Nifty Outlook: सितंबर में 1600 अंक से ज्यादा टूटा निफ्टी, क्या अब 22600 का अहम लेवल बचेगा?

Nifty Outlook: सितंबर एक्सपायरी के दिन शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। Nifty50 मंगलवार को 64 अंक गिरकर 22,716 पर बंद हुआ। पूरे सितंबर में इंडेक्स 1,600 अंक से ज्यादा यानी करीब 6.5% टूट चुका है।

मंगलवार को Nifty की शुरुआत गैप-डाउन हुई। शुरुआती कारोबार में बिकवाली तेज रही और इंडेक्स काफी नीचे चला गया। हालांकि, दिन के निचले स्तर से रिकवरी आई और Nifty ने शुरुआती नुकसान का बड़ा हिस्सा कम कर लिया।

एक्सपायरी के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहा। आखिर में Nifty 0.28% की गिरावट के साथ 22,716 पर बंद हुआ। सेक्टरों की बात करें तो IT, Realty और FMCG में गिरावट जारी रही। हालांकि, मेटल और फार्मा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

200-वीक मूविंग एवरेज तक पहुंचा निफ्टी

गिरावट के साथ Nifty अपने 200-वीक मूविंग एवरेज के करीब पहुंच गया है। यह लेवल अभी करीब 22,600 है। कोविड के समय बाजार में आई बड़ी गिरावट के बाद पहली बार Nifty इस लंबे समय के टेक्निकल सपोर्ट तक पहुंचा है।

यही वजह है कि अब 30 सितंबर को 22,600 का स्तर बाजार के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इसके आसपास इंडेक्स का अगला रुख तय हो सकता है।

मिडकैप और स्मॉलकैप में भी दबाव

बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में रहे। Nifty Midcap 100 इंडेक्स 0.99% गिरा। वहीं Nifty Smallcap 100 में 0.81% की गिरावट आई।

बाजार में कमजोरी का असर अब सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है। व्यापक बाजार में भी बिकवाली का दबाव दिख रहा है।

लगातार आठवें हफ्ते बाजार गिरा

हाल की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। Nifty में करीब 6.8% की गिरावट दर्ज हुई है। इसके साथ ही इंडेक्स लगातार आठवें हफ्ते गिरा है।

2020 के बाद यह Nifty की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट है। हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ आंकड़े अभी राहत दे रहे हैं।

इकोनॉमी से मिले कुछ अच्छे संकेत

अगस्त में भारत की इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन ग्रोथ 8% रही। यह दो महीने में सबसे तेज बढ़त है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की मांग में भी सुधार के संकेत मिले हैं। इससे शहरी इलाकों में लोगों के खर्च में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। GDP ग्रोथ भी बाजार के लिए एक सपोर्टिव फैक्टर बनी हुई है।

कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड भी महत्वपूर्ण रहेंगी। होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रम पर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी बाजार के लिए अहम होगी।

22,550 के नीचे गिरावट पर दबाव

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक निफ्टी का ट्रेंड अभी कमजोर है। उनका कहना है कि 22,900 से 23,000 के बीच आने वाली तेजी ज्यादा टिक नहीं सकती। इस स्तर पर बिकवाली देखने को मिल सकती है।

उनके मुताबिक, अगर निफ्टी 22,550 के नीचे जाता है तो 22,200 तक गिरावट बढ़ सकती है।

22,570-22,550 का जोन अहम

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक 22,570 से 22,550 का जोन Nifty के लिए तत्काल सपोर्ट है। इसके नीचे गिरावट आने पर 22,400 तक दबाव बढ़ सकता है।

ऊपर की तरफ 22,900 से 22,930 का स्तर अहम रेजिस्टेंस रहेगा। अगर Nifty इस रेंज के ऊपर टिकता है तो रिकवरी 23,050 तक जा सकती है।

22,600 के ऊपर टिकना जरूरी

LKP Securities के रूपक डे के मुताबिक 22,600 के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर बिकवाली तेज हो सकती है। वहीं, अगर Nifty इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो रिकवरी की गुंजाइश रहेगी।

उनके मुताबिक 22,600 फिलहाल अहम सपोर्ट है। वहीं 22,800 तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है।

Stocks to Watch: 30 सितंबर को फोकस में ये 12 स्टॉक्स, टाटा स्टील से KPI ग्रीन एनर्जी तक शामिल

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Stocks to Buy: इन 4 शेयरों पर मोतीलाल ओसवाल ने भरोसा जताया, 51% तक तेजी का टारगेट दिया

