SLMG Beverages: कोका-कोला की भारत में सबसे बड़ी बॉटलर होगी लिस्ट, 5 साल में कारोबार ₹20000 करोड़ पर पहुंचाने का लक्ष्य

कोका-कोला की भारत में सबसे बड़ी बॉटलिंग कंपनी SLMG बेवरेजेस अगले 5 साल में अपना कारोबार बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना चाहती है। साथ ही कंपनी की योजना अगले 3 से 4 साल में IPO लाकर स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने की है। यह बात कंपनी के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर परितोष लधानी ने एक इंटरव्यू में कही। SLMG Beverages की उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख बाजारों में अच्छी मौजूदगी है। कंपनी भारत में खपत बढ़ने से पैदा होने वाले अवसरों का फायदा उठाने के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी विस्तार की संभावनाएं तलाश रही है।

यह कंपनी कोका-कोला के दुनिया के टॉप 15 बॉटलिंग पार्टनर्स में शामिल है। इसका लक्ष्य अगले 5 सालों में वैश्विक स्तर पर टॉप 10 में जगह बनाना है। इसके अलावा, कंपनी अगले 10 सालों में दुनिया की टॉप 5 बॉटलिंग कंपनियों में शामिल होना चाहती है। कंपनी के पास उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में कोका-कोला की बॉटलिंग के अधिकार हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, लधानी ने इंटरव्यू में कहा, ‘‘हमें अगले 5 साल में कम से कम 20,000 करोड़ रुपये का कारोबार हासिल करना चाहिए। तब तक हम निश्चित रूप से शेयर बाजार में लिस्ट हो जाएंगे।’’

अभी 9,000 करोड़ रुपये है टर्नओवर

SLMG बेवरेजेस का मौजूदा ग्रॉस टर्नओवर करीब 9,000 करोड़ रुपये है। लधानी के मुताबिक, अगले साल तक इसके 10,000 करोड़ रुपये से अधिक पर पहुंचने की उम्मीद है। कंपनी अगले 3 साल में कारोबार को 15,000 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। आगे कहा कि कंपनी फिलहाल डबल डिजिट ग्रोथ रेट से आगे बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के कारोबार में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पिछले 4 सालों में इसकी कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 20 प्रतिशत से अधिक रही है।

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SLMG Beverages के गोरखपुर प्लांट का निर्माण शुरू

विस्तार योजनाओं के तहत कंपनी बिहार के बक्सर स्थित अपने प्लांट में करीब 1,200 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है। वहीं, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में प्रस्तावित प्लांट बनना शुरू हो गया है। इस प्लांट पर करीब 1,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। लधानी का कहना है कि कंपनी ने उत्तर प्रदेश के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में बॉटलिंग प्लांट लगाने के लिए जमीन भी खरीद ली है। इनका निर्माण जल्द शुरू होगा। इसके अलावा, बिहार में दूसरा प्लांट 2027 के बाद लगाया जाएगा। विस्तार योजनाओं का उद्देश्य उत्तर प्रदेश और बिहार में पेय पदार्थों की बढ़ती मांग को पूरा करना है। छोटे शहरों और ग्रामीण बाजारों में कारोबार बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं।

SLMG बेवरेजेस की मौजूदा बॉटलिंग क्षमता करीब 35,000 बोतल प्रति मिनट है। कंपनी अगले 5 सालों में इसमें 10,000 बोतल प्रति मिनट की अतिरिक्त क्षमता जोड़ने की योजना बना रही है। अगर कारोबार में वृद्धि की मौजूदा रफ्तार जारी रही तो अगले 10 सालों में कंपनी की बॉटलिंग क्षमता 1 लाख बोतल प्रति मिनट तक पहुंच सकती है।

Stocks to Watch: 21 अक्टूबर को इन 10 शेयरों पर रहेगी नजर, हिंदुस्तान जिंक से IREDA तक शामिल

Stocks to Watch: बुधवार, 21 अक्टूबर को शेयर बाजार में कई कंपनियों के शेयर खबरों के दम पर फोकस में रहेंगे। कुछ कंपनियों ने सितंबर तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं, तो कुछ के मुनाफे में गिरावट आई है। वहीं, कुछ कंपनियां अपने कारोबार और मैनेजमेंट से जुड़े बदलावों को लेकर चर्चा में हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर इन 10 शेयरों पर रहेगी।

Bajaj Finance

नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी Bajaj Finance का सितंबर तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 28.8% बढ़कर ₹6,367 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 23.6% बढ़कर ₹13,335 करोड़ रही। कंपनी की नेट टोटल इनकम 23% बढ़कर ₹15,974 करोड़ पहुंच गई। तिमाही के दौरान कंपनी ने 1.345 करोड़ नए लोन भी दिए।

Hindustan Zinc

वेदांता ग्रुप की मेटल कंपनी Hindustan Zinc का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 142% उछलकर ₹6,412 करोड़ पहुंच गया। कंपनी का रेवेन्यू 76.5% बढ़कर रिकॉर्ड ₹15,093 करोड़ हो गया। EBITDA भी दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹9,248 करोड़ रहा।

IREDA

सरकारी रिन्यूएबल एनर्जी फाइनेंस कंपनी IREDA का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट मामूली 0.5% बढ़कर ₹552 करोड़ रहा। हालांकि, ऑपरेटिंग प्रॉफिट 16.5% बढ़कर ₹904 करोड़ पहुंच गया। कंपनी की ग्रॉस NPA घटकर 3.57% और नेट NPA 1.08% रह गई। इससे पिछले साल के मुकाबले खराब कर्ज के स्तर में सुधार दिखा।

