जापान की ओर करीब 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से डॉल्फिन तूफान बढ़ रहा है। इसकी वजह से 2.6 लाख लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए गए हैं। जबकि 500 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। हालात को देखते हुए टोयोटा ने भी अपनी 9 फैक्ट्रियों में काम रोक दिया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, डॉल्फिन कैटेगरी-1 का तूफान है। इसकी लगातार हवा की रफ्तार 144 किमी प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 198 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही है। यह तूफान क्यूशू और ओकिनावा के बीच स्थित द्वीपों की ओर बढ़ रहा है। ओकिनावा द्वीप पर सबसे ज्यादा असर तूफान की वजह से जापान का ओकिनावा द्वीप बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहां छुट्टियां मनाने गए कई हांगकांग के पर्यटक उड़ानें रद्द होने के कारण फंस गए हैं। उन्हें अब जरूरी सामान की कमी, बिजली कटने और पानी की सप्लाई बाधित होने की आशंका का सामना करना पड़ रहा है। हांगकांग से जुड़े ट्रैवल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा की गई तस्वीरों में सुपरमार्केट की ब्रेड की अलमारियां खाली दिखाई दे रही हैं। वहीं, कई इलाकों में मूसलाधार बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। रविवार को चीन पहुंच सकता है तूफान डॉल्फिन तूफान तेजी से चीन के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार तक यह तूफान तट से करीब 820 किलोमीटर दूर था। इसके रविवार दोपहर से सोमवार सुबह के बीच झेजियांग और उत्तरी फुजियान के बीच कहीं टकराने की आशंका है। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी रखा है, जो चार स्तरों वाली चेतावनी प्रणाली में तीसरा सबसे गंभीर स्तर है। झेजियांग, फुजियान और ताइवान में तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम वैज्ञानिक शेन यूयांग के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तक इस तूफान का दायरा झेजियांग प्रांत से करीब 13 गुना बड़ा हो चुका था। झेजियांग का आकार भारत के बिहार राज्य के बराबर है। मौसम विभाग ने कहा कि तूफान का दायरा बहुत बड़ा है, इसलिए सिर्फ तटीय नहीं बल्कि अंदरूनी इलाकों के लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। चीन में AI और ड्रोन की मदद से बचाव कार्य फिलहाल यह साफ नहीं है कि चीन में टकराने के बाद यह किस दिशा में जाएगा। तूफान के 48 घंटे के अलर्ट जोन में पहुंचने के बाद चीन ने तैयारियां और तेज कर दी हैं। सरकारी टीवी सीसीटीवी के मुताबिक, नेशनल मरीन एनवायरनमेंटल फोरकास्टिंग सेंटर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैयार किया है, जो अगले 240 घंटे (10 दिन) तक तूफान की दिशा, ताकत और कहां टकराएगा, इसका अनुमान लगा सकता है। इसके साथ ही ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
जापान की ओर करीब 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से डॉल्फिन तूफान बढ़ रहा है। इसकी वजह से 2.6 लाख लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए गए हैं। जबकि 500 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। हालात को देखते हुए टोयोटा ने भी अपनी 9 फैक्ट्रियों में काम रोक दिया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, डॉल्फिन कैटेगरी-1 का तूफान है। इसकी लगातार हवा की रफ्तार 144 किमी प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 198 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही है। यह तूफान क्यूशू और ओकिनावा के बीच स्थित द्वीपों की ओर बढ़ रहा है। ओकिनावा द्वीप पर सबसे ज्यादा असर तूफान की वजह से जापान का ओकिनावा द्वीप बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहां छुट्टियां मनाने गए कई हांगकांग के पर्यटक उड़ानें रद्द होने के कारण फंस गए हैं। उन्हें अब जरूरी सामान की कमी, बिजली कटने और पानी की सप्लाई बाधित होने की आशंका का सामना करना पड़ रहा है। हांगकांग से जुड़े ट्रैवल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा की गई तस्वीरों में सुपरमार्केट की ब्रेड की अलमारियां खाली दिखाई दे रही हैं। वहीं, कई इलाकों में मूसलाधार बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। रविवार को चीन पहुंच सकता है तूफान डॉल्फिन तूफान तेजी से चीन के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार तक यह तूफान तट से करीब 820 किलोमीटर दूर था। इसके रविवार दोपहर से सोमवार सुबह के बीच झेजियांग और उत्तरी फुजियान के बीच कहीं टकराने की आशंका है। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी रखा है, जो चार स्तरों वाली चेतावनी प्रणाली में तीसरा सबसे गंभीर स्तर है। झेजियांग, फुजियान और ताइवान में तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम वैज्ञानिक शेन यूयांग के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तक इस तूफान का दायरा झेजियांग प्रांत से करीब 13 गुना बड़ा हो चुका था। झेजियांग का आकार भारत के बिहार राज्य के बराबर है। मौसम विभाग ने कहा कि तूफान का दायरा बहुत बड़ा है, इसलिए सिर्फ तटीय नहीं बल्कि अंदरूनी इलाकों के लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। चीन में AI और ड्रोन की मदद से बचाव कार्य फिलहाल यह साफ नहीं है कि चीन में टकराने के बाद यह किस दिशा में जाएगा। तूफान के 48 घंटे के अलर्ट जोन में पहुंचने के बाद चीन ने तैयारियां और तेज कर दी हैं। सरकारी टीवी सीसीटीवी के मुताबिक, नेशनल मरीन एनवायरनमेंटल फोरकास्टिंग सेंटर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैयार किया है, जो अगले 240 घंटे (10 दिन) तक तूफान की दिशा, ताकत और कहां टकराएगा, इसका अनुमान लगा सकता है। इसके साथ ही ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जापान और चीन में बार-बार टाइफून क्यों आते हैं? 1. भूमध्य रेखा के पास और उत्तर में स्थित होना पश्चिमी प्रशांत महासागर में हर साल सबसे ज्यादा 25 से 30 तूफान आते हैं। यह दुनिया भर में आने वाले कुल तूफानों का लगभग 30% है। इसकी वजह इस इलाके का भूमध्य रेखा के पास (उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में) स्थित होना है। पृथ्वी के घूमने के कारण यहां हवाओं को गोल घुमाने वाला बल (कोरियोलिस इफेक्ट) बहुत मजबूत होता है। तूफान बनने के बाद ये हवाओं के बहाव के साथ जापान, ताइवान, चीन, कोरिया और फिलीपींस की तरफ बढ़ते हैं। यही वजह है कि इन देशों में सबसे ज्यादा तूफान आते हैं। 2. समुद्र का तेजी से गर्म होना टाइफून बनने और मजबूत होने की सबसे बड़ी वजह गर्म समुद्र है। जब समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है, तो पानी तेजी से भाप बनकर ऊपर उठता है। यह भाप तूफान के लिए ईंधन का काम करती है, जिससे हवाएं और बारिश दोनों बेहद तेज हो जाती हैं। 1901 में दुनिया भर के महासागरों की सतह का औसत तापमान लगभग 15.2°C से 15.3°C था। बीते कुछ साल में यह औसतन वैश्विक समुद्र सतह तापमान 21.1°C को पार कर गया है, जो इतिहास में सबसे ज्यादा है।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सुरक्षा कारणों से दो विधानसभा क्षेत्रों में मतदान फिलहाल टाल दिया गया है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को पुंछ और पलंदरी सीटों पर चुनाव स्थगित करने का फैसला लिया। इन सीटों पर 10 अगस्त को आम चुनाव के तीसरे चरण में मतदान होना था। बताया गया है कि इलाके में लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। अधिकारियों ने अगले आदेश तक इन दोनों सीटों पर मतदान नहीं कराने का निर्णय किया है।
टल गया चुनाव
चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला लेने से पहले गृह विभाग की सुरक्षा रिपोर्ट का अध्ययन किया गया। साथ ही राजनीतिक दलों और चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की राय भी ली गई। आयोग ने कहा कि सुरक्षा स्थिति सामान्य होने के बाद नए मतदान कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) के नेतृत्व में पिछले कई हफ्तों से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। संगठन राजनीतिक और प्रशासन से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहा है।
