Acevector IPO: स्नैपडील की पेरेंट का इश्यू 5 गुना भरकर बंद, 5 अक्टूबर को लिस्टिंग; क्या कह रहा है ग्रे मार्केट

ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस स्नैपडील की पेरेंट कंपनी ऐसवेक्टर का ₹420 करोड़ का IPO 29 सितंबर को बंद हो चुका है। यह 5.07 गुना भरा। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 3.42 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 8.53 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 4.83 गुना सब्सक्राइब हुआ। अब कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 5 अक्टूबर को लिस्ट हो सकते हैं। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर महज 2.19 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ऐसे में लिस्टिंग बहुत अच्छी रहने की उम्मीद नहीं है। हालांकि ग्रे मार्केट के संकेत लिस्टिंग के दिन सच ही हो जाएं, ऐसा जरूरी नहीं है।

Acevector IPO के लिए प्राइस बैंड ₹30-₹32 प्रति शेयर था। IPO में ₹287 करोड़ के 8.97 करोड़ नए शेयर जारी हुए। साथ ही ₹133 करोड़ के 4.16 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहा। IPO के लिए रजिस्ट्रार MUFG Intime India थी। IPO से पहले ऐसवेक्टर ने एंकर इनवेस्टर्स से ₹189 करोड़ जुटाए। IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल मार्केटप्लेस बिजनेस की मार्केटिंग और बिजनेस प्रमोशन के लिए, मार्केटप्लेस बिजनेस के टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए, अधिग्रहणों के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रोथ के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

ऐसवेक्टर को कुणाल बहल और रोहित बंसल ने शुरू किया था। ऐसवेक्टर, स्नैपडील के साथ-साथ सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) प्लेटफॉर्म ‘यूनिकॉमर्स’ और कंज्यूमर ब्रांड बिल्डिंग फर्म Stellaro Brands को भी ऑपरेट करती है। यूनिकॉमर्स अगस्त 2024 में शेयर बाजार में लिस्ट हो चुकी है। इसका IPO ₹276.57 करोड़ का था।

Acevector IPO का अलॉटमेंट कैसे करें चेक

BSE पर

  • https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं।
  • इश्यू का टाइप ‘इक्विटी’ चुनें।
  • ड्रॉपडाउन मेन्यू से Acevector IPO चुनें।
  • एप्लीकेशन नंबर या PAN डिटेल एंटर करें।
  • ‘कैप्चा’ डालें।
  • ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।

MUFG Intime की वेबसाइट से

  • https://in.mpms.mufg.com/Initial_Offer/public-issues.html पर जाएं।
  • कंपनी नेम में Acevector सिलेक्ट करें।
  • PAN या एप्लीकेशन नंबर या DP/क्लाइंट ID या अकाउंट नंबर/IFSC में से एक को सिलेक्ट कर डिटेल डालें।
  • Submit पर क्लिक करें।

अप्रैल-सितंबर में मेनबोर्ड सेगमेंट में आए 78 IPO, जुटाए गए रिकॉर्ड ₹94205 करोड़

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Copper News: कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए बिग अलर्ट, कॉपर में मई के बाद की सबसे बड़ी वीकली गिरावट

Copper News: शेयर मार्केट में हाहाकार मचा हुआ ही है, कमोडिटी मार्केट में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। निफ्टी (Nifty) वीकली लेवल पर लगातार आठ हफ्ते कमजोर हुआ है और इतनी लंबी गिरावट 25 साल बाद दिखी है। अब कमोडिटी मार्केट में बात करें तो कॉपर जो धड़ाधड़ ऊपर भाग रहा था, अब मई के बाद से सबसे बड़ी वीकली गिरावट की तरफ बढ़ रहा है। शुक्रवार को डॉलर में गिरावट के साथ लंदन मेटल एक्सचेंज पर इसके फ्यूचर्स प्रति टन $14,300 प्रति टन से ऊपर चले गए, लेकिन फिर भी वीकली लेवल पर हफ्ते की समाप्ति पर इसमें लगभग 2% की गिरावट रहने के आसार हैं।

क्यों फीका पड़ा Copper?

एनर्जी की लागत में बढ़ोतरी और चीन के लड़खड़ाते इंडस्ट्रियल सेक्टर की वजह से मांग कम होने के डर से कॉपर को झटका लगा। एनर्जी की लागत इसलिए बढ़ रही है क्योंकि पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने तेल की सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया हुआ है, जिससे यह उबल पड़ा और कॉपर को भी इसकी आंच महसूस हुई। इसके अलावा चीन में इंडस्ट्रियल कमजोरी के आंकड़ो ने भी कॉपर पर दबाव बनाया।

अभी कितना टूटेगा भाव?

