IT Stocks: दो दिन में आईटी इंडेक्स 6% चढ़ा, क्या TCS, इंफोसिस जैसी कंपनियों का बुरा दौर खत्म? जानिए एक्सपर्ट्स से

IT Stocks: मंगलवार, 28 जुलाई को एशियाई टेक शेयरों में भारी बिकवाली के बीच निफ्टी IT इंडेक्स करीब 3% चढ़ गया। ग्लोबल मार्केट में AI पर होने वाले भारी निवेश और उससे मिलने वाले रिटर्न को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका असर दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान की टेक कंपनियों पर दिखा। हालांकि, भारतीय IT कंपनियां इस दबाव से काफी हद तक बची रहीं, क्योंकि यहां AI पर फोकस करने वाली कंपनियां बहुत कम हैं।

पिछले दो कारोबारी सत्रों में निफ्टी IT इंडेक्स करीब 6% चढ़ चुका है। इसकी एक बड़ी वजह Jefferies की रिपोर्ट रही, जिसमें ब्रोकरेज ने सेक्टर की रेटिंग ‘Underweight’ से बढ़ाकर ‘Neutral’ कर दी। यह तेजी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले आई है। बाजार को उम्मीद है कि फेड इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।

भारतीय IT सेक्टर कैसे बचा?

Nexedge Capital के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर गौरव कुलश्रेष्ठ का कहना है कि दुनियाभर में AI को लेकर जो उत्साह ठंडा पड़ा है, उससे भारतीय IT सेक्टर को संभलने का मौका मिला है। हालांकि, उनका मानना है कि बड़ी IT कंपनियों के लिए चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। जब तक वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी पर खर्च नहीं बढ़ता, तब तक सेक्टर में लंबी तेजी आना मुश्किल है।

Share.Market by PhonePe के मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन के मुताबिक, भारतीय IT कंपनियों का बिजनेस मॉडल एसेट-लाइट है। इन्हें AI डेटा सेंटर या चिप बनाने वाली कंपनियों की तरह अरबों डॉलर का पूंजीगत निवेश नहीं करना पड़ता। यही वजह है कि AI निवेश को लेकर बढ़ी चिंताओं का असर भारतीय IT कंपनियों पर कम पड़ा।

उनका कहना है कि पिछले कई महीनों की गिरावट के बाद IT शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर पहुंच गए थे। ऐसे में घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एशियाई हार्डवेयर कंपनियों से पैसा निकालकर भारतीय IT शेयरों में लगाया।

निफ्टी IT इंडेक्स का टेक्निकल आउटलुक

मयंक जैन के मुताबिक, निफ्टी IT इंडेक्स हालिया कारोबारी सत्र में 3.5% से ज्यादा चढ़कर 30,500 के करीब बंद हुआ। कई महीनों की गिरावट के बाद इसमें मजबूत रिकवरी देखने को मिली। इस तेजी के दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम भी बढ़ा। इससे पता चलता है कि निचले स्तरों पर अच्छी खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग हुई।

टेक्निकल चार्ट पर इंडेक्स ने अपने 20-डे और 50-डे EMA के ऊपर वापसी कर ली है। 28,600-28,700 का स्तर अब मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। हालांकि, इंडेक्स अभी भी 200-डे EMA यानी करीब 31,800 के नीचे कारोबार कर रहा है। मयंक जैन का कहना है कि 31,800-32,000 का दायरा सबसे बड़ा रेजिस्टेंस है। इस स्तर के ऊपर टिकने पर ही लंबी अवधि की तेजी की पुष्टि होगी। फिलहाल रिकवरी के संकेत मजबूत हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

TCS

जैन के मुताबिक, TCS का शेयर फिलहाल अपने 20 DMA और 50 DMA के ऊपर कारोबार कर रहा है। इससे शॉर्ट टर्म में मजबूती के संकेत मिलते हैं। हालांकि, शेयर अभी भी 200 DMA से नीचे है। उनका कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत डिविडेंड और बेहतर वैल्यूएशन इसे आकर्षक बनाते हैं। वहीं, ट्रेडर्स को 200 DMA के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट का इंतजार करना चाहिए।

