Delhi NCR Weather: दिल्ली-NCR में बदला मौसम, आंधी-तूफान के साथ कई इलाकों में हुई झमाझम बारिश, IMD ने जारी किया रेड अलर्ट

Delhi NCR Weather: दिल्ली-NCR में शुक्रवार को अचानक से तेज आंधी तुफान के साथ गरज-चमक और झमाझम बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। ने लोगों को गर्मी से काफी राहत दी। मौसम विभाग ने राजधानी और आसपास के इलाकों में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए रेड अलर्ट जारी कर दिया है। जिसके बाद दिल्ली और एनसीआर में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों के साथ-साथ ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी बारिश हुई है। मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में मध्यम से तेज बारिश के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, अगर बारिश की स्थिति लगातार बनती है तो निचले इलाकों में पानी भरने और सड़कों पर यातायात की रफ्तार धीमी पड़ने की संभावना है। हालांकि, राहत की बात यह है कि जन्माष्टमी के चलते स्कूल-कॉलेज और तमाम दफ्तरों में छुट्टी होने के चलते सड़कों पर ट्रैफिक का कम दबाव रहेगा।

IMD के ताजा अपडेट के अनुसार, राजधानी के ज्यादातर हिस्सों में मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश (50 से 100 मिमी) होने की आशंका है। बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनके झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

मौसम विभाग ने लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने और बेहद जरूरी होने पर ही बारिश के दौरान बाहर निकलने की सलाह दी है।

राजस्थान से उत्तर प्रदेश तक भी मौसम विभाग का अलर्ट

मौसम विभाग ने बताया कि उत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ ही मानसून की अक्षीय रेखा भी सक्रिय है, जो श्रीगंगानगर से होते हुए इस निम्न दबाव वाले क्षेत्र तक पहुंच रही है। इन मौसमी सिस्टम का असर उत्तर भारत के कई हिस्सों में देखने को मिल रहा है।

राजस्थान के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी इलाकों में भी भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। पिछले 24 घंटों के दौरान पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सवाई माधोपुर के खंडार में सबसे ज्यादा 130 मिमी बारिश हुई।

इसके अलावा अलवर, भरतपुर, डीग, दौसा, धौलपुर, जयपुर, सीकर, भीलवाड़ा, अजमेर, करौली, टोंक, बारां, कोटा और झालावाड़ में भी हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिली।

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Krishna Janmotsav 2026: आज आधी रात में पधारेंगे मुरलीधर श्याम, जानें आज निशिता काल पूजा विधि, महत्व और पारण का सही समय

Krishna Janmotsav 2026: आज भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है और आज के दिन ही द्वापर युग में देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में भगवान विष्णु ने अवतार लिया था। इसलिए हर साल इस दिन भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन मध्यरात्रि में भक्त वत्सल मनमोहन श्याम अपने लाखों करोड़ों भक्तों के बीच जन्म लेते हैं। निशिता काल में जब यह पल आता है, तब शंख और घंटों की आवाज और कृष्ण कन्हैया लाल की जय के साथ भगवान के अवतरण का उत्सव मनाया जाता है।

इस साल 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण का 5253वीं जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। बहुत से भक्त आज के दिन व्रत करते हैं, घर और मंदिर में भगवान कृष्ण के जन्म और लीलाओं की झाकियां सजाते हैं। आइए कृष्ण जन्माष्टमी पर जानते हैं तिथि, समय, महत्व, पूजा विधि, नियम, व्रत के प्रकार और पारण का समय।

जन्माष्टमी 2026: मध्यरात्रि निशिता काल पूजा विधि

  • भगवान कृष्ण की मूर्ति को धोकर साफ चौकी पर एक नया या साफ कपड़ा बिछाएं।
  • इसके बाद फलों, मोर पंख, तुलसी के पत्तों और पालकी को सजाएं।
  • भगवान कृष्ण की लड्डू गोपाल मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद साफ जल और आखिर में गंगाजल की कुछ बूंदें डालें।
  • मूर्ति को साफ कपड़े से सुखाएं, इसके बाद नए कपड़े पहनाएं, आभूषण लगाएं, मुकुट में मोर पंख और हाथ में बांसुरी दें। चंदन और रोली का तिलक और अक्षत लगाएं।
  • इसके बाद भगवान कृष्ण को पंजीरी, तुलसी पत्ते, फल-फूल, माखन-मिश्री और पंचमेवा का भोग अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान कृष्ण को पालने में बिठाएं और ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल’ की गीत गाते हुए धीरे से झुलाएं।
  • इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा मंत्र ‘ऊं’ नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें। संभव हो तो कृष्ण अष्टकम का जाप करें।
  • भगवान कृष्ण की जन्म घोषणा करने के लिए शंख बजाएं फिर घी के दीये और कपूर से आरती करें। प्रसाद और चरणामृत सभी में बांटें।
  • पारण व्रत से जुड़े नियम

कई भक्त जाने-अनजाने में आधी रात की आरती के फौरन बाद ही व्रत तोड़ देते हैं। जबकि जन्माष्टमी व्रत का पारणा अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों के समाप्त होने के बाद ही किया जाता है।

