A-1 लिमिटेड को से ₹38 करोड़ का ऑर्डर मिला, एसिड और इंडस्ट्रियल केमिकल की सप्लाई करेगी

A-1 Ltd Order: लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल एसिड-केमिकल सप्लाई करने वाली कंपनी A-1 Ltd को Solar Industries Group से 38.70 करोड़ रुपये का नया ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर एसिड और इंडस्ट्रियल केमिकल की सप्लाई के लिए है। इसमें GST शामिल नहीं है।

तीन महीने में पूरी होगी सप्लाई

A-1  लिमिटेड ने बताया कि यह ऑर्डर Solar Industries और उसकी ग्रुप कंपनियों के लिए है। इसकी सप्लाई मौजूदा वित्त वर्ष में 31 अक्टूबर 2026 तक पूरी की जाएगी। इससे FY27 की दूसरी और तीसरी तिमाही के कारोबार को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे पहले जून 2026 में भी कंपनी को Solar Group से 12 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला था।

ऑर्डर बुक होगी मजबूत

कंपनी का कहना है कि इस ऑर्डर से उसकी ऑर्डर बुक और मजबूत होगी। साथ ही आने वाले समय में रेवेन्यू बढ़ने की संभावना भी बेहतर होगी। यह ऑर्डर Solar Industries के साथ कंपनी के लंबे कारोबारी रिश्ते और उसकी सप्लाई क्षमता पर भरोसे को भी दिखाता है।

पहली तिमाही में शानदार नतीजे

A-1 Ltd ने FY27 की पहली तिमाही में भी अच्छा प्रदर्शन किया। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 170.5% बढ़कर 175.01 करोड़ रुपये पहुंच गया।

वहीं, टैक्स के बाद शुद्ध मुनाफा (PAT) 429.3% बढ़कर 16.73 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 3.16 करोड़ रुपये था।

कंपनी को आगे भी उम्मीद

A-1 Ltd का कहना है कि समय पर ऑर्डर पूरा करने से ग्राहकों के साथ रिश्ते और मजबूत होंगे। आगे भी कंपनी का फोकस बेहतर ऑपरेशनल प्रदर्शन, समय पर डिलीवरी और शेयरधारकों के लिए लंबी अवधि में वैल्यू बनाने पर रहेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Quality Power Q1 Results: मुनाफा 47% बढ़ा, ऑर्डर बुक दमदार; डिविडेंड का भी ऐलान

Quality Power Q1 Results: पावर इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनी Quality Power Electrical Equipments ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं।

कंपनी का एडजस्टेड कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 47% बढ़कर 54.5 करोड़ रुपये हो गया। यह पिछले साल की समान तिमाही में 37.1 करोड़ रुपये था। वहीं, रेवेन्यू 32% बढ़कर 256.4 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले 194.1 करोड़ रुपये थी।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन भी मजबूत

क्वालिटी पावर का एडजस्टेड EBITDA 50% बढ़कर 72.5 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, एडजस्टेड EBITDA मार्जिन 25% से बढ़कर 28.3% पर पहुंच गया। कंपनी ने बताया कि एडजस्टेड आंकड़ों में तुर्की के कारोबार पर Ind AS 29 के तहत दर्ज 7.82 करोड़ रुपये के गैर-नकद (Non-Cash) नुकसान को शामिल नहीं किया गया है।

रिपोर्टेड आधार पर EBITDA 64.7 करोड़ रुपये, EBITDA मार्जिन 25.2%, जबकि शुद्ध मुनाफा 46.7 करोड़ रुपये और PAT मार्जिन 18.2% रहा।

ऑर्डर बुक और नए प्रोजेक्ट पर फोकस

30 जून 2026 तक क्वालिटी पावर की कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक 1,945.5 करोड़ रुपये रही, जो FY26 की कुल रेवेन्यू का करीब 1.9 गुना है। तिमाही के दौरान कंपनी को 104.9 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले। इनमें अमेरिका के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए हाई-वोल्टेज रिएक्टर, जापान में FACTS सिस्टम और Hitachi Energy India से 400 kV इंस्ट्रूमेंट ट्रांसफॉर्मर के ऑर्डर शामिल हैं।

