क्यों मनाया जाता है भारतीय वायुसेना दिवस? जानें दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत का इतिहास

क्यों मनाया जाता है भारतीय वायुसेना दिवस? जानें दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत का इतिहास

Why is Indian Air Force Day celebrated, Learn about history of world's fourth largest air power

Indian Air Force Day 2026: हर साल 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह वह पावन अवसर है जब पूरा देश अपनी वायुसेना के शौर्य, अदम्य साहस और समर्पण को नमन करता है। ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ (गर्व के साथ आकाश को छूना) के अमर ध्येय वाक्य को जीने वाली भारतीय वायुसेना केवल हमारी सीमाओं की रक्षा ही नहीं करती, बल्कि देशवासियों के विश्वास का वो मज़बूत आधार है जो हर संकट में ढाल बनकर खड़ा रहता है। 8 अक्टूबर 1932 को भारतीय वायुसेना की स्थापना हुई थी। आइए जानते हैं भारतीय वायुसेना दिवस पर उसके इतिहास और महत्‍व के बारे में विस्‍तार से… 

 

भारतीय वायुसेना का इतिहास

8 अक्टूबर 1932 को ब्रिटिश शासनकाल के दौरान ‘रॉयल इंडियन एयर फोर्स’ (RIAF) के रूप में इसकी नींव रखी गई। 1 अप्रैल 1933 को महज 4 वेस्टलैंड वापिटी विमानों और 6 निडर भारतीय अधिकारियों के साथ वायुसेना के पहले स्क्वाड्रन ने सांसें लीं। द्वितीय विश्व युद्ध में अदम्य साहस दिखाने के लिए इसे ‘रॉयल’ उपाधि मिली थी।

इसे 1950 में पूर्ण गणतंत्र घोषित होने से पहले ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ के नाम से जाना जाता था। इसने 1945 के द्वितीय विश्वयुद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 1950 में आजादी यानी पूर्ण गणतंत्र घोषित होने के बाद इसमें से ‘रॉयल’ शब्द हटाकर उसे सिर्फ इंडियन एयर फोर्स (Indian Air Force) कर दिया गया। दुनियाभर में सिर्फ अमेरिका, चीन और रूस के पास भारत से बड़ी वायुसेना मौजूद है।

 

शौर्य और अभियानों की गाथा

भारतीय वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और ताकतवर वायुसेना है, जिसने इतिहास के हर मोड़ पर अपनी श्रेष्ठता साबित की है। साल 1947, 1965, 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों से लेकर 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1999 के कारगिल युद्ध की बर्फीली चोटियों तक वायुसेना ने दुश्मनों के हौसले पस्त किए हैं।

सियाचिन की शून्य से नीचे की बर्फ में ‘ऑपरेशन मेघदूत’, मालदीव में लोकतंत्र बचाने का ‘ऑपरेशन कैक्टस’ और 2019 में सीमा पार जाकर की गई ‘बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक’ वायुसेना की अचूक क्षमता का प्रमाण हैं। 

 

आपदा में सबसे पहली उम्मीद

वायुसेना केवल विनाशकारी युद्धों के लिए ही नहीं, बल्कि संकटग्रस्त जिंदगियों को बचाने के लिए भी जानी जाती है। प्राकृतिक आपदाओं (चाहे उत्तराखंड की विनाशकारी बाढ़ हो, गुजरात का भूकंप या केरल की सुनामी) हर जगह वायुसेना के चॉपर संकटमोचन बनकर पहुंचे हैं। महामारी या विदेशों में गृहयुद्ध के दौरान फंसे भारतीयों और मित्र देशों के नागरिकों को सुरक्षित निकालने में वायुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर जैसे विशाल विमानों ने हमेशा मिसाल कायम की है।

 

जब वायुसेना नीले गगन में रचती है इतिहास

वायुसेना दिवस का जश्न सिर्फ एक औपचारिक परेड नहीं, बल्कि भारत की सैन्य ताकत और एयरोबेटिक कलाबाजी का अद्भुत संगम है। कार्यक्रम की शुरुआत वायुसेना प्रमुख द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने, भव्य परेड के निरीक्षण और अदम्य साहस दिखाने वाले वीर वायु सैनिकों को वीरता पदकों से अलंकृत करने के साथ होती है।

 

देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित होने वाले भव्य एयर शो में जब राफेल, सुखोई Su-30MKI, स्वदेशी तेजस, जगुआर और मिराज जैसे घातक लड़ाकू विमान एक साथ उड़ान भरते हैं, तो धरती से आसमान तक गर्व की लहर दौड़ जाती है। एयरोबेटिक टीम ‘सूर्य किरण’ के लाल-सफेद विमान और ‘सारंग’ हेलीकॉप्टर दल जब हवा में जटिल और हैरतअंगेज फॉर्मेशन्स बनाते हैं, तो दर्शक दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर हो जाते हैं।

 

भारतीय वायुसेना की भविष्य की ओर उड़ान

आज भारतीय वायुसेना केवल अपनी पुरानी विरासत पर निर्भर नहीं है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए तेज़ी से खुद को बदल रही है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत ‘तेजस’ (LCA), प्रचंड अटैक हेलीकॉप्टर और आधुनिक ड्रोन प्रणालियों को शामिल कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए गए हैं। अब वायुसेना केवल हवाई सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि स्पेस (अंतरिक्ष) और साइबर सुरक्षा के नए आयामों में भी अपनी पकड़ मज़बूत कर रही है।

 

भारतीय वायुसेना का महत्व

वर्तमान युग में युद्ध की स्थिति में सबसे अधिक महत्व वायुसेना का होता है, इसलिए सेना के इस अंग का सबसे मजबूत होना अति आवश्यक है। भारतीय वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है। दुनियाभर में सिर्फ अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारत में बड़ी वायुसेना मौजूद है। भारतीय वायुसेना कई ऐसे लड़ाकू विमान हैं जो इसे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना होने का दर्जा दिलाती है। भारतीय वायुसेना बल, वीरता और पराक्रम का प्रतीक है।

 

वायुसेना दिवस पर भारतीय वायु सैनिकों की बहादुरी, शौर्य और पराक्रम के लिए उन्हें सलाम करती है। यह दिवस हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का जज़्बा जगाता है और उन वीर सपूतों को नमन करने का अवसर देता है जो दिन-रात हमारी नींद की हिफाज़त के लिए आसमान में पहरा देते हैं। 

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: यदि दयालुता हमारा स्वभाव है, तो हिंसा कहाँ से आती है?

