Delhi SIR: सीएम रेखा गुप्ता-अरविंद केजरीवाल को SIR का नोटिस,जानें चुनाव आयोग ने क्यों उठाया ये कदम

Delhi SIR: राजधानी दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर शनिवार को एक बड़ी खबर सामने आई है। स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के तहत नोटिस पाने वाले वोटर्स में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल का नाम भी लिस्ट में सामने आया। आयोग ने बताया कि SIR प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ियों की लिस्ट में नाम आने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया गया है। चुनाव आयोग ने दिल्ली में SIR के तहत जमा किए गए उनके एन्यूमरेशन फॉर्म की जानकारी में गड़बड़ियों के लिए नोटिस भेजा है।

इसलिए भेजा गया नोटिस

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने ऐसे मतदाताओं की लिस्ट जारी की है, जिनके रिकॉर्ड में गड़बड़ी या पुराने रिकॉर्ड से मिलान नहीं होने की बात सामने आई है। ये लिस्ट 31 अगस्त को जारी हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के करीब तीन हफ्ते बाद जारी की गई। सीएम रेखा गुप्ता को भेजा गया नोटिस उनके और उनके माता-पिता की दर्ज उम्र में 15 साल से कम का अंतर होने से जुड़ा है। वहीं, अरविंद केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, माता-पिता और बेटे पुलकित केजरीवाल के रिकॉर्ड पिछली SIR की वोटर लिस्ट से नहीं मिल पाए, इसलिए उन्हें भी नोटिस दिया गया है। इन नोटिस को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में रखा गया है—‘नो मैपिंग’ और ‘लॉजिकल गड़बड़ी’।

इन बड़े नेताओं के नाम भी शामिल

इस लिस्ट में राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल का नाम भी शामिल है। उनकी जानकारी पिछली SIR वोटर लिस्ट से मेल नहीं खाने पर उन्हें नोटिस दिया गया है। दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को भी नोटिस मिला है। उनकी पत्नी और भाई को नाम में अंतर पाए जाने के कारण नोटिस भेजा गया है। चुनाव अधिकारियों के पहले जारी आंकड़ों के मुताबिक, 13,79,785 मतदाताओं को ‘नो मैपिंग’ श्रेणी में रखा गया है, जबकि 19,33,134 मतदाताओं के रिकॉर्ड में ‘तार्किक अंतर’ पाया गया है। हालांकि इन सभी मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल हैं, लेकिन उन्हें अपने रिकॉर्ड में मिली गड़बड़ियों को दूर करने के लिए सुनवाई में शामिल होने को कहा गया है।

जारी है SIR की प्रक्रिया

31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के मुताबिक, दिल्ली में वोटरों की संख्या घटकर 97,53,577 रह गई है। यह 30 जून को दर्ज 1,45,10,299 वोटरों के मुकाबले 32.8% कम है। वहीं, वोटरों की संख्या में बदलाव के बाद दिल्ली में पोलिंग स्टेशनों की संख्या बढ़कर 14,947 हो गई है, जबकि पहले 13,033 पोलिंग स्टेशन थे। यानी पोलिंग स्टेशनों में करीब 15% की बढ़ोतरी हुई है। चुनाव अधिकारियों ने सभी 70 विधानसभा सीटों के पोलिंग स्टेशनों की जानकारी भी जारी कर दी है।

अलग-अलग पोलिंग स्टेशनों के दस्तावेजों में एसआईआर के दौरान सामने आई कई तरह की गड़बड़ियों का पता चला है। नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सरोजिनी नगर के एक पोलिंग स्टेशन पर 84 वोटरों के नाम जांच के लिए चिन्हित किए गए हैं। इनमें 37 वोटरों की जानकारी पिछली एसआईआर मतदाता सूची से नहीं मिल पाई। बाकी मामलों में नाम और अन्य रिकॉर्ड से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं।

टाटा ट्रस्ट ने Tata Sons के लिस्ट होने की बात खारिज की, नोएल टाटा ने भी अनलिस्टेड रखने का रुख दोहराया

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) को शेयर बाजार में लिस्ट कराने को लेकर Tata Trusts ने अपना रुख साफ किया है। Trusts ने कहा कि उसने कंपनी को पब्लिक करने पर सहमति नहीं दी है। चेयरमैन नोएल टाटा (Noel Tata) ने भी यही बात दोहराई है। उनका कहना है कि 100 साल से ज्यादा पुराने टाटा ग्रुप की मौजूदा संरचना को बचाए रखना जरूरी है।

Tata Sons बोर्ड ने क्या कहा?

Tata Trusts के मुताबिक, 17 सितंबर की बैठक में Tata Sons के बोर्ड ने RBI के कम्युनिकेशन पर चर्चा की। बोर्ड ने कहा कि सिर्फ लिस्टिंग पर ही फैसला नहीं होना चाहिए। सभी उपलब्ध विकल्पों को देखा और समझा जाना चाहिए।

बोर्ड ने कहा कि इन सभी विकल्पों का तुरंत आकलन किया जाएगा। इसके बाद उनकी रिपोर्ट और सिफारिशें बोर्ड के सामने रखी जाएंगी।

Noel Tata ने लिस्टिंग पर क्या कहा?

नोएल टाटा ने कहा कि लिस्टिंग के मुद्दे पर बोर्ड पहले ही फैसला ले चुका है। हालांकि, ऐसे मामले में जल्दबाजी ठीक नहीं है। इसके लिए जरूरी दस्तावेज, जानकारी और कानूनी सलाह जुटानी होगी। इसके बाद बोर्ड को पूरी जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि RBI के आदेश में लिस्टिंग की बात नहीं कही गई है। आदेश में कोई खास कदम उठाने को भी नहीं कहा गया है। साथ ही, RBI ने यह नहीं कहा कि Tata Sons ने कोई नियम तोड़ा है।

नोएल टाटा के मुताबिक, RBI के आदेश का कानूनी असर क्या है और कंपनी को कब तक क्या करना है, इस पर बोर्ड ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है।

लिस्टिंग क्यों नहीं चाहते Noel Tata

नोएल टाटा ने लिस्टिंग को लेकर अपनी चिंता भी बताई। उनका कहना है कि कंपनी के लिस्ट होने के बाद Tata Sons को संस्थागत और विदेशी शेयरधारकों के प्रति जवाबदेह होना पड़ेगा।

