Xiaomi ने लॉन्च की 7-सीटर इलेक्ट्रिक SUV, Kunlun आर्किटेक्चर पर बनी SkyNomad देगी 505Km तक की रेंज

Xiaomi SkyNomad Series: चीन की टेक और EV निर्माता कंपनी Xiaomi ने इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए अपनी नई SkyNomad Series SUV को लॉन्च कर दिया है। कंपनी की यह पहली Extended-Range Electric Vehicle (EREV) सीरीज है, जिसे नए Kunlun Architecture प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है। Xiaomi का दावा है कि SkyNomad N70 Max इलेक्ट्रिक मोड में 505 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है, जबकि इसकी कुल ड्राइविंग रेंज 1,700 किलोमीटर से भी ज्यादा है। फिलहाल इस इलेक्ट्रिक SUV की प्री-बुकिंग चीन में शुरू हो चुकी है और सितंबर से इसकी डिलीवरी शुरू होने की उम्मीद है। अब आइए जानते हैं Xiaomi SkyNomad Series की खासियतों के बारे में।

Xiaomi SkyNomad सीरीज की कीमत और उपलब्धता

Xiaomi ने SkyNomad Series को दो वेरिएंट में पेश किया है। इसका टॉप मॉडल Xiaomi SkyNomad N90 Max है, जो एक 7-सीटर एक्सटेंडेड-रेंज SUV है। चीन में इसकी प्री-सेल कीमत 2,99,900 चीनी युआन (करीब 42.41 लाख रुपये) रखी गई है। वहीं, कंपनी ने इसका एक 5-सीटर ऑल-व्हील-ड्राइव वेरिएंट SkyNomad N70 Max भी लॉन्च किया है। इसकी शुरुआती कीमत 2,59,900 चीनी युआन (करीब 36.75 लाख रुपये) है।

कलर ऑप्शन की बात करें तो, Xiaomi SkyNomad Series को Mountain Green, Valley Blue और Volcanic Gray एक्सटीरियर कलर में पेश किया गया है। वहीं, इसके इंटीरियर में Cream Beige और Mocha Brown कलर ऑप्शन मिलेंगे।

फिलहाल, चीन में अभी दोनों मॉडल्स के लिए प्री-ऑर्डर शुरू हो गए हैं। ग्राहक CNY 1,000 (लगभग ₹14,000) की रिफंडेबल डिपॉजिट राशि देकर किसी भी SUV को बुक कर सकते हैं। इस बुकिंग के साथ ग्राहकों को प्रोडक्शन में प्राथमिकता मिलेगी। इसके अलावा, डिलीवरी के समय उन्हें करीब 999 चीनी युआन (लगभग 14,000 रुपये) की कीमत वाला इन-कार डुअल कप होल्डर टेबल भी मुफ्त दिया जाएगा।

हालांकि, Xiaomi ने अभी तक SkyNomad Series को ग्लोबल मार्केट या भारत में लॉन्च करने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

Xiaomi SkyNomad सीरीज के फीचर्स और स्पेसिफिकेशन्स

Xiaomi का दावा है कि SkyNomad सीरीज नए Kunlun प्लेटफॉर्म पर आधारित उसका पहला प्रोडक्शन मॉडल है। पारंपरिक लेआउट के उलट, इस प्लेटफॉर्म को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसमें केबिन का फर्श पूरी तरह से फ्लैट रहता है, सीट रेल्स लंबी होती हैं और इंटीरियर को जरूरत के हिसाब से बदला जा सकता है। इसे आने-जाने, कैंपिंग, काम या फैमिली ट्रिप जैसे अलग-अलग कामों के लिए कई तरह के लेआउट में बदला जा सकता है, जिससे अंदर ज्यादा जगह मिलती है।

बड़े SkyNomad N90 Max की लंबाई 5,285mm और व्हीलबेस 3,080mm है, जबकि N70 Max की लंबाई 4,960mm और व्हीलबेस 2,950mm है। Xiaomi का दावा है कि सात सीटों वाली N90 Max में यात्रियों के बैठने के लिए 2,760mm तक की जगह और 1,831 लीटर तक का सामान रखने की क्षमता मिलती है।

कंपनी ने इस SUV में पावर-एडजस्टेबल सीटें, चार तक जीरो-ग्रेविटी सीटें, 16-पॉइंट मसाज, हीटिंग, वेंटिलेशन, बिल्ट-इन रेफ्रिजरेटर वाला स्लाइडिंग सेंटर कंसोल और 30 से ज्यादा स्टोरेज कम्पार्टमेंट जैसे फीचर्स दिए हैं।

नई EV में ‘कुनलुन हाइपररेंज’ (Kunlun HyperRange) एक्सटेंडेड-रेंज सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें 52kWh से 76kWh तक की बैटरी के विकल्प मिलते हैं। Xiaomi का दावा है कि SkyNomad N70 Max सिर्फ इलेक्ट्रिक मोड में 505km तक की CLTC (चाइना लाइट-ड्यूटी व्हीकल टेस्ट साइकिल) रेंज दे सकती है, जबकि बड़ी N90 Max एक बार चार्ज करने पर 464km तक की रेंज देती है। दोनों SUV में डुअल-मोटर ऑल-व्हील-ड्राइव सेटअप का इस्तेमाल किया गया है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह 310kW तक की पीक पावर जेनरेट कर सकता है।

टेक्नोलॉजी की बात करें तो, SkyNomad सीरीज का केबिन Snapdragon 8 Gen 3-बेस्ड डोमेन कंट्रोलर से चलता है। इसमें डुअल 5G कनेक्टिविटी, Wi-Fi 7, छह-स्क्रीन वाला इंफोटेनमेंट सिस्टम, 25-स्पीकर वाला ऑडियो सिस्टम और 6.9-इंच का रियर कंट्रोल डिस्प्ले दिया गया है। Xiaomi ने इसमें अपना Hyper XiaoAi वॉयस असिस्टेंट भी शामिल किया है, जो वॉयस कमांड से केबिन के 11 सीटिंग लेआउट को बदल सकता है।

