Motorola Edge 70 Neo की पहली झलक लीक, 200MP कैमरे के साथ 4 कलर में आएगा फोन!

Motorola Edge 70 Neo के लॉन्च से पहले ही इसके नए लीक हुए रेंडर सामने आए हैं। इन तस्वीरों से आने वाले स्मार्टफोन की पहली झलक मिलती है और पता चलता है कि Motorola इस डिवाइस के लिए कई डिजाइन और कलर ऑप्शन तैयार कर रहा है। यह हैंडसेट पहले ही भारत में कंपनी के Android 17 टेस्टिंग प्रोग्राम में देखा जा चुका है, जिससे संकेत मिलता है कि इसका आधिकारिक लॉन्च जल्द ही हो सकता है। हालांकि, Motorola ने अभी तक Edge 70 Neo की पुष्टि नहीं की है और न ही इसके स्पेसिफिकेशन, कीमत या उपलब्धता के बारे में कोई जानकारी दी है।

Motorola Edge 70 Neo के लीक से 200MP कैमरे का संकेत मिला है

‘द मैक ऑब्जर्वर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, लॉन्च से पहले Motorola Edge 70 Neo के लीक हुए रेंडर सामने आए हैं, जिनमें इसका डिजाइन और चार कलर ऑप्शन दिखाई दे रहे हैं। तस्वीरों में पतले बेजल और बीच में पंच-होल कैमरे वाली फ्लैट डिस्प्ले दिख रही है, जबकि पिछले हिस्से में तीन लेंस और 200MP की ब्रांडिंग वाला उभरा हुआ स्क्वायर कैमरा मॉड्यूल है। इसके अलावा, बैक पैनल के बीच में Motorola का मशहूर बैटविंग लोगो है।

लीक हुए चार रेंडर्स में कथित Motorola Edge 70 Neo को dark green, light blue, olive green और pale pink कलर में दिखाया गया है। इसके रियर पैनल का टेक्सचर अलग-अलग लग रहा है, और Pink कलर वाले मॉडल में एक खास पैटर्न है। हालांकि, Motorola ने कलर्स के आधिकारिक नामों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन कंपनी आमतौर पर अपने स्मार्टफोन के कलर के लिए Pantone ब्रांडिंग का इस्तेमाल करती है।

खबरों के मुताबिक, भारत में Motorola के Android 17 बीटा टेस्टिंग प्रोग्राम के जरिए Motorola Edge 70 Neo का नाम पहले ही सामने आ चुका है। कंपनी की टेस्टिंग एक्टिविटी में इसके दिखने से यह संकेत मिला था कि Motorola इस अनअनाउंसड हैंडसेट को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है।

इससे पहले सामने आई कुछ रिपोर्ट्स में Motorola Edge 70 Neo को Motorola Edge 2026 से जोड़ा गया था, जिसे जून में नॉर्थ अमेरिका में लॉन्च किया गया था। हालांकि, नए रेंडर्स में दिख रही कैमरा ब्रांडिंग से पता चलता है कि दोनों मॉडल्स के फाइनल स्पेसिफिकेशन्स अलग-अलग हो सकते हैं।

बता दें कि Motorola Edge 70 Neo कंपनी की बढ़ती हुई Edge 70 सीरीज का नया मॉडल हो सकता है। Motorola ने भारत में इस सीरीज का स्टैंडर्ड Edge 70 दिसंबर 2025 में लॉन्च किया था। इसके बाद मार्च 2026 में Edge 70 Fusion और Edge 70 Fusion+ पेश किए गए।

इसके बाद अप्रैल में Edge 70 Pro ने एंट्री की, जबकि Edge 70 Pro+ और Edge 70 Max को क्रमशः जून और जुलाई 2026 में लॉन्च किया गया।

हालांकि, खास बात यह है कि Edge 70 Fusion+ को भारत में लॉन्च नहीं किया गया था। अगर Edge 70 Neo भारत में आता है, तो यह सीरीज में एक और नया विकल्प जोड़ देगा।

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IRCTC ने किया बड़ा ऐलान! अब गिफ्ट कार्ड से घूमिये बैंकॉक-पटाया

IRCTC का 6 दिन का थाईलैंड टूर पैकेज कम समय में कई खास जगहों को घूमने का मौका देता है। इस ट्रिप में बैंकॉक और पटाया के साथ कोरल आइलैंड, सफारी वर्ल्ड और नदी क्रूज जैसे शानदार एक्सपीरियंस मिल सकते हैं। कम बजट में शुरू होने वाला यह पैकेज थाईलैंड की खूबसूरती और पॉपुलर जगहों को एक ही यात्रा में देखने की चाह रखने वालों के लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है।

 

 

पैकेज प्राइस और ट्रैवल डेट

थाईलैंड में सर्दी का मौसम: करने लायक चीज़ें और घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहें

IRCTC का थाईलैंड टूर पैकेज ₹49,500 प्रति व्यक्ति से शुरू हो रहा है। ट्रिपल शेयरिंग में एक व्यक्ति का किराया ₹49,500 है, जबकि डबल शेयरिंग के लिए ₹61,300 और सिंगल ऑक्यूपेंसी के लिए ₹57,000 देने होंगे। बच्चों के लिए किराया ₹30,300 रखा गया है। बुकिंग के समय 2% TCS अलग से देना होगा, जबकि 5% GST पैकेज की कीमत में शामिल है। यह 5 रात और 6 दिन का थाईलैंड टूर है, जो 12 नवंबर से 17 नवंबर 2026 तक चलेगा। जर्नी की शुरुआत कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से होगी। ट्रैवलर फ्लाइट से बैंकॉक पहुंचेंगे और वहां से आगे का सफर टूर प्लानिंग के हिसाब से करेंगे।

 

 

पहला दिन – पटाया

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बैंकॉक एयरपोर्ट पहुंचने के बाद ट्रैवलर को पटाया ले जाया जाएगा। एयरपोर्ट से पटाया तक का सफर करीब ढाई घंटे का होगा। होटल पहुंचकर चेक-इन और नाश्ता करने के बाद टाइगर पार्क घूमने का मौका मिलेगा। इसके बाद लंच किया जाएगा। शाम को पटाया का फेमस अल्काजार शो देखने जाएंगे। शो के बाद भारतीय रेस्टोरेंट में डिनर होगा और रात पटाया के होटल में बिताई जाएगी।

 

 

