SBI Funds IPO Listing: 6% प्रीमियम पर शेयर लिस्ट, आईपीओ को तगड़ी बोली के बाद प्रीमियम लिस्टिंग

SBI Funds IPO Listing: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को भी निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 41 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹574 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹610.00 और NSE पर ₹613.30 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 6% से अधिक लिस्टिंग गेन (SBI Funds Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर BSE पर यह ₹622.80 (SBI Funds Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 8.50% मुनाफे में हैं। एंप्लॉयीज अधिक फायदे में हैं क्योंकि उन्हें हर शेयर ₹54 के डिस्काउंट पर मिला है।

SBI Funds IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

एसबीआई फंड्स का ₹9813 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 14-16 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 41.73 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 140.11 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 22.51 गुना खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.76 गुना, एंप्लॉयीज का हिस्सा 4.65 गुना और शेयरहोल्डर्स का हिस्सा 9.52 गुना भरा था।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ के तहत कोई नया शेयर नहीं जारी हुआ हैं बल्कि ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत ₹1 की फेस वैल्यू वाले 17,09,56,631 शेयरों की बिक्री हुई है। इसमें से 12,83,34,397 शेयर एसबीआई और 7,53,74,842 शेयर एमुंडी इंडिया होल्डिंग ने बेचे हैं। चूंकि यह इश्यू पीरी तरह से ऑफर फॉर सेल का था तो आईपीओ का पैसा कंपनी को नहीं मिला बल्कि शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स एसबीआई और एमुंडी इंडिया को मिला।

SBI Funds Management के बारे में

AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) के हिसाब से देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट एसबीआई म्यूचुअल फंड को मैनेज करती है। यह एसबीआई और एमुंडी का ज्वाइंट वेंचर है। यह इक्विटी फंड्स, डेट फंड्स, हाइब्रिड फंड्स, ईटीएफ और PMS (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज) जैसे निवेश प्रोडक्ट्स ऑफर करती है। 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक यह र्16.32 लाख करोड़ के एसेट्स मैनेज कर रही है जोकि म्यूचुअल फंड्स को कुल एयूएम का करीब 15.5% है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के हिसाब से इंडिविजुअल और इंस्टीट्यूशनल मिलाकर इसके 1.60 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। इसके पोर्टफोलियो में 126 म्यूचुअल फंड स्कीम्स हैं।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 21% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹3,067.38 करोड़ और टोटल इनकम भी इस दौरान 20% के सीएजीआर से उछलकर ₹4,976.11 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में ₹326.73 करोड़ पड़े थे।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP Calculator: 10 साल नहीं, 20 साल तक करें SIP… फर्क देखकर रह जाएंगे हैरान; समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP Calculator: हर महीने ₹1,000, ₹5,000 या ₹10,000 की SIP करना आसान लगता है। मुश्किल तब होती है, जब उसे लंबे समय तक जारी रखना पड़ता है। कई लोग 8-10 साल निवेश करने के बाद सोचते हैं कि अब काफी पैसा बन गया होगा। लेकिन असली खेल उसके बाद शुरू होता है।

दरअसल, SIP में सिर्फ आपका पैसा काम नहीं करता। समय भी आपके लिए कमाई करता है। यही वजह है कि 20 साल की SIP का नतीजा, 10 साल की SIP से सिर्फ दोगुना नहीं होता। फर्क कई लाख रुपये तक पहुंच जाता है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

12% रिटर्न मिले तो क्या होगा?

नीचे दिए गए आंकड़े इस आधार पर हैं कि आपने हर महीने तय रकम की SIP की और पूरे समय औसतन 12% सालाना रिटर्न मिला।

हर महीने SIP10 साल बाद फंड20 साल बाद फंड
₹1,000₹2.30 लाख₹9.99 लाख
₹5,000₹11.50 लाख₹49.95 लाख
₹10,000₹23.00 लाख₹99.90 लाख

नोट : ये रकम 12% रिटर्न पर अनुमानित हैं। वास्तविक रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

10 साल में पैसा चार गुना?

पहली नजर में लगता है कि 20 साल, 10 साल से सिर्फ दोगुना है। इसलिए पैसा भी दोगुना होना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं होता। मान लीजिए आपने हर महीने ₹10,000 की SIP शुरू की। 10 साल में आपका कुल निवेश होगा ₹12 लाख। फंड बनेगा करीब ₹23 लाख।

अगर आप यही SIP 10 साल और जारी रखते हैं, तो कुल निवेश ₹24 लाख होगा। लेकिन फंड पहुंच जाएगा करीब ₹1 करोड़। यानी आपने निवेश तो सिर्फ ₹12 लाख और बढ़ाया, लेकिन फंड में करीब ₹77 लाख की बढ़ोतरी हो गई। यही कंपाउंडिंग का कमाल है।

आम के पेड़ से समझिए हिसाब

मान लीजिए आपने अपने घर के आंगन में आम का पौधा लगाया। पहले कुछ साल वह सिर्फ बढ़ता है। फल बहुत कम देता है। कई बार लगता है कि मेहनत बेकार गई।

लेकिन जब पेड़ बड़ा हो जाता है, तो हर मौसम में भरपूर आम देता है। तब समझ आता है कि असली फायदा इंतजार करने वालों को मिला। SIP भी बिल्कुल ऐसी ही है। शुरुआती साल तैयारी के होते हैं। बाद के साल कमाई के।

जल्दी SIP बंद करना गलती

बहुत से लोग 8-10 साल बाद घर, कार या दूसरी जरूरत के लिए SIP बंद कर देते हैं। उन्हें लगता है कि अच्छा-खासा पैसा मिल गया। लेकिन ऐसा करके वे कंपाउंडिंग के सबसे ताकतवर दौर से बाहर निकल जाते हैं।

आपको हमेशा याद रखना चाहिए कि कंपाउंडिंग शुरुआत में धीमी दिखती है। लेकिन समय के साथ उसकी रफ्तार तेजी से बढ़ती है।

अगर ₹5,000 की SIP करें तो?

