वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान हूती विद्रोहियों के हमले के डर से बंकरों वाले महल में रहने को मजबूर हैं। उनके पास करोड़ों का महल है लेकिन बढ़ते हमलों के डर से उन्हें बार-बार अपना ठिकाना बदलना पड़ रहा है। बीते कुछ समय में हूतियों ने सऊदी पर हमले बढ़ा दिए हैं। इसी महीने रियाद एयरपोर्ट को 20 बार निशाना बनाया गया। इसके चलते एयरपोर्ट बंद है और उड़ाने रद्द हैं। प्रिंस सलमान की सुरक्षा के लिए चुने गए गार्ड तैनात रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद बिन सलमान की सुरक्षा के लिए खास तौर पर चुने गए गार्ड तैनात हैं। हूती विद्रोहियों के हमलों के खतरे को देखते हुए सऊदी अरब अपने शाही महलों और तेल ठिकानों की सुरक्षा भी बढ़ा रहा है। इसके लिए मिसाइलों को हवा में रोकने वाले एयर डिफेंस सिस्टम को अलग-अलग जगहों पर तैनात किया जा रहा है। इस महीने सऊदी के एयरपोर्ट पर हुए बड़े हमले 6 अक्टूबर: जजान और नजरान के एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया। खामिस मुशैत की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को सऊदी एयर डिफेंस ने रोकने का दावा किया। 7 अक्टूबर: रियाद और अभा के एयरपोर्ट पर हमले हुए। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, तीन विदेशी नागरिकों की मौत हुई और 36 लोग घायल हुए। 8 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर एक और हमला हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, तीन सऊदी नागरिकों की मौत हुई। सरकारी एयरलाइन सऊदिया का एक विमान भी क्षतिग्रस्त हुआ। 10 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले में 1 भारतीय नागरिक समेत 13 लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए। इसके बाद एयरपोर्ट पर उड़ानें रोकनी पड़ीं। 11 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट के पर एक मिसाइल या ड्रोन गिरा। एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए। 2015 से जारी है सऊदी और हूतियों की लड़ाई यमन में हूतियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब ने कई देशों के साथ मिलकर उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। सऊदी अरब चाहता था कि यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार दोबारा सत्ता में आए और हूतियों का कब्जा खत्म हो। इसके बाद कई साल तक यमन में हवाई हमले होते रहे। लेकिन हूतियों को पूरी तरह पीछे धकेलने में सऊदी गठबंधन कामयाब नहीं हो पाया। हूती अब भी यमन के बड़े हिस्से में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। उनकी लड़ाई का असर अब सऊदी अरब की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। क्राउन प्रिंस सलमान की आलीशान जिंदगी से जुड़े किस्से 41 साल के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की आलीशान जिंदगी से जुड़े कई किस्से मशहूर हैं। कहीं उन्होंने करोड़ों रुपए खर्च कर पार्टी की, तो कहीं हजारों करोड़ की पेंटिंग, हवेली और यॉट से उनका नाम जुड़ा। 1. मालदीव में एक महीने के लिए 474 करोड़ रुपए में लिया रिसॉर्ट लेखक जस्टिन शेक की किताब ‘ब्लड एंड ऑयल’ के मुताबिक, जुलाई 2015 में सलमान ने मालदीव का वेला रिसॉर्ट एक महीने के लिए करीब 474 करोड़ रुपए में किराए पर लिया था। यहां पिटबुल, साइ और डीजे अफ्रोजैक ने परफॉर्म किया। एक रात सलमान खुद मंच पर पहुंचे और अपने पसंदीदा गाने बजाने लगे। पार्टी की खबर बाहर आने के बाद इसे एक हफ्ते के भीतर खत्म कर दिया गया। 2. 4268 करोड़ की पेंटिंग की खरीद से जुड़ा नाम लियोनार्डो दा विंची की पेंटिंग ‘साल्वेटर मुंडी’ 2017 में करीब 4268 करोड़ रुपए में बिकी थी। इसे दुनिया की सबसे महंगी पेंटिंग में गिना जाता है। इस पेंटिंग की खरीद से सलमान का नाम भी जुड़ा था। हालांकि, अबू धाबी के संस्कृति और पर्यटन विभाग ने दावा किया था कि पेंटिंग उसने खरीदी है। 3. फ्रांस में 2848 करोड़ की हवेली सलमान ने 2015 में फ्रांस के वर्साय में करीब 2848 करोड़ रुपए की एक आलीशान हवेली खरीदी थी। 57 एकड़ में फैली यह हवेली बाहर से पुराने शाही महल जैसी दिखती है। इसमें सिनेमा हॉल, स्विमिंग पूल और शानदार सजावट है। हवेली में एक ऐसा कमरा भी है, जहां पानी के बीच बैठकर ऊपर तैरती मछलियों को देखा जा सकता है। यहां के फव्वारे, लाइटें और एसी तक आईफोन से चलाए जा सकते हैं। 4. आधे घंटे यॉट देखी, पसंद आई तो दोगूनी कीमत में खरीदी रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2015 में फ्रांस में छुट्टियां मनाते समय सलमान को ‘सेरेन’ नाम की सुपरयॉट पसंद आ गई। उन्होंने करीब आधे घंटे तक इसे देखा और फिर लगभग 5472 करोड़ रुपए में खरीद लिया। इस यॉट में दो हेलीपैड हैं। इसके अलावा, इसमें एक खास कमरा भी है, जहां से पानी के अंदर का नजारा देखा जा सकता है। 5. नियोम के महल में निजी समुद्र तट और 10 हेलीपैड सऊदी अरब के नियोम में लाल सागर के किनारे सलमान का एक आलीशान महल भी है। यहां निजी समुद्र तट, बड़े-बड़े बगीचे और गोल्फ कोर्स हैं। महल में हेलिकॉप्टर उतारने के लिए 10 हेलीपैड भी बनाए गए हैं। ———————— ये खबर भी पढ़ें… हूती विद्रोहियों ने यमन के राष्ट्रपति भवन पर हमला किया:5 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, 4 की मौत; प्रधानमंत्री मौजूद थे, बाल-बाल बचे यमन के अदन शहर में हूती विद्रोहियों ने राष्ट्रपति भवन पर 5 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हमले के समय प्रधानमंत्री शाया मोहसेन अल-जिंदानी और सरकार के कई मंत्री परिसर में मौजूद थे, सभी सुरक्षित हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

नई दिल्ली। सीपीआई एमएल के छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने जमानत देने के लिए बॉन्ड भरने के पुलिस के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। नेहा बोरा शुक्रवार, 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क के तिरंगा मार्च में शामिल होने गई थीं, जहां उनको हिरासत में ले लिया गया था। शनिवार की सुबह पांच बजे उनको छोड़ा गया लेकिन उससे पहले उनसे शांति बनाए रखने का एक बॉन्ड भरवाया गया।