दूसरा दिन – कोरल आइलैंड

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दूसरे दिन सुबह नाश्ते के बाद कोरल आइलैंड घूमने का प्लान है। यात्रियों को स्पीडबोट से आइलैंड तक ले जाया जाएगा, जहां समुद्र और खूबसूरत नजारों का आनंद लिया जा सकता है। कोरल आइलैंड घूमने के बाद भारतीय रेस्टोरेंट में लंच कराया जाएगा। इसके बाद जेम्स गैलरी देखने का मौका मिलेगा। शाम को कुछ समय अपने हिसाब से बिताया जा सकता है। रात में डिनर के बाद पटाया के होटल में आराम करेंगे।

 

 

तीसरा दिन – बैंकॉक

Ripples Cruise

तीसरे दिन पटाया से चेक-आउट करके बैंकॉक के लिए रवाना होंगे। बैंकॉक पहुंचने के बाद आधे दिन का सिटी टूर कराया जाएगा। इस दौरान मार्बल बुद्ध और गोल्डन बुद्ध जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों को देखने का मौका मिलेगा। इसके बाद लंच किया जाएगा। शाम को चाओफ्राया नदी में डिनर क्रूज का आनंद लिया जा सकेगा। नदी के खूबसूरत नजारों के बीच डिनर के बाद रात बैंकॉक के होटल में ठहरेंगे।

 

 

चौथा दिन – सफारी वर्ल्ड और मरीन पार्क

थाईलैंड में घूमने की जगहें | जैकाडा ट्रैवल

चौथे दिन बैंकॉक में घूमने के लिए स्पेशल लोकेशन है। इस दिन ट्रैवलर सफारी वर्ल्ड और मरीन पार्क जाएंगे। यहां अलग-अलग जानवरों को देखने के साथ मनोरंजक शो देख सकते है। घूमने के दौरान लंच की सुविधा भी मिलेगी। दिनभर की सैर के बाद यात्री बैंकॉक के होटल में वापस आएंगे और रात वहीं रुकेंगे।

 

 

 

पांचवां दिन – बैंकॉक ओशन वर्ल्ड

पांचवें दिन होटल से चेक-आउट करने के बाद SEA LIFE बैंकॉक ओशन वर्ल्ड घूमने जाएंगे। यहां समुद्री जीवों और पानी के अंदर की दुनिया को करीब से देखने का मौका मिलेगा। इसके बाद लंच कराया जाएगा। यदि टाइम मिले तो एयरपोर्ट जाने से पहले बैंकॉक में शॉपिंग भी की जा सकती है। इसके बाद वापसी की फ्लाइट के लिए एयरपोर्ट रवाना होंगे।

 

 

पैकेज फैसिलिटी

IRCTC के इस पैकेज में जर्नी को आसान बनाने के लिए कई फैसिलिटीज शामिल की गई हैं। इसमें थाई लायन एयरलाइंस से कोलकाता और बैंकॉक के बीच आने-जाने का हवाई किराया, तीन सितारा होटल में पांच रातों का ठहराव, नाश्ता, लंच और डिनर शामिल हैं। ट्रैवलर को ट्रैवल इंश्योरेंस और लोकल टूर गाइड की फैसिलिटी भी मिलेगी।

कुछ खर्च ऐसे हैं, जो पैकेज की कीमत में शामिल नहीं किए गए हैं। इनमें वीज़ा फीस, 2% TCS, फ्लाइट में मिलने वाला खाना, सीट चुनने का शुल्क, टिप्स और निजी खर्च शामिल हैं। इसलिए टूर बुक करने से पहले इन एक्स्ट्रा खर्चों को भी अपने बजट में शामिल करें।

 

 

जरूरी डॉक्यूमेंट

थाईलैंड की ट्रिप से पहले पैसेंजर को वहां के लेटेस्ट एंट्री नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। पासपोर्ट की वैलिडिटी कम से कम छह महीने होनी चाहिए। इसके अलावा वापसी का टिकट, होटल बुकिंग की जानकारी, फोटो और पैसे होने का प्रमाण जैसे डॉक्यूमेंट की जरूरत पड़ सकती है। Thailand Digital Arrival Card (TDAC) भी जरूरी हो सकता है।

Viral Post: RAC टिकट वाली महिला ने सीट खाली करने से किया मना, दर्ज की शिकायत, फिर..

भारतीय रेलवे से हर दिन करोड़ों लोग सफर करते हैं। वहीं सफर के लिए हर यात्री को टिकट लेना जरूरी होता है। इसके बावजूद कई यात्री अक्सर बिना टिकट ट्रेन में सफर करते पकड़े जाते हैं। वहीं हाल ही में एक यात्री ने ट्रेन में सफर के दौरान हुई परेशानी का एक्सपीरिएंश शेयर किया। जहां एक महिला किसी दूसरे यात्री की आरक्षित सीट पर बैठी नजर आई। यात्री के मुताबिक, महिला के पास RAC टिकट था, लेकिन उसने उसकी कन्फर्म सीट पर बैठकर उसे खाली करने से इनकार कर दिया। यात्री ने महिला को बताया कि सीट उसके नाम पर रिजर्व है, फिर भी महिला अपनी जगह से नहीं हटी। इस वजह से दोनों के बीच असहज स्थिति बन गई और यात्री काफी परेशान हो गया।

महिला ने सीट छोड़ने से किया मना

X पर अपना एक्सपीरिएंस शेयर करते हुए संजू चौधरी ने इस स्थिति को “इंडियन रेलवे का पीक” बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई दूसरा यात्री कन्फर्म सीट पर कब्जा कर ले और वहां से हटने से मना कर दे, तो कन्फर्म टिकट बुक करने का क्या फायदा है। उन्होंने कहा, “मेरी रिजर्व सीट पर बैठी एक महिला के पास RAC टिकट है, लेकिन वह मुझे उस सीट पर बैठने से मना कर रही है जो असल में मुझे अलॉट की गई है।”

2.5 घंटे तक नहीं हुआ सामाधान

मामले को और मुश्किल बताते हुए यात्री ने कहा कि उसने पहले ही रेलवे अधिकारियों से शिकायत कर दी थी, लेकिन करीब ढाई घंटे बीतने के बाद भी उसकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। उसने कहा, “2.5 घंटे पहले कंप्लेंट की गई थी। अभी भी कोई सॉल्यूशन नहीं।” यात्री ने आगे सवाल उठाते हुए कहा, “तो कन्फर्म सीट बुक करने का क्या मतलब है अगर RAC टिकट वाला कोई व्यक्ति बस उस पर कब्जा कर सकता है और हिलने से मना कर सकता है?” पैसेंजर ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा, “बेसिक सॉल्यूशन के लिए 2.5 घंटे इंतजार करना पड़ा। बिल्कुल बेकार” और इस मामले में संबंधित अधिकारियों को भी टैग किया।