इस इलेक्ट्रिक SUV में 700 TOPS वाला असिस्टेड-ड्राइविंग प्लेटफॉर्म, LiDAR, 4D मिलीमीटर-वेव रडार और Xiaomi का XLA आर्किटेक्चर पर बना HAD असिस्टेड-ड्राइविंग सिस्टम भी मिलता है।

सेफ्टी के लिहाज से, SkyNomad सीरीज में स्टील-एल्युमीनियम हाइब्रिड बॉडी का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें कई स्ट्रक्चरल पॉइंट्स पर 2,200MPa अल्ट्रा-हाई-स्ट्रेंथ स्टील और 12 एयरबैग्स दिए गए हैं। इसमें Xiaomi की नई Armour Scale बैटरी भी है, जिसमें 18-लेयर प्रोटेक्शन स्ट्रक्चर है। साथ ही, इसमें डुअल टेलगेट रिलीज हैंडल, ट्रिपल-रिडंडेंट डोर हैंडल और 26 ड्राइवर-असिस्टेंस जैसे सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं।

SkyNomad Series के लॉन्च के साथ Xiaomi की इलेक्ट्रिक व्हीकल रेंज और मजबूत हो गई है। इससे पहले कंपनी के EV पोर्टफोलियो में SU7 सेडान और YU7 SUV जैसे मॉडल शामिल हैं।

यह भी पढ़ें: EV 2W Sales in India: 68% बढ़ी इलेक्ट्रिक दोपहिया की बिक्री, Ola Electric को झटका तो TVS Motor टॉप पर

Omkareshwar Darshan 2026 : ओंकारेश्वर में सावन में बदल गई दर्शन व्यवस्था, श्रद्धालु जान लें मंदिर का नया वन-वे रूट

omkarshwar tirth

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए जिला प्रशासन ने दर्शन और आवागमन की व्यवस्था में बदलाव किया है। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए मंदिर क्षेत्र में एकांगी मार्ग यानी वन-वे सिस्टम लागू किया गया है। अगर आप सावन में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने जा रहे हैं, तो मंदिर पहुंचने से पहले नई व्यवस्था और मार्ग की जानकारी जरूर जान लें। 

  ALSO READ: PoJK में कार्रवाई पर भारत का पाकिस्तान पर हमला, New York Times की रिपोर्ट पर क्यों जताई आपत्ति

 

omkarshwar map

सामान्य श्रद्धालु

पुराने बस स्टैंड से रूट

निर्वाणी अखाड़ा जूता-चप्पल स्टैंड → जेपी चौक → पुराना पुल → रैम्प → गर्भगृह → झूला पुल → स्काईब्रिज → निर्वाणी अखाड़ा।

न्यू बस स्टैंड (दांडी तिराहा) की ओर से रूट

गजानन आश्रम → ब्रह्मपुरी जूता-चप्पल स्टैंड → स्काईब्रिज → जेपी चौक → पुराना पुल → रैम्प → गर्भगृह → झूला पुल → ब्रह्मपुरी जूता-चप्पल स्टैंड -> गजानन आश्रम -> प्रसादालय पार्किंग।

प्रोटोकॉल एवं शीघ्र दर्शन श्रद्धालु

प्रोटोकॉल एवं शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निर्वाणी अखाड़ा एवं ब्रह्मपुरी पार्किंग में रिस्टबैंड काउंटर स्थापित किए गए हैं, जहां जूता-चप्पल स्टैंड की भी व्यवस्था है।

पुराने बस स्टैंड से रूट 

निर्वाणी अखाड़ा सेंटर → स्काईब्रिज → झूला पुल → गर्भगृह → झूला पुल → स्काईब्रिज → निर्वाणी अखाड़ा।

न्यू बस स्टैंड से रूट

प्रसादालय पार्किंग  -> गजानन आश्रम → ब्रह्मपुरी पार्किंग सेंटर → झूला पुल → गर्भगृह → झूला पुल → ब्रह्मपुरी पार्किंग सेंटर।

जिला प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्ग व्यवस्था का पालन करते हुए प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है।

क्या है ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर, भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह स्थान न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ के ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी एक ऐसी अलौकिक मान्यता भी है, जो भक्तों को विस्मित कर देती है। कहा जाता है कि इस पावन धाम में हर रात स्वयं भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती शयन के लिए आते हैं, और सोने से पहले वे चौपड़ का खेल भी खेलते हैं। यह मान्यता सदियों से चली आ रही है और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है।

 

रात्रि शयन और चौपड़ की दिव्य लीला

ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी सबसे अद्भुत और रहस्यमयी मान्यता यह है कि भगवान शिव तीनों लोकों का भ्रमण करके प्रतिदिन रात को इसी मंदिर में शयन करने आते हैं। उनके साथ माता पार्वती भी होती हैं। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि रात्रि के समय मंदिर के पट बंद होने के बाद, भोलेनाथ और माता पार्वती यहाँ चौसर (चौपड़) का खेल खेलते हैं।

 

इस मान्यता के चलते, मंदिर में प्रतिदिन रात्रि में पंडित के अलावा किसी को शामिल होने की अनुमति नहीं है। शयन आरती के बाद, गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग के सामने चौपड़-पांसे की बिसात सजाई जाती है। सुबह जब मंदिर के पट खुलते हैं, तो कई बार चौसर और उसके पासे कुछ इस तरह से बिखरे मिलते हैं, जैसे रात्रि के समय उन्हें किसी ने खेला हो। यह दृश्य भक्तों के विश्वास को और भी पुख्ता करता है। यह एक ऐसा रहस्य है जिसे विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया है, और यह सिर्फ़ श्रद्धा और आस्था का विषय है।