Stocks to Buy: शेयर बाजार में फिलहाल काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने 4 कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी का अनुमान दिया है। इनमें Sagility,  Petronet LNG, Prestige Estates Projects और Time Technoplast शामिल हैं। इन शेयरों में 27% से 51% तक तेजी की गुंजाइश बताई गई है।

Sagility

हेल्थकेयर सर्विस कंपनी Sagility को लेकर Motilal Oswal का रुख पॉजिटिव है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ₹54 का टारगेट दिया है। ₹42.50 के मौजूदा भाव से इसमें करीब 27% तेजी की गुंजाइश बनती है। हेल्थकेयर ऑपरेशंस और आउटसोर्सिंग कारोबार से कंपनी को फायदा मिल सकता है। नए क्लाइंट और क्रॉस-सेलिंग से भी आगे रेवेन्यू बढ़ने की उम्मीद है।

 Petronet LNG 

ऑयल एंड गैस कंपनी Petronet LNG पर Motilal Oswal ने Buy रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस ₹362 रखा है। ₹283.40 के मौजूदा भाव से इसमें करीब 28% तेजी की गुंजाइश है। ब्रोकरेज के मुताबिक, कोच्चि टर्मिनल की बढ़ती क्षमता, GJCU और ग्रिड कनेक्टिविटी से कंपनी के कारोबार को फायदा मिल सकता है।

Prestige Estates

रियल एस्टेट कंपनी Prestige Estates Projects के शेयर पर Motilal Oswal ने Buy कॉल बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने ₹1,830 का टारगेट तय किया है। ₹1,471 के मौजूदा भाव से यह करीब 24% ऊपर है। कंपनी के नए प्रोजेक्ट लॉन्च और मजबूत प्री-सेल्स से ग्रोथ को सपोर्ट मिल रहा है। 2QFY27 में तीन प्रोजेक्ट लॉन्च किए गए हैं। बेंगलुरु में मांग भी मजबूत बनी हुई है।

Time Technoplast

प्लास्टिक प्रोडक्ट कंपनी Time Technoplast के शेयर में ब्रोकरेज को अच्छी तेजी की गुंजाइश दिख रही है। Motilal Oswal ने ₹280 का टारगेट दिया है और Buy रेटिंग रखी है। मंगलवार को शेयर ₹185.07 पर बंद हुआ। इस भाव से करीब 51% का संभावित अपसाइड बनता है। मजबूत रेवेन्यू, मार्जिन और प्रॉफिट ग्रोथ से कंपनी को फायदा मिल सकता है। FY27 में भी ग्रोथ और मार्जिन में सुधार की उम्मीद है।

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बाजार पर मैक्रो का ट्रिपल अटैक!क्या बचेगा निफ्टी का 52-हफ्ते का निचला स्तर? जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या दे रहा संकेत

Gift Nifty Indicator: मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के सपाट या सतर्क रुख के साथ खुलने की संभावना है। पिछले सेशन में हुई भारी बिकवाली के बाद GIFT निफ्टी में बहुत कम हलचल दिख रही है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी, FII की लगातार बिकवाली, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं और कमजोर ग्लोबल इक्विटी मार्केट का सेंटीमेंट पर असर पड़ रहा है।

सुबह 7:45 बजे GIFT निफ्टी 5 अंक या 0.02 फीसदी गिरकर 22,819 पर ट्रेड कर रहा था। सोमवार को भारतीय इक्विटी मार्केट में भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,124.02 अंक या 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 पर आ गया, जबकि निफ्टी 360.25 अंक या 1.56 प्रतिशत गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ।

भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए बाहरी माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड की कीमत $106 प्रति बैरल से ऊपर चली गई क्योंकि US-ईरान शांति प्रयासों में जल्द किसी समाधान की उम्मीद कम हो गई है। वहीं, एशियाई इक्विटी मार्केट में गिरावट आई और US स्टॉक-इंडेक्स फ्यूचर्स भी नीचे ट्रेड कर रहे थे। वॉल स्ट्रीट भी रात भर भारी गिरावट के साथ बंद हुआ क्योंकि तेल की ऊंची कीमतों और ट्रेजरी यील्ड ने महंगाई और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर की चाल को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली एक बड़ी बाधा बनी रही। FII लगातार तीसरे सेशन में नेट सेलर रहे और 28 सितंबर को 5,300 करोड़ रुपये से अधिक की इक्विटी बेची। DII ने इस आउटफ्लो को संतुलित करते हुए लगभग 5,189 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी।