खासकर पुंछ डिवीजन के कई इलाकों में प्रदर्शन ज्यादा तेज रहे हैं। स्थानीय नेताओं का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा हालात का असर मतदाताओं और चुनाव प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अधिकारियों के अनुसार, चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराना जरूरी है। इसी वजह से पुंछ और पलंदरी सीटों पर मतदान फिलहाल टाल दिया गया है। हालांकि, चुनाव आयोग ने साफ किया है कि 10 अगस्त को तीसरे चरण का मतदान बाकी सभी निर्वाचन क्षेत्रों में तय कार्यक्रम के अनुसार होगा।
लोगों के अंदर है गुस्सा
10 अगस्त को बाग जिले की तीन सीटों और हवेली जिले की एक सीट पर भी मतदान होना है। इसके साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चुनाव का अंतिम चरण पूरा होगा। ये चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब इलाके में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और कई जगह विरोध प्रदर्शन जारी हैं। विपक्षी दल प्रशासन पर शासन व्यवस्था और चुनाव कराने के तरीके को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पुंछ और पलंदरी सीटों से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों ने भी चुनाव आयोग से मतदान टालने की मांग की थी। उनका कहना था कि मौजूदा सुरक्षा हालात मतदाताओं, मतदान कर्मियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि पुंछ और पलंदरी में मतदान की नई तारीख का ऐलान तभी किया जाएगा, जब अधिकारियों को भरोसा हो जाएगा कि वहां शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से चुनाव कराए जा सकते हैं।
Gold Silver Rates Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 7 अगस्त को लगातार चौथे दिन सोने में तेजी आई। यह 200 रुपये चढ़कर 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। विदेशी बाजार में सोने में तेजी का असर इसकी घरेलू कीमतों पर पड़ा। हालांकि चांदी में स्थिरता रही। एमसीएक्स में शाम के कारोबार में गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में अच्छी तेजी दिखी।
दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी में स्थिरता
दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 2,34,800 रुपये प्रति किलोग्राम रही। लेमन मार्केट डेस्ट के हेड (रिसर्च) गौरव गर्ग ने कहा कि जनवरी के बाद यह सोने में सबसे ज्यादा तेजी वाला हफ्ता है। सोने में तेजी की कई वजहें हैं। उन्होंने कहा कि डॉलर में नरमी है और इनफ्लेशन में होने वाली वृद्धि उम्मीद से कम रह सकती है।
विदेश में चांदी में 4 फीसदी का उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में 2 फीसदी तेजी दिखी। इससे इसका भाव 4,325.43 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। सिल्वर में 4 फीसदी की तेजी दिखी। जिससे इसका भाव 64.17 डॉलर प्रति औंस हो गया। सोने और चांदी की कीमतों में क्रूड ऑयल में नरमी का भी हाथ है।
अमेरिका में बेरोजगारी दर में कमी
अमेरिका में जॉब के डेटा आ गए हैं। अमेरिका में जुलाई में नौकरियों में कमी आई, जबकि बेरोजगारी दर थोड़ी कम हुई। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका में नौकरियों के मौके बनने की रफ्तार सुस्त पड़ रही है। बेरोजगारी दर घटकर 4.1 फीसदी पर आ गई। यह बीते पांच सालों में सबसे कम है। इससे यह संकेत मिलता है कि जॉब की तलाश करने वाले अमेरिकी लोगों की संख्या घटी है। इससे यह माना जा रहा है कि आगे अमेरिकी केंद्रीय बैंक का रुख नरम रह सकता है।
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फेड के इंटरेस्ट नहीं बढ़ाने से सोने को सपोर्ट
अगर फेडरल रिजर्व सितंबर में इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाता है तो इसका सोने की कीमतों पर पॉजिटिव असर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। मध्यपूर्व में अगर टेंशन कम होता है तो इसका भी गोल्ड की कीमतों पर पॉजिटिव असर पड़ेगा। हालांकि, अभी अमेरिका और ईरान में सीधी बातचीत की कोई संभावना बनती नहीं दिख रही है।
