क्यों खास है उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मंदिर? दक्षिण की ओर झुका है 56 सेमी ऊंचा स्वयंभू शिवलिंग

क्यों खास है उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मंदिर? दक्षिण की ओर झुका है 56 सेमी ऊंचा स्वयंभू शिवलिंग

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी आने वाले श्रद्धालुओं से ऐतिहासिक काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करने की अपील की। परशुराम द्वारा स्थापित इस प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास, महत्व और खासियतों के बारे में जानें।

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, जनपद उत्तरकाशी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव की आराधना का पावन एवं प्रमुख केंद्र है। यहां श्रद्धालु महादेव की पूजा-अर्चना कर आत्मिक शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति करते हैं। आप भी उत्तरकाशी आगमन पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन अवश्य करें।
 

क्या है मान्यता?

उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मंदिर भागीरथी नदी के तट पर स्थित है। यह उत्तराखंड के सबसे प्राचीन और पवित्र शिव मंदिरों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस प्राचीन मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी। वर्ष 1857 में टिहरी रियासत के राजा सुदर्शन शाह की पत्नी, महारानी खनेती ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।

 

उत्तरकाशी को भगवान शिव का कलियुग का दूसरा निवास माना जाता है और इसी कारण यहां भी काशी विश्वनाथ मंदिर मौजूद है। ऐसा कहते हैं कि जब काशी पानी में डूब जाएगी तब भगवान काशी विश्वनाथ को उत्तरकाशी के इस मंदिर में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

 

क्या है मंदिर की विशेषता?

गर्भ गृह में स्थापित शिवलिंग लगभग 56 सेंटीमीटर ऊंचा और स्वयंभू माना जाता है। यह शिवलिंग दक्षिण दिशा की ओर थोड़ा सा झुका हुआ है। मंदिर के सामने शक्ति मंदिर में एक विशाल त्रिशूल है। कहा जाता है कि इसका संबंध पौराणिक काल और देवताओं द्वारा अस्त्र-शस्त्र के प्रयोग से है।

IPO News: SEBI की हरी झंडी, दो कंपनियों के आईपीओ के रास्ते का एक बड़ा पड़ाव पार

IPO News: बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने पारस हेल्थकेयर और एमके सन्स के आईपीओ प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी है। सेबी की साइट पर मौजूद डिटेल्स के मुताबिक अब ये दोनों कंपनियों अपनी आईपीओ योजना पर आगे बढ़ सकती हैं। इन दोनों ने इस साल की शुरुआत में सेबी के पास आईपीओ का ड्राफ्ट फाइल किया था। अब इन्हें हरी झंडी मिल चुकी है लेकिन अभी तक आईपीओ खुलने की तारीख या प्राइस बैंड का ऐलान नहीं हुआ है। आईपीओ की सफलता के बाद इनके शेयरों की बीएसई और एनएसई पर एंट्री होगी।

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पारस हेल्थकेयर ने ₹1,800 करोड़ तक का आईपीओ लाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत कंपनी की योजना ₹500 करोड़ तक के नए इक्विटी शेयर जारी करने की है को ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत ₹1,300 करोड़ तक के शेयरों की बिक्री हो सकती है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिलेगा तो नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी कर्ज हल्का करने में करेगी। इसके अलावा कंपनी की योजना आईपीओ के पैसों को सब्सिडियरी PMHPL में भी निवेश की है ताकि इसका भी कर्ज हल्का हो सकते है। इसके अलावा आईपीओ के बाकी पैसों का इस्तेमाल आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में होगा।

पारस हेल्थकेयर पारस हेल्थ ब्रांड के तहत काम करती है और टर्शियरी और क्वाटर्नरी हेल्थकेयर सर्विसेज देती है। 31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक यह उत्तर भारत, बिहार और झारखंड में कुल 2,211 बेड की क्षमता वाले आठ अस्पताल चला रही थी। इसके अस्पताल हरियाणा, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में हैं।

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एमके सन्स फाइन ज्वेल्स रिटेल-फोकस्ड ज्वैलरी कंपनी है। इसकी योजना आईपीओ के तहत 1.36 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करने की है और ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत प्रमोटर शेयरहोल्डर रामचंद मुरलीधर रायमलानी अधिकतम 34 लाख शेयरों की बिक्री कर सकते हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले प्रमोटर को मिलेगा तो नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी महाराष्ट्र में एक नया शोरूम खोलने, गुजरात में अपने मौजूदा शोरूम को बड़ा करने, कर्ज हल्का करने और आम कॉर्रपोरेट उद्देश्यों में करेगी। एमके सन्स फाइन ज्वेल्स अपने शोरूम के जरिए सोने, हीरे और क्यूबिक जिर्कोनिया के गहने बेचती है। अभी मुंबई और अहमदाबाद में इसके पांच शोरूम हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UGC NET June 2026 Result: यूजीसी नेट ने जारी 84 विषयों की फाइनल आंसर और रिजल्ट, 6 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने दी थी परीक्षा