गौरतलब है कि इसी तरह के बॉन्ड भर कर 11 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका हिरासत से छूटे थे। इन तीनों को 10 अक्टूबर को इंदिरा गांधी अतंरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से हिरासत में लिया गया था। बाद में बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका फिर से हिरासत में लिए गए। दोनों छह दिन से जेल में बंद हैं।
बहरहाल, नेहा बोरा ने बॉन्ड भरवाने की पुलिस की कार्रवाई को चुनौती दी है। बताया जा रहा है कि वे हाई कोर्ट में इस मामले में जल्दी सुनवाई की अपील कर सकती हैं। परंतु दशहरा की वजह से इस हफ्ते हाई कोर्ट में छुट्टी है। पुलिस के बॉन्ड को चुनौती देने के लिए वे सोमवार को अदालत पहुंचीं।
रूस से करीब 5 साल से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस अमेरिका के हथियारों और खुफिया जानकारी के दम पर यूक्रेनी सेना रूसी हमलों का मुकाबला कर रही है, उसी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ट्रम्प ने महज एक सप्ताह में 4 ऐसे कदम उठाए, जिनसे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गईं। अब सवाल है कि अगर ट्रम्प ने यूक्रेन को सैन्य मदद और खुफिया जानकारी देना बंद कर दिया, तो जेलेंस्की की सेना का क्या होगा? क्या यूक्रेन अमेरिकी मदद के बिना रूस का मुकाबला कर पाएगा? और ट्रम्प के बदले रुख से पुतिन को कितना फायदा मिल सकता है? 9 अक्टूबर: डीजल की बढ़ी कीमतों के लिए यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार ठहराया ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध को अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह बताया। इसके बाद उन्होंने रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी। उनका कहना था कि इससे ईंधन की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि रूस तेल और गैस की बिक्री से बड़ी कमाई करता है। इस कमाई से उसे युद्ध का खर्च उठाने में भी मदद मिलती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से मॉस्को को आर्थिक फायदा हो सकता है। 10 अक्टूबर: जेलेंस्की से कहा- नया राष्ट्रपति चुनो अगले दिन ट्रम्प ने सीधे जेलेंस्की के नेतृत्व पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए, जो रूस के साथ समझौता करके युद्ध खत्म कर सके। ट्रम्प का आरोप था कि जेलेंस्की के पास युद्ध खत्म करने के कई मौके थे, लेकिन उन्होंने उनका फायदा नहीं उठाया। उनका कहना था कि यूक्रेन के राष्ट्रपति को रूस के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। 11 अक्टूबर: जेलेंस्की से बात किए बिना युद्धविराम का ऐलान तीसरे दिन ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए युद्धविराम का ऐलान किया। ऊर्जा ठिकानों में बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी और ईंधन से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण ढांचे शामिल होते हैं। रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले करते रहे हैं। इन हमलों से बिजली आपूर्ति, ईंधन की उपलब्धता और सैन्य अभियानों पर असर पड़ता है। लेकिन ट्रम्प के ऐलान के बाद विवाद खड़ा हो गया। जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें इस समझौते की पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने साफ किया कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तभी रोकेगा, जब रूस भी यूक्रेन पर ऐसे हमले बंद करेगा। 13 अक्टूबर: स्टारलिंक सर्विस की स्पीड कम की यूक्रेन जिस इंटरनेट से अपने तेज रफ्तार ड्रोन उड़ा रहा था और रूस में हमले कर रहा था, उस पर अचानक स्पीड लॉक लगा दिया गया। पहले ये 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करते थे। लॉक लगने के बाद इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा रह गई। जैसे ही कोई ड्रोन इस रफ्तार से तेज हुआ, उस पर लगा इंटरनेट सिग्नल कट गया और ड्रोन गिरने लगा। जेलेंस्की ने इसका जिम्मेदार मस्क को बताया। बाद में मस्क ने इस पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह अमेरिकी सरकार कर रही है। अमेरिका ने मदद रोक दी तो यूक्रेन का क्या होगा? 1. मिसाइल हमलों की चेतावनी मिलने में दिक्कत: अमेरिका की खुफिया जानकारी यूक्रेन को रूसी मिसाइलों के हमलों के बारे में पहले से आगाह करने में मदद करती है। इससे सैनिकों और आम नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचने का समय मिलता है। अमेरिकी जानकारी बंद होने पर यह व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। 2. पैट्रियट मिसाइलों की कमी: यूक्रेन पैट्रियट मिसाइलों की मदद से रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इनकी आपूर्ति रोक देता है, तो यूक्रेन के शहरों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करना और मुश्किल हो सकता है। 3. सैन्य अभियानों पर असर: अमेरिकी संचार तकनीक में रुकावट आने से ड्रोन के जरिए निगरानी और हमले करने, युद्ध के मैदान में सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और हमलों की योजना बनाने में मुश्किल होगी। 4. रूस पर दबाव बनाने की रणनीति कमजोर: यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करके रूस की कमाई और युद्ध क्षमता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इन हमलों का विरोध करता है और रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत देता है, तो यूक्रेन की रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी मदद बंद होते ही यूक्रेन युद्ध हार जाएगा। यूक्रेन ने अपने देश में हथियारों का उत्पादन बढ़ाया है और यूरोपीय देश भी उसे सैन्य सहायता देते हैं। लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी और कुछ खास हथियारों का पूरा विकल्प तैयार करना आसान नहीं होगा। ट्रम्प के फैसलों से रूस को क्या फायदा? रूस के लिए सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ने से कीव पर दबाव बढ़ेगा। अगर यूक्रेन को खुफिया जानकारी और हथियार कम मिलते हैं, तो उसे रूसी हमलों का मुकाबला करने में ज्यादा मुश्किल हो सकती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से रूस को आर्थिक फायदा भी हो सकता है। वहीं, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दबाव यूक्रेन की उस रणनीति को कमजोर कर सकता है, जिसके जरिए वह रूस की युद्ध क्षमता पर चोट करना चाहता है। ट्रम्प का जेलेंस्की का साथ छोड़ने की वजह क्या है? 