Infosys

मयंक जैन का कहना है कि Infosys का शेयर 20 DMA के ऊपर लौट आया है, लेकिन अभी भी 50 DMA और 200 DMA से नीचे है। कंपनी की मजबूत कैश फ्लो, 4.3% डिविडेंड यील्ड और आकर्षक वैल्यूएशन इसे डिफेंसिव स्टॉक बनाते हैं। हालांकि, शेयर में बड़ी तेजी तभी आ सकती है, जब कंपनी की ग्रोथ गाइडेंस और बिजनेस आउटलुक बेहतर हो।

HCL Technologies

जैन के हिसाब से बड़े IT शेयरों में HCL Technologies का टेक्निकल सेटअप सबसे मजबूत दिख रहा है। शेयर 20 DMA और 50 DMA के ऊपर बना हुआ है और अब 200 DMA के पास अहम रेजिस्टेंस का सामना कर रहा है। अगर शेयर अच्छे वॉल्यूम के साथ इस स्तर को पार कर लेता है, तो इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है।

Tech Mahindra

मयंक जैन के मुताबिक, Tech Mahindra भी 20 DMA और 50 DMA के ऊपर कारोबार कर रहा है। इससे शेयर में रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, 1,700 रुपये के आसपास मौजूद 200 DMA अभी बड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है। उनका मानना है कि इस स्तर तक आने वाली छोटी गिरावटें, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा खरीदारी का मौका हो सकती हैं।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

मयंक जैन का कहना है कि आने वाले समय में भारतीय IT सेक्टर की चाल काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर निर्भर करेगी। अगर अमेरिका में ब्याज दरें कम होती हैं, तो बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च बढ़ा सकती हैं। इससे भारतीय IT कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी।

L&T Q1 Results: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को ₹4123 करोड़ मुनाफा, ऑर्डर बुक ₹7.79 लाख करोड़ तक पहुंची

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L&T Q1 Results: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को ₹4123 करोड़ मुनाफा, ऑर्डर बुक ₹7.79 लाख करोड़ तक पहुंची

L&T Q1 Results: देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने जून 2026 तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 14% बढ़कर 4,123 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 3,617 करोड़ रुपये था। यह बाजार के अनुमान से भी बेहतर रहा। वहीं, कंपनी की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 6.7% बढ़कर 67,942 करोड़ रुपये पहुंच गई।

L&T की ऑर्डर बुक

इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग कंपनी L&T को जून तिमाही में 1,08,014 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले। यह पिछले साल के मुकाबले 14% ज्यादा है। कंपनी को रिहायशी और कमर्शियल बिल्डिंग, ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑफशोर विंड, हेवी इंजीनियरिंग और मेटल सेक्टर से बड़े ऑर्डर मिले।

कंपनी की कुल ऑर्डर बुक बढ़कर 7,78,954 करोड़ रुपये हो गई। इसमें अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर की हिस्सेदारी 52% है। तिमाही के दौरान कंपनी की कुल रेवेन्यू में 51% योगदान विदेशी कारोबार का रहा।

मार्जिन पर दबाव

तिमाही में L&T का EBITDA 3.2% घटकर 6,116 करोड़ रुपये रहा। वहीं, EBITDA मार्जिन पिछले साल के 9.9% से घटकर 9% पर आ गया। इसके बावजूद कंपनी का मुनाफा बेहतर रहा।

ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग से मजबूती

L&T के ग्रीन एनर्जी बिजनेस को तिमाही में 33,042 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले। यह पिछले साल से 58% ज्यादा है। इसकी बड़ी वजह ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट रहे। हालांकि, सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते इस सेगमेंट की रेवेन्यू 11% घट गई।

वहीं, मैन्युफैक्चरिंग एंड प्रोडक्ट्स कारोबार में ऑर्डर इनफ्लो 74% बढ़कर 5,535 करोड़ रुपये पहुंच गया। रिफाइनरी इक्विपमेंट से जुड़े बड़े ऑर्डर मिलने का फायदा कंपनी को मिला।

टेक और फाइनेंस ने भी दिखाया दम

L&T के टेक्नोलॉजी, प्लेटफॉर्म्स एंड सर्विसेज कारोबार की रेवेन्यू 15% बढ़कर 14,627 करोड़ रुपये हो गई। दूसरी ओर, फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस की ऑपरेशनल इनकम 27% बढ़कर 5,042 करोड़ रुपये रही। इस दौरान कंपनी का कुल लोन बुक 1,29,634 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

रियल्टी कारोबार में भी तेजी

L&T के रियल्टी बिजनेस में नए प्रोजेक्ट्स की अच्छी बुकिंग हुई। ऑर्डर इनफ्लो 32% बढ़कर 1,299 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, रेवेन्यू दोगुने से ज्यादा बढ़कर 1,009 करोड़ रुपये पहुंच गई।

चेयरमैन ने क्या कहा?