₹5,000 महीने की SIP में 10 साल बाद करीब ₹11.50 लाख का फंड बन सकता है।

अगर यही निवेश 20 साल तक जारी रखें, तो फंड करीब ₹49.95 लाख तक पहुंच सकता है। यानी सिर्फ समय बढ़ाने से फंड में करीब ₹38 लाख का अतिरिक्त इजाफा हो सकता है।

छोटी SIP से भी बड़ा फंड

कई लोग सोचते हैं कि ₹1,000 या ₹2,000 की SIP से क्या होगा।

लेकिन ₹1,000 महीने की SIP भी 20 साल में करीब ₹10 लाख तक पहुंच सकती है, अगर औसतन 12% सालाना रिटर्न मिले। यह रकम बच्चों की पढ़ाई, बाइक, कार की डाउन पेमेंट या किसी दूसरे बड़े लक्ष्य में अच्छी मदद कर सकती है।

निवेशकों के लिए क्या सबक है

SIP में सबसे बड़ी ताकत रकम नहीं, बल्कि समय होता है। अगर आप जल्दी शुरुआत करते हैं और बीच में निवेश नहीं रोकते, तो कंपाउंडिंग धीरे-धीरे आपके हक में काम करने लगती है।

इसलिए अगर आपकी SIP चल रही है और कोई बड़ी मजबूरी नहीं है, तो उसे 10 साल पर रोकने की बजाय 20 साल या उससे भी ज्यादा समय तक जारी रखने पर विचार करें। कई बार अतिरिक्त 10 साल ही आपके फंड को लाखों से करोड़ तक पहुंचाने का रास्ता बना देते हैं।

Market Correction vs SIP: मार्केट क्रैश का इंतजार पड़ सकता है भारी! जानें क्यों एक्सपर्ट्स दे रहे हैं हर महीने SIP की सलाह

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Market Correction vs SIP: मार्केट क्रैश का इंतजार पड़ सकता है भारी! जानें क्यों एक्सपर्ट्स दे रहे हैं हर महीने SIP की सलाह

Market Crash Timing vs SIP Strategy: हर निवेशक के मन में कभी न कभी यह विचार जरूर आता है कि ‘जब मार्केट गिरेगा, तब पैसा लगाऊंगा’। सुनने में यह रणनीति बहुत समझदारी भरी लगती है कम कीमत पर खरीदो और बंपर मुनाफा कमाओ। लेकिन शेयर बाजार की सबसे बड़ी हकीकत यह है कि बाजार कभी ढिंढोरा पीटकर नहीं गिरता और न ही बढ़ता है।

भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। ऐसे में निवेशकों के बीच एक पुरानी बहस फिर से छिड़ गई है क्या हर महीने SIP के जरिए निवेश करनी चाहिए, या फिर कैश बचाकर रखना चाहिए और बाजार में बड़ी गिरावट आने पर ही एकमुश्त पैसा लगाना चाहिए? आइए इसे समझते हैं।

बीते वक्त को देखना आसान है, बॉटम पकड़ना नामुमकिन

हर कोई चाहता है कि वह बाजार के बिल्कुल निचले स्तर यानी बॉटम पर शेयर या म्यूचुअल फंड खरीदे। लेकिन दिक्कत यह है कि जब बाजार गिर रहा होता है, तब कोई नहीं बता सकता कि बॉटम कहां है। बाजार कभी सीधी लकीर में नहीं चलता। अगर मार्केट 10% गिर चुका है, तो वहां से वह 10% और गिर सकता है या वहीं से रिकवरी शुरू कर सकता है।

‘परफेक्ट एंट्री पॉइंट’ के चक्कर में निवेशक अक्सर इस उम्मीद में बैठे रह जाते हैं कि कीमतें थोड़ी और गिरेंगी। नतीजा यह होता है कि जब तक बाजार में भरोसा लौटता है, तब तक मार्केट बहुत ऊपर निकल चुका होता है और निवेश का सही मौका हाथ से निकल जाता है।

एसआईपी क्यों है सबसे बेस्ट?

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह यह है कि यह बाजार को टाइम करने की टेंशन को पूरी तरह खत्म कर देता है। बाजार का सेंटिमेंट कैसा भी हो चाहे वह तेजी पर हो या मंदी पर आपकी तय रकम हर महीने खुद-ब-खुद निवेश हो जाती है।

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जब बाजार गिरता है, तो आपकी SIP को ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। जब बाजार चढ़ता है, तो कम यूनिट्स मिलती हैं। इससे आपकी खरीद की लागत खुद ही एवरेज हो जाती है। निवेशकों को रोज-रोज यह नहीं सोचना पड़ता कि आज निवेश करने का सही दिन है या नहीं।

कैश होल्ड करना गलत नहीं, पर यह रणनीति का हिस्सा हो

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हाथ में नकदी रखना हमेशा एक गलत फैसला होता है। अनुभवी और मझे हुए निवेशक हमेशा अपने पोर्टफोलियो में कुछ कैश रिजर्व रखते हैं। यह कैश किसी आगामी जरूरी खर्च या बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए होता है। कैश रखना आपकी वित्तीय रणनीति का एक हिस्सा होना चाहिए, न कि बाजार की हर छोटी-बड़ी भविष्यवाणी करने का कोई जुआ।

रिकवरी मिस करना पड़ सकता है बहुत महंगा

बाजार में सुधार आने या क्रैश होने का इंतजार करने का सबसे बड़ा रिस्क यह है कि बाजार हमेशा उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से रिकवर करता है। इतिहास गवाह है कि शेयर बाजार में सबसे बड़ी और सबसे तेज बढ़त अक्सर एक बहुत तेज गिरावट के तुरंत बाद आती है।

जो निवेशक पूरी स्पष्टता के इंतजार में बैठे रहते हैं, वे इस शुरुआती और सबसे कमाऊ उछाल को मिस कर देते हैं। इसलिए वित्तीय सलाहकार हमेशा सलाह देते हैं कि जब तक आपके पास कोई बहुत ठोस योजना न हो, केवल सुधार के भरोसे कैश लेकर न बैठें।

बैलेंस्ड अप्रोच ही दिलाएगी सफलता

लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए आपको SIP या कैश में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है, बल्कि दोनों का तालमेल बिठाना चाहिए:

लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए आपको SIP या कैश में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है, बल्कि दोनों का तालमेल बिठाना चाहिए:

कुल मिलाकर आपको बता दें कि बाजार को प्रेडिक्ट करना जितना आसान दिखता है, असल में उतना होता नहीं है। एक आम और लंबी अवधि के निवेशक के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि वह बाजार में कब एंट्री लेता है बल्कि असली चुनौती यह है कि वह हर परिस्थिति में बाजार में टिका रहता है और अपनी इन्वेस्टमेंट जर्नी को बिना रुके जारी रखता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Funds IPO GMP: कल बाजार में मचेगा तहलका? लिस्टिंग से ठीक पहले GMP में भारी उछाल! जानें कितना हो सकता है मुनाफा