ओला इलेक्ट्रिक ने 7 अगस्त को जून तिमाही के नतीजों का एलान किया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट लॉस घटकर 336 करोड़ रुपये रह गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 428 करोड़ रुपये था। जून तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 45 फीसदी घटकर 455 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 828 करोड़ रुपये था।
तिमाही-दर-तिमाही आधार पर अच्छा प्रदर्शन
तिमाही दर तिमाही आधार पर ओला प्रदर्शन में अच्छी रिकवरी दिखी। मार्च तिमाही के रेवेन्यू के मुकाबले जून तिमाही में रेवेन्यू 72 फीसदी ज्यादा रहा। मार्च तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 265 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में कंपनी का नेट लॉस 500 करोड़ रुपये था।
जून तिमाही में दोगुनी व्हीकल्स की डिलीवरी
जून तिमाही में व्हीकल्स की डिलीवरी करीब दोगुनी 39,192 यूनिट्स रही। तिमाही दर तिमाही आधार पर रजिस्ट्रेशन 97 फीसदी बढ़ा। इस दौरान इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट की ग्रोथ 17 फीसदी रही। जून तिमाही में ओला इलेक्ट्रिक की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 8.4 फीसदी हो गई। मार्च तिमाही में यह 5.1 फीसदी थी।
ग्रॉस मार्जिन में दिखा इम्प्रूवमेंट
कंपनी का ग्रॉस मार्जिन जून तिमाही में 30.5 फीसदी रहा। एडजस्टेड ऑपरेटिंग EBITDA में भी इम्प्रूवमेंट दिखा। यह निगेटिव 195 करोड़ रुपये रहा, जो मार्च तिमाही में निगेटिव 326 करोड़ रुपये था। ऑपेरटिंग EBITDA में भी इम्प्रूवमेंट दिखा। यह निगेटिव 281 करोड़ से घटकर निगेटिव 165 करोड़ रुपये रह गया।
कंपनी ने क्यूआईपी से जुटाए 780 करोड़ रुपये
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, “FY27 की पहली तिमाही में पिछले साल किए गए बदलावों का असर दिखा। सेल्स, रजिस्ट्रेशन, फुलफिलमेंट, सर्विस और बैटरी आरएंडडी में AI आधारित प्रोसेसेज के इस्तेमाल से कंपनी को खर्च घटाने में मदद मिली।” जून तिमाही में कंपनी ने क्वालिफायड इंस्टीट्यूशन प्लेसमेंट से 780 करोड़ जुटाने का प्रोसेस पूरा किया। इससे कंपनी की बैलेंसशीट को मजबूती मिली।
आपरेटिंग एक्सपेंसेज में भी कमी
कंपनी ने कहा है कि वह डीलर-आधारित डिस्ट्रिब्यूशन मॉडल का विस्तार जारी रखेगी। इन-हाउस बैटरीसेल इंटिग्रेशन पर भी कंपनी का फोकस बना रहेगा। जून तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग एक्सपेंसेज घटकर 333 करोड़ रुपये रह गया। मार्च तिमाही में यह 428 करोड़ रुपये था।
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तीन महीनों में शेयर में 17 फीसदी उछाल
Ola Electric का शेयर 7 अगस्त को 0.89 फीसदी गिरकर 41.07 रुपये पर क्लोज हुआ। बीते तीन महीने में यह शेयर 17 फीसदी चढ़ा है। कंपनी ने शेयर बाजार बंद होने के बाद जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। 10 अगस्त सोमवार को शेयर बाजार खुलने पर कंपनी के शेयर पर नतीजों का असर दिखेगा।

We exclusively reported that BYD would bring its luxury sub-brand Denza to our market. The Chinese carmaker will enter our shores with the debut of the D9 luxury MPV. While a festive season launch is being considered, if delayed, it could be moved to the Bharat Mobility Global Expo in February 2027. Ahead of its arrival in India, here’s all that you can expect from the Denza D9.
1. What seating configurations will the Denza D9 offer?
The Denza D9 is expected to offer a 2+2+3 seating configuration. Rivals like the Toyota Vellfire and Lexus LM offer the same configuration, while the latter offers a 2+2 configuration as well. The MG M9 and Mercedes-Benz V-Class offer a 2+2+2 configuration, while the Merc is also available in a 2+2 seat layout like the LM.
