

Lip Balm (लिप बाम) आएगा दूसरे काम

Eye Shadow (आई शैडो) से बनाएं नया नेल पेंट

Foundation (फाउंडेशन) का करें अलग इस्तेमाल

Toner (टोनर) से करें घर की सफाई
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Lip Balm (लिप बाम) आएगा दूसरे काम

Eye Shadow (आई शैडो) से बनाएं नया नेल पेंट

Foundation (फाउंडेशन) का करें अलग इस्तेमाल

Toner (टोनर) से करें घर की सफाई
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iQOO Z11 Lite लॉन्च करने के कुछ ही दिनों बाद, Vivo का यह सब-ब्रांड इस सीरीज में एक और फोन जोड़ने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस फोन के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन हाल ही में लीक हुई जानकारी से इसके अनुमानित स्पेसिफिकेशन्स, लॉन्च टाइमलाइन और अनुमानित कीमत का पता चलता है। ऐसी भी चर्चा है कि भारत में आने वाला iQOO Z11, इस साल की शुरुआत में चीन में लॉन्च हुए मॉडल से कुछ बड़े बदलावों के साथ आ सकता है। अब आइए जानते हैं इस अपकमिंग स्मार्टफोन की लीक हुई सभी जानकारी के बारे में।
iQOO Z11 के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स (लीक जानकारी)
टिपस्टर देबयान रॉय की ओर से शेयर की गई लीक जानकारी के अनुसार, iQOO Z11 का भारतीय वर्जन 144Hz रिफ्रेश रेट वाले 1.5K कर्व्ड OLED डिस्प्ले के साथ आ सकता है, जो इसे चीनी मॉडल में देखे गए फ्लैट-स्क्रीन डिजाइन से अलग बनाता है।
उम्मीद है कि चीनी स्मार्टफोन निर्माता इस फोन में MediaTek Dimensity 7500 चिपसेट का इस्तेमाल करेगा। साथ ही, कहा जा रहा है कि इस डिवाइस में 7000mAh से 8000 mAh की बैटरी होगी, जो 90W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगी।
कैमरे की बात करें तो, इस फोन में ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन (OIS) के साथ 50MP का प्राइमरी कैमरा और 32MP का फ्रंट कैमरा होने की उम्मीद है। अन्य अनुमानित फीचर्स में IP68 और IP69 डस्ट और वॉटर रेजिस्टेंस, इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट स्कैनर, प्लास्टिक फ्रेम और 8GB व 12GB RAM वाले मेमोरी ऑप्शन शामिल हैं।
वहीं, इसकी तुलना में चीनी वर्जन MediaTek Dimensity 8500 चिपसेट, 6.83-इंच 1.5K 165Hz AMOLED डिस्प्ले, 9020 mAh बैटरी और डुअल-कैमरा सेटअप (जिसमें 50MP का मेन सेंसर और 2MP का डेप्थ कैमरा है) के साथ लॉन्च हुआ था।
iQOO Z11 भारत में लॉन्च और कीमत (लीक जानकारी)
हालांकि, iQOO ने अभी तक ऑफिशियली लॉन्च डेट की पुष्टि नहीं की है, लेकिन हालिया लीक से पता चलता है कि यह स्मार्टफोन अगस्त में कभी भी भारत में आ सकता है। पहले मिली BIS सर्टिफिकेशन की जानकारी से यह भी संकेत मिलता है कि लॉन्च में ज्यादा समय नहीं बचा है। कीमत की बात करें तो, टिपस्टर देबयान के अनुसार, चीन की यह टेक कंपनी भारत में iQOO Z11 को लगभग 35,000 रुपये की कीमत पर लॉन्च कर सकती है।
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अभूतपूर्व जंगल की आग से जूझते फ्रांस में पहली बार फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनते देखा गया है। आखिर आग के बादल होते क्या हैं और इनका क्या असर होता है। फ्रांस में इसे देखने के बाद क्यों चिंता बढ़ रही है। ALSO READ: अमेरिका-चीन के बीच तनाव, अमेरिका ने लगाया चीनी रोबोट पर प्रतिबंध
फ्रांस जंगल की अभूतपूर्व आग से जूझ रहा है। लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है और सैर सपाटे के मौसम में अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। जंगल की आग ना सिर्फ अपने विस्तार में भयानक है बल्कि यह जिस रूप में नजर आ रही है वह इससे पहले फ्रांस में कभी नहीं देखी गई। यहां फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनने की भी खबरें आ रही हैं जो फ्रांस के लिए दुर्लभ रहा है।
पाइरक्यूम्यूलोनिंबस एक तरह का बादल है जो जंगल की बड़ी आग के ऊपर बनता है। तेज गर्मी जब धुएं, राख और भाप को वातावरण में धकेलती है तो पाइरोक्यूम्यूलोनिंबस बनता है जिसे फायर क्लाउड यानी आग के बादल भी कहा जाता है।
