Guest Faculty Recruitment 2026: राजस्थान में गेस्ट फैकल्ट के बंपरों पदों पर होगी भर्ती, विद्या संबल योजना के जरिए दूर होगी शिक्षकों की कमी

Guest Faculty Recruitment 2026: टीचिंग फील्ड में सरकारी नौकरी करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए यह बड़ी खबर है। राजस्थान के सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और संस्कृत शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए अतिथि शिक्षक के बंपर पदों पर जल्द भर्ती शुरू हो सकती है। विद्या संबल योजना के तहत की जाने वाले इस भर्ती के तहत स्कूल और कॉलेज स्तर पर करीब 76 हजार 791 पदों पर गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति की जाएगी। इसका उद्देश्य शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने से रोकना और योग्य अभ्यर्थियों को शिक्षण कार्य से जोड़ना है।

विद्या संबल योजना के तहत ये कर सकेंगे आवेदन

राजस्थान की विद्या संबल योजना के तहत गेस्ट फैकल्ट भर्ती प्रक्रिया में जरूरत के मुताबिक स्कूलों और कॉलेजों में रिक्त पदों की पहचान कर गेस्ट फैकल्टी की सेवाएं ली जाएंगी। इसके लिए युवा अभ्यर्थियों के साथ ही पात्र सेवानिवृत्त शिक्षक भी आवेदन कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए संबंधित विभाग और संस्थान की ओर से निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी करना जरूरी होगा।

विद्या संबल योजना गेस्ट फैकल्टी भर्ती 2026

विद्या संबल योजना के तहत स्कूल स्तर पर कक्षा 1 से 8 तक के लिए ग्रेड-3 शिक्षक, कक्षा 9 और 10 के लिए वरिष्ठ अध्यापक तथा कक्षा 11 और 12 के लिए व्याख्याता के पदों पर गेस्ट फैकल्टी लगाए जाने का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा अनुदेशक और लैब असिस्टेंट जैसे पद भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

उच्च शिक्षा संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर स्तर के पदों पर भी गेस्ट फैकल्टी की व्यवस्था की जा सकती है। संबंधित कॉलेज या संस्थान में उपलब्ध रिक्तियों के अनुसार पदों की संख्या तय होगी।

गेस्ट फैकल्ट के चयन के लिए नहीं देनी होगी लिखित परीक्षा

इच्छुक और योग्यत उम्मीदवारों को गेस्ट फैकल्टी के तौर पर चयन के लिए लिखित परीक्षा या साक्षात्कार नहीं लिया जाएगा। अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के लिए 75% और शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव के लिए 25% अंक रखा जा सकता है। समान अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों में अधिक आयु वाले अभ्यर्थी को वरीयता दिए जाने का प्रावधान बताया गया है।

चयनित गेस्ट फैकल्टी को घंटे के हिसाब से मिलेगा वेतन

गेस्ट फैकल्टी को नियमित सरकारी शिक्षक के समान वेतन नहीं मिलेगा। चयनित उम्मीदवारों को निर्धारित दर के अनुसार प्रति घंटे मानदेय दिया जाएगा। ग्रेड-3 शिक्षक, अनुदेशक और प्रयोगशाला सहायक के लिए 300 रुपए प्रति घंटे मानदेय और अधिकतम 21 हजार रुपए प्रतिमाह तक भुगतान की जानकारी है। वरिष्ठ अध्यापक को 350 रुपए प्रति घंटे और अधिकतम 25 हजार रुपए प्रतिमाह, जबकि व्याख्याता को 400 रुपए प्रति घंटे और अधिकतम 30 हजार रुपए प्रतिमाह तक मानदेय दिया जा सकता है।

उच्च शिक्षा में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए 800 रुपए प्रति घंटे और अधिकतम 45 हजार रुपए प्रतिमाह, एसोसिएट प्रोफेसर के लिए 1000 रुपए प्रति घंटे और अधिकतम 52 हजार रुपए प्रतिमाह, जबकि प्रोफेसर के लिए 1200 रुपए प्रति घंटे और अधिकतम 60 हजार रुपए प्रतिमाह तक मानदेय का प्रावधान बताया गया है।

ऑफलाइन होगा आवेदन

गेस्ट फैकल्टी के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन रखी जा सकती है। संबंधित स्कूल, कॉलेज या शिक्षण संस्था अपनी आवश्यकता के अनुसार रिक्त पदों की जानकारी जारी करेगी और अभ्यर्थियों से आवेदन प्राप्त करेगी।

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क्या RSS पर बैन लगाएंगे ट्रम्प:अमेरिका के धार्मिक कमीशन ने क्यों की ये सिफारिश; मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे पर हंगामा बढ़ा

