14 साल तक पहनी एयरफोर्स की वर्दी, अब देहरादून में चलाती है बुटिक! वजह सुन आप भी करेंगे सलाम

14 साल तक भारतीय वायु सेना में नौकरी करने के बाद एक पूर्व महिला अधिकारी ने अपनी रोज की जिंदगी को बदलने का फैसला किया। उन्होंने नौकरी छोड़ी और देहरादून वापस आकर कपड़ों की दुकान शुरू कर ली। उनका यह कदम किसी बड़े सपने को पूरा करने के लिए नहीं था, बल्कि एक खास वजह से लिया गया भावनात्मक फैसला था।

आखिर क्या है इस फैसले की वजह?

इस महिला का इंस्टाग्राम पर @thefaujifounder नाम से एक अकाउंट है, जहां उन्होंने एक वीडियो में अपनी कहानी बताई। उन्होंने कहा कि उनकी दुकान पर आने वाले लोग उनसे पूछते हैं कि आखिर वायु सेना की अधिकारी से वह कपड़ों की दुकान चलाने वाली कैसे बन गईं। उन्होंने बताया कि उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी के तौर पर 14 साल तक सेवा की, लेकिन नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें लगा कि अब परिवार के साथ रहना ज्यादा जरूरी है। उनके बच्चे बड़े हो रहे थे और माता-पिता भी बुजुर्ग हो रहे थे।

इसके बाद वह देहरादून लौट आईं। उनका घर उनकी दुकान से सिर्फ 100 मीटर दूर है। उन्हें कपड़ों और क्रिएटिव काम में इंटरेस्ट थी, इसलिए उन्होंने सोचा कि क्यों न ऐसा काम किया जाए, जिससे परिवार के पास रहने को भी मिल सके। इसी सोच के साथ उन्होंने कपड़ों की दुकान शुरू कर दी।

सोशल मीडिया पर पसंद आई उनकी यह कहानी

वह कहती है कि उनका यह फैसला किसी बड़े मुकाम तक पहुंचने के लिए नहीं था। वह बस अपने बच्चों के साथ रहकर जिंदगी को मजे से जीना चाहती थीं। उनकी कहानी सोशल मीडिया पर भी लोगों को पसंद आई। कई लोगों ने कहा – परिवार के साथ समय बिताना बहुत कीमती और यादगार पल होता है।

ये कहानी इसलिए लोगों के दिल को छू रही है क्योंकि इसमें कोई मोटिवेशनल ज्ञान नहीं है। एक मां का सिंपल फैसला है – करियर से ज्यादा जरूरी है परिवार के साथ रहना।

सोशल मीडिया पर लोग कमेंट कर रहे हैं – आपने वर्दी उतारी है, जज्बा नहीं।

The Vvaan Review: ‘द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ ने दी सिनेमाघरों में दस्तक, सिद्धार्थ मल्होत्रा-तमन्ना भाटिया की फ्रेश जोड़ी ने जीता दिल

The Vvaan Review: बॉलीवुड में जब भी किसी फिल्म में प्रेम कहानी, सीक्रेट, रोमांच और भारतीय लोक कथाओं का मिक्सचर देखने को मिलता है, तो दर्शकों की दिलचस्पी अपने आप बढ़ जाती है। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया स्टारर ‘Vvaan: Force of the Forrest’ भी इसी तरह की एक अलग दुनिया लेकर आई है। फिल्म 25 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। कैसी है फिल्म चलिए आपको बताते हैं।

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी शुरू होती है मुंबई में रह रहे ऋषि से…..। वह अपने अतीत और पुश्तैनी जड़ों की ओर लौटने को मजबूर होता है, जब जमीन से जुड़ा एक मामला उसे अपनी पत्नी ममता के साथ देवांचल गांव ले आता है। ऋषि के लिए यह सफर शुरुआत में सिर्फ एक पारिवारिक मसले को सुलझाने तक सीमित होता है, लेकिन जैसे ही वह गांव पहुंचता है उसे उस जंगल से जुड़ी एक अजीबोंगरीब लोककथा के बारे में पता चलता है, जिसे लोग वन देवी का पवित्र स्थान मानते हैं।

गांव में मान्यता है कि अंधेरा होने के बाद जंगल में जाना खतरे से खाली नहीं है। लेकिन जब ऋषि इस चेतावनी को नजरअंदाज कर रात में जंगल में चला जाता है तो उसे ऐसा राज पता चलता है, जो उसकी सोच और पूरी कहानी को बदलकर रख देता है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, अलग-अलग घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ती जाती हैं और रहस्य की परतें धीरे-धीरे खुलती हैं। लेकिन ये सब जानने के लिए आपको फिल्म सिनेमाघरों में देखनी होगी।

कलाकरों का काम

सिद्धार्थ मल्होत्रा के लिए यह किरदार उनकी पिछली कुछ फिल्मों से अलग नजर आता है। सिद्धार्थ ने किरदार के एक्शन और इमोशनल दोनों पहलुओं को अच्छे तरीके से संभाला है। खासकर फिल्म के गंभीर हिस्सों में उनकी एक्टिंग इंप्रेस करने वाली है। वहीं तमन्ना भाटिया फिल्म में सिर्फ ग्लैमर या रोमांटिक एंगल तक सीमित नहीं रहतीं। उनके किरदार की कहानी में अपनी अहम भूमिका है। सिद्धार्थ के साथ उनकी केमिस्ट्री भी फिल्म को एक अलग रंग देती है। तमन्ना ने अपने किरदार में बेहद जची हैं।