Piramal Finance

पिरामल ग्रुप की फाइनेंस कंपनी Piramal Finance का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 67% बढ़कर ₹545 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 35% बढ़कर ₹1,530 करोड़ पहुंच गई। इसके अलावा, SBI के पूर्व चेयरमैन दिनेश खारा को 19 अक्टूबर 2026 से पांच साल के लिए कंपनी का स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया है।

L&T Technology Services

टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी L&T Technology Services (LTTS) का सितंबर तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट तिमाही आधार पर 53.7% बढ़कर ₹548.2 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 3.4% बढ़कर ₹3,040 करोड़ रहा। यह ₹3,022.5 करोड़ के अनुमान से ज्यादा है।

Waaree Renewable Technologies

वारी ग्रुप की सोलर EPC कंपनी Waaree Renewable Technologies का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 30% गिरकर ₹82 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 36.53% बढ़कर ₹1,057.84 करोड़ पहुंच गया। कंपनी की अधूरी ऑर्डर बुक ₹5,500 करोड़ से ज्यादा है। इसके अलावा, सोलर, बैटरी स्टोरेज और ट्रांसमिशन-डिस्ट्रिब्यूशन प्रोजेक्ट्स में भी बड़े मौके मौजूद हैं।

Just Dial

हाइपरलोकल सर्च प्लेटफॉर्म Just Dial का सितंबर तिमाही में रेवेन्यू सालाना आधार पर 13.2% बढ़कर ₹343 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹303.1 करोड़ था। EBITDA भी 4.5% बढ़कर ₹91 करोड़ पहुंच गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन घटकर 26.4% रह गया। एक साल पहले यह 28.7% था।

Nelco

टाटा ग्रुप की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज कंपनी Nelco का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 6.79% बढ़कर ₹1.73 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 5.1% बढ़कर ₹78.14 करोड़ रहा। EBITDA में 22% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹9.1 करोड़ पहुंच गया। कंपनी का EBITDA मार्जिन भी एक साल पहले के 10% से बढ़कर 11.7% हो गया।

SML Mahindra

कमर्शियल गाड़ियों की कंपनी SML Mahindra का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 42.9% गिरकर ₹12 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 20.7% बढ़कर ₹670 करोड़ पहुंच गया। EBITDA 31% गिरकर ₹29 करोड़ रहा। कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 7.6% से घटकर 4.3% रह गया।

Trent

टाटा ग्रुप की रिटेल कंपनी Trent के नॉन-एग्जीक्यूटिव और नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हरीश भट्ट ने इस्तीफा दे दिया है। वह 12 साल से ज्यादा समय से कंपनी के बोर्ड में थे। उन्होंने बढ़ती पेशेवर और निजी जिम्मेदारियों का हवाला दिया। उनका इस्तीफा 17 अक्टूबर से प्रभावी हुआ। कंपनी के सितंबर तिमाही के नतीजे 29 अक्टूबर को आने वाले हैं।

Stock Split: एक साल में 190% और 5 साल में 1000% चढ़ी कीमत, अब 10 टुकड़ों में टूटेगा शेयर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Split: एक साल में 190% और 5 साल में 1000% चढ़ी कीमत, अब 10 टुकड़ों में टूटेगा शेयर

चांदनी मशीन्स लिमिटेड का स्टॉक, स्प्लिट होने वाला है। कंपनी का 10 रुपये फेस वैल्यू वाला शेयर, 1 रुपये फेस वैल्यू वाले 10 शेयरों में टूट जाएगा। रिकॉर्ड डेट 29 अक्टूबर 2026 है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, उनके शेयर स्प्लिट हो जाएंगे। कंपनी ने इस कॉरपोरेट एक्शन को सितंबर महीने में मंजूरी दी थी।

चांदनी मशीन्स में सितंबर 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 20.97 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। स्टॉक स्प्लिट में एक कंपनी अपने मौजूदा शेयरों को छोटे टुकड़ों में तोड़ देती है। इससे निवेशकों के पास शेयरों की संख्या बढ़ जाती है लेकिन उसी अनुपात में प्रति शेयर कीमत घट जाती है। निवेशकों के निवेश की कुल वैल्यू नहीं बदलती।

इस कदम का मकसद शेयरों को किफायती बनाना होता है। बहुत ज्यादा कीमत वाले शेयर छोटे निवेशकों की पहुंच से बाहर हो जाते हैं। स्प्लिट के बाद शेयर सस्ते हो जाते हैं, जिससे अधिक नए निवेशक जुड़ने की संभावना रहती है।

Chandni Machines का शेयर एक साल में 190 प्रतिशत मजबूत

कंपनी के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 102.13 रुपये है। मार्केट कैप 71 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर साल 2026 में अब तक 40 प्रतिशत चढ़ा है। एक साल में कीमत लगभग 190 प्रतिशत मजबूत हुई है। 3 साल में शेयर लगभग 340 प्रतिशत और 5 साल में 1000 प्रतिशत से ज्यादा बढ़त देख चुका है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 127.74 रुपये और एडजस्टेड लो 34 रुपये है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

