ऋषभ पंत का एक पोस्ट और सोशल मीडिया पर मचा बवाल! लोगों ने दिया मजेदार रिएक्शन

भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत का उत्तराखंड में जमीन खरीदने को लेकर किया गया सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गया। भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत उत्तराखंड में अपना घर बनाने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जमीन तलाशने में मदद मांगी है। ऋषभ पंत ने सोशल मीडिया पर बताया कि वह दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट होना चाहते हैं और काफी समय से वहां जमीन खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में मदद करने और सही प्रक्रिया बताने की अपील की है।

वहीं पंत का ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कुछ लोग इस पोस्ट पर तरह-तरह से कमेंट कर रहे हैं। वहीं कुछ का कहना है कि पंत का अकाउंट किसी ने हैक कर लिया है।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

ऋषभ पंत ने अपनी इच्छा जाहिर की है कि वह उत्तराखंड में रहकर अपने राज्य के विकास में योगदान देना चाहते हैं। उन्होंने सीएम पुष्कर सिंह धामी से घर बनाने के लिए सही जमीन तलाशने में मदद मांगी है। पंत ने कहा कि उत्तराखंड से उनका खास जुड़ाव है और वह अपनी जन्मभूमि के लिए कुछ करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर राज्य सरकार उन्हें जमीन गिफ्ट में देती है तो उन्हें खुशी होगी, लेकिन वह सरकार की तय कीमत पर जमीन खरीदने के लिए भी तैयार हैं। पंत ने बताया कि, उन्हें जमीन खरीदने की प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए वह मुख्यमंत्री से इस मामले में मदद और सही जानकारी चाहते हैं।

लोगों ने किया कमेंट

पंत की इस अपील के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग रिएक्शन देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि, अच्छी कमाई करने वाले एक इंटरनेशनल क्रिकेटर को जमीन गिफ्ट में लेने की बात क्यों करनी चाहिए।

एक यूजर ने पंत की आईपीएल से होने वाली कमाई का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की मांग से लोगों के बीच गलत संदेश जा सकता है। यूजर ने ये भी कहा कि जब आम लोग ऐसे ही फायदे मांगते हैं तो अक्सर उनकी बुराई की जाती है।

पोस्ट पर लोगों ने किया कमेंट

कुछ यूजर्स ने कहा कि, “भारत में जमीन खरीदने और घर बनाने में पेपरवर्क, देरी और दूसरी दिक्कतें आ सकती हैं। उन्हें लगा कि अगर कोई हाई-प्रोफाइल क्रिकेटर प्रोसेस को समझने में स्ट्रगल कर रहा है, तो आम लोगों के लिए यह अनुभव और भी मुश्किल हो सकता है।” पंत के पोस्ट की टाइमिंग भी चर्चा का विषय बन गई। एक यूजर ने मजाक करते हुए कहा कि, जब पंत श्रीलंका में थे और भारत को वहां टेस्ट सीरीज खेलनी है, उसी दौरान उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से जमीन को लेकर मदद मांगी।

Rishabh Pant: ऋषभ पंत के जमीन ना खरीद पाने के पोस्ट पर सीएम धामी ने दिया रिएक्शन, कही ये बात

भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए उत्तराखंड में जमीन खरीदने को लेकर अपनी परेशानी बताई थी। उन्होंने कहा था कि जमीन खरीदने की कोशिश उनके लिए किसी बुरे सपने जैसी हो गई है। वहीं पंत की इस पोस्ट के कुछ घंटों बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके पोस्ट पर अपना रिएक्शन दिया है। धामी ने कहा कि अपनी जन्मभूमि से जुड़ने और वहां लौटने की पंत की इच्छा सराहनीय है। मुख्यमंत्री ने ये भी भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनकी इस इच्छा को पूरा करने में हर संभव मदद और सहयोग करेगी। ऋषभ पंत इस समय भारतीय टीम के साथ श्रीलंका में हैं, जहां टीम को 15 अगस्त से दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है।

धामी ने क्या कहा

देर रात X पर किए गए एक पोस्ट में ऋषभ पंत ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग कर जमीन खरीदने में मदद की अपील की। पंत ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें उत्तराखंड को बढ़ावा देने के लिए जमीन देने का वादा भी किया गया था। धामी ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया पर लिखा, “प्रिय ऋषभ, आप उत्तराखंड का गौरव हैं। अपने शानदार खेल और उपलब्धियों के जरिए आपने देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में देवभूमि का नाम रोशन किया है। अपनी मातृभूमि के प्रति आपका प्रेम और वापस आकर राज्य के विकास में योगदान देने की आपकी इच्छा वाकई सराहनीय है।”

सीएम ने कहा जल्द करेंगें संपर्क

उन्होंने आगे कहा, “आपने जो मामला उठाया है, उसे लेकर संबंधित अधिकारियों को जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं। अधिकारी जल्द ही आपसे संपर्क करेंगे और नियमों व तय प्रक्रियाओं के तहत आपको हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।” उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाले भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत घरेलू क्रिकेट में दिल्ली की टीम का प्रतिनिधित्व करते हैं।अपने सोशल मीडिया पोस्ट में 28 वर्षीय ऋषभ पंत ने बताया कि वह दिल्ली छोड़कर उत्तराखंड में बसने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह वहां अपना घर बनाना चाहते हैं, लेकिन जमीन खरीदने में उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट होना चाहता हूं

