Stock Market Fall: सेंसेक्स 332 अंक गिरकर बंद; लगातार 5वें दिन लाल, निवेशकों के ₹91511 करोड़ स्वाहा

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार, 24 जुलाई को लगातार 5वें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। दिन में सेंसेक्स ने 917 अंकों की तगड़ी मार झेली और 75,474.43 के लो तक चला गया। निफ्टी भी 263 अंक तक टूटकर 23,606.30 के लो तक गया। हालांकि बाद में रिकवरी हुई। सेंसेक्स 331.62 अंकों की गिरावट के साथ 76,059.77 पर और निफ्टी 102.15 अंकों की गिरावट के साथ 23,767.45 पर बंद हुआ।

इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 91,510.68 करोड़ रुपये घट गया। गुरुवार, 23 जुलाई को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,76,60,985.926 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह घटकर 4,75,69,475.24 करोड़ रुपये हो गया।

NSE पर एचसीएल टेक्नोलोजिज, सिप्ला, विप्रो, आईटीसी, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी टॉप गेनर्स रहे। वहीं इटर्नल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, बजाज ऑटो टॉप लूजर्स रहे।

एक दिन पहले कैसी रही थी चाल

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में उछाल से गुरुवार को सेंसेक्स 363.66 अंक या 0.47 प्रतिशत टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ था। निफ्टी 126.65 अंक या 0.53 प्रतिशत टूटकर 23,869.60 अंक पर बंद हुआ था।

Hindustan Zinc Q1 Results: मुनाफा 145% बढ़ा, रेवेन्यू 77% की बढ़ोतरी के साथ अब तक के सबसे हाई लेवल पर

रुपये की चाल

शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 96.51 पर पहुंच गया। बाद में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे मजबूत होकर 96.55 (अस्थायी) पर बंद हुआ। खबरों के मुताबिक, इसमें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की संभावित दखलंदाजी का भी हाथ रहा, जिसके जरिए कच्चे तेल की कीमत में उछाल के बीच रुपये में और गिरावट को रोकने की कोशिश की गई। इसके अलावा कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी घरेलू करेंसी को कुछ सहारा दिया। रुपया गुरुवार को 20 पैसे की गिरावट के साथ 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 6 प्रतिशत लुढ़क गया। जापान का निक्केई 225, चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी गिरावट में हैं। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

50MP कैमरा के साथ iQOO का नया 5G फोन लॉन्च, 6500mAh बैटरी और 44W फास्ट चार्जिंग से होगा लैस

अगर आप कम कीमत में एक स्मार्टफोन लेना चाहते हैं तो, iQOO ने भारत में आधिकारिक तौर पर iQOO Z11 Lite 5G लॉन्च कर दिया है। Vivo के इस सब-ब्रांड ने अपने इस नए फोन में MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर, 6500mAh की बैटरी और 120Hz डिस्प्ले दिया है। साथ ही इंट्रोडक्टरी ऑफर्स के साथ इसकी शुरुआती कीमत 18,000 रुपये से कम रखी है। अब आइए iQOO Z11 Lite 5G के फीचर्स, स्पेसिफिकेशन्स और कीमत के बारे में डिटेल में जानते हैं।

iQOO Z11 Lite के स्पेसिफिकेशन्स

चीन की स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी iQOO ने Z11 Lite में 6.74-इंच का HD+ IPS LCD डिस्प्ले दिया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 1,200 निट्स तक की हाई ब्राइटनेस के साथ आएगा। स्क्रीन में सेल्फी कैमरे के लिए वॉटरड्रॉप नॉच है, और फोन की मोटाई 8.4mm है और वजन 209 ग्राम है।

यह हैंडसेट MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट पर चलता है, जिसमें LPDDR4X RAM और UFS 2.2 स्टोरेज दिया गया है। iQOO के अनुसार, AnTuTu बेंचमार्क पर इस फोन का स्कोर 5,79,000 से ज्यादा है।

सॉफ्टवेयर की बात करें तो, यह डिवाइस Android 16 पर आधारित OriginOS 6 के साथ आता है। चीनी टेक कंपनी ने इस फोन में दो साल के Android OS अपग्रेड और चार साल के सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा किया है। इसके अलावा, इसमें AI फीचर्स भी शामिल हैं, जैसे AI क्रिएशन, AI कैप्शन्स और Google Gemini इंटीग्रेशन।

पावर देखें तो, Z11 Lite में 44W फासस्ट चार्जिंग के साथ 6500mAh की बैटरी दी गई है। iQOO का कहना है कि सिर्फ 10 मिनट की चार्जिंग से 8 घंटे तक कॉलिंग या 7 घंटे से ज्यादा समय तक ऑनलाइन वीडियो देखा जा सकता है। यह फोन वायर्ड रिवर्स चार्जिंग और बायपास चार्जिंग को भी सपोर्ट करता है।

कैमरे की बात करें तो, इस फोन के रियर में 50MP का Sony मेन कैमरा और एक सेकेंडरी सेंसर है, जबकि सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 5MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है।

इस डिवाइस में धूल और पानी की छींटों से बचाव के लिए IP65 रेटिंग के साथ-साथ मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी और SGS 5-स्टार ड्रॉप रेजिस्टेंस सर्टिफिकेशन भी मिलता है।

