Market Technicals : LKP सिक्योरिटीज के रूपक डे से जानें कैसी रह सकती है बाजार की चाल, क्या हो कमाई की रणनीति

Market Technicals : 14 अक्टूबर को निफ्टी में 99 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22,623 पर बंद हुआ,जबकि बैंक निफ्टी 165 अंक यानी 0.30 प्रतिशत गिरकर 55,316 पर आ गया। बेंचमार्क सूचकांकों में कमजोरी के बावजूद, NSE पर मार्केट ब्रेड्थ पॉजिटिव रही। यहां 1,421 शेयरों में गिरावट के मुकाबले लगभग 1,850 शेयरों में तेजी देखी गई। अब सवाल यह है कि आज कैसी रह सकती है बाजार की चाल और इंडेक्स में क्या हो कमाई की रणनीति। इस अपनी राय साझा कर रहे हैं LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे।

निफ्टी पर रणनीति

रूपक डे ने कहा कि 30-मिनट के चार्ट पर निफ्टी को 200SMA के स्तर पर रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा, जिसके बाद इसमें भारी गिरावट देखी गई। 30-मिनट के चार्ट पर RSI अभी भी ‘बेयरिश क्रॉसओवर’ की स्थिति में है। इसके अलावा, डेली RSI में ‘हिडन नेगेटिव डाइवर्जेंस’ बना है, जो बाजार में अंदरूनी कमजोरी का संकेत देता है।

हालांकि हालिया रिकवरी अच्छी रही है और इसमें मुख्य रूप से बैंकिंग और IT सेक्टर का योगदान रहा है,लेकिन निफ्टी या किसी अन्य प्रमुख इंडेक्स ने अभी तक किसी ‘रिवर्सल’ (रुझान में बदलाव) की पुष्टि नहीं की है। इसलिए, हम मौजूदा तेजी को एक ‘रिलीफ रैली’ (राहत भरी तेजी) के रूप में ही देख रहे हैं, न कि किसी लंबे समय तक चलने वाले ‘अपट्रेंड’ (तेजी के दौर) की शुरुआत के रूप में।

ऊपर की तरफ, 22,650 और 22,800 के स्तर पर रेजिस्टेंस है। नीचे की तरफ,22,500 पर तत्काल सपोर्ट है। यदि यह स्तर टूटता है,तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है,जिससे बाजार में तेज गिरावट आ सकती है।

अहम रेजिस्टेंस: 22,850, 23,000

अहम सपोर्ट: 22,500, 22,300

रणनीति: 19 अक्टूबर की एक्सपायरी वाली निफ्टी 22,500 PE को लगभग 90 रुपये पर खरीदें। इसमें 60 रुपये का स्टॉप-लॉस और 140 रुपये का टारगेट रखें।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

रूपक डे का कहना है कि डेली चार्ट पर बैंकिंग इंडेक्स बैंक निफ्टी को 20EMA के स्तर पर रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा और यह थोड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। आवरली चार्ट पर RSI में ‘बेयरिश क्रॉसओवर’ हुआ है, जो तेजी के रुझान के कमजोर पड़ने का शुरुआती संकेत है। इसके अलावा,आवरली चार्ट पर इंडेक्स अभी भी 200SMA के नीचे ट्रेड कर रहा है, जिससे पता चलता है कि निकट अवधि का रुझान दबाव में बना हुआ है।

बैंक निफ्टी के लिए 55,200 के स्तर पर तत्काल सपोर्ट मौजूद है। अगर इंडेक्स इस स्तर के नीचे टूटता है, तो इससे नई बिकवाली का दबाव बन सकता है, जिससे इंडेक्स 54,900 और 54,400 के स्तर तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, 55,800 के स्तर पर रेजिस्टेंस है।

अहम रेजिस्टेंस: 55,800

अहम सपोर्ट: 54,900, 54,400

रणनीति: बैंक निफ्टी अक्टूबर 54,900 PE को लगभग 400 रुपये पर खरीदें। इसमें 300 रुपये का स्टॉप-लॉस और 560 रुपये का टारगेट रखें।

 

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Jio Platforms IPO: 21 अक्टूबर को खुलेगा आईपीओ, जानें प्राइस बैंड से लेकर कारोबारी सेहत तक 8 बड़ी बातें