अपने पोस्ट में पंत ने लिखा, “सीएम पुष्कर सिंह धामी हेलो सर, आप कैसे हैं??? मुझे बहुत समय हो गया है, खासकर उत्तराखंड का लोकल होने के नाते। मैं दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट होने के लिए जमीन खरीदने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन यहां रहने के लिए कुछ आसान और बड़ा नहीं मिल पाया है। मुझे अपना उत्तराखंड बहुत पसंद है। मेरी आपसे विनम्र रिक्वेस्ट है कि प्लीज जमीन खरीदने में मेरी मदद करें, क्योंकि आजकल यह क्लैरिटी के साथ एक बुरे सपने जैसा बन गया है। मुझे एक और जमीन भी मिली थी, जो मुझे तब मिली थी जब मैं सब कुछ अंदर रखने से पहले राज्य का प्रचार कर रहा था।”

 

पंत ने लिखा, “मैं उत्तराखंड के आसपास मदद करने और इसे बनाने के लिए अपने मूल स्थान पर वापस जाना चाहता हूं और अपने पहाड़ी लोगों के पास लौटना चाहता हूं। प्लीज इस मामले को देखें। 3 साल हो गए हैं, आपके जवाब का इंतजार कर रहा हूं, लेकिन अभी तक कोई जमीन नहीं मिली है।”

एक अन्य पोस्ट में पंत ने कहा कि वह सरकार से जमीन खरीदना चाहते हैं, जिस पर वह उत्तराखंड में अपना पहला घर बना सकें। पंत ने लिखा, “इंटरनेशनल लेवल पर सबसे ऊंचे स्तर पर अपने राज्य को रिप्रेजेंट करने के लिए गिफ्ट मिलना बहुत अच्छा रहेगा, लेकिन अगर आप इजाजत दें तो मैं इसे सरकार से खरीदना चाहता हूं। सरकार के तय रेट पर जमीन लेकर कम से कम मैं अपने राज्य में अपना पहला घर बना सकूं। कृपया हमारे राज्य में मेरी मदद करें। सच में, मुझे नहीं पता था कि यह प्रक्रिया कैसे करनी है।”

Kiara Advani: बोल्ड सीन्स विवाद के बाद पहली बार प्रमोशन में दिखेंगी कियारा आडवाणी, ‘टॉक्सिक’ ट्रेलर इवेंट में होंगी शामिल

Kiara Advani: कियारा आडवाणी ने शनिवार सुबह अपनी आने वाली फ़िल्म ‘Toxic: A Fairy Tale For Grown-Ups’ के हाल ही में रिलीज़ हुए गाने ‘तबाही’ को लेकर चल रही चर्चा के बीच पहली बार लोगों के सामने उपस्थिति दर्ज कराई। एक्ट्रेस को बेंगलुरु पहुंचते समय पैपराज़ी ने देखा, जहां आज बाद में उनकी फ़िल्म का ट्रेलर रिलीज़ किया जाएगा।

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में, कियारा एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय ऑल-डेनिम लुक में बेहद खूबसूरत लग रही थीं। उन्हें फ़ैन्स के साथ सेल्फ़ी लेते और पैपराज़ी के लिए पोज़ देते हुए भी देखा गया। कियारा के साथ फ़िल्म की डायरेक्टर गीतू मोहनदास भी मौजूद थीं।

‘तबाही’ के रिलीज़ से छिड़ी बहस

‘टॉक्सिक’ फ़िल्म के गाने ‘तबाही’ के रिलीज़ होने के बाद, कियारा आडवाणी को यश के साथ अपने इंटीमेट सीन्स को लेकर सोशल मीडिया यूज़र्स के एक वर्ग की आलोचना का सामना करना पड़ा। धीरे-धीरे बातचीत सिर्फ़ गाने से आगे बढ़कर कियारा की पर्सनल लाइफ़ तक पहुंच गई। ट्रोल करने वालों ने उनके पति सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​की सोशल मीडिया पोस्ट पर भी कमेंट करना शुरू कर दिया और फ़िल्म को उनकी शादी से जोड़ने लगे।

वहीं, यश, जो खुद भी शादीशुदा हैं, की तुलनात्मक रूप से कम आलोचना हुई। इससे ऑनलाइन यह बहस छिड़ गई कि क्या ऑन-स्क्रीन एक जैसी परफ़ॉर्मेंस के लिए महिला एक्टर्स को पुरुष एक्टर्स की तुलना में ज़्यादा सख़्ती से आंका जाता है।

हालांकि, इस चर्चा के बीच, हुमा कुरैशी – जो खुद भी ‘टॉक्सिक’ का हिस्सा हैं – ने हाल ही में कियारा का बचाव किया और कहा, “यह बहुत बुरा है। यह वाकई घिनौना है। लेकिन मुझे लगता है कि इस फ़िल्म में शामिल महिलाएं – यानी एक्ट्रेस और डायरेक्टर – ही अंत में बाज़ी मारेंगी। किसी चीज़ का बचाव करने की कोशिश करने का कोई फ़ायदा नहीं है, क्योंकि आप बातों से लोगों की सोच नहीं बदल सकते। मैं बस फ़िल्म को ही अपनी बात कहने दूंगी।”