 

ओंकारेश्वर और ममलेश्वर: एक ही ज्योति का दो रूप

ओंकारेश्वर द्वीप नर्मदा नदी के मध्य में 'ॐ' के आकार में स्थित है, और यहीं पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान है। नर्मदा के दक्षिणी तट पर ममलेश्वर मंदिर स्थित है, जिसे प्राचीन काल में अमरेश्वर के नाम से जाना जाता था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने अपने ओंकारेश्वर नामक लिंग के दो भाग किए थे, जिनमें से एक ओंकारेश्वर और दूसरा ममलेश्वर कहलाया। दोनों शिवलिंगों का स्थान भले ही अलग हो, लेकिन उनकी सत्ता और स्वरूप एक ही माना जाता है। शिवपुराण में इन दोनों ज्योतिर्लिंगों की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है।

 

इस स्थान पर ध्यान और पूजा करने से मन को शांति और आध्यात्मिक बल मिलता है। यह माना जाता है कि ओंकारेश्वर में नर्मदा स्नान और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बिना सभी तीर्थ यात्राएं अधूरी मानी जाती हैं। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत आस्था का प्रतीक है, जहाँ लाखों भक्त दूर-दूर से इस चमत्कारिक ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने आते हैं, यह विश्वास लेकर कि यहाँ आने से उनके सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

OnePlus का नया बजट फोन लॉन्च! 7000mAh बैटरी, 120Hz डिस्प्ले से होगा लैस, जानें कीमत

OnePlus Nord N6x: अगर आप कम रेंज में स्मार्टफोन में लेने की सोच रहे हैं तो, OnePlus आपके लिए शानदार फोन लेकर आया है। दरअसल, चीन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी ने भारतीय बाजार में अपना OnePlus Nord N6x लॉन्च कर दिया है। इसमें आपको 7000mAh बैटरी, 6.8 इंच का डिस्प्ले और 120 रिफ्रेश रेट मिलेगा। बता दें कि इस डिवाइस का डिजाइन काफी आकर्षक है। इसके पिछले हिस्से (रियर पैनल) के ऊपरी बाएं कोने में पिल-शेप का कैमरा मॉड्यूल है और बीच में OnePlus की ब्रांडिंग दी गई है। इसके अलावा, इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 3.5mm जैक भी दिया गया है, जो लंबे समय से अलग-अलग प्राइस रेंज वाले डिवाइस से गायब था।

भारत में OnePlus N6x की कीमत और उपलब्धता

OnePlus N6x के 4GB RAM और 64GB इंटरनल स्टोरेज वाले वेरिएंट को भारतीय बाजार में ₹19,999 में खरीदा जा सकता है। वहीं, 4GB RAM और 128GB इंटरनल स्टोरेज वाला वेरिएंट ₹20,999 में उपलब्ध है। यह डिवाइस आपको दो कलर ऑप्शन Ice Blue और Burgundy Red में मिलेगा। इस फोन की बिक्री 4 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। ग्राहक इसे OnePlus India की आधिकारिक वेबसाइट और Amazon के जरिए खरीद सकेंगे।

OnePlus N6x के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

OnePlus N6x में 6.8-इंच का IPS LCD डिस्प्ले है, जिसका रिफ्रेश रेट 120Hz और पीक ब्राइटनेस 700 निट्स है। इसमें MediaTek Dimensity 6360 Apex प्रोसेसर लगा है और इसके टॉप वेरिएंट में 4GB RAM और 64GB इंटरनल स्टोरेज मिलती है। यह डिवाइस Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर बेस्ड है और इसमें OxygenOS स्किन दी गई है। बता दें कि इस हैंडसेट की बैटरी इसकी एक बड़ी खासियत (USP) हो सकती है, क्योंकि इसमें 7000mAh की बैटरी और 15W वायर्ड चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है।

कैमरे की बात करें तो, निराशा की बात यह है कि OnePlus N6x में सिर्फ एक 13MP का रियर कैमरा है। आप इससे बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकते, क्योंकि इसमें OIS के बिना सिर्फ एक ही सेंसर है। इसके अलावा, सेल्फी और वीडियो कॉल करने के लिए इस फोन में 5MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है।

यह भी पढ़ें: अब शॉपिंग करो, Netflix फ्री में देखो! Flipkart की इस नई ट्रिक से बिना सब्सक्रिप्शन मिलेगा मोबाइल प्लान

सावन व्रत में बनाएं ये 5 आसान सात्विक रेसिपीज, बिना प्याज-लहसुन मिलेगा भरपूर स्वाद

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति, पूजा-पाठ और सात्विक लाइफस्टाइल अपनाने का समय माना जाता है। इस दौरान कई श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखते हैं और प्याज, लहसुन, मांसाहार व अंडे जैसी तामसिक चीजों से दूरी बनाए रखते हैं। ऐसे में शरीर को एनर्जी देने वाला हल्का भोजन खाना भी जरूरी होता है। आप भी इस सावन व्रत में बिना प्याज-लहसुन वाली आसान रेसिपीज आपकी व्रत की थाली को स्वादिष्ट और पौष्टिक बना सकती हैं:

1. सिंघाड़े की खीर (Singhara Kheer)

इसे बनाने के लिए दूध को एक भारी तले वाले बर्तन में उबालें। उसमें धीरे-धीरे सिंघाड़े का आटा मिलाते हुए लगातार चलाएं, ताकि गांठें न बनें। 8-10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। अब चीनी या गुड़, इलायची पाउडर और कटे हुए बादाम, काजू व पिस्ता डालकर 2-3 मिनट और पकाएं। सिंघाड़ा फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम और जरूरी मिनरल्स का अच्छा सोर्स माना जाता है। दूध से प्रोटीन और कैल्शियम मिलता है तथा ड्राई फ्रूट्स हेल्दी फैट, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं। इसे गर्म या ठंडा, दोनों तरह से परोसा जा सकता है।