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: यदि दयालुता हमारा स्वभाव है, तो हिंसा कहाँ से आती है?

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– – गुरुदेव श्री श्री रविशंकर

हर व्यक्ति का स्वाभाविक स्वरूप दयालु, प्रेमपूर्ण, करुणामय और आनंदमय होता है। कोई भी बच्चा बिना किसी कारण के नहीं रोता। वह तभी रोता है जब उसे भूख लगी हो, नींद आ रही हो या वह भयभीत हो। इसी प्रकार, यदि कोई व्यक्ति हिंसक है तो उसके पीछे कोई न कोई कारण अवश्य होता है। यदि किसी में करुणा का अभाव है तो उसके पीछे भी कोई कारण छिपा होता है। और यदि हम वास्तव में उसकी जड़ तक जाएँ, तो हमें वहाँ अकेलापन, भय, अस्वीकृति की भावना और अपनेपन का अभाव ही देखने को मिलेगा।

 

जब कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से बीमार होता है तो हम उसे अस्पताल भेजते हैं; वहीं जब उसके व्यवहार में विकृति आ जाती है तो हम उसे जेल भेज देते हैं। लेकिन जेल भेजने के बाद भी हम उसे ऐसे साधन और तकनीकें उपलब्ध नहीं कराते, जिनसे वह अपने व्यवहार में सुधार ला सके और अपनी भावनाओं को समझकर उन्हें बदल सके।

 

आज दुनिया में होने वाली आधी से अधिक हिंसा के पीछे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियाँ हैं। मानसिक स्वास्थ्य आज पूरे विश्व के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। चाहे देश विकासशील हो या विकसित, क्षेत्र युद्धग्रस्त हो या शांतिपूर्ण समाज—यह संकट हम सभी को प्रभावित करता है। यह अत्यंत चिंताजनक विषय है कि विश्व में हर 42 सेकंड में एक व्यक्ति अपना जीवन समाप्त कर रहा है। असंख्य युवा या तो आक्रामक और हिंसक होते जा रहे हैं या फिर अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार हो रहे हैं। भारत अपनी समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा के माध्यम से इस वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य संकट से निपटने में दुनिया का मार्गदर्शन कर रहा है।

 

सामान्यतः न तो घर पर और न ही विद्यालय में हमें अपनी भावनाओं को संभालना सिखाया जाता है। कभी-कभी अकेलापन महसूस होना स्वाभाविक है; पर्याप्त धन, परिवार और मित्र होने पर भी व्यक्ति भीतर से उदास या अकेला अनुभव कर सकता है। आज मानसिक स्वास्थ्य के एक बड़े संकट के रूप में उभर रहा यह अकेलापन इसलिए है, क्योंकि हमने स्वयं के साथ समय बिताना और अपने भीतर शांत रहना सीखा ही नहीं है। यदि हम यह कला सीख लें, तो हमारे भीतर का आनंद हमारे आसपास के प्रत्येक व्यक्ति तक स्वतः पहुँचने लगेगा।

 

यहाँ हमारी ‘श्वास’ (साँस) एक स्वस्थ मन की कुंजी बनती है। एक स्वस्थ मन के लक्षण क्या हैं? आपके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान जिसे कोई आपसे छीन न सके, और अपने भीतर एक ऐसा आत्मविश्वास कि आप किसी भी चुनौती का निर्भीकता से सामना कर सकें। स्वस्थ मन वह है जो रचनात्मक आलोचना को स्वीकार कर सके और स्वयं भी स्वस्थ व सकारात्मक आलोचना करने का साहस रखे। यह निर्भय होने के साथ-साथ विनम्र बने रहने की अद्भुत क्षमता है।

 

प्रत्येक भावना शरीर के किसी न किसी विशेष हिस्से में विशिष्ट संवेदनाएँ उत्पन्न करती है, और इसका सीधा संबंध हमारी श्वास से होता है। जब हम उदास होते हैं तब हमारी श्वास की गति व ढंग अलग होता है, और जब हम प्रसन्न होते हैं तब वह भिन्न होता है।

 


जब आप क्रोधित, निराश या ईर्ष्यालु होते हैं, तो प्रायः यह समझ नहीं आता कि उन नकारात्मक भावनाओं का क्या करें, और हम उन्हें अपने भीतर ही दबाकर रखते हैं। लेकिन आपकी श्वास मानो आपसे कह रही होती है— “मैं दिन-रात तुम्हारे भीतर प्रवाहित होती रहती हूँ। यदि तुम मुझ पर थोड़ा-सा ध्यान दे दो, तो मैं तुम्हें प्रसन्न रखूँगी, तुम्हारी आत्मा को ऊर्जावान व प्रफुल्लित रखूँगी और तुम्हारी जीवन-ऊर्जा को जीवंत बनाए रखूँगी।”

 

आज दुनिया भर में करोड़ों लोगों ने सरल श्वास तकनीकों और ध्यान (Meditation) को अपनाया है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। उदाहरण के लिए, ‘सुदर्शन क्रिया’ ने अनेक लोगों को निराशा और चिंता से उबरने में सहायता की है। ये तकनीकें हमें अपने मन का स्वामी बनना सिखाती हैं, न कि अपने ही मन का शिकार बने रहना।

Smit Machchhar: जिस पायलट ने आसमान में टाली तबाही, उसे नेतन्याहू का आया खास न्योता; कैप्टन स्मित संग PM मोदी भी होंगे साथ!

