₹1500 के टिकट का हिसाब मांग रही पुलिस! जंतर-मंतर आंदोलन से पहले इस बात पर भड़के अभिजीत दीपके

Abhijeet Dipke CJP Delhi Protest: देश की राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को बड़ा आंदोलन होने वाला है। इस प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले राजनीतिक हलचलों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

दीपके का दावा है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को लगातार परेशान कर रही है और उन्हें कानूनी नोटिस जारी कर रही है।

‘1500 रुपये की टिकट से क्या दिक्कत?’

अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महाराष्ट्र की चंद्रपुर पुलिस की कार्रवाई पर तीखा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा कहा है कि महाराष्ट्र पुलिस देश की सबसे बेहतरीन पुलिस फोर्स है और दिल्ली पुलिस को उनसे सीखना चाहिए। लेकिन यह बेहद दुखद है कि चंद्रपुर पुलिस ने सीजेपी कार्यकर्ताओं को नोटिस थमाकर जंतर-मंतर आंदोलन में हिस्सा न लेने की हिदायत दी है। पुलिस कार्यकर्ताओं से यह भी पूछ रही है कि उनके दिल्ली सफर का खर्च कौन उठा रहा है और पैसे कहाँ से आए?’

दीपके ने सवाल उठाया कि क्या अब देश का कोई आम नागरिक अपनी जेब से 1,000 या 1,500 रुपये का रेल टिकट खरीदकर राजधानी नहीं जा सकता? उन्होंने कहा कि यात्रा के मामूली खर्चों पर सवाल उठाना और कार्यकर्ताओं को रोकना खुलेआम तानाशाही है।

‘क्या पुलिस ने पहले ही हिंसा का प्लान बना रखा है?’

पुलिस नोटिस में आंदोलन के संभावित रूप से ‘हिंसक’ होने की बात लिखे जाने पर सीजेपी प्रमुख ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘पुलिस को इतने दिन पहले ही कैसे पता चल गया कि आंदोलन हिंसक होने वाला है? क्या पुलिस ने पहले से ही कुछ योजना बना रखी है?’

साथ ही, पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर पोस्ट न करने के निर्देशों पर भी दीपके ने एतराज जताया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों पर चलती है, तो पुलिस इसे हिंसक कैसे मान सकती है?

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की वजह क्या है?

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी की मुख्य मांगें ये हैं:

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) का इस्तीफा: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का विरोध: केंद्र सरकार की इस योजना पर निशाना साधते हुए दीपके ने आरोप लगाया कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ केवल एक नारा है और इसके पीछे की असली मंशा ‘वन नेशन, वन पॉलिटिकल पार्टी’ (एक देश, एक ही राजनीतिक दल) लागू करना है।

पुलिसिया कार्रवाई और नोटिस के बावजूद सीजेपी का कहना है कि वे दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के फैसले पर कायम हैं।

‘Gyanesh, it’s done bro…’ का नारा लगाते बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी; अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी सांसद डिटेन

‘Gyanesh, it’s done bro…’ का नारा लगाते बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी; अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी सांसद डिटेन

Rahul Gandhi-India Bloc EC March: देश की राजधानी में मंगलवार को विपक्षी INDIA गठबंधन ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुआई में दर्जनों विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर विरोध मार्च निकाला। सुरक्षा बलों ने इस मार्च को संसद मार्ग पर ही नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी, बोले- ‘ज्ञानेश, अब बहुत हुआ!’

सुरक्षा बलों द्वारा रास्ता रोके जाने पर माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। इसी दौरान राहुल गांधी प्रदर्शनकारियों के बीच लगे बैरिकेड्स पर चढ़ गए और हाथों में तिरंगा लहराते हुए सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित करते हुए लिखा, ‘Gyanesh it’s done bro. Time to resign’ यानी ज्ञानेश, अब बहुत हो गया ब्रो! अब इस्तीफा देने का समय आ गया है।

इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, पवन खेड़ा और केसी वेणुगोपाल आकाशवाणी भवन के गेट तक पहुंच गए, जहां से पुलिस ने राहुल और प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया।

सड़क पर ही धरने पर बैठे सांसद, कई बड़े चेहरे हिरासत में

बैरिकेडिंग के पास मार्च रुकने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता अभिषेक बनर्जी व डेरेक ओ’ब्रायन और सीपीआई (एम) के जॉन ब्रिटास समेत तमाम सांसद सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।

सांसदों ने हाथों में तख्तियां और पोस्टर ले रखे थे, जिनमें सीईसी ज्ञानेश कुमार को संघ (RSS) की गणवेश में दिखाया गया था। सांसदों ने ‘भाजपा है CEC है’, ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘लोकतंत्र बिकाऊ नहीं है’ जैसे तीखे नारे लगाए। बाद में पुलिस ने अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी समेत कई नेताओं को बसों में भरकर हिरासत में ले लिया।

