जल बोर्ड टेंडर घोटाले में बड़ा एक्शन, AAP नेता सत्येंद्र जैन गिरफ्तार, 1.52 करोड़ की रिश्वत का आरोप

दिल्ली के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों को एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जुड़े टेंडरों में कथित गड़बड़ी और हेरफेर के मामले में की गई है। सत्येंद्र जैन के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय, पूर्व कॉन्ट्रैक्ट सलाहकार अंकित श्रीवास्तव, एएन एंटरप्राइजेज के मालिक नागेंद्र यादव, यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजा कुमार कुर्रा और सृजनहार के मालिक पंकज वर्मा को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।

यह मामला डायरेक्टोरेट ऑफ विजिलेंस की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। शिकायत में दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को बेहतर बनाने और अपग्रेड करने के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर बड़े स्तर पर गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में कथित तौर पर बदलाव किए गए और कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। एसीबी इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ कर रही है और टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी पूरी जानकारी की जांच की जा रही है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ केस

एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 7ए, 9 और 13 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420, 409, 418 और 120-बी भी लगाई गई हैं।

टेंडर की शर्तों में हेरफेर का आरोप

एसीबी का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड के टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें और नियम शामिल किए गए, जिनसे एक खास कंपनी को फायदा पहुंच सकता था। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन शर्तों से यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। एसीबी का कहना है कि टेंडर की शर्तों ने दूसरी कंपनियों के लिए मुकाबले का मौका सीमित कर दिया और एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ मिला।

जांच में टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी कई कथित अनियमितताएं भी सामने आई हैं। इनमें प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट का नहीं किया जाना, इस्तेमाल होने वाली तकनीक या फिल्टर मीडिया को लेकर ऐसी शर्तें रखना जिनसे दूसरी कंपनियों की भागीदारी सीमित हो सकती थी, साफ किए गए पानी की गुणवत्ता के लिए जरूरी मानक तय नहीं करना और बाद में टेंडर की तकनीकी शर्तों में बदलाव करना शामिल है। एसीबी अब इन सभी आरोपों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर और किसके निर्देश पर हुआ।

एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने कहा कि टेंडर की शर्तों में किए गए कथित बदलावों से सरकारी खजाने पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ा। एजेंसी के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच में प्राइवेट कंपनियों के लोगों, सरकारी कर्मचारियों और बिचौलियों के बीच सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) प्रोजेक्ट से जुड़े टेंडर की शर्तों, उनमें किए गए बदलाव और दूसरे दस्तावेजों को लेकर बातचीत के सबूत मिले हैं। एसीबी का कहना है कि बातचीत में जिन कई शर्तों और दस्तावेजों का जिक्र था, उन्हें बाद में दिल्ली जल बोर्ड की ओर से जारी किए गए टेंडर में शामिल कर लिया गया। जांच एजेंसी को शक है कि प्राइवेट कंपनियों और सरकारी अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत हुई थी। इसका मकसद एक खास तकनीक देने वाली कंपनी के पक्ष में टेंडर की शर्तों को प्रभावित करना था।

पूर्व सीईओ को 1.52 करोड़ रुपये की रिश्वत देने का आरोप

एसीबी ने आरोप लगाया है कि सृजनहार और एएन एंटरप्राइजेज जैसी बीच की कंपनियों के जरिए कमीशन या रिश्वत के तौर पर पैसों का लेन-देन किया गया। एजेंसी के मुताबिक, वित्तीय जांच में पता चला कि यूरोटेक से कथित तौर पर जुड़ी कंपनियों से आरोपी नागेंद्र यादव की कंपनी में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी। एसीबी अब इन पैसों के लेन-देन और टेंडर प्रक्रिया के बीच संबंध की जांच कर रही है। एसीबी का यह भी आरोप है कि इस पूरे मामले में दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय को कथित तौर पर 1.52 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई थी।

एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने आरोप लगाया है कि बाद में यह रकम दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय और उनके कुछ रिश्तेदारों के बैंक खातों में भेजी गई।एसीबी ने अपने बयान में कहा कि जांच के दौरान पता चला है कि उस समय दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ रहे उदित प्रकाश राय को एएन एंटरप्राइजेज के जरिए बैंकिंग चैनल से करीब 1.52 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत मिली। एजेंसी के मुताबिक, यह रकम राय के अलावा उनके कुछ रिश्तेदारों के बैंक खातों में भी ट्रांसफर की गई थी।

जांच एजेंसी का आरोप है कि बाद में इस पैसे का इस्तेमाल अचल संपत्ति खरीदने के लिए किया गया। एसीबी का यह भी कहना है कि एएन एंटरप्राइजेज के जरिए भेजी गई रकम कथित तौर पर तकनीक उपलब्ध कराने वाली कंपनी यूरोटेक से जुड़ी थी। एसीबी ने बताया कि वह इस मामले में पैसों के पूरे लेन-देन की कड़ी यानी मनी ट्रेल की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि कथित भ्रष्टाचार से हासिल रकम कहां-कहां इस्तेमाल हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