डायरेक्शन और सिनेमैटोग्राफी

निर्देशक ने फिल्म के लिए एक अलग विजुअल वर्ल्ड तैयार करने की कोशिश की है। जंगल, अंधेरा, रहस्यमयी माहौल और लोककथाओं से जुड़े सीन फिल्म को एक अलग पहचान देते हैं। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी रोमांच को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खासकर जंगल से जुड़े सीन्स में साउंड और विजुअल्स मिलकर माहौल बनाने में सफल रहते हैं।

कहां कमजोर पड़ती है फिल्म?

फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष उसका कॉन्सेप्ट है, लेकिन यही जगह कुछ हिस्सों में इसकी कमजोरी भी बन जाती है। लोककथा, रोमांस, एक्शन, रहस्य और सुपरनैचुरल एलिमेंट्स को एक साथ संतुलित करना आसान नहीं था। कुछ सीन्स में कहानी जरूरत से ज्यादा एक्सपोजिशन पर निर्भर नजर आती है और सेकंड हाफ में काफी स्लो लगती है। फिर भी कहानी को अच्छा बनाने की कोशिश शानदार है।

देखें या नहीं

‘Vvaan’ की सबसे बड़ी खूबी इसका अलग सब्जेक्ट और भारतीय लोककथा से जुड़ा संसार है। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया ने अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है, जबकि फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट और रहस्यमयी माहौल इसे सामान्य बॉलीवुड फिल्मों से अलग बनाता है। अगर आपको लोककथाओं, रहस्य, रोमांस, एडवेंचर और सुपरनैचुरल कहानियों में दिलचस्पी है तो वन आपको एक अलग सिनेमाई अनुभव दे सकती है। फिल्म को हम 3.5 रेटिंग देते हैं।

20 घंटे की मेहनत, 351 किलो वजन और चार फीट ऊंचाई, बप्पा के लिए तैयार हुआ गणेशोत्सव का खास मोदक

मुंबई का गणेशोत्सव अपनी भव्यता, आस्था और अनोखी भेंटों के लिए जाना जाता है। लेकिन इस बार साकिनाका चा महाराजा के दरबार में बप्पा को मिली एक ऐसी भेंट ने सबका ध्यान खींच लिया, जो आकार में विशाल होने के साथ-साथ सोच में भी बेहद खास है। मुंबई के सबसे ऊंचे गणपति के लिए 351 किलो का चीनी-मुक्त मोदक तैयार किया गया, जिसे मशहूर शेफ हर्ष केडिया ने बनाया है।

करीब चार फीट ऊंचे इस विशाल मोदक को देखकर श्रद्धालुओं के लिए यह यकीन करना भी मुश्किल था कि यह वही पारंपरिक मिठाई है, जिसे गणेशोत्सव में भगवान गणेश को सबसे प्रिय भोगों में गिना जाता है।

20 घंटे की मेहनत, भक्ति से जुड़ी कहानी

इस अनोखे मोदक को तैयार करने में शेफ हर्ष केडिया ने करीब 20 घंटे लगाए। हर्ष केडिया को उनके शुगर-कॉन्शस और डायबिटिक-फ्रेंडली व्यंजनों के लिए जाना जाता है। ऐसे में इस बार उन्होंने अपनी कला को सिर्फ एक विशाल मिठाई बनाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे भक्ति और समावेशिता से जोड़ दिया। मोदक को पूरी तरह चीनी-मुक्त रखा गया, ताकि उम्रदराज, डायबिटीज से जूझ रहे और स्वास्थ्य के प्रति सजग श्रद्धालु भी प्रसाद का आनंद ले सकें।

पारंपरिक मोदक में चॉकलेट का मॉडर्न ट्विस्ट

इस विशाल मोदक को खास बनाने वाली एक और चीज थी इसकी अंतिम सजावट। इसके ऊपर भारत में उगाए गए कोको से तैयार चॉकलेट की परत चढ़ाई गई। यानी आकार और परंपरा में भारतीय, लेकिन प्रस्तुति में आधुनिक अंदाज। 351 किलो वजन वाला यह मोदक किसी आम पूजा की थाली में समा जाए, ऐसा तो संभव ही नहीं था। इसे बप्पा के विशाल पंडाल में विशेष भेंट के रूप में रखा गया, जहां श्रद्धालुओं की निगाहें बार-बार इस विशाल मिठाई पर टिकती रहीं।

‘यह मोदक मेरे लिए भावुक पल है’

शेफ हर्ष केडिया ने सोशल मीडिया पर इस भेंट से जुड़ी अपनी भावनाएं साझा करते हुए इसे महज एक पाक-कला का प्रदर्शन नहीं, बल्कि बप्पा के प्रति प्रेम और समर्पण बताया। उनके संदेश का भाव यही था कि यह मोदक उनके हाथों से निकलकर बप्पा के दरबार तक पहुंचा है और इसके पीछे ढेर सारा प्यार है।