चीन में इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज की कमजोर और कच्चे तेल में उबाल ने कॉपर को नरम किया है लेकिन सप्लाई की कमी के कारण कीमतें ऊपरी लेवल पर बनी हुई है यानी कि इसमें अधिक गिरावट की गुंजाइश नहीं दिख रही है। रिफाइंड मेटल पर अमेरिकी टैरिफ के डर से ट्रेडर्स ने लाखों टन मेटल अमेरिका भेजा है, जिससे दूसरी जगहों पर कमी का खतरा पैदा हो गया है। चिली की एक बड़ी खदान में भी हड़ताल चल रही है।

बैंक ऑफ अमेरिका कॉरपोरेशन के एनालिस्ट्स ने अपने नोट में जिक्र किया है कि जब तक पश्चिमी एशिया में युद्ध जारी रहेगा, बेस मेटल्स में बढ़ोतरी सीमित हो सकती है लेकिन एल्युमीनियम, कॉपर और निकेल की सप्लाई में कमी से कीमतों को सपोर्ट मिलना चाहिए।

अभी अमेरिका में सितंबर महीने का रोजगार डेटा आना है, जिसमें मार्केट का अनुमान है कि हायरिंग में बड़ी सुस्ती देखने को मिल सकती है। यह आंकड़ा आज शुक्रवार को आना है। इसमें सुस्ती का असर ये होगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अपनी मौद्रिक नीतियों को और सख्त करने की संभावना फीकी होगी, जो कॉपर के लिए पॉजिटिव हो सकता है।

Orient Cables IPO: ग्रे मार्केट में तूफानी चाल, आईपीओ को 97 गुना बोली के बाद अब धांसू लिस्टिंग की तैयारी

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Orient Cables IPO: ग्रे मार्केट में तूफानी चाल, आईपीओ को 97 गुना बोली के बाद अब धांसू लिस्टिंग की तैयारी

Orient Cables IPO: देश की चार सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरिंग केबल कंपनियों में शुमार ओरिएंट केबल्स के ₹552 करोड़ के आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला। ओवरऑल 97 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन के बाद इसके शेयर अलॉट हो चुके हैं और अब इसकी लिस्टिंग का इंतजार है। जिन्हें इसके शेयर मिले हैं, उनके खाते में यह 1 अक्टूबर को क्रेडिट हो गया और अब 5 अक्टूबर को बीएसई और एनएसई पर इसकी लिस्टिंग है।

लिस्टिंग को लेकर ग्रे मार्केट से मजबूत संकेत नहीं मिल रहे हैं और GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹107 यानी 39.34% है यानी कि 39% से अधिक के लिस्टिंग गेन की गुंजाइश दिख रही है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय लिस्टिंग के दिन मार्केट सेंटिमेंट के साथ-साथ कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल्स ही शेयरों की चाल तय करते हैं।

Orient Cables IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

ओरिएंट केबल्स का ₹552 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 25-29 सितंबर तक खुला था। इसका प्राइस बैंड प्रति शेयर ₹258-₹272 था। इस आईपीओ को निवेशकों का धमाकेदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 97.28 गुना सब्सक्राइब हुआ है। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 192.68 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 121.90 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 32.21 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹320 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹1 की फेस वैल्यू वाले ₹232 करोड़ के 85,29,409 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹91.50 करोड़ मशीनरी और इक्विपमेंट की खरीदारी और मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज के सिविल वर्क्स, ₹155.50 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹48.34 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹42.53 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Orient Cables के बारे में

