दक्षिण कोरिया का बाजार 11% क्रैश, सिर्फ इन दो शेयरों ने निकाली कोस्पी की हवा

बीते एक महीने में कोरिया के शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई है। बाजार के प्रमुख सूचकांक इस दौरान 28 फीसदी से ज्यादा गिरा है। 28 जुलाई को कोस्पी करीब 11 फीसदी फिसला। इसमें चिप बनाने वाली दो कंपनियों के शेयरों का बड़ा हाथ है। हालांकि, इस गिरावट के बावजूद दक्षिण कोरिया का बाजार दुनिया में बीते एक साल में सबसे ज्यादा चढ़ने वाला बाजार है।

SK Hynix का शेयर एक महीने में 41 फीसदी क्रैश

दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार बीते एक साल में करीब 88 फीसदी चढ़ा है। बीते एक महीने से दक्षिण कोरिया के बाजार पर बिकवाली का दबाव है। सबसे ज्यादा गिरावट SK Hynix और Samsung Electronics के शेयरों में दिखी है। 28 जुलाई को SK Hynix का शेयर 14 फीसदी से ज्यादा क्रैश कर गया। बीते एक महीने में यह शेयर 41 फीसदी गिरा है।

सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का शेयर एक महीने में 32 फीसदी फिसला

Samsung Electronics का शेयर 28 जुलाई को 13.39 फीसदी क्रैश कर गया। बीते एक महीने में यह शेयर करीब 32 फीसदी गिरा है। इन दोनों शेयरों में आई गिरावट ने दक्षिण कोरिया के बाजार को आसमान से जमीन पर ला पटका है। इन दोनों शेयरों ने ही दक्षिण कोरिया के बाजार को बीते एक साल में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला शेयर बाजार बनाया था।

एसके हायनिक्स का शेयर एक साल में 491% चढ़ा

SK Hynix और Samsung Electronics चिप बनाती हैं। बीते एक-डेढ़ साल में दुनियाभर में चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में ग्लोबल इनवेस्टर्स ने खूब दिलचस्पी दिखाई थी। इससे एस के हायनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों की कीमतें आसमान में पहुंच गई थी। हालिया गिरावट के बावूजद इन दोनों कंपनियों के शेयरों का रिटर्न हैरान करता है। एसके हायनिक्स का शेयर बीते एक साल में 491 फीसदी चढ़ा है। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का शेयर इस दौरान 212 फीसदी चढ़ा है।

चीन में CXMT की जोरदार लिस्टिंग ने बढ़ाया दबाव 

कोस्पी में इन दोनों कंपनियों का वेटेज करीब 60 फीसदी है। अब चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी घट रही है। इसका असर एसके हायनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों पर दिख रहा है। उधर, चीन से आने वाली खबरों ने इन दोनों शेयरों पर दबाव और बढ़ा दिया है। चीन की ChangXin Memory Technologies (CXMT) के शेयर की लिस्टिंग धमाकेदार रही।

चीन की चिप बनाने की क्षमता बढ़ने से बढ़ा डर

CXMT का शेयर पहले ही दिन अपने इश्यू प्राइस से 466 फीसदी चढ़ गया। दूसरा, खबर है कि चीन की एक सरकारी कंपनी ने इमर्सन DUV लिथोग्राफी इक्विपमेंट का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर दिया है। इससे माना जा रहा है कि चीन की चिप बनाने की क्षमता बहुत बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर दक्षिण कोरिया में चिप बनाने वाली कंपनियों पर पड़ेगा। इस वजह से एसके हायनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रिॉनिक्स के शेयरों में बड़ी बिकवाली दिख रही है।

OnePlus N6x की लॉन्च डेट कन्फर्म! 7000mAh बैटरी और 50MP कैमरा के साथ करेगा एंट्री, जानें कीमत और फीचर्स

OnePlus N6x: इस महीने की शुरुआत में OnePlus N6 लॉन्च करने के बाद, OnePlus अब ज्यादा किफायती OnePlus N6x को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। यह हैंडसेट पहले ही ऑफिशियल टीजर में दिखाई देने लगा है, जिसमें चीनी स्मार्टफोन मेकर ने इसकी लॉन्च डेट, कलर ऑप्शन और कुछ खास फीचर्स की पुष्टि की है। आने वाले OnePlus N6x के बारे में अनुमानित कीमत, स्पेसिफिकेशन्स और उपलब्धता जानने के लिए आगे पढ़ें।

OnePlus N6x स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स (अनुमानित)

ऑफिशियल टीजर से पता चलता है कि OnePlus N6x में पिल-शेप वाले कैमरा मॉड्यूल के साथ एक फ्लैट रियर पैनल होगा, जो हाल ही में आए Nord-सीरीज के स्मार्टफोन के डिजाइन जैसा ही है। इस हैंडसेट में 3.5mm हेडफोन जैक भी होगा, जबकि पावर और वॉल्यूम बटन दाईं ओर दिए गए हैं।

इस स्मार्टफोन में 120Hz रिफ्रेश रेट वाला 6.67-इंच का HD+ LCD डिस्प्ले होने की उम्मीद है। लीक्स के अनुसार, चीनी टेक कंपनी इस डिवाइस में MediaTek Dimensity 6000-सीरीज का चिपसेट और Android 16 पर आधारित OxygenOS 16 दे सकती है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक प्रोसेसर के बारे में आधिकारिक तौर पर जानकारी नहीं दी है।

