Nora Fatehi: जब सेट पर झगड़े के दौरान नोरा फतेही के को-स्टार ने बाल खींच जड़ा दिया उन्हें थप्पड़…

Nora Fatehi: बॉलीवुड की सबसे पसंदीदा डांसर और स्टाइल आइकॉन बनने से पहले, नोरा फतेही इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही एक नई कलाकार थीं। एक पुराने इंटरव्यू में, नोरा ने अपनी पहली फ़िल्म ‘रोर: टाइगर्स ऑफ द सुंदरबंस’ के सेट से जुड़ी एक हैरान करने वाली घटना के बारे में बताया, जहां उनके को-स्टार के साथ हुई लड़ाई काफ़ी बढ़ गई थी। यह घटना 2014 में हुई थी, जब वे बांग्लादेश में फिल्म की शूटिंग कर रही थीं।

सालों बाद, जब नोरा फतेही आयुष्मान खुराना के साथ ‘एन एक्शन हीरो’ फ़िल्म के गाने ‘जेहड़ा नशा’ को प्रमोट करने के लिए ‘द कपिल शर्मा शो’ में आईं, तो उन्होंने उस लड़ाई के बारे में खुलकर बात की। नोरा फतेही ने दावा किया कि उनके को-स्टार ने उनके साथ बदतमीज़ी की, इसलिए उन्होंने उसे थप्पड़ मार दिया।

उसने भी एक्ट्रेस को थप्पड़ मारा और गुस्से में उनके बाल भी खींचे। नोरा ने बताया, “हम बांग्लादेश के सुंदरबन के जंगलों में शूटिंग कर रहे थे। वहां एक को-एक्टर था जो बहुत बदतमीज था। इसलिए, मैंने उसे थप्पड़ मार दिया।”

नोरा ने आगे बताया, “मैंने फिर थप्पड़ मारा। फिर उसने मेरे बाल खींचे। मैंने भी उसके बाल खींचे। फिर बहुत झगड़ा हुआ। निर्देशक को बीच में आना पड़ा।” कहानी सुनकर कपिल ने मजाक में कहा, “उसे भुगतना पड़ेगा।” इस पर नोरा ने कहा, “कसम से, बिल्कुल कुत्ते जैसा।”

रोर 2014 में रिलीज हुई एक एडवेंचर थ्रिलर फिल्म है, जिसे कमल सदानह ने लिखा और निर्देशित किया है। यह फिल्म 31 अक्टूबर 2014 को रिलीज़ हुई थी। फिल्म में एक टीम के खतरनाक मिशन की कहानी दिखाई गई है, जिसमें वे एक ताकतवर सफेद बाघिन को मात देने की कोशिश करते हैं, जो अपने शावक की तलाश में बेताब है।

फिल्म के कलाकारों में पंडित के रूप में अभिनव शुक्ला, झुम्पा के रूप में हिमर्षा वेंकटसामी, फॉरेस्ट वार्डन के रूप में अचिंत कौर, भीरा के रूप में सुब्रत दत्ता, सीजे के रूप में नोरा फतेही, हीरो के रूप में अली कुली मिर्जा, कश्मीरी के रूप में आदिल चहल, चीना के रूप में वरिंदर सिंह घुमन, सूफी के रूप में आरन चौधरी, मधु के रूप में प्रणय दीक्षित और उदय के रूप में पुलकित जवाहर शामिल थे।

550 साल पुराने इस मंदिर में पानी नहीं, इस्तेमाल हुआ था 40 हजार किलो घी! वजह कर देगी हैरान

राजस्थान के बीकानेर में मौजूद भांडासर जैन मंदिर अपनी अनोखी कहानी और शानदार स्थापत्य कला के लिए मशहूर है। करीब 550 साल पुराने इस मंदिर से जुड़ी कई ऐसी मान्यताएं हैं, जो इसे देश की अन्य धरोहरों से अलग बनाती हैं। कहा जाता है कि इसके निर्माण में पानी की जगह हजारों किलो घी का इस्तेमाल किया गया था। यही वजह है कि यह मंदिर इतिहास, आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम माना जाता है। इसकी खूबसूरत नक्काशी, रंगीन चित्रकारी और प्राचीन वास्तुकला देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

हालांकि घी से निर्माण की कहानी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन यही लोककथा इस मंदिर को और भी खास बना देती है। सदियों बाद भी यह मंदिर अपनी अनोखी पहचान और आकर्षक विरासत के कारण लोगों को हैरान करता है।

