क्या AI तय करेगा अगली महाशक्ति? मार्क जुकरबर्ग ने चीन को लेकर ऐसा बता दिया जिसने उड़ाई दिग्गजों की नींद

AI Decide Global Superpower: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया की दो बड़ी महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बीच मुकाबला लगातार तेज हो रहा है। इसी बीच Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उसने AI के लिए जरूरी एनर्जी और डेटा सेंटर का इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से नहीं बढ़ाया, तो वह इस क्षेत्र में चीन से पिछड़ सकता है। एक नोट में जुकरबर्ग ने कहा कि जो देश एडवांस्ड AI के डेवलपमेंट और इस्तेमाल में आगे रहेंगे, उनका दुनिया में ताकत के संतुलन पर बड़ा असर होगा। इसका असर लोकतंत्र, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा।

जुकरबर्ग के मुताबिक, आने वाले समय में जो देश अत्याधुनिक AI को विकसित करने और बड़े पैमाने पर अपनाने में सबसे आगे रहेंगे, वे दुनिया के शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की स्थिति में होंगे। इसका असर सिर्फ टेक्नोलॉली सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “जो देश एडवांस्ड AI के डेवलपमेंट और इस्तेमाल में आगे रहेंगे, वे एक नए जियोपॉलिटिकल पावर बैलेंस में योगदान देंगे। यही भविष्य में लोकतांत्रिक मूल्यों, समृद्धि और सुरक्षा की स्थिति तय करेगा।”

क्या अमेरिका को चीन के AI बूम से टेंशन लेनी चाहिए?

सिलिकॉन पर अमेरिका के एक्सपोर्ट कंट्रोल का समर्थन करते हुए जुकरबर्ग ने कहा कि AI को सपोर्ट करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में चीन की तेजी से हो रही तरक्की वॉशिंगटन के लिए खास चिंता का विषय है। उन्होंने माना कि सिलिकॉन डिजाइन में अमेरिका को बढ़त हासिल है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि एनर्जी कैपेसिटी बढ़ाने और AI के लिए जरूरी फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के मामले में वह पिछड़ रहा है। उन्होंने कहा, “चीन जैसे देश हर दूसरे हफ्ते 1GW से ज्यादा न्यूक्लियर कैपेसिटी शुरू कर रहे हैं। इसलिए कॉम्पिटिशन में बने रहने के लिए हमें एनर्जी और डेटा सेंटर बनाने की रफ़्तार बढ़ानी होगी।”

AI की दौड़ में चीन से क्यों चिंतित हैं जुकरबर्ग?

जुकरबर्ग ने अपने एक नोट में चीन की तेजी से बढ़ती AI इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता को अमेरिका के लिए खास चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि AI मॉडल बनाने के लिए सिर्फ बेहतरीन चिप डिजाइन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए भारी मात्रा में बिजली, बड़े डेटा सेंटर और मजबूत फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। उनके मुताबिक, अमेरिका के पास सिलिकॉन डिजाइन के क्षेत्र में बढ़त है। उनके मुताबिक ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और AI के लिए जरूरी डेटा सेंटर बनाने में चीन की गति से अमेरिका पीछे रह रहा है। जुकरबर्ग ने कहा कि चीन हर कुछ हफ्तों में बड़ी मात्रा में नई परमाणु ऊर्जा क्षमता ऑनलाइन ला रहा है।

AI को लोग बना लेंगे हथियार!

जुकरबर्ग की चेतावनी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू AI को वैश्विक शक्ति संतुलन से जोड़ना है। उनका कहना है कि भविष्य में अत्याधुनिक AI के विकास और उसके इस्तेमाल में कौन से देश सबसे आगे रहते हैं, इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि दुनिया में लोकतांत्रिक मूल्य, समृद्धि और सुरक्षा किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

यानी AI की दौड़ को केवल कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे बड़ी तस्वीर यह है कि AI में तकनीकी बढ़त हासिल करने वाला देश आर्थिक और रणनीतिक रूप से भी मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है।