चांदनी मशीन्स का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू सालाना आधार पर लगभग 72 प्रतिशत गिरकर 44.50 लाख रुपये रहा। एक साल पहले यह 25.89 करोड़ रुपये था। जून 2026 तिमाही में कंपनी ने 1.98 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया। एक साल पहले समान तिमाही में कंपनी 74.68 लाख रुपये के मुनाफे में थी। खर्च 3.74 करोड़ रुपये के रहे, जो जून 2025 तिमाही में 26 करोड़ रुपये के थे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Brent Crude 111 डॉलर के करीब पहुंचा, एशियाई शेयर बाजारों में तेज गिरावट

क्रूड ऑयल की कीमतों में 20 अक्तूबर को जोरदार तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 1.39 फीसदी की तेजी के साथ 111.16 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 1.78 फीसदी चढ़कर 100 डॉलर के पार निकल गया। यह क्रूड ऑयल का बीते 5 महीनों का सबसे हाई लेवल है। क्रूड की यह तेजी न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों को बड़ी चोट पहुंचा सकती है।

20 मई के बाद पहली बार क्रूड 111 डॉलर पर

क्रूड ऑयल की कीमतों में नई तेजी की वजह सऊदी अरब में इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूती विद्रोहियों के हमले हैं। गल्फ में भी ऑयल टैंकर्स सहित जहाजों पर हमलों की खबर है। इससे क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया है। 20 मई के बाद पहली बार क्रूड का भाव इस लेवल पर पहुंचा है। हालांकि, फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रही हैं।

ब्रेंट क्रूड में जल्द ज्यादा नरमी का अनुमान नहीं 

ING के एनालिस्ट्स ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट में क्रूड की कीमतों के आउटलुक के बारे में बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रूड की कीमतों को मौजूदा लेवल पर सपोर्ट मिल रहा है। स्थिति नाजुक बनी हुई है, जिससे क्रूड पर रिस्क प्रीमियम बढ़ा है। हालांकि, क्रूड की सप्लाई जारी है, जिससे रिस्क प्रीमियम में धीर-धीरे कमी आ सकती है। लेकिन, फिलहाल कीमतों में नरमी आने के संकेत नहीं हैं।

गल्फ में लगातार हमलों का क्रूड की सप्लाई पर असर

केपलर (kpler) ने अपनी रिपोर्ट में सोमवार को बताया था कि बीते दो हफ्तों में कम से कम 18 जहाजों पर हमलों की खबर है। इससे क्रूड पर रिस्क प्रीमियम बना हुआ है। इधर, हूती विद्रोहियों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब में एनर्जी, एयरपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। अरामको की साइट को भी निशाना बनाया गया है।

हूती विद्रियों का सऊदी अरब के इंफ्रा पर हमला जारी

हूती विद्रोहियों ने सोमवार को यमन में सुरक्षा बलों के एक प्रशिक्षण शिविर को निशान बनाया, जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इन नए हमलों से मध्यपूर्व में अस्थिरता का खतरा बढ़ा है। साथ ही इसका असर एनर्जी की सप्लाई पर पड़ रहा है। इस वजह से पिछले कई दिनों से ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।

अमेरिका डीजल की सप्लाई के लिए रूस से समझौते को मजबूर

उधर, अमेरिका में क्रूड ऑयल का रिजर्व पिछले हफ्ते गिरने का अनुमान है। अमेरिका में पहले से ही ऑयल खासकर डीजल की कीमतें काफी ऊपर चल रही हैं। इससे अमेरिका को डीजल की सप्लाई के लिए रूस से समझौता करना पड़ा है। लेकिन, इससे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। क्रूड में उछाल सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए खराब खबर है।

भारत सहित दुनियाभर में महंगाई के बेकाबू होने का खतरा

महंगे क्रूड की वजह से दुनियाभर में महंगाई बेकाबू हो सकती है। इससे केंद्रीय बैंकों को इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने पिछले महीने इंटरेस्ट रेट में 25 बीपीएस की वृद्धि की थी। इस महीने की 28 तारीख को फेड की पॉलिसी आने वाली है। महंगाई को काबू में करने के लिए फेड एक बार फिर इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इधर, भारत में इस महीने की शुरुआत में RBI ने रेपो रेट रेट 0.25 फीसदी बढ़ाया था। अनुमान है कि केंद्रीय बैंक दिसंबर में एक बार फिर रेपो रेट बढ़ा सकता है।

20 अक्टूबर को एशियाई शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट 

क्रूड में उछाल का असर 20 अक्तूबर को शेयर बाजारों पर देखने को मिला। भारतीय शेयर बाजार दशहरा के मौके पर बंद हैं। लेकिन, दूसरे एशियाई बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिली। जापान का निक्केई 1.63 फीसदी नीचे चल रहा था। सिंगापुर का स्ट्रेट टाइम्स 0.25 फीसदी गिरकर चल रहा था। हैंगसेंग में 1.38 फीसदी की गिरावट दिखी। ताइवान का सूचकांक 1.14 फीसदी नीचे चल रहा था। दक्षिण कोरिया के बाजार कोस्पी में 3.88 फीसदी की गिरावट दिखी।

इंडोनेशिया के शेयर बाजार में जोरदार रिकवरी, क्या अब इमर्जिंग मार्केट का दर्जा गंवाने का खतरा टला?

