कोरिया मास्टर्स जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनी अश्मिता चालिहा (Video)

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी अश्मिता चालिहा ने रविवार को कोरिया मास्टर्स 2026 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला एकल फाइनल में चीन की हान कियान्शी के खिलाफ एक गेम से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए खिताबी जीत दर्ज की। आज यहां 26 वर्षीय अश्मिता ने चौथी वरीयता प्राप्त चीनी खिलाड़ी हान को 14-21, 21-14, 21-14 से हराकर कोरिया मास्टर्स का खिताब जीता और इसके साथ ऐसा करने वाली पहली भारतीय बनने का गौरव हासिल किया।

यह टूर्नामेंट बीडब्ल्यूएफ सुपर 300 स्तर का है। यह जीत अश्मिता चालिहा का पहला BWF World Tour खिताब भी है और खास बात यह रही कि उन्होंने अपने पहले ही फाइनल में यह उपलब्धि हासिल की। इससे पहले भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी जून में मकाऊ ओपन के सेमीफाइनल तक पहुंची थीं। इसके साथ ही अश्मिता उन चुनिंदा भारतीय महिला एकल खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गई हैं, जिन्होंने बीडब्ल्यूएफ सुपर 300 या उससे ऊंचे स्तर के बैडमिंटन खिताब जीते हैं। इस सूची में ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल और पीवी सिंधु के अलावा देविका सिहाग और तन्वी शर्मा भी शामिल हैं।

खिताब जीतने के बाद अश्मिता चालिहा ने कहा, “जीत के बाद मैं बहुत अविश्वसनीय महसूस कर रही हूं। लेकिन मैं अभी इसे समझने की कोशिश कर रही हूं।”इस जीत के साथ भारत ने बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर पर महिला एकल में लगातार दूसरा खिताब अपने नाम किया है। पिछले सप्ताह तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन का खिताब जीतकर यह सिलसिला शुरू किया था। अश्मिता चालिहा ने क्वार्टर-फाइनल में ही बड़ा उलटफेर करते हुए जापान की शीर्ष वरीयता प्राप्त हिना अकेची को हराकर अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर दी थी।

फाइनल में भी उन्होंने शानदार शुरुआत की और हान कियान्शी के खिलाफ 9-5 की बढ़त बना ली। हालांकि, चीनी खिलाड़ी ने लगातार पांच अंक हासिल करते हुए मुकाबले का रुख पलट दिया और अश्मिता को पहला गेम गंवाना पड़ा। इसके बाद अश्मिता चालिहा ने अगले दोनों गेम में शानदार वापसी की। उन्होंने इंटरवल पर मिली बढ़त का बेहतरीन फायदा उठाया और 53 मिनट में फाइनल अपने नाम कर लिया।

इससे पहले उन्होंने ऑल-इंडियन सेमीफाइनल में हमवतन रक्षिता रामराज को भी हराया था। अश्मिता चालिहा अब इस साल महिला एकल में बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीतने वाली चौथी भारतीय महिला बन गई हैं। उनसे पहले जापान ओपन में पीवी सिंधु, थाईलैंड मास्टर्स में देविका सिहाग और ताइपे ओपन में तन्वी शर्मा ने खिताब जीते थे।

‘लड़कियों को रेप में मजा आता है…’ NEET प्रोटेस्ट पर विवादित टिप्पणी करने के लिए दक्षिणपंथी कमेंटेटर टीजी मोहनदास गिरफ्तार

केरल पुलिस ने सोमवार को पॉलिटिकल कमेंटेटर टीजी मोहनदास को औपचारिक रूप से गिरफ़्तार कर लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली में NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों के बारे में एक YouTube वीडियो में भड़काऊ बातें कही थीं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मोहनदास को रविवार को कोच्चि में मट्टनचेरी के पास कूवापादम स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया और तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस स्टेशन लाया गया, जहां आधी रात के आसपास उनकी गिरफ्तारी दर्ज की गई। उम्मीद है कि उन्हें सोमवार को बाद में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।

पुलिस ने मोहनदास के यूट्यूब चैनल से जुड़ी जानकारी जुटाई

इस मामले की जांच कर रही साइबर पुलिस टीम ने मोहनदास के यूट्यूब चैनल ‘पत्रिका’ से जुड़ी जानकारी भी जुटाई और उन इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को जब्त किया जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर वीडियो रिकॉर्ड और अपलोड करने के लिए किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि इन डिवाइस को कोर्ट में पेश किए जाने और बाद में उनकी फॉरेंसिक जांच किए जाने की उम्मीद है।