अमेरिका के लिए बिजली बड़ी चुनौती

अमेरिका ने AI से जुड़ी हाई टेक्नोलॉजी और चिप्स को लेकर चीन सहित कुछ देशों पर निर्यात करने पर प्रतिबंध लगाए हैं। जुकरबर्ग ने इन प्रतिबंधों को जारी रखने का समर्थन किया है। उनका मानना है कि इन प्रतिबंधों ने महत्वपूर्ण दौर में दूसरे देशों में AI के विकास की गति को धीमा किया है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि केवल चिप्स पर कंट्रोल रखना पर्याप्त नहीं होगा।

AI सिस्टम को चलाने और लोगों को ट्रेंड करने के लिए विशाल कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है। इसके लिए लगातार बिजली की आपूर्ति आवश्यक है। इसलिए अमेरिका को अपनी ऊर्जा क्षमता और डेटा सेंटर नेटवर्क का तेजी से विस्तार करना होगा।

AI इतिहास का सबसे कॉम्पिटिटिव इंडस्ट्री?

जुकरबर्ग ने AI को इतिहास के सबसे कॉम्पिटिटिव इंडस्ट्री में से एक बताया। उनके मुताबिक AI के सेक्टर में नई तकनीक और इनोवेशन बेहद तेजी से दूसरे खिलाड़ियों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में कुछ ही महीनों में उनकी नकल या उन्हें अपनाया जा सकता है। यही वजह है कि AI की इस दौड़ में छोटी-सी बढ़त भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

जुकरबर्ग का कहना है कि कभी-कभी सिर्फ दो महीने की बढ़त भी मायने रख सकती है। उन्होंने अमेरिका से ऐसी पॉलिसी बनाने की अपील की है, जो AI इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण को तेज करें। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि घरेलू AI मॉडल को बाजार में जारी करने में अनावश्यक देरी भी अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को नुकसान पहुंचा सकती है।

चीन की बढ़त से अमेरिका को खतरा?

जुकरबर्ग की चिंता का मूल कारण यह है कि AI आने वाले सालों में अर्थव्यवस्था से लेकर रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा तक लगभग हर बड़े सेक्टर को प्रभावित कर सकता है। अगर चीन AI मॉडल, कंप्यूटिंग क्षमता, एनर्जी और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से आगे बढ़ता है और अमेरिका पर्याप्त रफ्तार से अपनी क्षमता नहीं बढ़ाता, तो दोनों देशों के बीच तकनीकी अंतर कम हो सकता है। या फिर चीन कुछ क्षेत्रों में बढ़त हासिल कर सकता है।

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ऐसे में AI की मौजूदा दौड़ भविष्य में अमेरिका-चीन के बीच वैश्विक प्रभाव की बड़ी लड़ाई में बदल सकती है। आपको बता दें कि जिस देश के पास पर्याप्त चिप्स, बिजली, डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग क्षमता होगी, उसके पास AI को बड़े पैमाने पर विकसित और इस्तेमाल करने की क्षमता भी ज्यादा होगी।

Noida Plot Scheme: नोएडा एयरपोर्ट के पास घर बनाने का सुनहरा मौका! YEIDA ला रहा 2 नई रेजिडेंशियल प्लॉट स्कीम, जानिए सबकुछ

YEIDA Residential Plot Schemes: उत्तर प्रदेश के जेवर में स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में रेजिडेंशियल प्लॉट की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) नवरात्रि के दौरान दो नई रिहायशी प्लॉट योजनाएं लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। नई योजनाओं में पहली स्कीम कम आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इन दोनों योजनाओं की घोषणा अक्टूबर में होने की संभावना है।

आपके बता दें कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 15 जून को फ्लाइट ऑपरेशन शुरू हुए थे। इसके दो दिन बाद कार्गो टर्मिनल भी खुल गया था। YEIDA के एडिशनल CEO शैलेंद्र भाटिया ने कहा कि अथॉरिटी अभी स्कीम की बारीकियों पर काम कर रही है। जल्द ही प्लॉट की सही संख्या और अन्य जानकारी की घोषणा की जाएगी।