Captain Smit Machchhar: फ्लाईदुबई विमान में हुए हाई-स्टेक्स मिड-एयर हमले के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर से खास बातचीत की। इस दौरान नेतन्याहू ने संकट की घड़ी में कैप्टन मच्छर के अदम्य साहस और सूझबूझ की जमकर सराहना की। उन्होंने कैप्टन मच्छर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने का औपचारिक न्योता भी दिया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से शनिवार (3 अक्तूबर) रात फोन पर बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया कि हमले से पहले को-पायलट ने प्रार्थना करने की इच्छा जताई थी। उसका सम्मान करते हुए वह दूसरी ओर मुड़ गए थे।

मच्छार ने बताया कि कुछ मिनट बाद उन्हें सिर के पीछे जोरदार प्रहार महसूस हुआ और इसके बाद उन पर लगातार हमले किए गए। नेतन्याहू ने उनसे कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों में उनके साहस और संयम बनाए रखने की क्षमता से वह हैरान हैं। उन्होंने कहा, “आपने इतनी सारी जानें बचाईं… आपने दुनिया की आत्मा को बचाया।”

उन्होंने कहा, “मैं आपको और मेरे प्रिय मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हमारे अगले स्वतंत्रता दिवस पर जश्न की मशाल जलाने के लिए आमंत्रित करना चाहता हूं। आप भारत और इज़राइल के बहादुर लोगों के सच्चे हीरो हैं। आप पूरी दुनिया के हीरो हैं। मैं आपके जल्द और पूरी तरह से ठीक होने की कामना करता हूं।”

नेतन्याहू ने आगे कहा, “आम तौर पर यह सम्मान इज़राइली नागरिकों को ही दिया जाता है। लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले में इजरायल के सभी नागरिक आपका स्वागत करेंगे। इसलिए हमें उम्मीद है कि आप जल्द ही इजरायल आएंगे… मैं आपको यहां फिर से देखने के लिए उत्सुक हूं। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए मुझे लगता है कि यह यात्रा यादगार और ऐतिहासिक होगी।”

कॉकपिट में अचानक हुआ हमला

कैप्टन स्मित मच्छार ने नेतन्याहू को उस खौफनाक घटना के बारे में बताया, जब फ्लाईदुबई की उड़ान सामान्य रूप से आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान उनके को-पायलट ने प्रार्थना करने की अनुमति मांगी। मच्छार ने बताया कि स्थानीय क्रू सदस्यों के लिए यह सामान्य बात थी, इसलिए उन्होंने पेशेवर रवैया अपनाते हुए अपना ध्यान उड़ान पर बनाए रखा। लेकिन करीब चार-पांच मिनट बाद उनके सिर के पीछे जोरदार हमला हुआ।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद विमान में कोई गंभीर तकनीकी खराबी हुई है। लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि कॉकपिट के अंदर ही उन पर हमला किया जा रहा है। हमले के बाद उनकी आंखों के सामने धुंध छाने लगी और वह बुरी तरह भ्रमित हो गए। इसी दौरान विमान तेजी से नीचे की ओर जाने लगा। कॉकपिट के फर्श पर पड़े होने के बावजूद उन पर लगातार वार किए जाते रहे।

‘अगर दरवाजा नहीं खोलता तो मेरी मौत हो जाती’

कैप्टन मच्छर ने बताया कि उस वक्त उन्हें एहसास हुआ कि विमान को बचाने का एकमात्र रास्ता कॉकपिट का दरवाजा खोलना था। उन्होंने अपनी बची हुई ताकत जुटाई और दरवाजे की तरफ बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “मेरे अंदर बस एक आखिरी लड़ाई बाकी थी। आप इसे निजी लड़ाई कहें या लोगों के लिए लड़ाई। लेकिन मैंने सोचा कि अगर मैंने ऐसा नहीं किया तो मैं मर जाऊंगा। इसके बाद मैंने अपनी पूरी ताकत लगाई और दरवाजे की तरफ गया और उसे खोल दिया।”

नेतन्याहू ने पूछा- सुरक्षित कॉकपिट का दरवाजा कैसे खोला?

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार से पूछा कि आखिर इतनी गंभीर स्थिति में उन्होंने कॉकपिट का सुरक्षित दरवाजा कैसे खोला? इस पर मच्छार ने कॉकपिट डोर की पूरी कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि बाहर से कॉकपिट में एंट्री के लिए सिक्योरिटी कोड की जरूरत होती है।

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स्मित ने बताया कि विमान के अंदर मौजूद क्रू को उस समय प्रवेश करने से रोका गया था। हालांकि, कॉकपिट के अंदर की तरफ से दरवाजा एक सामान्य मैनुअल टर्न-नॉब के जरिए खोला जा सकता है। इसी व्यवस्था का फायदा उठाते हुए कैप्टन मच्छार ने अपनी जान जोखिम में डालकर दरवाजा खोला और विमान को एक संभावित बड़ी त्रासदी से बचाने की कोशिश की।

यह बातचीत फ्लाईदुबई विमान में हुई उस भयावह घटना के बाद हुई है, जिसमें कॉकपिट के भीतर हिंसा के बावजूद कैप्टन मच्छार ने कंट्रोल बनाए रखा और विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा के लिए आखिरी क्षण तक संघर्ष किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कैप्टन स्मित मच्छार के लिए ‘अशोक चक्र’ की मांग की है।

कल का मौसम 4 October: रविवार को इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी! IMD ने जारी किया ये अलर्ट

Weather forecast for October 4: मौसम विभाग ने कल यानी 4 अक्टूबर के लिए वेदर का लेटेस्ट बुलेटिन जारी कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 24 घंटे के दौरान दक्षिण भारत के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बिगड़ सकता है। केरल और माहे तथा तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। वहीं, तमिलनाडु में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने का भी अलर्ट है।

IMD बुलेटिन के मुताबिक, दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में कल बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में बिजली चमकने की संभावना बनी हुई है। बता दें कि भारत में जून से सितंबर के बीच इस साल 87.4 प्रतिशत बारिश हुई है। यह 2001 के बाद मानसून के मौसम में चौथी सबसे कम बारिश है।

केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश की चेतावनी

  • मौसम विभाग ने चार अक्टूबर को केरल एवं माहे और तमिलनाडु, पुडुचेरी तथा कराईकल में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की आशंका जताई है। बारिश के दौरान स्थानीय स्तर पर जलभराव और यातायात प्रभावित होने जैसी स्थिति बन सकती है।

तमिलनाडु में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

  • IMD के मुताबिक, रविवार को तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ स्थानों पर बिजली चमकने और गरज के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
  • लोगों को मौसम खराब होने के दौरान खुले इलाकों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

आंध्र प्रदेश और केरल में भी आंधी-बारिश का अलर्ट

  • आंध्र प्रदेश तथा केरल और माहे में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
  • आंध्र प्रदेश में कुछ इलाकों में तेज सतही हवाएं चलने की भी आशंका है।

पूर्वोत्तर राज्यों में बिजली गिरने का खतरा

  • मौसम विभाग ने असम और मेघालय, साथ ही नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी कुछ स्थानों पर गरज के साथ बिजली चमकने की चेतावनी जारी की है।
  • ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे जाने से बचने की सलाह दी जाती है।

कोंकण-गोवा में गर्म और उमस भरा मौसम

  • दूसरी ओर, कोंकण और गोवा में कुछ स्थानों पर गर्म और उमस भरा मौसम बने रहने की संभावना है। दिन के समय उमस के कारण लोगों को परेशानी महसूस हो सकती है।
  • IMD की ओर से जारी बुलेटिन में मछुआरों के लिए किसी तरह की चेतावनी जारी नहीं की गई है।

2001 के बाद मानसून के दौरान चौथी बार सबसे कम बारिश 

भारत में जून से सितंबर के बीच इस साल 87.4 प्रतिशत बारिश हुई, जो 2001 के बाद मानसून के मौसम में चौथी सबसे कम बारिश है। IMD ने अपने मासिक पूर्वानुमान में कहा कि इस मानसून में बारिश की कमी का एक प्रमुख कारण प्रशांत क्षेत्र में जून में उभरी अल नीनो की स्थिति थी, जो उसके बाद से मजबूत होती गई। आईएमडी ने कहा कि फिलहाल अल नीनो की स्थिति मजबूत है। इसके मार्च 2027 तक बने रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, इस मानसून देश में 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जबकि सामान्य बारिश 868.6 मिलीमीटर होती है। यह सामान्य से 13 प्रतिशत कम है।

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IMD के महानिदेशक मौसम विज्ञान डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने एक बयान में कहा कि यदि कम दबाव की प्रणालियों के कारण अतिरिक्त बारिश नहीं हुई होती तो देश में बारिश की कमी और अधिक हो सकती थी। उन्होंने कहा कि इस मौसम में 14 कम दबाव की प्रणालियां बनीं और कुल 77 दिन कम दबाव की प्रणालियां सक्रिय रहीं। जबकि सामान्य तौर पर यह अवधि 57 दिन होती है। मानसून की वापसी के बारे में महापात्र ने कहा कि अब तक पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पूरी दिल्ली से मानसून की वापसी हो चुकी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों से भी मानसून लौट चुका है।

फेमिनिस्‍ट औरतों को एक तख़्ती पर मर्दों के लिए यह भी लिखना चाहिए

फेमिनिस्‍ट औरतों को एक तख़्ती पर मर्दों के लिए यह भी लिखना चाहिए

Feminist

आख़िरकार औरतों ने मर्दों पर कविताएं लिखीं, भले वे बहुत बेहूदा और ख़राब ही क्यों न थीं!

औरतों ने वो काम कर दिखाया जो मर्द ख़ुद अपने लिए नहीं कर सका। अब किसी औरत से मैं चाहता हूं कि वो मर्द के पसीने पर पसीने से भीगी हुई कोई कविता लिखेगी।

मैं चाहता हूं कि एक तख्ती पर यह भी लिखा जाना चाहिए कि कैसे मर्दों ने घर बनाए। खेत उगाये। फ़सल उगाई। बाग़ लगाए और बागों में फूल उगाए। भले तोड़कर नहीं ला सके, पर कैसे औरतों को उनके लिए चांद- तारे तोड़ लाने के ख़्वाब दिखाए?

लिखो कि मर्दों ने तुमसे वो भी कहा जो वो नहीं कर सकते थे!

एक तख्ती पर लिखो कि कैसे मर्दों ने औरतों को सुंदर कहा, लिखो कि जब औरतों को यकीन नहीं हुआ कि वे सुंदर हैं तो उसने उनके लिए शीशे भी बना डाले।

औरतों को चाहिए कि एक तख्ती पर वो लिखे कि कैसे मर्द दफ़्तर के किसी कोने में ता-उम्र एक वक्त सिर्फ़ ठंडी रोटियां खाता रहा?

औरतों! यह भी लिखो कि वो कितना उदास दिखता है जब अकेले- अकेले खाना खाता है?

लिखो कि कैसे मर्द फोन करते- करते यह सोचकर रुक जाता है कि अभी वो सो रही होगी।

एक तख्ती पर यह भी लिखो कि जब वो बारिश में भीगकर घर लौटता है तो कैसे उसकी देह का एक हिस्सा सड़क के कीचड़ में बहकर चला जाता है? कैसे गर्म सड़कों पर धूप हमेशा के लिए उसका रंग चुरा लेती है?

यह भी लिखो कि कैसे वो सर्दियों में अपनी हड्डियां बेचकर घर लौटता रहा?

लिखो कि मर्द अक्सर अपने घर के लिए ही जल्दी घर लौटता है। एक तख्ती पर यह भी तो लिखो कि कई बार औरतों की वजह से ही वो घर नहीं लौटाता!

लिखो कि ज़्यादातर मर्दों ने सबसे पहले बेटियां ही क्यों पैदा करना चाही?

