रियल लाइफ में कब विश्वकप जीतेंगी चक दे गर्ल्स, 15 में से सिर्फ 8 बार करा है क्वालिफाय

शाहरुख खान अभिनीत फिल्म चकदे इंडिया को देखा जाए तो भारतीय महिला हॉकी टीम साल 2007 में ही विश्वकप जीत चुकी है। लेकिन असल मैदान यानि कि एस्ट्रो टर्फ पर भारतीय महिला हॉकी टीम अन्य हॉकी टीमों के आगे कमजोर नजर आती है। बीच बीच में आए संघर्ष के पलों को छोड़ दिया जाए तो 15 बार में से 8 बार तो चकदे गर्ल्स विश्वकप के लिए क्वालिफाय भी नहीं कर पाई हैं।

विश्व कप 1974 से 2022 तक , फ्रांस से स्पेन तक भारतीय महिला हॉकी टीम का सफर :

1974 फ्रांस :

अजिंदर कौर की कप्तानी में भारतीय टीम ने नीदरलैंड जैसी मजबूत टीम को ग्रुप चरण में हराकर सभी को चौंका दिया था। मैक्सिको और स्पेन को हराने वाली यह टीम बेल्जियम से एकमात्र पराजय के बाद ग्रुप में शीर्ष पर रही लेकिन सेमीफाइनल में अर्जेंटीना एक गोल से हार गई। कांस्य पदक के मुकाबले में उसे पश्चिम जर्मनी ने 2-0 से हराया।

भारतीय टीम भले ही पदक नहीं जीत पाई लेकिन इस ऐतिहासिक प्रदर्शन ने देश में महिला हॉकी को गंभीरता से लेने पर मजबूर किया। नीदरलैंड ने अर्जेंटीना को एक गोल से हराकर खिताब जीता और पूरे टूर्नामेंट में नीदरलैंड को हराया तो सिर्फ भारत ने।

1976 बर्लिन :

पहले विश्व कप में चौथे स्थान पर रहने के बावजूद भारतीय महिला हॉकी टीम आर्थिक दिक्कतों, संस्थागत प्रायोजन के अभाव और भारतीय महिला हॉकी संघ के पास कोष नहीं होने के कारण दूसरे विश्व कप में भाग नहीं ले सकी।

1978 मैड्रिड :

रूपा सैनी की कप्तानी में भारतीय महिला हॉकी टीम ने स्पेन में तीसरे विश्व कप में भाग लिया और दस टीमों में सातवें स्थान पर रही। पूल ए में भारत को एकमात्र जीत चेकोस्लोवाकिया पर मिली जबकि उसे नीदरलैंड और अर्जेंटीना ने हराया। कनाडा से भारत ने 1-1 से ड्रॉ खेला। क्रासओवर मुकाबले में भारत ने जापान से तीन गोल से हारने के बाद स्पेन को एक गोल से हराया।नीदरलैंड ने पश्चिम जर्मनी को हराकर खिताब जीता जबकि अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा।

1981 ब्यूनस आयर्स :

मॉस्को ओलंपिक 1980 में चौथे स्थान पर रहने के बावजूद भारतीय महिला हॉकी टीम अर्जेंटीना में 12 टीमों के विश्व कप में जगह नहीं बना सकी। राष्ट्रीय महासंघ के सामने आर्थिक और प्रशासनिक दिक्कतों के कारण भारतीय महिला टीम की भागीदारी उपमहाद्वीपीय टूर्नामेंटों और आमंत्रण टूर्नामेंटों तक ही सिमटकर रह गई थी।पश्चिम जर्मनी ने नीदरलैंड को हराकर खिताब जीता जबकि सोवियत संघ तीसरे स्थान पर रहा।

1983 कुआलालम्पुर :

एशियाई खेल 1982 की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम की विश्व कप में वापसी हुई लेकिन सलमा डिसिल्वा की कप्तानी वाली टीम ग्रुप चरण में पांच में से चार मैच हारकर और वेल्स से एक ड्रॉ के बाद आखिरी स्थान पर रही। क्लासीफिकेशन मैच में अर्जेंटीना से एक गोल से हारकर उसे बारह टीमों में 11वें स्थान से संतोष करना पड़ा।नीदरलैंड ने कनाडा को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

1986 एम्सटेलवीन :

ब्यूनस आयर्स में 1985 में हुए विश्व कप क्वालीफायर में पांचवें स्थान पर रही भारतीय टीम टूर्नामेंट में जगह बनाने में नाकाम रही। भारत ने 1986 में सियोल एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था।नीदरलैंड ने पश्चिम जर्मनी को हराकर चौथी बार खिताब जीता जबकि कनाडा तीसरे स्थान पर रहा।

1990 सिडनी :

इस विश्व कप का क्वालीफायर 1989 इंटर कांटिनेंटल कप दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम पर खेला गया जिसमें 12 टीमों में से शीर्ष चार को विश्व कप में जगह मिली। भारत ने पांच में से दो मैच जीते लेकिन तीन हारे। 15 गोल किये लेकिन नौ गंवाये और पूल बी में चौथे स्थान पर रहकर विश्व कप में जगह नहीं बना सकी।नीदरलैंड ने दक्षिण कोरिया को हराकर पांचवीं बार खिताब जीता और इंग्लैंड तीसरे स्थान पर रहा।

1994 डबलिन :

भारतीय टीम मामूली अंतर से इस विश्व कप में जगह बनाने से चूक गई। फिलाडेल्फिया में 1993 में हुए क्वालीफायर में 12 टीमों ने भाग लिया जिनमें से शीर्ष पांच को जगह मिली थी लेकिन भारतीय टीम छठे स्थान पर रही।आस्ट्रेलिया ने अर्जेंटीना को हराकर खिताब जीता जबकि अमेरिका तीसरे स्थान पर रहा।

1998 यूट्रेक्ट :

