Voda Idea को मिला ₹26.8 करोड़ का नोटिस, अब 3 अगस्त को शेयर फोकस में

Voda Idea Share Price: टेलीकॉम विभाग ने वोडाफोन आइडिया को ₹26.83 करोड़ का लिक्विडेटेड डैमेज यानी हर्जाना भरने का नोटिस भेजा है। कंपनी ने इसके बारे में शनिवार 1 अगस्त को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया। ऐसे में अब इसका असर सोमवार 3 अगस्त को स्टॉक मार्केट खुलने पर इसके शेयरों पर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 31 जुलाई को इसके शेयर पॉजिटिव मार्केट सेंटिमेंट में बीएसई पर 1.09% की बढ़त के साथ ₹13.01 के भाव पर बंद हुए। शुक्रवार को घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो सेंसेक्स (Sensex) 166.49 प्वाइंट्स यानी 0.21% की बढ़त के साथ 78,094.64 और निफ्टी 0.27% यानी 66.45 प्वाइंट्स के उछाल के साथ 24,383.60 पर बंद हुआ था।

Voda Idea को क्यों मिला है नोटिस

टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने वोडा आइडिया को ₹26.83 करोड़ का हर्जाना भरने का नोटिस भेजा है। टेलीकॉम कंपनी को यह नोटिस साल 2022 की नीलामी में मिले स्पेक्ट्रम के लिए तय मिनिमम रोलआउट ऑब्लिगेशन्स को पूरा नहीं करने के आरोप में मिला है। कंपनी का कहना है कि वह 31 जुलाई को मिले इस नोटिस को अभी रिव्यू कर रही है जिसके बाद आगे क्या करना है, इस पर विचार किया जा रहा है। हालांकि कंपनी का यह कहना है कि इस नोटिस की उसकी सेहत और कारोबार पर असर नहीं होगा। कंपनी को यह नोटिस इस बात के लिए मिला है कि स्पेक्ट्रम मिलने के बाद नेटवर्क के रोलआउट के लिए जो न्यूनतम शर्तें हैं, टेलीकॉम कंपनी ने उसका पालन नहीं किया।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

वोडा आइडिया के शेयरों ने एक साल के निचले स्तर से शानदार रिकवरी की है और निवेशकों का पैसा फटाफट ढाई गुना हो गया। पिछले साल 14 अगस्त 2025 को बीएसई पर यह ₹6.12 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 10 महीने में यह 150.82% चढ़कर 15 जून 2026 को ₹15.35 पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से शेयर फिलहाल 15% से अधिक नीचे आ चुके हैं लेकिन अब भी यह एफपीओ प्राइस से 18% से अधिक ऊपर हैं। इसके ₹18 हजार करोड़ के एफपीओ के तहत निवेशकों को ₹11 के भाव पर शेयर जारी हुए थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

बारिश में समोसे खाने की हुई इच्छा, Swiggy से ऑर्डर किया तो 104 रुपये का बिल देख रह गई हैरान, वायरल पोस्ट पर लोगों ने दिए मजेदार रिएक्शन

बारिश के मौसम में समोसे खाने की छोटी सी ख्वाहिश सोशल मीडिया पर बड़ी चर्चा का कारण बन गई। X पर एक यूजर ने Swiggy से किए गए अपने ऑर्डर का अनुभव साझा किया, जिसमें कम कीमत ने सभी का ध्यान खींच लिया। पोस्ट में किए गए मजाकिया कमेंट के बाद यूजर्स ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के डिस्काउंट, रेस्टोरेंट ऑफर्स और ऑनलाइन ऑर्डर की असली कीमत को लेकर बहस शुरू कर दी।

कुछ लोगों ने इसे शानदार डील बताया, तो कुछ ने कंपनियों के बिजनेस मॉडल और ग्राहकों की जेब पर पड़ने वाले असर पर सवाल उठाए। देखते ही देखते यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोगों ने अपने-अपने अनुभव साझा करने शुरू कर दिए।

₹104 का बिल देख यूजर रह गई हैरान

X यूजर नलिनी उनागर ने बताया कि बारिश के दौरान उन्होंने Swiggy से 8 बड़े समोसे ऑर्डर किए। पूरे ऑर्डर का बिल सिर्फ ₹104 आया, जिसे देखकर वह खुद भी हैरान रह गईं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा कि अगर Swiggy ऐसे ही भारी छूट देता रहा तो एक दिन दिवालिया हो जाएगा।

पोस्ट के साथ शेयर किया बिल

पोस्ट के साथ उन्होंने समोसों की तस्वीर और ऑर्डर का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया। बिल में बारिश के कारण ₹5 रेन फीस, GST और अन्य शुल्क भी शामिल थे। इसके बावजूद कुल कीमत कई लोगों को काफी कम लगी।

यूजर्स बोले- ‘डिस्काउंट Swiggy नहीं, रेस्टोरेंट देता है’

पोस्ट वायरल होते ही कमेंट्स की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने कहा कि यह छूट Swiggy नहीं बल्कि रेस्टोरेंट की ओर से दी जाती है, जबकि प्लेटफॉर्म अपना कमीशन अलग से लेता है। कुछ लोगों ने मजाक में कहा कि अगर कंपनी की इतनी चिंता है तो डिस्काउंट वापस कर देना चाहिए।

किसी ने तारीफ की, किसी ने उठाए सवाल

कुछ यूजर्स ने दावा किया कि कम कीमत की वजह पुराना स्टॉक हो सकता है, हालांकि पोस्ट करने वाली यूजर ने जवाब दिया कि समोसे बिल्कुल गर्म और ताजा थे। वहीं कुछ लोगों ने Swiggy की सर्विस पर सवाल उठाए, जबकि अन्य ने कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए दिवालिया होने वाली बात को महज मजाक बताया।

