अमेरिका चीन और रूस से बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनी परमाणु नीति बदलने की तैयारी कर रहा है। NBC न्यूज के मुताबिक, पेंटागन ऐसी रणनीति बना रहा है, जिसमें बड़े परमाणु हथियारों के साथ छोटे एटम बम (टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार) भी इस्तेमाल का विकल्प होंगे। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल दुश्मन के सैन्य ठिकानों या सीमित युद्ध में किया जा सकेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस नई नीति पर पेंटागन के नीति प्रमुख एल्ब्रिज कोल्बी काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि अभी राष्ट्रपति के पास या तो बड़े परमाणु हमले का विकल्प है या फिर कोई जवाबी कार्रवाई नहीं करने का। नई रणनीति में बीच का रास्ता निकाला जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर छोटे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर दुश्मन को रोका जा सके। टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार क्या हैं? टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार कम क्षमता वाले परमाणु हथियार होते हैं। इन्हें पूरे शहर को तबाह करने के बजाय युद्ध के मैदान में दुश्मन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस, मिसाइल लॉन्च साइट, टैंक फॉर्मेशन या सैनिकों की तैनाती जैसे सीमित लक्ष्यों पर इस्तेमाल करने के लिए बनाया जाता है। अमेरिका नीति क्यों बदल रहा है? अमेरिका को लगता है कि अगर भविष्य में चीन या रूस से जंग हुई, तो सिर्फ बड़े परमाणु हमले का विकल्प काफी नहीं होगा। इसलिए वह छोटे एटम बमों को भी अपनी सैन्य योजना में शामिल करना चाहता है। उसका मानना है कि इससे दुश्मन पर दबाव बनेगा और जरूरत पड़ने पर सीमित जवाब देना आसान होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर छोटे एटम बम इस्तेमाल का विकल्प बन गए, तो उन्हें चलाने की संभावना भी बढ़ जाएगी। इससे कोई भी सामान्य जंग देखते-देखते परमाणु जंग में बदल सकती है। रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु हथियार रूस दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु जखीरा रखने वाला देश है। SIPRI और FAS के मुताबिक उसके पास 5,459 परमाणु हथियार हैं। अमेरिका 5,177 हथियारों के साथ दूसरे स्थान पर है। दोनों देशों के पास दुनिया के करीब 88% परमाणु हथियार हैं। वहीं, चीन के पास करीब 600 परमाणु हथियार हैं। संख्या में वह काफी पीछे है, लेकिन परमाणु हथियारों का जखीरा सबसे तेजी से वही बढ़ा रहा है। 1945 के बाद परमाणु हथियारों का इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ? द्वितीय विश्व युद्ध में अगस्त 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे। इसके बाद दुनिया ने परमाणु हथियारों की विनाशकारी क्षमता देखी। तभी से बड़ी परमाणु शक्तियों ने इन्हें युद्ध में चलाने के बजाय ‘न्यूक्लियर डिटरेंस’ (परमाणु प्रतिरोध) के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया। न्यूक्लियर डिटरेंस क्या है? इस रणनीति का मतलब है कि अगर कोई देश परमाणु हमला करेगा, तो जवाब में उसे भी उतना ही विनाशकारी परमाणु हमला झेलना पड़ेगा। यानी दोनों पक्षों को अस्वीकार्य नुकसान होगा। इसी डर ने अमेरिका, रूस समेत परमाणु शक्तियों को 1945 के बाद युद्ध में परमाणु हथियार इस्तेमाल करने से रोके रखा है।
Gift Nifty Indicator: शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स के सुस्त शुरुआत करने की संभावना है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, Wall Street में रात भर हुई गिरावट और US के अहम जॉब्स डेटा से पहले एशियाई बाजारों में सावधानी के माहौल के बीच GIFT Nifty आज सुबह गिरा। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर फिर से बनी अनिश्चितता के कारण जियोपॉलिटिकल जोखिम बने हुए हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी से कुछ सहारा मिल सकता है।
