Trading plan : कच्चे तेल में उछाल ने बाजार पर बनाया दबाव, जानिए कल के लिए क्या हो ट्रेंडिंग रणनीति

Trading plan : कच्चे तेल में उछाल से बाजार में लगातार सातवें दिन भी बिकवाली देखने को मिल रही है। निफ्टी करीब 100 अंक प्वाइंट फिसलकर गिरकर 24050 के करीब करीब कारोबार कर रहा है। निफ्टी में लोअर हाईज,लोअर लोज का सिलसिला कायम है। बैंक निफ्टी में भी दबाव देखने को मिल रहा है। छोटे-मझोले शेयरों में भी आज बिकवाली आई है। लेकिन फीयर इंडेक्स INDIA VIX में कोई उछाल नहीं है।

डिफेंस शेयरों में आज तगड़ा करेक्शन देखने को मिल रहा है। डिफेंस इंडेक्स करीब 1.75 फीसदी फिसला है। सोलार इंडस्ट्रीज और BDL तीन फीसदी से ज्यादा फिसलकर वायदा के टॉप लूजर्स में शामिल हैं। कैपिटल गुड्स और केमिकल में भी दबाव है। लेकिन चुनिंदा EMS शेयरों में दूसरे दिन भी रौनक है। KAYNES TECH वायदा का टॉप गेनर बना है।

कमजोर बाजार में न्यू एज शेयर कमाल कर रहे हैं। करीब 2 फीसदी की तेजी के साथ इटरनल निफ्टी के टॉप गेनर्स में शुमार है। वहीं PAYTM, PB फिनटेक भी दो फीसदी से ज्यादा चढ़कर वायदा के टॉप गेनर्स में शामिल हैं। साथ ही नायिका,मीशो और ग्रो में भी जोश देखने को मिल रहा है।

चीनी शेयरों में मिठास बढ़ी है। त्योहारों से पहले चीनी के भाव बढ़ने और सप्लाई पर दबाव से इनकी रफ्तार में तेजी आई है। बजाज हिंदुस्तान 9% से ज्यादा चढ़ा है। साथ ही धामपुर,त्रिवेणी और रेणुका भी तीन से पांच फीसदी ऊपर हैं।

बाजार: एक और खराब दिन

बाजार पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में फिर गिरावट हावी हो गई है। CNBC-आवाज़ पर लगातार करेक्शन का नजरिया रहा है। 8 दिनों से लोअर हाईज का सिलसिला चल रहा है। निफ्टी और बैंक निफ्टी काफी अहम स्तर पर हैं। आज मिडकैप में भी काफी बिकवाली है। IPO बाजार गुलजार है और सेकेंडरी मार्केट खराब है। बड़े प्राइवेट बैंकों में फिर बिकवाली का दबाव है। चुनिंदा IT शेयरों में आज अच्छी रैली हुई है। India VIX आज भी सिर्फ 1% ही ऊपर है। बड़ा सवाल है कि क्या ये बड़ी वाली करेक्शन है या सिर्फ छोटी वाली?

बाजार: अब क्या?

CNBC-आवाज़ पर पिछले सोमवार से हमारा शॉर्ट का नजरिया रहा है। वहां से अब निफ्टी करीब 550-600 अंक गिर चुका है। लगातार बात हुई थी कि बाजार के इनटर्नल्स अच्छे नहीं हैं। VIX का खराब बाजार में ना चलना बड़ा निगेटिव था। FIIs का सीरीज के बीच में शॉर्ट जोड़ना निगेटिव था। अब निफ्टी का ट्रेंडलाइन सपोर्ट 23,950 पर है। बाजार में रिकवरी की उम्मीद यहीं से रहेगी।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 23,950 पर सपोर्ट और 24,180-24,250 पर रेजिस्टेंस है। बैंक निफ्टी के लिए 56,800-57,000 पर सपोर्ट और 57,300-57,500 पर रेजिस्टेंस है।

 

 

Market View : बाजार में अगले कुछ दिन रहें सतर्क, शॉर्ट टर्म में डिफेंस सेक्टर का यह शेयर दे सकता है अच्छे रिटर्न

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Saptadhara Explained: ‘सप्तधारा’ क्या है? PM मोदी ने बताया विकसित भारत का 7-सूत्रीय रोडमैप

