नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह सोमवार को सबसे पहले भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे चीन के राजदूत झांग माओमिंग से बातचीत करेंगे। मंगलवार को शाह अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी स्कॉट अर्बोम से वन-टू-वन बैठक करेंगे। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहली बार होगा, जब बालेन किसी विदेशी राजदूत से अकेले में मुलाकात करेंगे। इससे पहले वे विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते रहे हैं।। एक ही दिन भारत और चीन के राजदूतों से बैठक के बाद अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से बातचीत होगी। इन बैठकों में नेपाल के इन तीनों देशों के साथ रिश्तों और मौजूदा मुद्दों पर बात होने की संभावना है। दो हफ्ते पहले होनी थी मुलाकात, हिंसा के बाद टली शाह की इन राजदूतों से मुलाकात करीब दो हफ्ते पहले ही तय थी। लेकिन सुनसरी और दूसरे जिलों में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद कार्यक्रम टाल दिया गया था। अब सरकार ने फिर से इन मुलाकातों का कार्यक्रम बनाया है। प्रधानमंत्री के एक सलाहकार के मुताबिक, दोनों देशों के दूतावासों को मुलाकात का समय बता दिया गया है। पहले बालेन ने भारतीय विदेश सचिव से मिलने से किया था इनकार बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दौर में नेपाल और भारत के रिश्तों में कुछ दूरी नजर आई थी। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक उस समय भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की नेपाल यात्रा भी टल गई थी। मिस्री को 11-12 मई को काठमांडू जाना था। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक, यात्रा टलने की एक वजह बालेन का मिस्री से वन-टू-वन मुलाकात नहीं करना भी थी। बालेन ने उस समय विदेश मंत्री के स्तर से नीचे के विदेशी अधिकारियों से अकेले में मुलाकात नहीं करने की नीति अपनाई थी। बालेन अकेले में मुलाकात से बचते रहे प्रधानमंत्री बनने के बाद शाह ने विदेशी राजदूतों और बड़े विदेशी अधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात नहीं करने का तरीका अपनाया था। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी दूतावास की कई मुलाकात की रिक्वेस्ट भी नहीं मानीं। इनमें अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विशेष दूत सर्जियो गोर से मुलाकात शामिल थी। अमेरिकी विदेश विभाग की पब्लिक डिप्लोमेसी की अंडर सेक्रेटरी सारा बी. रोजर्स भी नेपाल दौरे पर आई थीं, लेकिन शाह से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बजाय शाह ने काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ साथ बैठकर बैठकें की थीं। ऐसी बैठकें 9 अप्रैल और 26 मई को हुई थीं। अकेले विदेशी राजदूतों से क्यों नहीं मिलते थे बालेन? बालेन की राजदूतों के साथ सामूहिक बैठक करने की नीति को नेपाल के कई राजनयिकों और विदेश नीति के जानकारों ने अच्छा कदम बताया था। उनका मानना था कि सभी राजदूतों से एक साथ मिलने पर किसी एक देश को ज्यादा तवज्जो देने का संदेश नहीं जाता। इससे नेपाल सभी देशों के साथ बराबरी का व्यवहार करता दिखता था और बातचीत भी ज्यादा साफ तरीके से होती थी। हालांकि, बाद में बालेन ने नेपाल के घरेलू मामलों से जुड़े लोगों से अलग-अलग मुलाकातें शुरू कर दीं। ऐसे में विदेशी राजदूतों के साथ भी पहले वाली सामूहिक बैठक की नीति को लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल हो गया। 100 दिन बाद बालेन ने बदला अपना तरीका शाह की सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद उनके राजनीतिक सलाहकार आसिम शाह और दूसरे सलाहकारों ने उन्हें देश के अंदर भी अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इनमें कारोबारी, मीडिया से जुड़े लोग, ठेकेदार और दूसरे बड़े लोग शामिल थे। इसके साथ ही काठमांडू में तैनात विदेशी राजदूतों से भी अलग-अलग मुलाकात शुरू करने की तैयारी हुई। हाल के हफ्तों में शाह का तरीका बदला हुआ नजर आया है। वे अब अलग-अलग लोगों से मिलकर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने मधेश के राजनीतिक दलों और सांसदों के साथ बैठकें की हैं। इसके अलावा कारोबारियों, ठेकेदारों, उद्योगपतियों और निर्यातकों से भी अलग-अलग मुलाकात की है।