सुबह करीब 8 बजे GIFT Nifty 24,647 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले सेशन की क्लोजिंग से 101 अंक या 0.41 फीसदी नीचे था। हालांकि, यह गुरुवार को Nifty 50 की 24,636 की क्लोजिंग से थोड़ा ऊपर बना रहा, जिससे घरेलू बेंचमार्क के लिए फ्लैट से नेगेटिव शुरुआत का संकेत मिलता है।
गुरुवार को उतार-चढ़ाव भरे सेशन के बाद भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 373.76 अंक या 0.48 फीसदी बढ़कर 78,954.76 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 11.35 अंक या 0.05 फीसदी बढ़कर 24,636 पर बंद हुआ। PSU बैंकों में खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया, जबकि मेटल, मीडिया और रियल्टी शेयरों में कमजोरी ने बढ़त को सीमित कर दिया।
US जॉब्स डेटा से पहले एशियाई बाजार सर्तक
शुक्रवार को एशियाई शेयरों में सावधानी के साथ कारोबार हुआ क्योंकि निवेशक US के रोजगार डेटा का इंतजार कर रहे थे, जो अगले महीने फेडरल रिजर्व के ब्याज दर के फैसले पर उम्मीदों को प्रभावित कर सकता है। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स फ्लैट रहा और इसमें साप्ताहिक आधार पर 0.4 फीसदी की गिरावट की ओर बढ़ रहा था। जापान का Nikkei 225 0.9 फीसदी गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का Kospi 0.5 फीसदी नीचे आया। हालांकि, चीन के CSI 300 में 0.2 फीसदी की बढ़त हुई।
US इक्विटी फ्यूचर्स भी सुस्त रहे। Nasdaq फ्यूचर्स फ्लैट रहे और S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 फीसदी नीचे रहे। गुरुवार को US शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए क्योंकि निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली की, साथ ही वे कॉर्पोरेट नतीजों और US-ईरान संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों से जुड़े घटनाक्रमों का आकलन कर रहे थे। डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.85 फीसदी गिरा, S&P 500 में 0.18 फीसदी की गिरावट आई और नैस्डैक कम्पोजिट 0.06 फीसदी नीचे आया।
यह गिरावट हफ्ते की मजबूत शुरुआत के बाद आई है, जिसमें डाऊ और S&P 500 रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। इसकी वजह मजबूत अर्निंग्स सीज़न और मिडिल ईस्ट में चल रहे टकराव के संभावित डिप्लोमैटिक समाधान को लेकर उम्मीद थी।
क्रूड में उछाल
शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हुई क्योंकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से शिपिंग को लेकर अनिश्चितता फिर से सामने आ गई। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.2 प्रतिशत बढ़कर $83.48 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.1 प्रतिशत बढ़कर $78.84 हो गया। यह बढ़ोतरी गुरुवार को $3 प्रति बैरल से ज़्यादा की बढ़त के बाद हुई।
नई चिंताएं तब सामने आईं जब ईरान ने ओमान के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में दुश्मन माने जाने वाले जहाज़ों पर पाबंदियां लगाने और प्रस्तावित नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाज़ों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा।
निफ्टी-बैंक निफ्टी के लिए क्या है अहम लेवल
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि मिडिल ईस्ट में संभावित डिप्लोमैटिक सफलता को लेकर उम्मीदें किसी औपचारिक समझौते के न होने से कमज़ोर पड़ गई हैं, जिससे बाज़ार जियोपॉलिटिकल खबरों के प्रति संवेदनशील हो गए हैं। उन्होंने एशियाई इक्विटी में कमज़ोरी की ओर भी इशारा किया, जिसमें जापान और दक्षिण कोरिया ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी, जो ग्लोबल निवेशकों के बीच लगातार सावधानी का संकेत है।
पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी का व्यापक टेक्निकल स्ट्रक्चर सकारात्मक बना हुआ है। 24,700 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है, और अगर यह स्तर लगातार टूटता है तो 24,800-25,000 की ओर मोमेंटम मज़बूत हो सकता है। नीचे की तरफ, 24,600 तत्काल सपोर्ट है, उसके बाद 24,500 है।
Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत
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दिल्ली में हुमायूं का मकबरा मानसून के मौसम में और भी खूबसूरत दिखाई देता है। बारिश के बाद चारों ओर फैले चारबाग बगीचे हरियाली से भर जाते हैं और लाल बलुआ पत्थर से बना यह ऐतिहासिक स्मारक बिल्कुल नया-सा नजर आता है। हल्के बादल और ठंडी हवा यहां घूमने का एक्सपीरियंस और भी खास बना देते हैं। इतिहास, फोटोग्राफी या शांत माहौल पसंद करने वालों के लिए मानसून में यह जगह परफेक्ट है।

महाराष्ट्र की सह्याद्रि पहाड़ियों के बीच बनी अजंता की गुफाएं बारिश के मौसम में किसी जादुई दुनिया जैसी लगती हैं। मानसून के दौरान आसपास छोटे-छोटे झरने बहने लगते हैं और हर तरफ हरियाली छा जाती है। बौद्ध कला और प्राचीन चित्रों से सजी ये गुफाएं प्रकृति के बीच और भी अट्रैक्टिव दिखाई देती हैं। यहां इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता एक साथ देखने को मिलती है।
बेकल किला, केरल (Bekal Fort, Kerala)

केरल के समुद्र किनारे बना बेकल किला मानसून में बेहद खूबसूरत नजर आता है। एक तरफ अरब सागर की ऊंची लहरें और दूसरी तरफ बारिश से भीगी किले की दीवारें इस जगह की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देती हैं। ठंडी हवा, समुद्र का नजारा और हरियाली यहां आने वाले टूरिस्ट को यादगार एक्सपीरियंस देते हैं। फोटोग्राफी के लिए भी यह जगह शानदार मानी जाती है।
मांडू किला, मध्य प्रदेश (Mandu Fort, Madhya Pradesh)

मध्य प्रदेश का मांडू मानसून के दौरान पूरी तरह हरियाली से ढक जाता है। जहाज महल, हिंडोला महल, प्राचीन बावड़ियां और पुराने महल बारिश के मौसम में और भी अट्रैक्टिव दिखाई देते हैं। बादलों से घिरी पहाड़ियां और ठंडी हवाएं इस ऐतिहासिक शहर की खूबसूरती में चार चांद लगा देती हैं। इतिहास और प्रकृति का आनंद एक साथ लेना चाहते हैं, तो मांडू बेहतरीन जगह है।
कोणार्क सूर्य मंदिर, ओडिशा (Konark Sun Temple, Odisha)

ओडिशा का प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर मानसून में और भी भव्य दिखाई देता है। बारिश के बाद मंदिर के आसपास फैली हरियाली और बादलों से भरा आसमान इसकी खूबसूरत पत्थर की नक्काशी को और उभार देता है। यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल यह मंदिर भारतीय वास्तुकला का शानदार उदाहरण है। बारिश के मौसम में यहां घूमने का अलग ही एक्सपीरियंस मिलता है।
चित्तौड़गढ़ किला, राजस्थान (Chittorgarh Fort, Rajasthan)

राजस्थान का चित्तौड़गढ़ किला मानसून के दौरान बिल्कुल अलग रूप में नजर आता है। बारिश के बाद सूखी पहाड़ियां और मैदान हरियाली से भर जाते हैं, जिससे विशाल किला और भी आकर्षक दिखने लगता है। किले के भीतर बने महल, मंदिर और जलाशय इस मौसम में देखने लायक होते हैं। यहां से आसपास का नजारा भी खूबसूरत दिखाई देता है।
कर्नाटक के विजयपुरा में गोल गुंबद मानसून के मौसम में बेहद खूबसूरत लगता है। काले बादलों में विशाल गुंबद और भी शानदार दिखाई देता है। बारिश के बाद आसपास के बगीचे हरे-भरे हो जाते हैं, जिससे पूरा परिसर ताजगी से भर जाता है। इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का यह अनोखा स्मारक इतिहास प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए मानसून में घूमने की बेहतरीन जगह है।

अमेरिका में ट्रम्प सरकार की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी का सबसे बड़ा असर भारतीय छात्रों पर दिख रहा है। 2025 में भारतीय छात्रों को मिलने वाले F-1 स्टूडेंट वीजा में बड़ी गिरावट आई है। वहीं, पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के छात्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा स्टूडेंट वीजा मिले हैं। सिर्फ छात्रों पर ही नहीं, सख्ती का असर अमेरिका में रहने वाले अप्रवासियों की संख्या पर भी दिखा है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2025 में अमेरिका में अप्रवासियों की संख्या रिकॉर्ड 5.33 करोड़ थी, जो जून तक घटकर 5.19 करोड़ रह गई। 1960 के दशक के बाद यह पहली बार है, जब अमेरिका में अप्रवासियों की संख्या कम हुई है। भारतीय स्टूडेंट्स को मिलने वाले अमेरिकी वीजा 62% घटे सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (CIS) के मुताबिक, मई से अगस्त के बीच जब एडमिशन पीक पर होता है तब 2025 में भारतीय छात्रों को पिछले साल के मुकाबले 62% कम वीजा मिले। चीनी छात्रों को भी 2025 में 34% कम वीजा मिले। वहीं कई दूसरे एशियाई देशों के छात्रों की संख्या बढ़ी है। 