UGC NET June 2026 Result: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने यूजीसी नेट जून 2026 के रिजल्ट घोषित कर दिए हैं और 84 विषयों के लिए सब्जेक्ट और श्रेणी के हिसाब से कट-ऑफ मार्क्स जारी कर दिए हैं। जो उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे, वे आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर लॉग इन करके अपने रिजल्ट और श्रेणी के हिसाब से कट-ऑफ मार्क्स देख सकते हैं। बता दें, तीन विषयों अंग्रेजी, कॉमर्स ओर सोशियोलॉजी की परीक्षा सितंबर में दोबारा होगी, जिसके बाद इनका रिजल्ट जारी किया जाएगा।

यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा के लिए कुल 7,73,806 कैंडिडेट ने पंजीकरण किया था। इसमें 4,30,195 (55.59%) महिलाएं, 3,43,575 (44.40%) पुरुष और 36 (0.01%) थर्ड-जेंडर कैंडिडेट शामिल थे। यूजीसी नेट जून 2026 की परीक्षा 22, 23, 24, 25, 29, 30 जून और 5 जुलाई को देश भर के 286 शहरों में 655 परीक्षा केंद्रों पर 87 सब्जेक्ट के लिए कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की गई थी। इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी – की परीक्षा 9 और 10 सितंबर को दोबारा होगी।

यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा के 84 विषयों के लिए उम्मीदवारों के प्रश्नपत्र, अस्थायी उत्तर कुंजी और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स 16 अगस्त को जारी किए गए थे। इन पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए उम्मीदवारों को 18 अगस्त तक समय दिया गया था। परीक्षार्थियों द्वारा सबमिट की गई चुनौतियों की विशेषज्ञों ने समीक्षा की, जिसके बाद फाइनल आंसर की को फाइनल किया गया, और परिणाम प्रोसेस किए गए।

एक नजर में रिजल्ट

84 विषयों में परीक्षा के लिए पंजीकृत 7,73,806 उम्मीदवारों में से 6,07,151 उम्मीदवार शामिल हुए।

JRF और असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए क्वालिफाई हुए कैंडिडेट : 4,241

असिस्टेंट प्रोफेसर और PhD में एडमिशन के लिए क्वालिफाई हुए कैंडिडेट : 45,904

सिर्फ PhD के लिए क्वालिफाई हुए कैंडिडेट : 97,434

इन उम्मीदवारों को नहीं दिखेगा स्कोरकार्ड

एनटीए ने कहा कि इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की परीक्षा देने वाले उम्मीदवार अगर यूजीसी नेट जून 2026 का स्कोरकार्ड एक्सेस करने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें “इनवैलिड एप्लीकेशन नंबर/पासवर्ड” मैसेज मिल सकता है। इन उम्मीदवारों का स्कोरकार्ड/रिजल्ट उनकी परीक्षाएं दोबारा होने के बाद ही मिलेगा। यह परीक्षाएं 9 और 10 सितंबर, 2026 को दोबारा आयोजित होंगी।

एजेंसी के आधिकारिक नोटिस में लिखा है, “योग्य उम्मीदवार के पात्रता मानदंड, स्वघोषणा, अलग-अलग दस्तावेज वगैरह को यूजीसी नेट जून 2026 के सूचना बुलेटिन में बताए गए मानकों के हिसाब से संबंधित अधिकारिकयों द्वारा तय प्रक्रिया के हिसाब से वेरिफाई किया जाएगा।”

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नेपाल बाढ़ में जिंदगी बचाने का खतरनाक मिशन, घने कीचड़ और अंधेरी सुरंग के बीच फंसे लोगों तक ऐसे पहुंचे नेपाली सैनिक, वायरल हुआ Video

नेपाल इस समय एक बड़ी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। भोटे कोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। बाढ़ के पानी के साथ आया मलबा और कीचड़ गांवों और इमारतों में फैल गया, जिससे बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग जगहों पर फंस गए। हालात इतने मुश्किल हैं कि कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौती बन गया है। ऐसे समय में नेपाली सेना ने मोर्चा संभालते हुए बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। हेलिकॉप्टर की मदद से ऊंची इमारतों और छतों पर फंसे लोगों को निकाला जा रहा है, जबकि जवान मुश्किल रास्तों से अंदर जाकर भी लोगों की तलाश कर रहे हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन के सामने खराब मौसम, मलबा और दुर्गम इलाका बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इस बीच सामने आए कुछ वीडियो बचाव अभियान की गंभीरता और जवानों की कोशिशों की तस्वीर दिखा रहे हैं।

