देश में सुस्त पड़ी गोल्ड की डिमांड लेकिन, खर्च ₹1.98 लाख करोड़ के रिकॉर्ड हाई पर

Gold Report: गोल्ड की बढ़ती चमक ने इसकी मांग सुस्त की लेकिन बिक्री वैल्यू रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई। इसका खुलासा वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों से हुआ है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council- WGC) की भारत पर बनी ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस साल 2026 की दूसरी तिमाही अप्रैल-जून 2026 में भारतीयों ने वॉल्यूम के हिसाब से कम सोना खरीदा लेकिन रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के कारण सोने पर अब तक का सबसे अधिक खर्च किया। जून 2026 तिमाही में देश में गोल्ड की मांग सालाना आधार पर 6% घटकर 131 टन रह गई, जो हालिया वर्षों में साल की सबसे कमजोर जून तिमाही में से एक रही।। हालांकि जितनी भी डिमांड रही, उसकी वैल्यू 50% बढ़कर रिकॉर्ड ₹1.98 लाख करोड़ पर पहुंच गई, क्योंकि घरेलू बाजार में गोल्ड के भाव इस दौरान करीब 59% मजबूत हुए।

इस कारण कमजोर हुई गोल्ड की मांग

गोल्ड के सेल्स वॉल्यूम में गिरावट की मुख्य वजह इसके भाव में दो साल में ताबड़तोड़ तेजी रही। इसके अलावा मई के मध्य में आयात शुल्क में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और खरीदारी के लिए शुभ नहीं समझे जाने वाले महीने ने भी दबाव बनाया। इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमतें कुछ नरम हुईं लेकिन आयात शुल्क और रुपये की कमजोरी के कारण भारत में इसके भाव ऊंचे बने रहे। हालांकि मार्च तिमाही की तुलना में जून तिमाही में अक्षय तृतीया और शादी-ब्याह के मौसम की खरीदारी के चलते ज्वेलरी की मांग 14% बढ़कर 75 टन हो गई लेकिन फिर भी सालाना आधार पर यह 15% कम रही और साल 2000 के बाद दूसरी सबसे कमजोर जून तिमाही रही।

बदला खरीदारी का तरीका

ऊंची कीमतों के बावजूद लोगों ने सोना खरीदना बंद नहीं किया, बल्कि अपनी खरीदारी का तरीका बदल दिया। ज्वेलर्स के मुताबिक हल्के वजन, कम कैरेट और स्टडेड (रत्न जड़ी) ज्वेलरी की मांग बढ़ी। पुराने गहने बदलकर नए खरीदने का चलन भी तेज हुआ और कुछ ज्वेलर्स के मुताबिक उनकी कुल बिक्री का 70% तक हिस्सा इसी के जरिए आया और जून तिमाही में इसमें 10–20% की तेजी आई। जून तिमाही में ज्वेलरी की खरीदारी वॉल्यूम के हिसाब से भले ही कम हुई लेकिन वैल्यू 34% बढ़कर ₹1.13 लाख करोड़ हो गई। इस दौरान भारत दुनिया का सबसे बड़ा ज्वेलरी मार्केट बना रहा और ग्लोबल ज्वेलरी डिमांड में उसकी हिस्सेदारी 27% रही।

बार, कॉइन्स और गोल्ड ईटीएफ मिलाकर इंवेस्टमेंट डिमांड तीन धमाकेदार तिमाही के बाद जून तिमाही में कमजोर हुई। निवेश की मांग घटकर 54 टन रह गई जबकि इससे पहले की तीन तिमाहियों में औसतन मांग 100 टन की थी। हालांकि जून तिमाही में मांग घटने के बावजूद यह लॉन्ग टर्म एवरेज से ऊपर बनी रही।

बार और सिक्कों की खरीदारी मार्च तिमाही की तुलना में 19% घटकर जून तिमाही में 50 टन रह गई, क्योंकि कीमतों में तेज उछाल के बाद निवेशकों ने कुछ समय के लिए इंतजार करना उचित समझा। फिर भी सालाना आधार पर यह 9% अधिक रहा और इस साल की पहली छमाही में बार और सिक्कों की खरीद 13 साल के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई।

गोल्ड ईटीएफ की बात करें तो मार्च तिमाही में रिकॉर्ड निवेश के बाद जून तिमाही में इसकी मांग घटकर लगभग 4 टन रह गई। इसके बावजूद भारत उन देशों में शुमार रहा, जहां गोल्ड ईटीएफ में निवेश आया, जबकि अमेरिका और चीन जैसे देशों में निवेशकों ने पैसे निकाले। जून के अंत तक भारत में गोल्ड ईटीएफ की कुल होल्डिंग 119 टन और AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) ₹1.7 लाख करोड़ तक पहुंच गईं।

सप्लाई की बात करें तो देश में गोल्ड की उपलब्धता घटकर 120 टन रह गई, जो पिछले छह साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इसकी मुख्य वजह आयात शुल्क बढ़ने के बाद सोने के आयात में भारी गिरावट रही। तिमाही आधार पर इसमें 53% और सालाना आधार पर 22% की गिरावट आई। हालांकि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि घरेलू बाजार में गोल्ड की कोई कमी नहीं थी। पहले से मौजूद स्टॉक और रिसाइकल्ड गोल्ड मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक ऊंची कीमतों के बावजूद लोगों ने पुराने गहने बेचने की बजाय उन्हें गिरवी रखकर कर्ज लेना अधिक पसंद किया। बैंकों में बकाया गोल्ड लोन सालाना आधार पर दोगुना होकर ₹5.1 लाख करोड़ पहुंच गया, जबकि एनबीएफसी कंपनियों का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 70% बढ़कर यह ₹3.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

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पूर्वोत्तर में भूस्खलन का खतरा, उत्तर भारत में भी भारी बारिश के आसार, IMD ने जारी किया अलर्ट

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Weather Alert 4 August:  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देशभर में सक्रिय मानसून को देखते हुए 4 अगस्त के लिए ताजा मौसम अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश के साथ ही भूस्खलन होने की आशंका है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य भारत के कई हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। ALSO READ: Top News 4 August: जम्मू कश्मीर में बादल फटे, चीन का न्यूक्लियर सीक्रेट बेनकाब, EPFO वेतन सीमा बढ़ाने को मंजूरी

 

जम्मू कश्मीर के 6 जिलों में बादल फटे

जम्मू-कश्मीर के 6 जिलों में बादल फटने से हाहाकार मच गया। कुपवाड़ा के लोलाब में बाढ़ में बहने से महिला की मौत हो गई। शोपियां में बारिश ने भारी तबाही मचाई। बाढ़ में फंसे 80 लोगों को बचाया गया है। डल झील में नाव में फंसे 4 युवकों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया है। मौसम विभाग ने अगले 2 दिन भी भारी बारिश, बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताई है।

 

पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका

आईएमडी के मुताबिक अगले 24 घंटों के दौरान असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में अत्यधिक बारिश हो सकती है। लगातार वर्षा के कारण भूस्खलन और जलभराव का खतरा भी बना हुआ है। इसके अलावा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने का अनुमान है।

 

 पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

 

दिल्ली, यूपी और मध्य भारत में कैसा रहेगा मौसम?

उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश राज्यों में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के साथ भारी बारिश भी हो सकती है। 

 

वहीं, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। दूसरी ओर, कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश जारी रहने की संभावना है। कई जिलों में एहतियात के तौर पर स्कूलों में अवकाश भी घोषित किया गया है। ALSO READ: उत्तर-पूर्व भारत में बाढ़ का खतरा, यूपी-दिल्ली से राजस्थान तक जानें मौसम का हाल

 

राजस्थान में बारिश की गतिविधियों में बदलाव

राजस्थान में पिछले 24 घंटों के दौरान पाली जिले के जैतारण में सबसे अधिक 161 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने से जोधपुर, उदयपुर और कोटा संभाग में बारिश की गतिविधियों में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि, शेखावाटी, बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग में 3 से 5 अगस्त के बीच हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बनी हुई है।

 

दक्षिण भारत में भी बरसेंगे बादल

दक्षिण भारत के केरल, तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी जारी की गई है। वहीं, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

बांकीपुर से प्रशांत किशोर की जीत के क्या हैं मायने

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मनीष कुमार

प्रशांत किशोर (पीके) की बिहार के उपचुनाव में जीत पर फिलहाल उन्हें गेम चेंजर तो नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना तो साफ है कि बिहार की राजनीति करवट लेना चाह रही है। ALSO READ: दक्षिण कोरिया में गर्मी ने तोड़ा 100 साल का रिकॉर्ड

 

इस जीत का साफ संदेश है कि कुछ वोटर सिर्फ जातिगत समीकरण नहीं देख रहे, बल्कि उनकी नजर में मुद्दों, गवर्नेंस व विकास के साथ-साथ विकल्प भी अहमियत रख रहा है। साथ ही, यह भी तय है कि बतौर विधायक अब अकेले ही प्रशांत किशोर विधानसभा में गवर्नेंस के मुद्दे पर दबाव बनाए रखेंगे। अगर सब कुछ ठीक रहा तो एनडीए को मजबूरी मान रहे लोगों को उनकी पार्टी भी विकल्प के रूप में दिखेगी। भारत की राजनीति ने एक बार फिर चौंकाया है। 

 

बीजेपी की पारंपरिक सीट

बांकीपुर उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान हुआ था। इस बार 2025 के चुनाव की तुलना में यहां सात प्रतिशत कम वोटिंग हुई। पिछली बार यहां 41.39 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार 34.30 फीसदी वोटिंग हुई। 2010 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद मतदान का यह सबसे कम प्रतिशत है। एनडीए की तरफ से बीजेपी के नीरज सिन्हा और महागठबंधन की ओर से आरजेडी की रेखा गुप्ता सहित कुल 25 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।

 

बांकीपुर की यह सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई थी। यह बीजेपी की परंपरागत सीट मानी जाती रही है। 1995 से यहां बीजेपी जीतती रही है। पहले पिता नवीन कुमार सिन्हा और फिर पुत्र नितिन यहां से लगातार जीतते रहे।

 

यहां से पांच बार लगातार जीतने वाले नितिन को इस बार भी पार्टी की जीत का इतना अधिक भरोसा था कि उन्होंने यहां तक कहा था कि बांकीपुर की जनता इस चुनाव में बीजेपी की जीत के नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। लेकिन अब, जब पीके ने बीजेपी के गढ़ में घुसकर सेंध लगा दी है।

 

राजनीतिक समीक्षक एके चौधरी कहते हैं, ‘‘बिहार में चुनाव में जाति ही जीत की गारंटी रही है। इसी समीकरण को देखकर पार्टियां टिकट भी देती रही हैं, यह इतनी जल्दी टूटने वाला नहीं है। हां, इतना जरूर है कि पीके की जीत से उन सुधारों की चर्चा अवश्य ही तेज होगी, जिससे संबंधित मुद्दे वे 2025 के चुनाव से उठा रहे। अब इन मुद्दों से अन्य पार्टियां भी मुंह नहीं मोड़ सकेंगी।'' ALSO READ: क्या हम फफूंद के खतरे को अब तक कम आंकते रहे हैं?

 

पीके पर भरोसा बढ़ेगा

प्रशांत किशोर की 'वोटकटवा' वाली छवि पर इसका असर पड़ेगा। 2025 के चुनाव में जनसुराज ने 238 सीट पर अपने प्रत्याशी खड़े थे, किंतु हालत इतनी खराब हुई कि 237 पर पार्टी के उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके थे। चौधरी कहते हैं, ‘‘पीके को पिछली बार ही चुनाव लड़ना चाहिए था। राघोपुर सहित अन्य सीटों से उनके चुनाव लड़ने की बात पहले सामने आई, किंतु अंतत: वे शायद हिम्मत नहीं जुटा सके, या यूं कहिए कि अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं थे। पार्टी के मुखिया की यह अनिश्चितता लोगों को शायद रास नहीं आई।''

 

विश्लेषकों का कहना है कि इस जीत से उनका मनोबल तो बढ़ेगा ही, साथ ही उनकी जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। आखिरकार, उन्हें चुनौतीपूर्ण लंबी लड़ाई जो लडऩी है। हालांकि बीजेपी के एक नेता कहते हैं, “और कारण जो भी रहे हों, पीके की जीत में भितरघात की भी बड़ी भूमिका रही। अन्यथा इतना अधिक मार्जिन नहीं रहता। निशाने पर कौन और क्यों था, आप समझ सकते हैं।”

 

बीजेपी के गढ़ में मिली यह जीत प्रशांत किशोर के लिए संजीवनी का काम करेगी। राजनीति विज्ञान की अवकाश प्राप्त प्रोफेसर श्यामली घोष कहती हैं, ‘‘अब उनकी शख्सियत केवल एक पॉलिटिकल स्ट्रैटेजिस्ट की नहीं रह जाएगी, बल्कि वह राजनेता के रूप में स्थापित हो जाएंगे। उनकी पार्टी के लिए अवसर बढ़ेंगे, लेकिन बहुत कुछ विधानसभा में उनके परफार्मेंस पर निर्भर करेगा, जिससे आम जनता को लगे कि उनकी बात दमदार तरीके से उठाने वाला कोई है, जिस पर कोई चर्चा नहीं होती।''

 

घोष के मुताबिक प्रशांत किशोर को सरकार के उन वादों को जोरदार तरीके से उछालना होगा, जिन पर काम नहीं हुआ या वे पूरे नहीं हुए। सरकार के आंकड़ों के खेल पर भी उन्हें सक्रिय रहना होगा। तभी उनकी पार्टी के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि बिहार में जातिगत रूढ़िवादिता को तोड़ना इतना आसान नहीं है।

 

श्यामली घोष यह भी कहती हैं, ‘‘यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे एनडीए की पार्टियों का कोर वोटर शिफ्ट हो रहा। हां, यह इस बात का संकेत हो सकता है कि सवर्ण सहित इनका शहरी व मिडिल क्लास वोटर इनसे बिदक सकता है। मुझे नहीं लगता कि सम्राट सरकार पर कोई असर पड़ने वाला है।''

 