पीएम मोदी ने शनिवार रात अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से फोन पर बातचीत की। मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। मोदी ने लिखा, “अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का फोन आया। हमने प्रमुख क्षेत्रों में भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।” उन्होंने वेंस को बेटे के जन्म पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। दरअसल, 19 जुलाई को जेडी वेंस चौथी बार पिता बने थे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति पिछले साल भारत दौरे पर आए थे अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 3 से 7 मार्च 2025 तक भारत में थे। उनके साथ-साथ उनकी पत्नी उषा और तीनों बच्चे- इवान, विवेक और मिराबेल भी भारत आए थे। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उन्हें दिल्ली में रिसीव किया था। एयरपोर्ट पर ही उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था। उन्होंने PM मोदी से भी मुलाकात की थी। उपराष्ट्रपति बनने के बाद यह जेडी वेंस की पहली आधिकारिक भारत यात्रा थी। ट्रम्प भी 2027 की शुरुआत में भारत आ सकते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प साल 2027 की शुरुआत में भारत आ सकते हैं। 27 जून को व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ये बयान दिया। ये ट्रम्प की राष्ट्रपति रहते हुए दूसरी भारत यात्रा हो सकती है। इससे पहले ट्रम्प साल 2020 में पहली बार भारत यात्रा पर आए थे। वे अहमदाबाद में ‘नमस्ते ट्रम्प’ कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उषा वेंस के माता-पिता आंध्र प्रदेश से थे जेडी वेंस की पत्नी ऊषा का जन्म और स्कूली शिक्षा सैन डिएगो में हुआ है। उनके माता-पिता 1980 के दौरान आंध्र से अमेरिका आकर बसे गए थे। अमेरिका में रहने के बावजूद उनके माता-पिता ने वहां की मॉडर्न संस्कृति से प्रभावित हुए बिना उन्हें भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म के अनुसार शिक्षा और संस्कार दिए। बाद में वेंस भी इन संस्कारों से प्रभावित हुए। ऊषा की मां एक बायोलॉजिस्ट हैं और पिता इंजीनियर। ऊषा कहती हैं कि उन्होंने अपने माता-पिता के आदर्शों को ध्यान में रखते हुए ही पढ़ाई की है। येल से बैचलर की डिग्री हासिल करने के बाद ऊषा ने गेट्स कैम्ब्रिज स्कॉलरशिप की मदद से कैम्ब्रिज से मास्टर ऑफ फिलॉसफी की डिग्री हासिल की। ऊषा ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के लिए क्लर्क के रूप में काम किया। कल ही भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिका में पास हुआ अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार रात 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। यह बिल रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से लाया गया। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। 23 जुलाई को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। हालांकि, अभी ये कानून नहीं बना है। अभी इसे अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा। अगर वहां भी बिल पास हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति ट्रम्प के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून बनेगा। पूरी खबर पढ़ें… ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में पहली बार ‘बर्थ टूरिज्म’ पर रोक:यहां पैदा हुए विदेशियों के बच्चे को नागरिकता नहीं मिलेगी; ट्रम्प बोले- बर्थराइट सिटीजनशिप मजाक बनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर अमेरिका में जन्म लेने वाले लोगों को नागरिकता मिलने के दायरे को सीमित करने की कोशिश की है। पूरी खबर पढ़ें…