पुलिस ने कहा कि जांच के नतीजों के आधार पर और भी आरोप जोड़े जा सकते हैं।

बता दें कि यह मामला एक शिकायत से जुड़ा है जिसमें आरोप लगाया गया है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद, 24 और 25 जुलाई को मोहनदास के चैनल पर पोस्ट किए गए वीडियो का मकसद अशांति फैलाना और कानून-व्यवस्था को बिगाड़ना था।

महिलाओं को “रेप होने में मजा आता है”

पुलिस के मुताबिक, दिल्ली में छात्रों के जमावड़े का जिक्र करते हुए मोहनदास ने विरोध प्रदर्शन में शामिल महिलाओं के बारे में कई विवादित बातें कहीं। खबरों के अनुसार, उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शन से “गैंग रेप की घटनाएं हो सकती हैं” और दावा किया कि इसकी कोई शिकायत नहीं होगी क्योंकि “प्रदर्शन में शामिल लोगों को रेप पसंद है” और कुछ महिलाओं को “रेप होने में मजा आता है”।

वीडियो में मोहनदास ने यह भी बताया कि अगर हालात की जिम्मेदारी उनके पास होती, तो वे क्या करते। उन्होंने कहा कि वे प्रदर्शन वाली जगह के आस-पास कर्फ्यू लगा देते और प्रदर्शनकारियों को वहां से चले जाने के लिए कहते। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे नहीं मानते, तो वे “गोली चलवा देते”।

पुलिस ने दर्ज किया केस

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट और केरल पुलिस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, उनमें हिंसा भड़काने, गलत जानकारी फैलाने और बातचीत के जरिए परेशानी या उपद्रव पैदा करने जैसे आरोप शामिल हैं।

अधिकारियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी संपर्क किया है और उस विवादित वीडियो को हटाने की मांग की है।

विरोध प्रदर्शन की आशंका

फिलहाल, इस मामले की जांच तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि वे साइबर पुलिस स्टेशन और कोर्ट के आसपास सुरक्षा के एहतियाती कदम उठा रहे हैं क्योंकि विरोध-प्रदर्शन की आशंका है। बता दें कि रविवार को जब मोहनदास को हिरासत में लिया गया था, तो उनके घर के बाहर काफी भीड़ जमा हो गई थी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने पहले ही मोहनदास से दूरी बना ली थी और कहा था कि उनकी टिप्पणियां संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं।

मोहनदास संगठन में किसी भी पद पर नहीं- RSS 

27 जुलाई को जारी एक बयान में, RSS के दक्षिण केरल प्रांत सह-कार्यवाह केबी श्रीकुमार ने कहा कि मोहनदास संगठन में किसी भी पद पर नहीं हैं।

श्रीकुमार ने कहा, “हालिया विरोध प्रदर्शन पर टीजी मोहनदास की टिप्पणियां उनके निजी विचार हैं। वह किसी भी स्तर पर RSS के पदाधिकारी नहीं हैं। RSS उनके विचारों से सहमत नहीं है। संगठन मानता है कि ऐसे विचारों की कड़ी से कड़ी निंदा की जानी चाहिए।”

RSS का यह स्पष्टीकरण मोहनदास को हिरासत में लिए जाने से पहले और उनके बयानों को लेकर मचे विवाद के बीच आया था।

बता दें कि दिल्ली में छात्रों का विरोध प्रदर्शन NEET पेपर लीक विवाद और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही की मांग को लेकर हुआ था।

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विदेशी डिग्री का क्रेज खत्म,घर लौटे 52 लाख चीनी छात्र:कम हुआ विदेश जाने का रुझान; पिछले साल 94% छात्र स्वदेश लौटे

