आगरा में बनेगा भव्य ‘शिव लोक थीम पार्क’, 8.81 करोड़ की लागत से होगा निर्माण; महाकाल लोक की तर्ज पर दिखेंगे भगवान शिव के 19 अवतार

योगी सरकार प्रदेश में बुनियादी ढांचे के साथ- साथ धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को भी तेजी से बढ़ावा दे रही है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए उज्जैन के 'महाकाल लोक' की तर्ज पर आगरा के ऐतिहासिक बल्केश्वर पार्क को अब एक भव्य 'शिव लोक थीम पार्क' के रूप में विकसित किया जाएगा।

8.81 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 जुलाई 2026 को किया था। शिलान्यास के बाद से इस कार्य में खासी तेजी आई है। आगरा नगर निगम ने 15वें वित्त आयोग के फंड से इस पार्क को विकसित करने का पूरा लेआउट और विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है।

 

शिव के 19 अवतारों और शिव पुराण का सजीव चित्रण

यमुना नदी के किनारे स्थित प्राचीन बल्केश्वर महादेव मंदिर से कुछ ही दूरी पर बनने वाला शिव लोक थीम पार्क आस्था और आधुनिकता का एक अनूठा संगम होगा। इसका विजन भगवान शिव के 19 अवतारों पर आधारित एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गंतव्य बनाना है। कुल 16,000 वर्ग मीटर में फैले बल्केश्वर पार्क के मध्य में भगवान शिव की एक विशाल और आकर्षक प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यहां आने वाले श्रद्धालु शिव पुराण पर आधारित भगवान शिव की लीलाओं का सजीव चित्रण देख सकेंगे। पार्क के प्रवेश पर एक भव्य 'नंदी द्वार' का निर्माण होगा। इसके अलावा शिव स्तुति पर आधारित आकर्षक साउंड एंड लाइट शो और रंग-बिरंगे फव्वारे इस पार्क की दिव्यता में चार चांद लगाएंगे।

 

पर्यटन और आस्था का नया केंद्र बनेगा यह शिव लोक

इस शिव लोक थीम पार्क का हर हिस्सा इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह भक्ति, सौंदर्य और मनोरंजन का अद्भुत अनुभव प्रदान करे। इसके निर्माण से बल्केश्वर मंदिर में दर्शन और परिक्रमा करने आने वाले श्रद्धालुओं को विश्राम के लिए एक सुंदर और शांत वातावरण मिलेगा। साथ ही आगरा आने वाले पर्यटक अब ताजमहल के अलावा इस दिव्य शिव लोक का भी अनुभव कर सकेंगे। यह थीम पार्क ब्रज क्षेत्र के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास में मील का प्रमुख पत्थर साबित होगा।

 

अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शिव लोक थीम पार्क को 15वें वित्त आयोग के फंड से विकसित किया जा रहा है। 8.81 करोड़ रुपये के बजट से पुराने बल्केश्वर पार्क का पूरी तरह से कायाकल्प कर दिया जाएगा। हमारा उद्देश्य इसे एक अत्याधुनिक, सुंदर और शांतिपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करना है।

 

स्थानीय पार्षद मुरारी लाल अग्रवाल ने बताया कि आगरा नगर निगम

 

“मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से बल्केश्वर क्षेत्र को यह बड़ी सौगात मिली है। इस शिव लोक थीम पार्क के निर्माण से न केवल बल्केश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं और परिक्रमार्थियों को विश्राम का एक पवित्र स्थान मिलेगा, बल्कि इससे पूरे ब्रज क्षेत्र के पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। बल्केश्वर वासियों और पूरे आगरा के शिवभक्तों के लिए यह बहुत बड़ी सौगात है। यह थीम पार्क हमारी धार्मिक आस्था को एक नई और भव्य पहचान देगा। 

Ethanol Petrol Row: ‘…तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹125 प्रति लीटर होती’; एथेनॉल विवाद पर सरकार का बड़ा दावा

Ethanol Blending E20 Petrol Row: पेट्रोलियम मंत्रालय ने एथेनॉल प्रोग्राम का बचाव करते हुए दावा किया है जब ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें $135 प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, तब अगर तेल कंपनियों ने फ्यूल में एथेनॉल नहीं मिलाया होता, तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग ₹125 प्रति लीटर होती। मंत्रालय ने कहा कि लेकिन इसके बजाय ग्राहकों को ₹94.77 प्रति लीटर चुकाना पड़ा। दरअसल एथेनॉल पहले से तय कीमतों पर घरेलू स्तर पर खरीदा गया था। इसने क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के असर से रिटेल कीमतों को बचाए रखने में मदद की, जिससे संकट के चरम पर लगभग ₹30 प्रति लीटर की बचत हुई।

सरकार ने 28 फरवरी को वेस्ट एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद लगभग 75 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखीं। फिर मई में उन्हें 7.5 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिया। दिल्ली में स्टैंडर्ड E20 पेट्रोल (91-ऑक्टेन) की कीमत अब ₹102.12 प्रति लीटर है। जबकि 100-ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत ₹169 है। मंत्रालय ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि गरीबों के लिए अनाज का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने के लिए किया जा रहा था, या इस प्रोग्राम को सपोर्ट करने के लिए सब्सिडी वाले FCI चावल का इस्तेमाल किया जा रहा था।

एफिशिएंसी में 2-6% की कमी!