Saptadhara Explained: सात धाराओं के पवित्र हिंदू विचार से लेकर विकसित भारत के लिए सात-सूत्रीय रोडमैप तक: ‘सप्तधारा’ का क्या अर्थ है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2026 पर इसका जिक्र क्यों किया? दरअसल, ‘सप्तधारा’ शब्द असल में ‘सप्त’ (यानी सात) और ‘धारा’ (यानी बहाव या प्रवाह) से मिलकर बना है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इसे विकास के एक फ्रेमवर्क के तौर पर इस्तेमाल किए जाने से बहुत पहले से ही, सात पवित्र धाराओं का यह विचार हिंदू धार्मिक परंपराओं में मौजूद था।

बता दें कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने जो घोषणा की, उसका आधार यही सांस्कृतिक और सभ्यतागत सोच थी। उन्होंने एक नई “सप्तधारा” — यानी ताकत की सात धाराएं — की बात की, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ की ओर भारत के सफर को आगे बढ़ाएंगी।

प्रधानमंत्री ने सबसे पहले ‘सप्त सिंधु’ यानी सात नदियों की पुरानी अवधारणा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कभी भारत अपनी ताकत के लिए सप्त सिंधु के कारण जाना जाता था और तर्क दिया कि अब एक विकसित भारत को ताकत की नई धाराओं की जरूरत है।

तो, सप्तधारा का हिंदू मूल क्या है, और इस शब्द को नीति के संदर्भ में नया अर्थ कैसे मिला है?

हिंदू परंपरा में ‘सप्तधारा’ का क्या अर्थ है?

सबसे बुनियादी स्तर पर, सप्तधारा का अर्थ है ‘सात धाराएं’। हिंदू धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में सात की संख्या का विशेष महत्व है—चाहे वह सात ऋषि (सप्तर्षि) हों, सात पवित्र नदियां हों या हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में वर्णित सात लोक हों।

पद्म पुराण में एक विशिष्ट ‘सप्तधारा-तीर्थ’ का भी वर्णन मिलता है।

संबंधित अध्याय के अनुवाद के अनुसार, सप्तधारा को एक महत्वपूर्ण पवित्र स्थान माना जाता था और यह ऋषियों से जुड़ा हुआ था। इस ग्रंथ में पवित्र जल की सात धाराओं का जिक्र मिलता है, जिन्हें गंगा के सात शुभ रूपों से जोड़ा गया है। इस स्थान का संबंध पांडवों से भी बताया गया है।

पद्म पुराण में सप्तधारा का उल्लेख खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सात धाराओं में बहने वाले पवित्र जल को गंगा की पवित्रता, तीर्थ यात्रा और पूर्वजों से जुड़े धार्मिक कर्मकांडों से जोड़ा गया है।

सप्तधारा या सप्तसरोवर नामक स्थानों से जुड़ी अन्य हिंदू परंपराएं भी हैं। उदाहरण के लिए, हरिद्वार में एक स्थानीय मान्यता है कि गंगा सात धाराओं में विभाजित हो गई थी ताकि सप्तऋषि (सात प्राचीन ऋषि) बिना किसी व्यवधान के अपनी तपस्या कर सकें।

दूसरे शब्दों में, “सात धाराएं” कोई नई गढ़ी गई उपमा नहीं है। लंबे समय से यह पवित्र प्रवाह, समृद्धि, निरंतरता और किसी शक्तिशाली चीज के विभिन्न दिशाओं में फैलने का प्रतीक रही है।

सप्तधारा और सप्त सिंधु: क्या है इनका संबंध?

पीएम मोदी के भाषण को समझने के लिए यह कड़ी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

‘सप्त सिंधु’ का शाब्दिक अर्थ है “सात नदियां” और यह शुरुआती वैदिक काल से जुड़ा एक प्राचीन भौगोलिक और सांस्कृतिक शब्द है।

पीएम मोदी ने अपनी ‘सप्तधारा’ को पौराणिक ‘सप्तधारा-तीर्थ’ की हूबहू नकल के तौर पर पेश नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने अपने आज के विचार को समझाने के लिए पुरानी ‘सप्त सिंधु’ की अवधारणा का इस्तेमाल एक पुल की तरह किया।

सात ही क्यों?