इन निवेशकों का मुख्य लक्ष्य आर्थिक रिटर्न होता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या वे किसी मुश्किल में फंसी Tata Group की कंपनी को बचाने के लिए पैसा लगाने को तैयार होंगे।

इसी तरह, अगर कोई नया प्रोजेक्ट शुरू किया जाता है और उसका रिटर्न 15 साल बाद मिलने की उम्मीद है, तो क्या शेयरधारक उसमें पैसा लगाने की मंजूरी देंगे? नोएल टाटा के मुताबिक, यही बड़ा सवाल है।

उन्होंने कहा कि यह शेयरधारकों की आलोचना नहीं है। उनकी जिम्मेदारी ही फाइनेंशियल रिटर्न देखना है। लेकिन Tata Group के मामले में बात इससे आगे की है। यहां ग्रुप की पहचान और उसकी मौजूदा संरचना भी जुड़ी है।

Tata Sons पर RBI के नियम लागू होंगे

यह मामला RBI के फैसले के बाद और अहम हो गया है। RBI ने कुछ दिन पहले Tata Sons की Core Investment Company (CIC) के तौर पर रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी थी।

इसके बाद 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में Tata Sons ने RBI के लागू नियमों का पालन करने की दिशा में कदम उठाने का फैसला किया। कंपनी ने कहा कि वह RBI, Tata Trusts और दूसरे हितधारकों से भी जरूरी अनुपालन को लेकर सलाह लेगी।

Tata Sons पिछले दो साल से ज्यादा समय से RBI के इस रेगुलेटरी फ्रेमवर्क से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी। अब बोर्ड के ताजा फैसले से कंपनी के रुख में बदलाव दिख रहा है।

Tata Trusts का पुराना फैसला भी कायम

Tata Trusts ने अपने पुराने फैसले का भी जिक्र किया। Trusts के मुताबिक, रतन टाटा के समय Tata Sons को अनलिस्टेड रखने पर सर्वसम्मति से फैसला हुआ था।

इसके बाद जुलाई 2025 में Sir Dorabji Tata Trust और Sir Ratan Tata Trust ने भी Tata Sons को अनलिस्टेड रखने के पक्ष में प्रस्ताव पास किए थे। इन फैसलों की जानकारी Tata Sons को भी दी गई थी। Tata Trusts ने कहा कि तब से उसका रुख वही है।

इससे पहले Moneycontrol ने रिपोर्ट किया था कि Tata Sons के बोर्ड ने 17 सितंबर की बैठक में एन चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए चेयरमैन बनाने का फैसला किया है। हालांकि, नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अमेरिका में EB-5 वीजा आवेदन में भारतीय सबसे आगे:12 हजार से ज्यादा लोगों ने अप्लाई किया, चीन को पीछे छोड़ा