सोशल मीडिया पर चीन की वांग गेयिंग की कहानी काफी वायरल हो रही है। 111 साल की चीनी महिला वांग गेयिंग की लंबी उम्र लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। गेयिंग ने बताया कि, लंबी उम्र के लिए हमेशा कोई खास या मुश्किल तरीका अपनाना जरूरी नहीं होता। उनके रोजमर्रा के जीवन की साधारण आदतें और आसान दिनचर्या ही उनकी लंबी और स्वस्थ जिंदगी का हिस्सा रही हैं। सोशल मीडिया पर ये कहानी काफी वायरल हो रही है। आइए जानते हैं इनकी पूरी कहानी
चीन के जिआंग्सू प्रांत के रुगाओ शहर की रहने वाली वांग गेयिंग 111 साल की उम्र में भी अपने रोजमर्रा के काम खुद करने की कोशिश करती हैं। 100 साल की उम्र पार करने के बाद भी उनकी एक्टिव बनी हुई है। उनकी दिनचर्या की आदतें उन्हें इस उम्र में भी एक्टिव और आत्मनिर्भर रखती हैं।
100 साल की उम्र में करती है काम
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, वांग गेयिंग उम्र बढ़ने के बावजूद काफी एक्टिव रही हैं। 100 साल की उम्र में भी वह खेतों में काम करती थीं और मूंगफली व तरबूज तोड़ने जैसे कामों में हाथ बंटाती थीं। 111 साल की वांग आज भी घर के छोटे-मोटे काम खुद करती हैं। वह टेबल साफ करती हैं, कपड़े तह करती हैं और घर के दूसरे हल्के कामों में हाथ बंटाती हैं। परिवार के लोग उन्हें कई बार आराम करने की सलाह देते हैं, लेकिन वांग के मुताबिक, शरीर को एक्टिव रखना जरूरी है। वह किसी खास एक्सरसाइज रूटीन का पालन नहीं करतीं, बल्कि घर के काम करते हुए ही उनका शरीर चलता-फिरता रहता है। उनका कहना है कि इससे शरीर के अंग सक्रिय रहते हैं और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर बना रहता है।
वांग की लंबी उम्र को उनके शहर रुगाओ से भी जोड़कर देखा जाता है। चीन के पूर्वी हिस्से में स्थित जिआंग्सू प्रांत का ये शहर लंबे समय से अपनी ज्यादा उम्र तक जीने वाली आबादी के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिन्होंने 100 साल या उससे ज्यादा की उम्र पूरी की है।
रुगाओ में 672 लोग है 100 के पार
जियांगहाई इवनिंग न्यूज के मुताबिक, फरवरी तक रुगाओ में 100 साल या उससे ज्यादा उम्र के 672 लोग जीवित थे। इसी वजह से यह शहर चीन के उन इलाकों में शामिल है, जहां इतनी ज्यादा उम्र तक पहुंचने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक है। शोध में रुगाओ की मिट्टी में मौजूद खनिजों और स्थानीय वातावरण में पाए जाने वाले सूक्ष्म तत्वों का भी अध्ययन किया गया है। साइंटिस्ट्स ने रुगाओ के वातावरण को समझने के लिए वहां की मिट्टी, फसलों और पीने के पानी की जांच की है।
खान-पान का रखती है ध्यान
शोध के मुताबिक, रुगाओ का स्थानीय वातावरण लोगों की सेहत और लंबी उम्र से जुड़ा हो सकता है, हालांकि इसकी कोई एक वजह साफ नहीं है। वहीं, वांग कम मात्रा में अलग-अलग तरह का खाना खाती हैं। उन्हें मछली पसंद है और वह ज्यादा खाने से बचती हैं। वांग की दिनचर्या में सिर्फ खान-पान और शारीरिक गतिविधियां ही शामिल नहीं हैं, बल्कि वह छोटी-छोटी खुशियों को भी महत्व देती हैं। वह हर दिन कोई न कोई अच्छा काम करने की कोशिश करती हैं। कभी वह परिवार के किसी सदस्य की तारीफ करती हैं तो कभी किसी पुराने दोस्त को छोटा सा संदेश भेजती हैं। जब कोई बात वांग को परेशान करती है, तो वह उसे लेकर रातभर चिंता करने के बजाय सो जाना पसंद करती हैं।
वांग का सोने-जागने का समय भी तय है। वह शाम 7 बजे सोती हैं और सुबह 7 बजे उठती हैं। दिन में एक-दो बार आराम भी करती हैं। वांग अपने परिवार की पांच पीढ़ियों के साथ रहती हैं और उनका एक पोता 60 साल का है। पांच पीढ़ियों के परिवार के साथ रहते हुए भी वह अपनी क्षमता के अनुसार रोजमर्रा के काम खुद करती हैं।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

