H1B Visa Fee: अमेरिका जाने वाले भारतीयों को बड़ी राहत! H-1B वीजा पर ट्रंप के ₹95 लाख की फीस पर कोर्ट ने दिया बड़ा झटका

US Court Blocks Trump H-1B Visa Fee: अमेरिका में रहने के लिए जारी होने वाले H-1B वीजा पर एक बड़ी राहत वाली खबर आई है। एक संघीय अपील अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को बड़ा कानूनी झटका दिया है। अदालत ने नए H-1B वीजा पर करीब 95 लाख रुपये की भारी-भरकम फीस लगाने वाले आदेश पर रोक हटाने से साफ इनकार कर दिया है।

बोस्टन स्थित ‘फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स’ की तीन जजों की पीठ ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें इस फीस को गैर-कानूनी करार दिया गया था। अदालत के इस फैसले से अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिकी टेक कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।

अदालत ने क्यों लगाई $100,000 की वीजा फीस पर रोक?

यूएस डिस्ट्रिक्ट जज लियो टी. सोरोकिन ने 8 जून 2026 के अपने आदेश में कहा था कि ट्रंप प्रशासन द्वारा इतनी बड़ी फीस वसूलना एक तरह का ‘अवैध टैक्स’ है, क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस ने राष्ट्रपति या कार्यपालिका को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं दिया है।

20 डेमोक्रेटिक शासित राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर इस याचिका में तर्क दिया गया कि राष्ट्रपति ने संसद से कानून पास कराने के बजाय सिर्फ एक राष्ट्रपति घोषणापत्र के जरिए इस फीस को लागू कर अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया है।

अपील अदालत ने 1989 के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अगर सरकार नागरिकों या कंपनियों पर कोई बड़ा वित्तीय बोझ (टैक्स या फीस) डालती है, तो उसके लिए संसद की स्पष्ट मंजूरी अनिवार्य है। ट्रंप प्रशासन यह साबित करने में विफल रहा कि उनके पास इसकी कानूनी मंजूरी थी।

क्या था ट्रंप प्रशासन का तर्क और फैसला?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर 2025 में एक प्रेसिडेंशियल प्रोक्लेमेशन के जरिए $100,000 की H-1B वीजा फीस लगाने का ऐलान किया था। प्रशासन का कहना था कि अमेरिकी कंपनियां कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को लाने के लिए H-1B वीजा कार्यक्रम का गलत इस्तेमाल करती हैं, जिससे अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छिन जाती हैं। सरकार के मुताबिक, इस भारी फीस का मकसद कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने से हतोत्साहित करना था।

भारतीय IT प्रोफेशनल्स और टेक कंपनियों के लिए राहत क्यों?

H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को आईटी, इंजीनियरिंग और विज्ञान जैसे विशेष क्षेत्रों में विदेशी कुशल पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। अमेरिका हर साल कुल 85,000 H-1B वीजा करीब 65,000 रेगुलर कोटा और 20,000 अमेरिका से मास्टर डिग्री हासिल करने वालों के लिए जारी करता है। इस कोटे का बड़ा हिस्सा भारत और चीन के पेशेवरों को मिलता है।

इस नए नियम से पहले, अमेरिकी कंपनियों को एक H-1B कर्मचारी को स्पॉन्सर करने के लिए औसतन $2,000 से $5,000 (लगभग 1.6 लाख से 4.1 लाख रुपये) ही देने पड़ते थे। $100,000 की फीस लागू होने से कंपनियों के लिए विदेशी प्रतिभाओं को बुलाना बेहद खर्चीला हो जाता।

आगे क्या होगा?

अपील अदालत का यह स्टे खारिज होने का मतलब है कि जब तक इस पूरे मामले की अंतिम सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक ट्रंप प्रशासन $100,000 की इस बढ़ी हुई फीस को लागू नहीं कर सकता है। यानी फिलहाल पुरानी फीस प्रक्रिया के तहत ही H-1B वीजा आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

Asian Games में कब टकराएंगी भारत पाक की पुरुष महिला क्रिकेट टीमें?