Tempsens Instruments IPO: खुलने से पहले 56% पर पहुंचा GMP, 20 अगस्त से लगा सकेंगे पैसा

Tempsens Instruments IPO: थर्मल इंजीनियरिंग और स्पेशलाइज्ड केबल बनाने वाली कंपनी Tempsens Instruments का IPO 20 अगस्त को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। इश्यू खुलने से पहले ही ग्रे मार्केट में इसे लेकर जबरदस्त उत्साह दिख रहा है। Investorgain के मुताबिक, कंपनी का GMP ₹168 पहुंच गया है। यानी अपर प्राइस बैंड के मुकाबले करीब 56% प्रीमियम का संकेत मिल रहा है। वहीं IPO Watch ने करीब 51.33% GMP बताया है।

कंपनी इस IPO के जरिए ₹650 करोड़ जुटाना चाहती है। एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अगस्त को खुलेगी, जबकि रिटेल निवेशक 20 से 24 अगस्त तक आवेदन कर सकेंगे। कंपनी के शेयर 28 अगस्त को BSE और NSE पर लिस्ट होने की संभावना है।

IPO की जरूरी बातें

इश्यू साइज₹650 करोड़
प्राइस बैंड
₹285-300 प्रति शेयर

एंकर बिडिंग19 अगस्त
सब्सक्रिप्शन20 से 24 अगस्त
संभावित लिस्टिंग
28 अगस्त (BSE और NSE)

₹468 पर हो सकती है लिस्टिंग

Tempsens ने IPO का प्राइस बैंड ₹285 से ₹300 प्रति शेयर तय किया है। अगर मौजूदा ₹168 का GMP बना रहता है, तो शेयर की संभावित लिस्टिंग करीब ₹468 पर हो सकती है।

इस हिसाब से प्रति शेयर करीब ₹168 का संभावित फायदा बनता है। हालांकि, यह सिर्फ ग्रे मार्केट का संकेत है। असली लिस्टिंग प्राइस बाजार के सेंटीमेंट और मांग पर तय होगा।

जुटाए गए पैसे का कहां होगा इस्तेमाल?

Tempsens IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अपने कारोबार के विस्तार में करेगी। इसमें इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और स्पेशलाइज्ड केबल बिजनेस में पूंजीगत निवेश शामिल है। इसके अलावा कंपनी कुछ कर्ज भी चुकाएगी और बाकी रकम सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों में खर्च करेगी।

Tempsens क्या करती है?

1990 में शुरू हुई Tempsens Instruments थर्मल इंजीनियरिंग और स्पेशलाइज्ड केबल बनाने वाली कंपनी है। कंपनी इंडस्ट्री के लिए कस्टमाइज्ड टेम्परेचर सेंसर, इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और स्पेशलाइज्ड केबल तैयार करती है।

इसके पोर्टफोलियो में कॉन्टैक्ट और नॉन-कॉन्टैक्ट दोनों तरह के टेम्परेचर सेंसर शामिल हैं। कंपनी अलग-अलग औद्योगिक सेक्टर के लिए जरूरत के हिसाब से सॉल्यूशंस भी देती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

2 साल में 513 वीडियो बनाए और खर्च किए 9.76 लाख पर कमाई हुई सिर्फ 1 लाख की! एंफ्लूएंसर ने बताया कंटेंट क्रिएशन का कड़वा सच

सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाकर कमाई करना आज काफी लोगों को पसंद आ रहा है। लेकिन एक कंटेट बनाने के बीच काफी मेहनत और पैसे भी लगते हैं। हाल ही में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की पोस्ट सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। पोस्ट में इन्फ्लुएंसर ने दो साल की कमाई और खर्च की जानकारी दी है। शेयर किए गए पोस्ट के मुताबिक, इन्फ्लुएंसर ने कंटेंट तैयार करने में लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन इसके बदले खास कमाई नहीं हो सकी। इस पूरे खर्च में सबसे ज्यादा पैसा वीडियो एडिटिंग पर खर्च हुआ। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट काफी वायरल हो रहा है।

कंटेंट के लिए खर्च किए 9.76 लाख

नेहा गुप्ता ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है। पोस्ट में शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक, कंटेंट की एडिटिंग पर उन्होंने बड़ी रकम खर्च की। लंबे वीडियो की एडिटिंग में करीब 84 हजार रुपये लगे, जबकि शॉर्ट वीडियो और रील्स के लिए करीब 7.28 लाख रुपये खर्च हुए। इस तरह सिर्फ एडिटिंग का कुल खर्च करीब 8.11 लाख रुपये रहा। गुप्ता ने कंटेंट तैयार करने के लिए जरूरी उपकरणों पर भी करीब 1.65 लाख रुपये खर्च किए। इसमें लगभग 1 लाख रुपये का iPhone भी शामिल है। एडिटिंग और उपकरणों को मिलाकर देखा जाए तो दो साल में उनका कंटेंट बनाने का कुल खर्च करीब 9.76 लाख रुपये पहुंच गया।