हालांकि, पीके एनडीए की हार का ठीकरा मुख्यमंत्री के सिर फोड़ने की कोशिश करते हुए उनसे नैतिक आधार पर इस्तीफे को लेकर तंज तो कसते रहेंगे। जनसुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने इसे जनता की जीत और बीजेपी की हार बताते हुए कहा, ‘‘बिहार में लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए इस जीत के बड़े मायने हैं।'' ALSO READ: अमेरिका-चीन के बीच तनाव, अमेरिका ने लगाया चीनी रोबोट पर प्रतिबंध

 

गठबंधनों को करना होगा आत्ममंथन

बिहार में पिछले कई दशकों से कोई भी पार्टी अकेले सत्ता पर काबिज नहीं हो सकी है। जातिगत समीकरणों को देखते हुए गठबंधन उनकी मजबूरी बन जाती है। सत्ता पक्ष में बीजेपी, जेडीयू, चिराग पासवान की एलजेपी (लोक जनशक्ति पार्टी), उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोर्चा) और जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) है तो विपक्ष में आरजेडी, कांग्रेस और माले सहित सात पार्टियां हैं। पिछले 21 सालों के अधिकांश समय में एनडीए सत्ता और आरजेडी विपक्ष में है। यह परिणाम इन दोनों गठबंधनों के लिए झटका तो है ही, साथ यह एक अवसर भी है।

 

श्यामली घोष कहती हैं, ‘‘अब समय आ गया है कि दोनों ही पक्ष आत्ममंथन करें। किसी वर्ग विशेष को अपनी जागीर का हिस्सा नहीं समझें। अपनी नीतियों तथा रणनीति की समीक्षा करें। क्योंकि, अगर एनडीए से शहरी वोटरों का मोहभंग दिख रहा है तो आरजेडी का माइ (मुस्लिम-यादव) समीकरण भी कहीं न कहीं दरक रहा।''

 

जेडीयू-आरजेडी में भी नेतृत्व के प्रति चुनौती बढ़ेगी। कांग्रेस प्रवक्ता असितनाथ तिवारी तो पहले ही कह चुके हैं कि बिहार में महागठबंधन को चलाने की जिम्मेदारी आरजेडी पर है, लेकिन इस चुनाव में तेजस्वी यादव ने साथी दलों को साथ लेने की जरूरत ही नहीं समझी। हालांकि, आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया है।

 

इस खींचतान के बीच गठबंधन की पार्टियों में परिवर्तन के इच्छुक वोटर जनसुराज के प्रति आकर्षित तो हो ही सकते हैं। पटना के बोरिंग रोड निवासी वोटर राहुल कहते हैं, ‘‘परिवर्तन से ही बेहतर मिलता है। पहले विकल्प का अभाव था। लोग यह सोचते थे कि कहीं पहले वाली स्थिति ना लौट आए, इसलिए मजबूरी में वोट करते थे। स्वाभाविक है, जब विकल्प दिखेगा तो लोग आजमाएंगे ही। इसमें गलत क्या है।''

 

प्रशांत किशोर की जीत के फैक्टर अब चाहे जितने गिना लें, फिलहाल बीजेपी का यह भ्रम तो टूट ही गया कि वे बांकीपुर सीट से किसी को भी जीत दिला देंगे।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : ईरान डील की उम्मीद में अमेरिकी बाजारों में कल अच्छी तेजी रही। डाओ रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ। टेक शेयरों के दम पर नैस्डैक भी 2 फीसदी ऊपर रहा। 10 साल की बॉन्ड यील्ड में हल्की गिरावट आई है। हालांकि एशियाई बाजारों में दबाव है। जापान और कोरिया के बाजार नीचे आए हैं। इधर वीकली एक्सपायरी के दिन गिफ्ट निफ्टी में भी मामूली दबाव के साथ कामकाज हो रहा है।

करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

3 अगस्त को भारतीय इक्विटी मार्केट में लगातार चौथे सेशन में बढ़त रही। निफ्टी 24,700 के ऊपर बंद हुआ। मीडिया स्टॉक्स को छोड़कर सभी सेक्टर्स में बड़े पैमाने पर खरीदारी की वजह से बाजार में तेजी आई। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 544.39 अंक या 0.70 फीसदी बढ़कर 78,639.03 पर और निफ्टी 390.70 अंक या 1.60 फीसदी बढ़कर 24,774.30 पर बंद हुआ। छोटे-मझोले शेयरों में भी खरीदारी दिखी। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.2% की बढ़त हुई।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07:25 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 23 अंक यानी 0.09 फीसदी की गिरावट के साथ 24,642 के आसपास कारोबार कर रहा था। ये सेंसेक्स-निफ्टी के लिए निगेटिव संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में कमजोरी देखने को मिल रही है। जापान के निक्केई में 0.35 फीसदी की कमजोरी देखने को मिल रही है। हालांकि, स्ट्रेट टाइम्स में 0.25 फीसदी की तेजी दिख रही है। हैंग सेंग में 0.57 फीसदी और ताइवानी बाजार में 0.07 फीसदी की कमजोरी दिख रही है। लेकिन कोस्पी में करीब 0.83 फीसदी की बढ़त है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में भी 0.08 फीसदी की हल्की बढ़त नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

जुलाई में अमेरिकी विनिर्माण गतिविधि चार सालों से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। जिससे डॉव जोन्स रिकॉर्ड हाई पर बंद हुआ। टेक शेयरों के दम पर नैस्डैक भी 2 फीसदी ऊपर बंद हुआ।

Market cues : हालिया रैली के बाद अब निफ्टी में हल्का कंसोलिडेशन मुमकिन, 24774 के ऊपर जाने पर ही बढ़ेगी तेजी

डॉलर इंडेक्स

येन के मुकाबले डॉलर 0.3% बढ़कर 157.625 येन पर आ गया है। यह पिछले हफ्ते येन को सहारा देने के लिए अमेरिकी और जापानी अधिकारियों के मिलकर किए गए दखल के बाद फिर से मजबूत हुआ है। छह करेंसी के मुकाबले डॉलर की ताकत मापने वाला US डॉलर इंडेक्स पिछले दो महीनों के सबसे निचले लेवल 99.99 के पास दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10 ईयर ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 0.2 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4.684% पर आ गई है।

एशियाई करेंसी

US डॉलर के मुकाबले अधिकांश एशियाई करेंसी नीचे ट्रेड कर रही हैं। साउथ कोरियन वॉन में सबसे ज़्यादा बढ़त हुई है। यह 0.40% बढ़ा है। इसके बाद इंडोनेशियाई रुपिया (+0.14%) और ताइवान डॉलर (+0.07%) का नंबर आता है।

उधर दूसरी तरफ जापानी येन सबसे कमजोर बना हुआ है। यह 0.23% गिरा है। जबकि सिंगापुर डॉलर,थाई बहत,चीनी रेनमिनबी,फिलीपीन पेसो और मलेशियन रिंगित भी नीचे आए हैं।

