver कलर भी मिल सकते हैं।

डिस्प्ले में शायद मामूली बदलाव हों

iPhone 18 Pro Max में 6.9 इंच का डिस्प्ले बरकरार रहने की उम्मीद है। यानी स्क्रीन के साइज में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। हालांकि, Apple इसमें ज्यादा बेहतर और कम पावर इस्तेमाल करने वाली LTPO+ डिस्प्ले टेक्नोलॉजी दे सकता है। कुछ लीक में छोटे Dynamic Island की बात सामने आई है, लेकिन दूसरी रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बदलाव फिलहाल टल भी सकता है।

वहीं, डिस्प्ले के अंदर Face ID सेंसर देने की उम्मीद इस जनरेशन के iPhone से नहीं है। यानी अंडर-डिस्प्ले Face ID के लिए यूजर्स को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

कैमरा और बैटरी पर खास ध्यान

कैमरा से जुड़ी सबसे बड़ी चर्चा वेरिएबल-अपर्चर वाले मेन लेंस की है, जिससे फटोग्राफर्स को एक्सपोजर और बैकग्राउंड ब्लर पर ज्यादा कंट्रोल मिल सकता है। एक रिपोर्ट का दावा है कि यह फीचर सिर्फ Pro Max में हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि Apple ज्यादा चौड़े अपर्चर और स्टैक्ड इमेज सेंसर वाले टेलीफोटो कैमरे की भी टेस्टिंग कर रहा है।

बैटरी की बात करें तो, US मॉडल में बैटरी की क्षमता 5,567mAh तक बढ़ सकती है, जबकि iPhone 17 Pro Max में यह 5,088mAh है। अगर इसे ज्यादा पावर-एफिशिएंट नई चिप के साथ जोड़ा जाता है, तो फोन की बैटरी लाइफ पहले से बेहतर हो सकती है।

हालांकि, अभी ये सभी जानकारियां रिपोर्ट्स और लीक्स पर आधारित हैं। Apple की आधिकारिक घोषणा के बाद ही iPhone 18 Pro Max के फीचर्स और स्पेसिफिकेशन्स की पूरी तस्वीर साफ होगी।

यह भी पढ़ें: आधी से भी कम कीमत में मिल रहा iPhone 17! ऐसे पाएं ₹40,090 में खरीदने का मौका, जानिए पूरा ऑफर