भारतीय परंपराओं में ‘सात’ का बहुत गहरा महत्व है। सप्तऋषि (सात ऋषि) और सप्तसिंधु (सात नदियां) जैसी अवधारणाएं हैं। साथ ही हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान, रीति-रिवाजों और साहित्य में भी सात के समूहों का कई बार जिक्र मिलता है।

इसलिए, यह संख्या पूर्णता और विविधता को दिखाने के लिए एक बेहतरीन प्रतीक है: अलग-अलग धाराएं मिलकर एक बड़ा प्रवाह बनाती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर इसी तरह इस विचार का इस्तेमाल किया। उनकी ‘सप्तधारा’ कोई एक योजना या नया मंत्रालय नहीं है। बल्कि, यह सात हिस्सों वाला एक रणनीतिक ढांचा है। इसमें वे क्षेत्र शामिल हैं जो भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लिए जरूरी आर्थिक, तकनीकी, बुनियादी ढांचे से जुड़ी, सैन्य, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक मजबूती दे सकते हैं।

PM मोदी की सात ‘सप्तधाराएं’ क्या हैं?

  1. मैन्युफैक्चरिंग पावर: पहली धारा मैन्युफैक्चरिंग है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग की पूरी वैल्यू चेन में अपनी ताकत बढ़ानी होगी। इसमें पार्ट्स और कंपोनेंट्स बनाने से लेकर डिजाइन और तैयार उत्पादों तक हर स्तर शामिल है। साथ ही भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक भरोसेमंद हिस्सा बनना होगा। उन्होंने तीन जरूरतों पर ज़ोर दिया: लागत, क्वालिटी और स्केल।

उन्होंने कहा, “मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम कर रहे मेरे भाइयों और बहनों के लिए, यह एक बड़ मौका है। इस मौके को हाथ से न जाने दें। और इसके लिए, हमें लागत, क्वालिटी और स्केल के मामले में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को पूरा करना होगा। हमारी फैक्ट्रियां कॉम्पिटिटिव होनी चाहिए। हमारे प्रोडक्ट यूजर-फ्रेंडली होने चाहिए।”

इसका बड़ा लक्ष्य यह है कि भारत सिर्फ दुनिया की बड़ी कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार न रहे, बल्कि दुनिया के लिए एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब बने।

  1. खेती और फ़ूड प्रोसेसिंग: दूसरा क्षेत्र खेती और फूड प्रोसेसिंग का है। यहां जोर सिर्फ खेती से होने वाले उत्पादन को बढ़ाने पर नहीं, बल्कि खेत से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने पर है। पीएम मोदी ने मोटे अनाज (मिलेट्स), मसालों, फलों और सब्जियों जैसे उत्पादों का जिक्र किया और कहा कि भारत के पारंपरिक खाद्य उत्पाद ग्लोबल ब्रांड बनने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे किसान केमिकल-मुक्त खेती को बढ़ावा देंगे। दुनिया में इन उत्पादों की मांग बढ़ रही है। और अगर हमारे कृषि उत्पाद हर तरह से ग्लोबल मानकों पर खरे उतरते हैं, तो हम आसानी से दुनिया भर के बाजारों तक पहुंच पाएंगे।”

इसका मकसद खेती से होने वाले उत्पादन में प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट के जरिए वैल्यू जोड़ना है, न कि किसानों को मुख्य रूप से कच्चे माल (रॉ-कमोडिटी) के स्तर पर ही छोड़ देना।

  1. टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: तीसरी धारा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की है। पीएम मोदी ने UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भारत के अनुभव का जिक्र किया और कहा कि देश को अब टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अगली बड़ी छलांग लगानी चाहिए।

उन्होंने खास तौर पर डेटा सेंटर, रोबोटिक्स, उभरती हुई टेक्नोलॉजी और अगली पीढ़ी के कम्युनिकेशन (जिसमें ‘मेड-इन-इंडिया 6G’ भी शामिल है) जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया। इसका मुख्य संदेश यह है कि भारत उभरती हुई टेक्नोलॉजी का सिर्फ एक बड़ा उपभोक्ता बनकर नहीं रह सकता। बल्कि उसे इनका डेवलपर और निर्यातक भी बनना होगा।

