Trading plan :ये बाजार पोजीशन लेकर जाने वाला नहीं, अपनी पोजिशन्स समेटें और सोमवार को नया नजरिया लेंगे

Trading plan :बाजार फिर ऊपरी स्तरों पर फिर अटक गया है। रिलांयस के सपोर्ट के बावजूद निफ्टी 24000 पार करने में संघर्ष कर रहा है। बैंक निफ्टी भी 58000 के जोन पर फंसा हुआ है। ब्रॉडर मार्केट में सुस्ती है। कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल पर बरकरार,हालांकि इंडिया VIX 3 परसेंट नीचे है। केबल इंडस्ट्री में आदित्या बिड़ला ग्रुप की एंट्री से दूसरे कंपनियों के शेयरों को जोर का झटका लगा है। KEI, पॉलीकैब और हैवेल्स में 5-8 परसेंट की तेज गिरावट आई है। तीनों शेयर वायदा के टॉप लूजर्स में शामिल हैं।

आज डिफेंस शेयर दम दिखा रहे हैं। निफ्टी डिफेंस इंडेक्स करीब एक परसेंट ऊपर है। GE एयरोस्पेस से 3 इंजन की डिलिवरी मिलने और गोल्डमैन सैक्स की बुलिश रिपोर्ट से HAL भागा है। यह शेयर करीब 4 परसेंट उछलकर वायदा के टॉप गेनर्स में शुमार है। कोचिन शिपयार्ड और गार्डनरीच में भी तेजी आई है। फाइनेंशियल और कैपिटल मार्केट शेयरों में भी खरीदारी आई है। दोनों इंडेक्स करीब एक परसेंट मजबूत हुए हैं। साथ ही चुनिंदा तेल-गैस, मेटल, सरकारी और प्राइवेट बैंकों में भी रौनक है। लेकिन फार्मा, रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में दबाव है।

बाजार: फिर वही कहानी

सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में रैली आई लेकिन ऊपरी स्तरों पर नहीं टिका। निफ्टी, बैंक निफ्टी फिर से रजिस्टेंस जोन में आ कर रुके अच्छी बात ये कि दोनों अभी भी ग्रीन में हैं। मिडकैप, स्मॉलकैप में आज अंडरपरफॉर्मेंस है। केबल & वायर शेयरों में बड़ी गिरावट है। कैपिटल मार्केट शेयरों में बड़ी तेजी। रिलायंस ने बुल्स के लिए लीडरशिप ली है। इंश्योरेंस शेयरों में अच्छी तेजी है। NSE के IPO से जुड़े शेयरों में भी तेजी है। चुनिंदा ऑटो शेयरों में आज भी कमजोरी

बाजार: अब क्या?

बाजार वापस दायरे में फंस गया है। बाजार के पास चलने के ट्रिगर्स नहीं हैं। ग्लोबल संकेत अच्छे हैं, लेकिन कच्चे तेल की तेजी ने कैप लगा दिया है। बड़ी तेजी के लिए कच्चे तेल का गिरना जरूरी है। बाजार में अभी भी रैली फेल होने पर बेच कर पैसा बना है। लेकिन अच्छी बात ये है कि बाजार गिरने को तैयार नहीं है जब तक 23,800 बचा है, बाजार में शायद ज्यादा गिरावट शायद ना हो। लेकिन 23,800 टूटा तो बड़ी गिरावट का रिस्क होगा। बैंक निफ्टी बार-बार 57,800 टेस्ट कर रहा है। अगर 57,800-58,000 पार हुआ तो बड़ा पॉजिटिव होगा।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी के लिए 23,800-23,850 पर सपोर्ट और 24,000-24,050 पर रेजिस्टेंस है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 57,300-57,500 पर सपोर्ट और 57,800-58,000 पर रेजिस्टेंस हैं।

प्री-CAS रणनीति

ये बाजार पोजीशन लेकर जाने वाला नहीं है। आज शाम को US का बेहद अहम Payroll डाटा आएगा। Payroll डाटा के बाद बॉन्ड यील्ड में बड़ा मूव आ सकता है। इसलिए अपनी पोजिशन्स समेटें और सोमवार को नया नजरिया लेंगे।

CAS पर CNBC-आवाज़: ट्रेडर्स के साथ

CAS पर CNBC-आवाज़ की मुहिम का असर देखने को मिला है। SEBI ने कहा है कि कैश मार्केट में CAS के नतीजों की समीक्षा जारी है। CAS में बदलाव का प्रस्ताव लाया जा सकता है। सेटलमेंट प्राइस तय करने के तरीके बदल सकते हैं। F&O सेटलमेंट प्राइस के तरीके में बदलाव संभव है। एक हफ्ते के भीतर कंस्लटेशन पेपर ला सकते हैं।

CAS पर मुहिम, रिटेल ट्रेडर्स के सुझाव

सभी शेयरों की क्लोजिंग एक जैसी हो। यह 3:15 या 3:30 PM हो सकती है। कैश, फ्यूचर्स की अलग-अलग क्लोजिंग से भ्रम रहता है। प्राइस रेंज को ±3% की बजाय 0-0.3% तक छोटा करें। प्राइस रेंज छोटी होने से ऑक्शन रेंज भी घटेगी। इससे CAS में प्राइसिंग ज्यादा अच्छी तरह निकलेगी। छोटे प्राइस बैंड से बड़े प्राइस स्विंग से बचेंगे। इससे ऑप्शन राइटर्स का जोखिम भी घटेगा। वॉल्यूम बढ़ने तक रेंज को छोटा रखना अच्छा। डेली सेटलमेंट को 3:15 बजे ही किया जाए।