ईरान के पास सुलह का आखिरी मौका: ट्रंप

US-ईरान बातचीत को लेकर सस्पेंस कायम है। ट्रंप ने कहा है कि नया प्रस्ताव ईरान के पास सुलह का आखिरी मौका है। हलांकि ईरान का किसी भी सीधी बातचीत से इनकार है। ईरान ने कहा है कि हॉर्मूज से जहाजों की आवाजाही के लिए ओमान से बात चल रही है। ब्रेंट $84 के पास दिख रहा है।

CAS के कन्फ्यूजन पर NSE की सफाई

क्लोजिंग ऑक्शन सेसन यानी CAS पर को लेकर कल के कंफ्यूजन पर NSE ने देर रात सफाई जारी की। इसमें कहा गया कि SEBI के नियम के हिसाब से ट्रेडिंग हुई। प्री-ओपन से ज्यादा ट्रेडिंग मेंबर्स और यूनीक PAN से ऑर्डर आए।

आज नॉन रिटेल के लिए खुलेगा LIC का OFS

आज LIC का ऑफर फॉर सेल नॉन रिटेल के लिए खुल रहा है। इसके जरिए सरकार 2.5% हिस्सा बेचेगी। इसमें 4% का अतिरिक्त ग्रीन शू ऑप्शन भी मौजूद है। फ्लोर प्राइस करीब 11 फीसदी डिस्काउंट पर 382 रुपए प्रति शेयर है। OFS से सरकार करीब 31,000 करोड़ रुपए जुटा सकती है।

पेटीएम में आज 2002 करोड़ रुपए की ब्लॉक डील संभव

पेटीएम में आज 2002 करोड़ रुपए की ब्लॉक डील संभव है। शुरुआती निवेशक 2.3% हिस्सा बेच सकते हैं। फ्लोर प्राइस 5% डिस्काउंट पर करीब 1,340 रुपए प्रति शेयर तय की गई है। वहीं MEESHO में 1,900 करोड़ रुपए के बड़े सौदे हो सकते हैं। फ्लोर प्राइस 5% डिस्काउंट पर 182 रुपए प्रति शेयर तय की गई है।

डाबर को FSSAI से झटका

फूड रेगुलेटर FSSAI ने डाबर इंडिया को झटका दिया है। 100% दावों वाले फूड प्रोडक्ट्स की बिक्री तत्काल रोकने का आदेश दिया गया है। गाय का घी, कोकोनट वॉटर,कोकोनट मिल्क जैसे की प्रो़क्ट्स पर एक्शन लिया गया है। FSSAI ने कहा ‘100% Natural’ और ‘100% Pure’ जैसे दावे भ्रामक हैं।

DLF के नतीजे कमजोर,रेवेन्यू और मार्जिन घटा

चौथी तिमाही में DLF के नतीजे कमजोर रहे है। इसका मुनाफा 4 परसेंट बढ़ा है। लेकिन रेवेन्यू में 53 परसेंट की गिरावट दिखी है। मार्जिन पर भी दबाव दिखा है। वहीं KEI इंडस्ट्रीज का प्रॉफिट 40% बढ़ा है। मार्जिन में भी सुधार दिखा है। IREDA के मुनाफे में 37% की बढ़त दिखी है। इसकी ब्याज से होने वाली कमाई में 24% की ग्रोथ दिखी है।

भारती एयरटेल, ONGC के नतीजे आज

निफ्टी में शामिल भारती एयरटेल और ONGC के पहली तिमाही के नतीजे आज आएंगे। भारती एयरटेल का मुनाफा 20% बढ़ सकता है। इसका ARPU 1.5 फीसदी बढ़ सकता है। साथ ही BSE और गोदरेज प्रॉपर्टी समेत वायदा नतीजों की लंबी लिस्ट है जिनका आज इंतजार रहेगा।

डिजिटल पेमेंट पर लगने वाले चार्ज के नियमों में बदलाव हो सकता है। सरकार आज लोकसभा में बिल ला सकती है। FPIs को टैक्स छूट देने वाले अध्यादेश पर भी बिल पेश हो सकता है।

जिनकी जेब से राममंदिर निर्माण के लिए एक पैसा नहीं निकला, वे लोग कर रहे चंदा चोरी की बात : CM योगी

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Yogi Adityanath statement on Ram Temple funds: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र प्रारंभ होने से पहले सोमवार को पत्रकारों से वार्ता की। उन्होंने गरीब, युवा, महिला व किसान के मुद्दे पर विपक्ष को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि ये सभी डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता में हैं। मुख्यमंत्री ने राम मंदिर के चढ़ावा चोरी पर भी विरोधी दलों के नेताओं पर सवालिया निशाना खड़ा करते हुए कहा कि जो लोग अयोध्या के मुद्दे को उठा रहे हैं, उन्होंने जयश्रीराम बोलने पर रामभक्तों पर लाठी-गोली चलवाई थी। राम मंदिर के खिलाफ न्यायालय में वकीलों की फौज खड़ी करके इसे बाधित करने का कुत्सित प्रयास किया। राम मंदिर में चंदा चोरी की बात वे लोग कर रहे हैं, जिनके जेब से मंदिर निर्माण के लिए एक पैसा भी नहीं निकला। देश-दुनिया इनका दोहरे चरित्र देख रही है।

एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन, तय होगा न्यूनतम मानदेय 

सीएम ने बड़ी घोषणा की कि सरकार एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन को लागू करने के साथ ही न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित करने जा रही है। आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं, रसोइयों व ग्राम चौकीदारों को भी उचित मानदेय प्राप्त हो और उनकी सेवाएं प्रदेश के हित को संवर्धित करने के लिए कार्य करें, इसके लिए अनुपूरक बजट का सहारा लिया गया है। 

किसानों को असुरक्षित करने वालों का दोहरा चरित्र सामने  

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जिन लोगों के समय में किसानों के हितों पर कुठाराघात हुआ, जिन्होंने किसानों को खेत के लिए पानी नहीं दिया। उनके हक पर बिचौलियों का वर्चस्व स्थापित कराया और किसानों को असुरक्षित करते हुए उनके जीवन में बदहाली लाने का पाप किया। ऐसे दोहरे चरित्र वाले लोग आज किसान की बात करके उनके जले पर नमक छिड़क रहे हैं। पीएम मोदी जी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जिसके तहत यूपी में 24 लाख हेक्टेयर भूमि में अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा दी गई, समेत कई योजनाएं चल रही हैं। किसान अब तीन-चार फसलें लगा रहा है। पैक हाउस के माध्यम से औद्यानिक फसलों का विभिन्न देशों में निर्यात हो रहा है।

खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश 

सीएम ने किसानों के मुद्दे पर सपा को घेरा और अपनी सरकार में गन्ना किसानों के लाभों को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि 2007 से 2017 के बीच 29 चीनी मिलें बंद हुईं, 21 चीनी मिलें औने-पौने दाम पर बेच दी गईं, लेकिन हमारी सरकार में 3.23 लाख करोड़ से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान हुआ है। 122 में से 105 से अधिक चीनी मिलें चौथे-पांचवें दिन ही किसानों के खाते में गन्ना मूल्य का भुगतान कर रही हैं। समाजवादी पार्टी के समय में 10 वर्ष का गन्ना मूल्य बकाया था। ये लोग किसानों के हितों का संरक्षण करने के बजाय उन्हें आत्महत्या और पलायन के लिए मजबूर करते थे। उस समय किसानों के ट्यूबवेल तक सुरक्षित नहीं थे। सरकार आज 16 लाख ट्यूबवेल को निशुल्क बिजली उपलब्ध करा रही है। कुछ जगहों पर पोर्टल की तकनीकी समस्या आई थी, लेकिन विभाग को किसानों के लिए खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।

