Bihar Temple Stampede: बिहार के लखीसराय में अशोकधाम मंदिर में भगदड़! 7 लोगों की मौत, बिजली का तार गिरने से एक दर्जन से ज्यादा श्रद्धालु घायल

Bihar Temple Stampede: बिहार के लखीसराय में स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर 17 अगस्त की सुबह बड़ा हादसा हो गया। मंदिर में भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसमें कम से कम 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। ‘न्यूज 18’ के मुताबिक, इस हादसे में एक दर्जन से ज्यादा श्रद्धालु घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में सभी महिलाएं होने की जानकारी सामने आई है।

हादसे के वक्त मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, करीब 50 हजार श्रद्धालु मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में मौजूद थे।  बताया जा रहा है कि वहां बिजली का एक खंभा गिर गया। इससे लोग बिजली की चपेट में आ गए, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

लखीसराय के DM शैलेंद्र कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। सुबह करीब 6.30-6.45 बजे दो ट्रेनें आईं, जिससे भीड़ और बढ़ गई। हमने भीड़ का अंदाजा लगाते हुए इंतजाम किए थे। फिर हमें पता चला कि भीड़ की वजह से एक तरफ की बैरिकेडिंग टूट गई और लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े। हमने तुरंत 10-15 लोगों को यहां भेजा।”

7 लोगों की मौत की पुष्टि

मंदिर में हुए हादसे पर SDPO शिवम कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, “सात लोगों की मौत की खबर है। बताया जा रहा है कि वहां बिजली का एक खंभा गिर गया और लोग बिजली की चपेट में आ गए, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हम पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही सही वजह बता पाएंगे।” घायलों को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया है। उनका इलाज जारी है।

बिजली के खंभे की अफवाह से मची भगदड़?

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हादसा अशोक धाम रेलवे स्टेशन से मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर हुआ। बताया जा रहा है कि रात के दौरान इस रास्ते पर एक बिजली का खंभा गिर गया था। सोमवार सुबह भीड़ के बीच अचानक यह अफवाह फैल गई कि गिरे हुए बिजली के खंभे में करंट दौड़ रहा है।

इस खबर से श्रद्धालुओं में घबराहट फैल गई और लोग अचानक इधर-उधर भागने लगे। देखते ही देखते रास्ते पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। भीड़ में कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और दूसरे श्रद्धालुओं ने भीड़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने और घायलों की मदद करने की कोशिश की।

सभी घायल महिलाएं, कई की हालत गंभीर

हादसे में घायल हुए सभी श्रद्धालुओं के महिला होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को इलाज के लिए लखीसराय सदर अस्पताल ले जाया गया है, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और चिकित्सा व्यवस्था में जुट गईं।

मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। स्वास्थ्य विभाग और राहत-बचाव दलों को भी घटनास्थल पर लगाया गया है। अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

सावन की तीसरी सोमवारी पर उमड़ी थी भारी भीड़

सोमवार को सावन की तीसरी सोमवारी और नागपंचमी होने के कारण अशोक धाम मंदिर में सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए दूर-दूर से लोग आए थे। भारी भीड़ के बीच बिजली के खंभे को लेकर फैली अफवाह ने अचानक लोगों में डर पैदा कर दिया। इस दौरान देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई। बिहार प्रशासन की ओर से फिलहाल घटना की डिटेल्स जांच की जा रही है। हादसे के सही कारण और मृतकों एवं घायलों की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।

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Ghaziabad-Sitapur Rail Project: पश्चिमी यूपी को बड़ी सौगात! गाजियाबाद से सीतापुर के बीच 403 KM की बिछेगी नई रेल लाइन, हापुड़ को भी होगा बड़ा फायदा

Ghaziabad–Sitapur Rail Project: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा बल मिला है। गाजियाबाद से हापुड़ होते हुए सीतापुर तक करीब 406 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाने की प्रस्तावित योजना अब सर्वे के चरण में पहुंच गई है। इस महत्वाकांक्षी रेलवे प्रोजेक्ट का फाइनल सर्वे फिलहाल जारी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 14,926 करोड़ रुपये बताई गई है। रेलवे की ओर से एक RTI के जवाब में दी गई जानकारी सामने आने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश, खासकर हापुड़ और आसपास के क्षेत्रों में नई रेल कनेक्टिविटी की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।

इसी साल 18 अप्रैल को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गाजियाबाद और सीतापुर के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के निर्माण को मंजूरी दी थी। उम्मीद है कि इससे रेलवे की क्षमता काफी बढ़ेगी, सेवा की विश्वसनीयता में सुधार होगा और देश के सबसे व्यस्त कॉरिडोर में से एक पर भीड़ कम होगी। यह प्रोजेक्ट गाजियाबाद-सीतापुर सेक्शन दिल्ली-गुवाहाटी हाई-डेंसिटी नेटवर्क का एक अहम हिस्सा है।

अभी यह अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहा है। इसका इस्तेमाल 168% तक पहुंच गया है। अगर विस्तार नहीं किया गया, तो इसके 207% तक बढ़ने का अनुमान है। दो नई अतिरिक्त लाइनों का मकसद इस रुकावट को दूर करना और यात्री एवं मालगाड़ियों की आवाजाही को आसान बनाना है।