उन्होंने कहा, “मेड-इन-इंडिया दुनिया के हर कोने तक पहुंचना चाहिए। यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए और हमें इस दिशा में अपनी कोशिशें तेज करनी चाहिए। इस दिशा में हमारे प्रयास कम नहीं होने चाहिए।”

  1. गति शक्ति: चौथी धारा है ‘गति शक्ति’ – यानी रफ्तार और कनेक्टिविटी की ताकत। इसमें हाई-स्पीड रेल, हाईवे, अंदरूनी जलमार्ग, एयरपोर्ट, बंदरगाह और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।

इसका मकसद पूरे भारत में लोगों और सामान को लाने-ले जाने में लगने वाले समय और खर्च को कम करना है। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट पर आधारित अर्थव्यवस्था के लिए, इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ निर्माण का काम नहीं है। यह भारत की कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता) का हिस्सा बन जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें एयरपोर्ट्स की जरूरत है। हमें मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स सिस्टम की जरूरत है। हमें अपने बंदरगाहों को सिर्फ सामान चढ़ाने और उतारने की जगह के तौर पर नहीं देखना चाहिए। दुनिया भर से जहाजों का वहां आकर रुकना ही काफी नहीं है। हमें अपने बंदरगाहों को ‘पोर्ट-लेड डेवलपमेंट’ (बंदरगाह-आधारित विकास) और ग्रोथ की दिशा में आगे ले जाना होगा।”

इसलिए, पीएम मोदी ने बिना रुकावट वाली कनेक्टिविटी को देश के बड़े आर्थिक लक्ष्यों से जोड़ा।

  1. रक्षा शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा: पांचवां क्षेत्र डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भरता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज की अनिश्चित दुनिया में रणनीतिक आत्मनिर्भरता और भी जरूरी हो गई है।

उन्होंने उस जोखिम का जिक्र किया जो तब पैदा होती है जब जरूरी चीजों – जैसे एनर्जी, फर्टिलाइजर, दवाइयां और टेक्नोलॉजी – की सप्लाई पर जियोपॉलिटिकल तनाव का असर पड़ सकता है। वहीं, इसका समाधान है घरेलू डिफेंस प्रोडक्शन को मजबूत करना और ड्रोन व काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसी टेक्नोलॉजी विकसित करना, ताकि भारत को एक ग्लोबल डिफेंस सप्लायर बनाया जा सके।

उन्होंने कहा, “हमें डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनना होगा। अगली जनरेशन की डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित करके, हमें ग्लोबल सप्लायर बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना होगा।”

  1. ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी:

छठी धारा दो क्षेत्रों को मिलाती है: ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी

ग्रीन हिस्से में रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज शामिल हैं। ब्लू हिस्सा भारत की तटरेखा, महासागरों, मछली पालन, समुद्री गतिविधियों और तटीय पर्यटन पर केंद्रित है। इसका बड़ा मकसद आर्थिक विकास को एनर्जी ट्रांजिशन के साथ जोड़ना और साथ ही भारत की समुद्री क्षमता का इस्तेमाल करना है।

  1. भारत की सॉफ्ट पावर: सातवीं और आखिरी धारा ‘सॉफ्ट पावर’ है।

यहीं पर मोदी की ‘सप्तधारा’ पारंपरिक आर्थिक पैमानों से आगे निकल जाती है। उन्होंने योग, हस्तशिल्प, डिजिटल कंटेंट और पर्यटन जैसे क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का सांस्कृतिक प्रभाव खुद एक आर्थिक और भू-राजनीतिक संपत्ति बन सकता है।

इसका मकसद भारत के उत्पादों, संस्कृति, क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़ और विचारों को दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाना है।

पीएम मोदी ने कहा, “हम अपनी क्षमताओं को दुनिया तक ले जा सकते हैं। चाहे वह हस्तशिल्प हो, संस्कृति हो, हमारी फिल्में हों, हमारी क्रिएटिव दुनिया हो, VFX, एनिमेशन, गेमिंग या डिजिटल कंटेंट हो – भारत क्रिएटिव दुनिया में अपनी ताकत दिखा सकता है। हमें इसे एक ग्लोबल क्षमता के तौर पर विकसित करना होगा।”