ओरिएंट केबल्स इंटरनेट, नेटवर्किंग, डेटा सेंटर, टेलीकॉम, सोलर, EV और दूसरी इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली केबल और नेटवर्किंग उपकरण बनाती है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो CAT5, CAT5e, CAT6 और CAT6A नेटवर्किंग केबल्स, पैच कॉर्ड्स, सीसीटीवी और कोएक्सियल केबल्स, इंस्ट्रूमेशन और कंट्रोल केबल्स, पावर केबल्स, ऑप्टिकल फाइबर केबल्स, फाइबर पैच कॉर्ड्स, कीस्टोन जैक्स, पावर स्ट्रिप्स और पावर कॉर्ड्स हैं। इसके अलावा कंपनी ने कुछ नए प्रोडक्ट्स भी जोड़े हैं, जैसे कि ई-बीम इर्रेडिएटेड स्पेशल्टी केबल्स, सोलर जंक्शन बॉक्स, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम्स, केबल हार्नेसेज, ईवी चार्जिंग केबल्स, ईवी चार्जिंग गन्स और पावर कॉर्ड्स। नेटवर्किंग केबल मार्केट में इसका दबदबा तेजी से बढ़ा है और मार्केट शेयर वित्त वर्ष 2022 में करीब 16% से वित्त वर्ष 2026 में 22.9% पर पहुंच गया।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 16% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹53.56 करोड़ और टोटल इनकम 33% से अधिक के सीएजीआर से ₹1,181.67 करोड़ पर पहुंच गया। चालू वित्त वर्ष 2027 की बात करें तो पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में कंपनी को ₹32.78 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹490.94 करोड़ का टोटल इनकम हासिल हुआ था। जून 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹258.46 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹257.35 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SRIT India IPO: ₹218 करोड़ का इश्यू 125 गुना भरकर बंद, अलॉटमेंट आज 1 अक्टूबर को; ग्रे मार्केट में भाग रहा शेयर

मेनबोर्ड सेगमेंट में SRIT इंडिया का ₹218.40 करोड़ का IPO 125.16 गुना भरकर बंद हो चुका है। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 91.84 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 312.99 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के​ लिए रिजर्व हिस्सा 63.70 गुना सब्सक्राइब हुआ। अब अलॉटमेंट 1 अक्टूबर को फाइनल हो सकता है। उसके बाद कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 6 अक्टूबर को लिस्ट होने की उम्मीद है।

ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर 36.92 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं। IPO के लिए चॉइस कैपिटल एडवाइजर्स, बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार Kfin Technologies है।

जिन लोगों ने SRIT India IPO में पैसे लगाए हैं, वे इसकी रजिस्ट्रार Kfin Technologies और स्टॉक एक्सचेंज BSE की वेबसाइट पर जाकर अलॉटमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसकी प्रोसेस इस तरह है…

Kfin Technologies की वेबसाइट से

  • https://ipostatus.kfintech.com/ पर जाएं।
  • IPO में SRIT India सिलेक्ट करें।
  • अब एप्लीकेशन नंबर, PAN और डीमैट अकाउंट में से किसी एक को सिलेक्ट कर डिटेल्स एंटर करें।
  • ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।

BSE से कैसे करें चेक

  • https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं।
  • इश्यू का टाइप ‘इक्विटी’ चुनें।
  • ड्रॉपडाउन मेन्यू से SRIT India IPO चुनें।
  • एप्लीकेशन नंबर या PAN डिटेल्स एंटर करें।
  • ‘कैप्चा’ डालें।
  • ‘सर्च’ बटन पर क्लिक करें।

SRIT India IPO में 1.68 करोड़ नए शेयर जारी हुए। प्राइस बैंड ₹123-₹130 प्रति शेयर था। SRIT इंडिया लिमिटेड बेंगलुरु की एक इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इनेबल्ड सर्विसेज (IT/ITeS) सॉल्यूशंस कंपनी है। यह डिजिटल सॉल्यूशन, कस्टम एप्लीकेशन डेवलपमेंट और सिस्टम इंटीग्रेशन सर्विसेज उपलब्ध कराती है। कंपनी भारत और कुछ विदेशी बाजारों में सरकारी संस्थाओं और एंटरप्राइजेज के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म डिजाइन, इंप्लीमेंट और ऑपरेट करती है।

SRIT इंडिया 3 वर्टिकल में काम करती है: हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक गवर्नेंस, और टेलीकम्युनिकेशंस व ब्रॉडबैंड। इसकी सर्विसेज में हेल्थकेयर इनफॉर्मेशन सिस्टम्स, डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, ई-गवर्नेंस सॉल्यूशंस, साइबर सिक्योरिटी, एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर, नेटवर्किंग, कनेक्टिविटी, फाइबर ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सिस्टम इंटीग्रेशन, ऑटोमेशन और मैनेज्ड सर्विसेज शामिल हैं।

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IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