प्रीतम रानी सिवाच की कप्तानी में भारतीय महिला टीम लगातार तीन बार बाहर रहने के बाद विश्व कप में लौटी। पूल ए में पांचों मैच हारने के बाद भारतीय टीम बारहवें और आखिरी स्थान पर रही।आस्ट्रेलिया ने नीदरलैंड को 3 . 2 से हराकर खिताब जीता जबकि जर्मनी तीसरे स्थान पर रही।

2002 पर्थ :

जून 2002 में कठिन क्वालीफाइंग दौर में अमेरिका से हारने के बाद भारतीय टीम विश्व कप में जगह तो नहीं बना सकी लेकिन जुलाई अगस्त 2002 में मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर धूम मचा दी और यह जीत बाद में शाहरूख खान की फिल्म ‘चक दे इंडिया’ की प्रेरणा भी बनी।अर्जेंटीना ने नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 4- 3 से हराकर खिताब जीता जबकि चीन तीसरे स्थान पर रहा।

2006 मैड्रिड :

इस विश्व कप में भारत की सुरिंदर कौर सर्वाधिक गोल करने वालों की सूची में नीदरलैंड की किम लामेर्स के साथ पांच गोल करके दूसरे स्थान पर रही। नीदरलैंड की ही सिल्विया कारेस ने छह गोल दागे थे।भारतीय टीम पूल ए में पांच में से चार मैच हारकर और एक ड्रॉ के बाद आखिरी स्थान पर और 12 टीमों में 11वें स्थान पर रही। नीदरलैंड ने आस्ट्रेलिया को हराकर खिताब जीता जबकि अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा।

2010 रोसारियो :

इस विश्व कप ने भारत को रानी रामपाल जैसा बेहतरीन मिडफील्डर दिया जिसने सात गोल दागकर सभी का ध्यान खींचा। पूल चरण में भारत को एकमात्र जीत जापान के खिलाफ मिली जबकि बाकी चार मैच हारकर टीम पांचवें स्थान पर रही। क्लासीफिकेशन मैच में दक्षिण अफ्रीका को 4-3 से हराकर भारत नौवे स्थान पर रहा।अर्जेंटीना ने नीदरलैंड को हराकर स्वर्ण पदक जीता जबकि इंग्लैंड तीसरे स्थान पर रहा।

2014 द हेग :

कुआलालम्पुर में 2013 में हुए एशिया कप के चैम्पियन को विश्व कप में जगह मिलनी थी लेकिन भारत सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया से हार गया। चीन को पेनल्टी शूटआउट में हराकर भारतीय टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया लेकिन इस महाद्वीपीय क्वालीफायर से जापान ने विश्व कप में जगह बनाई।नीदरलैंड ने आस्ट्रेलिया को 2- 0 से हराकर सातवीं बार खिताब जीता जबकि अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा।

2018 लंदन :

रानी रामपाल की कप्तानी में भारतीय टीम इस विश्व कप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची। पूल बी में इंग्लैंड और अमेरिका से ड्रॉ खेलने के बाद आयरलैंड से हारी भारतीय टीम तीसरे स्थान पर रही। क्रॉसओवर में लालरेम्सियामी, वंदना कटारिया और नेहा गोयल के गोल से भारत ने इटली को हराया लेकिन क्वार्टर फाइनल में आयरलैंड से पेनल्टी शूटआउट में हार गई।नीदरलैंड ने आयरलैंड को 6-0 से हराकर खिताब जीता जबकि स्पेन तीसरे स्थान पर रहा।

2022 एम्सटेलवीन, नीदरलैंड और टेरासा, स्पेन :

सविता पूनिया की कप्तानी में भारतीय टीम ने स्पेन में पूल बी के मैचों में इंग्लैंड और चीन से ड्रॉ खेला लेकिन न्यूजीलैंड से हार गई। क्रॉसओवर में भारतीय टीम ने कनाडा को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराया और जापान को 3- से मात देकर चीन के साथ नौवे स्थान पर रही।नीदरलैंड ने अर्जेंटीना को 3-1 से हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

दावा- चीनी सामान भारत के रास्ते अमेरिका भेजा जा रहा:टैरिफ से बचने की कोशिश; अमेरिकी रिपोर्ट में पुणे, गुजरात और चेन्नई नेटवर्क का हिस्सा

अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए चीनी प्रोडक्ट्स को भारत के रास्ते अमेरिकी बाजारों में पहुंचाया जा रहा है। यह दावा व्हाइट हाउस की रिपोर्ट ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम: राइज, स्कोप एंड कॉस्ट्स’ में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से आने वाले सामान या पार्ट्स को पहले भारत समेत दूसरे एशियाई देशों में भेजा जाता है। वहां उन्हें प्रोसेस, असेंबल या किसी दूसरे प्रोडक्ट में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद तैयार सामान को अमेरिका निर्यात किया जाता है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इससे चीन पर लगाए गए टैरिफ से बचने का रास्ता मिल सकता है। रिपोर्ट में इसके लिए दुनिया भर में ट्रेड रूट्स का नेटवर्क बनने की बात कही गई है। भारत के पुणे, गुजरात और चेन्नई को चीन से आने वाले सामान के एक अहम रास्ते के तौर पर बताया गया है। रिपोर्ट में यहां बनने वाले इंडस्ट्रियल पंप और कंप्रेसर में चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल होने की संभावना का खास तौर पर जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में रूट नेटवर्क को ‘अग्ली सिस्टर सिटीज’ कहा गया चीनी सामान को तीसरे देशों के जरिए अमेरिका भेजने के लिए इस्तेमाल हो रहे रूट नेटवर्क को रिपोर्ट में ‘अग्ली सिस्टर सिटीज’ कहा गया है। इसका मतलब शहरों की सुंदरता या बदसूरती से नहीं है। यह शब्द अलग-अलग देशों के ऐसे औद्योगिक शहरों के लिए इस्तेमाल किया गया है, जहां एक जैसे प्रोडक्ट बनते हैं और वे अमेरिकी बाजार में एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं। भारत के मामले में रिपोर्ट ने पुणे, गुजरात और चेन्नई की तुलना अमेरिका के ओहायो राज्य के सिनसिनाटी, डेटन और कोलंबस से की है। इन अमेरिकी शहरों में भी पंप, कंप्रेसर और दूसरे औद्योगिक सामान का उत्पादन और कारोबार होता है। रिपोर्ट का तर्क है कि अगर तीसरे देशों के जरिए कम टैरिफ पर सामान अमेरिका पहुंचता है, तो वहां के स्थानीय निर्माताओं को नुकसान हो सकता है। अमेरिकी कंपनियों को कम कीमत वाले आयात से मुकाबला करना पड़ सकता है। इसका असर उत्पादन, ऑर्डर और नौकरियों पर भी पड़ सकता है। मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड का भी जिक्र व्हाइट हाउस की रिपोर्ट में सिर्फ भारत का जिक्र नहीं है। इसमें मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड के उन इलाकों का भी जिक्र है, जहां बड़े पैमाने पर सामान बनाया और दूसरे देशों को भेजा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे रास्तों से हर साल अरबों डॉलर का सामान अमेरिकी बाजार तक पहुंच सकता है, जिसमें चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया हो। क्या ये टैरिफ से बचने की कोशिश को साबित करता है? किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट का इस्तेमाल होना और चीन का सामान सिर्फ भारत के रास्ते अमेरिका भेजना, दोनों अलग बातें हैं। अगर भारत में किसी प्रोडक्ट की असली मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और उस पर काफी काम हो रहा है, तो उसे सिर्फ चीन का सामान घुमाकर अमेरिका भेजना नहीं माना जा सकता। इसलिए यह देखा जाता है कि प्रोडक्ट बनाने में असल काम और प्रोडक्ट की कीमत में कितना हिस्सा किस देश में तैयार हुआ है। सिर्फ किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट लगा होने से यह साबित नहीं होता कि टैरिफ से बचने की कोशिश हुई है। आज की ग्लोबल सप्लाई चेन में एक प्रोडक्ट के अलग-अलग पार्ट कई देशों में बनते हैं और उसकी आखिरी असेंबली किसी दूसरे देश में हो सकती है। अमेरिका अब AI और डेटा से संदिग्ध शिपमेंट पकड़ेगा रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका तीसरे देशों के जरिए टैरिफ से बचने की कोशिशों पर निगरानी बढ़ा रहा है। व्हाइट हाउस ने सीमा पर आने वाले सामान की जांच में टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिसिस के ज्यादा इस्तेमाल की बात कही है। रिपोर्ट में ऐसे AI सिस्टम का भी जिक्र है, जो अमेरिकी कस्टम अधिकारियों को संदिग्ध शिपमेंट की पहचान करने में मदद कर सकता है। इसका मकसद पूरी सप्लाई चेन को ट्रैक करना है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी सर्वे-10 में 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं: भारतीयों के लिए रूस सबसे अहम पार्टनर, पाकिस्तानियों की पहली पसंद चीन 10 में से 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं, ये बात अमेरिकी प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में सामने आई है। इंडियंस भी अपना सबसे बड़ा दुश्मन पाकिस्तान को ही मानते हैं। सर्वे में कहा गया कि दोनों देशों के लोग पड़ोसी के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन भरोसे की कमी है। पूरी खबर पढ़ें…

CM योगी पहुंचे अयोध्या, महंत रामचंद्र दास परमहंस को 23वीं पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि, विपक्ष पर साधा निशाना

CM योगी पहुंचे अयोध्या, महंत रामचंद्र दास परमहंस को 23वीं पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि, विपक्ष पर साधा निशाना

CM Yogi Ayodhya visit: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार (14 अगस्त) को अयोध्या दौरे पर पहुंचे। रामकथा पार्क हेलीपैड पर उतरने के बाद उन्होंने हनुमानगढ़ी और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन कर रामलला का आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात वे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर न्यास के प्रथम अध्यक्ष महंत रामचंद्र दास परमहंस जी महाराज की 23वीं पुण्यतिथि के अवसर पर दिगंबर अखाड़ा में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल हुए।

16 लाख गायों का संरक्षण

श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित संतों ने राम मंदिर परिसर में महंत परमहंस रामचंद्र दास जी की भव्य प्रतिमा स्थापित करने की मांग प्रमुखता से उठाई। सीएम योगी ने संत रविदास मंदिर पहुंचकर महंत बनवारीपति दिवाकर जी महाराज को नमन किया और पूज्य संतों-महंतों से आत्मीय मुलाकात की। गौमाता के मुद्दे पर बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि गाय सनातन धर्म और भारत की अनमोल धरोहर है। उन्होंने गौ तस्करी और गोहत्या पर पूर्ण विराम लगाने की अपील की तथा बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 16 लाख गायों का संरक्षण किया जा रहा है।

​चढ़ावा चोरी मामले पर विपक्ष पर प्रहार

राम जन्मभूमि चढ़ावा चोरी मामले को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईटी (SIT) जांच के आधार पर सख्त कार्रवाई जारी है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।​

राम जन्मभूमि आंदोलन में योगदान को नमन

सीएम ने परमहंस जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन राम मंदिर के निर्माण और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित रहा। संभल और देश के विभाजन का उल्लेख करते हुए योगी जी ने राष्ट्र को एकजुट रहने का संदेश दिया और कहा— 'हम बंटे थे, इसलिए कटे थे।'

 

योगी ने कहा कि अयोध्या के बदलते स्वरूप की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अयोध्या अपने प्राचीन गौरव के अनुरूप विकसित होकर पुनः त्रेता युग की अलौकिक छवि पेश कर रही है।