बहस पहुंची सेहत और जेब तक

चर्चा सिर्फ डिस्काउंट तक सीमित नहीं रही। कुछ लोगों ने रात में समोसे खाने को सेहत के लिए ठीक नहीं बताया, जबकि कई यूजर्स का कहना था कि अगर यही समोसे सीधे दुकान से खरीदे जाते तो कीमत आधी से भी कम होती। इस तरह एक साधारण फूड ऑर्डर ने इंटरनेट पर कीमत, डिस्काउंट और ग्राहक अनुभव को लेकर दिलचस्प बहस छेड़ दी।

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FPI Buying in India: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने पिछले महीने जुलाई में अपनी बिकवाली का सिलसिला थाम दिया। जुलाई में उन्होंने भारतीय शेयरों की बिकवाली से अधिक खरीदारी की यानी वे नेट खरीदार बन गए। उन्होंने कुल ₹20,199 करोड़ के शेयर खरीदे। इसमें से ₹6,731 करोड़ स्टॉक एक्सचेंज के जरिए आए, तो ₹13,467 करोड़ प्राइमरी मार्केट और अन्य कैटेगरी के जरिए भारतीय मार्केट में आए। सिर्फ इक्विटी मार्केट ही नहीं, बल्कि विदेशी निवेशकों ने पिछले महीने डेट मार्केट में भी काफी हलचल बढ़ा दी और NSDL (नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड) के आंकड़ों के मुताबिक अकेले जनरल लिमिट कैटेगरी के जरिए ही उन्होंने ₹29,211 करोड़ डाले।

क्या है विदेशी निवेशकों के ताबड़तोड़ खरीदारी की वजह?

जियोजीत इंवेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ वीके विजयकुमार ने दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे मार्केट के तेज उठा-पटक को ही भारतीय मार्केट में विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ खरीदारी की मुख्य वजह बताया है। उनका कहना है कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में भारी वोलैटिलिटी और चिप ट्रेड के कंसंट्रेशन रिस्क के चलते विदेशी निवेशक भारत जैसे स्थिर बाजारों की तरफ रुख कर रहे हैं। इसके अलावा रुपए की स्थिरता और भारतीय मार्केट में लार्ज कैप के बेहतर वैल्युएशन ने निवेश को सपोर्ट किया है। विजयकुमार के मुताबिक विदेशी निवेशकों के ताबड़तोड़ निवेश की एक अहम बात ये है कि वे अपना निवेश भारतीय मार्केट में मिडकैप और स्मॉलकैप में बढ़ा रहे हैं क्योंकि लार्ज कैप की तुलना में इन सेगमेंट्स में ग्रोथ की गुंजाइश अधिक है।

जुलाई में कैसी रही भारतीय मार्केट की चाल

लगातार चार महीने की गिरावट के बाद अप्रैल 2026 में निफ्टी 7.46% मजबूत हुआ लेकिन फिर मई में यह 1.87% कमजोर हुआ। इसके बाद निफ्टी ने फिर करवट ली और जून महीने में 1.35% मजबूत हुआ और जुलाई में 2.17% चढ़कर 24,383.60 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 मार्च में 10.19% की गिरावट के बाद लगातार चौथे महीने जुलाई में मजबूत हुआ। अप्रैल में 18.44%, मई में 0.73% और जून में 3.99% की तेजी के बाद जुलाई में यह 2.53% मजबूत हुआ। अब निफ्टी मिडकैप 100 की बात करें तो इसमें भी स्मॉलैकप दैसा रुझान दिखा। मार्च में 10.94% की गिरावट के बाद लगातार चौथे महीने जुलाई में यह मजबूत हुआ। अप्रैल में 13.55%, मई में 3.24% और जून में 0.12% की तेजी के बाद जुलाई में यह 1.81% ऊपर चढ़ा।

Zepto IPO: टल गई Swiggy-Eternal से नए मैदान में टक्कर! जेप्टो जुटी इस काम में

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Zepto IPO: टल गई Swiggy-Eternal से नए मैदान में टक्कर! जेप्टो जुटी इस काम में

Zepto IPO: दिग्गज क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो आईपीओ से पहले अपने शेयरहोल्डर्स के साथ एक एग्रीमेंट किया है। कंपनी ने शनिवार को ऐलान किया कि यह एग्रीमेंट प्री-आईपीओ इक्विटी प्लेसमेंट को लेकर हुआ है। इसका उद्देश्य कंपनी की बैलेंस शीट को और मजबूत करना है। कंपनी का कहना है कि इस नई फंडिंग से उसके मौजूदा ₹5,681 करोड़ के कैश रिजर्व में और बढ़ोतरी होगी। साथ ही कंपनी ने यह दावा किया कि 31 मार्च 2026 तक उस पर कोई कर्ज नहीं था। कंपनी का कहना है कि पब्लिक मार्केट इंवेस्टर्स से बोर्ड और फाउंडर्स को कंपनी की लिस्टिंग का प्रस्ताव मिला और उन्होंने दिलचस्पी दिखाई लेकिन फिलहाल कंपनी का फोकस कारोबार पर है।

तो क्या नहीं आएगा Zepto IPO?