तेल और बॉन्ड यील्ड के दबाव से एशियाई बाजारों में गिरावट

मंगलवार को एशियाई इक्विटी मार्केट में गिरावट देखी गई क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों ने ट्रेजरी यील्ड को कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स 0.5 प्रतिशत गिर गया, जिसमें जापानी और दक्षिण कोरियाई शेयरों में गिरावट देखी गई। हांगकांग का हैंग सेंग 0.4 प्रतिशत गिर गया, जबकि शंघाई कंपोजिट में बहुत कम बदलाव हुआ। ऑस्ट्रेलियाई इक्विटी मार्केट भी मोटे तौर पर सपाट रहा। US इक्विटी फ्यूचर्स में सुस्ती रही; Nasdaq 100 फ्यूचर्स 0.3 प्रतिशत और S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 प्रतिशत नीचे रहे।

ब्रेंट क्रूड $106 के पार पहुंचा

मंगलवार को लगातार दूसरे सेशन में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। मिडिल ईस्ट में सप्लाई में रुकावट की चिंताएं, उस क्षेत्र से क्रूड एक्सपोर्ट में सुधार के संकेतों पर भारी पड़ीं। ब्रेंट क्रूड 1.6 प्रतिशत बढ़कर $106.93 प्रति बैरल हो गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1.3 प्रतिशत बढ़कर $93.80 पर पहुंच गया।

US-ईरान विवाद में जल्द ही किसी डिप्लोमैटिक समाधान की उम्मीद कम हो गई है। एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि बातचीत को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के ज़रिए सप्लाई में संभावित रुकावट की चिंताएं बनी हुई हैं।

इंडेक्स पर क्या हो रणनीति

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल रिसर्च VP सचिन गुप्ता ने कहा, “तुरंत सपोर्ट 72,300–72,500 पर है, जबकि 72,900–73,000 मुख्य रेजिस्टेंस ज़ोन के तौर पर काम कर सकता है। ब्रॉडर ट्रेडिंग रेंज 72,300–73,000 है, और कुल मिलाकर रुख साइडवेज से लेकर मंदी (बेयरिश) वाला है। शॉर्ट-टर्म स्ट्रक्चर में कुछ स्थिरता लाने के लिए 73,000 के ऊपर लगातार रिकवरी की ज़रूरत होगी। कुल मिलाकर, इंडेक्स साइडवेज से लेकर मंदी वाला बना हुआ है, और जब तक मज़बूत रिबाउंड नहीं दिखता, ट्रेडर्स को सावधान रहना चाहिए। 72,900–73,000 के ऊपर लगातार बढ़त कुछ राहत दे सकती है, जबकि 72,300 के नीचे जाने पर गिरावट का दौर और बढ़ सकता है।”

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा, “भारतीय इक्विटी मार्केट पर दबाव बने रहने की उम्मीद है क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और U.S.-ईरान संघर्ष को लेकर लगातार अनिश्चितता मार्केट के सेंटीमेंट पर असर डाल रही है। U.S. प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि U.S. इस संघर्ष में ‘बहुत जल्द’ जीत हासिल करेगा, जबकि अधिकारी संघर्ष को खत्म करने के लिए मध्यस्थों से बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, बातचीत को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के ज़रिए संभावित सप्लाई में रुकावट की चिंताएं बनी हुई हैं।”

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

हाहाकार, ₹4 लाख करोड़ स्वाहा, Sensex 1248 प्वाइंट कमजोर, Nifty 23063 पर बंद

Sensex-Nifty closes deep red: सेंसेक्स और बैंकेक्स की मंथली एक्सपायरी के दिन आज मार्केट में हाहाकार मच गया। अधिकतर एशियाई बाजारों में बिकवाली की आंच आज घरेलू स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई। सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी को आज बिकवाली की ऐसी आंधी चली कि सेंसेक्स 1264 प्वाइंट् टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 23100 के नीचे आ गया और ये गहरे लाल बंद हुए। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में काफी दबाव है लेकिन मिडकैप स्पेस में थोड़ी अधिक। निफ्टी मिडकैप 100 आज ढाई फीसदी से अधिक कमजोर हुआ तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 डेढ़ फीसदी से अधिक टूटकर बंद हुआ।