औरतों! साहस करो, एक तख्ती पर यह भी लिखो कि तुम्हारा भाई और बाप भी एक मर्द है।

लिखो कि आख़िर क्यों ज़्यादातर दोस्तियां मर्द ही निभाते रहे?

यह भी तो लिखो कि वो तभी रोता है जब उसके आसपास कोई नहीं होता और तभी हंसता है जब सभी उसके साथ होते हैं।

कुछ पड़ताल यह भी करो कि मर्द किसी के मरने पर भी दहाड़ मारकर क्यों नहीं रोता?

लिखो कि जो प्रेम में रो पड़ता है, वो श्मशानों में पत्थर क्यों हो जाता है?

पता करो, मर्द क्यों चाहता है कि मरे हुए मर्दों की आत्माएं हमेशा के लिए मुक्त हो जाए?

एक तख्ती पर लिखो कि तमाम मृत्युओं का बोझ वो कहां रखता होगा?

एक तख्ती पर लिखो कि क्यों वो ईश्वर के खिलाफ़ हर सुबह फिर से पैदा होकर उठ खड़ा हो जाता है?

एकआध तख्तियों पर यह भी लिखना चाहिए कि क्यों सबसे ज़्यादा उसकी पीठ और तलवों में छाले पड़ते हैं?
एक तख्ती पर मर्द की उदासी का भी ज़िक्र करो तो जानें!

लिखो कि ज़िंदगी के तमाम रंज ओ ग़म के बावजूद मर्द ने देवता क्यों नहीं बनना चाहा?

यह भी लिखो कि मर्द की देह आखिर थकती क्यों नहीं?

एक तख्ती पर लिखो कि एक बार जाने के बाद उसकी आत्मा वापस लौटना क्यों नहीं चाहती?

‘आपके साहस पर UAE को गर्व है’; Flydubai के ‘हीरो’ भारतीय पायलट स्मित मच्छार से मिले दुबई के क्राउन प्रिंस, कैप्टन की बहादुरी के हुए कायल

Dubai Crown Prince met Smit Machchhar: फ्लाईदुबई फ्लाइट के ‘हीरो’ भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार से दुबई के क्राउन प्रिंस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के उप प्रधानमंत्री हमदान बिन मोहम्मद अल मकतूम ने शनिवार (3 अक्टूबर) को मुलाकात की। इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए अल मकतूम ने भारतीय हीरो की जमकर तारीफ की है। मच्छार ने उस समय असाधारण साहस और सूझबूझ का परिचय दिया था, जब उनके ओमानी को-पायलट ने फ्लाईदुबई के प्लेन को उड़ान के दौरान उन पर चाकू से हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छर ने विमान को सुरक्षित रखने और यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।

क्राउन प्रिंस ने अस्पताल में मच्छर से मुलाकात की, जहां वह हमले के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। मुलाकात के बाद हमदान बिन मोहम्मद ने कहा कि कैप्टन मच्छर ने साहस, जिम्मेदारी और मानव जीवन के प्रति देखभाल की सर्वोच्च भावना का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि UAE के नेतृत्व और देश की ओर से मच्छर को पूरा सम्मान और प्रशंसा दी जाती है।

‘हमें गर्व है कि वह हमारी टीम का हिस्सा हैं’

दुबई के क्राउन प्रिंस ने कैप्टन मच्छर की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि वह UAE की टीम का हिस्सा हैं और अब वह देश की कहानी का भी हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि मच्छर का साहस उस भावना को दर्शाता है, जिसके लिए UAE जाना जाता है करुणा, शांति और मानव जीवन की रक्षा…। 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 के कॉकपिट में हुई हाथापाई के दौरान वे घायल हो गए थे।

बोइंग 737 मैक्स 8 विमान दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से तेल अवीव जा रहा था, तभी उसे सऊदी अरब के तबुक की ओर मोड़ दिया गया। शेख हमदान ने आतंकी घटना के दौरान यात्रियों की सुरक्षा के लिए मच्छार की हिम्मत, जिम्मेदारी की भावना और बहादूरी की तारीफ की। शेख हमदान ने कहा कि स्मित मच्छार ने बेहद हिम्मत, जिम्मेदारी और लोगों की जान की परवाह दिखाई। उन्होंने UAE के नेतृत्व की ओर से भी पायलट की तारीफ की और उन्हें देश के लिए गर्व का जरिया बताया।

UAE के राष्ट्रपति के सलाहकार ने की स्मित मच्छार की प्रशंसा

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति के एक वरिष्ठ सलाहकार ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की शुक्रवार को प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके साहसिक कदमों ने एक गंभीर आतंकवादी घटना के दौरान बड़ी दुर्घटना को होने से रोक दिया। ‘गल्फ न्यूज’ के अनुसार, यूएई के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गर्गाश ने X पर लिखा, “फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट स्मित मच्छार अत्यधिक प्रशंसा के पात्र हैं। उन्होंने एक गंभीर आतंकवादी घटना और संभावित बड़ी त्रासदी का सामना करते हुए साहस और जिम्मेदारी का परिचय दिया।”

गर्गाश ने एक पोस्ट में कहा, “सबसे कठिन परिस्थितियों में दिखाई गई उनकी पेशेवर दक्षता और नैतिक दृढ़ता उन्हें सच्चा नायक बनाती है।” उन्होंने कहा कि भविष्य में चरमपंथ और आतंकवाद की संभावित घटनाओं से निपटने के लिए सतर्कता जरूरी है। उन्होंने साथ ही इस हमले को लेकर साजिश के सिद्धांतों को बढ़ावा देने के खिलाफ आगाह किया। फ्लाईदुबई का विमान सऊदी अरब के तबुक में उतरा था। वहां एक अस्पताल में प्राथमिक जांच के बाद मच्छार को आगे के इलाज के लिए अबू धाबी ले जाया गया।

34 हजार फीट की ऊंचाई पर हुआ था हमला

यह घटना फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई थी। विमान दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इजरायल के तेल अवीव जा रहा था। विमान में करीब 180 लोग सवार थे। बताया गया है कि विमान जब सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र के ऊपर करीब 34,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था, तभी ओमानी नागरिक कट्टरपंथी को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया।