उन्होंने आगे कहा: “भारत के पास वन संपदा का विशाल भंडार है। हमारे यहां 100 से ज्यादा नेशनल पार्क हैं। इसमें बहुत संभावनाएं हैं, लेकिन हम विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में पीछे रहे हैं। हमारे पास अपनी सॉफ्ट पावर के जरिए दुनिया भर के पर्यटकों को भारत की ओर आकर्षित करने का मौका है। हमें दुनिया के सामने अपनी क्षमताओं को दिखाना होगा।”

सप्तधारा के पीछे की सोच क्या है?

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सप्तधारा’ की घोषणा को ‘विकसित भारत 2047’ के बड़े लक्ष्य से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि आने वाले 5 से 7 साल बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि जो काम पिछले पांच से सात दशकों में नहीं हो पाए, उन्हें अब आने वाले पांच से सात सालों में पूरा करना होगा। उन्होंने इस पहल को “रिफॉर्म एक्सप्रेस” (सुधार की गति बढ़ाने वाला कदम) भी कहा और सिस्टम, सोच और काम करने की रफ्तार में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।

इस वजह से ‘सप्तधारा’ सिर्फ सरकार की एक अलग योजना नहीं रह जाती, बल्कि सरकार के विकास के एजेंडे के अगले चरण के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा बन जाती है।

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Rare Earth Magnet Scheme: ₹7280 करोड़ की सरकारी योजना, L&T और कोल इंडिया समेत 20 कंपनियों ने बोली लगाई

Rare Earth Magnet Scheme: सरकार की ₹7,280 करोड़ की रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग योजना को कंपनियों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। Larsen & Toubro (L&T), Coal India, ReNew, Attero Recycling और Lohum Magnets & Energy Solutions समेत 20 कंपनियों ने इस योजना के लिए बोली लगाई है।

भारी उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। तकनीकी बोलियां 13 अगस्त को खोली गईं। आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 12 अगस्त थी।

कौन-कौन सी कंपनियां दौड़ में हैं?

इस योजना में भारतीय कंपनियों के साथ विदेशी कंपनियों ने भी हिस्सा लिया है। इनमें NEO Performance Materials (Singapore) और जापान की Proterial की भारतीय इकाई Proterial India भी शामिल हैं।

इसके अलावा 20 Microns, N.A.N. Magnetech, PrNd Metal and Magnets, Prozeal Green Energy और Ramp Metals & Minerals जैसी कंपनियों ने भी बोली लगाई है।

सरकार की योजना क्या है?

सरकार इस योजना के तहत भारत में हर साल 6,000 मीट्रिक टन सिंटर्ड NdFeB रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने की क्षमता चाहती है। इस बंटवारा 5 कंपनियों के बीच किया जाएगा। हर कंपनी को अधिकतम 1,200 मीट्रिक टन सालाना क्षमता मिल सकती है।

केंद्रीय कैबिनेट ने नवंबर 2025 में इस योजना को मंजूरी दी थी। योजना की अवधि 7 साल होगी। इसमें पहले 2 साल फैक्ट्री लगाने के लिए होंगे। इसके बाद 5 साल तक बिक्री के आधार पर इंसेंटिव मिलेगा।

रेयर अर्थ मैग्नेट इतने अहम क्यों हैं?

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल, विंड टरबाइन, हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और डिफेंस सिस्टम में होता है। सरकार का लक्ष्य भारत में NdPr ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करना है।

चीन पर निर्भरता घटाने की तैयारी

इस सेक्टर में चीन का दबदबा है। भारत अभी रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। साल 2025 में चीन के एक्सपोर्ट प्रतिबंधों से सप्लाई प्रभावित हुई थी। इससे कई उद्योगों में कमी देखने को मिली। सरकार अब घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना और सप्लाई को सुरक्षित बनाना चाहती है।

LG Electronics India Q1 Results: इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी को ₹652 करोड़ मुनाफा, 10 लाख से ज्यादा AC बेचे

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sahana Systems को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का कॉन्ट्रैक्ट मिला, CEL के साथ 10 साल की डील