चीन में विदेश जाकर पढ़ाई करने का चलन तेजी से कम हो रहा है। माता-पिता मानते हैं कि देश के अपने विश्वविद्यालय अब पहले से बेहतर हो गए हैं। इसलिए भारी खर्च करके विदेश जाने का फायदा कम दिखता है। इसी वजह से 2019 में जहां 7 लाख छात्र विदेश पढ़ने गए थे, 2025 में यह संख्या घटकर करीब 5.7 लाख रह गई। दूसरी ओर विदेश से पढ़ाई पूरी करके चीन लौटने वालों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। 2025 में विदेश में रुकने के बजाय करीब 94% छात्र वापस लौट आए। 10 साल में कुल 52 लाख ग्रेजुएट लौट चुके हैं। न्यू ओरिएंटल के आंकड़ों के मुताबिक, विदेश से लौटने वाले छात्रों की शुरुआती सैलरी औसतन करीब 1.80 लाख रुपए प्रति महीना है। वहीं, देश में ही पढ़ाई करने वालों की औसत सैलरी करीब 1 लाख रुपए है। हालांकि हालात ऐसे हैं कि कई विदेश-पढ़े युवाओं को इससे भी कम कमाई मिल रही है और गुजारे के लिए डिलीवरी जैसे काम करने पड़ रहे हैं। विदेशी डिग्री का फायदा घटा,कंपनियों का नजरिया बदला कई कंपनियां अब विदेशी डिग्री को पहले जैसी तरजीह नहीं देतीं। विदेश की पढ़ाई के कोर्स की समय सीमों कम होना और आसान दाखिले के कारण कुछ एचआर इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाते हैं। जैसे चीन में पोस्ट ग्रेजुएशन तीन साल का होता है। वहीं ब्रिटेन और अमेरिका में एक साल का। सरकारी नौकरियों में भी विदेश से पढ़े युवाओं के लिए मुश्किलें बढ़ी हैं। शिक्षा पर खर्च बढ़ा तो परिवारों ने बजट घटाया विदेश में पढ़ाई का खर्च तेजी से बढ़ा है। सर्वे के मुताबिक, 2025 में विदेश पढ़ाई का औसत खर्च बढ़कर 85 लाख रुपए हो गया है। यह 2023 के मुकाबले करीब 20% ज्यादा है। इसलिए जो छात्र अब भी बाहर जा रहे हैं, वे ऐसे देश चुन रहे हैं जहां पैसा वसूल हो सके। चीन की यूनिवर्सिटीज मजबूत, फीस कम चीन के विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में सुधार हुआ है। वर्ल्ड रैंकिंग में पेकिंग और त्सिंगहुआ यूनिवर्सिटी अब 13वें और 14वें नंबर पर हैं। देश के ‘985’ और ‘211’ समूह के कॉलेज कई विदेशी संस्थानों से बेहतर माने जा रहे हैं। सरकारी यूनिवर्सिटी की सालाना फीस विदेशों के से बहुत कम है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : GIFT Nifty से मिल रहे संकेतों को देखते हुए लगता है कि 10 अगस्त को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स बढ़त के साथ खुल सकते हैं। GIFT Nifty शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ 24,660 के आसपास ट्रेड कर रहा था। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

शुक्रवार को सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए थे। ऑटो और IT शेयरों में अच्छी बढ़त के बावजूद बाजार पर फाइनेंशियल शेयरों में आई गिरावट का असर ज्यादा रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 455.59 अंक या 0.58 प्रतिशत गिरकर 78,499.17 पर और निफ्टी 65.35 अंक या 0.27 प्रतिशत गिरकर 24,570.65 पर बंद हुआ। निफ्टी ऑटो और IT इंडेक्स में 1.84 प्रतिशत और 1.42 प्रतिशत की बढ़त हुई,जबकि प्राइवेट बैंकों के शेयरों में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07:25 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी करीब 40 अंक यानी 0.16 फीसदी की बढ़त के साथ 24,680 के आसपास कारोबार कर रहा था।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिल रही है। जापान के निक्केई में 2.09 फीसदी की बढ़त देखने को मिल रही है। स्ट्रेट टाइम्स में 1.04 फीसदी की तेजी दिख रही है। हैंग सेंग में 0.80 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है। ताइवानी बाजार में 1.89 फीसदी की तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। कोस्पी में 0.69 फीसदी की मजबूती दिख रही है। शांघाई कंपोजिट में भी 0.59 फीसदी की तेजी नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में बढ़त देखने को मिली। S&P रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 151.83 अंक या 0.28% बढ़कर 54,036.93 पर पहुंच गया। S&P 500 इंडेक्स में 47.68 अंक या 0.62% की बढ़त हुई और यह 7,757.64 पर बंद हुआ। वहीं, नैस्डैक कम्पोजिट 342.26 अंक या 1.30% बढ़कर 26,690.62 पर पहुंच गया।

डॉलर इंडेक्स

शुरुआती कारोबार में दुनिया की अधिकांश बड़ी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में थोड़ी बढ़त देखने को मिल रही थी। ईरान और ओमान स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को फिर से खोलने के लिए किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं। जोखिम के प्रति संवेदनशील मुद्राओं का प्रदर्शन कमजोर नजर आ रहा है। डॉलर इंडेक्स 99.63 के लेवल पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10 ईयर और 2 ईयर के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 4.66% और 4.20% पर ऊपर ट्रेड कर रही है।

एशियाई करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसीज में मिला-जुला रुख नजर आ रहा है। इंडोनेशियाई रुपिया (+0.15%),फिलीपींस पेसो (+0.21%),थाई बाहत (+0.17%), ताइवान डॉलर (+0.16%),चीनी रेनमिनबी (+0.06%) और मलेशियाई रिंगित (+0.06%) मजबूत दिख रहे हैं। जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन (-0.50%),जापानी येन (-0.18%)और सिंगापुर डॉलर (-0.09%) कमजोर कारोबार कर रहे हैं। दक्षिण कोरियाई वॉन में सबसे ज्यादा गिरावट नजर आ रही है।