एक्सपायरी के दिन एक्सपायर होने वाले ऑप्शन को CAS से बाहर रखें। अगर आज एक्सपायरी है तो एक्सपायरी ENDING TIME पर ऑप्शन सेटल हों। CAS का उद्देश्य प्राइस डिस्कवरी हो, ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं। प्री-ओपन की तरह टर्मिनल पर CAS के भाव भी दिखें। ऑप्शंस एक्सपायरी को CAS से डीलिंक किया जाए। ऑप्शंस की एक्सपायरी 3:15 पर कर दी जाए। 3:25 से 3:28 के बीच HFTs को ऑर्डर कैंसिल करने से रोका जाए। पहले की तरह 3:30 तक सामान्य ट्रेडिंग हो, बाद में 10 मिनट का CAS हो। हर ब्रोकर के टर्मिनल पर इंडिकेटिव भाव दिखने चाहिए।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

कल का मौसम: 2 सितंबर को होगी मूसलाधार बारिश! IMD ने दिल्ली, यूपी, बिहार समेत 15 से ज्यादा राज्यों के लिए जारी किया अलर्ट

Weather update for September 2nd: देश के अलग अलग इलाकों में मानसून के एक्टिव होने की वजह से भारी बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2 सितंबर के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी किया है। IMD ने देश के 15 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मध्यम से मूसलाधार बारिश का अलर्ट दिया है। कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी प्रणालियों के चलते देश के मैदानी, पहाड़ी और तटीय इलाकों में 2 सितंबर को बारिश, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली कड़कने का खतरा बना रहेगा।

उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में बहुत भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के मुताबिक 2 सितंबर को उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का प्रकोप सबसे अधिक रहेगा। IMD ने इन तीनों राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में बिजली कड़कने और गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। इसे देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

दिल्ली, यूपी, बिहार और झारखंड समेत मैदानी राज्यों का हाल

दिल्ली समेत उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी 2 सितंबर को बारिश की गतिविधियां तेजी पकड़ेंगी। मौसम विभाग ने दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, विदर्भ और पश्चिमी मध्य प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। इसके अलावा बिहार, झारखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल और पूर्वी राजस्थान में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने की आशंका व्यक्त की गई है।

पहाड़ी राज्यों और पूर्वोत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम

पहाड़ी क्षेत्रों की बात करें तो उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के इलाकों में भारी बारिश के साथ-साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है। वहीं पूर्वोत्तर भारत में भी मानसूनी बारिश का तांडव जारी रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज-चमक का दौर बना रहेगा।

तटीय क्षेत्रों में तूफानी हवाओं की चेतावनी और समुद्र का हाल

दक्षिण भारत और तटीय इलाकों में भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ओडिशा और रायलसीमा में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और आकाशीय बिजली कड़कने का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और मजबूत सतही हवाएं चलने का अनुमान है।

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समुद्री गतिविधियों को लेकर IMD ने बताया है कि अरब सागर में सोमालिया व ओमान के तटों के साथ-साथ पश्चिम-मध्य, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर व पूर्व-मध्य अरब सागर में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। इसी तरह बंगाल की खाड़ी में दक्षिण तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी और दक्षिण श्रीलंका से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में भी 45 से 55 किमी प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने मछुआरों को इन तटीय और समुद्री क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी है।

मां मान चुकी थी कि बेटा नहीं रहा फिर नेपाल बाढ़ के बीच हुआ चमत्कार! 8 साल के मासूम ने पेड़ पर चढ़ यूं बचा ली थी अपनी जान

नेपाल में आई भयानक बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदलकर रख दी है। इस तबाही में कई परिवार अपनों से बिछड़ गए हैं। वहीं इस त्रासदी में कई बच्चे भी प्रभावित हुए है। वहीं इस बाढ़ के बीच 8 साल के जोयाल की कहानी काफी वायरल हो रही है। नेपाल में आई भयानक बाढ़ से बचने के लिए 8 साल के जोयाल जंगल की ओर भाग गया और कुछ समय तक पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई। इस दौरान उसकी मां बेहद परेशान थी। बाद में वह आखिरकार अपनी मां से मिल गया। लंबे इंतजार के बाद बच्चे के सुरक्षित मिलने से परिवार ने राहत की सांस ली है। आइए जानते हैं पूरी कहानी

सुरक्षित निकाला गया बाहर

बाढ़ से प्रभावित नेपाल के रसुवा जिले से जोयाल घाले को हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। जोयाल के पैर में चोट लगी थी और चेहरे पर भी कई कट और चोट के निशान थे। उसकी 28 वर्षीय मां मैटी माया तमांग पूरे दिन राहत शिविरों और लोगों को जुटाने वाली जगहों पर अपने दोनों बेटों को तलाशती रहीं। काफी समय तक बच्चों का कोई पता नहीं चलने पर उन्हें डर सताने लगा था कि शायद दोनों की बाढ़ में जान चली गई है।

कैसे पता चला बेटा जिंदा है

मैटी माया तमांग ने रॉयटर्स को बताया, “मुझे लगने लगा था कि मेरे दोनों बच्चे अब इस दुनिया में नहीं हैं। मैं सिर्फ रो रही थी और खुद को संभाल नहीं पा रही थी।” बाद में उन्हें पता चला कि उनका बेटा जोयाल जिंदा है। रॉयटर्स की पत्रकार सहाना बजराचार्य ने उनसे संपर्क किया और बताया कि वह पास के नुवाकोट के एक अस्पताल में जोयाल से मिली थीं। जब तमांग को पता चला कि जोयाल जिंदा है और उसे इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया है, तो उन्हें इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “जब आपने बताया कि आपको पता है कि जोयाल कहां है, तो मुझे विश्वास नहीं हुआ। मैंने तो पहले ही उम्मीद छोड़ दी थी कि मैं उसे कभी ढूंढ पाऊंगी।” तमांग ने कहा, “जब मुझे अपने बड़े बेटे के बारे में पता चला, तो लगा जैसे मेरी जिंदगी वापस मिल गई हो।” तमांग को उनका छोटा बेटा भी सुरक्षित मिल चुका था।

