Nagabandham OTT Release: विराट कर्णा-नभा नटेश स्टारर ‘नागबंधम’ इस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देने जा रही दस्तक

Nagabandham OTT Release: ‘नागबंधम’ का निर्देशन अभिषेक नामा ने किया है, जबकि इसे NIK स्टूडियोज़ के बैनर तले किशोर अन्नापुरेड्डी और निशिता ने प्रोड्यूस किया है। इस पौराणिक फैंटेसी एडवेंचर फिल्म में विराट कर्णा, नभा नटेऐश्वर्या मेनन, जगपति बाबू, मुरली शर्मा, महेश मांजरेकर और ऋषभ साहनी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।

प्राइम मेंबर्स ‘नागबंधम’ को 24 जुलाई 2026 से प्राइम वीडियो पर देख सकेंगे। यह फिल्म तेलुगु के साथ-साथ तमिल, मलयालम और कन्नड़ में डब वर्जन में भी उपलब्ध होगी।

प्राइम वीडियो, जो भारत के सबसे पसंदीदा एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म्स में से एक है, ने आज अपनी नई फिल्म ‘नागबंधम’ के एक्सक्लूसिव ग्लोबल स्ट्रीमिंग प्रीमियर का ऐलान किया। यह एक भव्य पौराणिक फैंटेसी एडवेंचर फिल्म है, जिसमें प्राचीन कथाओं, रहस्यमयी राज़ और रोमांच से भरे खजाने की तलाश को दिखाया गया है।

फिल्म का निर्देशन अभिषेक नामा ने किया है, जबकि इसे NIK स्टूडियोज़ के बैनर तले किशोर अन्नापुरेड्डी और निशिता नागिरेड्डी ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में विराट कर्णा लीड रोल में नजर आएंगे। उनके साथ नभा नटेश, ऐश्वर्या मेनन, जगपति बाबू, मुरली शर्मा, महेश मांजरेकर और ऋषभ साहनी भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। ‘नागबंधम’ 24 जुलाई से प्राइम वीडियो पर एक्सक्लूसिव तौर पर स्ट्रीम होगी। यह फिल्म तेलुगु में उपलब्ध होगी, साथ ही तमिल, मलयालम और कन्नड़ में डब वर्जन में भी देखी जा सकेगी।

‘नागबंधम’ की कहानी रुद्र नाम के एक साधारण गांव के युवक की है, जिसकी जिंदगी उस वक्त पूरी तरह बदल जाती है जब उसकी बहन की शादी पर क्रूर खजाना खोजने वाला अब्दाली हमला कर देता है। अब्दाली भारत के प्राचीन विष्णु मंदिरों के नीचे छिपे रहस्यमयी नागबंधम अनुष्ठान की तलाश में है। पवित्र ब्रह्म कमल और एक प्राचीन पांडुलिपि की खोज में, जिसके बारे में माना जाता है कि वह असीम दौलत का राज खोल सकती है, अब्दाली अपने पीछे तबाही छोड़ता चलता है। इसी संघर्ष के बीच रुद्र की मुलाकात रहस्यमयी नागा साधु शिवा से होती है, जो उसे आस्था, त्याग और विश्वासघात से भरे एक खतरनाक सफर पर ले जाते हैं। जैसे-जैसे ताकतवर दुश्मन उसके करीब आते हैं, रुद्र को धर्म की रक्षा करने और उस प्राचीन खजाने को गलत हाथों में जाने से बचाने के लिए आगे आना पड़ता है।

पौराणिक कथाओं, फैंटेसी और एडवेंचर का शानदार मेल ‘नागबंधम’ को एक अलग पहचान देता है। फिल्म में प्राचीन मंदिरों की भव्य वास्तुकला को शानदार विजुअल्स के साथ दोबारा जीवंत किया गया है और इसकी कहानी धर्म की जड़ों से जुड़ी हुई है। जुनैद कुमार और अभे का दमदार म्यूजिक फिल्म के रोमांच को और बढ़ा देता है। पुरानी दंतकथाओं, छिपे खजानों और आस्था से जुड़े सवालों को लेकर आगे बढ़ने वाली यह कहानी दर्शकों को एक बड़े और रोमांचक सफर पर ले जाती है।

ईरान जंग के बीच अमेरिका का सऊदी से परमाणु समझौता:इजराइल के विरोध के बावजूद ट्रम्प की मंजूरी; एक्सपर्ट बोले- परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ेगा