40 वर्गमीटर के प्लॉट वाली होगी LIG स्कीम

हाल ही में YEIDA ने अक्टूबर में नवरात्रि के दौरान दो नई रेजिडेंशियल प्लॉट स्कीम लॉन्च करने की घोषणा की है। टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के मुताबिक, इनमें से एक स्कीम कम आय वाले ग्रुप के लिए होगी। इसमें 40 वर्ग मीटर के प्लॉट मिलेंगे। दूसरी स्कीम आम जनता के लिए होगी। इसमें प्लॉट का साइज़ 162 से 300 वर्ग मीटर के बीच होगा।

दोनों स्कीम नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) के पास सेक्टर 5-A में शुरू की जाएंगी। यानी अलग-अलग जरूरत और बजट वाले लोग अपनी पसंद के आकार का प्लॉट हासिल करने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे सीमित बजट वाले लोगों को एयरपोर्ट के आसपास अपना घर बनाने का मौका मिल सकेगा।

पहले प्लॉट मिल चुका है तो नहीं कर पाएंगे अप्लाई

YEIDA ने योजनाओं में पारदर्शिता और ज्यादा से ज्यादा नए लोगों को मौका देने के लिए एक अहम शर्त रखी है। जिन लोगों को पहले नोएडा अथॉरिटी, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी या YEIDA की किसी पिछली रेजिडेंशियल प्लॉट स्कीम में प्लॉट मिल चुका है, वे इन नई स्कीम के लिए अप्लाई नहीं कर सकेंगे। इसका उद्देश्य उन लोगों को दोबारा लाभ लेने से रोकना है, जिन्हें पहले ही किसी प्राधिकरण की योजना के तहत रिहायशी प्लॉट आवंटित किया जा चुका है।

प्लॉट की कीमत समेत अन्य जानकारी

फिलहाल, यमुना प्राधिकरण के मुताबिक इस एरिया में रेजिडेंशियल प्लॉट का आवंटन रेट 36,260 रुपये प्रति वर्गमीटर है। हालांकि, नई योजनाओं में प्लॉट की अंतिम कीमत और अन्य शुल्क से जुड़ी जानकारी प्राधिकरण की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। यह कदम यमुना अथॉरिटी द्वारा जून में एयरपोर्ट के पास ही लकी ड्रॉ के जरिए भारी संख्या में रेजिडेंशियल प्लॉट अलॉट करने के ठीक बाद उठाया गया है। अप्रैल में घोषित उस स्कीम को बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला था।

जून में 973 प्लॉट के लिए आए थे 1.1 लाख आवेदन

नई योजनाओं की घोषणा ऐसे समय में हो रही है जब YEIDA की पिछली रिहायशी प्लॉट योजना को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी। इतने ही प्लॉट के लिए 1.1 लाख से ज़्यादा वैलिड एप्लीकेशन आए थे। बेहतर एयर कनेक्टिविटी, शानदार लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और इलाके में बड़े पैमाने पर इंडस्ट्रियल और कमर्शियल ग्रोथ की संभावनाओं ने इस क्षेत्र को घर खरीदारों के लिए एक आकर्षक जगह बना दिया है। यह स्कीम अप्रैल में घोषित की गई थी। इसमें 973 प्लॉट के लिए 1.1 लाख से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नोएडा एयरपोर्ट के आसपास रिहायशी जमीन को लेकर लोगों में कितनी मजबूत दिलचस्पी है।

नोएडा एयरपोर्ट के कारण बढ़ी इलाके की डिमांड

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्र में पिछले कुछ समय से तेजी से विकास हो रहा है। एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद इस इलाके में कनेक्टिविटी एवं निवेश की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। बेहतर हवाई संपर्क के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और बड़े पैमाने पर औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों की उम्मीद ने यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को घर खरीदारों और निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है। यही वजह है कि एयरपोर्ट के आसपास रिहायशी प्लॉट की योजनाओं में बड़ी संख्या में लोग अप्लाई कर रहे हैं। अब नवरात्रि के दौरान प्रस्तावित इन दो नई स्कीमों पर भी हजारों-लाखों लोगों की नजर रहने की उम्मीद है।

