Stock Market Rise: बाजार लगातार तीसरे दिन चढ़ा, सेंसेक्स 166 अंकों की बढ़त के साथ बंद; निवेशकों की दौलत ₹1.32 लाख करोड़ बढ़ी

शेयर बाजार में शुक्रवार, 31 जुलाई को लगातार तीसरे दिन तेजी रही। सेंसेक्स 166.49 अंकों की बढ़त के साथ 78,094.64 पर और निफ्टी 66.45 अंक चढ़कर 24,383.60 पर बंद हुआ। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 1.32 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया। दिन में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 344 अंक तक उछलकर 78,272.25 के हाई तक गया। यह मार्क दिन के लो से 462 अंक ज्यादा है। निफ्टी भी दिन में पिछली क्लोजिंग से लगभग 112 अंक तक उछलकर 24,429.40 के हाई तक गया।

गुरुवार, 30 जुलाई को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,84,56,699.485 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को यह बढ़कर 4,85,88,400.40 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 1,31,700.915 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी। निफ्टी पर बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, महिंद्रा एंड महिंद्रा और श्रीराम फाइनेंस टॉप गेनर रहे। वहीं TCS, इटर्नल, इंफोसिस, मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट, आईटीसी टॉप लूजर रहे।

गुरुवार को सेंसेक्स 273.55 अंक या 0.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,928.15 पर बंद हुआ था। निफ्टी 66.95 अंक या 0.28 प्रतिशत बढ़कर 24,317.15 अंक पर बंद हुआ था। विदेशी निवेशकों की ओर से अच्छी खरीद, रुपये में मजबूती और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए कंपनियों के उत्साहजनक नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को शुद्ध रूप से 3,623.51 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

विदेशी बाजारों की कैसी रही चाल

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 15 प्रतिशत की बढ़त में है। जापान के निक्केई 225 में भी 4 प्रतिशत की तेजी है। चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी बढ़त में है। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को अच्छी तेजी के साथ बंद हुए थे। यूरोपीय बाजार भी हरे निशान में हैं।

Sun Pharma Q1 Results: जून तिमाही में मुनाफा 27% बढ़ा, रेवेन्यू में 10% का इजाफा; शेयर टूटा

रुपये में बढ़त

शुक्रवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 9 पैसे की बढ़त के साथ 95.41 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। गुरुवार को रुपया लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज करते हुए 26 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.50 पर बंद हुआ था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

हिमस्खलन- नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा पाकिस्तान में लापता:10 मेंबर्स के साथ ब्रॉड पीक पर चढ़ाई कर रहे थे; 4 शव बरामद, रेस्क्यू जारी

नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा पाकिस्तान में हिमस्खलन यानी एवलांच की चपेट में आने के बाद लापता हो गए हैं। अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान (ACP) के अनुसार, काराकोरम इलाके में 8,051 मीटर ऊंचे ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान करीब 7,000 मीटर की ऊंचाई पर यह हादसा हुआ। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, पुर्जा के साथ 9 मेंबर थे। शिखर पर चढ़ने की कोशिश के दौरान बर्फीले तूफान ने 10 सदस्यीय टीम को अपनी चपेट में ले लिया। लापता होने वालों में नेपाल के 6, पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका और चीन का एक-एक पर्वतारोही शामिल है। इनमें से 4 के शव बरामद कर लिए गए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन खराब मौसम के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही है। GPS ट्रैकर में हलचल के संकेत एवरेस्ट क्रॉनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक निर्मल पुर्जा के GPS ट्रैकर में हल्की हलचल देखी गई है। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि यह तकनीकी खराबी भी हो सकती है। ट्रैकिंग डेटा के अनुसार गुरुवार सुबह 9:38 बजे पुर्जा 6,659 मीटर की ऊंचाई पर थे। इसके बाद सुबह 10:18 बजे 800 मीटर की तेजी से गिरावट दर्ज की गई, जो एवलांच के समय से मेल खाती है। रेस्क्यू हेलिकॉप्टर पहाड़ी इलाकों में नहीं पहुंच पा रहे नेपाल पर्वतारोहण संघ के पूर्व अध्यक्ष आंग शेरिंग शेरपा ने बताया कि खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर पहाड़ी इलाके में उतर नहीं पा रहे हैं, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित हुआ है। पाकिस्तान सरकार के संपर्क में नेपाल नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि वे पाकिस्तान में स्थित नेपाली दूतावास के जरिए पाकिस्तानी सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं। नेपाल के पर्यटन मंत्री खड़क प्रसाद पौडेल ने सोशल मीडिया पर कहा कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और पर्वतारोहियों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद कर रहे हैं। अल्पाइन क्लब कर रहा समन्वय अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान के उपाध्यक्ष करार हैदरी ने बताया कि हिमस्खलन के बाद से पूरी टीम से संपर्क टूट गया है। क्लब ने कहा कि वे सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर हर संभव संसाधन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। ———————————————————-