FII और DII फंड फ्लो

7 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹480 करोड़ के शेयर खरीदे। जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs)ने लगातार तीसरे दिन भी खरीदारी जारी रखते हुए ₹235 करोड़ के शेयर खरीदे।

Stocks to Buy: ये 5 स्टॉक 40% तक रिटर्न दे सकते हैं, एक्सपर्ट्स ने दांव लगाने की सलाह दी

Stocks to Buy: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कई दिग्गज ब्रोकरेज हाउस चुनिंदा शेयरों को लेकर बुलिश हैं। Morgan Stanley, HSBC, Motilal Oswal, Nuvama और JM Financial ने पांच कंपनियों पर खरीदारी की सलाह दी है। इनके मुताबिक, अगले 12 महीनों में ये शेयर करीब 24% से 40% तक का रिटर्न दे सकते हैं। आइए जानते हैं किन शेयरों पर एक्सपर्ट्स सबसे ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।

PNB Housing Finance

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी PNB Housing Finance पर Morgan Stanley ने ‘Overweight’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,420 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 1,143 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 24.2% की रिटर्न संभावित तेजी का अनुमान है। ब्रोकरेज के मुताबिक, मजबूत रिटेल लोन डिस्बर्समेंट और बेहतर लोन ग्रोथ कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

Britannia

FMCG कंपनी Britannia पर Nuvama ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 7,240 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 5,508 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 31.4% उछाल की उम्मीद है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की ग्रोथ मजबूत बनी हुई है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया का तनाव प्रमुख जोखिम हैं।

Hindalco Industries

मेटल कंपनी Hindalco Industries पर HSBC ने ‘Buy’ रेटिंग के साथ 1,430 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 1,053.50 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 35.7% की तेजी का अनुमान है। ब्रोकरेज का कहना है कि एल्यूमिनियम की मजबूत वैश्विक मांग और चीन की उत्पादन सीमा कंपनी के लिए सकारात्मक रहेगी।

Time Technoplast

प्लास्टिक प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनी Time Technoplast पर Motilal Oswal ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 280 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 205.50 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 36.3% रिटर्न की संभावना है। ब्रोकरेज का मानना है कि पैकेजिंग और कम्पोजिट सिलेंडर बिजनेस में विस्तार के दम पर लगातार मजबूत रेवेन्यू और मुनाफे की ग्रोथ दर्ज कर सकती है।

Ventive Hospitality

हॉस्पिटैलिटी कंपनी Ventive Hospitality पर JM Financial ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 840 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 603.20 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 40% की संभावित तेजी बनती है। ब्रोकरेज का मानना है कि हालिया लागत का दबाव अस्थायी है और लंबी अवधि में कंपनी की ग्रोथ मजबूत रह सकती है।

Nifty Outlook: 10 अगस्त को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, एक्सपर्ट्स से जानिए

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty Outlook: 10 अगस्त को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, एक्सपर्ट्स से जानिए

Nifty Outlook: पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र भी शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निफ्टी 50 शुरुआती गिरावट से उबरने की कोशिश जरूर करता दिखा, लेकिन यह तेजी टिक नहीं सकी। आखिर में इंडेक्स 65 अंक यानी 0.3% गिरकर 24,570 पर बंद हुआ। कमजोर वैश्विक संकेतों और हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली का असर बाजार पर दिखा।

अब सोमवार, 10 अगस्त से शुरू हो रहे हफ्ते में निफ्टी की चाल कैसी रहेगी? कौन से लेवल अहम रहेंगे? इसे एक्सपर्ट्स से समझेंगे। लेकिन, पहले जान लेते हैं कि शुक्रवार को बाजार में क्या खास हुआ था।

किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल?

निफ्टी 50 में Grasim, TCS और Hindalco सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयर रहे। वहीं Bajaj Finance, Bajaj Finserv और Trent में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो ऑटो, आईटी और PSU बैंक सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सेक्टर रहे। वहीं फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक और केमिकल सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Nifty Midcap 100 में 0.22% की बढ़त रही। Nifty Smallcap 100 0.05% फिसल गया।

अगले हफ्ते किन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर?