मौजूदा चैंपियन भारत और पाकिस्तान की पुरुष और महिला क्रिकेट टीम को जापान में होने वाले एशियाई खेलों में सीधे क्वार्टर फाइनल में जगह दी गई है।भारतीय महिला टीम जापान के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी, जबकि पुरुष टीम का मुकाबला प्रारंभिक चरण के मैच के बाद तय होगा। सेमीफाइनल में भारतीय महिला टीम का सामना बांग्लादेश या चीन में से किसी एक टीम से होगा।

भारतीय पुरुष टीम सेमीफाइनल में पाकिस्तान का सामना कर सकती है। एशियाई खेलों में पुरुषों की क्रिकेट प्रतियोगिता 24 सितंबर को शुरू होगी और उसका फाइनल मैच एक अक्टूबर को खेला जाएगा।

महिलाओं की प्रतियोगिता 17 से 22 सितंबर तक होगी। भारतीय महिला टीम फाइनल में पाकिस्तान से भिड़ सकती है। पुरुषों की प्रतियोगिता में 10 टीमें भाग ले रही हैं। प्रारंभिक चरण में ग्रुप ए में अफगानिस्तान, जापान और नेपाल तथा ग्रुप बी में हांगकांग, चीन, मलेशिया और ओमान शामिल होंगे।

दोनों प्रतियोगिताएं आइची प्रांत के कोरोजी एथलेटिक पार्क में टी20 प्रारूप में खेली जाएंगी।श्रेयस अय्यर भारतीय पुरुष टीम की, जबकि हरमनप्रीत कौर भारतीय महिला टीम की कप्तानी करेंगी।क्रिकेट चौथी बार एशियाई खेलों के कार्यक्रम का हिस्सा है। इससे पहले यह 2010 में ग्वांगझू, 2014 में इंचियोन और 2023 में हांगझोऊ खेलों का हिस्सा था।

ट्रम्प बोले- चीन-रूस जंग में आए तो अंजाम बुरा होगा:पुतिन-जिनपिंग ने मुझे यकीन दिलाया, वे ईरान को हथियार नहीं देंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन या रूस ईरान युद्ध में शामिल हैं। हालांकि उन्होंने धमकी दी कि अगर दोनों देशों ने इस युद्ध में दखल दिया तो इसके गंभीर नतीजे होंगे और यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हाल ही में बीजिंग में हुई उनकी मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिया था कि वे किसी भी हाल में ईरान को हथियार नहीं देंगे। चीनी कंपनियों के लिए भी यही चीज लागू है। ट्रम्प ने कहा मुझे जिनपिंग पर यकीन है। उन्होंने यह भी कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी उनसे कहा था कि वे ईरान को हथियार नहीं बेचेंगे। ट्रम्प ने कहा कि यूक्रेन जंग के बावजूद उनकी पुतिन से बातचीत जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका सीधे यूक्रेन को हथियार नहीं बेचता, बल्कि नाटो देशों को बेचता है। नाटो देश इन हथियारों की पूरी कीमत चुकाते हैं। उसके बाद वे इन्हें किस तरह आगे भेजते हैं, इसकी उन्हें जानकारी नहीं होती। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. नेतन्याहू अमेरिका जाएंगे, जंग के बाद पहली बार ट्रम्प से मुलाकात: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सोमवार को अमेरिका रवाना होंगे। वह राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ईरान जंग शुरू होने के बाद पहली बार होगी। 2. कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार: ईरान-अमेरिका में लगातार बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड का भाव मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। 3. कुवैत में 3 अमेरिकी ठिकानों पर हमला: ईरान ने शुक्रवार को कुवैत में मौजूद अमेरिका के तीन सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमला किया है। इसमें कैंप अरिफजान, कैंप दोहा और कैंप अदैरी को निशाना बनाया गया। 4. ईरान बोला- अमेरिका के आगे नहीं झुकेंगे: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान अमेरिका के सामने झुकेगा नहीं और उसकी धमकियां भी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने यह बयान किर्गिस्तान में SCO के विदेश मंत्रियों की बैठक में दिया। 5. होर्मुज में 28 क्रू मेंबर्स वाले LPG टैंकर पर हमला: ईरान के जलक्षेत्र में एक LPG टैंकर पर हमला हुआ। मोजाम्बिक के झंडे वाला यह टैंकर दिशा 28 भारतीय चालक दल के सदस्यों को लेकर जा रहा था। भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि सभी भारतीय सुरक्षित हैं। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