 

2. जीरा आलू (Jeera Aloo)

इसे बनाने के लिए कड़ाही में घी गर्म करें और उसमें जीरा चटकाएं। फिर बारीक कटी हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड भूनें। अब उबले और कटे हुए आलू डालें। सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाकर 5-7 मिनट तक मीडियम आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। फिर हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिलाएं। जीरा डाइजेशन को बेहतर बनाने और गैस जैसी प्रॉब्लम को कम करता है, जबकि आलू कार्बोहाइड्रेट और पोटैशियम का अच्छा सोर्स है। कम मसालों में बनने वाली यह डिश व्रत में हल्की होती है और शरीर को एनर्जी देती है।

 

 

3. साबूदाना खिचड़ी (Sabudana Khichdi)

इसे बनाने के लिए सबसे पहले साबूदाने का पानी निकाल लें। कड़ाही में घी गर्म करके जीरा चटकाएं और हरी मिर्च डालें। फिर उबले आलू डालकर 2-3 मिनट तक हल्का भूनें। अब साबूदाना, मूंगफली का पाउडर और सेंधा नमक डालकर धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए 3-4 मिनट पकाएं। हरा धनिया और थोड़ा-सा नींबू का रस डालकर परोसें। साबूदाना शरीर को तुरंत एनर्जी देता है, जबकि मूंगफली प्रोटीन, हेल्दी फैट और विटामिन ई का अच्छा सोर्स है। नींबू से विटामिन C मिलता है। यह रेसिपी व्रत में लंबे समय तक पेट भरा रखती है।

 

 

4. कुट्टू की पूरी (Kuttu Puri)

इसे बनाने के लिए उबले आलू को मैश करके कुट्टू के आटे में मिलाएं। सेंधा नमक डालें और जरूरत के हिसाब से थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर कड़क आटा गूंध लें। आटे को 10 मिनट ढककर रखें, फिर छोटी-छोटी लोइयां बनाकर पूरियां बेलें। गर्म घी या तेल में इन्हें सुनहरा और कुरकुरा होने तक तल लें। कुट्टू का आटा ग्लूटेन-फ्री होता है और इसमें फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम तथा एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे दही, जीरा आलू या व्रत की किसी भी सब्जी के साथ परोसें।

 

 

5. साबूदाना टिक्की (Sabudana Tikki)

इसे बनाने के लिए पहले उबले आलू को अच्छी तरह मैश कर लें। अब इसमें भीगा हुआ साबूदाना, भुनी मूंगफली का पाउडर, बारीक कटी हरी मिर्च, सेंधा नमक और हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिलाएं। तैयार मिक्सचर से छोटी साइज की टिक्कियां बनाएं और तवे पर थोड़ा घी लगाकर मीडियम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेक लें। साबूदाना में कार्बोहाइड्रेट होता है, जबकि मूंगफली से प्रोटीन और हेल्दी फैट मिलते हैं। आलू में पोटैशियम होता है। इसलिए यह रेसिपी व्रत के मिए परफेक्ट है। इसे दही या व्रत की हरी चटनी के साथ गर्मागर्म परोसें।

Stock Market Rise: बाजार लगातार तीसरे दिन चढ़ा, सेंसेक्स 166 अंकों की बढ़त के साथ बंद; निवेशकों की दौलत ₹1.32 लाख करोड़ बढ़ी

शेयर बाजार में शुक्रवार, 31 जुलाई को लगातार तीसरे दिन तेजी रही। सेंसेक्स 166.49 अंकों की बढ़त के साथ 78,094.64 पर और निफ्टी 66.45 अंक चढ़कर 24,383.60 पर बंद हुआ। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 1.32 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया। दिन में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 344 अंक तक उछलकर 78,272.25 के हाई तक गया। यह मार्क दिन के लो से 462 अंक ज्यादा है। निफ्टी भी दिन में पिछली क्लोजिंग से लगभग 112 अंक तक उछलकर 24,429.40 के हाई तक गया।

गुरुवार, 30 जुलाई को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,84,56,699.485 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को यह बढ़कर 4,85,88,400.40 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 1,31,700.915 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी। निफ्टी पर बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, महिंद्रा एंड महिंद्रा और श्रीराम फाइनेंस टॉप गेनर रहे। वहीं TCS, इटर्नल, इंफोसिस, मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट, आईटीसी टॉप लूजर रहे।

गुरुवार को सेंसेक्स 273.55 अंक या 0.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,928.15 पर बंद हुआ था। निफ्टी 66.95 अंक या 0.28 प्रतिशत बढ़कर 24,317.15 अंक पर बंद हुआ था। विदेशी निवेशकों की ओर से अच्छी खरीद, रुपये में मजबूती और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए कंपनियों के उत्साहजनक नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को शुद्ध रूप से 3,623.51 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

विदेशी बाजारों की कैसी रही चाल

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 15 प्रतिशत की बढ़त में है। जापान के निक्केई 225 में भी 4 प्रतिशत की तेजी है। चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी बढ़त में है। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को अच्छी तेजी के साथ बंद हुए थे। यूरोपीय बाजार भी हरे निशान में हैं।

Sun Pharma Q1 Results: जून तिमाही में मुनाफा 27% बढ़ा, रेवेन्यू में 10% का इजाफा; शेयर टूटा

रुपये में बढ़त

शुक्रवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 9 पैसे की बढ़त के साथ 95.41 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। गुरुवार को रुपया लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज करते हुए 26 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.50 पर बंद हुआ था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

हिमस्खलन- नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा पाकिस्तान में लापता:10 मेंबर्स के साथ ब्रॉड पीक पर चढ़ाई कर रहे थे; 4 शव बरामद, रेस्क्यू जारी

नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा पाकिस्तान में हिमस्खलन यानी एवलांच की चपेट में आने के बाद लापता हो गए हैं। अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान (ACP) के अनुसार, काराकोरम इलाके में 8,051 मीटर ऊंचे ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान करीब 7,000 मीटर की ऊंचाई पर यह हादसा हुआ। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, पुर्जा के साथ 9 मेंबर थे। शिखर पर चढ़ने की कोशिश के दौरान बर्फीले तूफान ने 10 सदस्यीय टीम को अपनी चपेट में ले लिया। लापता होने वालों में नेपाल के 6, पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका और चीन का एक-एक पर्वतारोही शामिल है। इनमें से 4 के शव बरामद कर लिए गए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन खराब मौसम के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही है। GPS ट्रैकर में हलचल के संकेत एवरेस्ट क्रॉनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक निर्मल पुर्जा के GPS ट्रैकर में हल्की हलचल देखी गई है। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि यह तकनीकी खराबी भी हो सकती है। ट्रैकिंग डेटा के अनुसार गुरुवार सुबह 9:38 बजे पुर्जा 6,659 मीटर की ऊंचाई पर थे। इसके बाद सुबह 10:18 बजे 800 मीटर की तेजी से गिरावट दर्ज की गई, जो एवलांच के समय से मेल खाती है। रेस्क्यू हेलिकॉप्टर पहाड़ी इलाकों में नहीं पहुंच पा रहे नेपाल पर्वतारोहण संघ के पूर्व अध्यक्ष आंग शेरिंग शेरपा ने बताया कि खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर पहाड़ी इलाके में उतर नहीं पा रहे हैं, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित हुआ है। पाकिस्तान सरकार के संपर्क में नेपाल नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि वे पाकिस्तान में स्थित नेपाली दूतावास के जरिए पाकिस्तानी सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं। नेपाल के पर्यटन मंत्री खड़क प्रसाद पौडेल ने सोशल मीडिया पर कहा कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और पर्वतारोहियों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद कर रहे हैं। अल्पाइन क्लब कर रहा समन्वय अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान के उपाध्यक्ष करार हैदरी ने बताया कि हिमस्खलन के बाद से पूरी टीम से संपर्क टूट गया है। क्लब ने कहा कि वे सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर हर संभव संसाधन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। ———————————————————-

भारत में इस्तीफे जोर जबरदस्ती ही होते हैं

दुनिया के संभवतः किसी दूसरे देश में नैतिकता की उतनी बात नहीं होती होंगी, जितनी भारत में होती हैं। भारत ने दया, करुणा, सत्य, प्रेम, भाईचारे आदि के जितने प्रतीक गढ़े हैं, दुनिया के किसी और देश में उतने नहीं होंगे। भारत में तो एक सतयुग ही था, जिसमें सत्य हरिश्चंद्र थे। लेकिन यह भी सही है कि सत्य, अहिंसा, प्रेम, भाईचारे, करुणा, दया आदि से जितनी दूरी भारत में है उतनी शायद ही कहीं और होगी। इस पर लंबी बहस हो सकती है। इसलिए उसमें जाने की जरुरत नहीं है। लेकिन दुनिया के जिन देशों में सत्य और नैतिकता आदि का ढोल रोज नहीं बताया जाता है वहां लोग ज्यादा नैतिक होते हैं। वहां लोग नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं और अगर कोई अपराध किया है तो उसे भी स्वीकार करके सजा पाते हैं। भारत में कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं लेता है और अपराध करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया व्यक्ति भी अदालत में खड़े होकर कहता है कि वह बेकसूर है और उसका पूरा परिवार और ज्यादातर मामलों में पूरी जाति उसके बचाव में खड़ी होती है।

भारत की राजनीति में भी नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने का कोई सिद्धांत नहीं रहा है। नैतिक जिम्मेदारी लेकर कुछ मंत्रियों आदि ने जरूर इस्तीफे दिए, जिनकी आज तक चर्चा होती है। लाल बहादुर शास्त्री, माधवराव सिंधिया या नीतीश कुमार का जिक्र किया जाता है। यह संयोग है कि इन तीनों के इस्तीफे ट्रेन दुर्घटना को लेकर हुए थे। इनके रेल मंत्री रहते ट्रेन दुर्घटनाएं हुईं और उसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दिया। यह अलग बात है कि रेल मंत्रालय में विफल होने के बाद भी इन सभी लोगों को दूसरे मंत्रालयों में अहम जिम्मेदारी मिली। लाल बहादुर शास्त्री तो बाद में प्रधानमंत्री बने। बहरहाल, भारत में गंभीर से गंभीर विफलता या आर्थिक अपराध में शामिल होने के आरोपों के बाद भी इस्तीफा कराना बड़ा मुश्किल होता है। आर्थिक अपराध के मामलों में तो अब गिरफ्तार होकर जेल जाने के बाद भी नेता इस्तीफा नहीं देते हैं। दिल्ली का मुख्यमंत्री रहते अरविंद केजरीवाल ने कमाल की मिसाल बनाई। वे कई महीने जेल में रहे और उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया। हेमंत सोरेन ने थोड़ी शर्म दिखाई और गिरफ्तारी से चंद मिनट पहले इस्तीफा दे दिया। अगर गिरफ्तारी की बाध्यता नहीं होती तो वे भी इस्तीफा नहीं देते।