नकारात्मकता की राजनीति त्यागें विपक्ष के साथी

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सत्र हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सदन के समय का बेहतर उपयोग हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश के हित और 25 करोड़ आमजन के विकास के लिए विधानमंडल की कार्यवाही को शांतिपूर्ण ढंग से चलाने के लिए विपक्ष के साथी नकारात्मकता की राजनीति को छोड़कर प्रदेश के विकास व समृद्धि में योगदान देंगे। सीएम ने कहा कि विधायिका आमजन की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। संसदीय प्रणाली में विधायिका गरीब, किसान, युवा और महिला से जुड़े मुद्दों पर चर्चा, समीक्षा और परिणाम तक पहुंचाने का सबसे अच्छा प्लेटफॉर्म है। हर जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्या को रखकर सरकार से समाधान का रास्ता निकलवा सकता है। इस प्लेटफॉर्म का बेहतर उपयोग हो, यह भाजपा नेतृत्व की एनडीए सरकार की सदैव प्राथमिकता रही है। 

संवाद से ही सरकार कर सकी बेहतर काम

सीएम ने कहा कि 9 वर्ष में संवाद और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की समीक्षा करने के उपरांत बनी योजनाओं के माध्यम से ही सरकार बेहतर काम कर सकी है। इससे उत्तर प्रदेश के प्रति धारणा बदलने के साथ ही इसे बीमारू राज्य से उबारकर रेवेन्यू सरप्लस व इकॉनमी का ब्रेकथ्रू स्टेट बनाना संभव हो सका। 9 वर्षों में सरकार ने युवाओं के कल्याण, महिलाओं की सुरक्षा-सम्मान और स्वावलंबन, किसानों के जीवन में परिवर्तन और चेहरे पर खुशहाली लाने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और वर्तमान में सरकार क्या करने जा रही है, इस पर भी चर्चा होगी।

विधायिका से संभव होता है गरीबों के जीवन में परिवर्तन

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने 9 वर्षों में छह करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से उबारकर मध्यम श्रेणी में लाकर यदि उनके जीवन में परिवर्तन लाने का प्रयास किया है तो उसकी केंद्रबिंदु विधायिका है, क्योंकि यहीं नीतियां बनती हैं। उससे पहले चर्चा-परिचर्चा होती है। विधायिका सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, किसान, निवेश, रोजगार आदि पर चर्चा करने का भी सशक्त माध्यम है। 

सावन का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती-किसानी की दृष्टि से किसानों, स्कूल-कॉलेज में एडमिशन के लिए युवाओं और कांवड़ यात्रियों के लिए यह महीना अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा ऊर्जा के प्रतीक जिन छात्रों ने प्रवेश लिया है और जो नए रोजगार के लिए बढ़ रहे हैं, उन सभी प्रतिभाशाली युवाओं को शुभकामनाएं। किसान जब दिनरात मेहनत करता है तो उत्तर प्रदेश की धरती सोना उगलती है। भारत की कुल कृषि भूमि में यूपी की हिस्सेदारी मात्र 11 प्रतिशत है, लेकिन हमारे किसान देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21-22 फीसदी का योगदान दे रहे हैं। किसानों के जीवन में आज व्यापक परिवर्तन हुआ है। मोदी जी के विजन के अनुरूप किसानों की आय दोगुनी से अधिक हुई है। किसानों के जीवन में खुशहाली लाने वाले अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। सीएम ने रिफॉर्म में किसानों के योगदान की सराहना भी की।

आधी आबादी के जीवन में व्यापक परिवर्तन

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आधी आबादी के जीवन में भी व्यापक परिवर्तन आया है। 2017 में जो महिला श्रमबल 12 फीसदी था, वह अब बढ़कर 37-38 फीसदी से अधिक हो गया है। डबल इंजन सरकार सभी बड़े महानगरों में कामकाजी महिलाओं के लिए श्रमजीवी हॉस्टल का निर्माण कर रही है। मिशन शक्ति के अंतर्गत सरकार ने महिला सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए अनेक कदम उठाए हैं। 9 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी और उसमें 20 फीसदी से अधिक महिलाओं की भागीदारी के साथ प्रदेश सरकार ने कीर्तिमान स्थापित किया है।

 

प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे युवाओं का अभिनंदन 

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कारण प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, सुरक्षा व अन्य कारणों से निवेश के बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं। लाखों युवाओं को अपने जनपद, क्षेत्र में नौकरी व रोजगार की गारंटी मिली है। परंपरागत उद्यम को प्रोत्साहित करते हुए एक जनपद-एक उत्पाद और पीएम विश्वकर्मा आदि योजनाओं से व्यापक बदलाव हुए हैं। करोड़ों नौजवानों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। सीएम ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे युवाओं का अभिनंदन किया।  

विधानसभा व परिषद के सदस्य सावन के आयोजनों में लेंगे भाग 

मुख्यमंत्री ने सावन में शिवभक्तों की आस्था को भी नमन किया और कहा कि  देश-प्रदेश में शिवभक्त हर-हर, बम-बम के उत्साहपूर्ण माहौल में शिवभक्ति को निवेदित कर रहे हैं। अभी से करोड़ों शिवभक्त पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हरिद्वार के पावन धाम में हर की पैड़ी से गंगाजल लेने के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। शासन, स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी, सामाजिक, व्यापारिक व धार्मिक संगठनों ने उनके स्वागत, सुरक्षा, सुविधा के लिए अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए हैं। विधानसभा व परिषद के सदस्य भी 7 अगस्त से इन आयोजनों में भाग लेंगे। 

सदन में स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा करें जनप्रतिनिधि 

सीएम ने सभी जनप्रतिनिधियों से कहा कि सदन में स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा बनाए रखने के लिए कार्य करें। सरकारी कर्मचारियों, आउटसोर्स व संविदा कार्मिकों ने 9 वर्षों में मेहनत की पराकाष्ठा दिखाई है, ऐसे में सरकार उनके वेलफेयर के लिए भी कार्य कर रही है। अनुदेशकों, शिक्षामित्रों, बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा के सभी शिक्षकों को कैशलेस की सुविधा दी गई। साथ ही सरकार ने अनुदेशकों, शिक्षामित्रों के मानदेय को भी बढ़ाया है। 

 

पत्रकार वार्ता के दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख आदि मौजूद रहे।

आस्था और अनुशासन का अद्भुत संगम है कांवड़ यात्रा

-डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी

सावन के इस महीने में उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में कांवड़ियों के झुंड कंधों पर गंगाजल लिए शिवत्व को आत्मसात करते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं तो यह सनातन परंपरा की उस अनंत धारा का साक्षात प्रकटीकरण है जो प्राचीन काल से भारतीय चेतना में प्रवाहित होती रही है। यह महीना शिव-आराधना का सबसे पवित्र काल है। यही वह समय है जब पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र-मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने कंठ में धारण किया था और सृष्टि को विनाश से बचाया था।