फ्यूल एफिशिएंसी के सवाल पर सड़क परिवहन मंत्रालय ने लोकसभा में ARAI, SIAM और IOC की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि E10 फ्यूल के लिए डिजाइन किए गए BS-III, BS-IV और BS-VI वाहनों में E20 पर चलने पर वाहन की कैटेगरी और उम्र के आधार पर एफिशिएंसी में 2-6% की कमी आ सकती है। मंत्रालय ने पहले 20 जुलाई को राज्यसभा को बताया था कि ऐसे वाहनों में यह कमी लगभग 3-5% तक सीमित है।

दोनों मंत्रालयों ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम को एक चरणबद्ध, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित प्रक्रिया के माध्यम से शुरू किया गया था, जिसमें प्रोडक्शन कैपेसिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ने के साथ-साथ ब्लेंडिंग का स्तर धीरे-धीरे बढ़ाया गया। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा को बताया कि E20 पर स्विच करने का फैसला फ्यूल सिस्टम, इंजन की मजबूती, गाड़ी चलाने में आसानी, मटीरियल की अनुकूलता और उत्सर्जन पर असर की जांच-परख के बाद लिया गया।

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इस प्रक्रिया में वाहन बनाने वाली कंपनियों, तेल मार्केटिंग कंपनियों और चीनी एवं अनाज उद्योगों से भी सलाह-मशविरा किया गया। सरकार ने यह भी कहा कि लैब स्टडीज और असल दुनिया के डेटा से पता चला है कि E20 फ्यूल से गाड़ियों की परफॉर्मेंस पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। साथ ही, 20 करोड़ से अधिक दो-पहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन ब्लेंड्स पर चल चुकी हैं। इनमें एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से इंजन खराब होने का कोई पक्का सबूत नहीं मिला है।

Nirmal Purja: कौन थे निर्मल पुर्जा…जिनकी PoK में हुई मौत! 6 महीने में दुनिया की 14 सबसे ऊंची चोटियां फतह कर रचा था इतिहास

नेपाल के प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा, जिन्हें लोग ‘निम्सदाई’ के नाम से भी जानते थे, की पाकिस्तान में स्थित दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन (बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरना) की चपेट में आने से मौत हो गई। इसकी जानकारी उनकी एडवेंचर कंपनी और अन्य लोगों ने इंस्टाग्राम पर साझा की।

शुक्रवार को ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन होने के बाद निर्मल पुर्जा और पांच अन्य पर्वतारोही लापता हो गए थे। इसके बाद लगातार उनकी तलाश की जा रही थी। इस दुखद हादसे से कुछ घंटे पहले निर्मल पुर्जा ने भारत के पत्रकार विष्णु सोम को एक वॉयस मैसेज भी भेजा था। माना जा रहा है कि यह उनका आखिरी संदेश था।

कंपनी ने पोस्ट कर दी जानकारी 

निर्मल पुर्जा की एडवेंचर कंपनी एलीट एक्सपेड ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट जारी कर उनकी मौत की पुष्टि की। कंपनी ने कहा कि ब्रॉड पीक पर हुए हिमस्खलन के बाद निर्मल पुर्जा का निधन हो गया। साथ ही अभियान में शामिल अन्य सदस्य भी इस हादसे में जीवित नहीं बच सके। कंपनी ने अपने संदेश में कहा कि यह सभी के लिए बेहद दुखद क्षण है। उन्होंने केवल निर्मल पुर्जा ही नहीं, बल्कि इस हादसे में जान गंवाने वाले उनके साथी पर्वतारोहियों और गाइड पुर बहादुर गुरुंग और निमा शेरपा को भी श्रद्धांजलि दी।कंपनी ने कहा कि उनकी संवेदनाएं सभी मृतकों के परिवार, दोस्तों और करीबियों के साथ हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस कठिन समय में परिवारों की निजता का सम्मान किया जाए।

ब्रॉड पीक में हुई मौत

ब्रॉड पीक काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है। यह पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान और चीन के शिनजियांग क्षेत्र की सीमा के पास स्थित है। यह चोटी के2 पर्वत के बेहद करीब है। रिपोर्ट के अनुसार, हिमस्खलन ब्रॉड पीक के सामान्य वेस्ट रिज मार्ग पर हुआ। उस समय पर्वतारोही करीब 21,600 से 21,850 फीट की ऊंचाई पर मौजूद थे, जहां अचानक बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया।

निर्मल पुर्जा की एडवेंचर कंपनी एलीट एक्सपेड ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि दुनिया ने पर्वतारोहण के सबसे महान पर्वतारोहियों में से एक को खो दिया है। कंपनी के अनुसार, निर्मल पुर्जा अपने साहस, विनम्र स्वभाव और मजबूत इरादों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उन्होंने अपने काम और उपलब्धियों से दुनिया भर के लाखों लोगों को बड़े सपने देखने और खुद पर भरोसा रखने की प्रेरणा दी। कंपनी ने कहा कि निर्मल पुर्जा का मानना था कि इंसान अपनी सोच से कहीं ज्यादा बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। यही सोच उन्होंने अपने जीवन और अभियानों के जरिए लोगों तक पहुंचाई और अनगिनत लोगों को अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए प्रेरित किया।

पोस्ट में यह भी कहा गया कि एलीट एक्सपेड, निम्सदाई फाउंडेशन, स्काईडाइव निम्सदाई और निम्सदाई स्टोर जैसी संस्थाओं को आगे बढ़ाने में उनकी दूरदृष्टि, नेतृत्व और मजबूत संकल्प की सबसे बड़ी भूमिका रही। कंपनी ने कहा कि निर्मल पुर्जा की विरासत हमेशा उन लोगों के जरिए जीवित रहेगी, जिनकी जिंदगी उन्होंने बदली और जिन्हें अपने सपनों को पूरा करने का हौसला दिया।

रचा था ये इतिहास

निर्मल पुर्जा पहले ब्रिटेन की ब्रिगेड ऑफ गोरखा और रॉयल मरीन की स्पेशल बोट सर्विस (एसबीएस) में भी सेवाएं दे चुके थे। सेना से अलग होने के बाद उन्होंने पूरी तरह पर्वतारोहण को अपना करियर बनाया और दुनिया भर में कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए। साल 2019 में उन्होंने अपने ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ अभियान के तहत केवल 6 महीने और 6 दिन में 8,000 मीटर से ऊंची दुनिया की सभी 14 चोटियों पर चढ़ाई पूरी कर इतिहास रच दिया। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इसके बाद साल 2021 में निर्मल पुर्जा उन 10 नेपाली पर्वतारोहियों की टीम का हिस्सा भी रहे, जिसने पहली बार सर्दियों के मौसम में दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी के2 पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी।