सवाल है कि ऐसा क्यों होता है कि भारत में केंद्र या राज्य का मंत्री या मुख्यमंत्री किसी भी विवाद में फंसने या अपनी कैसी भी विफलता के बाद इस्तीफा नहीं देते हैं? इसे दो पहलुओं से देख सकते हैं। एक आपराधिक मामला और दूसरा विफलता व नैतिकता का मामला। जहां तक आपराधिक मामलों में फंसने पर इस्तीफे का सवाल है तो वह इसलिए आसानी से नहीं होता है क्योंकि भारत में पहले से जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं ऐसे, सैकड़ों लोग सांसद और विधायक चुने गए हैं। सवाल है जब गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होने और उनकी जानकारी सार्वजनिक होने के बावजूद जनता उनको चुन देती है तो चुने जाने के बाद किए गए किसी अपराध के लिए वे क्यों इस्तीफा देंगे? जब जनता ने उनको सांसद चुन दिया है तो वे केंद्र में मंत्री बनने के योग्य हैं और जनता ने विधायक चुना है तो वे राज्य में मंत्री और मुख्यमंत्री बनने के योग्य हैं। ऐसे में उनके और जनता के बीच में नैतिकता की बात कहां से आ गई! उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि जानने के बाद भी अगर जनता ने चुना है तो वे वैसे ही किसी अन्य अपराध के मामले में भी क्यों इस्तीफा देंगे? तभी भारत में ऐसे मामलों में भी जोर जबरदस्ती ही इस्तीफा होता है। गिरफ्तार होने या गिरफ्तारी की नौबत आने या पार्टी व सरकार के प्रमुख की ओर से राजनीतिक नुकसान की आशंका देख कर दबाव डालने के बाद ही इस्तीफा होता है।

अब रही जिम्मेदारी के निर्वहन में विफलता की बात तो उसमें भी आजादी के बाद से ही यह परंपरा चलती आ रही है कि इस्तीफा जोर जबरदस्ती ही होगा। ध्यान रहे भारत में पहला हाई प्रोफाइल इस्तीफा वीके कृष्ण मेनन का हुआ था। चीन के साथ युद्ध में भारत की हार के बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्ण मेनन पर दबाव था कि वे इस्तीफा दें। लेकिन वे इस्तीफा देने को तैयार नहीं थे। जब जन दबाव बहुत बढ़ा तो अंत में उन्होंने इस्तीफा दिया। हालांकि जयराम रमेश ने उनके जीवन पर एक किताब लिखी है, ‘अ चेकर्ड ब्रिलियंसः द मेनी लाइव्स ऑफ वीके कृष्ण मेनन’, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि कृष्ण मेनन तो बहुत पहले इस्तीफा देने को तैयार थे लेकिन उन्हें रोका गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू मानते थे कि चीन के साथ युद्ध में पराजय का मेनन से कोई संबंध नहीं है। फिर वे क्यों इस्तीफा देंगे।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर चल रही बातें सुन कर क्या कृष्ण मेनन के इस्तीफे की कहानी से समानता नहीं दिखती है? ध्यान रहे पिछले कई दिनों से कहा जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान तो बहुत पहले इस्तीफा देना चाहते थे। लेकिन प्रधानमंत्री को लगता था कि पेपर लीक होने से उनका कोई लेना देना नहीं है, बल्कि उन्होंने तो पेपर लीक होने के तुरंत बाद सक्रियता दिखाई। सारे आरोपी पकड़े गए और रिकॉर्ड समय में दोबारा परीक्षा करा ली गई ताकि छात्रों का एक साल बरबाद न हो। इसके बाद भी उनका इस्तीफा हुआ तो उसका कारण यही है कि जन दबाव बहुत बढ़ गया यानी जोर जबरदस्ती से ही उनका इस्तीफा हुआ।

सोचें, पेपर लीक कितनी बड़ी विफलता है! एक मंत्री के कार्यकाल में दो बार नीट यूजी जैसी विशाल अखिल भारतीय परीक्षा के पेपर लीक हो जाएं तो उससे बड़ी विफलता क्या हो सकती है? आश्चर्य यह है कि 2024 के शुरू में बजट सत्र में पेपर लीक का कठोर कानून बना था और मई में पेपर लीक हो गया, उसके बाद भी जून में जब नई सरकार बनी तो फिर धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री बना दिया गया! फिर 2026 के मई में नीट यूजी की परीक्षा का पेपर लीक हो गया और धर्मेंद्र प्रधान कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थे।

यह सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान का मामला नहीं है। यह भारत की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था का मामला है, जहां हर व्यक्ति चाहता है कि जवाबदेही और नैतिकता का तकाजा दूसरे पर लागू हो। अपनी जवाबदेही और नैतिकता का ध्यान किसी को नहीं रहता है। जोर जबरदस्ती न हो तो न वीके कृष्ण मेनन का इस्तीफा होता और न धर्मेंद्र प्रधान का। याद करें कैसे कारगिल युद्ध के समय ताबूत घोटाला खुला था और तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज ने कितनी मुश्किल से इस्तीफा दिया था। ऐसे ही दबाव नहीं होता और पार्टियों को चुनावी नुकसान का भय नहीं होता तो न ए राजा इस्तीफा देते और न अशोक चव्हाण की विदाई होती। महिलाओं का दबाव नहीं होता तो एमजे अकबर का भी इस्तीफा नहीं होता। सोचें, इंगलैंड में क्रिस्टीन किलर कांड में एक मंत्री लॉर्ड प्रोफ्यूमो का नाम आया था तो प्रधानमंत्री हेराल्ड मैकमिलन की पूरी सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था। भारत में मी टू के उतने बड़े मुद्दे में एमजे अकबर फंसे तो उनका भी इस्तीफा मुश्किल से हुआ और दुनिया के सबसे बड़े सेक्स अपराधी एपस्टीन के साथ संबंधों का खुलासा होने के बाद भी हरदीप पुरी का इस्तीफा नहीं हुआ।

ईरान पर हमले रोकने वाला प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में फेल:49-50 वोट से खारिज, ट्रम्प की पार्टी के एक सांसद ने वोटिंग नहीं की