अमेरिका के इमिग्रेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। EB-5 वीजा के लिए आवेदन करने वाले भारतीयों की संख्या अब चीन से ज्यादा हो गई है। पिछले तीन साल में 12,900 भारतीयों ने EB-5 के लिए आवेदन किया, जबकि चीन से 9,875 आवेदन आए। EB-5 अमेरिका का ऐसा वीजा प्रोग्राम है, जिसमें विदेशी नागरिक अमेरिका में पैसा निवेश करके ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता बना सकते हैं। इसके लिए करीब 7.5 करोड़ रुपए का निवेश करना होता है। ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता है EB-5 EB-5 के जरिए अमेरिका में निवेश करने वाले लोगों को स्थायी रूप से वहां रहने यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने का मौका मिलता है। H-1B वीजा के नियमों में सख्ती बढ़ने के बीच कुछ भारतीयों की दिलचस्पी EB-5 में बढ़ी है। हालांकि, EB-5 वीजा मिलने का मतलब सीधे अमेरिकी नागरिक बन जाना नहीं है। पहले आवेदक को ग्रीन कार्ड के लिए जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं। इसके बाद अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और आगे नागरिकता पाने की प्रक्रिया अलग होती है। प्रोफेसर और वैज्ञानिकों के लिए EB-1 कोटा समय से पहले खत्म अमेरिका में EB-1 वीजा का कोटा इस साल तय तारीख से करीब एक महीने पहले ही पूरा हो गया। इस कैटेगरी में हर साल करीब 7 हजार वीजा उपलब्ध होते हैं। इस बार यह कोटा 1 सितंबर को ही खत्म हो गया, जबकि इसे 30 सितंबर तक चलना था। EB-1 वीजा कैटेगरी में प्रोफेसर, वैज्ञानिक और रिसर्च स्कॉलर जैसे लोग आवेदन कर सकते हैं। कोटा जल्दी खत्म होने से पता चलता है कि इस वीजा के लिए इस साल मांग काफी ज्यादा रही। ट्रम्प गोल्ड कार्ड के लिए 165 आवेदन, सिर्फ 1 को मिला ट्रम्प ने 2025 में गोल्ड कार्ड स्कीम शुरू की थी। इसे उन्होंने EB-5 वीजा के विकल्प के तौर पर पेश किया था। इसका मकसद था कि अमीर विदेशी नागरिक अमेरिका में पैसा निवेश करके स्थायी निवास पाने का रास्ता बना सकें। हालांकि, अब तक इस स्कीम को ज्यादा सफलता नहीं मिली है। अप्रैल 2026 में वित्त मंत्री लटनिक ने बताया था कि 338 लोगों ने गोल्ड कार्ड में रुचि दिखाई, 165 लोगों ने आवेदन फीस जमा की और सिर्फ एक व्यक्ति को गोल्ड कार्ड जारी किया गया। गोल्ड कार्ड के लिए अमेरिका में करीब 9.5 करोड़ रुपए का निवेश करना होता है। ऐसे में इसकी तुलना EB-5 से भी की जा रही है और माना जा रहा है कि इसी वजह से EB-5 में भारतीयों की दिलचस्पी बढ़ी है। गोल्ड कार्ड की कानूनी मान्यता पर सवाल ट्रम्प गोल्ड कार्ड को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी कानूनी मान्यता को लेकर है। ट्रम्प ने इसे राष्ट्रपति के तौर पर मिली अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके शुरू किया है। इसलिए एक सवाल यह भी है कि अगर ट्रम्प राष्ट्रपति पद पर नहीं रहते हैं तो आगे क्या होगा? ऐसी आशंका है कि उनके बाद आने वाला राष्ट्रपति इस योजना को खत्म कर सकता है। अमेरिका के 144 अप्रवासी अरबपतियों में 19 भारतवंशी अमेरिका में रहने वाले 144 अप्रवासी अरबपतियों में 19 भारत में जन्मे लोग हैं। यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। फोर्ब्स की 2026 की अमेरिका के सबसे अमीर अप्रवासियों की सूची में 45 देशों से आए अरबपति शामिल हैं। इनमें भारत में जन्मे अरबपतियों की संख्या 19 है। इन 19 भारतवंशी अरबपतियों की कुल संपत्ति करीब 207 लाख करोड़ रुपए है। भारतीयों में विनोद खोसला सबसे ऊपर हैं। वे 13वें नंबर पर हैं। जय चौधरी 8.2 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ 25वें नंबर पर हैं। इस साल 7 भारतवंशियों के नाम जुड़े पिछले साल इस सूची में 12 भारतवंशी अरबपति शामिल थे। इस साल इसमें 7 नए भारतवंशी नाम जुड़े हैं। इनमें हेमंत तनेजा, संजय गजेंद्र, जितेंद्र मोहन और श्याम शंकर शामिल हैं। अमेरिका के सबसे अमीर लोगों की इस सूची में एलन मस्क पहले, सर्गेई ब्रिन दूसरे और जेनसन हुआंग तीसरे नंबर पर हैं। इसमें सत्य नडेला और सुंदर पिचाई के नाम भी शामिल हैं। ————————– ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा: ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की तर्ज पर वोटर लिस्ट की जांच शुरू कर दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की तर्ज पर वोटर लिस्ट की जांच शुरू कर दी है। इसके लिए करीब 125 करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया है। इस प्रक्रिया में वोटर लिस्ट की जांच कर नेशनल वोटर डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इससे अमेरिका में मौजूद करीब 26 लाख भारतवंशी वोटरों में से लगभग 10 लाख के नाम कटने का खतरा बताया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले यह प्रक्रिया पूरी करने का है। ट्रम्प ने ICE को डेटाबेस की जिम्मेदारी दी ट्रम्प प्रशासन ने अपनी इमिग्रेशन एजेंसी ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) को वोटर डेटाबेस की निगरानी की जिम्मेदारी दी है। सभी 50 राज्यों में वोटर लिस्ट की जांच और डेटाबेस अपडेट करने के लिए कंपनियों को काम सौंपा गया है। वोटरों की जानकारी को अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। घर-घर जाकर सर्वे नहीं होगा अमेरिका में भारत की तरह घर-घर जाकर वोटरों का सर्वे नहीं किया जा रहा है। वोटर लिस्ट को कंप्यूटर के जरिए इमिग्रेशन रिकॉर्ड समेत दूसरे रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। रिकॉर्ड में नाम या जानकारी का मिलान नहीं होने पर संबंधित वोटर की जानकारी की दोबारा जांच हो सकती है और नाम हटाए जाने का खतरा रहेगा। भारतवंशी वोटरों पर ज्यादा असर की आशंका क्यों? अमेरिका में करीब 26 लाख भारतवंशी वोटर हैं। न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे राज्यों में इनकी संख्या और राजनीतिक प्रभाव काफी अहम माना जाता है। इन राज्यों में वोटर पहचान और रजिस्ट्रेशन के नियम अलग-अलग हैं। नई जांच प्रक्रिया में रिकॉर्ड का मिलान होने से भारतवंशी वोटरों के नाम भी जांच के दायरे में आएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतवंशी मतदाताओं के वोटिंग पैटर्न पर भी नजर रखी जा सकती है। हालांकि, कितने लोगों के नाम वास्तव में हटेंगे, यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगा। ट्रम्प वोटर आईडी को अनिवार्य करने के समर्थक ट्रम्प अमेरिका में वोटिंग के लिए फोटो आईडी अनिवार्य करने की मांग का समर्थन करते रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चुनाव में गड़बड़ी रोकने में मदद मिलेगी। वे अमेरिकी संसद से ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पास करने की मांग करते रहे हैं। अब वोटर लिस्ट की देशभर में जांच और एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने की कोशिश को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद बढ़ सकता है। खासकर उन राज्यों में इसका असर महत्वपूर्ण होगा, जहां भारतवंशी और दूसरे प्रवासी वोटर चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं। क्या है सेव अमेरिका एक्ट? सेव अमेरिका एक्ट अमेरिका में मतदाता पंजीकरण और मतदान से जुड़े नियमों को और सख्त करने वाला एक विधेयक प्रस्ताव है। इसके तहत वोटर रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण और मतदान के समय फोटो ID दिखाना जरूरी होगा। इस विधेयक में डाक से वोट देने की प्रक्रिया को काफी सीमित करने की बात भी कही गई है। यह विधेयक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से पारित हो चुका है, लेकिन सीनेट में इसे अब तक मंजूरी नहीं मिली है। अमेरिका में चुनाव भारत से अलग तरीके से होते हैं अमेरिका में भारत के चुनाव आयोग जैसी एक केंद्रीय संस्था पूरे देश के चुनाव नहीं कराती। वहां चुनाव की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य और स्थानीय प्रशासन संभालते हैं। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में वोटर रजिस्ट्रेशन और पहचान के नियम भी अलग हैं। अमेरिका में वोटर पहचान के नियम राज्य के हिसाब से अलग-अलग हैं। कई राज्यों में वोटर से अपनी पहचान की घोषणा कराना ही पर्याप्त होता है, जबकि कुछ राज्यों में पहचान के दस्तावेज जरूरी होते हैं। 12 राज्यों में पासपोर्ट या जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। कैलिफोर्निया में वोटर के हस्ताक्षर का मिलान किया जाता है। टेक्सास में पहले भी नाम हटाने पर विवाद हुआ टेक्सास में करीब 24 हजार लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के बाद मामला अदालत पहुंचा था। फेडरल कोर्ट से इस मामले में राहत मिली थी और संबंधित मामला अभी लंबित है। इसी वजह से ट्रम्प प्रशासन की नई वोटर लिस्ट जांच को लेकर भी अदालत में चुनौती मिलने की संभावना है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने ईरान के 3 तेल टैंकरों को निशाना बनाया:खार्ग आइलैंड के पास धमाका; ट्रम्प ने परमाणु ठिकाने पिकैक्स को उड़ाने की धमकी दी होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका ने शनिवार को ईरान के 3 तेल टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, तीनों टैंकर तेल ले जा रहे थे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

यूपी का राजनीतिक भविष्यफल!