जब प्रसाद बना सबके लिए

साकिनाका चा महाराजा की 42 फीट से अधिक ऊंची गणपति प्रतिमा के सामने रखा गया यह मोदक सिर्फ देखने की चीज बनकर नहीं रहा। रिपोर्टों के मुताबिक, बाद में इसे श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया गया।

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50 mph से ज्यादा की रफ्तार से गोता लगा समंदर को चीरती ये चिड़िया कौन है? इस गजब क्लिक पर फोटोग्राफर को मिला बड़ा अवॉर्ड

आज जब कुछ ही सेकंड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ऐसी तस्वीरें बना सकता है, जो पहली नजर में बिल्कुल असली लगती हैं, ऐसे समय में जंगल और आसमान के बीच कैमरे से कैद की गई एक सच्ची तस्वीर की अहमियत और बढ़ जाती है। Bird Photographer of the Year प्रतियोगिता की इस साल की विजेता तस्वीरों ने इसी बात को एक बार फिर सामने रखा है। प्रतियोगिता के निदेशक विल निकोल्स ने कहा कि इस साल की तस्वीरें याद दिलाती हैं कि प्रकृति की असली तस्वीर का कोई विकल्प नहीं है।

उनके मुताबिक, प्रतियोगिता में शामिल हर फोटो जंगल में घटे किसी वास्तविक पल की कहानी कहती है एक ऐसा पल, जिसे कैमरे में कैद करने के लिए फोटोग्राफर को लंबे इंतजार, धैर्य और मेहनत से गुजरना पड़ा।

एक क्लिक के पीछे छिपी होती है लंबी कहानी

पक्षियों की तस्वीर लेना सिर्फ कैमरा उठाकर शटर दबा देना नहीं है। कई बार फोटोग्राफर को घंटों या उससे भी ज्यादा समय तक किसी खास पक्षी के व्यवहार का इंतजार करना पड़ता है। कभी सही रोशनी का इंतजार होता है, तो कभी पक्षी के सही दिशा में देखने का। यही वजह है कि ऐसी तस्वीरों में सिर्फ खूबसूरती नहीं, बल्कि उस पल तक पहुंचने वाले इंसान की मेहनत भी दिखाई देती है। निकोल्स का कहना है कि लोग वास्तविक कहानियों को वास्तविक लोगों के जरिए देखना और महसूस करना हमेशा पसंद करेंगे। यही वजह है कि इस प्रतियोगिता की तस्वीरें सिर्फ पक्षियों की सुंदरता नहीं दिखातीं, बल्कि इंसान और प्रकृति के बीच रिश्ते को भी सामने लाती हैं।

तस्वीरों से संरक्षण की मुहिम को भी ताकत

Bird Photographer of the Year का मकसद केवल दुनिया की शानदार पक्षी तस्वीरों को सम्मान देना नहीं है। प्रतियोगिता के जरिए पक्षियों और उनके संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश भी की जाती है। इस साल प्रतियोगिता ने Birds on the Brink नाम की संस्था को 5,000 पाउंड से ज्यादा की आर्थिक मदद दी। यह संस्था दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय स्तर पर पक्षियों के संरक्षण से जुड़े प्रयासों के लिए अनुदान देती है।

जब तस्वीर बनती है बदलाव की वजह

निकोल्स के मुताबिक, संरक्षण की कोशिशों को सफल बनाने में आम लोगों का समर्थन बेहद जरूरी है। और लोगों तक प्रकृति की अहमियत पहुंचाने में तस्वीरें बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। एक खूबसूरत पक्षी की तस्वीर शायद कुछ सेकंड के लिए किसी की नजर रोक दे, लेकिन वही तस्वीर अगर उसे उस पक्षी और उसके प्राकृतिक आवास के बारे में सोचने पर मजबूर कर दे, तो कैमरे की एक क्लिक जागरूकता की शुरुआत बन सकती है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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IND vs JPN: बिहार की गलियों से निकलकर जापान की नेशनल टीम तक…भारत-जापान मैच से पहले छाए अभिषेक आनंद

भारत और जापान के बीच एकमात्र टी20 मुकाबला 22 सितंबर को खेला जाएगा। दोनों टीमों के बीच ये मुकाबला कांटो के सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड में खेला जाएगा। इस मुकाबले में जापान के एक खिलाड़ी की काफी चर्चा हैं। ये खिलाड़ी बिहार की छोटी-छोटी गलियों से निकलकर वह जापान के नेशनल टीम तक का सफर तय किया है। इस खिलाड़ी का नाम अभिषेक आनंद है। बिहार के रोहतास जिले से आने वाले 28 साल के अभिषेक आनंद की कहानी काफी दिलचस्प है। भारत और जापान के बीच होने वाले मुकाबले से पहले अभिषेक का एक वीडियो वायरल होने के बाद वह चर्चा में आ गए हैं। भारत के खिलाफ होने वाले इस मैच में अभिषेक जापानी टीम में शामिल नहीं है। आइए जानते हैं इनकी कहानी