कियारा, यश और हुमा के अलावा, ‘टॉक्सिक’ में नयनतारा, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत भी हैं। यह फ़िल्म 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है।

‘3 साल हो गए, जमीन नहीं मिली…’, आधी रात को ऋषभ पंत ने CM धामी से लगाई खास गुहार

Rishabh Pant: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हालांकि, इस बार वजह उनकी बल्लेबाजी या फिर शानदार प्रदर्शन नहीं बल्कि शुक्रवार आधी रात को किया गया उनका सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सिधे जमीन खरीदने की गुहार लगा दी। जिसके बाद उनका पोस्ट तुरंत वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगी।

पंत, जो अभी दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम के साथ श्रीलंका में हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट में धामी को टैग करते हुए यह अनुरोध किया। 28 वर्षीय पंत ने कहा कि वे पिछले तीन सालों से उत्तराखंड में उपयुक्त जमीन खोजने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें ऐसी कोई प्रॉपर्टी नहीं मिल पाई जो उनकी जरूरतों को पूरा कर सके।

इससे भी अहम बात यह है कि पंत ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सालों तक भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद वे अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं और राज्य में रहकर उसके विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए लिखा, “नमस्ते सर, आप कैसे हैं? उत्तराखंड का स्थानीय होने के नाते, मुझे यहां आए हुए काफी समय हो गया है। मैं दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट होने के लिए जमीन खरीदने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन मुझे यहां रहने के लिए कोई अच्छी और बड़ी जगह नहीं मिल पा रही है। मुझे अपना उत्तराखंड बहुत पसंद है। मेरी आपसे विनम्र विनती है कि जमीन लेने में मेरी मदद करें, क्योंकि आजकल साफ-सुथरी जमीन मिलना बहुत मुश्किल हो गया है। एक जमीन तो मुझे तब मिलनी चाहिए थी जब मैं राज्य का प्रचार-प्रसार कर रहा था, लेकिन अब मैं सब कुछ छोड़कर अपने मूल स्थान पर वापस आकर उत्तराखंड के विकास में योगदान देना चाहता हूं और अपने पहाड़ी लोगों के बीच रहना चाहता हूं। कृपया इस मामले पर ध्यान दें। 3 साल हो गए हैं और मुझे अभी तक कोई जमीन नहीं मिली है। आपके जवाब का इंतजार है, सर।”

X पर पोस्ट करने के बाद पंत ने साफ किया कि वह जमीन मुफ्त में नहीं मांग रहे थे, बल्कि सरकार से तय दरों पर उसे खरीदना चाहते थे।

पंत ने आगे लिखा, “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए यह एक शानदार तोहफा होगा, लेकिन अगर आप मुझे इजाजत दें तो मैं इसे सरकार से उनकी तय दरों पर खरीदना चाहूंगा, ताकि कम से कम मैं अपने राज्य में अपना पहला घर बना सकूं। कृपया इसमें मदद करें। सच कहूं तो मुझे नहीं पता था कि इसके लिए क्या करना होगा।”

पंत की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और उनकी इस अनोखी अपील ने लोगों का खासा ध्यान खींचा।

पंत अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं

बता दें कि पंत का जन्म उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के रुड़की में हुआ था और उन्होंने वहीं से अपने क्रिकेट सफर की शुरुआत की थी, जिसके बाद वे प्रोफेशनल तौर पर क्रिकेट खेलने के लिए दिल्ली चले गए। आगे चलकर उन्होंने सभी फॉर्मेट में भारत के बेहतरीन विकेटकीपर-बल्लेबाज़ों में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई।

हालांकि, पंत घरेलू क्रिकेट में दिल्ली का प्रतिनिधित्व करते रहते हैं, लेकिन उत्तराखंड के साथ उनका जुड़ाव हमेशा मजबूत रहा है। उनकी हालिया पोस्ट से पता चलता है कि वे भविष्य में इस राज्य को अपना घर बनाना चाहते हैं और इसके विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उनकी यह अपील ऐसे समय में आई है जब पंत 2025-26 फाइनेंशियल ईयर के लिए उत्तराखंड में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स देने वाले व्यक्ति बन गए हैं। खबरों के अनुसार, उन्होंने 23.84 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स भरा है।

इन आंकड़ों की घोषणा उत्तराखंड के इनकम टैक्स चीफ कमिश्नर ने 24 जुलाई को इनकम टैक्स डे के मौके पर एक कार्यक्रम में की थी। बता दें कि पंत लगातार दूसरे साल राज्य में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स देने वाले व्यक्तियों की लिस्ट में सबसे ऊपर रहे।

ABP Live की रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, पंत का टैक्स योगदान पिछले फाइनेंशियल ईयर की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। पिछले साल उन्होंने लगभग 10.5 करोड़ रुपये का एडवांस टैक्स भरा था।

27 करोड़ रुपये की IPL डील से लेकर बड़े-बड़े एंडोर्समेंट तक

पंत का भारी-भरकम टैक्स पेमेंट कई सोर्स से हुई उनकी कमाई को दिखाता है, जिसमें BCCI कॉन्ट्रैक्ट, IPL सैलरी, मैच फीस और एंडोर्समेंट डील शामिल हैं।