कंपनी पब्लिक इश्यू से हुई कमाई का इस्तेमाल मौजूदा प्रोडक्ट्स को आधुनिक बनाने और रीडेवलपमेंट के लिए, वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए, पहले से न पता अधिग्रहणों और अन्य रणनीतिक पहलों के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रेाथ के लिए, और आम कॉरपोरेट कामों के लिए करेगी। SRIT India का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 15 प्रतिशत बढ़कर ₹462.54 करोड़ रहा। शुद्ध मुनाफा 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹43.29 करोड़ रहा। इस बीच कंपनी पर ₹36.15 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025 के दौरान रेवेन्यू ₹400.50 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹33.60 करोड़ दर्ज किया गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SRIT India IPO: 25% के पार पहुंचा GMP, 28 सितंबर को खुलेगा इश्यू; जानिए हर एक डिटेल

SRIT India IPO: डिजिटल सॉल्यूशन देने वाली SRIT India का आईपीओ 28 सितंबर से खुलने वाला है। कंपनी का इश्यू से ₹218.40 जुटाने का प्लान है। इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP बढ़कर 25% के पार पहुंच गया है।

IPO कब खुलेगा?

बेंगलुरु की IT सॉल्यूशन कंपनी SRIT India का IPO 28 सितंबर को खुलेगा। निवेशकों के पास 30 सितंबर तक आवेदन करने का मौका रहेगा। प्राइस बैंड 123 से 130 रुपये प्रति शेयर रखा गया है। इसकी 6 अक्टूबर को बाजार में लिस्टिंग हो सकती है।

IPO के बाद कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी घट जाएगी। अभी प्रमोटर्स के पास 84.74% हिस्सेदारी है। IPO के बाद यह 62.59% रह जाएगी।

GMP से कितने मुनाफे का संकेत?

Investorgain के मुताबिक, SRIT India का GMP 33 रुपये है। यह अपर प्राइस बैंड 130 रुपये से करीब 25.38% ज्यादा है। हालांकि, GMP ग्रे मार्केट का संकेत है। यह लिस्टिंग पर मिलने वाले रिटर्न की गारंटी नहीं है।

कंपनी क्या करती है?

SRIT India डिजिटल सॉल्यूशन और सिस्टम ऑटोमेशन का काम करती है। कंपनी कस्टम एप्लीकेशन बनाती है। साथ ही अलग-अलग सिस्टम को इंटीग्रेट करने की सर्विस भी देती है।

कंपनी सरकारी संस्थाओं और एंटरप्राइज के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करती है। इसका कारोबार भारत के अलावा कुछ विदेशी बाजारों में भी है।

AI पर भी फोकस

SRIT India अपने मुख्य बिजनेस में AI बेस्ड सॉल्यूशन जोड़ रही है। इसका मकसद AI से जुड़ी अपनी क्षमता बढ़ाना है।

SRIT India ने बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी लागू किए हैं। कंपनी डिजिटल प्लेटफॉर्म को डिजाइन करने से लेकर उसे चलाने तक का काम करती है।

IPO के पैसे का क्या होगा?

IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कई कामों में किया जाएगा। कंपनी मौजूदा प्रोडक्ट्स को आधुनिक बनाने और उनके दोबारा विकास पर पैसा लगाएगी।

इसके अलावा वर्किंग कैपिटल की जरूरत पूरी की जाएगी। कंपनी अधिग्रहण के जरिए कारोबार बढ़ाने और दूसरी रणनीतिक योजनाओं पर भी पैसा खर्च करेगी। कुछ रकम सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए रखी जाएगी।

सरकारी कारोबार से सबसे ज्यादा रेवेन्यू

SRIT India के कारोबार में सरकारी सेगमेंट की बड़ी हिस्सेदारी है। मार्च 2026 को खत्म वित्त वर्ष में कंपनी का रेवेन्यू 450 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 389.3 करोड़ रुपये था। यानी रेवेन्यू में 15.6% की बढ़ोतरी हुई।

कंपनी के कुल रेवेन्यू में सरकारी कारोबार की हिस्सेदारी 89.41% रही। वहीं एंटरप्राइज सेगमेंट से 10.59% रेवेन्यू आया।

किन कंपनियों से मुकाबला?