सेक्टरवाइज मार्केट को आज बैंकिंग शेयरों ने बुरी तरह तोड़ दिया। प्राइवेट सेक्टर का निफ्टी इंडेक्स आज 2% से अधिक कमजोर हुआ को सरकारी बैंकों का निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक नीचे आया। निफ्टी मेटल करीब 2%, निफ्टी ऑटो डेढ़ फीसदी से अधिक, निफ्टी एफएमसीजी 1% से अधिक, निफ्टी रियल्टी 1% से अधिक और निफ्टी आईटी करीब आधा फीसदी कमजोर हुआ। किसी भी सेक्टर का निफ्टी इंडेक्स ग्रीन नहीं है। इस दबाव में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹4 लाख करोड़ से अधिक घट गई।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 24 सितंबर के दिन सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी को सेंसेक्स (Sensex) 1,247.71 प्वाइंट्स यानी 1.67% की गिरावट के साथ 73,580.54 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 383.70 प्वाइंट्स यानी 1.64% की फिसलन के साथ 23,063.10 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 1264.33 प्वाइंट्स टूटकर 73,563.92 और निफ्टी भी 400.65 प्वाइंट्स गिरकर 23,046.15 तक आ गया था।

निवेशकों के ₹4 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 23 सितंबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,85,01,353.86 करोड़ था। आज यानी 24 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹4,80,99,180.54 करोड़ रह गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹402,173.32 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex का सिर्फ 1 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज सिर्फ 1 स्टॉक- एनटीपीसी ही ग्रीन बंद हुआ है। वहीं दूसरी तरफ दिन के आखिरी में आज बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक और बजाज फिनसर्व में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

 

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पांच वजहों से आज मार्केट में चली बिकवाली की आंधी

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Share Market Crash: 5 सेकंड में ₹4 लाख करोड़ साफ, 700 प्वाइंट्स टूटा Sensex, इन 5 वजह से Nifty धड़ाम

Share Market Crash: अधिकतर एशियाई बाजारों में बिकवाली की आंच आज घरेलू स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई। सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी को आज शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम हो गए। सेंसेक्स 700 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 23200 के करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में काफी दबाव है लेकिन मिडकैप स्पेस में थोड़ी अधिक। निफ्टी मिडकैप 100 में 1% से अधिक गिरावट है और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक। इस माहौल में मार्केट खुलते ही बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹4 लाख करोड़ से अधिक कम हो गया यानी कि निवेशकों की दौलत ₹4 लाख करोड़ से अधिक घट गई

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:55 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 701.31 प्वाइंट्स यानी 0.94% की गिरावट के साथ 74,126.94 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 233.95 प्वाइंट्स यानी 1.00% की फिसलन के साथ 23,212.85 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 707.63 प्वाइंट्स टूटकर 74,120.62 और निफ्टी भी 241.35 प्वाइंट्स गिरकर 23,205.45 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

बॉन्ड यील्ड में उछाल

सितंबर में नए ऑर्डर में तेजी के कारण अमेरिका में बिजनेस एक्टिविटी पांच साल से अधिक समय में सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गई। इसके चलते अमेरिका के बेंचमार्क 10-साल का ट्रेजरी यील्ड साल 2007 के बाद के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया तो मार्केट ने ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ा दी।

कच्चे तेल में उबाल

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर अनिश्चितता ने कच्चे तेल को फिर से उबाल दिया, जिसकी आंच में मार्केट झुलस गए। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $102 के करीब पहुंच गया।

Sensex की मंथली एक्सपायरी

आज बीएसई के सेंसेक्स और बैकेंक्स समेत अन्य इंडेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की मंथली एक्सपायरी है तो मार्केट पर इसका असर दिखा। एक्सपायरी का मतलब डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर अपनी पोजिशन बंद करना है यानी उसे आगे नहीं बढ़ा सकते हैं।

बैंकिंग शेयरों का भारी दबाव

आज मार्केट पर बैंकिंग शेयरों ने भारी दबाव बनाया है। प्राइवेट बैंकों का निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक कमजोर है तो सरकारी बैंकों का निफ्टी इंडेक्स भी करीब 1% कमजोर है।

टेक्निकल आउटलुक

जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स का कहना है कि एक कारोबारी दिन पूरे दिन मार्केट में पॉजिटिव माहौल रहा, जिससे 23760 या उससे ऊपर तक तेजी की उम्मीदें जगीं, लेकिन 23490 के लेवल ने बढ़त को रोके रखा।

(यह स्टोरी अभी अपडेट हो रही है)

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Market cues : नियर टर्म में कंसोलिडेशन जारी रहने की उम्मीद, 23500 की दीवार पार होने पर ही आएगी तेजी