पानी की कमी ने बदली निर्माण की कहानी

मंदिर का निर्माण वर्ष 1468 में जैन व्यापारी भांडासा ओसवाल के संरक्षण में शुरू हुआ था। उस समय बीकानेर क्षेत्र में पानी की भारी कमी थी। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, इसी समस्या के कारण मंदिर के गारे (मोर्टार) में पानी की जगह घी का उपयोग किया गया, जिसने इस मंदिर को बाकी धरोहरों से अलग पहचान दिलाई।

एक बूंद घी से शुरू हुई अनोखी दास्तान

लोककथा के मुताबिक, एक बार एक वास्तुकार ने भांडासा ओसवाल को गिरे हुए घी की एक बूंद बचाने को लेकर ताना मारा। इस बात से प्रेरित होकर व्यापारी ने ऐसा मंदिर बनाने का संकल्प लिया, जिसमें घी का इस्तेमाल ही इसकी खास पहचान बन जाए। यही कहानी आगे चलकर इस मंदिर की सबसे प्रसिद्ध किंवदंती बन गई।

कई दशकों में पूरा हुआ भव्य निर्माण

भांडासा ओसवाल का निधन 1514 में हो गया, लेकिन मंदिर का निर्माण कार्य रुका नहीं। कई कारीगरों और पीढ़ियों के प्रयासों के बाद यह भव्य जैन मंदिर लगभग 1554 में बनकर तैयार हुआ।

सोने की चमक और कलाकारी का अद्भुत नमूना

यह मंदिर जैन धर्म के पांचवें तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ को समर्पित है। इसकी दीवारों और छतों पर शानदार राजस्थानी कला देखने को मिलती है। यहां की बारीक भित्तिचित्र कला, शीशे का काम और सोने की पेंटिंग्स 24 तीर्थंकरों की कहानियों को जीवंत रूप देती हैं।

क्या आज भी निकलता है घी? रहस्य बरकरार

मंदिर से जुड़ी एक और लोकप्रिय मान्यता है कि गर्मियों के दिनों में इसके कुछ हिस्सों से घी या मक्खन जैसी चीजें रिसती हुई दिखाई देती हैं। हालांकि इसे लोकविश्वास माना जाता है, लेकिन यह दावा आज भी पर्यटकों की जिज्ञासा बढ़ाता है।

इतिहास और आस्था का अनोखा संगम

आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस ऐतिहासिक मंदिर की देखरेख करता है। चाहे इसे वास्तुकला का चमत्कार मानें या लोककथा का हिस्सा, भांडासर जैन मंदिर राजस्थान की उन धरोहरों में शामिल है, जिनकी कहानी सदियों बाद भी लोगों को आकर्षित करती है।

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योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि, यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ सारनाथ

Sarnath included in UNESCO World Heritage List

– यूपी की बौद्ध विरासत को मिली वैश्विक पहचान, बौद्ध स्थली सारनाथ बना चौथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल

– 28 वर्षों के इंतजार के बाद सारनाथ को मिला यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा, बना देश का 45वां विश्व धरोहर स्थल

– आगरा से आगे बढ़ा उत्तर प्रदेश का यूनेस्को विरासत मानचित्र, वैश्विक पहचान में शामिल हुई बौद्ध धरोहर

– यूनेस्को की मान्यता गौरवपूर्ण उपलब्धि,उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को मिलेगी नई वैश्विक गतिः जयवीर सिंह

Sarnath Uttar Pradesh News : लगभग 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिल गया है। योगी सरकार के प्रयास रंग लाए और अब सारनाथ भारत का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन गया है। दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में शनिवार को यह ऐतिहासिक घोषणा की गई। इस उपलब्धि के साथ बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में शामिल सारनाथ को वैश्विक विरासत के सर्वोच्च मंच पर नई पहचान मिली है। वहीं उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के मानचित्र पर नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
 

उल्लेखनीय है कि सारनाथ को 3 जुलाई 1998 को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट (संभावित सूची) में शामिल किया गया था। ऐसे में, लगभग 28 वर्षों बाद मिली यह मान्यता उत्तर प्रदेश के लिए भी विशेष महत्व रखती है। अब तक राज्य के तीनों विश्व धरोहर स्थल- ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी (आगरा क्षेत्र) तक सीमित थे। मगर, योगी सरकार के प्रयासों से सारनाथ भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है। इससे उत्तर प्रदेश की विश्व धरोहर पहचान अब पूर्वांचल तक विस्तृत हो गई है। इस कदम से राज्य की समृद्ध बौद्ध विरासत को वैश्विक मान्यता मिली है।