रेलवे ने दिया ध्यान

इसके बाद रेलवे सेवा ने मामले का संज्ञान लिया और यात्री से जरूरी जानकारी शेयर करने को कहा, ताकि शिकायत की जांच की जा सके। लेकिन, चौधरी ने जवाब देते हुए कहा, “आपका TTE आया और कहा कि मुझे उस व्यक्ति से कॉम्प्रोमाइज करना होगा क्योंकि RAC दो सदस्यों को अलॉट किया गया है और मुझे अपनी पूरी यात्रा सोकर करनी होगी।” इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी चर्चा होने लगी।

लोगों ने किया कमेंट

कई यूजर्स ने रेलवे अधिकारियों से ऐसे मामलों में तुरंत दखल देने और उचित कार्रवाई करने की मांग की। एक यूजर ने नाराजगी जताते हुए कहा, “बहुत बेकार, आप लोग कोई एक्शन क्यों नहीं ले रहे हैं? रिजर्वेशन नॉन-रिजर्वेशन हो गया है??” एक अन्य यूजर ने लिखा, “भाई बिल्कुल फ्रस्ट्रेट होने वाली बात है। पैसे देकर कन्फर्म टिकट लिया और फिर भी यह नाटक। रेलवे को इस पर सीरियस एक्शन लेना चाहिए।” एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “सीरियसली, यह खुद के पैसे/टिकट पे मज़ाकिया है। आखिर में सॉल्यूशन यह होगा कि एडजस्ट कर लो, वो लोग दो लोग हैं।”

भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम करेगी विश्वकप का आगाज, देखें शेड्यूल

स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत श्रीलंका से पहले टेस्ट में भिड़ेगा लेकिन भारत की पुरुष हॉकी टीम विश्वकप में भिड़ने के लिए अपने अपने प्रतिद्वंदियों से लोहा लेगी। दोनों ही टीमों को पूल डी में रखा गया है। पुरुष टीम के लिए टूर्नामेंट 15 अगस्त और महिला टीम के लिए 16 अगस्त से टूर्नामेंट शुरु होगा।

बेल्जियम और स्पेन में होने वाले हॉकी  विश्वकप में भारतीय पुरुष टीम का पहला मैच वेल्स से होगा वहीं भारतीय महिला टीम का पड़ोसी मुल्क चीन से होगा। दोनों ही टीमों का पहला मैच 4.30 बजे खेला जाएगा।

भारतीय पुरुष टीम का अगला मैच इंग्लैंड से 17 अगस्त को शाम 6.30 बजे होगा। इसके बाद विश्वकप की सबसे सफल टीम पाकिस्तान भारत से 19 तारीख को 6.30 बजे भिड़ेगी। वहीं महिला टीम की बात करें तो पहले मैच के बाद टीम का अगला मैच दक्षिण अफ्रीका से 18 अगस्त शाम 6.30 बजे होगा। इंग्लैंड के खिलाफ महिला टीम को 20 अगस्त को शाम 6.30 बजे लोहा लेना होगा।

अगर भारतीय पुरुष टीम और महिला टीम के पूल को देखा जाए तो पुरुष टीम का पूल आसान लगता है। वहीं महिला टीम की स्थिति देखते हुए यह ग्रुप कठिन लगता है।

नए प्रारुप से खेला जाएगा टूर्नामेंट

पुरुष और महिला हॉकी विश्वकप नए प्रारुप से खेला जाएगा जिसमें क्वार्टरफाइनल की जगह नहीं होगी। ट्रॉफी के लिए कुल 16 टीमें – पुरुष और महिला दोनों वर्गों में – मुकाबला कर रही हैं। इन टीमों को चार-चार टीमों वाले चार ग्रुप में बांटा गया है। हर ग्रुप की टॉप दो टीमें दूसरे राउंड के लिए क्वालिफ़ाई करेगी। दूसरे राउंड में, क्वालिफ़ाई करने वाली आठ टीमों को चार-चार टीमों वाले दो ग्रुप में बांटा जाएगा।

भारतीय पुरुष टीम की ए पूल में नीदरलैंड्स, अर्जेंटीना, न्यूज़ीलैंड, जापान हैं। बी पूल में बेल्जियम, जर्मनी, फ्रांस, मलेशिया। सी पूल में ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, आयरलैंड, दक्षिण अफ्रीका है। भारतीय महिला टीम की बात करें तो ए पूल में नीदरलैंड्स, ऑस्ट्रेलिया, चिली, जापान हैं। बी पूल में अर्जेंटीना, जर्मनी, संयुक्त राज्य अमेरिका, स्कॉटलैंड हैं। सी पूल में बेल्जियम, स्पेन, न्यूज़ीलैंड, आयरलैंड हैं।दोनों ही टीमों के फाइनल 29 अगस्त को खेले जाएंगे।

यह टूर्नामेंट टीवी पर स्टार सिलेक्ट स्पोर्ट्स और OTT पर जियो हॉटस्टार पर देखा जा सकेगा।

जब गुरु ही बन जाएं विरोधी खेमे की ताकत! कभी टीम इंडिया को बनाया चैंपियन, अब उसी को हराने की तैयारी

भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज का मंच तैयार है। पहला मुकाबला 15 अगस्त से गॉल इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाना है। इससे पहले भारतीय टीम ने तीन दिवसीय वार्म-अप मैच में श्रीलंका क्रिकेट XI को 6 विकेट से हराकर अपनी तैयारियों का अच्छा संकेत दिया। हालांकि इस मुकाबले में एक चेहरा ऐसा भी था, जिसने भारतीय फैंस का खास ध्यान खींचागैरी कर्स्टन। कभी टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जिताने वाले कर्स्टन अब श्रीलंका के खेमे में हैं और आगामी टेस्ट सीरीज में भारत के खिलाफ रणनीति तैयार करेंगे।

 

बाउंड्री पर खड़े रहे कर्स्टन, भारतीय खिलाड़ियों पर रही पैनी नजर

 

रविवार को कर्स्टन एनसीसी ग्राउंड पहुंचे, जहां भारत अपना वार्म-अप मुकाबला खेल रहा था। वह काफी देर तक बाउंड्री के पास खड़े होकर भारतीय खिलाड़ियों की गतिविधियों पर नजर रखते दिखाई दिए।

