उड़ानों को तरसते नए हवाई अड्डे

भारत को अधिक हवाई अड्डों की नहीं, काम करने वाले हवाई अड्डों की जरूरत है। खाली रनवे पर खर्च होते रहना विकास नहीं, बर्बादी है। जब रखरखाव का बिल ही कमाई से बड़ा हो जाए, तब नीति को गर्व नहीं, सुधार चाहिए। सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए, यदि यही हाल रहा तो अगले दस साल में और सौ हवाई अड्डे बनेंगे और उनमें से कई फिर वीरान रहेंगे।

भारत में पिछले एक दशक में क्षेत्रीय हवाई संपर्क का नारा जितना जोर से लगाया गया, उतनी ही तेजी से छोटे शहरों में टर्मिनल बने, रिबन कटे और उद्घाटन की तस्वीरें छपी। ‘उड़े देश का आम नागरिक’ उड़ान योजना का वादा था कि टियर-2 और टियर-3 शहर भी हवाई नक्शे पर आ जाएंगे। आंकड़ों में सफलता दिखती है कि दर्जनों एयरपोर्ट चालू हुए, सैकड़ों रूट आवंटित हुए। लेकिन मैदान पर तस्वीर इससे उलट है। कई नए हवाई अड्डे और पुरानी पट्टियां आज वीरान पड़ी हैं। रनवे साफ है, सीआईएसएफ खड़ा है, बिजली जल रही है, लेकिन विमान नहीं आते। क्या यह महज ‘अस्थायी रुकावट’ है या नीतिगत असफलता का प्रमाण?

संसद में दिए गए जवाब के अनुसार, उड़ान के तहत विकसित करीब पंद्रह हवाई अड्डे इस समय अनुसूचित उड़ानों से रहित हैं। इनमें पठानकोट, लुधियाना, शिमला, पाकयोंग, कुशीनगर, अलीगढ़, आजमगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती, मुरादाबाद, भावनगर, अंबिकापुर, राउरकेला, दतिया और कलबुर्गी शामिल हैं। इस सब से उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित है। 2021 के बाद राज्य में शुरू हुए सात नए एयरपोर्ट में से छह पर नियमित व्यावसायिक उड़ानें बंद हो चुकी हैं। केवल अयोध्या ही अपवाद है। कुशीनगर बौद्ध सर्किट के लिए खोला गया, मुरादाबाद पीतल उद्योग के लिए, आजमगढ़ और चित्रकूट पर्यटन व धार्मिक यात्रा के नाम पर। लेकिन कुछ ही महीनों में यहाँ उड़ानें थम गईं।

असफलता का सबसे ठोस सबूत खर्च बनाम कमाई है। सरकार इन पंद्रह गैर-संचालित केंद्रों के रखरखाव पर करीब 879 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, जबकि वहां नियमित यात्री सेवा नहीं है। पाकयोंग का निर्माण ही करीब 605 करोड़ में हुआ; रखरखाव पर अब तक लगभग 179 करोड़ चुक चुके हैं। शिमला पर रखरखाव खर्च 116 करोड़ से ऊपर बताया गया। मुरादाबाद पर करीब 30 करोड़। भावनगर का हाल और स्पष्ट है, एक रिपोर्ट के अनुसार एक वर्ष में संचालन-रखरखाव पर करीब 18 करोड़ खर्च हुए, वहीं कमाई महज 4 करोड़ ही रही। यानी लागत राजस्व से कई गुना अधिक। गौरतलब है कि जब विमान नहीं उतरते, तब भी रनवे, फायर स्टेशन, सुरक्षा, एटीसी और बिजली का खर्च तो चलता ही रहता है। एयरपोर्ट अथॉरिटी के व्यापक नुकसान का एक हिस्सा इन्हीं सुनसान हवाई अड्डों से आता है।

सवाल उठता है कि ऐसा क्यों हुआ? पहला कारण मांग का गलत आकलन। हवाई अड्डा बनाने से मांग अपने आप नहीं पैदा होती। छोटे शहर में रेल और सड़क पहले से सस्ती व भरोसेमंद हैं। तीन घंटे की दूरी पर अगर ट्रेन है, तो सीमित आय वाला यात्री महंगा टिकट कभी नहीं खरीदेगा, खासकर जब सब्सिडी खत्म होने के बाद किराया दोगुना हो जाए। उड़ान में तीन साल का व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) मिलता है। अवधि खत्म होते ही कई रूट ढह जाते हैं। सीएजी की पुरानी समीक्षा पहले ही कह चुकी थी कि शुरुआती चरणों के आधे से अधिक आवंटित रूट कभी शुरू ही नहीं हुए या जल्दी बंद हो गए।

दूसरा, विमान और ऑपरेटर की कमी। क्षेत्रीय उड़ानों के लिए छोटे विमान चाहिए। फ्लाईबिग जैसे ऑपरेटर बंद हुए या उनकी सेवाएं रोक दीं गईं। विमान पट्टे, रखरखाव और पायलट की कमी ने कई रूट को अधर में छोड़ दिया। तीसरा, तकनीकी सीमा। कई छोटे हवाई अड्डे केवल विजुअल फ्लाइट रूल्स पर चलते हैं। उत्तर भारत की सर्दियों में कोहरा आते ही उड़ानें रुक जाती हैं। इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम न होने से विश्वसनीयता खत्म हो जाती है। चौथा, अंतिम छोर की कनेक्टिविटी। शहर से एयरपोर्ट तक सड़क खराब हो, टैक्सी महंगी हो, तो यात्री दोबारा नहीं आता।