इंडोनेशिया के शेयर बाजारों में मंगलवार यानी 20 अक्तूबर को रिकवरी दिखी। शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक जकार्ता कंपोजिट 3.46 फीसदी चढ़कर 5,168 पर चल रहा था। इसकी वजह एमएससीआई की चेतावनी के बाद अथॉरिटीज की तरफ से उठाए गए कदम हैं। हालांकि, अभी यह सवाल बना हुआ है कि अथॉरिटीज की कोशिश के बाद एमएससीआई का रुख बदलेगा या नहीं। एमएससीआई ने 16 अक्तूबर यानी शुक्रवार को इंडोनेशिया के शेयर बाजार को इमर्जिंग मार्केट्स कि लिस्ट से बाहर करने की धमकी दी थी।

बीते दो सत्रों में करीब 15 फीसदी गिरा था JCI

Jakarta Composite Index (JCI) मंगलवार को एक समय 4.3 फीसदी तक उछल गया था। इससे बीते दो सत्रों में आई करीब 15 फीसदी की गिरावट के बाद बाजार को कुछ राहत मिली है। हालांकि, इस रिकवरी के बावजूद इंडोनेशिया का शेयर बाजार दुनिया में सबसे खराब प्रदर्शन वाला बाजार बना हुआ है। 2026 में जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स 40 फीसदी गिर चुका है। दुनिया के किसी बड़े बाजार में इस दौरान शायद ही इतनी गिरावट आई है।

MSCI ने शुक्रवार को दी थी बड़ी चेतावनी 

सबसे पहले यह समझ लेना जरूरी है कि इंडोनेशिया के शेयर बाजारों में अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई। MSCI ने पिछले हफ्ते कहा था कि इंडोनेशियो को इमर्जिंग मार्केट का अपना दर्जा (Status) गंवाना पड़ सकता है। यह ग्लोबल शेयर सूचकांकों से भी बाहर हो सकता है। एमएससीआई के अचानक इस ऐलान से इंडोनेशिया के शेयर बाजारों में 16 अक्तूबर को बड़ी बिकवाली देखने को मिली थी। अगर एमएससीआई ऐसा करता है तो दक्षिणपूर्व एशिया की इस सबसे बड़ी इकोनॉमी से काफी पैसा बाहर जा सकता है।

एक्सचेंज ने कमी दूर करने के लिए उठाए कदम

ग्लोबल इंडेक्स प्रोवाइडर MSCI की चेतावनी के बाद इंडोनेशिया स्टॉक एक्सचेंज ने कुछ कदम उठाए हैं। उसने कहा है कि वह बेंचमार्क इंडेक्स के कैलकुलेशन से बहुत ज्यादा ओनरशिप वाली कंपनियों को हटाएगा। इस बारे में 19 अक्तूबर यानी सोमवार को एमएससीआई के प्रतिनिधियों और एक्सचेंज के अधिकारियों की बीच बातचीत हुई।

निवेशकों का भरोसा बहाल करना सबसे जरूरी

इंडोनेशिया स्टॉक एक्सचेंज के सीईओ जेफ्री हेंडरिक के मुताबिक, JCI में ऐसी कंपनियों का वेटेज करीब 18 फीसदी है। उन्होंने कहा कि ऐसी कंपनियों को हटाने के समय का ऐलान बाद में होगा। हालांकि, इनवेस्टर्स का कहना है कि सिर्फ बेंचमार्क में बदलाव करने से निवेशकों का भरोसा बहाल नहीं होगा। इसके लिए कंपनियों की ओनरशिप में पारदर्शिता लानी होगी, गवर्नेंस को स्ट्रॉन्ग करना होगा और नियमों के पालन पर फोकस करना होगा।

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फॉरेन इनवेस्टर्स कर चुके हैं 5 अरब डॉलर की बिकवाली

ब्लूमबर्ग के डेटा के मुताबिक, विदेशी निवेशक इस साल इंडोनेशिया के शेयर बाजारों में करीब 4.9 अरब डॉलर की बिकवाली कर चुके हैं। अगर MSCI इंडोनेशिया को इमर्जिंग मार्केट्स की लिस्ट से हटाता है तो बाजार में और बिकवाली दिख सकती है। एमएससीआई इंडोनेशिया को इमर्जिंग मार्केट की लिस्ट से हटाकर स्टैंडएलोन मार्केट की लिस्ट में डाल सकता है। इससे इंडोनेशिया के शेयर बाजार को बड़ा झटका लगेगा।

Daily Voice : अमेरिकी मध्यावधि चुनाव बाजार के लिए कर सकते हैं ट्रिगर का काम, चुनिंदा आईटी शेयरों पर रहे नजर

Daily Voice : IT शेयरों में हालिया तेजी भले ही अभी किसी टिकाऊ रिकवरी का संकेत न हो,लेकिन हर उछाल पर आईटी शेयरों में बिकवाली की एकतरफा रणनीति अपनाना भी जल्दबाजी हो सकती है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजे बाजारों के लिए एक ट्रिगर का काम कर सकते हैं,लेकिन इस बात की संभावना कम है कि केवल इसी वजह से बाजार में कोई बड़ी तेजी या कच्चे तेल में भारी गिरावट आएगी। ये बातें अल्फएक्यूरेट एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक और संस्थापक राजेश कोठारी ने मनीकंट्रोल से हुई एक बातचीत में कही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि आईटी शेयरों में आई हालिया तेजी पॉजिटिव संकेत है लेकिन निवेशकों को अभी यह नहीं मान लेना चाहिए कि इस सेक्टर में टिकाऊ तेजी की शुरुआत हो गई है। पोर्टफोलियो में कोई बदलाव करने से पहले तेल सप्लाई की स्थिति,डॉलर,बॉन्ड यील्ड और कॉर्पोरेट अर्निंग पर नजर रखने की जरूरत है।