भारत में iQOO Z11 Lite की कीमत, रंग और उपलब्धता

iQOO Z11 Lite 5G के 4GB + 128GB वेरिएंट की शुरुआती कीमत ₹19,499 है, जबकि 6GB + 128GB मॉडल की कीमत ₹21,499 और 6GB + 256GB वर्शन की कीमत ₹24,499 है। वहीं, 1,500 रुपये के एलिजिबल बैंक ऑफर के साथ, इस फोन की शुरुआती कीमत घटकर ₹17,999 हो जाती है।

यह स्मार्टफोन 30 जुलाई से Amazon, iQOO इंडिया की वेबसाइट और अधिकृत रिटेल स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इच्छुक ग्राहक Solar Flame और Midnight Blue के कलर ऑप्शन में इसे चुन सकते हैं।

यह भी पढ़ें: ₹35,000 के बजट में खरीदें ये 8 धांसू गेमिंग स्मार्टफोन्स, BGMI से लेकर हाई-एंड गेम्स तक चलेंगे स्मूद

Market Mantra : AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन महंगे,कैपिटल मार्केट शेयरों में आगे दिखेगी अच्छी तेजी – कैलाश कुलकर्णी

Market Mantra : इस समय बाजार एक दोराहे पर खड़ा है। कच्चा तेल है जिसने बाजार की सांस फूला रखी है। वहीं अबतक आए नतीजे हैं मिलेजुले होने के बाद कमेंट्री के फ्रंट पर अच्छे हैं। IT,बैंक और कंज्यूमर कंपनियां सब आगे की अच्छी राह की बात कर रही हैं। ऐसे में निवेशक कंफ्यूज है कि निवेश को लेकर आगे क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं। इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं। HSBC MF के CEO कैलाश कुलकर्णी (Kailash Kulkarni)।

कैलाश कुलकर्णी की राय

कैलाश कुलकर्णी का कहना है कि जियोपॉलिटिकल हालात के चलते बाजार में काफी ज्यादा अनिश्चितता है। पिछले कुछ सालों में भारतीय निवेशक मैच्योर हुए हैं। इसके चलते भारतीय निवेशकों की तरफ से पैनिक बिकवाली नहीं हुई है। निवेशकों अभी वेट एंड वॉच मोड में ही रहना चाहिए। भारतीय इकोनॉमी के हालात काफी बेहतर है।

डाइवर्सिफाइड इंडेक्स में बना पैसा

उन्होंने आगे कहा कि निवेशकों का पैसा डाइवर्सिफाइड इंडेक्स में बना है। निवेशक लार्जकैप की बजाय मिडकैप और स्मॉलकैप में पैसे डाल रहे हैं। फ्लैक्सीकैप कैटेगरी में काफी निवेश आ रहा है। मिडकैप की तरफ निवेशकों का रुझान बढ़ा है। इनमें रिटर्न भी अच्छे मिले हैं।

मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटाइजेशन थीम ज्यादा चल रही है। कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी थीम भी अच्छी चल रही है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के चलते आगे एक्सपोर्ट सेक्टर भी चल सकता है। PLI और चीन+1 के चलते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा होगा। देश के 8-10 राज्यों में मैन्युफैक्चरिंग हो रही है।

AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन ज्यादा

कैलाश कुलकर्णी ने आगे कहा कि AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन महंगे दिख रहे हैं। IT कंपनियों पर अंडरवेट नजरिया है। BFSI फंड में कैपिटल मार्केट शेयरों पर फोकस है। कैपिटल मार्केट शेयरों में आगे अच्छी तेजी दिखेगी। फार्मा शेयरों पर वेट एंड वॉच का नजरिया है।

Market Mantra : कैलाश कुलकर्णी के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटाइजेशन थीम ज्यादा चल रही है। कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी थीम भी अच्छी चल रही है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के चलते आगे एक्सपोर्ट सेक्टर भी चल सकता है

 

Top Stock Picks : बाजार में वेट एंड वॉच मोड में रहें, किसी गिरावट में इन फार्मा और डिफेंस शेयरों में करें खरीदारी

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ब्रेकअप के बाद एक्स को मनाने के लिए 3 लाख तक खर्च कर लव कोच हायर कर रहीं लड़कियां, ये तो नया ही ट्रेंड!

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में कई महिलाएं अपने एक्स-बॉयफ्रेंड को वापस पाने के लिए “रिलेशनशिप कोच” पर लाखों डॉलर खर्च कर रही हैं। एक मामले में, 28 साल की एक महिला ने अपने बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप के बाद एक महीने के कोचिंग प्रोग्राम के लिए 3,500 युआन ($500) दिए।

हालांकि उसने अपने कोच की सलाह को पूरी तरह से माना, लेकिन उसके एक्स-बॉयफ्रेंड ने उसे सभी मैसेजिंग ऐप्स पर ब्लॉक कर दिया। जब उसने कंपनी से उनके 90% सक्सेस रेट के दावे के बारे में पूछा, तो स्टाफ ने बस उसे “ज़्यादा अनुभवी” मेंटर वाला 9,800 युआन ($1,400) का पैकेज खरीदने के लिए दबाव डाला।

एक और मामले में, एक महिला ने एक ऐसे प्रोग्राम पर 20,000 युआन ($2,800) खर्च किए, जिसे “सम्मान के साथ सुलह” करने में मदद के लिए बनाया गया था। इसका मकसद अपने पूर्व पति को इस तरह से बहलाना-फुसलाना था कि वह खुद ही उसे वापस बुलाने के लिए कहे, ताकि दोस्तों के सामने उसकी इज़्ज़त पर कोई आंच न आए।