SRIT India की तुलना Allied Digital Services, Aurionpro Solutions, Mastek और Protean eGov Technologies जैसी लिस्टेड कंपनियों से की जाती है।

इस IPO के बुक रनिंग लीड मैनेजर Choice Capital Advisors Private Limited हैं। KFin Technologies Limited इश्यू की रजिस्ट्रार है।

लंबी और मध्यम अवधि के लिहाज से यह शेयरों में निवेश का शानदार मौका, एक्सपर्ट ने बताई इसकी खास वजह

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Cars24 IPO: लिस्टिंग की तैयारी, अप्रैल तक फाइल होगा ड्राफ्ट, अभी गुजर रही इस लंबे प्रोसेस से

Cars24 IPO: पुराने कारों की बिक्री के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ऑफर करने वाली कार्स24 सात महीने में आईपीओ के लायक हो सकती है। कंपनी के सीएफओ Shivanshu Makkar का कहना है कि सिंगापुर से भारत में अपने रिवर्स फ्लिप की प्रक्रिया पूरी करने के बाद वह अप्रैल तक आईपीओ का ड्राफ्ट यानी DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) दाखिल कर सकेगी। रिवर्स फ्लिप में छह से नौ महीने तक का समय लग सकता है। शिवांशु ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से इंटरव्यू में बताया कि 2015 में सिंगापुर में बनी कार्स24 को रिवर्स फ्लिप के लिए मंजूरी मिल चुकी है और अब यह भारत में अपने आईपीओ का ड्राफ्ट फाइल कर सकती है।

कब तक आ सकता है आईपीओ?

शिवांशु ने कहा था कि अभी कार्स24 सिंगापुर सिंगापुर की कंपनी है लेकिन अब इसे भारतीय कंपनी बनाने की तैयारी है। यह रिवर्स फ्लिप प्रक्रिया है, जैसा कि फ्लिकार्ट (Flipkart) और मिंत्रा (Myntra) ने किया था। शिवांशु की कहना है कि कंपनी को सिंगापुर से मंजूरी मिल चुकी है और भारत में दाखिल करने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें 6 से 9 महीने लग सकते हैं। आधिकारिक तौर पर भारतीय कंपनी बनने के बाद ही यह आईपीओ का ड्राफ्ट दाखिल कर सकेगी। शिवांश को उम्मीद है कि अप्रैल तक कंपनी ऐसा करने के योग्य हो जाएगी। इसके बाद सेबी की मंजूरी, आईपीओ की प्राइस तय करने और बुक-बिल्डिंग जैसी प्रक्रियाओं में करीब 3 से 4 महीने लग सकते हैं।

कैसी है Cars24 की स्थिति

कार्स24 ने आखिरी बार साल 2022 में फंडिंग जुटाई थी, जिसके बाद कंपनी का वैल्यूएशन करीब $330 करोड़ हो गया। शिवांशु के मुताबिक इसके बाद से शिवांशु ने बाहर से कोई नया निवेश नहीं जुटाया, क्योंकि उसे अतिरिक्त पूंजी की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने कहा कि कंपनी के पास अभी भी पर्याप्त पूंजी मौजूद है और वह फिलहाल कैश बर्न नहीं कर रही है। ऐसे में शिवांशु का कहना है कि अगर कंपनी आईपीओ लाती है तो इसका मुख्य उद्देश्य तत्काल पैसों की जरूरत पूरी करना नहीं, बल्कि भारत में विस्तार और देश के बाहर दूसरे बाजारों में एंट्री के लिए पूंजी तैयार करना होगा।

उनका कहना है कि फिलहाल भारत में 100 में से सिर्फ 5 भारतीयों के पास कार है, तो इस मार्केट में विस्तार की काफी संभावनाएं हैं। शिवांशु का कहना है कि कार्स24 का रिटेल कारोबार इस समय देश के करीब 25 शहरों में है, जिसे बढ़ाकर लगभग 200 शहरों तक ले जाने और करीब 50,000 कारों तक विस्तार करने पर विचार चल रहा है।

शिवांशु का कहना है कि भारत के अलावा कार्स24 खाड़ी के देशों और ऑस्ट्रेलिया में भी अपने कारोबार को बढ़ाने पर विचार कर रही है। अभी यूएई में पुरानी कारों के बाजारों में कार्स24 की लगभग 7% हिस्सेदारी है और यह लगभग 30% की दर से बढ़ रही है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में इसने तीन शहरों तक अपना विस्तार किया है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SRIT India IPO: ₹218 करोड़ का एक और मेनबोर्ड इश्यू 28 सितंबर से, रहेंगे केवल नए शेयर; चेक करें प्राइस बैंड, GMP