भारत में इस्तीफे जोर जबरदस्ती ही होते हैं

दुनिया के संभवतः किसी दूसरे देश में नैतिकता की उतनी बात नहीं होती होंगी, जितनी भारत में होती हैं। भारत ने दया, करुणा, सत्य, प्रेम, भाईचारे आदि के जितने प्रतीक गढ़े हैं, दुनिया के किसी और देश में उतने नहीं होंगे। भारत में तो एक सतयुग ही था, जिसमें सत्य हरिश्चंद्र थे। लेकिन यह भी सही है कि सत्य, अहिंसा, प्रेम, भाईचारे, करुणा, दया आदि से जितनी दूरी भारत में है उतनी शायद ही कहीं और होगी। इस पर लंबी बहस हो सकती है। इसलिए उसमें जाने की जरुरत नहीं है। लेकिन दुनिया के जिन देशों में सत्य और नैतिकता आदि का ढोल रोज नहीं बताया जाता है वहां लोग ज्यादा नैतिक होते हैं। वहां लोग नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं और अगर कोई अपराध किया है तो उसे भी स्वीकार करके सजा पाते हैं। भारत में कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं लेता है और अपराध करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया व्यक्ति भी अदालत में खड़े होकर कहता है कि वह बेकसूर है और उसका पूरा परिवार और ज्यादातर मामलों में पूरी जाति उसके बचाव में खड़ी होती है।

भारत की राजनीति में भी नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने का कोई सिद्धांत नहीं रहा है। नैतिक जिम्मेदारी लेकर कुछ मंत्रियों आदि ने जरूर इस्तीफे दिए, जिनकी आज तक चर्चा होती है। लाल बहादुर शास्त्री, माधवराव सिंधिया या नीतीश कुमार का जिक्र किया जाता है। यह संयोग है कि इन तीनों के इस्तीफे ट्रेन दुर्घटना को लेकर हुए थे। इनके रेल मंत्री रहते ट्रेन दुर्घटनाएं हुईं और उसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दिया। यह अलग बात है कि रेल मंत्रालय में विफल होने के बाद भी इन सभी लोगों को दूसरे मंत्रालयों में अहम जिम्मेदारी मिली। लाल बहादुर शास्त्री तो बाद में प्रधानमंत्री बने। बहरहाल, भारत में गंभीर से गंभीर विफलता या आर्थिक अपराध में शामिल होने के आरोपों के बाद भी इस्तीफा कराना बड़ा मुश्किल होता है। आर्थिक अपराध के मामलों में तो अब गिरफ्तार होकर जेल जाने के बाद भी नेता इस्तीफा नहीं देते हैं। दिल्ली का मुख्यमंत्री रहते अरविंद केजरीवाल ने कमाल की मिसाल बनाई। वे कई महीने जेल में रहे और उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया। हेमंत सोरेन ने थोड़ी शर्म दिखाई और गिरफ्तारी से चंद मिनट पहले इस्तीफा दे दिया। अगर गिरफ्तारी की बाध्यता नहीं होती तो वे भी इस्तीफा नहीं देते।

सवाल है कि ऐसा क्यों होता है कि भारत में केंद्र या राज्य का मंत्री या मुख्यमंत्री किसी भी विवाद में फंसने या अपनी कैसी भी विफलता के बाद इस्तीफा नहीं देते हैं? इसे दो पहलुओं से देख सकते हैं। एक आपराधिक मामला और दूसरा विफलता व नैतिकता का मामला। जहां तक आपराधिक मामलों में फंसने पर इस्तीफे का सवाल है तो वह इसलिए आसानी से नहीं होता है क्योंकि भारत में पहले से जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं ऐसे, सैकड़ों लोग सांसद और विधायक चुने गए हैं। सवाल है जब गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होने और उनकी जानकारी सार्वजनिक होने के बावजूद जनता उनको चुन देती है तो चुने जाने के बाद किए गए किसी अपराध के लिए वे क्यों इस्तीफा देंगे? जब जनता ने उनको सांसद चुन दिया है तो वे केंद्र में मंत्री बनने के योग्य हैं और जनता ने विधायक चुना है तो वे राज्य में मंत्री और मुख्यमंत्री बनने के योग्य हैं। ऐसे में उनके और जनता के बीच में नैतिकता की बात कहां से आ गई! उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि जानने के बाद भी अगर जनता ने चुना है तो वे वैसे ही किसी अन्य अपराध के मामले में भी क्यों इस्तीफा देंगे? तभी भारत में ऐसे मामलों में भी जोर जबरदस्ती ही इस्तीफा होता है। गिरफ्तार होने या गिरफ्तारी की नौबत आने या पार्टी व सरकार के प्रमुख की ओर से राजनीतिक नुकसान की आशंका देख कर दबाव डालने के बाद ही इस्तीफा होता है।

अब रही जिम्मेदारी के निर्वहन में विफलता की बात तो उसमें भी आजादी के बाद से ही यह परंपरा चलती आ रही है कि इस्तीफा जोर जबरदस्ती ही होगा। ध्यान रहे भारत में पहला हाई प्रोफाइल इस्तीफा वीके कृष्ण मेनन का हुआ था। चीन के साथ युद्ध में भारत की हार के बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्ण मेनन पर दबाव था कि वे इस्तीफा दें। लेकिन वे इस्तीफा देने को तैयार नहीं थे। जब जन दबाव बहुत बढ़ा तो अंत में उन्होंने इस्तीफा दिया। हालांकि जयराम रमेश ने उनके जीवन पर एक किताब लिखी है, ‘अ चेकर्ड ब्रिलियंसः द मेनी लाइव्स ऑफ वीके कृष्ण मेनन’, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि कृष्ण मेनन तो बहुत पहले इस्तीफा देने को तैयार थे लेकिन उन्हें रोका गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू मानते थे कि चीन के साथ युद्ध में पराजय का मेनन से कोई संबंध नहीं है। फिर वे क्यों इस्तीफा देंगे।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर चल रही बातें सुन कर क्या कृष्ण मेनन के इस्तीफे की कहानी से समानता नहीं दिखती है? ध्यान रहे पिछले कई दिनों से कहा जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान तो बहुत पहले इस्तीफा देना चाहते थे। लेकिन प्रधानमंत्री को लगता था कि पेपर लीक होने से उनका कोई लेना देना नहीं है, बल्कि उन्होंने तो पेपर लीक होने के तुरंत बाद सक्रियता दिखाई। सारे आरोपी पकड़े गए और रिकॉर्ड समय में दोबारा परीक्षा करा ली गई ताकि छात्रों का एक साल बरबाद न हो। इसके बाद भी उनका इस्तीफा हुआ तो उसका कारण यही है कि जन दबाव बहुत बढ़ गया यानी जोर जबरदस्ती से ही उनका इस्तीफा हुआ।