यूपी का राजनीतिक भविष्यफल!

क्या आप उत्तर प्रदेश से हैं? किसी राजनीतिक दल से आगामी विधानसभा चुनाव के लिए टिकटार्थी हैं? अगर हां, तो आपको किसी विरहन की तरह भादों की रातें भारी लगेंगी। 

 

क्वार में आसमान साफ होने तक आपकी स्थिति कुछ हद तक साफ होगी। फिर भी मुकम्मल तौर पर कुछ कहना मुश्किल है। इसलिए देवताओं की परिक्रमा करते रहिए। अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा भी देते रहिए।

 

त्रेता में बारिश के बाद ही लंका कांड हुआ था। भगवान श्रीराम उत्तर प्रदेश के अयोध्या से ही थे। अब कलयुग में इस बार उत्तर प्रदेश में क्या होगा, कहना संभव नहीं। सब कुछ रामजी की मर्जी पर है। अपने मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी से वह खुश हैं या नाराज, यह वक्त बताएगा।

 

हर दौर की तरह इस बार भी विभीषणों की चांदी रहेगी। इन दिनों विभीषण कुछ ज्यादा ही हैं, इसलिए मिलेंगे भी खूब। 

लेकिन ध्यान रखिए—ये त्रेता वाले विभीषण नहीं, कलयुग के विभीषण हैं। इनकी निष्ठा संदिग्ध रहेगी। ये विपक्ष यानी रावण का साथ छोड़कर आपके साथ आएं, यह जरूरी नहीं। मौका मिला तो आपको ही मरवाने की भूमिका में भी नजर आ सकते हैं। इसलिए इनसे दोस्ती करते समय सावधानी जरूरी है।

 

सावन-भादों में बारिश अच्छी हुई है और सिलसिला अभी जारी है। इससे मौसमी नेताओं यानी ‘मेंढकों’  की खुशी का ठिकाना नहीं। इनकी टर्र-टर्र अभी और बढ़ेगी। हालांकि इस पर बहुत ध्यान देने की जरूरत नहीं, क्योंकि टर्राना मेंढकों का स्वभाव है और मौसम बदलते ही इनकी आवाज भी बदल जाएगी।

 

भादों मौसम के बदलाव का प्रतीक है। कुछ दिनों में मानसून की वापसी शुरू होगी। उत्तर प्रदेश में भी राजनीतिक मौसम बदलेगा या नहीं, फिलहाल मुकम्मल तौर पर कुछ कहना मुश्किल है।

 

ग्लोबल वार्मिंग ने मौसम को जितना अप्रत्याशित बनाया है, उससे कहीं ज्यादा चुनावी राजनीति ने सियासी मौसम को। देश के सबसे बड़े सूबे में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बढ़ता चुनावी तापमान आने वाले दिनों को और अस्थिर बनाएगा। 

 

इसलिए थोड़ा दिल थामकर इंतजार करिए। आने वाले दिनों में कई चेहरे बदलेंगे, कई मौसम बदलेंगे और कई भविष्यफल गलत साबित होंगे। लेकिन तब तक एक काम जरूर कर लीजिए—SIR के बाद यह जरूर देख लीजिए कि आप मतदाता हैं भी या नहीं!

सत्येंद्र जैन को मिली जमानत, DJB STP टेंडर घोटाले में कोर्ट का बड़ा फैसला

सत्येंद्र जैन को मिली जमानत, DJB STP टेंडर घोटाले में कोर्ट का बड़ा फैसला

satyendra jain

दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को गुरुवार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दे दी। उन्हें 2 लाख रुपये के जमानती बॉन्ड और उतनी ही राशि के 2 जमानती बॉन्ड पर जमानत दी गई है। सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों को एंटी-करप्शन ब्रांच ने DJB STP टेंडर घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। ALSO READ: पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

 

विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) दिग्विजय सिंह ने जैन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सत्येंद्र जैन जमानत दे दी। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने सत्येंद्र जैन की जमानत पर खुशी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, सत्येंद्र जैन को जमानत मिली। भाजपा का ऑपरेशन पंजाब फेल। 'सत्यमेव जयते'।

एसीबी ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत के समक्ष दावा किया कि सत्येंद्र जैन आदतन अपराधी हैं।  जमानत याचिका पर फैसला करते समय इस पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

 

एसीबी के प्रमुख सयुंक्त पुलिस आयुक्त विक्रमजीत सिंह ने बताया था कि मामला एसटीपी के उन्नयन और क्षमता बढ़ाने के लिए जारी टेंडरों में बड़े पैमाने पर अनियमितता, टेंडर शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश से जुड़ा था।

 

जांच में सामने आया था कि टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें शामिल की गईं, जिनसे एक खास तकनीक और उसके प्रदाता यूरोटेक को फायदा हुआ। इससे प्रतिस्पर्धा सीमित हुई और सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ पड़ा।

 

एसीबी ने इस मामले में 11 मई 2024 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के साथ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई गई हैं। एजेंसी का दावा है कि मामले में पैसों के पूरे लेन-देन और अपराध से अर्जित रकम की जांच जारी है।

Raghav Chadha SIR Row: ‘दिल्ली वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की कोशिश’; राघव चड्ढा के पंजाब ड्राफ्ट लिस्ट विवाद में नया मोड़, AAP का बड़ा आरोप

Raghav Chadha SIR Row: पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम ‘शिफ्टेड’ (दूसरी जगह चले गए) बताए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। चड्ढा ने आरोप लगाया है कि पंजाब की AAP सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया है। वहीं, AAP ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि राघव चड्ढा दिल्ली में अपना नाम वोटर लिस्ट में रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश कर रहे थे।

आम आदमी पार्टी ने अपने पूर्व सहयोगी पर आरोप लगाया कि इसके लिए चड्ढा ने कथित तौर पर बैकडेटेड प्रोसेस” (पुरानी तारीख वाली प्रक्रिया) का सहारा लिया गया। पार्टी का कहना है कि अब चड्ढा अपनी ही स्थिति का ठीकरा AAP और पंजाब सरकार पर फोड़ रहे हैं।

हालांकि, चुनाव आयोग के एक सीनियर अधिकारी ने दिल्ली की वोटर लिस्ट में चड्ढा का नाम शामिल करने के लिए पर्दे के पीछे की किसी भी कोशिश के दावों को खारिज करते हुए पीटीआई से कहा, “ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया और न ही उठाया जा रहा है।” आपको बता दें कि चड्ढा ने अप्रैल में AAP छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) जॉइन की थी।

क्या है पूरा विवाद?