Motilal Oswal के रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि अगले हफ्ते भारतीय बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है। इसकी वजह मजबूत घरेलू आर्थिक संकेत, भू-राजनीतिक तनाव में कमी और तिमाही नतीजों का अंतिम दौर हो सकता है। हालांकि, शेयरों में खबरों के आधार पर शेयरों में हलचल बनी रह सकती है।

 

इन आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर

अगले हफ्ते निवेशकों की नजर कई अहम घरेलू और वैश्विक आंकड़ों पर रहेगी। इनमें भारत के CPI और WPI महंगाई के आंकड़े, जून तिमाही के नतीजे अहम रहेंगे। साथ ही, अमेरिका के CPI और PPI महंगाई के आंकड़े, OPEC की मासिक ऑयल मार्केट रिपोर्ट और चीन के इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन व रिटेल सेल्स के आंकड़े भी आएंगे।

निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, निफ्टी का रुझान फिलहाल कमजोर जरूर है। हालांकि, इंडेक्स 24,400-24,300 के अहम सपोर्ट जोन के ऊपर बना हुआ है। यह स्तर पहले रेजिस्टेंस था और अब सपोर्ट की तरह काम कर रहा है। उनके मुताबिक, अगर निफ्टी इस स्तर तक फिसलता है तो यह खरीदारी का मौका हो सकता है। वहीं, ट्रेंड बदलने के लिए 24,700 के ऊपर निकलना जरूरी होगा।

Angel One के हितेश राठी के अनुसार, निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 24,450-24,350 के बीच है। इसके नीचे 24,000 बड़ा सपोर्ट रहेगा। वहीं, ऊपर की ओर 24,650-24,750 पहला रेजिस्टेंस और 24,800-24,850 अगला अहम स्तर होगा।

HDFC Securities के नंदीश शाह का कहना है कि पिछले तीन कारोबारी सत्रों से निफ्टी 24,400-24,700 के दायरे में कारोबार कर रहा है। इंडेक्स अभी भी अपने सभी प्रमुख मूविंग एवरेज के ऊपर है, इसलिए लंबी अवधि का ट्रेंड अब भी सकारात्मक बना हुआ है। उनके मुताबिक, ऊपर की ओर 24,770 और 25,000 रेजिस्टेंस रहेंगे। वहीं, गिरावट पर 24,430-24,380 का दायरा सपोर्ट देगा।

बैंक निफ्टी पर क्या राय है?

 

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक, पिछले पांच कारोबारी सत्रों से बैंक निफ्टी 58,248-57,353 के दायरे में कारोबार कर रहा है। इसके बावजूद इंडेक्स अभी भी अपने 20-डे EMA के ऊपर बना हुआ है।

उनके मुताबिक, ऊपर की ओर 58,200-58,300 का दायरा अहम रेजिस्टेंस है। इसके ऊपर निकलने पर बैंक निफ्टी 58,700 और फिर 59,100 तक जा सकता है। वहीं, नीचे की ओर 57,300-57,200 का दायरा मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।

Stocks to Watch: सोमवार 10 अगस्त को फोकस में रहेंगे ये 21 स्टॉक्स, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

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FMCG Price Hikes: महंगा होगा तेल, साबुन, चॉकलेट? Britannia, Dabur, और HUL समेत छह कंपनियों की ये है तैयारी

FMCG Price Hikes: एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के भाव बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। यह बढ़ोतरी इसी तिमाही में हो सकती है। इसकी वजह ये है कि कमोडिटी की बढ़ती लागत यानी कच्चे माल के महंगे होने और जियो-पॉलिटिकल लेवल पर अनिश्चितताओं के चलते कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां मांग को लेकर अभी भी पॉजिटिव बनी हुई हैं। उनका कहना है कि खपत मजबूत बनी हुई है, प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है और रेवेन्यू ग्रोथ में सुधार हो रहा है। इससे पहले जून तिमाही में एफएमसीजी सेक्टर ने औसतन 2-5% तक भाव बढ़ाए थे।

कंपनियां मार्जिन बचाने के लिए कुछ चीजों के दाम बढ़ाने के अलावा श्रिंकफ्लेशन का भी सहारा ले रही है। श्रिंकफ्लेशन का मतलब है कि किसी चीज के दाम को स्थिर रखने या हल्के बदलाव के साथ उसके पैकेट का वजन कम कर दिया जाता है। कंपनियों की नजर महंगाई, कच्चे तेल के भाव और मौसम से जुड़े रिस्क जैसे मानसून और अल नीनो (El Nino) पर भी है।

क्या है कंपनियों की तैयारी

दिग्गज बेकरी फूड कंपनी ब्रिटानिया (Britannia) को इस तिमाही भाव में 1.5-2% बढ़ोतरी की उम्मीद है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ₹5और ₹10 की बिस्किट वाले पैक में श्रिंकफ्लेशन के जरिए किया जा सकता है क्योंकि चीनी और पाम तेल की कीमतें अभी भी ऊंची हैं। कंपनी के एमडी और सीईओ रक्षित हरगवे के मुताबिक जून तिमाही में प्राइसिंग से जुड़ी ग्रोथ मुख्य रूप से श्रिंकफ्लेशन के जरिए आई थी और इसका ओवरऑल असर 1% था लेकिन सितंबर तिमाही में 1.5-2.0% तक अतिरिक्त प्राइसिंग एक्शन देखने को मिल सकता है।

