Tukaram Mundhe : देश के हर राज्य को तुकाराम मुंढे जैसे IAS अधिकारी की जरूरत क्यों? 21 साल में 25 तबादले, फिर भी नहीं झुके ‘सिंघम’

Tukaram Mundhe : देश के हर राज्य को तुकाराम मुंढे जैसे IAS अधिकारी की जरूरत क्यों? 21 साल में 25 तबादले, फिर भी नहीं झुके 'सिंघम'

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी मुंढे को नियमों का कड़ाई से पालन कराने और भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए जाना जाता है। उनके करियर में 21 साल में 25 तबादले भी चर्चा का विषय रहे हैं।

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मई 2026 में महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) Commissioner की जिम्मेदारी संभालने के बाद मुंढे ने मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा के खिलाफ कार्रवाई तेज की। दूध-पनीर में मिलावट से लेकर खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन, प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों और क्विक-कॉमर्स स्टोर्स तक के खिलाफ जांच और कार्रवाई की गई। कई प्रतिष्ठानों पर छापेमारी हुई, कुछ को बंद किया गया और कई को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

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सवाल यह है कि हर राज्य को मुंढे जैसे अधिकारी की जरूरत क्यों है?

भारत जैसे विशाल देश में प्रशासन केवल सरकारी आदेश जारी करने का नाम नहीं है। कानूनों को जमीन पर लागू कराने के लिए ऐसे अधिकारियों की जरूरत होती है जो कानून, जनहित और प्रशासनिक जवाबदेही को प्राथमिकता दें। तुकाराम मुंढे की कार्यशैली इसी सवाल को सामने लाती है। खाद्य और दवा जैसी सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्था में अगर मिलावट या नियमों का उल्लंघन होता है तो उसका असर आम आदमी पर पड़ता है। ऐसे में अधिकारी की जिम्मेदारी केवल फाइलों तक सीमित नहीं रह सकती।

 

मुंढे का कहना है कि जब तक राज्य में लोगों को सुरक्षित भोजन और दवाएं सुनिश्चित नहीं हो जातीं, तब तक वह कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, उनकी सख्त कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठे हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें ‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल’ करने जैसी अति से बचने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद उनकी कार्रवाई को कई लोगों ने सराहा है।

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गरीब किसान परिवार से निकले IAS अधिकारी

तुकाराम मुंढे का सफर भी उनकी प्रशासनिक सोच को समझने में महत्वपूर्ण है। उनका जन्म महाराष्ट्र के बीड जिले के एक गरीब कृषि परिवार में हुआ। मराठवाड़ा के सूखा प्रभावित इलाके में उन्होंने बचपन से ही खेती की मुश्किलें, पानी की कमी और आर्थिक परेशानियां देखीं।

 

वह अपने परिवार के खेत में काम करते थे और माता-पिता के साथ साप्ताहिक बाजार में सब्जियां बेचते थे। फसलों में पानी देने के लिए उन्हें रात में करीब 2 बजे उठना पड़ता था। मिट्टी के घर में पले-बढ़े मुंढे ने बारिश पर निर्भर खेती और पानी की कमी का असर करीब से देखा। वह स्थानीय जिला परिषद स्कूल तक नंगे पैर जाते थे। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि वह व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था को बदलने के लिए उसमें शामिल हुए।

 

बिना कोचिंग के UPSC में हासिल की 20वीं रैंक

मुंढे ने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान या पारिवारिक प्रशासनिक पृष्ठभूमि के 2005 में UPSC परीक्षा पास की और देशभर में 20वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र कैडर आवंटित हुआ। उन्होंने 1996 में औरंगाबाद के Government College of Arts and Science से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 1998 में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। सिविल सेवा में आने के बाद भी उन्होंने वित्तीय नीति, राजस्व पूर्वानुमान, वित्तीय बाजार नियमन, मैक्रोइकोनॉमिक मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अध्ययन और प्रशिक्षण जारी रखा।

 

21 साल की नौकरी में 25 तबादले

 

तुकाराम मुंढे के करियर की सबसे चर्चित बातों में उनके तबादले शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 21 साल की सेवा में उनका 25 बार तबादला हो चुका है। कई पदों पर वह निर्धारित पूर्ण कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाए। एक IAS अधिकारी का सामान्य कार्यकाल किसी पद पर करीब तीन साल माना जाता है, जबकि मुंढे का करियर बार-बार होने वाले तबादलों के लिए चर्चा में रहा है। कुछ मौकों पर उन्हें बिना महत्वपूर्ण पोस्टिंग के भी रखा गया। फिर भी उनके प्रशासनिक काम को कई पुरस्कार और सम्मान मिले।

 

पानी से लेकर ट्रैफिक मैनेजमेंट तक काम

 

मुंढे को जल संरक्षण, शहरी प्रशासन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, परिवहन और सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में काम के लिए पहचान मिली है। उन्हें 2015-16 में महाराष्ट्र सरकार का Best Collector Award दिया गया। सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। जल संरक्षण के काम के कारण उन्हें ‘वॉटरमैन ऑफ महाराष्ट्र’ भी कहा गया। नवी मुंबई नगर निगम में उनके कार्यकाल के दौरान ई-टॉयलेट और भूकंपीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों को SKOCH Order of Merit मिला।

 

2017 में उन्हें Best Integrated Traffic Management System के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। आखिर क्यों जरूरी हैं ऐसे अधिकारी?