हर तरफ फैले थे कीचड़

बुधवार सुबह जोयाल और उसका भाई स्कूल की गाड़ी से स्कूल गए थे, जबकि उनकी मां घर पर बुनाई का काम कर रही थीं। तभी उन्हें भूकंप जैसी तेज आवाज सुनाई दी। तमांग तुरंत स्कूल की ओर भागीं, लेकिन वहां पहुंचकर वह हैरान रह गईं। उन्होंने बताया, “समझ ही नहीं आ रहा था कि स्कूल कहां है और बाजार कहां था। हर तरफ सिर्फ पानी, पत्थर और कीचड़ नजर आ रहा था।” बाढ़ में स्कूल की पूरी इमारत तबाह हो गई थी। लेकिन, जोयाल किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहा। बाद में उसने बचावकर्मियों को बताया कि जब बाढ़ आई, तब वह पढ़ाई कर रहा था और अचानक चारों तरफ “बहुत ज्यादा अंधेरा” छा गया।

करीब 17 हजार बच्चे हुए प्रभावित

बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ता देख जोयाल अपने एक दोस्त के साथ स्कूल से निकलकर पास के जंगल में चला गया। दोनों बच्चों ने पानी से बचने के लिए पेड़ों पर चढ़कर शरण ली। जब आठ साल के जोयाल से पूछा गया कि क्या उस समय उसे डर लगा था, तो उसने सिर्फ सिर हिलाकर “नहीं” कहा। जोयाल और उसका भाई भी उन हजारों बच्चों में शामिल हैं जो नेपाल में आई बाढ़ के कारण मुश्किल में फंस गए। यूनिसेफ के मुताबिक, रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में करीब 17 हजार बच्चे बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। संस्था नेपाल सरकार के साथ मिलकर ऐसे बच्चों की जानकारी जुटा रही है जो अपने परिवार से अलग हो गए हैं। इन बच्चों की पहचान कर उन्हें रजिस्टर किया जा रहा है और उनके परिवारों से मिलाने की कोशिश की जा रही है।

बता दें, लांगटांग लिरुंग पहाड़ के पास ग्लेशियर का एक हिस्सा अचानक टूट गया, जिससे बाढ़ आ गई। इसके बाद बर्फ और पत्थर तेजी से नीचे आने लगे और घाटी में पानी, कीचड़ और मलबा भर गया

20 साल बाद ‘जॉनी गद्दार’ की यादें होंगी ताजा, श्रीराम राघवन बना रहे हैं उसी अंदाज की नई थ्रिलर

मैचबॉक्स शॉट्स ने अपनी नए प्रोजेक्ट्स का ऐलान कर दिया है। कंपनी के अनुसार, मशहूर फिल्ममेकर श्रीराम राघवन उनके लिए कई नई कहानियों पर काम कर रहे हैं। इनमें एक अनटाइटल्ड थ्रिलर भी शामिल है, जिसका अंदाज उनकी कल्ट क्लासिक फिल्म ‘जॉनी गद्दार’ जैसा होगा। साल 2027 में ‘जॉनी गद्दार’ की रिलीज को 20 साल पूरे होने वाले हैं।

फाउंडर संजय राउत्रे ने कहा, “श्रीराम ने मैचबॉक्स को उसकी पहली फिल्म और पहला सबक दिया था कि अगर किसी कहानी को पूरी ईमानदारी और विश्वास के साथ बताया जाए, तो उसे हमेशा अपना दर्शक मिल जाता है। ‘जॉनी गद्दार’ की 20वीं सालगिरह के साल उसी अंदाज की थ्रिलर विकसित करना हम दोनों के लिए एक तरह से घर वापसी जैसा है।”

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब नेटफ्लिक्स के लिए मैचबॉक्स शॉट्स की बनाई वॉर सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ दुनियाभर में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। नॉन-इंग्लिश कंटेंट की ग्लोबल रैंकिंग में यह सीरीज दूसरे नंबर पर है, जबकि भारत में नंबर एक पर बनी हुई है। यह लगातार दूसरी नेटफ्लिक्स सीरीज है, जिसे मैचबॉक्स ने बनाया और जिसने ग्लोबल चार्ट पर बड़ी सफलता हासिल की है। इससे पहले ‘IC 814: द कंधार हाईजैक’ भी ग्लोबल स्तर पर नंबर दो पर डेब्यू कर चुकी है।

200 करोड़ रुपये से ज्यादा के बजट में बनी ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ मैचबॉक्स शॉट्स की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। सीरीज के लिए काम कर रहे एयरबेस पर फाइटर एयरक्राफ्ट के साथ शूटिंग की गई और करीब 450 लोगों की टीम ने बेहद कठिन हाई-एल्टीट्यूड परिस्थितियों में सेट पर काम किया।

हालांकि, कंपनी का सफर इतने बड़े स्तर से शुरू नहीं हुआ था। श्रीराम राघवन की ‘अंधाधुन’ मैचबॉक्स शॉट्स की पहली प्रोडक्शन थी। करीब 16 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनियाभर में 450 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया और 2018 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में शामिल रही। मैचबॉक्स के सफर में एक चीज लगातार बनी रही है—कहानी और कहानीकार पर भरोसा, साथ ही लागत पर नियंत्रण।

इसी सोच के बीच कंपनी ने अलग-अलग जॉनर और स्केल की कई परियोजनाएं की हैं, जिनमें ‘मोनिका ओ माय डार्लिंग’, ‘थ्री ऑफ अस’, ‘स्कूप’, ‘मेरी क्रिसमस’ और ‘खौफ’ जैसी फिल्में और सीरीज शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, अलग-अलग तरह की कहानियों में निवेश करना शुरुआत में एक क्रिएटिव फैसला था, जो धीरे-धीरे बिजनेस स्ट्रैटेजी में बदल गया। इससे कंपनी किसी एक तरह के दर्शक या किसी एक फॉर्मेट पर निर्भर नहीं रहती।