1. युद्ध खत्म करने के लिए यूक्रेन पर दबाव: ट्रम्प चाहते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच जल्द समझौता हो। इसके लिए वे जेलेंस्की से रियायतें देने को कह रहे हैं। 2. रूस से रिश्ते सुधारने की कोशिश: ट्रम्प रूस के साथ बातचीत और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी मदद पर असर पड़ने की आशंका है। 3. अमेरिका में तेल की कीमतें घटाना: यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज ट्रम्प ने कहा कि इन हमलों से डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। वे रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतें कम करना चाहते हैं। 4. पुतिन से समझौते की कोशिश: ट्रम्प ने रूस से डीजल कारोबार की अनुमति देने और जेलेंस्की पर हमले रोकने का दबाव बनाने जैसे कदम उठाए हैं। इससे रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है, जबकि यूक्रेन की स्थिति कमजोर पड़ने की आशंका है। —————————
यह खबर भी पढ़ें… मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड घटाई:रूस के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर असर
अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
रूस से करीब 5 साल से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस अमेरिका के हथियारों और खुफिया जानकारी के दम पर यूक्रेनी सेना रूसी हमलों का मुकाबला कर रही है, उसी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ट्रम्प ने महज एक सप्ताह में 4 ऐसे कदम उठाए, जिनसे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गईं। अब सवाल है कि अगर ट्रम्प ने यूक्रेन को सैन्य मदद और खुफिया जानकारी देना बंद कर दिया, तो जेलेंस्की की सेना का क्या होगा? क्या यूक्रेन अमेरिकी मदद के बिना रूस का मुकाबला कर पाएगा? और ट्रम्प के बदले रुख से पुतिन को कितना फायदा मिल सकता है? 9 अक्टूबर: डीजल की बढ़ी कीमतों के लिए यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार ठहराया ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध को अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह बताया। इसके बाद उन्होंने रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी। उनका कहना था कि इससे ईंधन की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि रूस तेल और गैस की बिक्री से बड़ी कमाई करता है। इस कमाई से उसे युद्ध का खर्च उठाने में भी मदद मिलती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से मॉस्को को आर्थिक फायदा हो सकता है। 10 अक्टूबर: जेलेंस्की से कहा- नया राष्ट्रपति चुनो अगले दिन ट्रम्प ने सीधे जेलेंस्की के नेतृत्व पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए, जो रूस के साथ समझौता करके युद्ध खत्म कर सके। ट्रम्प का आरोप था कि जेलेंस्की के पास युद्ध खत्म करने के कई मौके थे, लेकिन उन्होंने उनका फायदा नहीं उठाया। उनका कहना था कि यूक्रेन के राष्ट्रपति को रूस के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। 11 अक्टूबर: जेलेंस्की से बात किए बिना युद्धविराम का ऐलान तीसरे दिन ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए युद्धविराम का ऐलान किया। ऊर्जा ठिकानों में बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी और ईंधन से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण ढांचे शामिल होते हैं। रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले करते रहे हैं। इन हमलों से बिजली आपूर्ति, ईंधन की उपलब्धता और सैन्य अभियानों पर असर पड़ता है। लेकिन ट्रम्प के ऐलान के बाद विवाद खड़ा हो गया। जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें इस समझौते की पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने साफ किया कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तभी रोकेगा, जब रूस भी यूक्रेन पर ऐसे हमले बंद करेगा। 13 अक्टूबर: स्टारलिंक सर्विस की स्पीड कम की यूक्रेन जिस इंटरनेट से अपने तेज रफ्तार ड्रोन उड़ा रहा था और रूस में हमले कर रहा था, उस पर अचानक स्पीड लॉक लगा दिया गया। पहले ये 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करते थे। लॉक लगने के बाद इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा रह गई। जैसे ही कोई ड्रोन इस रफ्तार से तेज हुआ, उस पर लगा इंटरनेट सिग्नल कट गया और ड्रोन गिरने लगा। जेलेंस्की ने इसका जिम्मेदार मस्क को बताया। बाद में मस्क ने इस पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह अमेरिकी सरकार कर रही है। अमेरिका ने मदद रोक दी तो यूक्रेन का क्या होगा? 1. मिसाइल हमलों की चेतावनी मिलने में दिक्कत: अमेरिका की खुफिया जानकारी यूक्रेन को रूसी मिसाइलों के हमलों के बारे में पहले से आगाह करने में मदद करती है। इससे सैनिकों और आम नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचने का समय मिलता है। अमेरिकी जानकारी बंद होने पर यह व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। 2. पैट्रियट मिसाइलों की कमी: यूक्रेन पैट्रियट मिसाइलों की मदद से रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इनकी आपूर्ति रोक देता है, तो यूक्रेन के शहरों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करना और मुश्किल हो सकता है। 3. सैन्य अभियानों पर असर: अमेरिकी संचार तकनीक में रुकावट आने से ड्रोन के जरिए निगरानी और हमले करने, युद्ध के मैदान में सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और हमलों की योजना बनाने में मुश्किल होगी। 