Q1 Results: बिगब्लॉक कंस्ट्रक्शन का घाटा कम हुआ, रेवेन्यू 40% बढ़ा; नया प्लांट लगाने का प्लान

BigBloc Construction Q1 Results: AAC ब्लॉक और ग्रीन बिल्डिंग मटेरियल बनाने वाली कंपनी BigBloc Construction ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 40.5% बढ़कर 79.14 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल की समान तिमाही में 56.35 करोड़ रुपये थी।

कंपनी के घाटे में बड़ी कमी

कंपनी का नेट लॉस घटकर 71.95 लाख रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 4.96 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA 386% बढ़कर 6.28 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 2.29% से बढ़कर 7.93% पर पहुंच गया। कंपनी ने इसका श्रेय बेहतर ऑपरेशनल, लागत नियंत्रण और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स को दिया है।

क्षमता विस्तार पर जोर

तिमाही के दौरान BigBloc Construction ने उमरगांव प्लांट में कंस्ट्रक्शन केमिकल्स का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया। इसमें ब्लॉक जॉइंटिंग मोर्टार, रेडी मिक्स प्लास्टर और टाइल एडहेसिव्स शामिल हैं। कंपनी का कुल क्षमता उपयोग बढ़कर 69% हो गया, जो पिछले साल 53% था। इसके अलावा समूह की रूफटॉप सोलर क्षमता बढ़कर 3.34 मेगावाट हो गई।

इंदौर में बनेगा सबसे बड़ा AAC प्लांट

BigBloc ने हाल ही में इंदौर के पास 56,950 वर्ग मीटर जमीन खरीदी है। यहां भारत का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड AAC ब्लॉक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाया जाएगा। मानसून के बाद इसका निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। कंपनी को L&T से बुलेट ट्रेन स्टेशन परियोजना का ऑर्डर भी मिला है, जिससे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में उसकी मौजूदगी और मजबूत हुई है।

कंपनी के CFO मोहित साबू ने कहा कि BigBloc अब सिर्फ AAC ब्लॉक निर्माता नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड ग्रीन बिल्डिंग सॉल्यूशंस कंपनी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का फोकस क्षमता विस्तार, नए प्रोडक्ट्स, वितरण नेटवर्क और लंबी अवधि में शेयरधारकों के लिए वैल्यू बढ़ाने पर रहेगा।

Q1 Results: ज्वेलरी कंपनी का मुनाफा 140% बढ़ा, रेवेन्यू 78% उछला; शेयरों पर नजर रहेगी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bonus Issue: हर एक शेयर पर एक नया शेयर फ्री देगी कंपनी, एक महीने में शेयर 60% उछला

अहमदाबाद की इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन कंपनी चावड़ा इंफ्रा बोनस शेयर देने जा रही है। कंपनी के हर शेयरहोल्डर को प्रत्येक एक शेयर पर एक नया शेयर मिलेगा। कंपनी के बोर्ड ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बोर्ड ने अथॉराइज्ड शेयर कैपिटल 35 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 70 करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।

कंपनी के बोर्ड ने डिविडेंड पर भी किया विचार

चावड़ा इंफ्रा ने इस बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को बतया है। कंपनी ने कहा है कि बोर्ड ने शेयरधारकों को डिविडेंड के प्रस्ताव पर भी विचार किया। लेकिन, कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने और कैश रिजर्व के लिए प्रॉफिट को बनाए रखने का फैसला लिया गया। आम तौर पर कंपनियां प्रॉफिट के बाद डिविडेंड का ऐलान करती है। इसमें कंपनी प्रॉफिट का एक हिस्सा अपने शेयरहोल्डर्स को देती है।

बोनस शेयर के लिए अभी रिकॉर्ड डेट का ऐलान नहीं

कंपनी ने कहा है कि कंपनी का फोकस बिजनसे ग्रोथ बढ़ाने और वित्तीय स्थिति मजबूत करने पर है। इससे लंबी अवधि में शेयरहोल्डर्स के लिए वैल्यू क्रिएट करने में मदद मिलेगी। हाल में कंपनी ने 89.45 करोड़ रुपये का रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट मिलने का ऐलान किया था। कंपनी ने बोनस शेयर के लिए अभी रिकॉर्ड डेट के बारे में नहीं बताया है। माना जा रहा है कि कंपनी बाद में इस बारे में ऐलान करेगी।

कंपनी को अहमदाबाद में मिला एक बड़ा रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट

कंपनी हाल में मिले रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के तहत अहमदाबाद के अदाणी शांतिग्राम टाउनशिप में बहुमंजिला रेजिडेंशियल टावर बनाएगी। यह प्रोजेक्ट 24 महीनों में पूरा हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट कंपनी को ऐसे वक्त मिला है, जब वह अपनी एग्जिक्यूशन कपैसिटी बढ़ाने पर फोकस कर रही है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश कुमार चावड़ा ने ने कहा कि नए प्रोजेक्ट से यह संकेत मिलता है कि कंपनी की एग्जिक्यूशन कपैसिटी में कस्टमर्स का भरोसा बढ़ रहा है।

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बीते एक महीने में 60 फीसदी चढ़ा है कंपनी का शेयर 

चावड़ा इंफ्रा का शेयर 7 अगस्त को 5.47 फीसदी चढ़कर 140 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक महीने में यह शेयर 60 फीसदी से ज्यादा उछला है। हालांकि, 7 अगस्त को शेयर बाजारों में गिरावट दिखी। निफ्टी 0.27 फीसदी गिरकर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में 0.58 फीसदी यानी 455 अंक की गिरावट आई। बैंक निफ्टी भी 0.55 फीसदी गिरकर बंद हुआ।

क्या UPI पेमेंट पर आपको देना होगा चार्ज और कटेगा आपका पैसा? करोड़ों यूजर्स के लिए Payments Council of India ने दिया बड़ा अपडेट

UPI Payment Update: देश में डिजिटल पेमेंट का आधार बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा? इस पूरे विवाद और चर्चाओं के बीच पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक डिटेल्ड Q&A शेयर कर कई जरूरी चीजों पर स्थिति साफ की है। हमारे सहयोगी सीएनबीसी टीवी 18 की रिपोर्ट के मुताबिक PCI और केंद्र सरकार दोनों ने साफ कर दिया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पेमेंट पूरी तरह से मुफ्त है और रहेगा। इस पूरी बहस का मुख्य केंद्र उपभोक्ता नहीं बल्कि भारत के इस विशाल डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने पर आने वाली लागत है।

आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के लिए UPI रहेगा बिल्कुल फ्री

पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के मुताबिक UPI के इस्तेमाल और UPI पेमेंट्स स्वीकार करने के बीच के फर्क को समझना जरूरी है। 2016 में अपनी शुरुआत से लेकर अब तक आम यूजर्स के लिए UPI पूरी तरह से फ्री रहा है। कस्टमर बिना किसी ट्रांजैक्शन चार्ज के एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में तुरंत पैसे भेज सकते हैं। किराना दुकानों सहित देश के छोटे व्यापारियों के लिए भी UPI पेमेंट स्वीकार करने पर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लगता है। भारत के सबसे छोटे व्यवसायों तक डिजिटल भुगतान को सुलभ बनाए रखना इस प्लेटफॉर्म के विस्तार का मुख्य आधार रहा है।

फ्री होने के बावजूद क्यों उठ रहे हैं फंडिंग और लागत से जुड़े सवाल?

अगर ग्राहकों और छोटे व्यापारियों से कोई चार्ज नहीं लिया जा रहा है, तो फिर UPI पर खर्च कौन उठा रहा है? PCI ने स्पष्ट किया है कि भले ही यह सेवा यूजर्स के लिए मुफ्त है लेकिन इसका इंफ्रास्ट्रक्चर मुफ्त में काम नहीं करता। UPI इकोसिस्टम को चलाने के लिए टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम, कंप्लायंस, कस्टमर सपोर्ट और इनोवेशन में लगातार इन्वेस्टमेंट की जरूरत होती है। पिछले लगभग एक दशक में बैंकों, पेमेंट कंपनियों, फिनटेक फर्मों, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मिलकर इस नेटवर्क को बनाने और इसे बनाए रखने में भारी निवेश किया है। PCI के मुताबिक यह बहस किसी यूजर के रोजमर्रा के ट्रांजैक्शन पर फीस लगाने के बारे में नहीं है बल्कि ट्रांजैक्शन वॉल्यूम बढ़ने के साथ पेमेंट सिस्टम के सस्टेनेबल फंडिंग को लेकर है।

मर्चेंट सर्विस चार्ज को लेकर क्या है स्थिति?