संजय राउत्रे के साथ पार्टनर्स सरिता पाटिल और दीक्षा राउत्रे भी कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं। मैचबॉक्स का मानना है कि किसी प्रोजेक्ट की सफलता सिर्फ उसकी ओपनिंग से तय नहीं होती। सरिता पाटिल के मुताबिक, असली सवाल यह है कि क्या लोग सालों बाद भी किसी फिल्म को देख रहे हैं और दूसरों को उसकी सिफारिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, दर्शकों का ऐसा प्यार खरीदा या किसी रणनीति से हासिल नहीं किया जा सकता।

‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की ग्लोबल सफलता के बाद जहां कंपनी अपनी स्ट्रीमिंग स्लेट का विस्तार कर रही है, वहीं थिएट्रिकल फिल्मों को लेकर भी उसकी प्रतिबद्धता कायम है। कंपनी का कहना है कि हर फॉर्मेट की अपनी अर्थव्यवस्था और अपनी ऑडियंस होती है और हर कहानी को उसी हिसाब से विकसित किया जाता है। कुछ कहानियां सिनेमाघर में अजनबियों से भरे अंधेरे हॉल में देखने के लिए होती हैं, जबकि कुछ घर के आराम में ज्यादा बेहतर अनुभव देती हैं। दोनों अनुभव कंपनी के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

मैचबॉक्स शॉट्स की नई स्लेट में श्रीराम राघवन के अलावा हंसल मेहता, वासन बाला और जस्मीत रीन जैसे फिल्ममेकर्स के साथ भी प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। कंपनी का विस्तार सिर्फ फिल्मों और सीरीज तक सीमित नहीं है। मैचबॉक्स ने ‘द गुरुग्राम स्कूल मर्डर’ और ‘द जॉनसन एंड जॉनसन फाइल्स’ समेत कई किताबों के अधिकार भी हासिल किए हैं। इसका उद्देश्य अपनी कहानियों पर ज्यादा नियंत्रण रखना और तैयार स्क्रिप्ट्स के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के बजाय खुद मजबूत आईपी तैयार करना है।

संजय राउत्रे ने कहा कि बाहर से देखने पर मैचबॉक्स की स्लेट भले ही अलग-अलग तरह की नजर आती हो, लेकिन अंदर से हर प्रोजेक्ट के पीछे एक ही सवाल होता है—क्या यह कहानी अस्तित्व में आने लायक है और क्या इसे ऐसी लागत में बनाया जा सकता है, जिसे दर्शक सही ठहरा सकें?

उनके मुताबिक, कम बजट में बनाई गई ‘थ्री ऑफ अस’ जैसी शांत फिल्म कंपनी के लिए उतनी ही संतोषजनक हो सकती है, जितनी 200 करोड़ रुपये की ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ जैसी बड़ी फिल्म। उनके शब्दों में, “फिल्म का बड़ा होना जरूरी नहीं है। जरूरी यह है कि उसका गणित सही हो।”

मैचबॉक्स शॉट्स खुद को एक बुटीक प्रोडक्शन हाउस के रूप में देखता है, लेकिन उसकी महत्वाकांक्षा इससे कहीं बड़ी है। कंपनी का लक्ष्य लंबे समय तक चलने वाले आईपी तैयार करना, क्रिएटर्स के साथ मजबूत और स्थायी साझेदारी बनाना और थिएट्रिकल, स्ट्रीमिंग के साथ-साथ इंटरनेशनल मार्केट में भी काम करना है।

आखिरकार, कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ एक और हिट फिल्म या सीरीज बनाना नहीं है। असली लक्ष्य यह साबित करना है कि अनुशासन और सही बिजनेस मॉडल के साथ क्वालिटी कंटेंट को लंबे समय तक सफल कारोबार में बदला जा सकता है।

1.6 करोड़ रुपये की नेटवर्थ देखकर आप भी होंगे हैरान, लेकिन 25 साल के इस युवा की असली टेंशन कुछ और है

25 साल की उम्र में जहां ज्यादातर युवा करियर की शुरुआत और कमाई बढ़ाने की कोशिश में जुटे होते हैं, वहीं एक टियर-2 शहर के युवा उद्यमी ने करीब ₹1.6 करोड़ की नेटवर्थ बना ली है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इतनी संपत्ति बनाने के बाद भी उसकी चिंता खत्म नहीं हुई। अब उसका सवाल है- पैसा कमाने के बाद उसे सही जगह कैसे लगाया जाए और अगला लक्ष्य क्या हो?

18 की उम्र में शुरू हुई कमाई की कहानी

इस युवा की आर्थिक यात्रा 18 साल की उम्र में freelancing से शुरू हुई थी। धीरे-धीरे उसने Instagram पर theme pages बनाए और इन्हीं पेजों को आगे चलकर अपने डिजिटल मीडिया बिजनेस में बदल दिया। आज उसकी कमाई का मुख्य जरिया यही बिजनेस है। हालांकि, बिजनेस से होने वाली आय तय नहीं रहती और समय के साथ इसमें उतार-चढ़ाव आता रहता है।

करोड़ों की संपत्ति, कई जगह फैला निवेश

Reddit के r/personalfinanceindia पर अपनी कहानी शेयर करते हुए 25 वर्षीय उद्यमी ने अपने निवेश का पूरा ब्योरा बताया। उसके पोर्टफोलियो में सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय शेयरों का है। उसके मुताबिक, करीब ₹85 लाख भारतीय इक्विटी, ₹7.5 लाख अमेरिकी शेयरों और ₹5 लाख म्यूचुअल फंड्स में लगे हैं। इसके अलावा ₹5 लाख Sovereign Gold Bonds और ₹2 लाख Gold ETFs में निवेश किए गए हैं। रियल एस्टेट में करीब ₹15 लाख और क्रिप्टोकरेंसी में ₹3 लाख लगाए गए हैं।