हमले में कैप्टन गंभीर रूप से घायल हो गए। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने स्थिति को संभालने और विमान में सवार लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाई। वह फ्लाइट के कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे जिससे यात्रियों को हमलावर को काबू में करने का मौका मिला। विमान में 174 यात्री सवार थे। स्मिट की वजह से विमान सुरक्षित रूप से सऊदी अरब में उतरा, जहां अधिकारियों ने को-पायलट को हिरासत में ले लिया।

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मुश्किल हालात में बचाई यात्रियों की जान

हमले के बाद विमान में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई थी। इसके बावजूद कैप्टन मच्छार ने कॉकपिट को सुरक्षित करने और विमान पर कंट्रोल बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में विमान की सऊदी अरब में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। इस घटना के बाद UAE समेत कई देशों की एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। UAE के अधिकारियों ने कैप्टन मच्छर के साहस और पेशेवर रवैये की सार्वजनिक रूप से सराहना की है।

मच्छार ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि उन्होंने ठान लिया था कि वह विमान में सवार लोगों की जान नहीं जाने देंगे। हवा में को-पायलट के हमले के बाद भी उनमें जितनी भी ताकत बची थी, उसी के सहारे उन्होंने विमान को सुरक्षित बचा लिया। पीएम मोदी ने यूएई के एक अस्पताल में भर्ती मच्छार से फोन पर बात की।

रानी दुर्गावती जयंती 2026: स्वाभिमान के लिए सीने में घोंप ली थी कटार, जानें गोंडवाना की महान महारानी के अमर बलिदान की कहानी

रानी दुर्गावती जयंती 2026: स्वाभिमान के लिए सीने में घोंप ली थी कटार, जानें गोंडवाना की महान महारानी के अमर बलिदान की कहानी

Learn story of immortal sacrifice of great Queen Durgavati of Gondwana

Birth Anniversary of Heroic Queen Durgavati 2026: स्वाभिमान, साहस और सुशासन का अमर प्रतीक भारत के इतिहास में कई वीरांगनाओं ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, किंतु गोंडवाना की महारानी दुर्गावती का व्यक्तित्व और कृतित्व अद्वितीय है। प्रति वर्ष 5 अक्टूबर को मनाई जाने वाली रानी दुर्गावती जयंती केवल एक ऐतिहासिक स्मरण उत्सव नहीं, बल्कि उस भारतीय नारी शक्ति का जयघोष है जिसने साम्राज्यवादी शक्तियों के सामने कभी भी अपना शीश नहीं झुकाया। आइए जानते हैं वीरांगना महारानी दुर्गावती के अदम्‍य साहस, बलिदान और सुशासन की अमर कहानी विस्‍तार से… 

 

चंदेल और गोंड राजवंशों की एकजुटता

महारानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को महोबा के प्रख्यात चंदेल राजवंश में हुआ था। ये वही महान राजवंश है जिसने विश्वप्रसिद्ध खजुराहो के मंदिरों का निर्माण कराया। महारानी दुर्गावती के पिता राजा शालिवाहन थे। दुर्गावती का विवाह गोंडवाना (गढ़-मंडला) साम्राज्य के राजा संग्राम शाह के प्रतापी पुत्र दलपत शाह से हुआ। इस विवाह ने उत्तर भारत की 2 विशाल शक्तियों को एक सूत्र में बांध दिया।

 

जब महारानी दुर्गावती ने खुद संभाली गोंडवाना की बागडोर

विवाह के कुछ ही वर्षों पश्चात राजा दलपत शाह का असमय निधन हो गया। उस समय उनका पुत्र वीर नारायण मात्र पांच वर्ष का बालक था। साम्राज्य पर संकट के बादल मंडराते देख रानी ने हताश होने के बजाय गोंडवाना की बागडोर स्वयं अपने हाथों में ली और अपने पुत्र को सिंहासन पर बैठाकर उसकी संरक्षिका बनीं।

 

गोंडवाना का स्वर्णिम युग एवं जनहितकारी सुशासन

महारानी दुर्गावती केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि एक अत्यंत दूरदर्शी और कुशल प्रशासिका भी थीं। उनके शासनकाल को गोंडवाना साम्राज्य का स्वर्णिम काल कहा जाता है। रानी के न्यायप्रिय और पारदर्शी शासन में गढ़-मंडला राज्य इतना समृद्ध हो गया था कि प्रजा अपना कर (टैक्स) स्वर्ण मुद्राओं में चुकाया करती थी।

 

जल प्रबंधन और वास्तुकला

महारानी दुर्गावती ने राज्य में कृषि और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अनेक विशाल तालाबों, बावडियों और मंदिरों का निर्माण कराया। जबलपुर का प्रसिद्ध ‘रनिताल’, ‘चेरीताल’ और अपनी दासी के नाम पर बनवाया गया ‘आधारताल’ आज भी उनकी दूरदर्शिता के जीवंत प्रमाण हैं।

 

महारानी दुर्गावती का सशक्त सैन्य बल

महारानी दुर्गावती ने एक विशाल और अनुशासित सेना का गठन किया, जिसमें पैदल सैनिकों, घुड़सवारों और प्रशिक्षित हाथियों का बड़ा बेड़ा शामिल था। महारानी दुर्गावती स्वयं अस्त्र-शस्त्र चलाने में निपुण थीं और अक्सर सफेद हाथी पर सवार होकर सैन्य टुकड़ियों का नेतृत्व करती थीं।

 

मुग़ल आक्रामकता के विरुद्ध अदम्य शौर्य

अकबर की साम्राज्यवादी नीति के तहत जब मुग़ल सेनापति आसफ़ ख़ां ने गोंडवाना की अपार धन-संपदा और समृद्धि को हड़पने के लिए आक्रमण किया, तो रानी ने अधीनता स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। जबलपुर के समीप स्थित ‘नारई नाले’ के निकट मुग़ल सेना और गोंडवाना के सैनिकों के बीच भीषण युद्ध हुआ।