 

तुकाराम मुंढे की कहानी सिर्फ एक अधिकारी के तबादलों या सख्त कार्रवाई की कहानी नहीं है। यह उस सवाल से भी जुड़ी है कि क्या प्रशासन में ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो दबाव के बावजूद कानून और जनहित को प्राथमिकता दें?

 

लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकारी की सख्ती के साथ संवेदनशीलता और कानून के दायरे में रहना भी जरूरी है। लेकिन दूसरी तरफ, खाद्य सुरक्षा, मिलावट, अवैध कारोबार और जनस्वास्थ्य जैसे मामलों में कार्रवाई न होने का खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है।

 

इसीलिए मुंढे की कार्यशैली देश के सामने एक बड़ा सवाल रखती है- क्या हर राज्य को ऐसे अधिकारियों की जरूरत है, जो व्यवस्था में रहकर व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश करें? शायद इसी वजह से, तबादलों और विवादों के बावजूद तुकाराम मुंढे का नाम आज भी सख्त और सक्रिय प्रशासन की बहस में बार-बार सामने आता है।

Pakistan-Balochistan Conflict: ‘सेना हटाओ, हथियार यहीं छोड़कर जाओ..’; बलूचिस्तान का पाकिस्तान को फिर अल्टीमेटम

Pakistan-Balochistan Conflict: पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान को लेकर एक बार फिर बड़े स्तर पर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। बलूच अलगाववादी नेता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान को नया अल्टीमेटम जारी करते हुए क्षेत्र से सभी पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की मांग की है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की भी अपील की है।

मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में पाकिस्तान की सेना पर बलूचिस्तान में अवैध रूप से तैनात होने और क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों तथा खनिजों के दोहन का आरोप लगाया। बयान में कहा गया कि पाकिस्तानी सैन्य मौजूदगी से बलूचिस्तान के लोगों की जान, संपत्ति और कारोबार को खतरा है।

पाकिस्तानी सेना को बताया ‘कब्जा करने वाली ताकत’

बयान में बलूचिस्तान की ओर से पाकिस्तानी सेना को एक आक्रमणकारी और कब्जा करने वाली ताकत करार दिया है। मीर यार बलूच ने दावा किया कि क्षेत्र में पाकिस्तानी सैन्य मौजूदगी स्थानीय लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने पाकिस्तान से केवल सैनिकों को वापस बुलाने की मांग नहीं की, बल्कि सैन्य उपकरण भी बलूचिस्तान में छोड़ने को कहा है।

‘हथियार और उपकरण यहीं छोड़कर जाएं’

मीर यार बलूच ने मांग की है कि पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान से वापस जाते समय अपने युद्धक विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक, भारी तोपखाने, नौसैनिक पोत और अन्य सैन्य उपकरण बलूच बलों को सौंपे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास मौजूद ये सैन्य संसाधन कथित तौर पर बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों से हासिल धन से खरीदे गए हैं। इसलिए पाकिस्तान को इन्हें अपने साथ ले जाने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

1947 और 1971 का किया जिक्र

अपने बयान में मीर यार बलूच ने साल 1947 में ब्रिटिश शासन के भारत छोड़ने और 1971 में बांग्लादेश के युद्ध का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह ब्रिटेन भारत छोड़ते समय सैन्य हथियार और उपकरण भारत को सौंपकर गया था, उसी तरह 1971 में युद्ध के बाद पाकिस्तान ने भी बांग्लादेश में अपनी सैन्य संपत्ति वहां की सेनाओं के हवाले की थी।

उन्होंने इसी तर्ज पर पाकिस्तान से बलूचिस्तान से सेना हटाने की तारीख और डेडलाइन घोषित करने की मांग की। बयान में यह भी कहा गया कि पाकिस्तानी सेना को वापस जाते समय कथित तौर पर एक भी गोली साथ ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, बलूच नेता का यह दावा कि पाकिस्तान बलूचिस्तान में जमीनी युद्ध हार चुका है, स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं किया गया है।

1971 के बांग्लादेश युद्ध से की तुलना

मीर यार बलूच ने बलूचिस्तान की मौजूदा स्थिति की तुलना 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से की है। उन्होंने पाकिस्तान पर बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बलूचिस्तान के लोग कथित अत्याचारों को नहीं भूलेंगे और पाकिस्तान को उनके मुताबिक निरर्थक युद्ध जारी रखने के बजाय अपनी सेनाएं वापस बुला लेनी चाहिए।

इंटरनेशनल समुदाय से ‘स्वतंत्र देश’ की मांग

बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की अपील की गई। साथ ही पाकिस्तान की सैन्य वापसी सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया गया। मीर यार बलूच ने पाकिस्तान की रक्षा, सुरक्षा, सीमा सुरक्षा और खनिज संसाधनों की निगरानी से जुड़े बलों के अलावा पाकिस्तानी वायुसेना और नौसेना की मौजूदगी खत्म करने की भी मांग की। उन्होंने बलूचिस्तान में तैनात गैर-बलूच पाकिस्तानी नागरिकों से भी सेना, फ्रंटियर कॉर्प्स, पुलिस और अन्य सरकारी संस्थानों से क्षेत्र छोड़ने की अल्टीमेटम दिया।

‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ का ऐलान

यह बयान ऐसे समय आया है जब 11 अगस्त को बलूच अलगाववादी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ के गठन की घोषणा करने का दावा किया था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान की पाकिस्तान से स्वतंत्रता को मान्यता देने की अपील की थी। बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बना हुआ है।

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अलगाववादी संगठन पाकिस्तान से स्वतंत्रता की मांग करते हैं और इस्लामाबाद पर राजनीतिक उपेक्षा तथा क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के कथित शोषण का आरोप लगाते हैं। वहीं, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) समेत अलगाववादी समूह पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सरकारी दफ्तरों पर हमलों की जिम्मेदारी लेते रहे हैं। इसके जवाब में पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा अभियान तेज किए हैं।

UP-Japan Investment Meet 2026 : जापानी तकनीक और यूपी की औद्योगिक ताकत से खुलेगा निवेश का नया रास्ता, हजारों नौकरियों की उम्मीद

UP-Japan Investment Meet 2026 : जापानी तकनीक और यूपी की औद्योगिक ताकत से खुलेगा निवेश का नया रास्ता, हजारों नौकरियों की उम्मीद

यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 के उद्घाटन एवं दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में जापान और भारत के प्रमुख उद्योग समूहों ने उत्तर प्रदेश को निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ केंद्र बताया। समारोह में कुबोटा कॉरपोरेशन जापान और स्पार्क मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश में अपने निवेश, साझेदारी के अनुभव और भविष्य की संभावनाओं को साझा किया।
दोनों उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए प्रदेश में उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल मानव संसाधन, बड़े बाजार, निवेश-अनुकूल नीतियों और सरकार के सहयोग को औद्योगिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया।

 

कुबोटा ने कहा- यूपी में निवेश दीर्घकालिक विश्वास का प्रतीक

समारोह में कुबोटा कॉरपोरेशन, जापान के प्रेसिडेंट एवं सीईओ शिंगो हानाडा ने नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की ग्राउंड ब्रेकिंग को कंपनी के लिए महत्वपूर्ण माइलस्टोन बताते हुए कहा कि इस अवसर पर उत्तर प्रदेश में कुबोटा की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और साझेदारी को एक नया विस्तार मिल रहा है। उन्होंने भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, इन्वेस्ट यूपी और उन सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके समर्थन और सहयोग से यह महत्वपूर्ण पड़ाव संभव हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश भारत के सबसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक केंद्रों में से एक के रूप में उभरा है। उत्तर प्रदेश में कुबोटा का निवेश प्रदेश की क्षमता में कंपनी के दीर्घकालिक विश्वास को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश की प्रगति और भारत को एक विकसित एवं मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों में उद्योग जगत भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है।

 

135 साल से लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के मिशन पर कुबोटा

कुबोटा सीईओ ने कहा कि 135 वर्षों से अधिक समय से कुबोटा लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और समाज में योगदान देने के उद्देश्य से काम कर रहा है। कंपनी की फिलॉसफी के अनुरूप वह बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए लोगों के हित में काम करती रहेगी। उन्होंने भारत में कुबोटा की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में कंपनी की मौजूदगी उसकी मजबूत साझेदारियों के कारण लगातार सुदृढ़ हुई है। उन्होंने नंदा परिवार और उनकी संस्था का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस परिवार ने दशकों से भारत की सेवा की है और देश में कृषि के मशीनीकरण में अग्रणी भूमिका निभाई है। नंदा परिवार के नेतृत्व के साथ कुबोटा की साझेदारी आगे भी और मजबूत होती रहेगी। कुबोटा और उसके भारतीय साझेदारों की साझी महत्वाकांक्षा भविष्य के लिए एक मजबूत एक्सपोर्ट बेस तैयार करना है। जापान की विश्वस्तरीय तकनीक और भारतीय साझेदारों की स्थानीय समझ एवं क्षमता मिलकर इस दिशा में नई संभावनाएं पैदा कर सकती हैं।

 

स्पार्क मिंडा की यूपी में 40 वर्षों से अधिक की मौजूदगी, अब बड़े स्तर पर विस्तार की तैयारी

समारोह में आकाश मिंडा, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड ने उत्तर प्रदेश में कंपनी की मौजूदगी और भविष्य की योजनाओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज संभावनाओं और नए अवसरों का प्रदेश है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदेश उद्योग और निवेश को प्राथमिकता देने वाला राज्य बन चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण नहीं कर रहा, बल्कि निवेशकों और उद्योग जगत के बीच इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस और इंडस्ट्रियल कॉन्फिडेंस भी तैयार कर रहा है।

 