2025 की पहली छमाही में वियतनाम के छात्रों को 5,324 F-1 वीजा मिले, जो पिछले साल से 19.6% ज्यादा हैं। इसी दौरान बांग्लादेश के छात्रों को 2,098 F-1 वीजा मिले, यानी 20.1% की बढ़ोतरी हुई। पाकिस्तान के छात्रों को 1,928 वीजा मिले, जो 44.3% ज्यादा हैं। ट्रम्प सरकार ने वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया स्क्रीनिंग की वीजा में आई इस गिरावट की एक बड़ी वजह ट्रम्प सरकार के नए नियम रहे। जैसे- अमेरिका की जगह यूरोप का रुख कर रहे हैं भारतीय छात्र कई भारतीय छात्र अब यूरोप का रुख कर रहे हैं। जर्मनी, फ्रांस, आयरलैंड, इटली और नीदरलैंड जैसे देश भारतीय छात्रों की नई पसंद बन रहे हैं। इसकी वजह कम फीस, आसान वीजा प्रक्रिया और पढ़ाई के बाद नौकरी के बेहतर मौके हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, यूरोप की कई यूनिवर्सिटीज की फीस अमेरिकी यूनिवर्सिटीज से 50% से 80% तक कम होती है। 2015 से 2023 के बीच यूरोप जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 45% बढ़ी, जबकि जर्मनी, फ्रांस, इटली और आयरलैंड में भारतीय छात्रों का दाखिला 68% बढ़ा। वहीं, कुछ भारतीय प्रोफेशनल भी वीजा नियमों और नौकरी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत लौटने या दूसरे देशों का रुख करने लगे हैं। H-1B वीजा में अब भी भारत सबसे आगे स्टूडेंट वीजा में गिरावट के बावजूद नौकरी के लिए मिलने वाले H-1B वर्क वीजा में भारत की पकड़ अब भी सबसे मजबूत है। 2024 में जारी H-1B वीजा में 71% भारतीयों को मिले। चीन दूसरे स्थान पर रहा, जबकि फिलीपींस, कनाडा और साउथ कोरिया की हिस्सेदारी करीब 1-1% रही। यानी, स्टूडेंट वीजा घटे हैं, लेकिन नौकरी के लिए भारतीय प्रोफेशनल्स की मांग अब भी सबसे ज्यादा है। अमेरिका अब भी सबसे बड़ा प्रवासी देश सख्त नियमों और वीजा में गिरावट के बावजूद अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा प्रवासी देश बना हुआ है। बेहतर शिक्षा, नौकरी और कमाई के मौके आज भी लाखों लोगों को अमेरिका की ओर आकर्षित करते हैं। 2023 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में सबसे ज्यादा 1.1 करोड़ प्रवासी मेक्सिको से हैं। इसके बाद भारत (32 लाख), चीन (30 लाख), फिलीपींस (21 लाख) और क्यूबा (17 लाख) का स्थान है। प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, अमेरिका में रहने वाले कुल प्रवासियों में 52% लैटिन अमेरिका और 27% एशिया से हैं। यानी, अमेरिका की प्रवासी आबादी में एशियाई देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में वीजा नियमों में होने वाले बदलाव का असर भारत, चीन और दूसरे एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। अमेरिका में विदेशी टूरिस्टों की भी संख्या घटी अमेरिका आने वाले विदेशी टूरिस्टों की संख्या भी घटी है। 2025 में करीब 6.83 करोड़ विदेशी टूरिस्ट अमेरिका पहुंचे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 7.23 करोड़ था। टूरिस्टों के खर्च में भी 8 अरब डॉलर से ज्यादा की कमी आई। सबसे ज्यादा गिरावट कनाडा से आने वाले टूरिस्टों में रही। भारत, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और चीन से आने वाले टूरिस्टों की संख्या भी कम हुई, जबकि मेक्सिको से आने वाले टूरिस्ट बढ़े। यानी, ट्रम्प सरकार की सख्ती का असर सिर्फ स्टूडेंट वीजा ही नहीं, बल्कि इमिग्रेशन और विदेशी टूरिज्म पर भी साफ दिख रहा है।
Vivo ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन Vivo S2 आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह फोन कंपनी की फ्लैगशिप X-सीरीज के नीचे रखा गया है। इस फोन में आपको कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले, बड़ी 7050mAh बैटरी और MediaTek का नया Dimensity 7360-Turbo प्रोसेसर दिया गया है। अब आइए इस फोन की कीमत, स्पेसिफिकेशन, लॉन्च ऑफर और उपलब्धता से जुड़ी सभी जानकारी के बारे में जानते हैं।
Vivo S2 के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स