Sahana Systems Defence Deal: IT और डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी Sahana Systems Ltd की सब्सिडियरी Sahana Defence Ltd को बड़ा डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी ने भारत सरकार के मिनी रत्न Central Electronics Limited (CEL) के साथ लंबी अवधि का समझौता किया है। यह डील सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत हुई है।

समझौते के तहत उत्तर प्रदेश के साहिबाबाद में CEL के परिसर में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) इक्विपमेंट और वेपन पेरिफेरी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बनाई जाएगी और उसका संचालन भी किया जाएगा।

10 साल की होगी डील

यह कॉन्ट्रैक्ट शुरुआती तौर पर 10 साल के लिए है। अगर सबकुछ ठीक रहा, तो कॉन्ट्रैक्ट 5 साल और बढ़ाया जा सकता है।

Sahana Defence इस फैसिलिटी को बनाने, चलाने, मेंटेनेंस करने, मार्केटिंग करने और यहां बने प्रोडक्ट्स को कमर्शियल स्तर पर बाजार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालेगी।

क्या बनेगा इस फैसिलिटी में?

नई यूनिट में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और हथियारों से जुड़े पेरिफेरी इक्विपमेंट बनाए जाएंगे। इसका मकसद भारत में ही डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना और रणनीतिक तकनीकों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।

कंपनी का कहना है कि CEL के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाकर वह डिफेंस सेक्टर के लिए मजबूत मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म तैयार करेगी।

कंपनी ने क्या कहा?

Sahana Systems के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रतीक काकड़िया ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी के लिए बड़ा मील का पत्थर है। उनके मुताबिक, इससे डिफेंस कारोबार में लंबे समय तक रेवेन्यू की बेहतर दृश्यता मिलेगी और भविष्य की ग्रोथ को मजबूत आधार मिलेगा।

Sahana Systems क्या काम करती है?

साल 2013 में स्थापित Sahana Systems का मुख्यालय अहमदाबाद में है। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, IoT, ब्लॉकचेन, बिजनेस इंटेलिजेंस और IT आउटसोर्सिंग जैसी तकनीकी सेवाएं देती है।

इसके अलावा कंपनी डिफेंसटेक, फिनटेक, हेल्थटेक और एडुटेक सेक्टर में भी काम करती है। Sahana Systems का दावा है कि वह सरकारी संस्थानों, रक्षा संगठनों और वित्तीय संस्थानों के साथ कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।

Honasa Consumer Q1 Results: ममाअर्थ की पैरेंट कंपनी का मुनाफा 118% उछला, रेवेन्यू भी रिकॉर्ड स्तर पर

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Electric Air Taxi: 2028 तक खत्म हो जाएगा ट्रैफिक जाम का झंझट! भारत के आसमान में उड़ेंगी इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी और कारें, जानें सभी डिटेल्स

Electric Air Taxi in india News: भारत में आने वाले कुछ सालों में हवाई सफर का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के मुताबिक, भारत का लक्ष्य 2028 तक इलेक्ट्रिक एयर टैक्सियों और कारों को आसमान में उड़ान भरते देखना है। इसके लिए अगले साल से इन अत्याधुनिक विमानों की टेस्टिंग और ट्रायल को और तेज किया जाएगा। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि भारत 2028 तक देश में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी की उड़ान शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। उम्मीद है कि इस नई टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग अगले साल तेज हो जाएगी।

हाल ही में बेंगलुरु में सरला एविएशन के नए हेडक्वार्टर के उद्घाटन के मौके पर बोलते हुए नायडू ने कहा कि इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग एयरक्राफ्ट बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे भीड़-भाड़ वाले महानगरों के लिए आवाजाही का एक नया विकल्प बन सकते हैं। ANI के मुताबिक नायडू ने कहा, “हम चाहते हैं कि 2028 तक ये मशीनें भारत में उड़ान भरें। इनकी बहुत ज्यादा जरूरत है, न सिर्फ बेंगलुरु में, बल्कि मुंबई और दिल्ली में भी…।”