मजबूत बैलेंस शीट को देखते हुए जेप्टो का कहना है कि फिलहाल उसका ध्यान अपने कारोबार के प्रभावी एग्जेक्यूशन पर है। हालांकि इसमें कहीं भी ये बात नहीं कही गई है कि आईपीओ में कोई देरी होगी। कंपनी ने सिर्फ इतना स्पष्ट किया है कि अभी उसकी प्राथमिकता अपने कारोबार को बेहतर तरीके से चलाने और विस्तार करने की है। कंपनी का कहना है कि आने वाली तिमाही में नए ऑपरेटिंग रिजल्ट और फाइनेंशियल के साथ आईपीओ का ड्राफ्ट फाइल किया जाएगा और अपडेटेड ड्राफ्ट को मंजूरी मिलने के बाद सेबी के नियमों के हिसाब से तय समय के भीतर लिस्ट होगी।

आईपीओ को लेकर क्या है जेप्टो की योजना

जेप्टो लगभग $450 करोड़ (करीब ₹42,925 करोड़) के वैल्यूएशन पर फंड जुटाने की तैयारी में है। इसमें घरेलू घरेलू निवेशक मुख्य रूप से शामिल होंगे, जिससे कंपनी में भारतीय हिस्सेदारी करीब 40% के मौजूदा स्तर से अधिक हो जाएगी। हालांकि वैल्यूएशन की बात करें तो यह अक्टूबर 2025 में इसकी $700 करोड़ के वैल्यूएशन से कम है, जब कंपनी ने कैलिफोर्निया पब्लिक एम्प्लॉइज रिटायरमेंट सिस्टम (CalPERS) की अगुवाई वाले राउंड में $45.0 करोड़ जुटाए थे। जेप्टो ने दिसंबर 2025 में गोपनीय प्री-फाइलिंग रूट के जरिए आईपीओ का शुरुआती ड्राफ्ट फाइल किया था। जून 2026 में फाइल किए गए अपडेटेड ड्राफ्ट पेपर के अनुसार कंपनी नए शेयर जारी करके ₹8,010 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है, साथ ही मौजूदा शेयरहोल्डर्स भी 11.35 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री करेंगे।

कंपनी के कारोबारी सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 में कंपनी को ऑपरेशंस से ₹22,624 करोड़ का रेवेन्यू और ₹24,816 करोड़ का NRV (नेट रिसीवेबल्स वैल्यू) हासिल हुआ था। वित्त वर्ष 2026 में हर दिन इसने औसतन 17.5 लाख ऑर्डर प्रोसेस किए और मार्च तिमाही में तो यह आंकड़ा हर दिन औसतन 23.3 लाख हो गया। मार्च 2026 तक इसके 1,189 स्टोर्स चल रहे थे और इसका सालाना ट्रांजैक्टिग यूजर बेस करीब 4.8 करोड़ था।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Swiggy Stock Outlook: Q1 नतीजों से कुछ ब्रोकरेज नाखुश, टारगेट प्राइस घटाया; फिर भी 23% तक उछाल की उम्मीद

ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी के शेयर के लिए कुछ ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस घटा दिया है। CLSA ने तो रेटिंग भी कम कर दी है। कंपनी के तिमाही नतीजों के बाद ब्रोकरेज का व्यू सामने आया है। अभी भी स्विगी पर नजर रखने वाले 30 एनालिस्ट्स में से 70 प्रतिशत यानि कि 21 एनालिस्ट्स की ओर से रेटिंग “बाय” है। 6 ने “होल्ड” और 3 ने “सेल” की सलाह दी है। कंपनी इंस्टामार्ट के जरिए क्विक कॉमर्स सेक्टर में भी है। अब नए टारगेट प्राइस के आधार पर स्विगी के शेयरों में आगे 23 प्रतिशत तक उछाल की उम्मीद है।

स्विगी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंसोलिडेटेड बेसिस पर शुद्ध घाटा सालाना आधार पर 34 प्रतिशत घटकर 791 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले घाटा 1,197 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 6,812 करोड़ रुपये हो गया। जून 2025 तिमाही में रेवेन्यू 4,961 करोड़ रुपये था। खर्च बढ़कर 7,813 करोड़ रुपये के हो गए, जो जून 2025 तिमाही में 6,244 करोड़ रुपये के थे। फूड डिलीवरी बिजनेस की ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू पिछले साल के मुकाबले 17.4 प्रतिशत बढ़ी। इंस्टामार्ट की नेट ऑर्डर वैल्यू साल-दर-साल 38.9 प्रतिशत बढ़ी।

स्विगी के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 284.95 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 78600 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर एक महीने में 19 प्रतिशत चढ़ा है। वहीं एक साल में करीब 30 प्रतिशत गिरा है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 94.92 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Swiggy पर CLSA ने घटाई रेटिंग

ब्रोकरेज CLSA ने स्विगी के स्टॉक के लिए रेटिंग को “एक्युमुलेट” से घटाकर “होल्ड” कर दिया है। टारगेट प्राइस 357 रुपये से घटाकर 318 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के फूड डिलीवरी बिजनेस की ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) ग्रोथ उम्मीद से कम रही। यह जोमैटो से पीछे है। एडजस्टेड EBITDA मार्जिन भी अनुमान से कम रहा। JM फाइनेंशियल ने भी स्विगी की रेटिंग को “रिड्यूस” से घटाकर “सेल” कर दिया है। प्राइस टारगेट 250 रुपये रखा है।

CNBC-TV18 की रिपोर्ट के अनुसार, मैक्वेरी ने शेयर के लिए 230 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ “अंडरपरफॉर्म” रेटिंग बरकरार रखी है। कहा है कि डार्क स्टोर थ्रूपुट और मंथली ट्रांजेक्शन करने वाले यूजर्स सहित मुख्य ऑपरेटिंग मेट्रिक्स में तिमाही के दौरान सुधार नहीं हुआ। मोतीलाल ओसवाल ने ‘बाय’ रेटिंग के साथ 350 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि स्विगी का 68.1 अरब रुपये का नेट रेवेन्यू उसके अनुमान से ज्यादा रहा। फूड डिलीवरी बिजनेस की GOV (ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू) सालाना आधार पर 17.4 प्रतिशत बढ़ी।