SBI Funds Management IPO GMP Update: देश के सबसे बड़े म्यूचुअल फंड मैनेजर, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों की कल यानी मंगलवार, 21 जुलाई को घरेलू शेयर बाजार में एंट्री होने जा रही है। बाजार में कदम रखने से ठीक पहले ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयरों को लेकर जबर्दस्त उत्साह देखा जा रहा है और यह करीब 18 फीसदी के मजबूत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है।

यह आईपीओ सब्सक्रिप्शन के मामले में देश का पांचवां सबसे बड़ा आईपीओ बन चुका है। जिन निवेशकों ने इस आईपीओ में पैसा लगाया है, वे बेसब्री से कल सुबह की लिस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। आइए जानते हैं ग्रे मार्केट का ताजा हाल क्या है और संभावित लिस्टिंग प्राइस क्या हो सकती है।

देश का 5वां सबसे बड़ा आईपीओ, लगी थी बोलियों की झड़ी

₹9,813 करोड़ के इस विशाल आईपीओ को लेकर निवेशकों में गजब का क्रेज देखा गया। 14 जुलाई से 16 जुलाई तक खुले इस आईपीओ को रिकॉर्ड तोड़ रिस्पांस मिला था। यह आईपीओ कुल मिलाकर 41.66 गुना सब्सक्राइब हुआ था। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा रिकॉर्ड 140.11 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

आईपीओ से जुड़ी कुछ अन्य बड़ी बातें

₹545 से ₹574 के प्राइस बैंड वाला यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) था। इसके तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और अमुंडी इंडिया होल्डिंग (Amundi India Holding) ने मिलकर 20.37 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे हैं। चूंकि यह ओएफएस था, इसलिए आईपीओ से मिलने वाली पूरी रकम प्रमोटर्स के पास जाएगी, कंपनी को कोई फंड नहीं मिलेगा।

मार्केट लीडर है कंपनी

साल 1992 में स्थापित हुई यह कंपनी देश के सबसे बड़े म्यूचुअल फंड ‘एसबीआई म्यूचुअल फंड’ का इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट संभालती है। साल 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) करीब ₹16.32 लाख करोड़ था और भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में इसकी हिस्सेदारी 15.5 फीसदी की है।

ग्रे मार्केट में दमदार प्रदर्शन, 18% मुनाफे के संकेत

आईपीओ पर नजर रखने वाले प्रमुख प्लेटफॉर्म्स ‘इन्वेस्टरगेन’ और ‘आईपीओ वॉच’ के मुताबिक, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम ₹103 प्रति शेयर चल रहा है। इस जीएमपी के हिसाब से देखें तो आईपीओ के अपर प्राइस बैंड ₹574 के मुकाबले यह शेयर बाजार में ₹677 पर लिस्ट हो सकता है।

यानी कल पहले ही दिन निवेशकों को प्रति शेयर करीब 18% का तगड़ा लिस्टिंग गेन मिलने की उम्मीद है। कल सुबह 10 बजे जैसे ही बाजार खुलेगा, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह शेयर ग्रे मार्केट के अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए कोई नया रिकॉर्ड बनाता है या नहीं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: HDFC Bank, Cipla और PNB समेत इन स्टॉक्स पर फोकस, खास वजहों से तेज हलचल की उम्मीद

Stocks to Watch:  कच्चे तेल में उबाल पर वैश्विक बाजारों से मिले-जुले रुझान के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। एक कारोबारी दिन पहले 17 जुलाई को सेंसेक्स (Sensex) 964.58 प्वाइंट्स यानी 1.25% के उछाल के साथ 78,151.45 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 261.55 प्वाइंट्स यानी 1.09% की बढ़त के साथ 24,334.30 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है

इन कंपनियों के कारोबारी नतीजे पेश

Reliance Industries Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर रिलायंस इंडस्ट्रीज का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 6.1% बढ़कर ₹23,196 करोड़, ग्रास रेवेन्यू 24.5% उछलकर ₹3.4 लाख करोड़, ईबीआईटीडीए 10.1% बढ़कर ₹54,067 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन ईबीआईटीडीए मार्जिन 18% से 15.9% पर आ गया।

Jio Platforms Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 9.2% बढ़कर ₹7,764 करोड़, रेवेन्यू 11.8% उछलकर ₹39,173 करोड़, ईबीआईटीडीए 15.1% बढ़कर ₹20,865 करोड़ और मार्जिन 51.8% से 53.3% पर पहुंच गया।

HDFC Bank Q1 (Standalone YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एचडीएफसी बैंक का स्टैंडएलोन प्रॉफिट 5% बढ़कर ₹19,059.7 करोड़, NII (नेट इंटेरेस्ट इनकम) 6.7% बढ़कर ₹33,534 करोड़ पर पहुंच गया और प्रोविजंस एंड कंटिजेंसीज 78.8% गिरकर ₹3,059.8 करोड़ पर आ गया। तिमाही आधार पर बैंक का ग्रास एनपीए 1.15% से बढ़कर 1.17% तो नेट एनपीए 0.38% से उछलकर 0.41% पर पहुंच गया।

ICICI Bank Q1 (Standalone YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर आईसीआईसीआई बैंक का स्टैंडएलोन प्रॉफिट 15.9% बढ़कर ₹14,804.5 करोड़, NII (नेट इंटेरेस्ट इनकम) 12.7% बढ़कर ₹24,384.4 करोड़ पर पहुंच गया और प्रोविजंस एंड कंटिजेंसीज 30.5% गिरकर ₹1,260.5 करोड़ पर आ गया। तिमाही आधार पर बैंक का ग्रास एनपीए 1.40% से गिरकर 1.38% पर आ गया लेकिन नेट एनपीए 0.33% से उछलकर 0.35% पर पहुंच गया।

Kotak Mahindra Bank Q1 (Standalone YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर कोटक महिंद्रा बैंक का स्टैंडएलोन प्रॉफिट 25.6% बढ़कर ₹4,123 करोड़, NII (नेट इंटेरेस्ट इनकम) 9.2% चढ़कर ₹7,928.4 करोड़ पर पहुंच गया और प्रोविजंस एंड कंटिजेंसीज 44.7% गिरकर ₹668.1 करोड़ पर आ गया। तिमाही आधार पर बैंक का ग्रास एनपीए 1.20% से गिरकर 1.18% पर आ गया लेकिन नेट एनपीए 0.25% से उछलकर 0.27% पर पहुंच गया।