सोचें, पेपर लीक कितनी बड़ी विफलता है! एक मंत्री के कार्यकाल में दो बार नीट यूजी जैसी विशाल अखिल भारतीय परीक्षा के पेपर लीक हो जाएं तो उससे बड़ी विफलता क्या हो सकती है? आश्चर्य यह है कि 2024 के शुरू में बजट सत्र में पेपर लीक का कठोर कानून बना था और मई में पेपर लीक हो गया, उसके बाद भी जून में जब नई सरकार बनी तो फिर धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री बना दिया गया! फिर 2026 के मई में नीट यूजी की परीक्षा का पेपर लीक हो गया और धर्मेंद्र प्रधान कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थे।

यह सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान का मामला नहीं है। यह भारत की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था का मामला है, जहां हर व्यक्ति चाहता है कि जवाबदेही और नैतिकता का तकाजा दूसरे पर लागू हो। अपनी जवाबदेही और नैतिकता का ध्यान किसी को नहीं रहता है। जोर जबरदस्ती न हो तो न वीके कृष्ण मेनन का इस्तीफा होता और न धर्मेंद्र प्रधान का। याद करें कैसे कारगिल युद्ध के समय ताबूत घोटाला खुला था और तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज ने कितनी मुश्किल से इस्तीफा दिया था। ऐसे ही दबाव नहीं होता और पार्टियों को चुनावी नुकसान का भय नहीं होता तो न ए राजा इस्तीफा देते और न अशोक चव्हाण की विदाई होती। महिलाओं का दबाव नहीं होता तो एमजे अकबर का भी इस्तीफा नहीं होता। सोचें, इंगलैंड में क्रिस्टीन किलर कांड में एक मंत्री लॉर्ड प्रोफ्यूमो का नाम आया था तो प्रधानमंत्री हेराल्ड मैकमिलन की पूरी सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था। भारत में मी टू के उतने बड़े मुद्दे में एमजे अकबर फंसे तो उनका भी इस्तीफा मुश्किल से हुआ और दुनिया के सबसे बड़े सेक्स अपराधी एपस्टीन के साथ संबंधों का खुलासा होने के बाद भी हरदीप पुरी का इस्तीफा नहीं हुआ।

ईरान पर हमले रोकने वाला प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में फेल:49-50 वोट से खारिज, ट्रम्प की पार्टी के एक सांसद ने वोटिंग नहीं की

अमेरिकी सीनेट में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई सीमित करने वाला प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। इसके लिए गुरुवार को वोटिंग हुई, जिसमें यह 49-50 के अंतर से खारिज हो गया। पेन्सिलवेनिया से रिपब्लिकन सीनेटर डेव मैककॉर्मिक वोटिंग में शामिल नहीं हुए। अभी यह विधेयक सीनेट की विदेश मामलों से जुड़ी समिति में अटका हुआ है। प्रस्ताव लाने वाले सांसद चाहते थे कि इसे पूरे सीनेट में चर्चा और वोटिंग के लिए पेश किया जाए। अब इसे पूरे सीनेट में लाने के लिए सांसदों को दोबारा कोशिश करनी होगी। अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ जाता, तो ईरान के खिलाफ हमले शुरू करने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए संसद की मंजूरी लेना जरूरी हो जाता। यानी राष्ट्रपति अकेले ऐसा फैसला नहीं ले सकते थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया ईरान हमलों के बाद विपक्षी सांसद लगातार मांग कर रहे हैं कि ऐसे किसी भी सैन्य अभियान पर अंतिम फैसला संसद की मंजूरी से ही हो। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. जंग में पहली बार मिस्र पर हमला: मिस्र के बंदरगाह पर ड्रोन हमले में दो जहाजों में आग लगी। ईरान को इस हमले का जिम्मेदार माना जा रहा है। 2. अमेरिका का 10 ईरानी शहरों पर हमला: अमेरिकी सेना ने ईरान पर बड़े हवाई हमले किए। बंदर अब्बास, किश और क़ेश्म द्वीप में धमाकों की खबर है। 3. ईरान का जवाबी हमला: रिवोल्यूशनरी फोर्स ने कहा कि अमेरिकी हमले के बाद उन्होंने कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। 4. कुवैत में चीनी कंपनी की बिल्डिंग पर हमला: ईरानी हमले में उत्तरी कुवैत में एक चीनी कंपनी की इमारत पर हमला हुआ, एक कर्मचारी की मौत। 5. रेड सी की सुरक्षा के लिए गठबंधन बना रहा सऊदी: रेड सी (लाल सागर) में जहाजों की सुरक्षा के लिए सऊदी एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने जा रहा है। अब तक 14 देशों ने इससे जुड़ने में इच्छा जताई है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

रावण का यहां भगवान जैसा सम्मान! भारत के इन मंदिरों में होती है पूजा…अलग है यहां की कहानी