बता दें कि पंत को लखनऊ सुपर जायंट्स ने 27 करोड़ रुपये में खरीदा था, जिससे वह लीग के सबसे महंगे खिलाड़ियों में से एक बन गए। हालांकि, जिस अवधि की बात की जा रही है, उस दौरान पंत BCCI के Grade A कॉन्ट्रैक्ट में भी थे और उन्हें सालाना 5 करोड़ रुपये रिटेनरशिप के तौर पर मिलते थे। लेकिन, बाद में उन्हें Grade B में कर दिया गया, जिसके बाद उनकी सालाना रिटेनरशिप घटकर 3 करोड़ रुपये हो गई।

उनकी कमर्शियल कमाई भी उनकी इनकम में काफी योगदान देती है। पंत के एंडोर्समेंट एसोसिएशन Adidas, Dream11, SG, Thums Up, Cadbury, boAt, Noise, Zomato, JSW Cement और MakeMyTrip के साथ हैं।

धामी ने दिया आश्वासन

इस पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने पंत को आश्वासन दिया है कि मामले में संबंधित लोगों को निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने पंत को एक्स पर जवाब देते हुए लिखा, “प्रिय ऋषभ, आप उत्तराखंड के गौरव हैं। आपने अपने शानदार खेल और उपलब्धियों से देश-दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। अपनी मातृभूमि के प्रति आपका यह प्रेम और यहां वापस आकर योगदान देने की भावना अत्यंत सराहनीय है। आपके द्वारा उठाए गए विषय के संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है। वे शीघ्र ही आपसे संपर्क कर नियमानुसार हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करेंगे।”

Meta CEO Mark Zuckerberg ने भारत से मांगी माफी, 5-6 घंटे तक Facebook से हटाया गया था PM Modi का वीडियो

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Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSEAM) और Deepfake Content की उपलब्धता को लेकर माफी मांगी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, Zuckerberg ने Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों की मंत्रालय के साथ हुई बैठक के दौरान इस मामले पर खेद जताया।  Meta, Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी है।

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हटाया था PM Modi का वीडियो

Zuckerberg की यह माफी ऐसे समय में सामने आई है जब इससे पहले बुधवार को एक संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Facebook वीडियो को हटाए जाने के मामले में Meta प्रमुख को तीन दिन के भीतर माफी मांगने को कहा था। प्रधानमंत्री मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो कुछ समय के लिए Facebook से हटाए जाने पर समिति ने गंभीर नाराजगी जताई थी।

समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो Meta को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी Safe Harbour protection वापस लेने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित मामलों में अभियोजन और FIR दर्ज होने का रास्ता खुल सकता है।

लोकसभा सचिवालय की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो Facebook से करीब 5-6 घंटे तक हटाया जाना समिति ने गंभीरता से लिया था। यह वीडियो परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री के संदेश से संबंधित था। समिति ने इस घटना को लेकर Meta से स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग की थी।

मेटा की टीम को सरकार ने बुलाया था 

सरकार पीएम मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाने से भी नाराज थी। मोदी ने 23 जुलाई को यह वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने पेपर लीक को बड़ी समस्या बताया था। उन्होंने ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की भी बात कही थी। आईटी मंत्रालय और मेटा के अधिकारियों के बीच 2 दिन की बैठक चल रही है। सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को दिल्ली बुलाया है। 5 अगस्त को बैठक का पहला दिन था।

मार्क जुकरबर्ग को दिया गया था 3 दिन का समय 

समिति की ओर से कहा गया था कि मेटा  प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को मामले में माफी मांगनी चाहिए। अगर निर्धारित समय में माफी नहीं आती है, तो समिति भारत में उपलब्ध कानूनी संरक्षण को वापस लेने की दिशा में कदम उठाने पर विचार कर सकती है। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Safe Harbour protection इंटरनेट प्लेटफॉर्म को यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कुछ कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, बशर्ते वे लागू नियमों और कानूनी दायित्वों का पालन करें।

क्यों महत्वपूर्ण हुआ मामला

प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट को हटाए जाने की घटना ने भारत में Big Tech platforms, content moderation और social media accountability को लेकर बहस को तेज कर दिया था।  Meta की ओर से पहले इस वीडियो को गलती से हटाए जाने की बात सामने आई थी और वीडियो बाद में बहाल कर दिया गया था।

 

Zuckerberg ने अधिकारियों के जरिए भेजी माफी

 

MeitY के सूत्रों के अनुसार, Mark Zuckerberg ने प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों को लेकर शीर्ष अधिकारियों के माध्यम से अपनी माफी पहुंचाई। सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान Meta ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ खास तरह के कंटेंट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए बड़ी रकम का भुगतान किया गया था। सूत्र के मुताबिक, Meta ने गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और इस पर अफसोस जताया। हालांकि, मंत्रालय की ओर से इस संबंध में अभी सार्वजनिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

CSEAM और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पर भी सख्ती

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उन intermediary platforms के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जहां CSEAM और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक सामग्री उपलब्ध होने का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक, समिति की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जो प्लेटफॉर्म खुद तय करते हैं कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाएगा, उन्हें केवल intermediary की सामान्य परिभाषा के तहत सुरक्षा नहीं दी जा सकती। समिति ने कथित तौर पर कहा कि ऐसे मामलों में IT Act के तहत Safe Harbour protection लागू नहीं होगा।