फाइनल सर्वे का काम जारी

प्रस्तावित रेल लाइन गाजियाबाद को हापुड़ के रास्ते सीतापुर से जोड़ेगी। फिलहाल रेलवे इस रूट से जुड़े अंतिम सर्वे का काम कर रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद परियोजना के तकनीकी और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का आकलन किया जाएगा। करीब 406 किलोमीटर लंबे इस रेल कॉरिडोर के बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों को बेहतर रेल नेटवर्क से जोड़ने की संभावना है।

हापुड़ और आसपास के क्षेत्रों को बड़ा फायदा

इस परियोजना से सबसे अधिक उम्मीद हापुड़ और उसके आसपास के क्षेत्रों में दिखाई दे रही है। नई रेल लाइन बनने से इन इलाकों के लोगों को आवागमन के लिए अतिरिक्त रेल संपर्क मिल सकता है।बेहतर रेल कनेक्टिविटी से यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और माल परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद मिल सकती है।

₹14,926 करोड़ की है प्रस्तावित परियोजना

प्रस्तावित परियोजना की अनुमानित लागत करीब 14,926 करोड़ रुपये है। हालांकि, अभी यह योजना सर्वे के चरण में है। इसलिए निर्माण कार्य शुरू होने से पहले आगे की तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। रेलवे के RTI जवाब से यह स्पष्ट हुआ है कि परियोजना को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। वर्तमान में फाइनल सर्वे किया जा रहा है।

पश्चिमी यूपी की रेल कनेक्टिविटी को मिल सकता है नया विकल्प

गाजियाबाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण शहर है। जबकि हापुड़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रमुख जिला है। ऐसे में गाजियाबाद-हापुड़-सीतापुर के बीच नया रेल संपर्क तैयार होने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिल सकती है। नई रेल लाइन भविष्य में यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों की आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

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साथ ही, मौजूदा रेल रूट्स पर दबाव कम करने और ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, इस परियोजना को लेकर सबसे अहम पड़ाव फाइनल सर्वे का पूरा होना है। इसके बाद परियोजना के निर्माण और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।

Palamu Jyotirlinga Temple: झारखंड के इस मंदिर में एक साथ कर सकते हैं 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, उज्जैन की मिट्टी से बनी है महाकाल की प्रतिमूर्ति

Palamu Jyotirlinga Temple: शिव भक्तों के लिए महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा बेहद पावन और पवित्र यात्रा है। लेकिन, इनमें से कुछ बेहद दुर्गम स्थानों पर स्थित हैं, जहां हर किसी के लिए पहुंचना संभव नहीं है। इसके बावजूद, हर शिवभक्त द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने की इच्छा अपने मन में जरूर रखता है। शायद झारखंड के पलामू स्थिति भगवती भवन मंदिर का निर्माण भी इसी सोच के साथ किया गया होगा। इस मंदिर के परिसर में एक ही छत के नीचे सभी 12 ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं। यानी श्रद्धालु एक यात्रा में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की यात्रा का पुण्य पा सकते हैं।

उज्जैन की मिट्टी से बनी महाकाल की प्रतिमूर्ति

अपनी इस अनोखी विशेषता के कारण यह शिवभक्तों के बीच दिलचस्पी का केंद्र है। खासतौर से उन भक्तों के लिए, जो कम भीड़-भाड़ वाली धार्मिक जगहों पर घूमना पसंद करते हैं। भगवती भवन मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों प्रतिरूप होने के साथ ही यहां स्थित महाकाल की प्रतिमूर्ति भी है। मंदिर के मुख्य पुजारी शिबुल पंडित ने लोकल18 को बताया कि यहां महाकाल की प्रतिमूर्ति को उज्जैन से लाई गई मिट्टी से बनाया गया है। पारंपरिक रूप से, भक्त 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने के लिए भारत के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा करते हैं। हालांकि, भगवती भवन में, इन पवित्र रूपों का अनुभव एक ही परिसर में किया जा सकता है।

प्रकृति की गोद में बसा है झारखंड का पलामु

शिव भक्तों के लिए, भगवती भवन एक अलग तरह का तीर्थ अनुभव देता है। कई राज्यों में घूमने के बजाय, श्रद्धालु एक ही जगह पर 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर सकते हैं। पलामू अपने जंगलों, जंगली जानवरों और खूबसूरत नजारों के लिए ज्यादा जाना जाता है। हालांकि इस इलाके में कई धार्मिक और ऐतिहासिक जगहें भी हैं। जिला प्रशासन के अथक प्रयासोंक की बदौलत यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक जगहों के साथ-साथ अन्य टूरिस्ट आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

कैसे पहुंचें पलामु

पलामू का जिला हेडक्वार्टर मेदिनीनगर (डाल्टनगंज) है, जो सड़क और रेल से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। सबसे पास का एयरपोर्ट रांची में बिरसा मुंडा एयरपोर्ट है, जो मेदिनीनगर से लगभग 165 km दूर है।

ट्रेन से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए डाल्टनगंज रेलवे स्टेशन जिले का मुख्य रेलवे स्टेशन है। यहां पर रेगुलर पैसेंजर और एक्सप्रेस सर्विस हैं, जिनमें नई दिल्ली, कोलकाता, रांची और पटना जैसे शहरों के लिए सीधे ट्रेनें शामिल हैं।