सऊदी अरब ने बुधवार को अमेरिका के साथ एक अहम परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके तहत अमेरिका, सऊदी अरब को असैन्य (बिजली बनाने के लिए) परमाणु तकनीक देगा। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध और तनाव का माहौल है। इस समझौते को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। वह पिछले पांच साल से भी ज्यादा समय से यह समझौता चाह रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइल समेत अमेरिका के कई अधिकारी और न्यूक्लियर एक्सपर्ट्स इसका विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि यदि सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन की तकनीक मिल गई, तो भविष्य में वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में भी बढ़ सकता है। इससे पूरे मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियारों की नई होड़ शुरू होने का खतरा पैदा हो सकता है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले कई बार कह चुके हैं कि अगर ईरान परमाणु हथियार बना लेता है, तो सऊदी अरब भी परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में कदम उठाएगा। यह समझौता विवादों में क्यों है? ट्रम्प ने समझौते से इजराइल को हटाया इस समझौते की शुरुआत जो बाइडेन के राष्ट्रपति रहते हुई थी। तब अमेरिका चाहता था कि परमाणु समझौते के बदले सऊदी अरब, इजराइल को औपचारिक मान्यता दे और दोनों देश राजनयिक संबंध स्थापित करें। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका, सऊदी अरब को सुरक्षा की गारंटी, आधुनिक हथियार और असैन्य परमाणु कार्यक्रम में सहयोग देने को तैयार था। बदले में सऊदी अरब से उम्मीद थी कि वह इजराइल के साथ दूतावास खोलेगा, राजदूत नियुक्त करेगा और आधिकारिक संबंध शुरू करेगा। हालांकि, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजराइल पर हमले और उसके बाद गाजा में शुरू हुए युद्ध की वजह से यह प्लान फेल हो गया। सऊदी कहने लगा कि जब तक एक अलग फिलिस्तीन राष्ट्र नहीं बन जाता तब तक वे इजराइल को मान्यता नहीं देंगे। बाद में ट्रम्प ने रणनीति बदली और इजराइल के साथ रिश्तों को इस समझौते से अलग कर दिया। मिडिल ईस्ट में सऊदी का प्रभाव बढ़ेगा परमाणु बिजलीघर (न्यूक्लियर रिएक्टर) बनने में 10 साल या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है। इसलिए इस समझौते के बाद सऊदी अरब लंबे समय तक अमेरिका की परमाणु तकनीक और मदद पर निर्भर रहेगा। इससे दोनों देशों के बीच सुरक्षा, कारोबार और आपसी रिश्ते पहले से ज्यादा मजबूत होने की उम्मीद है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑन ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी की एक्सपर्ट कैरेन यंग के मुताबिक, सऊदी अरब सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि भविष्य को ध्यान में रखकर यह कदम उठा रहा है। उनका कहना है कि यह समझौता सिर्फ परमाणु बिजली बनाने तक सीमित नहीं है। इससे सऊदी अरब की राजनीतिक ताकत बढ़ेगी और मिडिल ईस्ट में उसका प्रभाव भी पहले से ज्यादा मजबूत होगा। अमेरिका को क्या फायदा होगा? इस समझौते से अमेरिका को दो बड़े फायदे मिल सकते हैं। 1. अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब में परमाणु बिजली संयंत्र बनाने के अरबों डॉलर के ठेके मिल सकते हैं। 2. अमेरिका को सऊदी अरब के परमाणु कार्यक्रम पर नजदीकी नजर रखने का मौका मिलेगा, जिससे उसे हथियारों के प्रसार को लेकर अपनी चिंताओं पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। रूस-चीन भी मदद को तैयार थे अगर अमेरिका के साथ यह समझौता किसी वजह से नहीं हो पाता, तो सऊदी अरब के पास दूसरे विकल्प भी हैं। दरअसल, सऊदी कई बार चेतावनी दे चुका था कि अगर उसे अमेरिका इसमें मदद नहीं करेगा तो वे चीन, रूस, फ्रांस या दक्षिण कोरिया जैसे दूसरे देशों से परमाणु तकनीक ले लेंगे। चीन की सरकारी कंपनी चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन (CNNC) पहले ही न्यूक्लियर प्लांट बनाने में रुचि दिखा चुकी है। रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम भी सऊदी अरब के साथ शुरुआती समझौते कर चुकी है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया और फ्रांस भी संभावित साझेदार माने जा रहे हैं। ट्रम्प का फैसला बदलना संसद के लिए मुश्किल अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सांसदों ने इस समझौते का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है न सिर्फ इससे मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियारों की होड़ को बढ़ावा मिलेगा बल्कि ईरान के लिए भी अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने की संभावना कम कर देगा। हालांकि इन विरोधों के बावजूद संसद के लिए इस समझौते को रोकना आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में इस समझौते को मंजूरी के लिए संसद में पेश किया जाएगा। लेकिन यदि संसद इसे रोकना चाहती है, तो उसे इस संबंध में संयुक्त प्रस्ताव (जॉइंट रिजोल्यूशन) पारित करना होगा। यदि राष्ट्रपति उस प्रस्ताव पर वीटो लगा देते हैं, तो संसद को उस वीटो को पलटने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जुटाना होगा। यही वजह है कि राजनीतिक विरोध के बावजूद इस समझौते के लागू होने की संभावना अधिक मानी जा रही है।

OnePlus N6x की लॉन्च डेट कन्फर्म, जानें डिजाइन, फीचर्स और कीमत से जुड़ी जानकारी

इस महीने की शुरुआत में डिवाइस की झलक दिखाने के बाद, OnePlus ने अब कन्फर्म किया है कि OnePlus N6x भारत में 31 जुलाई को लॉन्च होगा। इसके अलावा, यह स्मार्टफोन कंपनी की नई N-सीरीज लाइनअप का दूसरा मॉडल होगा। इससे पहले कंपनी ने OnePlus N6 लॉन्च किया था। बता दें कि चीनी स्मार्टफोन मेकर ने टीजर के जरिए लॉन्च डेट की जानकारी के साथ-साथ स्मार्टफोन की पहली ऑफिशियल झलक भी दिखाई है, जिसमें इसके डिजाइन और कलर ऑप्शन का पता चलता है। अब चलिए जानते हैं OnePlus N6x से जुड़ी जानकारियों के बारे में।