₹40-45 लाख कैश में, लेकिन निवेश को लेकर उलझन

सबसे दिलचस्प हिस्सा उसके पास मौजूद नकदी है। करीब ₹40-45 लाख लंबे समय से बैंक अकाउंट में पड़े हैं। वह खुद भी मानता है कि इतनी बड़ी रकम को सिर्फ सेविंग अकाउंट में रखना शायद पैसे का सबसे बेहतर इस्तेमाल नहीं है। लेकिन समस्या यह है कि वह सिर्फ इसलिए निवेश नहीं करना चाहता कि पैसा कहीं लगा हुआ दिखे। वह ऐसी जगह तलाश रहा है, जहां जोखिम और संभावित रिटर्न उसके हिसाब से संतुलित हों।

अब लक्ष्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं

युवा उद्यमी के मुताबिक, उसका अगला लक्ष्य बिजनेस को आगे बढ़ाने के साथ अपनी संपत्ति को अलग-अलग जगहों पर फैलाना है। वह किसी एक बिजनेस या एसेट पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहता। आखिरकार उसकी नजर FIRE यानी Financial Independence, Retire Early पर है। यानी वह ऐसी आर्थिक स्थिति बनाना चाहता है, जहां भविष्य में रोजी-रोटी के लिए काम करना मजबूरी न रहे।

₹1.6 करोड़ के बाद भी Reddit पर मांगी सलाह

अपनी स्थिति बताते हुए उसने Reddit यूजर्स से पूछा कि अगर कोई 25 साल की उम्र में करीब ₹1.5-2 करोड़ की नेटवर्थ और ₹40-45 लाख कैश के साथ हो, तो उसे आगे किस दिशा में ध्यान देना चाहिए। पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दिलचस्प रहीं। कई यूजर्स ने उसकी उपलब्धि की तारीफ की और कहा कि वह अपनी उम्र के ज्यादातर लोगों से काफी आगे है। एक यूजर ने उसके काम के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह Instagram पर कई theme pages का मालिक है, जिनमें meme pages भी शामिल हैं।

लोगों ने दी निवेश से ज्यादा सुरक्षा की सलाह

कुछ Reddit यूजर्स का ध्यान उसके निवेश से ज्यादा insurance पर गया। एक यूजर ने term insurance बढ़ाने और पर्याप्त health insurance लेने की सलाह दी। साथ ही emergency fund तैयार रखने की बात भी कही गई। एक अन्य यूजर ने real estate में धीरे-धीरे कदम रखने और rental income बनाने का सुझाव दिया।

असली कहानी ₹1.6 करोड़ की नहीं, अगले फैसले की है

इस पूरी कहानी का दिलचस्प पहलू सिर्फ यह नहीं है कि 25 साल की उम्र में किसी ने कितनी संपत्ति बना ली। असली सवाल यह है कि जब कमाई एक मुकाम तक पहुंच जाए, तो उसके बाद सही फैसले कैसे लिए जाएं?

8 इंटरव्यू में रिजेक्शन के बाद टेक प्रोफेशनल ने अपनाई ‘चीट शीट’ वाली तरकीब, फिर मिले 2 जॉब ऑफर

दुनिया का सबसे ‘बदसूरत’ कुत्ता कौन? लटकी जीभ बनी खासियत, मालिक को मिले 5 लाख रुपये

दुनिया में खूबसूरती के मुकाबले तो आपने कई देखे होंगे, लेकिन अमेरिका में होने वाली एक अनोखी प्रतियोगिता का मकसद बिल्कुल अलग है। यहां खूबसूरत नहीं, बल्कि सबसे अलग और ‘बदसूरत’ दिखने वाले कुत्ते को विजेता चुना जाता है। हालांकि, इसके पीछे किसी जानवर का मजाक उड़ाना नहीं, बल्कि रेस्क्यू डॉग्स की ओर लोगों का ध्यान खींचना है। साल 2026 में इस अनोखे मुकाबले का खिताब 6 साल की पग कुतिया जिन्नी लू ने जीता है। उसकी उभरी हुई आंखें और बाहर निकली बड़ी जीभ उसकी पहचान बन गई हैं। खास बात यह है कि जिन्नी लू की कहानी सिर्फ उसके अजीबोगरीब लुक तक सीमित नहीं है।

कभी दक्षिण कोरिया में मुश्किल हालात में मिली यह कुतिया आज अमेरिका में सुरक्षित और खुशहाल जिंदगी जी रही है। उसकी जीत यह संदेश भी देती है कि किसी जानवर की खूबसूरती उसके चेहरे से नहीं, बल्कि उसके संघर्ष और जज्बे से देखी जानी चाहिए।

6 साल की जिन्नी लू बनी विजेता

2026 के World’s Ugliest Dog Contest का खिताब 6 साल की पग कुतिया जिन्नी लू ने अपने नाम किया। उसकी बड़ी-बड़ी उभरी आंखें और मुंह से बाहर निकली लंबी जीभ उसके लुक को बेहद अनोखा बनाती हैं। यही ‘परफेक्टली इंपर्फेक्ट’ अंदाज जजों को पसंद आया। जिन्नी लू को जीत के लिए 5,000 डॉलर की इनामी राशि मिली। इसके साथ उसे टीवी शो में नजर आने और एक स्पेशल एडिशन प्रोडक्ट पर अपनी तस्वीर छपने का मौका भी मिला।