वायरल हो रहा वीडियो

भारत और जापान के टी20 मैच से पहले अभिषेक आनंद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा। वीडियो में उनसे जापान के लिए खेलने वाले बिहारी क्रिकेटर होने को लेकर सवाल पूछा गया। अभिषेक के जवाब और भारतीय टीम के लिए दिए गए उनके संदेश ने लोगों का ध्यान खींचा। उनका “बिहारी कहां नहीं है भाई” वाला जवाब भी काफी चर्चा में है।

 

भारत और जापान के बीच 22 सितंबर को पहली बार पुरुषों का टी20 इंटरनेशनल मैच खेला जाएगा। यह मुकाबला दोनों देशों के 75 साल पुराने राजनयिक संबंधों के मौके पर होगा और एशियन गेम्स से पहले तैयारियों का हिस्सा है। वहीं अभिषेक भारत के खिलाफ सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड में होने वाले मुकाबले का हिस्सा नहीं होंगे। जापान के 15 सदस्यीय टीम में अभिषेक आनंद का नाम शामिल नहीं है।

जानें बिहार के अभिषेक की कहानी

बिहार के रहने वाले अभिषेक आनंद ने IIT कानपुर में पढ़ाई के दौरान अभिषेक आनंद क्रिकेट से लगातार जुड़े रहे और कॉलेज की टीम की कप्तानी भी की। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए वह टोक्यो चले गए। जापान पहुंचने के बाद भी उन्होंने क्रिकेट खेलना नहीं छोड़ा और क्लब क्रिकेट के जरिए खेल से अपना रिश्ता बनाए रखा। इस तरह उन्होंने नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ अपने क्रिकेट के जुनून को भी जारी रखा। अभिषेक आनंद ने जापान के घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, जिसके बाद उन्हें नेशनल टीम में खेलने का मौका मिला।

कब खेला था पहला मुकाबला

अभिषेक आनंद ने 9 मई 2025 को कुक आइलैंड्स के खिलाफ अपना पहला टी20 इंटरनेशनल मैच खेला। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके बाद वह अब तक 18 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुके हैं, जिसमें उनके नाम 275 रन हैं। उनका सबसे बड़ा स्कोर 55 रन रहा है, जबकि गेंदबाजी में उन्होंने एक विकेट भी लिया है। वहीं भारत के खिलाफ वह खेलेंगे या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

Video: अंशु बिष्ट ने बताया अमेरिका में फोन चोरी का पूरा किस्सा, 911 कॉल के बाद पुलिस ने ऐसे पकड़ा चोर

अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को घूमने पहुंचे भारतीय YouTuber Anshu Bisht, जिन्हें ‘GamerFleet’ के नाम से जाना जाता है, के साथ ऐसा वाकया हुआ जिसकी उन्होंने शायद कल्पना भी नहीं की होगी। वह Burger King के एक आउटलेट में खाना लेने गए थे, लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें पता चला कि उनका स्मार्टफोन चोरी हो चुका है।

आनंद की जगह अचानक टेंशन में आए YouTuber ने जब CCTV फुटेज देखी तो मामला और भी हैरान करने वाला लगा। फुटेज में एक शख्स उनका फोन उठाकर रेस्टोरेंट से बाहर जाता दिखाई दिया।

CCTV में दिखा चोर, फोन लेकर स्कूटर से भागा

Anshu Bisht के मुताबिक, वह कुछ देर के लिए अपनी टेबल से खाना लेने गए थे। इसी दौरान एक व्यक्ति ने मौका देखकर उनका फोन उठा लिया और वहां से निकल गया। CCTV फुटेज में कथित तौर पर वह शख्स फोन को अपने अंडरवियर में छिपाता नजर आया और इसके बाद स्कूटर से वहां से चला गया। YouTuber ने दूसरे डिवाइस की मदद से अपने फोन की लोकेशन ट्रैक कर ली थी। लेकिन लोकेशन पता चलने के बावजूद उन्होंने खुद चोर का पीछा करने या उससे भिड़ने का फैसला नहीं किया।

‘डर लग रहा था, इसलिए खुद नहीं गया’

Anshu ने बताया कि उन्हें डर था कि अगर वह खुद फोन लेने पहुंचते हैं तो मामला खतरनाक हो सकता है। इसलिए उन्होंने अमेरिका के इमरजेंसी नंबर 911 पर कॉल कर पुलिस को पूरी जानकारी दी। उन्होंने पुलिस को फोन की लाइव लोकेशन के बारे में बताया। इसके बाद जो हुआ, उसने उन्हें भी हैरान कर दिया।

कुछ ही सेकंड में पहुंची पुलिस, 3-4 गाड़ियों ने घेरा

YouTuber के अनुसार, पुलिस ने लोकेशन पर पहुंचकर कुछ ही समय में संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ लिया। मौके पर करीब 3-4 पुलिस गाड़ियां पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि वह खुद वहां जाने की सोच रहे थे और मन में यह भी था कि पुलिस से पहले पहुंचकर उन्हें बता देंगे कि उनका फोन इसी जगह की लोकेशन दिखा रहा है। लेकिन जब तक वह कुछ कर पाते, पुलिस आरोपी को हिरासत में ले चुकी थी। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि पुलिस इतनी तेजी से पहुंचकर कार्रवाई कर चुकी है।

