Flying Car: उत्तराखंड के इस व्यक्ति ने खुदकी बनाई फ्लाइंग कार की ली टेस्ट-ड्राइव, इंटरनेट ने’देसी जुगाड़’ की खूब हो रही तारीफ

Flying Car: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके के एक व्यक्ति ने उस चीज को असलियत में बदल दिया है, जिसे ज़्यादातर लोग सिर्फ़ साइंस-फ़िक्शन (काल्पनिक विज्ञान) समझते थे। अल्मोड़ा के काफ़लीखान गांव के रहने वाले इनोवेटर रवि टम्टा ने ‘HAPIDA SKYNeX’ का सफल टेस्ट-फ़्लाइट किया है। यह एक-सीट वाला इलेक्ट्रिक फ़्लाइंग व्हीकल प्रोटोटाइप है, और उन्हें उम्मीद है कि एक दिन यह भारत में पर्सनल ट्रांसपोर्टेशन (निजी परिवहन) को पूरी तरह बदल देगा।

अल्मोड़ा में एक खुले मैदान में की गई इस टेस्ट-फ़्लाइट के वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। टम्टा के स्टार्टअप ‘Hapida Sky Private Limited’ के तहत बना यह एयरक्राफ़्ट, ड्रोन टेक्नोलॉजी का ही एक मॉडिफ़ाइड और अपग्रेडेड वर्शन है, जिसे किसी व्यक्ति को हवा में सुरक्षित रूप से ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

तमटा का कहना है कि यह आइडिया एक आम समस्या से आया। उनके गांव से घर तक का 40 किलोमीटर का सफ़र, जिसमें सड़क मार्ग से आमतौर पर लगभग 90 मिनट लगते हैं, हवाई मार्ग से सिर्फ़ 10 मिनट में पूरा किया जा सकता है। उनका लंबे समय का विज़न एक सुरक्षित, इलेक्ट्रिक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल बनाना है, जिससे हवाई सफ़र आसान और व्यावहारिक हो सके, खासकर पहाड़ी इलाकों में।

इसे अपने करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर बताते हुए, टम्टा ने कहा कि सफल लिफ्ट-ऑफ कई सालों की रिसर्च, संघर्ष, प्रयोगों और लगातार कोशिशों का नतीजा था। टेस्ट के बाद उन्होंने कहा, “आज मेरी ज़िंदगी का बहुत बड़ा दिन है। मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी और गर्व हो रहा है कि HAPIDA SKYNeX की पहली सफल उड़ान कई सालों की रिसर्च, संघर्ष, प्रयोगों और लगातार कोशिशों का नतीजा है।”

इस कामयाबी ने ऑनलाइन लोगों का दिल जीत लिया है। एक यूज़र ने लिखा, “अद्भुत! यह पहाड़ी इलाकों में ट्रांसपोर्टेशन के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।” एक और यूज़र ने कमेंट किया, “हमें सिर्फ़ डिग्री-होल्डर्स की नहीं, बल्कि ऐसे इनोवेटर्स की ज़रूरत है।” कुछ लोगों ने इसे “उत्तराखंड का पहला बड़ा इनोवेशन” बताया और अधिकारियों से टम्टा के काम को मान्यता देने और उसे सपोर्ट करने की अपील की। ​​एक और यूज़र ने कहा, “हमारे पहाड़ी इलाकों से बहुत अच्छी खबर है।”

हालांकि HAPIDA SKYNeX अभी सिर्फ़ एक प्रोटोटाइप है और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए तैयार होने में अभी काफी समय है, लेकिन इसकी सफल टेस्ट फ़्लाइट एक अहम शुरुआती कदम है। रवि टम्टा के लिए, यह सिर्फ़ एक उड़ने वाली मशीन बनाने की बात नहीं है—यह साबित करने की बात है कि भारत के छोटे कस्बों और गांवों से भी वर्ल्ड-क्लास इनोवेशन निकल सकते हैं।

क्या देशभर में चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन? जिंद-सोनीपत रूट के बाद अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दी ये जानकारी

देश में पहली हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन के सफल परिचालन के बाद अब इसे दूसरे रेल रूट्स पर भी चलाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिंद-सोनीपत रूट पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के बाद अब इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेल मंत्री ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि दूसरे रेल रूट्स पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का फैसला संसाधनों की उपलब्धता, ऑपरेशनल फिजिबिलिटी और दूसरी जरूरी चीजों पर निर्भर करेगा।

संसद में सांसदों ने पूछे थे हाइड्रोजन तकनीक से जुड़े कई सवाल

आपको बता दें कि राज्यसभा में अलग अलग राजनीतिक दलों के सांसदों ने रेलवे की इस नई तकनीक को लेकर कई सवाल उठाए थे। सांसदों ने इसके विकास पर हुए कुल खर्च, देश भर में स्वीकृत और प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं का ब्योरा, इन परियोजनाओं के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की उपलब्धता, लागत और ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन के लिए विकसित की जा रही घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कैपिसिटी को लेकर रेल मंत्री से जवाब मांगा था।

जिंद-सोनीपत रूट पर दर्ज हुई कॉमर्शियल सर्विस की सक्सेस

सांसदों के सवालों का लिखित जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्च सदन को बताया कि 17 जुलाई 2026 को जिंद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत की गई थी। 17 जुलाई से लेकर 3 अगस्त तक 89 किलोमीटर लंबे जिंद-सोनीपत सेक्शन पर इस ट्रेन ने कुल 2492 किलोमीटर की दूरी तय की है। रेल मंत्री ने अपने बयान में कहा कि भारतीय रेलवे में हाइड्रोजन संचालित ट्रेन तकनीक के इस्तेमाल को प्रदर्शित करने के लिए इस हाइड्रोजन ट्रेन को पायलट आधार पर विकसित किया गया है।

जींद में बना डेडिकेटेड प्लांट और सेफ्टी प्रोटोकॉल

रेल मंत्री ने बताया कि इस ट्रेनसेट को हाइड्रोजन उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा के जींद में एक डेडिकेटेड हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है। सुरक्षा मानकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही हाइड्रोजन स्टोरेज फैसिलिटी तैयार की गई है, जिससे निर्धारित सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित हो सके।

पर्यावरण को फायदा: जीरो कार्बन उत्सर्जन

इस तकनीक के फायदों के बारे में बताते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि हाइड्रोजन ट्रेनसेट शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन सुनिश्चित करता है, जिसमें बाई-प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ जलवाष्प (Water Vapour) ही निकलती है। उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रेनसेट फ्यूल सेल तकनीक पर काम करता है। इसमें ट्रैक्शन पावर जेनरेशन के लिए कोई मूविंग पार्ट या पारंपरिक इंजन नहीं होता है। इस वजह से इसके मूवमेंट में शोर भी नहीं होता और ध्वनि प्रदूषण कम होता है। यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे को हाइड्रोजन तकनीक के क्षेत्र में मजबूती से स्थापित करता है।

141 करोड़ रुपये थी इस प्रोजेक्ट की लागत

इस प्रोजेक्ट पर आए खर्च का ब्योरा देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट को कुल 141 करोड़ रुपये के खर्च से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेनसेट और इसका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रायोगिक तौर पर तैयार किया गया है, इसलिए इस चरण में स्थापित ट्रैक्शन सिस्टम के साथ हाइड्रोजन चालित ट्रेनों की लागत की सीधी तुलना करना उचित नहीं है। रेल मंत्री ने इस ट्रेन की प्रमुख विशेषताओं के बारे में भी बताया है। यह ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और विकास पर आधारित है। ब्रॉड-गेज प्लेटफॉर्म पर 10 डिब्बों के साथ यह दुनिया की सबसे लंबी और 2400 किलोवाट क्षमता वाली सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनसेट है। इसमें 1200 किलोवाट के दो ड्राइविंग पावर कार लगे हैं, जो मिलकर 2400 किलोवाट बिजली पैदा करते हैं, और इसके साथ आठ पैसेंजर कोच जोड़े गए हैं।

क्या अन्य रूटों पर भी चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन?

फिलहाल भारतीय रेलवे सिर्फ जिंद-सोनीपत सर्किट पर ही पायलट आधार पर इस हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन तकनीक का संचालन कर रहा है। देश के दूसरे हिस्सों में इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दोहराया कि अन्य रूटों पर हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का निर्णय भविष्य में संसाधनों की उपलब्धता, परिचालन संबंधी व्यावहारिकताओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा।

Titan Q1 Profit: नेट प्रॉफिट 65% बढ़कर 1699 करोड़ रुपये, रेवेन्यू में 24 फीसदी इजाफा

Titan Q1 Profit: टाइटन कंपनी का प्रदर्शन जून तिमाही में शानदार रहा। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट 65 फीसदी बढ़कर 1,699 करोड़ रुपये रहा। यह एनालिस्ट्स के अनुमान से काफी ज्यादा है। सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स ने जून तिमाही में प्रॉफिट 1,267 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था। कंपनी ने नतीजों का ऐलान शेयर बाजार बंद होने के बाद किया। इसके शेयरों पर नतीजों का असर 10 अगस्त को बाजार खुलने पर दिखेगा।

ऑपरेशंस से रेवेन्यू 18101 करोड़ रुपये

Titan Company का ऑपरेशंस से रेवेन्यू जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 24.3 फीसदी बढ़कर 18,101 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का रेवेन्यू एक साल पहले की समान अवधि में 14,564 करोड़ रुपये था। एनालिस्ट्स ने जून तिमाही में रेवेन्यू 19,700 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था।

ज्वेलरी पोर्टफोलियो की ग्रोथ 43 फीसदी 

टाइटन के ज्वेलरी पोर्टफोलियो की ग्रोथ जून तिमाही में शानदार रही। इस पोर्टफोलियो की इनकम 43 फीसदी बढ़कर 18,253 (बुलियन और डिजी-गोल्ड सेल्स छोड़कर) करोड़ रुपये रही। इसमें फेस्टिवल डिमांड और अक्षय तृतीया पर अच्छी खरीदारी का हाथ रहा। कंपनी का वॉचेज पोर्टफोलियो 21 फीसदी बढ़ा। इसकी इनकम 1,543 करोड़ रुपये रही। इसमें एनालॉग घड़ियों में ग्राहकों की बढ़ती दिलचस्पी का हाथ रहा।

कंज्यूमर बिजनेस की ग्रोथ 40 फीसदी 

टाइटन के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय चावला ने कहा, “इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही कंपनी के लिए स्ट्रॉन्ग रही। कंज्यूमर बिजनेस की ग्रोथ साल दर साल आधार पर 40 फीसदी रही। प्रीमियम ऑफरिंग्स में दिलचस्पी रखने वाले ग्राहकों को ज्वेलरी, वॉचेज, आईकेयर और इमर्जिंग बिजनेसेज के ब्रांड्स ने अच्छी वैल्यू डिलीवर की। “

इंटरनेशनल ज्वेलरी बिजनेस की ग्रोथ 136 फीसदी

टाइटन के इंडिया बिजनेस की ग्रोथ साल दर साल आधार पर 38 फीसदी बढ़कर 16,943 करोड़ रुपये रही। तनिष्क, Mia और Zoya बिजनेसेज की ग्रोथ 38 फीसदी बढ़कर 15,502 करोड़ रुपये रही। कैरेटलेन की ग्रोथ 40 फीसदी बढ़कर 1,441 करोड़ रुपये रही। इंटरनेशनल ज्वेलरी बिजनेस की ग्रोथ 136 फीसदी बढ़कर 1,309 करोड़ रुपये रही।

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बीते एक साल में 45 फीसदी ढ़ा शेयर 

टाइटन टाटा समूह की कंपनी है। इसका शेयर 7 अगस्त को 1.08 फीसदी गिरकर 4,944 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर करीब 45 फीसदी चढ़ा है। 7 अगस्त को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आई। निफ्टी 0.27 फीसदी गिरकर 24,570 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 455 अंक यानी 0.58 फीसदी गिरकर 78,499 पर क्लोज हुआ।

Market Outlook : निफ्टी-सेंसेक्स गिरावट के साथ हुए बंद, जानिए 10 अगस्त को कैसी रह सकती है इनकी चाल

Market Outlook : कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन बाजार में गिरावट देखने को मिली है। निफ्टी,सेंसेक्स गिरावट के साथ बंद हुए हैं। निफ्टी,सेंसेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ है। वहीं, ऑटो और IT शेयरों में खरीदारी रही। डिफेंस और इंफ्रा इंडेक्स भी बढ़त पर बंद हुए। हालांकि, बैंकिंग और PSE शेयरों में दबाव देखने को मिला। कारोबारी सत्र के अंत में निफ्टी 65 प्वाइंट गिरकर 24,571 पर बंद हुआ। वहीं,सेंसेक्स 456 प्वाइंट गिरकर 78,499 पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी भी बैंक निफ्टी 317 प्वाइंट गिरकर 57,746 पर बंद हुआ। जबकि, मिडकैप 137 प्वाइंट चढ़कर 63,464 पर बंद हुआ।

आज निफ्टी के 50 में से 27 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। वहीं, सेंसेक्स के 30 में से 16 शेयरों में बिकवाली रही। जबकि, बैंक निफ्टी के 14 में से 7 शेयरों में बिकवाली रही। डॉलर के मुकाबले रुपया 1 पैसा मजबूत होकर 95.21 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

आज ऑटो और IT शेयरों में अच्छी बढ़त के बावजूद फाइनेंशियल शेयरों में गिरावट का असर ज्यादा रहा। बजाज फाइनेंस के शेयरों में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट आई,जबकि बजाज फिनसर्व,ट्रेंट और ICICI बैंक भी गिरने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल थे। इसके विपरीत TCS, ग्रासिम और हिंडाल्को के शेयरों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त हुई। निफ्टी ऑटो और IT इंडेक्स में 1.84 प्रतिशत और 1.42 प्रतिशत की बढ़त हुई,जबकि प्राइवेट बैंकों के शेयरों में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। मार्केट ब्रेथ निगेटिव रहा 1,964 शेयरों में बढ़त हुई, जबकि 2,119 शेयरों में गिरावट देखने को मिली।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?

Hedged.in के HNI और डेरिवेटिव्स के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट रियांक अरोड़ा का कहना है कि भारतीय इक्विटी मार्केट में आज का कारोबार कमजोरी के साथ बंद हुआ। हालिया बढ़त के बाद बेंचमार्क इंडेक्स में प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली। कुछ हैवीवेट शेयरों में बिकवाली के दबाव का असर मार्केट के सेंटीमेंट पर पड़ा,जिससे बाजार लाल निशान में बंद हुआ। आज की गिरावट के बावजूद,मार्केट का ओवरऑल ढांचा काफी हद तक मजबूत बना हुआ। निवेशक ग्लोबल संकेतों और घरेलू घटनाओ पर नज़र बनाए हुए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी 65 अंक गिरकर 24,570.00 पर बंद हुआ। इंडेक्स 24,600 के तत्काल सपोर्ट से नीचे आ गया है, लेकिन अपने अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर ट्रेड कर रहा है,जो दिखाता है कि बड़ा ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। अब निफ्टी के लिए 24,500–24,450 के आसपास तत्काल सपोर्ट है और उसके बाद 24,300 के पास एक मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ,इसके लिए 24,650–24,750 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। अगर निफ्टी लगातार इस जोन से ऊपर बना रहता है,तो फिर से तेजी आ सकती और ऊंचे स्तरों के लिए रास्ता खुल सकता है।

रियांक अरोड़ा ने आगे कहा कि सेंसेक्स 317 अंक गिरकर 77,746.00 पर बंद हुआ। सेशन के दौरान इंडेक्स में बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग देखी गई,लेकिन यह अपने अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर बना रहा। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 77,500–77,300 के आसपास है,जबकि रेजिस्टेंस 78,000–78,300 के पास दिख रहा है। उन्होंने कहा कि रेजिस्टेंस जोन के ऊपर कोई भी निर्णायक चाल शॉर्ट-टर्म आउटलुक को मज़बूत करेगी।

बाजार के ओवरऑल ट्रेंड पर बात करते हुए उन्होंनें कहा कि हालिया बढ़त के बाद बाजार में हेल्दी करेक्शन का एक दौर देखने को मिला है। आज ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली हुई। जब तक अहम सपोर्ट लेवल बचे हुए हैं, तब तक कुल मिलाकर बाजार का रुख तेजी के पक्ष में रहेगा। ट्रेडर्स और निवेशक मज़बूत फ़ंडामेंटल वाले शेयरों में गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं। साथ ही उन्हें रिस्क मैनेजमेंट के मामले में अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

 

 

Q1 नतीजों के बाद मोतीलाल ओसवाल के सिद्धार्थ खेमका का इन शेयरों पर आया दिल, क्या हैं आपके पास?

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AISA की जिस स्टूडेंट लीडर के साथ राहुल गांधी ने की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस रांची में उनपर फेंकी गई स्याही, कौन हैं नेहा बोरा?

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में शुक्रवार को विधानसभा की ओर निकाले गए मार्च के दौरान एक व्यक्ति ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंक दी और उन पर  “राष्ट्र-विरोधी” होने का आरोप लगाया। बता दें कि यह घटना बिरसा चौक के पास तब घटी जब दो छात्र संगठनों – AISA और AISF के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़ रहे थे।

मैं डरने वाली नहीं हूं- नेहा बोरा

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए बोरा ने कहा, “मैं स्याही फेंके जाने से डरने वाली नहीं हूं, क्योंकि दिल्ली में हुए प्रदर्शन में मैंने पेलेट गन फायरिंग और लाठीचार्ज का सामना किया था।” AISA की नेता शिवानी ने कहा, “हम शांतिपूर्ण मार्च कर रहे थे। अचानक भीड़ में से एक व्यक्ति निकला और उसने बोरा पर स्याही फेंक दी।” उन्होंने आरोप लगाया कि वह व्यक्ति भाजपा समर्थित गुंडा था।

एक अधिकारी ने बताया कि स्याही फेंकने वाले व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

मीडिया से बात करते हुए उस व्यक्ति ने कहा, “बोरा उमर खालिद की समर्थक हैं। मुझे वह पसंद नहीं हैं। वह राष्ट्र-विरोधी हैं।”

स्टूडेंट्स के भविष्य के लिए खड़े रहेंगे

नेहा ने मांग करते हुए कहा कि सिस्टम में शामिल जिन पर गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उन सभी प्राइवेट एजेंसियों को हटाया जाना चाहिए। हम 10 तारीख को स्टूडेंट्स की अपील का सपोर्ट करेंगे और स्टूडेंट्स के भविष्य के लिए खड़े रहेंगे।

दिल्ली में नेहा बोरा के साथ राहुल गांधी की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस

बता दें कि कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 10 जनपथ पर शनिवार, 25 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान उनके साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा समेत वो छात्राएं भी मौजूद रहीं, जो जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठी थीं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि छात्रों पर हुए हमले के लिए प्रधानमंत्री मोदी को माफी मांगनी चाहिए। अपने भाषण में राहुल ने छात्रों को देश का भविष्य बताया और प्रधानमंत्री मोदी को भारत का ‘अतीत’।

वहीं, इसके बाद लेफ्ट संगठन AISA से जुड़ी और जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठी नेहा ने भी पत्रकारों से बात की। उन्होंने राहुल गांधी के बातों का समर्थन किया और उसे अच्छा बताया।

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Bajaj Pulsar N160 S, N160 SS launched at Rs 1.34 lakh with new 4-valve engine

 Bajaj Pulsar N160 S, N160 SS launched at Rs 1.34 lakh with new 4-valve engine

Bajaj Auto has expanded the Pulsar N160 range with the launch of the Pulsar N160 S and Pulsar N160 SS, priced at Rs 1.34 lakh and Rs 1.43 lakh (ex-showroom, Delhi), respectively. The standard Pulsar N160 will continue to be sold alongside the new variants. Compared to the outgoing N160 variants, the new N160 S is Rs 10,708 more expensive, while the flagship N160 SS commands a premium of Rs 14,089. 

  1. N160 S priced at Rs 1.34 lakh; N160 SS at Rs 1.43 lakh
  2. New 165cc, 4-valve engine produces 18.5hp
  3. Gets electronic throttle, ride modes and TFT display

Bajaj Pulsar N160 S, N160 SS: what’s new?

The biggest update is the new 164.5cc, oil-cooled, single-cylinder, 4-valve engine, which produces 18.5PS at 9,500rpm and 14.4Nm at 8,000rpm. Compared to the outgoing 2-valve motor’s 16PS and 14.65Nm, power is up by 2.5PS, while torque drops marginally by 0.25Nm. The engine also switches from a mechanical to an electronic throttle body. 

The electronic throttle enables Road, Rain, Sport and Off-road ride modes, along with Crawl Technology similar to what we see on KTM bikes, which allows the motorcycle to move at low speeds in higher gears with minimal clutch input. The flagship N160 SS additionally gets traction control. 

Other mechanical changes include 37mm USD forks in place of the previous 33mm units and a larger 300mm front disc. The monoshock, 14-litre fuel tank, 1,348mm wheelbase, 165mm ground clearance, 795mm seat height and 151kg kerb weight remain unchanged. 

The N160 SS becomes the first Bajaj motorcycle to get a 5-inch TFT display with Google Maps mirroring, while the N160 S continues with an LCD console. Other SS-exclusive additions include adjustable levers and Bluetooth plus Wi-Fi connectivity. Both new variants will be offered in Atlantic Blue, Pearl Metallic White and Brooklyn Black. 

Has the latest crop of midsize SUVs dented the Hyundai Creta’s dominance?

hyundai creta h1 2026 sales compared to rivals

The Hyundai Creta wasn’t the first midsize SUV to hit the Indian market, but it sure is the most popular one of them all. At the start of 2026, however, many believed that the Creta’s dominance on the sales charts was in jeopardy on account of new and upcoming entrants in the midsize SUV space, like the Maruti Suzuki Victoris, Tata Sierra, Kia Seltos, and Renault Duster, as well as the facelifted Skoda Kushaq and Volkswagen Taigun.

If things were to pan out that way, it would be bad news for Hyundai, since the Creta is the Korean carmaker’s bread-and-butter in India. Now that we have sales data for the first half of calendar 2026, and production, deliveries have stabilized for this fresh barrage of midsize SUVs, let’s take a look if any model has eaten into the Creta’s market, or if the Hyundai SUV continues to rule its segment.

Hyundai Creta vs latest midsize SUV sales in H1 2026

ModelJanuaryFebruaryMarchAprilMayJuneTotal
Hyundai Creta^17,92117,93817,83815,29115,2357,16891,391
Maruti Victoris15,24013,02111,06213,70110,85310,03573,912
Kia Seltos*10,63910,30811,04110,56610,5979,65462,805
Tata Sierra7,0037,1009,0037,3166,6066,39243,420
Skoda Kushaq*^^2,3071,8511,3109926,460
Renault Duster1,4022,3591,2671,0116,039
Volkswagen Taigun*^^1,5431,2811,1824,006

^Includes Creta Electric sales

*May include carryover sales of outgoing models

^^Sales counted from the facelift’s month of launch

Six months into 2026, the Creta has managed to retain its moniker of midsize SUV sales champion, averaging over 15,000 sales a month. Compared to H1 2025 (1,00,560 units sold), the Creta’s sales are actually 9.12 percent down YoY, but the Hyundai SUV is still far ahead of its rivals on the chart. That said, though the newer midsize SUVs haven’t dethroned the Creta, they’ve done a lot to grow the segment.

The next bestselling midsize SUV during H1 2026 was the Victoris, which fell 17,479 units behind the Creta. For perspective, you could fit the sales of the Duster, Kushaq, and Taigun within that gap and still come up around 1,000 units short. Launched in September 2025, the Victoris had a few months to establish itself in the market, and differentiates itself from the Creta by offering CNG and strong hybrid powertrains, which appeal to buyers seeking practicality and fuel efficiency, as well as Maruti’s famed peace of mind.

In third position comes the Seltos, which in theory should’ve been stiff competition for the Creta, with the Kia SUV offering a near-identical set of powertrains, a more modern platform (which will even underpin the next-gen Creta), similar pricing, and greater safety credentials by way of a 5-star Bharat NCAP rating. That said, the Seltos did record a whopping 70.28 percent YoY surge in sales, clearly reflecting the boosted popularity of the second-gen model.

The Sierra is Tata’s most formidable contender against the Creta to date, but sold less than half of what the Hyundai SUV did in H1 2026. It should be noted that the Sierra’s sales were initially production-constrained, with Tata steadily increasing manufacturing capacity every month to meet demand. The Sierra is undoubtedly a more feature-packed offering than the Creta, but also costs more. Concerns around fit-and-finish and Tata’s aftersales experience also play a role here.

Renault made its long-awaited return to the midsize SUV space with the new Duster in March, with deliveries commenced in April, but it hasn’t quite set the H1 sales chart alight. Like the Sierra, the Duster’s production is being increased in a phased manner, which could explain the relatively low sales numbers. The Duster has a lot going for it, like aggressive pricing, muscular looks, and a competitive feature set, but the SUV’s exclusively turbo-petrol powertrain line-up limits its appeal for many buyers. A strong hybrid powertrain is set to join the Duster line-up by Diwali 2026, and could pique buyer interest further.

Facelifts of the Kushaq and Taigun were launched in March and April, respectively – nearly five years since the midsize SUVs originally went on sale in India. Both packed some long-requested feature additions and changes, which led to demand spikes in subsequent months. Much like the Duster, though, the Kushaq and Taigun are available with turbo-petrol engines only, and are also on the dimensionally smaller side of the segment, which means they’re best-suited for enthusiast buyers.

Why does the Creta keep selling?

The biggest reason behind the Creta’s persistent reign on the midsize SUV sales charts is its deeply well-established brand name and perception. Many Indian car buyers are very conservative and safe in their purchasing decisions, and seeing a consistently high number of Cretas on the road every single day builds the image of it being the best option in the segment by virtue of sheer popularity. Not to mention, the more ubiquitous and established the car, the better its resale value, which is also very important to most Indian buyers.

Another key driver behind the Creta’s popularity is its proven reliability and no-nonsense ownership experience. Though many of the Creta’s rivals are just as, if not more durable, the Hyundai SUV’s reliability comes alongside a decently long list of features, a comfortable and well-built interior, great levels of refinement, a wide variety of powertrains, and an easy driving experience – making for an excellent overall package.

The Creta is even among the few in its segment to offer a diesel engine, which many midsize SUV buyers still prefer. For those who primarily commute in the city, there’s a smooth naturally aspirated petrol engine on offer, while enthusiast buyers can pick from the sporty Creta N Line range, which is powered by a direct-injection turbo-petrol motor. Basically, there’s something for everyone, and that’s exactly why the Creta is still unbeaten.

Tata Nexon special editions explained

Tata Nexon special editions

Over the years, Tata Motors has introduced multiple special editions of the Nexon, each aimed at buyers seeking a more distinctive appearance or additional features over the standard model. The Nexon is currently the only compact SUV in India to be offered with three factory-backed special editions.

While all three retain the standard Nexon’s engines and mechanical package, each follows a different approach. The Camo Edition adds exclusive colours and a handful of equipment upgrades, whereas the Dark and Red Dark editions primarily focus on cosmetic changes. All three editions can also be specified with an ADAS suite, although it remains available only on the top-spec petrol dual-clutch automatic variant. Here’s what sets each special edition of the Nexon apart.

Tata Nexon Camo Edition

The Camo Edition is the latest addition to the Nexon range and is available for a limited period. Based on the Creative+ and Fearless+ trims, it is the only special edition that adds equipment over the equivalent standard variants.

The Camo Edition is offered in two exclusive exterior colours, Munnar Mist and Coorg Cloud, along with a ‘Camo’ badge on the front fender and Camo-themed perforation on the front-seat headrests.

Inside, it upgrades to Tata’s 12.3-inch touchscreen, replacing the 10.25-inch unit fitted to the equivalent standard Nexon variants. This is also the only Nexon to get the larger 12.3-inch touchscreen, which is otherwise seen on larger Tata models such as the Harrier and Safari. It also adds an integrated dashcam that works with the 360-degree camera system.

Like the standard Nexon, the Camo Edition is available with petrol, diesel and CNG engines across manual and automatic gearbox options.

Tata Nexon Dark Edition

Unlike the Camo Edition, the Dark Edition does not introduce any exclusive equipment. Instead, it focuses on giving the Nexon a darker appearance inside and out while retaining the features of the underlying trim.

The Dark Edition receives an all-black exterior treatment, including black-finished alloy wheels, a black skid plate and ‘#Dark’ badging on the front fender. Inside, it gets an all-black cabin with black leatherette upholstery, black dashboard trim with a blue insert and blue contrast stitching, giving it a more understated appearance than the standard model.

The Dark Edition is available in Nexon’s Creative+ and Fearless+ trims with petrol, diesel and CNG powertrains, depending on the variant.

Tata Nexon Red Dark Edition

The Red Dark Edition combines the Dark Edition’s blacked-out exterior with a contrasting red-themed cabin. Like the Dark Edition, it is primarily a cosmetic package and does not introduce any exclusive features over the equivalent standard variant.

The exterior carries forward the all-black Dark Edition styling, while the cabin switches to ‘Carnelian Red’ leatherette upholstery, red contrast stitching and matching interior accents.

Like the Dark Edition, the Red Dark Edition is offered with petrol, diesel and CNG powertrains with manual and automatic gearbox options.

The Tata Nexon special edition line-up

The Nexon remains one of the few compact SUVs in India to be offered with special editions. While most rivals are sold only in their standard trims, Tata has steadily expanded the Nexon range with the Dark, Red Dark and now the Camo Edition.

These editions have also proved popular with buyers. Tata Motors has previously said that special editions contribute around 15 percent or more of sales, depending on the model, while Dark Editions account for an even higher share on the Harrier and Safari. With three distinct special editions now on sale, the Nexon offers buyers more choice than any other compact SUV in the segment without altering its underlying mechanical package.

Gold Silver Price: सोना ₹1.50 लाख पर, चांदी ₹8000 चढ़ी, एक्सपर्ट्स से जानें आगे कहां तक जाएगी कीमतें

Gold Silver Price: भारत में सोने-चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिला है। कीमतों में यह तेजी नई खरीदारी, मज़बूत ग्लोबल ट्रेंड के कारण आई है। साथ ही उम्मीद थी कि महंगाई का दबाव कम होने से US फ़ेडरल रिजर्व को ब्याज दरें घटाने के लिए ज़्यादा गुंजाइश मिल सकती है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अक्टूबर डिलीवरी के लिए सोने के फ़्यूचर्स ₹2,188 या 0.85% बढ़कर ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम हो गए। ट्रेडिंग वॉल्यूम 1,283 लॉट रहा।चांदी की कीमतों में भी तेज़ी आई। MCX पर सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के फ़्यूचर्स ₹8000 या 3.54% बढ़कर ₹2.33 लाख प्रति किलोग्राम हो गए, और 2,943 लॉट का कारोबार हुआ। इंटरनेशनल मार्केट में, चांदी के फ़्यूचर्स 3.44% बढ़कर $61.66 प्रति औंस हो गए।

जानकारों का मानना ​​है कि बाज़ार में हिस्सा लेने वालों द्वारा नई पोज़िशन बनाने की वजह से यह बढ़ोतरी हुई। ग्लोबल स्तर पर, न्यूयॉर्क में सोने के फ़्यूचर्स 1.13% बढ़कर $4,287.50 प्रति औंस हो गए।

कीमतों में तेजी क्यों

कीमती धातुओं में हालिया तेज़ी की वजह US ट्रेज़री यील्ड में कमी, महंगाई का दबाव कम होने की उम्मीद, डॉलर का कमज़ोर होना और कीमती धातुओं की लगातार मांग है।

स्मॉलकेस मैनेजर और क्वांटस रिसर्च के MD और CEO कार्तिक जोनागदला ने कहा कि COMEX गोल्ड फ़्यूचर्स 3 अगस्त को लगभग $4,090 प्रति औंस से बढ़कर 7 अगस्त को लगभग $4,350 हो गए।उन्होंने इस बदलाव का कुछ हद तक कारण महंगाई के जोखिमों का दोबारा आकलन बताया। ब्रेंट क्रूड 31 जुलाई को लगभग $90.12 प्रति बैरल से गिरकर लगभग $83.3 पर आ गया, जबकि US 10-वर्षीय ट्रेज़री यील्ड भी हाल के स्तरों से नीचे आ गई, हालांकि बाद में यील्ड में कुछ सुधार हुआ।

आमतौर पर बॉन्ड यील्ड गिरने से सोने को फ़ायदा होता है क्योंकि सोने जैसी बिना यील्ड वाली संपत्ति रखने की अवसर लागत (opportunity cost) कम हो जाती है। कमज़ोर डॉलर भी दूसरी करेंसी रखने वाले खरीदारों के लिए डॉलर में कीमत तय होने वाले सोने को सस्ता बना सकता है।

ये आंकड़े हैं अहम

निवेशक फ़ेडरल रिज़र्व के अगले पॉलिसी कदम के संकेत पाने के लिए US के आर्थिक डेटा पर भी नज़र रखे हुए हैं। कमज़ोर लेबर मार्केट से ब्याज दरें कम होने की उम्मीदें बढ़ सकती हैं, जो आम तौर पर सोने के लिए अच्छा होता है।

आगे कहां जा सकते है कीमतें

VT मार्केट्स के सीनियर मार्केट एनालिस्ट – APAC, जस्टिन खू ने कहा कि सोने में हालिया तेज़ी सिर्फ़ ‘सेफ़-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) की मांग के कारण नहीं थी, बल्कि तेल की गिरती कीमतें, US लेबर मार्केट का कमज़ोर डेटा, कम ट्रेजरी यील्ड और जियोपॉलिटिकल रिस्क में बदलाव जैसे कई कारणों से आई थी।

हाल ही में गोल्ड फ़्यूचर्स $4,300 प्रति औंस के स्तर से ऊपर चले गए थे, जबकि चांदी भी कई हफ़्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी।ग्लोबल कीमती धातुओं के लिए अगला बड़ा ट्रिगर US नॉन-फ़ार्म पेरोल रिपोर्ट हो सकती है। नौकरियों के आंकड़ों में नरमी से मॉनेटरी ईज़िंग (ब्याज दरों में कटौती या आसान नीति) की उम्मीदें बढ़ सकती हैं, जबकि उम्मीद से बेहतर डेटा यील्ड और डॉलर को ऊपर ले जा सकता है और सोने पर दबाव डाल सकता है।

जोनागाडला ने कहा कि $4,300 का स्तर सोने के लिए एक अहम टेस्ट है। अगर यह इस स्तर से ऊपर बना रहता है, तो धातु $4,350-$4,400 की रेंज में रह सकती है, जबकि $4,200 से नीचे गिरने पर प्रॉफ़िट-बुकिंग का संकेत मिल सकता है।

हालांकि, भारतीय निवेशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें समीकरण का सिर्फ़ एक हिस्सा हैं। रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट, आयात से जुड़ी लागत और घरेलू मांग भी स्थानीय सोने की कीमतों पर असर डालती हैं।

US डॉलर के मुकाबले रुपया ₹95.22 के आसपास होने के कारण, करेंसी में उतार-चढ़ाव अंतरराष्ट्रीय बुलियन कीमतों में बदलाव को बढ़ा या कम कर सकता है।

Gold Silver price Today: सोने की कीमतों में मामूली बढ़त, चांदी 1.5% उछली, इन अहम आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

क्या मौजूदा EMIs से आपको पर्सनल लोन मिलने की संभावना कम हो जाती है?

पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते समय आपकी मौजूदा EMIs काफी मायने रखती है, जो आपके फाइनैंशियल प्रोफाइल का सबसे अहम हिस्सा है। इनसे पता चलता है कि आपकी हर महीने की कमाई का कितना हिस्सा पहले से ही लोन चुकाने में जा रहा है, जिससे लोन देने वाले संस्थान यह तय करते हैं कि आप एक नई EMI आसानी से चुका पाएँगे या नहीं। पुरानी EMI का बोझ ज़्यादा होने से आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कम हो सकती है, मिलने वाले लोन की रकम घट सकती है, या लोन चुकाने की शर्तों पर असर पड़ सकता है।

हालाँकि, पहले से लोन होने का मतलब यह नहीं है कि आपको लोन मिल ही नहीं सकता। लोन लेने वाले संस्थान फैसला लेने से पहले कई बातों पर गौर करते हैं, जिनमें आपकी इनकम, क्रेडिट स्कोर, नौकरी की स्थिरता, लोन चुकाने का पिछला रिकॉर्ड और आपकी बाकी की देनदारियां शामिल हैं।

अगर आप पर्सनल लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि मौजूदा EMI आपकी एलिजिबिलिटी पर कैसे असर डालती हैं, जिससे आपको ज़िम्मेदारी से लोन लेने और आपके लिए सही लोन मिलने की संभावनाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

मौजूदा EMI आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी पर कैसे असर डालती हैं?

आपकी हर महीने की EMI से आपकी मौजूदा आर्थिक देनदारियों का पता चलता है। जब आप पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो लोन देने वाले संस्थान आपकी इनकम के साथ-साथ इन देनदारियों को भी देखते हैं, उसके आधार पर तय करते हैं कि आप एक और लोन आसानी से चुका पाएंगे या नहीं।

वे आमतौर पर नीचे दी गई बातों पर गौर करते हैं:

  • महीने की इनकम
  • महीने का खर्च
  • शहर
  • जन्म तिथि

अगर आपके महीने की इनकम का एक बड़ा हिस्सा मौजूदा EMI चुकाने में खर्च हो जाता है, तो इसकी वजह से लोन चुकाने की आपकी क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में, लोन देने वाले संस्थान आपकी फाइनैंशियल प्रोफाइल के आधार पर आपको कम लोन दे सकते हैं या लोन चुकाने की समय-सीमा बदल सकते हैं।

लोन देने वाले संस्थान मौजूदा EMI पर क्यों गौर करते हैं?

लोन देने वाले संस्थान यह पक्का करना चाहते हैं कि ग्राहक किसी आर्थिक दबाव के बिना आसानी से लोन चुका सकें। मौजूदा EMI से उन्हें आपके मौजूदा लोन की जानकारी मिलती है और वे यह तय कर पाते हैं कि आपके लिए एक और लोन लेना सही रहेगा या नहीं।

लोन चुकाने से जुड़ी अपनी देनदारियों पर अच्छी तरह गौर करने से ज़िम्मेदारी से लोन लेने को बढ़ावा मिलता है और समय पर भुगतान न हो पाने का जोखिम भी कम होता है।

पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर कैसे मदद कर सकता है?

पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर में दी गई आर्थिक जानकारी के आधार पर आप मिलने वाले लोन की रकम का अंदाजा लगा सकते हैं।

आमतौर पर, इसमें आपको कुछ जानकारी भरनी होती है जैसे कि:

• महीने की इनकम

• मौजूदा EMIs

• रोज़गार का प्रकार

• लोन की पसंदीदा समय-सीमा

यह कैलकुलेटर कुछ ही सेकंड में बता देता है कि आपको कितना लोन मिल सकता है। हालाँकि यह नतीजा सिर्फ़ एक अंदाज़ा होता है, लेकिन लोन के लिए आवेदन करने से पहले पैसों का हिसाब-किताब लगाने में इससे काफी मदद मिलती है।

कौन-सी बातें आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी पर असर डालती हैं?

मौजूदा EMI तो बस मूल्यांकन का एक हिस्सा हैं। लोन देने वाले संस्थान पर्सनल लोन को मंजूरी देने से पहले दूसरी कई बातों पर भी गौर करते हैं।

महीने की इनकम

आम तौर पर, ज़्यादा और स्थिर इनकम से आपकी लोन चुकाने की क्षमता बेहतर होती है, जिससे आपकी एलिजिबिलिटी भी बढ़ सकती है।

क्रेडिट स्कोर

अच्छा क्रेडिट स्कोर लोन के संबंध में आपके ज़िम्मेदारी भरे रवैये को दिखाता है। अगर आप अपने EMI और बिल का समय पर भुगतान करते हैं तो आपको अपने क्रेडिट प्रोफाइल को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

नौकरी में स्थिरता

नौकरीपेशा या अपना रोजगार करने वाले जिन लोगों की इनकम में स्थिरता है और लगातार नौकरी का रिकॉर्ड भी बेहतर है तो ऐसे लोगों को लोन मिलने की संभावना थोड़ी ज्यादा होती है।

लोन की समय-सीमा

लोन चुकाने के लिए लंबी समय-सीमा चुनने से आपकी महीने की EMI कम हो सकती है, हालाँकि इससे पूरे लोन के दौरान कुल मिलाकर ज्यादा ब्याज़ चुकाना पड़ सकता है।

मौजूदा आर्थिक देनदारियाँ

लोन की EMI के अलावा, लोन देने वाले संस्थान आपके लोन चुकाने की क्षमता का अंदाजा लगाते समय आपकी कुल आर्थिक देनदारियों पर भी गौर कर सकते हैं।

क्या आप अपनी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी को बेहतर बना सकते हैं?

भले ही एलिजिबिलिटी कई बातों पर निर्भर करती है, पर लोन के लिए आवेदन करने से पहले आप अपने फाइनैंशियल प्रोफाइल को और बेहतर बना सकते हैं।

आप इन बातों को ध्यान में रख सकते हैं:

•अपने मौजूदा EMIs का समय पर भुगतान करना

• जहां तक हो सके, बकाया लोन कम करना

• थोड़े समय के भीतर बार-बार लोन के लिए आवेदन करने से बचना

• अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखना।

• लोन चुकाने के लिए सही समय-सीमा चुनना

• सिर्फ़ उतनी ही रक़म के लिए आवेदन करना जिसकी आपको असल में ज़रूरत हो

ज़िम्मेदारी से लोन लेने से न सिर्फ़ आपकी एलिजिबिलिटी बेहतर होती है, बल्कि आपको लोन चुकाने में भी आसानी होती है।

पर्सनल लोन फाइनेंसिंग का सुविधाजनक विकल्प क्यों है?