पंजाब में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस के बाद तैयार की गई वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में राघव चड्ढा के नाम के आगे “शिफ्टेड” स्टेटस दर्ज किया गया है। पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को कहा कि वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में उनके नाम के आगे शिफ्टेड (यानी कहीं और चले गए) लिखा गया है। जबकि उनका वोटर ID मोहाली में रजिस्टर्ड है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार राजनीतिक बदले की भावना से चुनावी मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है।

X पर एक पोस्ट में चड्ढा ने कहा, “पंजाब में AAP सरकार अब बदले की राजनीति को वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट तक ले आई है। मैं पंजाब से राज्यसभा सांसद हूं और मेरा वोटर ID पंजाब के मोहाली में रजिस्टर्ड है। इसके बावजूद वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में मेरे नाम के आगे ‘शिफ्टेड’ लिखा गया है।” उन्होंने आरोप लगाया, “यह सिर्फ क्लर्क की गलती नहीं लगती। यह साफ तौर पर राजनीतिक बदले की भावना का मामला है।” चड्ढा ने कहा कि वह SIR गाइडलाइंस के तहत उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

‘शिफ्टेड किसने मार्क किया’?

चड्ढा ने आगे कहा, “अच्छी बात यह है कि यह सिर्फ एक ड्राफ्ट लिस्ट है, फाइनल वोटर लिस्ट नहीं। ‘दावे और आपत्तियों’ (claims and objections) की प्रक्रिया के दौरान सुधार किए जा सकते हैं, जो अभी चल रही है। फाइनल वोटर लिस्ट अक्टूबर में जारी की जाएगी। मैं पहले से ही SIR गाइडलाइंस के तहत उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में हूं।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उन्हें “शिफ्टेड” किसने मार्क किया? इस क्लासिफिकेशन को किसने वेरिफाई किया और ऊंचे लेवल पर इसे किसने मंजूरी दी?

पंजाब अधिकारियों पर लगाया आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में पंजाब सरकार के अधिकारी शामिल थे। चड्ढा ने आरोप लगाया, “मुझे ‘शिफ्टेड’ के तौर पर किसने मार्क किया? AAP सरकार के एक अधिकारी ने? उस क्लासिफिकेशन को किसने वेरिफाई किया? फिर से AAP सरकार के ही एक अधिकारी ने…। ऊंचे स्तर पर यह प्रक्रिया किसने पूरी की? एक बार फिर उसी AAP सरकार के एक अधिकारी ने।” उन्होंने दावा किया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी तक, पंजाब सरकार के अधिकारी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) प्रक्रिया के हर चरण में तैनात होते हैं।

उन्होंने कहा, “BLO आमतौर पर पंजाब सरकार का एक जूनियर कर्मचारी होता है। बीच के अधिकारी असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO), इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEO भी पंजाब सरकार के अधिकारी होते हैं। सबसे ऊपर पंजाब कैडर का IAS अधिकारी होता है जो मुख्य चुनाव अधिकारी के तौर पर काम करता है।” उन्होंने दावा किया कि ऐसे अधिकारी राजनीतिक दबाव में आ सकते हैं क्योंकि उनके ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर राज्य सरकार के कंट्रोल में होते हैं।

राज्यसभा सांसद ने आरोप लगाया, “इन अधिकारियों को पता है कि चुनाव ड्यूटी खत्म होने के बाद AAP सरकार ही उनके ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर को नियंत्रित करती है। वे जानते हैं कि कौन उनका ट्रांसफर कर सकता है और कौन उनकी जिंदगी मुश्किल बना सकता है। इस तरह, AAP सरकार राजनीतिक बदला लेने के लिए राज्य के अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव डालती है।” उन्होंने यह भी कहा कि जब से उन्होंने “भ्रष्ट” पार्टी छोड़ी है, तब से आम आदमी पार्टी का नेतृत्व उनसे नाराज है।

चुनाव आयोग की नियमों का किया जिक्र

उन्होंने कहा, “AAP ने उन लोगों के खिलाफ पंजाब पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल किया है जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया। पंजाब सरकार ने उन अन्य सांसदों को भी निशाना बनाया है जिन्होंने AAP छोड़कर BJP का दामन थामा। यह गलत क्लासिफिकेशन उसी राजनीतिक बदले की भावना का ताजा उदाहरण है।” चड्ढा ने चुनाव आयोग की विस्तृत SIR गाइडलाइंस के पैरा 4(d) का भी जिक्र किया, जिसमें जन-प्रतिनिधियों की एक “प्रोटेक्टेड लिस्ट” (सुरक्षित सूची) का प्रावधान है।

AAP का पलटवार

चड्ढा की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP की पंजाब यूनिट के प्रवक्ता ने कहा कि स्पेशल समरी रिविजन (SSR) चुनाव आयोग करता है, न कि राज्य सरकार। उन्होंने कहा, “वोटर लिस्ट में किसका नाम शामिल करना है या किसका नाम हटाना है, इसमें पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं होती।” प्रवक्ता ने आगे कहा, “यह बात सभी जानते हैं कि राघव चड्ढा दिल्ली में रहते हैं, पंजाब में नहीं। अगर वह अब पंजाब में नहीं रहते हैं, तो यह उनकी अपनी जिम्मेदारी थी कि वह या तो वहां अपना वोटर रजिस्ट्रेशन बनाए रखते या उसे कहीं और ट्रांसफर करवाते। वोटर लिस्ट से अपना नाम हटने के लिए वह अब AAP या पंजाब सरकार को दोष नहीं दे सकते।”