Google India को लेकर भी समिति ने मांगी कार्रवाई

संसदीय समिति ने Google India से जुड़े एक कथित साइबर फ्रॉड मामले का भी उल्लेख किया है। समिति के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि फर्जी ऐप्स के माध्यम से निवेश करने पर उन्हें 48 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। पत्र में कहा गया कि Hyderabad Cyber Police की कार्रवाई में Google India के प्रमुख को कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामले में सह-आरोपी के तौर पर शामिल किए जाने की बात सामने आई है। समिति ने इस मामले में भी भारत सरकार से Google India के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई करने की इच्छा जताई है।

दतिया भाजपा पर एक्शन के बाद नरोत्तम मिश्रा से आशुतोष तिवारी की मुलाकात, बोले नरोत्तम, सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा भ्रम

भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद दतिया भाजपा की जिला कार्यकारिणी को भंग करने के बाद जहां एक और प्रदेश की सियासत में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है, वहीं दूसरी ओर बुधवार को दतिया से भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने भोपाल में नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात की।
खुद नरोत्तम मिश्रा ने सोशल मीडिया पर आशुतोष तिवारी के साथ फोटो पोस्ट करते हुए एक लंबी पोस्ट लिखी।

दतिया विधानसभा चुनाव में हार के बाद नरोत्तम मिश्रा ने पहली बार रिएक्शन देते हुए सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा कि दतिया उपचुनाव के बाद सोशल मीडिया पर मेरे और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को लेकर जो भ्रामक और असत्य बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। आशुतोष तिवारी मेरे अनुज हैं। उनके प्रति मेरे मन में हमेशा स्नेह और आत्मीयता रही है, और आगे भी रहेगी। हमारे बीच न कभी कोई कटुता थी, न आज है। आज भी हमारी मुलाकात हमेशा की तरह उसी गर्मजोशी और अपनत्व के साथ हुई।

आशुतोष भारतीय जनता पार्टी के एक कर्मठ, समर्पित और मेहनती कार्यकर्ता हैं। मेरे चुनाव 2003 डबरा से मैने उन्हें एक ईमानदार कार्यकर्ता के रूप में ही देखा है। मैंने वर्षों से उनकी कार्यशैली को करीब से देखा है। मुझे पूरा विश्वास है कि वे संगठन और जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे। आशुतोष ने भी परिणाम के पश्चात किसी का नाम लेकर नाराज़गी नहीं जताई यह भी सभी कार्यकर्ताओं के प्रति उनके मन में सम्मान के भाव का प्रकटीकरण है !

मैं अपने सभी समर्थकों और कार्यकर्ताओं से आग्रह करता हूँ कि वे ऐसा कोई कार्य, टिप्पणी या व्यवहार न करें जिससे पार्टी, संगठन या आशुतोष को किसी प्रकार का नुकसान पहुँचे। हमारी ताकत हमारी एकजुटता, अनुशासन और संस्कार हैं। आशुतोष तिवारी जी और मेरे बीच 25 वर्षों का पारिवारिक रिश्ता है। वह सदैव मेरे अनुज है, उनके लिए मैं अभिभावक हमारा और उनका यह रिश्ता सदैव ऐसे ही बना रहेगा।राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन परिवार, संस्कार और रिश्ते हमेशा स्थायी रहते हैं !

AI की मदद से भरा ITR, फिर आया इनकम टैक्स नोटिस! CA की पोस्ट ने मचाई हलचल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की सोशल मीडिया पोस्ट ने नई चर्चा शुरू कर दी है। पोस्ट में दावा किया गया कि एक व्यक्ति ने AI की मदद से अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल किया, लेकिन बाद में उसे इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस मिल गया।

X यूजर और चार्टर्ड अकाउंटेंट बताए जा रहे @carajendra89 ने इस मामले को शेयर करते हुए लिखा, “AI से ITR फाइल करने के नतीजे आने शुरू हो गए हैं।” हालांकि, इस बातचीत में कितनी सच्चाई है इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

ITR नोटिस मिलने के बाद मांगी टैक्स एक्सपर्ट की मदद

वायरल पोस्ट में एक बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर किया गया था, जिसमें एक व्यक्ति टैक्स नोटिस मिलने के बाद विशेषज्ञ की मदद मांग रहा था। उस मैसेज में लिखा था कि उसने AI की सहायता से अपना ITR दाखिल किया था और अब उसे इनकम टैक्स नोटिस मिला है। वह इस मामले को समझने और समाधान के लिए किसी टैक्स एक्सपर्ट से जुड़ना चाहता था।

इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगा कि क्या टैक्स जैसे महत्वपूर्ण मामलों में पूरी तरह AI पर भरोसा करना सही है?

लोगों ने AI के इस्तेमाल पर दी अलग-अलग राय

पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो गुटों में बंट गए। कुछ लोगों ने कहा कि AI एक उपयोगी टूल है, लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। एक यूजर ने सलाह दी कि लोगों को समझना होगा कि AI का इस्तेमाल कहां करना चाहिए और कहां नहीं। खासकर ITR जैसे वित्तीय मामलों में पूरी तरह AI पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।

कुछ लोगों ने कहा- आसान ITR के लिए AI काफी है

वहीं, कई यूजर्स ने AI का समर्थन भी किया। उनका कहना था कि सामान्य टैक्स मामलों में AI काफी मददगार साबित हो सकता है। एक यूजर ने बताया कि व्यक्तिगत ITR-1 और ITR-2 जैसे रिटर्न उन्होंने AI की मदद से सफलतापूर्वक फाइल किए हैं। उनके मुताबिक, AI की सहायता से न सिर्फ काम आसान हुआ बल्कि टैक्स प्रक्रिया को समझने का मौका भी मिला।

क्या AI भविष्य में CA की जगह ले सकता है?

कुछ लोगों ने इस बहस को भविष्य की टैक्स व्यवस्था से जोड़ दिया। एक यूजर ने कहा कि आने वाले समय में AI कई ऐसे काम कर सकता है, जिन्हें आज टैक्स प्रोफेशनल संभालते हैं। हालांकि, कई लोगों का मानना था कि AI जानकारी देने और प्रक्रिया आसान बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन जटिल टैक्स मामलों में विशेषज्ञ की सलाह अभी भी जरूरी हो सकती है।

CA ने बताया- युवाओं को सावधान रहने की जरूरत

कुछ टैक्स प्रोफेशनल्स का कहना था कि ऐसे मामलों को सामने लाना जरूरी है, ताकि खासकर युवा और टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग सावधानी बरतें। एक यूजर ने कहा कि सिर्फ तकनीक की जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि हर वित्तीय काम बिना विशेषज्ञ सलाह के किया जा सकता है। टैक्स नियमों की बारीकियां समझना भी उतना ही जरूरी है।

एक ही AI से गलती भी सुधारी जा सकती है

वहीं, कुछ लोगों ने यह तर्क भी दिया कि अगर AI की मदद से कोई गलती हुई है तो उसी तकनीक की मदद से उसे ठीक भी किया जा सकता है। एक यूजर ने सुझाव दिया कि AI का इस्तेमाल रिटर्न में सुधार करने और सही तरीके से दोबारा सबमिट करने के लिए किया जा सकता है।

AI बनाम एक्सपर्ट की बहस फिर तेज

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या AI टैक्स जैसे संवेदनशील कामों के लिए पर्याप्त है या फिर विशेषज्ञों की जरूरत बनी रहेगी। जहां एक तरफ लोग AI को समय बचाने वाला और आसान विकल्प मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग वित्तीय मामलों में सावधानी और विशेषज्ञ सलाह को जरूरी बता रहे हैं।

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Red Sea Attack: यमन के पास भारतीय झंडे वाले जहाज पर हमला, 13 भारतीयों समेत सभी 14 क्रू सदस्य सुरक्षित

विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार को यमन के तट के पास लाल सागर (Red Sea) में भारतीय झंडे वाले वाणिज्यिक जहाज MSV Faize Noore Oliya पर हुए हमले की कड़ी निंदा की। हमले के बाद जहाज पलट गया और डूब गया। जहाज पर सवार 13 भारतीय नागरिकों समेत सभी 14 क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि 4 अगस्त 2026 को यमन के तट के पास लाल सागर में भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ, जिसके बाद जहाज डूब गया। मंत्रालय ने कहा कि सभी 13 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है।

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यमनी कोस्ट गार्ड ने सभी 14 लोगों को बचाया

 

केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि यमनी कोस्ट गार्ड ने सभी 14 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया और उन्हें मोखा बंदरगाह (Port of Mokha) पहुंचाया। सोनोवाल के मुताबिक, भारतीय जहाज MSV Faize Noore Oliya को यमनी जलक्षेत्र के पास एक प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया। इसके बाद जहाज पलट गया और समुद्र में डूब गया। उन्होंने इस हमले को निहत्थे और असुरक्षित मशीनीकृत नौकायन जहाज पर किया गया हमला बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए दिए निर्देश

 

सोनोवाल ने बताया कि उन्होंने Director General Maritime Administration (DGMA) को क्षेत्र में मौजूद भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के साथ तत्काल समन्वय करने के निर्देश दिए हैं।साथ ही, बचाए गए क्रू सदस्यों को हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया है।

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रियाद स्थित भारतीय दूतावास कर रहा निगरानी

 

विदेश मंत्रालय ने बताया कि रियाद स्थित भारतीय दूतावास पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहा है और क्रू सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यमनी अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। MEA ने बचाव अभियान में सहायता के लिए यमनी अधिकारियों का भी आभार जताया।

 

लाल सागर में लगातार हो रहे हमलों पर भारत की चिंता

 

विदेश मंत्रालय ने क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के हमले बंद होने चाहिए और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के जरिए बिना किसी बाधा के नौवहन और व्यापार को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए। भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप समुद्री आवाजाही और व्यापार निर्बाध रूप से जारी रहना चाहिए।

अल हुदायदाह के पास हुआ हमला

 

अनादोलु न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यमन सरकार समर्थित नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज (NRF) के हवाले से बताया गया कि जहाज पर हमला अल हुदायदाह से करीब 13 नॉटिकल मील दक्षिण में हुआ था। हमले के बाद जहाज समुद्र में डूब गया।

 

रिपोर्ट के मुताबिक, यमनी नौसेना और कोस्ट गार्ड ने तत्काल बचाव अभियान चलाया और जहाज पर मौजूद सभी 14 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। बचाए गए नाविकों को चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई गई।

 