भारत की अश्मिता चालिहा ने शनिवार को कोरिया मास्टर्स 2026 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला एकल के सेमीफाइनल में हमवतन रक्षिता रामराज को हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। आज आसन यी सन-सिन जिम्नेजियम में भारतीयों के बीच हुए इस सेमीफाइनल में, महिला एकल बैडमिंटन रैंकिंग में 50वें स्थान पर मौजूद अश्मिता चालिहा ने दुनिया की 49वें नंबर की खिलाड़ी रक्षिता रामराज को 48 मिनट तक चले मुकाबले में 21-13, 16-21, 21-13 से हराया।
26 साल की अश्मिता चालिहा ने शुरुआत से ही पहले गेम पर अपना दबदबा बनाए रखा; इंटरवल तक वह 11-6 से आगे थीं और अंत में पहला गेम जीत लिया। रक्षिता रामराज ने दूसरे गेम में ज़बरदस्त वापसी की। उन्होंने 11-6 की बढ़त बनाई और अश्मिता चालिहा की वापसी की कोशिशों को नाकाम करते हुए मैच को बराबरी पर ला दिया, जिससे मुकाबला निर्णायक गेम तक पहुंच गया।
इसके बाद निर्णायक गेम में अश्मिता चालिहा ने खेल पर पकड़ बनाई और लगातार छह पॉइंट जीतकर इंटरवल तक 11-3 की बढ़त हासिल कर ली। ब्रेक के बाद भी उन्होंने अपनी बढ़त बनाए रखी और जीत पक्की करते हुए फ़ाइनल में अपनी जगह बना ली।
#News l Ashmita Chaliha advances to her maiden final on BWF World Tour Circuit at Korea Masters Super 300
She beat teenage compatriot Rakshitha Sree Santhosh Ramraj 21-13, 16-21, 21-13 in the semis.
The 26-year-old continues her good run, following her win over top seed… pic.twitter.com/oij0cBjFNg
— The Bridge (@the_bridge_in) August 8, 2026
कोरिया मास्टर्स में अश्मिता चालिहा पहली बार बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फ़ाइनल में पहुंची। इससे पहले यह भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी जून में मकाऊ ओपन के सेमीफ़ाइनल से बाहर हो गई थीं। अब फाइनल में उनका सामना चीन की हान कियानक्सी से होगा, जो चौथी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी और 2026 जर्मन ओपन चैंपियन हैं।
कोरिया मास्टर्स फ़ाइनल में जीत के साथ ही वह इस साल एकल बीडब्ल्यूएफ ख़िताब जीतने वाली चौथी भारतीय महिला बन जाएंगी। उनसे पहले ताइपे ओपन में तन्वी शर्मा, जापान ओपन में पीवी सिंधु और थाईलैंड मास्टर्स में देविका सिहाग ने यह उपलब्धि हासिल की है।
US Russia Sanctions Bill: US सीनेट (अमेरिकी राज्यसभा) ने शुक्रवार को रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के मुख्य खरीदारों (जैसे चीन और भारत) पर फाइन लगाने वाला एक अहम बिल पास कर दिया है। उनका तर्क यह है कि इस तरह का व्यापार यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देता है।सीनेट ने 86-11 वोटों के बड़
भारत सरकार ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया। यह कदम चीन की ओर से सीमावर्ती राज्य की जगहों के नाम बदलने की कोशिशों के बीच उठाया गया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह काम अरुणाचल प्रदेश सरकार से सलाह लेकर किया गया है। इसका मकसद इन जगहों की सही पहचान सुनिश्चित करना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। मंत्रालय ने बयान में कहा, “भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश की राज्य सरकार से सलाह लेकर राज्य में स्थित कुल 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर उनके मानक नामों के साथ दर्ज किया है।” बयान में कहा गया कि इन जगहों को आधिकारिक नक्शे पर दर्ज करने का उद्देश्य उनकी सटीक पहचान आसान बनाना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है चीन समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश की जगहों के लिए नामों की सूची जारी करता रहा है। वह अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है। भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता। लॉन्गजू में 1959 में चीनी सेना पहुंची थी सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे पर औपचारिक रूप से दर्ज जगहों में वास्तविक नियंत्रण रेखा(LAC) के पास स्थित लॉन्गजू भी शामिल है। 