एक्सप्रेसवे, कॉरिडोर और वर्ल्ड क्लास लॉजिस्टिक्स ने बदला औद्योगिक परिदृश्य

आकाश मिंडा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में औद्योगिकीकरण के लिए मजबूत फाउंडेशन तैयार हुआ है। प्रदेश में एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, वर्ल्ड क्लास लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल पार्क, स्किल्ड मैनपावर और स्मार्ट टाउनशिप जैसी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। उन्होंने हाल में संचालित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ऐसी कई योजनाओं और परियोजनाओं को हकीकत में बदलते हुए देखा गया है, जो कुछ समय पहले तक केवल एक परिकल्पना मात्र थीं।

 

उत्तर प्रदेश में 9 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार

आकाश मिंडा ने बताया कि वह स्पार्क मिंडा ग्रुप का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और कंपनी ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी की उत्तर प्रदेश में 40 वर्षों से अधिक समय से मौजूदगी है और वर्तमान में प्रदेश में 9,000 से अधिक लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश स्पार्क मिंडा के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य है और कंपनी यहां अपनी मौजूदगी को कहीं बड़े स्तर पर विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

एडवांस टेक्नोलॉजी से ईवी और इलेक्ट्रॉनिक्स तक बढ़ेगा निवेश

आकाश मिंडा ने बताया कि कंपनी उत्तर प्रदेश में एडवांस टेक्नोलॉजी, मोटर पार्ट्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा डिजाइन एवं डेवलपमेंट सेंटर जैसे क्षेत्रों में अपना निवेश बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी डीपर लोकलाइजेशन और बैकवर्ड इंटीग्रेशन की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। इसके लिए जापानी कंपनियों के साथ साझेदारी काफी महत्वपूर्ण है। निवेश विस्तार के साथ कंपनी प्रदेश में करीब 6,000 से 8,000 अतिरिक्त लोगों को रोजगार देने की दिशा में काम करना चाहती है।

 

जापान की तकनीक और यूपी की क्षमता का संयोजन बनेगा ताकत

स्पार्क मिंडा के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने जापान और दुनिया भर के उद्योगों को उत्तर प्रदेश में निवेश के अवसरों पर विचार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाएं बेहद मजबूत हैं।।जापान वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजी, ग्लोबल क्वालिटी और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग लेकर आता है, जबकि उत्तर प्रदेश स्केल, टैलेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर, पॉलिसी सपोर्ट, बड़ा मार्केट और बिजनेस फ्रेंडली इनवॉयरमेंट उपलब्ध कराता है। भारतीय कंपनियां स्थानीय क्षमताओं, ग्राहकों की जरूरतों की बेहतर समझ और आगे बढ़ने की इच्छा लेकर आती हैं। इन सभी क्षमताओं का संयोजन उत्तर प्रदेश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में मदद कर सकता है।

 

कारोबार के साथ रोजगार और विकसित भारत में योगदान है लक्ष्य

आकाश मिंडा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश का उद्देश्य केवल बिजनेस ग्रोथ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करना भी होना चाहिए। कंपनी का लक्ष्य प्रदेश में अपनी औद्योगिक उपस्थिति का विस्तार करने के साथ रोजगार सृजन और विकसित भारत के सपने को साकार करने में योगदान देना है।  

Solar Panel Cost: अब सोलर पैनल लगवाना महंगा होगा! ICRA ने कहा- 20% तक बढ़ सकती है लागत

Solar Panel Cost: देश में बड़े सोलर प्रोजेक्ट लगाना आने वाले महीनों में महंगा पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA का कहना है कि अगले 6 से 8 महीनों में इनकी लागत करीब 20% तक बढ़ सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह चीन की जगह घरेलू सोलर सेल का इस्तेमाल है। वहीं पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम जैसी धातुएं भी महंगी हो गई हैं।

ICRA के मुताबिक, सरकार के नए नियमों के बाद डेवलपर्स को अब घरेलू सोलर सेल खरीदने पड़ रहे हैं। ये आयातित सेल के मुकाबले काफी महंगे हैं। इसका असर सीधे मॉड्यूल और पूरे प्रोजेक्ट की लागत पर पड़ रहा है।

घरेलू सोलर सेल क्यों बढ़ा रहे हैं खर्च?

ICRA का कहना है कि घरेलू सोलर सेल की कीमत आयातित सेल से 6-7 सेंट प्रति वॉट यानी करीब 5-6 रुपये प्रति वॉट ज्यादा है।

एजेंसी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट गिरीशकुमार कदम के मुताबिक, घरेलू सेल से बने मॉड्यूल की लैंडेड कॉस्ट करीब 22.5 सेंट प्रति वॉट (करीब 19 रुपये) है। वहीं आयातित सेल वाले मॉड्यूल की लागत करीब 16 सेंट प्रति वॉट (करीब 13.5 रुपये) पड़ती है। उनका कहना है कि अगले कुछ महीनों में दिखने वाली लागत बढ़ोतरी का सबसे बड़ा हिस्सा इसी बदलाव से आएगा।

सरकार के नए नियम का क्या असर है?