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HSBC और नोमुरा की राय

HSBC ने स्विगी के शेयर के लिए “होल्ड” रेटिंग और 300 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि भले ही स्विगी की वैल्यूएशन बहुत ज्यादा नहीं है, फिर भी कंपनी को अभी बहुत कुछ साबित करना है और कामकाज में सुधार कंपनी के लिए सबसे जरूरी है। मॉर्गन स्टेनली ने “इक्वलवेट” रेटिंग दी है। टारगेट 322 रुपये सेट किया है।

नोमुरा ने स्विगी के लिए “बाय” रेटिंग दी है और प्राइस टारगेट 435 रुपये प्रति शेयर है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि इंस्टामार्ट में कैश लॉस वित्त वर्ष 2027 में भी जारी रहेगा। एडजस्टेड EBITDA लॉस वित्त वर्ष 2027 में 3,100 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2028 में 2,300 करोड़ रुपये रह सकता है। स्विगी इन नुकसानों की भरपाई 14,300 करोड़ रुपये के कैश बैलेंस और फूड डिलीवरी बिजनेस से होने वाली कमाई से कर सकती है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

इस हफ्ते बीते चार महीनों में सबसे ज्यादा चढ़ा बाजार, जानिए अगले हफ्ते कैसी रहेगी चाल

भारतीय शेयर बाजारों के लिए यह हफ्ता बीते करीब चार महीनों में सबसे अच्छा रहा। बाजार के प्रमुख सूचकांकों में 2.5 फीसदी से ज्यादा तेजी आई। इसमें उम्मीद से बेहतर जून तिमाही के कंपनियों के नतीजों, रुपये में मजबूती और विदेशी निवेशकों की खरीदारी का हाथ रहा।

सेंसेक्स-निफ्टी में 2.5 फीसदी से ज्यादा तेजी

इस हफ्ते सेंसेक्स 2.67 फीसदी यानी 2,034 अंक चढ़कर 78,094 पर बंद हुआ। Nifty 50 भी 2.59 फीसदी यानी 616 अंक की मजबूती के साथ 24,383 पर बंद हुआ। निफ्टी आईटी इस हफ्ते सबसे ज्यादा चढ़ने वाला सूचकांक रहा। इसमें 6.75 फीसदी उछाल आया। निफ्टी ऑटो में भी 5.61 फीसदी मजबूती आई।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी अच्छी तेजी

खास बात यह है कि इस हफ्ते छोटी-बड़ी हर तरह की कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी। Nifty Smallcap 100 Index 2.6 फीसदी चढ़ा। Redington, Kaynes Technology India, Firstsource Solutions, Brigade Enterprises, Affle 3I, IIFL Finance, KFin Technologies और IFCI के शेयरों में 24 फीसदी तक तेजी दिखी।

इन मिडकैप शेयरों में 10 फीसदी तक की तेजी

Nifty Midcap Index में भी इस हफ्ते 2 फीसदी तेजी आई। Coforge, Lauras Labs, Swiggy, Container Corporation of India और Ashok Leyland के शेयरों में 10 फीसदी तक की तेजी आई। गिरने वाले शेयरों में Suzlon Energy, Phoenix Mills, Billionbrains Garage Ventures, Bank of India और LICHF प्रमुख रहे।

विदेशी निवेशकों की अच्छी खरीदारी 

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने दो हफ्ते के बाद भारतीय बाजार में इस हफ्ते निवेश किया। उन्होंने 5,946 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी 5,387 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को अच्छा सपोर्ट दिया। रुपये में बीते पांच हफ्तों से जारी गिरावट पर भी ब्रेक लग गया। यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 118 पैसे की मजबूती के साथ 95.39 के लेवल पर बंद हुआ।

निफ्टी अगले हफ्ते 24,500-24,60 लेवल टेस्ट कर सकता है

सेबी रजिस्टर्ड एनालिस्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि अगले हफ्ते निफ्टी के लिए 24,100-23,800 पर स्ट्रॉन्ग सपोर्ट है। रेसिस्टेंस 24,500-24,700 के लेवल पर है। बैंक निफ्टी के लिए 56,000-54,500 पर स्ट्रॉन्ग सपोर्ट है। इसे 58,500-6000 के लेवल पर रेसिस्टेंस का सामना करना पड़ेगा। अगले हफ्ते निफ्टी के 24,500-24,600 का लेवल टेस्ट करने की उम्मीद है।

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इस हफ्ते आए इन दिग्गज कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे

इस हफ्ते मारुति सुजुकी, ह्युंडई, एशियन पेंट्स, स्विगी, आईटीसी और सन फार्मा सहित कई दिग्गज कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे आए। मारुति का प्रॉफिट 11 फीसदी गिरा। आईटीसी का प्रॉफिट 27 फीसदी गिरा। लेकिन, सन फॉर्मा का प्रॉफिट 27 फीसदी बढ़ा। एशियन पेंट्स का प्रॉफिट तो 40 फीसदी तक बढ़ गया।

Stocks to Watch: आज 24 जुलाई को Tata Steel, Vedanta, Swiggy, Bajaj Finance, Astra Microwave समेत इन शेयरों पर नजर, बड़ी हलचल की उम्मीद