OnePlus N6x की लॉन्च डेट, डिजाइन और कलर ऑप्शन कन्फर्म

चीनी टेक कंपनी ने कन्फर्म किया है कि OnePlus N6x भारत में 31 जुलाई को दोपहर 12 बजे लॉन्च होगा। लॉन्च होने के बाद, यह स्मार्टफोन Amazon India और OnePlus India की वेबसाइट पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा।

आधिकारिक टीजर में फोन का डिजाइन काफी जाना-पहचाना नजर आ रहा है। पूरी तरह से नया लुक लाने के बजाय, ऐसा लगता है कि OnePlus ने Nord 5 से स्टाइलिंग के कुछ एलिमेंट लिए हैं। इस फोन में पीछे की तरफ एक स्लीक पैनल है जिसमें पिल-शेप का कैमरा मॉड्यूल और फ्लैट एज डिजाइन दिया गया है। इसके अलावा, पावर और वॉल्यूम बटन दाईं ओर दिए गए हैं। इच्छुक ग्राहक इसे दो कलर ऑप्शन Burgundy Red और Ice Blue ऑप्शन में से चुन सकेंगे।

OnePlus N6x: क्या उम्मीद करें

OnePlus ने अभी तक ज्यादातर स्पेसिफिकेशन्स को गुप्त रखा है, लेकिन रिपोर्ट्स से पता चलता है कि N6x में कंपनी के मौजूदा डिवाइस जैसे कई फीचर्स हो सकते हैं।

हालांकि, हार्डवेयर की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि इस स्मार्टफोन में बड़ी बैटरी और OxygenOS का लेटेस्ट वर्जन होगा। कुछ रिपोर्ट्स यह भी इशारा करती हैं कि इसमें हाल ही में लॉन्च हुए OnePlus N6 के कुछ फीचर्स हो सकते हैं, जिससे दोनों डिवाइस काफी मिलते-जुलते होंगे, लेकिन उम्मीद है कि N6x को कम कीमत वाले सेगमेंट के लिए पेश किया जाएगा।

जानकारी के लिए बता दें कि OnePlus N6 भारत में 4GB RAM + 128GB स्टोरेज वाले वेरिएंट के लिए ₹22,999 की शुरुआती कीमत पर लॉन्च हुआ था। अगर N6x को उस मॉडल से कम कीमत पर उतारा जाता है, तो यह बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन सेगमेंट में खरीदारों को एक और विकल्प दे सकता है।

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Monsoon Rain Update: 7000 किलोमीटर लंबी बारिश की पट्टी दिखी! क्या उत्तर भारत में फिर एक्टिव होगा मानसून? IMD ने जारी किया नया अलर्ट

Monsoon Rain Update: दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के अपने सबसे एक्टिव स्टेज में पहुंचने के बाद देश के एक बड़े हिस्से में मूसलाधार बारिश हो रही है। असम सहित कई इलाकों में बाढ़ जानलेवा हो गई है। इस बीच उपग्रह से कुछ ऐसी तस्वीरें शामने आई हैं जो इशारा कर रही हैं कि बारिश की इंटेसिटी और बढ़ने वाली है। असल में इन तस्वीरों में एशिया महाद्वीप के ऊपर 7000 से 10000 किलोमीटर लंबी बारिश की एक विशाल पट्टी (Rain Band) दिखाई दी है।

‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह विशाल मानसूनी प्रणाली उत्तर भारत से शुरू होकर हिमालय, चीन और दक्षिण कोरिया तक फैली हुई है। ये आने वाले दिनों में भारत के बड़े हिस्से में मूसलाधार बारिश का संकेत दे रही है।

इस क्लाउड स्ट्रक्चर को ‘मानसून कन्वर्जेंस जोन’ कहा जाता है। हिंद महासागर से आने वाली नमी से भरी हवाओं और पूरे एशिया में सक्रिय मौसमी प्रणालियों के बीच टकराव की वजह से ये बनते हैं। इसी वजह से फिलहाल हजारों किलोमीटर के दायरे में बारिश लाने वाले बादलों का नया कॉरिडोर लगातार बन रहा है।

सामान्य से 170-180% अधिक हुई बारिश

मौसम की इस णाली के सक्रिय होने से पूरे देश में मानसूनी गतिविधियों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो दिनों में दर्ज की गई बारिश दैनिक सामान्य औसत से करीब 170 से 180 प्रतिशत अधिक रही है। यह इस सीजन का अब तक का सबसे मजबूत और आक्रामक बारिश का स्पेल साबित हो रहा है। इस मानसूनी दौर की वजह से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पहले से ही भारी बारिश दर्ज की जा रही है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्रों की वजह से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी मूसलाधार बारिश का दौर लगातार जारी है।

फसलों और जल स्तर को मिलेगा भारी फायदा

आपको बता दें कि मानसून के असमान शुरुआती दौर की वजह से देश के कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन बारिश का यह ताजा दौर मौसमी प्रदर्शन में बड़ा सुधार लाएगा। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बारिश से उत्तर और मध्य भारत में बारिश की कमी में काफी कमी आएगी। इसके अलावा जलाशयों का जल स्तर सुधरेगा और खरीफ की फसलों को भी इससे बड़ा फायदा पहुंचेगा।