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Godrej Consumer Products) ने जून तिमाही में औसतन लगभग 5% भाव बढ़ाए थे। साथ ही कंपनी ने सितंबर तिमाही में भाव में और बढ़ोतरी की भी बात कही। हालांकि कंपनी कच्चे माल के भाव के रुझान को लेकर ज्यादा स्पष्टता का इंतजार कर रही है। कंपनी के सीईओ सुधीर सीतापति का कहना है कि कंपनी के कई कच्चे माल की कीमतें कच्चे तेल से जुड़ी हुई हैं और इसके भाव में बदलाव का असर आमतौर पर 3-4 हफ्ते में दिखाई देता है। फिलहाल कच्चा तेल प्रति बैरल $80-85 के आसपास है और कंपनी का मानना है कि फिलहाल बहुत अधिक प्राइस हाइक की जरूरत नहीं है।

डाबर इंडिया (Dabur India) का मानना है कि इनपुट कॉस्ट यानी कच्चे माल और अन्य खर्च के ऊंचे बने रहने के आसार हैं। ऐसे में कंपनी का कहना है कि मार्जिन को बनाए रखने के लिए वह सोच-समझकर भाव बढ़ाएगी और साथ ही प्रोडक्टिविटी और कॉस्ट एफिशिएंसी पर अधिक ध्यान देगी। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ​​का कहना है कि ग्रोथ मुख्य रूप से रेवेन्यू और प्राइस से आएगी। अर्निंग्स कॉल में उन्होंने कहा कि महंगाई की वजह से इसका बोझ कंज्यूमर पर डालना पड़ा, वॉल्यूम ग्रोथ के मुकाबले प्राइस ग्रोथ और वैल्यू ग्रोथ ज़्यादा हो रही है और महंगाई बहुत अधिक होने के कारण वॉल्यूम पर दबाव रहेगा।

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) सितंबर तिमाही में कई प्रोडक्ट कैटेगरी में कीमतें बढ़ा सकती है, क्योंकि इसे तिमाही आधार पर 2-5% की इनफ्लेशन ग्रोथ की आशंका दिख रही है। कंपनी की सीईओ और एमडी प्रिया नायर का कहना है कि जून तिमाही में कीमतें 2-5% बढ़ाई गई थी और अब बढ़ती लागत को एडजस्ट करने और वॉल्यूम ग्रोथ को बनाए रखने के लिए सितंबर तिमाही में भी कीमतें बढ़ाई जाएगी।

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Tata Consumer Products) के एमडी सुनील डिसूजा ने जरूरत पड़ने पर कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं।

नेस्ले इंडिया (Nestle India) का कहना है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन और मानसून पर अलनीनो के असर पर नजर बनी हुई है।

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Hariyali Teej: हरियाली तीज की थाली में जरूर रखें ये 5 मिठाइयां, घरवालों से लेकर मेहमान तक पूछेंगे रेसिपी

सावन की फुहारों के बीच आने वाला हरियाली तीज का त्योहार भारतीय परंपरा, आस्था और उत्साह का खूबसूरत संगम माना जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित इस पर्व पर महिलाएं सजने-संवरने के साथ व्रत, पूजा और कई पारंपरिक रस्मों में शामिल होती हैं। हरी साड़ी, चूड़ियों की खनक, हाथों में रची मेहंदी और झूलों की मस्ती इस दिन के माहौल को और खास बना देती है। परिवार और सहेलियों के साथ मिलकर त्योहार मनाने की खुशी के बीच खानपान का भी अपना अलग महत्व रहता है। खासकर घर में तैयार की गई पारंपरिक मिठाइयां तीज की थाली को पूरा करती हैं और उत्सव में मिठास घोलती हैं।

अगर आप इस बार हरियाली तीज पर कुछ स्वादिष्ट और पारंपरिक बनाना चाहती हैं, तो कुछ ऐसी मिठाइयां हैं जिन्हें आसानी से सेलिब्रेशन का हिस्सा बनाया जा सकता है। ये विकल्प त्योहार के स्वाद के साथ देसी परंपरा का अहसास भी कराएंगे।

घर की बनी मिठाइयों से बढ़ाएं त्योहार की खुशी

हरियाली तीज पर गुड़, नारियल, मावा और सूजी जैसी चीजों से तैयार होने वाली देसी मिठाइयों का खास महत्व है। घर पर तैयार की गई मिठाई में स्वाद के साथ शुद्धता का भरोसा भी रहता है। यही वजह है कि आज भी कई घरों में तीज के मौके पर पारंपरिक मिठाइयां जरूर बनाई जाती हैं।