4. रूस पर दबाव बनाने की रणनीति कमजोर: यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करके रूस की कमाई और युद्ध क्षमता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इन हमलों का विरोध करता है और रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत देता है, तो यूक्रेन की रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी मदद बंद होते ही यूक्रेन युद्ध हार जाएगा। यूक्रेन ने अपने देश में हथियारों का उत्पादन बढ़ाया है और यूरोपीय देश भी उसे सैन्य सहायता देते हैं। लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी और कुछ खास हथियारों का पूरा विकल्प तैयार करना आसान नहीं होगा। ट्रम्प के फैसलों से रूस को क्या फायदा? रूस के लिए सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ने से कीव पर दबाव बढ़ेगा। अगर यूक्रेन को खुफिया जानकारी और हथियार कम मिलते हैं, तो उसे रूसी हमलों का मुकाबला करने में ज्यादा मुश्किल हो सकती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से रूस को आर्थिक फायदा भी हो सकता है। वहीं, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दबाव यूक्रेन की उस रणनीति को कमजोर कर सकता है, जिसके जरिए वह रूस की युद्ध क्षमता पर चोट करना चाहता है। ट्रम्प का जेलेंस्की का साथ छोड़ने की वजह क्या है? 1. युद्ध खत्म करने के लिए यूक्रेन पर दबाव: ट्रम्प चाहते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच जल्द समझौता हो। इसके लिए वे जेलेंस्की से रियायतें देने को कह रहे हैं। 2. रूस से रिश्ते सुधारने की कोशिश: ट्रम्प रूस के साथ बातचीत और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी मदद पर असर पड़ने की आशंका है। 3. अमेरिका में तेल की कीमतें घटाना: यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज ट्रम्प ने कहा कि इन हमलों से डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। वे रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतें कम करना चाहते हैं। 4. पुतिन से समझौते की कोशिश: ट्रम्प ने रूस से डीजल कारोबार की अनुमति देने और जेलेंस्की पर हमले रोकने का दबाव बनाने जैसे कदम उठाए हैं। इससे रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है, जबकि यूक्रेन की स्थिति कमजोर पड़ने की आशंका है। —————————
यह खबर भी पढ़ें… मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड घटाई:रूस के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर असर
अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
UP Holiday List 2026: त्योहारों के बीच उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को लगातार तीन दिन की छुट्टी मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महानवमी के मौके पर 19 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का फैसला लिया है। वहीं, रविवार की साप्ताहिक छुट्टी और मंगलवार को विजयादशमी की छुट्टी पहले से तय है। ऐसे में अब सरकारी दफ्तर लगातार तीन दिन बंद रहेंगे।
राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने 2026 की छुट्टियों की पहले जारी की गई सूची में बदलाव को लेकर आदेश जारी किया है। हालांकि, पुराने आदेश की बाकी सभी बातें पहले की तरह लागू रहेंगी।
बता दें कि शिक्षकों और कर्मचारियों के संगठनों ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर महानवमी पर छुट्टी देने की मांग की थी। इससे पहले राज्य सरकार ने 20 अक्टूबर को महानवमी और विजयादशमी, दोनों त्योहारों के लिए एक ही दिन की छुट्टी घोषित की थी।
दफ्तर कब तक बंद रहेंगे?
| तारीख | दिन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|---|
| 18 अक्टूबर | रविवार | बंद | साप्ताहिक छुट्टी (महाअष्टमी) |
| 19 अक्टूबर | सोमवार | बंद | नए आदेश के तहत महानवमी की सार्वजनिक छुट्टी |
| 20 अक्टूबर | मंगलवार | बंद | पहले से घोषित विजयादशमी/दशहरा की छुट्टी |
| 21 अक्टूबर | बुधवार | खुलेंगे | सरकारी दफ्तर दोबारा खुलेंगे |
क्या योगी सरकार ने पहली बार किसी त्योहार की छुट्टी बढ़ाई है?
नहीं। इस साल की शुरुआत में, राज्य सरकार ने 26 और 27 मार्च को राम नवमी के मौके पर दो दिन की छुट्टी की घोषणा की थी, और 15 जनवरी को मकर संक्रांति के लिए सार्वजनिक अवकाश था। अक्टूबर 2024 में, सरकार ने नवमी के दिन छुट्टी घोषित की।
अलग-अलग सरकारों के दौरान यूपी में छुट्टियों को लेकर क्या बदलाव आए हैं?
राज्य सरकारें पहले भी अपनी छुट्टियों की सूची का इस्तेमाल एक राजनीतिक संकेत देने के लिए करती रही हैं। मई 2007 में मायावती सरकार ने 9 अक्टूबर को-जो बीएसपी संस्थापक कांशी राम की पुण्यतिथि है-छुट्टी घोषित की थी। हालांकि, अक्टूबर 2012 में अखिलेश यादव सरकार ने इस छुट्टी को खत्म कर दिया।
बता दें कि सपा सरकार ने महर्षि कश्यप और निषादराज जयंती, अजमेर उर्स, तथा चंद्रशेखर और महाराणा प्रताप की जयंती पर भी छुट्टियां घोषित की थीं।
वहीं अप्रैल 2017 में, योगी कैबिनेट ने 15 छुट्टियां रद्द कर दीं थी, जिनमें चेटी चंड, परशुराम जयंती, छठ पूजा और वाल्मीकि जयंती शामिल थीं। सरकार का कहना था कि स्कूलों को इन महापुरुषों के बारे में पढ़ाना चाहिए, न कि उनके नाम पर छुट्टी देनी चाहिए।
| सरकार | छुट्टी | फैसला | समय | किससे संबंधित |
|---|---|---|---|---|
| मायावती (BSP) | कांशीराम की पुण्यतिथि (9 अक्टूबर) | नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत छुट्टी घोषित | मई 2007 | बहुजन समाज के प्रमुख नेता |
| मायावती (BSP) | कांशीराम की जयंती (15 मार्च) | यूपी की छुट्टियों की सूची में शामिल | 2012 तक | बहुजन समाज के प्रमुख नेता |
| अखिलेश यादव (SP) | कांशीराम की पुण्यतिथि (9 अक्टूबर) | छुट्टी रद्द की | अक्टूबर 2012 | BSP सरकार के फैसले में बदलाव |
| अखिलेश यादव (SP) | महर्षि कश्यप और निषादराज जयंती (5 अप्रैल) | छुट्टी घोषित की | 2012–2017 | धार्मिक और सामुदायिक महत्व |
| अखिलेश यादव (SP) | अजमेर गरीब नवाज उर्स | छुट्टी घोषित की | 2012–2017 | धार्मिक महत्व |
| अखिलेश यादव (SP) | चंद्रशेखर जयंती (17 अप्रैल) और महाराणा प्रताप जयंती (9 मई) | छुट्टी घोषित की | 2012–2017 | महापुरुषों की जयंती |
| योगी आदित्यनाथ (BJP) | चेती चंद, परशुराम जयंती, अजमेर उर्स, जमात-उल-विदा, विश्वकर्मा पूजा, वाल्मीकि जयंती, छठ पूजा और ईद-ए-मिलाद समेत 15 छुट्टियां | छुट्टियां रद्द कीं | अप्रैल 2017 | त्योहार और जयंती |
| योगी आदित्यनाथ (BJP) | महानवमी (11 अक्टूबर) | छुट्टी घोषित की | 2024 | धार्मिक त्योहार |
| योगी आदित्यनाथ (BJP) | मकर संक्रांति (15 जनवरी) | छुट्टी घोषित की | 2026 | धार्मिक त्योहार |
| योगी आदित्यनाथ (BJP) | रामनवमी (26–27 मार्च) | दो दिन की छुट्टी घोषित की | 2026 | धार्मिक त्योहार |
| योगी आदित्यनाथ (BJP) | महानवमी (19 अक्टूबर) | छुट्टी घोषित की | 2026 | धार्मिक त्योहार |
क्या योगी ने नवरात्रि के दौरान कुछ और भी कहा?