अष्टमी तिथि 5 सितंबर को सुबह 11 बजकर 23 मिनट तक रहेगा, इसलिए सही मायने में पारण शनिवार की सुबह ही करनी चाहिए।

जन्माष्टमी पूजा सामग्री

दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, चीनी, तिलक के लिए रोली और चंदन पाउडर, अक्षत (साबुत चावल) मौली या कलावा, अभिषेक करने के लिए तांबे का लोटा, शंख, आरती के लिए भीमसेनी कपूर और सूती बत्तियां, भोग के लिए पंचमेवा, माखन-मिश्री और धनिया पंजीरी आरती की थाली, घी का दीया, अगरबत्ती, तुलसी पत्ता, मोर पंख, बांसुरी, मूर्ति के लिए वस्त्र।

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Janmashtami Laddu Gopal Puja Vidhi: इस जन्माष्टमी पर कैसे करें लड्डू गोपाल की पूजा और श्रृंगार? जानें कल पूजा की संपूर्ण विधि

Janmashtami Laddu Gopal Puja Vidhi: भगवान विष्णु के सभी अवतारों में कृष्णावतार सबसे लोकप्रिय और मोहक माना जाता है। यही वजह है कि भगवान के इस अवतार के जन्मोत्सव का पर्व भी अत्यंत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया था। माना जाता है कि श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए भगवान के भक्त हर साल भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। इस साल जन्माष्टमी का पर्व कल यानी 4 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल का श्रृंगार किया जाता है और निशिता काल में विशेष पूजा की जाती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर निशिता काल में लड्डू गोपाल के जन्म, अभिषेक और श्रृंगार की प्रामाणिक पूजा विधि निम्न प्रकार है:

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारी

पूजा स्थान : चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर फूलों व मोर पंख से झूला या आसन सजाएं।

सामग्री : पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), खीरा (डंठल व पत्ती वाला), नए वस्त्र, आभूषण, चंदन, अक्षत, तुलसी दल, माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और आरती की थाली तैयार रखें।

जन्मोत्सव और खीरा चीरने की विधि

  • मध्यरात्रि में खीरे के ऊपरी हिस्से को सिक्के या चाकू से काटकर बाल गोपाल का ‘नाल छेदन’ (जन्म का प्रतीक) करें।
  • ‘नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों के साथ शंख और घंटी बजाकर कान्हा के प्राकट्य का स्वागत करें।

पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक

  • लड्डू गोपाल को एक बड़े पात्र (परात) में विराजमान करें।
  • सबसे पहले गंगाजल अर्पित करें, फिर क्रम से दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद और शक्कर (या पंचामृत मिश्रण) से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हुए स्नान कराएं।
  • अंत में हल्के गुनगुने या साफ जल से इत्र मिलाकर अच्छी तरह स्नान कराएं और साफ तौलिए से पोंछें।

इस तरह करें लड्डू गोपाल का श्रृंगार

  • कान्हा को नए सुंदर पीले या रंगीन वस्त्र (पीतांबर) पहनाएं।
  • माथे पर चंदन और रोली का तिलक लगाएं तथा अक्षत (चावल) चढ़ाएं।
  • मुकुट, वैजयंती माला, बाजूबंद, कड़े, कुंडल और कमरधनी पहनाएं।
  • उनके हाथ में बांसुरी सजाएं और मुकुट में मोर पंख अवश्य लगाएं।

भोग और आरती

  • कान्हा को प्रिय माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, ऋतु फल और मिठाइयों का भोग लगाएं।
  • प्रत्येक भोग सामग्री में तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) जरूर रखें, क्योंकि इसके बिना भगवान भोग स्वीकार नहीं करते।
  • कपूर और घी का दीपक जलाकर बाल गोपाल की आरती गाएं।
  • पूजा और आरती के बाद लड्डू गोपाल को प्रेमपूर्वक सजाए गए झूले पर विराजमान करें।
  • भक्ति भाव से उन्हें झूला झुलाएं, क्षमा प्रार्थना करें और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करते हुए सभी में प्रसाद बांटें।

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Janmashtami Puja Samagri List: जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को सजाने और पूजा में जरूरी होगी ये सामग्री, यहां देखें जन्माष्टमी पूजा की पूरी सामग्री लिस्ट

Janmashtami Puja Samagri List: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण ने देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया था। इस दिन दुनिया भर के कृष्ण भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान कृष्ण की लीलाओं की झांकियां सजाते हैं, उनके मोहक बाल रूप का कीर्तन-भजन करते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा से सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। यह पर्व हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन लोग उपवास करते हैं और विभिन्न प्रकार से श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं। माना जाता है विधि-विधान से जन्माष्टमी की पूजा करने वाले भक्तों से भगवान प्रसन्न होते हैं। आइए जानें जन्माष्टमी की पूजा में क्या चीजें शामिल करना बेहद जरूरी है और जिनके बिना यह पूजा अधूरी मानी जाती है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा के लिए आवश्यक सामग्री की सूची नीचे दी गई है:

भगवान श्री कृष्ण के श्रृंगार और प्रतिमा हेतु

बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) की पीतल या मिट्टी की मूर्ति

नए वस्त्र : मोरपंख से सजे सुंदर वस्त्र या पोशाक

श्रृंगार सामग्री : मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, वैजयंती माला, कुंडल, कड़े, और पायल

झूला : बाल गोपाल को बैठाने के लिए छोटा झूला और सजावट का सामान

मुख्य पूजा की सामग्री

  • अक्षत (चावल), रोली (कुमकुम), हल्दी, और चंदन (सफेद व पीला)
  • अबीर, गुलाल, और सिंदूर
  • धूपबत्ती, अगरबत्ती, और दूर्वा (दूब घास)
  • दीपक (घी या तिल के तेल का) और आल की बत्ती/रेशमी बत्ती
  • कपूर (आरती के लिए)
  • सुपारी, पान के पत्ते, और लौंग-इलायची
  • कलावा (मौली) और गंगाजल
  • ताजे फूल (विशेषकर कमल या गेंदे के फूल) और तुलसी के पत्ते (भोग के लिए अत्यंत अनिवार्य)

पंचामृत और भोग सामग्री

पंचामृत : दूध, दही, देसी घी, शहद, और शक्कर (या बुरा) का मिश्रण

माखन और मिस्री : श्रीकृष्ण का सबसे प्रिय भोग

धनिया पंजीरी : भुने हुए धनिये के पाउडर, घी, चीनी और सूखे मेवों से बनी

मखाना और मेवे (पंचमेवा): काजू, बदाम, किशमिश, मखाना, और चिरौंजी

ताजे फल : केला, सेब, संतरा, और विशेष रूप से खीरा (डंठल और पत्ती वाला, जो जन्मोत्सव की प्रक्रिया के लिए आवश्यक है)

पूजा के बर्तन और अन्य वस्तुएं

  • पूजा की चौकी और लाल या पीला कपड़ा (चौकी पर बिछाने के लिए)
  • अर्घ्य और अभिषेक के लिए दक्षिणावर्ती शंख
  • छोटी घंटी और आरती की थाली
  • जल का कलश और आचमनी (तांबे या पीतल का छोटा लोटा)

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूजा मध्यरात्रि (रात 12 बजे) में की जाती है, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को हुआ था। सरल और प्रामाणिक पूजा विधि:

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और हाथ में जल, अक्षत व फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • दिनभर सात्विक रहें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘हरे कृष्णा’ मंत्र का जाप करते रहें।
  • शाम को पूजा के स्थान को साफ करें और उत्तर या पूर्व दिशा में एक चौकी स्थापित करें।
  • चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) का झूला या प्रतिमा स्थापित करें।
  • चौकी के पास जल से भरा कलश रखें और दीपक व धूप जलाएं।
  • रात 12 बजे खीरे को सिक्के या डंठल से काटकर बाल गोपाल का प्रतीकात्मक जन्म कराएं।
  • इसके बाद शंख में गंगाजल और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) भरकर लड्डू गोपाल का अभिषेक करें।
  • अभिषेक के बाद उन्हें शुद्ध जल से स्नान कराकर साफ कपड़े से पोंछें।
  • बाल गोपाल को सुंदर पोशाक, मुकुट, बांसुरी, वैजयंती माला और मोरपंख से सजाएं।
  • उन्हें रोली और चंदन का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें।
  • इसके बाद उन्हें प्यार से झूले में बैठाएं और झूला झुलाएं।
  • बाल गोपाल को उनका सबसे प्रिय भोग माखन-मिस्री और धनिया पंजीरी अर्पित करें।
  • पंचामृत, पंचमेवा, फल और मिठाइयों का भोग लगाएं।
  • सभी भोग सामग्रियों में तुलसी का पत्ता अवश्य रखें, क्योंकि इसके बिना श्री कृष्ण भोग स्वीकार नहीं करते।
  • धूप-दीप जलाकर ‘जय देव जय देव जय श्री कृष्णा’ या ‘कुंजबिहारी जी की आरती’ गाएं।
  • आरती के बाद हाथ जोड़कर जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
  • अंत में सभी सदस्यों में प्रसाद बांटें और अपना व्रत (धनिया पंजीरी व पंचामृत से) खोलें।

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रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी! 7 नई अमृत भारत एक्सप्रेस को मिली मंजूरी, इन शहरों के बीच दौड़ेंगी ट्रेनें

7 new Amrit Bharat Trains: रेलवे बोर्ड ने देश भर में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सात नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को मंजूरी दी है। इन ट्रेनों का मकसद खास तौर पर कम और कम-मध्यम आय वाले ग्रुप के यात्रियों को यात्रा का सस्ता विकल्प देना है। इन सेवाओं को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यात्रा आरामदायक हो और किराया प्रीमियम ट्रेन सेवाओं के मुकाबले कम और आम लोगों की पहुंच में हो।

बता दें कि ये प्रस्तावित ट्रेनें उत्तर, मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के शहरों को आपस में जोड़ेंगी और कई रूट लंबी दूरी तय करेंगे। यहाँ प्रस्तावित सेवाओं और उनके तय स्टॉप की जानकारी दी गई है:

धनबाद-कोयंबटूर अमृत भारत एक्सप्रेस

यह ट्रेन धनबाद से कोयंबटूर के बीच चलेगी और रास्ते में कई प्रमुख शहरों और स्टेशनों पर रुकेगी। इसके प्रस्तावित स्टॉपेज हैं:

धनबाद जंक्शन, NSC बोस जंक्शन गोमो, पारसनाथ, हजारीबाग रोड, कोडरमा, गया, अनुग्रह नारायण रोड, डेहरी ऑन सोन, सासाराम, भभुआ रोड, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, मिर्जापुर, प्रयागराज छिवकी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पिपरिया, इटारसी, बैतूल, नागपुर, चंद्रपुर, बल्लारशाह, सिरपुर कागजनगर, मंचेरियल, पेड्डापल्ली, वारंगल, महबूबाबाद, खम्मम, विजयवाड़ा, ओंगोल, नेल्लोर, गुडूर, रेणिगुंटा, तिरुत्तनी, काटपाड़ी, जोलारपेट्टई, सेलम, इरोड और तिरुप्पुर।

प्रयागराज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस

रेलवे बोर्ड ने प्रयागराज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 20436/20435) को भी मंजूरी दे दी है।

प्रस्तावित साप्ताहिक सेवा प्रयागराज, सतना, जबलपुर, इटारसी, भुसावल और कल्याण में रुकेगी।

प्रयागराज-उधना अमृत भारत एक्सप्रेस

प्रयागराज-उधना अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 20437/20438) को भी साप्ताहिक सेवा के रूप में मंजूरी दी गई है।

यह ट्रेन प्रयागराज, फतेहपुर, गोविंदपुरी, इटावा, टूंडला, ईदगाह आगरा, बयाना, हिंडौन सिटी, गंगापुर सिटी, सवाई माधोपुर, कोटा, रामगंज मंडी, भवानी मंडी, रतलाम, वडोदरा और उधना पर रुकेगी।

सुबेदारगंज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस

रेल मंत्रालय ने सुबेदारगंज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 14121/14122) को मंजूरी दे दी है।

यह ट्रेन सप्ताह में एक बार चलेगी। इसके प्रस्तावित स्टॉपेज सुबेदारगंज, फतेहपुर, गोविंदपुरी, भरुआ सुमेरपुर, रागौल, बांदा, चित्रकूटधाम कर्वी, सतना, मैहर, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पिपरिया, इटारसी, खंडवा, भुसावल, नासिक रोड, कल्याण और ठाणे होंगे।

गोरखपुर-दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस

रेलवे बोर्ड ने गोरखपुर-दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 15095/15096) को भी सप्ताह में एक बार चलाने की मंजूरी दी है।

इसके प्रमुख स्टॉपेज गोरखपुर, खलीलाबाद, बस्ती, गोंडा, बुढ़वल, सीतापुर, बरेली, मुरादाबाद, गाजियाबाद और दिल्ली होंगे।

गोरखपुर-बांद्रा अमृत भारत एक्सप्रेस

एक और साप्ताहिक ट्रेन गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 15085/15086) होगी।

यह ट्रेन गोरखपुर, खलीलाबाद, बस्ती, गोंडा, बादशाहनगर, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, टूंडला, आगरा फोर्ट, बयाना, गंगापुर सिटी, कोटा, भवानी मंडी, शामगढ़, रतलाम, वडोदरा, सूरत, वलसाड, वापी, पालघर, बोरीवली और बांद्रा टर्मिनस पर रुकेगी।

चारलापल्ली-गोरखपुर अमृत भारत एक्सप्रेस

सातवीं मंजूर की गई ट्रेन चारलापल्ली-गोरखपुर अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 22075/22076) है।

इसके प्रस्तावित स्टॉपेज चारलापल्ली, काजीपेट, पेड्डापल्ली, मंचेरियल, बल्लारशाह, चंद्रपुर, नागपुर, बैतूल, इटारसी, भोपाल, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, पोखरायन, कानपुर सेंट्रल, ऐशबाग, लखनऊ सिटी, गोमतीनगर, बाराबंकी, गोंडा और गोरखपुर होंगे।

इन 7 नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों से कई राज्यों के बड़े शहरों और कस्बों के बीच रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। साथ ही, यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए किफायती किराए में एक और विकल्प मिलेगा।

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Rakhi Puja Thali Items: रक्षा बंधन पूजा की थाली में क्यों रखी जाती हैं ये 7 चीजें, जानें क्या हैं ये और इनका महत्व

Rakhi Puja Thali Items: भाई बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षा बंधन कल धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र यानी राखी बांधती हैं। उन्हें तिलक कर आरती उतारती हैं। इस तरह वे अपने भाई पर आने वाले हर खतरे, हर परेशानी से सुरक्षा की कामना करती हैं और उन्हें जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