2. How large is the Denza D9?
The global-spec Denza D9 is 5,250mm long, 1,960mm wide, 1,920mm tall and has a 3,110mm wheelbase. Compared to other luxury MPVs in our market, the D9 is longer, wider and has a longer wheelbase longer than the Toyota and Lexus, but is shorter than the other two. But compared to the M9 and Mercedes-Benz V-Class, the D9’s dimensions are overall smaller.
3. Will the Denza D9 arrive in India as a CBU or be locally assembled?
Initially, the Denza D9 is expected to be sold as a full import in India. This will allow Denza to enter the market quickly, assess demand and take long-term decisions accordingly.
4. What features are expected on the Denza D9?

As for equipment, the global-spec D9 gets a 15.6-inch infotainment screen with Apple CarPlay and Android Auto, 10.25-inch digital driver’s display, panoramic sunroof, 8-way powered front seats with ventilation and massage functions, ambient lighting, triple-zone air conditioning, 14-speaker Dynaudio audio system, air purifier, wireless phone charger, 12-inch head-up display, powered tailgate and sliding rear doors.
Safety features include multiple airbags, an ADAS suite, surround view cameras, ESC, traction control, ISOFIX Mounts, hill hold control, driver fatigue warning and distraction detection, TPMS, and an auto-dimming IRVM.
5. What features are the second row occupants likely to get in the Denza D9?

The second row captain chairs have built-in leg rests and have 10-way power adjustment with memory and come with ventilation and massage functions. There’s also a powered boss mode, retractable tables, and a refrigerator as well. Additionally, LED displays integrated within the armrests of the second row seats control various car functions.
6. What powertrains are expected to power the Denza D9?
Globally, the Denza D9 is available in all-electric and plug-in hybrid versions. However, BYD is likely considering the former option for India, as EVs are subject to a lower 5 percent GST. Plug-in hybrid variants could be considered at a later stage.

While exact specifications remain under wraps, the global-spec D9 electric is powered by a 103.6kW battery pack. This battery pack can be had in a FWD configuration with a motor producing 314hp and 360Nm of torque. AWD versions add a 61hp, 110Nm motor, bringing the combined power output to 373hp and 470Nm of torque.
FWD versions get an NEDC-claimed range of 600km, while AWD versions have a claimed range of 580km. As far as charging is concerned, the D9 supports up to 11kW and 166kW outputs on AC and DC charging, respectively.
7. Will the Denza D9 be sold alongside other models from the BYD stable?
To maintain distinction between BYD and its sub-brand, the Denza D9 is expected to be sold via dedicated Denza outlets rather than through its existing retail network.
8. What is the expected price of the Denza D9?
Expect the Denza D9 to have an ex-showroom price of around Rs 90 lakh. The D9 will compete in the growing luxury MPV space and will be positioned above the all-electric MG M9 (Rs 79.95 lakh), but undercut the strong-hybrid-powered Toyota Vellfire (Rs 1.20 crore) and Lexus LM (Rs 2.20 crore to Rs 2.75 crore), and the Mercedes V-Class (Rs 1.40 crore), which offers petrol and diesel engines.