 

वह मैदान पर ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आए, लेकिन उनकी मौजूदगी अपने आप में चर्चा का विषय बन गई। कर्स्टन ने कुछ भारतीय खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ से बातचीत भी की। इस दौरान वह लगातार मैच और स्कोरबोर्ड पर नजर बनाए हुए थे।

 

भारतीय टीम के स्पिनर मानव सुथार और थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट रघु से भी उनकी बातचीत हुई। कर्स्टन का सुथार और साई किशोर जैसे खिलाड़ियों से पुराना परिचय रहा है, खासकर गुजरात टाइटन्स के साथ उनके समय के कारण।

जिस टीम को वर्ल्ड कप जिताया, अब उसी के खिलाफ बनाएंगे रणनीति

 

गैरी कर्स्टन का भारतीय क्रिकेट से रिश्ता बेहद खास रहा है। 2008 से 2011 तक वह टीम इंडिया के हेड कोच रहे और उनके कार्यकाल में भारतीय टीम ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। सबसे यादगार पल आया 2011 में, जब एमएस धोनी की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने श्रीलंका को हराकर 28 साल बाद वनडे वर्ल्ड कप अपने नाम किया। उसी दौर में भारत पहली बार टेस्ट रैंकिंग में नंबर-1 भी बना।

 

अब कहानी पूरी तरह बदल चुकी है। जिस टीम की कमजोरियों और ताकत को समझना कभी कर्स्टन की जिम्मेदारी थी, अब उसी टीम के खिलाफ उन्हें श्रीलंका की रणनीति तैयार करनी है।

 

गैरी के सामने होंगे उनके पुराने खिलाड़ी और नया कोच

 

कर्स्टन के लिए यह मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि भारतीय टीम के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर भी उनके पुराने खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं।एक समय कर्स्टन की कोचिंग में खेलने वाले गंभीर अब टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम की कमान संभाल रहे हैं। यानी एक तरफ पुराने गुरु कर्स्टन श्रीलंका को तैयार कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनका पुराना खिलाड़ी गंभीर भारत की रणनीति बनाएगा।

 

क्रिकेट में ऐसे रिश्ते मुकाबले को और दिलचस्प बना देते हैं।

 

207 रन का टारगेट, आखिरी ओवर में भारत ने मारी बाजी

 

वार्म-अप मैच के तीसरे दिन भारत के सामने 207 रन का लक्ष्य था। भारतीय बल्लेबाजों ने दबाव के बीच लक्ष्य का पीछा किया और दिन के आखिरी ओवर में 6 विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत से टीम इंडिया को टेस्ट सीरीज से पहले परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाने का अच्छा मौका मिला। वहीं श्रीलंका को भी भारत के खिलाफ अपनी तैयारियों को परखने का मौका मिला।

 

सरफराज की वापसी, सुदर्शन सीरीज से बाहर

 

टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय टीम में बदलाव भी हुआ है। चोट के कारण साई सुदर्शन पूरी सीरीज से बाहर हो गए हैं, उनकी जगह सरफराज खान को टीम में शामिल किया गया है।

 

सरफराज ने नवंबर 2024 के बाद कोई टेस्ट मैच नहीं खेला है। ऐसे में उनके पास खुद को फिर से टेस्ट टीम में स्थापित करने का मौका होगा।

 

वहीं, शुभमन गिल को भी लेकर टीम के लिए राहत की खबर आई। अभ्यास के दौरान चोटिल होने के कारण वह शुरुआती दो दिन वार्म-अप मैच में नहीं उतरे थे, लेकिन तीसरे दिन उन्होंने बल्लेबाजी की।

 

WTC पॉइंट्स टेबल के लिहाज से भी अहम है सीरीज

 

भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली यह टेस्ट सीरीज वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है। टीम इंडिया फिलहाल टॉप-4 से बाहर है और दोनों टेस्ट जीतकर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहेगी।

 

श्रीलंका के लिए भी यह सीरीज बड़ी चुनौती है। खास बात यह है कि भारत के खिलाफ श्रीलंका ने अब तक जो 7 टेस्ट जीते हैं, वे सभी अपनी घरेलू जमीन पर आए हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि गॉल में कर्स्टन की रणनीति भारी पड़ती है या फिर गंभीर की टीम पुराने गुरु को उनके ही घर में मात देने की कहानी लिखती है।

 

800 का क्रेडिट स्कोर कैसे हासिल करें?

800 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर हासिल करना कोई छोटी बात नहीं है, और ये आपको बॉरोअर्स की टॉप कैटेगरी में ला खड़ा करता है. इतना हाई क्रेडिट स्कोर लेंडर्स को बताता है कि आप बहुत भरोसेमंद बॉरोअर हैं, जिससे न्यू क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स अप्लाई करने पर आपको बेस्ट टर्म्स मिलने की संभावना बढ़ जाती है. आप सबसे कम इंटरेस्ट रेट्स, प्रीमियम क्रेडिट कार्ड्स और कई तरह के फाइनेंशियल बेनिफिट्स के लिए क्वालिफाई कर सकते हैं.

अगर आप अपने क्रेडिट स्कोर को इम्प्रूव करना चाहते हैं, तो 800 के इस खास माइलस्टोन तक पहुंचने के लिए कुछ जरूरी स्टेप्स यहां दिए गए हैं.

लेकिन पहले, आइए जानें कि गुड क्रेडिट स्कोर क्या होता है.

क्रेडिट स्कोर रेंज

ट्रांसयूनियन CIBIL की अगस्त 2024 में पब्लिश्ड एक रिपोर्ट, ‘एम्पावरिंग फाइनेंशियल फ्रीडम: द राइज ऑफ क्रेडिट सेल्फ-मॉनिटरिंग इन इंडिया’, के मुताबिक भारत में क्रेडिट स्कोर 300 से 900 के बीच होता है. इन्हें कई टियर्स में बांटा गया है:

  • सबप्राइम: 300 से 680
  • नियर प्राइम: 681 से 730
  • प्राइम: 731 से 770
  • प्राइम प्लस: 771 से 790
  • सुपर प्राइम: 791 से 900

इस क्लासिफिकेशन के हिसाब से, 800 का स्कोर आपको सुपर प्राइम कैटेगरी में डालता है, जो लेंडर्स के लिए बहुत अट्रैक्टिव होता है.