Jio Platforms IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी Jio Platforms ने IPO के लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है। कंपनी का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। इस इश्यू में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बुधवार, 14 अक्टूबर को अहमदाबाद स्थित गुजरात के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास RHP दाखिल किया। इसमें आईपीओ की पूरी रूपरेखा, जुटाई गई रकम के इस्तेमाल और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों की जानकारी दी गई है। आइए, आईपीओ से जुड़ी 8 बड़ी बातें जानते हैं।

1. 21 अक्टूबर को खुलेगा IPO

Jio Platforms का आईपीओ बुधवार, 21 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। निवेशक शुक्रवार, 23 अक्टूबर तक इसमें बोली लगा सकेंगे। वहीं, एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की तारीख 19 अक्टूबर तय की गई है।

2. 27 करोड़ तक नए शेयर जारी होंगे

इस आईपीओ में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं होगा। यानी पुराने निवेशक अपने शेयर नहीं बेचेंगे, बल्कि कंपनी नए शेयर जारी करके पैसा जुटाएगी। हालांकि, कुल कितनी रकम जुटाई जाएगी, यह अंतिम इश्यू शर्तों पर निर्भर करेगा।

3. जुटाए गए पैसे से चुकाया जाएगा कर्ज

Jio Platforms आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अपनी टेलीकॉम सब्सिडियरी Reliance Jio Infocomm Ltd (RJIL) का कर्ज चुकाने में करेगी। इसके अलावा, कुछ रकम सामान्य कारोबारी जरूरतों पर खर्च की जाएगी। इससे RJIL पर कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।

4. रिलायंस के शेयरधारकों के लिए ₹2500 करोड़ के शेयर

आईपीओ में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे गए हैं। इसमें तय शर्तों को पूरा करने वाले व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) शामिल हो सकते हैं, जिनके पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर हैं।

5. कर्मचारियों के लिए ₹500 करोड़ तक के शेयर

Jio Platforms ने अपने पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे हैं। कर्मचारी आईपीओ की शर्तों के मुताबिक इन शेयरों के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह हिस्सा दूसरे निवेशक वर्गों के लिए उपलब्ध शेयरों से अलग होगा।

6. पहली तिमाही में रेवेन्यू 11.8% बढ़ा

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में Jio Platforms का रेवेन्यू सालाना आधार पर 11.8% बढ़कर 39,173 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 35,032 करोड़ रुपये था। कंपनी का EBITDA भी 15.1% बढ़कर 20,865 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले 18,141 करोड़ रुपये था।

इस दौरान EBITDA मार्जिन 51.78% से बढ़कर 53.26% हो गया। कंपनी का नेट प्रॉफिट भी बढ़कर 7,764 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 7,110 करोड़ रुपये था।

7. 1,065 से 1,119 रुपये प्राइस बैंड

Jio Platforms ने आईपीओ के लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। लॉट साइज 13 शेयरों का रहेगा। रिटेल इनवेस्टर्स को कम से कम एक लॉट के लिए बोली लगानी है। इसके लिए ₹14,534 लगेंगे। लिस्टिंग 28 अक्टूबर को BSE और NSE पर होने वाली है।

8. जियो 53.33 करोड़ ग्राहक

जियो के पास पहली तिमाही के अंत में 53.33 करोड़ ग्राहक थे। तिमाही के दौरान कंपनी ने 89 लाख नए ग्राहक जोड़े। वहीं, प्रति यूजर औसत मासिक रेवेन्यू (ARPU) 215.6 रुपये रहा।

Q2 Results: बजाज ग्रुप की कंपनी का मुनाफा 67% बढ़ा, रेवेन्यू में भी उछाल; फोकस में रहेगा स्टॉक

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Hero Motors Q2 Results: आईपीओ के बाद पहला रिजल्ट, मुनाफा 115% बढ़ा; रेवेन्यू में भी उछाल

Hero Motors Q2 Results: ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली Hero Motors का दूसरी तिमाही में मुनाफा दोगुने से ज्यादा बढ़ गया। कंपनी ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को नतीजे जारी किए। यह पिछले महीने लिस्टिंग के बाद कंपनी का पहला रिजल्ट है। जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी को ₹10.2 करोड़ का नेट प्रॉफिट हुआ। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹4.73 करोड़ था। यानी मुनाफे में करीब 115% की बढ़ोतरी हुई।

कंपनी का रेवेन्यू भी 24.9% बढ़कर ₹319.3 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹255.7 करोड़ था। वहीं, EBITDA 92% बढ़कर ₹35.9 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹18.7 करोड़ था। EBITDA मार्जिन में भी सुधार हुआ। यह पिछले साल के 7.3% से बढ़कर 11.3% हो गया। यानी कंपनी की कमाई का मार्जिन बेहतर हुआ है।

ब्रिटेन की कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाएगी

Hero Motors अपनी सब्सिडियरी कंपनी Hewland Engineering में हिस्सेदारी बढ़ाने जा रही है। कंपनी इसके मौजूदा शेयरधारकों William Hewland और Siobhan Hewland से 39% अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदेगी। इस सौदे पर करीब 6 लाख पाउंड खर्च होंगे।

इस खरीद के बाद Hewland Engineering में Hero Motors की हिस्सेदारी 51% से बढ़कर 90% हो जाएगी। सौदे के तहत £1 की कीमत वाले 8,039 शेयर खरीदे जाएंगे। कंपनी को उम्मीद है कि यह सौदा करीब छह महीने में पूरा हो जाएगा। इसके लिए किसी सरकारी या नियामकीय मंजूरी की जरूरत नहीं है।

क्या काम करती है Hewland Engineering?

Hewland Engineering ब्रिटेन की कंपनी है। इसकी शुरुआत 29 मई 1957 को हुई थी। यह हाई-परफॉर्मेंस गाड़ियों के ट्रांसमिशन और ड्राइवट्रेन से जुड़े पार्ट्स बनाती है। कंपनी मोटरस्पोर्ट, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और एयरोस्पेस सेक्टर के लिए भी काम करती है। इसके अलावा, यह ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से इंजीनियरिंग समाधान तैयार करती है और रिसर्च पर भी पैसा खर्च करती है।

Hero Motors का कारोबार

Hero Motors ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए पावरट्रेन से जुड़े प्रोडक्ट बनाती है। कंपनी इनकी डिजाइनिंग से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई तक का काम करती है। इसका कारोबार भारत के अलावा अमेरिका, यूरोप और आसियान क्षेत्र में भी फैला है।

कंपनी दोपहिया गाड़ियों, इलेक्ट्रिक साइकिल, ऑफ-रोड गाड़ियों, इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों के लिए प्रोडक्ट बनाती है। भारी गाड़ियों के लिए भी इसके पास सॉल्यूशंस हैं। BMW, Ducati, Enviolo, Formula Motorsport, Hummingbird EV और HWA जैसी कंपनियां इसकी ग्राहक हैं।

Hero Motors का शेयर मंगलवार को NSE पर 0.82% गिरावट के साथ ₹154.44 पर बंद हुआ। हालांकि, स्टॉक अभी भी अपने आईपीओ प्राइस से करीब 56.95% ऊपर है।

Q2 Results: ट्रांसफॉर्मर्स बनाने वाली कंपनी का मुनाफा 135% बढ़ा, रेवेन्यू में 61% का उछाल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tata Elxsi Q2 Results: टाटा की कंपनी को ₹170 करोड़ का मुनाफा, ऑटो बिजनेस में मिला बड़ा कॉन्ट्रैक्ट

Tata Elxsi Q2 Results: टाटा एलेक्सी ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट लगभग स्थिर रहा। हालांकि, रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में बढ़ोतरी हुई। कंपनी को ऑटोमोबाइल, मीडिया और हेल्थकेयर कारोबार से सपोर्ट मिला। इसके अलावा, नए प्रोजेक्ट मिलने से भी कारोबार को मजबूती मिली।

नेट प्रॉफिट में मामूली गिरावट

सितंबर तिमाही में टाटा एलेक्सी का नेट प्रॉफिट ₹170.3 करोड़ रहा। जून तिमाही में यह ₹170.6 करोड़ था। यानी मुनाफे में मामूली गिरावट आई।

वहीं, कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 3.4% बढ़कर ₹1,055.7 करोड़ हो गया। जून तिमाही में यह ₹1,021.1 करोड़ था। कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर रेवेन्यू में 2.3% की बढ़ोतरी हुई।

ऑपरेटिंग प्रॉफिट और मार्जिन में सुधार

टाटा एलेक्सी का EBIT यानी ब्याज और टैक्स से पहले का मुनाफा 7.2% बढ़कर ₹207.7 करोड़ हो गया। पिछली तिमाही में यह ₹193.7 करोड़ था।

इसके साथ ही EBIT मार्जिन भी बढ़ा। जून तिमाही में यह 18.97% था, जो सितंबर तिमाही में बढ़कर 19.68% हो गया।

तीनों प्रमुख कारोबार में बढ़ोतरी

टाटा एलेक्सी के तीनों प्रमुख कारोबार में पिछली तिमाही के मुकाबले बढ़त दर्ज की गई। कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर ट्रांसपोर्टेशन रेवेन्यू 2% बढ़ा। मीडिया और कम्युनिकेशन कारोबार में 3.4% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज कारोबार का रेवेन्यू 3.5% बढ़ा।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO मनोज राघवन ने कहा कि तीनों प्रमुख कारोबार में बढ़त दर्ज की गई है।

ऑटोमोबाइल कारोबार में मिला बड़ा कॉन्ट्रैक्ट

टाटा एलेक्सी के सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सर्विसेज कारोबार में ट्रांसपोर्टेशन की हिस्सेदारी 55% से ज्यादा है। इस सेगमेंट में कंपनी को एक प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता से कई साल का कॉन्ट्रैक्ट मिला है।

इसके तहत कंपनी क्लाउड बेस्ड टेलीमैटिक्स और कनेक्टेड व्हीकल सिस्टम डेवलप करेगी। इसके अलावा, टाटा एलेक्सी ने सरला एविएशन के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। कंपनी इलेक्ट्रिक विमान ‘शून्य’ के विकास में मदद करेगी। यह विमान वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग यानी eVTOL टेक्नोलॉजी पर आधारित है।

मीडिया कारोबार में AI प्रोजेक्ट मिला

टाटा एलेक्सी के सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सर्विसेज कारोबार में मीडिया और कम्युनिकेशन की हिस्सेदारी 33.6% है। इस कारोबार को नए प्रोजेक्ट और पुराने कॉन्ट्रैक्ट पर काम बढ़ने से फायदा हुआ।

कंपनी को एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनी से जेनरेटिव AI बेस्ड वर्चुअल असिस्टेंट बनाने का प्रोजेक्ट मिला है। यह असिस्टेंट कई भाषाओं में काम करेगा। इसका मकसद दुनिया भर के यूजर्स को बेहतर डिजिटल अनुभव देना है।

ऑपरेटिंग एफिशिएंसी से बढ़ा EBITDA मार्जिन

टाटा एलेक्सी के CEO मनोज राघवन ने कहा कि कामकाज को बेहतर बनाने पर फोकस से मुनाफे में सुधार हुआ है। इस दौरान कंपनी ने कर्मचारियों की सैलरी में भी बदलाव किए थे।

इसके बावजूद कंपनी का EBITDA पिछली तिमाही के मुकाबले 70 बेसिस पॉइंट बढ़ा। कंपनी के मुताबिक, ऑपरेटिंग एफिशिएंसी बेहतर होने से मार्जिन को सपोर्ट मिला।

Tata Elxsi के शेयरों का हाल

नतीजों की घोषणा से पहले मंगलवार को NSE पर टाटा एलेक्सी के शेयर 5.21% की तेजी के साथ ₹3,426.70 पर बंद हुए।

टाटा एलेक्सी ऑटोमोबाइल, मीडिया, कम्युनिकेशन और हेल्थकेयर कंपनियों को डिजाइन और टेक्नोलॉजी सेवाएं देती है। कंपनी प्रोडक्ट, सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म और डिजिटल सेवाएं विकसित करने में मदद करती है

Stock in Focus: ड्रोन कंपनी को सरकार से ऑर्डर मिला, फोकस में रहेगा स्टॉक

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio Platforms IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में निवेश से पहले ये 6 सबसे जरूरी बातें जान लीजिए

Jio Platforms IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ जल्द आ रहा है। इनवेस्टर्स काफी समय से इस आईपीओ का इंतजार कर रहे हैं। रिलायंस जियो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। यह रिलायंस समूह की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का हिस्सा है। जियो प्लेफॉर्म्स का आईपीओ देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा।

आईपीओ में कंपनी 27 करोड़ तक नए शेयर इश्यू करेगी

जियो प्लेटफॉर्म्स के डीआरएचपी के मुताबिक, कंपनी आईपीओ में 27 करोड़ तक नए शेयर जारी रहेगी। प्रत्येक शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये होगी। इस आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं होगा। इसका मतलब है कि पुराने इनवेस्टर्स अपने शेयर इस आईपीओ में नहीं बेचेंगे। कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई दोनों पर लिस्ट होंगे।

यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 30,200 करोड़ रुपये का हो सकता है। इस तरह यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। अभी सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने के रिकॉर्ड ऑटो कंपनी ह्यूंडई मोटर इंडिया के नाम है। इसने 2024 में 27,870 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था। NSE ने पिछले महीने 22,562 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था।

10 लाख करोड़ एम-कैप वाली क्लब में होगी शामिल

शेयरों की लिस्टिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स उन कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जाएगी, जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। इस लिस्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक शामिल हैं। रिलांयस इंडस्ट्रीज देश की सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैपिटलाइजेशन 15,68,421 करोड़ रुपये है।

21 अक्तूबर को निवेश के लिए खुल सकता है आईपीओ

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के 21 अक्टूबर को खुलने की उम्मीद है। हालांकि, अभी कंपनी ने इस बारे में औपचारिक ऐलान नहीं किया है। यह इश्यू तीन दिन के लिए खुला रहेगा। इस महीने के आखिरी हफ्तों में शेयर बीएसई और एनएसई पर लिस्ट हो जाएंगे। यह आईपीओ ऐसे वक्त आ रहा है, जब शेयर बाजारों पर बिकवाली का दबाव दिख रहा है।

आईपीओ से मिले पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए होगा

कंपनी आईपीओ से आए पैसे के बड़े हिस्से का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। जियो प्लेटफॉर्म्स पर FY26 में 70,781 करोड़ रुपये का कर्ज था। कर्ज का बोझ घटने से कंपनी की बैलेंशशीट मजबूत होगी। जियो प्लेटफॉर्म्स मोबाइल एंड फिक्स्ड ब्रॉडबैंड, एंटरटेनमेंट, क्लाउड कंप्यूटिंग, क्लाउड गेमिंग, स्टोरेज, स्मार्ट होम सॉल्यूशंस और आर्टफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रोडक्ट्स में मौजूद है।

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रिलायंस जियो के कस्टमर्स की संख्या 53 करोड़ के पार 

जियो प्लेटफॉर्म्स की सब्सिडियरी जियो के इस साल जून के अंत में 53.33 करोड़ कस्टमर्स थे। इसमें 28.5 करोड़ 5जी यूजर्स शामिल हैं। कंपनी के फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शंस की संख्या 2.86 करोड़ थी। कंपनी का औसत रेवेन्यू प्रति यूजर (ARPU) जून तिमाही में बढ़कर 215.6 रुपये पहुंच गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 13 अक्टूबर को 0.67 फीसदी चढ़कर 1,166.70 रुपये पर बंद हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट के पास है, जिसकी रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Polycab Share Price: ₹2.78 करोड़ की कानूनी लड़ाई, NSE ने कॉल-पुट पर लगाया बैन तो शेयर धड़ाम

Polycab Share Price: वायर और केबल बनाने वाली देश की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड कंपनी पॉलीकैब के शेयरों ने आज निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया। एनएसई ने जब 30 दिसंबर, 2026 से इसके F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) कॉन्ट्रैक्ट्स को बंद करने को कहा तो आज इसमें बिकवाली का दबाव दिखा। एनएसई ने दिसंबर के बाद से इसे डेरिवेटिव सेगमेंट से बाहर करने का आदेश इसलिए दिया क्योंकि कंपनी अब IBC (इनसॉल्वेंस एंड बैंकरप्सी कोड) फ्रेमवर्क के तहत आ गई। इसके बाद अब कंपनी के शेयर धड़ाम हो गए। फिलहाल बीएसई पर यह 2.16% की गिरावट के साथ ₹8232.00 पर है। इंट्रा-डे में यह 5.38% टूटकर ₹7,961.10 तक आ गया था।

Polycab क्यों आई IBC फ्रेमवर्क के शॉर्टलिस्ट में

एनएसई ने पॉलीकैब इंडिया को इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट से बाहर करने का फैसला इसलिए किया क्योंकि यह आईबीसी फ्रेमवर्क के तहत शॉर्टलिस्ट हुई है। यह मामला पॉलीकैब इंडिया के खिलाफ एक दिवालिया याचिका से जुड़ा है, जिसे एशियर मेटल्स (Asier Metals) ने फाइल किया है और इस पर सुनवाई के लिए NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) ने दोनों पक्षों की बहस के बाद मंजूरी दे दी है।

यह मामला ₹2.78 करोड़ के डिफॉल्ट से जु़ड़ा है। एशियर मेटल्स का कहना है कि पॉलीकैब के साथ उसका कारोबार संबंध साल 2020 में शुरू हुआ और इसके तहत पहले ही तय हो गया था कि एलुमिनियम इनगॉट्स की सप्लाई के पेमेंट 100% एडवांस होगा। सप्लायर एशियर मेटल्स के मुताबिक ऐसा मार्च 2026 तक चलता रहा और फिर इसके बाद 8 जून और 25 जून को जो दो ऑर्डर्स पॉलीकैब ने दिए, उसका एडवांस पेमेंट नहीं मिला। सप्लायर ने बाद में सप्लाई और बकाये के आधार पर पेमेंट मांगा।

सप्लायर के दावे के मुताबिक उसने प्रति किग्रा ₹405 के भाव पर एलुमिनियम इनगॉट्स की सप्लाई की और 29 इनवॉइस जारी की। रिफंड्स, क्रेडिट नोट्स और अन्य एडजस्टमेंट्स के बाद एशियर मेटल्स ने ₹2.78 करोड़ के बकाए की बात कही, जिस पर कंपनी 26 जून को डिफॉल्ट हो गई यानी कि दे नहीं पाई। इस पर सप्लायर ने 6 अगस्त को स्टैटुअर डिमांड नोटिस भेजा। पेमेंट नहीं मिलने पर सप्लायर ने 24 अगस्त को एनसीएलटी में याचिका डाली, जिसे 7 अक्टूबर को एनसीएलटी ने स्वीकार कर लिया।

कंपनी के दावे की बात करें तो पॉलीकैब का कहना है कि इनवॉइस प्रोविजिनल बिलिंग थी और इसमें फाइनल प्राइसिंग, रिकंसिलिएशन, क्वांटिटी डिस्काउंट्स, क्रेडिट नोट्स और अन्य एडजस्टमेंट्स होने थे। पॉलीकैब ने ₹17.52 करोड़ का काउंटर-क्लेम भी किया और डिटेंशन/डेमरेज के लिए ₹80 लाख के एडजस्टमेंट की मांग की। कंपनी का दावा है कि सप्लायर ने यह रकम एकतरफा और बिना मिलान किए गए हिसाब-किताब से निकाली थी। वहीं सप्लायर ने पर्चेज ऑर्डर का हवाला देते हुए कहा कि इसमें साफतौर पर प्रति किग्रा ₹405 की कीमत तय लिखी है।

क्या है NSE के आदेश का मतलब

एनएसई ने 12 अक्टूबर के अपने आदेश में पॉलीकैब इंडिया को इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट से बाहर निकालने का आदेश दिया, जिसके तहत 30 दिसंबर, 2026 से इसके F&O (फ्यूचर्स एंड कॉन्ट्रैक्ट्स) की ट्रेडिंग नहीं होगी। हालांकि इस सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर 2026 के कॉन्ट्रैक्ट्स एक्सपायर होने के बाद एक्सपायरी महीनों के लिए कोई नया कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं होगा। वहीं अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 में एक्सपायर होने वाले मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स अपने-अपने एक्सपायरी डेट तक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहेंगे। NSE का यह भी कहना है कि सभी मौजूदा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर T+2 दिन के आधार पर 100% मार्जिन लगाया जाएगा। यह नियम 13 अक्टूबर, 2026 तक की सभी ओपन पोजीशन्स और 14 अक्टूबर से बनने वाली नई पोजीशन्स पर लागू होगा।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

पॉलीकैब के शेयरों ने अमेरिका-ईरान के बीच के युद्ध, टैरिफ वार की आंच और महंगाई की मार के बीच निवेशकों को कम समय में अच्छा रिटर्न दिया है। 27 जनवरी 2026 को बीएसई पर यह ₹6,660.50 पर था, जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 5 महीने में यह 52.07% उछलकर 22 जून 2026 को ₹10,128.60 पर पहुंच गया था।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HD Fire Protect IPO: एंकर इनवेस्टर्स से जुटाए ₹213 करोड़, 13 अक्टूबर से ओपनिंग; ग्रे मार्केट में उड़ान भर रहा है शेयर

मेनबोर्ड सेगमेंट में HD फायर प्रोटेक्ट का ₹712.31 करोड़ का IPO आज, 13 अक्टूबर से खुलने वाला है। एक दिन पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से 213.11 करोड़ रुपये जुटाए। प्राइस बैंड के अपर एंड पर 25 इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स को 78.64 लाख इक्विटी शेयर अलॉट किए गए। कुल एंकर एलोकेशन में से, 56,52,331 इक्विटी शेयर 9 घरेलू म्यूचुअल फंड्स को दिए गए। इनमें SBI म्यूचुअल फंड, HDFC एसेट मैनेजमेंट कंपनी, कोटक म्यूचुअल फंड, UTI म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी, आदित्य बिड़ला सन लाइफ एसेट मैनेजमेंट कंपनी, PGIM इंडिया, बंधन म्यूचुअल फंड और मिरे एसेट शामिल हैं।

बजाज लाइफ इंश्योरेंस और एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस ने कुल 14.95 करोड़ रुपये के 5.51 लाख शेयर सब्सक्राइब किए। अशोका व्हाइटओक, एलियांज ग्लोबल इनवेस्टर्स फंड और अमुंडी फंड्स जैसे दूसरे बड़े इनवेस्टर्स ने भी एंकर बुक में हिस्सा लिया।

HD फायर प्रोटेक्ट IPO 15 अक्टूबर को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹258-₹271 प्रति शेयर और लॉट साइज 55 शेयर है। कंपनी के IPO में 2.63 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। नए शेयर जारी नहीं होंगे। OFS में कंपनी के 2 प्रमोटर- हरीश नरशी धरमशी और कुसुम हरीश धरमशी शेयरों को बिक्री के​ लिए रखेंगे। IPO बंद होने के बाद अलॉटमेंट 16 अक्टूबर को फाइनल होगा। शेयरों की लिस्टिंग NSE और BSE पर 21 अक्टूबर को हो सकती है।

क्या करती है HD Fire Protect

HD फायर प्रोटेक्ट आग से सुरक्षा करने वाले इक्विपमेंट और सिस्टम बनाती और सप्लाई करती है। यह आग बुझाने के पानी, फोम और गैस-बेस्ड सॉल्यूशंस की पेशकश करती है। कंपनी 8 प्रोडक्ट कैटेगरीज में कई तरह के प्रोडक्ट बनाती है, जैसे कि स्प्रिंकलर, अलार्म वॉल्व व एक्सेसरीज, डेल्यूज वॉल्व और सिस्टम, फोम इक्विपमेंट व सप्रेशन सिस्टम, मॉनिटर व नोजल, वॉटर स्प्रे नोजल, कस्टम-इंजीनियर्ड सिस्टम, गैस सप्रेशन सिस्टम आदि।

कंपनी के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल इंडस्ट्रियल, रेजिडेंशियल और कमर्शियल कामों में होता है, जैसे कि ऑयल व गैस, रिफाइनिंग व पेट्रोकेमिकल्स, पावर एंड एनर्जी, हेवी इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस, फार्मास्यूटिकल्स, डेटा सेंटर, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर। HD Fire Protect के प्रोडक्ट एक्सपोर्ट भी होते हैं।

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IPO में कितना हिस्सा रिजर्व

IPO में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। HD Fire Protect IPO के लिए एंबिट प्राइवेट लिमिटेड, आनंद राठी एडवाइजर्स लिमिटेड और IIFL कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार MUFG Intime India Pvt.Ltd. है।

ग्रे मार्केट में दौड़ रहा है शेयर

HD Fire Protect की लिस्टिंग अच्छी रहने की उम्मीद है। ग्रे मार्केट में शेयर 31.73 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं। कंपनी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू 114 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 23.87 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान रेवेन्यू 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 505.12 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 116.79 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q2 Results: प्राइवेट बैंक का मुनाफा 169% बढ़ा, NII में भी तगड़ा उछाल; बैड लोन में कमी आई

RBL Bank Q2 Results: प्राइवेट सेक्टर के RBL Bank ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में बैंक का मुनाफा बढ़कर 481.7 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले इसी तिमाही में यह 179 करोड़ रुपये था। यानी मुनाफे में करीब 169% की बढ़ोतरी हुई है। बैंक की कमाई बढ़ी है। साथ ही, खराब कर्ज के आंकड़ों में भी सुधार हुआ है।

NII में 37.4% की बढ़ोतरी

बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी तेजी से बढ़ी है। सितंबर तिमाही में यह सालाना आधार पर 37.4% बढ़कर 2,131 करोड़ रुपये हो गई। पिछले साल इसी तिमाही में यह 1,551 करोड़ रुपये थी।

खराब कर्ज घटा, लेकिन प्रोविजन बढ़ा

RBL Bank के बैड लोन यानी खराब कर्ज में कमी आई है। सितंबर तिमाही में ग्रॉस NPA घटकर 1.02% रह गया। जून तिमाही में यह 1.3% था। इसी तरह, नेट NPA भी 0.37% से घटकर 0.29% पर आ गया। यानी बैंक के फंसे हुए कर्ज का स्तर कम हुआ है।

हालांकि, बैंक को खराब कर्ज के लिए ज्यादा रकम अलग रखनी पड़ी। सितंबर तिमाही में प्रोविजन बढ़कर 766.5 करोड़ रुपये हो गया। जून तिमाही में यह 599.2 करोड़ रुपये था। एक साल पहले सितंबर तिमाही में यह रकम 499.7 करोड़ रुपये थी।

लोन देने में बढ़ोतरी

बैंक का नेट एडवांस यानी दिया गया कर्ज सालाना आधार पर 42% बढ़कर 1,42,314 करोड़ रुपये हो गया। इसमें रिटेल कर्ज 32% बढ़कर 79,465 करोड़ रुपये रहा। वहीं, कंपनियों को दिए जाने वाले होलसेल कर्ज में 56% की बढ़ोतरी हुई। यह 62,849 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

रिटेल लोन में सिक्योर्ड लोन की बढ़ोतरी ज्यादा रही। इसमें 52% का इजाफा हुआ। वहीं, अनसिक्योर्ड लोन सिर्फ 6% बढ़ा। बैंक में जमा रकम भी बढ़ी है।

डिपॉजिट भी बढ़ा

सितंबर तिमाही में RBL Bank का कुल डिपॉजिट सालाना आधार पर 34% बढ़कर 1,56,272 करोड़ रुपये हो गया। करंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट यानी CASA रेशियो 27.2% रहा।

बैंक में 3 करोड़ रुपये से कम के डिपॉजिट को ग्रैन्युलर डिपॉजिट कहा जाता है। सितंबर तिमाही में इस तरह की जमा रकम 16% बढ़कर 68,877 करोड़ रुपये हो गई। यह बैंक के कुल डिपॉजिट का 44% है।

कैपिटल रेशियो में आई कमी

30 सितंबर 2026 तक बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 30.1% था। जून के आखिर में यह 33.3% था। वहीं, कॉमन इक्विटी टियर-1 यानी CET1 रेशियो भी घटा है। जून तिमाही के 32.2% के मुकाबले सितंबर तिमाही में यह 29% रहा।

बैंक का औसत लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) 148% रहा। यह वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही का आंकड़ा है।

CEO ने क्या कहा?

RBL Bank के MD और CEO आर सुब्रमण्यकुमार ने कहा कि सितंबर तिमाही में बैंक का प्रदर्शन मजबूत रहा। कर्ज देने और जमा जुटाने, दोनों मोर्चों पर अच्छी बढ़ोतरी हुई।

उन्होंने बताया कि बैंक ने विदेशी मुद्रा में FCNR डिपॉजिट भी जुटाए हैं। इससे बैंक की फंडिंग मजबूत हुई है। साथ ही, भविष्य में कारोबार बढ़ाने के लिए ज्यादा गुंजाइश मिली है।

बैंक का नेटवर्क बढ़ा

30 सितंबर तक RBL Bank के कुल 1,954 टचपॉइंट थे। इनमें 628 बैंक शाखाएं और 1,326 बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट शाखाएं शामिल थीं।

इन बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट शाखाओं में 248 बैंकिंग आउटलेट थे। वहीं, बैंक की सब्सिडियरी RBL Finserve के पास 1,076 बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट शाखाएं थीं।

RBL Bank के शेयरों का हाल

बैंक ने बाजार बंद होने के बाद सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए। 12 अक्टूबर को RBL Bank का शेयर NSE पर 0.07% गिरकर 417.70 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 32.14% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने 44.03% का रिटर्न दिया है। बैंक का मार्केट कैप 64.84 हजार करोड़ रुपये है।

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