इसे विफलता इसलिए कहना चाहिए क्योंकि पैसा करदाता का है और वादा विकास का था। उद्घाटन राजनीतिक पूंजी बन जाता है, लेकिन तीन साल बाद भी खाली टर्मिनल जनता का नुकसान बन जाता है। भूमि अधिग्रहण के बाद गांव वाले विकास की उम्मीद लगाते हैं, लेकिन जब उड़ान नहीं आती, तो अविश्वास बढ़ता है। क्षेत्रीय विमानन तभी सार्थक है जब वह व्यापार, पर्यटन, चिकित्सा आपात और रोजगार से जुड़कर स्थायी यातायात पैदा करे। महज रनवे बिछाना बुनियादी ढांचे का भ्रम है, अर्थव्यवस्था नहीं।

ऐसे में सरकार को क्या करना चाहिए? सबसे पहले, नए हवाई अड्डे खोलने से पहले कठोर अध्ययन अनिवार्य हो। यात्री क्षमता, आसपास के उद्योग, तीर्थ-पर्यटन चक्र और वैकल्पिक परिवहन की तुलना के बिना निर्माण न हो। संशोधित उड़ान में यही सबक शामिल होना चाहिए। दूसरा, सब्सिडी की अवधि तीन से बढ़ाकर पांच-सात वर्ष की जा सकती है, लेकिन भार कारक और स्थानीय राजस्व लक्ष्य पूरे होने पर ही। तीसरा, छोटे हवाई अड्डों को केवल यात्री पर निर्भर न रखा जाए। कार्गो, पायलट प्रशिक्षण, चार्टर, मेडिकल फ्लाइट और राज्य सरकार की आधिकारिक यात्राओं से न्यूनतम उपयोग सुनिश्चित हो। चौथा, मौसम-संवेदनशील अड्डों पर आईएलएस और बेहतर नेविगेशन लगाया जाए, वरना सर्दी या ख़राब मौसम में पूरा नेटवर्क ठप रहेगा।

पांचवां, राज्य सरकारों की जिम्मेदारी बढ़ाई जाए। भूमि, सड़क, पर्यटन पैकेज और स्थानीय कर रियायत राज्य दें, केंद्र केवल विमानन ढांचा। छठा, किराया नीति लचीली हो। सब्सिडी खत्म होते ही अचानक महंगा टिकट हवाई यात्रा की मांग को मार देता है। चरणबद्ध वृद्धि और ऑफ-पीक छूट से हवाई यात्रा आदत बन सकती है। सातवां, असफल रूट को बिना शर्म के बंद करने और सफल मॉडल, जैसे बेहतर कनेक्टिविटी वाले कुछ औद्योगिक या तीर्थ केंद्र को दोहराने का साहस हो। हर जिले में एयरपोर्ट का नारा राजनीतिक रूप से आकर्षक है, परंतु आर्थिक रूप से घातक।

भारत को अधिक हवाई अड्डों की नहीं, काम करने वाले हवाई अड्डों की जरूरत है। खाली रनवे पर खर्च होते रहना विकास नहीं, बर्बादी है। उड़ान का मकसद आम नागरिक को आसमान देना था, कंक्रीट के स्मारक खड़े करना नहीं। जब रखरखाव का बिल कमाई से बड़ा हो जाए, तब नीति को गर्व नहीं, सुधार चाहिए। सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए, यदि यही हाल रहा तो अगले दस साल में और सौ हवाई अड्डे बनेंगे और उनमें से कई फिर वीरान रहेंगे।

अन्नपूर्णा योजना पश्चिम बंगाल में नारी शक्ति के लिए बड़ा प्रोत्साहन: मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अन्नपूर्णा योजना को पश्चिम बंगाल में नारी शक्ति के लिए बड़ा प्रोत्साहन बताते हुए कहा है कि विकसित बंगाल की ताकत से विकसित भारत का संकल्प भी और मजबूत होगा।

श्री मोदी ने गुरुवार को वीडियो कांफ्रेन्स के माध्यम से पश्चिम बंगाल में अन्नपूर्णा योजना की चौथी किस्त जारी की। इस अवसर पर एक सभा को संबाेधित करते हुए उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं की वित्तीय गरिमा सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा, “यह उनके जीवन के लिए एक बड़ा सहारा है। यह एक बड़ी मदद है!

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस किस्त में डेढ करोड़ महिलाओं के खाते में तीन-तीन हजार रूपये की राशि भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की वित्तीय सहायता दवाएं, घरेलू आवश्यकताओं की खरीद या बच्चे की शिक्षा के वित्तपोषण के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा के रूप में कार्य करती है। उन्होंने कहा, “एक बहन के लिए, यह दवा या आवश्यक घरेलू सामान खरीदने के लिए एक सहारा हो सकता है।

इस योजना के पीछे के विजन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को मजबूत निर्णय लेने की शक्ति और आगे बढ़ने का साहस मिलेगा। उन्होंने कहा, “बंगाल की महिलाओं में भी निर्णय लेने की शक्ति और आगे बढ़ने का साहस होना चाहिए।

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प्रधानमंत्री ने कई कठिनाइयों को सहन करने के बाद राज्य में राजनीतिक परिवर्तन लाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय माताओं और बहनों को दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि नई सरकार का प्राथमिक मंत्र ‘कम बातें, ज्यादा काम’ है और इसका सख्ती से पालन करके उनके जीवन को आसान बनाना है। उन्होंने कहा, “हमारी नई सरकार के सामने सबसे पहली परीक्षा बंगाल की महिलाओं के जीवन को आसान बनाना था।”

सरकार के कल्याणकारी एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि नई सरकार के कार्यभार संभालने के कुछ दिनों के भीतर अन्नपूर्णा योजना पर काम शुरू हो गया। उन्होंने भ्रष्ट परंपराओं को सख्ती से समाप्त करते हुए लाखों महिलाओं तक पहुंचने वाले निर्बाध, प्रत्यक्ष बैंक अंतरण पर प्रसन्नता व्यक्त की। पूर्ण समावेशिता के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य भर में व्यापक कवरेज की गारंटी के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। श्री मोदी ने कहा, “हमारी सरकार का यह भी लक्ष्य है कि एक भी पात्र महिला अन्नपूर्णा योजना के लाभों से वंचित न रहे।