पर्सनल लोन बेहद सुविधाजनक होता है, क्योंकि इसके लिए कोलेटरल की जरूरत नहीं होती और इसका उपयोग पहले से तय या अचानक सामने आने वाले कई तरह के खर्चों के लिए किया जा सकता है।

आप निम्नलिखित कामों के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं:

• मेडिकल इमरजेंसी

• आगे की पढ़ाई

• शादी का खर्च

• घर की मरम्मत

• ट्रैवल का खर्च

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन में 40,000 रुपये से लेकर 55 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है, जिसे चुकाने के लिए 12 महीने से 108 महीने तक की समय-सीमा मिलती है। आपकी एलिजिबिलिटी और क्रेडिट प्रोफ़ाइल के आधार पर ब्याज़ दरें सालाना 10% से 30.5% के बीच हो सकती हैं। इस लोन के लिए किसी कोलेटरल की जरूरत नहीं पड़ती है, तुरंत मंजूरी मिल जाती है, कागजी कार्रवाई कम होती है और लोन की शर्तों को पूरा करने वाले लोगों को 24 घंटे के भीतर पैसे मिल जाते हैं।

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन के लिए कौन-कौन आवेदन कर सकते हैं?

आपकी एलिजिबिलिटी लोन देने वाले संस्थान के नियमों और आपकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है। आम तौर पर, लोगों की एलिजिबिलिटी जांचने के लिए इन बातों को देखा जाता है:

 

राष्ट्रीयताभारतीय
उम्र21 साल से 80 साल तक
नौकरीपब्लिक, प्राइवेट या MNC
CIBIL स्कोर650 या उससे ज्यादा
ग्राहक का प्रोफाइलखुद का रोजगार या नौकरीपेशा

लोन की समय-सीमा पूरी होने पर आपकी उम्र 80 साल या उससे कम होनी चाहिए

लोन पाने की शर्तें पूरी करने से लोन मंजूरी मिलने की गारंटी नहीं मिलती, क्योंकि हर आवेदन का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाता है।

आमतौर पर किन दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है?

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन के लिए बहुत कम दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है। यहाँ उन दस्तावेज़ों की सूची दी गई है जिनकी आवेदन के समय ज़रूरत होती है:

दस्तावेज़ों की श्रेणीमान्य विकल्प
KYC संबंधी दस्तावेज आधार/पासपोर्ट/मतदाता पहचान पत्र/ड्राइविंग लाइसेंस/ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का पत्र/ NREGA जॉब कार्ड
पहचान संबंधी दस्तावेजPAN कार्ड, वास्तविक समय की तस्वीर/फोटो
रोज़गार संबंधी दस्तावेज कर्मचारी पहचान पत्र, नौकरी देने वाली कंपनी द्वारा जारी आवास आवंटन पत्र
इनकम प्रूफ  पिछले 3 महीनों की सैलरी स्लिप, पिछले 3 महीनों का बैंक अकाउंट स्टेटमेंट
अन्य पेंशन ऑर्डर, आवश्यक सेवाओं के बिल, फ़ोन बिल, पाइप्ड गैस बिल, प्रॉपर्टी या नगरपालिका की टैक्स रसीद

लोन चुकाने के विकल्प बेहतर फाइनैंशियल प्लानिंग में कैसे मदद करते हैं?

  • लोन चुकाने की सही समय-सीमा चुनना आपके महीने के बजट को अच्छी तरह संभालने में अहम भूमिका निभाता है।
  • लोन चुकाने की समय सीमा काम हो ने से कुल ब्याज़ तो कम हो सकता है, लेकिन आपकी मासिक EMI बढ़ सकती है। वहीं, लोन चुकाने की लंबी समय-सीमा से आपके महीने की EMI कम हो सकती है, क्योंकि इसमें लोन चुकाने का समय बढ़ जाता है।
  • पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने से पहले, अपनी महीने की इनकम, मौजूदा EMI और अपने आर्थिक लक्ष्यों पर जरूर गौर करें ताकि आप अपने बजट के हिसाब से लोन चुकाने का सही विकल्प चुन सकें।
  • ज़िम्मेदारी से लोन लेने से आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
  • पर्सनल लोन लेने से आपको अपने आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलनी चाहिए, न कि आप पर बेवजह का आर्थिक दबाव पड़ना चाहिए।

लोन लेने से पहले:

• अपनी हर महीने की लोन चुकाने की क्षमता का सही अंदाज़ा लगाएं

• सिर्फ़ उतनी ही रकम लोन लें जितनी आपको ज़रूरत हो

• सभी EMI का भुगतान समय पर करते रहें

• अपनी लोन लेने की क्षमता का अंदाज़ा लगाने के लिए पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें

• ऑफ़र मान लेने से पहले लोन की शर्तों को ध्यान से पढ़ें

ज़िम्मेदारी से लोन लेने से आपको अपनी आर्थिक ज़िम्मेदारियों को बेहतर ढंग से पूरा करने के साथ-साथ एक अच्छा क्रेडिट प्रोफ़ाइल बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

मौजूदा EMIs आपके पर्सनल लोन की एलिजिबिलिटी तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं, क्योंकि ये आपकी हर महीने लोन चुकाने की क्षमता पर असर डालती हैं। आपकी इनकम, क्रेडिट प्रोफ़ाइल, नौकरी की स्थिरता और लोन चुकाने के पिछले रिकॉर्ड के साथ-साथ, ये लोन देने वाले संस्थानों को यह समझने में मदद करती हैं कि आप ज़िम्मेदारी से कितना लोन ले सकते हैं। आवेदन करने से पहले पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर का इस्तेमाल करने से आपको एक अंदाज़ा मिलता है और आप भरोसे के साथ अपने फ़ाइनेंस की योजना बना पाते हैं।

नियम व शर्तें लागू