अमेरिकी सीनेट में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई सीमित करने वाला प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। इसके लिए गुरुवार को वोटिंग हुई, जिसमें यह 49-50 के अंतर से खारिज हो गया। पेन्सिलवेनिया से रिपब्लिकन सीनेटर डेव मैककॉर्मिक वोटिंग में शामिल नहीं हुए। अभी यह विधेयक सीनेट की विदेश मामलों से जुड़ी समिति में अटका हुआ है। प्रस्ताव लाने वाले सांसद चाहते थे कि इसे पूरे सीनेट में चर्चा और वोटिंग के लिए पेश किया जाए। अब इसे पूरे सीनेट में लाने के लिए सांसदों को दोबारा कोशिश करनी होगी। अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ जाता, तो ईरान के खिलाफ हमले शुरू करने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए संसद की मंजूरी लेना जरूरी हो जाता। यानी राष्ट्रपति अकेले ऐसा फैसला नहीं ले सकते थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया ईरान हमलों के बाद विपक्षी सांसद लगातार मांग कर रहे हैं कि ऐसे किसी भी सैन्य अभियान पर अंतिम फैसला संसद की मंजूरी से ही हो। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. जंग में पहली बार मिस्र पर हमला: मिस्र के बंदरगाह पर ड्रोन हमले में दो जहाजों में आग लगी। ईरान को इस हमले का जिम्मेदार माना जा रहा है। 2. अमेरिका का 10 ईरानी शहरों पर हमला: अमेरिकी सेना ने ईरान पर बड़े हवाई हमले किए। बंदर अब्बास, किश और क़ेश्म द्वीप में धमाकों की खबर है। 3. ईरान का जवाबी हमला: रिवोल्यूशनरी फोर्स ने कहा कि अमेरिकी हमले के बाद उन्होंने कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। 4. कुवैत में चीनी कंपनी की बिल्डिंग पर हमला: ईरानी हमले में उत्तरी कुवैत में एक चीनी कंपनी की इमारत पर हमला हुआ, एक कर्मचारी की मौत। 5. रेड सी की सुरक्षा के लिए गठबंधन बना रहा सऊदी: रेड सी (लाल सागर) में जहाजों की सुरक्षा के लिए सऊदी एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने जा रहा है। अब तक 14 देशों ने इससे जुड़ने में इच्छा जताई है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

रावण का यहां भगवान जैसा सम्मान! भारत के इन मंदिरों में होती है पूजा…अलग है यहां की कहानी

नितेश तिवारी के निर्देशक में बनी फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ का पहला ट्रेलर रिलीज हो गया है। फैंस को फिल्म का ट्रेलर काफी पसंद आ रहा है। ये फिल्म दो पॉर्ट में रिलीज होने वाली है। पहला पॉर्ट दिवाली 2026 और दूसरा पॉर्ट दिवाली 2027 पर सिनेमाघरों में आएगा। राम और सीता की कहानी में रावण का नाम हमेशा विलेन के तौर पर रहा है। वहीं आपको ये जानकर हैरानी होगी की भारत में कई हिस्सों में ऐसे मंदिर मौजूद हैं, जहां रावण की पूजा होती है।

मान्यता है कि रावण ने शिव तांडव स्तोत्र की रचना की थी और वह वीणा वादन में भी निपुण थे। इसी वजह से देश के कुछ हिस्सों में रावण के मंदिर बने हुए हैं, जहां लोग उनकी श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं। आइए जानते हैं उन मंदिरों के बारे में

बिसरख, उत्तर प्रदेश: बिसरख (उत्तर प्रदेश) को कई लोग रावण का जन्मस्थान मानते हैं। इसी वजह से यहां दशहरे पर रावण के पुतले नहीं जलाए जाते। नवरात्रि के दौरान गांव के लोग विशेष पूजा-पाठ और यज्ञ कर रावण की आत्मा की शांति की कामना करते हैं। यहां स्थित प्राचीन विश्रवेश्वर महादेव मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इस मंदिर में मौजूद दुर्लभ अष्टकोणीय शिवलिंग की स्थापना रावण के पिता महर्षि विश्रवा ने की थी, इसलिए यह स्थान रावण से जुड़ी आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

मंदसौर, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश का मंदसौर रावण से जुड़ी मान्यताओं के कारण खास महत्व रखता है। ऐसा कहा जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका इसी क्षेत्र से था, इसलिए यहां रावण को दामाद के रूप में सम्मान दिया जाता है। स्थानीय लोग रावण को भगवान शिव का परम भक्त और महान विद्वान मानते हैं। शहर में रावण की करीब 35 फुट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित है। दशहरे के दिन यहां कई लोग रावण के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं और उसकी स्मृति में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

बैजनाथ मंदिर, हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित बैजनाथ मंदिर का संबंध भी रावण से जुड़ी प्राचीन मान्यताओं से जोड़ा जाता है। लोककथाओं के अनुसार, रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहां कठोर तपस्या की थी और अपनी भक्ति का अद्भुत प्रमाण दिया था। इसी कारण बैजनाथ में दशहरे पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। एक अन्य मान्यता के मुताबिक, भगवान शिव ने रावण को शिवलिंग लंका ले जाने की अनुमति दी थी, लेकिन शर्त थी कि उसे रास्ते में कहीं जमीन पर नहीं रखना होगा। बैजनाथ पहुंचने पर परिस्थितिवश शिवलिंग जमीन पर रख दिया गया और वह वहीं स्थापित हो गया। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

गढ़चिरौली, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में रहने वाले कुछ गोंड आदिवासी समुदाय रावण और उसके पुत्र मेघनाद को पूजनीय मानते हैं। फाल्गुन महीने में मनाए जाने वाले अपने पारंपरिक त्योहार के दौरान वे दोनों की विशेष पूजा करते हैं। समुदाय की अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण को महान शासक और सम्मानित व्यक्तित्व माना जाता है। इसी वजह से यहां उसकी याद में धार्मिक आयोजन किए जाते हैं और उसे श्रद्धा के साथ सम्मान दिया जाता है।