मेनबोर्ड सेगमेंट में SRIT इंडिया का ₹218.40 करोड़ का IPO आ रहा है। यह 28 सितंबर को खुलेगा और 30 सितंबर को बंद होगा। इसमें 1.68 करोड़ नए शेयर रहेंगे। प्राइस बैंड ₹123-₹130 प्रति शेयर और लॉट साइज 115 शेयर है। SRIT इंडिया लिमिटेड बेंगलुरु की एक इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इनेबल्ड सर्विसेज (IT/ITeS) सॉल्यूशंस कंपनी है। यह डिजिटल सॉल्यूशन, कस्टम एप्लीकेशन डेवलपमेंट और सिस्टम इंटीग्रेशन सर्विसेज उपलब्ध कराती है। कंपनी भारत और कुछ विदेशी बाजारों में सरकारी संस्थाओं और एंटरप्राइजेज के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म डिजाइन, इंप्लीमेंट और ऑपरेट करती है।

SRIT इंडिया 3 वर्टिकल में काम करती है: हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक गवर्नेंस, और टेलीकम्युनिकेशंस व ब्रॉडबैंड। इसकी सर्विसेज में हेल्थकेयर इनफॉर्मेशन सिस्टम्स, डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, ई-गवर्नेंस सॉल्यूशंस, साइबर सिक्योरिटी, एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर, नेटवर्किंग, कनेक्टिविटी, फाइबर ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सिस्टम इंटीग्रेशन, ऑटोमेशन और मैनेज्ड सर्विसेज शामिल हैं।

SRIT India के IPO की क्लोजिंग 30 सितंबर को होगी, जिसके बाद अलॉटमेंट 1 अक्टूबर को फाइनल हो सकता है। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 6 अक्टूबर को लिस्ट होने की उम्मीद है। IPO के लिए चॉइस कैपिटल एडवाइजर्स, बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार Kfin Technologies है।

IPO में कितना हिस्सा रिजर्व

पब्लिक इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। कंपनी पब्लिक इश्यू से हुई कमाई का इस्तेमाल मौजूदा प्रोडक्ट्स को आधुनिक बनाने और रीडेवलपमेंट के लिए, वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए, पहले से न पता अधिग्रहणों और अन्य रणनीतिक पहलों के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रेाथ के लिए, और आम कॉरपोरेट कामों के लिए करेगी।

Orient Cables IPO का GMP 25%, क्या दांव लगाने से होगी मोटी कमाई?

SRIT India की वित्तीय सेहत

SRIT India का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 15 प्रतिशत बढ़कर ₹462.54 करोड़ रहा। शुद्ध मुनाफा 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹43.29 करोड़ रहा। इस बीच कंपनी पर ₹36.15 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025 के दौरान रेवेन्यू ₹400.50 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹33.60 करोड़ दर्ज किया गया। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर अभी से 24.62 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Orient Cables IPO का GMP 25%, क्या दांव लगाने से होगी मोटी कमाई?

ओरिएंट केबल्स के आईपीओ को शानदार रिस्पॉन्स मिला है। 25 सितंबर को पहले दिन ही 1 बजे तक इश्यू 87 फीसदी सब्सक्राइब हो चुका था। यह इश्यू 552 करोड़ रुपये का है। कंपनी ने 258-272 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। इस इश्यू में 29 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है।

24 सितंबर को जीएमपी 41 फीसदी था

इनवेस्टरगेन के मुताबिक, इस शेयर पर ग्रे मार्केट प्रीमियम 25 फीसदी चल रहा है। 24 सितंबर को जीएमपी 41 फीसदी से ज्यादा था। अगर शेयर की लिस्टिंग जीएमपी के मुताबिक होती है तो इनवेस्टर्स को अच्छा मुनाफा हो सकता है। हालांकि, जीएमपी से शेयरों की लिस्टिंग का सिर्फ एक संकेत मिलता है। यह शेयर की लिस्टिंग प्राइस की गांरटी नहीं है।

आईपीओ में ऑफर फॉर सेल भी शामिल 

ओरिएंट केबल्स गुरुग्राम की कंपनी है। कंपनी के आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (OFS) भी शामिल है। इसका मतलब है कि आईपीओ में नए शेयर एलॉट होने के साथ ही प्रमोटर फैमिली अपने कुछ शेयर बेचेगी। इस आईपीओ में कम से कम शेयरों के एक लाट के लिए बोली लगानी होगी। एक लॉट 55 शेयरों का है। इसका मतलब है कि प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर बोली लगाने के लिए कम से कम 14,960 रुपये की जरूरत पड़ेगी।

एंकर इनवेस्टर्स से 165 करोड़ जुटा चुकी है कंपनी

कंपनी ने आईपीओ खुलने से पहले एंकर इनवेस्टर्स से 165.6 करोड़ रुपये जुटाए हैं। उसने 272 रुपये प्रति शेयर के भाव पर कुल 60.88 लाख शेयर एलॉट किए हैं। एंकर इनवेस्टर्स में कई बड़े म्यूचुअल फंड हाउस शामिल हैं।