पलामू रांची, पटना, वाराणसी और आस-पास के दूसरे शहरों से सड़क के रास्ते भी पहुंचा जा सकता है। जिला प्रशासन का कहना है कि डाल्टनगंज रांची से लगभग 165 km दूर है, और रांची और झारखंड के दूसरे बड़े शहरों और पड़ोसी राज्यों से रेगुलर बस सर्विस उपलब्ध हैं।

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मानसून में जरूर करें भारत के इन डेस्टिनेशन को एक्सप्लोर, बारिश में खिल उठती है इनकी खूबसूरती

मानसून का मौसम आते ही घूमने का मजा कई गुना बढ़ जाता है। इस दौरान भारत के ऐतिहासिक स्मारक भी एक अलग ही खूबसूरती में नजर आते हैं। बारिश की हल्की फुहारें, ठंडी हवाएं और चारों ओर फैली हरियाली इन जगहों को खूबसूरत बना देती हैं। किले, महल और प्राचीन इमारतें इस मौसम में पहले से ज्यादा खूबसूरत दिखाई देती हैं। इतिहास पसंद करने वालों के साथ-साथ फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह समय बेहद खास माना जाता है।

हुमायूं का मकबरा, दिल्ली (Humayun’s Tomb, Delhi)

Humayun Tomb Pictures | Download Free Images on Unsplash

दिल्ली में हुमायूं का मकबरा मानसून के मौसम में और भी खूबसूरत दिखाई देता है। बारिश के बाद चारों ओर फैले चारबाग बगीचे हरियाली से भर जाते हैं और लाल बलुआ पत्थर से बना यह ऐतिहासिक स्मारक बिल्कुल नया-सा नजर आता है। हल्के बादल और ठंडी हवा यहां घूमने का एक्सपीरियंस और भी खास बना देते हैं। इतिहास, फोटोग्राफी या शांत माहौल पसंद करने वालों के लिए मानसून में यह जगह परफेक्ट है।

अजंता की गुफाएं, महाराष्ट्र (Ajanta Caves, Maharashtra)

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महाराष्ट्र की सह्याद्रि पहाड़ियों के बीच बनी अजंता की गुफाएं बारिश के मौसम में किसी जादुई दुनिया जैसी लगती हैं। मानसून के दौरान आसपास छोटे-छोटे झरने बहने लगते हैं और हर तरफ हरियाली छा जाती है। बौद्ध कला और प्राचीन चित्रों से सजी ये गुफाएं प्रकृति के बीच और भी अट्रैक्टिव दिखाई देती हैं। यहां इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता एक साथ देखने को मिलती है।

बेकल किला, केरल (Bekal Fort, Kerala)

Bekal Fort Images - Bekal Fort Photo Gallery - Bekal Kerala Pictures

केरल के समुद्र किनारे बना बेकल किला मानसून में बेहद खूबसूरत नजर आता है। एक तरफ अरब सागर की ऊंची लहरें और दूसरी तरफ बारिश से भीगी किले की दीवारें इस जगह की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देती हैं। ठंडी हवा, समुद्र का नजारा और हरियाली यहां आने वाले टूरिस्ट को यादगार एक्सपीरियंस देते हैं। फोटोग्राफी के लिए भी यह जगह शानदार मानी जाती है।

 

मांडू किला, मध्य प्रदेश (Mandu Fort, Madhya Pradesh)

Mandu Forts MP: Monuments, History & Guide

मध्य प्रदेश का मांडू मानसून के दौरान पूरी तरह हरियाली से ढक जाता है। जहाज महल, हिंडोला महल, प्राचीन बावड़ियां और पुराने महल बारिश के मौसम में और भी अट्रैक्टिव दिखाई देते हैं। बादलों से घिरी पहाड़ियां और ठंडी हवाएं इस ऐतिहासिक शहर की खूबसूरती में चार चांद लगा देती हैं। इतिहास और प्रकृति का आनंद एक साथ लेना चाहते हैं, तो मांडू बेहतरीन जगह है।

 

कोणार्क सूर्य मंदिर, ओडिशा (Konark Sun Temple, Odisha)

Did You Know That An East India Company Complaint Led To Konark Temlpe's Discovery? | Outlook Traveller

ओडिशा का प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर मानसून में और भी भव्य दिखाई देता है। बारिश के बाद मंदिर के आसपास फैली हरियाली और बादलों से भरा आसमान इसकी खूबसूरत पत्थर की नक्काशी को और उभार देता है। यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल यह मंदिर भारतीय वास्तुकला का शानदार उदाहरण है। बारिश के मौसम में यहां घूमने का अलग ही एक्सपीरियंस मिलता है।

चित्तौड़गढ़ किला, राजस्थान (Chittorgarh Fort, Rajasthan)

Chittorgarh Fort - Images, Timings & History - Holidify

राजस्थान का चित्तौड़गढ़ किला मानसून के दौरान बिल्कुल अलग रूप में नजर आता है। बारिश के बाद सूखी पहाड़ियां और मैदान हरियाली से भर जाते हैं, जिससे विशाल किला और भी आकर्षक दिखने लगता है। किले के भीतर बने महल, मंदिर और जलाशय इस मौसम में देखने लायक होते हैं। यहां से आसपास का नजारा भी खूबसूरत दिखाई देता है।

गोल गुंबद, कर्नाटक (Gol Gumbaz, Karnatkaa)