शेयरों की तरह जोरदार रिटर्न के लिए म्यूचु्अल फंड की सही स्कीम का चुनाव जरूरी है। कुछ फंडों का रिटर्न हमेशा कैटेगरी के औसत रिटर्न से काफी ज्यादा होता है। एनालिसिस के नतीजे बताते हैं कि कुछ फंडों ने सिप के निवेशकों को सालाना 20 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिए हैं। खास बात यह है कि स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स रिटर्न देने में सबसे आगे हैं।
बीते पांच सालों में स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स का जलवा
सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले 10 फंडों में 9 फंड स्मॉलकैप और मिडकैप कैटेगरी के हैं। इनमें 4 स्मॉलकैप स्कीम हैं। पांच मिडकैप स्कीम हैं। SBI Children Fund सिर्फ एक अपवाद है, जो फ्लेक्सीकैप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करता है।
इससे यह संकेत मिलता है कि बीते 5 सालों में जिन निवेशकों ने ज्यादा रिस्क लिया, उन्हें ज्यादा रिटर्न मिला। इस दौरान स्मॉलकैप कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा। स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों ने सिप के निवेशकों को लार्जकैप फंडों के मुकाबले ज्यादा रिटर्न दिए।
एक्टिव लार्जकैप फंड्स की चमक पड़ी फीकी
सिप इनवेस्टर्स को सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले फंडों में एक भी एक्टिवली मैनेज्ड लार्जकैप फंड शामिल नहीं है। पिछले पांच सालों में लार्जकैप स्कीम में सबसे अच्छा प्रदर्शन Invesco India Largecap Fund का रहा है। इसका सालाना सिप रिटर्न 14.27 फीसदी रहा है। यह 64 लार्जकैप फंड्स में 10वें नंबर पर है। लार्जकैप कैटेगरी में टॉप 9 पोजीशन पर इंडेक्स फंड और ईटीएफ रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि लार्जकैप कैटेगरी में पैसिव फंड्स एक्टिव फंड मैनेजर्स को चुनौती दे रहे हैं।
जोरदार रिटर्न देने वाले फंड्स में उतार-चढ़ाव भी ज्यादा
बीते पांच सालों में स्मॉलकैप और मिडकैप रिटर्न देने में सबसे आगे रहे हैं। लेकिन, म्यूचुअल फंड्स की इन दोनों कैटेगरी में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखा है। उनका शानदार प्रदर्शन फेवरेबल मार्केट साइकिल में दिखा है। इस ट्रेंड के अगले पांच सालों में रिपीट होने की गारंटी नहीं है।

रिस्क लेने की कपैसिटी के आधार पर फंड का सेलेक्शन्
एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी फंड के पिछले रिटर्न को देखकर निवेश का फैसला ठीक नहीं है। इनवेस्टर को यह देखने की जरूरत है कि वह कितना रिस्क ले सकता है। किसी फंड का लंबी अवधि में लगातार अच्छा प्रदर्शन कुछ सालों में बेहतर प्रदर्शन के मुकाबले ज्यादा मायने रखता है।
RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन ने चीनी रिटेल चेन ‘पैंग डोंग लाई’ के फाउंडर और रिटेल टाइकून ‘यू डोंग लाई’ द्वारा शुरू की गई एक अनोखी पॉलिसी का जिक्र किया। यह पॉलिसी एक आसान सिद्धांत पर काम करती है- “अगर आप खुश नहीं हैं, तो काम पर न आएं।” इस सिस्टम के तहत, मैनेजमेंट छुट्टी देने से मना नहीं कर सकता, क्योंकि इसका मकसद कर्मचारियों को आराम का समय खुद तय करने की आजादी देना है।
हर्ष गोयनका ने एक्स पर पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने लिखा- चीन की रिटेल कंपनी ‘पैंग डोंग लाई’ अपने कर्मचारियों को 10 दिन की पेड “अनहैपी लीव” देती है। कंपनी के फाउंडर यू डोंगलाई की सोच साफ है- “अगर आप खुश नहीं हैं, तो काम पर न आएं।” कहा जाता है कि मैनेजर इस तरह की छुट्टी की रिक्वेस्ट को मना नहीं कर सकते।
उन्होंने आगे लिखा-क्या यह कुछ ज़्यादा ही है? शायद। हमें इस बात पर और गहराई से सोचने की ज़रूरत है कि क्या भारतीय माहौल में ‘अनहैपी लीव’ की जरूरत है या फिर क्या बर्नआउट (काम के तनाव से होने वाली थकान) को रोकने और ऐसा वर्कप्लेस बनाने का कोई बेहतर तरीका हो सकता है, जहां लोग सच में काम पर आना चाहें।
Chinese retailer Pang Dong Lai gives employees 10 days of paid “unhappy leave.” Founder Yu Donglai’s philosophy is simple “If you’re not happy, don’t come to work.” Managers are reportedly not allowed to refuse the request.
Extreme? Perhaps.