Vivo X500 Pro के लॉन्च से पहले लीक हुए फीचर्स, मिलेगा 144Hz डिस्प्ले और 2nm प्रोसेसर

Vivo X500 Pro इन दिनों अपने लीक और अफवाहों को लेकर काफी चर्चा में है। उम्मीद की जा रही है कि कंपनी इस स्मार्टफोन को अक्टूबर 2026 के आसपास चीन और अन्य ग्लोबल मार्केट्स में लॉन्च कर सकती है। लीक्स की मानें तो Vivo X500 Pro परफॉर्मेंस, कैमरा क्वालिटी और टेक्नोलॉजी के मामले में एक बेहद दमदार स्मार्टफोन साबित हो सकता है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसकी आधिकारिक जानकारी शेयर नहीं की है।

अब आइए अलग-अलग अनऑफिशियल रिपोर्ट्स और लीक के आधार पर हम आपको इस अपकमिंग स्मार्टफोन से जुड़ी संभावित फीचर्स और स्पेसिफिकेशन की जानकारी देते हैं।

Vivo X500 Pro के लीक हुए स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

जाने-माने टिप्सटर ‘डिजिटल चैट स्टेशन’ ने पहले ही इस बात का संकेत दे दिया है कि इस फोन में डिस्प्ले और प्रोसेसर कैसा होगा। Vivo X500 Pro में 6.37-इंच की फ्लैट LTPO डिस्प्ले हो सकती है, जिसका रिजोल्यूशन 1.5K और रिफ्रेश रेट 144Hz होगा।

इसके अलावा, यह भी कहा जा रहा है कि Vivo एक BOE OLED डिस्प्ले की टेस्टिंग कर रहा है, जिसमें नेक्स्ट-जेनरेशन लाइट-एमिटिंग मटीरियल का इस्तेमाल होगा। इतना ही नहीं, अफवाहें हैं कि Vivo X500 Pro में LIPO डिस्प्ले पैकेजिंग होगी, जिससे चारों तरफ पतले बेजल मिल सकेंगे। लीक से पता चलता है कि इस फोन में Vivo का सिग्नेचर सेंटर में स्थित गोल रियर कैमरा आइलैंड होगा।

उसी टिपस्टर ने यह भी बताया है कि यह फोन 2nm प्रोसेसर पर आधारित MediaTek Dimensity 9600 Pro चिपसेट से चलेगा। उम्मीद है कि फोन के बेस मॉडल में 12GB RAM और 256GB इंटरनल स्टोरेज होगी। इस बात की भी काफी संभावना जताई जा रही है कि Vivo X500 Pro में मेटल फ्रेम होगा। डिवाइस से जुड़ी बाकी सभी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि Vivo की तरफ से आधिकारिक घोषणा होते ही इसके बारे में और जानकारी मिल जाएगी।

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फ्रेंडशिप डे 2026: दोस्ती के ये 6 अवतार जानकर दंग रह जाएंगे आप

frinendship day 2026

दोस्ती का कोई एक रंग नहीं होता- यह तो सतरंगी गुलाल है! कभी बेपरवाह टांग खिंचाई, तो कभी ढाल बनकर साथ खड़े रहने का हौसला। कभी खट्टी-मीठी चटपटी, तो कभी सुकून देने वाली मीठी चाय जैसी। सच कहें तो हर दोस्ती अपने आप में एक अलग ही वाइब (Vibe) लेकर आती है। इस फ्रेंडशिप डे 2026 पर चलिए करते हैं दोस्ती के 6 अनोखे 'अवतारों' की एक मजेदार सैर!

 

1. 'बिज़नेस पार्टनर' वाली गाढ़ी दोस्ती

यह सिर्फ पैसों या काम का सौदा नहीं, बल्कि अटूट भरोसे पर टिकी एक ऐसी केमिस्ट्री है जहाँ दो दिमाग एक दिशा में सोचते हैं। जब दो दोस्त मिलकर कोई बिज़नेस खड़ा करते हैं, तो वे किसी सगे भाई-बहन से भी बढ़कर हो जाते हैं। अब आप इन्हें 'पार्टनर्स' कहें, 'फाउंडर्स' कहें या फिर 'लंगोटिया यार', इनकी ट्यूनिंग का कोई तोड़ नहीं होता!

 

2. '9-टू-5' का मरहम: लंच ब्रेक वाली दोस्ती

फाइलों के पहाड़, बॉस की डांट, टारगेट का प्रेशर या फिर घर की किचकिच—कॉलेज के बाद अगर कोई चीज़ कॉर्पोरेट लाइफ में बचाती है, तो वो है 'लंच टाइम गैंग'।

लंच के 30 मिनट में यहाँ सिर्फ टिफिन नहीं खुलते, बल्कि दिल के सारे दर्द बंट जाते हैं। यही वो जगह है जहाँ कोई सहयोगी आपके अटके सरकारी काम की जुगाड़ मिनटों में निकाल देता है या आपके पर्सनल संकट का एक्सपर्ट सॉल्यूशन दे देता है।

 

3. 'अरे! तुम्हें भी यह पसंद है?' वाली सिमिलर-वाइब दोस्ती

इस दोस्ती की शुरुआत सिर्फ एक जुमले से होती है—”क्या बात कर रहे हो, तुम्हें भी यह पसंद है?”

चाहे किसी हॉलीवुड मूवी की सनक हो, हैरी पॉटर का जादू, वही पुराना राइटर, या फिर स्ट्रीट फूड का सेम क्रेज़! बस जहाँ आपकी पसंद मैच हुई, वहीं बिना किसी मेहनत के एक नई और दिलचस्प 'हॉबी वाली दोस्ती' की शुरुआत हो जाती है।

 

4. 'डिजिटल दौर' वाली नो-बाउंड्री दोस्ती

टेक्नोलॉजी के पंखों पर सवार यह दोस्ती मीलों की दूरियों को पलक झपकते मिटा देती है। 80 के दशक के बिछड़े क्लासमेट्स हों या सरहद पार बैठा कोई अनजान साथी—इंटरनेट ने सबको एक धागे में पिरो दिया है। आपकी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर जहाँ एक तरफ 75 साल के दादू की 'फ्रेंड रिक्वेस्ट' होती है, वहीं दूसरी तरफ 7 साल की छोटी भानजी का 'हार्ट इमोजी'!

