Acme India Industries Listing: SME कंपनी की शानदार शुरुआत, 13% बढ़त में लिस्ट; शेयर में तुरंत लगा अपर सर्किट

SME सेक्टर में एक्मे इंडिया इंडस्ट्रीज की 9 अक्टूबर को शेयर बाजारों में लिस्टिंग शानदार रही। BSE SME पर शेयर लगभग 13 प्रतिशत बढ़त के साथ 221 रुपये पर लिस्ट हुआ। कुछ ही देर में शेयर लिस्टिंग प्राइस से 5 प्रतिशत उछला और 232.05 रुपये पर अपर सर्किट लगा। IPO प्राइस ₹196 प्रति शेयर था। कंपनी का ₹121.69 करोड़ का IPO 124.23 गुना भरकर बंद हुआ था। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 137.93 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 196.27 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 85.50 गुना सब्सक्राइब हुआ।

क्या करती है Acme India Industries

एक्मे इंडिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड भारतीय रेलवे रोलिंग स्टॉक सेक्टर में काम करती है। इसका फोकस रेलवे कोच के इंटीरियर और पुर्जों की डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई, इंस्टॉलेशन और वॉरंटी मेंटेनेंस पर है। कंपनी नए रेलवे कोच के लिए टर्नकी फर्निशिंग सॉल्यूशन; पुराने कोच के रिफर्बिशमेंट, अपग्रेडेशन, कन्वर्जन; और टॉयलेट सुविधाओं के आधुनिकीकरण का काम करती है।

यह कई तरह के प्रोडक्ट बनाती और सप्लाई करती है, जैसे ब्रेल साइनेज, FRP प्रोडक्ट, सैनिटरी वेयर, एपॉक्सी फ्लोरिंग, डेकोरेटिव ग्लास FRP, टॉयलेट और कंपार्टमेंट के दरवाजे, सीटें और बर्थ, फायर बैरियर कोटिंग, हाइजीन से जुड़े प्रोडक्ट आदि। एक्मे इंडिया इंडस्ट्रीज 16 रेलवे जोन में ऑपरेशनल है। कंपनी मुख्य रूप से टेंडर-बेस्ड बिजनेस मॉडल के जरिए काम करती है।

IPO में ₹105.98 करोड़ के 54.07 लाख नए शेयर जारी हुए। साथ ही ₹15.71 करोड़ के 8.02 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल रहा। कंपनी ने इश्यू की ओपनिंग से पहले एंकर इनवेस्टर्स से ₹34.61 करोड़ जुटाए।

Stock Market Gain: बाजार में तेजी लौटी, सेंसेक्स 438 अंक तक उछला, निवेशकों की दौलत ₹66563 करोड़ बढ़ी

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

एक्मे इंडिया इंडस्ट्रीज अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर हासिल हुए पैसों का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए, कर्ज चुकाने के​ लिए, अतिरिक्त प्लांट और मशीनरी की खरीद के लिए, और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Rise: इन 3 वजहों से शेयर बाजार में रौनक! सेंसेक्स 850 अंक उछला, निफ्टी 22500 के पार

Stock Market Rise: गुरुवार के चौतरफा बिकवाली के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने जोरदार बाउंस-बैक किया है। पिछले सत्र में निचले स्तरों पर जाने के बाद ओवरसोल्ड जोन से आई ‘वैल्यू बाइंग’ और आईटी शेयरों में मची तूफानी खरीदारी के दम पर दोनों मुख्य सूचकांक हरे निशान में ट्रेड कर रहे हैं।

सुबह 10:22 बजे, सेंसेक्स 737.26 अंक (1.02%) की मजबूत बढ़त के साथ 72,330.50 और निफ्टी 50 भी 243.20 अंक (1.09%) चढ़कर 22,475.00 के स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, निफ्टी बैंक 610 अंक (1.11%) सुधरकर 55,125.50 पर और मिडकैप 100 इंडेक्स 732 अंक (1.26%) चढ़कर 58,615.30 पर आ गया है। अमेरिकी वायदा बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया है।

Stock Market Live Update: सेंसेक्स 700 अंक चढ़ा, निफ्टी 22,450 पर, TCS, Apollo Hospitals शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी

बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह बदलने की सबसे बड़ी वजह दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के शानदार नतीजे रहे, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स में 3.45% (958 अंक) का उछाल आया। टीसीएस के शेयर में करीब 4% की तेजी ने पूरे बाजार को सहारा दिया।

शेयर बाजार में रौनक लौटने की 3 मुख्य वजहें

1. आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी: दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में 15% मुनाफा बढ़कर ₹13,884 करोड़ रहने और ₹12 प्रति शेयर डिविडेंड के ऐलान से आईटी शेयरों में शानदार तेजी आई है। टीसीएस का शेयर करीब 4% उछला, जिसने पूरे निफ्टी आईटी इंडेक्स को 3.45% मजबूत कर दिया।

2. टेक्निकल बाउंस-बैक: बीते सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी में 1,000 से ज्यादा अंकों की गिरावट के बाद बाजार ओवरसोल्ड जोन में चला गया था। निचले स्तरों पर निवेशकों और संस्थागत खरीदारों की ओर से आई ‘वैल्यू बाइंग’ ने बाजार को सहारा दिया है।

3. वैश्विक बाजारों से मजबूत संकेत: अमेरिकी वायदा बाजारों में 0.5% तक की बढ़त देखी गई, जिसने घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को बूस्ट करने का काम किया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Gain: बाजार में तेजी लौटी, सेंसेक्स 438 अंक तक उछला, निवेशकों की दौलत ₹66563 करोड़ बढ़ी

गुरुवार को भारी बिकवाली के बाद भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को तेजी ने फिर दस्तक दी। सेंसेक्स हरे निशान में खुला और चंद पलों में पिछली क्लोजिंग से 438.43 अंक तक चढ़कर 72,036.03 के हाई तक गया। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 66,563 करोड़ रुपये बढ़ गया। इसी तरह निफ्टी भी बढ़त में खुलने के बाद पिछली क्लोजिंग से 151.65 अंक तक चढ़कर 22,383.45 के हाई तक गया।

गुरुवार को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,62,33,248.126 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट खुलने के कुछ ही देर में यह 4,62,99,811.44 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 66,563.314 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी।

एक दिन पहले कैसी रही थी चाल

गुरुवार, 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही थी। यह काफी तगड़ी थी। सेंसेक्स 1,045.46 अंक या 1.44 प्रतिशत का गोता लगाकर ढाई साल से अधिक के निचले स्तर 71,593.24 पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,310.95 अंक तक लुढ़क गया था। निफ्टी 371.25 अंक या 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 21 महीने के निचले स्तर 22,231.80 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी 423.15 अंक तक लुढ़का था।

कच्चे तेल के दाम में तेजी और घरेलू व वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीति के और सख्त होने की आशंका के चलते ऐसा हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग में रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है।

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रुपये की चाल

शुक्रवार को भारतीय करेंसी रुपये में तेजी है। यह शुरुआती कारोबार में 23 पैसे मजबूत होकर 96.65 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। एक दिन पहले रुपया, अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट के साथ 96.88 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों समेत लगातार बने व्यापक आर्थिक दबाव के कारण रुपये में गिरावट आई।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trading Plan : JM फाइनेंशियल के जय मेहता से जानें, क्या भारी बिकवाली के बाद निफ्टी और बैंक निफ्टी में हो सकती है रिकवरी

Trading Plan : कल के सेशन में सभी सेक्टर में आई गिरावट और जबरदस्त बिकवाली के बाद,मार्केट में रिकवरी की कोशिश हो सकती है। हालांकि,मार्केट को लेकर सतर्क या नेगेटिव नजरिया दिख रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि रिकवरी कितनी देर तक टिक पाती है। निफ्टी को 22,350-22,500 के जोन में पहले और उसके बाद 22600-22800 की रेंज में बड़े रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है। नीचे की तरफ,गुरुवार का निचला स्तर सबसे नजदीकी सपोर्ट का काम कर सकता है। अगर यह स्तर टूटता है तो निफ्टी की गिरावट 22000 की ओर बढ़ सकती है।