छतों पर फंसे लोगों के लिए देवदूत बना हेलिकॉप्टर

रेस्क्यू ऑपरेशन के कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें सेना के हेलिकॉप्टर बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते नजर आ रहे हैं। एक वीडियो में हेलिकॉप्टर क्षतिग्रस्त इमारतों के ठीक ऊपर मंडराता दिखाई देता है, जबकि नीचे बाढ़ का मलबा फैला हुआ है। एक अन्य वीडियो में छत पर फंसा एक व्यक्ति लगातार हेलिकॉप्टर की ओर हाथ हिलाकर मदद मांगता दिखाई देता है। इसके बाद जवानों ने उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मुश्किल हालात में सेना का यह ऑपरेशन लोगों की जान बचाने की जद्दोजहद को दिखाता है।

हाइड्रोपावर टनल में फंसे लोगों तक पहुंचे जवान

बाढ़ के बाद रसुवा जिले में अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर की सुरंग के अंदर भी कई लोग फंस गए थे। इनमें मजदूरों के अलावा कुछ पर्यटक भी शामिल थे। सामने आए वीडियो में नेपाली सेना के दो जवान कीचड़ से भरे रास्ते से आगे बढ़ते हुए सुरंग के अंदर जाते दिखाई देते हैं। बाहर मलबे और कीचड़ की मोटी परत के बावजूद जवानों ने अंदर फंसे लोगों तक पहुंचकर उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की।

नेपाल में मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ा

इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में 579 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में सात लोगों की जान गई है। दोनों तरफ 2,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में करीब 1,924 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जबकि तिब्बत में यह संख्या 558 बताई गई है। इनमें 540 से ज्यादा विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

हजारों जवान राहत और बचाव में जुटे

नेपाल की आपदा प्रबंधन अथॉरिटी के अनुसार, राहत और बचाव अभियान में करीब 14,829 सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। अब तक 3,742 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। बाढ़ और मलबे से प्रभावित इलाकों में सेना की टीमें लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच हेलिकॉप्टर और जमीनी टीमें उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जो अब भी कहीं मलबे, सुरंगों या ऊंची इमारतों में फंसे हो सकते हैं।

भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकालने की कोशिश

इस आपदा का असर भारत के नागरिकों पर भी पड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि 149 लोग चीन से नेपाल पहुंच चुके हैं। करीब 400 भारतीय चीन में सुरक्षित बताए गए हैं। वहीं लगभग 320 भारतीयों के अभी भी लापता या संपर्क से बाहर होने की जानकारी है। नेपाल में जारी यह राहत अभियान सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा से लड़ाई नहीं, बल्कि मलबे के बीच जिंदगी की तलाश की लगातार कोशिश है। हर रेस्क्यू के साथ सेना और बचाव दल उन परिवारों के लिए उम्मीद जगा रहे हैं, जो अब भी अपने अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

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How Maruti Suzuki Became India’s Number One CNG Carmaker

How Maruti Suzuki Became India's Number One CNG Carmaker
Number One CNG carmaker Maruti

When Maruti Suzuki introduced its first factory-fitted CNG models in 2010, the fuel had little acceptance among private buyers. Availability was largely restricted to Delhi-NCR, Mumbai-Pune and Gujarat, while the filling network was small and uneven. CNG penetration remained at just 1-2 percent until 2016-17, but Maruti continued to improve the technology and expand its range. It began with affordable cars such as the Alto and Eeco before taking CNG to the WagonR, Swift, Baleno, Dzire and Ertiga. Today, its portfolio includes SUVs such as the Brezza, Fronx, Grand Vitara and Victoris.

Fixing what buyers disliked

In the late 1990s, buyers who wanted a CNG car usually had to convert a petrol model using an aftermarket kit. Most kits were imported, often from Italy or Argentina, and a conversion cost around Rs 30,000-32,000.

As demand grew, some dealers began tying up with local retrofitters. But when these cars developed problems, owners often returned to Maruti workshops even though the company had not supplied or installed the kit. Poorly fitted systems raised concerns about gas leaks and vehicle fires. An aftermarket conversion could also invalidate the manufacturer’s warranty, while the engine and fuel system were not always designed to cope with CNG.

Performance was another weakness. Early conversions resulted in a noticeable drop in power. Some owners would switch to petrol before overtaking or climbing steep roads and returned to CNG once the additional performance was no longer needed.

Factory-fitted systems addressed many of these problems. Engines, valve seats, fuel lines and mounting points were designed to work with CNG. Better calibration reduced the performance loss, while the car retained its manufacturer warranty and could be serviced through Maruti’s dealer network.