 

5. नॉस्टैल्जिया का खजाना: स्कूल-कॉलेज वाली दोस्ती

यह दोस्ती का 'गोल्डन एरा' है—सबसे निश्चल, सबसे बेफिक्र!

किताबों में मोर का पंख छुपाने से लेकर, चाय-समोसे की 'कॉन्ट्री', रात-रात भर जागकर नोट्स की जुगाड़ और एक-दूसरे के कपड़े-जूते मांगकर पहनना… यह सब इसी दौर की देन है। इस दोस्ती की पार्टियां भले ही बजट-फ्रेंडली हों, लेकिन इनका 'धूम-धड़ाका' और यादें पूरी ज़िंदगी के लिए अनलिमिटेड होती हैं।

 

6. 'गली-मोहल्ले' वाली साझी दोस्ती

भर दोपहर में छत पर धूप से बचने का जुगाड़ हो, या संकरी गली में साइकिल को स्टंप बनाकर क्रिकेट खेलना—यह दोस्ती भारत के हर मोहल्ले की जान है। कटोरी लेकर पड़ोसी के घर से चीनी या अचार मांग लाना हो, या किसी एक के घर की शादी में पूरे मोहल्ले के अंकल-आंटी का अपना घर समझकर काम में जुट जाना। जैसे छत पर सूखते अमचूर पर पूरे मोहल्ले के बच्चों का हक होता है, ठीक वैसे ही इस दोस्ती पर पूरे इलाके का प्यार होता है!

 

चलते-चलते:

आपकी लाइफ में इनमें से कौन-कौन से दोस्त मौजूद हैं? इस फ्रेंडशिप डे पर उन्हें यह आलेख टैग करके शुक्रिया कहना मत भूलिएगा!

पहली बार बिना सामान के चीन पहुंचे भारतीय व्यापारी:6 साल बाद भारत-तिब्बत ट्रेड शुरू; 2019 से तकलाकोट में छूटा है करोड़ों का माल

उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से 6 साल बाद भारत-तिब्बत परंपरागत व्यापार शनिवार से फिर शुरू हो गया है। पहले दल में 16 भारतीय व्यापारी और 4 हेल्पर तिब्बत के तकलाकोट मंडी पहुंचे। खास बात यह रही कि इतिहास में पहली बार भारतीय व्यापारी बिना सामान के चीन गए। सीमा पर चीनी प्रशासन ने उनके दस्तावेजों की जांच के बाद प्रवेश दिया, जबकि व्यापारियों का सामान अब भी पिथौरागढ़ के गुंजी में रखा हुआ है। वहीं, वर्ष 2019 से भारतीय व्यापारियों का करोड़ों रुपए का माल भी तकलाकोट में छूटा हुआ है। जून से जुलाई तक टलता रहा व्यापार कोरोना महामारी और भारत-चीन संबंधों में आई तल्खी के कारण वर्ष 2020 से दोनों देशों के बीच परंपरागत व्यापार पूरी तरह बंद था। इस साल जून में व्यापार शुरू होना था, लेकिन औपचारिकताओं और चीन की ओर से लगातार बदलते नियमों के कारण प्रक्रिया टलती रही। 8 जुलाई को व्यापारी सामान लेकर गुंजी तक पहुंच गए थे। उन्हें ट्रेड पास भी जारी कर दिए गए थे, लेकिन रवाना होने से ठीक एक दिन पहले चीन के पुरांग काउंटी प्रशासन ने व्यवस्थाएं पूरी न होने का हवाला देकर व्यापारियों की एंट्री रोक दी। इसके बाद व्यापारी अपना सामान गुंजी में छोड़कर वापस धारचूला लौट आए। फिलहाल सिर्फ 20 लोगों को मंजूरी व्यापार शुरू होने को लेकर सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों में काफी उत्साह था। प्रशासन ने 134 व्यापारियों और सहायकों के ट्रेड पास जारी किए थे। हालांकि बाद में चीन की ओर से नया आदेश जारी कर फिलहाल केवल 20 लोगों को तकलाकोट जाने की अनुमति दी गई। चीनी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पहले चरण में केवल उन्हीं व्यापारियों को प्रवेश मिलेगा, जो वर्ष 2019 में तकलाकोट गए थे और जिनका सामान वहां छूट गया था। SDM बोले- भारत-चीन व्यापार विधिवत शुरू हुआ धारचूला के एसडीएम एवं ट्रेड अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि 1 अगस्त को सुबह करीब 10:15 बजे लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन परंपरागत व्यापार की औपचारिक शुरुआत हो गई। पहले दल में 16 व्यापारी और 4 हेल्पर, कुल 20 लोग तकलाकोट मंडी पहुंचे हैं। वहां वे व्यापारिक गतिविधियां शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि अगले बैचों को भेजने की तारीख तय करने के लिए चीनी प्रशासन से लगातार ईमेल के माध्यम से पत्राचार किया जा रहा है। अभी गुंजी में रखा है गुड़, मिश्री और बर्तन व्यापारियों का गुड़, मिश्री, बर्तन समेत अन्य व्यापारिक सामान अभी भी गुंजी में रखा हुआ है। बताया जा रहा है कि तकलाकोट में व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद व्यापारी दोबारा सामान लेकर जाएंगे। यदि सब कुछ सामान्य रहा तो अगले कुछ दिनों में 20-20 व्यापारियों के अन्य दल भी चीन रवाना किए जाएंगे। तकलाकोट में आज भी पड़ा है करोड़ों का सामान वर्ष 2019 में कई भारतीय व्यापारी अपना माल तकलाकोट मंडी में ही छोड़कर लौटे थे। अगले ही वर्ष व्यापार बंद हो गया, जिससे करोड़ों रुपए का सामान वहीं फंस गया। व्यापारियों का कहना है कि धातु के बर्तन तो उपयोग में आ सकते हैं, लेकिन खाद्य सामग्री और अन्य सामान खराब होने की आशंका है। तकलाकोट में भारतीय व्यापारियों के लिए नए स्थान पर मंडी विकसित की गई है। अब व्यापारियों को इसी नई मंडी में किराये पर दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी, जहां से परंपरागत भारत-तिब्बत व्यापार संचालित होगा। भारतीय व्यापारी अब पुरानी नहीं, नई मंडी में करेंगे कारोबार छह साल के लंबे अंतराल में तकलाकोट की तस्वीर भी बदल गई है। पहले भारतीय व्यापारी पुरानी मंडी में किराए पर दुकानें लेकर कारोबार करते थे, लेकिन व्यापार बंद रहने के दौरान वहां की कई दुकानें नेपाली और अन्य व्यापारियों को आवंटित कर दी गईं। अब चीन ने भारतीय और नेपाली व्यापारियों के लिए नई ट्रेड मंडी विकसित की है। इस बार भारतीय व्यापारियों को इसी नई मंडी में दुकानें मिलेंगी। व्यापार समिति का कहना है कि नई मंडी पहले से ज्यादा व्यवस्थित है और वहां सामान रखने के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी। समिति ने भारतीय व्यापारियों के लिए रियायती किराए की भी मांग की है। पहली बार बदल जाएगा सदियों पुराना ढुलाई मॉडल इस बार सिर्फ मंडी ही नहीं, व्यापार का पूरा ढांचा बदल जाएगा। अब तक व्यापारी धारचूला से गुंजी, कालापानी और नाभीढांग होते हुए कई दिन की कठिन यात्रा के बाद लिपुलेख दर्रे तक पहुंचते थे। सामान घोड़े-खच्चरों और पोर्टरों के सहारे ढोया जाता था। खराब मौसम और भूस्खलन कई बार व्यापार रोक देते थे। अब सड़क बनने के बाद करीब 100 किलोमीटर तक वाहन सीधे सीमा के करीब पहुंच सकेंगे। सिर्फ अंतिम करीब 200 मीटर तक ही सामान पारंपरिक तरीके से ले जाना होगा। चीन की सीमा में प्रवेश करने के बाद सड़क पहले से उपलब्ध है, जहां से व्यापारी करीब 18 किलोमीटर दूर तकलाकोट मंडी तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे परिवहन लागत और समय दोनों कम होने की उम्मीद है। 2019 में 3 करोड़ से ज्यादा का कारोबार भारत-चीन व्यापार समिति के अनुसार 2019 में करीब 250 भारतीय व्यापारी तकलाकोट पहुंचे थे। उस वर्ष करीब 3 करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार हुआ था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 1.25 करोड़ रुपए का निर्यात और करीब 1.90 करोड़ रुपए का आयात हुआ था। इस बार सड़क, नई मंडी और बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था के कारण कारोबार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि भारतीय पक्ष को देरी से अनुमति मिलने के कारण इस साल शुरुआती कारोबारी अवसर काफी हद तक निकल चुके हैं। ——————- ये खबर भी पढ़ें : भारत-चीन व्यापार पर चाइना की टेढ़ी चाल: 1 अगस्त को बिना सामान के बुलाए 20 व्यापारी, नेपाल जून से कर रहा व्यापार करीब 6 साल बाद 1 अगस्त से लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू होने जा रहा है, लेकिन इस व्यापार पर एक बार फिर चीन ने टेढ़ी चाल चली है। दरअसल, चीन ने पहले बैच में सिर्फ उन्हीं व्यापारियों को तकलाकोट मंडी जाने की अनुमति दी है, जिनकी दुकानें या सामान 2019 से वहां फंसा हुआ है। पढ़ें पूरी खबर…

Xiaomi ने लॉन्च की 7-सीटर इलेक्ट्रिक SUV, Kunlun आर्किटेक्चर पर बनी SkyNomad देगी 505Km तक की रेंज

Xiaomi SkyNomad Series: चीन की टेक और EV निर्माता कंपनी Xiaomi ने इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए अपनी नई SkyNomad Series SUV को लॉन्च कर दिया है। कंपनी की यह पहली Extended-Range Electric Vehicle (EREV) सीरीज है, जिसे नए Kunlun Architecture प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है। Xiaomi का दावा है कि SkyNomad N70 Max इलेक्ट्रिक मोड में 505 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है, जबकि इसकी कुल ड्राइविंग रेंज 1,700 किलोमीटर से भी ज्यादा है। फिलहाल इस इलेक्ट्रिक SUV की प्री-बुकिंग चीन में शुरू हो चुकी है और सितंबर से इसकी डिलीवरी शुरू होने की उम्मीद है। अब आइए जानते हैं Xiaomi SkyNomad Series की खासियतों के बारे में।

Xiaomi SkyNomad सीरीज की कीमत और उपलब्धता

Xiaomi ने SkyNomad Series को दो वेरिएंट में पेश किया है। इसका टॉप मॉडल Xiaomi SkyNomad N90 Max है, जो एक 7-सीटर एक्सटेंडेड-रेंज SUV है। चीन में इसकी प्री-सेल कीमत 2,99,900 चीनी युआन (करीब 42.41 लाख रुपये) रखी गई है। वहीं, कंपनी ने इसका एक 5-सीटर ऑल-व्हील-ड्राइव वेरिएंट SkyNomad N70 Max भी लॉन्च किया है। इसकी शुरुआती कीमत 2,59,900 चीनी युआन (करीब 36.75 लाख रुपये) है।

कलर ऑप्शन की बात करें तो, Xiaomi SkyNomad Series को Mountain Green, Valley Blue और Volcanic Gray एक्सटीरियर कलर में पेश किया गया है। वहीं, इसके इंटीरियर में Cream Beige और Mocha Brown कलर ऑप्शन मिलेंगे।