कैमरे की बात करें तो, OnePlus N6x में 50MP का रियर कैमरा मिलने की उम्मीद है। जबकि, सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 8MP का फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है।

बता दें कि OnePlus ने पहले ही कन्फर्म कर दिया है कि हैंडसेट में 7000mAh की बैटरी मिलेगी और दावा किया है कि यह एक बार चार्ज करने पर 2.5 दिन तक चल सकती है। कंपनी के अनुसार, यह बैटरी 20.56 घंटे का वीडियो प्लेबैक, 133.56 घंटे का म्यूजिक प्लेबैक, 25.04 घंटे का सोशल मीडिया इस्तेमाल या 11.26 घंटे की वीडियो रिकॉर्डिंग दे सकती है।

OnePlus N6x की लॉन्च डेट, अनुमानित कीमत और उपलब्धता

चीन की टेक कंपनी ने कन्फर्म किया है कि OnePlus N6x भारत में 31 जुलाई को दोपहर 12 बजे (IST) लॉन्च होगा। लॉन्च होने के बाद, यह हैंडसेट Amazon India और OnePlus India के ऑनलाइन स्टोर पर उपलब्ध होगा। खरीदने के इच्छुक लोगों को दो कलर ऑप्शन भी मिलेंगे: बरगंडी रेड और आइस ब्लू।

हालांकि, कीमत के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक OnePlus N6x की कीमत लगभग 20,000 रुपये हो सकती है, जिससे यह OnePlus N6 के मुकाबले सस्ता होगा। तुलना के लिए, N6 को भारत में 4GB + 128GB वेरिएंट के लिए 22,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था, जबकि 6GB + 128GB मॉडल को 24,999 रुपये में लॉन्च किया गया था।

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EXPLAINER: गलवान के 6 साल बाद फिर खुलेगा नाथू ला दर्रा, भारत-चीन की कूटनीति में क्यों बेहद खास है ‘सिल्क रूट’ की यह खिड़की?

India China Nathu La Trade Explainer: भारत और चीन के रिश्तों का मिजाज समझना हो, तो हिमालय की 14,000 फीट की ऊंचाई पर जमे बर्फ से ढके नाथू ला दर्रे की ओर रुख करना काफी होगा। गलवान घाटी के खूनी संघर्ष और कोविड-19 की मार के चलते पिछले 6 वर्षों से ठप पड़ा सीमा व्यापार 1 अगस्त 2026 से एक बार फिर पटरी पर लौटने जा रहा है।

अगस्त 2025 में दोनों देशों के बीच सिक्किम के नाथू ला, हिमाचल के शिपकी ला और उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से व्यापार बहाली पर सहमति बनी थी। उसी कड़ी में अब नाथू ला के कपाट भी फिर से खोले जा रहे हैं।

सालाना कई अरब डॉलर के भारत-चीन व्यापार के समुद्री कारोबार के आगे नाथू ला से होने वाली खरीद-फरोख्त भले ही ऊंट के मुंह में जीरा लगे, लेकिन भू-राजनीतिक बिसात पर इसका रणनीतिक और कूटनीतिक वजन कहीं ज्यादा है। आइए आपको बताते हैं कि आखिर क्यों नाथू ला सिर्फ एक ट्रेड रूट नहीं, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों का असली थर्मामीटर है?

जब डाक के थैलों से बची रही रिश्तों की सांस

ऐतिहासिक सिल्क रूट की एक अहम कड़ी रहा नाथू ला प्राचीन काल से ही तिब्बत की चुम्बी घाटी को सिक्किम के गंगटोक, कालिम्पोंग और कोलकाता के बंदरगाहों से जोड़ता आया है। 20वीं सदी की शुरुआत में भारत-चीन के कुल जमीनी व्यापार का करीब 80 फीसदी हिस्सा इसी दर्रे के जरिए गुजरता था। 1962 के युद्ध ने इस सदियों पुरानी व्यापारिक डोर को एक झटके में काट दिया और नाथू ला अगले 44 सालों के लिए पूरी तरह सील हो गया।

वैसे युद्ध के बाद भले ही व्यापार और बंदूकें खामोश हो गईं, पर कूटनीतिक धागा नहीं टूटा। हर गुरुवार की सुबह 14,000 फीट की बर्फीली हवाओं के बीच एक भारतीय डाकिया कटीले तारों तक जाता और चीनी डाकिये से डाक का थैला बदलता। बिना एक-दूसरे की बोली समझे, महज 3 मिनट में अंजाम दी जाने वाली यह मूक रस्म दशकों तक दोनों देशों के बीच संपर्क का अकेला जीवित जरिया बनी रही।

2006 का री-ओपनिंग मॉडल: नई सदी में पुराने जमाने का सौदा

साल 2003 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ऐतिहासिक बीजिंग यात्रा के बाद बनी सहमति के आधार पर 6 जुलाई 2006 को नाथू ला को व्यापार के लिए दोबारा खोला गया। उसकी तस्वीरें भले ही भव्य थीं, लेकिन जिस व्यापार की इजाजत दी गई, वह गुजरे जमाने की याद दिलाता था:

चीन की ओर से भारत आने वाली चीजें (15 प्रोडक्ट्स): याक की पूंछ, बकरी-भेड़ की खाल, कच्चा रेशम, ऊन, बोरेक्स, नमक और घोड़े।

भारत से जाने वाला सामान (29 प्रोडक्ट्स): चावल, आटा, चाय, तंबाकू, कंबल और तांबे के बर्तन।

दौर बदल चुका था, लेकिन सामान की लिस्ट 19वीं सदी वाली ही रही। नतीजतन, नाथू ला कभी कोई बड़ा आर्थिक कॉरिडोर नहीं बन सका और सीमित दायरे में ही सिमटकर रह गया।

अरबों डॉलर के कारोबार के आगे कितना बड़ा है नाथू ला?