बाढ़ और भूस्खलन का बढ़ा खतरा

लगातार हो रही भारी बारिश के फायदों के साथ-साथ प्रशासन इसके खतरों को लेकर भी पूरी तरह सतर्क है। पूर्वानुमान बताते हैं कि मानसून का यह सक्रिय चरण इस पूरे सप्ताह जारी रहने की संभावना है। ऐसे में अचानक बाढ़ की स्थिति, शहरी क्षेत्रों में जलभराव, भूस्खलन और नदियों के जल स्तर में तेज बढ़ोतरी का खतरा बड़ा हो गया है। खासकर पहाड़ी राज्यों जैसे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में इन खतरों को देखते हुए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

पूरे एशिया से जुड़ी है भारतीय मानसून प्रणाली

सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि भारत का मानसून पूरे एशिया में फैले एक बहुत बड़े वायुमंडलीय तंत्र का हिस्सा है। वर्तमान परिसंचरण अरब सागर से लेकर पूर्वी एशिया तक फैला हुआ है, जो कई देशों की मौसमी प्रणालियों को आपस में जोड़ता है और एक विशाल भौगोलिक क्षेत्र में बारिश को प्रभावित कर रहा है।

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लंबी छुट्टी की जरूरत नहीं, कोलकाता के पास ये जगहें बनाएंगी आपका वीकेंड खास

बारिश का मौसम घूमने का मजा कई गुना बढ़ा देता है। अगर आप कोलकाता (Kolkata) में रहते हैं और वीकेंड (weekend) पर कम समय में किसी शांत और खूबसूरत जगह की तलाश कर रहे हैं, तो शहर से कुछ घंटों की दूरी पर मौजूद ये डेस्टिनेशन (destination) आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकते हैं:

Biharinath Hill (बिहारीनाथ पहाड़ी)

About the Forest and Wildlife | Biharinath | Bnkura Tourism

कोलकाता (Kolkata) से करीब 190-200 किमी दूर बांकुरा जिले की बिहारीनाथ पहाड़ी मानसून (Kolkata) में घूमने के लिए शानदार जगह है। यहां आप कार, टैक्सी या ट्रेन से दुर्गापुर (Durgapur)/बांकुरा (Bankura) पहुंचकर लोकल कैब ले सकते हैं। सड़क मार्ग से यहां पहुंचने में लगभग 4 से 4.5 घंटे लगते हैं। धुंध से ढकी पहाड़ियां, घने साल के जंगल और छोटे-छोटे झरने यहां की खूबसूरती बढ़ा देते हैं। ट्रैकिंग (trekking) और फोटोग्राफी पसंद करने वालों के लिए यह जगह खास है। प्रति व्यक्ति 2,000 से 4,000 रुपये में एक दिन की ट्रिप आराम से पूरी हो सकती है।

Garh Panchkot (गढ़ पंचकोट)

Garh Panchkot - Purulia Travels

गढ़ पंचकोट कोलकाता से करीब 250 किमी दूर पंचकोट पहाड़ी (Panchkot Hill) की तलहटी में है। यहां आप कार, टैक्सी या आसनसोल (Asansol)/आद्रा (Adra) तक ट्रेन से पहुंचकर आगे कैब ले सकते हैं। जर्नी में लगभग 5 घंटे लगते हैं। यहां पुराने किले, प्राचीन मंदिर, हरियाली और पंचेत डैम का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। एक दिन की ट्रिप का खर्च करीब 2,500 से 5,000 रुपये प्रति व्यक्ति आ सकता है।

Garchumuk (गारचुमुक)

Atanna gate in garchumuk| 58 gate garchumuk, Howrah

अगर कम दूरी में सुकून भरी जगह ढूंढ रहे हैं, तो गारचुमुक अच्छा ऑप्शन है। यह कोलकाता से करीब 65 किमी दूर है और कार, टैक्सी या बस से 2 से 2.5 घंटे में पहुंचा जा सकता है। यहां गारचुमुक डियर पार्क (Garchumuk Deer Park), मिनी जू (mini zoo), 58 लॉक गेट (Lock Gate) और नदियों का संगम मेन अट्रैक्शन हैं। यहां घूमने का खर्च 1,000 से 2,500 रुपये प्रति व्यक्ति के बीच रह सकता है।

Taki (टाकी)

Ichamati River - Wikipedia

टाकी कोलकाता से लगभग 80 किमी दूर इच्छामती नदी के किनारे बसा खूबसूरत शहर है। यहां लोकल ट्रेन (सीलदह से टाकी रोड), बस या कार से करीब 2 घंटे में पहुंचा जा सकता है। मानसून में यहां बोटिंग (boating), गोलपातार मैंग्रोव फॉरेस्ट (Golpatar Mangrove Forest) (मिनी सुंदरबन), पुरानी हवेलियां और मंदिर टूरिस्ट को अट्रैक्ट करते हैं। एक दिन की ट्रिप का खर्च लगभग 1,500 से 3,000 रुपये प्रति व्यक्ति हो सकता है।

Raichak (रायचक)

রায়চক / Raichak | Kolkata Weekends

कोलकाता से करीब 55 किमी दूर रायचक वीकेंड ट्रिप (weekend trip) के लिए बेहतरीन जगह है। यहां कार, टैक्सी या डायमंड हार्बर रोड (Diamond Harbour Road) के जरिए करीब 2 घंटे में आसानी से पहुंचा जा सकता है। हुगली नदी (Hooghly River) का किनारा, लग्जरी रिजॉर्ट और शांत माहौल इसे कपल्स और परिवारों के बीच पॉपुलर बनाते हैं। अगर आप डे ट्रिप करते हैं तो 1,500 से 3,500 रुपये, जबकि रिजॉर्ट में रुकने पर 5,000 रुपये या उससे ज्यादा का खर्च आ सकता है।