1959 में चीनी सेना के इस इलाके में घुसने के बाद लॉन्गजू भारत-चीन सीमा तनाव के शुरुआती केंद्रों में से एक बना था। अपर सुबनसिरी जिले का पास का माजा गांव भी इन जगहों में शामिल है। जयरामपुर सुरक्षा बलों के लिए लॉजिस्टिक्स हब चांगलांग जिले का जयरामपुर भी पहचानी गई जगहों में शामिल है। यह एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स हब है, जो पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार सीमा की ओर सुरक्षा बलों की आवाजाही में मदद करता है।
भारत सरकार ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया। यह कदम चीन की ओर से सीमावर्ती राज्य की जगहों के नाम बदलने की कोशिशों के बीच उठाया गया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह काम अरुणाचल प्रदेश सरकार से सलाह लेकर किया गया है। इसका मकसद इन जगहों की सही पहचान सुनिश्चित करना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। मंत्रालय ने बयान में कहा, “भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश की राज्य सरकार से सलाह लेकर राज्य में स्थित कुल 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर उनके मानक नामों के साथ दर्ज किया है।” बयान में कहा गया कि इन जगहों को आधिकारिक नक्शे पर दर्ज करने का उद्देश्य उनकी सटीक पहचान आसान बनाना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है चीन समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश की जगहों के लिए नामों की सूची जारी करता रहा है। वह अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है। भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता। लॉन्गजू में 1959 में चीनी सेना पहुंची थी सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे पर औपचारिक रूप से दर्ज जगहों में वास्तविक नियंत्रण रेखा(LAC) के पास स्थित लॉन्गजू भी शामिल है। 1959 में चीनी सेना के इस इलाके में घुसने के बाद लॉन्गजू भारत-चीन सीमा तनाव के शुरुआती केंद्रों में से एक बना था। अपर सुबनसिरी जिले का पास का माजा गांव भी इन जगहों में शामिल है। जयरामपुर सुरक्षा बलों के लिए लॉजिस्टिक्स हब चांगलांग जिले का जयरामपुर भी पहचानी गई जगहों में शामिल है। यह एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स हब है, जो पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार सीमा की ओर सुरक्षा बलों की आवाजाही में मदद करता है।
अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। यह बिल रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से लाया गया। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। 23 जुलाई को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके तहत रूस के अधिकारियों, शैडो टैंकर बेड़े, केंद्रीय बैंक और सरकारी ऊर्जा परियोजनाओं पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। हालांकि, अभी ये कानून नहीं बना है। अभी इसे अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा। अगर वहां भी बिल पास हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति ट्रम्प के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून बनेगा। ईरान के साथ ट्रेड करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ेगा अगर यह कानून बन जाता है तो 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी मिल जाएगा कि वे अमेरिका में आने वाले रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकें। राष्ट्रपति का यह अधिकार 5 साल तक लागू रहेगा। व्हाइट हाउस ने पहले भी रूस पर पाबंदियां लगाने की कोशिश की थी। लेकिन ईरान युद्ध के दौरान जब होर्मुज बंद हुआ, तो तेल का संकट आ गया। इस वजह से अमेरिकी प्रशासन को तेल की बिक्री पर कुछ समय के लिए छूट देनी पड़ी थी। भारत ने जून में आधे से ज्यादा तेल रूस से खरीदा भारत ने जून 2026 में रूस से रिकॉर्ड 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो देश के कुल तेल आयात का 52.4% था। यानी पिछले महीने भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से ज्यादा बैरल रूस से आया। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। मई के मुकाबले जून में रूस से तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… UK की व्हिस्की, कारें और ब्यूटी प्रोडक्ट्स सस्ते मिलेंगे:भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू, जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर आज से सस्ते मिलेंगे। आज से भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हो गया है। यानी अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
जापान की ओर करीब 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से डॉल्फिन तूफान बढ़ रहा है। इसकी वजह से 2.6 लाख लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए गए हैं। जबकि 500 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। हालात को देखते हुए टोयोटा ने भी अपनी 9 फैक्ट्रियों में काम रोक दिया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, डॉल्फिन कैटेगरी-1 का तूफान है। इसकी लगातार हवा की रफ्तार 144 किमी प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 198 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही है। यह तूफान क्यूशू और ओकिनावा के बीच स्थित द्वीपों की ओर बढ़ रहा है। ओकिनावा द्वीप पर सबसे ज्यादा असर तूफान की वजह से जापान का ओकिनावा द्वीप बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहां छुट्टियां मनाने गए कई हांगकांग के पर्यटक उड़ानें रद्द होने के कारण फंस गए हैं। उन्हें अब जरूरी सामान की कमी, बिजली कटने और पानी की सप्लाई बाधित होने की आशंका का सामना करना पड़ रहा है। हांगकांग से जुड़े ट्रैवल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा की गई तस्वीरों में सुपरमार्केट की ब्रेड की अलमारियां खाली दिखाई दे रही हैं। वहीं, कई इलाकों में मूसलाधार बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। रविवार को चीन पहुंच सकता है तूफान डॉल्फिन तूफान तेजी से चीन के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार तक यह तूफान तट से करीब 820 किलोमीटर दूर था। इसके रविवार दोपहर से सोमवार सुबह के बीच झेजियांग और उत्तरी फुजियान के बीच कहीं टकराने की आशंका है। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी रखा है, जो चार स्तरों वाली चेतावनी प्रणाली में तीसरा सबसे गंभीर स्तर है। झेजियांग, फुजियान और ताइवान में तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम वैज्ञानिक शेन यूयांग के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तक इस तूफान का दायरा झेजियांग प्रांत से करीब 13 गुना बड़ा हो चुका था। झेजियांग का आकार भारत के बिहार राज्य के बराबर है। मौसम विभाग ने कहा कि तूफान का दायरा बहुत बड़ा है, इसलिए सिर्फ तटीय नहीं बल्कि अंदरूनी इलाकों के लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। चीन में AI और ड्रोन की मदद से बचाव कार्य फिलहाल यह साफ नहीं है कि चीन में टकराने के बाद यह किस दिशा में जाएगा। तूफान के 48 घंटे के अलर्ट जोन में पहुंचने के बाद चीन ने तैयारियां और तेज कर दी हैं। सरकारी टीवी सीसीटीवी के मुताबिक, नेशनल मरीन एनवायरनमेंटल फोरकास्टिंग सेंटर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैयार किया है, जो अगले 240 घंटे (10 दिन) तक तूफान की दिशा, ताकत और कहां टकराएगा, इसका अनुमान लगा सकता है। इसके साथ ही ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