कंपनी आईपीओ के पैसे से नई मशीन खरीदेगी

कंपनी इश्यू से जुटाए गए पैसे में से 91.5 करोड़ रुपये का इस्तेमाल नई मशीन और इक्विपमेंट खरीदने के लिए करेगी। साथ ही अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में कुछ सिविल वर्क कराएगी। वह 155.5 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। बाकी पैसे का इस्तेमाल सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए होगा।

कंपनी नेटवर्किंग सहित कई तरह के केबल्स बनाती है

ओरिएंट केबल्स नेटवर्किंग केबल्स और पैसिव नेटवर्किंग इक्विपमेंट बनाती है। साथ ही स्पेशियलिटी और ऑप्टिकल फाइबर केबल्स बनाती है। इसके ग्राहकों में ब्रॉडबैंड, टेलीकॉम, डेटा सेंटर्स, रिन्यूएबल एनर्जी और स्मार्ट बिल्डिंग ऑटोमेशन सेंगमेंट शामिल हैं। यह आईपीओ ऐसे वक्त आया है, जब प्राइमरी मार्केट में काफी हलचल है। एनएसई का आईपीओ 24 सितंबर को लिस्ट हुआ। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ था। सबसे बड़ा आईपीओ ह्युंडई का था।

Varmora Granito IPO 1.60 गुना भरकर बंद, अब अलॉटमेंट आज, 25 सितंबर को; कैसी रहेगी लिस्टिंग

वरमोरा ग्रैनिटो का ₹708.02 करोड़ का IPO 1.60 गुना भरकर बंद हो गया है। इसमें ₹320 करोड़ के 2.16 करोड़ नए शेयर जारी हुए। साथ ही मौजूदा शेयरहोल्डर्स की ओर से ₹388.02 करोड़ के 2.62 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल रहा। प्राइस बैंड ₹140-₹148 प्रति शेयर था। अब 25 सितंबर को अलॉटमेंट फाइनल होने की उम्मीद है। उसके बाद कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 29 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं।

वरमोरा ग्रैनिटो लिमिटेड, सिरेमिक और विट्रिफाइड टाइल्स (जैसे ग्लेज्ड विट्रिफाइड टाइल्स- GVT, पॉलिश्ड विट्रिफाइड टाइल्स- PVT और सिरेमिक टाइल्स) बनाती और बेचती है। कंपनी का फोकस प्रीमियम और टेक्नोलॉजी बेस्ड प्रोडक्ट्स पर है। कंपनी के प्रमोटर भावेश वल्लभदास वरमोरा, हीरेन आर वरमोरा, और प्रमोदकुमार परसोतमभाई पटेल हैं। वरमोरा भारत के साथ-साथ विदेश में भी ऑपरेशनल है।

जिन लोगों ने Varmora Granito IPO में पैसे लगाए हैं, वे इसकी रजिस्ट्रार Kfin Technologies और स्टॉक एक्सचेंज BSE की वेबसाइट पर जाकर अलॉटमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसकी प्रोसेस इस तरह है…

Kfin Technologies की वेबसाइट से

  • https://ipostatus.kfintech.com/ पर जाएं।
  • IPO में Varmora Granito सिलेक्ट करें।
  • अब एप्लीकेशन नंबर, PAN और डीमैट अकाउंट में से किसी एक को सिलेक्ट कर डिटेल्स एंटर करें।
  • ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।

BSE से कैसे करें चेक

  • https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं।
  • इश्यू का टाइप ‘इक्विटी’ चुनें।
  • ड्रॉपडाउन मेन्यू से Varmora Granito IPO चुनें।
  • एप्लीकेशन नंबर या PAN डिटेल्स एंटर करें।
  • ‘कैप्चा’ डालें।
  • ‘सर्च’ बटन पर क्लिक करें।

कंपनी के IPO में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 3.10 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 0.94 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 1.02 गुना सब्सक्राइब हुआ। ग्रे मार्केट में वरमोरा ग्रैनिटो के शेयर महज 0.34 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Orient Cables IPO: ₹552 करोड़ का इश्यू 25 सितंंबर से, प्राइस बैंड ₹258-₹272 प्रति शेयर; ग्रे मार्केट में अभी से चढ़ा शेयर