800 या उससे ज्यादा क्रेडिट स्कोर के फायदे

800 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर कई फाइनेंशियल बेनिफिट्स का रास्ता खोलता है:

हायर अप्रूवल रेट्स: हाई क्रेडिट स्कोर से क्रेडिट कार्ड्स या लोन अप्रूव होने की संभावना बढ़ जाती है. लेंडर्स आपको लोअर-रिस्क बॉरोअर मानते हैं, जिससे वो आपको क्रेडिट देने के लिए ज्यादा इच्छुक होते हैं.

लोअर इंटरेस्ट रेट्स और हायर क्रेडिट लिमिट्स: 800 से ज्यादा स्कोर के साथ आपको मॉरगेज, कार लोन और क्रेडिट कार्ड्स पर बेहतर इंटरेस्ट रेट्स मिल सकते हैं. उदाहरण के लिए, 800 स्कोर वाला बॉरोअर होम लोन पर 8.5% इंटरेस्ट रेट पा सकता है, जबकि कम स्कोर वाले को 8.8% या उससे ज्यादा रेट मिल सकता है, जिससे लोन की पूरी लाइफ में इंटरेस्ट कॉस्ट काफी बढ़ जाता है.

बेहतर लोन टर्म्स: अगर आपका क्रेडिट स्कोर एक्सीलेंट है, तो लेंडर्स आपको कार लोन और मॉरगेज पर बेहतर टर्म्स ऑफर कर सकते हैं, जिससे आपके सपने पूरे करना आसान हो जाता है.

क्रेडिट रिपोर्ट और क्रेडिट स्कोर कैसे मॉनिटर करें

आप मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फ्री में क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड क्रेडिट रिपोर्ट आसानी से चेक कर सकते हैं. इससे आप इंस्टैंटली अपना स्कोर चेक कर सकते हैं और रेगुलरली मॉनिटर कर सकते हैं.

ट्रांसयूनियन CIBIL की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 44% लोग जो अपने स्कोर को एक्टिवली चेक करते हैं, उन्होंने साल में कम से कम चार बार स्कोर चेक किया, और 46% ने छह महीने में अपने स्कोर में इम्प्रूवमेंट देखा. इससे पता चलता है कि रेगुलर मॉनिटरिंग आपके क्रेडिट स्कोर और ओवरऑल फाइनेंशियल वेलबीइंग पर बड़ा असर डाल सकती है.

800 क्रेडिट स्कोर हासिल करने के स्टेप्स

800 का क्रेडिट स्कोर हासिल करना मुश्किल लग सकता है, लेकिन लगातार कोशिश से ये पूरी तरह मुमकिन है. ये रहे स्टेप्स:

हर बार टाइम पर बिल्स चुकाएं: पेमेंट हिस्ट्री आपके CIBIL स्कोर का सबसे जरूरी फैक्टर है. टाइम पर बिल्स चुकाने से लेंडर्स को आपकी रिलायबिलिटी दिखती है. मिस्ड पेमेंट्स को ठीक करना और स्कोर को डैमेज से बचाना मुमकिन है, लेकिन बेस्ट स्ट्रैटेजी है कि लेट पेमेंट्स से पूरी तरह बचा जाए. अभी क्रेडिट इंस्टीट्यूशंस (CIs) यानी लेंडर्स को हर महीने क्रेडिट इन्फॉर्मेशन क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनीज (CICs) को देना होता है. लेकिन 1 जनवरी 2025 से बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस क्रेडिट रिकॉर्ड्स को और बार-बार अपडेट करेंगे. 8 अगस्त को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) गवर्नर शक्तिकांत दास ने सुझाव दिया कि क्रेडिट डेटा हर 15 दिन में, यानी महीने की 15 तारीख और आखिरी दिन, या इससे भी कम समय में अपडेट हो. इसका मतलब है कि टाइमली पेमेंट्स और भी जरूरी हो जाएंगे.

क्रेडिट कार्ड बैलेंस कम रखें: क्रेडिट स्कोर तय करने में क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो एक बड़ा फैक्टर है, जो आपके क्रेडिट कार्ड बैलेंस को टोटल क्रेडिट लिमिट्स से कम्पेयर करता है. 30% से कम क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेट आइडियल माना जाता है. बैलेंस कम रखना रिस्पॉन्सिबल क्रेडिट मैनेजमेंट दिखाता है और आपके स्कोर को पॉजिटिवली इम्पैक्ट करता है.

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क्रेडिट हिस्ट्री का ध्यान रखें: क्रेडिट हिस्ट्री की लेंथ भी आपके स्कोर में अहम रोल प्ले करती है. आमतौर पर लंबी क्रेडिट हिस्ट्री से हायर स्कोर मिलता है. क्रेडिट स्कोरिंग मॉडल्स आपके सबसे पुराने अकाउंट की उम्र, सबसे नए अकाउंट और सभी अकाउंट्स की एवरेज उम्र देखते हैं. अच्छी स्टैंडिंग वाला क्रेडिट अकाउंट क्लोज करने से पहले इसके कॉन्सिक्वेंसेस पर विचार करें. अकाउंट क्लोज करने से क्रेडिट हिस्ट्री छोटी हो सकती है और ओवरऑल क्रेडिट लिमिट कम हो सकती है, जो आपके स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है. अकाउंट क्लोज करने की बजाय, अगर आप फीस से बचना चाहते हैं, तो नो एनुअल फी वाले क्रेडिट कार्ड पर स्विच करने पर विचार करें.

क्रेडिट मिक्स बेहतर करें: अलग-अलग तरह के क्रेडिट अकाउंट्स आपके स्कोर को पॉजिटिवली प्रभावित कर सकते हैं. अगर आपके पास ज्यादातर इंस्टॉलमेंट लोन (जैसे पर्सनल लोन या कार लोन) हैं, तो क्रेडिट कार्ड जोड़ने से क्रेडिट मिक्स बेहतर हो सकता है. डायवर्स क्रेडिट प्रोफाइल ये दिखाता है कि आप अलग-अलग टाइप्स के क्रेडिट को मैनेज कर सकते हैं, जिससे आपका स्कोर इम्प्रूव हो सकता है.