फिलहाल, चीन में अभी दोनों मॉडल्स के लिए प्री-ऑर्डर शुरू हो गए हैं। ग्राहक CNY 1,000 (लगभग ₹14,000) की रिफंडेबल डिपॉजिट राशि देकर किसी भी SUV को बुक कर सकते हैं। इस बुकिंग के साथ ग्राहकों को प्रोडक्शन में प्राथमिकता मिलेगी। इसके अलावा, डिलीवरी के समय उन्हें करीब 999 चीनी युआन (लगभग 14,000 रुपये) की कीमत वाला इन-कार डुअल कप होल्डर टेबल भी मुफ्त दिया जाएगा।

हालांकि, Xiaomi ने अभी तक SkyNomad Series को ग्लोबल मार्केट या भारत में लॉन्च करने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

Xiaomi SkyNomad सीरीज के फीचर्स और स्पेसिफिकेशन्स

Xiaomi का दावा है कि SkyNomad सीरीज नए Kunlun प्लेटफॉर्म पर आधारित उसका पहला प्रोडक्शन मॉडल है। पारंपरिक लेआउट के उलट, इस प्लेटफॉर्म को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसमें केबिन का फर्श पूरी तरह से फ्लैट रहता है, सीट रेल्स लंबी होती हैं और इंटीरियर को जरूरत के हिसाब से बदला जा सकता है। इसे आने-जाने, कैंपिंग, काम या फैमिली ट्रिप जैसे अलग-अलग कामों के लिए कई तरह के लेआउट में बदला जा सकता है, जिससे अंदर ज्यादा जगह मिलती है।

बड़े SkyNomad N90 Max की लंबाई 5,285mm और व्हीलबेस 3,080mm है, जबकि N70 Max की लंबाई 4,960mm और व्हीलबेस 2,950mm है। Xiaomi का दावा है कि सात सीटों वाली N90 Max में यात्रियों के बैठने के लिए 2,760mm तक की जगह और 1,831 लीटर तक का सामान रखने की क्षमता मिलती है।

कंपनी ने इस SUV में पावर-एडजस्टेबल सीटें, चार तक जीरो-ग्रेविटी सीटें, 16-पॉइंट मसाज, हीटिंग, वेंटिलेशन, बिल्ट-इन रेफ्रिजरेटर वाला स्लाइडिंग सेंटर कंसोल और 30 से ज्यादा स्टोरेज कम्पार्टमेंट जैसे फीचर्स दिए हैं।

नई EV में ‘कुनलुन हाइपररेंज’ (Kunlun HyperRange) एक्सटेंडेड-रेंज सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें 52kWh से 76kWh तक की बैटरी के विकल्प मिलते हैं। Xiaomi का दावा है कि SkyNomad N70 Max सिर्फ इलेक्ट्रिक मोड में 505km तक की CLTC (चाइना लाइट-ड्यूटी व्हीकल टेस्ट साइकिल) रेंज दे सकती है, जबकि बड़ी N90 Max एक बार चार्ज करने पर 464km तक की रेंज देती है। दोनों SUV में डुअल-मोटर ऑल-व्हील-ड्राइव सेटअप का इस्तेमाल किया गया है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह 310kW तक की पीक पावर जेनरेट कर सकता है।

टेक्नोलॉजी की बात करें तो, SkyNomad सीरीज का केबिन Snapdragon 8 Gen 3-बेस्ड डोमेन कंट्रोलर से चलता है। इसमें डुअल 5G कनेक्टिविटी, Wi-Fi 7, छह-स्क्रीन वाला इंफोटेनमेंट सिस्टम, 25-स्पीकर वाला ऑडियो सिस्टम और 6.9-इंच का रियर कंट्रोल डिस्प्ले दिया गया है। Xiaomi ने इसमें अपना Hyper XiaoAi वॉयस असिस्टेंट भी शामिल किया है, जो वॉयस कमांड से केबिन के 11 सीटिंग लेआउट को बदल सकता है।

इस इलेक्ट्रिक SUV में 700 TOPS वाला असिस्टेड-ड्राइविंग प्लेटफॉर्म, LiDAR, 4D मिलीमीटर-वेव रडार और Xiaomi का XLA आर्किटेक्चर पर बना HAD असिस्टेड-ड्राइविंग सिस्टम भी मिलता है।

सेफ्टी के लिहाज से, SkyNomad सीरीज में स्टील-एल्युमीनियम हाइब्रिड बॉडी का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें कई स्ट्रक्चरल पॉइंट्स पर 2,200MPa अल्ट्रा-हाई-स्ट्रेंथ स्टील और 12 एयरबैग्स दिए गए हैं। इसमें Xiaomi की नई Armour Scale बैटरी भी है, जिसमें 18-लेयर प्रोटेक्शन स्ट्रक्चर है। साथ ही, इसमें डुअल टेलगेट रिलीज हैंडल, ट्रिपल-रिडंडेंट डोर हैंडल और 26 ड्राइवर-असिस्टेंस जैसे सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं।

SkyNomad Series के लॉन्च के साथ Xiaomi की इलेक्ट्रिक व्हीकल रेंज और मजबूत हो गई है। इससे पहले कंपनी के EV पोर्टफोलियो में SU7 सेडान और YU7 SUV जैसे मॉडल शामिल हैं।

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Omkareshwar Darshan 2026 : ओंकारेश्वर में सावन में बदल गई दर्शन व्यवस्था, श्रद्धालु जान लें मंदिर का नया वन-वे रूट

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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए जिला प्रशासन ने दर्शन और आवागमन की व्यवस्था में बदलाव किया है। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए मंदिर क्षेत्र में एकांगी मार्ग यानी वन-वे सिस्टम लागू किया गया है। अगर आप सावन में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने जा रहे हैं, तो मंदिर पहुंचने से पहले नई व्यवस्था और मार्ग की जानकारी जरूर जान लें। 