बैंक निफ्टी की बात करें तो यह 55,000-55,600 के जोन की ओर वापसी कर सकता है। अगर यह लगातार 55,600 के ऊपर लगातार बना रहता है,तो बुल्स फिर से एक्टिव हो सकते हैं। बाजार जानकारों की राय है कि तब तक इंडेक्स एक दायरे में रह सकता है। इसे गुरुवार के निचले स्तर पर पहला सपोर्ट मिल सकता है और उसके बाद 54,000 और 53,700 पर बड़े सपोर्ट मिल सकते हैं।

निफ्टी आउटलुक और रणनीति

JM फाइनेंशियल सर्विसेज़ में टेक्निकल रिसर्च हेड जय मेहता का कहना है कि 1 अक्टूबर को निफ़्टी को 22,217 के आसपास सपोर्ट मिला। इस हफ्ते की शुरुआत में कुछ सकारात्मक संकेत दिखे थे,लेकिन हाल के सेशन में भारी बिकवाली का दबाव देखा गया और इंट्राडे में 400 से ज्यादा अंकों की गिरावट आई। कुल मिलाकर स्थिति मंदी वाली बनी हुई है। अगस्त सीरीज़ की शुरुआत से ही ‘लोअर लो’ और ‘लोअर हाई’ का ट्रेंड जारी है। निफ्टी ने 22,179 के आसपास नया 52-हफ्ते का निचला स्तर (लो) बनाया है।

निफ्टी अहम मूविंग एवरेज से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है। इंडिया VIX तेजी से (लगभग 10 प्रतिशत) बढ़कर 15.27 पर पहुंच गया। निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 22180–22000 के जोन में है। RSI नए निचले स्तर (lower lows) नहीं बना रहा है,जिससे संकेत मिलता है कि 22000 ±50 पॉइंट्स के आसपास सबसे नजदीकी सपोर्ट मिल सकता है। अगर यह जोन निर्णायक रूप से टूटता है तो गिरावट 21700 और आगे 21560 तक बढ़ सकती है।

ऊपर की तरफ 22,500 पर पहला रेजिस्टेंस है और उसके बाद 22,800 पर एक मज़बूत रेजिस्टेंस है। जब तक ये लेवल नहीं टूटते तब तक मार्केट का रुख मंदी वाला रहेगा।

अहम रेजिस्टेंस: 22,500, 22,800, 23,200

अहम सपोर्ट: 22,180, 22,000, 21,560

रणनीति:जब तक निफ्टी 22,800 के नीचे बना हुआ है,तब तक उछाल पर बेचें। अगर निफ्टी फ्यूचर्स लगातार 22,000 के नीचे बना रहता है तो नई शॉर्ट पोजीशन बनाई जा सकती है,जिसमें 21,700 और 21,560 का लक्ष्य रखा जा सकता है।

बैंक निफ्टी आउटलुक और रणनीति

जय मेहता का कहना है कि Nifty 50 के मुकाबले Bank Nifty ने ज्यादा मजबूती दिखाई है। इसने 29 सितंबर को 53,800 के आसपास एक निचला स्तर बनाया और तब से ज्यादातर एक ही दायरे में बना हुआ है। यहां तक कि 1 अक्टूबर को,जब Nifty में तेज गिरावट आई, तब भी Bank Nifty मजबूती से टिका रहा। हाल के सेशन में जहां निफ्टी ने 52-वीक का नया निचला स्तर छुआ,वहीं बैंक निफ्टी अपने हालिया स्विंग लो से ऊपर बना रहा जो पॉज़िटिव रिलेटिव स्ट्रेंथ दिखाता है। कुल मिलाकर स्थिति अभी भी मंदी वाली (bearish) है,लेकिन जब तक इंडेक्स 53,750 के ऊपर बना रहता है, तब तक और कंसोलिडेशन की संभावना है।

बैंक निफ्टी के लिए 55,700 पर मजबूत रेजिस्टेंस है। अगर यह लगातार 55,700 के ऊपर बना रहता है तो 56,200 और 56,700 तक जाने का रास्ता खुल सकता है। वहीं,अगर यह 53,750 के नीचे जाता है तो इंडेक्स 53,000 तक गिर सकता है।

अहम रेजिस्टेंस: 55,700, 56,200, 56,700

अहम सपोर्ट: 54,120, 53,750, 53,000

स्ट्रेटेजी: बैंक निफ्टी फ्यूचर्स में 53,750 और 55,700 के बीच रेंज ट्रेडिंग। किसी भी तरफ ब्रेकआउट होने पर,उस दिशा में 700–900 पॉइंट की चाल देखने को मिल सकती है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market cues : 22000 के मनोवैज्ञानिक लेवल पर भी मंडरा रहा खतरा, 21700 तक फिसल सकता है निफ्टी

Trade setup for today : 8 अक्टूबर को निफ्टी पर मदड़ियों का दबदबा बना रहा। यह 1.64 प्रतिशत गिरा और लगातार एक और सेशन में इसमें गिरावट जारी रही। मोमेंटम इंडिकेटर ‘बेयरिश’ जोन में बने रहे। जबकि इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी नीचे ट्रेड करता रहा। तेल की ऊंची कीमतें, रुपये में कमजोरी, FII की लगातार बिकवाली और इंडिया VIX का 15 के स्तर से ऊपर जाना भी मार्केट सेंटीमेंट पर भारी पड़ा। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर निफ्टी गुरुवार के 22,180 के निचले स्तर को साफ तौर पर तोड़ता है तो मंदड़िए 22,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को टारगेट कर सकते हैं और उसके बाद निफ्टी अप्रैल 2025 के निचले स्तर 21,700 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ,22,400 एक शुरुआती रेजिस्टेंस बन सकता है और उसके बाद 22,600-22,700 का जोन बड़े रेजिस्टेंस का काम कर सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

निफ्टी 50 (22,232) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस : 22,497, 22,596 और 22,756

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 22,177, 22,078 और 21,918

निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

निफ्टी 50 पिछले 18 महीनों के सबसे निचले क्लोजिंग स्तर पर पहुंच गया और डेली टाइमफ्रेम पर एक लंबी लाल कैंडल बनाई,जो बाजार में भारी गिरावट के दबाव का संकेत है। 10, 20, 50, 100 और 200-दिन के EMA सभी नीचे की ओर झुके हुए थे। RSI सुपर-बेयरिश जोन में बना रहा और 30 से गिरकर 27.55 पर आ गया, जबकि MACD सिग्नल लाइन के नीचे रहा और हिस्टोग्राम में एक बढ़ती हुई लाल पट्टी दिखाई दी। कुल मिलाकर ये संकेत लगातार मंदी के रुझान की ओर इशारा करते हैं और बताते हैं कि इंडेक्स पर निकट भविष्य में दबाव बना रह सकता है।

बैंक निफ्टी (54,515) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 54,899, 55,055 और 55,307

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 54,395, 54,239 और 53,987

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 55,897, 57,285

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 54,053, 52,784

बैंक निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

गुरुवार को 1 प्रतिशत की गिरावट के बाद बैंक निफ्टी पिछले हफ़्ते के क्लोजिंग लेवल के करीब आ गया। बैंकिंग इंडेक्स ने डेली चार्ट पर एक लंबी बेयरिश कैंडल बनाई और सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा,जो लगातार बनी कमजोरी को दिखाता है। RSI गिरकर 40 के ज़ोन से नीचे 36.45 पर आ गया,जबकि MACD जो अपनी सिग्नल लाइन की ओर ऊपर की तरफ बढ़ रहा था,सिग्नल लाइन से नीचे ही बना रहा। हालांकि,MACD हिस्टोग्राम लगातार छठे सेशन में भी मंदी के रुझान (बेयरिश मोमेंटम) में कमी दिखाता रहा। कुल मिलाकर ये इंडिकेटर बताते हैं कि मंदी का दबाव बना हुआ है,भले ही यह दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा हो।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो (करोड़ रुपए में)

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इंडिया VIX

मार्केट में संभावित उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडिया VIX कल 10.01% बढ़कर 15.275 पर पहुंच गया। यह 11 जून, 2026 के बाद इसका सबसे ऊंचा क्लोजिंग लेवल है। यह सभी अहम मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ है, जो बुल्स के बीच बढ़ती बेचैनी का संकेत है। 15 के लेवल से ऊपर बने रहने पर बुल्स पर दबाव बना रह सकता है।

Market Trend : बाजार में और बढ़ सकती है गिरावट, इस डिफेंस स्टॉक में बिकवाली करके बनाए जा सकते हैं पैसे

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 8 अक्टूबर को गिरकर 0.73 पर आ गया, जबकि पिछले सेशन में यह 0.89 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: अंबुजा सीमेंट्स, बंधन बैंक, LIC हाउसिंग फाइनेंस

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: SAIL

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Nifty ने 52 हफ्ते का निचला स्तर तोड़ा, पूरे एशिया के शेयर बाजारों में कोहराम, सिंगापुर में सबसे ज्यादा गिरावट

शेयर बाजारों में गुरुवार यानी 8 अक्टूबर को कोहराम मच गया। भारत सहित एशियाई शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। बाजार का सेंटिमेंट कमजोर था। लेकिन, अचानक इतनी बड़ी गिरावट की उम्मीद किसी ने नहीं की थी। अचानक मंदड़ियों ने बाजार को पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया।

निफ्टी आईटी छोड़ सभी सूचकांक फिसले

Nifty 3:20 बजे 1.71 फीसदी यानी 387 अंक गिरकर 22,216 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.62 फीसदी यानी 1177 अंक गिरकर 71,461 अंक पर था। बैंक निफ्टी में भी 1.04 फीसदी की गिरावट आई। बाजार में गिरावट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि Nifty IT को छोड़ सभी सूचकांक लाल निशान में थे। लेकिन, सबसे ज्यादा गिरावट निफ्टी मेटल इंडेक्स में आई। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी गिरावट दिखी।

एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट 

आज की गिरावट के दायरे में पूरे एशियाई बाजार आ गए। सबसे ज्यादा गिरावट सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज के स्ट्रेट टाइम्स में देखने को मिला। यह 3.49 फीसदी फिसला। दक्षिण कोरिया शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक कोस्पी में 2.62 फीसदी की गिरावट आई। जापान के निक्केई, हांगकांग के हैंगसेंग और चीन के शंघाई कंपोजिट में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। इससे यह संकेत मिलता है कि आज आई गिरावट किसी एक देश के शेयर बाजार तक सीमित नहीं है।

अमेरिकी शेयर बाजारों में 7 अक्टूबर को आई थी गिरावट 

अमेरिकी शेयर बाजारों में 7 अक्टूबर को गिरावट आई थी। इसका असर 8 अक्टूबर को भारत सहित दूसरे एशिया बाजारों पर दिखा। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की पिछली मीटिंग के मिनट्स के आने से पता चलता है कि फेड इस महीने के आखिर में अपनी मीटिंग में इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का फैसला ले सकता है। इस वजह से बुधवार को अमेरिकी बाजार में गिरावट आई। इसके अलावा 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड हाई लेवल पर बनी हुई है।

क्रूड में 4 फीसदी से ज्यादा उछाल ने बाजार पर बढ़ाया दबाव 

क्रूड की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड 4 फीसदी से ज्यादा के उछाल के साथ 104 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गया है। WTI क्रूड में भी 4 फीसदी से ज्यादा तेजी दिखी। इससे यह 91 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया। माना जा रहा है कि इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ेगी। महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ाना शुरू करेंगे। इससे लंबे समय तक इंटरेस्ट रेट हाई लेवल पर बना रह सकता है। इसका असर ग्रोथ पर पड़ सकता है।

Senco Gold Share Price: Q2 बिजनेस अपडेट ने भरा दम, 7% ज्यादा उछला शेयर

Senco Gold Price: डायमंड एंड ज्वैलरी मेकिंग कंपनी सेनको गोल्ड ( Senco Gold) के शेयरों में 8 अक्टूबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। शेयर 7 फीसदी से ज्यादा की छलांग लगाता नजर आया। शेयरों में यह तेजी कंपनी द्वारा दूसरी तिमाही के लिए पेश किए अच्छे अपडेट के बाद आई। इस साल अप्रैल के बाद से स्टॉक में एक दिन की यह सबसे बड़ी बढ़त है।

सेनको गोल्ड ने बताया कि सितंबर तिमाही में उसका रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 31% बढ़ा, जबकि रिटेल डिवीज़न के रेवेन्यू में 29% की बढ़ोतरी हुई। सितंबर तिमाही में Senco की ‘सेम स्टोर सेल्स ग्रोथ’ (SSSG) पिछले साल के मुकाबले 19% बढ़ी, जबकि डायमंड ज्वेलरी की बिक्री की वैल्यू में पिछले साल के मुकाबले 40% की बढ़ोतरी हुई। वॉल्यूम के हिसाब से यह ग्रोथ 7% रही।

Senco Gold ने यह भी बताया कि दूसरी तिमाही में अपना पुराना सोना एक्सचेंज करने वाले ग्राहकों की संख्या में 50% की बढ़ोतरी हुई।

कंपनी ने इस तिमाही में छह नए शोरूम खोले। अब उसके नेटवर्क में कुल 215 स्टोर हो गए हैं।

कंपनी को तीसरी तिमाही में मजबूत सीज़नल डिमांड की उम्मीद है। इसकी वजह शादियों के सीज़न में सोने के प्रति लोगों का लगाव है (जिस पर कीमत का ज़्यादा असर नहीं पड़ता और शादियों के कारण ज्वेलरी की खपत का एक मज़बूत आधार बनता है) और साथ ही त्योहारों का अच्छा कैलेंडर भी है।

कंपनी ने कहा कि ज्वेलरी की खपत का मौका अभी भी मज़बूत बना हुआ है। हालांकि सोने की बढ़ी हुई कीमतों से खरीदने की क्षमता और वर्किंग कैपिटल से जुड़ी चुनौतियां पैदा होती हैं, लेकिन Senco Gold का कहना है कि मज़बूत ब्रांड, सोर्सिंग क्षमता, एक्सचेंज प्रोग्राम और बेहतर इन्वेंट्री मैनेजमेंट वाले ऑर्गनाइज़्ड प्लेयर्स के लिए मार्केट शेयर बढ़ाने का मौका भी मिलता है।

कंपनी ने आगे कहा कि उसका फोकस हल्के वन वाले और 9K कलेक्शन को बढ़ावा देने, इन्वेंट्री टर्न को बेहतर बनाने और इन्वेंट्री डेज़ को कम करने, इन्वेंट्री भरने के अनुशासन और न बिकने वाली इन्वेंट्री को तेज़ी से बेचने पर है।

गुरुवार को Senco Gold के शेयर 7.22% बढ़कर ₹343.7 पर ट्रेड कर रहे हैं। इसके साथ ही, स्टॉक इस साल अब तक 11% की बढ़ोतरी के साथ पॉजिटिव हो गया है।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Fall: 7 वजह, Sensex लाल, Nifty आया 22500 के नीचे, IT Sector की कोशिश फेल

Stock Market Fall: ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता जैसी चुनौतियों से जूझ रहे शेयर मार्केट को रेपो रेट में बढ़ोतरी ने और झटका दिया। इसके आसार पहले से ही थे लेकिन आरबीआई ने महंगाई के अपने आउटलुक को भी बढ़ाया तो इससे मार्केट पर दबाव बढ़ाया। इंट्रा-डे में आज सेंसेक्स 384 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 22500 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का खासा दबाव है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे-आधे फीसदी से अधिक की गिरावट है।

अभी की बात करें तो फिलहाल 09:40 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 339.85 प्वाइंट्स यानी 0.47% की गिरावट के साथ 72298.85 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 113.05 प्वाइंट्स यानी 0.50% की गिरावट के साथ 22,490.00 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 384.47 प्वाइंट्स गिरकर 72,254.23 और निफ्टी भी 127.30 प्वाइंट्स टूटकर 22,475.75 तक आ गया था।

Stock Market Fall: ये है वजह

बॉन्ड यील्ड में उछाल

लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड में फिर से बढ़ोतरी शुरू होने से महंगाई और बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं। इसने पूरे एशियाई मार्केट में दबाव बना दिया, जिसकी आंच घरेलू स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई।

कच्चे तेल में उबाल

खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर बढ़ते हमलों ने पश्चिमी एशिया से सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। इस चिंता के बीच ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $102 के पार पहुंचा तो इसकी आंच में मार्केट झुलस गया।

विदेशी निवेशकों की लगातार नवें दिन बिकवाली

FIIs ने लगातार नवें कारोबारी दिन बुधवार 8 अक्टूबर को ₹6,121.37 करोड़ के नेट शेयर बेचे। इससे बाजार में दबाव बना हुआ है।

Sensex की एक्सपायरी

आज सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स यानी F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) की वीकली एक्सपायरी है, जिसका असर मार्केट पर दिख रहा है।

Repo Rate में बढ़ोतरी पर मेटल-रियल्टी सेक्टर में दबाव

आरबीआई ने रेपो रेट में लंबे समय बाद फिर से बढ़ोतरी की और इसे 5.25% से बढ़ाकर 5.50% किया तो लगातार दूसरे दिन इसकी आंच ऑटो, मेटल और रियल्टी सेक्टर में महसूस हुई। मेटल और रियल्टी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स तो 1-1% से अधिक टूट गए तो निफ्टी ऑटो आधे फीसदी से अधिक कमजोर हुआ है। बैंकिंग और फार्मा सेक्टर में भी बिकवाली का दबाव है। वहीं निफ्टी आईटी में 1% से अधिक बढ़त है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

आरबीआई ने ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया है तो महंगाई के भी अनुमान को बढ़ा दिया, जिससे मार्केट पर दबाव बढ़ा। महंगाई को लेकर आरबीआई ने कमजोर मॉनसून, अल-नीनो की स्थिति और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले सप्लाई-साइड रिस्क की तरफ इशारा किया। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई यानी CPI के अनुमान को 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया। दूसरी तिमाही के अनुमान को 4.7% से बढ़ाकर 4.9%, तीसरी तिमाही के लिए 5.9% से 6% और चौथी तिमाही के लिए 5.5% से 5.7% कर दिया। वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी अनुमान 5.3% से बढ़ाकर 5.6% कर दिया गया है।

टेक्निकल आउटलुक

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि रेपो रेट में बढ़ोतरी और महंगाई बढ़ने की आशंकाओं ने मार्केट पर दबाव बनाया है। उनका कहना है कि जब FII का निवेश स्थिर नहीं हो जाता या US ट्रेजरी यील्ड कम नहीं हो जाती,तब तक घरेलू इक्विटी में और बिकवाली का जोखिम बना रह सकता है। पोनमुडी के मुताबिक निफ्टी के लिए 22,750-22,800 का लेवल तत्काल रेजिस्टेंस जोन है। अगर निफ्टी लगातार 22,800 के ऊपर बना रहता है तो ही यह 23,000 की तरफ रिकवरी में मदद कर सकता है। नीचे की तरफ 22,500 तत्काल सपोर्ट लेवल है। अगर यह लेवल टूटता है तो इंडेक्स 22,400-22,200 तक जा सकता है। जब तक निफ्टी 22,800 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक शॉर्ट-टर्म टेक्निकल आउटलुक में सावधानी बरतने की जरूरत है।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

RBI MPC: तेजी से बढ़ रही ग्रोथ, आरबीआई की सख्ती, शेयर दबाव में, अब आगे क्या?

केंद्रीय बैंक आरबीआई (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की और इसे 5.5% कर दिया। मार्केट को इसने हैरान नहीं किया, क्योंकि इसकी उम्मीद पहले से ही थी। हालांकि कुछ और बातें ऐसी रही, जिसने मार्केट का ध्यान अपनी तरफ खींचा। आरबीआई ने ग्रोथ का अनुमान तेजी से बढ़ाया तो दूसरी तरफ महंगाई का भी अनुमान बढ़ाया है और साथ ही अपना रुख न्यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया है। आरबीआई ने इस वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया तो महंगाई का अनुमान भी 5% से बढ़ाकर 5.2% किया।

मार्केट में मिला-जुला रुझान

आरबीआई के रुझान से मार्केट को मिला-जुला संकेत मिला। जीडीपी अपग्रेड निश्चित रूप से कंपनियों की कमाई के लिए अच्छी बात है लेकिन महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी और मौद्रिक नीतियों की सख्ती से यह संकेत मिला कि दरों में आगे भी बढ़ोतरी की संभावना है। आरबीआई गवर्नर ने भी ऐसे संकेत दिए हैं।