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Stock in Focus: इंफ्रा कंपनी को राजस्थान सरकार से ₹241 करोड़ का प्रोजेक्ट मिला, 10 साल तक ITI को ऑपरेट करेगी

Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी HG Infra Engineering को राजस्थान सरकार से नया प्रोजेक्ट मिला है। कंपनी को इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI), भिवाड़ी क्लस्टर के संचालन और मैनेजमेंट के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड (LOA) मिला है। यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री PM-SETU योजना के तहत दिया गया है।

प्रोजेक्ट में कंपनी की हिस्सेदारी ₹17.1 करोड़

इस प्रोजेक्ट में HG Infra Anchor Industry Partner की भूमिका निभाएगी। कंपनी के हिस्से की वैल्यू करीब 17.1 करोड़ रुपये है। यह अनुमानित 241 करोड़ रुपये के कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट का करीब 7% है।

प्रोजेक्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चलाया जाएगा। HG Infra को ITI के संचालन और मैनेजमेंट की जिम्मेदारी 10 साल तक निभानी होगी। कंपनी को LOA 11 अगस्त 2026 को मिला है।

पहले के दो महाराष्ट्र प्रोजेक्ट ऑर्डर बुक से बाहर

HG Infra ने मई 2026 में महाराष्ट्र के दो प्रोजेक्ट्स को अपनी ऑर्डर बुक में शामिल नहीं करने का फैसला किया था। कंपनी ने इसके पीछे प्रोजेक्ट के समय पर शुरू होने को लेकर अनिश्चितता बताई थी।

ये दोनों प्रोजेक्ट नागपुर-चंद्रापुर एक्सेस सुपर कम्युनिकेशन एक्सप्रेसवे से जुड़े थे। कंपनी को मई 2024 में दोनों पैकेज के लिए L1 bidder घोषित किया गया था। HG Infra के मुताबिक, इन दोनों प्रोजेक्ट्स के लिए जमा की गई बैंक गारंटी MSRDC ने वापस कर दी। हालांकि, इसकी कोई वजह नहीं बताई गई।

HG Infra के शेयरों का हाल

मंगलवार को HG Infra Engineering का शेयर 0.97%% गिरकर 548 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 21.29% गिरा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 45% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 3.58 हजार करोड़ रुपये है।

HG Infra का बिजनेस क्या है

HG Infra Engineering इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है, जो मुख्य तौर पर सड़क, हाईवे, एक्सप्रेसवे और रेलवे से जुड़े EPC प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। कंपनी सड़क निर्माण, पुल, फ्लाईओवर और दूसरी सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं तैयार करती है। इसके अलावा, कंपनी अब इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI) के संचालन और मैनेजमेंट जैसे प्रोजेक्ट्स में भी कदम बढ़ा रही है।

L&T अपना डेटा सेंटर और क्लाउड बिजनेस ट्रांसफर करेगी, ₹1400 करोड़ में समझौता हुआ

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Shiprocket IPO: 12 अगस्त से ₹1617 करोड़ का IPO खुलेगा, GMP 28% मुनाफे का संकेत दे रहा

Shiprocket IPO: टेमासेक और जोमैटो जैसे दिग्गजों के निवेश वाली Shiprocket का IPO 12 अगस्त से सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। कंपनी ने इश्यू का प्राइस बैंड 92 से 97 रुपये प्रति शेयर तय किया है। IPO के जरिए कंपनी करीब 1,617.5 करोड़ रुपये जुटाएगी।

12 से 14 अगस्त तक खुलेगा IPO

Shiprocket IPO के लिए बोली 12 अगस्त से 14 अगस्त तक लगाई जा सकेगी। वहीं, एंकर निवेशकों के लिए इश्यू 11 अगस्त को खुलेगा। कंपनी फ्रेश इश्यू से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कारोबार बढ़ाने और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में करेगी।