क्रेडिट रिपोर्ट्स रिव्यू करें: कभी-कभी कम क्रेडिट स्कोर आपकी गलती की वजह से नहीं होता. क्रेडिट रिपोर्ट में गलतियां आपके स्कोर को नुकसान पहुंचा सकती हैं. रेगुलरली क्रेडिट रिपोर्ट्स चेक करने से गलत इन्फॉर्मेशन को पकड़ा और डिस्प्यूट किया जा सकता है. अगर आपको कोई गड़बड़ दिखे, तो उस लेंडर से कॉन्टैक्ट करें जिसने इन्फॉर्मेशन दी या क्रेडिट ब्यूरो से गलती ठीक करवाएं.

कुल मिलाकर, गुड क्रेडिट स्कोर हासिल करना या 800 की टियर में पहुंचना समय ले सकता है, लेकिन ये कोशिश वर्थवाइल है. आपका क्रेडिट स्कोर क्रेडिट लेने की आपकी एबिलिटी और लेंडर्स के ऑफर किए टर्म्स, जैसे मॉरगेज पर इंटरेस्ट रेट्स, को प्रभावित करता है.

800 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर दिखाता है कि आप एक एक्सीलेंट बॉरोअर हैं. इससे बेहतर लोन टर्म्स और बेस्ट रिवॉर्ड्स व परक्स वाले क्रेडिट कार्ड्स मिल सकते हैं. इस गोल को अचीव करने के लिए याद रखें कि ये एक लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल कमिटमेंट है और इसके लिए सालों तक डिसिप्लिंड मनी मैनेजमेंट की जरूरत होती है. अपने प्रोग्रेस को मॉनिटर करने के लिए, मनीकंट्रोल ऐप पर फ्री में इंस्टैंटली क्रेडिट स्कोर चेक करें, ताकि आप अपनी क्रेडिट हेल्थ को मैनेज करने में प्रोएक्टिव रहें.

Amara Raja Q1 Results: अमारा राजा का मुनाफा 15% बढ़ा, EV बैटरी कारोबार पर बड़ा दांव

Amara Raja Q1 Results: ऑटोमोटिव बैटरी बनाने वाली कंपनी Amara Raja Energy & Mobility ने जून तिमाही में अच्छे नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 15.8% बढ़कर 191 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह 165 करोड़ रुपये था।

कंपनी की रेवेन्यू 24% बढ़कर 4,214.5 करोड़ रुपये हो गई। एक साल पहले यह 3,401 करोड़ रुपये थी।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन भी बेहतर

तिमाही में अमारा राजा का EBITDA 11.7% बढ़कर 405.9 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल यह 363.5 करोड़ रुपये था। हालांकि, EBITDA मार्जिन 10.7% से घटकर 9.6% रह गया। यानी कमाई बढ़ी, लेकिन मार्जिन पर थोड़ा दबाव रहा।

बैटरी कारोबार से सबसे ज्यादा कमाई

अमारा राजा की सबसे ज्यादा कमाई लीड-एसिड बैटरी और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स से हुई। इस कारोबार की रेवेन्यू 3,279.79 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,005.24 करोड़ रुपये हो गई।

वहीं, न्यू एनर्जी बिजनेस की रेवेन्यू 121.29 करोड़ रुपये से बढ़कर 209.30 करोड़ रुपये रही। इस कारोबार का घाटा भी 35.20 करोड़ रुपये से घटकर 22.05 करोड़ रुपये रह गया। यानी नए कारोबार में भी सुधार दिखा।

EV बैटरी कारोबार में बढ़ाया निवेश

अमारा राजा ने तिमाही के दौरान अपनी सब्सिडियरी Amara Raja Advanced Cell Technologies (ARACT) में करीब 150 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके बाद इस कंपनी में कुल निवेश बढ़कर 1,650.01 करोड़ रुपये हो गया।

EV बैटरी सेल पर क्या है प्लान?

पिछले महीने कंपनी ने कहा था कि भारत में बनने वाली उसकी पहली EV बैटरी सेल शुरुआत में चीन की बैटरी सेल जितनी सस्ती नहीं होगी। लेकिन कंपनी का मानना है कि स्थानीय उत्पादन बढ़ेगा और सरकार लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगी। , इसके बाद ग्राहक भारत में बनी बैटरी के लिए अतिरिक्त कीमत चुकाने को तैयार होंगे।

कंपनी अपनी पहली 2170 सिलेंड्रिकल बैटरी सेल लॉन्च करने जा रही है। इसे सबसे पहले इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल ड्रोन और पावर टूल्स में भी किया जा सकेगा। फिलहाल कई EV कंपनियां इन बैटरी सेल का परीक्षण कर रही हैं। कंपनी का कहना है कि ग्राहकों को इन्हें अपनाने में थोड़ा समय लग सकता है।

Amara Raja शेयरों का हाल

नतीजों के बाद Amara Raja Energy & Mobility के शेयर दबाव में दिखे। कंपनी का शेयर 3.74% की गिरावट के साथ 896.90 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने से स्टॉक तकरीबन फ्लैट है। वहीं, 1 साल के दौरान इसमें 6% की गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैप 17.05 हजार करोड़ रुपये है।

Hindustan Copper Q1 Results: सरकारी कंपनी का मुनाफा 163% बढ़ा, रेवेन्यू में 81% का उछाल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

मीराबाई चानू ने PM को बताया, क्यों गोल्ड जीतने के बाद छलक आए थे आंसू (Video)

Mirabai Chanu

Mirabai Chanu

 

जब प्रधानमंत्री ने मीराबाई से उनसे सम्मान समारोह में भावुक होने का कारण पूछा तो मीराबाई ने पेरिस ओलंपिक में खाली हाथ आने को कारण बताया। राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान  मीराबाई ने कुल 190 किलोग्राम, स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंव जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाया और स्वर्ण पदक जीता। मीरबाई चानू ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था।

पदक मंच पर सबसे ऊंचे स्थान पर खड़े होकर राष्ट्रगान गाते समय उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उनके बालों में तिरंगे के रंग की रिबन भी सजी हुई थी।मीराबाई ने तब  पत्रकारों से बातचीत में सबसे पहले कहा था, ‘‘जल्दी-जल्दी करो, मैंने दो दिन से कुछ खाया नहीं है। ’’

प्रधानमंत्री मोदी ने जब इसका कारण पूछा तो मीराबाई ने कहा , ‘सर, वह खुशी के आंसू थे। रोने का कारण पेरिस ओलंपिक में विफलता था। इसके बाद चोटों का एक लंबा सिलसिला चला। इस दौरान परिवार में भी काफी कुछ चला लेकिन पदक मंच पर जब राष्ट्रगान बजा तो मेरे आंसू बह निकले।

टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई के लिए वह दिन बेहद भावुक रहा। अपनी मां और कोच विजय शर्मा के समर्थन का जिक्र करते हुए वह एक बार फिर भावुक हो गईं थी।

उन्होंने कहा था, ‘‘उन्होंने हर अच्छे-बुरे समय में मेरा साथ दिया है। परिवार और दोस्तों की उम्मीदों का मुझ पर काफी दबाव था। भारत के लिए तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर बहुत खुशी  है। मैं इन खेलों में खुद पर ज्यादा जोर नहीं डालना चाहती थी, लेकिन मेरा पहला प्रयास असफल रहा। कोच और मैंने पहले से तय किया था कि मैं दोनों स्पर्धाओं में केवल दो-दो प्रयास ही करूंगी। ’’

Hindustan Copper Q1 Results: सरकारी कंपनी का मुनाफा 163% बढ़ा, रेवेन्यू में 81% का उछाल

Hindustan Copper Q1 Results: सरकारी माइनिंग कंपनी Hindustan Copper के शेयर सोमवार, 10 अगस्त को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 163.4% बढ़कर 353 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह 134 करोड़ रुपये था।

कंपनी का रेवेन्यू 81.4% बढ़कर 936.5 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 516.4 करोड़ रुपये थी।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन भी मजबूत

हिंदुस्तान कॉपर का EBITDA 507.5 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह 212.3 करोड़ रुपये था। यानी ऑपरेटिंग मुनाफा भी दोगुना से ज्यादा बढ़ा।

वहीं, EBITDA मार्जिन 41% से बढ़कर 54% पर पहुंच गया। इससे कंपनी की ऑपरेटिंग एफिशिएंसी में सुधार दिखा।

कॉपर की कीमतों का भी मिला सहारा

वैश्विक बाजार में कॉपर की कीमतें पिछले छह हफ्तों से लगातार बढ़ रही थीं। इसकी वजह सप्लाई का कम होना और अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर चिंता कम होना रहा।

पिछले हफ्ते कॉपर की कीमत 14,000 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गई थी। यह जनवरी के आखिर के बाद का सबसे ऊंचा इंट्राडे स्तर था। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में भी कॉपर की कीमतें मजबूत रह सकती हैं।

हिंदुस्तान कॉपर के शेयरों का हाल

नतीजों के बाद Hindustan Copper के शेयरों में 1% से ज्यादा तेजी देखने को मिली। हालांकि, फिर मुनाफावसूली के के चलते यह लाल निशान में चला गया। दोपहर 2.20 बजे तक स्टॉक 0.48% की गिरावट के साथ 533.50 रुपये पर बंद हुआ।

पिछले 6 महीने में स्टॉक 10.72% गिरा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 125% का रिटर्न दिया है। इस सरकारी कंपनी का मार्केट कैप 51.63 हजार करोड़ रुपये है।

हिंदुस्तान कॉपर का बिजनेस क्या है

Hindustan Copper Ltd भारत सरकार के मालिकाना हक वाली खनन कंपनी है। इसका मुख्य कारोबार कॉपर (तांबा) की खोज, खनन, उत्पादन और बिक्री है।

कंपनी कॉपर ओर (अयस्क) निकालने से लेकर उसे प्रोसेस कर कॉन्संट्रेट, कॉपर कैथोड, वायर रॉड और दूसरे कॉपर उत्पाद बनाती है। इसके ग्राहक बिजली, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेलवे और रक्षा जैसे कई बड़े उद्योग हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

लोकतंत्र की पहली पाठशाला: छात्रसंघ चुनावों की वापसी क्यों जरूरी? जानें युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी

Madhya Pradesh Student Union Elections 2026

“विश्वविद्यालय केवल डिग्रियाँ नहीं गढ़ते, वे राष्ट्र का भविष्य गढ़ते हैं।”

 

करीब नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद मध्य प्रदेश के महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनावों की आहट फिर सुनाई दे रही है। कैंपस एक बार फिर जीवंत हैं- गलियारों में चुनावी नारों की गूंज है, कक्षाओं में प्रत्याशी विद्यार्थियों से संवाद कर रहे हैं, छात्र अपने भविष्य के प्रतिनिधियों पर चर्चा कर रहे हैं और पूरे परिसर का वातावरण लोकतांत्रिक ऊर्जा से भर उठा है। यह दृश्य केवल चुनावी गतिविधियों का नहीं, बल्कि उस लोकतांत्रिक संस्कृति की वापसी का प्रतीक है जिसकी शुरुआत शिक्षण संस्थानों से होती है।

 

मेरे लिए यह दृश्य केवल वर्तमान का अनुभव नहीं, बल्कि स्मृतियों का भी हिस्सा है। छात्र जीवन के वे दिन अनायास ही सामने आ खड़े होते हैं, जब मैं स्वयं छात्र राजनीति में सक्रिय था। वर्ष 2000 से लेकर 2017 तक छात्र राजनीति से जुड़ने एवं मार्गदर्शन करने का एक लंबा अवसर मुझे मिला। विद्यार्थियों की समस्याओं को समझना, नेतृत्व करना, संगठन बनाना, संवाद स्थापित करना और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का हिस्सा बनना मेरे सार्वजनिक जीवन की ऐसी पाठशाला रही जिसने मेरे व्यक्तित्व और सोच दोनों को परिपक्व बनाया। आज यह गहराई से महसूस होता है कि छात्रसंघ चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि नेतृत्व, उत्तरदायित्व और लोकतांत्रिक संस्कारों का पहला विद्यालय हैं।

 

लोकतंत्र संसद या विधानसभा की सीढ़ियों से शुरू नहीं होता; उसकी पहली सांस विद्यालयों और महाविद्यालयों के परिसरों में चलती है। यहीं युवा मतदान का महत्व समझते हैं, भिन्न विचारों का सम्मान करना सीखते हैं, असहमति के साथ भी संवाद करने की कला विकसित करते हैं और यह अनुभव करते हैं कि नेतृत्व अधिकार नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व है। इसी कारण छात्र राजनीति को 'लोकतंत्र की पहली पाठशाला' कहा जाता है।

 