पैरामिलिट्री फोर्स तैनात, संजय राउत ने उठाए सवाल

विपक्ष के मार्च को देखते हुए संसद भवन और चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था और भारी बैरिकेडिंग की गई थी। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इस भारी सुरक्षा बल की तैनाती पर तीखा हमला बोला।

संजय राउत ने कहा, ‘हम सांसद हैं, इस देश के जिम्मेदार नागरिक हैं। हमें रोकने के लिए इतनी बड़ी तादाद में सुरक्षा बल तैनात करने की क्या ज़रूरत थी? हम निहत्थे हैं और शांतिपूर्वक पैदल जा रहे थे।’ राउत ने यह भी दावा किया कि मौके पर बीएसएफ और सीआईएसएफ के जवानों को तैनात किया गया था और केंद्रीय मंत्रियों के आवासों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी।

क्या है विवाद की वजह?

विपक्ष का यह भारी विरोध प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद सामने आया है, जो सोमवार को मतदाता नामांकन से जुड़े ‘फॉर्म 6’ (Form 6) को लेकर की गई थी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि उसने फॉर्म 6 के किसी भी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है और वह चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच करेगी कि क्या नियमों में बदलाव किए गए थे और इसकी अनुमति किसने दी थी।

इसी मुद्दे पर चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को एक बयान जारी कर कहा था कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म 6 के साथ जोड़े गए घोषणापत्र को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर देश को गुमराह किया है।

Form 6 controversy: चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावे को बताया भ्रामक, कांग्रेस नेता ने CEC ज्ञानेश कुमार पर फॉर्म-6 में अवैध बदलाव का लगाया आरोप

Form 6 controversy: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा तरीके से बदलाव किए। साथ ही कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मदद पहुंचाने के लिए अपने पद के दुरुपयोग का एक और सबूत है। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने गांधी के इस आरोप को भ्रामक बताते हुए कहा कि बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) का आदेश 24 जून 2025 को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई, 2026 के अपने फैसले में बरकरार रखा है।

राहुल गांधी ने 26 सितंबर के निर्वाचन आयोग के प्रेस नोट का हवाला देते हुए X पर एक पोस्ट में कहा, अब यह संदेह से परे स्थापित हो चुका है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा तरीके से बदलाव किया। उन्होंने आरोप लगाया, “यह भाजपा की मदद करने के लिए उनके पद का दुरुपयोग करने का एक और सबूत है।” लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र पर इस आपराधिक हमले में शामिल ज्ञानेश कुमार और अन्य सभी लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

चुनाव आयोग का जवाब

हालांकि, निर्वाचन आयोग ने बाद में राहुल गांधी के आरोप को भ्रामक बताते हुए उनका फैक्ट-चेक जारी किया है। आयोग ने X पर कहा कि बिहार में SIR का आदेश 24 जून 2025 को निर्वाचन आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था। इस आदेश को उच्चतम न्यायालय ने 27 मई, 2026 के अपने फैसले में बरकरार रखा है।

आयोग ने अपने 26 सितंबर 2026 के प्रेस नोट संख्या 120 के बिंदु 1(3) का हवाला देते हुए कहा कि एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को भी सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। कांग्रेस नेता ने जिस प्रेस नोट का उल्लेख किया, उसमें निर्वाचन आयोग ने कहा था कि SIR प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा-पत्र को उच्चतम न्यायालय द्वारा सही ठहराया गया है।

सुुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

दूसरी तरफ, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उच्चतम सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने यह टिप्पणी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियोग चलाए जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

बीजेपी भी भड़की

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने निर्वाचन आयोग के कुछ फैसलों से संबंधित जनहित याचिका की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हुई कार्यवाही के बारे में राहुल गांधी पर झूठ बोलने और देश को गुमराह करने का सोमवार को आरोप लगाया। सत्ताधारी पार्टी ने कहा कि कांग्रेस नेता को इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, “भारत के चीफ जस्टिस ने यह नहीं कहा कि फॉर्म-6 अवैध है। राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं कि उच्चतम न्यायालय ने ऐसा कहा है।” पात्रा ने आगे कहा, “यह ठीक वैसा ही है, जब राहुल गांधी ने दावा किया था कि उच्चतम न्यायालय ने राफेल सौदे में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की बात कही है। बाद में उन्हें उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल करना पड़ा और बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी।”

उन्होंने कहा, “यहां भी यही होने वाला है। झूठ बोलने की सजा होती है।” पात्रा ने आरोप लगाया कि गांधी मामले की उच्चतम न्यायालय में हुई सुनवाई और 26 सितंबर को निर्वाचन आयोग द्वारा जारी बयान के बारे में देश को ‘गुमराह’ करने की कोशिश कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 को लेकर साफ किया रुख, CJI बोले- ‘हमने मंजूरी नहीं दी’; CEC ज्ञानेश कुमार पर सुनवाई के बीच बढ़ा विवाद