कर्ज चुकाने और अधिग्रहण पर भी पैसा

IPO से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा कंपनी कुछ कर्ज और उस पर लगने वाले ब्याज को चुकाने में लगाएगी। इसके अलावा संभावित अधिग्रहण के जरिए कारोबार बढ़ाने और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए भी रकम इस्तेमाल होगी।

GMP 28% तक

ग्रे मार्केट में Shiprocket के शेयरों को लेकर फिलहाल अच्छी दिलचस्पी दिख रही है। अलग-अलग प्लेटफॉर्म के मुताबिक IPO का GMP करीब 27 से 28% तक है। Investorgain ने 27 रुपये का GMP बताया है। इसके हिसाब से 97 रुपये के अपर प्राइस बैंड पर अनुमानित लिस्टिंग करीब 124 रुपये हो सकती है। हालांकि, GMP अनौपचारिक होता है और लिस्टिंग गेन की गारंटी नहीं देता।

Shiprocket क्या करती है?

Shiprocket पहले मुख्य तौर पर शिपिंग सर्विस देती थी। अब यह फुल स्टैक ई-कॉमर्स एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म बन चुकी है। कंपनी D2C ब्रांड्स और MSMEs को ऑनलाइन कारोबार से जुड़ी सेवाएं देती है।

इसके कारोबार को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहला कोर बिजनेस है। इसमें घरेलू शिपिंग प्लेटफॉर्म और शिपिंग ऐप्स शामिल हैं। कंपनी मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्टेशन, AI आधारित लॉजिस्टिक्स अलोकेशन, ऑर्डर मैनेजमेंट और ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं देती है।

कंपनी की ग्रोथ कैसी रही?

FY24 से FY26 के बीच Shiprocket का रेवेन्यू 24% CAGR से बढ़ा। इसी दौरान एडजस्टेड PAT घाटा 351 करोड़ रुपये से घटकर 76 करोड़ रुपये रह गया।

SBI Securities ने IPO को सब्सक्राइब रेटिंग दी है। ब्रोकरेज के मुताबिक, IPO से मिलने वाली रकम से करीब 210 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया जा सकता है। इससे कंपनी का कुल कर्ज 242 करोड़ रुपये से घटकर करीब 32 करोड़ रुपये रह सकता है।

ब्रोकरेज की अलग-अलग राय

Swastika Financial ने IPO को Neutral रेटिंग दी है। उसके मुताबिक, यह IPO ज्यादा जोखिम लेने वाले और ग्रोथ पर फोकस करने वाले निवेशकों के लिए बेहतर है। वहीं, Ventura Securities ने कंपनी की मजबूत बैलेंस शीट और FY26 में 52.64 करोड़ रुपये के पॉजिटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो को सकारात्मक बताया है।

हालांकि, कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा कोर बिजनेस से आता है। थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स पार्टनर्स पर निर्भरता भी एक जोखिम है। इसलिए IPO में निवेश से पहले वैल्यूएशन, कंपनी की ग्रोथ और जोखिम को ध्यान से देखना जरूरी है।

L&T अपना डेटा सेंटर और क्लाउड बिजनेस ट्रांसफर करेगी, ₹1400 करोड़ में समझौता हुआ

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L&T अपना डेटा सेंटर और क्लाउड बिजनेस ट्रांसफर करेगी, ₹1400 करोड़ में समझौता हुआ

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Larsen & Toubro (L&T) ने अपनी सब्सिडियरी Vyoma.AI के साथ दो समझौते किए हैं। इसके तहत L&T अपना डेटा सेंटर और क्लाउड सर्विसेज बिजनेस 1,400 करोड़ रुपये में Vyoma को ट्रांसफर करेगी। इसके अलावा, L&T Network Services में अपनी पूरी हिस्सेदारी 30 करोड़ रुपये में बेचेगी।

शेयर जारी करके होगा भुगतान

L&T ने 11 अगस्त को यह समझौता किया है। डेटा सेंटर और क्लाउड सर्विसेज बिजनेस को स्लंप सेल के जरिए ट्रांसफर किया जाएगा। यानी कारोबार को एक चालू बिजनेस के तौर पर दूसरी कंपनी को दिया जाएगा।

इसके बदले Vyoma, L&T को पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर जारी करेगी। अंतिम रकम क्लोजिंग के समय होने वाले बदलावों के आधार पर तय होगी।

डेटा सेंटर बिजनेस का कितना कारोबार?