संघ प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका के दौरे पर हैं। इस बीच वहां मांग उठ रही हैं- RSS पर बैन लगे। यह मांग अमेरिकी सरकार का धार्मिक स्वतंत्रता आयोग USCIRF के चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद और कमिश्नर जीन मिल्स ने की है। मार्च में इसी आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भी RSS पर प्रतिबंध की सिफारिश की थी। इस मांग का आधार क्या है, RSS पर क्या आरोप लगाए गए हैं और क्या ट्रम्प RSS पर बैन लगाएंगे; इसी पर आज का एक्सप्लेनर… सवाल-1: अमेरिका में RSS पर पाबंदी को लेकर कौन सवाल उठा रहा है? जवाब: मोहन भागवत 25 अगस्त से 19 दिन के विदेश दौरे पर हैं। पहला पड़ाव अमेरिका है, फिर कनाडा और ब्रिटेन। RSS पर प्रतिबंधों को लेकर तीन प्रमुख लोगों ने बयान दिए हैं- 19 अगस्त को USCIRF के कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा, ‘RSS नेता भले ही भारतीय सरकार से जुड़े हों, लेकिन उन्हें अमेरिका में हाई-लेवल मीटिंग्स और डिप्लोमेसी में तरजीह नहीं दी जानी चाहिए। अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के दोषी पाए गए RSS सदस्यों पर बैन लगाना चाहिए।’ USCIRF के चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद ने भी कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं। ये एक ऐसा भारतीय संगठन है, जिससे जुड़े समूहों ने ईसाई और मुस्लिम समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। अब RSS नेता मोहन भागवत अमेरिका आ रहे हैं।’ कमीशन की पूर्व चेयरपर्सन नादिन मेंजा ने भी अमेरिकी मैगजीन ‘प्रोविडेंस’ में लिखा, ‘भागवत जिस एकता और सद्भाव की बात करते हैं, वह संघ की जमीनी हरकतों से बिल्कुल अलग है। संघ के रवैये के लिए उसे बैन किया जाना चाहिए।’ सवाल-2: तो फिर इन बयानों का आधार क्या है और इसके पीछे की दलील क्या है? जवाब: RSS पर पाबंदी की बात मार्च 2026 से शुरू हुई। अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट जारी की। इसमें भारत से जुड़े 2 पन्ने हैं। इनमें 23 घटनाओं का जिक्र है- इन 10 प्रमुख घटनाओं के अलावा 13 और घटनाओं का जिक्र है, जिसमें 28 में से 12 राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानूनों, रेवरेंड फ्रैंकलिन ग्राहम का वीजा रद्द करने और गौ संरक्षण के नाम पर हत्या करने जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन घटनाओं में USCIRF ने विश्व हिंदू परिषद (VHP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) या उसकी सरकारों, हिंदू राष्ट्रवादी नेता और संगठन का जिक्र किया है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का सिर्फ एक जगह जिक्र है। वो भी Targeted Sanctions, यानी प्रतिबंध लगाने की सिफारिश के सेक्शन में। USCIRF का कहना है कि RSS की संपत्तियां जब्त कर लेनी चाहिए और उसके सदस्यों के अमेरिका आने पर रोक या वीजा रद्द कर देना चाहिए। सवाल-3: RSS पर बैन की मांग करने वाला ये USCIRF आखिर है क्या?
जवाब: USCIRF की शुरुआत 3 दशक पहले हुई… आयोग बनने की कहानी आयोग का स्ट्रक्चर USCIRF में संसद के जरिए नियुक्त 9 कमिश्नर होते हैं, जो दोनों पार्टियों से होते हैं। एक कमिश्नर को चेयरमैन बनाया जाता है। फिलहाल पाकिस्तानी मूल के डॉ. आसिफ महमूद इसके चेयरमैन हैं। आयोग का काम आयोग की ताकत आयोग अपनी सालाना रिपोर्ट अमेरिकी विदेश मंत्रालय को सौंपता जरूर है, लेकिन खुद कोई कार्रवाई नहीं कर सकता, सिर्फ सिफारिशें देता है। सवाल-4: क्या वाकई अमेरिका में RSS पर बैन लग सकता है?
जवाबः नहीं, फिलहाल ऐसा नहीं लगता। इसकी 4 बड़ी वजहें हैं… सवाल-5: पाबंदी की इस मांग पर भारत सरकार और RSS का क्या रुख है?
जवाबः भारत के विदेश मंत्रालय ने USCIRF को पूर्वाग्रह से ग्रसित और जीरो भरोसे वाली संस्था बताया है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 21 अगस्त को कहा, ‘USCIRF सालों से भारत के खिलाफ भ्रामक, गलत और भड़काऊ बयान देती रही है। हमें ऐसी संस्थाओं को नजरअंदाज करना चाहिए, क्योंकि ये अपने छिपे हुए एजेंडे के तहत काम करती हैं और इनकी कोई विश्वसनीयता नहीं बची है।’ वहीं RSS ने फिलहाल इस पर कोई बात नहीं कही है। हालांकि 24 अगस्त को VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया ‘X’ पर लिखा, ‘USCIRF के मन में सनातन धर्म, हिंदू समाज और भारत के प्रति गहरी नफरत है। हाल में RSS के प्रति जो नफरत दिखाई है, वह हिंदूफोबिया से प्रेरित उसके जाने-पहचाने एजेंडे का एक हिस्सा है।’ मार्च में भारत के पूर्व जजों और अधिकारियों ने एक बयान जारी कर USCIRF रिपोर्ट को दिमागी तौर पर दिवालिया और स्वार्थी बताया था। 275 अफसरों ने इस बयान पर दस्तखत किए थे, जिसमें 25 रिटायर्ड जज, 10 राजदूतों समेत 119 रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स और 131 आर्म्ड फोर्सेस के अधिकारी थे। सवाल-6: USCIRF पर क्यों उठ रहे हैं सवाल, पाकिस्तान से क्या है कनेक्शन?
जवाबः USCIRF के मौजूदा चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी हैं। वे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरात जिले के खारियान गांव में जन्मे। उन्होंने कराची के सिंध मेडिकल कॉलेज से मेडिकल डिग्री ली, फिर 1990 के दशक के आखिर में अमेरिका चले गए। अमेरिका के कैलिफोर्निया में महमूद प्रैक्टिस करने लगे। बाद में अमेरिका की नागरिकता मिल गई। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी से राजनीति भी की है। 2008 से 2016 तक डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन में डेलिगेट रहे। 2022 में कैलिफोर्निया से अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। फिर 2024 में डेमोक्रेटिक हाउस माइनॉरिटी लीडर हाकीम जेफ्रीज ने उन्हें USCIRF में नियुक्त हुए। जुलाई 2026 में चेयरमैन चुने गए। 2019 में जब भारत सरकार ने आर्टिकल 370 हटाया, तब महमूद ने जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए अमेरिकी संसदीय सुनवाई कराने के लिए लॉबिंग की थी। महमूद ने कहा था, ‘कश्मीरी अकेले नहीं हैं। हम तब तक उनके साथ खड़े रहेंगे, जब तक कि उन सभी के मानवाधिकार सुरक्षित नहीं हो जाते।’ महमूद पर सवाल उठते रहे हैं- ——————————–
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महंगाई ने फिर बढ़ाया घर का बजट, मुंबई में दूध के दाम में इस दिन से होगा ₹9 का इजाफा