The financial case was already strong. Around 2010, CNG cost roughly Rs 20-21 per kg, compared with about Rs 48 per litre for petrol and Rs 38 for diesel. A factory-fitted system added around Rs 45,000-54,000 to the price of the car, but offered better engineering, safety and warranty protection than an aftermarket conversion.

Even so, CNG did not take off immediately. Diesel was widely available, delivered better performance and offered low running costs. In 2013, diesel accounted for around 38 percent of India’s passenger vehicle market, making it the easier choice for many high-mileage users.

The network caught up

India had around 1,200 CNG stations in 2016-17. By March 2026, the network had expanded to about 8,900 stations across roughly 350 cities. This made CNG practical beyond its traditional strongholds. Petrol prices also rose sharply after 2020, crossing Rs 100 per litre in several cities and strengthening the case for switching to a cheaper fuel.

By then, Maruti had already addressed many of the product-related concerns and could respond with a broad factory-fitted portfolio. CNG’s share of Maruti’s new registrations, including private cars and cabs, increased from 14.3 percent in 2021 to 41.2 percent in the first half of 2026. Petrol’s share fell from 76.5 percent to 45.9 percent over the same period. The sharpest jump came between 2023 and 2024, when CNG’s share rose from 24.6 percent to 32 percent.

Commercial vehicles remain important. Cabs account for around 10 percent of Maruti’s cumulative registrations, but contribute more than a quarter of its CNG volumes. However, private buyers now account for the larger part of demand.

“Earlier, if a customer was opting for CNG, the perception was that he was just a very value-conscious customer,” says Maruti Suzuki’s senior executive officer, sales and marketing, Partho Banerjee. “Now, especially with underbody CNG, the profile of customers has changed. They are not only looking for mileage, they also want an aspirational product that feels no different to drive from gasoline.”

CNG moves beyond small cars

The WagonR remains the quintessential CNG hatchback. Its CNG share has risen from 42.5 percent in 2021 to 49.1 percent in the first half of 2026. Nearly every second WagonR buyer now chooses it. CNG is also gaining ground in models that were once overwhelmingly petrol-powered. Its share in the Swift has increased from 1.9 percent to 18 percent, while the Baleno has moved from 2.1 percent to 14.5 percent.

The Dzire has seen an even sharper change. CNG accounted for just 1.7 percent of its registrations in 2021. Its share reached 33.6 percent in H1 2026. 

Adoption is strongest in vehicles that cover longer distances or carry more passengers. CNG’s share of the Ertiga has risen from 39.3 percent to 73.6 percent, while the Eeco has moved from 31 percent to 55.2 percent. Big shifts are now also taking place in the SUV segment, where buyers care as much about design, features and luggage space as they do about mileage.

CNG accounts for 43.4 percent of Brezza registrations, compared with 23.7 percent for its Smart Hybrid powertrain in H1 2026. The Fronx has seen its CNG share rise from 10.9 percent at launch in 2023 to 35.4 percent in the first half of 2026. In the case of the Grand Vitara, it has increased from zero to 23.9 percent.

The Victoris has moved even faster. CNG accounted for 55.2 percent of its registrations in the first half of 2026. Its strong response shows that midsize SUV buyers will accept the fuel when it does not compromise the overall ownership experience. 

Better packaging removes a key compromise

A large cylinder placed across the luggage compartment has long been one of CNG’s biggest drawbacks. Dual-cylinder systems that divide the gas storage between two smaller cylinders positioned lower in the boot, or placing an underbody tank, create a flatter and more usable luggage area.

Maruti’s latest CNG development is the underbody tank on the Victoris and Brezza.

Central to Maruti’s next CNG push is the underbody CNG setup. The newly launched CNG Brezza opts for this setup – just like in the Victoris – where the tank is placed beneath the floor. It does negate the ability to have the spare tyre, but luggage space remains useable with a boot that is pretty much free of intrusions.

“If I don’t compromise on my driving experience, and I don’t lose boot space, and on top of that I reduce my total cost of ownership, then it is ticking all the boxes. Why would I not go for it?” says Banerjee.

Filling the gap left by diesel

Maruti’s exit from diesel in 2020 left a gap for buyers seeking low running costs without moving to an EV. CNG has become the answer. It cannot match a diesel engine’s torque or effortless highway performance, but it can cost substantially less to run than petrol, particularly for buyers covering high monthly distances. The vehicle can also switch to petrol when CNG is unavailable.

CNG will not replace diesel in every situation. Drivers who regularly travel on highways, carry heavy loads or value strong mid-range performance may still prefer diesel where it remains available. But for largely urban use, CNG now delivers much of the economic advantage that once made diesel attractive. The market has moved beyond mileage.

CNG has reached around 20 percent penetration without requiring buyers to completely change the way they use a car. There is no home charger to install, and the vehicle can run on petrol when the gas runs out. But the next stage will require more than savings. Buyers moving onto larger and more expensive vehicles will expect performance, equipment, luggage space and convenience alongside lower running costs.