तस्मानिया यूनिवर्सिटी में पायरोजियोग्राफी के प्रोफेसर डेविड बोमान ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, “आप किसी चिमनी के रूप में इसकी कल्पना कर सकते हैं, जिसमें नीचे आग होती है, धुआं चिमनी के रास्ते से होता हुआ वायुमंडल में जाता है।”
मौसमविज्ञानी उन परिस्थितियों की पहचान कर सकते हैं जो फायर क्लाउड बनाने के लिए आदर्श होते हैं, हालांकि वे बारीकी से यह नहीं बता सकते कि वे कब बनेंगे। ऐसे में वे चेतावनी तो दे सकते हैं लेकिन इसकी सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सकते। ALSO READ: नेपाल: बालेन शाह के खिलाफ जेन-जी में क्यों है उबाल
फायर क्लाउड जंगल की आग को ज्यादा खतरनाक और अप्रत्याशित बना सकते हैं। तेज हवाएं पैदा करके वे आग की दिशा बदल सकते हैं और बिजली पैदा करके वह आग की नई लपटों को जन्म दे सकते हैं।
उनके अंदर की ऊर्जा खत्म होने के बाद भी “प्लूम कोलैप्स” की स्थिति पैदा कर के नुकसान पहुंचा सकते हैं। प्लूम जब बादलों के अंदर पर्याप्त ऊर्जा नहीं बचती तो वे ढह जाते हैं, इसके साथ राख और कचरा जमीन पर गिर कर नुकसान पहुंचाता है। इसे ही प्लूम कोलैप्स कहते हैं। बोमन का कहना है, “प्लूम कोलैप्स होता है तो वहां जलते कचरे की बारिश होती है।” ALSO READ: जंगल की आग के सामने लाचार होते फ्रांस और स्पेन
फ्रेंच अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि बोर्दो के पास पाइरोक्यूमूलोनिंबस देखा गया है जो फ्रांस में पहली बार है। फ्रांस में बोर्दो के पास बीते कई दिनों से जंगल की आग धधक रही है।आग के बादल बनने की खबर आने के बाद आपातकालीन सेवाओं की चुनौती बढ़ गई है। आग की अप्रत्याशित प्रवृत्ति की वजह से अधिकारी इलाकों को खाली कराने का दायरा बढ़ा सकते हैं।
बोमन का कहना है कि पूर्वी यूरोप में आग के बादल पैदा होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। अब तक इन्हें ज्यादातर कनाडा या ऑस्ट्रेलिया में ही देखा जाता रहा है। बोमन के मुताबिक, “यह बहुत गंभीर स्थिति है। यह हैरान करने वाला है लेकिन यह विनाशकारी और भयानक है, हम ऐसी चीजें और नहीं चाहते।”
Stocks to Watch: गुरुवार के कारोबारी सत्र में कई बड़े शेयर फोकस में रह सकते हैं। कुछ कंपनियों ने जून तिमाही के मजबूत नतीजे जारी किए हैं। कुछ के प्रदर्शन ने निवेशकों को निराश किया है। इसके अलावा एक सरकारी कंपनी में बड़ा मैनेजमेंट बदलाव भी हुआ है। आइए जानते हैं 30 जुलाई को किन 16 शेयरों पर बाजार की सबसे ज्यादा नजर रहेगी।
Eicher Motors
दोपहिया और कमर्शियल व्हीकल बनाने वाली कंपनी आयशर मोटर्स का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 21.4% बढ़कर 1,462 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 31.5% बढ़कर 6,632 करोड़ रुपये हो गया। मुनाफा और रेवेन्यू दोनों ही CNBC-TV18 के अनुमान से बेहतर रहे।
Dabur
एफएमसीजी कंपनी डाबर का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 15.3% बढ़कर 586 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 10.6% बढ़कर 3,764.3 करोड़ रुपये और EBITDA 11% बढ़कर 741.2 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 19.6% से बढ़कर 19.7% रहा। मुनाफा अनुमान से बेहतर रहा, जबकि बाकी आंकड़े अनुमान के मुताबिक रहे।
MOIL
सरकारी मैंगनीज माइनिंग कंपनी MOIL का जून तिमाही का नेट प्रॉफिट 70.1% बढ़कर 87.6 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल यह 51.5 करोड़ रुपये था। रेवेन्यू 6.6% बढ़कर 370.9 करोड़ रुपये और EBITDA 72.3% बढ़कर 135.8 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 22.6% से बढ़कर 36.6% हो गया।
Bajaj Housing Finance
बजाज ग्रुप की कंपनी बजाज हाउसिंग फाइनेंस का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 22.6% बढ़कर 715 करोड़ रुपये रहा। NII 9% बढ़कर 968 करोड़ रुपये और कुल आय 17.2% बढ़कर 3,063 करोड़ रुपये हो गई। कंपनी की एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ। ग्रॉस NPA 0.30% से घटकर 0.29% और नेट NPA 0.13% से घटकर 0.12% रहा।
Vedanta Oil & Gas
ऑयल एंड गैस कंपनी वेदांता ऑयल एंड गैस ने जून तिमाही में 945 करोड़ रुपये का प्रॉफिट दर्ज किया। पिछली तिमाही में कंपनी को 476 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। रेवेन्यू 3.1% घटकर 2,507 करोड़ रुपये और EBITDA 7.7% घटकर 814 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 34.1% से घटकर 32.5% पर आ गया।