BJP सांसद ने कहा, “दोनों ही मामलों में राहुल गांधी लोगों को गुमराह करके देश में अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उनकी रैलियों को कुछ मजबूती मिल सके।” उन्होंने कहा, “उनकी X पर की गई पोस्ट झूठ से भरी थी। एक जिम्मेदार नेता प्रतिपक्ष से इसकी उम्मीद नहीं की जाती। इस तरह झूठ का दुष्प्रचार करके देश में अराजकता पैदा करने का प्रयास करना अपराध है।”

CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई

CEC Gyanesh Kumar: सुप्रीम कोर्ट आज यानी सोमवार (5 अक्टूबर) को दो प्रमुख याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग और उनकी अगुवाई वाले भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा दो निर्वाचन आयुक्तों की कथित तौर पर सहमति के बिना निर्णय लेने के आयोग के तरीके को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीर्ष अदालत में सोमवार को सुनवाई होगी।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची एवं जस्टिस वी. मोहना की पीठ, राकेश कुमार सिंह और वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इन याचिकाओं में उन फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को भी चुनौती दी गई है, जो सीईसी ने अपने दो सहयोगियों की कथित तौर पर सहमति के बिना किए थे।

याचिका में क्या कहा गया है?

पटना के रहने वाले राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह तय करने का अनुरोध किया गया है कि क्या सीईसी कुमार अकेले उन शक्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो कानूनी तौर पर पूरे निर्वाचन आयोग की है। अगर ऐसा है तो उन कार्यों को अनधिकृत घोषित किया जाए और उपयुक्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

याचिका में कहा गया है, “निर्देश दिया जाए कि प्रतिवादी संख्या 3 (सीईसी) इस याचिका की लंबित अंतिम सुनवाई तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तौर पर काम न करें। निर्देश दिया जाए कि इस दौरान आयोग का कामकाज प्रतिवादी संख्या 4 (सुखबीर सिंह संधू) और 5 (विवेक जोशी) की सर्वसम्मति से चलाया जाए; और निर्देश दिया जाए कि (निर्देश के) परिणामस्वरूप रिक्त होने वाले पद पर कोई भी नियुक्ति एक ऐसी समिति की सिफारिश पर की जाए, जिसमें माननीय प्रधान न्यायाधीश भी शामिल हों।”

CEC कुमार को निलंबित करने की मांग

शीर्ष अदालत से यह अनुरोध किया गया है निर्वाचन आयोग के बहु-सदस्यीय स्वरूप को बनाए रखने के लिए याचिका की अंतिम सुनवाई तक कुमार को निलंबित रखा जाए। यह याचिका अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद दायर की गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त संधू और जोशी ने पिछले 10 माह में वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR)  से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी। उनका दावा है कि ये फैसले और आदेश उनकी जानकारी या अनुशंसा के बिना जारी किए गए थे।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

आलोचनाओं का सामना कर रहे, निर्वाचन आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना एक सामान्य बात है। उसके सभी आदेशों को पूरी वैधता प्राप्त होती है तथा वे स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।

याचिका में केंद्रीय कानून मंत्रालय, निर्वाचन आयोग, कुमार, संधू, जोशी और निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी मनीष गर्ग को पक्षकार बनाया गया है। वकील चांद कुरैशी के जरिए दायर त्रिपाठी की याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीईसी के कार्य सामूहिक निर्णय लेने की सांविधिक जरूरत का उल्लंघन करते हैं।

आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग

याचिका में सीईसी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ आधिकारिक कर्तव्य का निर्वहन न करने के लिए आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का भी अनुरोध किया गया है। याचिका में उठाए गए मुख्य मुद्दों में से एक ‘प्रपत्र 6’ में बदलाव है, जिसका इस्तेमाल लोग मतदाता के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए करते हैं।

ये भी पढ़ें- Flydubai विमान हादसे में बड़ा खुलासा: कट्टरपंथी को-पायलट का था इजरायल में प्लेन क्रैश कराने का प्लान! इंजन कर दिया था बंद

इसमें आरोप लगाया गया है कि पिछले SIR से जुड़ाव की जरूरत को आयोग के सॉफ्टवेयर के जरिए लागू किया गया। जबकि इसके लिए नियमों के तहत आवश्यक कानूनी संशोधन नहीं किया गया था। याचिका के अनुसार, कुमार के अलावा अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना तय प्रोसेस में बदलाव नहीं किया जा सकता।

Meerut Viral Video: पति को गर्लफ्रेंड संग मोमो डेट पर देख भड़की पत्नी! कार के बोनट पर लटकी; 100 मीटर तक घसीटता रहा शख्स