“Quality, reliability and mileage are now hygiene,” says Banerjee. “You need to give all of that anyway and then still meet their lifestyle expectations.”

With the Victoris establishing CNG in the midsize SUV market and the Brezza addressing the compact SUV space, Maruti is now taking the fuel deeper into India’s largest vehicle segment, and it says there’s more to come.

LPG Price 29 August 2026: घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के नए दाम जारी, जानें दिल्ली समेत पूरे देश का भाव

LPG Price 29 August 2026: 29 अगस्त 2026 को देशभर में घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के दामों को लेकर तेल कंपनियों ने कोई बदलाव नहीं किया है। यानी आज ग्राहकों को सिलेंडर खरीदने के लिए पिछले महीने जितनी ही कीमत चुकानी होगी। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई समेत बड़े शहरों में LPG के मौजूदा रेट फिलहाल स्थिर हैं। घरेलू रसोई गैस की कीमत लंबे समय से लोगों के लिए अहम मुद्दा बनी हुई है, खासकर तब जब महंगाई का असर लगातार घरेलू बजट पर दिखाई दे रहा है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले होटल, रेस्टोरेंट और कारोबारियों की नजर भी कीमतों पर बनी रहती है।

ऐसे में आज LPG के दामों में बदलाव नहीं होने से उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है। दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर ₹942 और मुंबई में ₹941.50 पर उपलब्ध है। जानिए देश के प्रमुख शहरों में आज LPG के क्या रेट हैं।

आपके शहर में LPG सिलेंडर की कीमत कितनी है?

LPG सिलेंडर के दाम हर शहर में अलग-अलग हो सकते हैं। स्थानीय टैक्स, ट्रांसपोर्टेशन और अन्य खर्चों के कारण एक ही घरेलू सिलेंडर की कीमत में शहर के अनुसार अंतर देखने को मिलता है। इसलिए सिलेंडर बुक करने से पहले अपने शहर का ताजा LPG रेट जरूर चेक कर लें।

शहरघरेलू LPG (14.2 किलो)कमर्शियल LPG (19 किलो)
कोलकाता₹968.00₹2,872.50
मुंबई₹941.50₹2,691.50
चेन्नई₹957.50₹2,906.00
गुड़गांव₹950.50₹2,755.00
नोएडा₹939.50₹2,738.00
बैंगलोर₹944.50₹2,821.00
भुवनेश्वर₹968.00₹2,908.00
चंडीगढ़₹951.50₹2,760.00
हैदराबाद₹994.00₹2,985.00
जयपुर₹945.50₹2,765.50
लखनऊ₹979.50₹2,860.50
पटना₹1,031.50₹3,018.00
तिरुवनंतपुरम₹951.00

जून में महंगा हुआ था घरेलू सिलेंडर

घरेलू LPG की कीमत में आखिरी बदलाव जून 2026 में हुआ था। उस समय तेल कंपनियों ने प्रति सिलेंडर ₹29 की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत ₹913 से बढ़कर ₹942 हो गई थी और तब से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

अगस्त में कमर्शियल LPG हुआ था सस्ता

कमर्शियल LPG इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों को 1 अगस्त को राहत मिली थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बाद तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले सिलेंडर के दाम अलग-अलग शहरों में करीब ₹192 से ₹209 तक घटाए थे।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी परेशानी

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर भी दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। 25 अगस्त को इस रास्ते से सिर्फ पांच जहाज गुजरे, जबकि एक दिन पहले यह संख्या सात थी। इस रूट में व्यवधान से तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है।

ओमान तट के पास तेल टैंकर पर हमला

इस बीच ओमान के तट के पास तेल टैंकर AL SALAM II पर अज्ञात मिसाइल या प्रोजेक्टाइल से हमले की सूचना सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में विस्फोट हुआ और आग लग गई। नुकसान के चलते टैंकर आगे यात्रा करने की स्थिति में नहीं है। हमले को लेकर ईरान के IRGC पर संदेह जताया गया है, हालांकि जिम्मेदारी की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

LPG की कीमतों पर आगे भी रहेगी नजर

घरेलू LPG के दाम फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तेल-गैस बाजार और मध्य-पूर्व की स्थिति पर तेल कंपनियों की नजर बनी हुई है। ऐसे में आने वाले समय में LPG कीमतों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Petrol Diesel Price Today: आज सस्ता हुआ या महंगा? जानें पेट्रोल-डीजल का ताजा रेट

नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

farakka barrage

मनीष कुमार, पटना

नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से हुई तबाही के बाद बिहार भी सहम सा गया है। बिहार सरकार ने पश्चिम बंगाल से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने की मांग की है। ALSO READ: टैक्सियों को लेकर क्यों लड़ते रहते हैं भारत के दो राज्य