अब तक हुई 1 लाख की कमाई

बताया जा रहा कि, गुप्ता ने करीब चार-पांच महीने पहले पेड कोलेबोरेशन शुरू किए थे और अब तक लगभग 1 लाख रुपये की कमाई की है। वहीं, कंटेंट बनाने में उनका खर्च करीब 9.76 लाख रुपये रहा। इस तरह खर्च और कमाई के बीच करीब 8.76 लाख रुपये का अंतर है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद कंटेंट क्रिएटर के तौर पर करियर बनाने की चुनौतियों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। 2 साल के दौरान नेहा ने कुल 513 रील बनाई।

लोगों ने किया कमेंट

एक यूजर ने कहा कि गुप्ता पेड कोलेबोरेशन से कमाई शुरू कर चुकी हैं, इसलिए आगे वह अपना खर्च निकाल सकती हैं। वहीं, दूसरे यूजर ने माना कि ये निवेश भविष्य में फायदेमंद हो सकता है, लेकिन सफलता आसान नहीं है। एक यूजर ने कमेंट किया, “मेरा यकीन करो, यह उतना आसान नहीं है जितना दिखता है।” उन्होंने कहा कि किसी क्रिएटर की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह अपनी स्ट्रैटेजी को कितनी अच्छी तरह लागू करता है।

एक अन्य यूजर ने कहा, “क्रिएटर इकॉनमी बाहर से भले ही ग्लैमरस लगती हो, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि कंटेंट क्रिएशन को एक फायदे वाले बिजनेस में बदलना कितना मुश्किल है।”

सोशल मीडिया पर अक्सर क्रिएटर्स की चमकदार जिंदगी, शानदार वीडियो, ब्रांड डील और बढ़ते फॉलोअर्स ही नजर आते हैं। लेकिन इसके पीछे कंटेंट तैयार करने में होने वाला खर्च दिखाई नहीं देता। कमाई शुरू होने से पहले वीडियो बनाने, एडिटिंग और दूसरे जरूरी सामान पर काफी पैसा खर्च हो सकता है।

दोस्त-रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने से पहले ठीक से सोच लें, नहीं तो बाद में बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं

किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने का फैसला जल्दबाजी में नहीं करें। इस बारे में बगैर सोचे फैसला लेने से आप बाद में मुश्किल में फंस सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन के गारंटर की कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। कई लोग सोचते हैं कि लोन का गारंटर बनने का मतलब सिर्फ डॉक्युमेंट पर हस्ताक्षर करना है। लेकिन, यह सच नहीं है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

लोन के रीपेमेंट में डिफॉल्ट पर गारंटर मुश्किल में पड़ सकता है

अगर लोन लेने वाला व्यक्ति बैंक से लिया गया पैसा नहीं चुकाता है तो उस पैसे को चुकाने की जिम्मेदारी गारंटर की होती है। इसका मतलब है कि गारंटर बनने से व्यक्ति के फाइनेंशियल हेल्थ के लिए रिस्क हो सकता है। इतना ही नहीं, लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने की स्थिति में गारंटर की क्रेडिट प्रोफाइल पर भी असर पड़ता है।

बैंक लोन देने से पहले अपने पैसे की पूरी सुरक्षा चाहता है

एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन का गारंटर बनाने के पीछे बैंक का मकसद अपने पैसे की सुरक्षा है। बैंक लोन देने से पहले अपने पैसे को डूबने से बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाता है। इसलिए लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने की स्थिति में पहले वह लोन लेने वाले व्यक्ति से इसकी वजह पूछता है। अगर लोन लेने वाले व्यक्ति से संपर्क नहीं होता है तो वह गारंटर से संपर्क करता है।

लोन पर डिफॉल्ट की स्थिति में गारंटर को भी बैंक भेजता है नोटिस

लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने पर बैंक पहले ग्राहक को नोटिस भेजता है। लगातार तीन ईएमआई का पेमेंट नहीं करने पर बैंक ग्राहक को रजिस्टर्ड नोटिस भेजता है। लगातार चार ईएमआई का पेमेंट नहीं करने पर बैंक बैंक ग्राहक और गारंटर दोनों को नोटिस भेजता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बैंक के पास ग्राहक यानी लोन लेने वाले व्यक्ति और गारंटर के खिलाफ एक साथ कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार होता है।

पेमेंट में डिफॉल्ट का असर गारंटर के क्रेडिट प्रोफाइल पर भी पड़ता है

किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने के बाद अगर लोन का रीपेमेंट बंद हो जाता है तो इसका खराब असर गारंटर के क्रेडिट स्कोर पर भी पड़ता है। इसका मतलब है कि इससे गारंटर को खुद के लिए लोन लेने में दिक्कत आ सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन का गारंटर बनने से पहले आपको ठीक तरह से सोच समझ लेना चाहिए।