Trade setup for today : एक दिन की गिरावट के बाद कल निफ्टी में 0.50 फीसदी की रिकवरी हुई। बाजार में मंदी का दबाव कुछ कम हुआ। हालांकि,कुल मिलाकर बाजार का ओवरऑल स्ट्रक्चर अभी भी कमजोर बना हुआ है और इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है। US 10-ईयर बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.1 फीसदी पर पहुंच गया, जो जुलाई 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं कच्चे तेल की कीमतें फिर से $100 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं। इसकी वजह से कल बाजार में सावधानी का माहौल देखने को मिला।

जब तक निफ्टी 23,500–23,600 के अहम रेजिस्टेंस जोन के नीचे ट्रेड करता रहेगा,तब तक नियर टर्म में नेगेटिव रुझान के साथ कंसोलिडेशन का दौर बने रहने की संभावना है। बाजार जानकारों का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,300 पर तत्काल सपोर्ट दिख रहा है। इसके बाद 23,100–23,000 एक अहम सपोर्ट ज़ोन हो सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

निफ्टी 50 (23,447) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 23,466, 23,494 और 23,538

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 23,376, 23,349 और 23,304

निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

डेली टाइमफ्रेम पर,निफ्टी ने पिछले दिन की रेड कैंडल के अंदर ही एक बुलिश कैंडल बनाई। यह सीमित दायरे में हो रही ट्रेडिंग के बीच पॉजिटिव ट्रेंड का संकेत है। हालांकि,इंडेक्स अभी भी अपने 20, 50, 100 और 200-डे EMA से नीचे बना हुआ है,जो इसके कमजोर स्ट्रक्चर का संकेत है। इस बीच, RSI बढ़कर 40.25 हो गया। यह सिग्नल लाइन से ऊपर तो है,लेकिन अभी भी 50 के स्तर से नीचे है। MACD थोड़ा ऊपर चढ़कर अपनी सिग्नल लाइन के करीब पहुंच गया,जबकि लाल हिस्टोग्राम बार लगातार छठे सेशन में नीचे आया। यह एक बड़े कंसोलिडेशन फेज के दौरान मंदी के मोमेंटम में कमी का संकेत है।

बैंक निफ्टी (56,549) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 56,619, 56,717 और 56,875

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 56,303, 56,205 और 56,047

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,285, 59,261

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 55,749, 55,050

बैंक निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

बैंक निफ्टी में भी 0.6 फीसदी की बढ़त देखने को मिली। डेली चार्ट पर पिछले दिन की रेड कैंडल के साथ एक बुलिश कैंडल बनी। यह रेंज बाउंड ट्रेडिंग के बीच पॉजिटिव मूवमेंट का संकेत है। इंडेक्स अपने 10-डे EMA के ऊपर बंद हुआ,लेकिन 20, 50, 100 और 200 डे EMA से नीचे ही रहा। इससे पता चलता है कि बाजार पर अभी भी बेयर्स का कंट्रोल है। हालांकि मोमेंटम इंडिकेटर मंदी के दबाव में कमी आने का संकेत दे रहे हैं। लेकिन इस बदलाव की पुष्टि आज के सेशन में होनी चाहिए। पॉजिटिव क्रॉसओवर के बाद RSI बढ़कर 46.25 हो गया और MACD अपनी सिग्नल लाइन के करीब पहुंच गया,क्योंकि लगातार छठे सेशन में रेड हिस्टोग्राम बार छोटे होते गए।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो (करोड़ रुपए में)

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इंडिया VIX

मार्केट में संभावित उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडिया VIX, कल 5.93 प्रतिशत गिरकर 10.34 पर आ गया। यह 7 जनवरी, 2026 के बाद से इसका सबसे निचला क्लोजिंग लेवल है। वोलैटिलिटी मापने वाला यह इंडेक्स लगातार छठे सेशन में नीचे की ओर गया। यह बुल्स के बीच बढ़ते भरोसे और मार्केट में बेहतर स्थिरता का संकेत है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 23 सितंबर को बढ़कर 1.03 हो गया, जबकि पिछले सेशन में यह 0.94 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, LIC हाउसिंग फाइनेंस, मणप्पुरम फाइनेंस, SAIL

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

 

Market Technicals : मोमेंटम में सुधार आने के संकेत, निफ्टी-बैंक निफ्टी में इन अहम लेवल्स पर रहे नजर