प्रधानमंत्री ने लोगों को आश्वासन दिया कि मौजूदा प्रशासन समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए पहले से रुके हुए कार्यक्रमों को तेजी से पूरा कर रहा है। उन्होंने कहा, “अब, वर्तमान सरकार के तहत, इन रुकी हुई योजनाओं को तीव्र गति से आगे बढ़ाया गया है।

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Mangal Nakshatra Gochar: मंगल करेंगे शनि के नक्षत्र पुष्य में प्रवेश, 4 राशियों के जातकों की होगी छप्पर फाड़ कमाई और आएगी खुशहाली

Mangal Nakshatra Gochar: ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को उग्र और अग्नितत्व वाला ग्रह माना जाता है। इस ग्रह से प्रभावित जातक साहसी, पराक्रमी और बलवान माने जाते हैं। यह ग्रह जब किसी राशि या नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब इसका असर सभी 12 राशियों के जातकों पर देखने को मिलता है। लेकिन ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ग्रह-नक्षत्रों की चाल का प्रभाव सभी राशियों पर एक जैसा नहीं रहता है। कुछ के लेकिन बहुत अच्छा, तो कुछ के सामान्य, जबकि कुछ अन्य के लिए ग्रहों की चाल बदलना कष्टकारी साबित होता है।

ऐसा ही एक बदलाव ग्रहों के सेनापति मंगल की चाल में 24 सितंबर 2026 को होने वाला है। मंगल ग्रह इस दिन पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि हैं, जबकि देवगुरु बृहस्पति इसके अधिष्ठाता देवता माने जाते हैं। मंगल का इस नक्षत्र में प्रवेश कुछ राशियों के लिए आर्थिक और करियर के लिहाज से शुभ साबित हो सकता है।

मंगल ग्रह का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कब?

कर्क राशि में गोचर कर रहे मंगल 24 सितंबर को सुबह 5 बजकर 50 मिनट पर पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। 17 अक्टूबर 2026 तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। कर्क राशि मंगल की नीच राशि मानी जाती है। इसी राशि में गुरु पहले से मौजूद हैं और उनकी मौजूदगी के कारण मंगल के नकारात्मक प्रभाव में कमी और शुभ प्रभाव में वृद्धि का अनुमान जताया जा रहा है।

इन राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन

मेष राशि : मंगल का नक्षत्र परिवर्तन मेष राशि के जातकों के लिए राहत और प्रगति लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके काम पूरे होने की संभावना है। संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है। कारोबारियों के लिए यह समय अनुकूल रह सकता है। परिवार के लोगों का सहयोग मिलेगा।

सिंह राशि : सिंह राशि वालों के लिए यह नक्षत्र परिवर्तन नए अवसरों के दरवाजे खोल सकता है। नौकरी बदलने की योजना बना रहे लोगों को कोई अच्छा मौका मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। आपकी कार्यक्षमता और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है।

कन्या राशि : कन्या राशि के जातकों के लिए मंगल का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश मान-सम्मान और करियर में प्रगति का संकेत दे रहा है। नौकरी या व्यापार में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। अटके हुए कामों को गति मिल सकती है। रोजी-रोजगार के क्षेत्र में तरक्की के अवसर बनेंगे।

धनु राशि : धनु राशि के लोगों के लिए मंगल का यह नक्षत्र परिवर्तन आर्थिक रूप से लाभकारी रह सकता है। आमदनी में सुधार और व्यापार में मुनाफे के योग बन सकते हैं। लंबे समय से रुके किसी काम में तेजी आ सकती है। नौकरी से जुड़ी परेशानियां कम होने की संभावना है।

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Surya Gochar 2026: कन्या संक्रांति पर मित्र बुध की राशि में प्रवेश करेंगे सूर्य और 5 राशि वालों की बढ़ाएंगे टेंशन, जानें कौन सी हैं ये राशियां

Sanjukta Parashar: CRPF की सबसे घातक फोर्स CoBRA की कमान पहली बार महिला अफसर के हाथ, जानिए कौन हैं IPS संजुक्ता पराशर

Who is Sanjukta Parashar: असम की चर्चित IPS अधिकारी संजुक्ता पराशर ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की सबसे खतरनाक जंगल युद्धक कमांडो यूनिट CoBRA (Commando Battalion for Resolute Action) की पहली महिला प्रमुख बनकर इतिहास रच दिया है। 2006 बैच की असम-मेघालय कैडर की अधिकारी पराशर को उनकी नियुक्ति से पहले ही उग्रवाद विरोधी अभियानों में उनके साहस और नेतृत्व के लिए ‘आयरन लेडी ऑफ असम’ के नाम से जाना जाता है। वह इस स्पेशल जंगल-वारफेयर फोर्स की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं।

कौन हैं  IPS अधिकारी पराशर?