ओट्स बर्फी

अगर आप पारंपरिक मिठाई में थोड़ा मॉडर्न टच देना चाहती हैं, तो ओट्स बर्फी ट्राई कर सकती हैं। ओट्स, दूध पाउडर, देसी घी, गुड़, दूध, इलायची, काजू, बादाम और नारियल के बुरादे से तैयार होने वाली यह मिठाई स्वादिष्ट होने के साथ अलग विकल्प भी है। तीज पर परिवार वालों का मुंह मीठा कराने के लिए इसे बनाया जा सकता है।

नारियल लड्डू

हरियाली तीज के लिए नारियल के लड्डू भी बढ़िया विकल्प हैं। इन्हें बनाने में ज्यादा झंझट नहीं होती और स्वाद भी हल्का व स्वादिष्ट रहता है। अगर आप रिफाइंड चीनी से बचना चाहती हैं, तो लड्डुओं में गुड़ का इस्तेमाल कर सकती हैं। त्योहार के लिए यह झटपट तैयार होने वाली मिठाई है।

घेवर

हरियाली तीज और घेवर का रिश्ता काफी पुराना है। सावन आते ही बाजारों में घेवर की मांग बढ़ जाती है। कुरकुरा घेवर, ऊपर से मलाई या रबड़ी और ड्राई फ्रूट्स—त्योहार के मौके पर यह कॉम्बिनेशन मिठास को और खास बना देता है। हालांकि इसे घर पर बनाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन तीज की थाली में घेवर हो तो त्योहार का मजा दोगुना हो जाता है।

रबड़ी

सावन में रबड़ी का स्वाद भला कौन भूल सकता है। गाढ़े दूध से तैयार होने वाली यह पारंपरिक मिठाई खास मौकों पर खूब पसंद की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं भी अपनी पसंद और व्रत के नियमों के अनुसार इसका सेवन कर सकती हैं। इसे तैयार करने में थोड़ा समय जरूर लगता है, लेकिन इसका स्वाद मेहनत की पूरी भरपाई कर देता है।

मालपुआ

मालपुआ भी ऐसी पारंपरिक मिठाई है, जिसे कई जगह शुभ अवसरों से जोड़कर देखा जाता है। आटे या मैदे के घोल से तैयार होकर घी में सिकने वाला मालपुआ ऊपर से चाशनी या रबड़ी के साथ परोसा जाए तो इसका स्वाद और बढ़ जाता है। हरियाली तीज पर घरवालों के लिए इसे बनाकर त्योहार की मिठास बढ़ाई जा सकती है।

इस तीज पर थाली में परोसें परंपरा और स्वाद

हरियाली तीज सिर्फ व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि परिवार के साथ खुशियां बांटने का अवसर भी है। ऐसे में घर पर तैयार की गई पारंपरिक मिठाइयां त्योहार के स्वाद को खास बना सकती हैं। चाहे आप ओट्स बर्फी जैसे नए विकल्प को चुनें या घेवर, रबड़ी और मालपुआ जैसी सदाबहार मिठाइयों को हर विकल्प तीज के जश्न में अपनी अलग मिठास घोल सकता है।

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संडे प्रोफाइल : मोहम्मद बिन सलमान:सुधारों, कूटनीति से सल्तनत का चेहरा बदलते एमबीएस