Axis Bank Q1 (Standalone YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एक्सिस बैंक का स्टैंडएलोन प्रॉफिट 22.5% बढ़कर ₹7,113.9 करोड़, NII (नेट इंटेरेस्ट इनकम) 8% चढ़कर ₹14,646.1 करोड़ पर पहुंच गया और प्रोविजंस एंड कंटिजेंसीज 43.7% गिरकर ₹2,222.5 करोड़ पर आ गया। तिमाही आधार पर बैंक का ग्रास एनपीए 1.23% से बढ़कर 1.28% और नेट एनपीए 0.37% से उछलकर 0.39% पर पहुंच गया।

Punjab National Bank Q1 (Standalone YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर पंजाब नेशनल बैंक का स्टैंडएलोन प्रॉफिट 213.6% बढ़कर ₹5,253.3 करोड़, NII (नेट इंटेरेस्ट इनकम) 2.1% चढ़कर ₹10,798.4 करोड़ और प्रोविजंस एंड कंटिजेंसीज 67.5% उछलकर ₹541.2 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान बैंक का टैक्स पर खर्च 66% घटकर ₹1,724.7 करोड़ पर आ गया। तिमाही आधार पर बैंक का ग्रास एनपीए 2.95% से घटकर 2.78% और नेट एनपीए 0.29% से फिसलकर 0.28% पर आ गया।

Oberoi Realty Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर ओबेराय रियल्टी का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 29% बढ़कर ₹543.5 करोड़ और रेवेन्यू 31.7% उछलकर ₹1,300.9 करोड़ पर पहुंच गया।

Stocks to Watch: इन स्टॉक्स पर भी रहेगी नजर

NATCO Pharma

नाटको फार्मा को अमेरिकी दवा नियामक एफडीए से ओलापारिब 100 mg और 150 mg टैबलेट के लिए टेंटेटिव अप्रूवल मिला है। ये टैबलेट एस्ट्राजेनेका फार्मा की RLD (रेफरेंस लिस्टेड ड्रग लिनपार्जा (Lynparza) टैबलेट की बायोइक्विवेलेंट हैं। यह टैबलेट नाटको बनाएगी औक अमेरिका में इसे एलेम्बिक फार्मा बेचेगी। इंडस्ट्री के सेल्स डेटा के अनुसार मार्च 2026 को खत्म होने वाले 12 महीनों में ओलापारिब टैबलेट की अमेरिका में अनुमानित बिक्री लगभग $140 करोड़ रही।

Samvardhana Motherson International

समवर्धन मदरसन इंटरनेशनल को जापान की अदालत से युताका गिकेन में 81% हिस्सेदारी और युताका गिकेन की सब्सिडियरी शिनिची कोग्यो कंपनी में 11% हिस्सेदारी खरीदने की मंज़ूरी मिल गई है। शिनिची में युताका गिकेन की 62% हिस्सेदारी है।

GAIL India

गेल (इंडिया) ने देश की लॉन्ग-टर्म रिसोर्स सिक्योरिटी को सपोर्ट करने के लिए अहम मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग करने के लिए खनिज विदेश इंडिया (KABIL) के साथ एक एमओयू किया है।

Aditya Birla Capital

आदित्य बिड़ला कैपिटल ने आदित्य बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस के इक्विटी शेयरों में राइट्स इश्यू के जरिए ₹484.5 करोड़ का निवेश किया है।

Sterlite Technologies

स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज की अमेरिकी सब्सिडियरी एसटीएल ऑप्टिकल कनेक्टिविटी ने अमेरिका की सबसे बड़ी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स में से एक के नेटवर्क पर फील्ड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अपना नया एडवांस्ड FTTH सॉल्यूशन CONCAT लॉन्च किया है।

Cipla

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने 13-17 जुलाई के बीच न्यूयॉर्क में सिप्ला की पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी इनवाजेन फार्मा की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में नियमित तौर पर होने वाली cGMP (करंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज) जांच की और आखिरी में एक ऑब्जर्वेशन के साथ फॉर्म 483 जारी किया।

Power Grid Corporation of India

पावर ग्रिड ने फतेहगढ़-II ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए सफल बोली लगाई है। इस प्रोजेक्ट में फतेहगढ़-II पावर स्टेशन पर दो सिंक्रोनस कंडेंसर और उनसे जुड़े बे (bays) को लगाने और चालू करने का काम है।

Force Motors

अमित प्रमोद जोशी ने निजी कारणों से फोर्स मोटर्स के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट के पद से इस्तीफा दे दिया है, जो 17 जुलाई से प्रभावी है।

SpiceJet

सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने स्पाइसजेट पर अपने फ्लाइट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न यानी भ्रामक डिजाइन प्रैक्टिस के इस्तेमाल पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है।

बल्क डील्स

Landmark Cars

हेलियोस म्यूचुअल फंड ने हर शेयर ₹520.28 के भाव पर लग्जरी कार रिटेलर लैंडमार्क कार्स के 2.45 लाख शेयर (0.59% हिस्सेदारी) ₹12.79 करोड़ में खरीदे।

ZF Commercial Vehicle Control Systems India

एक्सिस म्यूचुअल फंड ने जेडएफ कमर्शियल व्हीकल कंट्रोल सिस्टम्स इंडिया के 5.94 लाख शेयर (0.5% होल्डिंग) ₹138.4 करोड़ में ₹2,330.03 के भाव पर बेचे।

Updater Services

एसआईएस ने प्रति शेयर ₹193.71 के भाव पर अपडेटर सर्विसेज के 6.53 लाख शेयर (0.97% हिस्सेदारी) ₹12.66 करोड़ में और खरीदे। जून 2026 तक एसआईएस के पास कंपनी में पहले से ही 4.88% हिस्सेदारी थी। वहीं दूसरी तरफ हेज फंड ईस्ट ब्रिज कैपिटल मास्टर फंड I ने अपडेटर सर्विसेज में अपनी लगभग पूरी हिस्सेदारी बेच दी। फंड ने ₹15.8 करोड़ में 8.17 लाख शेयर ₹193.27 के भाव पर बेचे। जून 2026 तक फंड के पास कंपनी में 1.25% हिस्सेदारी (8.39 लाख शेयर) थी।

