अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी नेगोसिएटिंग टीम से ईरान के साथ वार्ता रोकने को कहा है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने यह फैसला तब तक के लिए लिया है, जब तक तेहरान किसी डील के लिए तैयार नहीं हो जाता। अमेरिकी अधिकारी ने अल जजीरा को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच अब तक सकारात्मक बातचीत हुई थी, लेकिन ट्रम्प ने आगे की बातचीत शुरू करने से पहले इंतजार करने का फैसला किया। ट्रम्प ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताते हुए सोशल मीडिया पर मैप पोस्ट किया था। ट्रम्प के पोस्ट के बाद ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताना सिर्फ एक गलतफहमी है। पोस्ट में ट्रम्प ने लिखा- नया अमेरिकी क्षेत्र ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर एक ग्राफिक पोस्ट किया, जिसके ऊपर ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ लिखा था। इस मैप में होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास का समुद्री इलाका दिखाया गया था। इसमें ईरान, ओमान और UAE के हिस्से भी नजर आ रहे थे। ट्रम्प बोले- होर्मुज में नाकाबंदी जारी ट्रम्प ने मंगलवार को होर्मुज को लेकर कहा कि वहां अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी अभी भी पूरी तरह लागू है। होर्मुज खुला है और वहां आवाजाही जारी है। वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के अपना वादा पूरी करने तक ईरान होर्मुज को दोबारा नहीं खोलेगा। ट्रम्प के कहने से होर्मुज अमेरिका का हिस्सा हो जाएगा? सीधा जवाब है- नहीं। होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है। इस रास्ते से दुनिया के कई देशों के तेल और गैस से भरे जहाज गुजरते हैं। इसलिए इस पर सिर्फ किसी एक देश का अधिकार नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी देशों के जहाजों को इस रास्ते से आने-जाने का अधिकार है। इसी वजह से कोई भी देश सिर्फ अपने दम पर इस समुद्री मार्ग पर कब्जे का दावा नहीं कर सकता। इसलिए ट्रम्प का मैप एक राजनीतिक दावा या मैसेज माना जा सकता है, लेकिन इससे अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट पर अपने आप कोई नया कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। होर्मुज स्ट्रेट पर किसका अधिकार है? होर्मुज स्ट्रेट का उत्तरी हिस्सा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी हिस्सा ओमान के मुसंदम क्षेत्र से लगता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले जहाज इसी रास्ते से अरब सागर और फिर हिंद महासागर की ओर जाते हैं। इसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि कई देशों के लिए अहम समुद्री मार्ग है। अमेरिका यहां अपने युद्धपोत और नौसैनिक बल तैनात रखता है ताकि समुद्री व्यापार और अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। होर्मुज स्ट्रेट इतना अहम क्यों है? खाड़ी देशों से दुनिया को भेजे जाने वाले करीब 20% कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से होती है। फरवरी में अमेरिका-ईरान जंग शुरू होने से पहले हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल इस रास्ते से होकर गुजरता था। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की एनर्जी सप्लाई काफी हद तक इसी रास्ते पर निर्भर है। इसी वजह से अमेरिका चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही जल्द से जल्द सामान्य हो। दूसरी ओर, ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता और समझौते में किए गए वादे पूरे नहीं करता, तब तक यह रास्ता नहीं खोला जाएगा। ————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प की लोकप्रियता घटी, सिर्फ 33% लोगों की पसंद:ईरान युद्ध के चलते गिरावट; 80% अमेरिकी बोले- जंग लंबी चलेगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की लोकप्रियता ईरान युद्ध के बीच लगातार घट रही है। रॉयटर्स/इप्सोस के ताजा सर्वे में सिर्फ 33% अमेरिकियों ने ट्रम्प के कामकाज को मंजूरी दी। पूरी खबर पढ़ें…

पहले ही मैच में ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन को ड्रॉ पर रोकने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम ने आक्रामक लय को कायम रखते हुए एफआईएच विश्व कप के पूल डी के दूसरे मैच में दक्षिण अफ्रीका को 6 -1 से हराकर दूसरे दौर में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त कर लिया। वेगनेर स्टेडियम पर खेले गए इस मैच में भारत के लिये छह अलग अलग खिलाड़ियों ने गोल किये और तीन गोल तीसरे क्वार्टर में ही हुए। टूर्नामेंट में 11 पदार्पण करने वाली खिलाड़ियों को लेकर उतरे कोच शोर्ड मारिन के चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि यह प्रदर्शन उनके लिये क्या मायने रखता है।
भारत के लिये सुनेलिटा टोप्पो (11वां), नवनीत कौर (17वां), सुशीला चानू (25वां) , दीपिका (38वां), लालरेम्सियामी (44वां) और साक्षी राणा (45वां ) ने गोल दागे। आर्थिक परेशानियों से जूझते हुए टूर्नामेंट की तैयारी के लिये सोशल मीडिया पर अपील के बाद सरकार से मदद पाकर यहां पहुंची दक्षिण अफ्रीका के लिये एकमात्र गोल 55वें मिनट में मिले पेनल्टी कॉर्नर पर कायला डे वाल ने दागा।
इस जीत के बाद अब पूल चरण से चीन, भारत और इंग्लैंड तीनों के रास्ते खुले हैं और बड़े अंतर से जीत के कारण गोल औसत में भारत की उम्मीदें बेहतर होंगी। भारत के दो मैचों में एक जीत और एक ड्रॉ के बाद चीन के समान चार अंक है लेकिन गोल औसत के आधार पर भारत पूल में शीर्ष पर है । इंग्लैंड के एक जीत और एक हार के बाद तीन अंक हैं जबकि दक्षिण अफ्रीका दो मैच हारकर दौड़ से बाहर है।भारत को अब 20 अगस्त को इंग्लैंड से खेलना है जिसके बाद अगले दौर में पहुंचने वाली टीम का निर्धारण होगा।
मैच का पहला मूव दक्षिण अफ्रीका ने बनाया और चौथे ही मिनट में उसे पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन भारतीय गोलकीपर बिछू देवी ने आसान बचाव किया। भारत को जवाबी हमले में सातवें मिनट में बलजीत कौर ने पेनल्टी कॉर्नर दिलाया जिस पर बाहर की ओर जाती दीपिका की फ्लिक पर दक्षिण अफ्रीका की गोलकीपर वान टोंडेर मार्लिसे ने गेंद को दाहिने ओर से बाहर निकाल दिया।
भारत के लिये पहला गोल 11वें मिनट में सुनेलिटा ने किया । साक्षी राणा ने शॉट लेने की कोशिश की लेकिन गेंद छिटक गई और गोल के सामने खड़ी सुनेलिटा ने आसानी से उसे भीतर डाल दिया।दूसरे क्वार्टर में भारत की शुरूआत आक्रामक ही रही और दूसरे मिनट में मिले पेनल्टी कॉर्नर को नवनीत ने गोल में बदलकर बढत दुगुनी कर दी। नवनीत ने चतुराई से एंगल बदला और दाहिनी ओर नीचे की तरफ दमदार शॉट लगाकर गेंद को गोलकीपर और डिफेंडर के बीच से निकालते हुए भारत के लिये दूसरा गोल किया।
दक्षिण अफ्रीका के लिये ओंथाटाइल थाटी जुलू ने जबर्दस्त प्रदर्शन किया और कई बार भारतीय डिफेंस में सेंध लगाने की कोशिश की। वह 23वें मिनट में मैदान के बीच से दाहिने विंग से अकेले गेंद लेकर दौड़ी लेकिन भारतीय डिफेंस चौकस था। इसी मिनट भारत को तीसरा पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन नवनीत के शॉट पर गेंद दक्षिण अफ्रीका के डिफेंडर से टकराई ।भारत को लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर मिले।
पांचवें पेनल्टी कॉर्नर पर दीपिका की फ्लिक पहले रशर से टकराई लेकिन सुशीला ने रिबाउंड पर गोल करके भारत की बढत 3-0 की कर दी।भारत को ब्रेक से चार मिनट पहले एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन दीपिका की दमदार ड्रैग फ्लिक को एक बार फिर वान डोर ने आगे बढकर बचाया और रिबाउंड शॉट पोस्ट से टकरा गया।
The Indian Women’s Team has recorded its biggest-ever win at the FIH Hockey World Cup!