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इन दिनों सक्रिय कूटनीति को लेकर चर्चा में हैं। जुलाई में अमेरिका से परमाणु समझौते और 7 अगस्त को सऊदी, पाकिस्तान व तुर्किये के रक्षा करार में उनकी सक्रियता दिखी है। राजनेता को कई चेहरे लगाकर राजकाज चलाना पड़ता है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) इसका उदाहरण हैं। एक तरफ वे सऊदी समाज में बदलाव और आधुनिकता लाने की कोशिश करते हैं तो दूसरी तरफ सत्ता पर पकड़ मजबूत रखने के लिए सख्त फैसलों को लेकर चर्चा में रहते हैं। जनवरी 2015 में किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद के सत्ता संभालने के बाद एमबीएस को अहम जिम्मेदारियां मिलीं। इसके बाद वे तेजी से सत्ता के केंद्र में पहुंचे। आज 41 साल की उम्र में वे देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं। हाल के दिनों में अमेरिका के साथ परमाणु समझौते और पाकिस्तान-तुर्किये के साथ रक्षा गठजोड़ ने उनकी सक्रिय कूटनीति को फिर चर्चा में ला दिया है। इन कदमों के जरिए वे एक तरफ ईरान जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी का मुकाबला करना चाहते हैं तो दूसरी तरफ चीन, रूस और अमेरिका के बीच संतुलन साधते नजर आते हैं। एमबीएस ने सत्ता में आने के बाद सामाजिक बदलावों पर भी जोर दिया। धार्मिक पुलिस के अधिकार सीमित किए गए। महिलाओं को लेकर कई पुरानी पाबंदियां हटाई गईं। स्कूलों में लड़कियों के खेलने पर लगी रोक खत्म हुई और करीब 40 साल बाद 2018 में देश में सिनेमा फिर शुरू हुआ। 2019 में महिलाओं को पुरुष अभिभावक के बिना यात्रा और काम करने की ज्यादा स्वतंत्रता मिली। विश्व बैंक के अनुसार 2025 में सऊदी अरब की लेबर फोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 35% थी। आर्थिक मोर्चे पर एमबीएस ने तेल पर निर्भरता घटाने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू कीं। निओम का हाईटेक शहर, लाल सागर के पर्यटन प्रोजेक्ट और खेलों को बढ़ावा देना इसी रणनीति का हिस्सा हैं। रियाद में 2024 में ई-स्पोर्ट्स वर्ल्ड कप हुआ। सऊदी अरब 2030 में एक्सपो और 2034 में फुटबॉल विश्व कप की मेजबानी की तैयारी भी कर रहा है। हालांकि एमबीएस का दूसरा चेहरा विवादों से जुड़ा है। सत्ता मजबूत करने के दौरान उनके कई रिश्तेदारों और विरोधियों पर कार्रवाई हुई। पत्रकार जमाल खाशोगी की 2018 में हत्या के मामले में भी उन पर गंभीर आरोप लगे। मानवाधिकार संगठनों ने सऊदी सरकार की आलोचना की है। एमबीएस की निजी छवि भी पारंपरिक सऊदी शासकों से अलग है। उन्हें वीडियो गेम, फॉर्मूला-1 और मोटरसाइकिलों में दिलचस्पी है। वे आम लोगों के साथ सेल्फी लेते भी नजर आते हैं। हालांकि, एक दशक से अधिक समय से सत्ता के केंद्र में रहने के बावजूद सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था अब भी तेल पर काफी निर्भर है। यही उनकी महत्वाकांक्षी योजनाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।

नेपाल PM बालेन सोमवार को पहले भारतीय राजदूत से मिलेंगे:बाद में चीन के दूत से बात होगी, अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से वन-टू-वन बैठक

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह सोमवार को सबसे पहले भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे चीन के राजदूत झांग माओमिंग से बातचीत करेंगे। मंगलवार को शाह अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी स्कॉट अर्बोम से वन-टू-वन बैठक करेंगे। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहली बार होगा, जब बालेन किसी विदेशी राजदूत से अकेले में मुलाकात करेंगे। इससे पहले वे विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते रहे हैं। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव सोमवार को दिन के पहले हिस्से में प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचेंगे। इसके बाद चीनी राजदूत झांग माओमिंग से मुलाकात होगी। एक ही दिन भारत और चीन के राजदूतों से बैठक के बाद अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से बातचीत होगी। इन बैठकों में नेपाल के इन तीनों देशों के साथ रिश्तों और मौजूदा मुद्दों पर बात होने की संभावना है। दो हफ्ते पहले होनी थी मुलाकात शाह की भारत, चीन और अमेरिका के प्रतिनिधियों से मुलाकात करीब दो हफ्ते पहले ही होने वाली थी। लेकिन सुनसरी और दूसरे इलाकों में हुई हिंसा के बाद कार्यक्रम टाल दिया गया था। 27 मार्च को प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह ने विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने से दूरी बनाए रखी थी। उन्होंने अमेरिका के कुछ बड़े अधिकारियों से मिलने के अनुरोध भी स्वीकार नहीं किए थे। इसके बजाय शाह ने काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ सामूहिक बैठक की थी। ऐसी बैठकें 9 अप्रैल और 26 मई को हुई थीं। उस समय शाह की इस नीति को नेपाल के कई राजनयिकों और विदेश नीति के जानकारों ने अच्छा कदम बताया था। उनका कहना था कि इससे सभी देशों को बराबर महत्व देने का संदेश जाता है। 100 दिन बाद बदला शाह का तरीका सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद शाह के सलाहकारों ने उन्हें अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इसके बाद शाह ने मधेश के नेताओं और सांसदों के साथ बातचीत की। वे कारोबारियों, ठेकेदारों, उद्योगपतियों और निर्यातकों से भी मिल रहे हैं। अब विदेशी राजदूतों के साथ अलग-अलग मुलाकात भी इसी बदलाव का हिस्सा है।