नितेश तिवारी के निर्देशक में बनी फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ का पहला ट्रेलर रिलीज हो गया है। फैंस को फिल्म का ट्रेलर काफी पसंद आ रहा है। ये फिल्म दो पॉर्ट में रिलीज होने वाली है। पहला पॉर्ट दिवाली 2026 और दूसरा पॉर्ट दिवाली 2027 पर सिनेमाघरों में आएगा। राम और सीता की कहानी में रावण का नाम हमेशा विलेन के तौर पर रहा है। वहीं आपको ये जानकर हैरानी होगी की भारत में कई हिस्सों में ऐसे मंदिर मौजूद हैं, जहां रावण की पूजा होती है।

मान्यता है कि रावण ने शिव तांडव स्तोत्र की रचना की थी और वह वीणा वादन में भी निपुण थे। इसी वजह से देश के कुछ हिस्सों में रावण के मंदिर बने हुए हैं, जहां लोग उनकी श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं। आइए जानते हैं उन मंदिरों के बारे में

बिसरख, उत्तर प्रदेश: बिसरख (उत्तर प्रदेश) को कई लोग रावण का जन्मस्थान मानते हैं। इसी वजह से यहां दशहरे पर रावण के पुतले नहीं जलाए जाते। नवरात्रि के दौरान गांव के लोग विशेष पूजा-पाठ और यज्ञ कर रावण की आत्मा की शांति की कामना करते हैं। यहां स्थित प्राचीन विश्रवेश्वर महादेव मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इस मंदिर में मौजूद दुर्लभ अष्टकोणीय शिवलिंग की स्थापना रावण के पिता महर्षि विश्रवा ने की थी, इसलिए यह स्थान रावण से जुड़ी आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

मंदसौर, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश का मंदसौर रावण से जुड़ी मान्यताओं के कारण खास महत्व रखता है। ऐसा कहा जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका इसी क्षेत्र से था, इसलिए यहां रावण को दामाद के रूप में सम्मान दिया जाता है। स्थानीय लोग रावण को भगवान शिव का परम भक्त और महान विद्वान मानते हैं। शहर में रावण की करीब 35 फुट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित है। दशहरे के दिन यहां कई लोग रावण के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं और उसकी स्मृति में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

बैजनाथ मंदिर, हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित बैजनाथ मंदिर का संबंध भी रावण से जुड़ी प्राचीन मान्यताओं से जोड़ा जाता है। लोककथाओं के अनुसार, रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहां कठोर तपस्या की थी और अपनी भक्ति का अद्भुत प्रमाण दिया था। इसी कारण बैजनाथ में दशहरे पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। एक अन्य मान्यता के मुताबिक, भगवान शिव ने रावण को शिवलिंग लंका ले जाने की अनुमति दी थी, लेकिन शर्त थी कि उसे रास्ते में कहीं जमीन पर नहीं रखना होगा। बैजनाथ पहुंचने पर परिस्थितिवश शिवलिंग जमीन पर रख दिया गया और वह वहीं स्थापित हो गया। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

गढ़चिरौली, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में रहने वाले कुछ गोंड आदिवासी समुदाय रावण और उसके पुत्र मेघनाद को पूजनीय मानते हैं। फाल्गुन महीने में मनाए जाने वाले अपने पारंपरिक त्योहार के दौरान वे दोनों की विशेष पूजा करते हैं। समुदाय की अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण को महान शासक और सम्मानित व्यक्तित्व माना जाता है। इसी वजह से यहां उसकी याद में धार्मिक आयोजन किए जाते हैं और उसे श्रद्धा के साथ सम्मान दिया जाता है।

काकीनाडा, आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जो रावण की भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा से जुड़ा माना जाता है। यहां विशाल शिवलिंग के पास बना ये मंदिर स्थानीय मान्यताओं के कारण खास महत्व रखता है। कहा जाता है कि रावण ने स्वयं इस स्थान को भगवान शिव की आराधना के लिए चुना था। यही वजह है कि आंध्र प्रदेश में यह स्थान उन चुनिंदा जगहों में शामिल है, जहां रावण को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जाता है।

डिस्केलमर- यहां पर दी गई जानकारी पौराणिक कथाओं और मान्याताओं पर निर्धारित है।

भारत सीमा के पास चीन की सैन्य गतिविधि तेज:LAC से सटे दो एयरबेस पर 12 J-20 स्टील्थ फाइटर तैनात होने का दावा