शुक्रवार, 31 जुलाई को कई शेयरों में तेज उतारचढ़ाव देखने को मिल सकता है। इनमें टाटा स्टील, वेदांता, स्विगी, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी इंडिया, बजाज फिनसर्व, एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स, अबर्न कंपनी, नवीन फ्लोरीन, आरती इंडस्ट्रीज, मझगांव डॉक, रेलटेल, महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे नाम प्रमुख हैं। कुछ कंपनियों ने एक दिन पहले तिमाही नतीजे जारी किए थे। वहीं कुछ कंपनियां आज नतीजे जारी करने वाली हैं। कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं, जिन्होंने एक दिन पहले नई डील, कॉन्ट्रैक्ट या अन्य तरह के ​डेवलपमेंट्स की जानकारी दी थी। इन पर बाजार शुक्रवार को प्रतिक्रिया देगा।

इसके अलावा 65 से ज्यादा कंपनियों के शेयर 31 जुलाई को एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने वाले हैं। साथ ही 2 लिस्टिंग भी होने वाली हैं। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

आज इन कंपनियों के आएंगे नतीजे

मारुति सुजुकी इंडिया, बजाज फिनसर्व, अर्बन कंपनी, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, GAIL (इंडिया), ITC, सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज, ABB इंडिया, आधार हाउसिंग फाइनेंस, श्री सीमेंट, आदित्य बिड़ला कैपिटल, डिक्सन टेक्नोलोजिज (इंडिया), नारायण हृदयालय, ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स, क्लीन मैक्स एनवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस, नेशनल एल्युमीनियम कंपनी, बजाज होल्डिंग्स एंड इनवेस्टमेंट और शैडोफैक्स टेक्नोलॉजिज

1 अगस्त को ये कंपनियां जारी करेंगी तिमाही रिजल्ट

डिविस लैबोरेटरीज, एपीएल अपोलो ट्यूब्स, मुथूट फाइनेंस, गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट्स, लेटेंट व्यू एनालिटिक्स, आदित्य बिड़ला लाइफस्टाइल ब्रांड्स, क्लीन साइंस एंड टेक्नोलॉजी, ईपैक प्रीफैब टेक्नोलोजिज और उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक

आज इन प्रमुख शेयरों पर रहेगी खास नजर

Tata Steel: अप्रैल-जून 2026 तिमाही (Q1) में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 11.6% बढ़कर 2,318.5 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 14.3% बढ़कर 60,794.3 करोड़ रुपये हो गया।

Vedanta: जून 2026 तिमाही में कंसोलिडेटेड बेसिस पर शुद्ध मुनाफा (कंपनी के मालिकों के लिए) 5473 करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले के मुनाफे से 72 प्रतिशत ज्यादा है। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 53.6 प्रतिशत बढ़कर 24205 करोड़ रुपये हो गया।

महिंद्रा एंड महिंद्रा: Q1 में शुद्ध लाभ एक साल पहले से 34 प्रतिशत बढ़कर 5,455 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 28 प्रतिशत बढ़कर 58,188 करोड़ रुपये हो गया।

Swiggy: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड घाटा सालाना आधार पर घटकर 791 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले घाटा 1,197 करोड़ रुपये का था। रेवेन्यू 37.3% बढ़कर 6,812 करोड़ रुपये हो गया।

Bajaj Finance: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 27 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 5985.75 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू करीब 20 प्रतिशत बढ़कर 23165.45 करोड़ रुपये हो गया। शुद्ध ब्याज आय में सालाना आधार पर 24 प्रतिशत का इजाफा देखा गया और यह 11,495 करोड़ रुपये हो गई।

Torrent Pharmaceuticals: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 3.3% बढ़कर 566 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 54.8% बढ़कर 4,921 करोड़ रुपये रहा।

RailTel Corporation of India: Q1 में मुनाफा सालाना आधार पर 0.5% घटकर 65.8 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 20.1% बढ़कर 893.3 करोड़ रुपये हो गया।

Mazagon Dock Shipbuilders: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 21.5% बढ़कर 549.4 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 12.1% की बढ़ोतरी के साथ 2,942.7 करोड़ रुपये हो गया।

LIC Housing Finance: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 9.9% बढ़कर 1,499 करोड़ रुपये हो गया। शुद्ध ब्याज आय 0.6% की बढ़ोतरी के साथ 2,087.2 करोड़ रुपये रही।

Data Patterns India: Q1 में मुनाफा सालाना आधार पर 13.5% घटकर 22.1 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 16.8% बढ़कर 116 करोड़ रुपये हो गया।

AWL Agri Business: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 48.2% बढ़कर 350.3 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 17.5% बढ़कर 20,048.1 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने पंकज गोयल को 31 जुलाई से चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर नियुक्त किया है।

Thermax: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 83.4% घटकर 25.2 करोड़ रुपये पर आ गया। रेवेन्यू 6.7% की बढ़ोतरी के साथ 2,302.7 करोड़ रुपये हो गया।

Aarti Industries: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 260.5% बढ़कर 155 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 42.4% बढ़कर 2,387 करोड़ रुपये हो गया।

Indegene: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 0.2% घटकर 116.2 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 39.7% बढ़कर 1,063.1 करोड़ रुपये हो गया।

Astra Microwave Products: कंपनी को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स से 2,205.23 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर ‘उत्तम रडार प्रोग्राम’ के लिए 122 एडवांस्ड एयरबोर्न एक्टिव ऐरे यूनिट्स (AAAUs) और 121 इंटरफेस फ्रेम के लिए है।

Navin Fluorine International: कंपनी ने डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) के साथ सोडियम बोरोहाइड्राइड के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए एक समझौता किया है। इसका मकसद एक अहम डिफेंस मैटीरियल के लिए स्वदेशी प्रोसेस डेवलपमेंट को तेज करना है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