पुलिस की कार्रवाई से हुए बेहद प्रभावित

फोन वापस मिलने के बाद Anshu ने पुलिस के प्रति जमकर सम्मान जताया। उन्होंने खास तौर पर Colma Police Department की तारीफ की और कहा कि इस पूरे अनुभव के बाद उनके मन में वहां की पुलिस के लिए सम्मान और बढ़ गया है। हालांकि, उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि फोन वापस मिलने के बाद उसे इस्तेमाल करना थोड़ा अजीब लग रहा है, क्योंकि चोर ने उसे अपने अंडरवियर में छिपाकर रखा था।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी

Anshu के वीडियो के सामने आने के बाद यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गई। कई यूजर्स ने पुलिस की तेज कार्रवाई की तारीफ की और राहत जताई कि फोन सुरक्षित वापस मिल गया। एक यूजर ने पुलिस की कार्रवाई को ‘सुपरफास्ट’ बताया, जबकि दूसरे ने कहा कि पूरी घटना किसी रोलरकोस्टर राइड जैसी थी, लेकिन अंत अच्छा रहा। कुछ लोगों ने इस घटना पर मजाक भी किया। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि भारतीय पुलिस शायद इसे AI की कहानी बता देती। वहीं किसी ने मजाक किया कि फोन को अब ‘वॉशिंग मशीन’ की जरूरत पड़ सकती है।

हालांकि, यह पूरी कहानी Anshu Bisht द्वारा साझा किए गए सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है और इसके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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Women’s Asia Cup 2026: महिला एशिया कप में ट्रॉफी पर विवाद, नकवी के हाथों से कप लेने नहीं पहुंची टीम इंडिया

Women’s Asia Cup 2026: भारतीय महिला क्रिकेट टीम दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में महिला एशिया कप के फाइनल के बाद होने वाली ट्रॉफी प्रेजेंटेशन में शामिल नहीं हुई। माना जा रहा है कि टीम ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के प्रमुख मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि यह घटनाक्रम 2025 के पुरुष एशिया कप फाइनल की याद दिलाता है। तब भी भारतीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी नहीं ली थी और वह ट्रॉफी लेकर दुबई स्थित ACC के ऑफिस चले गए थे, जहां वह अब भी रखी हुई है।

बता दें कि हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने फाइनल में श्रीलंका को 72 रन से हराया। जीत के बाद टीम ने हमेशा की तरह जश्न मनाया और ब्रॉडकास्टर को इंटरव्यू भी दिए। आमतौर पर इसके 15-20 मिनट बाद ट्रॉफी प्रेजेंटेशन शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार इसमें एक घंटे से ज्यादा का समय लग गया।

इस दौरान BCCI सेक्रेटरी देवजीत सैकिया और उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने मैदान के पास भारतीय टीम के खिलाड़ियों से मुलाकात की। उन्होंने टीम के साथ ड्रेसिंग रूम में हुई निजी मेडल सेरेमनी में भी हिस्सा लिया।

पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नकवी ट्रॉफी देने के इरादे से मैदान पर पहुंचे थे; ACC चीफ के तौर पर यह उनका फैसला था। उन्होंने सेरेमनी में भी हिस्सा लिया और रनर-अप रहने पर श्रीलंकाई कप्तान चमारी अथापथु को चेक सौंपा।

लेकिन भारतीय टीम, कोच और अधिकारी मंच के आस-पास कहीं नजर नहीं आए। पाकिस्तानी मीडिया का यह भी दावा है कि वह शायद महिला एशिया कप की ट्रॉफी एक बार फिर ACC ऑफिस ले जाएंगे।

मोहसिन नकवी के लिए फिर वही कहानी

आपको बता दें कि नकवी पिछले साल भारत-पाकिस्तान के पुरुषों के फाइनल मैच के दौरान भी उसी जगह मौजूद थे, जहां इसी तरह का विवाद हुआ था। टूर्नामेंट जीतने के बाद, भारतीय टीम ने नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था और टीम ने कहा था कि ट्रॉफी किसी दूसरे ICC या ACC अधिकारी के हाथों दिलाई जाए।

ऐसा इसलिए क्योंकि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कारण टूर्नामेंट के दौरान भारत ने जो रुख अपनाया था, यह उसी का हिस्सा था। टीम ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मैचों से पहले और बाद में पारंपरिक रूप से हाथ मिलाने से पहले ही इनकार कर दिया था, और फिर भारत के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अपने प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ टूर्नामेंट में मिली तीन जीतों में से पहली जीत भारतीय सेना को समर्पित की थी।

कहा जाता है कि BCCI के नकवी से ट्रॉफी नहीं लेने के फैसले को उनके उन पुराने बयानों से भी जोड़कर देखा गया, जो उन्होंने देश के केंद्रीय गृह मंत्री के तौर पर भारत को लेकर दिए थे। हालांकि, नकवी ने ट्रॉफी किसी दूसरे अधिकारी के हाथों देने से इनकार कर दिया। इसके चलते मैदान में काफी देर तक स्थिति साफ नहीं हो सकी। हालाँकि, नकवी ने किसी और अधिकारी को ट्रॉफ़ी सौंपने से इनकार कर दिया, जिससे वहाँ गतिरोध पैदा हो गया। आखिरकार, वे ट्रॉफी लेकर मैदान से चले गए और उसे एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के ऑफ़िस ले गए।