अगर आप आंकड़ों के चश्मे से देखेंगे, तो नाथू ला का व्यापार दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के लिए शून्य नजर आएगा:

2016 (पीक टाइम): कुल व्यापार रिकॉर्ड ₹82.68 करोड़ तक पहुंचा।

2017 (डोकलाम विवाद): तनातनी का असर सीधा दिखा और व्यापार सिमटकर महज ₹8.86 करोड़ रह गया।

2019 (आखिरी सीजन): महामारी से ठीक पहले यहां ₹43.51 करोड़ की आवाजाही दर्ज हुई।

व्यापारिक घाटे की कड़वी हकीकत

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन के साथ कुल माल व्यापार $151.1 अरब रहा, जिसमें भारत का व्यापार घाटा $100 अरब के पार चला गया। ऐसे में नाथू ला के कुछ करोड़ का कारोबार इस विशाल खाई को नहीं पाट सकता। हां, सिक्किम के उन 600 से अधिक स्थानीय लाइसेंसधारी व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों के लिए यह रोजी-रोटी का मुख्य जरिया जरूर है, जिनका सामान 2020 में अचानक सीमा बंद होने से वहीं फंसा रह गया था।

बॉडर ट्रेड से परे क्यों यह ‘डिप्लोमैटिक इंडिकेटर’ है?

कूटनीतिक विश्लेषकों की मानें तो नाथू ला में माल का आना-जाना उतना मायने नहीं रखता, जितना कि गेट का खुलना और बंद होना। नाथू ला का हालिया इतिहास बताता है कि जब-जब दिल्ली और बीजिंग की दूरी घटी है, यह गेट खुला है और जब भी सरहद पर गोलियों या डंडों की गूंज हुई, ताला सबसे पहले इसी दरवाजे पर लगा।

2020 के गलवान हादसे के बाद रिश्ते सबसे गहरे अविश्वास के दौर में पहुंच गए थे। अब सीधी उड़ानों, वीजा, मानसरोवर यात्रा और नाथू ला व्यापार की एक साथ बहाली इस बात का साफ इशारा है कि दोनों मुल्क अब तनाव को नियंत्रण में रखकर रिश्तों को ‘न्यू नॉर्मल’ की तरफ ले जाना चाहते हैं।

1 अगस्त से नाथू ला का खुल जाना न तो रातों-रात सीमा विवाद सुलझाएगा और न ही चीनी सामान की निर्भरता को खत्म करेगा। लेकिन, वैश्विक भू-राजनीति के इस दौर में यह बहाली दर्शाती है कि दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी संवाद और सह अस्तित्व की टेबल पर बने रहने के इच्छुक हैं। इस बर्फीले दर्रे पर व्यापार की आहट, कूटनीति के मोर्चे पर एक पॉजिटिव संकेत है।

Kospi Crashed: दो स्टॉक्स ने 10% तोड़ दिया कोस्पी, 20 मिनट थम गई ट्रे़डिंग, तीन वजहों से दक्षिण कोरियाई मार्केट में हाहाकार

Kospi Crashed: चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में वैश्विक बिकवाली ने दक्षिण कोरियाई बाजार में कोहराम मचा दिया। टेक स्टॉक्स पर दबाव में दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी (Kospi) इंडेक्स 724.37 प्वाइंट्स यानी 10.73% टूटकर 6,031.38 पर आ गया जिसके कारण 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग भी थम गई। निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली ने सिर्फ दक्षिण कोरियाई बाजार को ही नहीं बल्कि जापान की चिप हैवी निक्केई 225 और ताइवान के Taiex को भी 4% से अधिक तोड़ दिया।

Kospi Crash: ये है वजहें

वैल्यूएशन से जुड़ी चिंताएं

एआई पर खर्च लगातार बना रहेगा या नहीं, इसे लेकर चिंता ने वैश्विक चिप कंपनियों के शेयरों पर दबाव डाला और बिकवाली की आंधी चलने लगी। दिग्गज चिप कंपनी एनवीडिया कॉर्प (Nvidia Corp) के $75 हजार करोड़ के एआई इंफ्रा डील के बाद भी शेयरों में गिरावट ने चिंता बढ़ाई जिसने बिकवाली तेज की। यूनियन बैंकेयर प्रिवी के एमडी Vey-Sern Ling का कहना है कि एआई से जुड़े शेयरों को लेकर लालच अब डर में बदल गया है और किसी भी खबर के असर को देखने की बजाय उसे शेयर बेचने के लिए इस्तेमाल कर रहे।

चीन से तगड़ा कॉम्पटीशन

निवेशक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या एआई निवेश की जबरदस्त लहर और कंपनियों की ऊंची वैल्यूएशन लंबे समय तक बनी रह सकती है, खासकर इसलिए क्योंकि चीन की कंपनियां उम्मीद से अधिक रफ्तार से टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। एएसएमएल होल्डिंग एनवी के शेयरों में जून महीने की शुरुआत के बाद से सबसे बड़ी गिरावट आई। इसमें यह गिरावट एक रिपोर्ट के बाद आई जिसमें ये है कि चीन की सरकारी कंपनी ने कुछ खास चिप बनाने वाली मशीनों का बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू कर दिया है, जिससे डच कंपनी की बिक्री पर असर पड़ सकता है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक के मुताबिक शंघाई की एक कंपनी ने इमर्शन डीप अल्ट्रावायलेट (DUV) लिथोग्राफी टूल्स बनाना शुरू कर दिया है। इसने दुनिया भर की चिप कंपनियों के शेयरों को तोड़ दिया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में चैंगजिन मेमोरी टेक्नोलॉजीज (ChangXin Memory Technologies- CXMT) की मार्केट में धांसू एंट् ने मार्केट सेंटीमेंट को और कमजोर किया है।

बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली

दक्षिण कोरिया की बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में बिकवाली दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क इंडेक्स को तोड़ दिया। मेमोरी-चिप बनाने वाली कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) के शेयर धड़ाम हो गए। इसमें से एसके हीनिक्स के शेयरों में न्यूयॉर्क में इसके ADR (अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स) के टूटकर शुरुआती यूएस ऑफरिंग प्राइस से नीचे रिकॉर्ड निचले स्तर पर आने के चलते 10% की गिरावट आई। वहीं सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर 9.15% फिसल गए। इन दोनों की कोस्पी में हिस्सेदारी आधे से अधिक है, जिससे इस सेक्टर की बिकवाली की आंच पूरे मार्केट पर और भी अधिक दिखा।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Insight : इस बार IT रैली फेल होती नहीं दिख रही, बाजार में अभी भी शानदार स्टॉक स्पेसिफिक मौके

Market Insight : एशियाई बाजारों को देखकर डरने की कोई जरूरत नहीं है। हम कोस्पी के चलने से नहीं चले तो गिरे क्यों? बल्कि कोरिया और नैस्डेक का गिरना हमारे लिए पॉजिटिव होता है। हमारे लिए सबसे बड़ा फैक्टर कच्चा तेल है। वो वहीं है जहां हम कल छोड़कर गए थे,थोड़ा नीचे ही है। FIIs की बिकवाली जरूर थोड़ा सा सेंटीमेंट निगेटिव है। आज बड़ी वाली एक्सपायरी है तो थोड़ी वोलाटिलिटी संभव है। चिप शेयरों में गिरावट भी हमारे लिए एक और पॉजिटिव है। ये कहना है सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल का।

उन्होंने आगे कहा कि बाजार में रिकॉर्ड शॉर्ट्स हैं और हमने रेंज के निचले स्तर बचाए हैं। अगर कल का हाई पार हुआ तो बड़ी वाली कवरिंग संभव है। बाजार में अब वापस पैसा लॉन्ग साइड पर बनने की उम्मीद है। आज हमारे बाजार के पास चलने के लिए सब कुछ है। IT शेयरों में तूफानी तेजी है जो जारी रहनी चाहिए। कल चिप शेयरों में बड़ी गिरावट आई सॉफ्टवेयर शेयरों में बड़ी रैली रही।

चिप शेयरों में फिर बड़ी गिरावट क्यों आई?

AI डील्स को लेकर चिंताओं के बीच Nvidia में 5% की गिरावट देखने को मिली है। Nvidia का कहना है कि 750 अरब डॉलर की नई AI डील्स पर काम चल रहा है। Nvidia के कर्ज को डिफॉल्ट से बचाने की लागत रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ी है। SK Hynix ADR सोमवार को अपने IPO भाव 149 डॉलर से नीचे फिसल गया। चीन की एक सरकारी कंपनी चिप बनाने वाली मशीनें बना रही है। इससे ASML की बिक्री पर खतरा हो सकता है। इस खबर के बाद ASML NV में 6% की गिरावट आई।

बाजार: क्या आज होगी बड़ी रैली?

इसके अलावा बैंकों में भी आज पॉजिटिव संकेत हैं। कच्चे तेल का नीचे आना बैंकों के लिए एल्गो पॉजिटिव है। कल रुपये में भी शानदार तेजी आई थी। हां,बस FIIs की कैश बिकवाली थोड़ा सा निगेटिव फैक्टर है।

बाजार: क्या हो रणनीति?

हमने 23,700 के करीब से शुक्रवार से लॉन्ग का नजरिया लिया था। वहां से 300 अंकों की रैली आ चुकी है। हमारा मानना है कि अब हम वापस रेंज के बीच में हैं। यहां से निचला स्तर 23,800 और ऊपरी स्तर 24,300 है। अगर आपके पास लॉन्ग हैं तो कल के निचले स्तर का SL रखें और अगर कल का हाई पार हो तो लॉन्ग पोजिशंस जोड़ें। ऑप्शन राइटर्स की रेंज है 23,800-24,100 । स्टॉक स्पेसिफिक मौके अभी भी शानदार हैं। आपको चुनिंदा शेयरों पर फोकस करना होगा। सबसे मजबूत पॉकेट अभी भी मिडकैप IT ही है। आज कोफोर्ज के नतीजों पर देखना होगा बाजार कैसे रिएक्ट करता है। इंफोसिस में मल्टी ईयर लो से अच्छी रैली की उम्मीद है। लगभग यही मामला TCS और HCL Tech का भी है।