चीनी कंपनी Vivo S2 में 6.83-इंच का 1.5K 3D कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट, HDR10+ और 3,000 निट्स तक की लोकल पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है। इस स्मार्टफोन में 4nm प्रोसेस पर बना MediaTek Dimensity 7360-Turbo चिपसेट दिया गया है, साथ ही इसमें 8GB RAM और 256GB तक का स्टोरेज ऑप्शन मिलता है। इसके अलावा, इस हैंडसेट में 44W सपोर्ट वाली 7050mAh की बैटरी है और यह Android 16 पर आधारित OriginOS 6 पर चलता है।
कैमरे की बात करें तो, इस फोन में 50MP का Sony प्राइमरी रियर कैमरा और 32MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है। दोनों कैमरे 4K वीडियो रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करते हैं। कैमरे के अन्य फीचर्स में AI Erase 2.0, पोर्ट्रेट मोड, नाइट मोड, सुपरमून, डुअल व्यू वीडियो, टाइम-लैप्स और प्रो मोड शामिल हैं।
चीन की यह टेक कंपनी अपने इस हैंडसेट में IP68 और IP69 रेटिंग, मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी, स्टीरियो स्पीकर, Google Gemini इंटीग्रेशन, Circle to Search, AI Smart Call Assistant, AI Captions, Super Documents, Private Space और Vivo Office Kit जैसे फीचर्स भी देती है।
Vivo S2 की कीमत, ऑफर, कलर और उपलब्धता
भारत में Vivo S2 Silk White, Sapphire Blue और Regal Bronze कलर ऑप्शन में उपलब्ध है। इसके 8GB + 128GB वेरिएंट की कीमत ₹39,999 है, जबकि 8GB + 256GB वर्जन की कीमत ₹49,999 है। इसकी बिक्री 11 अगस्त से Vivo के ऑफिशियल ऑनलाइन स्टोर, Flipkart, Amazon और देश भर के ऑथराइज्ड रिटेल आउटलेट्स पर शुरू होगी।
लॉन्च ऑफर के तहत, इच्छुक ग्राहक चुनिंदा बैंक कार्ड पर 10% तक का इंस्टेंट कैशबैक, एक्सचेंज बोनस, डिस्काउंटेड V-शील्ड प्रोटेक्शन प्लान, एक साल की एक्सटेंडेड वारंटी और Jio के फायदे पा सकते हैं। वहीं, इन फायदों में 18 महीने के लिए 5TB क्लाउड स्टोरेज और Google Gemini Pro का एक्सेस शामिल है।
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कुकर में स्टीम
अब प्रेशर कुकर में थोड़ा पानी डालें और उसके अंदर साबूदाने वाला डिब्बा रख दें। चाहें तो साथ में दो आलू भी रख सकते हैं, ताकि वे भी एक साथ उबल जाएं। कुकर का ढक्कन बंद करें और मध्यम आंच पर 3 सीटी आने तक पकाएं। इसके बाद गैस बंद कर दें और कुकर का प्रेशर अपने आप निकलने दें। इस तरीके से साबूदाना बिना भिगोए भी अच्छी तरह पक जाता है।
ठंडे पानी की ट्रिक
स्टीम होने के बाद साबूदाना थोड़ा चिपचिपा लग सकता है। इसे छलनी में निकालकर ऊपर से ठंडा पानी डालें और बहुत हल्के हाथ से धो लें। यह आसान ट्रिक साबूदाने के दानों को अलग-अलग कर देती है, जिससे खिचड़ी बनाते समय वह चिपकती नहीं और बिल्कुल खिली-खिली बनती है।
तड़का लगाएं
अब एक कड़ाही में देसी घी गर्म करें और उसमें जीरा डालें। इसके बाद बारीक कटी हरी मिर्च, कद्दूकस किया हुआ अदरक और व्रत में खाते हैं तो थोड़ा बारीक कटा टमाटर डालकर हल्का भून लें। फिर उबले हुए आलू के टुकड़े डालें। अब तैयार किया हुआ साबूदाना, सेंधा नमक, दरदरी काली मिर्च, चुटकी भर चीनी और भुनी हुई मूंगफली डालकर हल्के हाथ से मिलाएं, ताकि दाने टूटें नहीं। खिचड़ी तैयार होने के बाद ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया, थोड़ा नींबू का रस और चाहें तो भुना जीरा पाउडर छिड़क दें। इससे खिचड़ी का स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं। ध्यान रखें कि खिचड़ी को ज्यादा देर तक न चलाएं, वरना साबूदाना टूट सकता है और चिपचिपा हो सकता है।
पौष्टिक आहार
साबूदाना शरीर को जल्दी एनर्जी देने वाला सोर्स है। जब इसमें मूंगफली, आलू और देसी घी मिलाया जाता है, तो यह ज्यादा पौष्टिक और पेट भरने वाला भोजन बन जाता है। इसलिए सावन, एकादशी या अन्य व्रत के दौरान यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में भी मदद करता है।