रामलला और हनुमानगढ़ी में दर्शन

समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हनुमानगढ़ी पहुंचे। यहां उन्होंने बजरंगबली के दर्शन-पूजन कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद हनुमानगढ़ी स्थित इमली बाग में पहुंचकर स्वर्गीय महंत संत रामदास को श्रद्धांजलि अर्पित की। हनुमानगढ़ी से मुख्यमंत्री सीधे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर पहुंचे। यहां उन्होंने रामलला का दर्शन-पूजन किया।

अमेरिकी सर्वे-10 में 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं:भारतीयों के लिए रूस सबसे अहम पार्टनर, पाकिस्तानियों की पसंद चीन

अमेरिका के प्यू रिसर्च सेंटर के नए सर्वे में सामने आया है कि करीब 10 में से 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं। वहीं भारतीय भी पाकिस्तान को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है। सर्वे में दावा किया गया है कि दोनों देशों के लोग अपने पड़ोसी के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं। लेकिन दोनों के बीच भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है। दूसरी ओर, भारत रूस को अपना सबसे बड़ा दोस्त मानता है। वहीं, पाकिस्तान ने चीन को अपना सबसे बड़ा सहयोगी देश माना है। 21% भारतीय मुस्लिमों ने पाकिस्तान पर पॉजिटिव राय रखी प्यू के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में पाकिस्तान को लेकर नेगेटिव सोच कोई नई बात नहीं है। हालांकि, भारत के अलग-अलग समुदायों में राय एक जैसी नहीं है। 21% भारतीय मुस्लिमों ने पाकिस्तान के बारे में पॉजिटिव राय जताई। हिंदुओं में यह आंकड़ा 6% रहा। खतरे के सवाल पर भी अंतर दिखा। 34% भारतीय मुस्लिमों ने पाकिस्तान को भारत का सबसे बड़ा भू-राजनीतिक खतरा बताया, जबकि हिंदुओं में यह आंकड़ा 57% था। दूसरी ओर, सर्वे में पाकिस्तानियों की भारत को लेकर यह नेगेटिव सोच पाकिस्तान के अलग-अलग साजाजिक समूहों में ज्यादा दिखाई दी है। पहलगाम हमले के बाद रिश्ते और बिगड़े सर्वे में भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव का भी जिक्र है। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी। इनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया। इसके बाद भारत सरकार ने 1960 की सिंधु जल संधि को रोकने का फैसला किया। सिंधु जल संधि पाकिस्तान के लिए खास तौर पर अहम है। पाकिस्तान की खेती और पानी की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। 58% भारतीयों की रूस को लेकर पॉजिटिव राय भारत में 36% लोगों ने रूस को अपना सबसे जरूरी सहयोगी बताया। अमेरिका को 16% लोगों ने चुना। वहीं, पाकिस्तान में 75% लोगों ने चीन को अपना बड़ा सहयोगी माना। 12% ने सऊदी अरब को देश का दोस्त बताया। रूस चीन अमेरिका भारत की विदेश नीति किसी एक देश के साथ नहीं जुड़ी सर्वे से भारत की विदेश नीति की एक और अहम बात सामने आती है। भारत में किसी एक विदेशी देश को लेकर पाकिस्तान जैसी एकतरफा मजबूत पसंद नहीं दिखती। भारत की विदेश नीति में कई बड़े देशों के साथ एक साथ रिश्ते बनाए रखने की कोशिश दिखाई देती है। भारत अमेरिका के साथ रक्षा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ रूस के साथ उसके पुराने रक्षा संबंध हैं। चीन के साथ सीमा पर तनाव और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा है, लेकिन बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देश कई मुद्दों पर साथ भी काम करते हैं। इसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और मल्टी-अलाइनमेंट की नीति से जोड़कर देखा जा सकता है। मल्टी-अलाइनमेंट यानी कई देशों के साथ अपने हित के हिसाब से रिश्ते रखना। यानी भारत किसी एक बड़े देश के खेमे में पूरी तरह जाने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ अपने हित के हिसाब से रिश्ते बनाए रखना चाहता है। ——————- पाकिस्तान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी PM की धमकी- पानी रोका तो मुंहतोड़ जवाब देंगे: कश्मीर पर रुख कभी नहीं बदलेंगे, मुनीर की लीडरशिप में हमने दुश्मन को हराया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर भारत को एक बार फिर धमकी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई समझौता नहीं होगा। अगर इसे रोकने या कम करने की कोशिश हुई तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

विदेश घूमना अब नहीं महंगा! ₹50,000 के बजट में एक्सप्लोर करें 7 खूबसूरत एशियाई देश

अगर आप कम बजट में विदेश घूमने का सपना देख रहे हैं, लेकिन महंगे टिकट और वीजा की लंबी प्रक्रिया की वजह से प्लान टाल रहे हैं, तो आपके लिए कुछ एशियाई देश बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। इन जगहों पर भारतीय यात्रियों को वीजा के लिए लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता, जिससे ट्रिप प्लान करना काफी आसान हो जाता है। खूबसूरत शहरों से लेकर समुद्र, पहाड़, ऐतिहासिक जगहों और एडवेंचर तक, यहां घूमने के कई ऑप्शन मिलते हैं।

सबसे खास बात यह है कि कुछ डेस्टिनेशन के लिए भारत से राउंड-ट्रिप फ्लाइट का किराया ₹50,000 से भी कम मिल सकता है। फ्लाइट के किराए तारीख, शहर और बुकिंग के समय के हिसाब से बदल सकते हैं।

 

कजाकिस्तान

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राउंड-ट्रिप फ्लाइट: नई दिल्ली–अस्ताना