आईटी में तीन बातों पर नजर रखने की जरूरत

राजेश कोठारी के मुताबिक IT शेयरों में हालिया तेजी उत्साहजनक है,लेकिन इसे एक टिकाऊ तेजी मान लेने में सावधानी बरतने की जरूरत है। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह तेजी इंडस्ट्री की अर्निंग आउटलुक से मेल खाती है या यह सिर्फ ‘ओवरसोल्ड’लेवल्स से आई खरीदारी है? हमें आईटी में तीन बातों पर नजर रखने की जरूरत है:

मांग की स्थिति: विशेष रूप से अमेरिका और यूरोप में टाले जा सकने वाला टेक्नोलॉजी खर्च (discretionary technology spending)अहम बना हुआ है। बेहतर सौदे हासिल करने का नतीजा रेवेन्यू ग्रोथ के रूप में दिखना चाहिए।

AI से बदलाव और अवसर: AI कमाई के नए स्रोत पैदा कर सकता है, लेकिन यह पारंपरिक बिलिंग मॉडल को भी बदल सकता है और कीमतों पर दबाव डाल सकता है।

वैल्यूएशन और अर्निंग आउटलुक: भारी तेजी के बाद, जिन शेयरों की कीमत उनकी कमाई की संभावनाओं से आगे निकल गई है, उनमें मुनाफावसूली (प्रॉफिट-टेकिंग) देखने को मिल सकती है।

राजेश कोठारी का मानना ​​है कि आईटी सेक्टर में तेजी आने पर हर शेयर बेच देने की रणनीति जल्दबाजी हो सकती है, लेकिन इस तेजी के पीछे भागना भी कोई समझदारी नहीं है। आईटी में उन कंपनियों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए जिनकी ग्रोथ की संभावनाएं बेहतर हो रही हैं, जिनके ग्राहकों के साथ मजबूत संबंध हैं और जिनके पास AI से कमाई करने के ठोस मौके हैं। ऐसी कंपनियों से दूर रहने की जरूरत है जो अभी भी कमजोर मांग से जूझ रही हैं।

क्या आप कंजम्पशन सेक्टर को लेकर सतर्क हैं? कंजम्पशन डिमांड और इससे जुड़े शेयरों पर आपकी क्या राय है?

राजेश कोठारी ने कहा कि कंजम्पशन सेक्टर को लेकर पूरी तरह सतर्क रहने के बजाय,चुनिंदा रुख अपनाना पसंद करेंगे। जरूरी चीजों पर होने वाले खर्च और गैर-जरूरी (वैकल्पिक) चीजों पर होने वाले खर्च के बीच का अंतर समझना जरूरी है। कई ‘फास्ट फ्रीक्वेंसी’ डेटा इंडिकेटर कंजम्पशन ट्रेंड में सुधार दिखा रहे हैं (जैसे रिटेल क्रेडिट ग्रोथ, टू-व्हीलर की बिक्री में बढ़ोतरी, आदि)।

इस सेक्टर में ऐसी कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिनके पास मजबूत ब्रांड, अच्छा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, कीमतों को तय करने की ताकत, अच्छी बैलेंस शीट और सही वैल्यूएशन हों। वैकल्पिक उपभोग (discretionary consumption) के सेक्टर में केवल कीमतों में बढ़ोतरी पर निर्भर रहने के बजाय, बिक्री की मात्रा (volume) में बढ़त के संकेतों पर भी नजर रखने की जरूरत है।

क्या आप आने वाले समय में ‘अल नीनो’ (El Niño) को बड़ा जोखिम मानते हैं? इसका महंगाई, ग्रामीण मांग और भारत के विकास पर क्या असर पड़ सकता है?

इसके जवाब उन्होंने कहा कि ‘अल नीनो’ एक जोखिम तो है,लेकिन इसे देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि भारत के विकास का पूरा आउटलुक ही खराब हो जाएगा। कोई निष्कर्ष निकालने से पहले फसल उत्पादन, जलाशयों के जल-स्तर, खाने-पीने की चीजों की कीमतों के रुझान और ग्रामीण मांग के इंडीकेटरों पर नजर रखने की जरूरत है।

Q2FY27 में बैंकों के नतीजे कैसे रह सकते है? क्या इनके मौजूदा वैल्यूएशन अच्छे लग रहे है या इन स्तरों से आगे बढ़ने की गुंजाइश सीमित है?