L&T के डेटा सेंटर बिजनेस का FY26 में रेवेन्यू 36.6 करोड़ रुपये रहा था। यह L&T के स्टैंडअलोन रेवेन्यू का सिर्फ 0.025% था। इस कारोबार की नेटवर्थ 1,142 करोड़ रुपये थी। यह L&T की स्टैंडअलोन नेटवर्थ का 1.565% है।

सौदा 31 अक्टूबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके लिए समझौते में तय शर्तों को पूरा करना होगा।

नेटवर्क सर्विस कंपनी भी ट्रांसफर होगी

L&T अपनी L&T Network Services Private Ltd में 100% हिस्सेदारी भी Vyoma को देगी। इसकी कीमत 30 करोड़ रुपये तय की गई है। इसका भुगतान भी Vyoma के इक्विटी शेयर जारी करके किया जाएगा।

सौदा पूरा होने के बाद L&T Network Services, Vyoma की सब्सिडियरी बन जाएगी। वहीं, L&T की यह अप्रत्यक्ष सब्सिडियरी रहेगी।

Vyoma.AI क्या करती है?

Vyoma.AI को 22 अप्रैल 2026 को बनाया गया था। कंपनी का मकसद डेटा सेंटर स्थापित करना है। इसके अलावा यह इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी से जुड़ी सेवाएं देगी। FY26 में कंपनी का कोई रेवेन्यू या नेटवर्थ नहीं था। L&T के मुताबिक, डेटा सेंटर बिजनेस का ट्रांसफर किसी स्कीम ऑफ अरेजमेंट के तहत नहीं हो रहा है।

मंगलवार को L&T का शेयर 0.70% गिरकर 4,040 रुपये पर बंद हुआ।

RVNL Q1 Results: सरकारी रेल कंपनी का मुनाफा 18.5% बढ़ा, EBITDA में जोरदार उछाल

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क्रिस्टल इंटीग्रेटेड सर्विसेज के कंसोर्टियम को ₹740 करोड़ के प्रोजेक्ट मिले, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का है काम

इंटीग्रेटेड फैसिलिटीज मैनेजमेंट कंपनी Crystal Integrated Services के कंसोर्टियम को महाराष्ट्र सरकार से दो बड़े वर्क ऑर्डर मिले हैं। इनकी कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू 740.06 करोड़ रुपये है। कंपनी की कंसोर्टियम में 40% हिस्सेदारी है। इस हिसाब से कंपनी के हिस्से की वैल्यू करीब 296.03 करोड़ रुपये है।

पुणे और नागपुर में होंगे प्रोजेक्ट

ये दोनों ऑर्डर LC Infra Crystal Consortium को मिले हैं। इसमें LC Infra Projects Private Limited लीड मेंबर है। वहीं Crystal Integrated Services टेक्निकल मेंबर है।

प्रोजेक्ट के तहत पुणे और नागपुर डिवीजन के शहरी निकायों में सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), सीवर नेटवर्क और इंटरसेप्शन एंड डायवर्जन सिस्टम शामिल हैं। 5 MLD या उससे ज्यादा क्षमता वाले STP भी बनाए जाएंगे। इन प्रोजेक्ट्स को दो साल में पूरा करना है।

कंपनी की ऑर्डर बुक को मिलेगा सहारा

कंपनी के लिए ये ऑर्डर काफी अहम हैं। इससे सरकारी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में उसकी मौजूदगी बढ़ेगी। कंपनी टेक्निकल मेंबर के तौर पर सीवेज ट्रीटमेंट और सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करेगी।