रिलेशनशिप एक्सपर्ट और मनोवैज्ञानिक इस इंडस्ट्री के बढ़ने की वजह लोगों की इमोशनल वीकनेस और भारी सामाजिक दबाव को मानते हैं, क्योंकि कई पारंपरिक परिवेशों में महिला की अहमियत और खुशी उसके रिश्ते या वैवाहिक स्थिति से जुड़ी होती है। अकेले रह जाने का डर बहुत ज़्यादा बेचैनी पैदा करता है।

इसके अलावा, गहरे इमोशनल दर्द से जूझ रहे लोग अक्सर असली थेरेपी के बजाय जल्दी और आसानी से पूरे होने वाले वादों को चुनते हैं, जबकि थेरेपी में समय और भावनात्मक मेहनत लगती है। आलोचकों ने चिंता जताई है, क्योंकि चीन में कंज्यूमर प्रोटेक्शन प्लेटफॉर्म्स को डेटिंग और कोचिंग सेवाओं के खिलाफ 3,000 से ज़्यादा औपचारिक शिकायतें मिली हैं। इनमें झूठे और गुमराह करने वाले विज्ञापनों और कोचों के पास असली प्रोफेशनल योग्यता न होने जैसी गंभीर बातें शामिल हैं।

भारी आर्थिक और भावनात्मक जोखिमों के बावजूद, मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स एक छोटा सा सकारात्मक बदलाव देख रहे हैं। ज़्यादा महिलाएं अब खराब रिश्तों को जबरदस्ती चलाने के बजाय उनसे बाहर निकल रही हैं और ब्रेकअप का इस्तेमाल खुद के विकास और लंबे समय की व्यक्तिगत खुशी के लिए कर रही हैं।

बिना कदम थकाए जन्नत का करें दीदार, जहां हिमालय पर गाड़ी से पहुंच सकते हैं आप!

अगर आप पहाड़ों (mountain) की खूबसूरती का आनंद लेना चाहते हैं, लेकिन लंबी ट्रेकिंग (trekking) और मुश्किल रास्तों से बचना चाहते हैं, तो हिमालय गांव (Himalayan village) आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकते हैं। यहां आप सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचकर ऊंचे पहाड़, ठंडी हवा, शांत माहौल और अनछुई प्राकृतिक खूबसूरती का भरपूर आनंद ले सकते हैं:

Zuluk village (जुलुक गांव का शांत और खूबसूरत नजारा)

Full view of Zuluk Village from top of Silk Route Sikkim 21616058 Stock Photo at Vecteezy

सिक्किम (Sikkim) का जुलुक गांव समुद्र तल से करीब 9,400 फीट की ऊंचाई पर है। भारत-चीन (India-China) बॉर्डर के पास बसे इस गांव तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। यहां की घुमावदार सड़कें, बादलों से घिरी पहाड़ियां और शांत वातावरण इसे ऑफबीट ट्रैवल (offbeat travel) पसंद करने वालों के लिए खास बनाते हैं।

Silk Route (सिल्क रूट का यूनिक एक्सपीरियंस)

Kalimpong to Zuluk Cycling adventure with cycling in India

जुलुक (Zuluk) सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक ओल्ड सिल्क रूट (Old Silk Route) का हिस्सा होने के कारण भी मशहूर है। यहां आने वाले टूरिस्ट शानदार व्यू पॉइंट्स (viewpoint) के साथ-साथ इस ऐट्रेड रुट की झलक भी देख सकते हैं। भीड़भाड़ से दूर सुकून भरी छुट्टियां (holiday) बिताने के लिए यह शानदार जगह है।

Nako Village (नाको गांव में मिलेगा हिमालय का अलग रूप)

Nako Village, Himachal Pradesh Stock Image - Image of autumn, background: 202877089

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के किन्नौर जिले में नाको गांव लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई पर बसा है। स्पीति घाटी के नजदीक यह गांव अपनी बौद्ध संस्कृति, शांत माहौल और खूबसूरत पहाड़ी नजारों के लिए जाना जाता है। यहां पहुंचते ही बदलता प्राकृतिक दृश्य ट्रैवलर को अलग ही एक्सपीरियंस देता है।

adventure and tranquility (एडवेंचर और सुकून का परफेक्ट कॉम्बिनेशन)

Nako Lake reflection in Kinnaur, Himachal

नाको (Nako) की खासियत इसकी अनछुई प्राकृतिक खूबसूरती और शांत वातावरण है। यहां भूरे पहाड़, साफ आसमान, ठंडी हवा और लोकल कल्चर मिलकर ऐसा एक्सपीरियंस देते हैं, जो शहर की भागदौड़ से पूरी तरह अलग होता है। अगर आप ऑफबीट ट्रिप (offbeat trip), नेचर और फोटोग्राफी (photography) के शौकीन हैं, तो जुलुक और नाको दोनों गांव आपकी ट्रैवल लिस्ट (travel list) में जरूर होने चाहिए।

IRCTC का ये है धमाकेदार पैकेज, जहां पहाड़ों में और प्रकृति में बिताएं सुख भरे पल!