बल्क और ब्लॉक डील्स

IIFL Finance: FIH मॉरीशस इनवेस्टमेंट्स ने IIFL फाइनेंस में 63.39 लाख शेयर 374.02 करोड़ रुपये में बेचे। अमेरिकन फंड इंश्योरेंस सीरीज ग्लोबल स्मॉल कैपिटलाइजेशन फंड ने 9.8 करोड़ रुपये में 1.66 लाख शेयर खरीदे। स्मॉलकैप वर्ल्ड फंड ने 364.2 करोड़ रुपये में 61.73 लाख शेयर खरीदे।

Sapphire Foods India: फिडेलिटी फंड्स इंडिया फोकस फंड ने अतिरिक्त 20.22 लाख शेयर 39.58 करोड़ रुपये में खरीदे हैं। सिंगापुर सरकार ने 18.95 लाख शेयर 37.1 करोड़ रुपये में बेचे हैं।

Xtranet Technologies: मित्तल ग्रोथ पार्टनर्स LLP ने 9.4 लाख शेयर 12.69 करोड़ रुपये में खरीदे हैं।

Bai-Kakaji Polymers: अबाकस वेंचर अपॉर्चुनिटीज फंड ने 6.08 लाख शेयर 12.18 करोड़ रुपये में खरीदे हैं। टाइगर स्ट्रैटेजीज फंड-I ने 2.16 करोड़ रुपये में 1.08 लाख शेयर बेचे हैं। संजय पोपटलाल जैन ने 6.84 करोड़ रुपये में 3.42 लाख शेयर बेचे हैं।

इन कंपनियों की होगी लिस्टिंग

क्यूब हाईवेज ट्रस्ट

सिल्वरस्टॉर्म पार्क्स एंड रिसॉर्ट्स

आज ये शेयर करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

कोल इंडिया

आयशर मोटर्स

REC

भारती हेक्साकॉम

एस्ट्राजेनेका फार्मा इंडिया

ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज

कल्याणी स्टील्स

मफतलाल इंडस्ट्रीज

पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन

AU स्मॉल फाइनेंस बैंक

अनंत राज

कोरोमंडल एग्रो प्रोडक्ट्स एंड ऑयल्स

सिटी यूनियन बैंक

ASK ऑटोमोटिव

बेजल प्रोजेक्ट्स

बाटा इंडिया

ADC इंडिया कम्युनिकेशंस

ऑलडिजी टेक

बाटलीबोई

सेलो वर्ल्ड

सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स

बंगाल टी एंड फैब्रिक्स

अमल

बॉम्बे डाइंग एंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी

कैंपस एक्टिववियर

कार्बोरंडम यूनिवर्सल

सिएट

DCM श्रीराम

EIH

ममता मशीनरी

नेक्सोम कैपिटल मार्केट्स

इंटरनेशनल ट्रैवल हाउस

एक्सप्लेओ सॉल्यूशंस

केल्टेक एनर्जीज

किर्लोस्कर ऑयल इंजन्स

KPT इंडस्ट्रीज

फाइन ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज

कैरा कैन कंपनी

केसी इंडस्ट्रीज

गैलेक्सी सर्फेक्टेंट्स

गंधार ऑयल रिफाइनरी (इंडिया)

एंड्योरेंस टेक्नोलोजिज

GE पावर इंडिया

हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन

फाइव-स्टार बिजनेस फाइनेंस

ग्रीनपैनल इंडस्ट्रीज

इगाराशी मोटर्स इंडिया

रेडटेप

वरुण बेवरेजेज

V-गार्ड इंडस्ट्रीज

RK स्वामी

PNB हाउसिंग फाइनेंस

इंडिजीन

प्लेटिनमवन बिजनेस सर्विसेज

इंडियन मेटल्स एंड फेरो अलॉयज

प्रिवी स्पेशलिटी केमिकल्स

प्रदीप मेटल्स

प्रिसिजन वायर्स इंडिया

सिंगर इंडिया

सिरका पेंट्स इंडिया

रामा फॉस्फेट्स

सैकसॉफ्ट

शिलचर टेक्नोलोजिज

टिम्केन इंडिया

स्मृति ऑर्गेनिक्स

स्पाइस आइलैंड्स इंडस्ट्रीज

स्ट्राइड्स फार्मा साइंस

WPIL

स्टॉक स्प्लिट के लिए ये शेयर करेंगे एक्स-स्प्लिट ट्रेड

नर्मदा एग्रोबेस

Asian Market Today: चिप शेयरों में जोरदार खरीदारी से एशियाई बाजारों में रौनक,कोस्पी 13% ऊपर, निक्केई 5% चढ़ा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Swiggy Q1 results: जून तिमाही में लॉस घटकर 791 करोड़ पर आया, रेवेन्यू में 37 फीसदी उछाल

Swiggy Q1 results: स्विगी ने 30 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया। इस दौरान कंपनी का लॉस साल दर साल आधार पर करीब 34 फीसदी घटकर 791 करोड़ रुपये पर आ गया। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी को 1,197 करोड़ रुपये का लॉस हुआ था। मार्च तिमाही में कंपनी का लॉस 800 करोड़ रुपये था। स्विगी का फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म है।

जून तिमाही में रेवेन्यू 6812 करोड़ रुपये

जून तिमाही में स्विगी के लॉस में कमी में अच्छी रेवेन्यू ग्रोथ का हाथ रहा। इस दौरान कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 37 फीसदी बढ़कर 6,812 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 4,961 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 6,383 करोड़ रुपये था।