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व्यक्ति की वित्तीय स्थिति की पूरी जानकारी होने पर ही बनें गारंटर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपको लोन का गारंटर तभी बनना चाहिए, जब लोन लेने वाला व्यक्ति आपका बहुत करीबी है। उदाहरण के लिए पत्नी, भाई, बहन के लोन लेने पर आप गांरटर बन सकते हैं। इसकी वजह यह है कि आपको उनकी वित्तीय स्थिति और लोन चुकाने की क्षमता का पता होता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स लंबी अवधि वाले लोन का गारंटर बनने से बचने की सलाह देते हैं।

EPF Retirement Investment: रिटायरमेंट के बाद नियमित कमाई के लिए EPF का पैसा कहां लगाएं? एक्सपर्ट्स से जानिए

EPF Retirement Investment: कई सैलरीड कर्मचारी रिटायरमेंट के समय Employees’ Provident Fund (EPF) में काफी अच्छा खासा पासा जमा कर लेते हैं। लेकिन जैसे ही सैलरी बंद होती है, असली चुनौती शुरू होती है। सवाल यह होता है कि इस पैसे को लंबे समय तक कैसे चलाया जाए। क्या पूरा पैसा EPF में ही रखा जाए या महंगाई से बचने के लिए कुछ हिस्सा बाजार से जुड़े निवेश में लगाया जाए? कितना जोखिम लेना सही होगा? और एकमुश्त रकम से नियमित आय कैसे बनाई जाए?

अगर आपके पास EPF में बड़ा कॉर्पस है, तो रिटायरमेंट के बाद लक्ष्य सिर्फ पैसे को सुरक्षित रखना नहीं होता। जरूरी यह भी है कि यह पैसा आने वाले वर्षों में आपके खर्चों को पूरा करने के लिए काम करता रहे।

रिटायरमेंट के बाद EPF पर ब्याज कैसे मिलता है

रिटायरमेंट के बाद EPF पर मिलने वाले ब्याज को लेकर अक्सर उलझन रहती है। Kustodian Life के फाउंडर कुणाल काबरा बताते हैं कि EPF नियमों के मुताबिक- 58 साल को आधिकारिक रिटायरमेंट उम्र माना जाता है। रिटायरमेंट के बाद EPF में योगदान बंद हो जाता है, लेकिन बैलेंस पर कुछ समय तक ब्याज मिलता रहता है।

नियम दो तरह से लागू होते हैं। अगर कोई व्यक्ति 58 साल की उम्र में रिटायर होता है, तो उसके EPF बैलेंस पर तीन साल तक यानी 61 साल की उम्र तक ब्याज मिलता है। लेकिन अगर कोई 58 साल से पहले रिटायर होता है, तो उसे ब्याज सिर्फ 58 साल की उम्र तक ही मिलेगा। इसका मतलब है कि 58 साल एक तरह से कट-ऑफ उम्र है। तीन साल तक ब्याज मिलने का फायदा तभी मिलता है, जब रिटायरमेंट आधिकारिक उम्र यानी 58 साल पर हो।

इसे उदाहरण से समझिए

अब मान लीजिए कि अगर कोई 57 साल में रिटायर होता है, तो उसे ब्याज 60 साल तक मिलेगा। अगर कोई 55 साल में रिटायर होता है, तो ब्याज 58 साल तक मिलेगा। यहां तक कि अगर कोई 45 साल में रिटायर होता है, तब भी ब्याज केवल 58 साल तक ही मिलेगा।

आमतौर पर EPF पर मिलने वाली ब्याज दर करीब 8 प्रतिशत के आसपास रहती है, लेकिन यह ब्याज इन्हीं तय सीमाओं के भीतर मिलता है। यहां तक कि अगर कोई व्यक्ति 58 के बाद भी काम करता रहे, तब भी नए EPF योगदान आम तौर पर बंद हो जाते हैं। ब्याज 61 साल की उम्र तक ही सीमित रहता है। इसी वजह से एक्सपर्ट मानते हैं कि रिटायरमेंट के बाद केवल EPF पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता।

फिक्स्ड इनकम का इंतजाम जरूरी

रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित निवेश वाले हिस्से में भी केवल एक साधन पर निर्भर रहना सही नहीं माना जाता। Master Capital Services में वेल्थ मैनेजमेंट की AVP आकांक्षा शुक्ला कहती हैं कि EPF मुख्य रूप से बचत जमा करने का साधन है, न कि रिटायरमेंट में नियमित आय देने वाला साधन।

इसलिए रिटायरमेंट के बाद बचत को इस तरह व्यवस्थित करना जरूरी होता है कि उससे नियमित आय मिलती रहे। उदाहरण के तौर पर Senior Citizens’ Savings Scheme (SCSS) अपेक्षाकृत ज्यादा और स्थिर आय दे सकती है। वहीं बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट भी अपनी सादगी और तय रिटर्न की वजह से कई लोगों की पसंद बने रहते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो मासिक आय चाहते हैं।

इसके अलावा डेट म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में लचीलापन और लिक्विडिटी जोड़ सकते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनके जरिए जरूरत के मुताबिक समय-समय पर पैसे निकालना आसान हो सकता है।