इसके बाद शुक्ला समेत भारतीय अधिकारियों ने ICC की बैठकों में यह मुद्दा उठाया, लेकिन नकवी अपनी बात पर अड़े रहे। उनका कहना था कि भारत को ट्रॉफी उनके ऑफ़िस से ही लेनी होगी, न कि किसी दूसरे अधिकारी को उसे सौंपने दिया जाएगा।

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180 बार होटल, 50+ इंश्योरेंस पॉलिसियां और करोड़ों रुपये… पत्नी ने ऐसे पकड़ा पति का अफेयर

चीन में एक शादीशुदा शख्स का कथित सात साल पुराना अफेयर उस वक्त कोर्ट तक पहुंच गया, जब उसकी पत्नी को पति के बैंक ट्रांजैक्शन, इंश्योरेंस पॉलिसियों और होटल बुकिंग से जुड़े ऐसे सबूत मिले, जिन्होंने पूरे मामले की तस्वीर बदल दी। मामला चीन के गुआंग्शी प्रांत के लिउझोउ शहर का है। यहां रहने वाली महिला झेन को 2017 में अपने पति गुओ और एक इंश्योरेंस एजेंट ली के बीच कुछ आपत्तिजनक और रोमांटिक मैसेज मिले थे।

दोनों के बीच हुई बातचीत में कई बार 520 युआन के ट्रांसफर का भी जिक्र था। चीन में 520 को इंटरनेट स्लैंग में ‘आई लव यू’ से जोड़ा जाता है। उस समय झेन को पति के रिश्ते पर शक तो हुआ, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

अस्पताल में मिली एक जानकारी ने फिर जगा दिया शक

साल 2024 में झेन इलाज के लिए अस्पताल में थीं। इसी दौरान उन्हें पता चला कि उनके पति ने उनके और उनकी छोटी बेटी के नाम पर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां खरीदी थीं। यह जानकारी मिलने के बाद झेन ने पति के इंश्योरेंस एजेंट ली के साथ पुराने लेन-देन की पड़ताल शुरू की। जैसे-जैसे उन्होंने रिकॉर्ड खंगाले, मामला साधारण इंश्योरेंस खरीद से कहीं ज्यादा बड़ा नजर आने लगा।

करोड़ों रुपये के ट्रांसफर और 50 से ज्यादा इंश्योरेंस पॉलिसियां

झेन के मुताबिक, उनके पति ने कई वर्षों के दौरान ली को 30 लाख युआन से ज्यादा रकम ट्रांसफर की थी। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 3.6 करोड़ रुपये बैठती है। इतना ही नहीं, रिकॉर्ड में सामने आया कि गुओ ने ली के जरिए 50 से ज्यादा इंश्योरेंस पॉलिसियां खरीदी थीं। इन पॉलिसियों के प्रीमियम के तौर पर उसने 1 करोड़ युआन से अधिक, यानी करीब 12 करोड़ रुपये, खर्च किए थे। इन सौदों का फायदा ली के करियर को भी मिला। इस दौरान वह इंश्योरेंस कंपनी में आगे बढ़ती गईं और आखिरकार मैनेजर के पद तक पहुंच गईं।

होटल के 180 से ज्यादा चक्कर ने बढ़ाया शक

मामले की जांच आगे बढ़ी तो एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, गुओ ने अधिकारियों के सामने माना कि वह ली के साथ 180 से ज्यादा बार होटल में ठहरा था। इस जानकारी ने दोनों के बीच सिर्फ कारोबारी संबंध होने के दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद झेन ने अपने पति, ली और इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

वैवाहिक संपत्ति का हुआ इस्तेमाल

झेन का आरोप था कि पति ने शादी के दौरान अर्जित संपत्ति का इस्तेमाल इन इंश्योरेंस पॉलिसियों और कथित तौर पर ली को पैसे देने में किया। उन्होंने अदालत से मांग की कि इंश्योरेंस प्रीमियम के साथ-साथ ली को ट्रांसफर की गई रकम भी वापस दिलाई जाए। झेन ने ली के पति के खिलाफ भी अलग दावा किया और पैसे लौटाने की जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

इंश्योरेंस एजेंट ने अफेयर से किया इनकार

दूसरी ओर, ली ने गुओ के साथ किसी भी तरह के प्रेम संबंध से साफ इनकार किया। उनका कहना था कि होटल में हुई मुलाकातें काम के सिलसिले में थीं और ऐसा कोई कानून नहीं है जो इंश्योरेंस एजेंट को होटल में ग्राहक से मिलने से रोकता हो। ली ने यह भी दावा किया कि बाद में गुओ महंगे प्रीमियम का भुगतान नहीं कर पा रहा था और इसलिए पैसे वापस पाने के लिए उसने अपनी पत्नी के साथ मिलकर यह मामला खड़ा किया।