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उन्होंने यह भी दावा किया कि AAP को चुनाव आयोग के सूत्रों से जानकारी मिली है कि चड्ढा “बैक-डेटेड प्रोसेस” का इस्तेमाल करके दिल्ली के राजिंदर नगर में वोटर के तौर पर रजिस्टर होने की कोशिश कर रहे थे। AAP प्रवक्ता ने कहा, “अगर बैक डेटेड प्रोसेस या ऐसी कोई गैर-कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई थी, तो इसकी जांच होनी चाहिए और पूरी सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। अगर BJP या किसी और ने बैक-डेटेड प्रोसेस के जरिए नाम दर्ज कराने में मदद की है, तो हम इस मामले को तार्किक अंजाम तक पहुंचाएंगे और सच्चाई सामने लाएंगे।”

पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

Raghav Chadha name removed from voter list in SIR

पंजाब में SIR में भाजपा के राज्यसभा सांसद राघव चढ्‍डा का नाम कटने से हड़कंप मच गया। उन्होंने राज्य की भगवंत मान सरकार पर बदले की राजनीति के ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स तक लाने का आरोप लगाया। ALSO READ: क्या राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी का बदलेगा विभाग? मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच उठे बड़े सवाल

 

राघव चढ्‍डा ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि आप सरकार अब बदले की राजनीति को प्रारूप मतदाता सूची (ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स) तक ले आई है।

 

उन्होंने कहा कि मैं पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हूँ और मेरा वोटर आईडी पंजाब के मोहाली में पंजीकृत है। इसके बावजूद, प्रारूप मतदाता सूची में मेरे नाम को स्थानांतरित के रूप में वर्गीकृत किया गया है। गनीमत है कि यह केवल प्रारूप मतदाता सूची है, अंतिम मतदाता सूची नहीं। 'दावे और आपत्ति' (क्लेम्स एंड ऑब्जेक्शन) प्रक्रिया के दौरान नामों को सुधारा जाता है, जो फिलहाल जारी है। अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित की जाएगी। मैं एसआईआर (SIR) दिशानिर्देशों के तहत उपलब्ध उपायों का लाभ उठाने की प्रक्रिया में हूं।

 

भाजपा सांसद के अनुसार, यह केवल एक लिपिकीय गलती नहीं लगती। यह राजनीतिक प्रतिशोध का एक स्पष्ट मामला है। मुझे ‘स्थानांतरित’ के रूप में किसने चिह्नित किया? आप की पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने। उस वर्गीकरण का सत्यापन किसने किया? फिर से, आप की पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने। उच्च स्तर पर इसे किसने आगे बढ़ाया? एक बार फिर, वही आप की पंजाब सरकार के अधिकारी ने।

 

उन्होंने कहा कि जमीन पर तैनात बीएलओ (BLO) से लेकर पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक, इस पूरी प्रक्रिया का हर प्रशासनिक स्तर पंजाब सरकार के अधिकारियों से भरा पड़ा है। बीएलओ आमतौर पर पंजाब सरकार का एक जूनियर कर्मचारी होता है। बीच के एईआरओ, ईआरओ और डीईओ पंजाब सरकार के अधिकारी हैं। सबसे शीर्ष पर पंजाब कैडर के एक आईएएस अधिकारी हैं जो पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि ये अधिकारी जानते हैं कि चुनावी ड्यूटी समाप्त होते ही आप सरकार उनके तबादले, तैनाती और करियर को नियंत्रित करती है। वे जानते हैं कि कौन उनका तबादला कर सकता है और कौन उनका जीवन कठिन बना सकता है। इस तरह आप सरकार राजनीतिक बदले को अंजाम देने के लिए राज्य के अधिकारियों के माध्यम से राजनीतिक दबाव बनाती है।

 

राघव चढ्‍डा ने कहा कि जब से मैंने भ्रष्ट आम आदमी पार्टी छोड़ी है, इसका नेतृत्व गुस्से में जल रहा है। इसने हममें से उन लोगों के खिलाफ पंजाब पुलिस और पंजाब सरकार की प्रशासनिक मशीनरी को तैनात कर दिया है जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया था। आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अन्य सांसदों को भी पंजाब सरकार द्वारा निशाना बनाया गया है। यह गलत वर्गीकरण उस राजनीतिक प्रतिशोध का एक नया अध्याय है।

 

उन्होंने कहा कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव आयोग के एसआईआर (SIR) के विस्तृत दिशानिर्देशों का पैराग्राफ 4(d) उन जनप्रतिनिधियों के लिए एक 'सुरक्षित सूची' (प्रोटेक्टेड लिस्ट) बनाता है जिनके नाम चिह्नित किए गए हैं। इसमें न्यायाधीश, सांसद और विधायक शामिल हैं। यह कहता है: न्यायपालिका के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, घोषित पदों के धारकों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल व लोक सेवा आदि क्षेत्रों की हस्तियों के वे सभी नाम जो पहले चुनावी डेटाबेस में चिह्नित किए गए हैं, उन्हें प्रारूप मतदाता सूची में शामिल किया जाना है, ताकि दावों और आत्तियों की अवधि के दौरान आवश्यक दस्तावेज भी एकत्र किए जा सकें।

 

राघव चढ्‍डा ने कहा कि मैं पंजाब से मौजूदा संसद सदस्य हूं। यदि मेरे नाम को चिह्नित भी किया गया था, तो पैराग्राफ 4(d) के अनुसार प्रारूप मतदाता सूची में मेरा नाम शामिल करना अनिवार्य था। इस निर्देश की केवल अनदेखी नहीं की गई, बल्कि मेरे मामले में जानबूझकर इसका उल्लंघन किया गया। आप भले ही पंजाब सरकार चला सकती है, लेकिन पंजाब की प्रारूप मतदाता सूची उसकी निजी संपत्ति नहीं है।

Maharashtra SIR: महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट से 2 करोड़ नाम कटे, मुंबई में 35% की भारी गिरावट! नाम जुड़वाने के लिए कैसे करें अप्लाई?