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चौखंडी और धामेक स्तूप

यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त इस विश्व धरोहर संपत्ति में चौखंडी स्तूप और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष शामिल हैं। ये दोनों स्थल एक-दूसरे से लगभग 626 मीटर की दूरी पर हैं। चौखंडी स्तूप भगवान बुद्ध और उनके पांच प्रथम शिष्यों के मिलन की स्मृति का प्रतीक है, जबकि पुरातात्विक परिसर में धामेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, प्राचीन विहारों के अवशेष तथा अशोक स्तंभ जैसे महत्वपूर्ण स्मारक शामिल हैं। ये सभी मिलकर सारनाथ के विश्व के प्रमुख बौद्ध आस्था और ज्ञान केंद्र के रूप में हुए विकास की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाते हैं।

 

बौद्ध धर्म सारनाथ क्यों महत्वपूर्ण?

सारनाथ, वह पावन धरती है जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद मानवता को अपना प्रथम उपदेश देकर 'धर्मचक्र प्रवर्तन' का शुभारंभ किया था। योगी सरकार के प्रयास से अब यह विश्व धरोहर के रूप में विशिष्ट पहचान प्राप्त कर चुका है। बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शामिल सारनाथ को प्राचीन बौद्ध ग्रंथों में 'ऋषिपत्तन' के नाम से वर्णित किया गया है।

यही वह ऐतिहासिक स्थल है जहां भगवान बुद्ध ने अपने पहले पांच शिष्यों को धर्म का उपदेश देकर करुणा, शांति और मध्यम मार्ग का संदेश समस्त मानवता तक पहुंचाया। आज यह गौरवशाली विरासत वैश्विक मंच पर और अधिक प्रतिष्ठित हो गई है। उल्लेखनीय है कि करीब 2600 वर्षों से सारनाथ बौद्ध आस्था और तीर्थ परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। यह स्थल आज भी बौद्ध मठ जीवन, प्राचीन स्थापत्य और समृद्ध कला विरासत का साक्षी है।

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28 वर्षों की प्रतीक्षा का प्रतिफल : जयवीर सिंह

योगी सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इसे उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि 'यह सम्मान प्रदेश की बहुआयामी सांस्कृतिक और सभ्यतागत धरोहर को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के सतत प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने आगे कहा, भगवान बुद्ध और रामायण की पावन भूमि उत्तर प्रदेश जैन, सूफी तथा अन्य आध्यात्मिक परंपराओं की भी समृद्ध विरासत समेटे हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने सभी आस्था और विरासत स्थलों के संरक्षण एवं विकास को समान प्राथमिकता दी है।
 

जयवीर सिंह ने ये भी कहा कि 28 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद सारनाथ को मिला यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को वैश्विक स्तर पर नई पहचान और गति मिलेगी। साथ ही, प्रदेश का शांति, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक समावेशिता का संदेश दुनिया के अधिक व्यापक समुदाय तक पहुंचेगा।'

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'सारनाथ की पहचान स्मारकों से आगे'

सारनाथ के यूनेस्को नामांकन की तैयारी में अहम भूमिका निभाने वाली संरक्षण वास्तु विशेषज्ञ आभा नारायण लांबा ने कहा कि 'सारनाथ की पहचान केवल इसके स्मारकों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यही वह पावन स्थली है जहां भगवान बुद्ध ने प्रथम धर्मदेशना दी, बौद्ध संघ की स्थापना हुई और बौद्ध स्थापत्य की प्रारंभिक परंपराओं का विकास हुआ। उन्होंने कहा कि लगभग ढाई हजार वर्षों से यहां बौद्ध तीर्थ परंपरा जीवित है, जो समग्र सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत सारनाथ को विश्व धरोहर के रूप में विशिष्ट बनाती है।'

 

हमारे सतत प्रयासों का परिणाम : अमृत अभिजात

पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि 'सारनाथ का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होना उत्तर प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने इसे योगी सरकार के पर्यटन स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम बताया।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को बौद्ध तीर्थाटन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में सारनाथ की हमेशा केंद्रीय भूमिका रही है। राज्य सरकार ने बौद्ध सर्किट को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार प्रमुखता से प्रस्तुत किया है। इसके लिए फैम ट्रिप (फैमिलियराइजेशन ट्रिप), ट्रैवल ट्रेड सहभागिता, बौद्ध उत्सवों के आयोजन तथा पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विशेष बल दिया गया।

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अमृत अभिजात ने आगे कहा कि अक्टूबर 2025 में लखनऊ को यूनेस्को की 'क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी' की मान्यता मिलना भी प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का प्रमाण है। अब सारनाथ को मिली विश्व धरोहर की मान्यता विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने, उनके प्रवास अवधि को विस्तार तथा उन्हें उत्तर प्रदेश के व्यापक बौद्ध सर्किट से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जालौन के पिछड़ेपन के जिम्मेदार अब घड़ियाली आंसू बहाकर युवाओं को गुमराह कर रहे