 

कांवड़िए गंगाजल लेकर शिवलिंग पर अभिषेक करते हैं तो यह उस देवता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन है, जिसने संसार के कल्याण के लिए विष पिया। यह त्याग और भक्ति के शाश्वत सिद्धांत की जीवंत अभिव्यक्ति है। आस्था के इसी धरातल पर, यदि हम इस यात्रा को सामाजिक और मनोवैज्ञानिक रूप में देखें, तो ऐसी संरचना उभरती है जिसमें मनुष्य की सामूहिक चेतना, अनुशासन और सामाजिक सहयोग की गहरी परतें हैं। यही गहराई उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूर्ण समर्पण से इन तपस्वियों के प्रति सेवा भाव के लिए प्रेरित करती है।

 

इस यात्रा का मूल तत्व आस्था और अनुशासन है। आस्था मनुष्य की सहनशक्ति बढ़ा देती है। सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा, वह भी भीषण गर्मी और मानसून की अनिश्चितता के बीच, किसी सामान्य शारीरिक क्षमता का काम नहीं। श्रद्धा के आवेग में शरीर धीरे-धीरे थकान की सीमाओं को पार करता जाता है। शिव भक्त को अपने शरीर की सीमाओं का नए सिरे से साक्षात्कार होता है। यह अनुभव दीर्घकालिक और सामूहिक है। यहां प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहभागिता केंद्र में होती है। शरीर की यह परीक्षा व्यक्ति को यह सिखाती है कि सीमाएं जितनी भौतिक होती हैं, उतनी ही मानसिक भी, और अक्सर मन शरीर से पहले हार मान लेता है।

इसी बिंदु से मानसिक अनुशासन का प्रश्न जुड़ता है। लंबी पदयात्रा में कांवड़ियों को एक निश्चित संयम और मर्यादा का पालन भी करना पड़ता है। समय पर विश्राम, भोजन में सादगी, और सबसे महत्वपूर्ण, कांवड़ को भूमि पर न रखने जैसे नियमों का निर्वहन। यह अनुशासन स्वेच्छा से स्वीकार किया गया प्रतिबंध है। जब कोई व्यक्ति किसी बड़े लक्ष्य के लिए स्वयं को संयमित करता है, तो उसमें आत्म-नियंत्रण की क्षमता विकसित होती है। अनेक कांवड़िए इस अनुभव को केवल धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि आत्म-परिष्करण की एक प्रक्रिया के रूप में वर्णित करते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो कांवड़ को भूमि पर न रखने का नियम भी गहरा प्रतीकात्मक अर्थ रखता है। यह जल साक्षात गंगा का, स्वयं शिव की जटाओं से प्रवाहित पवित्रता का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय परंपरा में तप, व्रत और संयम को सदा मोक्ष के मार्ग के रूप में देखा गया है, और कांवड़ यात्रा इसी तपस्या-परंपरा का समकालीन रूप है।

 

समाजशास्त्रीय दृष्टि से देखें तो कांवड़ यात्रा ऐसी सामूहिकता है जो सामाजिक ढांचों, जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति की सीमाओं को अस्थायी रूप से धुंधला कर देती है। सड़क पर चलते समय एक मजदूर और एक व्यापारी, दोनों समान रूप से थकान और कष्ट साझा करते हैं। यह साझा अनुभव एक अस्थायी किंतु सशक्त बंधन उत्पन्न करता है। मनुष्य के सामाजिक स्वभाव में यह प्रवृत्ति गहराई से अंतर्निहित है कि साझा कष्ट और साझा उद्देश्य समुदाय को अधिक दृढ़ता से बांधते हैं। साझा सुख में यह दृढ़ता नहीं होती।

 

इसी सामूहिकता में सेवा शिविरों की व्यवस्था भी है। मार्ग में स्थान-स्थान पर स्थापित सेवा शिविर, जहां स्थानीय निवासी, सामाजिक संगठन और स्वयंसेवक निःशुल्क भोजन, विश्राम और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराते हैं, पूरी यात्रा का सामाजिक आधार बनाते हैं। यह स्वतःस्फूर्त सामुदायिक सहयोग का उदाहरण है। हजारों परिवार और संस्थाएं बिना किसी प्रत्यक्ष लाभ की अपेक्षा के इस व्यवस्था में योगदान देती हैं। आज के दौर में जहां आधुनिक शहरी जीवन व्यक्तिवाद और पारस्परिक अलगाव की ओर बढ़ रहा है, कांवड़ यात्रा वर्ष में एक बार ही सही, पारस्परिक निर्भरता और सामुदायिक दायित्व की भावना को पुनर्जीवित करती है।

 

राज्य की भूमिका पर विचार किए बिना यह विषय पूरा नहीं होगा। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीते वर्षों में इस यात्रा को व्यवस्थित, सुरक्षित और गरिमामय बनाने की दिशा में जो प्रयास किए हैं, वे एक स्पष्ट सांस्कृतिक दृष्टि का प्रतिबिंब हैं। मार्ग प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सा शिविर, ड्रोन निगरानी, स्वच्छता अभियान, पुष्प वर्षा और यातायात प्रबंधन जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि योगी सरकार श्रद्धालुओं को भीड़ के रूप में नहीं, सम्मानित आस्था-यात्रियों के रूप में देखती है।

 

योगी आदित्यनाथ स्वयं धर्माचार्य हैं और उनके नेतृत्व में यह प्रयास सांस्कृतिक पुनर्जागरण या 'सनातन गौरव की पुनर्स्थापना' के रूप में देखा जाता है। एक ऐसी दृष्टि जिसके अंतर्गत काशी विश्वनाथ धाम का भव्य पुनर्निर्माण, अयोध्या में राम मंदिर के आसपास के अवसंरचनात्मक कायाकल्प, और कुंभ जैसे आयोजनों की भव्यता को भी रखा जा सकता है। कांवड़ यात्रा मार्ग की हर सड़क, हर लाइट, हर सेवा शिविर, आस्था और शासन के बीच सम्मानजनक संबंध का प्रतीक है। स्वाभाविक है कि किसी भी बड़े सार्वजनिक विषय पर भिन्न मत भी होते हैं, और कुछ टिप्पणीकार इस विषय पर अलग दृष्टिकोण भी रखते हैं परंतु व्यापक जनसमर्थन और श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप है।

 

कांवड़ यात्रा को सिर्फ आस्था या अनुशासन के ही रूप में देखना उचित नहीं होगा। यह यात्रा वास्तव में इन दोनों तत्वों के संगम पर खड़ी है जहां आध्यात्मिक विश्वास शारीरिक कष्ट को अर्थ प्रदान करता है, और शारीरिक कष्ट उस विश्वास को अधिक सघन, अधिक प्रत्यक्ष और अधिक अनुभवजन्य बना देता है। आस्था के बिना यह यात्रा केवल एक कठिन शारीरिक परीक्षा रह जाती और अनुशासन के बिना यह केवल भावुक उन्माद बनकर रह जाती। किंतु, जब लाखों भक्त शिव के प्रति अपने प्रेम में एक साथ चलते हैं, कष्ट सहते हैं और फिर भी मुस्कुराते हुए 'बोल बम' का उद्घोष करते हैं, तब यह केवल सामाजिक व्यवहार नहीं रह जाता, यह सनातन धर्म की अजेय जीवंतता का प्रमाण बन जाता है।