‘ईरान को जिनपिंग और पुतिन हथियार देते तो अच्छा नहीं होता, उनके लिए बहुत बुरा होता…’, युद्ध के बीच अचानक रूस और चीन को क्यों धमकाने लगे ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर ऐसा बयान जारी किया है, जो दिखने में चीन और रूस को दी जारी एक धमकी की तरह मालूम पड़ रहा है। उन्होंने ईरान का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान के मामले में जिन दो बड़े देशों का अक्सर जिक्र किया जाता है, वे इसमें शामिल नहीं हो रहे हैं।इसके

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नेपाल के प्रधानमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट में दखल का आरोप:3 जजों पर इस्तीफे का दवाब बना रहे बालेन शाह; अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर सुप्रीम कोर्ट को अपने पक्ष में करने की कोशिश के आरोप लगे हैं। तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट्स (ICJ) ने संयुक्त बयान जारी कर यह आरोप लगाए हैं। संगठनों का कहना कि सरकार तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों पर इस्तीफा देने का दबाव बना रही है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ महाभियोग लाया जा सकता है। संगठनों का कहना है कि सरकार का मकसद सुप्रीम कोर्ट की संरचना बदलना है। उनका आरोप है कि हाल के महीनों में ऐसे कई कदम उठाए गए हैं जिनसे अदालत की स्वतंत्रता कमजोर हो सकती है और संवैधानिक मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है। मुख्य न्यायधीश की नियुक्ति को लेकर भी विवाद बयान में मनोज कुमार शर्मा को नेपाल का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। शर्मा उस समय वरिष्ठता क्रम में चौथे स्थान पर थे। उनसे सीनियर तीन न्यायाधीश को नजरअंदाज कर दिया गया। इसी वजह से विवाद शुरू हुआ। नेपाल में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को ही मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। इस बार इस परंपरा का पालन नहीं किया गया और मनोज शर्मा को तब यह पद दिया गया जब उनसे सीनियर जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल मौजूद थे। इसके अलावा संगठन का आरोप है कि मनोज कुमार शर्मा के खिलाफ मिली शिकायतों की भी खुली और निष्पक्ष जांच नहीं की गई। संसदीय सुनवाई समिति को शर्मा के खिलाफ कुल 16 शिकायतें मिली थीं। हालांकि ये शिकायतें गोपनीय रखी गई और मीडिया के सामने पेश नहीं की गईं। बिना सबूत के जजों पर इस्तीफे का दबाव बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में शर्मा से तीन सीनियर जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि अब तक इन तीनों के खिलाफ ऐसा कोई सार्वजनिक आरोप या ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने कोई गंभीर संवैधानिक या कानूनी गलती की है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि नेपाल के संविधान के मुताबिक, किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होते ही उसे तुरंत निलंबित कर दिया जाता है। अगर सुप्रीम कोर्ट के तीनों वरिष्ठ न्यायाधीशों को एक साथ निलंबित किया गया तो अदालत की संरचना और कामकाज पर बड़ा असर पड़ेगा। यह ऐसे समय में होगा, जब सुप्रीम कोर्ट सरकार के कई अहम फैसलों और संवैधानिक मामलों की सुनवाई कर रही है। संगठनों का कहना है कि अगर बिना ठोस संवैधानिक आधार के महाभियोग का इस्तेमाल किया गया तो इससे यह संदेश जाएगा कि सरकार अदालत की संरचना बदलकर लंबित मामलों के फैसलों को प्रभावित करना चाहती है। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर जनता का भरोसा भी कमजोर हो सकता है। संवैधानिक परिषद में बदलाव पर आपत्ति जताई इन संगठनों ने मई 2026 में संवैधानिक परिषद अधिनियम में अध्यादेश के जरिए किए गए संशोधन पर भी आपत्ति जताई है। नेपाल में संवैधानिक परिषद एक अहम संस्था है। यही परिषद मुख्य न्यायाधीश, चुनाव आयोग, मानवाधिकार आयोग और अन्य संवैधानिक निकायों के प्रमुखों की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश करती है। विवाद इस बात पर है कि बालेन शाह सरकार ने मई 2026 में संसद से कानून पारित कराने के बजाय अध्यादेश के जरिए परिषद के काम करने के नियम बदल दिए। पहले बैठक के लिए ज्यादा सदस्यों की मौजूदगी जरूरी थी। नियुक्तियों पर व्यापक सहमति या पूरे परिषद के बहुमत की जरूरत पड़ती थी। अब संशोधन के बाद कम सदस्यों की मौजूदगी में भी बैठक हो सकती है। इतना ही नहीं बैठक में मौजूद सदस्यों के साधारण बहुमत से फैसला लिया जा सकता है। —————————— नेपाल से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा:भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात करेंगे; 3 महीने में ही फैसले से पलटे
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) पहली बार अपने बनाए नियम से हटकर विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने तय किया था कि वह किसी भी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बालेन शाह भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Stock Market Fall: सेंसेक्स 332 अंक गिरकर बंद; लगातार 5वें दिन लाल, निवेशकों के ₹91511 करोड़ स्वाहा