घट रहा क्विक कॉमर्स बिजनेस का लॉस

स्विगी इंस्टामार्ट पर निवेश बढ़ा रही है। हालांकि, कंपनी के कुल खर्च बढ़ने की रफ्तार रेवेन्यू बढ़ने की रफ्तार से कम रही। इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी के क्विक कॉमर्स बिजनेस के लॉस में कमी आ रही है। हालांकि, कंपनी का मुख्य फूड डिलीवरी बिजनेस मुनाफे में है। स्विगी की प्रतिद्वंद्वी कंपनी जोमैटो जून तिमाही में 92 करोड़ रुपये के मुनाफे में रही। इसका रेवेन्यू 17 फीसदी बढ़कर 20,211 करोड़ रुपये रहा।

जून तिमाही में कुल खर्च 7813 करोड़ रुपये 

जून तिमाही में स्विगी का कुल खर्च 7,813 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 6,244 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में यह 7,448 करोड़ रुपये था। कंपनी के एमडी एवं ग्रुप सीईओ हर्ष मजेटी ने कहा, “फूड डिलीवरी इकोनॉमिक्स में मजबूती दिख रही है। आउट ऑफ होम कंजम्प्शन प्रॉफिट में है। यह बिजनेस का तेजी से बढ़ता हिस्सा है। इससे प्रोग्रेस अच्छा है।”

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स्विगी के शेयरों में 30 जुलाई को तेजी

30 जुलाई को स्विगी के शेयरों में तेजी दिखी। यह 2.25 फीसदी चढ़कर 293.80 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक हफ्ते में यह शेयर करीब 19 फीसदी चढ़ा है। उधर, शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक भी चढ़कर बंद हुए। निफ्टी 66 अंक चढ़कर 24,317 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 273 की मजबूती के साथ 77,928 पर क्लोज हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

रेस्टोरेंट में ₹30 की इडली, ऑनलाइन ₹90 क्यों? फूड डिलीवरी ऐप्स के बिलिंग गेम की ये कहानी सामने आई

Billing Game News: अगर आप अक्सर स्विगी और जोमैटो जैसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स से खाना मंगवाते हैं तो आपने भी ये गौर किया किया होगा कि रेस्टोरेंट में मिलने वाले फूड और ऐप पर दिखने वाले की कीमतों में बहुत बड़ा अंतर होता है। अब इस पूरे मसले पर बेंगलुरु के रेस्टोरेंट मालिकों ने मोर्चा खोल दिया है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां के होटेलियर्स ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के अनफेयर और अपारदर्शी कमीशन स्ट्रक्चर पर कड़ा एतराज जताया है।

रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने उनके बिजनेस को बढ़ाने में मदद की है। लेकिन इनका मौजूदा मॉडल उनके मुनाफे को पूरी तरह से खत्म कर रहा है। वहीं दूसरी ओर ग्राहकों को चीजें महंगी मिल रही हैं।

30 रुपये की इडली ऑनलाइन 90 रुपये की क्यों?

By2 Coffee चेन के संस्थापक राघवेंद्र पादुकोण ने रेस्टोरेंट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के बीच की कीमतों के भारी अंतर पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जो इडली रेस्टोरेंट में 30 से 35 रुपये में मिलती है, वही ऑनलाइन ऑर्डर करने पर 80 से 90 रुपये की क्यों हो जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रेस्टोरेंट की वास्तविक कीमत और ऑनलाइन कीमत बिल्कुल एक समान होनी चाहिए जिसमें सिर्फ डिलीवरी चार्ज का अंतर होना चाहिए। राघवेंद्र पादुकोण ने कहा कि रेस्टोरेंट मालिक फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ नहीं हैं बल्कि वे इस बात का विरोध कर रहे हैं कि यह मौजूदा मॉडल किस तरीके से काम कर रहा है।

कमाई का आधा हिस्सा भी नहीं बचता, जानें कहां-कहां कटता है पैसा

रिपोर्ट के मुताबिक रेस्टोरेंट मालिकों ने उन तमाम कटौतियों की डिटेल में जानकारी दी है जो उनके पेआउट को काफी कम कर देती हैं। इनमें हर ऑर्डर पर लिया जाने वाला कमीशन, ग्राहकों द्वारा दिया जाने वाला प्लेटफॉर्म शुल्क, कलेक्शन चार्ज, पेमेंट गेटवे शुल्क, सर्विस चार्ज पर लगने वाला जीएसटी, कैंसिलेशन चार्ज, लंबी दूरी का शुल्क और प्रमोशनल खर्च शामिल हैं। रेस्टोरेंट मालिकों के मुताबि, इन सभी कटौतियों को एक साथ मिलाने पर उन्हें अपनी वास्तविक बिक्री का आधा हिस्सा भी नहीं मिल पाता है। इससे उनका प्रॉफिट मार्जिन बुरी तरह प्रभावित होता है।

बिना अनुमति के डिस्काउंट और विज्ञापन का बोझ

कर्नाटक स्टेट होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष जीके शेट्टी का कहना है कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स रेस्टोरेंट पार्टनर्स की अनुमति के बिना भारी कटौती कर रहे हैं। होटेलियर्स ने इस बात पर सबसे ज्यादा आपत्ति जताई कि प्लेटफॉर्म्स अपनी मर्जी से विज्ञापन, डिस्काउंट और प्रमोशनल कैंपेन शुरू करते हैं और उनका पूरा खर्च रेस्टोरेंट मालिकों से वसूल लेते हैं। रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि सिर्फ एक ईमेल नोटिफिकेशन भेज देने को उनकी सहमति नहीं माना जा सकता।

बैंगलोर होटल्स एसोसिएशन के मानद अध्यक्ष पीसी राव ने कहा कि अगर 20 प्रतिशत कमीशन तय हुआ है तो सिर्फ उतना ही पैसा कटना चाहिए। मालिकों को उम्मीद होती है कि कटौती के बाद उन्हें कम से कम 70 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा लेकिन अंत में उनके हाथ में सिर्फ 30 से 40 फीसदी रकम ही बचती है। उनका मानना है कि समझौते के बाद कोई भी हिडन चार्ज नहीं थोपा जाना चाहिए।