A record-breaking performance on the biggest stage! #HockeyIndia #IndiaKaGame #HWC2026 #INDvsRSA I pic.twitter.com/14WujqD3zf
— Hockey India (@TheHockeyIndia) August 18, 2026
दक्षिण अफ्रीका ने दूसरे क्वार्टर में एकमात्र अच्छा प्रयास 29वें मिनट में किया जब एनत्सोपा मोकोएना भारतीय सर्कल में घुसी तो गोलकीपर के अलावा कोई नहीं था लेकिन उनके शॉट पर गेंद हवा में उछलकर बाहर निकल गई।भारत के पास पहले हाफ के बाद तीन गोल की शानदार बढत थी।
ब्रेक के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने उसी लय को कायम रखा और 38वें मिनट में फॉरवर्ड पंक्ति के बीच बेहतरीन पासिंग से भारत को एक और गोल मिला। नवनीत ने बलजीत को तेजी से पास दिया जिसने बायीं ओर से दीपिका को क्रॉस दिया और दीपिका ने बैकहैंड पर गेंद रोककर सीधे शॉट पर गोल के भीतर डाल दिया।
दक्षिण अफ्रीका को अगले मिनट पलटवार पर मिला पेनल्टी कॉर्नर बेकार गया। भारत ने तीसरे क्वार्टर में एक गोल और दागा और यह आज ही अर्जुन पुरस्कार पाने वाली लालरेम्सियामी के खाते में गया। नेहा से हवा में मिली गेंद को बेहतर नियंत्रण दिखाते हुए उन्होंने रोका और उसी मूव में शॉट लगाते हुए गोल कर दिया।
गोलों की बौछार के बीच अगले मिनट साक्षी राणा ने भी स्कोरर में अपना नाम दर्ज कराया। कप्तान सलीमा टेटे ने इशिका को गेंद सौंपी जिनका शॉट गोलपोस्ट से टकराया लेकिन रिबाउंड पर साक्षी ने भारत का छठा गोल किया।
दक्षिण अफ्रीका ने आखिरी मिनटों में मिले पेनल्टी कॉर्नर को तब्दील करके भारत को क्लीन शीट रखने से रोका।
रूस सीक्रेट रास्ते के जरिये ईरान के सैन्य भंडार को मजबूत करने में मदद कर रहा है। NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ईरान को TNT विस्फोटक, ड्रोन के पार्ट्स और गोला-बारूद भेज रहा है। रिपोर्ट में यूरोपीय सरकार के एक दस्तावेज के हवाले से बताया गया कि सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि इनमें बैलिस्टिक मिसाइल बनाने के लिए जरूरी कुछ पार्ट्स भी हो सकते हैं। ईरान के सैन्य भंडार हाल में अमेरिका और इजराइल के साथ हुए संघर्ष में काफी कम हुए थे। रूस इसके लिए कैस्पियन सागर का रास्ता इस्तेमाल कर रहा है। कैस्पियन सागर से रूस, ईरान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और अजरबैजान क सीमाएं लगती हैं। यह समुद्री रास्ता पश्चिमी देशों की निगरानी से बचने में मदद करता है। यहां से गुजरने वाले जहाज अपना ट्रैकिंग सिस्टम (AIS) बंद कर सकते हैं। इससे उनकी आवाजाही को ट्रैक करना बहुत मुश्किल हो जाता है। कैस्पियन सागर रूस-ईरान के लिए बैकडोर कैस्पियन सागर रूस और ईरान के बीच एक सुरक्षित बैकडोर और रणनीतिक समुद्री रास्ते के रूप में काम करता है। यह बैकडोर दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और पश्चिमी देशों की नजरों से बचकर सैन्य सामान भेजने की सहूलियत देता है। कैस्पियन सागर की कानूनी स्थिति को लेकर लंबे समय तक विवाद रहा है, लेकिन 2018 में ‘कैस्पियन सागर की कानूनी स्थिति पर कन्वेंशन’ पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता कैस्पियन सागर के पांच तटीय देशों को इसके संसाधनों और सुरक्षा पर अधिकार देता है। हालांकि, यह समझौता मुख्य रूप से समुद्री सीमाओं और वहां के संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़ा है। इसके तहत किसी बाहरी देश की सेना को यहां आने की इजाजत नहीं है। इससे यह इलाका इन पांच देशों के खास प्रभाव वाला क्षेत्र बन जाता है। पहले ईरान रूस को ड्रोन देता था, अब रूस मदद कर रहा यूक्रेन युद्ध के दौरान ईरान ने रूस को शाहेद जैसे ड्रोन दिए थे। अब, रूस ईरान को अपने घटे सैन्य भंडार को फिर से भरने में मदद कर रहा है। रूस की ओर से ईरान को सामान भेजे जाने की रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब इजराइल पहले ईरान के अहम बंदरगाह और सैन्य सप्लाई नेटवर्क को निशाना बना चुका है। द टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, इजराइली हमलों में बंदर अंजली पोर्ट की कुछ सुविधाओं और ईरानी नौसेना से जुड़े ठिकानों को नुकसान पहुंचा था। यह पोर्ट ईरान तक सैन्य सामान पहुंचाने वाले समुद्री नेटवर्क का हिस्सा है। चीन से भी मिसाइल के पार्ट्स ले रहा ईरान रूस ने ईरान की मदद करने पर इनकार किया था रूस और ईरान ने इन सामानों की आपूर्ति को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। रूस पहले भी ईरान को सैन्य सामान देने की खबरों से इनकार करता रहा है। रूस ने घोषित सैन्य सहयोग के अलावा ईरान को किसी तरह की सैन्य सामग्री देने से लगातार इनकार किया है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियां सार्वजनिक रूप से यह बताने को तैयार नहीं हैं कि ईरान ने अपने सैन्य भंडार को कितनी तेजी से दोबारा तैयार किया है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइली खुफिया एजेंसियां इस बात से हैरान थीं कि ईरान अपने कुछ मिसाइल भंडार को इतनी तेजी से फिर तैयार करने में सफल रहा। ————— यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने होर्मुज को अमेरिका का नया इलाका बताया:मैप पोस्ट किया; ईरान का जवाब- ट्रम्प की गलतफहमी जल्द दूर हो जाएगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताते हुए सोशल मीडिया पर मैप पोस्ट किया है। ट्रम्प के पोस्ट के बाद ईरान ने कहा कि होर्मुज को अमेरिका का हिस्सा बताना सिर्फ एक गलतफहमी है। पूरी खबर पढ़ें…
Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 18 अगस्त को सोने और चांदी में तेजी दिखी। सोना 2,000 रुपये चढ़कर 1,58,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। सोने में लगातार दूसरे दिन तेजी रही। इसकी वजह रिटेलर्स और स्टॉकिस्ट्स की अच्छी मांग बताई जा रही है। लगातार दो सत्रों में अपरिवर्तित रहने के बाद चांदी में भी तेजी रही।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट
चांदी का भाव 730 रुपये चढ़कर 2,40,730 रुपये प्रति किलो ग्राम पर पहुंच गया। उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में नरमी दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.51 फीसदी गिरकर 4,393 डॉलर प्रति औंस था। चांदी 1.41 फीसदी गिरकर 64.82 डॉलर प्रति औंस थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट की वजह क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल है।
क्रूड ऑयल में उछाल का असर सोने पर पड़ा है
मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज के हेचड प्रवीण सिंह ने कहा कि पश्चिम एशिया में टेंशन बढ़ने से क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है, जिसका असर सोने की कीमतों पर पड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों का युद्धविराम 17 अगस्त को खत्म हो गया। इसके बाद क्रूड में तेजी आई है। 18 अगस्त को एक समय ब्रेंट क्रूड का भाव 91 डॉलर प्रति बैरल पार कर गया था।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल का भी बुलियन पर असर
कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की एवीबी कायनात चेनवाला ने कहा कि स्पॉट सिल्वर 65 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया है। इसकी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल है। उन्होंने कहा कि चांदी में मुनाफावसूली का भी कुछ असर इसकी कीमतों पर पड़ा है। इससे पहले बुलियन में अच्छी तेजी दिखी थी।
बुलियन के लिए फिलहाल स्थितियां अनुकूल
चेनवाला ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में नरमी के बावजूद बुलियन के लिए स्थितियां अनुकूल दिख रही हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की उम्मीद कम हुई है। चीन सहित दुनिया के दूसरे देशों के केंद्रीय बैंक सोना खरीद रहे हैं। साथ ही इनवेस्टर्स की डिमांड भी स्ट्रॉन्ग बनी हुई है।
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क्रूड में तेजी जारी रहने पर बढ़ सकता है इंटरेस्ट रेट
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका और ईरान में से कोई झुकने को तैयार नहीं है। मध्यपूर्व में तनाव घटने की जगह बढ़ता दिखता रहा है। इसका असर क्रूड ऑयल की सप्लाई पर पड़ रहा है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जल्द नहीं खुलता है तो सप्लाई कम होने से क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई बढ़ेगी, जिसे काबू में करने के लिए फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाने को मजबूर होगा। इसका निगेटिव असर सोने पर पड़ेगा।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम का दबाव, घंटों बैठे रहना, बाहर का खाना और लगातार तनाव हमारी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल का हिस्सा बनते जा रहे हैं। इन आदतों का असर धीरे-धीरे दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है। हालांकि, दिल को स्वस्थ रखने के लिए अपनी पूरी लाइफस्टाइल बदलने की जरूरत नहीं है। छोटी-छोटी अच्छी आदतें भी बड़ा फर्क डाल सकती हैं। कार्डियोवस्कुलर सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन ने 8,000 से ज्यादा हार्ट ऑपरेशन किए हैं। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर ऐसी 5 चीजों के बारे में बताया है, जिनसे वह खुद दूरी बनाए रखते हैं।
इनमें स्मोकिंग, ज्यादा प्रोसेस्ड खाना, लंबे समय तक बैठे रहना, अकेलापन और लगातार तनाव जैसी रोज की आदतें शामिल हैं। खास बात यह है कि इनसे बचने के लिए किसी कठिन रूटीन की जरूरत नहीं है। बस अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में थोड़े बदलाव करके दिल की सेहत का बेहतर ख्याल रखा जा सकता है।
- धूम्रपान से रहें दूर
डॉ. Jeremy लंदन सिगरेट, वेप और गांजा पीने से बचने की सलाह देते हैं। धुएं में मौजूद हानिकारक पदार्थ दिल और रक्त वाहिकाओं पर बुरा असर डाल सकते हैं। इसलिए दिल की सेहत के लिए धूम्रपान छोड़ना सबसे जरूरी कदमों में से एक है।
- ज्यादा पैकेट वाला खाना न खाएं
चिप्स, पैकेज्ड स्नैक्स, फास्ट फूड और दूसरे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में अक्सर ज्यादा नमक, चीनी और खराब फैट होता है। डॉक्टर की सलाह है कि खाने में ताजे फल, सब्जियां, दाल, साबुत अनाज और घर का बना खाना ज्यादा शामिल करें।
- घंटों बैठे न रहें
आजकल काम के दौरान कई लोग लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं। डॉ. लंदन के मुताबिक, हमारा शरीर लगातार बैठे रहने के लिए नहीं बना है। रोज थोड़ा चलना भी अच्छी शुरुआत है। खाने के बाद 10 मिनट की वॉक जैसी छोटी आदत भी फायदेमंद हो सकती है।
- अकेलेपन को नजरअंदाज न करें
दिल की सेहत का संबंध सिर्फ खान-पान और एक्सरसाइज से नहीं है। लंबे समय तक अकेलापन भी शरीर और दिमाग पर असर डाल सकता है। परिवार, दोस्तों और करीबी लोगों के साथ समय बिताना और उनसे जुड़े रहना जरूरी है।
- लंबे समय तक तनाव न पालें
लगातार तनाव रहने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और दिल पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए तनाव को नजरअंदाज करने के बजाय उसे कम करने की कोशिश करनी चाहिए। अच्छी नींद, एक्सरसाइज, आराम और अपनों के साथ समय बिताना इसमें मदद कर सकता है।
खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता
डॉ. लंदन का कहना है कि इन आदतों को अपनाने से हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। लेकिन स्वस्थ जीवनशैली और जोखिम कारकों पर नियंत्रण दिल को बेहतर स्थिति में रखने में मदद कर सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य स्वास्थ्य सुझावों पर आधारित है। इसे किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प न मानें। किसी भी नए व्यायाम को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
Walking vs Swimming: कौन सी कसरत तेजी से घटा सकती है वजन? जानिए पूरा हिसाब
किसी फिल्म की खराब क्वालिटी की चर्चा आमतौर पर उसके लिए नुकसानदायक मानी जाती है, लेकिन चीन की एक एनिमेटेड फिल्म के साथ कहानी पूरी तरह उलट गई। ‘Niu Lai’ (The Cow Is Coming) को सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर ट्रोल किया। फिल्म के कमजोर ग्राफिक्स, अजीब किरदारों और उलझी कहानी को लेकर ऐसे-ऐसे कमेंट किए गए कि यह देखते ही देखते चर्चा में आ गई। शुरुआत में फिल्म को दर्शकों का खास रिस्पॉन्स नहीं मिला और इसकी कमाई भी बेहद कम रही। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए फिल्म के क्लिप्स ने लोगों की जिज्ञासा बढ़ा दी।
अब कई दर्शक फिल्म को इसलिए देखने पहुंच रहे हैं ताकि खुद तय कर सकें कि यह वाकई इतनी खराब है या नहीं। हैरानी की बात यह है कि जिस फिल्म को लोग मजाक का विषय बना रहे थे, वही अब बॉक्स ऑफिस पर बड़ी फिल्मों को टक्कर दे रही है। फिल्म की यह अजीबोगरीब सफलता सोशल मीडिया के दौर में चर्चा का नया उदाहरण बन गई है।
पहले 10 दिन में सिर्फ 300 टिकट बिके
5 अगस्त को रिलीज हुई इस 86 मिनट की फिल्म की शुरुआत बेहद कमजोर रही। पहले 10 दिनों में इसकी कमाई सिर्फ 7,700 युआन यानी करीब ₹1.04 लाख रही। देशभर में 300 से भी कम लोगों ने फिल्म का टिकट खरीदा था। फिल्म के प्रमोशन पर भी खास ध्यान नहीं दिया गया था। न कोई बड़ा प्रचार अभियान हुआ, न ट्रेलर जारी किया गया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई फिल्म की ‘बदसूरती’
फिर फिल्म के कुछ क्लिप सोशल मीडिया पर पहुंच गए। इसके बाद लोगों ने इसके खराब कंप्यूटर ग्राफिक्स, अजीब किरदारों, कमजोर आवाज और उलझी कहानी का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। किसी ने इसे खराब स्टूडेंट प्रोजेक्ट जैसा बताया, तो किसी ने इसे AI से भी खराब कह दिया। देखते ही देखते फिल्म को ‘2026 की सबसे खराब फिल्म’ जैसे टैग मिलने लगे। लेकिन यहीं से कहानी पलट गई।
मजाक बना फिल्म के लिए फ्री प्रमोशन
सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोलिंग ने फिल्म को खत्म करने के बजाय लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी। लोग अब यह देखने के लिए टिकट खरीदने लगे कि आखिर फिल्म वास्तव में इतनी खराब है या नहीं। यानी जिस चीज को फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी माना जा रहा था, वही उसकी सबसे बड़ी मार्केटिंग बन गई।
₹1 लाख से सीधे ₹20 करोड़ के पार
चीनी टिकटिंग प्लेटफॉर्म Maoyan के आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म अब 14.9 मिलियन युआन यानी करीब 20 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है। खास बात यह है कि फिल्म अब चीन के बॉक्स ऑफिस पर बड़ी फिल्मों के साथ नजर आ रही है। यानी जिस फिल्म को शुरुआत में कोई पूछ भी नहीं रहा था, वह अचानक चर्चा में आ गई।
सिर्फ दो लोगों ने 5 साल में बनाई फिल्म
‘Niu Lai’ की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसे सिर्फ दो लोगों ने करीब पांच साल में तैयार किया। शिन युमेंग और सुन लिफांग को फिल्म के लेखक, निर्देशक, निर्माता और वॉइस आर्टिस्ट के तौर पर क्रेडिट दिया गया है। फिल्म का इकलौता चर्चित प्रमोशनल पोस्टर भी काफी खूबसूरत है, जिसमें पारंपरिक इंक-वॉश आर्ट नजर आती है। लेकिन पोस्टर और फिल्म के अंदर दिखने वाले साधारण एनिमेशन में जमीन-आसमान का अंतर है।
रिलीज करने से पहले भी मिली थी चेतावनी
फिल्म के वितरक के बारे में बताया गया कि उन्हें इसकी क्वालिटी को लेकर फिल्म रिलीज न करने की सलाह दी गई थी। इसके बावजूद उन्होंने फिल्म रिलीज की, क्योंकि वह निर्देशक के दोस्त थे। आज वही फैसला फिल्म के लिए फायदे का सौदा साबित होता नजर आ रहा है।
AI के दौर में कुछ लोगों को पसंद आई ‘कच्ची’ कला
हालांकि हर कोई फिल्म की आलोचना से सहमत नहीं है। कुछ दर्शकों को इसका साधारण और हाथ से तैयार किया गया अंदाज पसंद आया। उनका कहना है कि ऐसे समय में जब AI कुछ ही सेकंड में शानदार विजुअल तैयार कर सकता है, इस फिल्म की कमियां भी उसे अलग बनाती हैं। लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी खासियत शायद यही है कि लोग इसे अच्छा मानकर नहीं, बल्कि खराब होने की बात सुनकर देखने पहुंच रहे हैं। कभी फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बनी उसकी खराब क्वालिटी, आज उसी की सबसे बड़ी ताकत और चर्चा की वजह बन गई है।
Xiaomi के सब-ब्रांड Redmi ने ऐलान किया है कि Redmi Note 17 सीरीज जल्द ही ग्लोबल मार्केट में दस्तक देने वाली है। कंपनी ने सोमवार को इसकी लॉन्च डेट की जानकारी दी। बता दें कि इस सीरीज के फोन जुलाई में चीन में लॉन्च किए गए थे, और ब्रांड ने Redmi Note 17 के 5G और 4G वेरिएंट भी ग्लोबल लेवल पर पेश किए थे। उम्मीद है कि ग्लोबल लाइनअप में तीन मॉडल होंगे — Redmi Note 17, Note 17 Pro और एक नया Note 17 Pro Max। इनमें से आखिरी वाले (Pro Max) के कई स्पेसिफिकेशन भी अब सामने आ गए हैं।
Redmi Note 17 सीरीज की लॉन्च डेट