अगर आप एक ही ट्रिप में शहर, पहाड़, झीलें और एडवेंचर का मजा लेना चाहते हैं, तो कजाकिस्तान बेहतरीन ऑप्शन है। अल्माटी की खूबसूरत कैफे वाली सड़कें, बर्फ से ढके पहाड़, साफ झीलें और केबल कार राइड यहां की खास पहचान हैं। साथ ही यहां के लोकल बाजार और सेंट्रल एशियन खाने का स्वाद भी आपकी ट्रिप को यादगार बना देगा। इंडियन 14 दिनों तक वीजा-फ्री ट्रैवल कर सकते हैं। हर 180 दिनों में मैक्सिमम 42 दिन तक बिना वीजा के रह सकते हैं।

 

मलेशिया

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राउंड-ट्रिप फ्लाइट: हैदराबाद–कुआलालंपुर

मलेशिया कम बजट में घूमने के लिए शानदार देश है। कुआलालंपुर अपने स्ट्रीट फूड, मॉडर्न बिल्डिंग और शॉपिंग के लिए मशहूर है। वहीं कैमरून हाइलैंड्स की हरियाली, लंगकावी के शांत बीच और बोर्नियो के घने रेनफॉरेस्ट नेचर लवर को खूब पसंद आते हैं। अगर आप खाने, घूमने और एडवेंचर का कॉम्बिनेशन चाहते हैं, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है। इंडियन के लिए 31 दिसंबर 2026 तक वीजा-फ्री एंट्री।

 

मकाऊ

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राउंड-ट्रिप फ्लाइट: नई दिल्ली–मकाऊ

मकाऊ सिर्फ कैसीनो के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी खूबसूरत विरासत और संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। यहां का ऐतिहासिक शहर, रंग-बिरंगी पुर्तगाली स्टाइल की बिल्डिंग, पुराने मंदिर और UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स देखने लायक हैं। यहां का मकानीज खाना चीनी और पुर्तगाली स्वाद का अनोखा ब्लेंड है, जिसे एक बार जरूर चखना चाहिए। 30 दिनों तक वीजा-फ्री।

 

फिलीपींस

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राउंड-ट्रिप फ्लाइट: चेन्नई–एंजेल्स: ₹27,015

अगर आपको समुद्र, बीच और आइलैंड्स पसंद हैं, तो फिलीपींस शानदार ऑप्शन है। यहां 7,000 से ज्यादा द्वीप हैं, जहां पलावान की नीली झीलें, बोहोल की चॉकलेट हिल्स और सियार्गाओ की सर्फिंग सबसे ज्यादा पॉपुलर हैं। 14 दिन में एक या दो द्वीप आराम से घूमे जा सकते हैं और यादगार छुट्टियां बिताई जा सकती हैं। 14 दिनों तक वीजा-फ्री।

 

नेपाल

राउंड-ट्रिप फ्लाइट: नई दिल्ली–काठमांडू

नेपाल इंडियन के लिए सबसे आसान और सस्ती इंटरनेशनल ट्रिप में से एक है। काठमांडू के प्राचीन मंदिर, पुराने बाजार और कैफे ट्रैवलर को खास एक्सपीरियंस देते हैं। इसके अलावा पोखरा की झीलें, चितवन नेशनल पार्क और हिमालय के खूबसूरत ट्रेकिंग रूट्स नेचर और एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए बेहतरीन हैं। इंडियन के लिए वीजा-फ्री, रहने की कोई टाइम लिमिट नहीं।

भूटान

राउंड-ट्रिप फ्लाइट: कोलकाता–पारो

भूटान अपनी नेचुरल ब्यूटी, शांति और बौद्ध संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां के किलेनुमा मठ, जोंग, हरी-भरी घाटियां और शांत माहौल आपको शहर की भागदौड़ से दूर ले जाते हैं। अच्छी बात यह है कि भारतीयों को यहां दूसरे फॉरेन टूरिस्ट की तरह सस्टेनेबल डेवलपमेंट फीस नहीं देनी पड़ती, जिससे ट्रिप और भी अफोर्डेबल हो जाती है। इंडियन के लिए वीजा-फ्री, लेकिन एंट्री परमिट जरूरी है।

 

थाईलैंड

राउंड-ट्रिप फ्लाइट: चेन्नई–बैंकॉक

थाईलैंड इंडियन टूरिस्ट की पसंदीदा फॉरेन ट्रिप में शामिल है। बैंकॉक के मंदिर, फ्लोटिंग मार्केट और नाइट मार्केट, चियांग माई के पहाड़ और कैफे, जबकि फुकेत, क्राबी और कोह समुई जैसे द्वीप शानदार बीच वेकेशन का एक्सपीरियंस देते हैं। भारत से कई शहरों के लिए सीधी फ्लाइट्स और कम किराया इसे बजट-फ्रेंडली इंटरनेशनल डेस्टिनेशन बनाते हैं। इंडियन के लिए 30 दिनों तक वीजा-फ्री।

ट्रम्प ने ड्रोन इंपोर्ट पर 100% तक टैरिफ लगाया:राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया, चीनी कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान

अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अनमैन्ड ड्रोन और उनके कंपोनेंट्स के आयात यानी इंपोर्ट पर 100% तक का टैरिफ लगाने का ऐलान किया। अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों और चीनी कंपनियों के वर्चस्व वाले इस सेक्टर में दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस फैसले से अमरीका में ड्रोन और उनके कंपोनेंट्स का घरेलू प्रोडक्शन बढ़ेगा और विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम होगी। पिछले साल तक अमेरीकी कॉमर्शियल ड्रोन बाजार में चीनी कंपनी की लगभग 70% हिस्सेदारी थी। ड्रोन के वजन और क्षमता के हिसाब से टैरिफ तय हुआ व्हाइट हाउस के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले ड्रोन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। लागू होने की समय-सीमा और छूट के नियम नया टैरिफ स्ट्रक्चर अलग-अलग समय-सीमा में लागू किया जाएगा… विशेष छूट: हस्ताक्षर के 20 दिनों के भीतर अमरीकी युद्ध विभाग यानी डिपार्टमेंट ऑफ वॉर द्वारा FCC की कवर्ड लिस्ट से छूट प्राप्त प्रोडक्ट्स और कंपोनेंट्स पर भी टैरिफ 180 दिनों बाद प्रभावी होगा। ब्रिटेन और यूरोप समेत 7 सहयोगी देशों पर भी टैरिफ अमेरिका ने केवल विरोधी देशों पर ही नहीं, बल्कि अपने सहयोगी देशों से आने वाले ड्रोन पर भी टैरिफ लागू किया है… चीन की ड्रोन कंपनियों पर नकेल कसने की तैयारी फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ट्रम्प प्रशासन चीनी ड्रोन तकनीक पर अपनी कार्रवाई तेज कर रहा है। पिछले साल दिसंबर में फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने चीनी ड्रोन के आयात पर प्रतिबंध की घोषणा की थी और विरोधी देशों के ड्रोन को वायरलेस कम्युनिकेशंस की मंजूरी देने पर रोक लगा दी थी। वैश्विक बाजार में शेनझेन स्थित कंपनी DJI टेक्नोलॉजीज का दबदबा है, जिसकी पिछले साल तक अमेरीकी कॉमर्शियल ड्रोन बाजार में लगभग 70% हिस्सेदारी थी। इसके अलावा, हाल ही में चीन ने भी अमरीकी व्यापारिक प्रतिबंधों के जवाब में अमेरीका को ड्रोन एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी और छह कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। रूस-यूक्रेन युद्ध और हाइब्रिड वॉर से बढ़ी चिंता ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध ने आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया है। दोनों देशों द्वारा इलाके की रक्षा और उस पर कब्जा करने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल ने एक नए हाइब्रिड वॉर को जन्म दिया है। ट्रम्प ने अपने आधिकारिक पत्र में अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम को अमरीका की राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी करार दिया है। एक्सपर्ट्स की राय: कॉमर्शियल मार्केट का ढांचा पूरी तरह बदलेगा अमरीका-चीन टेक्नोलॉजी प्रतिस्पर्धा के विशेषज्ञ क्रेग सिंगलेटन ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि यह फैसला कॉमर्शियल मार्केट को पूरी तरह से नया आकार देगा। क्रेग सिंगलेटन ने कहा कि अमरीकी कॉमर्शियल और सरकारी खरीदारों को तुरंत एक बड़े पूंजीगत बदलाव की जरूरत होगी। उन्हें अब अमरीका या सहयोगी देशों के सप्लायर्स की तरफ रुख करना होगा, भले ही उनके प्रोडक्ट्स की कीमत ज्यादा क्यों न हो। यह फैसला चीन के ड्रोन बाजार को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है और ट्रम्प तथा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली आगामी बैठक से पहले तनाव बढ़ा सकता है। क्या है अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम (UAS)? अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम (UAS) को सामान्य भाषा में ड्रोन कहा जाता है। ये ऐसे विमान होते हैं जिन्हें बिना किसी इंसानी पायलट के रिमोट कंट्रोल या ऑटोमैटिक सॉफ्टवेयर के जरिए उड़ाया जाता है। इनका इस्तेमाल फोटोग्राफी, सामान की डिलीवरी से लेकर मिलिट्री सर्विलांस और सटीक हमलों तक में किया जाता है। ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- पैकेज्ड फूड पर वॉर्निंग लेबल लगाओ: ज्यादा चीनी-नमक और फैट की जानकारी दो, सरकार ऐसा नहीं करती तो हम आदेश देंगे सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स के वॉर्निंग लेबल पर केंद्र सरकार और फूड सेफ्टी अथॉरिटी (FSSAI) को आखिरी चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि नमकीन, बिस्किट और चिप्स के पैकेट पर ज्यादा चीनी-नमक और फैट की चेतावनी देने वाले वॉर्निंग लेबल लगाने पर अगर सरकार फैसला नहीं ले पा रही है तो हम आदेश जारी करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

योगी सरकार की निर्यात नीति से किसानों को सीधा लाभ, निवेश की नई लहर

योगी सरकार की निर्यात नीति से किसानों को सीधा लाभ, निवेश की नई लहर

 

 

 

 

 

 


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने निर्यात क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रदेश देश का पहला राज्य बना है, जिसने निर्यात के लिए समर्पित त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति (2026-29) लागू की है। एक अप्रैल 2026 से प्रभावी इस नीति के शुरुआती दो माह में ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अप्रैल-मई 2026 में प्रदेश से निर्यात 84.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि देश का समग्र निर्यात 6.3 प्रतिशत बढ़ा। राष्ट्रीय निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 8.1 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई और प्रदेश पांचवें स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंच गया।
 

 

यूपी ने 39.4 लाख डॉलर की वृद्धि अर्जित की

 

अप्रैल-मई 2026 में देश से कुल 6.15 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जिसमें उत्तर प्रदेश का योगदान 86 लाख डॉलर रहा। पिछले वर्ष इसी अवधि में देश का निर्यात 5.78 करोड़ डॉलर और प्रदेश का योगदान 46.6 लाख डॉलर था। इस दौरान देश के निर्यात में 36.5 लाख डॉलर की वृद्धि हुई, जबकि उत्तर प्रदेश ने अकेले 39.4 लाख डॉलर की वृद्धि अर्जित की। बस्ती से 25,000 कुंतल शीरे का निर्यात भी हुआ, जिससे 5,00,000 अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा मिली। शीरा भिन्न शुल्क वर्गीकरण में आता है, अतः यह अर्जन उपरोक्त आंकड़ों में सम्मिलित नहीं है और उनसे अतिरिक्त है। महत्वपूर्ण यह है कि राज्य ने इसके लिए कोई आर्थिक सहायता या अनुदान नहीं दिया, बल्कि नियामक शुल्कों को तर्कसंगत बनाया है। प्रत्येक निर्यात बोतल पर ट्रैक एंड ट्रेस व्यवस्था लागू है। एपीडा ने इस क्षेत्र के लिए करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर का राष्ट्रीय निर्यात लक्ष्य रखा है और उत्तर प्रदेश लगातार अपना योगदान बढ़ा रहा है।