क्या आप भी भीड़भाड़, ट्रैफिक और रोजमर्रा की भागदौड़ से कुछ दिनों की राहत चाहते हैं, तो नॉर्थ-ईस्ट (North-East) की वादियां (valleys) आपका इंतजार कर रही हैं। ऊंचे पहाड़, हरियाली, शांत माहौल और प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर यह क्षेत्र सुकून भरी छुट्टियां बिताने के लिए बेहतरीन माना जाता है। ऐसे में IRCTC ने ट्रैवलर के लिए एक खास फ्लाइट टूर पैकेज (flight tour package) लॉन्च किया है, जिससे इस खूबसूरत सफर की प्लानिंग करना और भी आसान हो गया है:

 

 

इन जगहों को करें एक्सप्लोर

IRCTC के अरुणोदय अरुणाचल (Arunoday Arunachal) फ्लाइट टूर पैकेज (flight tour package) में आपको असम (Assam) और अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) की कई खूबसूरत जगहें घूमने का मौका मिलेगा। इस जर्नी के दौरान प्रकृति, संस्कृति और पहाड़ों का शानदार संगम देखने को मिलेगा।

 

Tawang (तवांग): बर्फ से ढके पहाड़, विशाल बौद्ध मठ और मनमोहक नजारों की वजह से तवांग नॉर्थ-ईस्ट के सबसे पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन में गिना जाता है।Tawang Wallpapers - Wallpaper Cave

Tezpur (तेजपुर): ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra River) के किनारे बसा यह शहर अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, शांत माहौल और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है।90+ Tezpur Assam Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock

Dirang (दिरांग): अरुणाचल प्रदेश की खूबसूरत घाटियों में बसा यह छोटा-सा शहर हरियाली, ठंडे मौसम और शांत वातावरण के लिए मशहूर है।170+ Dirang Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock

Guwahati (गुवाहाटी): असम की राजधानी और नॉर्थ-ईस्ट का प्रमुख शहर, जहां से इस यादगार सफर की शुरुआत होगी।Guwahati | India, Map, History, & Facts | Britannica

इस टूर पैकेज को क्यों बनाएं अपनी पसंद?

अगर आप छुट्टियों (holiday) में सुकून, प्राकृतिक खूबसूरती और रोमांच तीनों का मजा लेना चाहते हैं, तो यह टूर पैकेज बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है।

अनछुई नेचुरल ब्यूटी: हरियाली, झरने, साफ हवा और शांत माहौल आपको शहर की भागदौड़ से दूर पूरी तरह तरोताजा कर देंगे।Assam Wallpapers - Top Free Assam Backgrounds - WallpaperAccess

 

हिमालय (Himalayan) के शानदार नजारे: बर्फ से ढकी चोटियां, गहरी घाटियां और बादलों से घिरे पहाड़ इस सफर को और भी यादगार बना देंगे।

Story pin image

 

प्राचीन बौद्ध मठों का एक्सपीरियंस: तवांग (Tawang) और आसपास के प्रसिद्ध मठों में आपको आध्यात्मिक माहौल और शांति का यूनिक एक्सपीरियंस मिलेगा।

This may contain: a river running through a lush green hillside next to tall yellow buildings with red roofs

 

रोमांच से भरपूर पहाड़ी रास्ते: घुमावदार पहाड़ी सड़कें और ऊंचे दर्रे एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए खास अट्रैक्शन होंगे।This may contain: an empty road surrounded by trees and mountains in the distance with fog rolling over them

कितना होगा खर्च?

This may contain: a city on top of a hill covered in clouds

IRCTC के ‘अरुणोदय अरुणाचल’ फ्लाइट टूर पैकेज की शुरुआती कीमत ₹53,500 प्रति व्यक्ति रखी गई है। इस पैकेज में ट्रैवल से जुड़ी कई सुविधाएं शामिल हैं, जिससे आपको अलग-अलग बुकिंग (booking) की चिंता नहीं करनी पड़ती। अगर आप नॉर्थ-ईस्ट की खूबसूरत वादियों में यादगार छुट्टियां (holiday) बिताना चाहते हैं, तो यह पैकेज (package) एक शानदार ऑप्शन साबित हो सकता है।

साइन होते ही अटक गई अमेरिका-सऊदी की न्यूक्लियर डील:ट्रम्प ने 24 घंटे में नई शर्त जोड़ी, बोले- इजराइल से रिश्ते सामान्य करे सऊदी