Rappid Valves India

एजिस इन्वेस्टमेंट फंड ने रैपिड वाल्व्स (इंडिया) के 2.06 लाख शेयर (3.97% हिस्सेदारी) ₹6.77 करोड़ में प्रति शेयर ₹328.4 के भाव पर खरीदे। वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र डिफेंस एंड एयरोस्पेस वेंचर फंड ने ₹323.7 के भाव पर रैपिड वाल्व्स के 1.45 लाख शेयर (2.79% होल्डिंग) ₹4.7 करोड़ में और अशोक कुमार धारीवाल ने प्रति शेयर ₹338 के भाव पर ₹1.25 करोड़ में 37,200 शेयर बेचे। मार्च 2026 तक महाराष्ट्र डिफेंस एंड एयरोस्पेस वेंचर फंड के पास रैपिड वाल्व्स में 5.58% हिस्सेदारी थी।

एक्स-डेट

आदित्य इन्फोटेक, एक्सेलरेटबीएस इंडिया, फेयरकेम ऑर्गेनिक्स, ग्रेफाइट इंडिया, हैप्पी फोर्जिंग्स, केपीआर मिल, एनडीआर ऑटो कंपोनेंट्स, नेलकास्ट, नेस्को, पोकरना, क्वेस्ट कैपिटल मार्केट्स और एसपीआर ऑटो टेक्नोलॉजीज के शेयर आज एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे तो सिम्प्लेक्स कास्टिंग्स के स्प्लिट की भी आज एक्स-डेट है।

F&O Ban

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Funds Listing Gain: IPO को ताबड़तोड़ बोली, अब लिस्टिंग का इंतजार, पहले दिन इतने मुनाफे की गुंजाइश

SBI Funds Listing Gain: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपाओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला। शेयर अलॉट हो चुके हैं और अब इसकी लिस्टिंग का इंतजार है। हर कैटेगरी के निवेशकों के धांसू रिस्पांस के बाद आईपीओ निवेशकों को शेयर ₹574 के भाव पर जारी हुए हैं। अब मंगलवार को मंगल होने की उम्मीद है क्योंकि ग्रे मार्केट से 16% से अधिक लिस्टिंग गेन के संकेत मिल रहे हैं। ग्रे मार्केट में इसके शेयर इश्यू प्राइस से ₹92.5 यानी 16.11% की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर हैं। इससे शेयरों की मजबूत लिस्टिंग के संकेत मिल रहे हैं।

हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। अब अलॉटमेंट की बात करें तो अगर आपने आईपीओ में बोल लगाई थी और अभी तक स्टेटस चेक नहीं किया है तो इसे या तो बीएसई की वेबसाइट पर या रजिस्ट्रार एमयूएफजी की वेबसाइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।

इश्यू टाइप ‘Equity’ चुनें। इश्यू नाम SBI Funds चुनें।

एप्लीकेशन नंबर या पैन भरें।

फिर I’m not a robot पर क्लिक करें।

सर्च पर क्लिक करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

रजिस्ट्रार की साइट पर ऐसे चेक करें स्टेटस

https://ipostatus.kfintech.com/, लिंक पर क्लिक करें।

सेलेक्ट आईपीओ पर क्लिक करके SBI Funds चुनें।

एप्लीकेशन नंबर, डीमैट अकाउंट या पैन में से कोई भी चुनें। फिर जो विकल्प चुना है, उसके मुताबिक डिटेल्स दें। जैसे कि पैन चुना है तो पैन भरें।

सबमिट करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

SBI Funds IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

एसबीआई फंड्स का ₹9813 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 14-16 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 41.73 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 140.11 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 22.51 गुना खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.76 गुना, एंप्लॉयीज का हिस्सा 4.65 गुना और शेयरहोल्डर्स का हिस्सा 9.52 गुना भरा था।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ के तहत कोई नया शेयर नहीं जारी हुआ हैं बल्कि ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत ₹1 की फेस वैल्यू वाले 17,09,56,631 शेयरों की बिक्री हुई है। इसमें से 12,83,34,397 शेयर एसबीआई और 7,53,74,842 शेयर एमुंडी इंडिया होल्डिंग ने बेचे हैं। चूंकि यह इश्यू पीरी तरह से ऑफर फॉर सेल का था तो आईपीओ का पैसा कंपनी को नहीं मिला बल्कि शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स एसबीआई और एमुंडी इंडिया को मिला।

SBI Funds के बारे में

AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) के हिसाब से देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट एसबीआई म्यूचुअल फंड को मैनेज करती है। यह एसबीआई और एमुंडी का ज्वाइंट वेंचर है। यह इक्विटी फंड्स, डेट फंड्स, हाइब्रिड फंड्स, ईटीएफ और PMS (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज) जैसे निवेश प्रोडक्ट्स ऑफर करती है। 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक यह र्16.32 लाख करोड़ के एसेट्स मैनेज कर रही है जोकि म्यूचुअल फंड्स को कुल एयूएम का करीब 15.5% है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के हिसाब से इंडिविजुअल और इंस्टीट्यूशनल मिलाकर इसके 1.60 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। इसके पोर्टफोलियो में 126 म्यूचुअल फंड स्कीम्स हैं।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 21% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹3,067.38 करोड़ और टोटल इनकम भी इस दौरान 20% के सीएजीआर से उछलकर ₹4,976.11 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में ₹326.73 करोड़ पड़े थे।

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कमाई तगड़ी पर बचत जीरो! क्या आप भी फंस चुके हैं ‘लाइफस्टाइल क्रीप’ के इस मायाजाल में? जानें बचने के 5 आसान उपाय

Financial Planning and Budgeting Tips: नौकरी में प्रमोशन होना, बंपर सैलरी हाइक मिलना या बिजनेस से होने वाली कमाई का बढ़ना हर किसी को एक सुखद अहसास देता है। इसे देखकर लगता है कि हमारे वित्तीय लक्ष्य बिल्कुल सही रास्ते पर हैं। इसके बावजूद, एक कड़वी हकीकत यह भी है कि समाज में ‘मोटी सैलरी’ कमाने वाले कई लोग भी महीने का अंत आते-आते पैसों की तंगी से जूझने लगते हैं।