CM Yogi Adityanath Jalaun

CM Yogi Adityanath Jalaun: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जालौन में विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने बुंदेलखंड के पिछड़ेपन, सूखे और पलायन के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि लोगों को यह याद रखना चाहिए कि आखिर वे कौन लोग थे, जिन्होंने जालौन और बुंदेलखंड के पिछड़ेपन का आधार तैयार किया। जिन लोगों के काले कारनामों के कारण जालौन दस्यु प्रभावित क्षेत्र घोषित हो गया था, उन्हें भी याद करने की जरूरत है। सीएम योगी ने कहा कि बुंदेलखंड को अभाव और सूखे के कारण पलायन के लिए मजबूर करने वाले भी वे ही लोग थे। आज वही लोग घड़ियाली आंसू बहाकर नौजवानों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। 

 

उन्होंने सवाल किया कि यमुना, बेतवा और पहूज जैसी पावन नदियों की त्रिवेणी वाले क्षेत्र को आखिर क्यों पिछड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा और हर योजना में यह क्षेत्र पीछे क्यों दिखाई देता था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में शनिवार को जालौन के उरई, माधौगढ़ व कालपी विधानसभा क्षेत्रों में 1275 करोड़ रुपए की 375 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उरई के स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को किट/चेक/स्वीकृति पत्र भी वितरित किए। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जालौन और पूरा बुंदेलखंड अपनी पुरानी पहचान से बाहर निकलकर विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। आज बुंदेलखंड में 56 हजार एकड़ से बड़े क्षेत्रफल में भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र बीडा के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसकी कनेक्टिविटी का आधार जालौन बन रहा है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और फोरलेन कनेक्टिविटी ने जालौन की तस्वीर बदलने का काम किया है। अब यह क्षेत्र बीहड़ और दस्यु प्रभावित क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि विकास और नई संभावनाओं के क्षेत्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।

कालपी का कागज बना ग्लोबल ब्रांड

सीएम योगी ने कहाकि जालौन के कालपी में तैयार होने वाला हस्तशिल्प कागज अब स्थानीय पहचान से निकलकर वैश्विक ब्रांड बन रहा है। कालपी के इस पारंपरिक कागज को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और बाजार दोनों का विस्तार हुआ है। आज कालपी का कागज देश की सीमाओं को पार कर ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका, जर्मनी और जापान जैसे देशों तक पहुंच रहा है। कालपी के कागज की खासियत इसकी पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़ी पहचान है। जीआई टैग मिलने से इस उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान मिली है और इससे स्थानीय कारीगरों एवं उद्यमियों के लिए नए बाजार खुलने की उम्मीद बढ़ी है।

कोंच की रामलीला ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया

सीएम योगी ने कहा कि इतिहास हमें इस बात का आगाह करता है। महर्षि वेदव्यास ने यहां जन्म लिया इस पावन धारा में और कहते हैं भगवान कृष्ण के पौत्र सांब ने प्राचीन सूर्य मंदिर का निर्माण भी यहीं पर करवाया था। याद करिए कोंच की रामलीला ने लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। यानी रामलीला का इतिहास कैसे होना चाहिए। ऐसी उरई, माधवगढ़ और कालपी विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी धरा पर आज 1275 करोड़ रुपए की परियोजनाओं के लोकार्पण/शिलान्यास के लिए मुझे आने का अवसर प्राप्त हुआ।

 

सीएम योगी ने आदिशक्ति मां भगवती जालौन माता और बैरागढ़ की शारदा माता के श्रीचरणों में नमन करते हुए महर्षि वेदव्यास की पावन जन्मभूमि और इसी जालौन की तपोभूमि को कोटि-कोटि नमन किया। जालौन और कालपी अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और नाना साहेब पेशवा की समर भूमि के रूप में जो धरती जानी जाती हो, कालपी का हैंडमेड कागज और यहां की विश्व विख्यात मटर इस जनपद को एक नई पहचान दिलाते हैं।

अपराधी के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा कोई जगह नहीं

मुख्यमंत्री ने सपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज उत्तर प्रदेश का नौजवान देश-दुनिया में सीना चौड़ा कर चल रहा है और उसके सामने पहचान का संकट नहीं है। योगी ने कहा कि सपा शासन में बुंदेलखंड के संसाधनों का माफिया ने जमकर दोहन किया और विकास के नाम पर वसूली होती थी। बुंदेलखंड के विकास के लिए आने वाला पैसा सैफई में फिल्मी कार्यक्रमों पर खर्च किया जाता था। आज यही धन फोरलेन कनेक्टिविटी, युवाओं के रोजगार और किसानों के हित में खर्च हो रहा है।