असम-मेघालय कैडर की 2006-बैच की IPS अधिकारी पराशर के पास उग्रवाद विरोधी अभियानों, फील्ड पुलिसिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जांच का लंबा अनुभव है। CRPF मुख्यालय ने पिछले सप्ताह नियुक्ति का आदेश जारी किया। पराशर CoBRA की IG के तौर पर 1996-बैच के IPS अधिकारी दानिश राणा की जगह लेंगी। एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “यह पहली बार है जब CRPF की 10-बटालियन वाली CoBRA यूनिट की कमान एक महिला अधिकारी संभालेंगी।” हाल ही में CRPF ने मणिपुर में हथियारबंद हिंसा को रोकने के लिए CoBRA की दो यूनिट तैनात की थीं।

NDFB के खिलाफ अभियान से मिली ‘आयरन लेडी’ की पहचान

संजुक्ता पराशर ने अपने करियर के शुरुआती दौर में बोडो और अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों से जुड़े संघर्षों को संभाला था। इसके बाद 2013-14 में सोनितपुर की SP रहते हुए उन्होंने उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB) के खिलाफ बड़े अभियान का नेतृत्व किया। इस कार्रवाई में 16 उग्रवादियों के मारे जाने और 64 के गिरफ्तार होने की बात सामने आई थी। एक ऑपरेशन के दौरान हाथ में AK-47 लिए उनकी तस्वीर काफी चर्चित हुई, जिसके बाद उन्हें ‘आयरन लेडी ऑफ असम’ कहा जाने लगा। अभियान के दौरान उन्हें बोडो उग्रवादियों से जान से मारने की धमकियां भी मिली थीं।

NIA और असम पुलिस में भी निभाई अहम जिम्मेदारी

असम की रहने वाली पराशर ने अपने कैडर के अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में भी काम किया है। यहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण आतंकवाद विरोधी जांचों में भूमिका निभाई। CoBRA की IG नियुक्ति से पहले वह असम पुलिस की CID विंग की प्रमुख थीं। अब CoBRA की कमान संभालते हुए उनके सामने देश के उन बड़े जंगल क्षेत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होगी, जिन्हें नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों ने अपने नियंत्रण में लिया है। CoBRA मुख्य रूप से जंगलों में उग्रवाद विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षित कमांडो बल है।

छत्तीसगढ़ और झारखंड में बड़ी जिम्मेदारी

CoBRA के जवान मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ और झारखंड के बड़े वन क्षेत्रों में तैनात हैं। इन इलाकों में नक्सल गतिविधियों के खिलाफ लंबे समय से अभियान चलाए जा रहे हैं। खबर के मुताबिक, मार्च 2026 तक देश में वामपंथी उग्रवाद को लगभग समाप्त करने की दिशा में सुरक्षा अभियानों की अहम भूमिका रही है। इसके अलावा CoBRA की दो बटालियन मणिपुर में भी तैनात हैं, जहां जातीय तनाव के कारण समय-समय पर हिंसा होती रही है।

CRPF में महिला अधिकारियों को मिल रही बड़ी कमान

संजुक्ता पराशर की नियुक्ति को CRPF में महिला अधिकारियों को ऑपरेशनल और कॉम्बैट से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की व्यापक पहल का हिस्सा माना जा रहा है। CRPF के एक अधिकारी ने Times of India को बताया कि महिला अधिकारी वर्तमान में जम्मू, CoBRA, Rapid Action Force (RAF), नॉर्थ ईस्ट, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों में IG के पद पर जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

एक और महिला अधिकारी की संवेदनशील इलाकों में तैनाती

हाल ही में 2006 बैच की IPS अधिकारी ए. विजया लक्ष्मी को संवेदनशील जम्मू सेक्टर का IG नियुक्त किया गया था। नीतू डी. भट्टाचार्य मध्य प्रदेश सेक्टर की IG हैं। वह बालाघाट में नक्सल विरोधी अभियानों से जुड़ी रही हैं। ओडिशा कैडर की IPS अधिकारी कविता जालान नॉर्थ ईस्ट सेक्टर की कमान संभाल रही हैं, जिसमें पूरा मेघालय और असम के कुछ हिस्से शामिल हैं। वहीं, गुजरात कैडर की IPS अधिकारी अर्चना शिवहरे राजस्थान सेक्टर की IG हैं।

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CRPF की Rapid Action Force (RAF) की कमान भी अधिकारी सीमा धुंधिया के पास है। वह 1987 में महिला अधिकारियों के पहले बैच के हिस्से के रूप में CRPF में शामिल हुई थीं। संजुक्ता पराशर की नई जिम्मेदारी ऐसे समय में आई है, जब CoBRA को नक्सल प्रभावित जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ मणिपुर जैसे संवेदनशील इलाकों में भी महत्वपूर्ण ऑपरेशनल भूमिका निभानी है।

15 सितंबर से IAS सेवा से बाहर हुईं दिव्या मित्तल, इस्तीफा मंजूर होते ही किया ये पोस्ट

उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से विदाई ले ली है। निजी कारणों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जिंदगी में कुछ नए लक्ष्य तय करने का हवाला देते हुए उन्होंने 30 अगस्त को इस्तीफे की घोषणा की थी। अब केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने उनके इस्तीफे को मंजूरी दे दी है। 15 सितंबर से उनका इस्तीफा प्रभावी हो गया।

दिव्या मित्तल का यह फैसला इसलिए खास है, क्योंकि IAS बनने के लिए उन्होंने पहले भी एक सुरक्षित और शानदार करियर को पीछे छोड़ा था। उनकी कहानी सिर्फ एक अफसर के इस्तीफे की नहीं, बल्कि बार-बार अपनी जिंदगी की दिशा खुद तय करने वाली महिला की कहानी है।

लंदन में शानदार नौकरी, फिर भी मन में थी एक कसक

IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई करने के बाद दिव्या मित्तल ने लंदन में अच्छी नौकरी हासिल की। विदेश में बेहतर करियर, आकर्षक सैलरी और सुविधाओं के बावजूद उन्हें लगा कि जिंदगी में कुछ कमी है। उन्होंने नौकरी छोड़कर भारत लौटने और UPSC की तैयारी करने का फैसला किया। पहले प्रयास में IPS और दूसरे प्रयास में 2013 में IAS बनकर उन्होंने साबित कर दिया कि बड़ा जोखिम उठाने का साहस उनमें शुरू से रहा है।

उनके पति गगनदीप सिंह ने भी 2022 में सरकारी नौकरी छोड़कर अपनी कंपनी शुरू की थी। यानी परिवार में पारंपरिक सुरक्षित करियर से हटकर अपनी राह चुनने का सिलसिला नया नहीं है।