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

₹2 लाख करोड़ साफ, Sensex में 330 अंकों की गिरावट, Nifty टूटकर 23329 पर बंद

Share Market Crash: निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन आज शुरुआती बढ़त पूरा गंवाते हुए सेंसेक्स और निफ्टी लाल हो गए और दिन के आखिरी तक ये कमजोर बने रहे। डे-हाई से सेंसेक्स 600 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 23300 के नीचे तक आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी ऐसा रुझान दिखा और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में गिरावट है के साथ बंद हुए। सेक्टरवाइज मार्केट पर आज सबसे तगड़ा दबाव आईटी सेक्टर ने बनाया, जिसका निफ्टी इंडेक्स करीब 1% टूट गया। अधिकतर अहम सेक्टर के इंडेक्स आज लाल रहे। ओवरऑल आज बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹2 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 22 सितंबर को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 329.91 प्वाइंट्स यानी 0.44% की गिरावट के साथ 74,529.08 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 85.30 प्वाइंट्स यानी 0.36% की फिसलन के साथ 23,329.00 पर बंद हुआ है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 179.94 प्वाइंट्स उछलकर 75,038.93 तक पहुंचा था जिससे फिर यह 615.22 प्वाइंट्स टूटकर 74,423.71 तक आ गया तो दूसरी तरफ निफ्टी 50 भी 74.70 प्वाइंट्स चढ़कर 23,489.00 तक पहुंचा था, जिससे फिर यह 203.25 प्वाइंट्स गिरकर 23,285.75 तक आ गया था।

निवेशकों के ₹2.37 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 21 सितंबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,82,68,385.61 करोड़ था। आज यानी 22 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹4,80,30,572.59 करोड़ रह गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹237,813.02 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के सिर्फ 7 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें सिर्फ 7 ही आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज जोमैटो की एटर्नल, इंडिगो और टाटइन सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ बजाज फिनसर्व, ट्रेंट और बजाज फाइनेंस में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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इन पांच वजहों से मार्केट ने गंवाई बढ़त, लाल हुआ सेंसेक्स-निफ्टी

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market cues : मोमेंटम इंडिकेटर्स दे रहे मंदी के कमजोर पड़ने के संकेत, 23600 के ऊपर टिकने पर निफ्टी में आ सकती है और तेजी

Trade setup for today : 21 सितंबर को निफ्टी ने 0.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ हफ्ते की शुरुआत की और लगातार चौथे सेशन में भी तेजी बनाए रखी। इसे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। मोमेंटम इंडिकेटर्स में भी सुधार दिखा और मंदी का रुझान कम हुआ। हालांकि इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड करता रहा,जो इसके कमजोर स्ट्रक्चर का संकेत है। मार्केट एक्सपर्ट्स की राय है कि आगे निफ्टी को 23,500-23,600 के दायरे में रुकावट का सामना करना पड़ सकता है,जबकि 23,600 के ऊपर मजबूती दिखाने पर और बढ़त की गुंजाइश बन सकती है। बाजार जानकारों के मुताबिक,नीचे की तरफ 23,300 पर तत्काल सपोर्ट दिख रहा है और उसके बाद 23,000 का लेवल अहम सपोर्ट का काम कर सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

निफ्टी 50 (23,414) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 23,457, 23,493 और 23,551

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 23,341, 23,305 और 23,247

निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

निफ्टी 50 ने डेली चार्ट पर एक बुलिश कैंडल बनाई,लेकिन यह 15 सितंबर की लंबी रेड कैंडल के दायरे में ही रही। यह सीमित दायरे में हो रही ट्रेडिंग के बीच पॉजिटिव संकेत है। इंडेक्स अपने शॉर्ट से लेकर लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड करता रहा। हालांकि मोमेंटम इंडिकेटर्स ने बेयरिश मोमेंटम में कमी दिखाई। RSI बढ़कर 37.54 पर पहुंच गया और अपनी सिग्नल लाइन से ऊपर बना रहा। MACD ऊपर तो गया लेकिन रेफरेंस लाइन से नीचे ही रहा,जबकि हिस्टोग्राम की कमजोरी लगातार चौथे सेशन में कम हुई। कुल मिलाकर,ये इंडिकेटर बताते हैं कि मंदी का रुझान धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है।

बैंक निफ्टी (56,471) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 56,622, 56,716 और 56,868