Meerut Viral Video: उत्तर प्रदेश के मेरठ से पति-पत्नी के रिश्ते और सड़क पर हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे का एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है। आरोप है कि पत्नी ने अपने पति को एक दूसरी महिला के साथ मोमो डेट पर रंगे हाथों पकड़ लिया। पति जब कार लेकर वहां से जाने लगा तो पत्नी उसकी कार के बोनट पर चढ़ गई। इस दौरान कार चलती रही और महिला करीब 100 मीटर तक बोनट पर लटकी रही। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। पुलिस ने बताया कि पत्नी को कथित तौर पर कार से कुचलने की कोशिश करने के आरोप में उसके पति समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, घटना शनिवार को लोहिया नगर थाना क्षेत्र में हापुड़ रोड स्थित एल-ब्लॉक चौकी के पास हुई।

दूसरी महिला के साथ पति को देख पत्नी ने किया सामना

पुलिस के मुताबिक, शनिवार शाम लोहियानगर इलाके के एल-ब्लॉक पुलिस चौकी के पास मयंक सिंह कथित तौर पर अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मौजूद था। इसी दौरान उसकी पत्नी सुनीता सिंह की नजर दोनों पर पड़ गई। सुनीता ने पति को दूसरी महिला के साथ देखा तो वहां दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि विवाद बढ़ने के बाद मयंक वहां से कार लेकर निकलने की कोशिश करने लगा।

कार के सामने खड़ी हो गई पत्नी

पुलिस के अनुसार, पति को रोकने के लिए सुनीता कार के सामने खड़ी हो गई। कार आगे बढ़ी तो वह टोयोटा अर्बन क्रूजर टैसर के बोनट पर जा गिरी और कार को रोकने के बजाय वह बोनट पकड़कर लटक गई। वायरल वीडियो में कथित तौर पर महिला को चलती कार के बोनट पर पकड़े हुए देखा जा सकता है। वह आसपास मौजूद लोगों से मदद के लिए लगातार गुहार लगाती सुनाई दे रही है।

करीब 100 मीटर तक बोनट पर लटकी रही महिला

बताया गया है कि कार करीब 100 मीटर तक चलती रही। इस दौरान आसपास के लोग घटना देखकर वहां जुटने लगे। लोगों की भीड़ बढ़ती देख चालक ने आखिरकार कार रोक दी। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

पुलिस ने बताया कि काजीपुर निवासी महिला की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, उसने हसनपुर कला गांव निवासी अपने पति मयंक (36) को एक महिला के साथ कार में देखा और दोनों को रोक लिया तभी पति-पत्नी के बीच कहासुनी हो गई।

महिला की शिकायत के मुताबिक, कहासुनी के बाद पति ने उस पर कार चढ़ाने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मयंक और उसके साथ मौजूद महिला ने उसे झाड़ियों में गिराकर उसका गला दबाने की भी कोशिश की। उसके साथ गाली-गलौज भी की।

पति पर कई गंभीर आरोप, दोनों गिरफ्तार

सुनीता ने अपने पति के खिलाफ मारपीट, दहेज उत्पीड़न और बेवफाई के आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मयंक के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला भी दर्ज किया है। पुलिस ने इस मामले में मयंक सिंह और माही वर्मा दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में इस्तेमाल कार, जिसका नंबर UP15ER3086 बताया गया है, उसे भी पुलिस ने जब्त कर लिया है।

मामला लोहियानगर थाने में FIR नंबर 697/2026 के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, केस में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) और 352 लगाई गई हैं। मामले की आगे जांच जारी है।

ये भी पढें- Justice Ujjal Bhuyan: ‘वोटिंग से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मनमानी’; SIR विवाद पर बोले जस्टिस उज्ज्वल भुइयां

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला एक व्यक्ति को कार से उतारकर उसकी पिटाई करती दिखाई दे रही है। वीडियो में महिला को कार के बोनट पर कुछ दूरी तक घसीटते हुए भी देखा जा सकता है।

पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) संग्राम सिंह ने पीटीआई को बताया कि पुलिस ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में प्रयुक्त कार को जब्त कर लिया गया है और मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है। दोनों आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया जा रहा है।

Justice Ujjal Bhuyan: ‘वोटिंग से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मनमानी’; SIR विवाद पर बोले जस्टिस उज्ज्वल भुइयां

SIR Row: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने रविवार (4 अक्टूबर) को कहा कि लाखों भारतीय नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी और संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया को किसी भी तरह की दलीलों के जरिये उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था को नकारती है। जस्टिस भुइयां ने कहा कि चाहें अरबपति हो या रिक्शा चलाने वाला हो। दोनों के वोट की कीमत बराबर होती है।

जस्टिस भुइयां रविवार को हैदराबाद में NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह टिप्पणी भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच आई है।

‘मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया भारतीय संविधान का सीधा उल्लंघन होगी’