भाई अपनी बहन की हमेशा देखभाल और सुरक्षा का वचन देते हैं। हर साल सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व कल पूरे जोश और उल्लास के साथ संपन्न होगा। रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले पूजा की थाली को सही तरीके से सजाना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत शुभ माना जाता है।

रक्षाबंधन का मुहूर्त 2026

श्रावण पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ : 27 अगस्त, गुरुवार, सुबह 9:08 बजे से

श्रावण पूर्णिमा तिथि का समापन : 28 अगस्त, शुक्रवार, सुबह 9:48 बजे पर

राखी बांधने का मुहूर्त : सुबह 05:57 बजे से लेकर सुबह 9:48 बजे तक

थाली में ये 7 चीजें जरूर होनी चाहिए

राखी (रक्षासूत्र): भाई की कलाई पर बांधने के लिए राखी थाली की सबसे मुख्य सामग्री है। यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और रक्षा के वचन को दर्शाती है।

दीपक : आरती उतारने के लिए देसी घी या तेल का जलता हुआ दीपक थाली में रखें। भाई की आरती उतारकर उसकी लंबी उम्र और बुरी नजर से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

अक्षत (साबुत चावल): तिलक लगाने के बाद उस पर अक्षत लगाया जाता है। ध्यान रखें कि चावल टूटे हुए न हों। अक्षत अखंड सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है।

रोली या कुमकुम : रक्षाबंधन पर भाई के माथे पर तिलक लगाने के लिए रोली अनिवार्य है। इसे शुभता, विजय और आरोग्य का प्रतीक माना जाता है।

मिठाई : तिलक और आरती के बाद भाई का मुंह मीठा कराने के लिए मिठाई जरूर रखें। इससे रिश्ते में मिठास और स्नेह बना रहता है।

नारियल (श्रीफल): कई परंपराओं में राखी बांधते समय भाई के हाथ में नारियल दिया जाता है। नारियल को सुख-समृद्धि और शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

गंगाजल या थोड़ा पानी : तिलक बनाने (रोली घोलने) के लिए और हाथ धोने के लिए थाली में थोड़ा सा गंगाजल या जल का छोटा पात्र रखें।

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बिहार से गुजरात के लिए एक और ट्रेन, 26 अगस्त से दौड़ेगी नई अमृत भारत एक्सप्रेस, जानिए इसका रूट, स्टॉपेज और टाइमिंग

Ahmedabad-Bhagalpur Amrit Bharat Express: भारतीय रेलवे भागलपुर और अहमदाबाद के बीच एक नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन शुरू करने जा रहा है। इससे बिहार और गुजरात के बीच रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। ईस्टर्न रेलवे के मुताबिक, नई ट्रेन से यात्रियों की बढ़ती मांग पूरी होगी और देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा।

ईस्टर्न रेलवे ने कहा, “भागलपुर को ‘भारत की सिल्क सिटी’ के नाम से जाना जाता है और यह बिहार का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। नई ट्रेन से भागलपुर की गुजरात के बड़े औद्योगिक और आर्थिक केंद्र अहमदाबाद से रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी।”

बता दें कि भारतीय रेलवे ने मौजूदा 09447/09448 अहमदाबाद-पटना-अहमदाबाद क्लोन स्पेशल ट्रेन को अब नियमित ट्रेन के तौर पर चलाने का फैसला किया है। इसे 19423/19424 अहमदाबाद-भागलपुर-अहमदाबाद साप्ताहिक अमृत भारत एक्सप्रेस के रूप में चलाया जाएगा।

कल से शुरू होगी बिहार और अहमदाबाद के बीच ट्रेन

इसका परिचालन अहमदाबाद से 26 अगस्त, 2026 से प्रत्येक बुधवार को तथा भागलपुर से 28 अगस्त, 2026 से प्रत्येक शुक्रवार को किया जायेगा।

इस गाड़ी में LSLRD के 2, पेट्रीकार का 1, जनरल सेकेंड क्लास के 11 तथा स्लीपर क्लास के 08 कोचों सहित कुल 22 कोच लगाये जायेंगे।

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस: दूरी और सफर का समय

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस पूरी यात्रा लगभग 36 घंटे 10 मिनट में तय करेगी। इसमें जनरल अनरिजर्व्ड और स्लीपर क्लास के डिब्बे होंगे। ट्रेन 110 से 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी।

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस: रूट, कितनी बार चलेगी और कहां रुकेगी?

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस हफ्ते में एक दिन चलेगी। रास्ते में यह कई प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी। इनमें आनंद, छायापुरी, गोधरा, दाहोद, रतलाम, भवानी मंडी, रामगंज मंडी, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, हिंडौन सिटी, बयाना, ईदगाह आगरा, टूंडला, गोविंदपुरी, सुबेदारगंज, पं. दीन दयाल उपाध्याय, बक्सर, आरा, दानापुर, पटना, बख्तियारपुर, मोकामा, किऊल, अभयपुर, जमालपुर और सुल्तानगंज शामिल हैं।