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सामान्य श्रद्धालु

पुराने बस स्टैंड से रूट

निर्वाणी अखाड़ा जूता-चप्पल स्टैंड → जेपी चौक → पुराना पुल → रैम्प → गर्भगृह → झूला पुल → स्काईब्रिज → निर्वाणी अखाड़ा।

न्यू बस स्टैंड (दांडी तिराहा) की ओर से रूट

गजानन आश्रम → ब्रह्मपुरी जूता-चप्पल स्टैंड → स्काईब्रिज → जेपी चौक → पुराना पुल → रैम्प → गर्भगृह → झूला पुल → ब्रह्मपुरी जूता-चप्पल स्टैंड -> गजानन आश्रम -> प्रसादालय पार्किंग।

प्रोटोकॉल एवं शीघ्र दर्शन श्रद्धालु

प्रोटोकॉल एवं शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निर्वाणी अखाड़ा एवं ब्रह्मपुरी पार्किंग में रिस्टबैंड काउंटर स्थापित किए गए हैं, जहां जूता-चप्पल स्टैंड की भी व्यवस्था है।

पुराने बस स्टैंड से रूट 

निर्वाणी अखाड़ा सेंटर → स्काईब्रिज → झूला पुल → गर्भगृह → झूला पुल → स्काईब्रिज → निर्वाणी अखाड़ा।

न्यू बस स्टैंड से रूट

प्रसादालय पार्किंग  -> गजानन आश्रम → ब्रह्मपुरी पार्किंग सेंटर → झूला पुल → गर्भगृह → झूला पुल → ब्रह्मपुरी पार्किंग सेंटर।

जिला प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्ग व्यवस्था का पालन करते हुए प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है।

क्या है ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर, भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह स्थान न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ के ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी एक ऐसी अलौकिक मान्यता भी है, जो भक्तों को विस्मित कर देती है। कहा जाता है कि इस पावन धाम में हर रात स्वयं भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती शयन के लिए आते हैं, और सोने से पहले वे चौपड़ का खेल भी खेलते हैं। यह मान्यता सदियों से चली आ रही है और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है।

 

रात्रि शयन और चौपड़ की दिव्य लीला

ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी सबसे अद्भुत और रहस्यमयी मान्यता यह है कि भगवान शिव तीनों लोकों का भ्रमण करके प्रतिदिन रात को इसी मंदिर में शयन करने आते हैं। उनके साथ माता पार्वती भी होती हैं। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि रात्रि के समय मंदिर के पट बंद होने के बाद, भोलेनाथ और माता पार्वती यहाँ चौसर (चौपड़) का खेल खेलते हैं।

 

इस मान्यता के चलते, मंदिर में प्रतिदिन रात्रि में पंडित के अलावा किसी को शामिल होने की अनुमति नहीं है। शयन आरती के बाद, गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग के सामने चौपड़-पांसे की बिसात सजाई जाती है। सुबह जब मंदिर के पट खुलते हैं, तो कई बार चौसर और उसके पासे कुछ इस तरह से बिखरे मिलते हैं, जैसे रात्रि के समय उन्हें किसी ने खेला हो। यह दृश्य भक्तों के विश्वास को और भी पुख्ता करता है। यह एक ऐसा रहस्य है जिसे विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया है, और यह सिर्फ़ श्रद्धा और आस्था का विषय है।

 

ओंकारेश्वर और ममलेश्वर: एक ही ज्योति का दो रूप

ओंकारेश्वर द्वीप नर्मदा नदी के मध्य में 'ॐ' के आकार में स्थित है, और यहीं पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान है। नर्मदा के दक्षिणी तट पर ममलेश्वर मंदिर स्थित है, जिसे प्राचीन काल में अमरेश्वर के नाम से जाना जाता था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने अपने ओंकारेश्वर नामक लिंग के दो भाग किए थे, जिनमें से एक ओंकारेश्वर और दूसरा ममलेश्वर कहलाया। दोनों शिवलिंगों का स्थान भले ही अलग हो, लेकिन उनकी सत्ता और स्वरूप एक ही माना जाता है। शिवपुराण में इन दोनों ज्योतिर्लिंगों की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है।

 

इस स्थान पर ध्यान और पूजा करने से मन को शांति और आध्यात्मिक बल मिलता है। यह माना जाता है कि ओंकारेश्वर में नर्मदा स्नान और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बिना सभी तीर्थ यात्राएं अधूरी मानी जाती हैं। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत आस्था का प्रतीक है, जहाँ लाखों भक्त दूर-दूर से इस चमत्कारिक ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने आते हैं, यह विश्वास लेकर कि यहाँ आने से उनके सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

OnePlus का नया बजट फोन लॉन्च! 7000mAh बैटरी, 120Hz डिस्प्ले से होगा लैस, जानें कीमत

OnePlus Nord N6x: अगर आप कम रेंज में स्मार्टफोन में लेने की सोच रहे हैं तो, OnePlus आपके लिए शानदार फोन लेकर आया है। दरअसल, चीन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी ने भारतीय बाजार में अपना OnePlus Nord N6x लॉन्च कर दिया है। इसमें आपको 7000mAh बैटरी, 6.8 इंच का डिस्प्ले और 120 रिफ्रेश रेट मिलेगा। बता दें कि इस डिवाइस का डिजाइन काफी आकर्षक है। इसके पिछले हिस्से (रियर पैनल) के ऊपरी बाएं कोने में पिल-शेप का कैमरा मॉड्यूल है और बीच में OnePlus की ब्रांडिंग दी गई है। इसके अलावा, इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 3.5mm जैक भी दिया गया है, जो लंबे समय से अलग-अलग प्राइस रेंज वाले डिवाइस से गायब था।

भारत में OnePlus N6x की कीमत और उपलब्धता

OnePlus N6x के 4GB RAM और 64GB इंटरनल स्टोरेज वाले वेरिएंट को भारतीय बाजार में ₹19,999 में खरीदा जा सकता है। वहीं, 4GB RAM और 128GB इंटरनल स्टोरेज वाला वेरिएंट ₹20,999 में उपलब्ध है। यह डिवाइस आपको दो कलर ऑप्शन Ice Blue और Burgundy Red में मिलेगा। इस फोन की बिक्री 4 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। ग्राहक इसे OnePlus India की आधिकारिक वेबसाइट और Amazon के जरिए खरीद सकेंगे।