पति के बयान ने बदल दी पूरी कहानी

लेकिन ली के इस दावे को गुओ के बयान से झटका लगा। गुओ ने अधिकारियों को बताया कि उसके पास कई संपत्तियां हैं और वह किसी आर्थिक परेशानी से नहीं जूझ रहा था। उसने यह भी स्वीकार किया कि ली के साथ उसका निजी रिश्ता इतनी बड़ी संख्या में इंश्योरेंस पॉलिसियां खरीदने के फैसले की एक अहम वजह था। यानी जिस कहानी को महज कारोबारी लेन-देन बताया जा रहा था, उसमें निजी रिश्ते की भूमिका भी सामने आ गई।

कोर्ट ने माना रिश्ता अनुचित

मामले में सबूतों की समीक्षा करने के बाद अदालत ने माना कि गुओ और ली के बीच अनुचित संबंध था। अदालत ने ली को झेन को करीब 9 लाख युआन, यानी लगभग 1.1 करोड़ रुपये, वापस करने का आदेश दिया। इस रकम को अनुचित तरीके से दिए गए उपहार माना गया। इसके साथ ब्याज चुकाने का भी आदेश दिया गया। ली ने फैसले के खिलाफ दोबारा सुनवाई की मांग की, लेकिन उनकी रिट्रायल याचिका भी खारिज कर दी गई। इस तरह एक पत्नी को मिले कुछ संदिग्ध मैसेज से शुरू हुई कहानी बैंक ट्रांजैक्शन, करोड़ों रुपये की इंश्योरेंस खरीद, 180 से ज्यादा होटल स्टे और आखिरकार अदालत के फैसले तक पहुंच गई।

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PoK Bandh: पीओके में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बगावत! फुल शटडाउन और खाली पड़ीं सड़कें, क्यों सुलग रहा है ये इलाका?

PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोगों ने शहबाज शरीफ की सरकार के अत्याचार के खिलाफ अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। PoK में बुधवार (9 सितंबर) को एक बार फिर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के ऐलान पर पूरे क्षेत्र में शटर-डाउन और व्हील-जाम हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। कई इलाकों में दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। जबकि सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित हुआ। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के सड़कों पर उतरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा।

JAAC लंबे समय से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की सरकार और इस्लामाबाद की नीतियों के खिलाफ आंदोलन चला रही है। संगठन में व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल हैं। आंदोलन अब केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा। बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व, स्थानीय शासन और पाकिस्तान के कथित हस्तक्षेप जैसे मुद्दे भी इसके केंद्र में आ गए हैं।

12 आरक्षित सीटों को खत्म करने की मांग

JAAC की प्रमुख मांगों में क्षेत्रीय विधानसभा में पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इन सीटों की वजह से स्थानीय आबादी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित होता है और पाकिस्तान समर्थित राजनीतिक प्रभाव को बढ़ावा मिलता है। यह मुद्दा हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान भी काफी विवादित रहा। चुनाव हिंसा, सुरक्षा प्रतिबंधों और JAAC के बहिष्कार के बीच हुए। कुछ क्षेत्रों में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के कारण मतदान भी टालना पड़ा।

आंदोलन के केंद्र में ये मुद्दे

PoK में विरोध का एक बड़ा कारण आर्थिक समस्याएं भी हैं। प्रदर्शनकारी बिजली की दरों, खाद्य एवं गेहूं सब्सिडी, रोजगार, महंगाई और सरकारी सुविधाओं को लेकर लंबे समय से नाराजगी जाहिर करते रहे हैं। इससे पहले भी क्षेत्र में बिजली और गेहूं की कीमतों को लेकर बड़े आंदोलन हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप रहा है कि आम जनता आर्थिक दबाव झेल रही है, जबकि राजनीतिक और प्रशासनिक वर्ग को विशेष सुविधाएं हासिल हैं।

पाक सरकार ने JAAC पर लगाया बैन

आंदोलन बढ़ने के डर से पाकिस्तान-प्रशासित क्षेत्र की सरकार ने JAAC पर प्रतिबंध लगाने का कदम उठाया है। सरकार ने इसके पीछे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया। हालांकि, संगठन के नेताओं और समर्थकों ने सरकार के इस कदम को विरोध की आवाज दबाने की कोशिश बताया। पिछले कुछ महीनों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आई हैं। इन घटनाओं में मौत और घायल होने की खबरों ने तनाव को और बढ़ाया है। कई इलाकों में आवाजाही और संचार पर भी प्रतिबंध लगाए गए।

इन इलाकों में बंद का व्यापक असर

बुधवार के बंद का असर PoK के कई हिस्सों में दिखाई दिया। खासतौर पर भिंबर, मीरपुर, रावलाकोट, मुजफ्फराबाद और नीलम घाटी समेत प्रमुख क्षेत्रों में बाजार बंद रहे। इस दौरान परिवहन सेवाएं प्रभावित हुईं। कई जगह प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। लोगों ने अपनी मांगों के समर्थन में पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ नारे लगाए। JAAC का कहना है कि जब तक उसकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

नई सरकार के सामने बढ़ी चुनौती

PoK में यह विरोध ऐसे समय में हो रहा है जब हालिया विधानसभा चुनावों के बाद पाकिस्तान की सत्तारूढ़ तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) ने करीब एक दशक बाद क्षेत्र में सत्ता में वापसी की है। ऐसे में JAAC का आंदोलन नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। एक ओर सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