व्यावसायिक सैटेलाइट तस्वीरों में दावा किया गया है कि चीन ने भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट स्थित दो एयरबेस पर अपने सबसे आधुनिक J-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। तस्वीरों के अनुसार, शिनजियांग के होतान और तिब्बत के डामशुंग एयरबेस पर कुल 12 J-20 विमान मौजूद हैं। हाल के वर्षों में LAC के पास इस श्रेणी के विमानों की यह सबसे बड़ी तैनातियों में से एक मानी जा रही है। सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा रिपोर्ट के अनुसार, व्यावसायिक सैटेलाइट कंपनी Vantor की तस्वीरों में 9 जुलाई को शिनजियांग के होतान एयरबेस पर आठ J-20 ‘माइटी ड्रैगन’ स्टील्थ फाइटर विमान दिखाई दिए। वहीं, 25 जून की तस्वीरों में तिब्बत के डामशुंग एयरबेस पर चार J-20 विमान सुरक्षात्मक शेल्टर के नीचे खड़े नजर आए। भारत की सीमा के कितने करीब हैं एयरबेस होतान एयरबेस भारतीय वायुसेना के दौलत बेग ओल्डी एयरबेस से करीब 245 किमी और लेह से लगभग 389 किमी दूर है। यह चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में स्थित पीएलए एयर फोर्स (PLAAF) का प्रमुख फॉरवर्ड एयरबेस है। यह नागरिक और सैन्य, दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होता है और भारत-चीन सीमा के निकट चीन का महत्वपूर्ण फॉरवर्ड ऑपरेशनल बेस माना जाता है। इस बेस पर करीब 3,700 मीटर लंबा विस्तारित रनवे है, जिससे बड़े और भारी सैन्य विमान भी आसानी से उड़ान भर सकते हैं। यहां मजबूत एयरक्राफ्ट शेल्टर, नए एप्रन और आधुनिक ऑपरेशन सपोर्ट सुविधाएं विकसित की गई हैं। इस बेस पर J-20 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान, KJ-500 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEWC) विमान, इंटरसेप्टर फाइटर जेट और CH-4 जैसे निगरानी और स्ट्राइक ड्रोन (UAV) तैनात रहते हैं। क्षेत्रीय सैन्य अभ्यास और सीमा पर तनाव के दौरान यहां H-6 रणनीतिक बमवर्षक विमानों की भी तैनाती की जाती है। डामशुंग एयरबेस चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ल्हासा प्रीफेक्चर में स्थित एक उच्च ऊंचाई वाला सैन्य एयरबेस है। यह अरुणाचल प्रदेश के तवांग से करीब 344 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित है और LAC के पूर्वी सेक्टर पर चीन की सैन्य रणनीति का अहम केंद्र माना जाता है। तिब्बती पठार की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यह पीएलए एयर फोर्स (PLAAF) के लिए महत्वपूर्ण फॉरवर्ड स्टेजिंग बेस है। यहां से उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लड़ाकू विमानों की तैनाती, प्रशिक्षण और ऑपरेशन संचालित किए जाते हैं। एयरक्रू को कठिन भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों में उड़ान संचालन का अभ्यास कराया जाता है। एयरबेस में एक प्रमुख रनवे है, जहां से लड़ाकू और सैन्य विमान नियमित रूप से ऑपरेट कर सकते हैं। डामशुंग एयरबेस चीन की पश्चिमी थिएटर कमांड के लिए पूर्वी LAC पर वायु शक्ति बढ़ाने का प्रमुख केंद्र है। यहां से अरुणाचल प्रदेश की दिशा में निगरानी, त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया और उच्च ऊंचाई वाले अभियानों का संचालन आसान हो जाता है। तैनाती क्यों मानी जा रही है अहम रिपोर्ट में रक्षा सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ऊंचाई वाले एयरबेस पर J-20 की लगातार मौजूदगी इस बात का संकेत है कि चीन अब ऐसी तैनाती को नियमित सैन्य रणनीति का हिस्सा बना रहा है, न कि किसी अस्थायी सैन्य अभ्यास का। J-20 चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे रडार से बचने और आधुनिक हवाई अभियानों के लिए विकसित किया गया है। इसे चीनी वायुसेना के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। भारत-चीन सीमा पर लगातार सैन्य गतिविधियां रिपोर्ट के मुताबिक, यह तैनाती ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी विवादित सीमा पर सैन्य तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद दोनों देशों ने कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ता की है तथा कुछ क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी भी हुई है। इसके बावजूद दोनों पक्ष LAC पर बड़ी संख्या में सैनिकों, बख्तरबंद वाहनों और आधुनिक वायु संसाधनों की तैनाती बनाए हुए हैं। भारतीय वायुसेना के सामने चुनौतियां रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय वायुसेना फिलहाल लड़ाकू विमानों की संख्या में कमी की चुनौती का सामना कर रही है। स्वदेशी LCA तेजस Mk1A कार्यक्रम में देरी हुई है, जबकि 114 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद प्रक्रिया अभी जारी है।

पुराना मेकअप नहीं है बेकार! जानें एक्सपायर प्रोडक्ट्स के 7 शानदार जुगाड़

Makeup product की एक्सपायरी डेट खत्म होने के बाद उन्हें चेहरे पर इस्तेमाल करना सेफ नहीं माना जाता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर expired product बेकार हो जाता है। थोड़ी समझदारी से इनका इस्तेमाल घर के कई छोटे-मोटे कामों और creative project में किया जा सकता है:

Face Oil (फेस ऑयल) से बनाएं बॉडी स्क्रब

Story pin image

अगर आपका फेस ऑयल Expired हो गया है, तो उसे चेहरे पर लगाने से बचें। इसकी जगह उसमें थोड़ी चीनी या कॉफी पाउडर मिलाकर body scrub तैयार किया जा सकता है। यह हाथ, पैर और कोहनी जैसी जगहों की डेड स्किन हटाने में मदद कर सकता है। ध्यान रखें, इस मिक्सचर का यूज चेहरे पर न करें।

Lipstick (लिपस्टिक) का करें क्रिएटिव इस्तेमाल

How to Draw and Color Lipstick & Lips |beautiful Lips Lipstick colour and draw - YouTube

Expire लिपस्टिक होंठों पर लगाने के बजाय आर्ट और क्राफ्ट में इस्तेमाल की जा सकती है। इससे ड्रॉइंग, ग्रीटिंग कार्ड या DIY project में रंग भरे जा सकते हैं। अगर बच्चों के साथ कोई creative activities कर रहे हैं, तो यह एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है।

Lip Balm (लिप बाम) आएगा दूसरे काम

Jane Birkin's original Hermès bag sells at auction for whopping 8.6 million euros | KOLR - OzarksFirst.com

Expired लिप बाम होंठों के लिए सेफ नहीं होता, लेकिन घर के छोटे-मोटे कामों में काम आ सकता है। अटकी हुई zip पर थोड़ा-सा लगाने से वह आसानी से चलने लगती है। इसके अलावा लेदर के जूते या बैग पर हल्का-सा लगाने से उनकी चमक भी बेहतर दिखाई दे सकती है।

Eye Shadow (आई शैडो) से बनाएं नया नेल पेंट

आइशैडो से कुछ यूं बनाएं नेल पॉलिश

पुराने आई शैडो को फेंकने की बजाय transparent nail polish में मिलाकर अपनी पसंद का नया शेड तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा इसे कैनवास, पेपर या craft project में रंग की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

Foundation (फाउंडेशन) का करें अलग इस्तेमाल

MUA tell us how to get the perfect foundation.