 

गरीबों को राशन, पेंशन, आयुष्मान भारत और रसोई गैस जैसी योजनाओं का लाभ मिल रहा है कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि अब बेटियां सुरक्षित माहौल में स्कूल जा रहीं हैं। किसी बेटी से छेड़छाड़ या व्यापारी का उत्पीड़न करने वाले अपराधी के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा कोई जगह नहीं है। आज व्यापारी निर्भय होकर कारोबार और बेटियां स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

जालौन में सड़क-पेयजल परियोजनाओं को रफ्तार

सीएम योगी ने कहा कि जालौन जिले में सड़क, पेयजल और कनेक्टिविटी से जुड़ी कई परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है। गोहन-माधौगढ़ से मध्य प्रदेश सीमा तक जिला मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य पूरा हो चुका है। वहीं बंगरा-जगम्मनपुर मार्ग पर रामपुरा, निनावली, नारोल, राठौर और अनपुरा होते हुए मध्य प्रदेश सीमा तक टू-लेन सड़क का निर्माण भी पूरा होने की जानकारी दी गई। 

 

एट-बंगरा-बीकेपुर तथा कालपी-मदारीपुर संपर्क मार्ग भी तैयार हो चुके हैं। हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की नगरपालिका परिषद उरई, कोटा-मस्तकिल ग्राम पेयजल परियोजना और सलाघाट वाटर सप्लाई ग्रामीण पेयजल योजना पर काम जारी है। सीएम योगी ने कानून-व्यवस्था नीति का जिक्र करते हुए कहा कि संगठित अपराध में शामिल माफिया की 600 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त की गई हैं। नकल माफिया के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा रही। परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

जालौन में आएंगे रोजगार के नए अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि झांसी और चित्रकूट में बन रहे डिफेंस कॉरिडोर का लाभ जालौन को भी मिलेगा। जालौन से होकर कनेक्टिविटी विकसित होने के साथ यहां 56 हजार एकड़ में फ्यूचर रेडी इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनाने की योजना है, जिससे लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने जालौन में डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने की बात भी कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत आधुनिक तकनीक के विकास के लिए डेटा सेंटर महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा है। चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे का काम तेजी से चल रहा है। बुंदेलखंड के सभी सात जिलों को यूपी एग्रीज योजना में शामिल किया गया है। महिला शक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बैलैनी मिल्क प्रोड्यूसर के माध्यम से महिलाओं की क्षमता की सराहना की।

CM Yogi Adityanath Jalaun

सीएम योगी ने लाभार्थियों को प्रमाणपत्र, चेक वितरित किया 

  • गीता, रेनू, शकीला खातून और ममता (उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 13,14,30000 का चेक)
  • उमेदा (मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पत्र)
  • आस्था ( कन्या सुमंगला योजना के तहत चेक)
  • शैलेंद्र सिंह सेंगर (कृषि यंत्र)
  • शिवा त्रिपाठी (प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सोलार रूफ टॉप यंत्र, पत्र) 
  • विनय राजपूत (प्रधानमंत्री स्वनिध योजना के तहत पत्र)
  • रानी देवी (प्रधानमंत्री शहरीय आवास योजना के तहत पत्र)
  • समर सिंह (कुक्कुट योजना के तहत ब्याज मुक्त ऋण पत्र)
  • कुशाग्र गुप्ता (एआईएफ के तहत 4 करोड़ रुपए का चेक)
  • अंबदा रहमान (आयुष्मान भारत के तहत गोल्डन कार्ड)।

ये रहे मौजूद 

इस अवसर पर मंत्री संजय सिंह गंगवार, विधायक विनोद कुमार चतुर्वेदी, विधायक गौरी शंकर वर्मा, विधायक मूलचंद निरंजन, विधान परिषद सदस्य रमा निरंजन, विधान परिषद सदस्य बाबू लाल तिवारी, क्षेत्रीय अध्यक्ष राम किशोर साहू, जिलाध्यक्ष उर्विजा दीक्षित, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ घनश्याम अनुरागी, गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य बाबा बालक दास, कोऑपरेटिव बैंक के सभापति बृजभूषण सिंह मुन्नू, अपना दल के अध्यक्ष अनिल कोदारी, राष्ट्रीय लोक दल के जिलाध्यक्ष रविंद्र श्रीवास्तव, नगर पालिका परिषद उरई की अध्यक्ष गिरिजा चौधरी, नगर पालिका परिषद कोंच के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता, नगर पालिका परिषद जालौन के अध्यक्ष नेहा पुनीत आदि मौजूद रहे।