सीएनबीसी टीवी 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, मर्चेंट सर्विस चार्ज (जहां लागू हो) व्यापारियों और उनके पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच की वाणिज्यिक व्यवस्था होती है। ऐसे किसी भी शुल्क का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आम ग्राहकों को UPI का इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने पड़ेंगे। UPI अब सिर्फ एक पेमेंट ऑप्शन नहीं रह गया है बल्कि यह भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का एक अहम हिस्सा बन चुका है। इसका इस्तेमाल करोड़ों आम लोग और बिजनेस कर रहे हैं। 24×7 सुरक्षित, मजबूत और बिना किसी बाधा के सर्विस देने के लिए साइबर सुरक्षा और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन पर लगातार फंडिंग की जरूरत होती है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का स्पष्टीकरण और संसद का नया विधेयक

UPI पर MDR और चार्जेस को लेकर हाल ही में उठी आशंकाओं पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भविष्य में अगर कभी MDR पेश किया भी जाता है तो वह मर्चेंट्स (व्यापारियों) पर लागू होगा, ग्राहकों पर नहीं। यह स्पष्टीकरण टैक्सेशन और दूसरे कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के बाद पैदा हुई चिंताओं के जवाब में आया है। हालांकि इस विधेयक के तहत UPI ट्रांजैक्शन पर कोई MDR या नई फीस लागू नहीं की गई है। यह बिल सिर्फ एक कानूनी ढांचा तैयार करता है, जो सरकार को भविष्य की अधिसूचनाओं के माध्यम से मौजूदा जीरो-MDR व्यवस्था में संशोधन करने का अधिकार देता है।

MDR क्या होता है और आगे क्या होगा?

MDR वह शुल्क होता है जो पेमेंट लेने वाला व्यापारी देता है, न कि पेमेंट करने वाला ग्राहक। आमतौर पर यह शुल्क ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने वाले अधिग्रहणकर्ता बैंक, जारीकर्ता बैंक, पेमेंट नेटवर्क और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच बांटा जाता है। बैंकों और पेमेंट कंपनियों ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और सिस्टम अपग्रेडेशन के बढ़ते खर्चों पर चिंता जताई है। वित्त मंत्री ने जानकारी दी है कि संसद द्वारा विधेयक पारित किए जाने के बाद ही NPCI की अध्यक्षता वाली UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी इस मुद्दे की समीक्षा करेगी। फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए कोई बदलाव नहीं हुआ है और जीरो-कॉस्ट पेमेंट की मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।

क्या देशभर में चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन? जिंद-सोनीपत रूट के बाद अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दी ये जानकारी

देश में पहली हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन के सफल परिचालन के बाद अब इसे दूसरे रेल रूट्स पर भी चलाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिंद-सोनीपत रूट पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के बाद अब इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेल मंत्री ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि दूसरे रेल रूट्स पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का फैसला संसाधनों की उपलब्धता, ऑपरेशनल फिजिबिलिटी और दूसरी जरूरी चीजों पर निर्भर करेगा।

संसद में सांसदों ने पूछे थे हाइड्रोजन तकनीक से जुड़े कई सवाल

आपको बता दें कि राज्यसभा में अलग अलग राजनीतिक दलों के सांसदों ने रेलवे की इस नई तकनीक को लेकर कई सवाल उठाए थे। सांसदों ने इसके विकास पर हुए कुल खर्च, देश भर में स्वीकृत और प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं का ब्योरा, इन परियोजनाओं के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की उपलब्धता, लागत और ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन के लिए विकसित की जा रही घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कैपिसिटी को लेकर रेल मंत्री से जवाब मांगा था।

जिंद-सोनीपत रूट पर दर्ज हुई कॉमर्शियल सर्विस की सक्सेस

सांसदों के सवालों का लिखित जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्च सदन को बताया कि 17 जुलाई 2026 को जिंद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत की गई थी। 17 जुलाई से लेकर 3 अगस्त तक 89 किलोमीटर लंबे जिंद-सोनीपत सेक्शन पर इस ट्रेन ने कुल 2492 किलोमीटर की दूरी तय की है। रेल मंत्री ने अपने बयान में कहा कि भारतीय रेलवे में हाइड्रोजन संचालित ट्रेन तकनीक के इस्तेमाल को प्रदर्शित करने के लिए इस हाइड्रोजन ट्रेन को पायलट आधार पर विकसित किया गया है।

जींद में बना डेडिकेटेड प्लांट और सेफ्टी प्रोटोकॉल

रेल मंत्री ने बताया कि इस ट्रेनसेट को हाइड्रोजन उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा के जींद में एक डेडिकेटेड हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है। सुरक्षा मानकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही हाइड्रोजन स्टोरेज फैसिलिटी तैयार की गई है, जिससे निर्धारित सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित हो सके।

पर्यावरण को फायदा: जीरो कार्बन उत्सर्जन

इस तकनीक के फायदों के बारे में बताते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि हाइड्रोजन ट्रेनसेट शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन सुनिश्चित करता है, जिसमें बाई-प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ जलवाष्प (Water Vapour) ही निकलती है। उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रेनसेट फ्यूल सेल तकनीक पर काम करता है। इसमें ट्रैक्शन पावर जेनरेशन के लिए कोई मूविंग पार्ट या पारंपरिक इंजन नहीं होता है। इस वजह से इसके मूवमेंट में शोर भी नहीं होता और ध्वनि प्रदूषण कम होता है। यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे को हाइड्रोजन तकनीक के क्षेत्र में मजबूती से स्थापित करता है।

141 करोड़ रुपये थी इस प्रोजेक्ट की लागत

इस प्रोजेक्ट पर आए खर्च का ब्योरा देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट को कुल 141 करोड़ रुपये के खर्च से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेनसेट और इसका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रायोगिक तौर पर तैयार किया गया है, इसलिए इस चरण में स्थापित ट्रैक्शन सिस्टम के साथ हाइड्रोजन चालित ट्रेनों की लागत की सीधी तुलना करना उचित नहीं है। रेल मंत्री ने इस ट्रेन की प्रमुख विशेषताओं के बारे में भी बताया है। यह ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और विकास पर आधारित है। ब्रॉड-गेज प्लेटफॉर्म पर 10 डिब्बों के साथ यह दुनिया की सबसे लंबी और 2400 किलोवाट क्षमता वाली सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनसेट है। इसमें 1200 किलोवाट के दो ड्राइविंग पावर कार लगे हैं, जो मिलकर 2400 किलोवाट बिजली पैदा करते हैं, और इसके साथ आठ पैसेंजर कोच जोड़े गए हैं।

क्या अन्य रूटों पर भी चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन?

फिलहाल भारतीय रेलवे सिर्फ जिंद-सोनीपत सर्किट पर ही पायलट आधार पर इस हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन तकनीक का संचालन कर रहा है। देश के दूसरे हिस्सों में इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दोहराया कि अन्य रूटों पर हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का निर्णय भविष्य में संसाधनों की उपलब्धता, परिचालन संबंधी व्यावहारिकताओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा।

Technocraft Ventures IPO: टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स का आईपीओ खुला, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?

Technocraft Ventures IPO: टेक्नोक्रॉफ्ट वेंचर्स का आईपीओ 7 अगस्त को खुल गया। कंपनी ने प्रति शेयर 200-212 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। यह इश्यू 252 करोड़ रुपये का है। इस इश्यू में ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) शामिल है। इसका मतलब है कि कंपनी के पुराने इनवेस्टर्स यह प्रमोटर्स अपने शेयर बचेंगे। इस इश्यू में 11 अगस्त तक निवेश किया जा सकता है।

क्या कंपनी सिर्फ नए शेयर इश्यू करेंगी?

Technocraft Ventures आईपीओ में निवेशकों को 202 करोड़ रुपये के नए शेयर इश्यू करेगी। बाकी 50 करोड़ रुपये के शेयर ओएफएस के जरिए बेचे जाएंगे। कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई दोनों स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट होंगे। क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए 50 फीसदी शेयर रिजर्व हैं। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) के लिए 15 फीसदी और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 35 फीसदी शेयर रिजर्व हैं।

कंपनी का बिजनेस क्या है?

कंपनी की शुरुआत 1998 में हुई थी। इसका हेडक्वार्टर दिल्ली-एनसीआर में है। यह पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ईपीसी कंपनी है। इसके प्रोजेक्ट्स राजस्थान, उत्तर प्रदेशन, दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार और मध्यप्रदेश में हैं। ये प्रोजेक्ट्स वाटर सप्लाई स्कीम, सिवरेज नेटवर्क्स, सिवेज ट्रीटमेंट प्लांटंस (STPs), पावर ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रिब्यूशन और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हैं। कंपनी की ऑर्डरबुक में सिवरेज और वेस्टवाटर प्रोजेक्ट्स की करीब 91 फीसदी हिस्सेदारी है।

क्या कंपनी मुनाफा कमा रही है?

कंपनी को करीब पूरा बिजनेस सरकार के डिपार्टमेंट्स और म्युनिसिपल बॉडीज से मिलता है। इनमें केंद्र और राज्य सरकार की स्पॉन्सर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होती हैं। बीते तीन सालों में कंपनी की ग्रोथ अच्छी रही है। FY26 में कंपनी का टैक्स बाद प्रॉफिट (PAT) 43.31 करोड़ रुपये रहा। पीएटी मार्जिन 12.56 फीसदी रहा। ऑपरेशन से रेवेन्यू 345 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू ग्रोथ 23.40 फीसदी रही। कंपनी की ऑर्डरबुक 1,236 करोड़ रुपये की थी।

शेयर की वैल्यूएशन ज्यादा या कम?

इश्यू से आए पैसे का इस्तेमाल कंपनी वर्किंग कैपिटल के लिए इस्तेमाल करेगी। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर इश्यू बाद कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 840 करोड़ रुपये का होगा। शेयर की कीमत FY26 की अर्निंग्स का 19.4 गुना है। प्राइस-टू-बुक रेशिया 2.3 गुना है। प्रतिद्वद्वी कंपनियों के मुकाबले वैल्यूएशन ठीक लगती है। प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के शेयरों का औसत पी/ई करीब 23 गुना है।

ग्रे मार्केट में कितना चल रहा प्रीमियम?

इनवेस्टर को कम से कम एक लॉट शेयरों के लिए बोली लगानी होगी। एक लॉट 70 शेयरों का है। इसका मतलब है कि प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर अप्लाई करने के लिए कम से कम 14,840 रुपये की जरूरत पड़ेगी। शेयरों का एलॉटमेंट 12 अगस्त को होने की संभावना है। बीएसई और एनएसई में कंपनी के शेयर 14 अगस्त को लिस्ट होंगे। इनवेस्टरगेन के मुताबिक, ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयर पर प्रीमियम 13 रुपये चल रहा है। 6 अगस्त को ग्रे मार्केट प्रीमियम 10 रुपये था। यह ज्यादा नहीं है। हालांकि, अभी यह इश्यू का पहला दिन है।

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क्या आपको आईपीओ में पैसे लगाने चाहिए?

ब्रोकरेज फर्म आनंदराठी ने इस आईपीओ में पैसे लगाने की सलाह दी है। उसने कहा है कि कंपनी की ऑर्डरबुक डायवर्सिफायड है। कंपनी नए इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। कंपनी को इंटिग्रेटेड ईपीसी कपैबिलिटी का फायदा होगा। शेयर की वैल्यूएशन प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले कम है। सुशील फाइनेंशियल सर्विसेज ने भी इस आईपीओ में पैसे लगाने की सलाह दी है। हालांकि, इनवेस्टर्स को अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह के बाद इस आईपीओ में निवेश के बारे में फैसला लेना चाहिए।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बनेंगे ये 2 नए मेट्रो कॉरिडोर, बॉटनिकल गार्डन से सेक्टर 142 और डिपो से बोड़ाकी इसके सारे स्टेशन जानिए

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में दैनिक यात्रियों के लिए मेट्रो कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRC) ने शहर में दो नए मेट्रो कॉरिडोर के इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का चुनाव किया है। ये दो नए प्रोजेक्ट हैं बॉटनिकल गार्डन से सेक्टर 142 के बीच 11.56 किलोमीटर लंबा स्ट्रेच और डिपो से बोड़ाकी तक 2.6 किलोमीटर का विस्तार। इन दोनों परियोजनाओं के अगले तीन वर्षों के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।

बॉटनिकल गार्डन से सेक्टर 142 कॉरिडोर: लागत और स्टेशन

रिपोर्ट के मुताबिक बॉटनिकल गार्डन से सेक्टर 142 के बीच बनने वाली लाइन दोनों परियोजनाओं में से बड़ी है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 2254.35 करोड़ रुपये है। यह पूरा रूट पूरी तरह से एलिवेटेड अलाइमेंट पर होगा और इस पर कुल आठ मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे। इस कॉरिडोर पर बनने वाले सभी आठ स्टेशनों की लिस्ट यहां नीचे देखी जा सकती है-

  • बॉटनिकल गार्डन
  • सेक्टर 44
  • सेक्टर 96 – नोएडा अथॉरिटी ऑफिस
  • सेक्टर 97
  • सेक्टर 105
  • सेक्टर 108 – पुलिस कमिश्नरेट
  • सेक्टर 93

पंचशील बालक इंटर कॉलेज, सेक्टर 91

रिपोर्ट में बताया गया है कि एक बार चालू हो जाने के बाद यह कॉरिडोर बॉटनिकल गार्डन और ग्रेटर नोएडा के बीच यात्रियों की आवाजाही को बेहद आसान बना देगा और जेवर की तरफ कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगा।

डिपो से बोड़ाकी एक्सटेंशन: मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब से कनेक्टिविटी

दूसरा प्रोजेक्ट डिपो से बोड़ाकी एक्सटेंशन का है, जो छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रूट है। इस 2.6 किलोमीटर लंबे स्ट्रेच की लागत 416 करोड़ रुपये तय की गई है। इस विस्तार में केवल दो स्टेशन होंगे:

  • जुनपत
  • बोड़ाकी

भले ही इसमें सिर्फ दो स्टेशन हैं, लेकिन पूरा होने के बाद यह एक महत्वपूर्ण मल्टीमॉडल लिंक के रूप में काम करेगा। यह एक्सटेंशन बोड़ाकी गांव में बनने वाले प्रस्तावित मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH) से जुड़ेगा। इस हब में एक अंतरराज्यीय बस टर्मिनस (ISBT) और एक रेलवे पैसेंजर टर्मिनस शामिल करने की योजना बनाई गई है।

टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य की शुरुआत

रिपोर्ट में एनएमआरसी के महाप्रबंधक (प्रोजेक्ट्स) प्रदीप यादव के हवाले से बताया गया है कि कि दोनों कॉरिडोर के लिए अप्रैल में टेंडर जारी किए गए थे। इस परियोजना में नौ एजेंसियों ने रुचि दिखाई थी, जिनमें से एलएंडटी (L&T) सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी और उसी आधार पर उसका चयन किया गया। प्रदीप यादव ने आगे कहा कि दोनों कॉरिडोर पर काम एक महीने के भीतर शुरू होने वाला है।

इन दोनों परियोजनाओं की जमीनी तैयारी काफी समय से चल रही थी। पिछले साल एनएमआरसी ने दोनों एक्सटेंशन के सिविल, आर्किटेक्चरल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल घटकों के डिजाइन तैयार करने के लिए एक डिटेल डिजाइन कंसलटेंट को शामिल किया था। इसके बाद डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट, अलाइनमेंट, जियोटेक्निकल डेटा और सिस्टम आवश्यकताओं की समीक्षा सहित सत्यापन अध्ययन करने के लिए एक जनरल कंसलटेंट (GC) को लाया गया था। जीसी ने डेवलपर चुनने और अनुबंध प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए टेंडर दस्तावेज तैयार करने में भी एनएमआरसी की मदद की।

मेट्रो स्टेशनों की को-ब्रांडिंग और पीपीपी मॉडल

एनएमआरसी इन दो नए कॉरिडोर पर बनने वाले मेट्रो स्टेशनों की को-ब्रांडिंग के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर भी काम कर रहा है। इसके तहत कॉर्पोरेशन ने मेट्रो स्टेशनों के वित्तपोषण, निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिए प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनियों से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट आमंत्रित किए हैं। इसके बदले में एनएमआरसी चुनी गई कंपनी को एक निश्चित लीज अवधि के लिए स्टेशनों के नामकरण अधिकार, व्यावसायिक स्थान और विज्ञापन अधिकार प्रदान करेगा।

बॉटनिकल गार्डन बना दिल्ली-एनसीआर का सबसे व्यस्त स्टेशन

यह नया नेटवर्क पहले से व्यस्त चल रहे मेट्रो नेटवर्क में और विस्तार करेगा। वर्तमान एक्वा लाइन नोएडा सेक्टर 51 को ग्रेटर नोएडा के डिपो स्टेशन से जोड़ती है। एनएमआरसी के जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक एक्वा लाइन पर औसतन 61811 दैनिक यात्रियों की सवारियां दर्ज की गईं। बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन पिछले तीन महीनों में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन नेटवर्क का सबसे व्यस्त स्टेशन बनकर उभरा है। ब्लू लाइन और मैजेंटा लाइन के इस इंटरचेंज स्टेशन ने यात्रियों की संख्या के मामले में लंबे समय से शीर्ष पर रहे कश्मीरी गेट को पीछे छोड़ दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 में बॉटनिकल गार्डन पर औसतन 2.71 लाख दैनिक यात्रियों की आवाजाही दर्ज की गई, जो कश्मीरी गेट के 2.57 लाख के आंकड़े से अधिक है। बॉटनिकल गार्डन-सेक्टर 142 कॉरिडोर के चालू होने के बाद इस स्टेशन पर यात्रियों की संख्या में और इजाफा होने की संभावना है।

तीसरे मेट्रो रूट की भी योजना: सेक्टर 51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट

एनएमआरसी सेक्टर 51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर 4 तक एक तीसरे मेट्रो रूट की भी योजना बना रहा है। इसमें पांच स्टेशन शामिल होंगे। पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) ने पिछले महीने ही इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी और अब काम शुरू होने से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल से अंतिम मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।