Mumbai milk Price: देश में अभी चीनी की महंगाई से जहां लोग उबरे नहीं हैं, वहीं अब 1 सितंबर, 2026 से दूध की कीमतें भी बढ़ने वाली हैं। जी हां, दरअसल मुंबई के स्थानीय दूध उत्पादकों ने 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस बढ़ोतरी के बाद से आम आदमी की जेब पर भारी असर पड़ सकता है।

फिलहाल, तबेले के दूध की कीमत अभी 93 रुपये प्रति लीटर है, जो बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह बढ़ोतरी त्योहारों के मौसम से ठीक पहले हो रही है और इससे उन ग्राहकों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है जो नियमित रूप से ताजा डेयरी दूध खरीदते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, दूध की नई कीमतें 1 सितंबर, 2026 से 28 फरवरी, 2027 तक लागू रहेंगी।

तबेले के दूध की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

दूध उत्पादकों ने इस बढ़ोतरी की वजह डेयरी पशुओं के रखरखाव में आने वाले ज्यादा खर्च और पशुओं के चारे व दाने की कीमतों में भारी वृद्धि को बताया है।

उत्पादकों का कहना है कि बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों के कारण डेयरी फार्मों के लिए 93 रुपये प्रति लीटर की मौजूदा दर बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। अनाज समेत पशुओं के दाने की कई चीजों की कीमतें 25% तक बढ़ गई हैं, जबकि महंगे चारे और खली (oil cakes) ने दूध उत्पादन की लागत को और बढ़ा दिया है।

लागत लगातार बढ़ने के कारण, दूध उत्पादकों का कहना है कि डेयरी का कामकाज जारी रखने के लिए कीमतों में बदलाव जरूरी हो गया था।

मुंबई के परिवारों पर असर

दूध के दाम में प्रति लीटर 9 रुपये की बढ़ोतरी से उन परिवारों के बजट पर असर पड़ने की उम्मीद है जो नियमित रूप से तबेले का दूध खरीदते हैं। यह बढ़ोतरी त्योहारों के मौसम से ठीक पहले हुई है, जब आमतौर पर घरों में खर्च बढ़ जाता है।

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बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर में किसने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया? जानिए वक्त के साथ तस्वीर कैसे बदली

बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर ने पिछले कुछ महीनों में काफी उतार-चढ़ाव देखा है। तीनों ने अलग-अलग समय में अलग रिटर्न दिया है। कुछ अवधि में बिटकॉइन आगे रहा। वहीं लंबी अवधि में सिल्वर ने भी शानदार प्रदर्शन किया।

कम अवधि में बिटकॉइन आगे

1 महीने और 6 महीने के रिटर्न में बिटकॉइन सबसे आगे रहा। 1 महीने में इसका रिटर्न 17.23% रहा। 6 महीने में यह बढ़कर 22.26% हो गया। गोल्ड ने भी लगातार बढ़त दिखाई। हालांकि, शॉर्ट टर्म में बिटकॉइन की तेजी ज्यादा रही।

3 साल में सिल्वर ने मारी बाजी

3 साल की अवधि में तस्वीर बदल जाती है। यहां सिल्वर सबसे आगे रहा। इसका सालाना औसत रिटर्न 48.97% रहा। इसी अवधि में बिटकॉइन ने 47.46% और गोल्ड ने 41.06% का सालाना औसत रिटर्न दिया। यानी लंबी अवधि में सिल्वर ने बिटकॉइन और गोल्ड दोनों को पीछे छोड़ दिया।

₹10,000 की SIP का क्या हुआ?

एक साल की अवधि में अगर हर महीने ₹10,000 की SIP बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर में की जाती, तो तीनों में निवेश का नतीजा अलग होता। इससे पता चलता है कि नियमित निवेश करने पर अलग-अलग एसेट ने कैसा प्रदर्शन किया। यहां SIP का मतलब हर महीने एक तय रकम निवेश करना है। इससे बाजार के अलग-अलग भाव पर निवेश होता रहता है।

बिटकॉइन ने 3 साल में भी शानदार कमाई की

CoinDCX की ग्रोथ और क्रिप्टो बिजनेस हेड मीनल ठुकराल के मुताबिक, बिटकॉइन का लंबी अवधि का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है।

उनके मुताबिक, 24 अगस्त 2023 को लगाए गए $26,162 बढ़कर $77,472 हो गए। यानी निवेश पर 244% से ज्यादा रिटर्न मिला। रकम करीब 3.44 गुना हो गई। हालांकि, इस दौरान बिटकॉइन में कई बड़ी गिरावट भी आईं। इसलिए सिर्फ तेजी देखकर निवेश करना सही नहीं है। लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखना अहम रहा।

बिटकॉइन का सफर काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा

बिटकॉइन ने 7 अक्टूबर 2025 को $1,25,752 का ऑल टाइम हाई बनाया था। 2026 में यह 15 जनवरी को $96,931 तक पहुंचा। इसके बाद कीमत में गिरावट आई। 1 जुलाई को बिटकॉइन $58,562 तक फिसल गया।

अगस्त के पहले हफ्ते में यह करीब $62,000 से $65,000 के स्तर पर था। 26 अगस्त तक बिटकॉइन करीब $80,000 से $80,300 के बीच कारोबार कर रहा था।

गोल्ड में भी तेज उतार-चढ़ाव

गोल्ड जनवरी 2026 में $5,500 प्रति औंस तक पहुंचा था। जुलाई में इसकी कीमत $4,000 प्रति औंस से नीचे आ गई। इसके बाद गोल्ड में फिर तेजी आई। 26 अगस्त तक यह $4,630 प्रति औंस के ऊपर कारोबार कर रहा था। कमजोर डॉलर और अमेरिका की वित्तीय स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता ने गोल्ड को सपोर्ट दिया है।

सिल्वर भी तेजी से पलटा

सिल्वर जनवरी में करीब $120 प्रति औंस पर था। जुलाई में यह गिरकर $55 से $60 के दायरे में आ गया। इसके बाद सिल्वर में तेजी लौटी। 26 अगस्त तक इसकी कीमत करीब $63 से $70 प्रति औंस के बीच थी। सिल्वर की तेजी को गोल्ड की मजबूती से भी सपोर्ट मिला।

निवेश से पहले क्या समझें?

बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर का प्रदर्शन हर अवधि में अलग रहा है। छोटी अवधि में बिटकॉइन आगे रहा। वहीं 3 साल में सिल्वर ने सबसे ज्यादा सालाना औसत रिटर्न दिया।

इसलिए सिर्फ पुराने रिटर्न देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। बिटकॉइन और सिल्वर में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव हो सकता है। निवेश से पहले जोखिम और अपने निवेश के लक्ष्य को जरूर देखना चाहिए।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

पाक टेस्ट टीम ने नहीं प्रसारित होने दिया इमरान खान के बेटों का दुख, टेस्ट मैच बॉयकॉट करने की दी धमकी

imran khan

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इंग्लैंड के शीर्ष स्पोर्ट्स चैनल और डजीटल स्पोर्ट्स प्रसारणकर्ता के ख़िलाफ़ औपचारिक शिकायत की है। यह शिकायत तब की गई, जब प्रसारणकर्ता ने लॉर्ड्स में पहले दिन लंच के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री और कप्तान इमरान ख़ान के बेटों का इंटरव्यू प्रसारित किया। एक अग्रणी क्रिकेट वेबसाइट को मिली जानकारी के मुताबिक़ PCB ने विरोध के तौर पर ब्रेक के बाद पाकिस्तान की टीम के मैदान पर वापस नहीं उतरने के विकल्प पर भी विचार किया था।

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और मौजूदा स्पोर्ट्स प्रेसेंटर माइक एथर्टन ने यह इंटरव्यू किया था। इसमें इमरान के बेटों सुलेमान और क़ासिम ख़ान ने अपने पिता की सेहत को लेकर चिंता जताई थी। इमरान पिछले तीन साल से जेल में हैं। उनके बेटों ने कहा कि उन्हें अपने पिता की ज़िंदगी को लेकर भी डर है। माना जा रहा है कि PCB ने लंच ब्रेक से पहले ही स्काई स्पोर्ट्स से संपर्क करके इस सेगमेंट को लेकर विरोध दर्ज कराया था। PCB ने कथित तौर पर यह भी चेतावनी दी थी कि अगर इंटरव्यू प्रसारित किया गया, तो पाकिस्तान के खिलाड़ी लंच के बाद मैदान पर वापस नहीं लौटेंगे।

इन बातचीत के दौरान स्काई ने इंटरव्यू को कुछ देर के लिए रोक दिया। लेकिन बाद में उसने 18 मिनट का यह इंटरव्यू प्रसारित कर दिया। जब तक इंटरव्यू ख़त्म हुआ, पाकिस्तान के खिलाड़ी दूसरे सेशन के लिए मैदान पर लौटने की तैयारी कर रहे थे। दूसरा सेशन दोपहर 2:40 बजे शुरू होना था।

एथर्टन ने बुधवार सुबह लॉर्ड्स के राइटर्स रूम में इमरान के बेटों का यह इंटरव्यू किया था। स्काई ने टेस्ट मैच से पहले इस इंटरव्यू की एक छोटी झलक भी दिखाई थी। हालांकि पाकिस्तान में इस सीरीज़ का प्रसारण करने वाले PTV ने इस इंटरव्यू को प्रसारित नहीं किया। पिछले कुछ हफ़्तों से इमरान की सेहत को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उनके बेटे भी उन्हें सही इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने की कोशिशें तेज़ कर रहे हैं।

पिछले हफ़्ते पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि इमरान को राजधानी इस्लामाबाद के शिफ़ा अस्पताल में भर्ती कराया जाए। लेकिन इसके बजाय उन्हें सरकारी PIMS अस्पताल ले जाया गया और जांच के कुछ ही समय बाद वापस जेल भेज दिया गया था।

इमरान की बहनों और बेटों ने आरोप लगाया है कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन था। उन्होंने यह भी मांग की है कि इमरान को अपने निजी डॉक्टर से मिलने की इजाज़त दी जाए। पिछले हफ़्ते एथर्टन समेत 21 पूर्व कप्तानों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को एक ख़त लिखा था। इसमें उन्होंने उनसे अपील की थी कि यह सुनिश्चित किया जाए कि इमरान को जेल में सही इलाज और ज़रूरी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाए।

इस ख़त पर भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज़ और न्यूज़ीलैंड के पूर्व कप्तानों ने दस्तख़त किए थे। यह फ़रवरी में 14 पूर्व कप्तानों द्वारा लिखे गए एक पिछले ख़त के बाद भेजा गया था। उस पहले ख़त का पाकिस्तान सरकार की तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया था।

एक अग्रणी क्रिकेट वेबसाइट ने इस मामले पर PCB की आधिकारिक प्रतिक्रिया के लिए उससे संपर्क भी किया है। वहीं, पाकिस्तान सरकार ने पिछले हफ़्ते एसोसिएटेड प्रेस को दिए एक बयान में उन आरोपों को ख़ारिज किया था कि इमरान के साथ जेल में बदसलूक़ी की गई या उन्हें अपने परिवार और वकीलों से मिलने नहीं दिया गया। सरकार ने कहा था कि अगस्त 2023 में जेल जाने के बाद से इमरान से उनके परिवार, वकीलों और डॉक्टरों ने 900 से ज़्यादा बार मुलाक़ात की है।

Tecno ने लॉन्च किया दमदार Spark Go 3 Pro, पानी, धूल और गिरने से नहीं होगा आसानी से खराब

Tecno ने भारत में Spark Go 3 Pro लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह इस सेगमेंट का पहला स्मार्टफोन है जिसे IP69 ड्यूरेबिलिटी रेटिंग मिली है। बता दें कि यह नया बजट स्मार्टफोन उन यूजर्स के लिए बनाया गया है जिन्हें ऐसे डिवाइस की जरूरत है जो मुश्किल हालात झेल सके और तेज प्रेशर वाले पानी के जेट, धूल और गलती से गिरने जैसी स्थितियों से सुरक्षित रह सके।

कंपनी के मुताबिक, Spark Go 3 Pro को डिलीवरी एग्जीक्यूटिव, किसानों, छात्रों और प्रोफेशनल्स जैसे यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जिन्हें रोजाना इस्तेमाल के लिए एक मजबूत स्मार्टफोन चाहिए, जिसमें जरूरी फीचर्स से कोई समझौता न करना पड़े।

कीमत और उपलब्धता

Tecno Spark Go 3 Pro भारत में 4 सितंबर, 2026 से रिटेल स्टोर, Amazon और Flipkart पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इसके 4GB RAM + 64GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत ₹15,999 है, जबकि 4GB RAM + 128GB स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत ₹16,999 है।

स्पेसिफिकेशन्स

Tecno Spark Go 3 Pro की सबसे बड़ी खासियत इसकी IP69-रेटेड बनावट है। कंपनी का कहना है कि यह तेज दबाव वाले पानी के जेट, धूल और गलती से गिरने पर सुरक्षा देती है, जिससे यह मुश्किल आउटडोर स्थितियों में काम करने वाले यूजर्स के लिए सही है।

इस स्मार्टफोन में 120Hz का डिस्प्ले है, जो आम 60Hz पैनल के मुकाबले ज्यादा स्मूद स्क्रॉलिंग, गेमिंग और एनिमेशन का अनुभव देता है। डिवाइस को पावर देने के लिए इसमें 5,200mAh की बैटरी है। Tecno का कहना है कि इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि एक बार चार्ज करने पर यह पूरे दिन चल सके।

इसके अलावा, क्लियर वॉइस कॉल के लिए फोन में AI वॉइसप्रिंट नॉइज कैंसिलेशन फीचर दिया गया है, जो बातचीत के दौरान बैकग्राउंड के शोर को कम करता है। इस डिवाइस में IR ब्लास्टर भी है, जिससे यूजर्स टेलीविजन और एयर कंडीशनर जैसे कम्पैटिबल घरेलू उपकरणों को सीधे स्मार्टफोन से कंट्रोल कर सकते हैं।

Tecno का कहना है कि Spark Go 3 Pro को मजबूती और भरोसे को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह उन ग्राहकों के लिए है जो किफायती कीमत पर मजबूत स्मार्टफोन का अनुभव चाहते हैं, साथ ही रोजाना के कामों और मनोरंजन के लिए मॉडर्न फीचर्स भी चाहते हैं।

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Reforms in Public Examinations: सरकार ने शुरू की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी, जनता से मांगा सुझाव

Reforms in Public Examinations: हाल के महीनों में आयोजित बड़ी और प्रमुख परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों के बीच सरकार देश की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था में व्यापक पैमाने पर बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके तहत सरकार ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। देश की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव पर आम जनता 13 सितंबर 2026 तक सुझाव दे सकती है। इसके लिए पहले ही नंदन नीलकेणी की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स (HPTF) बनाई गई है। यह फोर्स नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षा समेत उसके आयोजन, सुरक्षा, डिजाइन और गवर्नेंस में बड़े सुधारों की जांच करेगी और सुझाव देगी।

टास्क फोर्स संस्थागत व्यवस्था और प्रक्रिया को मजबूत करने, परीक्षा की शुचिता और सुरक्षा में सुधार करने, सही तकनीक का इस्तेमाल करने और एग्जामिनेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के तरीकों की जांच कर रही है। यह परीक्षा प्रक्रिया के दौरान सुगमता और समावेश को बढ़ावा देने और छात्रों की सुरक्षा के तरीकों पर भी गौर कर रही है। इसका मकसद एक ऐसी सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था बनाना है जो मजबूत, सुरक्षित, पारदर्शी, बराबर और भविष्य के लिए तैयार हो।

कौन सुझाव दे सकता है?

एचपीटीएफ ने छात्रों और उम्मीदवारों, अभिभावकों, शिक्षकों और शैक्षिक संस्थानों, परीक्षा आयोजित करने वाली और टेस्ट इंडेंट करने वाली संस्थाओं, विषय विशेषज्ञों, तकनीकी पेशेवरों, औद्योगिक संस्थानों और सिविल सोसाइटी संस्थानों सहित कई स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे हैं। दूसरे इच्छुक स्टेकहोल्डर भी अपने इनपुट दे सकते हैं।

इन मुख्य बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है

सुझावों में सार्वजनिक परीक्षा का आयोजन और सुरक्षा, परीक्षा तंत्र का प्रारूप और मूल्यांकन का तरीका, गवर्नेंस और जवाबदेही, और संस्थागत व्यवस्था शामिल हो सकते हैं।स्टेकहोल्डर परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने, उनका पता लगाने और उन्हें ठीक करने के साथ-साथ सुरक्षित कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग सहित टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर भी इनपुट दे सकते हैं।

टास्क फोर्स परीक्षा व्यवस्था का ढांचा बनाने और उसे बढ़ाने और सोशल, इकोनॉमिक, रीजनल और भाषाई ग्रुप्स तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए एक समावेशी परीक्षा फ्रेमवर्क विकसित करने पर भी सुझाव मांग रही है। दूसरे बिंदुओं में पारदर्शिता, शिकायत का समाधान, स्टेकहोल्डर कम्युनिकेशन और परीक्षा प्रक्रिया के दौरान छात्रों की भलाई को बढ़ावा देने के उपाय शामिल हैं। स्टेकहोल्डर कोई और उपाय भी सुझा सकते हैं जो परीक्षा व्यवस्था में वैल्यू ऐड कर सके।

सुझाव देने की आखिरी तारीख

एचपीटीएफ ने स्टेकहोल्डर्स से 13 सितंबर, 2026 तक अपने सुझाव देने को कहा है। सुझाव आधिकारिक वेबसाइट, फोन, WhatsApp या ईमेल से इंग्लिश, हिंदी और दूसरी रीजनल भाषाओं में दिए जा सकते हैं।

वेबसाइट: examreforms-taskforce.dopt.gov.in

फोन: 1800-180-4747

WhatsApp: “hptf” लिखकर +91 78270 42830 पर भेजें।

ईमेल: ExamReformsTaskforce@dopt.gov.in

GATE Registration 2027: नहीं शुरू हुआ गेट पंजीकरण, आईआईटी मद्रास ने रजिस्ट्रेशन शेड्यूल में किया बदलाव

Jio Platforms IPO: सेबी ने जियो के आईपीओ को मंजूरी दी, 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे

Jio Platforms IPO: रिलायंस ग्रुप की टेलीकॉम कंपनी Jio Platforms की शेयर बाजार में एंट्री अब और करीब आ गई है। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने कंपनी के IPO प्लान को मंजूरी दे दी है। Jio Platforms ने 19 जून को DRHP दाखिल किया था। अब IPO की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

यह IPO भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल हो सकता है। कंपनी इस इश्यू में 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी। इससे करीब 2.93% हिस्सेदारी कम होगी। IPO से मिलने वाली रकम में से करीब ₹27,500 करोड़ लोन चुकाने में लगाए जाएंगे।

Jio Platforms में किसकी कितनी हिस्सेदारी?