रिटायरमेंट में भी इक्विटी की भूमिका

कई रिटायर्ड लोगों को लगता है कि इक्विटी से पूरी तरह दूर रहना सुरक्षित रहेगा। लेकिन ऐसा करने से एक और जोखिम पैदा हो सकता है। समय के साथ महंगाई आपकी खरीद क्षमता को कम कर सकती है।

आकांक्षा शुक्ला के मुताबिक, बढ़ती औसत उम्र और महंगाई को देखते हुए रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में इक्विटी की भूमिका अब धीरे धीरे जरूरी होती जा रही है।

आमतौर पर 15 से 20 प्रतिशत तक इक्विटी निवेश, खासकर लार्ज-कैप, इंडेक्स या हाइब्रिड फंड के जरिए, पोर्टफोलियो को लंबे समय में बढ़ने में मदद कर सकता है। यहां मकसद बहुत ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं होता, बल्कि यह सुनिश्चित करना होता है कि आपका कॉर्पस समय के साथ खत्म न हो।

सही एसेट एलोकेशन क्यों जरूरी है

रिटायरमेंट के बाद पोर्टफोलियो का संतुलन बहुत महत्वपूर्ण होता है। इससे एक तरफ नियमित आय मिलती रहती है और दूसरी तरफ महंगाई से भी बचाव होता है।

आकांक्षा शुक्ला के अनुसार अगर किसी के पास करीब 3 करोड़ रुपये का कॉर्पस है, तो निवेश को चार हिस्सों में बांटना एक सामान्य रणनीति हो सकती है। इसमें EPF और अन्य फिक्स्ड इनकम साधन, डेट निवेश, इक्विटी और एक छोटा इमरजेंसी फंड शामिल हो सकता है। असल में यह डिस्ट्रीब्यूशन कुछ इस तरह हो सकता है:

  • 40 से 50 प्रतिशत फिक्स्ड इनकम
  • 30 से 35 प्रतिशत डेट निवेश
  • 15 से 20 प्रतिशत इक्विटी
  • और एक छोटा इमरजेंसी फंड

एकमुश्त रकम से नियमित आय कैसे बनाएं

रिटायरमेंट के समय मिलने वाली बड़ी रकम को सही तरीके से निवेश करना जरूरी होता है। Arihant Capital Markets की CEO Wealth स्वाति जैन के अनुसार, पूरी रकम एक साथ निवेश करने की बजाय Systematic Transfer Plan (STP) का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसमें पैसा पहले कम जोखिम वाले डेट या लिक्विड फंड में रखा जाता है और फिर 6 से 12 महीनों के दौरान धीरे धीरे इक्विटी या हाइब्रिड फंड में ट्रांसफर किया जाता है। इससे बाजार के उतार चढ़ाव का जोखिम कम हो जाता है।

नियमित आय के लिए Systematic Withdrawal Plan (SWP) भी बेहतर तरीका हो सकता है। इसमें निवेश से तय अंतराल पर एक निश्चित रकम निकाली जाती है, जिससे नियमित कैश फ्लो बना रहता है।

एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि एक से दो साल के खर्च के बराबर रकम सुरक्षित निवेश में रखी जाए, ताकि बाजार गिरने के समय मजबूरी में पैसे निकालने की जरूरत न पड़े। इसके बाद SWP के जरिए नियमित आय बनाई जा सकती है।

रिटायरमेंट में सुरक्षित निकासी कितनी हो

स्वाति जैन के मुताबिक, इसके लिए बकेट रणनीति अपनाना इस्तेमाल हो सकता है। इसमें छोटे समय की जरूरतों के लिए डेट निवेश से SWP किया जाता है और लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए इक्विटी में निवेश रखा जाता है।

एक्सपर्ट्स आम तौर पर 4 से 5 प्रतिशत सालाना निकासी को सुरक्षित मानते हैं। यानी अगर किसी के पास 3 करोड़ रुपये का कॉर्पस है, तो वह सालाना लगभग 12 से 15 लाख रुपये निकाल सकता है। यह दर आम तौर पर 20 से 25 साल तक टिकाऊ मानी जाती है, बशर्ते पोर्टफोलियो संतुलित बना रहे। अगर शुरुआती वर्षों में इससे ज्यादा पैसा निकाला जाए, तो भविष्य में कॉर्पस जल्दी खत्म होने का खतरा बढ़ सकता है।

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5 मिनट नहाने की कीमत 1.30 लाख रुपये! ऑस्ट्रेलिया में रही रही भारतीय महिला को एक गलती पड़ गई भारी

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली एक भारतीय महिला के लिए सिर्फ पांच मिनट नहाना बहुत महंगा साबित हुआ। रोज की तरह नहाने गई महिला के कारण पूरी बिल्डिंग में फायर अलार्म बज गया। इसके बाद बिल्डिंग में रहने वाले लोगों को बाहर निकालना पड़ा और महिला पर 1,900 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का जुर्माना लगा। वामिका नाम की इस महिला ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस पूरी घटना के बारे में बताया। उसने कहा कि वह जल्दी-जल्दी नहा रही थी, तभी अचानक बिल्डिंग का फायर अलार्म बजने लगा। शुरुआत में उसे लगा कि शायद यह अलार्म की सामान्य जांच या ड्रिल है। उसे तुरंत समझ नहीं आया कि अलार्म को बिल्डिंग में असली आपात स्थिति के तौर पर लिया जा रहा है।