एक्सपायर फाउंडेशन को चेहरे पर नहीं लगाना चाहिए। हालांकि, इसे पेंटिंग, डेकोरेशन या DIY projects में रंग की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर शरीर के किसी हिस्से पर लगा रहे हो, तो पहले स्किन के छोटे हिस्से पर patch test जरूर करें और किसी तरह की जलन होने पर इसका यूज न करें।

Mascara Brush (मस्कारा ब्रश) को करें दोबारा इस्तेमाल

Mascara wand for maximum volume of artificial eyelashes 16235347 Stock Photo at Vecteezy

मस्कारा expire होने के बाद उसे आंखों पर बिल्कुल न लगाएं। लेकिन उसका ब्रश अच्छी तरह धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे eyebrow को सेट करना, छोटे उड़ते बालों को ठीक करना या हेयर स्टाइल को फिनिशिंग देना आसान हो जाता है।

Toner (टोनर) से करें घर की सफाई

5 Ways You're Using Cleaning Products Wrong, Pro Cleaners Say

एक्सपायर टोनर को चेहरे पर लगाने के बजाय सफाई के लिए यूज किया जा सकता है। इससे शीशे, खिड़की के कांच या mobile screen की सफाई की जा सकती है। अगर टोनर में अल्कोहल मौजूद है, तो यह सरफेस को साफ करने में मदद कर सकता है।

लॉन्च से पहले iQOO Z11 की भारत में कीमत और स्पेसिफिकेशन्स लीक, मिलेगा 144Hz OLED डिस्प्ले और 8000mAh बैटरी

iQOO Z11 Lite लॉन्च करने के कुछ ही दिनों बाद, Vivo का यह सब-ब्रांड इस सीरीज में एक और फोन जोड़ने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस फोन के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन हाल ही में लीक हुई जानकारी से इसके अनुमानित स्पेसिफिकेशन्स, लॉन्च टाइमलाइन और अनुमानित कीमत का पता चलता है। ऐसी भी चर्चा है कि भारत में आने वाला iQOO Z11, इस साल की शुरुआत में चीन में लॉन्च हुए मॉडल से कुछ बड़े बदलावों के साथ आ सकता है। अब आइए जानते हैं इस अपकमिंग स्मार्टफोन की लीक हुई सभी जानकारी के बारे में।

iQOO Z11 के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स (लीक जानकारी)

टिपस्टर देबयान रॉय की ओर से शेयर की गई लीक जानकारी के अनुसार, iQOO Z11 का भारतीय वर्जन 144Hz रिफ्रेश रेट वाले 1.5K कर्व्ड OLED डिस्प्ले के साथ आ सकता है, जो इसे चीनी मॉडल में देखे गए फ्लैट-स्क्रीन डिजाइन से अलग बनाता है।

उम्मीद है कि चीनी स्मार्टफोन निर्माता इस फोन में MediaTek Dimensity 7500 चिपसेट का इस्तेमाल करेगा। साथ ही, कहा जा रहा है कि इस डिवाइस में 7000mAh से 8000 mAh की बैटरी होगी, जो 90W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगी।

कैमरे की बात करें तो, इस फोन में ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन (OIS) के साथ 50MP का प्राइमरी कैमरा और 32MP का फ्रंट कैमरा होने की उम्मीद है। अन्य अनुमानित फीचर्स में IP68 और IP69 डस्ट और वॉटर रेजिस्टेंस, इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट स्कैनर, प्लास्टिक फ्रेम और 8GB व 12GB RAM वाले मेमोरी ऑप्शन शामिल हैं।

वहीं, इसकी तुलना में चीनी वर्जन MediaTek Dimensity 8500 चिपसेट, 6.83-इंच 1.5K 165Hz AMOLED डिस्प्ले, 9020 mAh बैटरी और डुअल-कैमरा सेटअप (जिसमें 50MP का मेन सेंसर और 2MP का डेप्थ कैमरा है) के साथ लॉन्च हुआ था।

iQOO Z11 भारत में लॉन्च और कीमत (लीक जानकारी)

हालांकि, iQOO ने अभी तक ऑफिशियली लॉन्च डेट की पुष्टि नहीं की है, लेकिन हालिया लीक से पता चलता है कि यह स्मार्टफोन अगस्त में कभी भी भारत में आ सकता है। पहले मिली BIS सर्टिफिकेशन की जानकारी से यह भी संकेत मिलता है कि लॉन्च में ज्यादा समय नहीं बचा है। कीमत की बात करें तो, टिपस्टर देबयान के अनुसार, चीन की यह टेक कंपनी भारत में iQOO Z11 को लगभग 35,000 रुपये की कीमत पर लॉन्च कर सकती है।

यह भी पढ़ें: Realme C100i के लॉन्च से पहले लीक हुए फीचर्स, 7000mAh बैटरी और 2 कलर ऑप्शन के साथ आएगा फोन

फ्रांस में पहली बार दिखा आग का बादल आखिर है क्या?

fire cloud

अभूतपूर्व जंगल की आग से जूझते फ्रांस में पहली बार फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनते देखा गया है। आखिर आग के बादल होते क्या हैं और इनका क्या असर होता है। फ्रांस में इसे देखने के बाद क्यों चिंता बढ़ रही है। ALSO READ: अमेरिका-चीन के बीच तनाव, अमेरिका ने लगाया चीनी रोबोट पर प्रतिबंध

 

फ्रांस जंगल की अभूतपूर्व आग से जूझ रहा है। लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है और सैर सपाटे के मौसम में अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। जंगल की आग ना सिर्फ अपने विस्तार में भयानक है बल्कि यह जिस रूप में नजर आ रही है वह इससे पहले फ्रांस में कभी नहीं देखी गई। यहां फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनने की भी खबरें आ रही हैं जो फ्रांस के लिए दुर्लभ रहा है।

 

फायर क्लाउड क्या है?