छुट्टी का यह आदेश नवरात्रि के छठे दिन आया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने महिलाओं की शक्ति के बारे में एक संदेश भी दिया। उन्होंने इस संदेश के जरिए लड़कियों और खेलों के क्षेत्र में अपनी सरकार के कामकाज को सामने रखा।
मां कात्यायनी को समर्पित इस दिन, योगी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने देवी को महिलाओं के साहस, संकल्प और वीरता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “सभी बाधाओं और राक्षसी प्रवृत्तियों का नाश करने वाली मां कात्यायनी, महिलाओं के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अजेय वीरता का प्रतीक हैं।”
उन्होंने दावा किया कि 2017 से पहले, “राज्य में डर और अराजकता का माहौल था, जहां बेटियों के सपनों को दबा दिया जाता था, उनका आत्मविश्वास कुचल दिया जाता था और मौकों की कमी के कारण उनकी प्रतिभा मुरझा जाती थी।”
सीएम योगी ने कहा कि खेल के मैदान माफियाओं के नियंत्रण में थे, और लड़कियों के सपनों को उड़ान मिलने के बजाय, उन्हें “चार दीवारों के भीतर कैद” कर दिया गया था।
उन्होंने कहा, “पिछले साढ़े नौ वर्षों में, राज्य में बदलाव का एक नया अध्याय लिखा गया है। डर की जगह सुरक्षा ने ले ली है, उपेक्षा की जगह प्रोत्साहन ने, और संसाधनों की कमी की जगह खेल सुविधाओं के विस्तार ने ले ली है।”
योगी ने खेलों से जुड़ी किन सुविधाओं का जिक्र किया?
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब लड़कियों के पास अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए एक मजबूत आधार है, जिसमें “गांव के खेल के मैदानों और ब्लॉक-स्तरीय मिनी स्टेडियमों से लेकर जिला स्टेडियम, मंडल स्तरीय खेल कॉलेज और मेरठ में स्थित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय” शामिल हैं।
उन्होंने ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को मिलने वाले लाखों-करोड़ों रुपये के नकद पुरस्कारों और खिलाड़ियों की सीधी भर्ती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये चीजें प्रतिभा को बढ़ावा देती हैं, उपलब्धियों का सम्मान करती हैं और खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाती हैं।
मुख्यमंत्री ने किन महिला खिलाड़ियों के नाम गिनाए?
सीएम योगी आदित्यनाथ ने एथलेटिक्स में पारुल चौधरी, प्रियंका गोस्वामी, प्राची चौधरी और अन्नू रानी; जूडो में अस्मिता डे; क्रिकेट में दीप्ति शर्मा और मेघना सिंह; हॉकी में वंदना कटारिया; और कुश्ती में दिव्या काकरान का नाम लिया। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में उनके प्रदर्शन ने भारत और उत्तर प्रदेश, दोनों का मान बढ़ाया है।
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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लेकर उनका तिरंगा मार्च रोक दिया। दीपके अपने समर्थकों के साथ शाम पांच बजे के करीब कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने जा रहे थे। लेकिन पुलिस ने वहां पहुंचने से पहले ही उनको हिरासत में ले लिया गया। हालांकि उनके कुछ समर्थक तिरंगा लेकर सेंट्रल पार्क पहुंच गए थे और वहां तिरंगा फहराया। सीपीआई माले के छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। सीजेपी ने देर शाम कहा कि दीपके को दिल्ली पुलिस किसी अज्ञात जगह ले गई है।
दिल्ली पुलिस ने डेढ़ सौ अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया है। दीपके को छह दिन में दूसरी बार दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इससे पहले 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए आए दीपके को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर ही हिरासत में ले लिया गया था। एक दिन बाद 11 अक्टूबर को दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका एक बॉन्ड भर कर रिहा हुए थे। पांच दिन बाद उनको फिर से हिरासत में लिया गया। दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी ने इसे अघोषित आपातकाल बताया।
गौरतलब है कि सीजेपी का तिरंगा मार्च रोकने के लिए एनडीएमसी ने सेंट्रल पार्क को दिन के लिए बंद कर दिया था और पुलिस ने नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी है। इसके तहत चार या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है। बहरहाल, दीपके को हिरासत में लेने से पहले दिल्ली पुलिस झंडेवालान स्थित उस घर पर पहुंची थी, जहां वे ठहरे हुए थे। पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन नहीं करने का नोटिस दिया था। यह घर शरद पवार की एनसीपी के एक नेता का है।