 

निवेश और रोजगार के नए अवसर

 

नीति की 3 वर्ष की स्थिरता से उद्योग जगत का भरोसा बढ़ा है। यूनाइटेड ब्रुअरीज उन्नाव और माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज हरदोई में नई इकाई स्थापित कर रही हैं। वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने फर्रुखाबाद में इकाई स्थापित की है। एलाइड ब्लेंडर्स एण्ड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद इकाई को पुनर्जीवित किया है। गोरखपुर में लगभग एक वर्ष पहले एथेनॉल उत्पादन के लिए स्थापित कियान डिस्टिलरी ने पेय आसवनी और ब्रुअरी, दोनों की स्थापना के लिए आवेदन किया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार रैडिको खेतान अन्य राज्यों से अपने सीतापुर और रामपुर संयंत्रों में निर्यात उत्पादन स्थानांतरित कर रहा है। एक अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनी का स्थल चयन अंतिम चरण में है, जबकि कई मौजूदा आसवनियां क्षमता विस्तार कर रही हैं।

 

किसानों को बढ़ी मांग का सीधा फायदा

 

आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने बताया कि इस नीति का महत्वपूर्ण लाभ प्रदेश के किसानों को मिल रहा है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है, जिससे गन्ना किसानों को अप्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। वहीं ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने से अनाज की खरीद भी बढ़ी है। यानी निर्यात बढ़ने के साथ प्रदेश की औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन, किसानों से खरीद और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। नीति में किसान हित को लेकर सख्त प्रावधान भी किए गए हैं। जिस आसवनी अथवा उसके स्वामी की किसी अन्य इकाई या चीनी मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान अथवा आबकारी देयों की वसूली प्रमाण-पत्र प्रभावी है, उसे नीति की कोई छूट नहीं मिलेगी। इससे निर्यात प्रोत्साहन को सीधे किसानों के भुगतान से जोड़ा गया है।

 

कांच से लेकर परिवहन तक बढ़ा कारोबार

 

आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र की पश्च संबद्धता गन्ना, शीरा और अनाज जैसी कृषि उपज से जुड़ी है, जबकि अग्र संबद्धता में कांच, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन जैसे उद्योग आते हैं। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच प्रदेश की इकाइयों ने अन्य राज्यों को 1.64 करोड़ अधिक बोतलें भेजीं, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 45.7 प्रतिशत अधिक हैं। यह वृद्धि घरेलू आपूर्ति घटाकर नहीं, बल्कि कुल उत्पादन बढ़ने से हुई है।

 

देश के लिए मॉडल बनी योगी सरकार की नीति

 

केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से गठित टास्क फोर्स सभी राज्यों के लिए आदर्श निर्यात नीति तैयार कर रही है। इसमें एपीडा और विभिन्न राज्यों के आबकारी विभाग शामिल हैं। टास्क फोर्स की बैठक में उत्तर प्रदेश की नीति की सराहना करते हुए इसे अन्य राज्यों के लिए उपयोगी ढांचा बताया गया और राष्ट्रीय आदर्श नीति में प्रदेश के अनुभवों को शामिल करने के निर्देश दिए गए। इस तरह योगी सरकार की नीति ने किसान हित, निवेश, रोजगार और विदेशी मुद्रा अर्जन को एक साथ जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है।

पाकिस्तानी PM बोले- भारत पानी रोकेगा तो मुंहतोड़ जवाब देंगे:कश्मीर पर रुख कभी नहीं बदलेंगे, मुनीर की लीडरशिप में हमने दुश्मन को हराया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर एक बार फिर से भारत को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई समझौता नहीं होगा। अगर इसे रोकने या कम करने की कोशिश हुई तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री शहबाज ने गुरुवार को इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते कहा कि कश्मीर पर पाकिस्तान का रुख कभी नहीं बदलेगा। अपने भाषण में शहबाज ने एक बार फिर सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ करते हुए दावा किया कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने भारत को हराया। चीन की दोस्ती को हिमालय से भी मजबूत बताया शहबाज ने अपने भाषण में चीन-पाकिस्तान की दोस्ती को हिमालय से भी बुलंद बताया। उन्होंने कहा कि चीन पाकिस्तान का अजीम दोस्त है। हर मुश्किल घड़ी में वह चट्टान की तरह देश के साथ रहा है। फिर दोहराया- ट्रम्प ने कराया था युद्धविराम शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में एक बार फिर दावा किया कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अहम भूमिका रही थी। उन्होंने ट्रम्प की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी पहल से समय रहते युद्धविराम संभव हो सका। हालांकि भारत लगातार यह कहता रहा है कि संघर्ष विराम दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे बातचीत से हुआ था और इसमें किसी तीसरे देश की कोई मध्यस्थता नहीं थी। कश्मीर, फिलिस्तीन और अफगानिस्तान पर भी बोले अपने भाषण में शहबाज शरीफ ने कहा कि कश्मीर पर पाकिस्तान का रुख नहीं बदलेगा और कश्मीरियों की कुर्बानी बेकार नहीं जाने दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान फिलिस्तीन के लोगों के अधिकारों का समर्थन करता रहेगा। अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार से उन्होंने अपील की कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने दे। साथ ही दावा किया कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका भी निभाई है। भारत ने पहलगाम हमले के बाद संधि पर लगाई थी रोक अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। तभी से यह मुद्दा दोनों देशों के बीच तनाव की बड़ी वजह बना हुआ है। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और भरोसेमंद कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि पर रोक जारी रहेगी। वहीं, पाकिस्तान का दावा है कि यह संधि अब भी कानूनी रूप से प्रभावी है और इसे एकतरफा निलंबित नहीं किया जा सकता। 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों का बंटवारा किया गया था। इसी संधि को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं और हाल के महीनों में यह विवाद फिर से गहरा गया है। गंभीर जल संकट का सामना कर रहा पाकिस्तान रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। खासकर सिंध और बलूचिस्तान में पानी की कमी लगातार बढ़ रही है। सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक- पाकिस्तान की सिंचाई व्यवस्था के अहम हिस्से सुक्कुर बैराज को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। पानी का स्तर लगातार घटने से कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