अमेरिका और सऊदी अरब के बीच करीब दो दशक से अटके परमाणु समझौते पर बुधवार को हस्ताक्षर हुए, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही यह डील अटक गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौते में नई शर्त जोड़ दी है। उन्होंने कहा कि डील तभी आगे बढ़ेगी, जब सऊदी अरब अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होकर इजराइल से राजनयिक रिश्ते सामान्य करेगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) की अनुमति नहीं मिलेगी। बिना बताए डील की घोषणा से ट्रम्प नाराज वॉशिंगटन में हुए हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट शामिल हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प इस बात से नाराज थे कि राइट ने उनकी मंजूरी के बिना समझौते की घोषणा कर दी। इसके बाद फॉक्स न्यूज और वॉल स्ट्रीट जर्नल में हुई आलोचना से उनकी नाराजगी और बढ़ गई। रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस ने ऊर्जा विभाग से समझौते की घोषणा टालने को कहा था, लेकिन विभाग ने हस्ताक्षर समारोह भी किया और मीडिया में इसकी जानकारी भी दी। हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि अब्राहम अकॉर्ड्स की शर्त शुरू से ही ट्रम्प की नीति का हिस्सा थी। वहीं ऊर्जा विभाग ने किसी भी मतभेद से इनकार किया। ट्रम्प की नई शर्त ने सऊदी को भी चौंकाया CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प की घोषणा से सऊदी अरब भी हैरान रह गया। समझौते के मसौदे में कुछ शर्तें पूरी होने पर सऊदी अरब को अपनी जमीन पर यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिलने की बात थी, लेकिन ट्रम्प ने इसे सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया। दोनों देशों ने करीब दो दशक पहले परमाणु ऊर्जा सहयोग की पहल की थी। पिछले साल अक्टूबर में प्रारंभिक सहमति बनी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध और कांग्रेस की संभावित आपत्तियों के कारण समझौता महीनों तक अटका रहा। पिछले सप्ताह ऊर्जा विभाग को लगा कि ट्रम्प की मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद इसकी घोषणा कर दी गई। परमाणु एक्सपर्ट्स ने यूरेनियम संवर्धन की अनुमति और IAEA के अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल की गैरमौजूदगी पर चिंता जताई। वहीं समर्थकों का तर्क था कि अगर अमेरिका पीछे हटता है तो चीन या रूस सऊदी अरब में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत कर सकते हैं। आखिर अब्राहम अकॉर्ड्स है क्या, जिसे लेकर डील अटक गई? दरअसल, अब्राहम अकॉर्ड्स 2020 में अमेरिका की पहल पर हुआ ऐसा समझौता है, जिसके तहत कुछ अरब देशों ने पहली बार इजराइल के साथ अपने रिश्ते सामान्य किए। यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान इसके तहत इजराइल से जुड़ चुके हैं। अब अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब भी इसी समझौते का हिस्सा बने। ट्रम्प का मानना है कि अगर सऊदी इजराइल से रिश्ते सामान्य करता है, तो पश्चिम एशिया में अमेरिका का रणनीतिक गठजोड़ और मजबूत होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाइडेन प्रशासन भी सऊदी परमाणु समझौते को इजराइल से रिश्ते सामान्य करने से जोड़कर आगे बढ़ा रहा था। हालांकि 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले और गाजा युद्ध के बाद यह प्रक्रिया रुक गई। सऊदी का कहना है कि फिलिस्तीन के लिए अलग राज्य का रास्ता साफ हुए बिना वह इजराइल से आधिकारिक रिश्ते नहीं बनाएगा। यही वजह है कि अब न्यूक्लियर डील भी इस शर्त पर अटक गई है। ट्रम्प ने यूरेनियम एनरिचमेंट पर इनकार क्यों किया परमाणु बिजलीघर चलाने के लिए यूरेनियम को एक खास स्तर तक एनरिच (संवर्धित) किया जाता है। लेकिन यही तकनीक अगर बहुत अधिक स्तर तक पहुंच जाए, तो उसी यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में भी किया जा सकता है। इसलिए यूरेनियम एनरिचमेंट को दुनिया की सबसे संवेदनशील परमाणु तकनीकों में माना जाता है। यही वजह है कि अमेरिका आमतौर पर किसी भी देश को अपनी जमीन पर यूरेनियम एनरिचमेंट की अनुमति देने से बचता है। उसे आशंका रहती है कि भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल सैन्य कार्यक्रम के लिए भी हो सकता है। सऊदी अरब को लेकर भी यही चिंता है, इसलिए ट्रम्प ने साफ कर दिया कि न्यूक्लियर डील होगी, लेकिन यूरेनियम एनरिचमेंट की इजाजत नहीं मिलेगी। ——————— अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौते से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ईरान जंग के बीच अमेरिका का सऊदी से परमाणु समझौता:इजराइल के विरोध के बावजूद ट्रम्प की मंजूरी; एक्सपर्ट बोले- परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ेगा सऊदी अरब ने बुधवार को अमेरिका के साथ एक अहम परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके तहत अमेरिका, सऊदी अरब को असैन्य (बिजली बनाने के लिए) परमाणु तकनीक देगा। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध और तनाव का माहौल है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अमेरिका ने भारत पर 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया:जबरन मजदूरी से बने सामान को लेकर कार्रवाई, 60 देशों पर एक्शन

अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला शुक्रवार से लागू हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से बने सामान के आयात को लेकर 60 देशों पर कार्रवाई की है। अमेरिका ने इन देशों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है। वहीं बाकी 43 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है। अमेरिका ने यह कार्रवाई ट्रेड एक्ट-1974 की धारा 301 के तहत की है। भारत के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, मेक्सिको, पाकिस्तान और श्रीलंका समेत कई देशों को 10% टैरिफ वाले समूह में रखा गया है। अमेरिका का कहना है कि इन देशों ने फोर्स्ड लेबर से बने सामान पर प्रतिबंध लगाया है या ऐसा करने की दिशा में कदम उठाए हैं। सेक्शन 301 क्या है, जिसके तहत अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाया सेक्शन 301 अमेरिका के ट्रेड एक्ट-1974 का एक प्रावधान है। इसके तहत अमेरिकी सरकार को यह अधिकार मिलता है कि अगर किसी देश की व्यापारिक नीतियां अमेरिकी कारोबार या उद्योगों के लिए अनुचित, भेदभावपूर्ण या नुकसानदायक मानी जाएं, तो वह उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इस कार्रवाई में अतिरिक्त टैरिफ लगाना, आयात पर प्रतिबंध लगाना या दूसरे व्यापारिक प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं। जांच की जिम्मेदारी अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की होती है। जांच के दौरान संबंधित देश से जवाब मांगा जाता है और जरूरत पड़ने पर बातचीत भी की जाती है। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति की मंजूरी से कार्रवाई लागू होती है। भारत के किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। ऐसे में अतिरिक्त 10% टैरिफ से उन सेक्टरों पर ज्यादा असर पड़ सकता है, जिनकी अमेरिकी बाजार पर निर्भरता अधिक है। इनमें टेक्सटाइल और गारमेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर उत्पाद, कृषि एवं फूड प्रोडक्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स और कुछ मैन्युफैक्चरिंग आइटम शामिल हैं। अतिरिक्त टैरिफ लगने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे। इससे खरीदार दूसरे देशों के विकल्प तलाश सकते हैं या भारतीय निर्यातकों पर कीमत घटाने का दबाव बढ़ सकता है। इसका असर ऑर्डर, मुनाफे और प्रतिस्पर्धा पर पड़ने की आशंका है। फोर्स्ड लेबर क्या है, जिस पर अमेरिका सख्ती कर रहा है फोर्स्ड लेबर का मतलब ऐसी मजदूरी से है, जिसमें किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के खिलाफ काम कराया जाए। इसमें धमकी, कर्ज, हिंसा, दस्तावेज जब्त करना, वेतन रोकना या नौकरी छोड़ने की आजादी न देना जैसी परिस्थितियां शामिल होती हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानता है। अमेरिका का कहना है कि अगर किसी देश से आयात होने वाला सामान फोर्स्ड लेबर से जुड़ा पाया जाता है, तो उस पर अतिरिक्त टैरिफ या आयात प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसका उद्देश्य कंपनियों पर दबाव बनाना है कि उनकी सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी का इस्तेमाल न हो। पहले भी कई देशों और उद्योगों पर हो चुकी है कार्रवाई अमेरिका पिछले कुछ वर्षों में फोर्स्ड लेबर के मुद्दे पर कई देशों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। खासतौर पर चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले कॉटन, टमाटर, सोलर पैनल और उनसे जुड़े उत्पादों पर कड़े आयात प्रतिबंध लगाए गए थे। इसके अलावा समुद्री खाद्य, पाम ऑयल, रबर, कोको, टेक्सटाइल और खनन जैसे उद्योग भी अमेरिकी जांच के दायरे में रहे हैं। भारत को कैसे मिली राहत अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक शुरुआत में भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। हालांकि श्रम मानकों पर अमेरिका के साथ हुई बातचीत और भारत की ओर से किए गए नीति बदलाव के बाद इसे घटाकर 10% कर दिया गया। फेडरल नोट में कहा गया है कि जून में प्रस्तावित टैरिफ घोषित होने के बाद भारत ने 14 जून को अपनी विदेशी व्यापार नीति में संशोधन किया। इसके तहत फोर्स्ड लेबर से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया। इसी बदलाव को टैरिफ तय करते समय ध्यान में रखा गया।

Gift Nifty Indictor: बाजार पर हावी हो सकते है मंदड़िए, गिफ्ट निफ्टी 200 अंक नीचे, जानें आज निफ्टी-बैंक निफ्टी के लिए कौन से लेवल होंगे अहम

Gift Nifty Indictor: भारतीय बाजार आज 24, जुलाई को एक और कमजोर सेशन के लिए तैयार हैं। गिफ्ट निफ्टी पर ग्लोबल इक्विटी में बिकवाली और तेल की कीमतों में तेज गिरावट का असर देखने को मिल रहा है। निफ्टी 50 की परफॉर्मेंस का शुरुआती इंडिकेटर,  गिफ्ट निफ्टी  सुबह 8 बजे 23,656.50 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज 23,873.60 से 205 पॉइंट्स नीचे है।

बता दें कि गुरुवार को, बेंचमार्क में लगातार चौथे सेशन में गिरावट जारी रही, जो 6 जून के बाद से उनकी सबसे लंबी गिरावट का सिलसिला था, क्योंकि ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतों ने सेंटिमेंट पर असर डाला। निफ्टी 50 126.65 पॉइंट्स या 0.53% गिरकर 23,869.60 पर आ गया, जबकि सेंसेक्स 363.66 पॉइंट्स या 0.47% गिरकर 76,391.39 पर आ गया।

शुक्रवार को एशियाई मार्केट भी नीचे ट्रेड कर रहे थे, पिछले सेशन से हो रही गिरावट जारी रही क्योंकि तेल की ज़्यादा कीमतों और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में बिकवाली के एक और दौर ने महंगाई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से चलने वाले इन्वेस्टमेंट के आउटलुक को लेकर चिंता बढ़ा दी। जापान का निक्केई 225 2.46 परसेंट गिरा, साउथ कोरिया का कोस्पी 3.04 परसेंट गिरा, ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 0.57 परसेंट गिरा और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.01 परसेंट फिसला।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच तेल की कीमतों में तेज़ी आने से गुरुवार को U.S. इक्विटीज़ तेज़ी से नीचे बंद हुईं, जबकि इन्वेस्टर्स दुनिया की दो सबसे बड़ी कंपनियों की तिमाही कमाई का अंदाज़ा लगा रहे थे। अल्फाबेट के नतीजों ने बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस खर्च को लेकर चिंता बढ़ा दी।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 506.93 पॉइंट्स या 0.97 परसेंट गिरकर 51,711.65 पर आ गया। S&P 500 1.21 परसेंट गिरकर 7,408.30 पर आ गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 2.15 परसेंट गिरकर 25,137.69 पर आ गया। टेक्नोलॉजी-हैवी इंडेक्स पर अल्फाबेट में 7 परसेंट और टेस्ला में 14 परसेंट की गिरावट का असर पड़ा, जो उनकी अर्निंग्स रिपोर्ट के बाद आई।