सरकार ने 1 जून 2026 से नया नियम लागू किया है। इसके तहत सोलर प्रोजेक्ट्स में अब सिर्फ ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) में शामिल कंपनियों के घरेलू सोलर सेल ही इस्तेमाल किए जाएंगे।

हालांकि कुछ ओपन एक्सेस और नेट मीटरिंग प्रोजेक्ट्स को 31 दिसंबर 2026 तक की राहत दी गई है।

पश्चिम एशिया का असर भी दिख रहा

ICRA का कहना है कि सिर्फ घरेलू सेल ही वजह नहीं हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसकी वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं। इससे प्रोजेक्ट की कुल लागत और बढ़ सकती है।

फिर भी सेक्टर पर भरोसा कायम

लागत बढ़ने के बावजूद ICRA ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर ‘Stable’ आउटलुक बरकरार रखा है।

एजेंसी का अनुमान है कि बड़े हाइड्रो समेत रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी भारत के बिजली उत्पादन में 2024-25 के 22% से बढ़कर 2029-30 तक 35% से ज्यादा हो सकती है। 30 जून 2026 तक देश में 150 गीगावॉट से ज्यादा रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन थे।

चुनौतियां अभी भी बाकी हैं

ICRA का कहना है कि जमीन अधिग्रहण, ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमी, PPA और PSA साइन होने में देरी, महंगे उपकरण और सप्लाई चेन की दिक्कतें अब भी बनी हुई हैं। बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती है।

इसके बावजूद FY26 में रिन्यूएबल सेक्टर में 72 रेटिंग अपग्रेड और 21 डाउनग्रेड हुए। वहीं FY27 की पहली तिमाही में 4 अपग्रेड हुए और कोई डाउनग्रेड नहीं हुआ।

Kisan Vikas Patra: किसान विकास पत्र में पैसा डबल कितने समय में होगा?

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Delhi CNG Blast: दिल्ली के टिकरी कलां में सीएनजी स्टेशन पर जोरदार धमाका, गैस टैंक फटने से 3 लोगों की मौत, कई झुलसे

Delhi CNG Blast incident: बाहरी दिल्ली के टिकरी कलां क्षेत्र में बुधवार (19 अगस्त) को एक सीएनजी स्टेशन पर गैस भरते समय एक ट्रक का गैस सिलेंडर फटने से तीन लोगों की मौत हो गई। जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। दिल्ली पुलिस ने बताया कि तीनों मृतक सीएनजी स्टेशन के कर्मचारी हैं। टिकरी कलां मेट्रो स्टेशन के पास स्थित CNG पंप पर ट्रक के CNG सिलेंडर में जोरदार धमाका होने से हड़कंप मच गया।

फायर सर्विस (DFS) के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि बुधवार दोपहर 3.37 बजे इस घटना की सूचना मिली, जिसके बाद दमकल की छह गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। अधिकारी ने कहा कि ट्रक के आसपास खड़े छह लोग विस्फोट की चपेट में आ गए।

पुलिस के मुताबिक, जोरदार धमाके में मनीष की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि सन्नी और चार अन्य लोगों को पास के एक अस्पताल ले जाया गया। यहां इलाज के दौरान सन्नी की मौत हो गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि तीसरे मृतक की पहचान की जा रही है। अधिकारी ने बताया कि तीन घायलों की हालत गंभीर है। पुलिस ने कहा कि विस्फोट के सटीक कारण का तुरंत पता नहीं चल पाया है।

धमाके की असल वजह का अभी पता नहीं चल पाया है और मामले की जांच चल रही है। फायर सर्विस के एक अधिकारी के मुताबिक, इस घटना से इलाके में अफरातफरी मच गई। फायर सर्विस के कर्मचारियों ने मौके पर जरूरी एहतियाती कदम उठाए। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। मामले में आगे की जांच जारी है। खबर लिखे जाने तक किसी की हिरासत या गिरफ्तारी की खबर सामने नहीं आई है।

दिल्ली में अवैध रूप से रह रहा पाकिस्तानी नागरिक गिरफ्तार

इस बीच, खबर है कि राष्ट्रीय राजधानी में अवैध रूप से रहने के आरोप में पुलिस ने पुरानी दिल्ली से एक पाकिस्तानी नागरिक को हिरासत में लिया है। सूत्रों के मुताबिक, यह शख्स नेपाल के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था और दिल्ली में एक रेस्तरां में काम कर रहा था। उसे 15 अगस्त को हिरासत में लिया गया था। सूत्र ने पीटीआई को बताया, “व्यक्ति की मां मूल रूप से दिल्ली की थीं। लेकिन उन्होंने एक पाकिस्तानी नागरिक से शादी की थी और बाद में पाकिस्तानी नागरिकता ले ली थी।”

उन्होंने बताया कि आरोपी की पृष्ठभूमि और गतिविधियों का पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने उससे लंबी पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, अब तक की पूछताछ में कोई आतंकी कोण सामने नहीं आया है। सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के बाद उस व्यक्ति को फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) को सौंप दिया गया। वहां उसे पाकिस्तान वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

यूपी में निवेश की अपार संभावनाएं, भारत की आर्थिक विकास यात्रा के ये 4 स्तंभ बनेंगे आधार: अश्विनी वैष्णव

यूपी में निवेश की अपार संभावनाएं, भारत की आर्थिक विकास यात्रा के ये 4 स्तंभ बनेंगे आधार: अश्विनी वैष्णव

जापान और उत्तरप्रदेश के बीच निवेश एवं औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम 'यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026' में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत की आर्थिक विकास यात्रा और भविष्य की निवेश संभावनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के संबंध लंबे समय से विश्वास पर आधारित रहे हैं और उत्तर प्रदेश तथा जापान के बीच बढ़ती साझेदारी इस विश्वास को और मजबूत करेगी।