वर्ल्ड अपडेट्स:UNSC में सिंधु जल संधि पर भारत का पाकिस्तान को जवाब: कहा- सीमा पार आतंकवाद से सहयोग का आधार खत्म

भारत ने UNSC में पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद ने दोनों देशों के बीच सहयोग का आधार खत्म कर दिया है। भारत ने स्पष्ट किया कि आपसी विश्वास और सद्भावना के बिना सिंधु जल संधि के तहत सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती। प्राकृतिक संसाधन शासन पर UNSC की हाई-लेवल ओपन डिबेट में पाकिस्तान के बयान का जवाब देते हुए राजदूत हरीश पारवतननेनी ने कहा कि पाकिस्तान ने इस मंच का इस्तेमाल “झूठा नैरेटिव” फैलाने के लिए किया। उन्होंने कहा कि भारत का सिंधु जल संधि पर रुख स्पष्ट और लगातार एक जैसा रहा है। सीमा पार आतंकवाद को राज्य की नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने के बीच आपसी विश्वास और सद्भावना के आधार पर सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती। भारत ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा। राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान इस संवैधानिक और कानूनी वास्तविकता को जानबूझकर नजरअंदाज करता है। भारत ने यह भी कहा कि वह मानवीय आधार पर पाकिस्तान को बाढ़ की चेतावनी देता रहेगा और अपने हिस्से के जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए जलविद्युत परियोजनाओं को तेज करेगा। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन: ऐसा करने वाला पहला EU देश फ्रांस की संसद ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इसके साथ ही फ्रांस ऐसा कानून बनाने वाला EU का पहला देश बन गया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बिल का समर्थन किया है और इसे सितंबर से लागू करने की तैयारी है। कानून लागू कराने की जिम्मेदारी डिजिटल रेगुलेटर Arcom की होगी। हालांकि, बच्चों की उम्र की जांच कैसे होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फ्रांस के बाद ब्रिटेन, स्पेन, ग्रीस और डेनमार्क भी सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम उम्र तय करने की तैयारी में हैं। फ्रांस के कई माता-पिता ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि कुछ किशोरों को एजुकेशनल कंटेंट और दोस्तों से संपर्क प्रभावित होने की चिंता है। शिक्षा मंत्री और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी कहा है कि सिर्फ बैन काफी नहीं होगा, बच्चों को डिजिटल दुनिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में शिक्षित करना भी जरूरी है। चीन का ताइवान स्ट्रेट में 2 दिन का लाइव-फायर ड्रिल: फुजियान के पास समुद्री इलाके में सैन्य अभ्यास
चीन ने गुरुवार से ताइवान स्ट्रेट के कुछ हिस्सों में 2 दिन का लाइव-फायर सैन्य अभ्यास शुरू किया। यह ड्रिल दक्षिण-पूर्वी प्रांत फुजियान के तट के पास हो रही है। समुद्री अधिकारियों के नोटिस के मुताबिक, अभ्यास दोनों दिन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक डोंगशान द्वीप के आसपास होगा। यह इलाका गुआंगदोंग प्रांत की सीमा के पास है। यह ड्रिल अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत के एक दिन बाद शुरू हुई है। दोनों नेताओं के बीच ताइवान समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान की सरकार चीन के इस दावे को खारिज करती है। इससे पहले दिसंबर में चीन ने ताइवान को चारों ओर से घेरकर अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास किया था। यह अभ्यास अमेरिका की ओर से ताइवान के लिए 11.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हथियार पैकेज की घोषणा के बाद हुआ था। उस समय चीन की ईस्टर्न थिएटर कमांड ने 10 घंटे के लाइव-फायर अभ्यास के दौरान ताइवान के उत्तर और दक्षिण में समुद्री इलाकों में रॉकेट दागे थे। अफ्रीका में बढ़ती गर्मी से ‘रेगिस्तान के जहाज’ भी बेहाल: हीट स्ट्रेस, पानी की कमी और बीमारियों से बढ़ रही मौतें
अफ्रीका में बढ़ते तापमान का असर अब रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंटों पर भी पड़ रहा है। उत्तर-पूर्वी इथियोपिया के अफार क्षेत्र में ऊंट पालक अली उमेर के मुताबिक, तेज गर्मी से ऊंटों के पैरों में छाले पड़ रहे हैं, आंखों से पानी आ रहा है और गर्म रेत से उनकी चमड़ी और बाल प्रभावित हो रहे हैं। पिछले एक महीने में उन्होंने गर्मी के कारण ऊंट के 8 बच्चों को खो दिया। वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी से ऊंटों में हीट स्ट्रेस, थकान, डिहाइड्रेशन और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। पानी और वनस्पति की कमी के साथ छाया का घटता क्षेत्र भी स्थिति को गंभीर बना रहा है। पड़ोसी देश सोमालिया में सूखे के कारण ऊंटों की मौत का संकट गंभीर है। जून में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, करीब 46% ऊंट पालने वाले परिवारों में सूखे से ऊंटों की मौत हुई। उत्तरी सोमालिया के सूल क्षेत्र में यह दर करीब 73% तक पहुंच गई। उत्तर-पूर्वी केन्या में भी पशु चिकित्सकों ने ऊंटों में अत्यधिक गर्मी से होने वाली बीमारियों और मौतों में बढ़ोतरी दर्ज की है। एक पशु चिकित्सा अधिकारी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में क्षेत्र में गर्मी के कारण ऊंटों की मौत 15% से ज्यादा बढ़ी है। गर्मी के तनाव से ऊंटों में दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंट सामान्य तौर पर करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी को शरीर के तापमान में बदलाव, कम पसीना और पानी की कम खपत जैसे तरीकों से सहन कर सकते हैं। लेकिन सहारा के कई हिस्सों में गर्मियों का तापमान अब अक्सर 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच रहा है।