जस्टिस भुइयां ने ‘नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ’ में आयोजित 19वीं जस्टिस बोध राज साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन कार्यक्रम में कहा कि भारत का संविधान नागरिकों को दो वर्गों में नहीं बांटता, जिनमें से एक वर्ग मताधिकार प्राप्त हो और दूसरा मताधिकार से वंचित हो। उन्होंने कहा कि व्यापक पैमाने पर भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया भारतीय संविधान के आर्टिकल 326 और 14 का सीधा उल्लंघन होगी।

उन्होंने कहा, “यदि किसी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप अनगिनत भारतीय नागरिक अपने ही देश में दोयम दर्जे के नागरिक बन जाएं और उनके पास मतदान का अधिकार न रहे, तो ऐसी प्रक्रिया पूरी तरह से मनमानी है। किसी भी तरह की दलीलों से इसे उचित नहीं ठहराया जा सकता।” उन्होंने कहा, “यह संविधान के मूल ढांचे पर हमला करती है और मैं तो यहां तक कहूंगा कि यह उस संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन है, जिसे हमने भारत के संविधान के तहत अपनाया है।”

ब्रिटिश शासन का किया जिक्र

जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि भारतीय नागरिकों का मतदान का अधिकार देश में ब्रिटिश शासन के खिलाफ लंबे संघर्ष से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद हासिल की गई स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति है और संविधान के आर्टिकल 326 के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।

‘संविधान से ऊपर कोई नहीं’

जस्टिस भुइयां ने आगे कहा, “ऐसा करने का अधिकार किसी भी प्राधिकार को नहीं है। कोई भी अदालत इसे मंजूरी या मान्यता नहीं दे सकती। संविधान से ऊपर कोई नहीं है।” उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार या मतदाता होने का अधिकार महज एक वैधानिक अधिकार नहीं है, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 जैसे संसदीय कानून से प्राप्त होता है। बल्कि यह एक संवैधानिक अधिकार है, जो स्वयं लोकतंत्र का एक विशिष्ट और अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस तरह, यह भारतीय संविधान के मूल ढांचे के दायरे में आता है।

सुप्रीम कोर्ट का दिया हवाला

पीटीआई के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी नागरिक के मतदान के अधिकार को संविधान के आर्टिकल 326 के प्रावधान से अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी नागरिक का मतदाता बनने और मतदान करने का अधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला है।

‘वोटर लिस्ट में दर्ज किसी नाम को हटाने की अनुमति नहीं’

जस्टिस भुइयां कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 22 वोटर लिस्ट में दर्ज किसी नाम को हटाने की अनुमति देती है। लेकिन ऐसा तभी किया जा सकता है जब संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया गया हो। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने मतदाताओं के नाम हटाने के मामलों में अपनाए जाने वाले दिशानिर्देश निर्धारित किए हैं।

‘सबसे ऊंचा पद राष्ट्रपति का नहीं, बल्कि नागरिक का होता’

जस्टिस भुइयां कहा कि मृत व्यक्ति के मामले को छोड़कर, वोटर लिस्ट में दर्ज किसी वोटर का नाम बिना पूर्व सूचना दिए और उसका पक्ष सुने बिना हटाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “एक भारतीय नागरिक के रूप में उसकी पहचान से मतदान का अधिकार या मतदाता सूची में शामिल होने का अधिकार अलग नहीं किया जा सकता। ऐसा करना शरीर से आत्मा निकालने के समान होगा।”

ये भी पढ़ें- Flydubai विमान हादसे में बड़ा खुलासा: कट्टरपंथी को-पायलट का था इजरायल में प्लेन क्रैश कराने का प्लान! इंजन कर दिया था बंद

जस्टिस भुइयां ने कहा कि अमेरिकी जज जस्टिस फ्रैंकफर्टर ने यह विचार व्यक्त किया था कि लोकतंत्र में सबसे ऊंचा पद राष्ट्रपति का नहीं, बल्कि नागरिक का होता है। उन्होंने कहा, “मैं खुद से सवाल करता हूं कि अपने मतदान के अधिकार से वंचित नागरिक की आखिर क्या हैसियत रह जाती है?”

IMD Weather Update October 4: मौसम का आज बदलेगा मिजाज! इन राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट

IMD Weather Update October 4: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का पूर्वानुमान जताया है। केरल, ओडिशा, बिहार, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में बारिश होने की संभावना है। कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के भी कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश में फिलहाल मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने वाला है। IMD के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में 5 से 7 अक्टूबर के बीच बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है।

दिल्ली-NCR में अभी सूखा मौसम, 6-7 अक्टूबर को बारिश के आसार

दिल्ली में आज मौसम मुख्य रूप से शुष्क और धूप वाला रहने की संभावना है। राजधानी में फिलहाल कोई बड़ी बारिश होने का अनुमान नहीं है। इस दौरान करीब 20-22 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। अगले कुछ दिनों तक दिल्ली में मौसम के शुष्क रहने की संभावना है। हालांकि, 6 और 7 अक्टूबर को दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में कहीं-कहीं से लेकर छिटपुट बारिश हो सकती है। यानी दिल्ली-NCR के लोगों को सप्ताह के मध्य में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