सख्त तेवर और काम की अलग पहचान

IAS बनने के बाद दिव्या मित्तल की पहचान तेजतर्रार, बेबाक और सख्त अधिकारी के रूप में बनी। मिर्जापुर, बस्ती और देवरिया समेत कई जिलों में उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। मिर्जापुर में उनके काम को खास तौर पर याद किया जाता है। ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या को लेकर उन्होंने गंभीरता से काम किया। जिन क्षेत्रों में आजादी के 75 साल बाद भी पानी पहुंचना बड़ी चुनौती थी, वहां उनकी पहल से लोगों को राहत मिली। यही वजह है कि उनके इस्तीफे की खबर के बाद कई ग्रामीण भावुक दिखाई दिए और उनके कार्यकाल को याद किया।

एक सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाई चर्चाएं

इस्तीफा मंजूर होने के बाद दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर जयशंकर प्रसाद की पंक्ति लिखी “प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो।” इस एक पंक्ति ने उनके अगले कदम को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी। क्या वह सामाजिक क्षेत्र में जाएंगी, कोई नया काम शुरू करेंगी या राजनीति का रुख करेंगी? फिलहाल उन्होंने अपने भविष्य की योजना सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन संदेश साफ है एक सफर खत्म हुआ है और शायद किसी नई मंजिल की ओर कदम बढ़ चुके हैं।

इस्तीफे के साथ राजनीति भी गरमाई

दिव्या मित्तल के इस्तीफे पर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई। समाजवादी पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदेश में ईमानदार अधिकारियों को काम करने की पर्याप्त स्वतंत्रता नहीं मिल रही। कांग्रेस नेता अजय राय ने राज्यपाल को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की और संकेत दिया कि अगर दिव्या मित्तल चुनाव लड़ना चाहें तो कांग्रेस उनके नाम पर विचार कर सकती है।

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Jensen Huang: ट्रंप ने लाइव पैनल में Nvidia CEO को लगाया फोन, बोले- ‘अगले 25 साल का तेल हैं डेटा सेंटर’

Jensen Huang News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (14 सितंबर) को उस वक्त सबको चौंका दिया, जब उन्होंने एक लाइव पैनल चर्चा के दौरान अमेरिका की दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनी Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग को फोन कर दिया। लॉस एंजिल्स में आयोजित All-In समिट में हुआ यह फोन कॉल चर्चा का प्रमुख आकर्षण बन गया। बातचीत के दौरान ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती चिंताओं को खारिज करते हुए इसे एक तरह का ‘होक्स’ यानी झूठा डर बताया।

पैनल चर्चा के दौरान हुआ यह फोन कॉल ऐसे समय में आया है, जब AI के तेजी से विकास और इससे जुड़े संभावित खतरों को लेकर टेक इंडस्ट्री में बहस तेज है। कुछ एक्सपर्ट और AI कंपनियों के कर्मचारी विकास की रफ्तार धीमी करने की मांग कर रहे हैं।

AI की रफ्तार धीमी करने की मांग पर ट्रंप ने उठाए सवाल

फोन पर ट्रंप ने AI के विकास की रफ्तार कम करने की कोशिशों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि AI को धीमा करने की कोशिश के पीछे राजनीतिक हित हो सकते हैं या फिर यह चीन के हित में जा सकता है। ट्रंप ने इस बहस को लेकर कहा कि AI के विकास को रोकने की कोशिश उन लोगों के हाथ मजबूत कर रही है, जो इसे आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते। Nvidia CEO ने भी ट्रंप की बात से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने इस जटिल मुद्दे को सही तरीके से समझा है।

AI सुरक्षा को लेकर चिंता जताने वाले रिसर्चर की भी तारीफ

दिलचस्प बात यह रही कि AI के खतरों को लेकर चिंता जताने वाले लोगों की आलोचना के बावजूद Huang ने Anthropic के उस रिसर्चर की तारीफ की, जिसने इन चिंताओं के कारण कंपनी से इस्तीफा दिया। Anthropic के रिसर्चर जेकब कॉक्सन ने AI के संभावित खतरों को लेकर चिंता जताते हुए कंपनी छोड़ दी थी। Huang ने उन्हें अपनी चिंताओं को सामने रखने के लिए साहसी बताया। उन्होंने कहा कि कंपनियों के भीतर व्हिसलब्लोअर्स यानी गंभीर मुद्दों की जानकारी सामने लाने वाले कर्मचारियों की बात को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

हालांकि Huang ने यह भी कहा कि मौजूदा बहस ने AI को लेकर एक गलत विकल्प खड़ा कर दिया है। जैसे या तो तेजी से AI का विकास किया जाए या फिर AI की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उनके मुताबिक दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

AI को लेकर टेक इंडस्ट्री में बढ़ी बहस

AI के मानवता के लिए संभावित खतरे को लेकर हाल के दिनों में चर्चा काफी तेज हुई है। जेकब कॉक्सन के इस्तीफे के बाद यह बहस और बढ़ गई। Coxon ने आरोप लगाया था कि Anthropic और OpenAI AI को लेकर ऐसे प्रयोग कर रहे हैं, जिनके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

इसके बाद Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने शनिवार को करीब 3,800 शब्दों का एक लेख प्रकाशित किया, जिसमें AI के विकास की गति को नियंत्रित करने का प्रस्ताव रखा गया। इस विचार का समर्थन OpenAI CEO सैम ऑल्टमैन और SpaceX CEO एलॉन मस्क ने भी किया।

AI खर्च धीमा होने की आशंका से टेक शेयरों में गिरावट

AI को लेकर बढ़ती चिंताओं का असर अमेरिकी शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। सोमवार को टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई, क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाला खर्च भविष्य में धीमा पड़ सकता है। दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल Nvidia के शेयरों में सोमवार को 3.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Nvidia के चिप्स का इस्तेमाल AI मॉडल को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से कंपनी को जबरदस्त फायदा मिला है।