‘जहाज पर हमला किया तो पुल या पावर प्लांट उड़ा देंगे’, ईरान को ट्रंप की कड़ी चेतावनी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को धमकी दी कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी जहाज पर हमला करता है, तो अमेरिका हर बार ईरान के किसी पुल या पावर प्लांट को निशाना बनाएगा। इसमें राजधानी तेहरान में मौजूद ठिकाने भी शामिल हो सकते हैं।

ट्रंप ने यह धमकी अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट के जरिए दी। इससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है, जो पहले से ही संघर्ष विराम टूटने और हाल ही में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा हुआ था। बता दें कि ट्रंप को बुधवार को ही इन सैनिकों के शव मिलने वाले थे।

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा था, “अब से, जब भी ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला करेगा, तो अमेरिका उसके एक पुल या पावर प्लांट पर बम गिराकर उसे नष्ट कर देगा।”

ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि इन लक्ष्यों में “तेहरान शहर के पास या उसके अंदर मौजूद ठिकाने” भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी ईरान के बिजली संयंत्रों, पानी की सुविधाओं और दूसरे बुनियादी ढांचों पर हमला करने की धमकी दे चुके हैं। जानकारों ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं।

इससे पहले बुधवार को, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका के साथ समझौता करने को लेकर “गंभीर” नहीं है, साथ ही उन्होंने दोहराया कि वॉशिंगटन मध्य पूर्व में “कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध” है।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने लगातार 11वीं रात ईरानी ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित और खुला करने की कोशिश कर रहा है। यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और युद्ध के दौरान ईरान के लिए दबाव बनाने का एक बड़ा साधन बन गया है।

CENTCOM ने बताया कि उसने मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, ड्रोन स्टोर करने की जगहों और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए।

फिलीपींस में आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक में बोलते हुए, रुबियो ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक मुख्य विवाद यह है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में ट्रैफिक को नियंत्रित करने का “अधिकार मांगता है”, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसे यह अधिकार नहीं है।

रुबियो ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर हम मध्य पूर्व में एक ऐसी मिसाल कायम करते हैं, जहां कोई राष्ट्र किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर नियंत्रण करने, शुल्क वसूलने और भुगतान न करने पर आपके जहाजों को उड़ाने का फैसला कर सकता है, तो हमने एक बहुत ही खतरनाक मिसाल कायम कर दी है, जो दुनिया के अन्य हिस्सों में, इस क्षेत्र सहित, दोहराई जाएगी।”

रुबियो ने अप्रत्यक्ष रूप से चीन की ओर इशारा करते हुए कहा कि “दुनिया के सभी क्षेत्रों में से, यह वह क्षेत्र है जहां मुझे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व के बारे में सिखाने की आवश्यकता नहीं है।”

बाद में दिन में दिए गए अलग-अलग बयानों में, रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत करने को तैयार है।

उन्होंने कहा, “अमेरिका कूटनीतिक समझौते तक पहुंचना चाहता है। अगर ईरान के साथ ऐसा कोई समझौता संभव हो, जिसमें वह कहे कि हम अब आतंकवाद को समर्थन नहीं देंगे और परमाणु हथियार या उसे बनाने के लिए जरूरी चीजों को आगे नहीं बढ़ाएंगे, तो अमेरिका इसके लिए तैयार है।”

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि “फिलहाल वे डील करने को लेकर गंभीर नहीं लगते।” उन्होंने आगे कहा कि तेहरान ने पिछले महीने हुए समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) में कुछ वादे किए थे, “और दो हफ्ते के अंदर ही उन्हें तोड़ दिया।”

अमेरिकी नौसेना ने पहले भी साउथ चाइना सी में विवादित द्वीपों के आस-पास “फ्रीडम ऑफ नेविगेशन” (आजादी से आवाजाही) ऑपरेशन चलाए हैं। इन द्वीपों पर चीन के साथ-साथ कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के भी दावे हैं, जबकि चीन अपनी “नाइन-डैश लाइन” के जरिए लगभग पूरे समुद्र पर अपना अधिकार बताता है।

यह सब ‘परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ के 2016 के उस फैसले के बावजूद हो रहा है, जिसमें कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चीन के दावों का कोई आधार नहीं है। हालांकि, चीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया है।

तेल की कीमतों में उछाल

बुधवार सुबह कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (सितंबर डिलीवरी) 3.7% बढ़कर 94.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स (सितंबर डिलीवरी) में 3.5% की तेजी आई और यह 87.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