Rare Earth Magnet Scheme: ₹7280 करोड़ की सरकारी योजना, L&T और कोल इंडिया समेत 20 कंपनियों ने बोली लगाई

Rare Earth Magnet Scheme: सरकार की ₹7,280 करोड़ की रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग योजना को कंपनियों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। Larsen & Toubro (L&T), Coal India, ReNew, Attero Recycling और Lohum Magnets & Energy Solutions समेत 20 कंपनियों ने इस योजना के लिए बोली लगाई है।

भारी उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। तकनीकी बोलियां 13 अगस्त को खोली गईं। आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 12 अगस्त थी।

कौन-कौन सी कंपनियां दौड़ में हैं?

इस योजना में भारतीय कंपनियों के साथ विदेशी कंपनियों ने भी हिस्सा लिया है। इनमें NEO Performance Materials (Singapore) और जापान की Proterial की भारतीय इकाई Proterial India भी शामिल हैं।

इसके अलावा 20 Microns, N.A.N. Magnetech, PrNd Metal and Magnets, Prozeal Green Energy और Ramp Metals & Minerals जैसी कंपनियों ने भी बोली लगाई है।

सरकार की योजना क्या है?

सरकार इस योजना के तहत भारत में हर साल 6,000 मीट्रिक टन सिंटर्ड NdFeB रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने की क्षमता चाहती है। इस बंटवारा 5 कंपनियों के बीच किया जाएगा। हर कंपनी को अधिकतम 1,200 मीट्रिक टन सालाना क्षमता मिल सकती है।

केंद्रीय कैबिनेट ने नवंबर 2025 में इस योजना को मंजूरी दी थी। योजना की अवधि 7 साल होगी। इसमें पहले 2 साल फैक्ट्री लगाने के लिए होंगे। इसके बाद 5 साल तक बिक्री के आधार पर इंसेंटिव मिलेगा।

रेयर अर्थ मैग्नेट इतने अहम क्यों हैं?

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल, विंड टरबाइन, हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और डिफेंस सिस्टम में होता है। सरकार का लक्ष्य भारत में NdPr ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करना है।

चीन पर निर्भरता घटाने की तैयारी

इस सेक्टर में चीन का दबदबा है। भारत अभी रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। साल 2025 में चीन के एक्सपोर्ट प्रतिबंधों से सप्लाई प्रभावित हुई थी। इससे कई उद्योगों में कमी देखने को मिली। सरकार अब घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना और सप्लाई को सुरक्षित बनाना चाहती है।

LG Electronics India Q1 Results: इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी को ₹652 करोड़ मुनाफा, 10 लाख से ज्यादा AC बेचे

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

राम मंदिर के पुजारियों का नया ड्रेस कोड लागू, अब बिना सिले वस्त्रों में होगी रामलला की पूजा!

राम मंदिर के पुजारियों का नया ड्रेस कोड लागू, अब बिना सिले वस्त्रों में होगी रामलला की पूजा!

Ram Mandir priest dress code: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विराजित रामलला की सेवा-पूजा कर रहे पुजारियों की वेशभूषा (ड्रेस कोड) में एक बार फिर बड़ा बदलाव किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा नवगठित 'धार्मिक न्यास समिति' की सहमति के बाद यह निर्णय लिया गया है। ​अब राम मंदिर के पुजारी सिलाई किए हुए वस्त्रों के बजाय बिना सिले वस्त्र (धोती और दुपट्टा/अंगवस्त्र) धारण करके ही पूजा-पाठ करेंगे।

क्यों बदला गया ड्रेस कोड?

​इससे पहले ट्रस्ट की ओर से पुजारियों के लिए पीले रंग की सिलाई वाली चौबंदी (कुर्ता/अंगरखा), सफेद धोती और पगड़ी तय की गई थी, जिस पर तीर्थ क्षेत्र का मोनोग्राम भी छपा हुआ था। हाल ही में हुई धार्मिक न्यास समिति की पहली बैठक में संतों ने इस पर आपत्ति जताई। संतों का तर्क था कि सिलाई वाले वस्त्र पहनना अयोध्या की प्राचीन वैष्णव परंपरा के प्रतिकूल है।

​संतों का सुझाव : गर्भगृह में प्रभु की सेवा के दौरान पुजारियों को पूर्णतः वैष्णव मर्यादा के अनुसार केवल बिना सिले वस्त्र ही धारण करने चाहिए। संतों के इस मार्गदर्शन को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि और अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।

​रोस्टर बदलाव के साथ नई व्यवस्था प्रभावी

​बदला हुआ ड्रेस कोड सावन शुक्ल प्रतिपदा (13 अगस्त) से पूरी तरह लागू कर दिया गया है। रामलला के पुजारियों की ड्यूटी का रोस्टर हर माह अमावस्या और पूर्णिमा को बदलता है। सावन कृष्ण अमावस्या तक जो पुजारी सुबह की पाली में थे, वे प्रतिपदा से शाम की पाली में आ गए हैं और नई वेशभूषा के साथ अपनी सेवा दे रहे हैं।