इस बार IT रैली फेल होती नहीं दिख रही है,ट्रेंडलाइन भी यही दिखा रही है। कच्चे तेल से जुड़े शेयरों में भी अच्छी रैली हो रही है। आज HUL और L&T के नतीजे बाजार के लिए काफी अहम हैं। अगर HUL की वॉल्यूम ग्रोथ ने चौंकाया तो बड़ा पॉजिटिव होगा। L&T के नतीजों पर युद्ध का असर रहेगा,लेकिन कमेंट्री ज्यादा अहम होगी।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी में ऑप्शन राइटर्स की रेंज 23,800-24,100 है। कल का निचला स्तर 23,891 है। कल का हाई 24,012 है। सबसे बड़ा रजिस्टेंस जोन 24,050-24,100 है। 24,100 के ऊपर 24,300 तक बड़ी रैली संभव है। खरीदारी का सबसे अच्छा जोन 23,900-23,950 है। स्टॉप लॉस 23,850 पर रखें।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी में आज की बेसिक रेंज 56,800-57,350 है। खरीदारी का सबसे अच्छा जोन 56,700-56,900 है। इसके लिए 56,500 पर स्टॉप लॉस रखें। बिकवाली का सबसे अच्छा जोन 57,300-57,450 के रिजेक्शन पर है। इसके लिए SL 57,550 पर रखें।

 

Trading Plan: मंथली F&O एक्सपायरी के दिन कंसोलिडेशन जारी रहने की उम्मीद, जानिए निफ्टी-बैंक निफ्टी में क्या हो कमाई की रणनीति

 

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Friendship Day Wishes 2026: फ्रेंडशिप डे पर अपने खास मित्रों को भेजें ये 10 फ्रेंडली शुभकामना मैसेज

An image providing information on sending heartwarming Friendship Day wishes to friends

Friendship Day Quotes: फ्रेंडशिप डे यानी मित्रता दिवस एक ऐसा खास अवसर है, जब हम अपने जीवन में मौजूद उन खास दोस्तों को धन्यवाद देते हैं, जो हर सुख-दुख में हमारा साथ निभाते हैं। दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है, जो बिना किसी स्वार्थ के विश्वास, प्यार, अपनापन और यादों से जुड़ा होता है। बचपन के दोस्तों से लेकर जीवन के हर पड़ाव पर मिलने वाले नए साथियों तक, हर दोस्त हमारी जिंदगी को खास बना देता है।ALSO READ: Essay on Friendship Day: फ्रेंडशिप डे: दोस्ती के अटूट बंधन का खूबसूरत पर्व, पढ़ें हिन्दी में रोचक निबंध

 

फ्रेंडशिप डे 2026 पर लोग अपने दोस्तों को प्यार भरे मैसेज, शुभकामना संदेश, कोट्स और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं।

अगर आप भी अपने खास दोस्त को दिल छू लेने वाला संदेश भेजना चाहते हैं, तो यहां दिए गए फ्रेंडशिप डे विशेज और शुभकामना मैसेज आपके रिश्ते में और मिठास घोल सकते हैं।

 

दिल को छू लेने वाले फ्रेंडशिप डे मैसेज

1. “सच्चे दोस्त वही होते हैं, जो रोने की वजह नहीं,
बल्कि मुस्कुराने की वजह बनते हैं।”
— हैप्पी फ्रेंडशिप डे, मेरे यार!

2. “ना किसी से दुश्मनी, ना किसी से कोई गिला,

मुझे तो किस्मत से दुनिया का सबसे प्यारा दोस्त मिला।”

— दोस्ती दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं!

 

3. “किस्मत वाले हैं वो लोग जिन्हें तुम्हारी जैसी 

निस्वार्थ और सच्ची दोस्ती मिली है।

मेरे जीवन में होने के लिए शुक्रिया!”

— Happy Friendship Day!

 

4. “वक्त बदल सकता है, दुनिया बदल सकती है,

पर हमारी हंसी-मजाक और दोस्ती कभी नहीं बदलेगी।”

— Happy Friendship Day Buddy!

 

5. “दोस्ती कोई शब्द नहीं, यह तो एक अहसास है,

जो हर मुश्किल घड़ी में हमेशा हमारे पास है।”

— फ्रेंडशिप डे मुबारक हो!

 

थ्रिल और मस्ती भरे मैसेजेस 

 

6. “तुझ जैसा पागल दोस्त मिलना भी, 

एक अलग ही किस्मत की बात है,

वरना मेरी फालतू बातें सहने का दम किसी में नहीं था!”

— हैप्पी फ्रेंडशिप डे, मेरे भाई!

 

7. “दोस्ती की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती,

चाहे हम कितने भी बूढ़े हो जाएं, 

हमारी शैतानियां कभी खत्म नहीं होंगी।”

— Happy Friendship Day!

 

8. “चाय में चीनी ना हो तो पीने में मजा नहीं आता,

और जिंदगी में तेरे जैसा दोस्त ना 

हो तो जीने में मजा नहीं आता!”

— फ्रेंडशिप डे की बहुत-बहुत बधाई! 

 

9. “दूरियां चाहे कितनी भी आ जाएं, 

हमारी बॉन्डिंग हमेशा नंबर 1 रहेगी।

तू सिर्फ दोस्त नहीं, मेरी फैमिली का हिस्सा है।”

— Happy Friendship Day, Bestie!

 

10. “ना पैसों की मांग, ना तोहफों की चाह,

बस एक सच्चा दोस्त हो 

जो कहे— 'फिक्र मत कर, मैं हूं ना!'”

— हैप्पी फ्रेंडशिप डे!

 

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श्रावण मास में शाक खाना क्यों है वर्जित?