Vedanta Iron & Steel
स्टील कंपनी वेदांता आयरन एंड स्टील ने जून तिमाही में 121 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया। पिछली तिमाही में कंपनी को 1,939 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। रेवेन्यू 5.2% घटकर 3,662 करोड़ रुपये और EBITDA 8.1% घटकर 508 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 14.3% से घटकर 14% रह गया।
Vedanta Power
बिजली कंपनी वेदांता पावर को जून तिमाही में 423 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। पिछली तिमाही में कंपनी ने 139 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। 487 करोड़ रुपये के एक्सेप्शनल लॉस का असर नतीजों पर दिखा, जबकि रेवेन्यू 31% बढ़कर 2,607 करोड़ रुपये रहा।
Waaree Energies
रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी वारी एनर्जीज का जून तिमाही का नेट प्रॉफिट 14.1% बढ़कर 850 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 79.2% बढ़कर 7,932 करोड़ रुपये और EBITDA 44.4% बढ़कर 1,440 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन 22.5% से घटकर 18.2% पर आ गया।
Cochin Shipyard
सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी कोचीन शिपयार्ड के डायरेक्टर (फाइनेंस) जोस वी. जे. अगले सात महीने तक CMD का अतिरिक्त प्रभार संभालते रहेंगे। उनकी नियुक्ति 1 अगस्त 2026 से बढ़ाई गई है। इस विस्तार को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने मंजूरी दी है।
Star Health
हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी स्टार हेल्थ का जून तिमाही का मुनाफा 438 करोड़ रुपये से बढ़कर 550 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी की आय भी बढ़कर 4,917 करोड़ रुपये पहुंच गई। पिछले साल की समान तिमाही में यह 4,336 करोड़ रुपये थी।
MTAR Tech
इंजीनियरिंग कंपनी MTAR Tech का जून तिमाही का नेट प्रॉफिट 10.8 करोड़ रुपये से बढ़कर 50.2 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 157 करोड़ रुपये से बढ़कर 360 करोड़ रुपये और EBITDA 28 करोड़ रुपये से बढ़कर 85 करोड़ रुपये पहुंच गया। EBITDA मार्जिन 18.1% से बढ़कर 23.5% हो गया।
Balkrishna Industries
टायर कंपनी बालकृष्ण इंडस्ट्रीज का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 287 करोड़ रुपये से बढ़कर 432 करोड़ रुपये हो गया। आय बढ़कर 3,445 करोड़ रुपये और EBITDA 724 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 18.2% से बढ़कर 21.01% हो गया। कंपनी ने 4 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है।
TBO Tek
ट्रैवल टेक कंपनी TBO Tek का जून तिमाही का प्रॉफिट 32.4% बढ़कर 83.3 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 81.1% बढ़कर 925.7 करोड़ रुपये और EBITDA 86.6% बढ़कर 138 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 14.4% से बढ़कर 14.9% रहा।
TeamLease
स्टाफिंग और एचआर सर्विसेज कंपनी TeamLease का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 31.4% बढ़कर 34.9 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 5.8% बढ़कर 3,034.7 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA 2.7% बढ़कर 31.5 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 1% पर स्थिर बना रहा।
Triveni Engineering
इंजीनियरिंग और शुगर सेक्टर की कंपनी त्रिवेणी इंजीनियरिंग का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 2.1 करोड़ रुपये से बढ़कर 3.65 करोड़ रुपये हो गया। कंसोलिडेटेड आय 1,950 करोड़ रुपये और EBITDA 52.9 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 1.96% से बढ़कर 2.71% हो गया।
Redington
आईटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी रेडिंग्टन का जून तिमाही का मुनाफा 76.6% बढ़कर 486 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 34.6% बढ़कर 34,922 करोड़ रुपये और EBITDA 76.8% बढ़कर 708 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 1.5% से बढ़कर 2% रहा।
कल ये कंपनियां तिमाही नतीजे जारी करेंगी