L&T के चेयरमैन और MD एस. एन. सुब्रह्मण्यन ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने अलग-अलग सेक्टर और बाजारों पर फोकस बनाए रखा। उन्होंने कहा कि कंपनी ने इस तिमाही में Nabha Power की हिस्सेदारी बेचने का काम पूरा किया है। साथ ही, Hyderabad Metro में अपनी 100% हिस्सेदारी बेचने के लिए भी समझौता किया है। इससे कंपनी अपने पोर्टफोलियो को और मजबूत बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

L&T के शेयर

L&T के शेयर मंगलवार को 0.63% की बढ़त के साथ 3,830 रुपये पर बंद हुए। पिछले 1 साल में स्टॉक ने 11.92% का रिटर्न दिया है। वहीं, 5 साल में इससे निवेशकों को 139.16% का मुनाफा हुआ है। कंपनी का मार्केट कैप 5.27 लाख करोड़ रुपये है।

Tata Capital Q1 Results: टाटा की कंपनी को ₹1547 करोड़ का मुनाफा, गोल्ड लोन कारोबार में भी एंट्री

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Suzlon Q1 Results: सुजलॉन एनर्जी का मुनाफा गिरा, मार्जिन भी घटा; 7% टूटा स्टॉक

Suzlon Q1 Results: विंड एनर्जी कंपनी सुजलॉन एनर्जी के जून तिमाही के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 6% घटकर ₹305 करोड़ रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹324 करोड़ था। हालांकि, रेवेन्यू 22% बढ़कर ₹3,829 करोड़ पहुंच गया।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन कैसा रहा?

सुजलॉन का EBITDA ₹595 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹599 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 19% से घटकर 15.5% पर आ गया। यानी कंपनी की ऑपरेटिंग कमाई पर दबाव दिखा।

किस कारोबार से कितनी कमाई

रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस कारोबार का रेवेन्यू ₹2,494 करोड़ से बढ़कर ₹3,174 करोड़ हो गया। रिन्यूएबल एनर्जी एसेट मैनेजमेंट सर्विसेज का रेवेन्यू ₹632 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹584 करोड़ था। हालांकि, फाउंड्री और फोर्जिंग कारोबार का रेवेन्यू ₹146 करोड़ से घटकर ₹126 करोड़ रह गया।

ऑर्डर बुक और डिलीवरी

जून तिमाही में सुजलॉन ने 506 मेगावाट की डिलीवरी की। यह पिछले साल से 14% ज्यादा है। वहीं, 269 मेगावाट की कमिशनिंग हुई, जो सालाना आधार पर दोगुने से भी ज्यादा है। तिमाही के अंत तक कंपनी की ऑर्डर बुक 6.1 गीगावाट (GW) रही। इसमें 84% ऑर्डर सरकारी कंपनियों और कमर्शियल एंड इंडस्ट्रियल (C&I) सेक्टर से मिले हैं।

सुजलॉन के शेयरों का हाल

कमजोर नतीजों के बाद मंगलवार को सुजलॉन एनर्जी का शेयर करीब 7% गिरकर 50 रुपये से नीचे आ गया। दोपहर 2.16 बजे तक सुजलॉन का स्टॉक 49.69 % गिरकर 49.69 रुपये पर कारोबार कर रहा था। इस गिरावट के साथ 2026 में अब तक स्टॉक का रिटर्न भी निगेटिव हो गया है। पिछले 1 साल में स्टॉक में 17.81% की गिरावट आई है।

सुजलॉन का बिजनेस क्या है

सुजलॉन एनर्जी विंड एनर्जी सेक्टर की कंपनी है। यह विंड टरबाइन बनाती है और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सप्लाई, इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस की सेवाएं देती है। कंपनी EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन), रिन्यूएबल एनर्जी एसेट मैनेजमेंट और फाउंड्री-फोर्जिंग कारोबार में भी मौजूद है। इसका कारोबार भारत के साथ कई विदेशी बाजारों में भी फैला हुआ है।