Aaban Ahmed News: माफिया एवं पूर्व सांसद अतीक अहमद के छोटे बेटे आबान समेत दो लोगों की गुरुवार (6 अगस्त) को उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में एक सड़क हादसे में मौत हो गई। इस घटना में कार सवार तीन अन्य लोग भी घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक (देहात) अरविंद कुमार ने बताया कि पूर्व सांसद अतीक अहमद का बेटा आबान अहमद अपने कुछ साथियों के साथ झांसी जेल में बंद अपने भाइयों से मिलने जा रहा था। इस दौरान रास्ते में पुंछ थाना में झांसी-कानपुर नेशनल हाईवे पर उसकी तेज रफ्तार कार बेकाबू होकर एक डिवाइडर से टकराकर पलट गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SP) बीबीजीटीएस मूर्ति ने पत्रकारों को बताया कि इस हादसे में 21 वर्षीय आबान अहमद और उसके दोस्त सोनू (26) की मौत हो गई। जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए जिनका मेडिकल कॉलेज में इलाज किया जा रहा है। मूर्ति ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आबान अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलने के लिए झांसी जेल गया था। वहां से लौटते वक्त तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। कार का अलग हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि गाड़ी में कुल 5 लोग थे। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हादसे के दौरान आबान और उसके एक साथी सोनू की मौत हो गई। इसी झांसी में अतीक अहमद के तीसरे नंबर वाले बेटे असद अहमद की भी एनकाउंटर में मौत हुई थी। अतीक के कुल 5 बेटे थे। इनमें से अब दो की मौत हो चुकी है। जबकि दो बेटे जेल में बंद है। अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन अभी भी फरार चल रही है। उनके ऊपर यूपी पुलिस ने 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया है।
अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ अहमद की 15 अप्रैल 2023 की रात प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना उस समय हुई जब पुलिस दोनों को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जा रही थी। हमलावर मीडिया कर्मी बनकर पहुंचे थे। पुलिस सुरक्षा के बीच उन्होंने दोनों पर नजदीक से गोलियां चला दीं। तीनों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
#WATCH | Jhansi | Two dead and three injured following a road accident in the Poonch police station area of Jhansi; Deceased mafia Atiq Ahmed’s son Aaban and his friend Sonu also lost his life in the accident
(Visuals of the injured being brought to the hospital) pic.twitter.com/UEeR0VcEH6
— ANI (@ANI) August 6, 2026
इसके अलावा अतीक अहमद के बेटे असद अहमद का 13 अप्रैल 2023 को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने झांसी में मुठभेड़ (एनकाउंटर) में मार गिराया था। उस पर उमेश पाल हत्याकांड में शामिल होने का आरोप था। अब यूपी पुलिस को अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन की तलाश है।
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भारत के आयुष शेट्टी इस महीने के आखिर में शुरू होने वाली 2026 BWF विश्व चैंपियनशिप के पहले ही राउंड में दुनिया के नंबर 1 खिलाड़ी चीन के शि यू की से भिड़ेंगे। यह बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप का दूसरा सीधा एडिशन है, जहां पिछले साल लक्ष्य सेन के चीनी खिलाड़ीसे भिड़ने के बाद एक भारतीय खिलाड़ी पहले राउंड में शि से भिड़ेगा।
14वीं वरीयता प्राप्त, 2021 विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता का हालांकि, राउंड ऑफ़ 16 में सामना थाईलैंड के पूर्व विश्व चैंपियन और तीन बार के मेडलिस्ट कुनलावुत विटिडसार्न से हो सकता है।
महिला एकल में, पीवी सिंधु को दक्षिण कोरिया की विश्व नंबर 1 एन से यंग के साथ एक ही हाफ में रखा गया है, लेकिन सेमीफाइनल से पहले उनका सामना उनसे नहीं होगा। सिंधु आयरलैंड की सोफिया नोबल के खिलाफ शुरुआत करेंगी, जिसके बाद उनका राउंड ऑफ़ 16 में चीन की वांग ज़ी यी के खिलाफ और क्वार्टर फाइनल में इंडोनेशिया की पुत्री कुसुमा वार्डिनी के खिलाफ मुकाबला हो सकता है, ये दो मुश्किल मुकाबले हो सकते हैं।
विमेंस सिंगल्स में दूसरी भारतीय उन्नति हुड्डा पहले राउंड में म्यांमार की थेट थुजार के खिलाफ शुरुआत करेंगी। मेंस डबल्स में, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी चोट के कारण बाहर रहने के बाद वापसी करेंगे।

पांचवीं वरीयता प्राप्त रंकीरेड्डी-शेट्टी को पहले राउंड में बाई मिलेगी, ठीक वैसे ही जैसे डबल्स ड्रॉ में सभी वरीय खिलाड़ियों को मिलती है। हालांकि, हरिहरन अमसकरुआनन और अर्जुन एमआर राउंड 1 में आयरलैंड के स्कॉट गिल्डिया और पॉल रेनॉल्ड्स के खिलाफ शुरुआत करेंगे।
भारत के पास महिला डबल्स में कोई वरीय जोड़ी नहीं होगी, हालांकि ट्रीसा जॉली-गायत्री गोपीचंद और कविप्रिया सेल्वम-सिमरन सिंघी दोनों ही मुकाबले में होंगी, जो अपने अभियान की शुरुआत पहले राउंड में स्पेन की दो अलग-अलग जोड़ियों के खिलाफ करेंगी।मिक्स्ड डबल्स में, तनीषा क्रैस्टो और ध्रुव कपिला को पहले राउंड में बाई मिली है, जबकि रुथविका गड्डे और रोहन कपूर का मुकाबला कनाडा के जोनाथन बिंग-क्रिस्टल लाई से होगा।
Pakistan News: भारत और पाकिस्तान की समुद्री सीमा पर स्थित स्ट्रैटिजकली काफी सेंसेटिव सर क्रीक क्षेत्र के पास पाकिस्तान अपनी नौसैनिक और सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बना रहा है। हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘फर्स्टपोस्ट’ की रिपोर्ट में ‘CNN-न्यूज18’ के हवाले से बताया गया है कि टॉप पॉकिस्तानी सोर्सेज के जरिए ये जानकारी सामने आई है। ये पता चला है कि यह पूरा सैन्य विस्तार पाकिस्तान के एक नए प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिसे अबाबील- द डिवाइन स्ट्राइक नाम दिया गया है। सर क्रीक और उससे लगे इलाकों में पाकिस्तान की इन नई गतिविधियों की वजह से समुद्री सीमा पर सुरक्षा जोखिम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
‘अबाबील’ प्रोजेक्ट के तहत SSG-N कमांडोज की तैनाती
सीएनएन-न्यूज18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान नौसेना ने अपने प्रोजेक्ट अबाबील के तहत सर क्रीक इलाके में नेवल स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG-N) के विशेष कमांडोज को तैनात किया है। एसएसजी-एन पाकिस्तान की एक प्रमुख मैरिटाइम स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स है। ये समंदर के साथ हवा और जमीन तीनों माध्यमों से बेहद जोखिम भरे सैन्य अभियानों को अंजाम देने के लिए प्रशिक्षित की जाती है।
तुर्की के ड्रोन और चीन के आधुनिक होवरक्राफ्ट से बढ़ा तनाव
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान इस क्षेत्र में तुर्की में निर्मित आधुनिक ड्रोन, चीन के आधुनिक होवरक्राफ्ट और हाई स्पीड वाली नौसैनिक नौकाओं की तैनाती कर रहा है। वहां आधुनिक रॉकेट और एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किए जा रहे हैं। सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि पाकिस्तान द्वारा तैनात किए जा रहे तुर्की के ये ड्रोन विस्फोटक सामग्री ले जाने में पूरी तरह सक्षम हैं और इनका इस्तेमाल हवाई निगरानी के लिए भी किया जा सकता है। अबाबील प्रोजेक्ट के तहत एक उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम भी शामिल किया गया है। ये सर क्रीक और अरब सागर क्षेत्र में पाकिस्तान थलसेना की नई गठित रॉकेट फोर्स के साथ कोआर्डिनेशन में काम करेगा।
चीन और तुर्की की मदद से भारतीय नौसेना को चुनौती देने की कोशिश
सीएनएन-न्यूज18 को अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सर क्रीक और अरब सागर में भारत की नौसैनिक मौजूदगी को चुनौती देने के इरादे से पाकिस्तान ने अपने समुद्री अभियानों में मानवरहित एरियल और समुद्री ड्रोनों को शामिल किया है। इसमें चीन और तुर्की की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। ये दोनों देश मॉडर्न सैन्य उपकरण और तकनीक की आपूर्ति करके पाकिस्तान के सशस्त्र बलों के मॉडर्नाइजेशन में मदद कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने पाकिस्तान को अपनी पहली हैंगोर-क्लास पनडुब्बी सौंप दी है। सूत्र का कहना है कि इससे अरब सागर में पाकिस्तान की स्टेल्थ क्षमता और सेकेंड-स्ट्राइक क्षमता में काफी इजाफा होगा। इसके अलावा इस्लामाबाद ने अपने नौसेना बेड़े को आधुनिक बनाते हुए चीन निर्मित हाई एंड तुगरिल-क्लास युद्धपोतों को भी शामिल किया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि सर क्रीक और अरब सागर के तटीय इलाकों में दर्जनों तटीय रक्षा नौकाएं, मरीन असॉल्ट क्राफ्ट, होवरक्राफ्ट, नौसैनिक जहाज और तेज गति वाली गश्ती नौकाएं तैनात की गई हैं। इसके साथ ही इस पूरे क्षेत्र में नौसैनिक गश्त को भी काफी बढ़ा दिया गया है।