पुलिस जब उनको नोटिस देने गई तो इस दौरान दीपके की पुलिस से बहस हो गई थी। दीपके ने पुलिस से कहा कि यह कोई रैली या प्रोटेस्ट नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हम सिर्फ सेंट्रल पार्क तक जाकर तिरंगा फहराना चाहते हैं’। गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को शाम पांच बजे ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च का ऐलान किया था। सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों को शाम पांच बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आने के लिए कहा था।
दूसरी ओर इस मार्च को रोकने के लिए दिल्ली में 28 हजार से ज्यादा सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था। अर्धसैनिक बलों के साथ साथ दिल्ली पुलिस के जवानों ने पूरे कनॉट प्लेस को घेर लिया था। सात लेयर की बैरिकेडिंग की गई थी। ऐसी की बैरिकेडिंग और सुरक्षा बंदोबस्त करके 10 अक्टूबर का जंतर मंतर का प्रदर्शन भी रोका गया था। उस दिन सात हजार के करीब लोग हिरासत में लिए गए थे।

क्या दिल्ली में 10 अक्टूबर को मेट्रो की सेवा नहीं बंद थी? क्या मेडिकल में दाखिले के लिए होने वाली नीट की परीक्षा के पेपर लीक नहीं हुए थे? क्या नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जिन परीक्षाओं का आयोजन कराती है उनमें से पिछले नौ साल में किसी परीक्षा के पेपर लीक नहीं हुए हैं? राजधानी दिल्ली में या दूसरे भी किसी शहर में किसी भी नागरिक से ये सवाल पूछेंगे तो उसका जवाब यही होगा कि मेट्रो बंद थी और पेपर लीक हुए हैं। दिल्ली और एनसीआर में रहने वाला हर व्यक्ति निजी अनुभव से जानता है कि मेट्रो की सेवा बंद थी। जहां तक इंटरनेट सेवा की बात है तो उस पर तो एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट गुरुवार, 15 अक्टूबर को ही छपी है, जिसके मुताबिक पूरी दुनिया में इंटरनेट बंद होने के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है। पहले स्थान पर सैनिक तानाशाही वाला देश म्यांमार है। सो, मेट्रो बंद थी और इंटरनेट भी बंद थे।
परंतु दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि मेट्रो सेवा बंद नहीं थी। उसने कहा है कि सिर्फ 45 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद किया गया था। यानी मेट्रो की सेवा सीमित की गई थी। सोचें, कितना आसान है सरकार के लिए यह कह देना! 45 मेट्रो स्टेशनों पर लोग अंदर नहीं जा सकते थे और न बाहर निकल सकते थे। फिर यह सेवा सीमित करना कैसे हुआ? जिन लोगों को इन 45 मेट्रो स्टेशनों पर ट्रेन पकड़नी थी या इन स्टेशनों पर उतरना था उनके लिए तो मेट्रो बंद ही हुई न! सो, लाखों लोगों के लिए मेट्रो की सेवा बंद थी। सरकार एक तकनीकी टर्म का इस्तेमाल करके अदालत को बता रही है कि उसने अदालत की अवमानना नहीं की है। वास्तव में 10 और 11 अक्टूबर को कई इलाकों में मेट्रो बंद थी और ऐसा नहीं था कि मेट्रो ने स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद की तो यात्रियों के लिए कोई और बंदोबस्त किया। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुंचाने के लिए कोई फीडर बस सेवा नहीं चलाई गई थी। इसलिए यह कहना सरासर गलत है कि मेट्रो सेवा बंद नहीं थी। यह हलफनामा देकर झूठ बोलना है।
ऐसे ही एक रिपोर्ट आई है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने शिक्षा मामलों की संसदीय समिति के सामने कहा है कि 2017 में एनटीए के गठन के बाद से आज तक कोई पेपर लीक नहीं हुआ है। यह झूठ नहीं, बल्कि सफेद झूठ है। कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली कमेटी के सामने एनटीए ने कहा कि कुछ अनियमितता का शिकायत हुई है लेकिन पेपर लीक नहीं हुआ है। सवाल है कि तीन मई 2026 को हुई नीट की परीक्षा को क्यों रद्द किया गया? सात मई को पेपर लीक होने की खबर आई और 12 मई को एनटीए ने परीक्षा रद्द दी, जिसका आयोजन 21 जून को किया गया। एनटीए और शिक्षा मंत्रालय दोनों की ओर से कई बार कहा गया कि पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द हुई है। इस बार तो किसी और धांधली या अनियमितता की खबर भी नहीं थी। इसी तरह 2024 के नीट की परीक्षा पेपर लीक और धांधली दोनों कारणों से प्रभावित हुई थी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कई जगह परीक्षा रद्द की गई। उसके बाद पेपर लीक रोकने का एक कानून बना। जिस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने कानून बनाया उसमें अनियमितता को ‘पेपर लीक केस’ के तौर पर दर्ज किया गया। सोचें, नीट परीक्षा को लेकर 356 केस दर्ज हैं, जेईई मेन्स के 31, यूजीसी नेट के 26 और सीयूईटी यूजी के 14 केस दर्ज हैं। पर एनटीए कह रहा है कि सब कुछ ठीक है!