इन प्रोजेक्ट्स से वेस्टवॉटर मैनेजमेंट और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार में भी कंपनी की पकड़ मजबूत होने की उम्मीद है।

Q1 में रेवेन्यू और मुनाफा बढ़ा

Crystal Integrated Services ने FY27 की पहली तिमाही में भी ग्रोथ दर्ज की। कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 11.65% बढ़कर 360.71 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 323.08 करोड़ रुपये था।

EBITDA 6.76% बढ़कर 22.80 करोड़ रुपये रहा। वहीं, टैक्स के बाद मुनाफा 6.30% बढ़कर 17.36 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 6.32% रहा। बेसिक EPS भी 5.95% बढ़कर 12.46 रुपये पहुंच गया।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

कंपनी की चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर नीता प्रसाद लाड ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार से मिले ये दोनों कॉन्ट्रैक्ट कंपनी के लिए अहम पड़ाव हैं। उनके मुताबिक, 740 करोड़ रुपये के कुल कॉन्ट्रैक्ट और कंपनी की 40% हिस्सेदारी से प्रोजेक्ट पाइपलाइन मजबूत होगी।

उन्होंने कहा कि कंपनी सरकारी, हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरे संस्थागत क्षेत्रों में कारोबार बढ़ाने पर फोकस कर रही है। कंपनी का लक्ष्य लंबे समय में टिकाऊ ग्रोथ हासिल करना है।

Manappuram Finance Q1 Results: गोल्ड लोन कंपनी का प्रॉफिट 322% बढ़ा, डिविडेंड का भी ऐलान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

BSNL Investment Plan: सरकारी टेलीकॉम कंपनी 5 साल में ₹77000 करोड़ निवेश करेगी, 2 लाख नए 4G टावर लगाएगी

BSNL Investment Plan: सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL अगले पांच साल में करीब 77,000 करोड़ रुपये निवेश करने की तैयारी कर रही है। इस योजना में 2 लाख नए 4G साइट, नेटवर्क को मजबूत करना और ज्यादा ट्रैफिक वाले इलाकों में 5G सेवा शुरू करना शामिल है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने यह जानकारी संचार और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी संसदीय समिति को दी है।

98% आबादी तक पहुंचाने का लक्ष्य

DoT के मुताबिक, इस निवेश में एक नया इंटीग्रेटेड कस्टमर सपोर्ट सिस्टम भी बनाया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इस योजना के बाद FY29 तक BSNL अपने रोजमर्रा के कारोबार में नफा-नुकसान के बराबर पहुंच जाएगी। यानी कंपनी की ऑपरेशनल कमाई उसके ऑपरेशनल खर्च के बराबर हो जाएगी। साथ ही कंपनी की सेवाएं देश की 98% आबादी तक पहुंच जाएंगी।

₹21,588 करोड़ की अतिरिक्त मदद

DoT ने यह भी बताया कि FY27 के लिए BSNL को मिलने वाली पूंजी सहायता (Capital Infusion) में 21,588 करोड़ रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह रकम पहले से मंजूर BSNL रिवाइवल पैकेज के तहत मांगी गई है।

यह रकम 77,000 करोड़ रुपये की निवेश योजना से अलग है। 77,000 करोड़ रुपये अगले पांच साल के निवेश के लिए हैं, जबकि 21,588 करोड़ रुपये सरकार की अतिरिक्त पूंजी सहायता है।

1.05 लाख स्वदेशी 4G साइट लगीं

अप्रैल 2026 तक BSNL 1,05,290 स्वदेशी 4G साइट लगा चुकी है। DoT का कहना है कि इन्हें आगे चलकर 5G में अपग्रेड किया जा सकता है। कंपनी ने दिल्ली में 5G-as-a-Service की शुरुआत भी कर दी है।

सरकार को उम्मीद है कि इससे BSNL के ग्राहकों की संख्या, प्रति ग्राहक औसत कमाई (ARPU) और कुल रेवेन्यू बढ़ेगा।