रेस्टोरेंट मालिकों की प्रमुख मांगें

इस स्थिति से निपटने के लिए होटेलियर्स ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। उन्होंने कुल सर्विस चार्ज और सभी कटौतियों को मिलाकर अधिकतम 20 प्रतिशत से नीचे सीमित करने की मांग की है। इसके अलावा तय कमीशन के अलावा कोई भी छिपा हुआ खर्च न वसूलने और डिस्काउंट या विज्ञापन कैंपेन चलाने से पहले रेस्टोरेंट से ओटीपी या सीधे तौर पर स्पष्ट अनुमति लेने की बात कही है।

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रेस्टोरेंट मालिकों ने पारदर्शी सेटलमेंट स्टेटमेंट देने की मांग की है ताकि सभी कटौतियों का स्पष्ट हिसाब मिल सके। साथ ही शिकायतों के निपटारे के लिए एक उचित एस्केलेशन सिस्टम बनाने, सर्विस चार्ज पर जीएसटी की समीक्षा करने और डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ सर्विस प्रोवाइडर के रूप में सीमित रखने वाले निष्पक्ष मॉडल को बनाए रखने की मांग की गई है।

Swiggy ने नंदिता सिन्हा को इंस्टामार्ट का सीईओ नियुक्त किया, शेयर बने रॉकेट

स्विगी ने नंदिता सिन्हा को इंस्टामार्ट का सीईओ नियुक्त किया है। वह अमितेश झा की जगह लेंगी। वह 3 अगस्त को नई जिम्मेदारी संभालेंगी। सिन्हा मिंत्रा की सीईओ रह चुकी हैं। 29 जुलाई को स्विगी के शेयरों में जबर्दस्त उछाल दिखा। 13:10 बजे शेयर 7.40 फीसदी उछाल के साथ 288.40 रुपये पर चल रहा था।

क्विक कॉमर्स बिजनेस में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा

Swiggy ने सोच-समझकर नंदिता सिन्हा को इंस्टामार्ट का सीईओ बनाया है। देश में क्विक कॉमर्स के क्षेत्र में प्रतियोगिता तेजी से बढ़ रही है। इस फील्ड में पहले से Blinkit, Zepto, Flipkart और Amazon जैसी कंपनियां मौजूद हैं। मनीकंट्रोल ने मार्च में खबर दी थी कि सिन्हा मिंत्रा के सीईओ पद को छोड़ रही हैं। इसके कुछ दिन पहले फ्लिपकार्ट ग्रुप के सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति ने उन्हें वॉलमार्ट की कंपनी में बनाए रखने की संभावनाओं पर विचार किया था।

सिन्हा के नेतृत्व में मिंत्रा घाटे से फायदे में आई

सिन्हा फ्लिपकार्ट में 12 साल रहीं। इसमें से 4 साल से ज्यादा समय उन्होंने Myntra का नेतृत्व किया। उन्हें मिंत्रा के फैशन बिजनेस को चार चांद लगाने का श्रेय जाता है। उनके नेतृत्व में मिंत्रा चार साल तक लॉस उठाने के बाद फायदे में आ गई। FY24 में कंपनी ने 31 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया। एक साल पहले कंपनी ने 782 करोड़ रुपये का लॉस उठाया था।

स्विगी के कई एंप्लॉयीज फ्लिपकार्ट में रह चुके हैं

FY25 में कंपनी का प्रॉफिट बढ़कर 18 गुना यानी 548 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान ऑपरेटिंग रेवेन्यू 35 फीसदी बढ़ा। अब स्विगी सिन्हा से इंस्टामार्ट में इसी तरह के प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है। मनीकंट्रोल की लिंक्डइन की एनालिसिस के मुताबिक, स्विगी के 7,500 एंप्लॉयीज हैं। इनमें से अभी 350 से ज्यादा ऐसे एंप्लॉयीज हैं, जो अपने करियर में किसी समय फ्लिपकार्ट में काम कर चुके हैं।

सबसे पहले इंस्टामार्ट की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ानी होगी

सिन्हा पर सबसे पहले इंस्टामार्ट की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने की जिम्मेदारी है। नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) के लिहाज से Instamart दूसरे नंबर पर रही है। कभी यह तो कभी जेप्टो दूसरे नंबर पर रही हैं। ऑर्डर वॉल्यूम के लिहाज से इस्टामार्ट ब्लिंकिट और जेप्टो से काफी पिछड़ चुकी है। ब्लिंकिट, बिगबास्केट, फ्लिपकार्ट मिनट्स, एमेजॉन नाउ और फर्स्टक्लब ने प्रतियोगिता बढ़ने की वजह से प्रॉफिट टारगेट को पीछे कर दिया है।

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स्विगी का इंस्टामार्ट के लिए लंबी अवधि का विजन

नूडल्स ब्रांड नेचुरली योर्स के फाउंडर विनोद चेनधिल ने सिन्हा की नियुक्ति के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मुझे उम्मीद है कि नई टीम प्रीमियम ऑफरिंग्स को लाएगी, जिसके लिए वह जानी जाती है।” स्विगी पहले कह चुकी है कि कीमतों को लेकर प्रतिस्पर्धा सिर्फ समस्या का समाधान नहीं है। उसने कहा है कि समाधान ऐसा बिजनेस बनाने में है, जो सिर्फ कीमतों के लिहाज से आगे न हो। क्विक बिजनेस की उपयोगिता बढ़ रही है।