डेटा सेंटर निर्माण के बड़े समर्थक हैं ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार अमेरिका में नए डेटा सेंटर बनाने की वकालत करते रहे हैं। हालांकि कई अमेरिकी राज्यों में डेटा सेंटर परियोजनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और परमिट से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। ट्रंप ने उन अमेरिकी राज्यों की आलोचना की, जो नए डेटा सेंटर बनाने के लिए परमिट देने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर लोगों और राज्यों के लिए बड़ी संपत्ति और कमाई का जरिया बन सकते हैं।

‘अगले 20-25 साल का तेल हैं डेटा सेंटर’

ट्रंप ने डेटा सेंटर की अहमियत बताते हुए कहा कि ये आने वाले दशकों में अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने डेटा सेंटर को अगले 20 से 25 वर्षों का तेल करारा देते हुए कहा कि इसका महत्व इंटरनेट से भी बड़ा हो सकता है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ रही है। AI मॉडल को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है, जिसके लिए बड़े और अत्याधुनिक डेटा सेंटर जरूरी हैं।

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अमेरिकी AI स्कूलों के लर्निंग मॉडल की हो रही आलोचना:स्कूल बने टॉर्चर चैम्बर, पेरेंट्स के कड़वे बोल तय कर रहे भविष्य

भविष्य की शिक्षा के नाम पर अमेरिकी स्कूलों का चौंकाने वाला सच सामने आया है। यहां एडमिशन के लिए बच्चों को हार्ट मॉनिटर से जोड़कर पूरी क्लास के सामने उनके पेरेंट्स के आलोचनात्मक वीडियो दिखाई जाते हैं, जहां दिल की धड़कन बढ़ने पर वे फेल हो जाते हैं। ‘सहनशीलता’ सिखाने का यह अमानवीय एआई मॉडल बच्चों की मानसिक सेहत को कैसे प्रभावित कर रहा है, जानिए… सिलिकॉन वैली का अल्फा स्कूल… कमरे में ऐसा सन्नाटा था कि सिर्फ दीवार पर लगे विशाल मॉनिटर की ‘बीप-बीप’ सुनाई दे रही थी। यह अस्पताल का आईसीयू नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा का दावा करने वाला अत्याधुनिक एआई स्कूल है। चौदह साल का रेयान मंच पर रखी एक कुर्सी पर अकेला बैठा था। उसकी उंगलियों और सीने से सेंसर जुड़े थे, जबकि सामने बैठे छात्र बड़ी स्क्रीन पर उसकी धड़कनों का ग्राफ देख रहे थे। रेयान का सामान्य हार्ट रेट 80 बीपीएम था। नियमों के मुताबिक अपनी जगह बनाए रखने के लिए रेयान को दिल की धड़कन 10% से अधिक नहीं बढ़ने देनी थी। 88 बीपीएम पार होते ही वह तुरंत अयोग्य घोषित कर दिया जाता। तभी प्रोजेक्टर की स्क्रीन जगमगाई। सामने रेयान के पेरेंट्स का पहले से रिकॉर्ड किया गया वीडियो चलने लगा। वे उसके काम, उसकी कमियों और उसकी हर नाकामी की तीखी आलोचना कर रहे थे। एक-एक शब्द रेयान के आत्मसम्मान पर हथौड़े की तरह चोट कर रहा था। पूरी क्लास की नजरें कभी उस वीडियो पर जातीं, तो कभी स्क्रीन पर दौड़ती लाल लकीर पर। ‘82… 85… 87…’ रेयान की मुट्ठियां भींच गईं। उसने अपनी आंखें बंद कीं, सांसों को जबरदस्ती धीमा करने लगा। दिल सीने से बाहर आने को बेताब था, पर बाहर दिखने वाली हर कमजोरी का मतलब था विफलता। जब वीडियो थमा, स्क्रीन पर औसत दर्ज था- 87 बीपीएम। वह सिर्फ एक धड़कन के फासले से बच गया था। पूरा हफ्ता उसके हाथ कांपते रहे। सिलिकॉन वैली के चर्चित एआई स्कूल में परीक्षा सिर्फ दिल की धड़कन नियंत्रित करने तक सीमित नहीं थी। छात्रों पर बॉट्स की मदद से कुछ ही दिनों में कठिन कोर्स पूरा करने का दबाव था। उन्हें बिना शिकायत गंदे शौचालय साफ कराए जाते और सोशल मीडिया पर खुद को ‘बेचने’ की ट्रेनिंग दी जाती। अल्फा स्कूल के अलावा जाने-माने स्कूल सिंथेसिस, अल्फा एनीवेयर और क्वेस्ट् टू लर्न यही तरीका अपना रहे हैं…सहनशीलता और ‘अदम्य साहस’ के नाम पर चल रहा यह प्रयोग शिक्षा से ज्यादा तकनीकी सैन्य प्रशिक्षण जैसा लगता था, जहां संवेदनाओं को दबाना ही सफलता की कसौटी माना जाता है। सेंसर हटाते ही रेयान ने राहत की सांस तो ली, पर उसकी आंखें शून्य में ताक रही थीं। मशीन ने उसके दिल की रफ्तार तो नाप ली थी, लेकिन उस डर और घुटन का कोई डेटा स्क्रीन पर नहीं आया, जो उसके भीतर हमेशा के लिए दर्ज हो चुका था।

इटली की नेता और पूर्व विदेश मंत्री बोनिनो का निधन:महिलाओं के हक पर पोप से टकरा गई थीं एमा; 48 साल पुराना एबॉर्शन कानून बदलवाया