 

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से कई जिलों में गंगा नदी में जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने की मांग की है। 23 अगस्त को हुई इस बातचीत के 24 घंटे के अंदर बैराज के सभी फाटक खोल दिए गए, जिससे बिहार में नदियों का जलस्तर तेजी से कम हुआ। अब बिहार इस समझौते के नवीकरण की जगह नया समझौता चाहता है, जिसमें बिहार के बाढ़ प्रबंधन और अन्य मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए।

 

फरक्का बैराज का निर्माण 1975 में मुख्य रूप से कोलकाता बंदरगाह और भागीरथी-हुगली जलमार्ग में नौ परिवहन के लिए गहराई बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था। सोच यह थी कि हुगली नदी में पर्याप्त पानी पहुंचा कर कोलकाता बंदरगाह में गाद (सिल्ट) कम किया जाए। कालांतर में यह परियोजना बिहार, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण केंद्र बन गई। ALSO READ: जर्मन और विदेशी कामगारों की कमाई में इतनी बड़ी खाई क्यों?

 

बिहार में बाढ़ की वजह बना फरक्का बैराज

भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को 30 साल के लिए यह जल संधि की गई थी, जिसे फरक्का बैराज संधि कहा जाता है। इसका उद्देश्य दोनों देश के बीच पानी का बंटवारा करना था। पानी की उपलब्धता के अनुसार दोनों के हिस्से तय होते हैं। यह बैराज बंगाल में गंगा नदी पर बनाया गया है, लेकिन इसके कारण गंगा नदी के प्रवाह की गति पीछे की तरफ धीमी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप नदी अपने साथ जो गाद लाती है, वह बैराज के पीछे बिहार में गंगा नदी की तलहटी में जमा हो जाती है।

 

बैराज के कारण गंगा व उसकी सहायक नदियांइस सिल्ट के कारण उथली होती जा रही हैं। मानसून में जब पानी बढ़ता है तो यही उथलापन, बाढ़ का कारण बन जाता है। इससे बिहार को दो तरफा नुकसान हो रहा है। शुष्क मौसम में पानी की कमी तथा मानसून में बाढ़। बिहार का कहना है कि इस बराज को या तो पूरी तरह हटा दिया जाए या फिर ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे गाद का बहाव सुचारू रूप से हो सके। ताकि, बिहार को बाढ़ की समस्या न झेलनी पड़े।

 

गंडक का जलस्तर तीन मीटर तक हो सकता है ऊंचा

इस बीच, बिहार सरकार ने नेपाल में फ्लैश फ्लड की आपदा और गंडक नदी में अचानक जल प्रवाह तेज होने की संभावना को देखते हुए बांधों तथा तटबंधों की 24 घंटे निगरानी का आदेश दिया है। सीमावर्ती छह जिलों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। नेपाल की त्रिशूली नदी का भारी सैलाब गंडक की ओर बढ़ रहा है। इससे नारायणी नदी में भी पानी बढ़ गया है। यही नारायणी नदी बिहार में गंडक नदी कहलाती है।

 

गंडक नदी के जलस्तर में एक से तीन मीटर तक की भारी वृद्धि की आशंका है। जल संसाधन विभाग के अनुसार बुधवार की रात आठ बजे के बाद फ्लैश फ्लड का पानी आना शुरू हुआ और 12 बजे तक जल प्रवाह डेढ़ लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। राहत की बात हालांकि यह रही कि 12.30 बजे यह घटकर 1.42 लाख और एक बजे 1.29 लाख तथा दो 1.04 लाख क्यूसेक रह गया। सुरक्षा के लिहाज से पश्चिम चंपारण जिला स्थित वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। ALSO READ: असम में क्यों हो रहा है इतना निवेश?

 

बिहार के बड़े क्षेत्र में पानी के फैलाव की आशंका

नेपाल से आने वाली ज्यादातर नदियों का बहाव बिहार की ओर ही है। वहीं बिहार में नदियां पहले से ही गाद से भरी हैं, इसलिए इस बार बड़ी आबादी को बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ सकती है। गंगा मुक्ति आंदोलन के संस्थापक ए प्रकाश का कहना है कि हर साल मानसून में नेपाल में होने वाली बारिश का खामियाजा बिहार के 20 जिलों को भुगतना पड़ता है। लेकिन, इसे रोका नहीं जा सकता है, बल्कि इसका प्रभाव कम किया जा सकता है।

 

नदी विशेषज्ञ दिनेश मिश्र कहते हैं, ‘‘नदियों को रोकने की कवायद बेकार है। उन्हें अपनी रौ में बहने देना चाहिए। हमें बांध बनाकर या तटबंधों को ऊंचा कर उन्हें रोकना चाहते हैं। इससे बाढ़ की समस्या का समाधान नहीं होगा। नदी की तलहटी में गाद जमा हो रही है। जब तक गाद प्रबंधन नहीं होगा तब तक समस्या ज्यों की त्यों ही रहेगी।''