वर्ष 2017 के बाद मध्य प्रदेश के अधिकांश महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए। इस दौरान एक पूरी पीढ़ी कॉलेजों में आई, पढ़ाई पूरी की और आगे बढ़ गई, लेकिन उन्हें लोकतंत्र का प्रत्यक्ष अभ्यास करने का अवसर नहीं मिला। आज जो विद्यार्थी स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं में अध्ययनरत हैं, उनके लिए यह पहला अवसर होगा जब वे अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। यह केवल मतपत्र पर मुहर लगाने या बटन दबाने का अवसर नहीं, बल्कि एक सजग लोकतांत्रिक नागरिक बनने की दिशा में पहला कदम है।

 

शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना या रोजगार हासिल करना नहीं होता। इसका वास्तविक लक्ष्य ऐसे नागरिक तैयार करना है जो समाज के प्रति संवेदनशील हों, विवेकपूर्ण निर्णय लेने में सक्षम हों और सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी निभाने का साहस रखते हों। छात्रसंघ चुनाव इन मूल्यों को व्यावहारिक रूप से सीखने का अवसर देते हैं। यहाँ विद्यार्थी समझते हैं कि लोकतंत्र केवल बहुमत का नाम नहीं, बल्कि संवाद, सहमति और सम्मानजनक असहमति की संस्कृति का नाम है।

 

भारतीय लोकतंत्र का इतिहास इस बात का साक्षी है कि अनेक राष्ट्रीय और प्रादेशिक नेताओं ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से ही की। संसद, विधानसभाओं और सामाजिक आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अनेक व्यक्तित्व कभी कॉलेज परिसरों में छात्र प्रतिनिधि रहे। मध्य प्रदेश भी इससे अलग नहीं है। यहाँ के छात्रसंघों ने ऐसे अनेक नेता दिए जिन्होंने आगे चलकर राजनीति, प्रशासन, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। इसलिए छात्रसंघ चुनावों को केवल एक वार्षिक औपचारिकता मानना उनके ऐतिहासिक महत्व को कम करके आंकना होगा।

 

समय के साथ छात्र राजनीति का स्वरूप भी बदला है। मेरे छात्र जीवन में चुनाव प्रचार पोस्टर, पर्चियों, दीवार लेखन और नुक्कड़ सभाओं तक सीमित रहता था। आज डिजिटल युग में व्हाट्सएप ग्रुप, इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया मंच चुनावी अभियान के प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। यह परिवर्तन समय की मांग भी है और एक नया अवसर भी। इससे संवाद का दायरा व्यापक हुआ है और विद्यार्थी अपने विचार अधिक प्रभावी ढंग से रख पा रहे हैं। हालाँकि, इसके साथ ही यह जिम्मेदारी भी बढ़ी है कि डिजिटल मंच स्वस्थ बहस का माध्यम बनें- दुष्प्रचार, ट्रोलिंग और व्यक्तिगत कटाक्ष का नहीं।

 

आज की राजनीति की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अनेक बार रचनात्मक विमर्श की जगह शोर और तथ्यों की जगह भावनात्मक ध्रुवीकरण हावी हो जाता है। यदि यही प्रवृत्ति छात्र राजनीति में भी प्रवेश कर गई, तो लोकतंत्र की पहली पाठशाला अपना मूल उद्देश्य खो देगी। इसलिए यह आवश्यक है कि चुनाव व्यक्तियों की लोकप्रियता से अधिक मुद्दों की गंभीरता पर आधारित हों। महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक पुस्तकालय, शोध सुविधाएं, छात्रावास, खेल, महिला सुरक्षा, दिव्यांग-अनुकूल परिसर, डिजिटल संसाधन, स्टार्टअप और कौशल विकास जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को चुनावी विमर्श का केंद्र बनाया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को यह समझना होगा कि केवल अच्छे भाषण से अधिक महत्वपूर्ण एक अच्छी और व्यावहारिक कार्ययोजना होती है।

 

यह भी उतना ही आवश्यक है कि छात्र राजनीति अपनी मूल आत्मा को सुरक्षित रखे। राजनीतिक दलों की वैचारिक प्रेरणा लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हो सकती है, लेकिन छात्रसंघों की प्राथमिकता सदैव 'छात्रहित' ही रहनी चाहिए। यदि चुनाव धनबल, बाहुबल, जातीय ध्रुवीकरण या व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता का माध्यम बनेंगे, तो उनका शैक्षणिक और लोकतांत्रिक उद्देश्य कमजोर पड़ जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन, राज्य सरकार, छात्र संगठनों और स्वयं विद्यार्थियों की यह साझा जिम्मेदारी है कि चुनाव मर्यादित, शांतिपूर्ण और विचार-केंद्रित हों।

 

छात्रसंघ के निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए भी यह अवसर केवल विजय प्राप्त करने का नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का विश्वास अर्जित करने का है। उनका प्रमुख दायित्व प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करना, समस्याओं के समाधान के लिए रचनात्मक पहल करना और परिसर में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना है। नेतृत्व का वास्तविक अर्थ लोकप्रियता नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व और सेवा भाव है। यदि यह भावना छात्र जीवन में ही विकसित हो जाए, तो वही युवा भविष्य में समाज और राष्ट्र को बेहतर नेतृत्व प्रदान करेंगे।

 

मध्य प्रदेश में प्रस्तावित छात्रसंघ चुनाव इसलिए केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं हैं, बल्कि वे लोकतांत्रिक विश्वास की पुनर्स्थापना का सुनहरा अवसर हैं। नौ वर्षों के बाद लौटती यह चुनावी हलचल केवल पोस्टरों, नारों और मतदान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए; यह विचारों के पुनर्जागरण, संवाद की पुनर्स्थापना और युवाओं की सकारात्मक भागीदारी का उत्सव बननी चाहिए।

 

आज आवश्यकता इस बात की है कि विद्यार्थी चुनाव को अधिकार नहीं बल्कि दायित्व के रूप में देखें, उम्मीदवार पद को नहीं बल्कि सेवा को अपना संकल्प समझें, और विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव को महज औपचारिकता न मानकर लोकतांत्रिक संस्कृति के उत्सव के रूप में संचालित करे। यदि ऐसा हुआ, तो यह केवल छात्रसंघ चुनावों की वापसी नहीं होगी, बल्कि लोकतंत्र की उस आत्मा का पुनर्जन्म होगा जो शिक्षा संस्थानों से होकर पूरे समाज तक प्रवाहित होती है। इतिहास गवाह है- जब विश्वविद्यालयों में विचार जागते हैं, तब केवल परिसर ही नहीं जागते; समाज जागता है, राजनीति परिपक्व होती है और राष्ट्र का भविष्य एक नई व सही दिशा प्राप्त करता है।