Red Sea और Bab al-Mandab को लेकर बढ़ी चिंता

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यह घटना ऐसे समय हुई है जब लाल सागर और बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। बाब-अल-मंदब एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर पहले भी कई घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में भारतीय जहाज पर हमले ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

 

Houthis और क्षेत्रीय तनाव का भी असर

 

रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के पश्चिमी तट और बाब-अल-मंदब के आसपास सक्रिय नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज (NRF) का नेतृत्व तारेक सालेह करते हैं, जो यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के सदस्य हैं। यह घटना क्षेत्र में जारी अन्य तनावों के बीच हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान समर्थित यमनी हूती समूह ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ कथित 'नौसैनिक नाकाबंदी' की घोषणा की थी। इसके बाद रियाद ने अपने जहाजों को निशाना बनाए जाने की किसी भी कोशिश के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

Dabur के शहद, घी और तेल पर बड़ा एक्शन! FSSAI ने ‘100%’ दावे वाले कई प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकी

dabur fssai

खाद्य नियामक FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) ने Dabur India के कई खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया है। कार्रवाई उन उत्पादों की पैकेजिंग और बिक्री में किए गए ‘100 per cent’ यानी 100 प्रतिशत दावों को लेकर की गई है। FSSAI का कहना है कि इस तरह के दावे भ्रामक हो सकते हैं और खाद्य नियमों के अनुरूप नहीं हैं।

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FSSAI ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि उसने Dabur India Ltd के खिलाफ prohibition order जारी किया है। यह कार्रवाई कंपनी की वेबसाइट पर ऐसे खाद्य उत्पादों की बिक्री को लेकर की गई, जिन पर ‘100% Natural’, ‘100% Pure’, ‘100% Purity Guaranteed’, ‘100% Organic’ और ‘100% Tender Coconut Water’ जैसे दावे किए गए थे। नियामक के अनुसार ऐसे दावे अस्पष्ट, सत्यापित करना मुश्किल और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हो सकते हैं। ‘100%’ दावे पर FSSAI ने क्यों उठाया सवाल?

FSSAI के मुताबिक खाद्य उत्पादों पर ऐसे absolute claims यानी पूर्णता का दावा करने वाले शब्द उपभोक्ताओं को उत्पाद की प्रकृति या गुणवत्ता को लेकर गलत धारणा दे सकते हैं। नियामक ने इन्हें ambiguous, unverifiable and likely to mislead यानी अस्पष्ट, सत्यापन योग्य नहीं और भ्रामक होने की आशंका वाला बताया है। FSSAI के खाद्य दावों संबंधी दिशा-निर्देशों में भी दावों को सच्चा, स्पष्ट, सार्थक और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित रखने पर जोर दिया गया है। उपभोक्ताओं के लिए इसका क्या मतलब?

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इस कार्रवाई का मुख्य फोकस उत्पादों की गुणवत्ता पर सामान्य प्रतिबंध लगाने के बजाय लेबलिंग और मार्केटिंग में किए गए ‘100%’ दावों पर है। इसलिए इसे सीधे तौर पर यह नहीं समझना चाहिए कि सूची में शामिल सभी Dabur उत्पाद असुरक्षित घोषित कर दिए गए हैं। मामला मुख्य रूप से इस बात से जुड़ा है कि पैकेजिंग और बिक्री के दौरान उत्पाद के बारे में किस तरह के दावे किए जा सकते हैं।