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

कंपनी अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल अपना और सब्सिडियरीज का कर्ज चुकाने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। वरमोरा ग्रैनिटो का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 5 प्रतिशत बढ़कर 1,562.53 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 79 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 55 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इस दौरान कंपनी पर 357.95 करोड़ रुपये की उधारी थी। एक साल पहले रेवेन्यू 1,492.68 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 30.77 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE IPO: 5.67 गुना सब्सक्राइब, हर 4 में से 3 रिटेल इनवेस्टर को शेयर अलॉटमेंट मिल सकता है

NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का ₹22,569 करोड़ का IPO सोमवार, 21 सितंबर को बंद हो गया। आखिरी दिन इश्यू को 5.67 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। निवेशकों ने 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 50.28 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई।

QIB यानी बड़े संस्थागत निवेशकों ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। उनका हिस्सा 12.68 गुना सब्सक्राइब हुआ। NII कैटेगरी 6.54 गुना और रिटेल हिस्सा 1.35 गुना सब्सक्राइब हुआ।

रिटेल निवेशकों को कितना मिल सकता है?

रिटेल हिस्सा 1.35 गुना भरा है। इस आधार पर शुरुआती अनुमान करीब 75% का है। अगर आसान भाषा में कहें तो हर चार में से करीब तीन रिटेल आवेदकों को शेयर मिल सकते हैं।

इसे पक्का अलॉटमेंट रेशियो नहीं मानना चाहिए। क्योंकि असल अलॉटमेंट वैध आवेदनों और IPO के नियमों के हिसाब से होगा।

NSE IPO के GMP में भारी गिरावट

NSE IPO का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर था। एक लॉट में 8 शेयर रखे गए थे। अपर प्राइस बैंड पर एक लॉट के लिए ₹14,280 लगाने पड़े।

ग्रे मार्केट में NSE शेयर का GMP IPO के दौरान काफी नीचे आया है। लेटेस्ट GMP करीब 3% संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत दे रहा है। शुरुआत में ये 18% के करीब था। GMP अनऑफिशियल होता है। इसे लिस्टिंग प्राइस या मुनाफे की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

एंकर निवेशकों से जुटाए ₹6,746 करोड़

IPO से पहले NSE ने 189 एंकर निवेशकों से ₹6,746.18 करोड़ जुटाए थे। इन्हें ₹1,785 प्रति शेयर के भाव पर शेयर दिए गए। एंकर निवेशकों को 16 सितंबर को 3.78 करोड़ शेयर अलॉट किए गए।

LIC सबसे बड़ा व्यक्तिगत एंकर निवेशक रहा। उसे करीब ₹400.3 करोड़ के शेयर मिले। Norway का Government Pension Fund Global, Monetary Authority of Singapore और Abu Dhabi Investment Authority भी एंकर निवेशकों में शामिल रहे।

NSE को नहीं मिलेगा IPO का पैसा

NSE का पूरा IPO ऑफर फॉर सेल यानी OFS है। इसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। इसलिए IPO से मिलने वाला पैसा NSE के पास नहीं जाएगा।

इश्यू से जुड़े खर्च निकालने के बाद रकम शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलेगी। अपर प्राइस बैंड पर NSE की वैल्यू करीब ₹4.42 लाख करोड़ है। IPO में कर्मचारियों के लिए ₹70 करोड़ तक का हिस्सा भी रखा गया था। पात्र कर्मचारियों को अंतिम इश्यू प्राइस पर ₹170 प्रति शेयर की छूट मिली है।

22 सितंबर को अलॉटमेंट, 24 को लिस्टिंग

NSE IPO का अलॉटमेंट 22 सितंबर को फाइनल होने की उम्मीद है। शेयरों की BSE पर लिस्टिंग 24 सितंबर को प्रस्तावित है।

अलॉटमेंट फाइनल होने के बाद निवेशक रजिस्ट्रार और स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट पर अपना स्टेटस चेक कर सकेंगे।

शेयर बाजार में NSE की कितनी हिस्सेदारी?

NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। जून 2026 को खत्म तीन महीने में कैश मार्केट के टर्नओवर में NSE की हिस्सेदारी 93.05% रही।

इक्विटी फ्यूचर्स में इसकी हिस्सेदारी 99.72% और इक्विटी ऑप्शंस में 68.48% थी। वहीं, एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी फ्यूचर्स और करेंसी ऑप्शंस में कुल प्रीमियम टर्नओवर के आधार पर NSE की हिस्सेदारी 100% रही।

Stock in Focus: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी को ₹488 करोड़ का ऑर्डर मिला, शेयरों पर रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।