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर फिर हमले करने का ऐलान किया है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हमले रोकने की अपील मानने से इनकार कर दिया। जेलेंस्की ने अमेरिका के रूस से डीजल खरीदने के फैसले को गलत बताते हुए कहा कि इससे रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए पैसा मिलेगा। उन्होंने ने गुरुवार को फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा, “अब बहुत हो चुका।” उन्होंने यह नहीं बताया कि रूसी रिफाइनरियों पर हमले कब शुरू होंगे। ट्रम्प की अपील पर यूक्रेन ने रोके थे हमले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने 11 अक्टूबर को रूस और यूक्रेन के बीच एनर्जी सीजफायर का ऐलान किया था। उन्होंने दोनों देशों से ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की अपील की थी। यूक्रेन ने इस अपील के बाद रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोक दिए थे। हालांकि, यूक्रेन का आरोप है कि रूस ने उसके बिजलीघरों और बिजली सप्लाई करने वाले दूसरे ठिकानों पर हमले जारी रखे। वहीं रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दावा किया था कि यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों पर हमले कभी बंद ही नहीं किए थे। यूक्रेन का कहना है कि उसने अमेरिकी राष्ट्रपति की अपील का पालन किया। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने तेल ठिकानों पर यूक्रेन के हमलों को ट्रम्प के लिए सीधी चुनौती बताया था। अमेरिका ने रूस से डीजल खरीदने का समझौता किया ट्रम्प ने पिछले हफ्ते रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के साथ आने वाले महीनों में लाखों टन डीजल खरीदने का समझौता करने का ऐलान किया था। इसके बाद अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने रूस से डीजल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटा दीं। ये प्रतिबंध 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद लगाए गए थे, ताकि पुतिन को युद्ध के लिए मिलने वाला पैसा कम किया जा सके। जेलेंस्की ने इस समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि एक तरफ यूक्रेन के लोग युद्ध में जान गंवा रहे हैं, दूसरी तरफ अमेरिका रूस के साथ ऊर्जा कारोबार कर रहा है। उन्होंने कहा कि रूस को तेल और डीजल बेचकर मिलने वाला पैसा युद्ध जारी रखने में मदद करेगा। जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका और रूस के बीच ऊर्जा कारोबार बढ़ रहा है, जबकि यूक्रेन के लोग लड़ रहे हैं, जान गंवा रहे हैं और अपने देश को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। रूस के मिसाइल हमलों की जानकारी नहीं मिलने का आरोप जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन को हाल के दिनों में रूसी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के बारे में पहले जैसी खुफिया जानकारी नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए यूक्रेन पर दबाव बनाया था। यूक्रेन की राजधानी कीव में रूसी हमलों के बाद करीब 6 लाख लोग बिजली से वंचित हो गए थे। जेलेंस्की के मुताबिक, रूस ने दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिन्होंने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचाया। अमेरिका के स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम के सैन्य इस्तेमाल पर पाबंदियां लगाए जाने की खबरें भी सामने आईं। स्टारलिंक की मदद से यूक्रेनी सेना युद्ध के मैदान में कम्युनिकेशन बनाए रखती है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि वे जांच कर रहे हैं कि चलते हुए उपकरणों के लिए स्टारशील्ड की कनेक्टिविटी बहाल हुई है या नहीं। स्टारशील्ड, स्टारलिंक का सैन्य इस्तेमाल वाला सिस्टम है, जिसका खर्च अमेरिकी रक्षा मंत्रालय उठाता है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यूक्रेन के साथ खुफिया जानकारी साझा करना कम नहीं किया गया है। उन्होंने ऐसी मदद रोकने की धमकी देने से भी इनकार किया। जेलेंस्की बोले- अमेरिका जैसा मजबूत साथी खो रहे जेलेंस्की ने ब्रिटिश पत्रकार पियर्स मॉर्गन को दिए इंटरव्यू में कहा कि उन्हें ट्रम्प के फैसलों से धोखा महसूस हुआ है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को अपने देश को बचाने के लिए अमेरिका और ट्रम्प पर भरोसा है, लेकिन हाल के फैसले दोनों देशों के बीच साझेदारी के अनुरूप नहीं हैं। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन अमेरिका जैसे मजबूत साझेदार को खो रहा है। उन्होंने ट्रम्प के पुतिन के साथ समझौते करने और तानाशाहों की तारीफ करने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पुतिन को “असली बुराई” बताते हुए कहा, “ट्रम्प उनसे दोस्ती कैसे कर सकते हैं? मुझे लगता है कि यह एक गलती है।” यूरोपीय नेताओं ने रूस की रिफाइनरियों पर हमले का समर्थन किया ब्रसेल्स में यूरोपीय नेताओं ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले फिर शुरू करने के जेलेंस्की के फैसले का ज्यादातर समर्थन किया। एस्टोनिया के प्रधानमंत्री क्रिस्टन मिहाल ने कहा कि रूस की रिफाइनरियों और उसकी ऊर्जा बेचने की क्षमता को जितना जल्दी नुकसान पहुंचे, उतना बेहतर है, क्योंकि रूस तेल बेचकर युद्ध के लिए पैसा जुटाता है। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन ने अमेरिका-रूस डीजल समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि इससे दुनिया के बाजार में कीमतें कम होने की संभावना नहीं है, लेकिन पुतिन को युद्ध के लिए पैसा जरूर मिलेगा। उन्होंने इसे ट्रम्प का गलत फैसला बताया। हालांकि, बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रुमेन रादेव ने कहा कि वह किसी भी तेल रिफाइनरी पर हमले का समर्थन नहीं करते। रूस की रिफाइनरी पर ड्रोन हमले के बाद आग लगी गुरुवार तड़के यूक्रेनी ड्रोन ने रूस के रियाजान इलाके में एक तेल रिफाइनरी पर हमला किया। इसके बाद वहां आग लग गई। यह इलाका मॉस्को से करीब 300 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है। रियाजान के गवर्नर पावेल माल्कोव और रूस के रक्षा मंत्रालय ने हमले के बाद आग लगने की जानकारी दी। एक वरिष्ठ यूक्रेनी अधिकारी ने भी पुष्टि की कि यूक्रेन ने रिफाइनरी को निशाना बनाया था। हालांकि, आग से हुए नुकसान की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। यह हमला जेलेंस्की के उस बयान के कुछ घंटे बाद हुआ, जिसमें उन्होंने रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले फिर शुरू करने की बात कही थी। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड घटाई:रूस के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर असर; यही सर्विस भारत में शुरू करना चाहते हैं मस्क अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर रद्द करने को लेकर दिल्ली में कई दिन तक हुए प्रदर्शन में शामिल रहे कुछ प्रदर्शनकारियों को राहुल गांधी मीडिया के सामने लेकर आए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके खिलाफ बहुत ज्यादती की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों के प्राइवेट पार्ट पर हमला किया। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि जहां सीसीटीवी कैमरा नहीं था वहां लेकर जाकर पुलिसकर्मियों ने उसे मारा।