जापान की ओर करीब 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से डॉल्फिन तूफान बढ़ रहा है। इसकी वजह से 2.6 लाख लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए गए हैं। जबकि 500 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। हालात को देखते हुए टोयोटा ने भी अपनी 9 फैक्ट्रियों में काम रोक दिया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, डॉल्फिन कैटेगरी-1 का तूफान है। इसकी लगातार हवा की रफ्तार 144 किमी प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 198 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही है। यह तूफान क्यूशू और ओकिनावा के बीच स्थित द्वीपों की ओर बढ़ रहा है। ओकिनावा द्वीप पर सबसे ज्यादा असर तूफान की वजह से जापान का ओकिनावा द्वीप बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहां छुट्टियां मनाने गए कई हांगकांग के पर्यटक उड़ानें रद्द होने के कारण फंस गए हैं। उन्हें अब जरूरी सामान की कमी, बिजली कटने और पानी की सप्लाई बाधित होने की आशंका का सामना करना पड़ रहा है। हांगकांग से जुड़े ट्रैवल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा की गई तस्वीरों में सुपरमार्केट की ब्रेड की अलमारियां खाली दिखाई दे रही हैं। वहीं, कई इलाकों में मूसलाधार बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। रविवार को चीन पहुंच सकता है तूफान डॉल्फिन तूफान तेजी से चीन के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार तक यह तूफान तट से करीब 820 किलोमीटर दूर था। इसके रविवार दोपहर से सोमवार सुबह के बीच झेजियांग और उत्तरी फुजियान के बीच कहीं टकराने की आशंका है। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी रखा है, जो चार स्तरों वाली चेतावनी प्रणाली में तीसरा सबसे गंभीर स्तर है। झेजियांग, फुजियान और ताइवान में तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम वैज्ञानिक शेन यूयांग के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तक इस तूफान का दायरा झेजियांग प्रांत से करीब 13 गुना बड़ा हो चुका था। झेजियांग का आकार भारत के बिहार राज्य के बराबर है। मौसम विभाग ने कहा कि तूफान का दायरा बहुत बड़ा है, इसलिए सिर्फ तटीय नहीं बल्कि अंदरूनी इलाकों के लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। चीन में AI और ड्रोन की मदद से बचाव कार्य फिलहाल यह साफ नहीं है कि चीन में टकराने के बाद यह किस दिशा में जाएगा। तूफान के 48 घंटे के अलर्ट जोन में पहुंचने के बाद चीन ने तैयारियां और तेज कर दी हैं। सरकारी टीवी सीसीटीवी के मुताबिक, नेशनल मरीन एनवायरनमेंटल फोरकास्टिंग सेंटर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैयार किया है, जो अगले 240 घंटे (10 दिन) तक तूफान की दिशा, ताकत और कहां टकराएगा, इसका अनुमान लगा सकता है। इसके साथ ही ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जापान और चीन में बार-बार टाइफून क्यों आते हैं? 1. भूमध्य रेखा के पास और उत्तर में स्थित होना पश्चिमी प्रशांत महासागर में हर साल सबसे ज्यादा 25 से 30 तूफान आते हैं। यह दुनिया भर में आने वाले कुल तूफानों का लगभग 30% है। इसकी वजह इस इलाके का भूमध्य रेखा के पास (उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में) स्थित होना है। पृथ्वी के घूमने के कारण यहां हवाओं को गोल घुमाने वाला बल (कोरियोलिस इफेक्ट) बहुत मजबूत होता है। तूफान बनने के बाद ये हवाओं के बहाव के साथ जापान, ताइवान, चीन, कोरिया और फिलीपींस की तरफ बढ़ते हैं। यही वजह है कि इन देशों में सबसे ज्यादा तूफान आते हैं। 2. समुद्र का तेजी से गर्म होना टाइफून बनने और मजबूत होने की सबसे बड़ी वजह गर्म समुद्र है। जब समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है, तो पानी तेजी से भाप बनकर ऊपर उठता है। यह भाप तूफान के लिए ईंधन का काम करती है, जिससे हवाएं और बारिश दोनों बेहद तेज हो जाती हैं। 1901 में दुनिया भर के महासागरों की सतह का औसत तापमान लगभग 15.2°C से 15.3°C था। बीते कुछ साल में यह औसतन वैश्विक समुद्र सतह तापमान 21.1°C को पार कर गया है, जो इतिहास में सबसे ज्यादा है।