सांगली प्लांट में उत्पादन की तैयारी

क्वालिटी पावर के सांगली प्लांट में क्षमता विस्तार का काम जारी है। मशीनों की स्थापना की जा रही है और नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद अगस्त में ट्रायल प्रोडक्शन शुरू करने का लक्ष्य है। चेयरमैन और एमडी पीटी पांडियन ने कहा कि हाई-वोल्टेज और एनर्जी ट्रांजिशन सॉल्यूशंस की मजबूत मांग के चलते कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की अच्छी शुरुआत की है।

डिविडेंड और शेयर का हाल

क्वालिटी पावर ने FY27 के लिए 0.25 रुपये प्रति इक्विटी शेयर का अंतरिम लाभांश देने की भी घोषणा की है।

कंपनी का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 3.63% की गिरावट के साथ 1115 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 37.56% चढ़ा है। 1 साल में इसने 41.77% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 8.64 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q1 Results: ज्वेलरी कंपनी का मुनाफा 140% बढ़ा, रेवेन्यू 78% उछला; शेयरों पर नजर रहेगी

Sky Gold Q1 Results: मुंबई की B2B ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Sky Gold and Diamonds ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 78% बढ़कर 2,012.8 करोड़ रुपये रही। वहीं, टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) दोगुना से ज्यादा यानी 140% बढ़कर 104.9 करोड़ रुपये हो गया।

कंपनी ने कहा कि यह ग्रोथ संगठित ज्वेलरी रिटेलर्स से मजबूत मांग, हल्के वजन (Lightweight) और वैल्यू-एडेड ज्वेलरी की बढ़ती बिक्री और बेहतर मैन्युफैक्चरिंग एग्जीक्यूशन की वजह से आई है।

कैश फ्लो भी हुआ पॉजिटिव

Sky Gold ने बताया कि जून तिमाही में उसका ऑपरेटिंग कैश फ्लो पॉजिटिव रहा। इसका श्रेय एसेट-लाइट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल, एडवांस गोल्ड बिजनेस की बढ़ती हिस्सेदारी और एक्सपोर्ट पेमेंट जल्दी मिलने को दिया गया है।

हल्की ज्वेलरी और एक्सपोर्ट पर फोकस

स्काई गोल्ड अब हल्के वजन की ज्वेलरी, कम कैरेट के गहने और डायमंड-स्टडेड ज्वेलरी पर ज्यादा ध्यान दे रही है। उसका मानना है कि इससे प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और मजबूत होगा। साथ ही, एक्सपोर्ट कारोबार बढ़ाने पर भी कंपनी का फोकस है।

हाल ही में कंपनी ने लंदन में आयोजित Asiana UK-India Jewellery Expo में अपने प्रोडक्ट्स पेश किए। कंपनी के मुताबिक, उसे ब्रिटेन और यूरोप के खरीदारों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला और 30-45 करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक तैयार हुई।

₹8,100 करोड़ रेवेन्यू का टारगेट

स्काई गोल्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर मंगेश चौहान ने कहा कि संगठित ज्वेलरी बाजार और डिजाइन बेस्ड प्रोडक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। उनका मानना है कि भारत डिजाइन-बेस्ड ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बन सकता है।

कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 में 8,100 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, कंपनी का फोकस रेवेन्यू ग्रोथ, मुनाफे और मजबूत कैश फ्लो के बीच संतुलन बनाए रखने पर रहेगा।

स्काई गोल्ड के शेयरों का हाल

स्काई गोल्ड का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 4.61% बढ़कर 723 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 106.78% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने 169.37% का रिटर्न दिया है। 5 साल में 3,114% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 11.20 हजार करोड़ रुपये है।

Nifty Outlook: 10 अगस्त को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, एक्सपर्ट्स से जानिए

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Siemens Energy Stock Outlook: आगे 15% तक उछल सकता है शेयर, ब्रोकरेज ने दोहराई ‘बाय’ रेटिंग