यूपी में फिलहाल बारिश का अलर्ट नहीं

उत्तर प्रदेश में भी फिलहाल मौसम के शुष्क रहने का अनुमान है। राज्य में अगले कुछ दिनों के दौरान किसी बड़े मौसमी बदलाव की संभावना नहीं है। IMD के ताजा चेतावनी बुलेटिन के अनुसार, 4 से 9 अक्टूबर के बीच पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए कोई मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है। राज्य में शनिवार को भी गरज-चमक, भारी बारिश या किसी अन्य गंभीर मौसम की स्थिति का अलर्ट नहीं है।

ओडिशा, बिहार और झारखंड में बारिश

उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में जहां मौसम शुष्क रहने वाला है। वहीं, पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। ओडिशा में 7 अक्टूबर तक कहीं-कहीं से लेकर छिटपुट बारिश होने की संभावना है। वहीं, बिहार और झारखंड में 5 अक्टूबर से छिटपुट बारिश शुरू हो सकती है।

पूर्वोत्तर में गरज-चमक और भारी बारिश के आसार

पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में गरज के साथ बिजली गिरने और बारिश की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में कहीं-कहीं भारी बारिश भी हो सकती है। इस क्षेत्र में बारिश की गतिविधियां 7 अक्टूबर तक जारी रहने का अनुमान है। छत्तीसगढ़, कोंकण-गोवा और मध्य महाराष्ट्र में भी 7 अक्टूबर तक कहीं-कहीं से लेकर छिटपुट बारिश होने की संभावना है।

केरल में तेज हवाओं के साथ बारिश

केरल में मौजूदा बारिश का दौर जारी रहेगा। यहां गरज-चमक, मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। हालांकि, अगले दो-तीन दिनों में बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। IMD ने 4 से 6 अक्टूबर के बीच केरल और माहे में कहीं-कहीं भारी बारिश का अनुमान जताया है। वहीं, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 5 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

उत्तर-पश्चिम भारत में 5 से 7 अक्टूबर के बीच बारिश

IMD ने उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में 5 से 7 अक्टूबर के बीच बारिश के नए दौर का अनुमान जताया है। इस दौरान हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश हो सकती है। वहीं, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद में 6 और 7 अक्टूबर को कहीं-कहीं से लेकर छिटपुट बारिश होने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश में 6 और 7 अक्टूबर को गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। हालांकि, 3 से 5 अक्टूबर के बीच पंजाब, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए कोई मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है।

दक्षिण भारत में भी बारिश का दौर जारी

दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। केरल और माहे में 7 अक्टूबर तक व्यापक स्तर पर बारिश हो सकती है। इसके अलावा दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में गरज-चमक, बिजली और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। 2 से 5 अक्टूबर के बीच तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में तेज सतही हवाएं चल सकती हैं।

मानसून की वापसी का दौर जारी

देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का दौर जारी है। IMD के मुताबिक, आने वाले दिनों में उत्तर और मध्य भारत के कुछ और हिस्सों से मानसून की वापसी हो सकती है। हालांकि, मानसून की विदाई के बावजूद दक्षिण, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश जारी रहने की संभावना है।

ये भी पढ़ें- SIR विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार पर 20 साल पुराने भ्रष्टाचार के आरोप, केरल सरकार कराएगी विजिलेंस जांच

SIR विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार पर 20 साल पुराने भ्रष्टाचार के आरोप, केरल सरकार कराएगी विजिलेंस जांच

CEC Gyanesh Kumar: केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ साल 2006 के कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। उस समय ज्ञानेश कुमार केरल के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव के पद पर तैनात थे। करीब दो दशक पुराने इस मामले की दोबारा चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं। अब नई विजिलेंस जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों और पुराने रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह जांच मलयंकिझु वेणुगोपाल की शिकायत के आधार पर शुरू की गई है। न्यूज 18 के मुताबिक, शिकायत में ज्ञानेश कुमार के PWD सचिव रहते सरकारी निर्माण कार्यों के ठेके दिए जाने में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है।

मलेशियाई अधिकारी की मौत से भी जुड़े आरोप

मामला ली सी बीन की मौत से भी जुड़ा है। ली सी बीन मलेशिया के नागरिक और PATI-BEL नाम की भारत-मलेशिया संयुक्त कंपनी के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर थे। यह कंपनी केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के तहत एक सड़क परियोजना से जुड़ी थी। साल 2006 में कुआलालंपुर में ली की आत्महत्या से मौत हो गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, ली के कथित सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम था। नोट में PWD अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और कथित उत्पीड़न से जुड़े आरोप लगाए जाने की बात सामने आई थी।

ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप हैं?