Xiaomi ने X पर एक पोस्ट में घोषणा की कि Redmi Note 17 सीरीज को 27 अगस्त को ग्लोबल लेवल पर लॉन्च किया जाएगा। Xiaomi की ग्लोबल वेबसाइट पर एक नई माइक्रोसाइट से Redmi Note 17 Pro Max नाम के एक नए मॉडल के जल्द लॉन्च होने की पुष्टि होती है। डिजाइन की बात करें तो, इस लाइनअप में फोटोक्रोमिक टेक्नोलॉजी होगी। Redmi का कहना है कि इसमें एक नया ‘क्लाउड ब्लश’ एलिमेंट है जो सूरज की रोशनी के साथ रिएक्ट कर सकता है।
आने वाली Redmi Note 17 सीरीज में 6.83 इंच का CrystalRes AMOLED डिस्प्ले मिलेगा, जो 1.5K रेजोल्यूशन के साथ आएगा। फोन में Snapdragon 6 Gen 5 चिपसेट दिया जाएगा। इसके साथ 24GB तक रैम मिलेगी, जिसमें वर्चुअल रैम का सपोर्ट भी शामिल होगा। Redmi का दावा है कि फोन 72 महीने तक स्मूद परफॉर्मेंस बनाए रखेगा।
माइक्रोसाइट से धूल और पानी से बचाव के लिए IP66 + IP68 + IP69 + IP69K रेटिंग्स का भी पता चलता है। Xiaomi के सब-ब्रांड का कहना है कि उनके फोन SGS और TÜV SÜD दोनों से सर्टिफाइड हैं।
कैमरे की बात करें तो अभी इसके बारे में पूरी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन कंपनी ने कन्फर्म किया है कि Note 17 सीरीज में AI-पावर्ड पोर्ट्रेट एन्हांसमेंट फीचर होगा। ब्रांड द्वारा शेयर किए गए कैमरा सैंपल में f/1.5 अपर्चर, 26mm फोकल लेंथ, 1/60-सेकंड शटर स्पीड और ISO 125 की जानकारी मिलती है।
हालांकि, सबसे खास बात इसकी बैटरी क्षमता है, जो 10,000mAh की है। जानकारी से पता चलता है कि यह Redmi 17 Pro Max के लिए है, जो 100W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगा, हालांकि Xiaomi ने कन्फर्म किया है कि वे बॉक्स में पावर एडॉप्टर नहीं देंगे। Redmi Note 17 सीरीज खरीदने पर ग्राहकों को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के 2 महीने का YouTube Premium, तीन महीने का Spotify Premium, छह महीने का Google One प्लान, 24 महीने के अंदर एक बार फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट और 36 महीने के अंदर एक बार फ्री बैटरी सर्विस मिलेगी।
पिछली रिपोर्ट्स के अनुसार, Redmi Note 17 सीरीज भारत में 18 या 20 सितंबर को लॉन्च हो सकती है। लीक से यह भी पता चलता है कि Redmi Note 17 Pro Max में 50MP (f/1.8) का प्राइमरी रियर कैमरा हो सकता है, साथ ही 8MP का अल्ट्रा-वाइड-एंगल लेंस और सेल्फी व वीडियो कॉल के लिए 32MP का फ्रंट कैमरा भी हो सकता है। हालांकि, पहले सामने आई जानकारी में फोन में 9,210mAh बैटरी होने की बात कही गई थी।
लेकिन अब ग्लोबल लॉन्च डेट कन्फर्म होने के बाद, हम उम्मीद कर सकते हैं कि Redmi Note 17 सीरीज के लॉन्च से पहले के दिनों में और भी जानकारी सामने आएगी।
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अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ 60 दिन का समझौता सोमवार को खत्म हो गया। इसका मकसद दोनों देशों के बीच युद्ध रोकना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विवाद का समाधान निकालना था। डेडलाइन खत्म होने के बावजूद न तो कोई फाइनल समझौता हुआ, न ही अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया। 60 दिनों के दौरान ट्रम्प ने कई बार कहा कि अगर बातचीत नाकाम रही तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। माना जा रहा था कि डेडलाइन खत्म होते ही अमेरिका फिर बड़ा हमला कर सकता है। समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले ट्रम्प का रुख बदलता दिखा। एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा, “हम पहले के मुकाबले हल्का रुख अपना रहे हैं।” वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अमेरिका, ईरान को तीन तरीके से घेर रहा है। 1. आर्थिक दबाव- ईरान की कमाई और अर्थव्यवस्था को कमजोर करना। 2. नौसैनिक नाकाबंदी- ईरान के लिए समुद्र के रास्ते व्यापार मुश्किल करना। 3. बातचीत- सीधे या दूसरे देशों के जरिए ईरान से समझौते की कोशिश करना। ट्रम्प के इस बयान का मतलब अभी अमेरिका सीधे बड़ा हमला करने की बजाय ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहा है, समुद्र के रास्ते उसका व्यापार रोक रहा है और बातचीत से समझौते की कोशिश भी कर रहा है। ट्रम्प हमला रोककर क्या हासिल करना चाहते हैं? ट्रम्प की मौजूदा रणनीति को समझने के लिए सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका युद्ध को खत्म नहीं मान रहा है। ट्रम्प को लगता है कि फिलहाल ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना सैन्य हमले से ज्यादा असरदार हो सकता है। अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ने ईरान की आर्थिक मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। ट्रम्प का मानना है कि अगर ईरान युद्ध में नहीं उलझा रहेगा तो उसे अपनी असली आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ेगा। जैसे कि बर्बाद बुनियादी ढांचा, कमजोर अर्थव्यवस्था, महंगाई और पैसों की कमी। यानी अमेरिका का दांव यह है कि युद्ध रोककर ईरान को कमजोर होने दिया जाए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को कहा कि अमेरिका कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य तीनों तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि युद्ध जारी रहने पर ईरानी सरकार अपनी आर्थिक परेशानियों के लिए जंग को जिम्मेदार ठहरा सकती है। जब युद्ध नहीं होगा, तब जनता और सरकार को आर्थिक संकट का सामना सीधे करना पड़ेगा। ट्रम्प को ईरान के खिलाफ रणनीति क्यों बदलनी पड़ी? ट्रम्प ने फरवरी में इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। शुरुआत में उम्मीद थी कि संघर्ष ज्यादा लंबा नहीं चलेगा, लेकिन यह कई महीनों तक खिंच गया। अब अमेरिका के सामने दो तरह का दबाव है। एक तरफ वह ईरान के खिलाफ अपने सैन्य लक्ष्य हासिल करना चाहता है, दूसरी तरफ लंबे युद्ध की बढ़ती लागत भी उसके लिए चिंता बन रही है। ट्रम्प लगातार कहते रहे हैं कि ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत है। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका के सामने दो रास्ते हैं- या तो ईरान को आर्थिक रूप से टूटने दिया जाए या फिर उस पर बहुत बड़ा सैन्य हमला किया जाए। फिलहाल ट्रम्प पहला रास्ता आजमाते दिख रहे हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि अमेरिका ने टकराव खत्म कर दिया है। रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रम्प सरकार चीन की उन रिफाइनरियों पर नए प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है जो ईरानी तेल खरीदती हैं। इसके अलावा ईरान के साथ लेन-देन करने वाले चीनी बैंकों और उन संस्थाओं पर भी कार्रवाई की तैयारी है, जिन पर प्रतिबंधों से बचने में ईरान की मदद करने का आरोप है। यानी हमला भले ही रुका हुआ है, लेकिन दबाव कम नहीं हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा सौदेबाजी का मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव में होर्मुज स्ट्रेट सबसे बड़ा दांव बन गया है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट को लेकर किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। ईरान इस मुद्दे पर ओमान के साथ बातचीत कर रहा है। 9 अगस्त को ईरानी अधिकारियों ने कहा था कि ओमान के साथ समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। लेकिन तेहरान ने यह भी साफ कर दिया कि ओमान के साथ समझौता होने का मतलब यह नहीं है कि होर्मुज स्ट्रेट तुरंत अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करे, प्रतिबंध हटाए और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा दे। यानी अमेरिका चाहता है कि समुद्री रास्ते और जहाजों की आवाजाही सामान्य हो, जबकि ईरान इसे अमेरिकी रियायतों से जोड़कर देख रहा है। इसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट अब सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं रह गया है। यह दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा सौदेबाजी का हथियार बन चुका है। युद्ध की बड़ी कीमत चुका रहा अमेरिका सूत्रों के मुताबिक, ईरान के साथ पांच महीने चले युद्ध में अमेरिका ने लंबी दूरी तक मार करने वाली बड़ी संख्या में मिसाइलें इस्तेमाल की हैं। इनमें ATACMS और प्रिसीजन स्ट्राइक मिसाइल शामिल हैं। दो सूत्रों ने दावा किया कि अमेरिका ने इन हथियारों का लगभग पूरा भंडार इस्तेमाल कर लिया है, हालांकि उन्होंने सटीक संख्या नहीं बताई। अमेरिका युद्ध के दौरान कम से कम 45 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भी गंवा चुका है। यह उसके कुल बेड़े का करीब 25% है। अमेरिकी वायुसेना के मुताबिक, एक रीपर ड्रोन की कीमत उसके उपकरणों के आधार पर 3 से 5 करोड़ डॉलर तक हो सकती है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, इन नुकसानों की कुल कीमत 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकती है। इन ड्रोन का इस्तेमाल खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास निगरानी और हमलों के लिए किया गया था। कम ऊंचाई और धीमी गति के कारण ये ईरानी बलों और ईरान समर्थित समूहों के निशाने पर रहे। युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास करीब 185 रीपर ड्रोन थे। इनमें 165 वायुसेना और 20 मरीन कॉर्प्स के पास थे। मई में अमेरिकी वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल डेविड टैबर ने सीनेट को बताया था कि वायुसेना के पास करीब 135 रीपर ड्रोन बचे हैं। पेंटागन पहले से ही रीपर ड्रोन को धीरे-धीरे हटाकर उनकी जगह कम कीमत वाले नए हथियारबंद ड्रोन लाने की योजना पर काम कर रहा है। लंबी दूरी की मिसाइलों की कीमत भी 10 लाख डॉलर से ज्यादा होती है। इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में भी किया गया है। अगर अमेरिका के पास इन हथियारों का भंडार कम होता है तो भविष्य में ईरान पर बड़े हमले या रूस और चीन जैसे दूसरे प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ उसकी सैन्य क्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका दुनिया भर में मौजूद अपने सैन्य भंडार से इन हथियारों की फिर से आपूर्ति कर सकता है। ईरान की मांगें क्या हैं? अमेरिका आर्थिक दबाव बढ़ाकर ईरान को समझौते के लिए तैयार करना चाहता है। लेकिन ईरान भी अपने पास मौजूद विकल्पों का इस्तेमाल कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। ईरान ने अमेरिका के सामने होर्मुज खोलने के लिए 6 मांगें रखी हैं। यानी अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों को दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है, जबकि ईरान दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग पर अपनी पकड़ को दबाव के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। यही वजह है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत की गुंजाइश होते हुए भी समझौते की राह आसान नहीं है।
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ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने ओमान पर बमबारी की धमकी दी:कहा- ईरान मुद्दे पर बीच में न आए; IRGC का अमेरिका से बातचीत का दावा खारिज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर ओमान को बमबारी की धमकी दी है। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा कि अगर ओमान अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में बाधा बना, तो अमेरिका उस पर ‘बमबारी करेगा’। पूरी खबर यहां पढ़ें…