OnePlus N6x के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

OnePlus N6x में 6.8-इंच का IPS LCD डिस्प्ले है, जिसका रिफ्रेश रेट 120Hz और पीक ब्राइटनेस 700 निट्स है। इसमें MediaTek Dimensity 6360 Apex प्रोसेसर लगा है और इसके टॉप वेरिएंट में 4GB RAM और 64GB इंटरनल स्टोरेज मिलती है। यह डिवाइस Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर बेस्ड है और इसमें OxygenOS स्किन दी गई है। बता दें कि इस हैंडसेट की बैटरी इसकी एक बड़ी खासियत (USP) हो सकती है, क्योंकि इसमें 7000mAh की बैटरी और 15W वायर्ड चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है।

कैमरे की बात करें तो, निराशा की बात यह है कि OnePlus N6x में सिर्फ एक 13MP का रियर कैमरा है। आप इससे बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकते, क्योंकि इसमें OIS के बिना सिर्फ एक ही सेंसर है। इसके अलावा, सेल्फी और वीडियो कॉल करने के लिए इस फोन में 5MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है।

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सावन व्रत में बनाएं ये 5 आसान सात्विक रेसिपीज, बिना प्याज-लहसुन मिलेगा भरपूर स्वाद

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति, पूजा-पाठ और सात्विक लाइफस्टाइल अपनाने का समय माना जाता है। इस दौरान कई श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखते हैं और प्याज, लहसुन, मांसाहार व अंडे जैसी तामसिक चीजों से दूरी बनाए रखते हैं। ऐसे में शरीर को एनर्जी देने वाला हल्का भोजन खाना भी जरूरी होता है। आप भी इस सावन व्रत में बिना प्याज-लहसुन वाली आसान रेसिपीज आपकी व्रत की थाली को स्वादिष्ट और पौष्टिक बना सकती हैं:

1. सिंघाड़े की खीर (Singhara Kheer)

इसे बनाने के लिए दूध को एक भारी तले वाले बर्तन में उबालें। उसमें धीरे-धीरे सिंघाड़े का आटा मिलाते हुए लगातार चलाएं, ताकि गांठें न बनें। 8-10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। अब चीनी या गुड़, इलायची पाउडर और कटे हुए बादाम, काजू व पिस्ता डालकर 2-3 मिनट और पकाएं। सिंघाड़ा फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम और जरूरी मिनरल्स का अच्छा सोर्स माना जाता है। दूध से प्रोटीन और कैल्शियम मिलता है तथा ड्राई फ्रूट्स हेल्दी फैट, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं। इसे गर्म या ठंडा, दोनों तरह से परोसा जा सकता है।

 

2. जीरा आलू (Jeera Aloo)

इसे बनाने के लिए कड़ाही में घी गर्म करें और उसमें जीरा चटकाएं। फिर बारीक कटी हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड भूनें। अब उबले और कटे हुए आलू डालें। सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाकर 5-7 मिनट तक मीडियम आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। फिर हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिलाएं। जीरा डाइजेशन को बेहतर बनाने और गैस जैसी प्रॉब्लम को कम करता है, जबकि आलू कार्बोहाइड्रेट और पोटैशियम का अच्छा सोर्स है। कम मसालों में बनने वाली यह डिश व्रत में हल्की होती है और शरीर को एनर्जी देती है।

 

 

3. साबूदाना खिचड़ी (Sabudana Khichdi)

इसे बनाने के लिए सबसे पहले साबूदाने का पानी निकाल लें। कड़ाही में घी गर्म करके जीरा चटकाएं और हरी मिर्च डालें। फिर उबले आलू डालकर 2-3 मिनट तक हल्का भूनें। अब साबूदाना, मूंगफली का पाउडर और सेंधा नमक डालकर धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए 3-4 मिनट पकाएं। हरा धनिया और थोड़ा-सा नींबू का रस डालकर परोसें। साबूदाना शरीर को तुरंत एनर्जी देता है, जबकि मूंगफली प्रोटीन, हेल्दी फैट और विटामिन ई का अच्छा सोर्स है। नींबू से विटामिन C मिलता है। यह रेसिपी व्रत में लंबे समय तक पेट भरा रखती है।

 

 

4. कुट्टू की पूरी (Kuttu Puri)

इसे बनाने के लिए उबले आलू को मैश करके कुट्टू के आटे में मिलाएं। सेंधा नमक डालें और जरूरत के हिसाब से थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर कड़क आटा गूंध लें। आटे को 10 मिनट ढककर रखें, फिर छोटी-छोटी लोइयां बनाकर पूरियां बेलें। गर्म घी या तेल में इन्हें सुनहरा और कुरकुरा होने तक तल लें। कुट्टू का आटा ग्लूटेन-फ्री होता है और इसमें फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम तथा एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे दही, जीरा आलू या व्रत की किसी भी सब्जी के साथ परोसें।

 

 

5. साबूदाना टिक्की (Sabudana Tikki)

इसे बनाने के लिए पहले उबले आलू को अच्छी तरह मैश कर लें। अब इसमें भीगा हुआ साबूदाना, भुनी मूंगफली का पाउडर, बारीक कटी हरी मिर्च, सेंधा नमक और हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिलाएं। तैयार मिक्सचर से छोटी साइज की टिक्कियां बनाएं और तवे पर थोड़ा घी लगाकर मीडियम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेक लें। साबूदाना में कार्बोहाइड्रेट होता है, जबकि मूंगफली से प्रोटीन और हेल्दी फैट मिलते हैं। आलू में पोटैशियम होता है। इसलिए यह रेसिपी व्रत के मिए परफेक्ट है। इसे दही या व्रत की हरी चटनी के साथ गर्मागर्म परोसें।