कभी ठंड में लकड़ी के बक्से में मिली थी

जिन्नी लू की कहानी उसके लुक से कहीं ज्यादा भावुक है। वह दक्षिण कोरिया के एक पहाड़ी इलाके में बेहद खराब हालत में मिली थी। उसे ठंड में एक लकड़ी के बक्से में छोड़ दिया गया था। बाद में उसे रेस्क्यू किया गया और अमेरिका में एक नया परिवार मिला। आज वही कुतिया न सिर्फ सुरक्षित और खुशहाल जिंदगी जी रही है, बल्कि दुनिया का ध्यान भी अपनी ओर खींच रही है।

प्रतियोगिता का मकसद सुनकर बदल जाएगा नजरिया

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य किसी कुत्ते का मजाक बनाना नहीं है। आयोजक ऐसे रेस्क्यू डॉग्स को पहचान दिलाना चाहते हैं, जिन्होंने बीमारी, चोट, उपेक्षा या मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया है।जिन्नी लू की जीत भी इसी संदेश को मजबूत करती है कि किसी जानवर की कीमत उसके चेहरे से नहीं, बल्कि उसकी जिंदगी और संघर्ष से तय होनी चाहिए।

पग की शक्ल के पीछे छिपी है स्वास्थ्य की कहानी

पग कुत्तों की चपटी नाक, बड़ी आंखें और छोटी कद-काठी उन्हें अलग पहचान देती है। हालांकि, उनकी शारीरिक बनावट के कारण कुछ पग्स को सांस लेने जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जिन्नी लू की उभरी आंखें और बाहर निकली जीभ भी उसकी अनोखी शारीरिक बनावट का हिस्सा हैं। इसके बावजूद वह एक सक्रिय और खुश कुतिया है। शायद यही वजह है कि इस बार जजों को उसमें ‘बदसूरती’ से ज्यादा संघर्ष के बाद मिली जिंदगी की खूबसूरती नजर आई।

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नेपाल ने भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को दिया बड़ा सम्मान, नेपाली आर्मी, भारत संग रिश्ते को नई ताकत देने की कवायद

भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने नेपाली सेना के जनरल का मानद पद दिया। यह सम्मान काठमांडू के राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में दिया गया। यह सम्मान भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच लंबे समय से चली आ रही खास परंपरा का हिस्सा है। दोनों देशों की सेनाओं के प्रमुखों को एक-दूसरे की सेना में मानद पद देने की परंपरा रही है।

नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने  मानद पद दिया

जनरल धीरज सेठ सोमवार को तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर नेपाल पहुंचे हैं। उनकी यह यात्रा 17 से 19 अगस्त तक है। इसका मकसद भारत और नेपाल के बीच सैन्य संबंधों को और मजबूत करना है। यात्रा के दौरान उन्होंने काठमांडू स्थित नेपाली सेना के मुख्यालय में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने टुंडिखेल के आर्मी पैवेलियन में जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी।

रक्षा मंत्रालय ने जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह अपने नेपाली समकक्ष के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत करेंगे। इसके अलावा, वह नेपाली सेना के सैन्य संचालन महानिदेशक से दोनों देशों के रणनीतिक हित से जुड़े मामलों पर जानकारी लेंगे।

जनरल धीरज सेठ की कहानी

18 अगस्त को जनरल धीरज सेठ शिवपुरी स्थित आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज के अधिकारियों को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह कॉलेज के प्रशिक्षकों और विदेशी अधिकारियों से भी बातचीत करेंगे। इसके अलावा, नेपाल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत-नेपाल के द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। 19 अगस्त को अपनी यात्रा के आखिरी दिन सेना प्रमुख पोखरा जाएंगे। यहां वह पूर्व सैनिकों के एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वह वीर नारियों और वीरता पुरस्कार पाने वाले लोगों को सम्मानित करेंगे। भारत लौटने से पहले वह नेपाल में रहने वाले भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों से भी मुलाकात करेंगे।

भारत-नेपाल के बीच रिश्ते मजबूत

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से मजबूत ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। दोनों देशों के इस रिश्ते को अक्सर ‘रोटी-बेटी का रिश्ता’ कहा जाता है। जनकपुर-अयोध्या और लुंबिनी-बोधगया जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध दोनों देशों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं। भारत और नेपाल लोकतांत्रिक मूल्यों, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को लेकर भी एक जैसी सोच रखते हैं। मंत्रालय के मुताबिक, जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा दोनों देशों की सेनाओं और जनता के बीच पुराने संबंधों को और मजबूत करने का मौका है। इससे भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच सहयोग के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।

जनरल धीरज सेठ को परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल और अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने अपने सैन्य करियर की शुरुआत नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला से की थी। दिसंबर 1986 में उन्हें आर्म्ड कॉर्प्स में कमीशन मिला था। ईमानदारी, कड़ी मेहनत, निस्वार्थ सेवा और सेना के प्रति समर्पण ने जनरल धीरज सेठ को एक कुशल और अनुभवी सैन्य अधिकारी बनाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अपने लंबे सैन्य करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।

ONGC New Chairman: आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों ने किया आवेदन, लिस्ट में Oil India के CMD रंजीत रथ भी

सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) का पद जल्द खाली होने वाला है। ऐसे में इस पद के लिए आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों ने आवेदन किया है। इनमें ऑयल इंडिया लिमिटेड के प्रमुख (सीएमडी) रंजीत रथ भी शामिल हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 54 साल के रथ लगातार दूसरे वर्ष ONGC में टॉप पोजिशन पाने की दौड़ में शामिल हुए हैं। रथ अगस्त, 2022 से ऑयल इंडिया का नेतृत्व कर रहे हैं।

रथ पिछले साल भी ONGC प्रमुख के पद के लिए चुने गए उम्मीदवारों की सूची में शामिल थे, लेकिन सरकार ने ONGC के मौजूदा चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण कुमार सिंह का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया था। अब सिंह का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को खत्म हो रहा है। लिहाजा यह पद 7 दिसंबर को खाली हो जाएगा।