 

केंद्रीय मंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जापान और उत्तर प्रदेश के बीच इस महत्वपूर्ण पहल के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर तथा उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल का भी स्वागत किया और कहा कि जापान के उद्योग जगत के लिए उत्तर प्रदेश में तेजी से अवसर खुल रहे हैं।

 

भारत की आर्थिक सोच को चार स्तंभों में समझाया

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की मौजूदा आर्थिक वृद्धि को चार प्रमुख स्तंभों के आधार पर समझा जा सकता है। इनमें सोशल, डिजिटल और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश, समावेशी विकास, मैन्युफैक्चरिंग एवं इनोवेशन और कानूनों तथा नियमों का सरलीकरण प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि भारत पिछले कुछ वर्षों से लगभग 6 से 8 प्रतिशत की सतत आर्थिक वृद्धि के दौर में है। इसके साथ महंगाई को नियंत्रण में रखने और देश की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाए रखने पर भी लगातार ध्यान दिया गया है। इससे भारत को आने वाले वर्षों में लंबे समय तक टिकाऊ विकास की मजबूत क्षमता मिली है।

 

जापान के निवेशकों को दिया उत्तर प्रदेश में निवेश का संदेश

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में आने वाले वर्षों में 6 से 8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का लंबा दौर देखने को मिल सकता है। इस विकास यात्रा में रेलवे, डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, कृषि समेत लगभग हर क्षेत्र में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने जापान के उद्योग जगत से भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज तेजी से बदल रहा है और राज्य में निवेशकों के लिए मजबूत आधार तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा कि जापान के निवेशकों के लिए संदेश स्पष्ट है- भारत में निवेश करें, उत्तर प्रदेश में निवेश करें। सरकार निवेशकों की सहायता और सुविधा के लिए पूरी तरह तैयार है। निवेशकों की सफलता ही भारत और उत्तर प्रदेश की सफलता है। उन्होंने कहा कि भारत-जापान की मजबूत साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

हार के बाद श्रीलंका के लिए एक और बुरी खबर, 3 सीनियर खिलाड़ी अभी भी चोटिल

भारत के खिलाफ कोलंबो होने वाले दूसरे टेस्ट मैच से कुसल मेंडिस और दिनेश चांदीमल बाहर हो गए हैं। रविवार से शुरू होने वाले इस मैच के लिए पथुम निसंका के भी समय पर फिट होने की उम्मीद कम है। लंका प्रीमियर लीग (एलपीएल) के शुरुआती दौर में हैमस्ट्रिंग की चोट लगने के बाद से मेंडिस ने कोई भी प्रतिस्पर्धी क्रिकेट नहीं खेला है। टेस्ट टीम में उनकी जगह निरोशन डिकवेला को शामिल किया गया था, और पहली पारी में 80 रन बनाने के बाद, डिकवेला के अपनी जगह बनाए रखने की संभावना है।

वहीं, चांदीमल दूसरे टेस्ट से अपने आप बाहर हो गए हैं क्योंकि आईसीसी के नियमों के अनुसार, सिर में चोट के कारण सब्स्टीट्यूट किए गए खिलाड़ी सात दिनों तक नहीं खेल सकते। गॉल में चौथे दिन उनके बाहर होने से पसिनदु सूरियाबंदारा के डेब्यू का रास्ता साफ हुआ। सूरियाबंदारा अपनी पहली टेस्ट पारी में बिना खाता खोले आउट हो गए थे, लेकिन फिर भी प्लेइंग इलेवन में अपनी जगह बनाए रख सकते हैं। वहीं, निसांका जून में हुई अपनी कलाई की सर्जरी से उबरने के लिए अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। माना जा रहा है कि वह मेंडिस की तुलना में मैच के लिए फिट होने के ज़्यादा करीब हैं, लेकिन बल्लेबाजी करते समय उन्हें अभी भी परेशानी हो रही है।

श्रीलंका के कोच गैरी कर्स्टन ने कहा, “कुसल मेंडिस को हैमस्ट्रिंग की गंभीर चोट लगी है और वह कुछ समय तक उपलब्ध नहीं रहेंगे। दिनेश भी अगले टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इस नज़रिए से हमारे कुछ खिलाड़ी टीम में नहीं हैं, लेकिन इससे युवा खिलाड़ियों के लिए आगे आने और अपनी जगह पक्की करने का अच्छा मौका बनता है। ऐसे खिलाड़ी हैं जिनका इस देश में फर्स्ट-क्लास रिकॉर्ड बहुत अच्छा रहा है। यह उनके लिए एक अच्छा मौका है।” श्रीलंका ने अभी तक दूसरे टेस्ट के लिए टीम की घोषणा नहीं की है। एसएलसी ने इस सीरीज़ से पहले जो टीम घोषित की थी, वह केवल पहले टेस्ट के लिए थी।

नेपाल बॉर्डर तक 4 लेन हाईवे, 3591 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, जानिए मुजफ्फरपुर से सोनबरसा तक क्या बदलेगा

Bihar Highway Project: बिहार में रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई पर ले जाने और भारत-नेपाल सीमा तक आवाजाही को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़े फोर-लेन हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने बुधवार बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को फोर-लेन मानकों में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 3590.73 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक यह 82.578 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट हाइब्रिड एंनुटी मॉडल से बनाया जाएगा। यह हाईवे भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनबरसा को मुजफ्फरपुर में ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का हिस्सा रहे NH-27 से सीधे जोड़ेगा।

इस हाइवे प्रोजेक्ट से बिहार को क्या फायदा होगा?