 

फरक्का पर तेज हुई राजनीति

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल के बंटवारे को लेकर 30 साल पुराने इस समझौते की अवधि दिसंबर, 2026 में समाप्त हो रही है। अब इसके नवीनीकरण के समय बिहार की सियासत भी गर्म हो गई है। इसे लेकर जेडीयू और आरजेडी, दोनों ने एक दूसरे पर निशाना साधा है। जेडीयू सांसद संजय झा का कहना है कि 1996 में जब केंद्र की संयुक्त मोर्चा सरकार ने बांग्लादेश के साथ यह समझौता किया था, तब लालू प्रसाद यादव केंद्र में काफी प्रभावशाली नेता थे। अगर, उस समय बिहार सरकार ने इस जलसंधि का मजबूती से विरोध किया होता तो राज्य को बीते तीन दशकों से बाढ़ और फिर सूखे की दोहरी मार नहीं झेलनी पड़ती।

 

इस पर पलटवार करते हुए आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद ने सोशल मीडिया में एक बयान जारी कर नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश ने अपने राजनीतिक जीवन में दूरगामी प्रभाव वाले मुद्दों पर कभी ध्यान नहीं दिया। फरक्का के मुद्दे पर उन्होंने हमेशा चुप्पी साधे रखी। लालू ने संसद में अपने एक पुराने भाषण का वीडियो साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इस संधि को देशहित के खिलाफ बताते हुए कैसे इसे रद्द करने की मांग की थी। क्योंकि इसमें बिहार के भविष्य के खतरे को अनदेखा किया गया था।

Petrol Diesel Price Today: आज सस्ता हुआ या महंगा? जानें पेट्रोल-डीजल का ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 29 आगस्त 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

LPG Price Today August 25: गैस सिलेंडर के दाम में फिर आया बड़ा ट्विस्ट!दिल्ली से मुंबई तक जानिए 14.2 KG और कमर्शियल LPG के नए रेट

September Rajyog 2026: 4 राशियों पर सितंबर में होने वाली है पैसों की बारिश, एक साथ 3 दुर्लभ राजयोग बनाएंगे धनवान

September Rajyog 2026: ज्यातिष शास्त्र में ग्रहों का राशि या नक्षत्र परिवर्तन जितना अहम है, उतना ही महत्वपूर्ण होता है ग्रहों का एक-दूसरे के साथ संयोग। यानी जब किसी राशि या नक्षत्र में एक से अधिक ग्रह एक साथ आते हैं, तो ग्रहों का दुर्लभ संयोग बनता है। ग्रहों का यह दुर्लभ मिनल कई बार शुभ और अशुभ योगों का निर्माण भी करता है। इसमें कुछ तो अत्यंत लाभकारी राजयोग भी होते हैं। ऐसा ही एक ज्योतिषीय संयोग हमें सितंबर 2026 में देखने को मिलेगा। इस महीने में ग्रहों के राशि परिवर्तन और गोचर से 3 बड़े और दुर्लभ राजयोग बन रहे हैं।

इस महीने में कई बड़े ग्रह अपनी चाल में परिवर्तन करेंगे, जिससे मालव्य राजयोग, भद्रा राजयोग और लक्ष्मी नारायण राजयोग का एक साथ दुर्लभ निर्माण होगा। ग्रहों के इस बड़े हेरफेर और शुभ योगों के बनने से 4 राशियों के जीवन में तरक्की, मान-सम्मान और धन-धान्य की बारिश होगी। आइए जानते हैं कि यह सभी राजयोग किन राशियों के लिए शुभ माने जा रहे हैं। सबसे पहले जानते हैं इन राजयोगों के बारे में

3 प्रमुख राजयोग

भद्र राजयोग (7 सितंबर 2026): ग्रहों के राजकुमार बुध देव अपनी उच्च राशि कन्या में प्रवेश करेंगे। इससे ‘भद्र राजयोग’ बनेगा, जो बुद्धि, व्यापार, बैंकिंग और निर्णय क्षमता में वृद्धि कराता है।

लक्ष्मी नारायण राजयोग (7 सितंबर 2026): कन्या या तुला राशि में शुक्र और बुध ग्रह की शुभ युति से ‘लक्ष्मी नारायण राजयोग’ बनेगा, जो धन-धान्य, करियर में वृद्धि और आर्थिक समृद्धि का कारक माना जाता है।

मालव्य राजयोग (18 सितंबर 2026): शुक्र देव अपनी स्वराशि तुला में प्रवेश करेंगे। शुक्र के अपनी राशि में रहने से पंचमहापुरुष योगों में शामिल ‘मालव्य राजयोग’ का निर्माण होता है, जो भौतिक सुख, संपत्ति और ऐश्वर्य दिलाता है।