बता दें कि अमेरिका और ईरान ने 17 जून को एक अंतरिम समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें सैन्य अभियानों को रोकने, होर्मुज को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों सहित एक स्थायी समझौते पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय करने की बात कही गई थी। लेकिन इस दस्तावेज में होर्मुज के भविष्य के प्रबंधन का मुद्दा अनसुलझा ही रह गया।

ईरान ने इस बात का मतलब यह भी निकाला कि होर्मुज (स्ट्रेट) से गुजरने वाले ट्रैफिक को मैनेज करने में तेहरान की भूमिका है और शुरुआती 60 दिनों के बाद समुद्री सेवाओं के लिए शुल्क भी लिया जा सकता है, लेकिन अमेरिका का कहना था कि यह जलमार्ग बिना किसी अनिवार्य ईरानी शुल्क या प्रतिबंध के खुला रहना चाहिए।

ईरान और ओमान – जिनकी सीमाएं भी होर्मुज जलडमरूमध्य से लगती हैं – ने 23 जून को एक संयुक्त बयान में कहा कि “होर्मुज से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं में जलडमरूमध्य के दोनों तटीय देशों की संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।”

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दिल्ली में सोना 2 हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंचा, चांदी एक दिन में 8500 रुपये उछली

दिल्ली सर्राफा बाजार में 22 जुलाई को सोने और चांदी में तेजी देखने को मिली। सोने का भाव 1,900 रुपये के उछाल के साथ दो हफ्ते की ऊंचाई यानी 1,49,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। ग्लोबल मार्केट से पॉजिटिव संकेतों और स्ट्रॉन्ग डिमांड की वजह से कीमतों को सपोर्ट मिला। चांदी में भी जबर्दस्त तेजी दिखी।

चांदी एक दिन में 8500 रुपये चढ़ी

दिल्ली सर्राफा बाजार में 22 जुलाई को चांदी 8,500 रुपये की तेजी के साथ 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। चांदी में यह तेजी का लगातार छठा सत्र था। ट्रेडर्स ने कहा कि सोने में भी यह तेजी का लगातार तीसरा सत्र था। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के पॉजिटिव संकेतों के साथ ही स्ट्रॉन्ग लोकल डिमांड और पिछले हफ्ते कीमतों में गिरावट के बाद अच्छी खरीदारी का असर कीमतों पर पड़ा।

फिजिकल सोने की डिमांड में रिकवरी

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “बुधवार को सोने में तेजी रही। इससे कीमतें दो हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गई। इसमें फिजिकल सोने की डिमांड में रिकवरी का भी हाथ है।” उन्होंने कहा कि गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में भी निवेश बढ़ा है। इससे यह संकेत मिलता है कि हालिया गिरावट के बाद सोने को लेकर सेंटिमेंट बदल रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में तेजी दिखी। स्पॉट गोल्ड 1.16 फीसदी यानी 47 डॉलर के उछाल के साथ 4,125 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। चांदी में भी करीब 1 फीसदी की तेजी रही, जिससे यह 59.32 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। बीते कुछ हफ्तों में सोने और चांदी पर काफी दबाव देखने को मिला था।

क्रूड ऑयल 5 हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंचा

कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च के एवीपी कायनात चेनवाला ने कहा कि पश्चिम एशिया में टेंशन और क्रूड ऑयल की कीमतें पांच हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच जाने के बावजूद सोने और चांदी में तेजी है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कूटनीति से मामले के समाधान के संकेत दिए हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका बातचीत शुरू करना चाहता है लेकिन चीन इसके लिए तैयार नहीं है। इससे इनवेस्टर्स ‘इंतजार करो और देखो’ की पॉलिसी अपना रहे हैं।

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क्रूड में तेजी जारी रहने पर बढ़ेगी महंगाई

22 जुलाई को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 94 डॉलर प्रति बैरल को पार गई। अगर क्रूड में तेजी जारी रहती है या लंबे समय तक कीमतें इस लेवल पर बनी रहती हैं तो दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा होगा। अमेरिका में फेडरल रिजर्व उम्मीद से पहले इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक घट जाती है।

4 Android अपडेट और 50MP कैमरा के साथ आएगा Redmi Note 17, लॉन्च से पहले सभी स्पेसिफिकेशन्स और कीमत लीक

Redmi Note 17 को चीन में लॉन्च हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, लेकिन अब इसकी भारत में लॉन्चिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पिछले कुछ दिनों में सामने आए कई लीक्स में इसकी संभावित लॉन्च डेट से लेकर सॉफ्टवेयर सपोर्ट तक की जानकारी सामने आई है। अब, एक और जानकारी से इसकी कीमत का भी पता चला है, जिससे यह अंदाजा लगाना आसान हो गया है कि Xiaomi का अगला Redmi फ़ोन भारतीय मार्केट में किस रेंज में आ सकता है।

हालांकि, Xiaomi के सब-ब्रांड ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन ताजा लीक से संकेत मिलता है कि इसके लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब चलिए जानते हैं अपकमिंग Redmi Note 17 से जुड़ी अब तक सामने आई सभी अहम जानकारियां।

Redmi Note 17 की कीमत और स्पेसिफिकेशन्स (लीक जानकारी)