बता दें कि सरकार ने ONGC के सीएमडी पद के लिए अधिकतम आयु सीमा समेत पात्रता संबंधी मानदंडों में ढील दी है। इसके तहत अधिकतम उम्र सीमा को बढ़ाकर 59 साल कर दिया गया है। साथ ही अब चुने गए उम्मीदवार को 3 साल का फिक्स्ड टर्म दिया जाएगा, जिसे और 2 साल बढ़ाया जा सकता है। ONGC भारत की सबसे बड़ी तेल और गैस उत्पादक कंपनी है।

आवेदन करने वालों में और कौन

ONGC के सीएमडी पद के लिए आवेदन करने वालों में ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) के मैनेजिंग डायरेक्टर राजर्षि गुप्ता भी शामिल हैं। सरकार द्वारा अधिकतम आयु सीमा 59 वर्ष किए जाने के बाद वह इस पद के लिए पात्र हुए हैं। गुप्ता जुलाई, 2027 में रिटायर होने वाले हैं और इस पद के लिए आवेदन करने वाले इंटर्नल कैंडिडेट्स में सबसे वरिष्ठ हैं। पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि ONGC के प्रौद्योगिकी एवं क्षेत्रीय सेवाओं के डायरेक्टर विक्रम सक्सेना, रणनीति एवं कॉरपोरेट मामलों के डायरेक्टर सत्यम कुमार और OVL के ऑपरेशंस के डायरेक्टर दुलाल हलदर ने भी ONGC के सीएमडी पद के लिए आवेदन किया है। इसके अलावा इस दौड़ में MRPL के डायरेक्टर (फाइनेंस) देवेंद्र कुमार और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के मार्केटिंग डायरेक्टर एस.पी. श्रीवास्तव भी शामिल हैं।

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सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी करेगी कैंडिडेट का चुनाव

ONGC की ओर से दिए गए विज्ञापन के अनुसार, सीएमडी पद के लिए उम्मीदवारों की उम्र पद खाली होने की तारीख यानि 7 दिसंबर, 2026 को 59 साल या उससे ज्यादा नहीं होनी चाहिए। चुने गए उम्मीदवार को शुरू में 3 साल के लिए नियुक्त किया जाएगा और परफॉर्मेंस रिव्यू के बाद उनके कार्यकाल को 2 साल और बढ़ाया जा सकता है। 60 साल की उम्र के बाद कोई भी नौकरी या कार्यकाल का विस्तार कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर होगा। कैंडिडेट का सिलेक्शन सामान्य PESB सिलेक्शन प्रोसेस के बजाय पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से गठित एक सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी द्वारा किया जाएगा।

111 साल की महिला ने बताया लंबी उम्र का राज, रोज खाती हैं मछली और लेती हैं 2 झपकी

सोशल मीडिया पर चीन की वांग गेयिंग की कहानी काफी वायरल हो रही है। 111 साल की चीनी महिला वांग गेयिंग की लंबी उम्र लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। गेयिंग ने बताया कि, लंबी उम्र के लिए हमेशा कोई खास या मुश्किल तरीका अपनाना जरूरी नहीं होता। उनके रोजमर्रा के जीवन की साधारण आदतें और आसान दिनचर्या ही उनकी लंबी और स्वस्थ जिंदगी का हिस्सा रही हैं। सोशल मीडिया पर ये कहानी काफी वायरल हो रही है। आइए जानते हैं इनकी पूरी कहानी

चीन के जिआंग्सू प्रांत के रुगाओ शहर की रहने वाली वांग गेयिंग 111 साल की उम्र में भी अपने रोजमर्रा के काम खुद करने की कोशिश करती हैं। 100 साल की उम्र पार करने के बाद भी उनकी एक्टिव बनी हुई है। उनकी दिनचर्या की आदतें उन्हें इस उम्र में भी एक्टिव और आत्मनिर्भर रखती हैं।

100 साल की उम्र में करती है काम

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, वांग गेयिंग उम्र बढ़ने के बावजूद काफी एक्टिव रही हैं। 100 साल की उम्र में भी वह खेतों में काम करती थीं और मूंगफली व तरबूज तोड़ने जैसे कामों में हाथ बंटाती थीं। 111 साल की वांग आज भी घर के छोटे-मोटे काम खुद करती हैं। वह टेबल साफ करती हैं, कपड़े तह करती हैं और घर के दूसरे हल्के कामों में हाथ बंटाती हैं। परिवार के लोग उन्हें कई बार आराम करने की सलाह देते हैं, लेकिन वांग के मुताबिक, शरीर को एक्टिव रखना जरूरी है। वह किसी खास एक्सरसाइज रूटीन का पालन नहीं करतीं, बल्कि घर के काम करते हुए ही उनका शरीर चलता-फिरता रहता है। उनका कहना है कि इससे शरीर के अंग सक्रिय रहते हैं और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर बना रहता है।

वांग की लंबी उम्र को उनके शहर रुगाओ से भी जोड़कर देखा जाता है। चीन के पूर्वी हिस्से में स्थित जिआंग्सू प्रांत का ये शहर लंबे समय से अपनी ज्यादा उम्र तक जीने वाली आबादी के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिन्होंने 100 साल या उससे ज्यादा की उम्र पूरी की है।

रुगाओ में 672 लोग है 100 के पार

जियांगहाई इवनिंग न्यूज के मुताबिक, फरवरी तक रुगाओ में 100 साल या उससे ज्यादा उम्र के 672 लोग जीवित थे। इसी वजह से यह शहर चीन के उन इलाकों में शामिल है, जहां इतनी ज्यादा उम्र तक पहुंचने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक है। शोध में रुगाओ की मिट्टी में मौजूद खनिजों और स्थानीय वातावरण में पाए जाने वाले सूक्ष्म तत्वों का भी अध्ययन किया गया है। साइंटिस्ट्स ने रुगाओ के वातावरण को समझने के लिए वहां की मिट्टी, फसलों और पीने के पानी की जांच की है।