15 मिनट में नोएडा से गुरुग्राम

कल्पना कीजिए कि आप अपने मोबाइल से टैक्सी बुक करते हैं। लेकिन यह टैक्सी सड़क पर आने के बजाय किसी बिल्डिंग की छत पर बने खास वर्टिपैड पर आपका इंतजार कर रही है। आप लिफ्ट से ऊपर पहुंचते हैं, एक ऐसे इलेक्ट्रिक विमान में बैठते हैं जो देखने में किसी बड़े ड्रोन जैसा लगता है। कुछ ही सेकंड में वह सीधे आसमान में उड़ जाता है।

सड़क के जाम में फंसने के बजाय यह एयर टैक्सी शहर के ऊपर से उड़ते हुए आपको एयरपोर्ट तक पहुंचा देती है। दावा है कि भविष्य में ऐसी यात्रा के जरिए एयरपोर्ट तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि एयर टैक्सी शुरू होने के बाद नोएडा से गुरुग्राम पहुंचने में सिर्फ 10 से 15 मिनट लगेंगे।

मंत्री ने क्या कहा?

मंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरला एविएशन अगले साल पूरी तरह से टेस्टिंग के दौर में आ जाएगी। जबकि नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एविएशन रेगुलेटर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) टेस्टिंग, सुरक्षा और नियमों पर इंडस्ट्री के साथ काम करना जारी रखेंगे। नायडू ने यह भी कहा कि DGCA ने सरला एविएशन को डिजाइन ऑर्गनाइजेशन अप्रूवल दिया है, जो कंपनी के eVTOL एयरक्राफ्ट के डेवलपमेंट में एक रेगुलेटरी कदम है। मंत्री ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि अगले साल हम पूरी तरह से टेस्टिंग के दौर में होंगे।” उन्होंने आगे कहा, “2028 तक हम इसे हकीकत बनाने की योजना बना रहे हैं।”

क्या होती है इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी?

इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी को टेक्नीकल भाषा में eVTOL यानी Electric Vertical Take-Off and Landing Aircraft कहा जाता है। इन टैक्सी की खासियत यह है कि इन्हें हेलीकॉप्टर की तरह रनवे की जरूरत नहीं होती। ये डायरेक्ट जमीन या वर्टिपैड से ऊपर उड़ सकते हैं। साथ ही उसी तरह नीचे उतर भी सकते हैं।

Electric Air Taxi

इनके डिजाइन में फ्लाइट और हेलीकॉप्टर दोनों की झलक दिखाई देती है। इनमें कई रोटर या इलेक्ट्रिक फैन लगाए जाते हैं, जो विमान के पंखों या उसके बाहरी हिस्सों पर लगे होते हैं। हेलीकॉप्टर की तरह eVTOL भी लंबवत उड़ान भर सकता है। लेकिन इसमें एक बड़े रोटर की जगह कई छोटे रोटर या फैन इस्तेमाल किए जाते हैं।

बैटरी और इलेक्ट्रिक तकनीक ने खोला रास्ता

eVTOL टेक्नोलॉजी का विचार नया नहीं है। इस दिशा में कई दशकों से काम हो रहा है। लेकिन हाल के सालों में बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में हुई प्रगति ने इसे कमर्शियल इस्तेमाल के करीब पहुंचा दिया है। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी बड़े पैमाने पर सफल होती हैं तो शहरों में सड़क ट्रैफिक का कुछ हिस्सा आसमान में शिफ्ट किया जा सकता है।

जॉर्जिया टेक के वर्टिकल लिफ्ट रिसर्च सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की निदेशक मर्लिन स्मिथ के मुताबिक, बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण गंभीर समस्या बन चुके हैं। ऐसे में परिवहन के मौजूदा तरीकों पर दोबारा विचार करने की जरूरत है।

किन कामों में इस्तेमाल हो सकती हैं eVTOL?

शुरुआत में इलेक्ट्रिक एयर कारों का इस्तेमाल लोगों को कम और मध्यम दूरी तक पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। कई eVTOL कंपनियां एयरलाइंस के साथ मिलकर एयर-टैक्सी सर्विस शुरू करने की दिशा में काम कर रही हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल सिर्फ यात्रियों को लाने-ले जाने तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में इनका उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा सकता है, जैसे-

  • मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में एयर टैक्सी का इस्तेमाल हो सकेगा।
  • आग बुझाने और फायरफाइटिंग में भी ये काम करेगा।
  • इसके अलावा डिफेंस सेक्टर में, खेती और कृषि कार्यों में, पर्यटन क्षेत्र में, शहरों के बीच एयर टैक्सी सेवा का लाभ उठाया जा सकेगा।

कौन-कौन सी कंपनियां दौड़ में हैं?