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार, 24 जुलाई को लगातार 5वें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। दिन में सेंसेक्स ने 917 अंकों की तगड़ी मार झेली और 75,474.43 के लो तक चला गया। निफ्टी भी 263 अंक तक टूटकर 23,606.30 के लो तक गया। हालांकि बाद में रिकवरी हुई। सेंसेक्स 331.62 अंकों की गिरावट के साथ 76,059.77 पर और निफ्टी 102.15 अंकों की गिरावट के साथ 23,767.45 पर बंद हुआ।

इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 91,510.68 करोड़ रुपये घट गया। गुरुवार, 23 जुलाई को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,76,60,985.926 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह घटकर 4,75,69,475.24 करोड़ रुपये हो गया।

NSE पर एचसीएल टेक्नोलोजिज, सिप्ला, विप्रो, आईटीसी, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी टॉप गेनर्स रहे। वहीं इटर्नल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, बजाज ऑटो टॉप लूजर्स रहे।

एक दिन पहले कैसी रही थी चाल

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में उछाल से गुरुवार को सेंसेक्स 363.66 अंक या 0.47 प्रतिशत टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ था। निफ्टी 126.65 अंक या 0.53 प्रतिशत टूटकर 23,869.60 अंक पर बंद हुआ था।

Hindustan Zinc Q1 Results: मुनाफा 145% बढ़ा, रेवेन्यू 77% की बढ़ोतरी के साथ अब तक के सबसे हाई लेवल पर

रुपये की चाल

शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 96.51 पर पहुंच गया। बाद में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे मजबूत होकर 96.55 (अस्थायी) पर बंद हुआ। खबरों के मुताबिक, इसमें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की संभावित दखलंदाजी का भी हाथ रहा, जिसके जरिए कच्चे तेल की कीमत में उछाल के बीच रुपये में और गिरावट को रोकने की कोशिश की गई। इसके अलावा कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी घरेलू करेंसी को कुछ सहारा दिया। रुपया गुरुवार को 20 पैसे की गिरावट के साथ 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 6 प्रतिशत लुढ़क गया। जापान का निक्केई 225, चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी गिरावट में हैं। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

50MP कैमरा के साथ iQOO का नया 5G फोन लॉन्च, 6500mAh बैटरी और 44W फास्ट चार्जिंग से होगा लैस

अगर आप कम कीमत में एक स्मार्टफोन लेना चाहते हैं तो, iQOO ने भारत में आधिकारिक तौर पर iQOO Z11 Lite 5G लॉन्च कर दिया है। Vivo के इस सब-ब्रांड ने अपने इस नए फोन में MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर, 6500mAh की बैटरी और 120Hz डिस्प्ले दिया है। साथ ही इंट्रोडक्टरी ऑफर्स के साथ इसकी शुरुआती कीमत 18,000 रुपये से कम रखी है। अब आइए iQOO Z11 Lite 5G के फीचर्स, स्पेसिफिकेशन्स और कीमत के बारे में डिटेल में जानते हैं।

iQOO Z11 Lite के स्पेसिफिकेशन्स

चीन की स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी iQOO ने Z11 Lite में 6.74-इंच का HD+ IPS LCD डिस्प्ले दिया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 1,200 निट्स तक की हाई ब्राइटनेस के साथ आएगा। स्क्रीन में सेल्फी कैमरे के लिए वॉटरड्रॉप नॉच है, और फोन की मोटाई 8.4mm है और वजन 209 ग्राम है।

यह हैंडसेट MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट पर चलता है, जिसमें LPDDR4X RAM और UFS 2.2 स्टोरेज दिया गया है। iQOO के अनुसार, AnTuTu बेंचमार्क पर इस फोन का स्कोर 5,79,000 से ज्यादा है।