सीमेंस एनर्जी इंडिया के शेयर में आगे 15 प्रतिशत तक की तेजी आने की गुंजाइश है। ऐसी उम्मीद मोतीलाल ओसवाल और नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के टारगेट प्राइस से मिली है। मोतीलाल ओसवाल ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग दोहराई है। वहीं टारगेट प्राइस 3,950 रुपये से बढ़ाकर 4,100 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। नुवामा ने ‘बाय’ रेटिंग और 4,200 रुपये प्रति शेयर का टारगेट बरकरार रखा है। यह टारगेट शेयर के BSE पर मौजूदा भाव 3648.75 रुपये से 15 प्रतिशत ज्यादा है। कंपनी के तिमाही नतीजे जारी होने के बाद ब्रोकरेज का व्यू सामने आया है।

सीमेंस एनर्जी इंडिया का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में मुनाफा सालाना आधार पर 67.8 प्रतिशत बढ़कर 440.9 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेशंस से रेवेन्यू 39.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2485.6 करोड़ रुपये रहा। कुल खर्च 1949.5 करोड़ रुपये के रहे। कंपनी अक्टूबर-दिसंबर को वित्त वर्ष के तौर पर फॉलो करती है। जून 2026 तिमाही में कंपनी का EBITDA एक साल पहले से 72.1 प्रतिशत बढ़कर 585.7 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेटिंग मार्जिन बेहतर होकर 23.6 प्रतिशत हो गया।

30 जून 2026 तक सीमेंस एनर्जी इंडिया का ऑर्डर बैकलॉग 19,331 करोड़ रुपये का था। कंपनी का पावर ट्रांसमिशन बिजनेस से रेवेन्यू सालाना आधार पर 41.98 प्रतिशत बढ़कर 1,386.3 करोड़ रुपये हो गया। पावर जेनरेशन सेगमेंट का रेवेन्यू सालाना आधार पर 36.02 प्रतिशत बढ़कर 1,099.3 करोड़ रुपये हो गया।

Siemens Energy पर ब्रोकरेज के तर्क

मोतीलाल ओसवाल ने अपने रिसर्च नोट में कहा कि सीमेंस एनर्जी इंडिया के जून तिमाही के नतीजे हर मामले में अनुमानों से बेहतर रहे। रेवेन्यू में बढ़ोतरी पावर ट्रांसमिशन और पावर जेनरेशन, दोनों सेगमेंट में मजबूत ग्रोथ की वजह से हुई। पावर ट्रांसमिशन सेगमेंट के लिए EBIT मार्जिन में भी सुधार हुआ और पावर जेनरेशन के लिए यह अच्छा बना रहा। कुल ऑर्डर इनफ्लो सालाना आधार पर 3 प्रतिशत बढ़कर 34 अरब रुपये हो गया, जिससे कुल ऑर्डर बुक 193 अरब रुपये पर पहुंच गई।

पावर ट्रांसमिशन के लिए इनफ्लो में सालाना आधार पर 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और आंकड़ा 24 अरब रुपये पर पहुंच गया। पावर जेनरेशन इनफ्लो सालाना आधार पर 10 प्रतिशत घटकर 10 अरब रुपये रह गया। ब्रोकरेज ने उम्मीद जताई है कि सीमेंस एनर्जी को रिन्यूएबल्स, डेटा सेंटर और स्टीम टर्बाइन जैसे क्षेत्रों में घरेलू और एक्सपोर्ट-बेस्ड मौकों से फायदा मिलता रहेगा।

नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि सीमेंस एनर्जी के मामले में अगले 12-24 महीनों में मौजूदा पुराने ऑर्डरों (बैकलॉग) को समय पर पूरा किया जाना और कलवा/ग्रीनफील्ड ट्रांसफॉर्मर व स्विचगियर क्षमता शुरू किया जाना वे महत्वपूर्ण चीजें होंगी, जिन पर नजर रखनी चाहिए। बेहतर काम-काज और मार्जिन के कारण नुवामान ने FY26E और FY27E के EPS अनुमानों को क्रमशः 12 प्रतिशत और 3 प्रतिशत बढ़ाया है।