 

H1B Visa Fee: अमेरिका जाने वाले भारतीयों को बड़ी राहत! H-1B वीजा पर ट्रंप के ₹95 लाख की फीस पर कोर्ट ने दिया बड़ा झटका

US Court Blocks Trump H-1B Visa Fee: अमेरिका में रहने के लिए जारी होने वाले H-1B वीजा पर एक बड़ी राहत वाली खबर आई है। एक संघीय अपील अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को बड़ा कानूनी झटका दिया है। अदालत ने नए H-1B वीजा पर करीब 95 लाख रुपये की भारी-भरकम फीस लगाने वाले आदेश पर रोक हटाने से साफ इनकार कर दिया है।

बोस्टन स्थित ‘फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स’ की तीन जजों की पीठ ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें इस फीस को गैर-कानूनी करार दिया गया था। अदालत के इस फैसले से अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिकी टेक कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।

अदालत ने क्यों लगाई $100,000 की वीजा फीस पर रोक?

यूएस डिस्ट्रिक्ट जज लियो टी. सोरोकिन ने 8 जून 2026 के अपने आदेश में कहा था कि ट्रंप प्रशासन द्वारा इतनी बड़ी फीस वसूलना एक तरह का ‘अवैध टैक्स’ है, क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस ने राष्ट्रपति या कार्यपालिका को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं दिया है।

20 डेमोक्रेटिक शासित राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर इस याचिका में तर्क दिया गया कि राष्ट्रपति ने संसद से कानून पास कराने के बजाय सिर्फ एक राष्ट्रपति घोषणापत्र के जरिए इस फीस को लागू कर अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया है।

अपील अदालत ने 1989 के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अगर सरकार नागरिकों या कंपनियों पर कोई बड़ा वित्तीय बोझ (टैक्स या फीस) डालती है, तो उसके लिए संसद की स्पष्ट मंजूरी अनिवार्य है। ट्रंप प्रशासन यह साबित करने में विफल रहा कि उनके पास इसकी कानूनी मंजूरी थी।

क्या था ट्रंप प्रशासन का तर्क और फैसला?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर 2025 में एक प्रेसिडेंशियल प्रोक्लेमेशन के जरिए $100,000 की H-1B वीजा फीस लगाने का ऐलान किया था। प्रशासन का कहना था कि अमेरिकी कंपनियां कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को लाने के लिए H-1B वीजा कार्यक्रम का गलत इस्तेमाल करती हैं, जिससे अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छिन जाती हैं। सरकार के मुताबिक, इस भारी फीस का मकसद कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने से हतोत्साहित करना था।

भारतीय IT प्रोफेशनल्स और टेक कंपनियों के लिए राहत क्यों?

H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को आईटी, इंजीनियरिंग और विज्ञान जैसे विशेष क्षेत्रों में विदेशी कुशल पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। अमेरिका हर साल कुल 85,000 H-1B वीजा करीब 65,000 रेगुलर कोटा और 20,000 अमेरिका से मास्टर डिग्री हासिल करने वालों के लिए जारी करता है। इस कोटे का बड़ा हिस्सा भारत और चीन के पेशेवरों को मिलता है।

इस नए नियम से पहले, अमेरिकी कंपनियों को एक H-1B कर्मचारी को स्पॉन्सर करने के लिए औसतन $2,000 से $5,000 (लगभग 1.6 लाख से 4.1 लाख रुपये) ही देने पड़ते थे। $100,000 की फीस लागू होने से कंपनियों के लिए विदेशी प्रतिभाओं को बुलाना बेहद खर्चीला हो जाता।

आगे क्या होगा?

अपील अदालत का यह स्टे खारिज होने का मतलब है कि जब तक इस पूरे मामले की अंतिम सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक ट्रंप प्रशासन $100,000 की इस बढ़ी हुई फीस को लागू नहीं कर सकता है। यानी फिलहाल पुरानी फीस प्रक्रिया के तहत ही H-1B वीजा आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

Asian Games में कब टकराएंगी भारत पाक की पुरुष महिला क्रिकेट टीमें?