Jio Platforms में Reliance Industries यानी RIL सबसे बड़ी शेयरधारक है। उसके पास 66.43% हिस्सेदारी है। Meta Platforms के पास 9.98% और Google के पास 7.73% हिस्सेदारी है।

सऊदी अरब के पब्लिक इनवेस्टमेंट फंड के पास 2.31% हिस्सेदारी है। KKR के पास भी 2.31% और Vista Equity Partners के पास 2.31% हिस्सेदारी है। Silver Lake के पास 1.88% हिस्सेदारी है।

इसके अलावा Mubadala के पास 1.85%, General Atlantic Singapore के पास 1.34%, Abu Dhabi Investment Authority के पास 1.16% और TPG Capital के पास 0.93% हिस्सेदारी है।

जून तिमाही में रेवेन्यू 12% बढ़ा

Jio Platforms का कारोबार भी अच्छी रफ्तार से बढ़ रहा है। जून तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 12% बढ़कर ₹45,961 करोड़ रहा।

ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹39,173 करोड़ रहा। EBITDA 15% बढ़कर ₹20,865 करोड़ पहुंच गया। EBITDA मार्जिन भी 52% से बढ़कर 53% हो गया। कंपनी का मुनाफा 9.2% बढ़कर ₹7,764 करोड़ रहा।

53.33 करोड़ पहुंचा सब्सक्राइबर बेस

जून तिमाही के अंत में Jio Platforms का सब्सक्राइबर बेस 53.33 करोड़ हो गया। पिछली तिमाही में यह 52.44 करोड़ था। एक साल पहले यह 49.81 करोड़ था।

कंपनी के 5G सब्सक्राइबर की संख्या 28.5 करोड़ पहुंच गई। डेटा इस्तेमाल भी बढ़ा है। जून तिमाही में कुल डेटा ट्रैफिक सालाना आधार पर 26.9% बढ़कर 69.4 अरब GB रहा। प्रति व्यक्ति औसत मासिक डेटा इस्तेमाल 43.7 GB रहा।

इन कंपनियों के IPO को भी मंजूरी

SEBI ने Bharat PET, Sadbhav Futuretech, MK Sons Fine Jewels, Pushp Brand India और Paras Healthcare के IPO को भी मंजूरी दी है।

इसके अलावा Paramotor Digital Technology के प्री फाइलिंग प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है।

Top IPO 2026: इस साल किन आईपीओ ने मालामाल किया? Tempsens 110% लिस्टिंग गेन के साथ सबसे आगे

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Top IPO 2026: इस साल किन आईपीओ ने मालामाल किया? Tempsens 110% लिस्टिंग गेन के साथ सबसे आगे

Top IPO 2026: भारत के प्राइमरी मार्केट ने इस साल निवेशकों को शानदार लिस्टिंग गेन दिए हैं। कुछ IPO की शुरुआत इतनी मजबूत रही कि निवेशकों को पहले ही दिन काफी बड़ा मुनाफा मिला। कुछ मामलों में तो शेयर ने लिस्टिंग पर ही निवेश की रकम दोगुनी से ज्यादा कर दी।

पैसा लगभग डबल करने वाले IPO

Tempsens Instruments India इस लिस्ट में सबसे आगे है। कंपनी के शेयर IPO प्राइस से 110.40% प्रीमियम पर लिस्ट हुए। यानी पहले दिन निवेशकों का पैसा दोगुने से भी ज्यादा हो गया। यह इस साल की अब तक की सबसे मजबूत लिस्टिंग रही।

सरकारी कंपनी कोल इंडिया की सब्सिडियरी Bharat Coking Coal दूसरे नंबर पर रही। इसके शेयर 96.57% प्रीमियम पर लिस्ट हुए। यानी निवेशकों को पहले दिन ही करीब दोगुनी रकम के बराबर फायदा मिला।

40% से ज्यादा रिटर्न देने वाले

इसके बाद लिस्टिंग गेन में बड़ा अंतर दिखता है। INDO MIM के शेयर 44.95% प्रीमियम पर लिस्ट हुए। वहीं CMR Green Tech ने 43.44% का लिस्टिंग गेन दिया। दोनों IPO ने निवेशकों को पहले दिन ही मजबूत रिटर्न दिया।

Dhoot Transmission और Kusumgar की लिस्टिंग भी करीब-करीब एक जैसी रही। Dhoot Transmission के शेयर 37.06% प्रीमियम पर खुले। Kusumgar के शेयर 36.99% प्रीमियम पर लिस्ट हुए। दोनों के बीच सिर्फ मामूली अंतर रहा।

निवेशकों को मालामाल करने वाले IPO

कंपनी
लिस्टिंग प्रीमियम (%)

Tempsens110.40%
Bharat Coking Coal96.57%
INDO MIM44.95%
CMR Green Tech43.44%
Dhoot Transmission37.06%
Kusumgar36.99%
BigFoot Retail33.51%
Lalithaa Jewellery31.99%
Laser Power25.70%
Molbio Diagnostics

21.44%

नोट: इसमें ₹5 अरब से ज्यादा इश्यू साइज वाले IPO शामिल हैं।

स्रोत: Bloomberg

 

2026 में IPO से ₹72,165 करोड़ जुटे

Prime Database के मुताबिक, जनवरी से अगस्त 2026 के बीच भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर 60 IPO आए। इन IPO के जरिए कंपनियों ने कुल ₹72,165 करोड़ जुटाए। खास बात यह रही कि जुलाई और अगस्त में IPO बाजार काफी सक्रिय रहा। इन दो महीनों में कुल जुटाई गई रकम का करीब 69% हिस्सा आया।

₹2.02 लाख करोड़ के IPO कतार में

IPO बाजार में आगे भी काफी हलचल देखने को मिल सकती है। Prime Database के मुताबिक, 75 कंपनियां SEBI की मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। इन कंपनियों के प्रस्तावित इश्यू का कुल आकार करीब ₹2.02 लाख करोड़ है।

इनमें से 32 कंपनियों ने अपना इश्यू साइज बताया है। इन 32 कंपनियों के IPO का कुल आकार करीब ₹1.38 लाख करोड़ है। यानी आने वाले महीनों में भी प्राइमरी मार्केट में बड़ी रकम जुटाए जाने की संभावना है।

* एजेंसी इनपुट के साथ

Tempsens IPO Listing: 111% का लिस्टिंग गेन, पैसा डबल, ₹300 का शेयर ₹634 पर लिस्ट

 

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sonia Gandhi Book Row: ‘हम पुस्तक को पब्लिश करने के लिए तैयार थे, लेकिन…’; Penguin ने सोनिया गांधी की किताब छापने से किया इनकार? दी ये सफाई

Sonia Gandhi Book Row: ‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ ने शुक्रवार (28 अगस्त) को कहा कि वह कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव (Belonging: A Journey of Love)’ किताब का भारत में प्रकाशक यानी पब्लिशर नहीं है। पेंगुइन का यह बयान अमेरिकी पब्लिशर ‘अल्फ्रेड ए. नॉफ’ द्वारा यह घोषणा किए जाने के कुछ सप्ताह बाद आया है कि किताब 10 नवंबर को प्रकाशित होगी। ‘अल्फ्रेड ए. नॉफ (Alfred A Knopf)’, पेंगुइन रैंडम हाउस का एक प्रकाशन संस्थान है।

 ‘हम किताब को पब्लिश करने के लिए तैयार थे’

कंपनी ने एक बयान में कहा, “पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया भारत में ‘बिलॉन्गिंग’ की प्रकाशक नहीं है। यह कहना परिस्थितियों की सही तरीके से प्रस्तुति नहीं है कि लेखिका (सोनिया) द्वारा संपादकीय बदलावों को स्वीकार करने से इनकार करने के कारण पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इसे प्रकाशित नहीं करने का फैसला किया है।” यह बयान अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें दावा किया गया था कि सोनिया गांधी द्वारा पांडुलिपि में ‘संपादकीय बदलाव’ करने से इनकार करने के बाद प्रकाशक पीछे हट गया।

‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ ने कहा कि वह ‘किताब प्रकाशित करने के लिए इच्छुक और उत्सुक’ था। लेकिन लेखकों की तथ्य-जांच करना और उन्हें सुझाव देना प्रकाशन प्रक्रिया के सामान्य हिस्से के रूप में उसका विशेषाधिकार और जिम्मेदारी है। कंपनी ने कहा, “संबंधित चर्चाओं के दौरान पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का रुख यही था कि हम किताब प्रकाशित करने के लिए इच्छुक और उत्सुक बने हुए हैं। हम लेखिका के साथ हुई गोपनीय बातचीत पर आगे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।”

‘किताब के डिस्ट्रीब्यूटर की स्थिति अभी साफ नहीं’

इस बीच, भारत में किताब के डिस्ट्रीब्यूटर की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, ई-कॉमर्स वेबसाइट Amazon के एक पेज पर ‘बिलॉन्गिंग’ का ई-बुक वर्जन 2,615 रुपये में प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध दिखा। ई-कॉमर्स वेबसाइट के अनुसार, ई-बुक का पब्लिशर ‘हार्पर कॉलिन्स’ यूके का एक प्रकाशन संस्थान विलियम कॉलिन्स है।

क्या है किताब में?

अल्फ्रेड ए. नॉफ की घोषणा के बाद से ही भारत में किताब के पब्लिशर को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं। अल्फ्रेड ए. नॉफ द्वारा कुछ दिनों पहले कहा गया था कि सोनिया गांधी अपनी आत्मकथा में भारत के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवारों में से एक में विवाह के बाद अपने जीवन, पति राजीव गांधी की हत्या के दुखद दौर और 2004 में प्रधानमंत्री पद अस्वीकार करने सहित कई निजी अनुभव शेयर करेंगी।

सार्वजनिक रूप से अपने निजी जीवन के बारे में बहुत कम ही बात करने वालीं 79 वर्षीय सोनिया ने इस किताब में युद्ध के बाद के इटली में अपने बचपन से लेकर अपने प्रेम-प्रसंग और उसकी वजह से भारत आने तक की कहानी का वर्णन किया है। इससे पहले जून में पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने पत्रकार और लेखक जो सैको के 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित ग्राफिक उपन्यास को स्थानीय कानूनी, रेगुलेटरी, कमर्शियल और मार्केट संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हटा दिया था।

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खबरों में दावा किया गया था कि प्रकाशक ने गलत मानचित्र के कारण किताब के डिस्ट्रीब्यूट से हाथ खींच लिया था और मूल पब्लिशर की ओर से कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इस साल फरवरी में भी पब्लिशर उस समय सुर्खियों में आया था, जब उसने कहा था कि उसने पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को प्रिंट नहीं किया है। यह बयान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा संसद में इस किताब की एक कॉपी दिखाए जाने के कुछ दिन बाद आया था।