सॉफ्टवेयर की बात करें तो, यह डिवाइस Android 16 पर आधारित OriginOS 6 के साथ आता है। चीनी टेक कंपनी ने इस फोन में दो साल के Android OS अपग्रेड और चार साल के सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा किया है। इसके अलावा, इसमें AI फीचर्स भी शामिल हैं, जैसे AI क्रिएशन, AI कैप्शन्स और Google Gemini इंटीग्रेशन।

पावर देखें तो, Z11 Lite में 44W फासस्ट चार्जिंग के साथ 6500mAh की बैटरी दी गई है। iQOO का कहना है कि सिर्फ 10 मिनट की चार्जिंग से 8 घंटे तक कॉलिंग या 7 घंटे से ज्यादा समय तक ऑनलाइन वीडियो देखा जा सकता है। यह फोन वायर्ड रिवर्स चार्जिंग और बायपास चार्जिंग को भी सपोर्ट करता है।

कैमरे की बात करें तो, इस फोन के रियर में 50MP का Sony मेन कैमरा और एक सेकेंडरी सेंसर है, जबकि सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 5MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है।

इस डिवाइस में धूल और पानी की छींटों से बचाव के लिए IP65 रेटिंग के साथ-साथ मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी और SGS 5-स्टार ड्रॉप रेजिस्टेंस सर्टिफिकेशन भी मिलता है।

भारत में iQOO Z11 Lite की कीमत, रंग और उपलब्धता

iQOO Z11 Lite 5G के 4GB + 128GB वेरिएंट की शुरुआती कीमत ₹19,499 है, जबकि 6GB + 128GB मॉडल की कीमत ₹21,499 और 6GB + 256GB वर्शन की कीमत ₹24,499 है। वहीं, 1,500 रुपये के एलिजिबल बैंक ऑफर के साथ, इस फोन की शुरुआती कीमत घटकर ₹17,999 हो जाती है।

यह स्मार्टफोन 30 जुलाई से Amazon, iQOO इंडिया की वेबसाइट और अधिकृत रिटेल स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इच्छुक ग्राहक Solar Flame और Midnight Blue के कलर ऑप्शन में इसे चुन सकते हैं।

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Market Mantra : AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन महंगे,कैपिटल मार्केट शेयरों में आगे दिखेगी अच्छी तेजी – कैलाश कुलकर्णी

Market Mantra : इस समय बाजार एक दोराहे पर खड़ा है। कच्चा तेल है जिसने बाजार की सांस फूला रखी है। वहीं अबतक आए नतीजे हैं मिलेजुले होने के बाद कमेंट्री के फ्रंट पर अच्छे हैं। IT,बैंक और कंज्यूमर कंपनियां सब आगे की अच्छी राह की बात कर रही हैं। ऐसे में निवेशक कंफ्यूज है कि निवेश को लेकर आगे क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं। इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं। HSBC MF के CEO कैलाश कुलकर्णी (Kailash Kulkarni)।

कैलाश कुलकर्णी की राय

कैलाश कुलकर्णी का कहना है कि जियोपॉलिटिकल हालात के चलते बाजार में काफी ज्यादा अनिश्चितता है। पिछले कुछ सालों में भारतीय निवेशक मैच्योर हुए हैं। इसके चलते भारतीय निवेशकों की तरफ से पैनिक बिकवाली नहीं हुई है। निवेशकों अभी वेट एंड वॉच मोड में ही रहना चाहिए। भारतीय इकोनॉमी के हालात काफी बेहतर है।

डाइवर्सिफाइड इंडेक्स में बना पैसा

उन्होंने आगे कहा कि निवेशकों का पैसा डाइवर्सिफाइड इंडेक्स में बना है। निवेशक लार्जकैप की बजाय मिडकैप और स्मॉलकैप में पैसे डाल रहे हैं। फ्लैक्सीकैप कैटेगरी में काफी निवेश आ रहा है। मिडकैप की तरफ निवेशकों का रुझान बढ़ा है। इनमें रिटर्न भी अच्छे मिले हैं।

मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटाइजेशन थीम ज्यादा चल रही है। कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी थीम भी अच्छी चल रही है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के चलते आगे एक्सपोर्ट सेक्टर भी चल सकता है। PLI और चीन+1 के चलते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा होगा। देश के 8-10 राज्यों में मैन्युफैक्चरिंग हो रही है।

AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन ज्यादा

कैलाश कुलकर्णी ने आगे कहा कि AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन महंगे दिख रहे हैं। IT कंपनियों पर अंडरवेट नजरिया है। BFSI फंड में कैपिटल मार्केट शेयरों पर फोकस है। कैपिटल मार्केट शेयरों में आगे अच्छी तेजी दिखेगी। फार्मा शेयरों पर वेट एंड वॉच का नजरिया है।

Market Mantra : कैलाश कुलकर्णी के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटाइजेशन थीम ज्यादा चल रही है। कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी थीम भी अच्छी चल रही है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के चलते आगे एक्सपोर्ट सेक्टर भी चल सकता है

 

Top Stock Picks : बाजार में वेट एंड वॉच मोड में रहें, किसी गिरावट में इन फार्मा और डिफेंस शेयरों में करें खरीदारी

 

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ब्रेकअप के बाद एक्स को मनाने के लिए 3 लाख तक खर्च कर लव कोच हायर कर रहीं लड़कियां, ये तो नया ही ट्रेंड!

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में कई महिलाएं अपने एक्स-बॉयफ्रेंड को वापस पाने के लिए “रिलेशनशिप कोच” पर लाखों डॉलर खर्च कर रही हैं। एक मामले में, 28 साल की एक महिला ने अपने बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप के बाद एक महीने के कोचिंग प्रोग्राम के लिए 3,500 युआन ($500) दिए।

हालांकि उसने अपने कोच की सलाह को पूरी तरह से माना, लेकिन उसके एक्स-बॉयफ्रेंड ने उसे सभी मैसेजिंग ऐप्स पर ब्लॉक कर दिया। जब उसने कंपनी से उनके 90% सक्सेस रेट के दावे के बारे में पूछा, तो स्टाफ ने बस उसे “ज़्यादा अनुभवी” मेंटर वाला 9,800 युआन ($1,400) का पैकेज खरीदने के लिए दबाव डाला।

एक और मामले में, एक महिला ने एक ऐसे प्रोग्राम पर 20,000 युआन ($2,800) खर्च किए, जिसे “सम्मान के साथ सुलह” करने में मदद के लिए बनाया गया था। इसका मकसद अपने पूर्व पति को इस तरह से बहलाना-फुसलाना था कि वह खुद ही उसे वापस बुलाने के लिए कहे, ताकि दोस्तों के सामने उसकी इज़्ज़त पर कोई आंच न आए।

रिलेशनशिप एक्सपर्ट और मनोवैज्ञानिक इस इंडस्ट्री के बढ़ने की वजह लोगों की इमोशनल वीकनेस और भारी सामाजिक दबाव को मानते हैं, क्योंकि कई पारंपरिक परिवेशों में महिला की अहमियत और खुशी उसके रिश्ते या वैवाहिक स्थिति से जुड़ी होती है। अकेले रह जाने का डर बहुत ज़्यादा बेचैनी पैदा करता है।

इसके अलावा, गहरे इमोशनल दर्द से जूझ रहे लोग अक्सर असली थेरेपी के बजाय जल्दी और आसानी से पूरे होने वाले वादों को चुनते हैं, जबकि थेरेपी में समय और भावनात्मक मेहनत लगती है। आलोचकों ने चिंता जताई है, क्योंकि चीन में कंज्यूमर प्रोटेक्शन प्लेटफॉर्म्स को डेटिंग और कोचिंग सेवाओं के खिलाफ 3,000 से ज़्यादा औपचारिक शिकायतें मिली हैं। इनमें झूठे और गुमराह करने वाले विज्ञापनों और कोचों के पास असली प्रोफेशनल योग्यता न होने जैसी गंभीर बातें शामिल हैं।

भारी आर्थिक और भावनात्मक जोखिमों के बावजूद, मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स एक छोटा सा सकारात्मक बदलाव देख रहे हैं। ज़्यादा महिलाएं अब खराब रिश्तों को जबरदस्ती चलाने के बजाय उनसे बाहर निकल रही हैं और ब्रेकअप का इस्तेमाल खुद के विकास और लंबे समय की व्यक्तिगत खुशी के लिए कर रही हैं।