गुरुवार को कई बड़ी कंपनियां जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी करेंगी। इनमें आर्कियन केमिकल इंडस्ट्रीज, अजंता फार्मा, अपोलो पाइप्स, AWL एग्री बिजनेस, बजाज फाइनेंस, बेस्ट एग्रोलाइफ, एक्साइड इंडस्ट्रीज, ICRA और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजों पर निवेशकों की नजर रहेगी।
Crude Oil Price: कच्चे तेल में तूफानी तेजी, ट्रंप की धमकी के बाद 7% उछलकर 90 डॉलर के पार पहुंचा भाव
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर बिगड़ते दिख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को नई सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रहे तो अमेरिका जोरदार जवाब देगा। इसके चलते कच्चे तेल के दामों में जोरदार तेजी आई और वो 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए।
ट्रंप बोले- ईरान पर करेंगे जोरदार हमला
ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया है। वहीं, अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित गुटों पर संयुक्त हवाई हमले किए हैं। इन घटनाओं से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
Fox News से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा, “हम ईरान पर जोरदार हमला करेंगे।” ट्रंप ने साफ कहा कि जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों का जवाब सीधे ईरान को दिया जाएगा। उनके बयान से संकेत मिला है कि दोनों देशों के बीच तनाव फिर से तेजी से बढ़ सकता है।
100 डॉलर तक जा सकता है कच्चा तेल
बुधवार को रात 8.20 बजे तक क्रूड 7.68% चढ़कर 90.54 डॉलर प्रति बैरल पर था। DBS बैंक का अनुमान है कि आने वाले दिनों में ब्रेंट क्रूड 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकता है। वहीं, OPEC+ भी अक्टूबर से कुछ समय के लिए उत्पादन बढ़ाने की योजना टाल सकता है।
DBS बैंक के एनर्जी रिसर्च हेड सुव्रो सरकार का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के संकेत जरूर दिए हैं, लेकिन इससे हॉर्मुज का संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगर तनाव कम भी होता है, तब भी कच्चे तेल की कीमतों के 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे जाने की संभावना फिलहाल कम दिखती है।
हूती विद्रोही वसूल सकते हैं शुल्क
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन का हूती समूह अब दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों से शुल्क लेने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने हूती विद्रोहियों से सीधे बातचीत की है। मकसद यह है कि उसके तेल टैंकरों को इस रास्ते से सुरक्षित गुजरने दिया जाए।
अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 24 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में अमेरिका का कच्चे तेल का भंडार करीब 33 लाख बैरल घटा है।
OPEC+ भी ले सकता है बड़ा फैसला
रॉयटर्स के मुताबिक, OPEC+ अक्टूबर से अगले तीन महीने तक उत्पादन बढ़ाने की योजना रोक सकता है। अगर ऐसा होता है तो बाजार में सप्लाई सीमित रह सकती है। इससे कच्चे तेल की कीमतों को और सहारा मिल सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर उत्पादन में कटौती के साथ ईरान युद्ध का संकट गहराता है, तो कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं।
Waaree Energies Q1 Results: सोलर कंपनी को ₹850 करोड़ का मुनाफा, अमेरिका में मिली बड़ी राहत
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अमेरिका ने चीन समेत दूसरे देशों से आने वाले इंसानों जैसे दिखने वाले (ह्यूमनॉइड) और चार पैरों पर चलने वाले (क्वाड्रुपेड) रोबोट के आयात पर रोक लगा दी है। अमेरिका के फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने इस फैसले के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिमों का हवाला दिया है। यह प्रतिबंध उन रोबोट पर लागू होगा जो अब तक अमेरिका में नहीं पहुंचे हैं। पहले से इस्तेमाल हो रहे रोबोट इस दायरे में नहीं आएंगे। इस फैसले पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने कहा कि अमेरिका बिना किसी ठोस सबूत के चीनी कंपनियों को निशाना बना रहा है। चीन ने चेतावनी दी कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी जवाबी कदम उठाएगा। अमेरिका बोला- अहम सप्लाई चेन को सुरक्षित करना जरूरी FCC चेयरमैन ब्रेंडन कार ने कहा कि यह फैसला अमेरिका की अहम सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए लिया गया है। उनके मुताबिक विदेशों में बने एडवांस रोबोट अमेरिकी इन्फ्रास्ट्रक्चर, डेटा और सप्लाई नेटवर्क के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का जोखिम पैदा कर सकते हैं। FCC के इस आदेश में ह्यूमनॉइड रोबोट के अलावा रोबोट डॉग और पावर इनवर्टर शामिल हैं। पावर इन्वर्टर का इस्तेमाल सोलर और दूसरी रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम, डेटा सेंटर और कई घरेलू उपकरणों में होता है। इसलिए इस फैसले का असर ऊर्जा और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर भी पड़ सकता है। चीन ने कहा- राष्ट्रीय सुरक्षा का बहाना बनाया जा रहा अमेरिका के इस फैसले पर चीन ने कड़ा विरोध जताया है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा का बहाना बनाकर चीनी कंपनियों को निशाना बना रहा है। चीन अपनी कंपनियों के कानूनी अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए जरूरी सभी कदम उठाएगा। माओ निंग ने कहा कि ऐसी रोक लगाने से अमेरिका ज्यादा मजबूत नहीं बनेगा और न ही उसकी कंपनियां दूसरे देशों की कंपनियों से बेहतर हो जाएंगी। इसका नुकसान आखिरकार अमेरिकी कंपनियों और वहां के आम लोगों को भी उठाना पड़ेगा। दुनिया के 85% ह्यूमनॉइड रोबोट चीन के हैं चीन इस समय दुनिया का सबसे बड़ा ह्यूमनॉइड रोबोट निर्माता है। AP के मुताबिक दुनिया में तैनात करीब 85% ह्यूमनॉइड रोबोट चीन के हैं। अमेरिकी निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि 2030 तक चीन का ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार 15 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। टेक्नोलॉजी रिसर्च फर्म ओम्डिया के मुताबिक 2025 में दुनिया भर में करीब 15 हजार ह्यूमनॉइड रोबोट भेजे गए। इनमें चीन की दो बड़ी कंपनियां ‘यूनिट्री’ और ‘एजीआईबॉट’ ने अकेले पांच-पांच हजार से ज्यादा रोबोट की सप्लाई की। दूसरी तरफ अमेरिकी कंपनियां ‘टेस्ला’ और ‘फिगर एआई’ कुछ 100 या उससे भी कम रोबोट भेज सकीं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीनी कंपनियों ने कम लागत में बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की क्षमता बहुत तेजी से विकसित की है। ऐसे में अमेरिकी बाजार बंद होने से उन्हें एक बड़े खरीदार का नुकसान जरूर होगा। हालांकि, चीन अब यूरोप जैसे बाजारों पर भी तेजी से फोकस कर रहा है, ताकि अमेरिका पर निर्भरता कम हो सके। तकनीकी सहयोग पर असर विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रतिबंध से अमेरिकी और चीनी तकनीकी कंपनियों के बीच सहयोग प्रभावित हो सकता है। उदाहरण के लिए, एनवीडिया (Nvidia) ने जून में एक ह्यूमनॉइड रोबोट डिजाइन पेश किया था, जिसमें चीन की यूनिट्री कंपनी के चेसिस का उपयोग किया गया था। हाल ही में पेंटागन ने यूनिट्री को उन कंपनियों की सूची में शामिल किया है, जिन पर चीनी सेना की मदद करने का आरोप है, हालांकि बीजिंग ने इन दावों को खारिज किया है।
US Tariff: रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अमेरिकी संसद के उच्च सदन (सीनेट) ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने से जुड़े एक अहम विधेयक को आगे बढ़ा दिया है। इस फैसले के साथ ही सीनेट में इस बिल पर औपचारिक बहस और अंतिम वोटिंग का रास्ता साफ हो गया है। अगर यह ब
अमेरिका में यूनिवर्सिटीज को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर सवालों के बीच नया खुलासा हुआ है। इससे यूनिवर्सिटीज और ट्रम्प प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। शिक्षा विभाग के पोर्टल के मुताबिक, हार्वर्ड को विदेशी स्रोतों से रिकॉर्ड 43,100 करोड़ रु. मिले हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है। इसमें से छह हजार करोड़ चीन से आए हैं। ट्रम्प प्रशासन की वीसा नीतियों और प्रवासियों पर सख्ती के बीच अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर विदेशी नागरिकों और पैसे पर अत्यधिक निर्भरता का आरोप लग रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौते की बात कही जा रही है। ट्रम्प प्रशासन से जांच शुरू करने की मांग उठी है। अन्य अमेरिकी यूनिवर्सिटीज भी राडार पर यह विवाद सिर्फ हार्वर्ड तक सीमित नहीं है। अमेरिका के वॉच-लिस्ट में शामिल शीर्ष पांच चीनी कंपनियों (जैसे हुआवेई और एयर चाइना) ने देश के अलग-अलग कॉलेजों को करीब 1,140 करोड़ रु. दिए हैं। इन्हें भी राडार पर लेकर जांच हो सकती है। लैब की जासूसी और सैन्य तकनीक चोरी का खतरा अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आ रहा विदेशी पैसा सिर्फ दान नहीं, बल्कि रणनीतिक घुसपैठ का जरिया बन चुका है। फंड के इस खेल से अमेरिका के सामने कई बड़े खतरे खड़े हो गए हैं। यूनिवर्सिटी लैब्स में विदेशी फंड के जरिए गोपनीय रिसर्च और डेटा चुराए जाने की आशंका जताई जा रही है। आरोप हैं कि चीनी सेना से जुड़ी संस्थाएं फंडिंग देकर अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल अपने हथियारों को तैयार करने में कर सकती हैं। हार्वर्ड और विदेशी संस्थाओं में 7,089 वित्तीय सौदे हुए हार्वर्ड ने विदेशी संस्थाओं के साथ 7,089 अलग-अलग वित्तीय सौदे किए हैं। इस रिकॉर्ड वित्तीय सौदे के कारण हार्वर्ड अमेरिका में विदेशी फंडिंग हासिल करने वाला शीर्ष संस्थान बना है। हार्वर्ड को चीनी सैन्य विकास से जुड़ी संस्थाओं से करीब 4 करोड़ रुपए और विदेशी टैलेंट प्रोग्राम से 4 करोड़ रु. मिले हैं। ट्रम्प ने कहा था- यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निशाने पर रहती है। पिछले साल (16 अप्रैल, 205) उन्होंने एक बयान में कहा था कि यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है और यह सिर्फ वोक कर्मचारियों की भर्ती कर रहा है। अब हार्वर्ड को दुनिया की सबसे बेहतर यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की किसी भी लिस्ट में नहीं गिना जाना चाहिए। हार्वर्ड एक मजाक है जो नफरत और मूर्खता सिखाता है। इसे अब सरकारी पैसा नहीं मिलना चाहिए। ट्रम्प ने इस बयान के एक दिन पहले ही हार्वर्ड की 18 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग रोकी थी और उसका टैक्स फ्री दर्जा खत्म करने की बात कही थी। ————-
ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की टैक्स छूट खत्म कर सकते हैं:₹18 हजार करोड़ की फंडिंग भी रोकी; ट्रम्प यूनिवर्सिटी पर कंट्रोल चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्स छूट खत्म करने की बात कही। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्ट छूट पर फिर से विचार किया जा सकता है। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका में यूनिवर्सिटीज को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर सवालों के बीच नया खुलासा हुआ है। इससे यूनिवर्सिटीज और ट्रम्प प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। शिक्षा विभाग के पोर्टल के मुताबिक, हार्वर्ड को विदेशी स्रोतों से रिकॉर्ड 43,100 करोड़ रु. मिले हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है। इसमें से छह हजार करोड़ चीन से आए हैं। ट्रम्प प्रशासन की वीसा नीतियों और प्रवासियों पर सख्ती के बीच अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर विदेशी नागरिकों और पैसे पर अत्यधिक निर्भरता का आरोप लग रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौते की बात कही जा रही है। ट्रम्प प्रशासन से जांच शुरू करने की मांग उठी है। अन्य अमेरिकी यूनिवर्सिटीज भी राडार पर यह विवाद सिर्फ हार्वर्ड तक सीमित नहीं है। अमेरिका के वॉच-लिस्ट में शामिल शीर्ष पांच चीनी कंपनियों (जैसे हुआवेई और एयर चाइना) ने देश के अलग-अलग कॉलेजों को करीब 1,140 करोड़ रु. दिए हैं। इन्हें भी राडार पर लेकर जांच हो सकती है। लैब की जासूसी और सैन्य तकनीक चोरी का खतरा अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आ रहा विदेशी पैसा सिर्फ दान नहीं, बल्कि रणनीतिक घुसपैठ का जरिया बन चुका है। फंड के इस खेल से अमेरिका के सामने कई बड़े खतरे खड़े हो गए हैं। यूनिवर्सिटी लैब्स में विदेशी फंड के जरिए गोपनीय रिसर्च और डेटा चुराए जाने की आशंका जताई जा रही है। आरोप हैं कि चीनी सेना से जुड़ी संस्थाएं फंडिंग देकर अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल अपने हथियारों को तैयार करने में कर सकती हैं। हार्वर्ड और विदेशी संस्थाओं में 7,089 वित्तीय सौदे हुए हार्वर्ड ने विदेशी संस्थाओं के साथ 7,089 अलग-अलग वित्तीय सौदे किए हैं। इस रिकॉर्ड वित्तीय सौदे के कारण हार्वर्ड अमेरिका में विदेशी फंडिंग हासिल करने वाला शीर्ष संस्थान बना है। हार्वर्ड को चीनी सैन्य विकास से जुड़ी संस्थाओं से करीब 4 करोड़ रुपए और विदेशी टैलेंट प्रोग्राम से 4 करोड़ रु. मिले हैं। ट्रम्प ने कहा था- यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निशाने पर रहती है। पिछले साल (16 अप्रैल, 205) उन्होंने एक बयान में कहा था कि यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है और यह सिर्फ वोक कर्मचारियों की भर्ती कर रहा है। अब हार्वर्ड को दुनिया की सबसे बेहतर यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की किसी भी लिस्ट में नहीं गिना जाना चाहिए। हार्वर्ड एक मजाक है जो नफरत और मूर्खता सिखाता है। इसे अब सरकारी पैसा नहीं मिलना चाहिए। ट्रम्प ने इस बयान के एक दिन पहले ही हार्वर्ड की 18 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग रोकी थी और उसका टैक्स फ्री दर्जा खत्म करने की बात कही थी। ————-
ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की टैक्स छूट खत्म कर सकते हैं:₹18 हजार करोड़ की फंडिंग भी रोकी; ट्रम्प यूनिवर्सिटी पर कंट्रोल चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्स छूट खत्म करने की बात कही। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्ट छूट पर फिर से विचार किया जा सकता है। पूरी खबर पढ़ें…
Sell-off in chip stocks : अमेरिका में चिप शेयरों में बिकवाली दक्षिण कोरिया पर भारी पड़ रही है। कॉस्पी में आज करीब 11% की भारी गिरावट दिख रही है। इस बिकवाली का एक बड़ा कारण कोस्पी में बढ़ती मार्जिन पोजिशन भी है। जब बाजार में बिकवाली बढ़ती है तो मार्जिन ट्रिगर होते हैं और ब्रोकर्स सौदे काट देते हैं। मार्जिन ट्रेडिंग की समस्या सिर्फ कोस्पी की नहीं,पूरी दुनिया में है। अमेरिका,चीन के साथ साथ भारत में भी मार्जिन पोजिशन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। ये भारत और दुनिया भर के बाजारों के लिए कितनी बड़ी चुनौती है,इस पर खास चर्चा के लिए हमारे साथ हैं स्टॉकएज (Stockedge) के को-फाउंडर विवेक बजाज। लेकिन इसके पहले जान लेते हैं कि दुनिया के बड़े बाजारों में क्या है मार्जिन पोजिशन (लेवरेज पोजिशन) की स्थिति।
रिकॉर्ड स्तर पर लेवरेज पोजिशन
अमेरिका में लेवरेज पोजिशन 1.53 लाख करोड़ डॉलर पर है। वहीं, चीन में यह 3 लाख करोड़ यूआन, दक्षिण कोरिया में 39 अरब डॉलर और भारत में 1.38 लाख करोड़ रुपए पर है। भारत में MTF पोजिशन की बात करें तो यह FY23 में 0.25 लाख करोड़ रुपए,FY24 में 0.47 लाख करोड़ रुपए, FY 25 में 0.72 लाख करोड़ रुपए। सितंबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपए, दिसंबर 2025 में 1.16 लाख करोड़ रुपए और जुलाई 2026 में 1.38 लाख करोड़ रुपए थी।
मार्केट कैप में MTF पोजिशन का हिस्सा
मार्केट कैप में MTF पोजिशन के हिस्से की बात करें तो चीन में यह कुल मार्केट कैप का 2.4%, अमेरिका में कुल मार्केट कैप का 2%, दक्षिण कोरिया में कुल मार्केट कैप का 0.8% और भारत में कुल मार्केट कैप का 0.34% है।
कोस्पी की गिरावट का लेवरेज कनेक्शन
27 मई को कोरिया में सिंगल स्टॉक लेवरेज ETF लॉन्च किया गया। इस ETF में सिर्फ सैमसंग और SK Hynix शामिल हैं। AI चिप रैली में रिटेल ने अंधाधुंध पैसा लगाया। इसमें कुछ ही हफ्तों में 9.48 अरब डॉलर की खरीदारी हुई। इस ETF के 92 फीसदी होल्डर रिटेल निवेशक हैं। मई के अंत तक रिटेल मार्जिन लोन 39 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
कोस्पी: मार्जिन कॉल और फोर्स सेलिंग
कोस्पी में सैमसंग और SK Hynix की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा है। सैमसंग और SK Hynix में सबसे ज्यादा लेवरेज पोजिशन है। चिप शेयरों में बिकवाली से सैमसंग और SK Hynix में तेज बिकवाली आई। एक महीने में सैमसंग 38% और SK Hynix 42% टूट गया। तेज बिकवाली से ब्रोकर्स ने मार्जिन पोजिशन काटी।
मार्जिन ट्रेडिंग भारत के लिए चुनौती?