File:Gol Gumbaz -4, Bijapur, Karnataka.jpg - Wikimedia Commons

कर्नाटक के विजयपुरा में गोल गुंबद मानसून के मौसम में बेहद खूबसूरत लगता है। काले बादलों में विशाल गुंबद और भी शानदार दिखाई देता है। बारिश के बाद आसपास के बगीचे हरे-भरे हो जाते हैं, जिससे पूरा परिसर ताजगी से भर जाता है। इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का यह अनोखा स्मारक इतिहास प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए मानसून में घूमने की बेहतरीन जगह है।

ग्वालियर किला, मध्य प्रदेश (Gwalior Fort, Madhya Pradesh)

630+ Gwalior Fort Madhya Pradesh Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock

मध्य प्रदेश का ग्वालियर किला मानसून के मौसम में बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। बारिश के बाद किले के चारों ओर फैली हरियाली और पहाड़ियों पर छाए बादल इसकी खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं। विशाल प्राचीर, प्राचीन महल, मंदिर और शानदार नक्काशी खूब अट्रैक्ट करती है। किले की ऊंचाई से पूरे शहर का सीन दिखाई देता है, जो मानसून में और भी खूबसूरत लगता है। इतिहास, वास्तुकला और फोटोग्राफी का आनंद एक साथ लेना चाहते हैं, तो ग्वालियर किला बेहतरीन ऑप्शन है।

जिनकी जेब से राममंदिर निर्माण के लिए एक पैसा नहीं निकला, वे लोग कर रहे चंदा चोरी की बात : CM योगी

Jevar Airport Farmers meet cm yogi

Yogi Adityanath statement on Ram Temple funds: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र प्रारंभ होने से पहले सोमवार को पत्रकारों से वार्ता की। उन्होंने गरीब, युवा, महिला व किसान के मुद्दे पर विपक्ष को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि ये सभी डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता में हैं। मुख्यमंत्री ने राम मंदिर के चढ़ावा चोरी पर भी विरोधी दलों के नेताओं पर सवालिया निशाना खड़ा करते हुए कहा कि जो लोग अयोध्या के मुद्दे को उठा रहे हैं, उन्होंने जयश्रीराम बोलने पर रामभक्तों पर लाठी-गोली चलवाई थी। राम मंदिर के खिलाफ न्यायालय में वकीलों की फौज खड़ी करके इसे बाधित करने का कुत्सित प्रयास किया। राम मंदिर में चंदा चोरी की बात वे लोग कर रहे हैं, जिनके जेब से मंदिर निर्माण के लिए एक पैसा भी नहीं निकला। देश-दुनिया इनका दोहरे चरित्र देख रही है।

एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन, तय होगा न्यूनतम मानदेय 

सीएम ने बड़ी घोषणा की कि सरकार एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन को लागू करने के साथ ही न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित करने जा रही है। आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं, रसोइयों व ग्राम चौकीदारों को भी उचित मानदेय प्राप्त हो और उनकी सेवाएं प्रदेश के हित को संवर्धित करने के लिए कार्य करें, इसके लिए अनुपूरक बजट का सहारा लिया गया है। 

किसानों को असुरक्षित करने वालों का दोहरा चरित्र सामने  

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जिन लोगों के समय में किसानों के हितों पर कुठाराघात हुआ, जिन्होंने किसानों को खेत के लिए पानी नहीं दिया। उनके हक पर बिचौलियों का वर्चस्व स्थापित कराया और किसानों को असुरक्षित करते हुए उनके जीवन में बदहाली लाने का पाप किया। ऐसे दोहरे चरित्र वाले लोग आज किसान की बात करके उनके जले पर नमक छिड़क रहे हैं। पीएम मोदी जी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जिसके तहत यूपी में 24 लाख हेक्टेयर भूमि में अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा दी गई, समेत कई योजनाएं चल रही हैं। किसान अब तीन-चार फसलें लगा रहा है। पैक हाउस के माध्यम से औद्यानिक फसलों का विभिन्न देशों में निर्यात हो रहा है।

खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश 

सीएम ने किसानों के मुद्दे पर सपा को घेरा और अपनी सरकार में गन्ना किसानों के लाभों को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि 2007 से 2017 के बीच 29 चीनी मिलें बंद हुईं, 21 चीनी मिलें औने-पौने दाम पर बेच दी गईं, लेकिन हमारी सरकार में 3.23 लाख करोड़ से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान हुआ है। 122 में से 105 से अधिक चीनी मिलें चौथे-पांचवें दिन ही किसानों के खाते में गन्ना मूल्य का भुगतान कर रही हैं। समाजवादी पार्टी के समय में 10 वर्ष का गन्ना मूल्य बकाया था। ये लोग किसानों के हितों का संरक्षण करने के बजाय उन्हें आत्महत्या और पलायन के लिए मजबूर करते थे। उस समय किसानों के ट्यूबवेल तक सुरक्षित नहीं थे। सरकार आज 16 लाख ट्यूबवेल को निशुल्क बिजली उपलब्ध करा रही है। कुछ जगहों पर पोर्टल की तकनीकी समस्या आई थी, लेकिन विभाग को किसानों के लिए खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।