 

रानी दुर्गावती ने रणनीतिक कौशल का परिचय देते हुए मुग़ल सेना को कई बार पीछे हटने पर मजबूर कर दिया और पहले दिन की लड़ाई में मुग़लों के छक्के छुड़ा दिए। युद्ध भूमि में रानी के युवा पुत्र राजकुमार वीर नारायण ने भी अभूतपूर्व वीरता दिखाई।

 

मातृभूमि के लिए दिया सर्वोच्च बलिदान

युद्ध के अंतिम चरण में रानी दुर्गावती को 2 तीर लगे, एक गर्दन में और दूसरा आंख के पास। रानी समझ गईं कि अब मूर्छित होना या बंदी बनना तय है। मुग़लों के हाथों बंदी बनकर अपने स्वाभिमान से समझौता करने के बजाय, उन्होंने अपनी ही कटार निकालकर अपने वक्षस्थल में घोंप ली और मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की।

 

महारानी दुर्गावती जयंती का सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व

महारानी दुर्गावती की जयंती आज की आधुनिक नारियों को यह संदेश देती है कि महिलाएं केवल परिवार की संरक्षक ही नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र की रक्षक और कुशल प्रशासिका बनने में पूर्णतः सक्षम हैं। जबलपुर के पास स्थित ‘बरेला’ गांव में जहां रानी ने अपने प्राण त्यागे थे, आज भी उनकी समाधि स्थित है। यह स्थान देशप्रेमी नागरिकों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल के समान है।

Capt Smit Machchhar: सलमान खान, संजय दत्त से लेकर रणवीर सिंह तक, कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी के कायल हुए बॉलीवुड स्टार्स

Capt Smit Machchhar: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हवा में हुई डरावनी घटना के बाद कैप्टन स्मित मच्छार हिम्मत की मिसाल बनकर उभरे हैं। उनके काम की हर तरफ तारीफ हो रही है, जिसमें कई भारतीय एक्टर और बॉलीवुड सेलिब्रिटी भी शामिल हैं। आर माधवन, अनन्या पांडे, जाह्नवी कपूर, विजय देवरकोंडा, रवि किशन, परेश रावल, रवीना टंडन, सोनम कपूर और कंगना रनौत जैसे लोगों ने कैप्टन की बहादुरी और सूझबूझ की खुलकर तारीफ की है।

भारतीय सेलिब्रिटी ने स्मित मच्छर को ‘असली हीरो’ कहा

इस घटना पर प्रतिक्रिया देने वाले पहले स्टार्स में आर माधवन शामिल थे। पायलट के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट को शेयर करते हुए एक्टर ने लिखा, “एक असली हीरो के जल्द ठीक होने की प्रार्थना कर रहा हूं।” विजय देवरकोंडा ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “भगवान आपकी रक्षा करे और आप पर कृपा बनाए रखे, कैप्टन। आपने जिस स्थिति का सामना किया और जो किया, वह अविश्वसनीय है। उस फ्लाइट में मौजूद बाकी सभी लोगों के साथ भी।” रश्मिका मंदाना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज में लिखा, “क्या हिम्मत है। अपनी जान बचाने की लड़ाई लड़ते हुए भी अपने आस-पास के सभी लोगों की जान के बारे में सोचना। मेरे पास शब्द नहीं हैं… आपके लिए हिम्मत और जल्द ठीक होने की कामना करती हूं। कैप्टन स्मित। हमें आप पर बहुत गर्व है।”

एक्टर-नेता रवि किशन ने पायलट को “अपने काम के प्रति अटूट निष्ठा, अदम्य साहस और असाधारण समझदारी” की मिसाल बताया और कहा कि उनके काम गर्व और प्रेरणा का स्रोत हैं। संजय दत्त ने कहा, “कैप्टन स्मित मच्छार को दिल से सलाम। इतने बड़े डर के माहौल में भी आपने इतनी सारी जिंदगियों को बचाने की हिम्मत दिखाई। आपके जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।”

परेश रावल ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए 1994 की फिल्म ‘क्रांतिवीर’ के नाना पाटेकर के मशहूर डायलॉग का जिक्र किया। मच्छार के सरनेम का मज़ा लेते हुए रावल ने लिखा, “नाना पाटेकर का मशहूर डायलॉग याद आ रहा है- एक मच्छर आदमी को…!”

अनन्या पांडे, जाह्नवी कपूर, रवीना टंडन, सोनम कपूर और शरवरी ने मच्छार को सलाम किया और उन्हें “असली हीरो” कहा। कंगना रनौत ने भी उन्हें सपोर्ट दिया है और मच्छार के उस खुलासे का जिक्र किया कि संकट के समय उन्होंने हनुमान जी की प्रार्थना की थी।

शमिता शेट्टी, रिद्धिमा कपूर साहनी और शेफ कुणाल कपूर भी उन हस्तियों में शामिल थे जिन्होंने समर्थन के पोस्ट साझा किए। सलमान खान ने अपने खास संदेश में अपना मशहूर डायलॉग “इट्स डन ब्रो” कहा, जबकि रणवीर सिंह ने मच्छार को “कैप्टन करेजियस” (साहसी कैप्टन) कहा।

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कैप्टन स्मित मच्छार के साथ क्या हुआ?