इन 4 राशियों को होगा फायदा

कन्या राशि : आपकी राशि में बुध के आने से भद्रा और लक्ष्मी नारायण राजयोग दोनों का प्रभाव रहेगा। आर्थिक स्थिति में जबरदस्त सुधार होगा। फंसा हुआ या अटका पैसा वापस मिल सकता है। बौद्धिक क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति मजबूत होगी। समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

तुला राशि : शुक्र का आपकी ही राशि में गोचर ‘मालव्य राजयोग’ बनाएगा, जो आपके लिए वरदान समान रहेगा। बिजनेस में बड़ा मुनाफा होगा। नए व्यावसायिक संबंध बनेंगे। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन का तोहफा मिल सकता भौतिक सुख-सुविधाओं की वस्तुओं में बढ़ोतरी होगी।

मकर राशि : मकर राशि के जातकों के लिए सितंबर का महीना भाग्योदय लेकर आ रहा है। लंबे समय से रुके हुए काम तेजी से पूरे होंगे। विदेश यात्रा या उच्च शिक्षा के योग बनेंगे। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी और आय में लगातार वृद्धि देखने को मिलेगी।

कुंभ राशि : कुंभ राशि वालों के लिए यह त्रिग्रही और राजयोगों का संयोग अत्यंत शुभ रहने वाला है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को मनचाहा अवसर मिलेगा। अधिकारियों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा। घर-परिवार में मांगलिक कार्य संपन्न हो सकते हैं और दांपत्य जीवन में मिठास आएगी।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Bhadra Rajyog 2026: 7 सितंबर को अपनी उच्च राशि में गोचर करेंगे बुध और बनाएंगे भद्रा राजयोग, 5 राशियों पर बरसेगा इतना पैसा कि भर जाएगी तिजोरी

Audi Q3 Sportback long term review, 11,500km report

Audi Q3 Sportback long term review, 11,500km report
Audi Q3

Okay, first, a clarification: that’s not me hooning around in the Audi Q3 Sportback. That’s a certain Mr Saumil Shah, who borrowed the car from me for ‘work’ – in the biggest air quotes imaginable.

The Q3 Sportback was the support car for our Lamborghini Sterrato shoot at Nanoli Speedway. And, naturally, a muddy track with acres of runoff was an opportunity that proved far too tempting for him to resist. Fun cars do have a way of making you do slightly silly things when the right opportunity presents itself. And I’d definitely put the Audi Q3 in that category. It’s got a peppy engine, neat handling and even good ground clearance, all wrapped within a compact footprint. As someone who loves smaller cars, the Q3 is right up my alley. 

It might not look cutting-edge, but buttons and knobs make the dash very user-friendly.

I’ll admit, life with a luxury car can be a little stressful on Mumbai’s congested roads, where you’re sharing whatever road space is left after all the construction with cars, bikes, battle-hardened buses and everything in between. But the Q3 takes a lot of that stress away. The small size and elevated seating make it very easy to place, and what makes things more relaxing still is the excellent noise insulation. It’s no EV (the engine does get vocal in a good way when rushed), but the Q3 does cut out a lot of the cacophony outside. Another highlight on the Q3 is ride comfort. It makes light work of bad roads with the chunky tyres taking up a lot of the initial impact. Just wish the Q3 got snazzier wheels. The boring alloys undo much of the glamour of the Sportback’s SUV-coupé shape. Gun to my head, I’d still take the standard Q3 with its more conventional derriere.    

The Sportback has its fans, but I’d have the conventional Q3.

In cars with ADAS, my SOP is to first check if auto-braking functions are off. The Q3 doesn’t have ADAS, but I do still have a pre-flight check. And that is to ensure Automatic Parking Sensor Activation is turned off. The Q3’s overly sensitive proximity sensors seem to react to absolutely everything around the car and the constant beeping can get alarming in heavy traffic. Of course, connecting my phone via a wire is also a requirement because there’s no wireless connectivity in the Audi.  

Constant warnings from over-sensitive proximity sensors an irritant. Best kept off in traffic.

Thing is, I don’t want to overplay these small irritants. Because, in the big picture, the Q3 remains a charming option for buyers looking for an entry luxury car. More so now with some great deals going on the model as it makes way for the next-gen Q3 that comes later this year. Having lived with one, I know I won’t get bored of this Q3 for a long time to come. Heck, maybe I need to scout around for a good deal myself. 

Audi Q3 Sportback 40 TFSI Technology test data
Odometer 11,306km 
Price Rs 54.2 lakh (ex-showroom, Mumbai)  
Economy 7.9kpl
Maintenance cost Nil
Faults None
Previous reports June 2026