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शेयर 6 महीनों में 33 प्रतिशत चढ़ा

Siemens Energy का मार्केट कैप बढ़कर लगभग 1.30 लाख करोड़ रुपये हो गया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 75 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर 6 महीनों में 33 प्रतिशत और साल 2026 में अब तक 43 प्रतिशत मजबूत हुआ है।

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विटल इलेक्टॉनिक्स को खरीदेगी RRP Electronics, ऑर्डर में जुड़ेंगे ₹90 करोड़

RRP Electronics Ltd ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनी Vital Electronics Pvt Ltd के रणनीतिक अधिग्रहण के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) और टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनी का कहना है कि यह कदम भारत में एक इंटीग्रेटेड सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

सेमीकंडक्टर से इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक बढ़ेगा कारोबार

RRP Electronics का दावा है कि इस अधिग्रहण के बाद उसकी OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) और ATMP (Assembly, Testing, Marking and Packaging) क्षमताएं और मजबूत होंगी। कंपनी अब सिर्फ सेमीकंडक्टर पैकेजिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के निर्माण में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाएगी।

Vital Electronics क्या करती है?

Vital Electronics एक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनी है। कंपनी Printed Circuit Board Assembly (PCBA), Surface Mount Technology (SMT), इलेक्ट्रोमैकेनिकल असेंबली, सिस्टम इंटीग्रेशन, टेस्टिंग, स्ट्रैटेजिक सोर्सिंग और बॉक्स-बिल्ड सॉल्यूशंस जैसी एंड-टू-एंड मैन्युफैक्चरिंग सेवाएं देती है।

ग्राहकों को मिलेगा वन-स्टॉप सॉल्यूशन

कंपनी के मुताबिक, अधिग्रहण के बाद RRP सेमीकंडक्टर पैकेजिंग से लेकर पूरी तरह तैयार इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट तक की सेवाएं दे सकेगी। उसका कहना है कि Vital Electronics उसके बनाए चिप्स को PCB पर लगाएगी और डिफेंस, ऑटोमोबाइल, इंडस्ट्रियल, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई सेक्टर के लिए तैयार इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बनाएगी।

ऑर्डर बुक और ग्रोथ पर रहेगा फोकस

कंपनी के मुताबिक, इस अधिग्रहण के बाद उसकी ऑर्डर बुक में करीब 90 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दिखाई दे रहा है। साथ ही अगले तीन वर्षों में कारोबार की ग्रोथ को लेकर भी कंपनी ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।

चार चरणों में होगा अधिग्रहण

RRP Electronics ने बताया कि वह चार चरणों में Vital Electronics की 100% हिस्सेदारी खरीदेगी। कंपनी का लक्ष्य मार्च 2027 तक 50% हिस्सेदारी और मार्च 2028 तक पूरा अधिग्रहण करने का है। हालांकि, यह तय माइलस्टोन पूरे होने और जरूरी नियामकीय मंजूरियों पर निर्भर करेगा। अधिग्रहण पूरा होने के बाद कंपनी, जरूरी मंजूरियां मिलने पर, Vital Electronics का विलय RRP Group की किसी लिस्टेड कंपनी में भी कर सकती है।

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Tata Sons IPO: टाटा संस को IPO लाना ही होगा? RBI से राहत नहीं मिली, अपर लेयर NBFC लिस्ट में बरकरार

Tata Sons IPO: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 अगस्त को अपर लेयर NBFC (NBFC-UL) की नई लिस्ट जारी की। इसमें टाटा संस का नाम बरकरार रखा गया है। इसका मतलब है कि RBI ने अभी तक टाटा संस को NBFC-UL फ्रेमवर्क से बाहर निकलने की मंजूरी नहीं दी है।

RBI ने कहा कि कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन रद्द कराने के लिए टाटा संस ने जो आवेदन दिया है, वह अभी जांच के दौर में है। केंद्रीय बैंक ने साफ किया कि अपर लेयर लिस्ट में टाटा संस को शामिल करने का मतलब यह नहीं है कि उसकी डीरजिस्ट्रेशन अर्जी खारिज हो गई है। उस पर अलग से फैसला लिया जाएगा।

अपर लेयर NBFC क्या है?