टिपस्टर योगेश बरार के अनुसार, Redmi Note 17 में Snapdragon 4 Gen 4 चिपसेट और Android 16 पर आधारित HyperOS 3 होने की संभावना है। इसके अलावा, कहा जा रहा है कि चीनी स्मार्टफोन कंपनी लंबे समय तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट देने की योजना बना रही है, जिसमें चार बड़े Android अपडेट और पांच साल तक सिक्योरिटी पैच शामिल होंगे। कैमरे की बात करें तो, इस डिवाइस में 50MP का रियर कैमरा और सेल्फी के लिए 8MP का फ्रंट कैमरा होने की पूरी उम्मीद है।

लीक हुई दूसरी जानकारियों में LPDDR4X मेमोरी और UFS 2.2 स्टोरेज का जिक्र है। हालांकि, Xiaomi ने अभी तक इनमें से किसी भी स्पेसिफिकेशन की पुष्टि नहीं की है, इसलिए इन्हें हार्डवेयर की पक्की जानकारी के बजाय शुरुआती लीक के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

Redmi Note 17 की कीमत और लॉन्च डेट (लीक)

टिपस्टर योगेश बरार ने X पर नई जानकारी शेयर की है, जिससे पता चलता है कि भारत में Redmi Note 17 की शुरुआती कीमत 30,000 रुपये से ज्यादा हो सकती है। अगर यह जानकारी सही है, तो उम्मीद है कि इसके एंट्री-लेवल मॉडल में 6GB RAM और 128GB स्टोरेज मिलेगी। एक और लीक, जो टिपस्टर अभिषेक यादव की तरफ से आया है, बताता है कि इसे भारत में 6 अगस्त को लॉन्च किया जा सकता है। टिपस्टर अभिषेक के मुताबिक, यह स्मार्टफोन 11 अगस्त से बिक्री के लिए उपलब्ध हो सकता है।

बता दें कि पहले आई रिपोर्ट्स से पता चला था कि भारतीय खरीदारों को इस फोन का कोई अलग वर्जन नहीं मिलेगा। इसके बजाय, उम्मीद है कि Redmi Note 17 में वही हार्डवेयर और फीचर्स होंगे जो हाल ही में चीन में लॉन्च किए गए थे।

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Dr Reddy’s Q1 Results: डॉ रेड्डीज का प्रॉफिट 69 फीसदी गिरकर 443 करोड़ रुपये रहा, शेयर फिसला

डॉ रेड्डीज लेबोरेट्रीज ने 22 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट 69 फीसदी गिरकर 443 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के प्रॉफिट पर सेमाग्लूटाइड की सप्लाई में बाधा का असर पड़ा। इस वजह से कंपनी की इनवेंट्री और इससे जुड़ी दूसरी कॉस्ट बढ़ गई।

Dr Reddy’s Laboratories हैदराबाद की दवा बनाने वाली कंपनी है। इसने एक साल पहले की जून तिमाही में 1,418 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया था। जून तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 5.6 फीसदी गिरकर 8,070.5 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में रेवेन्यू 8,545.2 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने कहा है कि उसने जून तिमाही में सेमाग्लूटाइड की सप्लाई की बाधा से जुड़े इनवेंट्री और इससे जुड़ी दूसरी कॉस्ट के लिए 240 करोड़ रुपये का प्रोविजन किया है। इस महीने की शुरुआत में डॉ रेड्डीज ने कहा था कि उसकी जेनरिक सेमाग्लूटाइड की सप्लाई में बाधा जारी रहेगी। यह इंडिया में उपलब्ध नहीं होगी और चीन में भी कम से कम अक्तूबर तक इसकी सप्लाई में बाधा आएगी।

एक्टिव फार्मास्युटिकल्स इनग्रेडिएंट्स (API) में अशुद्धता (Impurity) से जुड़े मसले की वजह से कंपनी को नए बैचेज के प्रोडक्शन को रोकना पड़ा था। सेमाग्लूटाइड एक्टिव इनग्रेडिएंट है, जिसका इस्तेमाल वजन घटाने वाली दवा Wegovy में होता है। इंडिया में इस पर पेंटेंट खत्म हो गया है। इससे जेनरिक दवा बनाने वाली कंपनियों के लिए इसका उत्पादन करने का रास्ता खुल गया है।

डॉ रेड्डीज का प्लान भारत में तेजी से बढ़ते सेमाग्लूटाइड मार्केट में अपनी पैठ मजबूत करने का था। लेकिन, इसका उत्पादन रुकने से कंपनी के प्लान पर पानी फिर गया। नॉर्थ अमेरिका से भी कंपनी का रेवेन्यू 35.3 फीसदी गिरकर 2,205 करोड़ रुपये रह गया। यह कंपनी का सबसे बड़ा बाजार है। कंपनी को लेनालिमाइड की बिक्री में गिरावट का भी सामना करना पड़ रहा है। यह ब्रिस्टल मेयर्स स्क्विब की कैंसर की दवा रेवलीमिड का जेनरिक वर्जन है।

डॉ रेड्डीज का शेयर 22 जुलाई को 2.16 फीसदी गिरकर एनएसई पर 1,179.90 रुपये पर बंद हुआ। दूसरी फार्मा कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट आई। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति का ऐलान है, जिसमें उन्होंने जेनरिक दवाओं के आयात पर चरणबद्ध तरीके से टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इसका असर सन फार्मा, सिप्ला और डॉ रेड्डीज जैसी दवा कंपनियों पर पड़ेगा।