इस फोर-लेन हाईवे को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के हिसाब से तैयार किया जाएगा। इस पर गाड़ियों की एवरेज स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। इस हाईवे पर बीच में कोई एट-ग्रेड मीडियन ओपनिंग नहीं होगी। इससे गाड़ियों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के तेज रफ्तार से हो सकेगी। प्रोजेक्ट के पूरा होने से रूट पर पड़ने वाले घनी आबादी वाले कई प्रमुख इलाकों को ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी। इनमें मुजफ्फरपुर, मकसूदपुर, रुन्नीसैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुतही और सोनबरसा शामिल हैं। इस अपग्रेडेड कॉरिडोर से यात्रियों और माल ढुलाई के समय में भारी बचत होगी। साथ ही ईंधन की खपत और वाहनों के रखरखाव पर भी कम खर्च होगा।

पीएम गतिशक्ति से जुड़ेगा नेटवर्क, इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स नोड्स को बूस्ट

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस हाईवे की प्लानिंग पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स नोड्स की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए की गई है। यह कॉरिडोर 5 पीएम गतिशक्ति इकोनॉमिक नोड्स को जोड़ेगा। इनमें चार इंडस्ट्रियल एस्टेट और एक मेगा फूड पार्क शामिल हैं। इसके अलावा यह चार सोशल नोड्स और मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशनों पर स्थित दो लॉजिस्टिक्स नोड्स से भी कनेक्ट होगा। यह नया रूट पहले से मौजूद NH-31 और NH-122 जैसे कॉरिडोर, बरौनी सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों और गंगा नदी के किनारे बने रिवराइन लॉजिस्टिक्स हब्स के साथ कनेक्टिविटी को और बेहतर करेगा।

क्रॉस-बॉर्डर कारोबार को भी मिलेगा पुश

सोनबरसा और पास में भिठ्ठामोड़ में स्थित लैंड पोर्ट के जरिए यह फोर-लेन हाईवे भारत और नेपाल के बीच सीमा पार यात्रियों और कार्गो की आवाजाही को बेहद आसान बनाएगा। इस 82.578 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट में बड़े स्तर पर सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार होंगे। इसपर 7 बड़े पुल होंगे, जिसमें बारहमासी बागमती नदी पर बनने वाला 340 मीटर लंबा एक प्रमुख पुल भी शामिल है। इसके अलावा 3 रेलवे ओवरब्रिज और 2 फ्लाईओवर भी होंगे।

इस नए हाईवे से इलाके की कृषि सप्लाई चेन को बहुत मजबूती मिलेगी। किसान अपनी उपज को तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। यह रूट धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक जाने वाले लोगों के लिए भी काम का साबित होगा। इस कॉरिडोर से बौद्ध सर्किट और सीतामढ़ी में स्थित प्रसिद्ध जानकी पुनौरा धाम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को वर्ल्ड क्लास सड़क कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा।

Mutual Funds: सोने ने दिया 9% रिटर्न, फिर भी निवेशकों ने इन फंड्स में लगाए ₹1.40 लाख करोड़

Mutual Funds: जुलाई 2026 में सोने ने करीब 9% का रिटर्न दिया। इसके बावजूद भारतीय निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा मनी मार्केट फंड्स पर जताया। Vallum Capital की अगस्त 2026 की Monthly Macro Grid Chartbook के मुताबिक, जुलाई में इन फंड्स में 1.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया। दिलचस्प बात यह है कि जून में इसी कैटेगरी से 65,530 करोड़ रुपये निकल गए थे।

सिर्फ मनी मार्केट फंड ही नहीं, फिक्स्ड इनकम फंड्स में भी वापसी देखने को मिली। जुलाई में इनमें 5,947 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि जून में 53,006 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। दूसरी तरफ, सोने की कीमत बढ़ने के बावजूद प्रेशियस मेटल फंड्स में निवेश घटकर 4,084 करोड़ रुपये रह गया, जो जून में 8,680 करोड़ रुपये था।

SIP में लगातार बढ़ रहा निवेश

सुरक्षित निवेश की तरफ झुकाव का मतलब यह नहीं था कि निवेशकों ने शेयर बाजार से दूरी बना ली। Franklin Templeton India की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में SIP योगदान 12% बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं SIP खातों की संख्या भी 12.5% बढ़कर 10.63 करोड़ हो गई।

हालांकि, औसत मासिक SIP योगदान में मामूली गिरावट आई। यह 3,012 रुपये से घटकर 3,007 रुपये रह गया।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने बनाया नया रिकॉर्ड

जुलाई में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर रिकॉर्ड 85.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इस दौरान इक्विटी फंड्स का AUM 15.3% बढ़कर 38.40 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं पैसिव फंड्स का AUM सालाना आधार पर 24% से ज्यादा बढ़ा।

सबसे ज्यादा पैसा कहां गया?