We do need a broader conversation if…
— Harsh Goenka (@hvgoenka) August 7, 2026
गोयनका ने बदलते ग्लोबल वर्क कल्चर को देखते हुए यह पोस्ट शेयर किया है। लेकिन उनके प्रोफेशनल नेटवर्क में इसे लेकर बहुत अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कमेंट बॉक्स में लोग-लोग अपने विचार शेयर कर रहे हैं।
कुछ लोगों को उनका ये सजेशन पसंद नहीं आया। लोगों का कहना है कि अगर पूरी टीमें परफॉर्मेंस टारगेट पूरे न होने के बाद महीने के आखिरी दिनों जैसी अहम तारीखों पर “अनहैप्पी लीव” (unhappy leave) के लिए अप्लाई करती हैं, तो यह खतरनाक हो सकता है। कंपनी पर गहरा असर पड़ेगा।
वहीं कई प्रोफेशनल्स का तर्क है कि छुट्टी देने से सिस्टम की कई समस्याओं को ठीक नहीं किया जा सकता है। वहीं कुछ ने कहा कि लीडर्स को अटेंडेंस मैनेज करने के बजाय “उत्साह बढ़ाने” पर ध्यान देना चाहिए, जिससे मेंटल हेल्थ की वजह से छुट्टी लेने की जरूरत अपने आप कम हो जाएगी।
Sugar Price : फेस्टिवल सीजन में चीनी का स्वाद फीका पड़ सकता है। पिछले एक महीने में कुछ राज्यों में चीनी के दाम 15% तक बढ़े हैं। इसका उत्पादन बढ़ाने के लिए चीनी मिलों ने शुगर क्रशिंग पहले शुरू करने का फैसला लिया है। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले एक महीने के अंदर चीनी के दाम औसतन 8 फीसदी तक बढ़ गए हैं। ऐसे में चीनी का उत्पादन बढ़ा कर इसके बढ़ते दाम को थामने के लिए चीनी मिलों ने इस साल शुगर क्रशिंग पहले शुरू करने का फैसला किया है।
इस साल फेस्टिवल सीजन में चीनी का स्वाद फीका हो सकता है। दरअसल,इस साल अनुमान के मुताबिक चीनी का उत्पादन नहीं हुआ है। इस साल चीनी का उत्पादन 293 लाख टन रहने का अनुमान था लेकिन ये 280 लाख टन ही रहा,जो अनुमान के मुकाबले करीब 5% कम है। पिछले साल का करीब 50 लाख टन स्टॉक उपलब्ध है लेकिन देश में कुल चीनी की खपत 280 लाख टन होती है। इस साल करीब 8 लाख टन चीनी निर्यात हुई है। पिछले महीने चीनी के होलसेल दाम में 400 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। इसे देखते हुए कंपनियों ने इस साल चीनी का उत्पादन 10-15 दिन पहले शुरू करने का फैसला किया है।
अगर सरकार के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली में 1 महीने पहले चीनी का दाम 45 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 49 रुपए प्रति किलो हो गया है। वहीं,पश्चिम बंगाल में 1 महीने पहले इसका दाम 49 रुपए प्रति किलो था जो अब 55 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। चेन्नई में 1 महीने पहले चीनी का दाम 46 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 53 रुपए प्रति किलो हो गया है। मुंबई में 1 महीने पहले चीनी का दाम 46 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 52 रुपए प्रति किलो हो गया है। इसी तरह रांची में 1 महीने पहले चीनी का दाम 47 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 51 रुपए प्रति किलो हो गया है। पिछले एक महीने में चीनी के दाम औसतन 8 फीसदी तक बढ़े हैं। कुछ राज्यों में तो चीनी के दाम में 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।
चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाई है। साथ ही चीनी मिलों के स्टॉक की भी जांच की है। लेकिन एल नीनो और अगले साल चीनी का उत्पादन कम होने की आशंका से दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
चीनी कंपनियों मार्जिन में आएगा सुधार