महिला ने नहीं चलाया एग्जॉस्ट, बज गया फायर अलार्म

बाद में उसे पता चला कि फायर अलार्म उसके नहाने की वजह से बजा था। यह जानकर वह खुद भी हैरान रह गई कि सिर्फ कुछ मिनट नहाने की वजह से मामला इतना गंभीर हो गया और उसे 1,900 डॉलर का भारी जुर्माना भरना पड़ा। क्लिप की शुरुआत में वामिका ने हैरानी जताते हुए कहा, “फायर अलार्म के लिए मुझ पर 1,800 डॉलर का जुर्माना लगाया गया। आखिर यह क्या हो रहा है?”उसने अलार्म बजने के बाद की पूरी घटना को कैमरे में रिकॉर्ड किया। जब बिल्डिंग से सभी लोगों को बाहर निकलने का अनाउंसमेंट किया गया, तो वह कुछ देर तक समझ नहीं पाई कि क्या सभी लोगों के लिए बाहर जाना जरूरी है।

करीब 25 मिनट बाद जब वह आखिरकार बिल्डिंग से नीचे आई, तब उसे पता चला कि यह कोई फायर अलार्म टेस्ट या ड्रिल नहीं थी। अलार्म वास्तव में उसकी वजह से बजा था और बिल्डिंग के लोगों को सुरक्षा के लिए बाहर निकाला गया था। जब वामिका नीचे पहुंची और लोगों को बता रही थी कि अलार्म बजने के समय वह नहा रही थी, तभी बिल्डिंग मैनेजर ने उससे पूछा कि क्या उसी समय वह नहा रही थी। इसके बाद वामिका को समझ आया कि फायर अलार्म उसी की वजह से बजा था।

 

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बाद में उसने बताया कि नहाते समय उसने बाथरूम का एग्जॉस्ट फैन चालू नहीं किया था। इसकी वजह से बाथरूम में काफी भाप जमा हो गई और भाप के कारण फायर अलार्म बज गया।वामिका ने इस पूरी घटना को मजाकिया अंदाज में बताते हुए कहा, “अगर खाना बनाने की वजह से अलार्म बजता तो शायद कम बेइज्जती होती। लेकिन नहाते-नहाते मैंने यह कैसे कर दिया?” वीडियो के आखिर में उसने कहा, “मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं हैं।”

वायरल हुआ वीडियो

वामिका ने पोस्ट के कैप्शन में बताया कि उसे टैक्स समेत कुल 1,900 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का जुर्माना भरना पड़ा। भारतीय रुपये में यह रकम करीब 1.30 लाख रुपये बैठती है।वामिका की इस घटना ने सोशल मीडिया पर लोगों को खूब हंसाया। कई यूजर्स ने जहां उसके साथ सहानुभूति जताई, वहीं कुछ लोगों ने मजेदार कमेंट भी किए। कुछ लोगों के मन में यह सवाल भी आया कि आखिर भाप की वजह से फायर अलार्म कैसे बज सकता है।

एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “असली जिंदगी में ‘गरीबी में आटा गीला’ वाली बात हो गई। बधाई हो बहन।” एक अन्य यूजर ने कहा, “इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है, लेकिन फिर भी यह काफी मजेदार है। हाहा।” वहीं, एक व्यक्ति ने सवाल किया, “आखिर यह हुआ कैसे? गर्म पानी या भाप से फायर अलार्म कैसे बज सकता है?” एक और यूजर ने महिला के पक्ष में लिखा, “शायद पहली बार ऐसा होने पर उन्हें तुमसे पैसे नहीं लेने चाहिए थे, जब तक कि यह बार-बार होने वाली बात न हो।”

Weather Update: अगले 48 घंटे भारी! यूपी, MP और झारखंड समेत इन राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, चक्रवाती सिस्टम हुआ एक्टिव

IMD Weather Bulletin: देश के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां प्रचंड रूप पकड़ने की वजह से भारी बारिश का दौर चल रहा है। आने वाले दिनों में भी इसमें राहत की उम्मीद नहीं दिख रही क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 18 अगस्त को जारी अपने वेदर बुलेटिन में चेतावनी दी है कि अगले 24 से 48 घंटे देश के कई राज्यों में भारी बारिश देखने को मिलेगी। झारखंड और उससे सटे गंगीय पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों पर बने डिप्रेशन (अवदाब) के असर से मौसम का मिजाज काफी आक्रामक हो गया है।