गौरतलब है कि इससे पहले राहुल गांधी 20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों को सामने लेकर आए थे। बुधवार, 14 अक्टूबर को राहुल ने जिन लोगों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की उनमें कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ घटनाएं बताईं। एक छात्रा ने प्राइवेट पार्ट पर लात मारने का आरोप लगाया, जबकि दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई से उसके एक कान से सुनने की क्षमता चली गई।
राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं के वीडियो और दूसरे सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। राहुल ने केंद्रीय गृह मंत्री को ललकारते हुए कहा, ‘ये हिंदुस्तान है, अमित शाह जी यहां कोई हिंदू, मुस्लिम नहीं है, इनकी कोई जात नहीं है। आप इस आवाज के सामने खड़े नहीं हो सकते। स्टूडेंट्स से कहना चाहता हूं। आप वीडियो बनाकर रखिए। उन सबूतों को हम रखेंगे’। राहुल ने कहा कि जब सब खत्म होगा तो इन सबूतों के आधार पर सबको सजा मिलेगी। चाहे पुलिस वाले हों या ज्ञानेश कुमार हों। ये देश की आवाज हैं। इस आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘केरल की अदिरा की एक कान से सुनने की क्षमता चली गई है। उस कान पर चोट लगने के कारण वह एक कान से सुन नहीं पा रही है। पिछली बार मैंने आपको एक लड़का दिखाया था, जिसकी आंखों की रोशनी चली गई थी। अब इस लड़की के एक कान से सुनने की क्षमता चली गई है’। एनएसयूआई से जुड़ी ऋतु बराला ने अपने साथ हुई बदसलूकी का कहानी सुनाई तो दूसरे प्रदर्शनकारी रमित ने कहा, ‘मैं कंटेंट क्रिएटर हूं, मुझे 11 अक्टूबर को आरएसएस और भाजपा के गुंडों के बोलने के बाद हिरासत में लिया गया। उनके पास डंडे थे। पुलिस ने उनकी बात सुनकर लोगों को हिरासत में लिया और बुरी तरह हमें पीटा।
अमेरिका के इलिनॉय में के ऑरोरा इलाके में 19 साल का एक युवक हिंदू मंदिर पर हमला करने की योजना बना रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, युवक भारतीय मूल के लोगों से नफरत करता था। उसके घर से राइफल, कई भरी हुई मैगजीन और सैकड़ों गोलियां मिली हैं। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। एक व्यक्ति ने पुलिस को जानकारी दी थी आरोपी का नाम अलेक्जेंड्रोस पापोराकिस है। पुलिस के मुताबिक, 11 अक्टूबर को माउंट प्रॉस्पेक्ट पुलिस को एक व्यक्ति ने बताया कि उसे पापोराकिस के कुछ मैसेज मिले हैं। इन मैसेज के साथ एक दस्तावेज भी था, जिसमें हिंदू मंदिर में गोलीबारी करने की योजना का जिक्र था। पुलिस ने पापोराकिस को उसके घर से निकलते समय पकड़ लिया। इसके बाद उसके घर की तलाशी ली गई। उसके घर में मिली एक जैकेट पर ऐसा निशान भी था, जो गोरी नस्ल को दूसरों से बेहतर मानने वाले चरमपंथियों से जुड़ा है। पुलिस ने फिलहाल मंदिर का नाम नहीं बताया है। ऑरोरा में श्री वेंकटेश्वर स्वामी (बालाजी) मंदिर है, लेकिन इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि युवक इसी मंदिर को निशाना बनाना चाहता था। आतंकवादी धमकी देने और अवैध हथियार रखने के आरोप पापोराकिस पर आतंकवादी धमकी देने और गैरकानूनी तरीके से हथियार रखने के आरोप लगाए गए हैं। बुधवार को अदालत में सुनवाई के बाद जज ने उसे हिरासत में रखने का आदेश दिया। FBI शिकागो के अधिकारी रयान व्हेलन ने कहा कि एजेंसी चरमपंथी सोच से जुड़ी हिंसा की धमकियों का पता लगाने और उनकी जांच करने के लिए स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर काम करती है। 2 अक्टूबर को ओहायो में हिंदू मंदिर पर हमला हुआ था 2 अक्टूबर 2026 को अमेरिका के ओहायो राज्य के रिचमंड हाइट्स में स्थित श्री स्वामीनारायण वडताल धाम हिंदू मंदिर की खिड़कियों पर ईंटें फेंकी गईं थीं। घटना के समय मंदिर के अंदर पुजारी और श्रद्धालु मौजूद थे, लेकिन कोई घायल नहीं हुआ। पुलिस ने एक संदिग्ध की पहचान की थी। हालांकि, पुलिस के मुताबिक, घटना के पीछे धार्मिक या नस्लीय नफरत होने का कोई सबूत नहीं मिला था और जांच जारी थी। अमेरिका में पहले भी मंदिरों पर हमले हुए कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका पहले भी अमेरिका में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और मंदिरों में तोड़फोड़ को लेकर चिंता जताता रहा है। संगठन ने ऐसे मामलों की एक टाइमलाइन भी तैयार की है। अमेरिका में हेट क्राइम 30% बढ़ने का खतरा अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव में इमिग्रेशन विरोध बड़ा मुद्दा बन रहा है। भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम के मामले 30% तक बढ़ने की आशंका है। न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में 20 साल से रेस्तरां चलाने वाले भारतवंशी मोमिन अली (बदला हुआ नाम) कहते हैं कि ट्रम्प के समर्थक श्वेत गुट भारतीयों के रेस्तरां में जासूसी करते हैं। प्रवासियों के मुद्दे से जुड़े संगठन एपीआई ने एक मॉड्यूल का अध्ययन कर चेताया है कि नवंबर तक भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम के मामले 58 हजार होने का खतरा है। जबकि इस साल जुलाई तक भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम के 44,535 मामले सामने आए थे। अमेरिका में चुनाव और भारतीयों से जुड़ा कोई भी मुद्दा सामने आने पर राष्ट्रपति ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी एंटी इमिग्रेशन मुद्दा उठाती है। भारतीयों के खिलाफ जॉब छीनने का आरोप भी लगाया जाता है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… OpenAI ऑफिस में जासूसी की कोशिश करने वाला गिरफ्तार: TV के पीछे रिकॉर्डर लगाया था अमेरिकी कंपनी OpenAI के सैन फ्रांसिस्को ऑफिस में जासूसी की कोशिश करने वाले कर्मचारी को FBI ने गिरफ्तार कर लिया है। कर्मचारी ने कॉन्फ्रेंस रूम में टीवी के पीछे रिकॉर्डिंग डिवाइस छिपा दिया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