पाइरक्यूम्यूलोनिंबस एक तरह का बादल है जो जंगल की बड़ी आग के ऊपर बनता है। तेज गर्मी जब धुएं, राख और भाप को वातावरण में धकेलती है तो पाइरोक्यूम्यूलोनिंबस बनता है जिसे फायर क्लाउड यानी आग के बादल भी कहा जाता है।

 

तस्मानिया यूनिवर्सिटी में पायरोजियोग्राफी के प्रोफेसर डेविड बोमान ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, “आप किसी चिमनी के रूप में इसकी कल्पना कर सकते हैं, जिसमें नीचे आग होती है, धुआं चिमनी के रास्ते से होता हुआ वायुमंडल में जाता है।”

 

मौसमविज्ञानी उन परिस्थितियों की पहचान कर सकते हैं जो फायर क्लाउड बनाने के लिए आदर्श होते हैं, हालांकि वे बारीकी से यह नहीं बता सकते कि वे कब बनेंगे। ऐसे में वे चेतावनी तो दे सकते हैं लेकिन इसकी सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सकते। ALSO READ: नेपाल: बालेन शाह के खिलाफ जेन-जी में क्यों है उबाल

 

जंगल की आग पर बुरा असर

फायर क्लाउड जंगल की आग को ज्यादा खतरनाक और अप्रत्याशित बना सकते हैं। तेज हवाएं पैदा करके वे आग की दिशा बदल सकते हैं और बिजली पैदा करके वह आग की नई लपटों को जन्म दे सकते हैं।

 

उनके अंदर की ऊर्जा खत्म होने के बाद भी “प्लूम कोलैप्स” की स्थिति पैदा कर के नुकसान पहुंचा सकते हैं। प्लूम जब बादलों के अंदर पर्याप्त ऊर्जा नहीं बचती तो वे ढह जाते हैं, इसके साथ राख और कचरा जमीन पर गिर कर नुकसान पहुंचाता है। इसे ही प्लूम कोलैप्स कहते हैं। बोमन का कहना है, “प्लूम कोलैप्स होता है तो वहां जलते कचरे की बारिश होती है।” ALSO READ: जंगल की आग के सामने लाचार होते फ्रांस और स्पेन

 

यूरोप पर क्या असर होगा?

फ्रेंच अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि बोर्दो के पास पाइरोक्यूमूलोनिंबस देखा गया है जो फ्रांस में पहली बार है। फ्रांस में बोर्दो के पास बीते कई दिनों से जंगल की आग धधक रही है।आग के बादल बनने की खबर आने के बाद आपातकालीन सेवाओं की चुनौती बढ़ गई है। आग की अप्रत्याशित प्रवृत्ति की वजह से अधिकारी इलाकों को खाली कराने का दायरा बढ़ा सकते हैं।

 

बोमन का कहना है कि पूर्वी यूरोप में आग के बादल पैदा होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। अब तक इन्हें ज्यादातर कनाडा या ऑस्ट्रेलिया में ही देखा जाता रहा है। बोमन के मुताबिक, “यह बहुत गंभीर स्थिति है। यह हैरान करने वाला है लेकिन यह विनाशकारी और भयानक है, हम ऐसी चीजें और नहीं चाहते।”

Stocks to Watch: 30 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 16 स्टॉक्स, मिल सकता तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: गुरुवार के कारोबारी सत्र में कई बड़े शेयर फोकस में रह सकते हैं। कुछ कंपनियों ने जून तिमाही के मजबूत नतीजे जारी किए हैं। कुछ के प्रदर्शन ने निवेशकों को निराश किया है। इसके अलावा एक सरकारी कंपनी में बड़ा मैनेजमेंट बदलाव भी हुआ है। आइए जानते हैं 30 जुलाई को किन 16 शेयरों पर बाजार की सबसे ज्यादा नजर रहेगी।

Eicher Motors

दोपहिया और कमर्शियल व्हीकल बनाने वाली कंपनी आयशर मोटर्स का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 21.4% बढ़कर 1,462 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 31.5% बढ़कर 6,632 करोड़ रुपये हो गया। मुनाफा और रेवेन्यू दोनों ही CNBC-TV18 के अनुमान से बेहतर रहे।

Dabur

एफएमसीजी कंपनी डाबर का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 15.3% बढ़कर 586 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 10.6% बढ़कर 3,764.3 करोड़ रुपये और EBITDA 11% बढ़कर 741.2 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 19.6% से बढ़कर 19.7% रहा। मुनाफा अनुमान से बेहतर रहा, जबकि बाकी आंकड़े अनुमान के मुताबिक रहे।

MOIL

सरकारी मैंगनीज माइनिंग कंपनी MOIL का जून तिमाही का नेट प्रॉफिट 70.1% बढ़कर 87.6 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल यह 51.5 करोड़ रुपये था। रेवेन्यू 6.6% बढ़कर 370.9 करोड़ रुपये और EBITDA 72.3% बढ़कर 135.8 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 22.6% से बढ़कर 36.6% हो गया।