असल में दिक्कत यह नहीं है कि वे हर महीने कितना कमा रहे हैं, बल्कि समस्या उस अंतर में है जो उनके बैंक खाते में आने वाले पैसे और चुपके से जेब से बाहर जाने वाले खर्चों के बीच होता है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज के दौर में ‘अफोर्डेबिलिटी’ का मतलब केवल यह नहीं है कि आप आज कोई चीज खरीद सकते हैं या नहीं, बल्कि इसका मतलब यह है कि क्या आप अपनी बचत को नुकसान पहुंचाए या बिना कर्ज लिए उसे लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं।

आइए जानते हैं कुछ ऐसे प्रैक्टिकल बजटिंग टिप्स, जो आपकी अच्छी सैलरी को असल मायने में आपकी ‘आर्थिक सुरक्षा’ में बदल सकते हैं।

1. CTC के भ्रम से बाहर निकलें, ‘इन-हैंड सैलरी’ से बनाएं बजट

ज्यादातर लोग अपने सालाना कॉस्ट-टू-कंपनी (CTC) या ग्रॉस सैलरी के हिसाब से अपने खर्चों की प्लानिंग करने की गलती कर बैठते हैं। सीटीसी का आंकड़ा नौकरी बदलते समय या सैलरी नेगोशिएशन के दौरान तो बहुत काम आता है, लेकिन घर का बजट चलाने में इससे कोई मदद नहीं मिलती।

आपको हमेशा इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि टैक्स (TDS), प्रोविडेंट फंड (PF) और अन्य कटौतियों के बाद हर महीने आपके बैंक अकाउंट में वास्तविक रूप से कितना पैसा क्रेडिट हो रहा है। अगर आप खाते में आने वाली रकम से बड़े आंकड़े पर अपना बजट तैयार करेंगे, तो महीने के आखिरी हफ्ते में निराशा ही हाथ लगेगी।

2. फिक्स्ड खर्चे बयां करते हैं आपके बजट का सच

अपने वित्तीय स्वास्थ्य को समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि आप उन खर्चों की एक लिस्ट बनाएं जिन्हें आप किसी भी कीमत पर टाल नहीं सकते। इसमें आपके घर का किराया या होम लोन की EMI, बच्चों की स्कूल फीस, इंश्योरेंस प्रीमियम, कार लोन, राशन का खर्च और बिजली-पानी के यूटिलिटी बिल शामिल होते हैं।

इन अनिवार्य खर्चों को अलग करने के बाद जो रकम बचती है, वही आपके बजट की असली ‘फ्लेक्सिबिलिटी’ तय करती है। इस एक्सरसाइज को करने के बाद बहुत से लोगों को यह देखकर हैरानी होती है कि अपनी मर्जी से खर्च करने के लिए उनके पास उतनी बड़ी रकम बची ही नहीं है, जितना वे मानकर चल रहे थे।

3. ‘लाइफस्टाइल अपग्रेड’ करने से पहले दो बार सोचें

सैलरी में बढ़ोतरी होते ही अक्सर लोग बड़े वित्तीय कमिटमेंट कर लेते हैं। जैसे ही आय बढ़ती है, एक बड़ा घर किराए पर लेना, महंगी कार खरीदना या हर वीकेंड पर महंगे रेस्टोरेंट में जाना बहुत आसान और किफायती लगने लगता है। इस बदलाव का सबसे बड़ा चैलेंज यह है कि ये लाइफस्टाइल अपग्रेड धीरे-धीरे आपके स्थायी फिक्स्ड खर्चों में बदल जाते हैं।

अगर भविष्य में कभी नौकरी में कोई बदलाव होता है, बिजनेस में मंदी आती है या किसी आपातकालीन स्थिति के कारण आपकी आय कम होती है, तो इन बढ़े हुए फिक्स्ड कमिटमेंट्स को संभालना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि फाइनेंशियल प्लानर्स हमेशा सैलरी हाइक मिलने के कम से कम 3 से 6 महीने बाद तक कोई बड़ा लाइफस्टाइल अपग्रेड न करने की सलाह देते हैं।

4. पहले बचत करें, फिर बचे हुए पैसों को खर्च करें

मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों में बजटिंग की सबसे आम गलती यह होती है कि वे महीने भर खुलकर खर्च करते हैं और सोचते हैं कि महीने के अंत में जो कुछ बचेगा, उसे बचा लेंगे। हकीकत में महीने के अंत तक बचने वाली यह रकम या तो बेहद मामूली होती है या फिर शून्य होती है।

वित्तीय सलाहकार हमेशा यह सुझाव देते हैं कि आपको अपनी बचत और निवेश (जैसे- म्यूचुअल फंड एसआईपी या पीपीएफ) को महीने के किसी अन्य जरूरी बिल की तरह देखना चाहिए। जैसे ही सैलरी अकाउंट में आए, सबसे पहले इमरजेंसी फंड, रिटायरमेंट या लॉन्ग टर्म गोल्स के लिए पैसे अलग कर दें। ऐसा करने से फिजूलखर्ची के चक्कर में आपकी बचत कभी नहीं छूटेगी।

5. अनचाहे खर्चों और आपातकाल के लिए रखें जगह

एक ऐसा बजट जो केवल तभी काम करता है जब सब कुछ आपकी प्लानिंग के मुताबिक चल रहा हो, असल में एक बेहद कमजोर बजट है। जिंदगी में कभी भी मेडिकल इमरजेंसी, घर या गाड़ी की अचानक मरम्मत, पारिवारिक संकट या कुछ समय के लिए नौकरी छूटने जैसी परिस्थितियां आ सकती हैं।

इसी वजह से एक मजबूत इमरजेंसी फंड का होना और खुद पर बहुत ज्यादा कर्ज (EMIs का बोझ) न लादना समझदारी की निशानी है। यही एक छोटी सी तैयारी एक सामान्य वित्तीय असुविधा और एक बड़े वित्तीय संकट के बीच का अंतर तय करती है।

कुल मिलाकर आपकी फाइनेंशियल सिक्योरिटी इस बात से तय नहीं होती कि आपकी सैलरी कितनी बड़ी है। यह इस बात से तय होती है कि क्या आप बिना क्रेडिट कार्ड या कर्ज के जाल में फंसे अपने सभी मासिक खर्चों को पूरा कर पा रहे हैं और भविष्य के लिए पर्याप्त बचत कर रहे हैं या नहीं। हर दो-तीन महीने में अपने खर्चों का रिव्यू करना आपको चौंकाने वाले नतीजे दे सकता है। कई बार फायदा ज्यादा कमाने से नहीं, बल्कि यह समझने से होता है कि आप उसे खर्च कैसे कर रहे हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