मौजूदा चैंपियन भारत और पाकिस्तान की पुरुष और महिला क्रिकेट टीम को जापान में होने वाले एशियाई खेलों में सीधे क्वार्टर फाइनल में जगह दी गई है।भारतीय महिला टीम जापान के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी, जबकि पुरुष टीम का मुकाबला प्रारंभिक चरण के मैच के बाद तय होगा। सेमीफाइनल में भारतीय महिला टीम का सामना बांग्लादेश या चीन में से किसी एक टीम से होगा।

भारतीय पुरुष टीम सेमीफाइनल में पाकिस्तान का सामना कर सकती है। एशियाई खेलों में पुरुषों की क्रिकेट प्रतियोगिता 24 सितंबर को शुरू होगी और उसका फाइनल मैच एक अक्टूबर को खेला जाएगा।

महिलाओं की प्रतियोगिता 17 से 22 सितंबर तक होगी। भारतीय महिला टीम फाइनल में पाकिस्तान से भिड़ सकती है। पुरुषों की प्रतियोगिता में 10 टीमें भाग ले रही हैं। प्रारंभिक चरण में ग्रुप ए में अफगानिस्तान, जापान और नेपाल तथा ग्रुप बी में हांगकांग, चीन, मलेशिया और ओमान शामिल होंगे।

दोनों प्रतियोगिताएं आइची प्रांत के कोरोजी एथलेटिक पार्क में टी20 प्रारूप में खेली जाएंगी।श्रेयस अय्यर भारतीय पुरुष टीम की, जबकि हरमनप्रीत कौर भारतीय महिला टीम की कप्तानी करेंगी।क्रिकेट चौथी बार एशियाई खेलों के कार्यक्रम का हिस्सा है। इससे पहले यह 2010 में ग्वांगझू, 2014 में इंचियोन और 2023 में हांगझोऊ खेलों का हिस्सा था।

ट्रम्प बोले- चीन-रूस जंग में आए तो अंजाम बुरा होगा:पुतिन-जिनपिंग ने मुझे यकीन दिलाया, वे ईरान को हथियार नहीं देंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन या रूस ईरान युद्ध में शामिल हैं। हालांकि उन्होंने धमकी दी कि अगर दोनों देशों ने इस युद्ध में दखल दिया तो इसके गंभीर नतीजे होंगे और यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हाल ही में बीजिंग में हुई उनकी मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिया था कि वे किसी भी हाल में ईरान को हथियार नहीं देंगे। चीनी कंपनियों के लिए भी यही चीज लागू है। ट्रम्प ने कहा मुझे जिनपिंग पर यकीन है। उन्होंने यह भी कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी उनसे कहा था कि वे ईरान को हथियार नहीं बेचेंगे। ट्रम्प ने कहा कि यूक्रेन जंग के बावजूद उनकी पुतिन से बातचीत जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका सीधे यूक्रेन को हथियार नहीं बेचता, बल्कि नाटो देशों को बेचता है। नाटो देश इन हथियारों की पूरी कीमत चुकाते हैं। उसके बाद वे इन्हें किस तरह आगे भेजते हैं, इसकी उन्हें जानकारी नहीं होती। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. नेतन्याहू अमेरिका जाएंगे, जंग के बाद पहली बार ट्रम्प से मुलाकात: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सोमवार को अमेरिका रवाना होंगे। वह राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ईरान जंग शुरू होने के बाद पहली बार होगी। 2. कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार: ईरान-अमेरिका में लगातार बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड का भाव मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। 3. कुवैत में 3 अमेरिकी ठिकानों पर हमला: ईरान ने शुक्रवार को कुवैत में मौजूद अमेरिका के तीन सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमला किया है। इसमें कैंप अरिफजान, कैंप दोहा और कैंप अदैरी को निशाना बनाया गया। 4. ईरान बोला- अमेरिका के आगे नहीं झुकेंगे: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान अमेरिका के सामने झुकेगा नहीं और उसकी धमकियां भी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने यह बयान किर्गिस्तान में SCO के विदेश मंत्रियों की बैठक में दिया। 5. होर्मुज में 28 क्रू मेंबर्स वाले LPG टैंकर पर हमला: ईरान के जलक्षेत्र में एक LPG टैंकर पर हमला हुआ। मोजाम्बिक के झंडे वाला यह टैंकर दिशा 28 भारतीय चालक दल के सदस्यों को लेकर जा रहा था। भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि सभी भारतीय सुरक्षित हैं। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

‘ईरान को जिनपिंग और पुतिन हथियार देते तो अच्छा नहीं होता, उनके लिए बहुत बुरा होता…’, युद्ध के बीच अचानक रूस और चीन को क्यों धमकाने लगे ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर ऐसा बयान जारी किया है, जो दिखने में चीन और रूस को दी जारी एक धमकी की तरह मालूम पड़ रहा है। उन्होंने ईरान का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान के मामले में जिन दो बड़े देशों का अक्सर जिक्र किया जाता है, वे इसमें शामिल नहीं हो रहे हैं।इसके