RBI ने कहा कि अपर लेयर में उन NBFC को रखा जाता है, जिन पर ज्यादा नियामकीय निगरानी की जरूरत होती है। फिलहाल इसके लिए 1 लाख करोड़ रुपये की एसेट सीमा तय है। हालांकि, RBI समय-समय पर इस सीमा की समीक्षा करता है और हर तीन साल में इसे दोबारा देखा जाएगा।

केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि अगर कोई NBFC एक बार अपर लेयर में आ जाती है, तो उसे कम से कम 5 साल तक इसी श्रेणी के कड़े नियमों का पालन करना होगा। भले ही बाद के वर्षों में वह तय मानदंडों पर खरी न उतरे।

किन कंपनियों के नाम हैं लिस्ट में?

नई लिस्ट में REC, PFC, IRFC, PNB Housing Finance, Sammaan Capital समेत कुल 17 NBFC शामिल हैं। RBI ने पहले नियमों में बदलाव करते हुए सरकारी मालिकाना हक वाली योग्य NBFC को भी अपर लेयर में शामिल करने की अनुमति दी थी।

हालांकि, सरकारी NBFC के लिए एक राहत है। उन्हें शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी नहीं होगा। लेकिन निजी कंपनियों को अपर लेयर NBFC बनने के तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना पड़ता है।

टाटा संस के लिए यह मामला क्यों अहम?

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस एक Core Investment Company (CIC) के रूप में रजिस्टर्ड है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये की एसेट थीं। यानी यह RBI की तय सीमा से काफी ऊपर है।

टाटा संस ने अपना CIC लाइसेंस रद्द कराने के लिए आवेदन किया था। ऐसा इसलिए, क्योंकि अगर कंपनी NBFC नहीं रहती, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होने की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है।

टाटा संस लिस्टिंग से क्यों बचना चाहती है?

टाटा संस को 2022 में पहली बार अपर लेयर NBFC में शामिल किया गया था। नियमों के मुताबिक, उसे 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना था। इसी वजह से कंपनी ने CIC लाइसेंस रद्द करने का आवेदन दिया था।

जून में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने RBI को पत्र लिखकर संभावित लिस्टिंग का विरोध किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कहा कि अगर टाटा संस की लिस्टिंग होती है, तो इससे टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी का लंबी अवधि स्वरूप बदल सकता है। साथ ही टाटा ट्रस्ट्स के परोपकारी उद्देश्यों पर भी असर पड़ सकता है।

HCC Q1 Results: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को ₹51 करोड़ का मुनाफा, ऑर्डर बुक मजबूत हुई

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Fcous: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को BMC से ₹1918 करोड़ का प्रोजेक्ट मिला, मुंबई में बनाएगी वाटर टनल

Stock in Fcous: शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप की कंपनी अफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) से 1,918 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी मुंबई में डिसैलिनेटेड यानी समुद्री पानी को साफ कर तैयार पेयजल की सप्लाई के लिए टनल बनाएगी। इस प्रोजेक्ट में डिजाइन, निर्माण, GST और ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस (O&M) भी शामिल है। कंपनी ने अभी इसकी समयसीमा नहीं बताई है।

मुंबई की पानी सप्लाई होगी मजबूत

यह टनल मनोरी के पंपिंग स्टेशन से चारकोप होते हुए कांदिवली के महावीर नगर तक बनाई जाएगी। डिसैलिनेशन प्लांट में समुद्र के पानी को पीने लायक बनाया जाएगा। इसके बाद इसी टनल के जरिए पानी शहर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया जाएगा। बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए इस प्रोजेक्ट को काफी अहम माना जा रहा है।

पहले भी BMC के साथ कर रही है काम

अफकॉन्स पहले से ही BMC के लिए 7.13 किलोमीटर लंबी कशेली-मुलुंड अंडरग्राउंड वाटर टनल बना रही है। इसके अलावा कंपनी नवी मुंबई, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी कई जल आपूर्ति परियोजनाओं पर काम कर रही है। पानी से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स अब कंपनी के कारोबार का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं।