भारत में भी मार्जिन ट्रेडिंग या MTF तेजी से बढ़ रही है। 27 जुलाई को MTF 1.38 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। हालांकि कुल मार्केट कैप में MTF का हिस्सा 0.34% ही है।
एक्सपर्ट की राय
स्टॉकएज (Stockedge) के को-फाउंडर विवेक बजाज ने कहा कि सालों से मार्जिन ट्रेडिंग चलती आ रही है। यह अमेरिका की उपज है। अमेरिकी लीवरेज पसंद करते है। वे हर तरह के इंस्ट्रूमेंट में लीवरेज क्रिएट करते हैं। वहां पर भी यह काफी बड़ा होता जा रहा है। टिपिकली जब भी किसी एसेट में बबल बनता है तो वह पूरे बाजार में बबल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए जैसे 2008 में रियल एस्टेट बबल बना उसमें रियल एस्टेट लीवरेज बाजार में बबल बनने का कारण बना। जब बबल फटता है तो जहां भी लीवरेज होता है वहां असर पड़ता है।
हम सभी जानते हैं कि इस समय दुनिया में एआई ड्रिवेन बबल बन चुका है। लेकिन ये कब फटेगा हमें नहीं पता है। इस नजरिए से कोस्पी इस समय बहुत बड़ा केस स्टडी बन गया है। कोरियन मार्केट अपने हाई से 33 फीसदी टूट चुका है। लेकिन लीवरेज बबल फटने पर इसमें और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
विवेक बजाज ने आगे कहा कि भारत में मार्जिन ट्रेडिंग या MTF 2000 शेयरों में हैं। वहीं, कोरिया में सिर्फ 20 शेयरों में भारत से कई गुना बड़ा लीवरेज्ड पोजीशन है। भारत में फ्री फ्लोट बेसिस पर MTF पोजीशन मार्केट कैप का 0.74 फीसदी है। ऐसे में भारत में मार्जिन ट्रेंडिंग का बड़ा रिस्क नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि कोरिया का बाजार एक ट्रिगर का काम करेगा। अगर वहां,लीवरेज्ड शेयरों में गिरावट आती है तो इसका असर भारत सहित पूरे ग्लोबल मार्केट पर देखने को मिलेगा। ऐसे में जहां भी लीवरेज ज्यादा होगा वहां दबाव दिखेगा।
MTF क्या है?
मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी ‘आज खरीदें,बाद में भुगतान करें’के मॉडल की तरह काम करता है। इसमें निवेशकों को ट्रेडिंग के लिए जरूरी पैसों का कुछ हिस्सा ही चुकाना पड़ता है और बाकी पैसा ब्रोकर लोन की तरह देता है। जैसे कि मान लें कि 100 रुपये के भाव वाले 1 हजार शेयरों की ट्रेडिंग करनी है तो 1 लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी। अब या तो आप पूरे एक लाख रुपये अपने पास से लगाएं या 30 फीसदी यानी 30 हजार रुपये खुद का लगाएं और बाकी 70 फीसदी यानी 70 हजार रुपये ब्रोकर से लोन के रूप में मिल जाएगा।
मार्जिन ट्रेडिंग का फायदा ट्रेडर्स और ब्रोकर्स दोनों को मिलता है। ट्रेडर्स ज्यादा पैसा लगाने के लिए लोन ले सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमाने की कोशिश कर सकते हैं, वहीं ब्रोकर्स दिए गए लोन पर ब्याज कमाते हैं।
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