घटना 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुई। इजराइली अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार, जब विमान सऊदी अरब के ऊपर उड़ रहा था, तब मच्छार के ओमान के को-पायलट ने कथित तौर पर कॉकपिट के अंदर उन पर हमला किया और चाकू से हमला किया। स्थिति गंभीर हो गई क्योंकि विमान 30 सेकंड से भी कम समय में लगभग 14,000 फीट नीचे गिर गया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छार कॉकपिट के दरवाजे का रिलीज मैकेनिज्म चालू करने और उसे खोलने में कामयाब रहे।

इस कदम से केबिन क्रू और यात्रियों को कॉकपिट में घुसने और हमलावर पर काबू पाने में मदद मिली। यात्रियों के तौर पर यात्रा कर रहे फ्लाईदुबई के दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने फिर विमान को नियंत्रित करने में मदद की। प्लेन का रास्ता बदला गया और उसे सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।

मच्छार को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। वे अपनी चोटों से उबर रहे हैं। 2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीडियो कॉल में उन्होंने उन डरावने पलों का जिक्र किया और बताया कि दरवाजा खोलने में कामयाब होने से पहले ही उन्हें पता चल गया था कि विमान नीचे गिर रहा है।

मोदी ने पायलट स्मित मच्छार से बात की

नई दिल्ली। फ्लाईदुबई की इजराइल जा रही उड़ान में 174 लोगों की जान बचाने वाले भारत के जांबाज पायलट से शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बात की। पायलट स्मित मच्छार का अभी सऊदी अरब में इलाज चल रहा है। मोदी ने उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। करीब नौ मिनट की इस बातचीत में मोदी ने स्मित की जम कर तारीफ की। उन्होंने पहले स्मित मच्छार के परिवार के लोगों से भी बात की थी।

गौरतलब है कि स्मित ने बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रहे विमान की हाइजैकिंग नाकाम की थी। ओमानी को पायलट ने उन्हें कॉकपिट में चाकू मार दिया था फिर भी स्मित ने प्लेन क्रैश नहीं होने दिया। उन्होंने न सिर्फ हाईजैक का अलर्ट भेजा, बल्कि कॉकपिट का दरवाजा भी खोल दिया, जिससे लोगों ने हमलावर पायलट को काबू में किया।

बहरहाल, शुक्रवार को बातचीत में मोदी ने स्मित से कहा, ‘पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा था और आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर रहा था। आपके साहस और सूझबूझ से कई लोगों की जान बची’। बातचीत के दौरान स्मित ने कहा, ‘मुझे पता था कि यह आखिरी मौका है। दरवाजा वहीं था और मैंने उसे खोल दिया। मैं मुश्किल समय में हनुमान चालीसा पढ़ता हूं और उस समय भी पढ़ रहा था। मुझे पता है कि भगवान ने ही हमें बचाया’।

बातचीत के दौरान मोदी ने कहा, ‘आपने इतना बड़ा काम किया है कि देश का हर नागरिक और दुनिया के लोग आपको देखना और आपसे बात करना चाहते हैं। आपने हनुमान चालीसा के बारे में जो बताया, उसके लिए मैं आपकी मां गीताबेन को प्रणाम करूंगा कि उन्होंने आपको ऐसे संस्कार दिए। मैं आपके पिता भूपेंद्रभाई को भी प्रणाम करूंगा’। मोदी ने कहा, ‘कल जब मेरी सोनलबेन से बात हुई तो मैं हैरान रह गया। वे इतनी शांति और हिम्मत से बात कर रही थीं। मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि ऐसी परिस्थिति में वे इतनी सहजता से बात कर पाएंगी’।

‘हनुमान चालीसा का कर रहा था पाठ, सबको मरने नहीं दे सकता था…’ स्मित मच्छार ने PM मोदी को सुनाई डरावने वक्त की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाई दुबई के कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल पर बात की। फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव फ्लाइट में को-पायलट के हमले में भारतीय स्मित मच्छार घायल हो गए हैं। पीएम से बातचीत के दौरान स्मित काफी इमोशनल हो गए। पीएम मोदी ने पायलट की हिम्मत और धैर्य की तारीफ की। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभर के लोग उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं पीएम से बात करते हुए स्मित मच्छार ने बताया कि कैसे उन्होंने मुश्किल वक्त में संयम बनाए रखा।

पीएम से बात हुए इमोशनल हुए कैप्टन

PM मोदी के सामने घटना को याद करते हुए मच्छार इमोशनल हो गए और कहा कि, वह उस मुश्किल वक्त में वह हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे। कैप्टन के लिए हनुमान चालीसा मुश्किल वक्त में हिम्मत देने का सहारा बनी। पीएम से बात करते हुए कैप्टन स्मित मच्छार ने कहा, वह उनके सबसे बड़े आदर्श हैं और उनसे बात करना उनके लिए बहुत खास है। मच्छार ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें प्रधानमंत्री से सीधे बात करने का मौका मिलेगा। पीएम से बातचीत के दौरान स्मित मच्छार काफी भावुक थे।

‘हनुमान चालीसा पढ़ता हूं’

मच्छार ने पीएम से कहा, “मुझे बहुत चोटें आईं, लेकिन मैंने खुद से कहा कि मुझे उठना होगा और कुछ करना होगा। उस समय, मैंने खुद को धक्का देकर कॉकपिट का दरवाजा खोला।” पीएम मोदी ने मच्छार से बातचीत के दौरान कहा कि, भारत को अपने उन लोगों पर गर्व है, जो किसी की जान लेने के बजाय दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान तक जोखिम में डालने का साहस रखते हैं। मच्छार ने बताया कि ‘जब मैं मुश्किल में होता हूं तो हनुमान चालीसा पढ़ता हूं’

मुश्किल हालत का किया सामना

मच्छार ने बताया कि, जब भी वह मुश्किल में होते हैं, तो हनुमान चालीसा पढ़ते हैं। फ्लाईदुबई विमान की घटना के दौरान भी उन्होंने ऐसा ही किया। उनके को-पायलट ने कॉकपिट में उन पर हमला कर दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद मच्छार ने हिम्मत नहीं छोड़ी और हालात को संभालने की कोशिश करते रहे। उन्होंने चोट लगने के बाद काफी कोशिश करके कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद केबिन क्रू और यात्रियों ने आगे आकर स्थिति को काबू में किया। फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई इस घटना के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित रूप से इमरजेंसी लैंड कराया गया। राहत की बात थी कि विमान में सवार सभी 174 लोगों की जान बच गई।

25 अक्टूबर से मुंबई एयरपोर्ट का टर्मिनल 1 बंद, नहीं मिलेगी कोई फ्लाइट्स, आखिर क्यों हुआ ऐसा?