इसके चलते उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश, झारखंड और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश में बेहद भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी से उठा यह डिप्रेशन पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए झारखंड और आसपास के इलाकों में केंद्रित हो गया है। अगले 24 घंटों के दौरान इसके इसी दिशा में झारखंड और बिहार से होकर गुजरने और धीरे-धीरे कमजोर होकर वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया में बदलने की संभावना है। त्तर हरियाणा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पंजाब के ऊपर ऊपरी हवा का साइक्लॉनिक सर्कुलेशन बना हुआ है, जबकि मानसूनी ट्रफ भी अपने सामान्य स्थान पर सक्रिय है।

पिछले 24 घंटों में बदला मौसम का मिजाज

IMD के आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटों के दौरान देश के कई राज्यों में भारी बारिश देखने को मिली है। उत्तराखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 21 सेमी से अधिक की बेहद भारी बारिश दर्ज की गई है। वहीं छत्तीसगढ़, असम व मेघालय, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश में 12 से 20 सेमी की बहुत भारी बारिश हुई है। इसके अलावा कोंकण, मध्य महाराष्ट्र, त्रिपुरा, पूर्वी मध्य प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में भी 7 से 11 सेमी तक की भारी बारिश रिकॉर्ड की गई है।

दक्षिण-पूर्वी UP, MP और झारखंड में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी

मौसम प्रणालियों के प्रभाव से उत्तर भारत और मध्य भारत के मौसम में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 और 19 अगस्त को अलग-अलग जगहों पर बेहद मूसलाधार यानी अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। इसी तरह उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और झारखंड में 18 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट है।

उत्तर-पश्चिम भारत के अन्य क्षेत्रों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश में 18 अगस्त को, उत्तराखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 से 19 अगस्त के दौरान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 और 20 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पूर्वी राजस्थान में भी अलग-अलग दिनों में तेज बौछारों के साथ भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। उत्तराखंड में 18 से 24 अगस्त तक गरज और चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका बनी रहेगी।

मध्य भारत और ओडिशा-छत्तीसगढ़ में तेज हवाओं के साथ बरसेगी आफत

मध्य भारत में पूर्वी मध्य प्रदेश में 18 से 20 अगस्त तक और छत्तीसगढ़ में 18 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में 18 से 22 अगस्त के दौरान तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने का अनुमान है। पूर्वी भारत में झारखंड में 18 अगस्त को 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं।

इनकी स्पीड 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ओडिशा में 18 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश होगी। बिहार, गंगीय पश्चिम बंगाल, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 18 से 20 अगस्त के दौरान हल्की से मीडियम और कुछ जगहों पर भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने के आसार हैं।

पूर्वोत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत के राज्यों का हाल

पूर्वोत्तर भारत में असम और मेघालय में 18 अगस्त को बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 18 से 24 अगस्त तक लगातार भारी बारिश और बिजली चमकने का दौर जारी रहेगा। पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा में 18 से 24 अगस्त तक व्यापक बारिश होगी, जबकि मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी गरज-चमक देखने को मिलेगी।

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दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में तटीय कर्नाटक, केरल और माहे में 18 और 19 अगस्त को भारी बारिश का अनुमान है। इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तमिलनाडु और कर्नाटक के अलग अलग इलाकों में तेज सतही हवाएं और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

30 बच्चों से दुष्कर्म के दोषी पर ब्रिटेन-पाकिस्तान में विवाद:ब्रिटिश सरकार वापस PAK भेजने पर अड़ी, इस्लामाबाद ने दी चेतावनी

ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक यौन अपराधी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। शाबिर अहमद ब्रिटेन के कुख्यात ग्रूमिंग गैंग से जुड़ा हुआ है। उसे 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी पाया गया है। शाबिर मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला है लेकिन उसके पास ब्रिटिश नागरिकता है। अब ब्रिटेन शाबिर को पाकिस्तान भेजना चाहता है, लेकिन इस्लामाबाद ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि अगर शाबिर को रखने का दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों को वापस लेने, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर फिर से विचार कर सकता है। कौन है शाबिर अहमद? 73 वर्षीय शाबिर अहमद पाकिस्तान मूल का है। बच्चों के यौन शोषण मामले में उसे 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वह करीब 14 साल जेल में काट चुका है और हाल ही में रिहा हुआ है। ब्रिटेन उसकी नागरिकता समाप्त कर चुका है और अब उसे पाकिस्तान भेजने की कोशिश कर रहा है। हालांकि पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपना अधिकांश जीवन ब्रिटेन में बिताया, वहीं उसका पालन-पोषण हुआ और वहीं उसने अपराध किए, इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी ब्रिटेन को ही उठानी चाहिए। वीजा प्रतिबंध की खबरों से भी नाराज पाकिस्तान ब्रिटेन की कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान शाबिर अहमद को वापस लेने से इनकार करता है, तो ब्रिटिश सरकार पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा पर सख्ती कर सकती है। कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता घटाने की भी बात कही गई है। हालांकि, ब्रिटेन की ओर से इन कदमों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है। डेली टेलीग्राफ से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा कि अगर वीजा और आर्थिक मदद को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो इससे दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। शाबिर अहमद केस की टाइमलाइन 2012: 22 साल की जेल की सजा
ब्रिटेन की अदालत ने रोचडेल ग्रूमिंग गैंग मामले में शाबिर अहमद को 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी ठहराया। अदालत ने उसे 22 साल कैद की सजा सुनाई। 2016: ब्रिटिश नागरिकता खत्म
दोषी ठहराए जाने के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता समाप्त कर दी। जुलाई 2026: 14 साल बाद जेल से रिहाई
करीब 14 साल जेल में बिताने के बाद शाबिर अहमद को सख्त शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। उस पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, तय इलाके से बाहर न जाने और कई अन्य प्रतिबंध लगाए गए। जुलाई 2026: ब्रिटेन ने पाकिस्तान भेजने की कोशिश शुरू की
रिहाई के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद को पाकिस्तान भेजने के लिए इस्लामाबाद से बातचीत शुरू की। जुलाई 2026: पाकिस्तान ने लेने से इनकार किया
पाकिस्तान ने कहा कि वह शाबिर अहमद को स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उस पर दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों की वापसी, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर अपने रुख पर दोबारा विचार कर सकता है। ब्रिटेन-पाकिस्तान के बीच अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का समझौता ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 से एक समझौता है। इसके तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने की अनुमति नहीं है। इसमें मुख्य रूप से तीन तरह के लोग शामिल हैं: किसी व्यक्ति को पाकिस्तान वापस भेजने से पहले उसकी पहचान और नागरिकता की पुष्टि की जाती है। इसके बाद पाकिस्तान उसके लिए जरूरी यात्रा दस्तावेज जारी करता है और उसे वापस भेज दिया जाता है। इस समझौते में सिर्फ लोगों को वापस भेजना ही शामिल नहीं है। दोनों देश अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और संगठित अपराध से निपटने में भी एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। समझौते के बाद भी पाकिस्तान शाबिर को क्यों नहीं अपना रहा? इसकी वजह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि नागरिकता और कानून से जुड़े कई पेचीदा मुद्दे हैं। 1. पाकिस्तान का दावा- शाबिर उसका नागरिक नहीं ब्रिटेन ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता पहले ही खत्म कर दी थी। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता भी छोड़ दी थी। ऐसे में इस्लामाबाद का दावा है कि उसे पाकिस्तानी नागरिक नहीं मान सकता। 2. 2022 का समझौता हर मामले में लागू नहीं ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 में हुआ रिटर्न्स समझौते के तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। लेकिन किसी व्यक्ति को वापस भेजने से पहले उसकी राष्ट्रीयता और पहचान की पुष्टि करना जरूरी होता है। अगर पाकिस्तान यह मानने से इनकार कर दे कि संबंधित व्यक्ति उसका नागरिक है, तो उसे वापस भेजने की प्रक्रिया रुक सकती है। 3. ब्रिटेन का कानून भी अड़चन बना शाबिर अहमद का मामला दूसरे मामलों से अलग है। वह 1973 से पहले ब्रिटेन आ गया था। उस समय के कानून के तहत ऐसे कुछ लोगों को देश से बाहर भेजने पर रोक थी। इसलिए ब्रिटेन चाहकर भी उसे पाकिस्तान नहीं भेज सकता था। अब ब्रिटिश सरकार ने इस कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए कानून में बदलाव किया है। लेकिन इसके बाद भी शाबिर को पाकिस्तान तभी भेजा जा सकता है, जब पाकिस्तान उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हो। क्या 2022 का समझौता टूट सकता है? ब्रिटिश संसद में सरकार ने बताया है कि पाकिस्तान के साथ मौजूदा रिटर्न्स व्यवस्था के तहत पिछले साल करीब 1,300 ऐसे लोगों को पाकिस्तान भेजा गया था, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का अधिकार नहीं था। इनमें कई गंभीर अपराधों में दोषी लोग भी शामिल थे। यानी पाकिस्तान आम तौर पर अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार नहीं करता। शाबिर अहमद का मामला उसकी नागरिकता और कानूनी स्थिति की वजह से अलग माना जा रहा है। ग्रूमिंग गैंग क्या है जिससे जुड़ा है शबीर अहमद ग्रूमिंग गैंग ऐसे अपराधियों का गिरोह होता है, जो बच्चों को दोस्ती, प्यार, पैसे, उपहार या दूसरे लालच देकर अपने जाल में फंसाता है। इसके बाद उनका यौन शोषण करता है। इनमें से कई लड़कियां प्रेग्नेंट हुईं और उन्हें अबॉर्शन कराना पड़ा। कई लड़कियों ने अपने बच्चों को जन्म दिया, लेकिन वो इनके पिता का नाम तक नहीं जानती थीं। ये ग्रूमिंग गैंग्स पूरे ब्रिटेन में काम करते थे, लेकिन रोशडेल, रॉदरहैम और टेलफॉर्ड राज्यों में इन्होंने सबसे ज्यादा लड़कियों को फंसाया।