घाटा अभी भी बना हुआ है

हालांकि BSNL की आमदनी बढ़ रही है। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू FY23 के 19,131 करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 23,259 करोड़ रुपये हो गया है। FY27 में इसके 26,407 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

इसके बावजूद कंपनी का घाटा FY27 में 5,946 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। कुल खर्च 34,853 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है।

खर्च घटाने और कमाई बढ़ाने पर फोकस

संसदीय समिति ने BSNL और DoT से खर्च कम करने और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग बढ़ाने को कहा है। साथ ही 4G, 5G, एंटरप्राइज सर्विसेज और फाइबर कनेक्टिविटी जैसे ज्यादा कमाई वाले कारोबार पर ध्यान देने को कहा है।

BSNL अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए टावर और डार्क फाइबर लीज पर भी दे रही है। मार्च 2026 तक कंपनी ने 11,398 टावर दूसरी टेलीकॉम कंपनियों को किराये पर दिए थे। इससे FY26 में 1,019 करोड़ रुपये की कमाई हुई।

वहीं, करीब 3 लाख रूट किलोमीटर डार्क फाइबर लीज पर देकर 410 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल किया। साथ ही, कंपनी ने FY25 के 9,460 करोड़ रुपये के मुकाबले FY26 में अपना ऑपरेशनल खर्च घटाकर 8,970 करोड़ रुपये कर लिया।

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Hindustan Copper Q1 Results: सरकारी कंपनी का मुनाफा 163% बढ़ा, रेवेन्यू में 81% का उछाल

Hindustan Copper Q1 Results: सरकारी माइनिंग कंपनी Hindustan Copper के शेयर सोमवार, 10 अगस्त को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 163.4% बढ़कर 353 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह 134 करोड़ रुपये था।

कंपनी का रेवेन्यू 81.4% बढ़कर 936.5 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 516.4 करोड़ रुपये थी।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन भी मजबूत

हिंदुस्तान कॉपर का EBITDA 507.5 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह 212.3 करोड़ रुपये था। यानी ऑपरेटिंग मुनाफा भी दोगुना से ज्यादा बढ़ा।

वहीं, EBITDA मार्जिन 41% से बढ़कर 54% पर पहुंच गया। इससे कंपनी की ऑपरेटिंग एफिशिएंसी में सुधार दिखा।

कॉपर की कीमतों का भी मिला सहारा

वैश्विक बाजार में कॉपर की कीमतें पिछले छह हफ्तों से लगातार बढ़ रही थीं। इसकी वजह सप्लाई का कम होना और अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर चिंता कम होना रहा।

पिछले हफ्ते कॉपर की कीमत 14,000 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गई थी। यह जनवरी के आखिर के बाद का सबसे ऊंचा इंट्राडे स्तर था। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में भी कॉपर की कीमतें मजबूत रह सकती हैं।

हिंदुस्तान कॉपर के शेयरों का हाल

नतीजों के बाद Hindustan Copper के शेयरों में 1% से ज्यादा तेजी देखने को मिली। हालांकि, फिर मुनाफावसूली के के चलते यह लाल निशान में चला गया। दोपहर 2.20 बजे तक स्टॉक 0.48% की गिरावट के साथ 533.50 रुपये पर बंद हुआ।

पिछले 6 महीने में स्टॉक 10.72% गिरा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 125% का रिटर्न दिया है। इस सरकारी कंपनी का मार्केट कैप 51.63 हजार करोड़ रुपये है।

हिंदुस्तान कॉपर का बिजनेस क्या है

Hindustan Copper Ltd भारत सरकार के मालिकाना हक वाली खनन कंपनी है। इसका मुख्य कारोबार कॉपर (तांबा) की खोज, खनन, उत्पादन और बिक्री है।

कंपनी कॉपर ओर (अयस्क) निकालने से लेकर उसे प्रोसेस कर कॉन्संट्रेट, कॉपर कैथोड, वायर रॉड और दूसरे कॉपर उत्पाद बनाती है। इसके ग्राहक बिजली, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेलवे और रक्षा जैसे कई बड़े उद्योग हैं।

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