नकारात्मकता की राजनीति त्यागें विपक्ष के साथी

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सत्र हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सदन के समय का बेहतर उपयोग हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश के हित और 25 करोड़ आमजन के विकास के लिए विधानमंडल की कार्यवाही को शांतिपूर्ण ढंग से चलाने के लिए विपक्ष के साथी नकारात्मकता की राजनीति को छोड़कर प्रदेश के विकास व समृद्धि में योगदान देंगे। सीएम ने कहा कि विधायिका आमजन की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। संसदीय प्रणाली में विधायिका गरीब, किसान, युवा और महिला से जुड़े मुद्दों पर चर्चा, समीक्षा और परिणाम तक पहुंचाने का सबसे अच्छा प्लेटफॉर्म है। हर जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्या को रखकर सरकार से समाधान का रास्ता निकलवा सकता है। इस प्लेटफॉर्म का बेहतर उपयोग हो, यह भाजपा नेतृत्व की एनडीए सरकार की सदैव प्राथमिकता रही है। 

संवाद से ही सरकार कर सकी बेहतर काम

सीएम ने कहा कि 9 वर्ष में संवाद और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की समीक्षा करने के उपरांत बनी योजनाओं के माध्यम से ही सरकार बेहतर काम कर सकी है। इससे उत्तर प्रदेश के प्रति धारणा बदलने के साथ ही इसे बीमारू राज्य से उबारकर रेवेन्यू सरप्लस व इकॉनमी का ब्रेकथ्रू स्टेट बनाना संभव हो सका। 9 वर्षों में सरकार ने युवाओं के कल्याण, महिलाओं की सुरक्षा-सम्मान और स्वावलंबन, किसानों के जीवन में परिवर्तन और चेहरे पर खुशहाली लाने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और वर्तमान में सरकार क्या करने जा रही है, इस पर भी चर्चा होगी।

विधायिका से संभव होता है गरीबों के जीवन में परिवर्तन

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने 9 वर्षों में छह करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से उबारकर मध्यम श्रेणी में लाकर यदि उनके जीवन में परिवर्तन लाने का प्रयास किया है तो उसकी केंद्रबिंदु विधायिका है, क्योंकि यहीं नीतियां बनती हैं। उससे पहले चर्चा-परिचर्चा होती है। विधायिका सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, किसान, निवेश, रोजगार आदि पर चर्चा करने का भी सशक्त माध्यम है। 

सावन का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती-किसानी की दृष्टि से किसानों, स्कूल-कॉलेज में एडमिशन के लिए युवाओं और कांवड़ यात्रियों के लिए यह महीना अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा ऊर्जा के प्रतीक जिन छात्रों ने प्रवेश लिया है और जो नए रोजगार के लिए बढ़ रहे हैं, उन सभी प्रतिभाशाली युवाओं को शुभकामनाएं। किसान जब दिनरात मेहनत करता है तो उत्तर प्रदेश की धरती सोना उगलती है। भारत की कुल कृषि भूमि में यूपी की हिस्सेदारी मात्र 11 प्रतिशत है, लेकिन हमारे किसान देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21-22 फीसदी का योगदान दे रहे हैं। किसानों के जीवन में आज व्यापक परिवर्तन हुआ है। मोदी जी के विजन के अनुरूप किसानों की आय दोगुनी से अधिक हुई है। किसानों के जीवन में खुशहाली लाने वाले अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। सीएम ने रिफॉर्म में किसानों के योगदान की सराहना भी की।

आधी आबादी के जीवन में व्यापक परिवर्तन

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आधी आबादी के जीवन में भी व्यापक परिवर्तन आया है। 2017 में जो महिला श्रमबल 12 फीसदी था, वह अब बढ़कर 37-38 फीसदी से अधिक हो गया है। डबल इंजन सरकार सभी बड़े महानगरों में कामकाजी महिलाओं के लिए श्रमजीवी हॉस्टल का निर्माण कर रही है। मिशन शक्ति के अंतर्गत सरकार ने महिला सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए अनेक कदम उठाए हैं। 9 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी और उसमें 20 फीसदी से अधिक महिलाओं की भागीदारी के साथ प्रदेश सरकार ने कीर्तिमान स्थापित किया है।

 

प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे युवाओं का अभिनंदन 

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कारण प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, सुरक्षा व अन्य कारणों से निवेश के बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं। लाखों युवाओं को अपने जनपद, क्षेत्र में नौकरी व रोजगार की गारंटी मिली है। परंपरागत उद्यम को प्रोत्साहित करते हुए एक जनपद-एक उत्पाद और पीएम विश्वकर्मा आदि योजनाओं से व्यापक बदलाव हुए हैं। करोड़ों नौजवानों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। सीएम ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे युवाओं का अभिनंदन किया।  

विधानसभा व परिषद के सदस्य सावन के आयोजनों में लेंगे भाग 

मुख्यमंत्री ने सावन में शिवभक्तों की आस्था को भी नमन किया और कहा कि  देश-प्रदेश में शिवभक्त हर-हर, बम-बम के उत्साहपूर्ण माहौल में शिवभक्ति को निवेदित कर रहे हैं। अभी से करोड़ों शिवभक्त पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हरिद्वार के पावन धाम में हर की पैड़ी से गंगाजल लेने के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। शासन, स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी, सामाजिक, व्यापारिक व धार्मिक संगठनों ने उनके स्वागत, सुरक्षा, सुविधा के लिए अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए हैं। विधानसभा व परिषद के सदस्य भी 7 अगस्त से इन आयोजनों में भाग लेंगे। 