Coforge Share Price: कोफोर्ज का शेयर बना रॉकेट, जून तिमाही के नतीजों का असर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Coforge Share Price: कोफोर्ज का शेयर बना रॉकेट, जून तिमाही के नतीजों का असर

कोफोर्ज का शेयर 28 जुलाई को रॉकेट बन गया। सुबह में शेयर मजबूत खुले। कुछ ही देर बाद शेयर में जबर्दस्त उछाल दिखा। 1:18 बजे शेयर का प्राइस 10.15 फीसदी के उछाल के साथ 1,683.90 रुपये पर चल रहा था। शेयरों में तेजी की वजह कंपनी के जून तिमाही के नतीजे हैं। कंपनी ने 27 जुलाई की देर रात नतीजों का ऐलान किया। इसका असर 28 जुलाई को शेयरों पर दिखा।

Coforge के जून तिमाही के नतीजों में पहली बार Encore Holdings का भी प्रदर्शन शामिल रहा। इसलिए यह ध्यान में रखना जरूरी है कि जून तिमाही के नतीजों की तुलना मार्च तिमाही के नतीजों और एक साल पहले के जून तिमाही के नतीजों से नहीं की जा सकती। कोफोर्ज आईटी सॉल्यूशंस ऑफर करती है।

जून तिमाही में कोफोर्ज का रेवेन्यू डॉलर में 21.1 फीसदी बढ़कर 59.2 करोड़ डॉलर रहा। मार्च तिमाही में रेवेन्यू 48.91 करोड़ डॉलर था। जून तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट तिमाही दर तिमाही आधार पर 15.3 फीसदी गिरकर 518.6 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के प्रॉफिट पर कुछ खास खर्चों का असर पड़ा। इसमें Encora के अधिग्रहण और इंटिग्रेशन पर 61.3 करोड़ रुपये का खर्च शामिल है। कंपनी का लीगल खर्च 5 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने कस्टमर रिसीवएबल्स के लिए 10.8 करोड़ का प्रोविजन किया। इन वजहों से 22.1 करोड़ रुपये के फॉरेंस गेंस का फायदा नहीं मिला।

जून तिमाही में रुपये में कंपनी का रेवेन्यू मार्च तिमाही के मुकाबले 24.2 फीसदी बढ़कर 5,527.7 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का मार्जिन 16 फीसदी रहा। मार्च तिमाही में यह 16.5 फीसदी था। अगर अधिग्रहण पर हुआ खर्च हटा दिया जाए तो कंपनी की ऑर्गेनिक कॉन्स्टैंट करेंसी ग्रोथ 1.1 फीसदी रही। एग्जिटेड बिजनेसेज को छोड़ दिया जाए तो यह 5.2 फीसदी रहता।

कोफोर्ज ने नतीजों के बाद अपनी रिलीज में बताया कि कम मार्जिन वाले 1.5 करोड़ डॉलर के इंडियन गवर्नमेंट पोर्टफोलियो का एग्जिट प्लान के मुताबिक था। इसके अलावा जून तिमाही के प्रदर्शन पर डेटा सेंटर के 40 लाख डॉलर के डिसइनवेस्टमेंट का असर पड़ा। कंबाइंड EBIT मार्जिन 16 फीसदी रहा, जो कंपनी के 15.5 फीसदी के पूरे साल के गाइडेंस से ज्यादा है।

कोफोर्ज ने जून तिमाही में 69.1 करोड़ डॉलर के नए ऑर्डर हासिल किए। इससे कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 222.8 करोड़ डॉलर तक पहुंच गई। कंपनी ने प्रति शेयर 4 रुपये के अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया। इसकी रिकॉर्ड डेट 2 अगस्त होगी। इस साल कोफोर्ज का शेयर 3 फीसदी गिरा है। यह 52 हफ्तों के अपने 1,938 रुपये के हाई से करीब 20 फीसदी नीचे है।

Stocks to Watch: 28 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 15 स्टॉक्स, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: शेयर बाजार में 28 जुलाई को कई शेयरों पर निवेशकों की नजर रहेगी। कुछ कंपनियों ने तिमाही नतीजे जारी किए हैं। कुछ ने बड़े ऑर्डर, मैनेजमेंट में बदलाव और फंड जुटाने जैसे अहम ऐलान किए हैं। वहीं, कुछ कंपनियां कल अपने जून तिमाही के नतीजे पेश करेंगी। ऐसे में इन 15 शेयरों में कारोबार के दौरान हलचल देखने को मिल सकती है।