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 56,317, 56,223 और 56,071

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,285, 59,261

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 55,749, 55,050

बैंक निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

डेली चार्ट पर बैंक निफ्टी ने ऊपरी शैडो के साथ एक बुलिश कैंडल बनाई,लेकिन यह 15 सितंबर की लंबी रेड कैंडल के दायरे में ही रही। इससे पता चलता है कि रेंज-बाउंड ट्रेडिंग के बीच ऊंचे लेवल पर दबाव होने के बावजूद इसमें पॉजिटिव रुझान बना हुआ है। बैंक निफ्टी सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड करता रहा,जबकि पॉजिटिव क्रॉसओवर के बाद RSI बढ़कर 44.62 पर पहुंच गया,हालांकि यह अभी भी 50 के लेवल से नीचे ही है। लाल हिस्टोग्राम बार लगातार चौथे सेशन में भी घटता रहा, जबकि MACD लाइन सिग्नल लाइन के नीचे बनी रही। कुल मिलाकर,ये इंडिकेटर बताते हैं कि मंदी का रुझान धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है,हालांकि बड़ा ट्रेंड अभी भी सावधानी वाला बना हुआ है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

21 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹576 करोड़ के शेयर बेचे,जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस दौरान ₹2,800 करोड़ के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

वोलैटिलिटी इंडेक्स,India VIX कल लगातार चौथे सेशन में गिरा और एक और अपने शॉर्ट-टू-मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा,जो बुल्स के लिए राहत का संकेत है। सोमवार को वोलैटिलिटी इंडेक्स 1.43 प्रतिशत गिरकर 11.22 पर आ गया। 12 के जोन से नीचे बने रहने से बुल्स को राहत मिल सकती है और मार्केट को स्थिर रहने में मदद मिल सकती है।

Market Technicals: मंदी का रुझान धीरे-धीरे हो रहा कम, निफ्टी में खुल सकता है 24000 की तरफ रैली का रास्ता

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 21 सितंबर को बढ़कर 1.2 हो गया,जबकि पिछले सेशन में यह 1.06 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: LIC हाउसिंग फाइनेंस

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: बंधन बैंक, आईनॉक्स विंड, मणप्पुरम फाइनेंस, सेल

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Banks vs NBFCs: 5 वजहों से बैंकिंग शेयरों की चमक फीकी, एनबीएफसी ने मारी बाजी

Banks vs NBFCs: लोन बुक में बढ़ोतरी, एसेट क्वालिटी की मजबूती बने रहने और बैड लोन के रिकॉर्ड निचले स्तर के आस-पास होने के बावजूद बड़े बैकों के शेयर निवेशकों को लुभा नहीं पा रहे। वहीं नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनीज (NBFC) को लेकर निवेशकों की काफी दिलचस्पी दिख रही है। सैमको सिक्योरिटीज के सीईओ और फाउंडर जिमीत मोदी का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि बैंकों का मैनेजमेंट खराब है बल्कि बैंकिंग सेक्टर के हालात बदल गए हैं। उन्होंने इसके पीछे की पांच अहम वजह बताई है, जिसके बारे में नीचे दिया जा रहा है।

घट रहे बैंकों के रिटर्न

बड़े प्राइवेट बैंकों के शेयरहोल्डर्स का रिटर्न अब कम हो रहा तो दिग्गज एनबीएफसी में RoE (रिटर्न ऑन इक्विटी) बढ़ रहा है। लंबे समय तक बैंकों का RoE मजबूत बना रहा क्योंकि उनके पसा बड़ा डिपॉजिट बेस था, जिसके दम पर वे शेयरहोल्डर्स के निवेश की तुलना में अधिक लोन बांट पाते थे तो दूसरी तरफ एनबीएफसी को यह सुविधा नहीं थी और उन्हें अपनी पूंजी पर निर्भर रहना पड़ता था। हालांकि अब लेंडिंग मार्जिन कम होने से अधिक लेवरेज का असर बैंकों के RoE पर निगेटिव दिखने लगा तो बेहतर मार्जिन और कम लेवरेज वाली NBFCs का रिटर्न बेहतर बना हुआ है।

रेपो-लिंक्ड लोन ने बढ़ाई बैंकों की दिक्कत

फरवरी 2025 से आरबीआई ने रेपो रेट में 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। बैंकों के लगभग 60% लोन इसी रेट से जुड़े होते हैं तो रेपो रेट कम होने से इनकी ब्याज दर लगभग तुरंत कम हो गईं। वहीं डिपॉजिट के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है क्योंकि इनकी दरें तभी बदलती हैं, जब वे मैच्योर होते हैं, जिसमें आमतौर पर छह से बारह महीने लगते हैं। ऐसे में बैंकों की इनकम पहले घटी, जबकि लागत बाद में कम हुई। वहीं नॉन-बैंक लेंडर्स यानी NBFCs के मामले में स्थिति बिल्कुल उल्टी रही। उनके अधिकतर लोन फिक्स्ड रेट वाले होते हैं, जैसे- ऑटो, गोल्ड और SME लोन। ऐसे में उनकी इनकम कम नहीं हुई और लोन के लिए फंड जुटाने की लागत कम हो गई। इस तरह रेपो रेट में कटौती का असर बिल्कुल अलग-अलग दिखा और इसने मार्जिन में फर्क डाल दिया।