Image related to information about not consuming green leafy vegetables during the month of Shravan

Why Shak is prohibited in Sawan: सनातन धर्म में श्रावण (सावन) मास भगवान शिव की उपासना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस पूरे महीने भक्त व्रत, पूजा, जप, दान और सात्विक जीवनशैली का पालन करते हैं। सावन के दौरान खान-पान को लेकर भी कई विशेष नियम बताए गए हैं। इन्हीं में से एक है शाक यानी हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन न करना। कई लोग इसे केवल धार्मिक परंपरा मानते हैं, जबकि इसके पीछे धार्मिक, आयुर्वेदिक और व्यावहारिक कारण भी बताए जाते हैं।ALSO READ: Monsoon Health Tips: बारिश में फिट कैसे रहें?

 

श्रावण/ सावन मास में शाक या हरी पत्तेदार सब्जियां खाने से क्यों बचा जाता है? जानें इसके धार्मिक, आयुर्वेदिक, वैज्ञानिक कारण, चातुर्मास के नियम और सही आहार संबंधी जानकारी।

 

चातुर्मास के नियम

बता दें कि हमारे शास्त्रों में अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में आहार संबंधी नियमों में कुछ भिन्नताएं मिलती हैं। इसलिए स्थानीय परंपरा और अपने गुरु या परिवार की परंपरा का पालन करना उचित माना जाता है। श्रावण मास चातुर्मास का हिस्सा होता है। चातुर्मास में ऋषि-मुनि और साधु-संत भी भोजन में संयम रखते थे। इस अवधि में कुछ खाद्य पदार्थों का त्याग करने की परंपरा बनी, जिसमें कई स्थानों पर शाक का भी उल्लेख मिलता है।

 

1. वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य कारण

कीड़े-मकोड़ों और जीवाणुओं यानी बैक्टिरिया (Bacteria) का बढ़ाव:

सावन का महीना बारिश का मौसम यानी मानसून का समय होता है। इस समय हवा में नमी बहुत अधिक होती है, जिसके कारण हरे पत्तों पर छोटे-छोटे सूक्ष्म जीव, कीड़े और उनके अंडे पनपने लगते हैं। कई बार ये इतने बारीक होते हैं कि अच्छे से धोने पर भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाते, जिससे पेट के संक्रमण यानी Infections का खतरा रहता है।

 

पाचन तंत्र का धीमा पड़ना:

मानसून के दौरान वातावरण में बदलाव के कारण हमारा पाचन तंत्र या पाचन अग्नि (Digestive System, Metabolism) मंद हो जाती है। साग में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जिसे पचाने के लिए शरीर को अधिक ऊर्जा लगानी पड़ती है। इस मौसम में साग खाने से गैस, एसिडिटी, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

 

वात दोष में वृद्धि:

आयुर्वेद के अनुसार, वर्षा ऋतु में शरीर में 'वात दोष' प्राकृतिक रूप से बढ़ता है। हरी पत्तेदार सब्जियां वात को और अधिक बढ़ाती हैं, जिससे जोड़ों में दर्द, वायु विकार और पेट की बीमारियां हो सकती हैं।

 

2. धार्मिक एवं आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

पित्त और वात का संतुलन: आयुर्वेद के नियम 'ऋतुचर्या' के अनुसार, सावन के महीने में शरीर को हल्का और सुपाच्य भोजन चाहिए होता है।

 

सात्विकता और व्रत: सावन मास शिव जी की भक्ति और सात्विक जीवन शैली का महीना है। इस दौरान शरीर को शुद्ध रखने के लिए उन चीजों के त्याग का विधान है जो पाचन पर भार डालती हैं या बीमारियों का कारण बन सकती हैं।

प्राचीन समय में आज की तरह सब्जियों को कीटाणुरहित करने के उन्नत साधन नहीं थे। इसलिए हमारे ऋषियों ने स्वास्थ्य सुरक्षा के इस नियम को धर्म और परंपरा से जोड़ दिया ताकि आम लोग मानसून में बीमारियों से सुरक्षित रह सकें।

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योगी सरकार की बड़ी सौगात, 48.79 करोड़ से काशी की तर्ज पर संवरेगा लोधेश्वर महादेव धाम

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  • बाराबंकी का लोधेश्वर महादेव बनेगा हाईटेक तीर्थ, श्रद्धालुओं को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं
  • अगले वर्ष अक्टूबर तक पूरा होगा मेगा प्रोजेक्ट, बनेंगे कवर्ड कॉरिडोर, कमांड सेंटर और मेडिकल सुविधा केंद्र
  • सीएम योगी की पहल से लोधेश्वर धाम में पर्यटन विकास को मिली नई उड़ान

 

बाराबंकी, 26 जुलाई। जिले के प्राचीन लोधेश्वर महादेव मंदिर को शीघ्र ही काशी जैसा भव्य स्वरूप मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत लगभग 48.79 करोड़ रुपये की समेकित पर्यटन विकास परियोजना के तहत मंदिर परिसर में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार तेजी से किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र को और अधिक सुगम बनाएगी, बल्कि पर्यटकों व श्रद्धालुओं के लिए हाईटेक विजिटर फैसिलिटी कॉम्प्लेक्स भी तैयार करेगी। इसके साथ ही यहां कवर्ड कारीडोर भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री ने गत 20 जुलाई को इस परियोजना का शिलान्यास किया है।

 