सदन में स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा करें जनप्रतिनिधि 

सीएम ने सभी जनप्रतिनिधियों से कहा कि सदन में स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा बनाए रखने के लिए कार्य करें। सरकारी कर्मचारियों, आउटसोर्स व संविदा कार्मिकों ने 9 वर्षों में मेहनत की पराकाष्ठा दिखाई है, ऐसे में सरकार उनके वेलफेयर के लिए भी कार्य कर रही है। अनुदेशकों, शिक्षामित्रों, बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा के सभी शिक्षकों को कैशलेस की सुविधा दी गई। साथ ही सरकार ने अनुदेशकों, शिक्षामित्रों के मानदेय को भी बढ़ाया है। 

 

पत्रकार वार्ता के दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख आदि मौजूद रहे।

‘सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल ₹18 करोड़ की चोरी’; राज ठाकरे का सनसनीखेज आरोप

Siddhivinayak Temple donations theft: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल 18 करोड़ रुपये की चोरी होने का सनसनीखेज दावा किया है। MNS प्रमुख ने शनिवार 1 अगस्त को एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आजकल मंदिर भी सुरक्षित नहीं हैं। मनसे की छात्र इकाई के एक कार्यक्रम में ठाकरे ने यह दावा भी किया कि अयोध्या के राम मंदिर में 1,400 करोड़ रुपये की चोरी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर बोलना चाहिए।

MNS प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि निराश युवा मंदिरों में जाते हैं। लेकिन मंदिर भी भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को आठ न्यासियों द्वारा लिखा गया एक लेटर पढ़ते हुए ठाकरे ने कहा कि सिद्धिविनायक मंदिर में दान पेटी से पैसे चुराने वाले कुछ कर्मचारियों को न्यासियों की सतर्कता के कारण पकड़ लिया गया।

‘हर साल 18 करोड़ रुपये की चोरी’

ठाकरे ने कहा कि इस चोरी के पकड़े जाने से पहले मंदिर में दान से होने वाली साप्ताहिक आय 50 लाख रुपये से भी कम थी। लेकिन इसके बाद दान की राशि बढ़कर 1.5 करोड़ रुपये हो गई। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक ठाकरे ने दावा किया, “हर साल 18 करोड़ रुपये की चोरी की गई है।”

9 कर्मचारी गिरफ्तार

इस बीच सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेता सदा सरवणकर ने पत्रकारों से कहा कि इस मामले में 9 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “जहां भी आवश्यक था, हमने मामले दर्ज कर दिए हैं।” सरवणकर ने कहा कि दान में वृद्धि न्यास द्वारा किए गए प्रयासों के कारण हुई।

‘आजकल मंदिर भी सुरक्षित नहीं हैं’

अपनी पार्टी के छात्र विंग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ठाकरे ने कहा, “आजकल मंदिर भी सुरक्षित नहीं हैं।” राज ठाकरे ने मांग की है कि प्रधानमंत्री मोदी इस मुद्दे पर बात करें। उन्होंने यह भी कहा, “निराश युवा मंदिरों में जाते हैं, लेकिन मंदिर भी भ्रष्टाचार से सुरक्षित नहीं हैं।”

सिद्धिविनायक मंदिर का ज़िक्र करते हुए ठाकरे ने कहा कि दान पेटी से पैसे चुराने वाले कुछ कर्मचारियों को ट्रस्टियों की सतर्कता के कारण पकड़ा गया था। आठ ट्रस्टियों द्वारा महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखे गए एक पत्र को पढ़कर उन्होंने बताया कि चोरी का पता चलने से पहले मंदिर की साप्ताहिक दान आय 50 लाख रुपये से कम थी। बाद में यह बढ़कर 1.5 करोड़ रुपये हो गई।

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ठाकरे ने यह दावा अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान चारी केारोपों के बाद आया है। अयोध्या में पुलिस ने राम मंदिर में दान की चोरी के मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अभी जांच चल रही है। मुंबई में दिए गए इन बयानों ने मंदिर के दान को लेकर ठाकरे के आरोपों, सिद्धिविनायक मामले में की गई कार्रवाई और प्रधानमंत्री से जवाब की उनकी मांग पर ध्यान केंद्रित किया है।

श्रावण के प्रथम दिन बाबा विश्वनाथ के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब

Kashi Vishwanath Temple: श्रावण मास के प्रथम दिन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंगला आरती के बाद जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, पूरी काशी 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठी। शिवभक्तों के स्वागत के लिए मंदिर परिसर में रेड कार्पेट बिछाया गया था। बाबा के दर्शन के लिए बुधवार देर रात से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए योगी सरकार के निर्देश पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक एवं पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

जलाभिषेक के लिए देर रात से ही काशी पहुंचने लगे थे शिवभक्त

सावन के प्रथम दिन ही काशी के शिवालयों में शिवभक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। पूरी काशी 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गुंजायमान रही। बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए कांवड़िये देर रात से ही काशी पहुंचने लगे थे। लाइन में लगे श्रद्धालुओं के हाथों में बेलपत्र, मदार की माला, गंगाजल तथा बाबा विश्वनाथ को अर्पित की जाने वाली उनकी प्रिय पूजन सामग्री दिखाई दे रही थी।

 