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वहीं, दूसरी ओर प्रदर्शनकारी राजनीतिक अधिकारों, आर्थिक राहत और स्थानीय मामलों में अधिक आजादी की मांग पर पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि सरकार और JAAC के बीच बातचीत का रास्ता नहीं निकलता है, तो टकराव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है। आपको बता दें कि पीओके में पिछले कई महीनों से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं।

Box Office Collection: ‘मिर्जापुर द मूवी’ के तूफान के बीच ‘हनुमान अंश’ का जलवा कायम, 32वें दिन भी बॉक्स ऑफिस पर डटी फिल्म

Box Office Collection: बॉक्स ऑफिस पर इस समय नई रिलीज और पुरानी हिट फिल्म के बीच दिलचस्प टक्कर देखने को मिल रही है। 4 सितंबर को सिनेमाघरों में पहुंची ‘मिर्जापुर द मूवी’ ने रिलीज के महज चार दिनों में 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर अपनी मजबूत पकड़ साबित कर दी है। दूसरी ओर, ‘हनुमान अंश’ पांचवें हफ्ते में पहुंचने के बावजूद दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच रही है। आमतौर पर किसी फिल्म की कमाई पर नई रिलीज का असर साफ दिखाई देता है, लेकिन यहां कहानी कुछ अलग नजर आ रही है। सीमित स्क्रीन्स के बावजूद ‘हनुमान अंश’ की कमाई में बड़ी गिरावट नहीं आई है। सोमवार के कलेक्शन ने भी ट्रेड को हैरान किया है।

अब एक तरफ ‘मिर्जापुर द मूवी’ की रफ्तार चर्चा में है, तो दूसरी ओर ‘हनुमान अंश’ का लंबा बॉक्स ऑफिस सफर लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।

सोमवार को दोनों फिल्मों ने दिखाया दम

‘मिर्जापुर द मूवी’ ने रिलीज के चौथे दिन यानी सोमवार को भी बॉक्स ऑफिस पर मजबूत प्रदर्शन किया। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने सोमवार को 15.50 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ ही घरेलू बॉक्स ऑफिस पर इसकी कुल कमाई 109.25 करोड़ रुपये हो गई है।

वर्किंग डे पर भी 15 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई बताती है कि फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। सोमवार का टेस्ट पास करने के बाद फिल्म के लंबे बॉक्स ऑफिस रन की उम्मीद भी बढ़ गई है।

32वें दिन भी ‘हनुमान अंश’ ने चौंकाया

अब बात उस फिल्म की, जिसने अपनी धीमी शुरुआत के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर अलग ही कहानी लिख दी है। पांचवें हफ्ते में पहुंच चुकी ‘हनुमान अंश’ ने 32वें दिन यानी सोमवार को 9.50 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। सीमित स्क्रीन्स पर रिलीज होने के बावजूद फिल्म की यह कमाई हैरान करने वाली है। इसके साथ ही फिल्म का घरेलू नेट कलेक्शन बढ़कर 131.63 करोड़ रुपये हो गया है। यानी पांचवें हफ्ते में भी फिल्म नई रिलीज को कड़ी चुनौती दे रही है।

छोटी शुरुआत से बड़ी कामयाबी तक

‘हनुमान अंश’ की सबसे दिलचस्प बात इसका बॉक्स ऑफिस सफर है। रिलीज के शुरुआती 15 दिनों में फिल्म की कमाई 1 करोड़ रुपये का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई थी। ऐसे में शायद ही किसी ने सोचा होगा कि आगे चलकर यही फिल्म इतनी बड़ी हिट साबित होगी। लेकिन धीरे-धीरे दर्शकों की प्रतिक्रिया बदलने लगी। मजबूत वर्ड ऑफ माउथ का फायदा फिल्म को मिला और तीसरे हफ्ते के बाद इसकी कमाई में लगातार तेजी देखने को मिली।

दर्शकों की पसंद ने बदली पूरी कहानी

फिल्म की कहानी और कंटेंट को लेकर दर्शकों के बीच सकारात्मक चर्चा बढ़ी तो इसका सीधा असर सिनेमाघरों पर दिखाई दिया। सोशल मीडिया और दर्शकों की तारीफ ने फिल्म को धीरे-धीरे और ज्यादा लोगों तक पहुंचाया। अब बॉलीवुड के कई बड़े सितारे भी फिल्म देखने पहुंच रहे हैं और इसकी तारीफ कर रहे हैं। यही वजह है कि सीमित बजट में बनी यह फिल्म लगातार चर्चा में बनी हुई है।

2 करोड़ के बजट ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने अपनी लागत के मुकाबले कई गुना ज्यादा कमाई कर ली है। यही वजह है कि इसकी सफलता को बॉलीवुड की चर्चित सरप्राइज हिट्स में गिना जा रहा है। अब फिल्म के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आने वाले दिनों में यह बॉक्स ऑफिस पर कितनी लंबी पारी खेलती है। वहीं, ‘मिर्जापुर द मूवी’ के 100 करोड़ पार करने के बाद दोनों फिल्मों की कमाई पर दर्शकों और ट्रेड की नजर बनी हुई है।

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