लोधेश्वर महादेव धाम बाराबंकी का महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है। यहां आधुनिक सुविधाओं के विस्तार से श्रद्धालुओं को आरामदायक प्रवास, सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और बेहतर व्यवस्था मिलेगी। प्रवेश द्वार, कवर्ड कॉरिडोर, क्लॉक रूम, मेडिकल सेंटर और कमांड सेंटर जैसी सुविधाएं परिसर को हाईटेक विजिटर फैसिलिटी कॉम्प्लेक्स का रूप देंगी। लैंडस्केपिंग व दुकानों की व्यवस्था से पर्यटन अनुभव और समृद्ध होगा। कुल 12980 वर्गमीटर क्षेत्र में यह विकास कार्य हो रहा है। इसका निर्माण कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस कर रही है।

 

पुरुषों व महिलाओं के लिए होंगे 26-26 टॉयलेट
 

परियोजना के अंतर्गत 5 प्रवेश द्वार, 2734 वर्गमीटर।का लैंडस्केप एरिया, 3.25 मीटर चौड़ा व 652 रनिंग मीटर लंबा परकोटा कवर्ड कॉरिडोर, 412 वर्गमीटर का क्लॉक रूम, पुरुषों व महिलाओं के लिए 26-26 तथा दिव्यांगजनों के लिए 4 टॉयलेट, पेयजल व्यवस्था, सिक्योरिटी स्टाफ हॉल, 9 दुकानें, सीसीटीवी सिस्टम, कंट्रोल रूम एवं कमांड सेंटर, पेंट्री तथा मेडिकल सेंटर जैसी सुविधाओं का निर्माण शामिल है। इन सुविधाओं से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिलेगी और परिसर आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा।

 

अगले वर्ष अक्टूबर माह तक हो जाएगा तैयार
 

सीएंडडीएस के परियोजना प्रबंधक देवव्रत पवार ने बताया कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अप्रैल 2026 से निर्माण कार्य तेज गति से शुरू हो गया है। वर्तमान में मुख्य भवन का फाउंडेशन और पाइलिंग का कार्य चल रहा है। हम समयबद्ध तरीके से सभी सुविधाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अगले वर्ष अक्टूबर माह तक इसके निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।

 

स्थानीय अर्थव्यवस्था को होगा फायदा: डीएम
 

जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप बाराबंकी के प्राचीन धार्मिक स्थल लोधेश्वर महादेव मंदिर को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। भूमि संबंधी बाधाओं के बावजूद अब कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है। यह परियोजना आस्था और पर्यटन का सुंदर संगम बनाएगी। जिला प्रशासन इस महत्वपूर्ण विकास कार्य की नियमित निगरानी कर रहा है ताकि निर्धारित समय में पूर्ण गुणवत्ता के साथ काम पूरा हो सके। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा और अधिक से अधिक पर्यटक यहां आकर्षित होंगे।

 

मान्यता: महाभारत काल में पांडवों ने यहां किया था महायज्ञ
 

बाराबंकी जिले की रामनगर तहसील के महादेवा गांव में घाघरा नदी के तट पर स्थित लोधेश्वर महादेव मंदिर अत्यंत प्राचीन एवं पवित्र शिव मंदिर है। यहां का शिवलिंग भारत के 52 दुर्लभ शिवलिंगों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने यहां महायज्ञ किया था, जिसका प्रमाण आज भी मौजूद पांडव-कूप है। इस मंदिर का नाम लोधरम नामक ब्राह्मण से जुड़ा है, जिन्होंने स्वप्न में भगवान शिव के आदेश पर शिवलिंग की खोज की। यह मंदिर लोधी राजपूतों का कुलदेवता भी है। चारों युगों में इसकी पूजा का उल्लेख मिलता है। हर वर्ष महाशिवरात्रि पर लाखों भक्त यहां आते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। पौराणिक महत्व, श्रद्धा और चमत्कारों के कारण लोधेश्वर महादेव आस्था का प्रमुख केंद्र है।
 

सब्जी में डालने से पहले फ्रोजन मटर के साथ करें ये काम, हलवाई जैसा आएगा स्वाद!

हरी मटर (Green peas) लगभग हर भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है। विंटर के बाद ज्यादातर लोग फ्रोजन मटर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अगर इसे सही तरीके से तैयार न किया जाए तो इसका स्वाद, रंग और टेक्सचर काफी हद तक खराब हो सकता है। कुछ आसान स्टेप्स (steps) अपनाकर आप फ्रोजन मटर को भी ताजी (fresh) मटर जैसा स्वादिष्ट बना सकते हैं:

 

Check the Peas (मटर चेक करें)

This may contain: green peas in a glass bowl on a black surface with one pea still attached to the bowl

फ्रीजर से मटर निकालने के बाद उसे एक प्लेट में फैलाकर ध्यान से देखें। अगर कोई दाना बदरंग, सिकुड़ा हुआ, बहुत नरम या खराब नजर आए, तो उसे अलग कर दें। इससे पूरी डिश का स्वाद और क्वालिटी बनी रहती है।

 

 

 

Avoid Direct Cooking (सीधे न पकाएं)

This may contain: a white bowl filled with peas and carrots

कई लोग फ्रोजन मटर को सीधे सब्जी या पुलाव में डाल देते हैं, लेकिन यह तरीका सही नहीं है। बहुत ठंडी मटर पकने के दौरान एक्स्ट्रा पानी छोड़ सकती है, जिससे सब्जी का स्वाद, मसालों का संतुलन और टेक्सचर एफेक्ट हो सकता है।

 

 

 

Blanch First (पहले हल्का उबालें)