फील्ड मार्शल असीम मुनीर की यूनिफाइड कमान में चल रहा मॉडर्नाइजेशन
सीएनएन-न्यूज18 के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल असीम मुनीर के अंडर में यूनिफाइड कमान के तहत पाकिस्तान की थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बड़े पैमाने पर मॉडर्नाइजेशन का काम चल रहा है। इसी साल की शुरुआत में मुनीर ने तीनों सेनाओं के अभियानों को एक साथ जोड़ने और बाहरी खतरों के खिलाफ पाकिस्तान की ओवरऑल डिटर्जेंस कैपेबिलिटी को मजबूत करने के मकसद से नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड की स्थापना की थी।
Lucky Rawat North Pole expedition: महज 17 साल की उम्र में चकराता, उत्तराखंड के लकी रावत उत्तरी ध्रुव की 10 दिनों की यात्रा पर पा जा रहे हैं। इस यात्रा के लिए लकी का चुनाव तीन चरणों की प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के बाद किया गया है। यहां वह साइंस और कल्चरल गतिविधियों में 22 देशों के 14 से 16 की उम्र के बच्चों के साथ शामिल होंगे। लकी रावत ‘आइसब्रेकर ऑफ नॉलेज’ में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है। नॉर्थ पोल के लिए यह 10 दिन का अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक और शैक्षिक खोज यात्रा है।
रूस के मरमांस्क से शुरू हुए इस एक्सपीडिशन में इंडिया, बांग्लादेश, चीन और रूस के छात्र एक साथ आए हैं। पार्टिसिपेंट्स न्यूक्लियर आइसब्रेकर 50 लेट पोबेडी पर सवार होकर ज्योग्राफिक नॉर्थ पोल (90° नॉर्थ लैटीट्यूड) जा रहे हैं। यहां वे विज्ञान आधारित सीखने की गतिविधियों और सांस्कृति आदान-प्रदान कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। लकी के लिए, यह सफर सिर्फ एक ट्रिप नहीं है। यह वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के साथ सीखने का मौका है।
लकी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि उन्हें इस एक्सपीडिशन के लिए चुने जाने पर गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा, “मैं उत्तराखंड के चकराता से हूं और इस एक्सपीडिशन के लिए भारत के दूत के तौर पर यहां आया हूं। यह 10 दिन का एक्सपीडिशन है, जिसमें हम नॉर्थ पोल जाएंगे। हम उन बहुत कम लोगों में से होंगे जो असल में नॉर्थ पोल पहुंचे हैं।”
इस एक्सपीडीशन की चयन प्रक्रिया काफी मुश्किल थी। लकी ने कहा कि छात्रों को तीन चरणों प्रतियोगिता को पार करना था, जिसके बाद हर हिस्सा लेने वाले देश से एक छात्र को अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया। उन्होंने कहा, “तीन स्टेज का कॉम्पिटिशन क्लियर करने के बाद हर देश से एक छात्र को अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया।”
उनके पिता, राम सिंह ने इस सिलेक्शन को परिवार के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने एएनआई को बताया, “मुझे अपने बेटे पर गर्व है कि उसने ऑनलाइन एग्जाम क्लियर किया और इंडिया को रिप्रेजेंट करने के लिए चुना गया। वह नॉर्थ पोल के लिए 10 दिन के एक्सपीडिशन पर जा रहा है।”
क्या है आइसब्रेकर ऑफ नॉलेज
‘आइसब्रेकर ऑफ नॉलेज’ एक अंतरराष्ट्रीय पहल है जिसका मकसद छात्रों में विज्ञान में दिलचस्पी जगाना है। साथ ही, कल्चरल एक्सचेंज और आर्कटिक के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना है। यह प्रोग्राम युवा भागीदारों को दुनिया के सबसे दूर-दराज के इलाकों में से एक में जिंदगी का अनुभव करने और दुनिया भर के साथियों से बातचीत करने का मौका देता है। लकी की यह कामयाबी न सिर्फ उनके परिवार और उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह इस बात का भी उदाहरण है कि कैसे भारतीय छात्र अपने टैलेंट, कड़ी मेहनत और पक्के इरादे से इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर पहचान बना रहे हैं।