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि PWD सचिव रहते ज्ञानेश कुमार ने ठेकेदारों को सरकारी निर्माण कार्यों का आवंटन करने में कथित आपराधिक कदाचार किया। शिकायतकर्ता ने ली सी बीन की मौत की परिस्थितियों और उनके कथित सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की भी जांच की मांग की है। इस मामले में पहले भी विजिलेंस जांच हुई थी।

न्यूज 18 के मुताबिक, उस समय की रिपोर्टों के अनुसार, विवाद सामने आने के बाद 2006 के अंत से पहले ज्ञानेश कुमार का PWD से तबादला कर दिया गया था। हालांकि, पिछली जांच किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंची। वेणुगोपाल का आरोप है कि पहले की विजिलेंस जांच को अचानक बंद कर दिया गया और आरोपों की उचित तरीके से पड़ताल नहीं की गई।

केरल सरकार ने पुराने विजिलेंस रिकॉर्ड मांगे

ताजा घटनाक्रम से पहले केरल के गृह विभाग ने 2006 में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुई प्रारंभिक विजिलेंस जांच से जुड़ी फाइलें मांगी थीं। इन रिकॉर्ड में ली सी बीन की मौत और केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट से जुड़े आरोपों के बाद शुरू हुई जांच से संबंधित दस्तावेज शामिल बताए जा रहे हैं।

SIR विवाद को लेकर देशभर में प्रदर्शन

शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देश में कई जगह प्रदर्शन हुए। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने दिल्ली में सड़कों पर उतरकर विरोध किया और इस दौरान 700 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। जबकि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अपील पर मुंबई के शिवाजी पार्क में बड़ी संख्या में लोग जुटे। इन प्रदर्शनों के तहत राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और युवा समूहों ने व्यापक स्तर पर लामबंदी की। उन्होंने कुमार के इस्तीफे की मांग की। दिल्ली और मुंबई के अलावा अहमदाबाद, लखनऊ और पटना समेत देश के कई अन्य हिस्सों में प्रदर्शन हुए।

विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गांधी जयंती के दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में लिए जाने की निंदा की और पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया। कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार दोपहर मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP की अगुवाई वाले प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग जुटे। एसएफआई और आईसा के कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल हुए। अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, गायक विशाल डडलानी और महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी भी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे।

ये भी पढ़ें- Smit Machchhar: जिस पायलट ने आसमान में टाली तबाही, उसे नेतन्याहू का आया खास न्योता; कैप्टन स्मित संग PM मोदी भी होंगे साथ!

शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने CJP के आंदोलन को समर्थन दिया है। दिल्ली में फिरोजशाह रोड और अशोक रोड समेत कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की। जबकि पुलिसकर्मियों ने उन्हें निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर की ओर बढ़ने से रोक दिया। दिल्ली मेट्रो ने प्रदर्शन स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था के तहत राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय और पेटल चौक सहित मध्य दिल्ली के 12 स्टेशनों पर अस्थायी रूप से प्रवेश और निकास बंद कर दिया। मध्य दिल्ली में इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गई। भारतीय युवा कांग्रेस ने प्रदर्शन कर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए तथा कुमार के इस्तीफे की मांग की।

‘CM विजय को गले लगाना है…’ जंतर-मंतर सड़क पर लेटी महिला की अनोखी मांग, Video वायरल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला का अलग अंदाज देखने को मिला। सोशल मीडिया पर महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में महिला प्रदर्शन स्थल से हटने से इनकार कर दिया। महिला ने कहा कि वह एक्टर और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय से मिलकर उन्हें गले लगाना चाहती है। महिला की इस बात को लेकर मौके पर कुछ देर तक लोगों के बीच चर्चा होती रही। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

क्या है पूरा मामला

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में एक महिला सड़क पर लेटी नजर आ रही है। वीडियो में दो महिला पुलिसकर्मी उस महिला के पास जाती नजर आती हैं और उसे वहां से उठाने की कोशिश करती हैं। लेकिन महिला वहां से हटने को तैयार नहीं होती। जब एक पुलिसकर्मी उसे उठाने की कोशिश करती हे महिला तुरंत विरोध करते हुए कहती है, “मुझे मत छुओ।” जब उससे इसकी वजह पूछी जाती है, तो वह कहती है कि वह एक्टर और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलपति से मिलना चाहती है और उन्हें गले लगाना चाहती है। इसके बाद महिला पुलिसकर्मी उसे वहां से अपने साथ ले जाती हैं।

चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर के आसपास विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के लोग जुटे। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ाई और कई लोगों को हिरासत में भी लिया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सवाल उठाए। आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाए गए हैं।