Bajaj Housing Finance

बजाज ग्रुप की कंपनी बजाज हाउसिंग फाइनेंस का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 22.6% बढ़कर 715 करोड़ रुपये रहा। NII 9% बढ़कर 968 करोड़ रुपये और कुल आय 17.2% बढ़कर 3,063 करोड़ रुपये हो गई। कंपनी की एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ। ग्रॉस NPA 0.30% से घटकर 0.29% और नेट NPA 0.13% से घटकर 0.12% रहा।

Vedanta Oil & Gas

ऑयल एंड गैस कंपनी वेदांता ऑयल एंड गैस ने जून तिमाही में 945 करोड़ रुपये का प्रॉफिट दर्ज किया। पिछली तिमाही में कंपनी को 476 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। रेवेन्यू 3.1% घटकर 2,507 करोड़ रुपये और EBITDA 7.7% घटकर 814 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 34.1% से घटकर 32.5% पर आ गया।

Vedanta Iron & Steel

स्टील कंपनी वेदांता आयरन एंड स्टील ने जून तिमाही में 121 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया। पिछली तिमाही में कंपनी को 1,939 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। रेवेन्यू 5.2% घटकर 3,662 करोड़ रुपये और EBITDA 8.1% घटकर 508 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 14.3% से घटकर 14% रह गया।

Vedanta Power

बिजली कंपनी वेदांता पावर को जून तिमाही में 423 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। पिछली तिमाही में कंपनी ने 139 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। 487 करोड़ रुपये के एक्सेप्शनल लॉस का असर नतीजों पर दिखा, जबकि रेवेन्यू 31% बढ़कर 2,607 करोड़ रुपये रहा।

Waaree Energies

रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी वारी एनर्जीज का जून तिमाही का नेट प्रॉफिट 14.1% बढ़कर 850 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 79.2% बढ़कर 7,932 करोड़ रुपये और EBITDA 44.4% बढ़कर 1,440 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन 22.5% से घटकर 18.2% पर आ गया।

Cochin Shipyard

सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी कोचीन शिपयार्ड के डायरेक्टर (फाइनेंस) जोस वी. जे. अगले सात महीने तक CMD का अतिरिक्त प्रभार संभालते रहेंगे। उनकी नियुक्ति 1 अगस्त 2026 से बढ़ाई गई है। इस विस्तार को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने मंजूरी दी है।

Star Health

हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी स्टार हेल्थ का जून तिमाही का मुनाफा 438 करोड़ रुपये से बढ़कर 550 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी की आय भी बढ़कर 4,917 करोड़ रुपये पहुंच गई। पिछले साल की समान तिमाही में यह 4,336 करोड़ रुपये थी।

MTAR Tech

इंजीनियरिंग कंपनी MTAR Tech का जून तिमाही का नेट प्रॉफिट 10.8 करोड़ रुपये से बढ़कर 50.2 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 157 करोड़ रुपये से बढ़कर 360 करोड़ रुपये और EBITDA 28 करोड़ रुपये से बढ़कर 85 करोड़ रुपये पहुंच गया। EBITDA मार्जिन 18.1% से बढ़कर 23.5% हो गया।

Balkrishna Industries

टायर कंपनी बालकृष्ण इंडस्ट्रीज का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 287 करोड़ रुपये से बढ़कर 432 करोड़ रुपये हो गया। आय बढ़कर 3,445 करोड़ रुपये और EBITDA 724 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 18.2% से बढ़कर 21.01% हो गया। कंपनी ने 4 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है।

TBO Tek

ट्रैवल टेक कंपनी TBO Tek का जून तिमाही का प्रॉफिट 32.4% बढ़कर 83.3 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 81.1% बढ़कर 925.7 करोड़ रुपये और EBITDA 86.6% बढ़कर 138 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 14.4% से बढ़कर 14.9% रहा।

TeamLease

स्टाफिंग और एचआर सर्विसेज कंपनी TeamLease का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 31.4% बढ़कर 34.9 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 5.8% बढ़कर 3,034.7 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA 2.7% बढ़कर 31.5 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 1% पर स्थिर बना रहा।

Triveni Engineering

इंजीनियरिंग और शुगर सेक्टर की कंपनी त्रिवेणी इंजीनियरिंग का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 2.1 करोड़ रुपये से बढ़कर 3.65 करोड़ रुपये हो गया। कंसोलिडेटेड आय 1,950 करोड़ रुपये और EBITDA 52.9 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 1.96% से बढ़कर 2.71% हो गया।

Redington

आईटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी रेडिंग्टन का जून तिमाही का मुनाफा 76.6% बढ़कर 486 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 34.6% बढ़कर 34,922 करोड़ रुपये और EBITDA 76.8% बढ़कर 708 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 1.5% से बढ़कर 2% रहा।

कल ये कंपनियां तिमाही नतीजे जारी करेंगी

गुरुवार को कई बड़ी कंपनियां जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी करेंगी। इनमें आर्कियन केमिकल इंडस्ट्रीज, अजंता फार्मा, अपोलो पाइप्स, AWL एग्री बिजनेस, बजाज फाइनेंस, बेस्ट एग्रोलाइफ, एक्साइड इंडस्ट्रीज, ICRA और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजों पर निवेशकों की नजर रहेगी।

Crude Oil Price: कच्चे तेल में तूफानी तेजी, ट्रंप की धमकी के बाद 7% उछलकर 90 डॉलर के पार पहुंचा भाव

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।