148.67 करोड़ रुपये का आर्बिट्रेशन अवॉर्ड

हाल ही में अफकॉन्स को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना से जुड़े टनल T74-R मामले में 148.67 करोड़ रुपये का आर्बिट्रेशन अवॉर्ड भी मिला है। नए ऑर्डर और इस फैसले से कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत होगी। साथ ही आने वाले वर्षों में रेवेन्यू को भी सहारा मिलने की उम्मीद है।

अफकॉन्स के शेयरों का हाल

अफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर गुरुवार को 0.55% की गिरावट के साथ 279.35 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 15.86% गिरा है। वहीं, बीते 1 साल में यह 30.76% टूटा है। कंपनी का मार्केट कैप 10.27 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Hindustan Aeronautics Share Price: गोल्डमैन सैक्स ने अपग्रेड की रेटिंग, शेयर 5% चढ़ा

Hindustan Aeronautics Share Price: डिफेंस इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के शेयरों में 6 अगस्त को तेजी देखने को मिली। शेयर 5 फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है। शेयर में आज यह तेजी ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स के इस स्टॉक को अपग्रेड करने के बाद आई है। बता दें कि अक्टूबर 2025 में ब्रोकरेज द्वारा कवरेज शुरू करने के बाद से HAL को गोल्डमैन सैक्स से मिला यह पहला अपग्रेड है।

गोल्डमैन सैक्स ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL) पर अपनी रेटिंग को ‘Neutral’ से बदलकर ‘Buy’ (खरीदने की सलाह) कर दिया है और इसका प्राइस टारगेट भी ₹5,545 से बढ़ाकर ₹5,870 कर दिया है। नया प्राइस टारगेट गुरुवार के क्लोजिंग लेवल से 26% की बढ़त की संभावना दिखाता है।

गोल्डमैन सैक्स ने क्या दिया तर्क

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि तेजस Mk1A फाइटर जेट की डिलीवरी में लगभग दो साल की देरी के बाद, इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही से HAL के काम में तेजी आएगी। उनके चैनल चेक से पता चलता है कि GE एयरोस्पेस के मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही से F-404 इंजन की डिलीवरी को सुव्यवस्थित करने की संभावना है।

HAL की कमाई पर मार्केट की आम राय LCA तेजस Mk1A प्लेटफॉर्म की संभावनाओं पर बहुत ज़्यादा केंद्रित लगती है और इसमें आने वाले दूसरे प्लेटफॉर्म की डिलीवरी पर ध्यान नहीं दिया गया है।

पिछली तिमाही की अर्निंग्स कॉल के दौरान, HAL के मैनेजमेंट ने बताया था कि उन्हें GE से छह इंजन मिले हैं और एयरक्राफ्ट का टेस्ट चल रहा है। मैनेजमेंट को उम्मीद थी कि अगस्त और सितंबर तक सभी मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा और स्थिति स्थिर हो जाएगी।

HAL की योजना FY27 में 20 एयरक्राफ्ट डिलीवर करने की है, जबकि FY26 में शुरुआती टारगेट 12 था, जिसे बाद में घटाकर 5 से 6 कर दिया गया था।

LCA Mk1A ऑर्डर का साइज़ ₹48,000 करोड़ है, जो FY26 के अंत में कंपनी के कुल ₹2.5 लाख करोड़ के ऑर्डर बुक का एक अहम हिस्सा है।

28 एनालिस्ट हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स को कवर करते हैं, जिनमें से 23 की रेटिंग ‘buy’ है, 1 की ‘hold’ है और 4 की रेटिंग ‘Sell’ है। प्राइस टारगेट के आम अनुमानों के अनुसार, मौजूदा स्तरों से इसमें 10.1% की बढ़त की संभावना है।

गुरुवार को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के शेयर 5.36% बढ़कर ₹4,895.80 पर ट्रेड कर रहे हैं। पिछले एक महीने में इस स्टॉक में 10% की बढ़त हुई है, जिससे साल की शुरुआत से अब तक इसमें कुल 11.3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।