 

जब राज्य स्वयं आगे बढ़कर इस आस्था को गरिमा, सुरक्षा और सम्मान देता है, तो यह सभ्यता की उस स्मृति के प्रति राजकीय कृतज्ञता है जिसने हमें सनातन पहचान दी है। इन दोनों के संतुलन में ही इस परंपरा की वास्तविक शक्ति निहित है। एक ऐसी शक्ति जो व्यक्ति को स्वयं से जोड़ती है, समुदाय को एक-दूसरे से जोड़ती है, और राष्ट्र को उसकी आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ती है। (लेखक श्री गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर में वेद विभागाध्यक्ष हैं) 

GK: किस देश में सबसे पहले बनीं थी बिरयानी? कहानी भले ही उलझी है, लेकिन खुशबू और स्वाद लाजवाब

चाहे वह हैदराबाद की स्मोकी दम बिरयानी हो, कोलकाता की मशहूर आलू वाली बिरयानी हो या लखनऊ की खुशबूदार अवधी बिरयानी….खाने के शौकीनों के बीच बहुत पसंद की जाती है। फिर भी एक सवाल दशकों से बहस का विषय बना हुआ है- असल में बिरयानी किस देश में बनी थी? हालांकि बहुत से लोग मानते हैं कि इसकी शुरुआत भारत में हुई थी, लेकिन इतिहासकारों का मानना ​​है कि इसका जवाब खुद इस डिश की तरह ही कई परतों वाला और कठिन है।

ज्यादातर खाने-पीने के इतिहासकार बिरयानी की शुरुआत प्राचीन फारस (आज का ईरान) से मानते हैं। माना जाता है कि ‘बिरयानी’ शब्द भी फारसी शब्दों ‘बिरिंज’ (जिसका मतलब है चावल) और ‘बिरयान’ (जिसका मतलब है ‘तला हुआ’ या ‘पकाने से पहले भुना हुआ’) से बना है। फारसी रसोइए चावल के साथ मीट, जड़ी-बूटियां, सूखे मेवे और केसर की परतें लगाकर शानदार चावल के व्यंजन बनाते थे। इसी से उस चीज की नींव पड़ी जो बाद में आधुनिक बिरयानी बनी।

बिरयानी असल में भारत कैसे पहुंची, यह आज भी बहस का विषय है। एक प्रचलित थ्योरी का श्रेय मुगल साम्राज्य को जाता है। माना जाता है कि वहां के शाही रसोइयों ने सैनिकों के लिए चावल, मांस और खुशबूदार मसालों को मिलाकर एक पौष्टिक ‘वन-पॉट मील’ (एक ही बर्तन में बनने वाला खाना) तैयार किया था। एक और मत यह है कि यह डिश फारसी व्यापारियों, तीर्थयात्रियों और रईसों के साथ बहुत पहले ही आ गई थी, जो मुगल आने से पहले काफी पहले दक्कन में बस गए थे।

कुछ इतिहासकार दक्षिण भारत में और भी पुराने कनेक्शन की ओर इशारा करते हैं। ऐतिहासिक संदर्भों में बताया गया है कि दूसरी सदी ईस्वी में ही आज के तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में योद्धाओं को चावल और मांस से बना एक खास व्यंजन परोसा जाता था। हालांकि यह आज की बिरयानी से अलग था, लेकिन ऐसे व्यंजनों के होने से पता चलता है कि सदियों के दौरान भारत की अपनी पाक-कला परंपराएं शायद फारसी खाना पकाने के तरीकों के साथ मिलकर कुछ बिल्कुल नया बन गईं।

जैसे-जैसे बिरयानी पूरे उपमहाद्वीप में फैली, हर इलाके ने इसमें अपनी खास पहचान जोड़ी। अवध की शाही रसोई में नाज़ुक लखनवी बिरयानी को और बेहतर बनाया गया, जिसमें खुशबूदार चावल और हल्के मसालेदार मीट को अलग-अलग पकाया जाता है और फिर उनकी परतें एक साथ लगाई जाती हैं। वहीं, हैदराबाद ने मशहूर ‘दम’ स्टाइल को बेहतरीन बनाया। इसमें मैरीनेट किए हुए मीट, केसर वाले चावल और खुशबूदार मसालों को एक बर्तन में सील करके धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता है, जब तक कि चावल के हर दाने में स्वाद न समा जाए।

बिरयानी को साधारण पुलाव से जो चीज असल में अलग बनाती है, वह है इसे बनाने का खास तरीका और इसकी परतें। पारंपरिक रूप से, मीट को दही, मसालों, लहसुन और प्याज के साथ मैरीनेट करके थोड़ा पकाया जाता है। इसके बाद, खुशबूदार बासमती चावल, केसर वाला दूध, घी और साबुत मसालों की परतें लगाई जाती हैं और फिर बर्तन को ‘दम’ पर पकाने के लिए सील कर दिया जाता है। धीरे-धीरे भाप में पकाने की इस तकनीक से सभी स्वाद आपस में मिल जाते हैं और चावल भी खिले-खिले और खुशबूदार बने रहते हैं।

समय के साथ, बिरयानी में स्थानीय स्वाद और सामग्री के हिसाब से बदलाव आए। तटीय इलाकों में झींगे और मछली से सीफ़ूड बिरयानी बनाई गई, जबकि पनीर, सब्ज़ियों या कटहल वाली वेज बिरयानी भी उतनी ही लोकप्रिय हुई। कोलकाता ने इसमें आलू जोड़े, मालाबार में खुशबूदार छोटे दाने वाले चावल का इस्तेमाल हुआ, सिंधी बिरयानी अपने तेज़ मसालों के लिए मशहूर हुई और कश्मीर ने इसमें सूखे मेवे और नट्स शामिल किए, जिससे यह साबित हुआ कि कोई भी दो बिरयानी बिल्कुल एक जैसी नहीं होतीं।

आज, कोई भी एक देश सचमुच बिरयानी पर अपना मालिकाना हक नहीं जता सकता। हो सकता है कि इसकी शुरुआती प्रेरणा फारस से मिली हो, लेकिन इसे भारतीय उपमहाद्वीप में ही वह रूप मिला-खूब सारे मसालों वाली और अलग-अलग इलाकों की खासियत वाली डिश-जिसे लाखों लोग पसंद करते हैं। बिरयानी सिर्फ एक खाना नहीं है, बल्कि यह इस बात की एक स्वादिष्ट याद दिलाती है कि कैसे अलग-अलग संस्कृतियां, व्यापार, लोगों का आना-जाना और सदियों से खाने-पीने में हुए नए प्रयोग मिलकर दुनिया की सबसे मशहूर डिश में से एक बना सकते हैं।

भारत का बॉर्डर रेल प्रोजेक्ट! चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर 45000 करोड़ खर्च कर बिछेगा रेलवे का जाल