Maharashtra SIR List: महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2.06 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। ये लोग पिछली वोटर लिस्ट में शामिल कुल मतदाताओं का लगभग 21.14 प्रतिशत थे। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सोमवार 31 अगस्त को यह जानकारी दी। राज्य के चुनाव अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 7.71 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम शामिल हैं। इनमें 3.95 करोड़ पुरुष, 3.75 करोड़ महिलाएं और 3,087 थर्ड जेंडर (अन्य लिंग) के मतदाता शामिल हैं।

मुंबई में मतदाताओं की संख्या में लगभग 36.1 लाख की कमी आई है। यानी करीब 35 फीसदी वोटर ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए हैं। महाराष्ट्र की पिछली वोटर लिस्ट में जून तक करीब 9.8 करोड़ मतदाता दर्ज थे। जबकि SIR के बाद जारी ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर लगभग 7.7 करोड़ रह गई है। यानी आंकड़ों के हिसाब से करीब 21.1 फीसदी की कमी आई है।

हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम हमेशा के लिए वोटर लिस्ट से हट गया है। ऐसे लोगों को 30 सितंबर तक अपना दावा और आपत्ति दाखिल करने का मौका दिया गया है।

क्यों हटाए गए नाम?

अधिकारियों ने बताया कि 2,06,88,487 मतदाताओं के नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि उनके एन्यूमरेशन फॉर्म (गणना फर्म) जमा नहीं हो पाए। उनसे संपर्क नहीं हो सका। शायद उनकी मृत्यु हो गई थी। या उन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया था। SIR प्रोसेस से पहले महाराष्ट्र में 9.78 करोड़ मतदाता रजिस्टर्ड थे।

इनमें से 78.86 प्रतिशत को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सबसे ज्यादा फॉर्म 28.6 लाख पुणे में जमा नहीं हो पाए। इसके बाद ठाणे (28.5 लाख), मुंबई उपनगर (26.5 लाख), नागपुर (14.43 लाख), नासिक (10.27 लाख) और मुंबई शहर (9.5 लाख) का नंबर आता है।

मुंबई में 36.1 लाख मतदाता कम

SIR के बाद मुंबई के मतदाता आंकड़ों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में करीब 36.1 लाख मतदाता कम हुए हैं, जो पिछली लिस्ट की तुलना में लगभग 35 फीसदी है। यह कमी कई कारणों से हुई है। मतदाता गणना के दौरान जिन लोगों के फॉर्म उपलब्ध नहीं हो सके या जिनके बारे में जानकारी नहीं मिली, उन्हें विभिन्न कैटेगरी में रखा गया।

17 लाख डुप्लीकेट नामों का भी मामला

मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम के अनुसार, करीब 17 लाख डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज पाए गए थे। इन नामों को एक साथ मिलाकर हटाया गया है। इसलिए इन्हें पूरी तरह से ‘फर्जी’ या ‘डुप्लीकेट मतदाता’ मानना सही नहीं होगा। यानी एक ही व्यक्ति का नाम अगर एक से अधिक जगह दर्ज था। उसे एक निर्वाचन क्षेत्र में बरकरार रखते हुए दूसरे स्थान से हटाया गया, तो इससे कुल मतदाता संख्या में कमी दिखाई देती है।

30 सितंबर तक वापस जुड़ सकता है नाम

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम बाहर होने वाले मतदाताओं के लिए यह आखिरी मौका नहीं है। वे 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। अगर किसी पात्र मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है तो उसे अपने क्षेत्र के संबंधित चुनाव अधिकारी या BLO से संपर्क करके अपना दावा पेश करना होगा। जरूरी प्रक्रिया और दस्तावेज पूरे करने के बाद नाम को वोटर लिस्ट में शामिल कराने का अवसर मिलेगा।

18 साल के होने वाले युवाओं को भी मौका

इस प्रक्रिया में पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है। जो युवा 1 अक्टूबर से पहले 18 वर्ष की उम्र पूरी कर रहे हैं, वे भी इस अवधि के दौरान मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे पहली बार मतदान करने वाले पात्र युवाओं को भी आगामी चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता मिलेगा।

ऑनलाइन ऐसे चेक करें अपना नाम

वोटर ड्राफ्ट लिस्ट में अपना नाम देखने के लिए नागरिक ECI के वोटर पोर्टल और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं। वोटर अपने EPIC नंबर के जरिए भी नाम और संबंधित डिटेल्स की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा जिला निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर भी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट उपलब्ध कराई गई है।

नाम नहीं है तो कौन सा फॉर्म भरना होगा?

ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं होने पर पात्र व्यक्ति Form 6 के जरिए वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। यानी जिन लोगों का नाम SIR के दौरान ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गया है, उनके पास अभी दावा दाखिल कर अपना नाम वापस सूची में शामिल कराने का अवसर मौजूद है।

  • नाम जोड़ने के लिए: Form 6
  • मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए: Form 7
  • एड्रेस या अन्य डिटेल्स में सुधार के लिए: Form 8

ड्राफ्ट लिस्ट को अंतिम सूची न समझें

महाराष्ट्र में मतदाता संख्या में इतनी बड़ी गिरावट के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ड्राफ्ट मतदाता सूची है। यह फाइनल लिस्ट नहीं। जिन लोगों के नाम इसमें नहीं हैं, वे 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। इसलिए महाराष्ट्र और खासकर मुंबई के मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे अपना नाम अभी चेक करें। अगर नाम गायब है या डिटेल्स में कोई गलती है, तो तय समय सीमा के भीतर आवेदन कर सुधार या नाम शामिल कराने की प्रक्रिया पूरी करें।

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Delhi SIR List: दिल्ली की नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से कटे 47 लाख नाम! अगर आपका नाम लिस्ट में नहीं तो जानिए 30 सितंबर तक कैसे करें आवेदन

Delhi SIR List: दिल्ली के मतदाताओं के लिए वोटर लिस्ट से जुड़ी यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है। अगर आप दिल्ली में मतदाता हैं तो सबसे पहले यह सुनिश्चित कर लें कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में आपका नाम दर्ज है या नहीं। इसके लिए दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO Delhi) की वेबसाइट पर जाकर अपना नाम ऑनलाइन चेक किया जा सकता है। अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम मिल जाता है तो फिलहाल आपको कोई दूसरा कदम उठाने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर नाम लिस्ट में नहीं है तो उसे शामिल कराने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर अप्लाई करना होगा।

दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत सोमवार (31 अगस्त) को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 1.45 करोड़ वोटरों में से 47 लाख से अधिक लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, वे 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच दावा (क्लेम) करके अपना नाम शामिल करवाने का अनुरोध कर सकते हैं। फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी की जाएगी।

वोटर अपना नाम कैसे चेक कर सकते हैं?