इसके जवाब में राजेश कोठारी ने कहा कि बैंक शेयरों का प्रदर्शन उत्साहजनक है। ज़्यादातर बैंकों ने लोन वितरण (डिस्बर्समेंट) में अच्छी बढ़ोतरी और मज़बूत एसेट क्वालिटी की जानकारी दी है। अच्छे बैंकों में मध्यम अवधि के नजरिए निवेश के अच्छे मौके दिख रहे हैं लेकिन वैल्यूएशन के नजरिए से चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाने की सलाह होगी।

ऐसे बैंकों पर फोकस करने की सलाह होगी जिनकी अर्निंग ग्रोथ को टिकाऊ कोर इनकम,अच्छी एसेट क्वालिटी और मजबूत फंडिंग फ्रेंचाइजी का सपोर्ट हासिल हो। अगले दो से तीन तिमाहियों में मार्जिन में सुधार की स्थिति कैसी रहती है, इस पर भी नजर रहनी चाहिए।

 

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यूसुफ पठान को 500 वर्ग मीटर जमीन मुफ्त देगी गुजरात सरकार? 14 साल पुराने विवाद का होगा अंत

Yusuf Pathan Land Dispute: पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद पार्टी छोड़ने वाले सांसद यूसुफ पठान को गुजरात सरकार से 900 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन मिलने वाली है। इसके साथ ही राज्य सरकार के साथ उनका 14 साल पुराना जमीन विवाद भी खत्म होने जा रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जमीन गुजरात के वडोदरा के तांदलजा इलाके में है। जो कि यूसुफ पठान के परिवार के घर के पास स्थित है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, 500 वर्ग मीटर जमीन उन्हें घर बनाने के लिए उपहार के तौर पर दी जाएगी। वहीं, बाकी 478 वर्ग मीटर जमीन उसके तय मूल्य के 55 फीसदी भुगतान पर उन्हें दी जाएगी। बता दें कि यह जमीन वडोदरा नगर निगम (VMC) की है।

पठान ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस से की थी। 2024 में, उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट जीती। हालांकि, जून 2026 में, वह उन सांसदों में शामिल थे जिन्होंने TMC से अलग होकर ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ जॉइन कर ली।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पठान के राजनीतिक जुड़ावों पर फिर से चर्चा हो रही है, और साथ ही इसने राज्य के साथ ज़मीन से जुड़े विवाद के पुराने इतिहास को भी फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

यूसुफ पठान का जमीन विवाद क्या था?

पठान – जो उस समय एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर थे – ने सबसे पहले 2012 में VMC (वडोदरा नगर निगम) से संपर्क किया था। उन्होंने बिना किसी सार्वजनिक नीलामी के, 99 साल की लीज पर एक प्लॉट की मांग की। उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के नाते अपनी सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया और अपने पारिवारिक घर से सटी जमीन मांगी।

2014 में गुजरात सरकार के शहरी विकास विभाग ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

हालांकि, जून 2024 में यह विवाद फिर से सामने आया – जो कि TMC के साथ पठान के राजनीतिक करियर की शुरुआत के 2 महीने बाद की बात है। VMC ने पठान को एक नोटिस जारी किया, जिसमें उनसे उस जमीन से ‘अतिक्रमण’ हटाने के लिए कहा गया।

पठान ने गुजरात हाई कोर्ट में इस नोटिस को चुनौती दी। जून 2026 में, कोर्ट ने सवाल उठाया कि बिना किसी औपचारिक आवंटन या भुगतान के, जमीन पर कब्जं कैसे किया जा सकता है और वहाँ बाड़ कैसे लगाई जा सकती है। इसके बाद, यह कानूनी विवाद कोर्ट के बाहर सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ा।

इस प्लॉट की कीमत कितनी है?

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, 978 वर्ग मीटर के इस प्लॉट की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 20.5 करोड़ रुपये है, जो कि 2.10 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के मूल्यांकन पर आधारित है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, पठान को 500 वर्ग मीटर जमीन उपहार के तौर पर मिलेगी, जबकि बाकी 478 वर्ग मीटर के लिए उन्हें रियायती दर पर भुगतान करना होगा। सरकार के प्रस्ताव में यह भी प्रावधान है कि राज्य का राजस्व विभाग VMC को इतनी ही कीमत की जमीन आवंटित करेगा।

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खेती से AI तक… बिजनेस आइडिया से जीतें डेढ़ लाख रुपये! जानिए IIT कानपुर के मेंटरशिप वाले चैलेंज में कैसे करें रजिस्ट्रेशन

आपके पास कोई ऐसा आइडिया है, जो लोगों की जिंदगी आसान बना सकता है या किसी बड़ी समस्या का समाधान कर सकता है, तो उसे हकीकत में बदलने का मौका है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर युवाओं को उनके नए विचारों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इसके लिए यूथ एंटरप्रेन्योर्स चैलेंज (YEC) 2027 के तहत आवेदन मांगे गए हैं। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में चुने जाने वाले युवाओं को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा। इस प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली टीमों को डेढ़ लाख रुपये तक का नकद पुरस्कार भी मिलेगा। आवेदन करने की अंतिम तिथि 22 अक्टूबर 2026 है। यह पहल भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2027 का हिस्सा है। इसमें आईआईटी कानपुर नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभा रहा है।

आइडिया को कारोबार में बदलने में मिलेगी मदद

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य ऐसे युवाओं की पहचान करना है, जो तकनीक और नए प्रयोगों के जरिए समाज की समस्याओं का समाधान निकालना चाहते हैं। कई बार युवाओं के पास अच्छा विचार होता है, लेकिन उसे आगे बढ़ाने, उसका प्रोटोटाइप तैयार करने और बाजार तक पहुंचाने का रास्ता नहीं पता होता। ऐसे युवाओं को प्रतियोगिता के माध्यम से अपने विचार को बेहतर बनाने का मौका मिलेगा। आईआईटी कानपुर का स्टार्टअप इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (एसआईआईसी) भी नए विचारों को व्यावहारिक रूप देने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में मददगार साबित हो सकता है।

18 से 35 साल के युवा कर सकेंगे आवेदन

इस प्रतियोगिता में 18 से 35 वर्ष की उम्र के युवा हिस्सा ले सकते हैं। ऐसे स्टार्टअप संस्थापक आवेदन कर सकते हैं, जिनके उद्यम को डीपीआईआईटी से मान्यता मिली हो या जो एमएसएमई के रूप में पंजीकृत हों। सरकारी, निजी, गैर सरकारी संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों में काम करने वाले पेशेवर भी निर्धारित शर्तों के तहत आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित संस्थान से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) देना होगा। युवा अकेले या अधिकतम तीन सदस्यों की टीम बनाकर हिस्सा ले सकते हैं। प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा।

खेती से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पर मौका

युवा स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कृषि, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण, शासन व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों से जुड़े अपने विचार पेश कर सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित नए समाधान भी इसमें शामिल किए जा सकते हैं। विचार ऐसा होना चाहिए, जो किसी वास्तविक समस्या को हल करने में मदद करे और जिसे भविष्य में उपयोगी समाधान के रूप में विकसित किया जा सके।

पहले स्थान पर डेढ़ लाख रुपये का पुरस्कार

प्रतियोगिता के तहत चुनी गई टीमों को अलग-अलग चरणों में अपने विचार प्रस्तुत करने होंगे। क्षेत्रीय स्तर पर अक्टूबर और नवंबर 2026 में प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित टीमों को दिसंबर में मार्गदर्शन मिलेगा। इसके बाद 8 और 9 दिसंबर को आईआईटी कानपुर परिसर में प्रत्यक्ष मार्गदर्शन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। प्रोटोटाइप और पोस्टर तैयार करने के लिए प्रत्येक फाइनलिस्ट टीम को 5,000 रुपये की सहायता भी दी जाएगी। प्रतियोगिता का अंतिम चरण 10 से 12 जनवरी 2027 के बीच प्रस्तावित है। इसमें पहले स्थान पर आने वाली टीम को 1.50 लाख रुपये, दूसरे स्थान पर एक लाख रुपये, तीसरे स्थान पर 75 हजार रुपये, चौथे स्थान पर 50 हजार रुपये और पांचवें स्थान पर 30 हजार रुपये मिलेंगे। फाइनल में पहुंचने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र के साथ नीति निर्माताओं और निवेशकों से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।

22 अक्टूबर तक करना होगा पंजीकरण

इच्छुक युवा माय भारत पोर्टल पर जाकर विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2027 के अंतर्गत यूथ एंटरप्रेन्योर्स चैलेंज के लिए आवेदन कर सकते हैं। पंजीकरण की अंतिम तिथि 22 अक्टूबर 2026 है। आवेदन और पात्रता से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक लिंक https://mybharat.gov.in/pages/youth-entrepreneurs-challenge पर जाना होगा।

कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट

‘यहां कोई न्याय नहीं’, न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के बाद CJP के सौरव दास ने दी प्रतिक्रिया

ड्रैगन फ्रूट की खेती से छप्परफाड़ कमाई! महाराष्ट्र के किसान ने अपनाया ऐसा तरीका, आज सालाना ₹2 करोड़ का कारोबार!

किसान अगर कुछ नया करने की ठान ले, तो खेती से भी करोड़ों रुपये कमाए जा सकते हैं। महाराष्ट्र के सोलापुर के रहने वाले महेश असाबे ने इसे सच कर दिखाया है। उनके परिवार ने कुछ साल पहले सिर्फ 3 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट उगाना शुरू किया था। आज उनका फार्म 60 एकड़ तक फैल चुका है और सालाना कारोबार करीब 2 करोड़ रुपये पहुंच गया है। खास बात यह है कि महेश ने खेती को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीक अपनाई और दूसरे देशों से भी सीख ली। उनकी यह कहानी उन किसानों के लिए खास है, जो खेती से अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं।

पिता ने शुरू की थी खेती

महेश असाबे महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अकोला गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार पहले मक्का जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करता था। महेश ने एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग में बीटेक किया और इसके बाद एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड फूड प्रोसेसिंग में एमटेक की पढ़ाई पूरी की।

साल 2013-14 में उनके पिता ने ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का फैसला लिया। उन्होंने इस फल के बारे में पढ़ा था और जाना था कि इसकी खेती में अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है। सूखे इलाकों में भी इसकी खेती की जा सकती है। यही बात उन्हें इस फसल की ओर खींच लाई।

बांग्लादेश से मंगाए 9,000 पौधे

ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करना परिवार के लिए एक नया प्रयोग था। इसके लिए उन्होंने बांग्लादेश से करीब 9,000 पौधे मंगवाए। Startup Pedia के मुताबिक, पौधों पर शुरुआती निवेश करीब ₹9.9 लाख था। परिवार ने तीन एकड़ जमीन पर खेती शुरू की। साल 2015-16 में पहली फसल तैयार हुई और प्रति एकड़ करीब पांच टन उत्पादन मिला। उपज बेचकर परिवार को लगभग ₹5 लाख की कमाई हुई।

धीरे-धीरे ड्रैगन फ्रूट की मांग और कीमत बढ़ने लगी। साल 2017 तक परिवार इसे ₹150 से ₹250 प्रति किलो के भाव पर बेचने लगा। इससे खेती को बड़े स्तर पर ले जाने का हौसला मिला।

इजरायल और वियतनाम से सीखी खेती की नई तकनीक

महेश ने खेती को सिर्फ पारंपरिक तरीके तक सीमित नहीं रखा। पढ़ाई के दौरान वह 45 दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए इजरायल गए। वहां उन्होंने पानी का बेहतर इस्तेमाल, आधुनिक कृषि तकनीक और उत्पादन बढ़ाने के तरीके सीखे। साल 2018 में उन्होंने वियतनाम का दौरा भी किया, जहां ड्रैगन फ्रूट की खेती के तरीकों को समझा। लौटकर उन्होंने अपने खेत में एक-एक एकड़ के अलग-अलग प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए, ताकि खेती की विभिन्न तकनीकों को आजमाया जा सके।

3 एकड़ से 60 एकड़ तक पहुंचा फार्म

आज महेश असाबे Rukmini Farms and Nursery का संचालन करते हैं। उनके फार्म में ड्रैगन फ्रूट के अलावा अनार, सीताफल और अमरूद भी उगाए जाते हैं।

खेती में पानी बचाने के लिए ड्रिप इरिगेशन और तालाब जैसी सुविधाएं विकसित की गईं। निराई जैसे नियमित कामों में मशीनों का इस्तेमाल भी शुरू किया गया, जिससे खेती को संभालना आसान हुआ।

ड्रैगन फ्रूट से ₹1.25 करोड़ की सालाना कमाई

Startup Pedia के मुताबिक, महेश ड्रैगन फ्रूट की खेती से हर साल करीब ₹1.25 करोड़ कमाते हैं। उनके फार्म में सालाना लगभग 200 टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन होता है। दूसरे फलों से होने वाली कमाई को जोड़ दें, तो उनके कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब ₹2 करोड़ पहुंच जाता है।

महेश की कहानी बताती है कि खेती में नई तकनीक अपनाना, बाजार की मांग समझना और लगातार सीखते रहना कितना महत्वपूर्ण है। तीन एकड़ से शुरू हुआ उनका सफर आज दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

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नीलकंठ मिश्रा ने भारतीय शेयर बाजारों में तेजी नहीं टिकने की बताई बड़ी वजह, सोमवार को भी FII ने की 1148 करोड़ रुपये की बिकवाली

विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकने का नाम नहीं ले रही है। फॉरेन इनवेस्टर्स ने 19 अक्तूबर यानी सोमवार को भी बिकवाली की। इससे पिछले हफ्ते की अच्छी तेजी के बाद हफ्ते के पहले दिन बाजार में बड़ी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी 1.11 फीसदी यानी 257 अंक गिरकर 22,888 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.17 फीसदी यानी 876 अंक गिरकर 73,852 पर क्लोज हुआ। विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजार को लेकर जब तक बदलेगा नहीं, तब तक बाजार में तेजी टिक नहीं पाएगी।

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल का बड़ा असर 

वर्ल्ड बैंक में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर-इंडिया नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि अमेरिका में बॉन्ड्स की बढ़ती यील्ड की वजह से भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी घट रही है। निवेश के जटिल नियमों का असर भी फॉरेन इनवेस्टर्स के इनवेस्टमेंट पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ टैक्स घटाने से काम नहीं चलेगा। इनवेस्टमेंट प्रोसेस को आसान बनाना होगा, नियमों को पारदर्शी बनाना होगा और फैसले लेने की प्रक्रिया तेज करनी होगी। उन्होंने कहा कि रुपये पर जितना दिख रहा है, उससे ज्यादा दबाव है।

अमेरिका और भारतीय बाजार में रिटर्न के बीच का फर्क घटा

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर फॉरेन इनवेस्टर्स को भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट में निवेश में फायदा नहीं दिखता है। अमेरिका और भारत में रिटर्न के बीच का फर्क घट गया है, जिससे निवेश के लिहाज से भारत का अट्रैक्शन कम हुआ है। हाल में 10 साल के बॉन्ड की यील्ड अमेरिका में कई दशकों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई। न सिर्फ अमेरिका बल्कि यूरोपीय देशों में भी बॉन्ड यील्ड बढ़ी है। यील्ड में उछाल से अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश में दिलचस्पी बढ़ी है।

भारतीय बाजार में घट रही विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी

मिश्रा ने एक उदाहरण की मदद से स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 2 फीसदी और भारत में 8 फीसदी है, तो भारत में निवेश करने में फायदा है। लेकिन, अगर अमेरिका में यील्ड बढ़कर 5.3 फीसदी हो जाती है और भारत में 7.3 फीसदी रहती है भारत में निवेश में दिलचस्पी कम हो जाती है। इसका मतलब है कि फॉरेन इनवेस्टर्स को भारत में निवेश करने में फायदा नहीं दिखता। ऐसी स्थिति में वे भारत की जगह अमेरिका में इनवेस्ट करना पसंद करेंगे।

FIIs ने सोमवार को शुद्ध रूप से की 1,148 करोड़ की बिकवाली

स्टॉक एक्सचेंजों के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, फॉरेन इनवेस्टर्स ने 19 अक्तूबर को भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से 1,148 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। उन्होंने 11,240.64 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। लेकिन, 12,389.28 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने शुद्ध रूप से 3,201.19 करोड़ रुपये की खरीदारी की। फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली के बीच DII ने लगातार खरीदारी कर भारतीय शेयर बाजार को सहारा दिया है।