Indian Rail Border Project: बदलती रीजनल मोबिलिटी और रणनीतिक चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। ‘ब्लूमबर्ग’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत अपनी स्ट्रैटिजिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की कोशिशों के तहत चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती अपनी सीमाओं पर रेलवे नेटवर्क के विस्तार और अपग्रेडेशन के लिए लगभग ₹45000 करोड़ ($4.7 बिलियन) के निवेश की योजना बना रहा है। आने वाले 18 से 24 महीनों के भीतर लागू होने वाली यह परियोजना अगले दो वर्षों के लिए नियोजित कुल रेलवे इंफ्रा आउटले का करीब 22 फीसदी हिस्सा है।

इन सीमावर्ती राज्यों में बिछेगा रेलवे का जाल

रिपोर्ट के मुताबिक इस डेवलपमेंट से जुड़े लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस खर्च का इस्तेमाल देश के संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों में नई पटरियां बिछाने, नए प्लेटफॉर्म बनाने और नेटवर्क को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। इस योजना में पाकिस्तानी सीमा से लगते पश्चिमी राज्य पंजाब और राजस्थान, बांग्लादेश सीमा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर से सटे पश्चिम बंगाल और असम के रणनीतिक क्षेत्र, चीन सीमा के पास और सुदूर पर्वतीय क्षेत्र वाले हिमाचल और पूर्वोत्तर के राज्य शामिल हैं।

आपको बता दें कि ये नया प्लान भारत सरकार के सीमावर्ती क्षेत्रों में रेलवे नेटवर्क, पुल और सुरंगों बनाने के उस $3.4 बिलियन ($340 करोड़) के प्लान से भी बड़ा है, जिसकी जानकारी पहले सामने आई थी।

संवेदनशील सीमाओं पर बदलती रणनीतिक स्थितियां

सीमावर्ती कनेक्टिविटी पर भारत का ये फोकस तब सामने आया है जब पड़ोसी देशों के साथ संबंध नए फेज में आगे बढ़े हैं। 6 साल पहले हुई घातक झड़प के बाद चीन के साथ संबंधों में अब स्थिरता आई है। आपको बता दें कि पिछले साल पाकिस्तान के साथ एक ब्रीफ कॉन्फ्लिक्ट देखने को मिला था। इसके अलावा साल 2024 में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक उलटफेर ने भारत के पहले से स्थिर साझेदारी के संबंधों को जटिल बना दिया है।

नागरिक सुविधा के साथ सैन्य लॉजिस्टिक्स को मजबूती

इस भारी निवेश से डुअल यूजर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसका मतलब है कि ये सिविलियन रेलवे नेटवर्क होंगे जिनका इस्तेमाल आम नागरिकों की आवाजाही के लिए तो होगा ही, साथ ही आपात स्थिति में ये सैन्य लॉजिस्टिक्स को भी पूरा सहारा देंगे।

हिमालयी क्षेत्रों, सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वोत्तर के राज्यों जैसी संवेदनशील सीमाओं तक उच्च क्षमता वाले, ऑल-वेदर रेल नेटवर्क को मजबूत करके ट्रूप मोबलाइजेशन टाइम को भी स्ट्रैटिजकली कम किया जा सकता है। इसके साथ ही रिजनल प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ यह अहम सप्लाई लाइन को भी सुरक्षित करता है।

सीमावर्ती बुनियादी ढांचे पर पीएम मोदी का जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संवेदनशील क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को लगातार प्राथमिकता दी है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार ने इसे लेकर लगातार कदम उठाए हैं। पाकिस्तान सीमा के पास 1450 किलोमीटर नई सड़कें बनाई गई हैं। डोकलाम के करीब इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर है।

पिछले साल कश्मीर घाटी को बाकी भारत से जोड़ने वाले दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल का उद्घाटन किया गया। पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर भारत में लगभग 1700 किलोमीटर नई रेल लाइनें जोड़ी गई हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर और सैन्य विमानों के इस्तेमाल के लिए 1962 से निष्क्रिय पड़े एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से सक्रिय किया गया है।

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चीन की ओर से भी जारी है निर्माण

रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी तरफ चीन ने भी 2017 में डोकलाम में हुए सैन्य गतिरोध के बाद से अपनी ओर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण काफी तेज कर दिया है। चीन अपनी सीमा में एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है। चीन के इस विस्तार ने उपकरण और सैनिकों की तेजी से आवाजाही के जरिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को बढ़ाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अभी भारत के रेल मंत्रालय की ओर से इस निवेश योजना पर कोई आधिकारिक बयान या टिप्पणी नहीं आई है।

CM धामी ने की बालेश्वर मंदिर आने की अपील, जानिए क्यों खास है चंपावत का यह शिवधाम?

baleshwar temple champawat

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सावन के पहले सोमवार को श्रद्धालुओं को चंपावत के प्राचीन बालेश्वर मंदिर के बारे में जानकारी दी। उन्होंने लोगों से चंपावत आगमन पर इस शिवधाम दर्शन करने की भी अपील की। 

 

सीएम धामी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के चंपावत जनपद में स्थित प्राचीन बालेश्वर मंदिर भगवान शिव की दिव्य आस्था, समृद्ध इतिहास और अद्भुत स्थापत्य कला का अनुपम संगम है। पत्थरों पर उकेरी गई इसकी बेजोड़ नक्काशी और प्राचीन शिल्पकला सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत की गौरवगाथा सुनाती है।

उन्होंने कहा कि पने चंपावत आगमन पर इस पावन शिवधाम के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति और हमारी समृद्ध विरासत का अविस्मरणीय अनुभव अवश्य प्राप्त करें।

 

क्यों खास है यह मंदिर

उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित बालेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और कलात्मक मंदिर है। इसका निर्माण चंद वंश के राजाओं द्वारा 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच कराया गया था। अपनी बेजोड़ पत्थर की नक्काशी और अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध यह ऐतिहासिक स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में एक राष्ट्रीय धरोहर है।

 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में बाली ने यहां असुरों से शांति के लिए शिव जी की पूजा की थी, इसलिए इसे 'बालेश्वर' कहा जाता है। बालेश्वर मंदिर के अलावा इस परिसर में रत्नेश्वर मंदिर और चंपावती दुर्गा मंदिर भी स्थित हैं। मंदिर परिसर के पास एक प्राचीन प्राकृतिक जल स्रोत है, जिसके पवित्र जल का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है।

IAS Ojaswi Raj की सोच ने बदल दी बलिया के सत्तू की पहचान | Sattu Pops | Make In India |

जिस सत्तू को लोग कभी गरीबों का खाना समझते थे… आज वही Amazon, Blinkit और चीन की यूनिवर्सिटी कैफे तक पहुँच चुका है।
IAS ओजस्वी राज की सोच ने सिर्फ एक उत्पाद नहीं बदला, बल्कि किसानों, महिलाओं और पूरे बलिया की पहचान को नई उड़ान दी।
कभी-कभी बदलाव नई चीज़ बनाने से नहीं… अपनी विरासत पर भरोसा करने से आता है।
आपके राज्य का कौन-सा पारंपरिक उत्पाद दुनिया तक पहुँचना चाहिए?
कमेंट में ज़रूर बताइए।

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