रेड सी में टैंकरों पर हूथी हमलों के बाद मिडिल ईस्ट संघर्ष में एक नया मोर्चा खुलने के बाद ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड कर रहा था, जबकि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले बढ़ाने की धमकी दी थी। ग्लोबल बेंचमार्क गुरुवार को दो महीने में पहली बार $100 के निशान से ऊपर चढ़ गया और इस हफ्ते इसमें लगभग 14 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट $92 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था।

ट्रंप ने रेड सी में जहाजों पर और हमले होने पर ईरान और हूथी दोनों के लिए “बड़ी मिलिट्री सज़ा” की चेतावनी दी और एक्सियोस को बताया कि वह ईरान पर “बड़े हमले” पर विचार कर रहे हैं।

तेल बाज़ार रूस के ब्लैक सी कोस्ट पर कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम टर्मिनल पर हुए हमलों से भी जूझ रहा है, जो कज़ाकिस्तान का ज़्यादातर क्रूड एक्सपोर्ट करता है। मिडिल ईस्ट में महीनों से चल रहे संघर्ष के कारण ग्लोबल इन्वेंटरी कम हो गई है, जिससे सप्लाई कम होने और बड़े पैमाने पर आर्थिक झटके का खतरा बढ़ गया है।

इस महीने तेल की कीमतों में तेज़ी आई है क्योंकि फ़ारस की खाड़ी में US और ईरान के बीच दुश्मनी बढ़ गई है, जिससे होर्मुज़ स्ट्रेट से ट्रैफ़िक में रुकावट आई है और क्रूड ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस के फ्लो पर असर पड़ा है। रेड सी में ईरान-समर्थित हूथी मिलिटेंट्स द्वारा सऊदी अरब के टैंकरों पर पहले हमलों ने पूरे इलाके में सप्लाई में बड़े पैमाने पर रुकावटों को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।

निफ्टी- बैंक निफ्टी के लिए क्या होगा आज आउटलुक 

आज बैंक निफ्टी के आउटलुक पर बात करते हुए एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि  बैंक निफ्टी के नेगेटिव बायस के साथ ट्रेड करने की उम्मीद है, जिससे हाल के सेशन में देखी गई लगातार कमजोरी और बढ़ेगी। इंडेक्स अपने मुख्य रेजिस्टेंस लेवल से नीचे बना हुआ है और अपने 200-दिन के EMA (56,495) से थोड़ा ऊपर बना हुआ है, जिससे पता चलता है कि बेयर्स शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पर मजबूती से कंट्रोल में हैं। टेक्निकल नजरिए से, 56,800–56,900 ज़ोन तुरंत रेजिस्टेंस है, इसके बाद 57,200–57,300 ज़ोन और ऊपर है।

नीचे की तरफ, 56,400–56,300 ज़ोन तुरंत सपोर्ट बना हुआ है, जो पिछले सेशन में मजबूत बना हुआ था। इस लेवल से नीचे एक बड़ा ब्रेक सेलिंग प्रेशर बढ़ सकता है और इंडेक्स 56,000–55,800 सपोर्ट ज़ोन की ओर खिंच सकता है। कुल मिलाकर, शॉर्ट-टर्म टेक्निकल आउटलुक बेयरिश बना हुआ है, इंडेक्स के शॉर्ट-टर्म टेक्निकल स्ट्रक्चर में काफ़ी सुधार लाने और मोमेंटम को बुल्स के पक्ष में करने के लिए 57,000 मार्क से ऊपर लगातार मूव जरूरी होगा।

पीएल कैपिटल के हेड एडवाइजरी विक्रम कासट ने कहा, “तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर चढ़ने और जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने के कारण बाज़ार फिर से साफ़ तौर पर रिस्क-ऑफ मोड में आ गए हैं। मज़बूत कॉर्पोरेट फंडामेंटल्स पर सख्त फाइनेंशियल हालात और बढ़ते रिस्क से बचने की प्रवृत्ति का असर पड़ सकता है। निफ्टी के लिए, 23,600 एक मुख्य सपोर्ट लेवल बना हुआ है, जबकि 24,000 तुरंत रेजिस्टेंस है।”

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा:भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात करेंगे; 3 महीने में ही फैसले से पलटे