वैसे मार्केट पहले से ही कमजोर है। पिछले महीने सितंबर में निफ्टी 6.1% गिरकर 22,620 तक आ गया था, जोकि मार्च के बाद इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी तो सेंसेक्स 5.8% गिरकर 72,480 पर आ गया। साथ ही अक्टूबर में एंट्री करते ही इसने लगातार आठ हफ्तों की लगातार गिरावट दिखाई, जो 25 वर्षों में इसकी सबसे लंबी गिरावट रही। आरबीआई के 5 अगस्त के पॉलिसी पॉज के बाद इंडेक्स लगभग 7.5% गिर चुका है।

अब आगे क्या

आरबीआई ने अपने आउटलुक से यह संकेत दिया है कि इसका फोकस फिलहाल इनफ्लेशन पर है। वैसे भी जून 2026 तिमाही में भारतीय इकॉनमी 7.8% की रफ्तार से बढ़ी थी जोकि आरबीआई के पहले के अनुमान 7% से अधिक रही। अब आरबीआई ने पूरे वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 7.1% कर दिया। इसका मतलब है कि कंपनियों की मांग और रेवेन्यू की ग्रोथ मजबूत रह सकती है।

अब सबसे बड़ी परीक्षा सितंबर तिमाही के नतीजे को लेकर है। निफ्टी 50 की कंपनियों से रेवेन्यू और मुनाफे में सालाना करीब 20% के ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि तेल और कच्चे माल की लागत में उछाल से रेवेन्यू में बढ़ोतरी का पूरा फायदा प्रॉफिट में नहीं बदल सकता है और कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि ऑपरेटिंग मार्जिन में सालाना आधार पर सितंबर तिमाही में 100-150 बीपीएस की गिरावट आ सकती है।

ऐसे में असली सवाल ये रहेगा कि कंपनियां बढ़ती लागत को कितना सोख सकती है और ईबीआईटीडीए मार्जिन कितना बचा सकती हैं। सितंबर तिमाही के कारोबारी नतीजे पर तो मार्केट की नजर रहेगी ही लेकिन इसके अलावा आगे यह भी देखना होगा कि मैनेजमेंट की कमेंट्री क्या रहती है, क्या कंपनियों के पास प्राइसिंग पावर है, और वित्त वर्ष 2027 में डिमांड कैसी रहती है।

फिलहाल तो इस समय सबसे बड़ा रिस्क कच्चा तेल भी है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $101 के पार चला गया क्योंकि इससे इनफ्लेशन, करंट अकाउंट, रुपये और कॉरपोरेट मार्जिन- चारों पर दबाव पड़ता है। दूसरी तरफ अमेरिका और भारत में बॉल्ड यील्ड ऊंची है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय मार्केट में निवेश का क्रेज फीका पड़ सकता है। अमेरिका में 10-साल का ट्रेजरी यील्ड उछलकर करीब 5.3% और भारत में 10-साल का गवर्नमेंट बॉन्ड यील्ड 7.2% पर पहुंच गया। इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। DIIs की खरीदारी और एसआईपी फ्लो ने एक जरूरी सहारा दिया है, लेकिन यूएस यील्ड में बढ़ोतरी, कमजोर रुपए और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से विदेशी पैसे की तेजी से वापसी मुश्किल हो गई है।

कंक्लूजन

बाजार का समीकरण बदल चुका है। 7.1% GDP ग्रोथ से कमाई का निचला स्तर तय होता है तो महंगाई की 5.2% की रफ्तार और 5.5% रेपो रेट से वैल्यूएशन रीरेटिंग की ऊपरी सीमा तय होती है। सितंबर में निफ्टी पहले ही लगभग 6% और अगस्त की पॉलिसी के बाद से लगभग 8% गिर चुका है, इसलिए अगला दौर इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या कंपनी की कमाई उम्मीदों से बेहतर हो सकती है। फिलहाल आरबीआई ने सस्ते कर्ज की संभावना खत्म कर दी है तो इक्विटी को बड़े बदलाव की जरूरत है। खास बात ये है कि भारत का ग्रोथ इंजन बना हुआ है लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कई वर्षों के हाई लेवल के करीब ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और मार्जिन पर दबाव से कंपनियों की मजबूत कमाई के बावजूद शेयरों का जोश फीका हो सकता है।

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RBI ने 25 बीपीएस बढ़ाया रेपो रेट

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।