वोटर दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और चुनाव आयोग के पोर्टल के जरिए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम चेक कर सकते हैं:-

EPIC (वोटर ID) नंबर से खोजें: राज्य के तौर पर दिल्ली चुनकर और EPIC नंबर एवं कैप्चा कोड डालकर नाम खोजा जा सकता है।

मोबाइल नंबर से खोजें: दिल्ली और अपनी पसंद की भाषा चुनने के बाद, चुनाव आयोग के पास रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और कैप्चा कोड डालकर नाम देखा जा सकता है।

अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम न हो तो क्या करें?

अगर किसी वोटर या निवासी का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। योग्य लोग 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच दावा (क्लेम) करके अपना नाम शामिल करवा सकते हैं। इसके लिए उन्हें तय डिक्लेरेशन और जरूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ फॉर्म-6 जमा करना होगा। जिन लोगों ने अपना घर स्थायी रूप से बदल लिया है और अपना नाम नए निर्वाचन क्षेत्र में ट्रांसफर करवाना चाहते हैं, वे अपने नए पते वाले इलाके में फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं।

सबसे पहले ऐसे चेक करें अपना नाम

वोटर लिस्ट में नाम चेक करने के लिए दिल्ली के चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाना होगा। वहां नाम देखने के लिए दो विकल्प दिए गए हैं:-

विकल्प 1: EPIC नंबर से करें सर्च

अगर आपके पास वोटर आईडी का EPIC नंबर है तो उसके जरिए अपना नाम खोज सकते हैं। इसके लिए संबंधित जानकारी भरनी होगी और दिल्ली का राज्य/क्षेत्र चुनकर अपना EPIC नंबर दर्ज करना होगा। इसके अलावा मतदाता अपने व्यक्तिगत विवरण के जरिए भी नाम खोज सकता है। इसके लिए सामान्य तौर पर ये जानकारियां मांगी जा सकती हैं:-

नाम

वोटर आईडी में दर्ज रिश्तेदार का नाम

जन्म तिथि

उम्र

लिंग

विधानसभा क्षेत्र

मोबाइल नंबर के जरिए भी रजिस्टर्ड मतदाता की जानकारी खोजने का विकल्प दिया गया है। सर्च करने के बाद सिस्टम पर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मतदाता के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी वाला पेज दिखाई देगा, जिसे प्रिंट भी किया जा सकता है।

विकल्प 2: वोटर लिस्ट की PDF में नाम खोजें

दूसरे विकल्प के तहत जारी वोटर लिस्ट की PDF डाउनलोड करके उसमें अपना नाम खोजा जा सकता है। इसके लिए राज्य, जिला, विधानसभा क्षेत्र और लिस्ट की भाषा जैसी जानकारी चुननी होगी। इसके बाद संबंधित बूथ की वोटर लिस्ट की PDF तैयार होगी। इस PDF में अपना नाम और अन्य डिटेल्स खोजे जा सकते हैं।

अगर ड्राफ्ट लिस्ट में नाम मिल गया तो?

अगर आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मौजूद है तो फिलहाल किसी और कार्रवाई की जरूरत नहीं है। हालांकि अपने नाम के साथ दर्ज डिटेल्स जैसे नाम, पता और अन्य मतदाता संबंधी जानकारी को ध्यान से जांच लेना बेहतर है।

अगर नाम नहीं है तो घबराएं नहीं

अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में आपका नाम नहीं दिखाई देता है तो आपके पास उसे शामिल कराने का मौका है। दी गई जानकारी के अनुसार ऐसे मतदाता 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच नाम शामिल कराने का दावा पेश कर सकते हैं। इसके लिए अपने स्थानीय BLO (Booth Level Officer) से संपर्क करना होगा।

नाम जोड़ने के लिए Form 6 भरना होगा

अगर किसी पात्र वोटर्स का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो उसे फॉर्म- 6 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करना होगा। Form 6 के साथ निर्धारित घोषणा पत्र (Declaration Form) और जरूरी सहायक दस्तावेज भी जमा करने होंगे। यानी केवल अप्लाई करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

पता बदल गया है तो Form 8

अगर आपका नाम वोटर लिस्ट में है लेकिन आपने अपना निवास स्थान बदल लिया है, तो इसके लिए Form 8 का इस्तेमाल किया जाएगा। Form 8 के जरिए विधानसभा क्षेत्र के अंदर या किसी दूसरे विधानसभा क्षेत्र में निवास स्थान बदलने की स्थिति में आवश्यक बदलाव कराया जा सकता है। इसी फॉर्म के जरिए मतदाता डिटेल्स में सुधार के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।

गलत जानकारी होने पर भी ध्यान दें

अगर वोटर लिस्ट में नाम तो है लेकिन नाम, व्यक्तिगत डिटेल्स या अन्य जानकारी में किसी तरह की गड़बड़ी है, तो उसे भी नजरअंदाज न करें। चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत संबंधित सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है। बताई गई प्रक्रिया के मुताबिक, नाम या अन्य डिटेल्स में गलतियां पाए जाने पर निर्वाचन आयोग संबंधित लोगों को नोटिस भी भेज सकता है।

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एक नजर में पूरी प्रक्रिया

  • नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में है तो फिलहाल कोई अतिरिक्त कदम नहीं उठाएं।
  • अगर वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो स्थानीय BLO से संपर्क करें और निर्धारित अवधि में दावा करें।
  • नया नाम जोड़ना है तो Form 6 जमा करें और उसके साथ जरूरी दस्तावेज लगाएं।
  • पता बदलना/डिटेल्स में सुधार करना है तो Form 8 के जरिए आवेदन करें।
  • फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी किया जाएगा।