येन को 40 साल के निचले स्तर से उबारेगा अमेरिका:15 साल बाद जापानी येन खरीदा, ट्रम्प बोले- कमजोर मुद्रा को सहारा देना दुनिया के लिए बेहतर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया कि अमेरिका ने एक दशक में पहली बार जापानी येन खरीदा है। येन को डॉलर के मुकाबले उसके 40 साल के सबसे निचले स्तर से उबारने के लिए ऐसा किया गया है। ट्रम्प ने कहा, “उनकी करेंसी कमजोर हो रही थी और वे थोड़ी मदद चाहते थे।” 10 सवाल-जवाब में जानें पूरी डिटेल्स… सवाल 1: जापान और अमेरिका ने हाल ही में बाजार में क्या और क्यों कदम उठाया है? जवाब: पिछले हफ्ते जापानी मुद्रा ‘येन’ डॉलर के मुकाबले 164 के स्तर पर पहुंच गई थी, जो पिछले 40 सालों का सबसे निचला स्तर है। इस तेज गिरावट को नियंत्रित करने के लिए जापान और अमेरिका ने मिलकर फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में हस्तक्षेप किया। इस हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य येन की अत्यधिक अस्थिरता को रोकना और करेंसी स्पेक्युलेटर्स को नियंत्रित करना था। यह पिछले 15 सालों में यानी साल 2011 के बाद पहला मौका है जब जापान और अमेरिका ने करेंसी मार्केट में एक साथ मिलकर कदम उठाया है। इससे पहले 2011 में पूर्वी जापान में आए भूकंप और सुनामी के बाद दोनों देशों ने येन को कमजोर करने के लिए समन्वित कार्रवाई की थी। इस बार उद्देश्य येन को और अधिक गिरने से बचाना है। सवाल 2: इस हस्तक्षेप में दोनों देशों ने कितनी रकम का इस्तेमाल किया है? उत्तर: बैंक ऑफ जापान के आंकड़ों के अनुसार, टोक्यो ने शुक्रवार के आधिकारिक संयुक्त हस्तक्षेप से ठीक पहले, गुरुवार को न्यूयॉर्क बाजार में येन खरीदने के लिए लगभग 59 अरब डॉलर बेचे थे। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर अपनी खरीदी की राशि का खुलासा नहीं किया है, लेकिन कैबिनेट बैठक के दौरान अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की नोटबुक की तस्वीर से संकेत मिला है, जिस पर लिखा था: “To Do: Buy Japanese Yen $5-10 bil” यानी 5 से 10 अरब डॉलर का येन खरीदना। सवाल 3: इस संयुक्त कार्रवाई पर अमेरिका और जापान के अधिकारियों का क्या कहना है? जवाब: जापान का वित्त मंत्रालय: इस संयुक्त कार्रवाई से हाल के महीनों में येन में आई अत्यधिक अस्थिरता और अनियंत्रित चाल को रोकने में सफल रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी: स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि इस समन्वित कार्रवाई ने येन की अनियंत्रित चाल को नियंत्रित किया है। अमेरिका, येन के भारी अवमूल्यन को ठीक करने के लिए जापान के मौद्रिक और बाजार कदमों का पुरजोर समर्थन करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति: रविवार को संवाददाताओं से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा, “जापानी मुद्रा कमजोर हो रही थी और वे थोड़ी मदद चाहते थे। हम जापान की मदद के लिए हमेशा तैयार हैं।” सवाल 4: अमेरिका को जापान की मदद करने से क्या फायदा है? जवाब: ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स में जापान इकोनॉमिक्स के प्रमुख शिगेतो नागाई ने बताया कि अमेरिका इस समन्वित हस्तक्षेप में शामिल होने के लिए इसलिए सहमत हुआ क्योंकि यह उसके अपने राष्ट्रीय हित में है। यदि येन और जापानी सरकारी बॉन्ड्स में बिकवाली जारी रहती, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता और वॉशिंगटन के लिए भी कर्ज लेने की लागत बढ़ सकती थी। सवाल 5: इस हस्तक्षेप का करेंसी मार्केट पर तुरंत क्या असर देखने को मिला? उत्तर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों के बाद डॉलर 0.2% गिरकर 157.07 येन पर आ गया, जो पिछले महीने के 164 के रिकॉर्ड निचले स्तर से काफी बेहतर स्थिति है। सवाल 6: आगे क्या उम्मीद है? क्या दोनों देश भविष्य में भी ऐसा हस्तक्षेप करेंगे? जवाब: विशेषज्ञ शिगेतो नागाई के अनुसार, दोनों देश आगे भी समय-समय पर रुक-रुक कर और समन्वित तरीके से हस्तक्षेप जारी रख सकते हैं। जापान के वित्त मंत्रालय और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी दोनों ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर वे दोबारा कदम उठाने से नहीं हिचकेंगे। सवाल 7: जापानी येन 40 साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंचा? इसके पीछे क्या कारण हैं? जवाब: 1990 के दशक की मंदी के बाद से जापान ने अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए लंबे समय तक अपनी ब्याज दरों को शून्य या नकारात्मक बनाए रखा था। 2024 में जापान ने ब्याज दरें बढ़ाईं जरूर, लेकिन फिर भी ये दुनिया के मुकाबले काफी कम रहीं। कम ब्याज दरों के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने येन में कर्ज लेकर उसे ज्यादा रिटर्न देने वाली करेंसी में लगाया। इसके अलावा जापानी कंपनियों का भारी विदेशी निवेश और उनकी विदेशी कमाई का विदेशों में ही बने रहना भी येन पर भारी पड़ा। इसने येन को 40 साल के निचले स्तर पर पहुंचा दिया था। सवाल 8: क्या अमेरिका-ईरान जंग का असर भी येन की गिरावट पर पड़ा? जवाब: हां। ईरान जंग ने येन की गिरावट को और तेज कर दिया। केइओ यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सायुरी शिराई के अनुसार, पूरी तरह ऊर्जा आयात पर निर्भर रहने के कारण तेल-गैस की बढ़ती कीमतों ने जापान के व्यापार संतुलन को बिगाड़ा। इससे महंगाई बढ़ी और येन की रिकवरी रुक गई। सवाल 9: मजबूत डॉलर और कमजोर येन से दोनों देशों को क्या फायदा-नुकसान हो रहा था? जवाब: अमेरिका के लिए: मजबूत डॉलर अमेरिकी एक्सपोर्ट को विदेशी उपभोक्ताओं के लिए महंगा बना देता है। इसका नुकसान अमेरिकी कंपनियों को होता है। जापान के लिए: कमजोर येन से जापानी एक्सपोर्टर्स और पर्यटकों को फायदा जरूर होता है, लेकिन जरूरी सामान का आयात महंगा हो जाता है, जिससे देश में महंगाई बढ़ती है। सवाल 10: क्या इस खरीदारी से येन की स्थिति में स्थायी सुधार आ सकता है? जवाब: बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज के शुसुके यामादा का मानना है कि करेंसी मार्केट में ऐसी खरीदारी से केवल कुछ समय के लिए ही राहत मिलती है। वहीं बार्कलेज बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साझा कदम का असर शुरुआती दिनों में तो दिखेगा, लेकिन लंबी अवधि में येन पर नीचे जाने का दबाव बना रह सकता है।