Meesho

ई-कॉमर्स कंपनी मीशो में निवेशक Elevation Capital करीब ₹1,200 करोड़ का ब्लॉक डील कर अपनी हिस्सेदारी बेच सकता है। सूत्रों के मुताबिक फर्म के पास जून 2026 तक कंपनी में 12.04% हिस्सेदारी थी। इस डील के जरिए वह अपने निवेश का एक हिस्सा भुनाने की तैयारी में है।

Coal India

महारत्न सरकारी कंपनी कोल इंडिया का जून तिमाही का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.69% बढ़कर ₹8,852 करोड़ रहा। कंपनी का रेवेन्यू बढ़ा, लेकिन EBITDA और मार्जिन में गिरावट दर्ज की गई। कंपनी ने ₹5.50 प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है।

IndiGo

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने अपने मैनेजमेंट में बदलाव किया है। कंपनी ने गौरव नेगी को 27 जुलाई 2026 से मैनेजिंग डायरेक्टर का सलाहकार नियुक्त किया है। वहीं, किरण थदिमरी 28 जुलाई 2026 से कंपनी के नए चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) का पद संभालेंगे।

TVS Motor

दोपहिया और तिपहिया गाड़ी बनाने वाली कंपनी TVS मोटर ने अपनी सब्सिडियरी TVS Credit Services में 4.4% अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदी है। कंपनी ने यह सौदा ₹711 करोड़ में किया है। इस निवेश के बाद TVS Credit Services में उसकी हिस्सेदारी और बढ़ जाएगी।

Vodafone Idea

टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया (Vi) छह टेलीकॉम सर्किलों में खत्म हो रही स्पेक्ट्रम वैधता का नवीनीकरण नहीं करने पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक इन सर्किलों में स्पेक्ट्रम की वैधता 5 दिसंबर 2026 को खत्म होगी। फिलहाल कंपनी का इन लाइसेंसों को रिन्यू कराने का इरादा नहीं है।

Tata Chemicals

केमिकल कंपनी टाटा केमिकल्स को जून तिमाही में घाटा हुआ है। कंपनी को ₹17 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस हुआ। पिछले साल इसी तिमाही में ₹252 करोड़ का मुनाफा हुआ था। कंपनी ने बताया कि कम कीमत मिलने, दूसरे स्रोतों से कम आय और जॉइंट वेंचर से कम कमाई की वजह से उसके नतीजों पर दबाव पड़ा।

Godfrey Phillips

सिगरेट और तंबाकू उत्पाद बनाने वाली कंपनी गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया ने जून तिमाही में कमजोर नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का मुनाफा और रेवेन्यू, दोनों पिछले साल की तुलना में घटे हैं। कंपनी के मार्जिन पर जनवरी में बढ़ाई गई एक्साइज ड्यूटी का असर देखने को मिला।

Tata Power

टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा पावर ने जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट 11% बढ़कर ₹1,401 करोड़ रहा। रिन्यूएबल एनर्जी, ट्रांसमिशन और जनरेशन कारोबार की मजबूत ग्रोथ ने कंपनी के नतीजों को सहारा दिया। हालांकि मार्जिन पर दबाव बना रहा।

Tata Motors

ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स ने कहा है कि गुजरात में आई भारी बाढ़ की वजह से उसके सानंद प्लांट और सप्लायर यूनिट्स का कामकाज अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ है। इसका असर कंपनी की कई प्रमुख पैसेंजर व्हीकल्स के प्रोडक्शन पर पड़ा है।

HDFC Bank

निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक ने महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MSRDC) डिपॉजिट मामले की आंतरिक जांच पूरी कर ली है। बैंक के बोर्ड ने कहा कि इसमें शामिल कर्मचारियों का मामला कारोबारी सीमा से आगे बढ़ने का था। हालांकि, किसी तरह की गलत मंशा, निजी फायदा या अनुचित इरादे के सबूत नहीं मिले।

Northern Arc Capital

एनबीएफसी कंपनी नॉर्दर्न आर्क कैपिटल का जून तिमाही का नेट प्रॉफिट 17.6% बढ़कर ₹121.8 करोड़ रहा। कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 44.2% बढ़ी, जबकि कुल रेवेन्यू 30% बढ़कर ₹767.5 करोड़ पहुंच गया।