अमेरिका में Archer, BETA Technologies और Joby जैसी कंपनियां इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी विकसित करने और उन्हें कमर्शियल सर्विस में लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। इनमें से कुछ कंपनियां अंतिम FAA सुरक्षा मंजूरी के करीब पहुंच चुकी हैं। हालांकि, आम यात्रियों के लिए एयर टैक्सी की नियमित बुकिंग कब से शुरू होगी, इसकी कोई निश्चित तारीख अभी तय नहीं है। फिर भी इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी का दौर लोगों की उम्मीद से काफी करीब है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह टेक्नोलॉजी?

भारत जैसे तेजी से बढ़ते शहरीकरण और भारी ट्रैफिक वाले देश में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी भविष्य के परिवहन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। खासतौर पर भारी ट्रैफिक जाम का सामने करने वाली दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में एयरपोर्ट और शहर के दूसरे हिस्सों के बीच तेज कनेक्टिविटी के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

Electric Air TaxiS

अगर तकनीक, सुरक्षा, लागत और इससे जुड़े अथॉरिटी की मंजूरी से जुड़ी चुनौतियां समय पर दूर होती हैं, तो 2028 के आसपास भारत में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी का सपना हकीकत में बदलता दिखाई दे सकता है। यानी आने वाले समय में सड़क पर कैब बुक करने के साथ-साथ मोबाइल से आसमान में उड़ने वाली टैक्सी भी बुक करने का विकल्प मिल सकता है।

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Mazagon Dock Q1 Results: सरकारी डिफेंस कंपनी का मुनाफा 22% बढ़ा, ऑर्डर बुक ₹18000 करोड़ के पार

Mazagon Dock Q1 Results: डिफेंस सेक्टर की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (Mazagon Dock Shipbuilders) ने जून तिमाही के मजबूत नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 21.5% बढ़कर ₹549.4 करोड़ रहा। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹452.2 करोड़ था।

रेवेन्यू में 12% की बढ़त

मझगांव डॉक का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 12.1% बढ़कर ₹2,943 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹2,626 करोड़ था। कंपनी को अपने विभिन्न युद्धपोत और पनडुब्बी निर्माण प्रोजेक्ट्स में लगातार काम आगे बढ़ने का फायदा मिला।

मझगांव डॉक का जून तिमाही में EBITDA 48% बढ़कर ₹446.6 करोड़ पहुंच गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 11.5% से बढ़कर 15.2% हो गया। इससे साफ है कि कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी में अच्छी सुधार देखने को मिली। कंपनी की कुल आय ₹3,081 करोड़ रही, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹2,949 करोड़ से ज्यादा है।

ऑर्डर बुक ₹18,218 करोड़

30 जून 2026 तक मझगांव डॉक की ऑर्डर बुक ₹18,218 करोड़ रही। इससे आने वाली तिमाहियों में कंपनी के कारोबार और रेवेन्यू को अच्छी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

मझगांव डॉक के शेयरों का हाल

मझगांव डॉक का शेयर गुरुवार को 0.79% बढ़कर ₹2,326 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 9.60% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह 15.72% टूटा है। हालांकि, पिछले 5 साल में स्टॉक ने 1,692% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 93.62 हजार करोड़ रुपये हैय़

मझगांव डॉक का बिजनेस

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स भारत की प्रमुख रक्षा शिपबिल्डिंग कंपनी है। यह भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के लिए युद्धपोत, पनडुब्बियां और अन्य रक्षा पोत बनाती है। यह देश की इकलौती सरकारी शिपयार्ड कंपनी है, जो डिस्ट्रॉयर और पनडुब्बियां दोनों बनाती है। साथ ही, इसमें एक साथ 11 पनडुब्बियां और 10 युद्धपोत बनाने की क्षमता है।

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