कमजोर हो रही बैंकों की डिपॉजिट

दशकों तक बैंकों को कम लागत वाली सेविंग्स डिपॉजिट मिल जा रही थी लेकिन अब स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड जैसे मार्केट से जुड़े प्रोडक्ट्स में पैसा जाने लगा तो बैंकों का डिपॉजिट्स बेस कमजोर पड़ा। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक परिवारों की बचत का बैंकों में जमा हिस्सा FY12 में 57.9% से घटकर FY25 में 35.2% रह गया। ऐसे में बैंकों के लिए बॉन्ड्स और CD (सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट) इत्यादि की जरूरत बढ़ने लगी जिनकी फंडिंग लागत मार्केट से जुड़ी है। एनबीएफसी भी इसी तरीके से पैसे जुटाते हैं।

कुछ एरिया में बैंकों से आगे NBFC

पिछले कुछ महीनों में बैंकों की लोन ग्रोथ एनबीएफसी की तुलना में अधिक रफ्तार से बढ़ी लेकिन इस ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा बड़े कॉरपोरेट से जुड़ा है, जहां मार्जिन कम है और कीमत बॉन्ड मार्केट से तय होती है। इसके अलावा एनबीएफसी को भी बैंकों का लोन तेजी से बढ़ रहा है। एनबीएफसी की बात करें तो गोल्ड लोन, पुरानी गाड़ियों से जुड़े लोन, अफोर्डेबल हाउसिंग से जुड़े लोन और छोटे बिजनेसेज के लोन के मामले में यह आगे है। इन सेगमेंट में सही फैसला लेने, स्थानीय जानकारी और लोन वसूली की क्षमता की जरूरत होती है, और NBFC ने इन मामलों में बढ़त हासिल कर ली है।

लीडरशिप में बदलाव

प्राइवेट बैंकों के चीफ एग्जीक्यूटिव का एक कार्यकाल तय होता है, जिस पर आरबीआई मंजूरी लेनी होती है। चूंकि कई लीडरशिप कार्यकाल एक ही समय के आसपास तय किए गए थे, इसलिए अब उनमें से कई लगभग एक साथ खत्म हो रहे हैं। इस वजह से 2026 में प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के बैंकों में बड़ी संख्या में लीडरशिप में बदलाव हो रहे हैं। लीडरशिप में बदलाव से बड़े फैसलों में देरी हो सकती है। नए सीईओ के पद संभालने तक बैंक कई अहम फैसलों को टाल सकते हैं तो नए सीईओ भी आते ही तुरंत आक्रामक तौर पर काम करने लगें, ऐसा जरूरी भी नहीं। बैंकिंग स्टेबिलिटी के लिए ये नियम जरूरी हैं, लेकिन लीडरशिप में बदलाव के समय बैंकों को लेकर निवेशक अधिक सतर्क होने लगते हैं।

क्या करना चाहिए निवेशकों को

निवेशकों की पसंद में बदलाव स्टॉक मार्केट में भी दिखने लगा है। एक साल में निफ्टी बैंक 3.51% मजबूत हुआ है लेकिन निफ्टी फाइनेंशिल सर्विसेज 2.5% कमजोर हुआ है। हालांकि अगर निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में से बैंकों को निकाल दें तो यह एक साल में 6.77% मजबूत हुआ। जिमीत मोदी के मुताबिक जहां बैंकों का क्रेडिट मॉडल काम नहीं कर पा रहा, वहां एनबीएफसी की मौजूदगी इसकी कमाई को सपोर्ट दे रही। हालांकि उनका यह भी मानना है कि इसमें अधिकतर फायदा साइक्लिकल है और इसमें बदलाव हो सकता है। बैंकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्ट्रक्चरल है। अब आम लोग अपनी बचत बैंकों की बजाय मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स में डाल रहे हैं। जिमीत के मुताबिक ऐसे समय में निवेशकों को सिर्फ लोन ग्रोथ की बजाय बैंकों के लोन यील्ड और कम लागत वाले डिपॉजिट के हिस्से पर ध्यान देना चाहिए।

Railway Stocks: इस रेलवे पीएसयू को मिला ₹405 करोड़ का काम, अब 21 सितंबर को शेयरों पर रहेगी नजर

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।