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Indian Army Cyber Quest 2026: देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सेना आयोजित करेगी साइबर क्वेस्ट, 20 अगस्त तक करें आवेदन

Indian Army Cyber Quest 2026: देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने और साइबर दुनिया के खतरों से निपटने के लिए इंडियन आर्मी टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह एक प्रतियोगिता है जिसमें छात्र, साइबर प्रोफेशनल, इनोवेटर्सऔर टेक्नोलॉजी के शौकीन हिस्सा ले सकेंगे। इस प्रतियोगिता का आयोजन साइबरपीस फाउंडेशन के साथ मिलकर टेरिटोरियल आर्मी करेगी। इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 20 अगस्त तक आधिकारिक पोर्टल के जरिए रजिस्टर कर सकते हैं।

इंडियन आर्मी टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026 टाइमलाइन

रजिस्ट्रेशन : 30 जुलाई से 20 अगस्त, 2026

शॉर्टलिस्टिंग फेज : ऑनलाइन शॉर्टलिस्टिंग प्रोसेस 1 सितंबर से 10 सितंबर, 2026 तक चलेगा।

ग्रैंड फिनाले : कॉम्पिटिशन का ग्रैंड फिनाले 6 अक्टूबर से 8 अक्टूबर, 2026 तक होगा।

अवार्ड सेरेमनी : अवार्ड सेरेमनी 9 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में होगी।

अंतिम राउंड में चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक इनाम और सर्टिफिकेट दिया जाएगा। साथ ही, उन्हें भारतीय सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों से मिलने का मौका मिलेगा। इस प्रतियोगिता के विजेता रक्षा संस्थानों का दौरा भी करेंगे।

प्रतियोगिता का फॉर्मेट

शॉर्टलिस्टिंग राउंड में सभी उम्मीदवार एक ऑनलाइन कैप्चर-द-फ्लैग (CTF) चैलेंज में हिस्सा लेंगे। इस राउंड में चयनित टीमें फिर 36 घंटे के लाइव फिनाले में आगे बढ़ेंगी। यहां वे एक कृत्रिम नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर सैंडबॉक्स में इंडियन आर्मी के लिए खास तौर से विकसित सॉल्यूशन पर काम करेंगी। फिनाले के दौरान, टीमें कमजोरियों की पहचान करेंगी, गलतियों को दर्ज करेंगी, और डोमेन में कमाए गए अपने साइबर सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन या बैज के लिंक सबमिट करेंगी।

कौन हिस्सा ले सकता है ?

छात्र, साइबर सुरक्षा पेशेवर, एथिकल हैकर्स, सेना से जुड़े लोग और शोधकर्ता।

फॉर्मेट : एक पूरी तरह से ऑनलाइन सीटीएफ क्वालिफायर राउंड के बाद एक इन-पर्सन ग्रैंड फिनाले होगा। हर टीम में टीम लीडर समेत ज्यादा से ज्यादा तीन सदस्य हो सकते हैं।

स्कोरिंग : एक विशेषज्ञ पैनल ग्रैंड फिनाले के दौरान जमा की गई एंट्री का आकलन कमजोरियों की गंभीरता, सुलझाने का तरीका और जटिलता के आधार पर करेगा।

ग्रैंड फिनाले

टॉप 10 शॉर्टलिस्टेड टीमें नई दिल्ली में 36 घंटे के इन-पर्सन ग्रैंड फिनाले में मुकाबला करेंगी। सभी प्रतिभागी रियलिस्टिक डमी डेटा का इस्तेमाल करके एक खासतौर से तैयार सिस्टम स्टैक पर लाइव कमजोरी तलाशेंगे और दर्ज करेंगे। पहचानी गई वल्नरेबिलिटीज का उनकी गंभीरता, मूलता और जटिलता के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। एक विशेषज्ञ पैनल खोजों को सत्यापित करेगा और फाइनल स्कोर तय करेगा। टॉप तीन टीमों को उनके पूरे प्रदर्शन के आधार पर विजेता घोषित किया जाएगा।

मेडल और सर्टिफिकेट

टेरिटोरियल आर्मी प्रतियोगिता में उम्मीदवारों के योगदान और उपलब्धियों के लिए उन्हें मेडल और सर्टिफिकेट देगी। प्रतिभागियों को टेरिटोरियल आर्मी के साथ काम करने, रक्षा विशेषज्ञों के साथ काम करने, राष्ट्रीय सुरक्षा इकोसिस्टम में योगदान देने और वरिष्ठ सरकारी और सेना के अधिकारियों के साथ बातचीत करने का मौका मिलेगा।