काकीनाडा, आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जो रावण की भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा से जुड़ा माना जाता है। यहां विशाल शिवलिंग के पास बना ये मंदिर स्थानीय मान्यताओं के कारण खास महत्व रखता है। कहा जाता है कि रावण ने स्वयं इस स्थान को भगवान शिव की आराधना के लिए चुना था। यही वजह है कि आंध्र प्रदेश में यह स्थान उन चुनिंदा जगहों में शामिल है, जहां रावण को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जाता है।

डिस्केलमर- यहां पर दी गई जानकारी पौराणिक कथाओं और मान्याताओं पर निर्धारित है।

भारत सीमा के पास चीन की सैन्य गतिविधि तेज:LAC से सटे दो एयरबेस पर 12 J-20 स्टील्थ फाइटर तैनात होने का दावा

व्यावसायिक सैटेलाइट तस्वीरों में दावा किया गया है कि चीन ने भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट स्थित दो एयरबेस पर अपने सबसे आधुनिक J-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। तस्वीरों के अनुसार, शिनजियांग के होतान और तिब्बत के डामशुंग एयरबेस पर कुल 12 J-20 विमान मौजूद हैं। हाल के वर्षों में LAC के पास इस श्रेणी के विमानों की यह सबसे बड़ी तैनातियों में से एक मानी जा रही है। सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा रिपोर्ट के अनुसार, व्यावसायिक सैटेलाइट कंपनी Vantor की तस्वीरों में 9 जुलाई को शिनजियांग के होतान एयरबेस पर आठ J-20 ‘माइटी ड्रैगन’ स्टील्थ फाइटर विमान दिखाई दिए। वहीं, 25 जून की तस्वीरों में तिब्बत के डामशुंग एयरबेस पर चार J-20 विमान सुरक्षात्मक शेल्टर के नीचे खड़े नजर आए। भारत की सीमा के कितने करीब हैं एयरबेस होतान एयरबेस भारतीय वायुसेना के दौलत बेग ओल्डी एयरबेस से करीब 245 किमी और लेह से लगभग 389 किमी दूर है। यह चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में स्थित पीएलए एयर फोर्स (PLAAF) का प्रमुख फॉरवर्ड एयरबेस है। यह नागरिक और सैन्य, दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होता है और भारत-चीन सीमा के निकट चीन का महत्वपूर्ण फॉरवर्ड ऑपरेशनल बेस माना जाता है। इस बेस पर करीब 3,700 मीटर लंबा विस्तारित रनवे है, जिससे बड़े और भारी सैन्य विमान भी आसानी से उड़ान भर सकते हैं। यहां मजबूत एयरक्राफ्ट शेल्टर, नए एप्रन और आधुनिक ऑपरेशन सपोर्ट सुविधाएं विकसित की गई हैं। इस बेस पर J-20 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान, KJ-500 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEWC) विमान, इंटरसेप्टर फाइटर जेट और CH-4 जैसे निगरानी और स्ट्राइक ड्रोन (UAV) तैनात रहते हैं। क्षेत्रीय सैन्य अभ्यास और सीमा पर तनाव के दौरान यहां H-6 रणनीतिक बमवर्षक विमानों की भी तैनाती की जाती है। डामशुंग एयरबेस चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ल्हासा प्रीफेक्चर में स्थित एक उच्च ऊंचाई वाला सैन्य एयरबेस है। यह अरुणाचल प्रदेश के तवांग से करीब 344 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित है और LAC के पूर्वी सेक्टर पर चीन की सैन्य रणनीति का अहम केंद्र माना जाता है। तिब्बती पठार की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यह पीएलए एयर फोर्स (PLAAF) के लिए महत्वपूर्ण फॉरवर्ड स्टेजिंग बेस है। यहां से उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लड़ाकू विमानों की तैनाती, प्रशिक्षण और ऑपरेशन संचालित किए जाते हैं। एयरक्रू को कठिन भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों में उड़ान संचालन का अभ्यास कराया जाता है। एयरबेस में एक प्रमुख रनवे है, जहां से लड़ाकू और सैन्य विमान नियमित रूप से ऑपरेट कर सकते हैं। डामशुंग एयरबेस चीन की पश्चिमी थिएटर कमांड के लिए पूर्वी LAC पर वायु शक्ति बढ़ाने का प्रमुख केंद्र है। यहां से अरुणाचल प्रदेश की दिशा में निगरानी, त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया और उच्च ऊंचाई वाले अभियानों का संचालन आसान हो जाता है। तैनाती क्यों मानी जा रही है अहम रिपोर्ट में रक्षा सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ऊंचाई वाले एयरबेस पर J-20 की लगातार मौजूदगी इस बात का संकेत है कि चीन अब ऐसी तैनाती को नियमित सैन्य रणनीति का हिस्सा बना रहा है, न कि किसी अस्थायी सैन्य अभ्यास का। J-20 चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे रडार से बचने और आधुनिक हवाई अभियानों के लिए विकसित किया गया है। इसे चीनी वायुसेना के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। भारत-चीन सीमा पर लगातार सैन्य गतिविधियां रिपोर्ट के मुताबिक, यह तैनाती ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी विवादित सीमा पर सैन्य तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद दोनों देशों ने कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ता की है तथा कुछ क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी भी हुई है। इसके बावजूद दोनों पक्ष LAC पर बड़ी संख्या में सैनिकों, बख्तरबंद वाहनों और आधुनिक वायु संसाधनों की तैनाती बनाए हुए हैं। भारतीय वायुसेना के सामने चुनौतियां रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय वायुसेना फिलहाल लड़ाकू विमानों की संख्या में कमी की चुनौती का सामना कर रही है। स्वदेशी LCA तेजस Mk1A कार्यक्रम में देरी हुई है, जबकि 114 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद प्रक्रिया अभी जारी है।