भारत के आयुष शेट्टी ने सोमवार को बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 के शुरुआती दौर के रोमांचक मुकाबले में चीन के दुनिया के नंबर 1 खिलाड़ी शी यू की को हराकर तहलका मचा दिया जबकि महिला वर्ग में पीवी सिंधु ने आसान जीत हासिल की।रैंकिंग में 22वें स्थान पर मौजूद 21 वर्षीय भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपने डेब्यू मैच में 30 वर्षीय चीनी टॉप सीड खिलाड़ी के खिलाफ संयम बनाए रखा और 21-14, 13-21, 21-19 से शानदार जीत हासिल की।
आयुष इस मैच से पहले शी यू की के खिलाफ 0-3 के हेड-टू-हेड रिकॉर्ड के साथ उतरे थे, लेकिन उनमें से दो मुकाबले काफी कड़े रहे थे। पिछले साल इंडोनेशिया मास्टर्स में, शी यू की ने भारतीय खिलाड़ी को 21-19, 21-19 से हराया था, जबकि इस साल की शुरुआत में मलेशिया ओपन के राउंड ऑफ़ 16 में आयुष को हराने के लिए उन्हें तीन गेम और एक घंटा 10 मिनट का समय लगा था। हालांकि, उनकी सबसे हालिया भिड़ंत एकतरफा रही थी। अप्रैल में निंगबो में बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप के फाइनल में शी यू की ने आयुष को 21-8, 21-10 से हराया था।
नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन के खिलाफ, आयुष ने दिखाया कि अप्रैल की उस हार के बाद से उनमें काफी सुधार हुआ है। भारतीय खिलाड़ी ने मजबूत शुरुआत की और 8-3 की बढ़त बना ली। उन्होंने अपनी बढ़त को 13-6 तक पहुंचाया और फिर संयम बनाए रखते हुए पहला गेम 21-14 से जीत लिया।
दूसरे गेम में शी यू की ने वापसी की; दोनों खिलाड़ी 8-8 की बराबरी पर थे, जिसके बाद चीनी शटलर ने धीरे-धीरे गेम पर पकड़ बना ली। शी यू की 15-10 से पांच अंक आगे हो गए और फिर बढ़त को 17-13 तक पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने लगातार चार अंक जीतकर मैच को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया। आखिरी गेम में स्कोर 3-3 से बराबर था, लेकिन फिर आयुष ने लगातार तीन पॉइंट जीतकर बढ़त बना ली और इंटरवल तक 11-5 से आगे हो गए। इसके बाद, शी यू की की वापसी की कोशिशों के बावजूद आयुष ने अपना संयम बनाए रखा और दुनिया के नंबर 1 बैडमिंटन खिलाड़ी के खिलाफ शानदार जीत हासिल की।
वहीं, पीवी सिंधु ने आयरलैंड की सोफिया नोबल के खिलाफ सीधे गेम में जीत के साथ अपने महिला सिंगल्स अभियान की शुरुआत की। दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट और पांच बार की वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट, नौवीं वरीयता प्राप्त भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने दुनिया की 141वें नंबर की खिलाड़ी को 29 मिनट में 21-7, 21-13 से हराया। 2019 की वर्ल्ड चैंपियन सिंधु का अगला मुकाबला राउंड ऑफ़ 32 में कनाडा की वेन यू झांग से होगा।
Who doesn't want to relive that Ayush Shetty win?
WATCH: Highlights from a huge result at the World Championships as Ayush beat defending champion Shi Yu Qi #SmashForIndia #BWFWorldChampionships #NewDelhi2026 pic.twitter.com/EEpOAIy4Ew
— BAI Media (@BAI_Media) August 17, 2026
इस भारतीय खिलाड़ी के नाम दो ब्रॉन्ज मेडल, दो सिल्वर मेडल और एक गोल्ड मेडल (जो उन्होंने 2019 में जीता था) दर्ज हैं। इस बड़े इवेंट में सेमीफाइनल में पहुंचने पर उनका कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो जाएगा और वह वर्ल्ड चैंपियनशिप के इतिहास में छह मेडल जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन जाएंगी। केवल दो अन्य खिलाड़ियों ने पांच वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल जीते हैं — चीन के लिन डैन, जिनके नाम पांच मेन्स सिंगल्स गोल्ड हैं, और उनके देश के झाओ युनलेई, जिन्होंने तीन मिक्स्ड डबल्स और दो विमेंस डबल्स खिताब जीते हैं। सिंधु ने शुरू से ही अपनी कमज़ोर मानी जा रही प्रतिद्वंद्वी पर दबदबा बनाए रखा और 29 मिनट में आसानी से मैच जीत लिया।
इससे पहले दिन में, ट्रेसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने स्पेन की पाउला लोपेज़ और लूसिया रोड्रिग्ज़ के खिलाफ 21-9, 21-13 की शानदार जीत के साथ महिला डबल्स के दूसरे राउंड में जगह बनाई। भारतीय जोड़ी को राउंड ऑफ़ 64 के अपने मैच में जीत हासिल करने में सिर्फ़ 33 मिनट लगे। कॉमनवेल्थ गेम्स मेडलिस्ट जोड़ी का अगला मुकाबला राउंड ऑफ़ 32 में अमेरिका की लॉरेन लैम और एलिसन क्विन ली (16वीं वरीयता प्राप्त) से होगा।
एमआर अर्जुन और हरिहरन अमसाकरुणन पुरुष डबल्स में आगे बढ़े, क्योंकि उनके आयरिश प्रतिद्वंद्वी स्कॉट गिल्डिया और पॉल रेनॉल्ड्स शुरुआती राउंड के मैच के दौरान चोट के कारण हट गए। दुनिया में 24वें नंबर की भारतीय जोड़ी ने पहला गेम 21-16 से जीता था और दूसरे गेम में 6-4 से आगे चल रही थी, तभी दुनिया के 102वें नंबर की आयरिश जोड़ी आगे नहीं खेल पाई। इस नतीजे के साथ भारतीय जोड़ी राउंड ऑफ़ 32 में पहुंच गई है, जहां उनका मुकाबला 15वीं वरीयता प्राप्त रिपब्लिक ऑफ़ कोरिया की जोड़ी कांग मिन ह्युक और की डोंग जू से होगा।