बिहार से आए कांवड़िए दुर्गेश ने बताया कि योगी सरकार ने पूरे मार्ग पर सुरक्षा, साफ-सफाई और शिविरों में ठहरने सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी हर जगह तैनात हैं और श्रद्धालुओं की हर संभव सहायता कर रहे हैं। कांवड़ियों की सुरक्षित एवं सुगम यात्रा के लिए प्रयागराज-वाराणसी मार्ग का एक लेन सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा पूरे कांवड़ मार्ग पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल और पीआरवी वाहनों की तैनाती की गई है।

 

काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा धाम परिसर एवं आसपास के समस्त क्षेत्रों में व्यापक एवं समुचित व्यवस्थाएं  की गई हैं। दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सभी प्रवेश एवं निकास मार्गों पर प्रशिक्षित कार्मिकों की तैनाती की गई है तथा श्रद्धालुओं को कतारबद्ध एवं सहज दर्शन उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक प्रबंध किए गए हैं।

चिकित्सकीय सुविधा, एम्बुलेंस, प्राथमिक उपचार, चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता है। इसके अतिरिक्त विभिन्न स्थानों पर शुद्ध पेयजल, ग्लूकोज, ओ.आर.एस., विश्राम एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की  व्यवस्था की गई है।

‍बिहार में किन्नर बनाएंगे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मंदिर, क्या है इसकी अहम वजह

Modi Temple Bihar

PM Modi Temple Bihar: बिहार राज्य ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की आधिकारिक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर एक मंदिर का निर्माण कराने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया है। यह प्रस्ताव ट्रांसजेंडर समुदाय द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में उन्हें मिले कानूनी अधिकारों, सामाजिक सम्मान और संस्थागत पहचान के प्रति आभार व्यक्त करने के उद्देश्य से लाया गया है। बताया जा रहा है कि यह मंदिर राजधानी पटना में बनाया जाएगा। हालांकि इसके लिए स्थान का चयन अभी नहीं किया गया है। 

क्यों बनाया जा रहा है मोदी का मंदिर?

बिहार के पटना स्थित समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में 'बिहार राज्य ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड' की आधिकारिक बैठक आयोजित की गई। ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 लागू होने के बाद बोर्ड की यह पहली आधिकारिक बैठक थी। इसी बैठक के दौरान बोर्ड के सदस्य राजन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम समर्पित एक मंदिर बनाने का आधिकारिक प्रस्ताव रखा।

प्रस्ताव की जानकारी देते हुए राजन सिंह ने बताया कि बिहार में ट्रांसजेंडर समुदाय के पास अभी तक अपना कोई आधिकारिक मंदिर या मुख्य सांस्कृतिक केंद्र नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2019 में ऐतिहासिक कानून बनाकर ट्रांसजेंडर समाज को न केवल अधिकार दिए, बल्कि समाज और राज्य सचिवालय जैसी संस्थाओं में प्रतिनिधित्व और सम्मान भी दिलाया। इसी सम्मान के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समुदाय ने उनके नाम पर मंदिर निर्माण का निर्णय लिया है। ALSO READ: बिहार छात्र आंदोलन पर AK-47 से फायरिंग करने वाला सिपाही सस्पेंड, भाजपा सांसद संबित पात्रा घिरे

समुदाय के लिए 2019 कानून का महत्व

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा 2019 में पारित किए गए ट्रांसजेंडर अधिकार कानून के तहत इस समुदाय को सामाजिक-आर्थिक विकास और सशक्तिकरण के कई अधिकार मिले हैं। इसी कानून के तहत गठित बिहार राज्य ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड के माध्यम से समुदाय के लोगों को राज्य स्तर पर संस्थागत आवाज मिली है। हालांकि बिहार के कटिहार में पहले से ही प्रतीकात्मक प्रतिमा मौजूद है। हालांकि एक्स पर की गई इस पोस्ट पर लोगों ने तीखे कमेंट किए हैं। 

भारी-भरकम कपड़ों की जरूरत नहीं, बस इस ज्वेलरी से सिंपल सूट-साड़ी को बनाएं क्लासिक!

 सावन (Sawan) का महीना आते ही महिलाएं अपने लुक में ट्रेडिशनल और खूबसूरत अंदाज जोड़ना पसंद करती हैं। हरी साड़ी (green saree), सलवार सूट (salwar suit) या एथनिक आउटफिट के साथ सही ज्वेलरी पहनकर आप अपने फेस्टिव लुक को और भी खास बना सकती हैं। टेंपल डिजाइन ज्वेलरी (Temple-design jewelry)इस मौसम में ट्रेडिशनल के साथ रॉयल टच देने का बेहतरीन ऑप्शन है:

Temple Necklace (टेंपल नेकलेस) – रॉयल ट्रेडिशनल लुक

Temple Necklace Set

साड़ी या सलवार सूट के साथ टेंपल डिजाइन नेकलेस पहनने से पूरा लुक शाही नजर आता है। देवी-देवताओं की आकृति और गोल्डन फिनिश वाली डिजाइन सावन के त्योहारों के लिए परफेक्ट रहती है।

Temple Earrings (टेंपल झुमके) – चेहरे की बढ़ाएं खूबसूरती

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अगर आप ज्यादा ज्वेलरी पहनना पसंद नहीं करतीं, तो सिर्फ टेंपल डिजाइन झुमके भी काफी हैं। ये सिंपल सूट और साड़ी दोनों के साथ खूबसूरत लगते हैं।