This may contain: green beans are sitting on a wooden table

एक बर्तन में पानी उबालें और उसमें एक चुटकी नमक व आधा छोटा चम्मच चीनी डालें। अब मटर को केवल 1–2 मिनट तक उबालें और तुरंत छान लें। यह तरीका मटर के प्राकृतिक हरे रंग (natural green color), मिठास और मुलायम बनावट को बनाए रखने में मदद करता है।

 

 

Bring to Room Temperature (रूम टेम्परेचर पर लाएं)

This may contain: peas being cooked in a skillet with wooden spoon

फ्रीजर से निकालने के बाद मटर को 10–15 मिनट तक रूम टेम्परेचर पर रखें। चाहें तो इसके बाद 5–10 मिनट के लिए सादे पानी में भिगो दें। इससे मटर समान रूप से पकती है और डिश में एक्स्ट्रा पानी छोड़ने की संभावना कम हो जाती है।

 

 

 

Drain & Use (पानी निकालकर यूज करें)

This may contain: a wooden spoon filled with green peas on top of a table

उबालने या भिगोने के बाद मटर को छलनी या साफ सूती कपड़े पर फैलाकर अच्छी तरह सुखा लें। जब एक्स्ट्रा पानी निकल जाता है, तो मटर मसालों के साथ बेहतर तरीके से पकती है और सब्जी, पुलाव या दूसरे डिश का टेस्ट ताजी मटर जैसा लगता है।

Commodity Outlook: कच्चे तेल से सोना-चांदी तक, अगले हफ्ते कैसी रहेगी चाल? एक्सपर्ट कायनात चैनवाला से जानिए

Commodity Outlook: पिछला हफ्ता कमोडिटी बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। ऐसे में अगले हफ्ते भी बाजार की नजर भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर रहेगी।

कोटक सिक्योरिटीज की कमोडिटी रिसर्च एक्सपर्ट कायनात चैनवाला के मुताबिक, आने वाले दिनों में कमोडिटी बाजार की दिशा तीन बड़े फैक्टर तय करेंगे। इनमें पश्चिम एशिया का तनाव, अमेरिकी फेड की नीति और वैश्विक सप्लाई की स्थिति सबसे अहम होगी।

कच्चे तेल में क्यों आया उछाल?

पिछले हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10% की तेजी आई। ब्रेंट क्रूड एक समय 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि, हफ्ते के आखिर में मुनाफावसूली से इसमें कुछ गिरावट आई।

कायनात चैनवाला के मुताबिक, इस तेजी की सबसे बड़ी वजह लाल सागर (Red Sea) में बढ़ा तनाव रहा। हूती विद्रोहियों ने दो सऊदी टैंकरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले का दावा किया। इसके बाद कई जहाजों ने अपना रास्ता बदल दिया। दूसरी ओर, ड्रोन हमले के बाद कजाकिस्तान की पाइपलाइन क्षमता भी करीब 80% प्रभावित हुई। इससे सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई।

सोना-चांदी में कैसी रही चाल?

स्पॉट गोल्ड पिछले हफ्ते करीब 1% चढ़कर 4,050 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बंद हुआ। वहीं, चांदी में करीब 4% की तेजी आई और यह 58 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई।

कायनात चैनवाला का कहना है कि सोना-चांदी में आई तेजी की बड़ी वजह नई खरीदारी नहीं, बल्कि गिरावट के बाद हुई खरीदारी (Dip Buying) और शॉर्ट कवरिंग रही। मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड अभी भी इन धातुओं पर दबाव बनाए हुए हैं।

MCX गोल्ड के लिए कौन से स्तर अहम?

MCX गोल्ड पिछले हफ्ते ₹1,43,106 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। बाजार फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है।

कायनात चैनवाला के मुताबिक, ऊपर की ओर ₹1,46,000 पहला रेजिस्टेंस है। इसके बाद ₹1,48,000 अहम स्तर होगा। नीचे की ओर ₹1,41,000 पहला सपोर्ट है। अगर ₹1,39,800 का स्तर टूटता है, तो गिरावट और बढ़ सकती है।

बेस मेटल्स में भी रही मजबूती

कॉपर, एल्युमिनियम, जिंक और लेड में भी पिछले हफ्ते तेजी रही। चीन में कॉपर का स्टॉक घटने और रिफाइंड मेटल्स पर संभावित टैरिफ को लेकर अनिश्चितता की वजह से कॉपर एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया।

फेड की बैठक पर रहेगी नजर

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 28-29 जुलाई की बैठक अगले हफ्ते बाजार के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर होगी।

कायनात चैनवाला का मानना है कि सिर्फ तेल की कीमतों में आई तेजी के आधार पर फेड अगले हफ्ते ब्याज दर बढ़ाने का फैसला शायद ही ले। हालांकि, सितंबर की बैठक को लेकर जोखिम पहले के मुकाबले ज्यादा बना हुआ है।

अगले हफ्ते किन बातों पर रहेगी नजर?

कायनात चैनवाला के मुताबिक, अगले हफ्ते कमोडिटी बाजार की दिशा तीन बातें तय करेंगी। पहली, लाल सागर और पश्चिम एशिया में तनाव का घटनाक्रम।

दूसरी, फेड की बैठक और ब्याज दरों को लेकर उसके संकेत। तीसरी, ईरान की ओर से आने वाले किसी भी कूटनीतिक संकेत। इन तीनों का असर कच्चे तेल, सोना, चांदी और दूसरे कमोडिटी बाजारों की चाल पर साफ दिख सकता है।

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