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नेपाल के प्रधानमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट में दखल का आरोप:3 जजों पर इस्तीफे का दवाब बना रहे बालेन शाह; अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर सुप्रीम कोर्ट को अपने पक्ष में करने की कोशिश के आरोप लगे हैं। तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट्स (ICJ) ने संयुक्त बयान जारी कर यह आरोप लगाए हैं। संगठनों का कहना कि सरकार तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों पर इस्तीफा देने का दबाव बना रही है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ महाभियोग लाया जा सकता है। संगठनों का कहना है कि सरकार का मकसद सुप्रीम कोर्ट की संरचना बदलना है। उनका आरोप है कि हाल के महीनों में ऐसे कई कदम उठाए गए हैं जिनसे अदालत की स्वतंत्रता कमजोर हो सकती है और संवैधानिक मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है। मुख्य न्यायधीश की नियुक्ति को लेकर भी विवाद बयान में मनोज कुमार शर्मा को नेपाल का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। शर्मा उस समय वरिष्ठता क्रम में चौथे स्थान पर थे। उनसे सीनियर तीन न्यायाधीश को नजरअंदाज कर दिया गया। इसी वजह से विवाद शुरू हुआ। नेपाल में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को ही मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। इस बार इस परंपरा का पालन नहीं किया गया और मनोज शर्मा को तब यह पद दिया गया जब उनसे सीनियर जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल मौजूद थे। इसके अलावा संगठन का आरोप है कि मनोज कुमार शर्मा के खिलाफ मिली शिकायतों की भी खुली और निष्पक्ष जांच नहीं की गई। संसदीय सुनवाई समिति को शर्मा के खिलाफ कुल 16 शिकायतें मिली थीं। हालांकि ये शिकायतें गोपनीय रखी गई और मीडिया के सामने पेश नहीं की गईं। बिना सबूत के जजों पर इस्तीफे का दबाव बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में शर्मा से तीन सीनियर जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि अब तक इन तीनों के खिलाफ ऐसा कोई सार्वजनिक आरोप या ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने कोई गंभीर संवैधानिक या कानूनी गलती की है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि नेपाल के संविधान के मुताबिक, किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होते ही उसे तुरंत निलंबित कर दिया जाता है। अगर सुप्रीम कोर्ट के तीनों वरिष्ठ न्यायाधीशों को एक साथ निलंबित किया गया तो अदालत की संरचना और कामकाज पर बड़ा असर पड़ेगा। यह ऐसे समय में होगा, जब सुप्रीम कोर्ट सरकार के कई अहम फैसलों और संवैधानिक मामलों की सुनवाई कर रही है। संगठनों का कहना है कि अगर बिना ठोस संवैधानिक आधार के महाभियोग का इस्तेमाल किया गया तो इससे यह संदेश जाएगा कि सरकार अदालत की संरचना बदलकर लंबित मामलों के फैसलों को प्रभावित करना चाहती है। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर जनता का भरोसा भी कमजोर हो सकता है। संवैधानिक परिषद में बदलाव पर आपत्ति जताई इन संगठनों ने मई 2026 में संवैधानिक परिषद अधिनियम में अध्यादेश के जरिए किए गए संशोधन पर भी आपत्ति जताई है। नेपाल में संवैधानिक परिषद एक अहम संस्था है। यही परिषद मुख्य न्यायाधीश, चुनाव आयोग, मानवाधिकार आयोग और अन्य संवैधानिक निकायों के प्रमुखों की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश करती है। विवाद इस बात पर है कि बालेन शाह सरकार ने मई 2026 में संसद से कानून पारित कराने के बजाय अध्यादेश के जरिए परिषद के काम करने के नियम बदल दिए। पहले बैठक के लिए ज्यादा सदस्यों की मौजूदगी जरूरी थी। नियुक्तियों पर व्यापक सहमति या पूरे परिषद के बहुमत की जरूरत पड़ती थी। अब संशोधन के बाद कम सदस्यों की मौजूदगी में भी बैठक हो सकती है। इतना ही नहीं बैठक में मौजूद सदस्यों के साधारण बहुमत से फैसला लिया जा सकता है। —————————— नेपाल से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा:भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात करेंगे; 3 महीने में ही फैसले से पलटे
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) पहली बार अपने बनाए नियम से हटकर विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने तय किया था कि वह किसी भी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बालेन शाह भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…