इस म्यूचुअल फंड ने 10 लाख रुपये के निवेश को सिर्फ 5 साल में 20 लाख रुपये बना दिया

म्यूचुअल फंड की स्कीम में एकमुश्त निवेश करने पर भी अच्छा रिटर्न मिलता है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल फ्लेक्सीकैप फंड ने एकमुश्त निवेश करने वाले इनवेस्टर्स का पैसा सिर्फ 5 साल में डबल कर दिया है। इस फंड की शुरुआत जुलाई 2021 में हुई थी। तब अगर आपने इस फंड में 10 लाख रुपये का एकमुश्त निवेश किया होता तो 30 जून, 2026 को आपका पैसा बढ़कर 19.61 लाख रुपये हो गया होता। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड ने अपने इस फंड के रिटर्न का डेटा जारी किया है।

17 जुलाई, 2021 को हुई थी फंड की शुरुआत

ICICI Prudential Mutual Fund ने 17 जुलाई, 2026 को इस फंड के लॉन्च के 5 साल पूरे होने पर इसके रिटर्न का डेटा जारी किया है। ICICI Prudential Flexicap Fund की शुरुआत 17 जुलाई 2021 को हुई थी। एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मुताबिक, इस फंड के रिटर्न का कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 14.55 फीसदी है। यह फंड के बेंचमार्क BSE 500 Total Return Index (TRI) के 11.88 फीसदी सीएजीआर रिटर्न से काफी ज्यादा है।

5 साल में 10000 का मंथली सिप आज 8.47 लाख होता

किसी निवेशक ने इस फंड की शुरुआत के समय इसमें 10,000 रुपये का मंथली सिप शुरू किया होता तो आज उसका पैसा बढ़कर 8.47 लाख रुपये हो गया होता। यह 13.83 फीसदी सीएजीआर रिटर्न है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनवेस्टर्स किसी अच्छे फंड में SIP या एकमुश्त दोनों ही तरीकों से निवेश कर सकते हैं। जो निवेशक एकमुश्त निवेश नहीं कर सकते, सिप उनके लिए निवेश का आसान तरीका है।

यह ओपन-एंडेड फ्लेक्सीकैप इक्विटी स्कीम है

ICICI Prudential Mutual Fund एक ओपन-एंडेड इक्विटी फ्लेक्सी कैप स्कीम है। इसका मतलब है कि यह छोटी-बड़ी सभी तरह की कंपनियों के शेयरों में निवेश कर सकती है। यह स्कीम निवेश में बॉटम-अप स्टॉक सेलेक्शन एप्रोच का इस्तेमाल करती है। इसका फोकस उन कंपनियों की पहचान पर होता है, जिनमें लंबी अवधि में ग्रोथ की बड़ी संभावना होती है।

क्वालिटी बिजनेसेज के स्टॉक्स में निवेश पर फोकस

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के सीनियर फंड मैनेजर रजत चंडाक ने इस स्कीम के बारे में बताया, “स्कीम का फोकस रिसर्च के जरिए क्वालिटी बिजनेसेज के सेलेक्शन पर रहा है। स्कीम मार्केट की हर साइकिल के हिसाब से लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट एप्रोच का इस्तेमाल करती है।”

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61 फीसदी निवेश लार्जकैप स्टॉक्स में 

30 जून, 2026 को इस फंड का करीब 61 फीसदी निवेश लार्ज-कैप स्टॉक्स में था। 9 फीसदी मिडकैप स्टॉक्स में था। 25 फीसदी निवेश स्मॉलकैप स्टॉक्स में था। अभी निवेश के मामले में इस फंड का झुकाव कंजम्प्शन-ओरिएंटेड स्टॉक्स में है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि हालांकि, इस फंड का रिटर्न अच्छा है, लेकिन निवेशकों को किसी फंड के पिछले रिटर्न को देखकर उसमें निवेश का फैसला करना चाहिए। इस फंड में निवेश से पहले इनवेस्टर्स को अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की राय जरूर लेनी चाहिए।

Market Mantra : 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना रहेगा अच्छा, US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

Market Mantra : बाजार के सामने संकट के बादल फिर खड़े हो गए हैं। एक तरफ जहां अमेरिका-ईरान फिर लड़ पड़े हैं तो वहीं क्रूड की बिगड़ी चाल ने बाजार में फिर डर का माहौल बना दिया है। इसके अलावा भी बाजार के सामने कई और बड़ी चुनौतियां अब भी खड़ी हैं। कमजोर मॉनसून और पहली तिमाही के नतीजों पर बाजार नजर बनाए बैठा है। इन सभी मुद्दों से अब आगे बाजार की दिशा तय होनी है। ऐसे में निवेशक कंफ्यूज है कि निवेश को लेकर क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं। इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं खास मेहमान LIC म्यूचुअल फंड (LIC Mutual Fund) के CIO इक्विटी सुधांशु अस्थाना

US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

बाजार की चाल पर बात करते हुए सुधांशु अस्थाना ने कहा कि US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं है। US-ईरान फिर शांति की तरफ बढ़ेंगे। सरकार के कदमों से इकोनॉमी में डिमांड बढ़ी है। प्राइवेट कैपेक्स और क्रेडिट ग्रोथ में भी सुधार देखने को मिल रहा है। कॉर्पोरेट क्रेडिट ग्रोथ में 15% का उछाल आया है। देश में डॉलर का फ्लो आगे सुधरेगा। US-ईरान युद्ध आगे बढ़ा तो FY28 नतीजों पर असर दिखेगा। कच्चा तेल 85-90 डॉलर प्रति बैरल पर रहे तो इकोनॉमी पर असर नहीं होगा।

3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा

उन्होंने आगे कहा कि 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा रहेगा। कंपनियों के मुताबिक युद्ध का असर अभी डिमांड पर नहीं दिखा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है। अगले साल से 8वें वेतन आयोग का पैसा भी आने लगेगा। 8वें वेतन आयोग के पैसे से डिमांड को बूस्ट मिलेगा। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने का असर Q1 नतीजों पर दिखेगा।नतीजों के साथ कंपनियों की कमेंट्री और आउटलुक पर बाजार की नजर रहेगी।

बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ा

सुधांशु अस्थाना ने बताया कि उन्होंनें बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ाया है। प्राइवेट बैंक,NBFC और कैपिटल मार्केट शेयरों पर फोकस बढ़ा है। हेल्थकेयर शेयरों में भी एक्सपोजर बढ़ाया है। प्रीसिजन इंजीनियरिंग और डाटा सेंटर पर भी फोकस बढ़ा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है।

कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में डालें पैसा

उन्होंने आगे कहा कि अगर आप कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में पैसा डालें। फ्लैक्सीकैप फंड में भी निवेश किया जा सकता है। पिछले कुछ महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश बढ़ा है। मिडकैप और स्मॉलकैप आगे अच्छा कर सकते हैं।

 

MF Investment : वाइजइन्वेस्ट के CEO हेमंत रुस्तगी से जाने बाजार में निवेश के मंत्र, क्या हैं स्टेप-अप SIP के फायदे

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook : अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए भारतीय इक्विटी इंडेक्स, जानिए 20 जुलाई को कैसी रह सकती है इनकी चाल

Market Outlook : 17 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स मजबूती के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,300 के ऊपर रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 964.58 अंक या 1.25 प्रतिशत बढ़कर 78,151.45 पर और निफ्टी 261.55 अंक या 1.09 प्रतिशत बढ़कर 24,334.30 पर बंद हुआ। लगभग 1632 शेयरों में बढ़त हुई, 2419 शेयरों में गिरावट आई और 175 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक,टेक महिंद्रा,TCS,जियो फाइनेंशियल और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल रहे। जबकि गिरावट वाले शेयरों में हिंडाल्को,डॉ. रेड्डीज़ लैब्स,विप्रो,सन फार्मा और मैक्स हेल्थकेयर शामिल रहे। सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे ज्यादा बढ़त वाला सेक्टर रहा। इसमें 2 प्रतिशत की तेजी आई। इसके बाद निफ्टी बैंक रहा,जिसमें 1.6 प्रतिशत की बढ़त हुई। निफ्टी IT में 1.7 प्रतिशत की तेजी आई।

दूसरे बढ़त वाले सेक्टरों में निफ्टी ऑटो और निफ्टी रियल्टी में 1.3-1.3 प्रतिशत की बढ़त हुई। जबकि निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1 प्रतिशत और निफ्टी FMCG में 0.7 प्रतिशत की बढ़त हुई। दूसरी ओर निफ्टी फार्मा में 1.4 प्रतिशत और मेटल में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.4 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.2 प्रतिशत की गिरावट आई।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

बाजार जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार के लिए पहली तिमाही के नतीजे मेन ट्रिगर होंगे,जिससे अलग-अलग सेक्टर और शेयरों में हलचल दिखेगी। हालांकि,मिडिल ईस्ट में हो रही घटनाएं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी अहम डिसाइडिंग फैक्टर बने रहेंगे। इनसे ब्याज दरों,कंपनियों की अर्निंग, महंगाई और देश के मैक्रोइकॉनॉमिक आउटलुक के अनुमानों पर असर पड़ने की संभावना है।

टाटा म्यूचुअल फंड को उम्मीद है कि बेहतर होते मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल के दम पर FY27 में निफ्टी की अर्निंग्स में 15-17% की बढ़ोतरी होगी। इसका कहना है कि निफ्टी का वैल्यूएशन अपने लान्ग टर्म एवरेज से नीचे आ गया है,जो अगले 12-18 महीनों में इक्विटी रिटर्न के लिए एक अच्छा माहौल बनाता है। भारत का लॉन्ग-टर्म इक्विटी आउटलुक, बेहतर होते इन्वेस्टमेंट साइकल,क्रेडिट ग्रोथ,मैन्युफैक्चरिंग को मिल रहे सपोर्ट,रियल एस्टेट में रिकवरी और मज़बूत बैंकिंग फंडामेंटल्स की वजह से अच्छा बना हुआ है। FII की लगातार बिकवाली के बावजूद,घरेलू संस्थागत निवेशकों का मज़बूत निवेश भारतीय इक्विटी को सपोर्ट कर रहा है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि मार्केट की चाल में बदलाव दिख रहा है, जिसमें IT और बैंकिंग सेक्टर की अगुवाई में लार्ज-कैप शेयरों की ओर जबरदस्त रुझान है। बिजनेस अपडेट्स और Q1 की कमाई की उम्मीदों को लेकर अच्छे माहौल से इसे सपोर्ट मिल रहा है। यह ट्रेंड मुख्य रूप से घरेलू संस्थागत निवेशकों की वजह से दिख रहा है,जो महंगे मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों से निकलकर बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल और आकर्षक वैल्यूएशन वाले लार्ज-कैप शेयरों में निवेश कर रहे हैं।

साथ ही,FY27 की दूसरी छमाही (H2) में घरेलू मांग अच्छी रहने की उम्मीद में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी खरीदारी का रुझान दिख रहा है। कुल मिलाकर भारत के लिए बेहतर होते आउटलुक के बीच चुनिंदा शेयरों में प्रॉफिट बुकिंग और खरीदारी के साथ ब्रॉडर मार्केट का रुख पॉजिटिव बना हुआ है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि इंडेक्स पांच दिन के कंसोलिडेशन फेज से बाहर निकल गया है। यह ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स के बढ़ते भरोसे का संकेत है। बाजार का ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है क्योंकि इंडेक्स अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है। इसके अलावा,RSI बुलिश क्रॉसओवर में आ गया है,जिससे पॉजिटिव मोमेंटम और मजबूत हुआ है। आने वाले समय में निफ्टी के मजबूत बने रहने और 24,800 के लेवल की ओर बढ़ने की संभावना है। नीचे की तरफ निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24,200 पर है। अगर यह इस लेवल से नीचे गिरता है तो कंसोलिडेशन का दौर शुरू हो सकता है।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे बाजार रिलायंस इंडस्ट्रीज,HDFC बैंक और ICICI बैंक के Q1FY27 नतीजों पर बारीकी से नजर रखेगा। इनसे बाजार की निकट भविष्य की दिशा तय होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर,बाजार के स्टॉक-स्पेसिफ़क रहने की संभावना है। अच्छी कमाई करने वाली कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है।

 

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