गाड़ी नंबर 19423 अहमदाबाद-भागलपुर अमृत भारत एक्सप्रेस का शेड्यूल

ट्रेन नंबर 19423 अहमदाबाद-भागलपुर वीकली अमृत भारत एक्सप्रेस 26 अगस्त, 2026 से हर बुधवार शाम 6:30 बजे अहमदाबाद से रवाना होगी और यह गुरूवार को 21.13 बजे डीडीयू, 22.30 बजे बक्सर, 23.15 बजे आरा, 23.50 बजे दानापुर, शुक्रवार को 00.43 बजे पटना स्टेशन, 01.25 बजे बख्तियारपुर, 02.08 बजे मोकामा, 03.30 बजे किउल, 04.01 बजे अभयपुर, 04.30 बजे जमालपुर, 05.13 बजे सुलतानगंज रूकते हुए 06.40 बजे भागलपुर पहुंचेगी।

गाड़ी नंबर 19424 भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस का शेड्यूल

वापसी की दिशा में, ट्रेन नंबर 19424 भागलपुर-अहमदाबाद वीकली अमृत भारत एक्सप्रेस 28 अगस्त, 2026 से हर शुक्रवार शाम 4:45 बजे भागलपुर से रवाना होगी और यह 17.03 बजे सुलतानगंज, 17.48 बजे 18.13 बजे अभयपुर, 19.15 बजे किउल, 19.56 बजे मोकामा, 20.30 बजे बख्तियारपुर, 21.58 बजे पटना स्टेशन 22.21 बजे दानापुर, 22.53 बजे आरा, 23.41 बजे बक्सर, शनिवार को 02.53 बजे डीडीयू सहित अन्य स्टेशनों पर रूकते हुए रविवार को 05.25 बजे अहमदाबाद पहुंचेगी।

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Amrit Bharat Express: अहमदाबाद-भागलपुर ‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ जल्द शुरू होगी, जानें- रूट, स्टॉपेज और पूरा टाइम टेबल

Amrit Bharat Express: गुजरात और बिहार के बीच रेल यात्रियों के लिए बड़ी गुड न्यूज है। भारतीय रेलवे जल्द ही अहमदाबाद-भागलपुर नई अमृत भारत एक्सप्रेस की नियमित सेवा शुरू करने जा रहा है। इस ट्रेन के शुरू होने से गुजरात के प्रमुख औद्योगिक शहर अहमदाबाद और बिहार के महत्वपूर्ण कारोबारी केंद्र भागलपुर के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। भागलपुर को अपनी रेशम उद्योग की पहचान के कारण ‘सिल्क सिटी ऑफ इंडिया’ भी कहा जाता है।

‘हिंदुस्तान’ की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे ने मौजूदा 09447/09448 अहमदाबाद-पटना-अहमदाबाद स्पेशल ट्रेन को नियमित करने का फैसला किया है। इसे अब 19423/19424 अहमदाबाद-भागलपुर-अहमदाबाद विकली अमृत भारत एक्सप्रेस के रूप में चलाया जाएगा। यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे के इस फैसले से गुजरात और बिहार के बीच सफर करने वाले लोगों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

21 अगस्त से शुरू होगी टिकट बुकिंग

इस ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग 21 अगस्त से शुरू होगी। टिकट रेलवे के पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटर के साथ-साथ IRCTC की वेबसाइट के माध्यम से भी बुक किए जा सकेंगे। ट्रेन सप्ताह में एक दिन अहमदाबाद से भागलपुर और एक दिन भागलपुर से अहमदाबाद के लिए चलेगी।

अहमदाबाद से भागलपुर का पूरा शेड्यूल

ट्रेन नंबर 19423 अहमदाबाद-भागलपुर अमृत भारत एक्सप्रेस की नियमित सेवा 26 अगस्त से शुरू होगी। रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक ट्रेन की परिचालन गति करीब 110 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहेगी।

अहमदाबाद से रवाना होने का टाइम: हर बुधवार शाम 6:30 बजे

भागलपुर पहुंचने का समय: शुक्रवार सुबह 6:40 बजे

कुल यात्रा समय: करीब 36 घंटे 10 मिनट

भागलपुर से अहमदाबाद वापसी का समय

वापसी में ट्रेन नंबर 19424 भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस भागलपुर से हर शुक्रवार शाम 4:45 बजे रवाना होगी। इसकी नियमित सेवा 28 अगस्त से शुरू होगी। ट्रेन रविवार सुबह करीब 5:25 बजे अहमदाबाद पहुंचेगी। यानी भागलपुर से अहमदाबाद पहुंचने में लगभग 36 घंटे 40 मिनट का समय लगेगा।

किन-किन स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन?

अहमदाबाद-भागलपुर अमृत भारत एक्सप्रेस गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई महत्वपूर्ण शहरों और रेलवे जंक्शनों से होकर गुजरेगी। इस रूट के जरिए गुजरात और बिहार के अलावा रास्ते में पड़ने वाले कई बड़े शहरों और महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शनों को भी सीधा रेल संपर्क मिलेगा।

इसके प्रमुख स्टॉपेज इस प्रकार हैं:-

अहमदाबाद-आनंद -छायापुरी-गोधरा- दाहोद-रतलाम -कोटा – सवाई माधोपुर – गंगापुर सिटी – आगरा – टूंडला -गोविंदपुरी – प्रयागराज – पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन – बक्सर -आरा – दानापुर -पटना -मोकामा – किऊल- जमालपुर – सुल्तानगंज -भागलपुर।

ट्रेन में होंगे कई तरह के कोच

अहमदाबाद-भागलपुर अमृत भारत एक्सप्रेस में यात्रियों की जरूरत के अनुसार जनरल, बिना रिजर्वेशन वाला कोच और स्लीपर क्लास के कोच उपलब्ध होंगे। इससे अलग-अलग बजट में यात्रा करने वाले यात्रियों को विकल्प मिल सकेंगे।

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गुजरात-बिहार के यात्रियों को क्या होगा फायदा?

अहमदाबाद और भागलपुर के बीच सीधी साप्ताहिक ट्रेन शुरू होने से दोनों राज्यों के यात्रियों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है। गुजरात में बड़ी संख्या में बिहार और पूर्वी भारत से जुड़े लोग काम और कारोबार के लिए रहते हैं। वहीं, बिहार से गुजरात आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह ट्रेन एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराएगी।

Vande Mataram: ‘सोनिया गांधी को जनता माफ नहीं करेगी’; अमित शाह ने कांग्रेस पर लगाया ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने का आरोप, बंकिम चंद्र के वंशज भी नाराज

Vande Mataram Row: कांग्रेस पर राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने का आरोप लगाते हुये केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मांग की है कि विपक्षी दल इसके लिए देश की जनता एवं गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर आत्मा से माफी मांगे। शाह ने रविवार (16 अगस्त) को आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने वोट बैंक की लालच में कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम’ को भुला दिया। शाह चित्तौड़गढ़ में ‘अटल गौरव स्मृति समारोह’ में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे।

शनिवार को दिल्ली के लालकिले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि इस समारोह में इस साल एक बड़ा बदलाव यह था कि आजादी के 80 साल के बाद लाल किले की प्राचीर पर और देश भर में जहां ध्वज वंदन हुआ वहां पर वंदे मातरम का गायन 80 साल में पहली बार हुआ है।

‘कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया’

अमित शाह ने आरोप लगाते हुए कहा, “कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया है।” उन्होंने कहा, “बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की वह अमर कृति, एक गान के दो शब्द वंदेमातरम… भारत माता की मैं वंदना करता हूं.. यह बोलते-बोलते हजारों लाखों लोग फांसी के फंदे पर चढ़ गए थे, गोलियां खाई थीं, लाठियां खाईं, कई साल जेल में रहे।”

शाह ने आगे कहा, “वोट बैंक की लालच में कांग्रेस ने वंदे मातरम को बुला दिया था।” उन्होंने कहा कि यह 150वां साल है वंदेमातरम के प्राकट्य का… लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने वंदेमातरम् को फिर से एक नया आयुष्य देने का काम किया है।

सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष को वंदे मातरम रोकने की बात कही?

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “इनकी (कांग्रेस) निर्लज्जता देखिए। कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय पर वंदे मातरम का गान हो रहा था। चालू गान में कांग्रेस की नेत्री, सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष को गान रोकने की बात कही। हम सब टी.वी. पर देखते रह गए। 80 साल के बाद बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का ये अमर गान, जब फिर से सम्मान प्राप्त कर रहा है, वो भी सोनिया गांधी को रास नहीं आता है। सोनिया जी, 140 करोड़ जनता आपको देख रही है।”

शाह ने कहा, “आपके द्वारा किया गया ये पाप इस देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। कोई स्वप्न में भी कैसे सोच सकता है कि वंदे मातरम का गान अधूरा छोड़ दिया जाए? कांग्रेस के लोगों को शर्म आनी चाहिए और थोड़ी भी शर्म बची है तो दोनों हाथ जोड़कर बंकिम बाबू और देश की जनता से उन्हें माफी मांगनी चाहिए।”

बंकिम चंद्र के वंशज नाराज

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी से मांग की है कि वह स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में हुई ‘वंदे मातरम’ के गायन से जुड़ी कथित घटना को लेकर बिना शर्त माफी मांगें। चटर्जी ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर असहजता नजर आई।से रोकने के बार-बार प्रयास किए गए। चटर्जी ने गांधी को लिखे पत्र में कहा कि 15 अगस्त को जब देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब हुई कथित घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि एक ऐतिहासिक भूल का शर्मनाक दोहराव भी है।

नैहाटी से विधायक चटर्जी ने कहा कि वह एक सामान्य नागरिक, देशभक्त और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज के रूप में यह पत्र लिख रहे हैं। उन्होंने इस घटना को लेकर गहरा दुख, खालीपन और आक्रोश व्यक्त किया। चटर्जी ने श्री अरविंद के इस कथन का उल्लेख किया कि इस मंत्र ने राष्ट्र को देशभक्ति के धर्म की दीक्षा दी थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की धरती पर ‘वंदे मातरम’ को पूरा गाने में कथित हिचक खुदीराम बोस जैसे शहीदों के बलिदान का अपमान है।

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरला देवी चौधरानी ने 1905 में कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में इसे गाया था। बाल गंगाधर तिलक के समर्थकों ने 1909 में उन पर राजद्रोह के मुकदमे के दौरान इसका गायन किया था। हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में राष्ट्रवादी छात्रों ने 1938 में निजाम की पाबंदियों के बावजूद इसे अपने आंदोलन का नारा बनाया था।

‘जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुक गई थी कांग्रेस’

चटर्जी ने 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा इस गीत की प्रस्तुति का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की कथित दोहरी नीति नई नहीं है। चटर्जी ने कहा कि 1937 में पार्टी मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुक गई थी और उसी वर्ष अक्टूबर में गीत को छोटा कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि उस ‘‘समझौते’’ की छाया पार्टी के मौजूदा आचरण में फिर दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की अपनी छात्र इकाई छात्र परिषद जब मंत्र मोदेर संजीवन-वंदे मातरम नारे का इस्तेमाल करती है तो फिर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसी गीत को लेकर असहज क्यों है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि देश की सामूहिक स्मृति, बंकिम चंद्र की अमर विरासत और शहीदों के खून एवं बलिदान से प्राप्त पवित्र राष्ट्रीय प्रतीक है।

चटर्जी ने कहा कि इस गीत का सम्मान करना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का सम्मान करने के समान है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इतिहास किसी को माफ नहीं करता। जो नेतृत्व स्वतंत्रता के अपने ही मंत्र का सम्मान नहीं करता, उसे इतिहास गुमनामी के अंधकार में धकेल देगा। चटर्जी ने कहा कि इस घटना से पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने गांधी से पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना किसी शर्त के माफी मांगने की अपील की है।

क्या है पूरा विवाद?

BJP ने दावा किया है कि कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने पर सोनिया गांधी समेत पार्टी के कुछ नेताओं ने आपत्ति जताई थी। 15 अगस्त को कांग्रेस के कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आया है जिसमें जब ‘वंदे मातरम’ बजाया जा रहा था, तब सोनिया गांधी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से बात कर रही थीं। इसके बाद गांधी और खड़गे को कथित तौर पर गाना रोकने का इशारा करते हुए देखा जा सकता है।

हालांकि, कांग्रेस ने इस बात से इनकार किया कि ‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण को गाने से रोकने की कोई कोशिश की गई थी। पार्टी ने कहा कि गांधी सिर्फ़ खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं। पिछले महीने संसद ने एक विधेयक पारित किया था जिसमें राष्ट्रगीत के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान किया गया है। कानून में ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा दिया गया है।

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Meerut Viral Video: सामान डिलीवरी में 5 मिनट की हुई देरी तो भड़क गया शख्स, फ्लैट में बंद कर एजेंट की पिटाई

मेरठ के एक अपार्टमेंट में ऑर्डर पहुंचाने में सिर्फ पांच मिनट की देरी को लेकर ब्लिंकइट के डिलीवरी एजेंट और एक दंपति के बीच विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि डिलीवरी एजेंट के साथ मारपीट की गई। घटना के सीसीटीवी फुटेज में डिलीवरी एजेंट को खींचकर फ्लैट के अंदर ले जाते और उसके साथ मारपीट करते हुए देखा जा सकता है।

मेरठ की है घटना

यह घटना 14 अगस्त की रात करीब 9:30 बजे मेरठ के भावनपुर थाना क्षेत्र के गंगानगर स्थित गंगा हाइट्स अपार्टमेंट में हुई। जानकारी के मुताबिक, अमित नाम का डिलीवरी एजेंट ऑर्डर पहुंचाने के लिए अपार्टमेंट आया था। इसी दौरान एक व्यक्ति ने उसे रोक लिया। दोनों के बीच पहले बहस हुई और देखते ही देखते विवाद बढ़ गया। आरोप है कि उस व्यक्ति ने अमित का मोबाइल फोन छीन लिया और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी।

CCTV वीडियो आया सामने 

सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रहा है कि आरोपी व्यक्ति डिलीवरी एजेंट को फ्लैट के अंदर ले जाने से पहले उसे थप्पड़ मारता और लात मारता है। अमित इस दौरान अपना मोबाइल फोन वापस मांगता हुआ भी नजर आता है, लेकिन आरोप है कि व्यक्ति ने उसका फोन लौटाने से इनकार कर दिया। घटना के दौरान एक महिला भी फ्लैट से बाहर आती हुई दिखाई देती है। फुटेज में मारपीट जारी रहती है और डिलीवरी एजेंट परिसर के अंदर ही मौजूद रहता है।

आरोपी दंपति के खिलाफ FIR दर्ज

घटना का सीसीटीवी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस को मामले की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने घटना में शामिल लोगों की पहचान की और डिलीवरी एजेंट की शिकायत दर्ज की। सदर देहात के क्षेत्राधिकारी सुधीर सिंह ने बताया कि डिलीवरी एजेंट की लिखित शिकायत और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि ऑर्डर पहुंचाने में करीब पांच मिनट की देरी को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि इसी वजह से डिलीवरी एजेंट के साथ मारपीट की गई।