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) पहली बार अपने बनाए नियम से हटकर विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने तय किया था कि वह किसी भी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बालेन शाह भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। इसे नेपाल की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह अपने दोनों सबसे बड़े पड़ोसियों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखना चाहता है। एक ही दिन दोनों देशों के राजदूतों के साथ मीटिंग बालेन शाह नहीं चाहते थे कि भारत या चीन में से किसी को यह लगे कि दूसरे देश को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने दोनों देशों के राजदूतों से एक ही दिन अलग-अलग मुलाकात करने का फैसला किया है। दोनों बैठकें एक के बाद एक होंगी, ताकि दोनों देशों के साथ समान व्यवहार का मैसेज जाए। नेपाल सरकार ने पुष्टि की है कि भारत और चीन के राजदूतों के साथ अलग-अलग बैठकें इसी सप्ताह होंगी। हालांकि, दोनों बैठकों की सटीक तारीख अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। नेपाल का विदेश मंत्रालय इन बैठकों की अंतिम तैयारियों में जुटा है। बालेन शाह के पीएम बनने से पहले का नियम क्या था? नेपाल में नई सरकार बनने पर खासकर भारत, चीन और अमेरिका जैसे प्रभावशाली देशों के राजदूत सीधे प्रधानमंत्री के निजी आवास पर जाकर अलग-अलग मुलाकात करते थे। इन बैठकों में विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद नहीं होते थे और न ही इनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड रखा जाता था। नेपाल में लंबे समय से यह परंपरा रही थी कि बड़े देशों के राजदूत जब चाहें प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर लेते थे। इन मुलाकातों का मकसद अक्सर द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने से ज्यादा व्यक्तिगत संपर्क मजबूत करना माना जाता था। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हितों का टकराव पैदा होता था और नेपाल के राष्ट्रीय हित प्रभावित होते थे। पीएम बनने के बाद बालेन शाह ने क्या बदलाव किए बालेन शाह ने तय किया कि वह किसी भी विदेशी राजदूत या प्रतिनिधि से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। इसके लिए उन्होंने एक अलग ‘रैंक प्रोटोकॉल’ बनाया था। नए नियम के मुताबिक, वह सिर्फ किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष/प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री स्तर के अधिकारी से ही अकेले व्यक्तिगत बैठक करेंगे। निचले स्तर के अधिकारियों, राजदूतों या उप-मंत्रियों से वे अकेले मिलने के बजाय विदेश मंत्रालय के माध्यम से या फिर ग्रुप मीटिंग के जरिए ही मिलेंगे। उनका मानना था कि विदेश नीति व्यक्तिगत मुलाकातों के बजाय सरकार और विदेश मंत्रालय के तय ढांचे के तहत चलनी चाहिए। उनका मानना था कि कई शक्तिशाली देश सरकारी व्यवस्था को दरकिनार कर सीधे नेपाल के टॉप नेताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश करते रहे हैं। इस फैसले के चलते बालने शाह ने कई बड़े विदेशी प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत मुलाकात करने से इनकार कर दिया। कई विदेशी अधिकारियों से नहीं मिले बालेन भारत- बालेन शाह ने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मिलने से इनकार कर दिया। मिस्री प्रधानमंत्री मोदी की ओर से बालेन शाह को भारत आने का औपचारिक न्योता देने काठमांडू आने वाले थे, लेकिन प्रधानमंत्री से मुलाकात का समय नहीं मिलने के कारण उनका प्रस्तावित दौरा रद्द हो गया। इससे भारत में नाराजगी भी देखी गई। अमेरिका- बालेन ने अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर और विशेष दूत सर्जियो गोर को भी अलग से मिलने का समय नहीं दिया। गोर नेपाल आने से पहले भूटान के प्रधानमंत्री और राजा तथा श्रीलंका के राष्ट्रपति से मुलाकात कर चुके थे। चीन- बालेन ने चीन के उप वाणिज्य मंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता यान डोंग से भी मुलाकात नहीं की। वह इसी महीने व्यापार और निवेश से जुड़े उच्चस्तरीय दौरे पर नेपाल आए थे। नोट- हालांकि इन घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। ये सभी घटनाओं की जानकारी रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दी गई हैं। बालेन शाह को अपना फैसला क्यों बदलना पड़ा बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर थे, तब उन्होंने खुद को पारंपरिक नेताओं से अलग दिखाया था। इसी सोच के तहत उन्होंने नियम बनाया था कि वह किसी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद हालात बदल गए हैं। अब उन्हें समझ आ गया है कि सिर्फ अलग छवि बनाना काफी नहीं है। देश चलाने के लिए पड़ोसी देशों के साथ सीधे बातचीत भी जरूरी होती है। इसी वजह से उन्होंने पहली बार अपना पुराना नियम तोड़ा है। भारत और चीन, दोनों नेपाल के सबसे अहम पड़ोसी हैं। ऐसे में दोनों देशों के साथ सीधा संपर्क बनाए रखना उनकी सरकार की जरूरत बन गया है। नेपाल के लिए भारत और चीन दोनों क्यों जरूरी हैं? नेपाल की विदेश नीति हमेशा से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने पर आधारित रही है। भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है, जिससे लाखों नेपाली नागरिक काम, व्यापार और पढ़ाई के लिए आसानी से भारत आते-जाते हैं। दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ पड़ोसी होने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से भी जुड़े हैं। दूसरी ओर, चीन ने पिछले कुछ वर्षों में नेपाल में सड़क, रेल, ऊर्जा और दूसरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इसलिए नेपाल के लिए चीन भी एक अहम आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बन गया है। यही वजह है कि काठमांडू किसी एक देश के करीब दिखने के बजाय भारत और चीन, दोनों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखने की कोशिश करता है।