चीनी की कीमतों में बढ़त से उपभोक्ता भले ही परेशान हों लेकिन इससे चीनी मिल कंपनियों को फायदा होगा। चीनी के दाम बढ़ने से बलरामपुर चीनी,द्वारिकेश शुगर,श्री रेणुका शुगर और डालमिया भारत शुगर जैसी कंपनियों के मुनाफे में बढ़ोतरी की उम्मीद है। ऊंचे दाम से उनके मार्जिन सुधर सकते हैं। साथ ही यह सरकार के महत्वाकांक्षी इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के लिए भी झटका साबित हो सकता है। ऊंची कीमतों की वजह से मिलें इथेनॉल बनाने के बजाय चीनी बेचना ज्यादा फायदेमंद समझ सकती हैं, जिससे देश में इथेनॉल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
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Flying Car: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके के एक व्यक्ति ने उस चीज को असलियत में बदल दिया है, जिसे ज़्यादातर लोग सिर्फ़ साइंस-फ़िक्शन (काल्पनिक विज्ञान) समझते थे। अल्मोड़ा के काफ़लीखान गांव के रहने वाले इनोवेटर रवि टम्टा ने ‘HAPIDA SKYNeX’ का सफल टेस्ट-फ़्लाइट किया है। यह एक-सीट वाला इलेक्ट्रिक फ़्लाइंग व्हीकल प्रोटोटाइप है, और उन्हें उम्मीद है कि एक दिन यह भारत में पर्सनल ट्रांसपोर्टेशन (निजी परिवहन) को पूरी तरह बदल देगा।
अल्मोड़ा में एक खुले मैदान में की गई इस टेस्ट-फ़्लाइट के वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। टम्टा के स्टार्टअप ‘Hapida Sky Private Limited’ के तहत बना यह एयरक्राफ़्ट, ड्रोन टेक्नोलॉजी का ही एक मॉडिफ़ाइड और अपग्रेडेड वर्शन है, जिसे किसी व्यक्ति को हवा में सुरक्षित रूप से ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
तमटा का कहना है कि यह आइडिया एक आम समस्या से आया। उनके गांव से घर तक का 40 किलोमीटर का सफ़र, जिसमें सड़क मार्ग से आमतौर पर लगभग 90 मिनट लगते हैं, हवाई मार्ग से सिर्फ़ 10 मिनट में पूरा किया जा सकता है। उनका लंबे समय का विज़न एक सुरक्षित, इलेक्ट्रिक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल बनाना है, जिससे हवाई सफ़र आसान और व्यावहारिक हो सके, खासकर पहाड़ी इलाकों में।
इसे अपने करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर बताते हुए, टम्टा ने कहा कि सफल लिफ्ट-ऑफ कई सालों की रिसर्च, संघर्ष, प्रयोगों और लगातार कोशिशों का नतीजा था। टेस्ट के बाद उन्होंने कहा, “आज मेरी ज़िंदगी का बहुत बड़ा दिन है। मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी और गर्व हो रहा है कि HAPIDA SKYNeX की पहली सफल उड़ान कई सालों की रिसर्च, संघर्ष, प्रयोगों और लगातार कोशिशों का नतीजा है।”
Almora innovator Ravi Tamta successfully tests HAPIDA SKYNeX flying vehicle prototype.
A major innovation has emerged from Almora, Uttarakhand, where Ravi Tamta, Founder and CEO of Hapida Sky Private Limited, announced the successful flight of the HAPIDA SKYNeX prototype.
Tamta… pic.twitter.com/7MFKnR2ow9
— GFN (@GFNIND) August 7, 2026
इस कामयाबी ने ऑनलाइन लोगों का दिल जीत लिया है। एक यूज़र ने लिखा, “अद्भुत! यह पहाड़ी इलाकों में ट्रांसपोर्टेशन के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।” एक और यूज़र ने कमेंट किया, “हमें सिर्फ़ डिग्री-होल्डर्स की नहीं, बल्कि ऐसे इनोवेटर्स की ज़रूरत है।” कुछ लोगों ने इसे “उत्तराखंड का पहला बड़ा इनोवेशन” बताया और अधिकारियों से टम्टा के काम को मान्यता देने और उसे सपोर्ट करने की अपील की। एक और यूज़र ने कहा, “हमारे पहाड़ी इलाकों से बहुत अच्छी खबर है।”
हालांकि HAPIDA SKYNeX अभी सिर्फ़ एक प्रोटोटाइप है और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए तैयार होने में अभी काफी समय है, लेकिन इसकी सफल टेस्ट फ़्लाइट एक अहम शुरुआती कदम है। रवि टम्टा के लिए, यह सिर्फ़ एक उड़ने वाली मशीन बनाने की बात नहीं है—यह साबित करने की बात है कि भारत के छोटे कस्बों और गांवों से भी वर्ल्ड-क्लास इनोवेशन निकल सकते हैं।