Waist Chain (कमरबंद/वेस्ट चेन) – एथनिक लुक में चार चांद

साड़ी के साथ कमरबंद या वेस्ट चेन पहनकर आप अपने ट्रेडिशनल लुक को और स्टाइलिश बना सकती हैं। यह खासकर फेस्टिव और पूजा के अवसरों पर सुंदर लगता है।

Temple Bangles (टेंपल कंगन) – हाथों को दें खास अंदाज

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हरी चूड़ियों के साथ टेंपल डिजाइन कंगन पहनकर आप सावन के लुक में ट्रेडिशनल टच जोड़ सकती हैं। ये साड़ी और सूट दोनों के साथ अच्छे लगते हैं।

Temple Hair Pin (टेंपल हेयरपिन) – बालों में जोड़ें खूबसूरती

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जूड़े या खुले बालों के साथ टेंपल डिजाइन हेयरपिन लगाने से लुक और भी अट्रैक्टिव बन जाता है। यह छोटे फंक्शन या त्योहारों के लिए अच्छा ऑप्शन है।

Simple Temple Jewellery (सिंपल टेंपल ज्वेलरी) – हल्का और एलिगेंट लुक

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अगर आप ज्यादा भारी ज्वेलरी नहीं पहनना चाहतीं, तो छोटे पेंडेंट, हल्के झुमके या मिनिमल टेंपल डिजाइन चुन सकती हैं। यह ऑफिस, पूजा और फैमिली सेलिब्रेशन के लिए भी परफेक्ट रहता है।

Ayodhya Ram Temple: धार्मिक मामलों की देखरेख के लिए 9 सदस्यीय समिति गठित, प्रवक्ता की भी होगी नियुक्ति

Ayodhya Ram Temple: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में राम मंदिर के धार्मिक कामकाज की देखरेख के लिए संतों और ट्रस्ट के प्रतिनिधियों वाली नौ सदस्यों सदस्यीय समिति का गठन किया है। News18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला बुधवार को ट्रस्ट की दो घंटे चली बैठक में लिया गया, जो मंदिर के धार्मिक और प्रशासनिक ढांचे को बड़े पैमाने पर फिर से व्यवस्थित करेंगे।

नई बनी कमेटी के प्रमुख ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि होंगे। इसके अलावा, इसमें अयोध्या के पांच प्रमुख संत शामिल हैं: मणिराम दास छावनी के महंत कमल नयन दास, राम कथा कुंज के स्वामी रामानंद दास, रामवल्लभ कुंज के स्वामी राजकुमार दास, हनुमत निवास मंदिर के स्वामी मिथिलेश नंदिनी शरण और निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेन्द्र दास। बाकी चार सदस्य ट्रस्ट से जुड़े प्रतिनिधि होंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, यह 9 सदस्यीय समिति मंदिर में धार्मिक मामलों की देखरेख करेगी, जिसमें अनुष्ठान, त्योहार, पूजा व्यवस्था और अयोध्या के संतों के साथ समन्वय शामिल है।

बैठक में एक और अहम फैसला लेते हुए ट्रस्ट ने मीडिया और जनता के साथ औपचारिक संचार चैनल स्थापित करने के लिए एक आधिकारिक प्रवक्ता की नियुक्ति को मंजूरी दी है। बता दें कि यह कदम राम मंदिर प्रबंधन पर बढ़ते सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव के बीच उठाया गया है।

हालांकि, ट्रस्ट ने कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों को स्थगित कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन रिक्त न्यासी पदों को भरने पर सहमति नहीं बन पाई, जबकि स्थायी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति एक महीने के लिए टाल दी गई।

CEO पद के लिए मिले हजारों आवेदन

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट को CEO के पद के लिए हजारों आवेदन मिले हैं, जिनमें रिटायर्ड सरकारी अधिकारी और सीनियर प्रोफेशनल भी शामिल हैं। ऐसे में ट्रस्ट अंतिम फैसला लेने से पहले सिलेक्शन प्रोसेस जारी रहेगा।

फिलहाल, अंतरिम महासचिव (Interim General Secretary) के तौर पर काम कर रहे कृष्ण मोहन अपने पद पर बने रहेंगे।

यह बदलाव ऐसे समय में किया जा रहा है, जब राम मंदिर निर्माण के चरण से निकलकर पूरी तरह से संचालन (ऑपरेशन) के दौर में प्रवेश कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट मंदिर में आने वाले बढ़ते श्रद्धालुओं और तेजी से बढ़ते मंदिर परिसर को बेहतर तरीके से संभालने के लिए अपनी धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।

नई कमिटी से धार्मिक नेताओं की भूमिका होगी तय

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संतों की नई बनी कमिटी से मंदिर के कामकाज में अयोध्या के धार्मिक नेताओं की भूमिका तय होने की उम्मीद है, जबकि प्रस्तावित CEO से संस्थान के मैनेजमेंट में ज्यादा प्रोफेशनल देखरेख आने की उम्मीद है।

ये बदलाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे हैं और फंड व रिकॉर्ड के प्रबंधन में ज्यादा पारदर्शिता की मांग उठ रही है।

बता दें कि ट्रस्ट की अगली बैठक 2 सितंबर को होनी है, जिसमें CEO और ट्रस्टी के तीन खाली पदों समेत रुकी हुई नियुक्तियों पर समीक्षा होने की उम्मीद है।

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