इटली की पूर्व विदेश मंत्री एमा बोनिनो को एक ऐसी महिला के रूप में याद किया जाएगा, जिसने अपनी निजी पीड़ा को लाखों महिलाओं के अधिकार की लड़ाई बना दिया। 26 साल की उम्र में जब उनका गर्भपात हुआ, तब इटली में यह गैरकानूनी था। इसके बाद उन्होंने तय किया कि दूसरी महिलाओं को एबॉर्शन के अपमान और असुरक्षित हालात से नहीं गुजरना पड़े। यूरोपीय आयुक्त भी रह चुकीं इटली की कद्दावर नेता एमा अपनी तीखी टिप्पणियों और मानवाधिकारों के प्रति अटूट निष्ठा के लिए जानी जाती थीं। उनका 78 वर्ष की उम्र में शुक्रवार को निधन हो गया। उनकी पार्टी ‘मोर यूरोप’ ने कहा कि देश ने सबसे दूरदर्शी, साहसी और स्वतंत्र सोच वाली नेता को खो दिया है। जानते हैं ​उनके राजनीतिक संघर्ष… निजी पीड़ा को बनाया इटली में क्रांति का नया हथियार – 1974 में जब इटली में गर्भपात गैरकानूनी था, तब 26 वर्षीय एमा ने एक क्लिनिक में गर्भपात कराया। – गर्भपात पर प्रतिबंध वाले 48 साल पुराने कानून के विरोध में पुलिस के सामने समर्पण किया। अपनी गिरफ्तारी से उपजी लहर को जनआंदोलन बनाया। – दबाव में संसद ने 1978 में 48 साल पुराने 1930 के कानून को बदलते हुए गर्भपात को कानूनी मान्यता दी। इससे पहले तलाक का कानून भी बनाया गया था। एमा ने कभी विवाह नहीं किया। एबॉर्शन के सवाल पर वेटिकन से भी टकराव रहा एमा ने वेटिकन चर्च के कड़े विरोध के बावजूद गर्भपात और तलाक को कानूनी दर्जा दिलवाने के अभियानों का नेतृत्व किया। महिला अधिकारों पर टकराव के बावजूद पोप फ्रांसिस के साथ उनकी अनूठी और गहरी दोस्ती भी थी। पोप फ्रांसिस अक्सर उनकी मानवीय पहलों की सराहना करते थे और उन्हें सबसे कमजोर तबके की आवाज उठाने वाली नेता कहते थे। कैंसर के बावजूद सक्रिय रहीं – 2015 में कैंसर का पता चलने के बाद भी एमा ने सार्वजनिक जीवन से दूरी नहीं बनाई। वह रंग-बिरंगे स्कार्फ पहनकर संसद से लेकर टीवी डिबेट्स में मानवाधिकारों की आवाज बुलंद करती रहीं। आखिरी बात: लड़ाइयां अभी बहुत हैं – बीमारी के बीच जब उनसे पूछा गया कि कौन सी लड़ाई बाकी है, तब कहा था, ‘बहुत सारी, जरूरत से भी ज्यादा- मानवाधिकार, वैश्विक भूख और स्वतंत्र वैज्ञानिक शोध। दस जन्म भी कम पड़ेंगे।’

भारत बांग्लादेश को 40 रनों से हराकर फिर पहुंची एशिया कप फाइनल में

indian women cricket team

BANvsIND ओपनर शेफाली वर्मा (64) के शानदार अर्धशतक और दीप्ति शर्मा (13 रन और 26 रन पर तीन विकेट) के हरफनमौला प्रदर्शन की बदौलत भारत ने बांग्लादेश  को गुरूवार को 40 रन से रौंद कर महिला एशिया कप के खिताबी मुकाबले में प्रवेश कर लिया। भारत ने पहले सेमीफाइनल में 20 ओवर में छह विकेट पर 149 रन का बड़ा स्कोर बनाने के बाद बांग्लादेश की चुनौती को सात विकेट पर 109 रन पर थाम लिया। शेफाली को प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला।

इस टूर्नामेंट के इतिहास में भारत के बिना कोई भी फ़ाइनल नहीं खेला गया है और 2026 में भी यह शानदार सिलसिला जारी है। एक बार फिर भारत ने फ़ाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। भारतीय खिलाड़ियों के चेहरों पर ज़्यादा भाव नहीं दिख रहे हैं। उन्हें भरोसा था कि वे आगे बढ़ेंगे और आज रात उन्होंने बेहतरीन खेल दिखाया। हरमनप्रीत कौर बिना किसी खास भाव के बंगलादेशी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ती हैं, जबकि उनकी कुछ टीम-साथियों के चेहरों पर मुस्कान है।

इस पिच पर 150 रन का लक्ष्य हमेशा से ही मुश्किल होने वाला था, और भारत ने शेफाली वर्मा की शानदार और थोड़ी किस्मत के साथ खेली गई 40 गेंदों में 64 रनों की पारी की बदौलत फ़ाइनल में जगह बना ली। बांग्लादेशके टॉप पांच बल्लेबाजों को अच्छी शुरुआत तो मिली, लेकिन किसी भी समय ऐसा नहीं लगा कि वे लक्ष्य का पीछा कर पाएंगे। नई गेंद से क्रांति गौड़ और नंदनी शर्मा ने अच्छा प्रदर्शन किया, जिसके बाद स्पिनरों ने कमान संभाली और बांग्लादेशको लक्ष्य का पीछा करते हुए कभी भी लय नहीं बनाने दी।

दीप्ति शर्मा ने तीन विकेट लिए, जबकि प्रेमा रावत और श्री चरणी ने एक-एक विकेट हासिल किया। नंदनी आखिरी ओवर फेंकने के लिए वापस आईं और दो विकेट लिए, जिससे बांग्लादेशअपने 20 ओवरों में सिर्फ़ 109/7 रन ही बना सका। बांग्लादेशकी तरफ से शोरना अख़्तर ने सर्वाधिक नाबाद 22 रन बनाये।