पुरुष डबल्स की स्टार जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी, जो पांचवीं वरीयता प्राप्त हैं, को दूसरे दौर में सीधे प्रवेश मिला है, जहां उनका सामना स्कॉटलैंड के अलेक्जेंडर डन और एडम प्रिंगल से होगा।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अवसरों को पहचानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना। विकासशील देशों के लिए बड़े बहुपक्षीय मंच केवल औपचारिक सम्मेलन नहीं होते, बल्कि वे निवेश,व्यापार, तकनीक,ऊर्जा और वैश्विक राजनीतिक स्वीकार्यता के नए रास्ते खोलते हैं। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना इस वास्तविकता को अच्छी तरह समझती थी। उन्होंने भारत, चीन, रूस, अमेरिका, जापान और खाड़ी देशों के साथ संबंधों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने की कोशिश की और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बांग्लादेश की आर्थिक जरूरतों तथा विकास की संभावनाओं को प्रमुखता दी।
भारत की ओर से प्रधानमंत्री तारिक रहमान को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाना महत्वपूर्ण था। यह केवल भारत की ओर से दिया गया निमंत्रण नहीं था,बल्कि बांग्लादेश के लिए वैश्विक दक्षिण की बदलती आर्थिक और राजनीतिक संरचना से जुड़ने का अवसर था। इस मंच पर उपस्थित होकर तारिक रहमान भारत के साथ सीधे संवाद कर सकते थे, चीन और रूस सहित प्रमुख उभरती शक्तियों के नेताओं से संपर्क बढ़ा सकते थे तथा बांग्लादेश के लिए निवेश, व्यापार और आर्थिक सहयोग के नए अवसर तलाश सकते थे।
यदि तारिक रहमान इस अवसर से दूर रहते है,तो इसका नुकसान केवल एक भारत यात्रा छूटने तक सीमित नहीं रहेगा। सबसे पहला नुकसान उनकी व्यक्तिगत कूटनीतिक छवि को हो सकता है। सत्ता संभालने के बाद किसी प्रधानमंत्री की पहली प्राथमिकता यह होती है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपनी सरकार की दिशा और प्राथमिकताओं का भरोसा दिलाए। ब्रिक्स जैसा मंच उन्हें यह अवसर देता कि वे बांग्लादेश की नई सरकार को एक व्यावहारिक, आर्थिक विकास केंद्रित और बहुध्रुवीय विदेश नीति वाली सरकार के रूप में प्रस्तुत करते। भारत की राजधानी में विश्व की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधियों के बीच उनकी मौजूदगी उनके लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक परिचय बन सकती है। तारिक रहमान यदि दिल्ली आते तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत के जरिए मतभेदों को व्यापक द्विपक्षीय एजेंडे से अलग रखने की कोशिश कर सकते थे। इससे यह संदेश जाता कि शेख हसीना का विवाद अपनी जगह है, लेकिन बांग्लादेश और भारत के राष्ट्रीय हित उससे कहीं बड़े हैं।
ब्रिक्स का मंच विकासशील देशों के लिए आर्थिक सहयोग और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अधिक प्रभाव की संभावनाओं से जुड़ा है। बांग्लादेश जैसे देश के लिए ऐसे मंच पर अपनी निवेश जरूरतों, औद्योगिक क्षमता, निर्यात संभावनाओं और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को प्रस्तुत करना उपयोगी हो सकता है। तारिक रहमान वहां भारत के साथ ही चीन, रूस, खाड़ी देशों और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधियों से बातचीत कर सकते थे। किसी औपचारिक समझौते के बिना भी ऐसे संपर्क भविष्य के निवेश और व्यापार के लिए रास्ते खोलते हैं।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नेताओं की व्यक्तिगत संपर्क भी राष्ट्रीय शक्ति का हिस्सा होती है। किसी शिखर सम्मेलन में एक नेता की उपस्थिति अनेक द्विपक्षीय मुलाकातों,अनौपचारिक संवादों और भविष्य के संपर्कों का आधार बनती है। तारिक रहमान के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण था क्योंकि उनकी सरकार अभी अपनी विदेश नीति की नई पहचान बना रही है। ब्रिक्स में भागीदारी उन्हें यह दिखाने का अवसर देती कि बांग्लादेश किसी एक शक्ति-गुट पर निर्भर नहीं है और वह भारत,चीन,रूस,पश्चिमी देशों तथा खाड़ी की शक्तियों के साथ संतुलित संबंध चाहता है।
बंगलादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का मुद्दा बांग्लादेश की घरेलू राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकता है,लेकिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में किसी एक नेता के भविष्य को पूरे द्विपक्षीय संबंधों की कसौटी बना देना दीर्घकाल में विकल्पों को सीमित कर सकता है। तारिक रहमान के लिए ब्रिक्स का मंच इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे वे पाकिस्तान के साथ बढ़ते संबंधों को संतुलित करने का संदेश दे सकते थे। पाकिस्तान से संबंध मजबूत करना बांग्लादेश का संप्रभु अधिकार है,लेकिन भारत के साथ दूरी बनाकर पाकिस्तान के करीब जाना दक्षिण एशिया में अनावश्यक रणनीतिक ध्रुवीकरण पैदा कर सकता है। दिल्ली आकर तारिक रहमान यह स्पष्ट कर सकते थे कि ढाका की विदेश नीति किसी एक देश के विरुद्ध नहीं, बल्कि बांग्लादेश के आर्थिक और राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।
यहां शेख हसीना की विदेश नीति का अनुभव भी प्रासंगिक है। उनके शासनकाल की आलोचना के बावजूद यह स्वीकार करना होगा कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों को बांग्लादेश के आर्थिक हितों से जोड़ने का प्रयास किया। भारत के साथ निकटता के साथ उन्होंने चीन, जापान, रूस, अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ भी संबंध बनाए रखे। उनका उद्देश्य यह था कि बांग्लादेश किसी एक शक्ति पर निर्भर न रहे और अलग-अलग देशों से अपने विकास के लिए अवसर प्राप्त करे।
बहरहाल तारिक रहमान यदि ब्रिक्स से दूर रहते है तो वे एक ऐसे मंच का उपयोग नहीं कर पाएंगे जहां वे अपनी सरकार की वैश्विक छवि गढ़ सकते थे, भारत के साथ सीधे संवाद कर सकते थे,निवेश के अवसर तलाश सकते थे और बांग्लादेश को वैश्विक दक्षिण की उभरती आर्थिक व्यवस्था में अधिक प्रभावी स्थान दिलाने की कोशिश कर सकते थे।
(लेखक विदेश नीति के जानकार है और लेख में छपे विचार उनके व्यक्तिगत हैं)