विजेताओं का सम्मान

इस प्रतियोगिता के विजेताओं को भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा सम्मानित किया जाएगा और उन्हें खास डिफेंस एस्टैब्लिशमेंट्स में जाने का भी मौका मिलेगा।

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Fusion Klassroom Edutech IPO Listing: एडटेक कंपनी ने जीता दिल, 7% बढ़त में लिस्ट

फ्यूजन क्लासरूम एडुटेक की शुक्रवार, 7 अगस्त को शेयर बाजार में लिस्टिंग खुश करने वाली रही। कंपनी के शेयर ने BSE SME पर करीब 7 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 170 रुपये पर शुरुआत की। फाइनल IPO प्राइस 159 रुपये था। कंपनी का 39.04 करोड़ रुपये का पब्लिक इश्यू 1.50 गुना भरा था। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा फुली सब्सक्राइब हुआ था। नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 1.47 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 1.80 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

IPO में 31.63 करोड़ रुपये के 20 लाख नए शेयर जारी हुए। साथ ही 7.41 करोड़ रुपये के 5 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल रहा। फ्यूजन क्लासरूम एडुटेक एक एजुकेशन टेक्नोलॉजी कंपनी है। यह कई शहरों में डिजिटल और हाइब्रिड लर्निंग मॉडल के जरिए प्रोफेशनल और कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की कोचिंग देती है। कंपनी CA, CS, CMA और कॉमर्स से जुड़ी दूसरी परीक्षाओं के लिए कोचिंग प्रोग्राम चलाती है। इसका एक सब्सक्रिप्शन बेस्ड एजुकेशन OTT प्लेटफॉर्म है।

IPO के पैसों का कैसे होगा इस्तेमाल

कंपनी ने IPO से पहले एंकर इनवेस्टर्स से 11.08 करोड़ रुपये जुटाए थे। यह अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने, टेक्नोलॉजी एंड AIML मॉडल के डेवलपमेंट, सर्वर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, कंटेंट डेवलपमेंट, नए ऑफलाइन सेंटर्स व AI/ML लैब्स के लिए डेस्कटॉप व लैपटॉप की खरीद, मार्केटिंग पहलों, पहले से न पता अधिग्रहणों के जरिए इनऑर्गेकनिक ग्रोथ, आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और अन्य खर्चों के लिए करेगी।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

फ्यूजन क्लासरूम एडुटेक का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 129 प्रतिशत बढ़कर 23.10 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले रेवेन्यू 10.11 करोड़ रुपये था। इस बीच शुद्ध मुनाफा 162 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 7.60 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2025 में यह 2.90 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर 3.43 करोड़ रुपये की उधारी थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

‘UPI पेमेंट के लिए ग्राहकों पर कोई चार्ज नहीं लगेगा’, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 6 अगस्त को स्पष्ट किया कि अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होता है, तो इसका असर सिर्फ व्यापारियों (Merchants) पर होगा। आम UPI यूजर्स से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि MDR से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सुरक्षा पर ज्यादा निवेश करने में मदद मिलेगी। इसका फायदा आखिरकार सभी UPI यूजर्स को मिलेगा।

अभी MDR पर अंतिम फैसला नहीं

निर्मला सीतारमण ने कहा कि UPI पर MDR लागू होगा या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। यह फैसला UPI और NPCI की सर्विसेज स्टीरिंग कमेटी करेगी।

उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी, जब संसद टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पारित करेगी। इस बिल में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव है।

कांग्रेस ने क्या कहा था?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया था कि नया विधेयक UPI ट्रांजैक्शन को फीस-मुक्त रखने वाली कानूनी गारंटी को खत्म कर देगा। उनके मुताबिक, इससे भविष्य में सभी तरह के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने का रास्ता खुल सकता है और इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा था कि आम लोगों को भविष्य में UPI इस्तेमाल करने के लिए भी शुल्क देना पड़ सकता है।

वित्त मंत्री ने दावे को बताया गलत

निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के दावों को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दों पर संसद के भीतर रचनात्मक चर्चा होनी चाहिए, न कि गलतफहमियां फैलानी चाहिए। उनके मुताबिक, फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है जिससे UPI यूजर्स पर कोई शुल्क लगाया जाए।

RBI गवर्नर ने क्या कहा था

UPI पर MDR को लेकर बहस RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के हालिया बयान के बाद तेज हुई। इसमें  उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने की एक लागत होती है और किसी न किसी को इसका बोझ उठाना होगा। हालांकि, उन्होंने साफ संकेत नहीं दिया था कि इसका बोझ कौन उठाएगा।

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