इससे पहले शेफाली ने 40 गेंदों पर 64 रन की अपनी पारी में सात चौके और तीन छक्के लगाए। स्मृति मंधाना (2) के रूप में भारत को शुरुआती झटका लग गया था लेकिन जीवनदानों के बीच शेफ़ाली ने साहसिक पारी खेली और अर्धशतक जड़ा। भारतीय पारी में बाद में हरमनप्रीत कौर, ऋचा घोष और दीप्ति शर्मा ने गति को बढ़ाया और भारत को एक बड़े स्कोर तक पहुंचा दिया।

पिच पर स्कोरिंग आसान नहीं थी, लेकिन भारत ने 150 रन के स्कोर के करीब पहुँचने का रास्ता ढूंढ लिया। इसका श्रेय शेफाली वर्मा को जाता है, जिन्होंने 40 गेंदों में 64 रन बनाए, जिसमें सात चौके और तीन छक्के शामिल थे। हालाँकि, बांग्लादेशको खुद को ही दोष देना होगा। उन्होंने शेफाली के तीन कैच छोड़े और एक आसान रन-आउट का मौका भी गंवा दिया। भारत ने स्मृति मंधाना का विकेट जल्दी गंवा दिया, लेकिन प्रतिका रावल और शेफाली वर्मा ने दूसरे विकेट के लिए 50 रन जोड़कर पारी को संभाला।

हालाँकि, शेफाली ही थीं जिन्होंने बांग्लादेश पर दबाव बनाए रखा और आक्रामक खेल दिखाया। प्रतीका रावल ने 24 गेंदों में 20 रन बनाए, जबकि हरमनप्रीत कौर 28 गेंदों में 24 रन बनाकर नाबाद रहीं; उन्हें तेज़ी से रन बनाने में मुश्किल हो रही थी। ऋचा घोष (16 गेंदों में 21 रन) और दीप्ति शर्मा (6 गेंदों में 13 रन) ने पारी के आखिरी हिस्से में उपयोगी योगदान दिया, जिससे भारत की लय बनी रही। हरमन और ऋचा ने दो-दो छक्के लगाए। दीप्ति ने एक चौका और एक छक्का मारा।

Jawa 42 All Stars Edition लॉन्च, रेट्रो लुक और स्टार थीम के साथ, जानें कीमत और डिलीवरी डेट

फेस्टिव सीजन की मांग का फायदा उठाने के लिए Classic Legends ने Jawa 42 All Stars लॉन्च की है, जिसकी शुरुआती कीमत 1.85 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है। स्टैंडर्ड मॉडल के मुकाबले 10,000 रुपये ज्यादा कीमत वाले इस स्पेशल एडिशन में कॉस्मेटिक बदलाव और खास ‘All Stars’ ब्रांडिंग दी गई है, जबकि इसका मैकेनिकल पैकेज वही है।

Jawa 42 ‘All Stars’ एडिशन में सिर्फ कॉस्मेटिक बदलाव किए गए हैं, जैसे नए ग्राफिक्स, खास स्टार-थीम वाली डिटेलिंग और ‘All-Stars’ बैजिंग।

बता दें कि इस हफ्ते की शुरुआत में आनंद महिंद्रा ने Global Chess League 2026 के दौरान Jawa 42 Bobber All Stars को पेश किया। ये स्पेशल एडिशन ब्रांड की ‘ऑल स्टार्स’ लाइनअप को बढ़ाते हैं, और Jawa 42 Bobber All Stars की कीमत 2.09 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है।

Jawa 42 रेंज में 294.72 cc का सिंगल-सिलेंडर, लिक्विड-कूल्ड DOHC इंजन है, जो छह-स्पीड गियरबॉक्स के साथ आता है और 27.1 hp की पावर और 26.3 Nm का टॉर्क देता है। ब्रेकिंग के लिए इसमें आगे 280 mm और पीछे 240 mm के डिस्क ब्रेक दिए गए हैं, जो डुअल-चैनल ABS के साथ आते हैं। मोटरसाइकिल का व्हीलबेस 1,369 mm और सीट की ऊंचाई 795 mm है, जो रोजाना इस्तेमाल और आरामदायक राइडिंग पोजिशन के बीच अच्छा तालमेल बिठाती है।

Jawa All Stars 42 Bobber: वेरिएंट के हिसाब से कीमतें

All Stars Mystic Copper – Rs 2,08,942

All Stars Jasper Red – Rs 2,15,942

All Stars Silver Knight – Rs 2,15,942

All Stars Shadow Black – Rs 2,17,942

All Stars Black Mirror – Rs 2,19,942

Jawa 42 All Stars: वेरिएंट के हिसाब से कीमतें

Black: Rs 1,89,942

Nebula Blue: Rs 1,86,942

Battle Green: Rs 1,86,942

Moss Grey: Rs 1,86,942

All Stars Ivory: Rs 1,84,942

Jawa 42 All Stars की बुकिंग शुरू हो गई है। ग्राहकों को बाइक की डिलीवरी 14 सितंबर 2026 से मिलनी शुरू होगी। यह तारीख त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ मेल खाती है।

कंपनी जिसे ‘Jawa के कैरेक्टर, कंडक्ट और करेज (चरित्र, व्यवहार और साहस) का साझा कोड’ कहती है, उसे ध्यान में रखते हुए इन मोटरसाइकिलों की पूरी रेंज में ‘All-Stars’ का निशान और स्टार के डिजाइन दिए गए हैं।

Jawa 42 मॉडर्न-क्लासिक मोटरसाइकिल सेगमेंट में Royal Enfield Classic 350, Royal Enfield Meteor 350 और Honda CB350 H’ness जैसी मोटरसाइकिलों को टक्कर देती है।

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