प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ AISA, SFI, NSUI और दूसरे छात्र संगठन भी शामिल हुए। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। सुरक्षा के मद्देनजर जंतर-मंतर व आसपास के इलाकों में सख्त पाबंदियां लागू की गई थीं।

मेट्रो स्टेशन को किया गया बंद

शुक्रवार को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने 700 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया। इनमें आम आदमी पार्टी के नेता आतिशी, सौरभ भारद्वाज, संजीव झा और संजय सिंह भी शामिल थे। प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग की गई और कई मेट्रो स्टेशनों पर कुछ समय के लिए आने-जाने पर रोक लगाई गई।

‘हनुमान अंश’ ने 56वें दिन भी कमा लिए इतने करोड़! क्या आप भूमियाधार के उस फेमस झरने को जानते हैं जहां का पानी पीते थे नीम करौली बाबा?

फ्लाइट में बैठे दादाजी कर रहे थे ChatGPT से ये काम, तस्वीर वायरल हुई तो लोगों ने जमकर की तारीफ

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर अक्सर युवाओं की चर्चा होती है, लेकिन एक 77 साल के भारतीय दादाजी ने इस धारणा को ही बदल दिया। वह फ्लाइट में बैठकर ChatGPT की मदद से वर्टिकल फार्मिंग का बिजनेस आइडिया तैयार कर रहे थे। खास बात यह थी कि वह AI से बात करते समय उसे बार-बार बेहद सम्मान से ‘सर’ कह रहे थे। उनकी यही बात सोशल मीडिया यूजर्स को इतनी पसंद आई कि तस्वीर वायरल हो गई।

फ्लाइट में चल रही थी बिजनेस की तैयारी

हैदराबाद के रहने वाले VBR प्रसाद इंडिगो की फ्लाइट में सफर कर रहे थे। उनके पास बैठे एक युवा यात्री की नजर उनके फोन पर पड़ी। प्रसाद ChatGPT के साथ बिजनेस प्लान पर चर्चा कर रहे थे। युवा यात्री ने उनकी तस्वीर लेकर X पर शेयर कर दी। पोस्ट में बताया गया कि 77 साल की उम्र में भी प्रसाद बिजनेस आइडिया पर इतनी गंभीरता से काम कर रहे थे। देखते ही देखते पोस्ट को लाखों व्यूज मिल गए।

ChatGPT को तीन बार कहा ‘सर’

प्रसाद की बातचीत का सबसे मजेदार हिस्सा उनका अंदाज था। उन्होंने कुछ ही वाक्यों में ChatGPT को तीन बार ‘सर’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने AI को धन्यवाद देते हुए कहा कि वह दो फाइल डाउनलोड करेंगे और जरूरत पड़ने पर दोबारा मदद लेंगे। सोशल मीडिया पर लोगों को उनका यह शालीन अंदाज बेहद पसंद आया। आज जहां लोग AI को सीधे आदेश देने के आदी हो चुके हैं, वहीं प्रसाद का विनम्र तरीका इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया।

77 की उम्र में नया बिजनेस आइडिया

प्रसाद सिर्फ ChatGPT से बातचीत नहीं कर रहे थे, बल्कि उससे अपने वर्टिकल फार्मिंग के आइडिया को बेहतर बनाने में मदद ले रहे थे। यानी उम्र बढ़ने के साथ सीखने और कुछ नया करने का उनका उत्साह कम नहीं हुआ। उनकी तस्वीर शेयर करने वाले यूजर ने भी उनकी तारीफ करते हुए लिखा कि वह 77 की उम्र में कई युवाओं से ज्यादा फोकस्ड नजर आ रहे थे।

वायरल होने के बाद दादाजी ने खुद दिया जवाब

पोस्ट वायरल होने के बाद प्रसाद खुद X पर आए और लोगों के प्यार का जवाब दिया। उन्होंने खुशी जताई कि उनकी तस्वीर और बातचीत को इतनी लोकप्रियता मिली। उन्होंने AI को लेकर भी एक बात कही तकनीक का इस्तेमाल इंसान के हाथ में है और इसे अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया ने कहा- ‘ऐसे ही रहिए सर!’

प्रसाद की कहानी पर लोगों ने मजेदार से लेकर भावुक प्रतिक्रियाएं तक दीं। किसी ने उनकी विनम्रता की तारीफ की तो किसी ने मजाक में कहा कि अगर कभी AI इंसानों से नाराज हुआ, तो प्रसाद को उनकी शालीनता के कारण छोड़ देगा। कई लोगों ने यह भी कहा कि उनकी कहानी दिखाती है कि AI सीखने की कोई उम्र नहीं होती। सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो तकनीक बुजुर्गों के लिए भी सीखने, काम करने और नए आइडिया आजमाने का साथी बन सकती है।

न्यूजलेटर लिखकर महिला ने खड़ा किया 2.5 करोड़ का कारोबार, फिर भी इसे बताती हैं ‘साइड हसल’; जानिए क्यों