इक्विटी फंड्स के भीतर भी निवेशकों की पसंद साफ नजर आई। स्मॉलकैप फंड्स में जुलाई के दौरान 7,768 करोड़ रुपये आए, जबकि मिडकैप फंड्स में 6,192 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। Vallum Capital के मुताबिक, जुलाई में माइक्रोकैप शेयर 4.6% और स्मॉलकैप शेयर 2.8% चढ़े।

निवेशकों ने क्यों सुरक्षित विकल्प चुने?

डेटा बताता है कि जुलाई में निवेशकों ने सिर्फ सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली एसेट क्लास का पीछा नहीं किया। एक तरफ SIP और इक्विटी में निवेश जारी रहा, तो दूसरी तरफ बड़ी रकम मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम फंड्स में गई। इससे साफ है कि निवेशक बेहतर रिटर्न के साथ-साथ लिक्विडिटी और कम जोखिम वाले विकल्पों को भी प्राथमिकता दे रहे थे।

Vallum Capital का कहना है कि जुलाई में सोने की तेजी की बड़ी वजह अमेरिका की उम्मीद से कमजोर जॉब्स रिपोर्ट रही। इससे फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद कुछ कमजोर पड़ी। साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने भी सोने की कीमतों को सहारा दिया।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

रेलवे के इन 4 बड़े प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी, 6448 गांवों की रेल कनेक्टिविटी को मिलेगा जबर्दस्त बूस्ट, ये रही पूरी डिटेल

Indian Railways New Projects: देश में रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने 9450 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले चार बड़े रेलवे मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है। हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक ये प्रोजेक्ट्स पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 8 जिलों में फैले हैं। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से भारतीय रेलवे के अभी के नेटवर्क में लगभग 410 किलोमीटर का नया ट्रैक जुड़ जाएगा। सरकार ने इन सभी प्रोजेक्ट्स को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का टारगेट फिक्स किया है।

60 लाख की आबादी और 6448 गांवों को सीधा लाभ

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इन नई पटरियों के बिछने से करीब 6448 गांवों की रेल कनेक्टिविटी में सुधार होगा। यहां बसने वाली करीब 60 लाख की आबादी को रेलवे के इन नए प्रोजेक्ट्स का फायदा मिलेगा। इन रूटों पर नई लाइनें बनने से रेल नेटवर्क पर दबाव और भीड़भाड़ कम होगी। इससे ट्रेनों की टाइमिंग तो सुधरेगी ही, लोगों को कम्यूट करने में भी आसानी होगी। ये सारे प्रोजेक्ट्स पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार किए गए हैं।

इन 4 रूट्स पर बिछेंगी नई अतिरिक्त रेल लाइनें

कैबिनेट से मंजूर किए गए चारों प्रोजेक्ट्स के तहत सबसे बिजी रेल रूटों पर तीसरी और चौथी पटरियां बिछाई जाएंगी। इनकी जानकारी यहां नीचे दी गई है-

  • खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन: यह इस पैकेज का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। ये 173 किलोमीटर लंबा है। यह लाइन पश्चिम बंगाल और ओडिशा दोनों राज्यों से होकर गुजरेगी।
  • भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन: ओडिशा के भीतर रेल क्षमता बढ़ाने के लिए 75 किलोमीटर लंबी चौथी लाइन बनाई जाएगी।
  • गुम्मिडीपुंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन: आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को जोड़ने वाले इस रूट पर 90 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी।
  • कटक-पारादीप (बड़ाबंधा) तीसरी और चौथी लाइन: ओडिशा के इस महत्वपूर्ण औद्योगिक और पोर्ट रूट पर 72 किलोमीटर की तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी।

पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी में होगा सुधार

रेल नेटवर्क के इस विस्तार से देश के कई प्रमुख प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा। लोगों को भीतरकणिका नेशनल पार्क, कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, चांदीपुर बीच, पुलिकट झील और नेलापट्टू बर्ड सैंक्चुअरी जैसी मशहूर जगहों के लिए सीधी और बेहतर रेल सुविधाएं मिल सकेंगी।

माल ढुलाई क्षमता में 7.6 करोड़ टन का होगा इजाफा

जिन रूट्स पर ये पटरियां बिछाई जा रही हैं, वे देश में माल ढुलाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन लाइनों से कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा और इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और खाद्यान्न जैसी जरूरी वस्तुओं का ट्रांसपोर्ट किया जाता है। नई रेल लाइनें बनने से भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में सालाना 7.6 करोड़ टन का भारी इजाफा होगा।

सड़क मार्ग के बजाय रेलवे से अधिक माल ढुलाई होने से देश का लॉजिस्टिक्स खर्च घटेगा और साथ ही इंपोर्ट किए जाने वाले फॉसिल फ्यूल पर डिपेंडेंसी कम होगी। सरकार के अनुमान के मुताबिक इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से करीब 13 करोड़ लीटर कच्चे तेल के आयात की बचत होगी और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उत्सर्जन में करीब 65 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी।