सरकारी गौशाला के पीछे चल रहा था करोड़ों का काला कारोबार: आईटीसी के नाम पर बन रही थीं नकली सिगरेट, ऐसे खुला राज

सरकारी गौशाला के पीछे चल रहा था करोड़ों का काला कारोबार: आईटीसी के नाम पर बन रही थीं नकली सिगरेट, ऐसे खुला राज

Hastinapur fake cigarette factory

हस्तिनापुर विधानसभा के खादर क्षेत्र में सरकारी गौशाला के पास पुराना स्कूल भवन और इसी की आड़ में चल रहा था करोड़ों के नकली सिगरेट का काला कारोबार। पुलिस ने दूधली खादर में एक ऐसी फैक्टरी का भंडाफोड़ किया है, जहां नामी ब्रांड के नाम पर धड़ल्ले से नकली सिगरेट तैयार की जा रही थीं। छापेमारी में पुलिस के हाथ करीब डेढ़ करोड़ रुपये कीमत की तैयार नकली सिगरेट और इतनी ही कीमत का कच्चा माल पकड़ा है। वहीं पुलिस ने सिगरेट बनाने वाली मशीनें भी बरामद की हैं।

 

पुरानी सरकारी गौशाला की आड़ में फैक्टरी के अंदर देश की प्रमुख सिगरेट कंपनी आईटीसी के नाम से कई ब्रांड की नकली सिगरेट तैयार की जा रही थीं। पुलिस ने मौके से चार कर्मचारियों को पकड़ा है, जबकि फैक्टरी संचालक दिल्ली निवासी रवि किशोर को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

 

कंपनी की सूचना ने खोली फैक्टरी की पोल

नकली सिगरेट की इस फैक्टरी की सूचना पुलिस मुखबिर ने नही बल्कि आईटीसी सिगरेट कंपनी द्वारा दी गई। कंपनी के मैनेजर रेशू मिश्रा ने पुलिस को बताया था कि हस्तिनापुर से करीब आठ किलोमीटर दूर खादर इलाके में बड़े पैमाने पर नकली सिगरेट बनाई जा रही हैं।

 

सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने फैक्टरी पर दबिश दी। अंदर का नजारा देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। मशीनों पर सिगरेट तैयार की जा रही थीं और चार कर्मचारी मौके पर काम करते मिले। पूछताछ में पता चला कि रात्रि मैं गिनती के कर्मचारी काम करते है जबकि दिन के समय यहां बड़ी संख्या में कर्मचारी सिगरेट बनाते है। 

 

बड़े ब्रांड, लेकिन माल पूरा नकली

फैक्टरी में किसी छोटे-मोटे ब्रांड की नहीं, बल्कि बाजार में खूब बिकने वाले नामों की नकल की जा रही थी। यहां गोल्ड फ्लेक, क्लासिक, विल्स नेवी कट, इंडिया किंग्स, इंसिग्निया, सैसर्स, प्लेयर्स और ब्रिस्टल के नाम से नकली सिगरेट तैयार की जा रही थीं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि सिगरेट बनाने का कच्चा माल कंबोडिया से और तंबाकू राजस्थान से मंगाया जाता था। फैक्टरी में तैयार माल को यूपी के बाजार के अलावा हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली तक भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

 

छह महीने से चल रहा था पूरा खेल

पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया है कि रवि किशोर पिछले करीब छह महीने से दूधली खादर में पुराने स्कूल भवन के पास इस फैक्टरी को संचालित कर रहा था। सरकारी गौशाला के बिल्कुल पास बड़े पैमाने पर नकली सिगरेट का उत्पादन चल रहा था, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसकी भनक तक नहीं लगी। छापेमारी में मिली मशीनों, तैयार सिगरेट और भारी मात्रा में कच्चे माल ने साफ कर दिया कि यह कोई छोटा-मोटा सेटअप नहीं था, बल्कि बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा था।

 

करोड़ों के नेटवर्क की तलाश में पुलिस

फैक्टरी से बरामद माल की कीमत पुलिस ने करोड़ों रुपये में आंकी है। अब जांच का दायरा फैक्टरी से बाहर निकलकर पूरे नेटवर्क तक पहुंच रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कच्चा माल कौन उपलब्ध कराता था, तैयार सिगरेट किन लोगों के जरिए बाजार तक पहुंचती थीं और इस कारोबार में रवि किशोर के साथ और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

 

साथ ही अलग-अलग राज्यों तक फैले सप्लाई नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि नकली सिगरेट का यह कारोबार अकेले इस फैक्टरी तक सीमित नहीं हो सकता। फिलहाल हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर पूरे सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।