खान-पान का रखती है ध्यान

शोध के मुताबिक, रुगाओ का स्थानीय वातावरण लोगों की सेहत और लंबी उम्र से जुड़ा हो सकता है, हालांकि इसकी कोई एक वजह साफ नहीं है। वहीं, वांग कम मात्रा में अलग-अलग तरह का खाना खाती हैं। उन्हें मछली पसंद है और वह ज्यादा खाने से बचती हैं। वांग की दिनचर्या में सिर्फ खान-पान और शारीरिक गतिविधियां ही शामिल नहीं हैं, बल्कि वह छोटी-छोटी खुशियों को भी महत्व देती हैं। वह हर दिन कोई न कोई अच्छा काम करने की कोशिश करती हैं। कभी वह परिवार के किसी सदस्य की तारीफ करती हैं तो कभी किसी पुराने दोस्त को छोटा सा संदेश भेजती हैं। जब कोई बात वांग को परेशान करती है, तो वह उसे लेकर रातभर चिंता करने के बजाय सो जाना पसंद करती हैं।

वांग का सोने-जागने का समय भी तय है। वह शाम 7 बजे सोती हैं और सुबह 7 बजे उठती हैं। दिन में एक-दो बार आराम भी करती हैं। वांग अपने परिवार की पांच पीढ़ियों के साथ रहती हैं और उनका एक पोता 60 साल का है। पांच पीढ़ियों के परिवार के साथ रहते हुए भी वह अपनी क्षमता के अनुसार रोजमर्रा के काम खुद करती हैं।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

Gangs of Wasseypur 2: ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर 2’ के 14 साल पूरे, फैजल खान के किरदार में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने जीता था दिल

Gangs of Wasseypur 2: चौदह साल पहले गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 ने इंडियन सिनेमा का माहौल बदल दिया और दर्शकों को इसके सबसे यादगार किरदारों में से एक फैजल खान से मिलवाया। हालांकि फिल्म ने खुद कल्ट स्टेटस हासिल किया। लेकिन नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का फैजल का जबरदस्त किरदार उनके करियर का एक अहम मोड़ बन गया, जिसने उन्हें एक शानदार परफॉर्मर से अपनी पीढ़ी के सबसे मशहूर एक्टर में से एक बना दिया।

फैज़ल खान को डायलॉग आइकॉनिक बनाता था। उनकी चुप्पी, पैनी नजर, सधी हुई बॉडी लैंग्वेज और आसान डायलॉग डिलीवरी ने किरदार में एक अनोखी सच्चाई ला दी। हर ठहराव का मतलब था, हर एक्सप्रेशन एक कहानी कहता था, यह साबित करता है कि दमदार एक्टिंग अक्सर उसमें होती है जो अनकहा रह जाता है। चौदह साल बाद भी, फैज़ल खान इंडियन सिनेमा के सबसे पसंदीदा और सबसे ज़्यादा कोट किए जाने वाले किरदारों में से एक हैं।

इस फ़िल्म ने एक शानदार सफ़र की शुरुआत की, जिसमें नवाज़ुद्दीन ने अलग-अलग जॉनर और प्लेटफ़ॉर्म पर बेहतरीन एक्टिंग की नई परिभाषा गढ़ी है। द लंचबॉक्स, बदलापुर और मंटो से लेकर सेक्रेड गेम्स, सीरियस मेन और सिनेमा और स्ट्रीमिंग में कई शानदार परफॉर्मेंस तक, उन्होंने लगातार ऐसी वर्सेटिलिटी दिखाई है जिसका मुकाबला बहुत कम एक्टर कर सकते हैं। कभी भी किसी एक इमेज या जॉनर तक सीमित नहीं रहे, उन्होंने ऐसे काम किए हैं जो बिना डरे पसंद और अपने काम के प्रति अटूट कमिटमेंट को दिखाते हैं।

एक ऐसी इंडस्ट्री में जो अक्सर रिवाज़ों से चलती है, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने अपने टैलेंट, लगन और असलियत से अपना रास्ता बनाया। हर किरदार में घुल जाने की उनकी काबिलियत, चाहे वह किसी भी लेवल या जॉनर का हो, ने उन्हें एक्टिंग की एक पहचान दिलाई है। हर परफॉर्मेंस में इमोशनल गहराई, ईमानदारी और बातचीत का एक अनोखा तरीका होता है जिसने दर्शकों, क्रिटिक्स और उभरते हुए एक्टर्स को समान रूप से प्रेरित किया है।

गैंग्स ऑफ़ वासेपुर 2 के चौदह साल बाद भी, फैज़ल खान इंडियन सिनेमा के सबसे आइकॉनिक किरदारों में से एक हैं, जबकि नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अपनी आइकॉनिक परफॉर्मेंस और ज़बरदस्त वर्सेटाइल टैलेंट पर बनी लेगेसी को और मज़बूत कर रहे हैं।

आगे एक रोमांचक लाइनअप के साथ, मशहूर एक्टर अगली बार हाउस M.D. रीमेक (टाइटल की घोषणा जल्द) में बनिजय, तुम्बाड 2, ब्लाइंड बाबू, नूरानी चेहरा, संगीन, सेक्शन 108, उनकी अनटाइटल्ड पंजाबी डेब्यू और थामा 2 में नज़र आएंगे।  जैसे-जैसे वह अलग-अलग और चैलेंजिंग रोल अपना रहे हैं, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी इंडियन सिनेमा के सबसे अच्छे कहानीकारों में से एक बने हुए हैं, यह साबित करते हुए कि सच्चे लेजेंड किसी एक परफॉर्मेंस से नहीं, बल्कि काम के एक ऐसे लंबे समय तक चलने वाले कलेक्शन से पहचाने जाते हैं जो लगातार डेवलप होता रहता है।