Gravita India

रीसाइक्लिंग कंपनी ग्रेविटा इंडिया का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट जून तिमाही में 14.1% बढ़कर ₹106.4 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹93.3 करोड़ था। इससे साफ है कि कंपनी ने लगातार मुनाफे की ग्रोथ बनाए रखी है।

Bharat Electronics

सरकारी रक्षा कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) ने जून तिमाही में बाजार के अनुमान के मुतबाकि नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का मुनाफा और रेवेन्यू अनुमान से थोड़ा बेहतर रहा। हालांकि, ऑपरेटिंग मार्जिन उम्मीद से कमजोर रहा। कंपनी ने अधिकृत शेयर पूंजी बढ़ाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।

Welspun Corp

स्टील पाइप बनाने वाली कंपनी वेलस्पन कॉर्प को अमेरिका से करीब ₹960 करोड़ का नया ऑर्डर मिला है। इसके बाद कंपनी की ग्लोबल ऑर्डर बुक ₹25,750 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। यह ऑर्डर अमेरिका के लिटिल रॉक प्लांट से पूरा किया जाएगा।

Adani Energy Solutions

बिजली ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए फंड जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी की QIP समिति ने इश्यू खोलने के साथ ₹1,698.15 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। यह कीमत SEBI के नियमों के तहत तय किए गए प्राइसिंग फॉर्मूले के आधार पर निर्धारित की गई है।

तिमाही नतीजे जारी करेंगी ये कंपनियां

कई कंपनियां मंगलवार को जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें Ambuja Cements, Cholamandalam Investment and Finance Company, City Union Bank समेत कई कंपनियां शामिल हैं। निवेशकों की नजर तिमाही नतीजों के साथ-साथ कंपनियों के मैनेजमेंट की भविष्य की रणनीति पर भी रहेगी।

Coal India Q1 Results: सरकारी कंपनी को ₹8852 करोड़ का मुनाफा, हर शेयर पर ₹5.50 का डिविडेंड देगी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Focus: पाइप कंपनी को अमेरिका से ₹960 करोड़ का ऑर्डर मिला, 6 महीने में स्टॉक 121% चढ़ा

Stock in Focus: पाइप बनाने वाली कंपनी वेलस्पन कॉर्प को अमेरिका से करीब ₹960 करोड़ का नया ऑर्डर मिला है। कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को इसकी जानकारी दी।

यह ऑर्डर अमेरिका के लिटिल रॉक स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से कोटेड लाइन पाइप की सप्लाई के लिए मिला है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची ऑर्डर बुक

इस नए ऑर्डर के बाद वेलस्पन कॉर्प की कुल ग्लोबल ऑर्डर बुक करीब ₹25,750 करोड़ (करीब 2.7 अरब डॉलर) पर पहुंच गई है। कंपनी के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी ऑर्डर बुक है।

कंपनी का कहना है कि इससे आने वाले समय में रेवेन्यू की अच्छी तस्वीर दिखाई देती है। साथ ही, भारत और अमेरिका में मौजूद उसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल भी होगा।

दो साल में पूरा होगा ऑर्डर

वेलस्पन कॉर्प ने बताया कि इस ऑर्डर को वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 के दौरान पूरा किया जाएगा।

कंपनी का कहना है कि लगातार मिल रहे बड़े ऑर्डर उसकी लंबी अवधि की ग्रोथ को मजबूत करेंगे। साथ ही, वैश्विक पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में उसकी मौजूदगी भी और मजबूत होगी।

वेलस्पन कॉर्प के शेयर

सोमवार को वेलस्पन कॉर्प के शेयर 0.19% चढ़कर 1,599.90 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 121.64% चढ़ा है। इसने बीते 5 साल में 1,055.58% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 42.19 हजार करोड़ रुपये है।

क्या बनाती है कंपनी?

वेलस्पन कॉर्प स्टील पाइप और पाइपलाइन सॉल्यूशंस बनाने वाली कंपनी है। कंपनी तेल और गैस, पानी, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए बड़े व्यास (Large Diameter) वाले पाइप बनाती है। भारत के अलावा अमेरिका में भी इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं और यह दुनिया के कई देशों में अपने उत्पादों की सप्लाई करती है।

Godfrey Phillips Q1 Results: सिगरेट कंपनी का मुनाफा 44% गिरा, डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट का ऐलान

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Laurus Labs Q1 Results: मार्जिन 30% उछला, रेवेन्यू 29% बढ़ा, दूसरे पैरामीटर्स भी बेहतर रहे नतीजे

Laurus Labs Q1 Results:फार्मास्यूटिकल कंपनी लॉरस लैब्स ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया है , कंपनी के तिमाही नतीजे सभी पैरामीटर्स पर साल-दर-साल के आधार पर अच्छे रहे है। कंपनी ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए ₹2,026 करोड़ का रेवेन्यू बताया, जो पिछले साल के ₹1,570 करोड़ के आंकड़े से 29% ज़्यादा है।

तिमाही के लिए इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइज़ेशन से पहले की कमाई (EBITDA) साल-दर-साल आधार पर 67% बढ़कर ₹382.1 करोड़ से ₹638.3 करोड़ पर हो गया।

तिमाही के लिए EBITDA मार्जिन साल-दर-साल के आधार पर 24.3% से सात परसेंटेज पॉइंट्स से ज़्यादा बढ़कर 31.5% हो गया। कंपनी के लिए यह मार्जिन कई सालों में सबसे ज़्यादा है, जिसमें अच्छे प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेटिंग लेवरेज की मदद मिली है।

जून तिमाही के आखिर में तिमाही के लिए ग्रॉस मार्जिन पिछले साल के 59.4% और मार्च तिमाही के 61.4% से बढ़कर 62.7% हो गया है।

अलग- अलग सेगमेंट का कैसा रहा प्रदर्शन

लॉरस लैब्स का CDMO बिज़नेस रेवेन्यू साल-दर-साल आधार पर 67% और लगातार 48% बढ़कर ₹870 करोड़ हो गया। कंपनी ने इस ग्रोथ का क्रेडिट लेट-स्टेज क्लिनिकल प्रोजेक्ट्स और कमर्शियल API सप्लाई की लगातार प्रोग्रेस को दिया। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके पास 125 से ज़्यादा एक्टिव प्रोजेक्ट्स के साथ एक बढ़ती हुई पाइपलाइन है।

लॉरस ने अपने इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन में कहा कि वह कस्टमर डिमांड के आधार पर कमर्शियल स्केल पेप्टाइड्स ब्लॉक को भी आगे बढ़ा रही है।

अफोर्डेबल मेडिसिन्स बिज़नेस का रेवेन्यू तिमाही के दौरान 10% बढ़कर ₹1,156 करोड़ हो गया। हालांकि, यह आंकड़ा सीक्वेंशियल बेसिस पर 5% कम था क्योंकि इसने मार्च क्वार्टर में ₹1,223 करोड़ का आंकड़ा बताया था।

लॉरस ने कहा कि डिवीजन के पास एक हेल्दी ऑर्डर बुक, स्टेबल ARV और स्थापित वॉल्यूम ग्रोथ है, जिससे 10% ग्रोथ हुई। इसने कहा कि इस बिज़नेस के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन की चुनौतियां बनी हुई हैं।

कंपनी इमर्जिंग मार्केट्स में प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन बढ़ा रही है। अपने बिज़नेस के मौके को मजबूत करने के लिए, इसने साउथ अफ्रीका में एक ऑफिस भी खोला है।

रिज़ल्ट अनाउंसमेंट के बाद लॉरस लैब्स के शेयर आज 2% से ज्यादा बढ़कर ₹1,601.20 पर बंद हुआ। 2026 में अब तक स्टॉक 44% ऊपर है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Infosys shares Price: Q1 नतीजों के बाद शेयर 2% टूटा, बना निफ्टी का टॉप लूजर, ब्रोकरेज भी हुए सर्तक

Infosys shares Price:  मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से भारत की दूसरी सबसे बड़ी IT सर्विस कंपनी इंफोसिस  (Infosys ) के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। 24, जुलाई को BSE पर इंफोसिस का शेयर 2.5% गिरकर दिन के सबसे निचले स्तर ₹1,023.30 प्रति शेयर पर पहुंच गया। तिमाही नतीजों के ऐलान के बाद आई।

बता दें कि IT कंपनी ने FY27 की अप्रैल-जून तिमाही के लिए कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफ़िट में साल-दर-साल (YoY) 12.3% की बढ़ोतरी के साथ ₹7,769 करोड़ बताया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹6,921 करोड़ था। हालांकि, पिछली तिमाही के आधार पर, नेट प्रॉफ़िट मार्च तिमाही (Q4FY26) में बताए गए ₹8,501 करोड़ से 8.6% कम हो गया।

IT कंपनी ने जून तिमाही में ऑपरेशन से ₹48,211 करोड़ का रेवेन्यू पोस्ट किया, जिसमें YoY में 14% और तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) 3.9% की ग्रोथ दर्ज की गई। Q1FY26 में रेवेन्यू ₹42,279 करोड़ और Q4FY26 में ₹46,402 करोड़ रहा। कॉन्स्टेंट करेंसी (CC) टर्म्स में, रेवेन्यू YoY में 2.4% और QoQ में 1% बढ़ा।

स्टॉक पर क्या है ब्रोकरेजज फर्मों की राय 

HSBC

HSBC उन दो बड़े डाउनग्रेड में से एक है जो इंफोसिस को उसके नतीजों के बाद मिले हैं। ब्रोकरेज ने स्टॉक पर अपनी रेटिंग को पहले की “buy” रेटिंग से घटाकर “hold” कर दिया है और अपना टारगेट प्राइस भी पहले के ₹1,340 से घटाकर ₹1,110 कर दिया है।

HSBC ने अपने नोट में लिखा कि हालांकि गाइडेंस में कटौती की उम्मीद थी, लेकिन यह रकम आम उम्मीदों से ज़्यादा थी। हालांकि HSBC ने इंफोसिस के नियर-टर्म वैल्यूएशन को “सस्ता” बताया है, लेकिन उसे उम्मीद है कि नियर-टर्म क्वार्टर कमजोर रहेंगे।

जेपी मॉर्गन

जेपी मॉर्गन ने भी इंफोसिस को उसकी पिछली “ओवरवेट” रेटिंग से डाउनग्रेड करके “Neutral” कर दिया है और स्टॉक का प्राइस टारगेट ₹1,050 रखा है। रेवेन्यू गाइडेंस में भारी कटौती को बताया और कहा कि ग्रोथ मोमेंटम को अब कई झटके लगे हैं, जिसमें कमजोर डिमांड, बढ़ता AI डिफ्लेशन, और डेमलर में चुनौतियां और एनर्जी, यूटिलिटीज रिसोर्सेज सर्विसेज (EURS) कॉन्ट्रैक्ट का खत्म होना शामिल है।

इंफोसिस का नया ऑर्गेनिक गाइडेंस, जो नेगेटिव 0.2% से पॉजिटिव 1.3% तक है, तेज मंदी की ओर इशारा करता है और वह भी मुश्किल माहौल में 0.4% से 1.4% कंपाउंड क्वार्टरली ग्रोथ रेट (CQGR) बनाए रखने पर निर्भर करता है।

CLSA

ब्रोकरेज ने इंफोसिस पर अपनी “outperform” रेटिंग राय दी है और इसके लिए टारगेट प्राइस ₹1,109 रखा है।CLSA ने कहा कि गाइडेंस में कटौती निराशाजनक थी, लेकिन EBIT मार्जिन बेहतर थे और ऑर्डर बुक भी स्थिर थी।इसने आशीष कुमार दाश को CEO-डेजिग्नेट के तौर पर नियुक्त करने को इंफोसिस के इतिहास में पहला मौका बताया, जब किसी इनसाइडर नॉन-फाउंडर को यह मौका दिया गया हो।

नोमुरा

नोमुरा ने इंफोसिस पर अपनी “Buy” रिकमेंडेशन बनाए रखी है और प्राइस टारगेट ₹1,290 रखा है। इसने नेगेटिव रेवेन्यू को क्लाइंट स्पेसिफिक इश्यूज के लिए सरप्राइज बताया, और कहा कि स्टॉक अभी आकर्षक वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है।

इंफोसिस ने गुरुवार को अपने रिजल्ट्स की रिपोर्ट दी, जिसमें उसने अपने फाइनेंशियल ईयर 2027 रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस के अपर एंड में 50 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की। अब गाइडेंस कॉन्स्टेंट करेंसी टर्म्स में 1.5% से 3% है, जो पहले 1.5% से 3.5% था।

सलिल पारेख भी अगले साल अपना टर्म पूरा होने पर MD और CEO का पद छोड़ देंगे और 1 अप्रैल, 2027 से उनकी जगह आशीष दाश लेंगे।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।