Stocks to Buy: ये 5 स्टॉक 40% तक रिटर्न दे सकते हैं, एक्सपर्ट्स ने दांव लगाने की सलाह दी

Stocks to Buy: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कई दिग्गज ब्रोकरेज हाउस चुनिंदा शेयरों को लेकर बुलिश हैं। Morgan Stanley, HSBC, Motilal Oswal, Nuvama और JM Financial ने पांच कंपनियों पर खरीदारी की सलाह दी है। इनके मुताबिक, अगले 12 महीनों में ये शेयर करीब 24% से 40% तक का रिटर्न दे सकते हैं। आइए जानते हैं किन शेयरों पर एक्सपर्ट्स सबसे ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।

PNB Housing Finance

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी PNB Housing Finance पर Morgan Stanley ने ‘Overweight’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,420 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 1,143 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 24.2% की रिटर्न संभावित तेजी का अनुमान है। ब्रोकरेज के मुताबिक, मजबूत रिटेल लोन डिस्बर्समेंट और बेहतर लोन ग्रोथ कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

Britannia

FMCG कंपनी Britannia पर Nuvama ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 7,240 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 5,508 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 31.4% उछाल की उम्मीद है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की ग्रोथ मजबूत बनी हुई है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया का तनाव प्रमुख जोखिम हैं।

Hindalco Industries

मेटल कंपनी Hindalco Industries पर HSBC ने ‘Buy’ रेटिंग के साथ 1,430 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 1,053.50 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 35.7% की तेजी का अनुमान है। ब्रोकरेज का कहना है कि एल्यूमिनियम की मजबूत वैश्विक मांग और चीन की उत्पादन सीमा कंपनी के लिए सकारात्मक रहेगी।

Time Technoplast

प्लास्टिक प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनी Time Technoplast पर Motilal Oswal ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 280 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 205.50 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 36.3% रिटर्न की संभावना है। ब्रोकरेज का मानना है कि पैकेजिंग और कम्पोजिट सिलेंडर बिजनेस में विस्तार के दम पर लगातार मजबूत रेवेन्यू और मुनाफे की ग्रोथ दर्ज कर सकती है।

Ventive Hospitality

हॉस्पिटैलिटी कंपनी Ventive Hospitality पर JM Financial ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 840 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 603.20 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 40% की संभावित तेजी बनती है। ब्रोकरेज का मानना है कि हालिया लागत का दबाव अस्थायी है और लंबी अवधि में कंपनी की ग्रोथ मजबूत रह सकती है।

Nifty Outlook: 10 अगस्त को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, एक्सपर्ट्स से जानिए

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty Outlook: 10 अगस्त को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, एक्सपर्ट्स से जानिए

Nifty Outlook: पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र भी शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निफ्टी 50 शुरुआती गिरावट से उबरने की कोशिश जरूर करता दिखा, लेकिन यह तेजी टिक नहीं सकी। आखिर में इंडेक्स 65 अंक यानी 0.3% गिरकर 24,570 पर बंद हुआ। कमजोर वैश्विक संकेतों और हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली का असर बाजार पर दिखा।

अब सोमवार, 10 अगस्त से शुरू हो रहे हफ्ते में निफ्टी की चाल कैसी रहेगी? कौन से लेवल अहम रहेंगे? इसे एक्सपर्ट्स से समझेंगे। लेकिन, पहले जान लेते हैं कि शुक्रवार को बाजार में क्या खास हुआ था।

किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल?

निफ्टी 50 में Grasim, TCS और Hindalco सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयर रहे। वहीं Bajaj Finance, Bajaj Finserv और Trent में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो ऑटो, आईटी और PSU बैंक सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सेक्टर रहे। वहीं फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक और केमिकल सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Nifty Midcap 100 में 0.22% की बढ़त रही। Nifty Smallcap 100 0.05% फिसल गया।

अगले हफ्ते किन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर?

Motilal Oswal के रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि अगले हफ्ते भारतीय बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है। इसकी वजह मजबूत घरेलू आर्थिक संकेत, भू-राजनीतिक तनाव में कमी और तिमाही नतीजों का अंतिम दौर हो सकता है। हालांकि, शेयरों में खबरों के आधार पर शेयरों में हलचल बनी रह सकती है।

 

इन आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर

अगले हफ्ते निवेशकों की नजर कई अहम घरेलू और वैश्विक आंकड़ों पर रहेगी। इनमें भारत के CPI और WPI महंगाई के आंकड़े, जून तिमाही के नतीजे अहम रहेंगे। साथ ही, अमेरिका के CPI और PPI महंगाई के आंकड़े, OPEC की मासिक ऑयल मार्केट रिपोर्ट और चीन के इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन व रिटेल सेल्स के आंकड़े भी आएंगे।

निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, निफ्टी का रुझान फिलहाल कमजोर जरूर है। हालांकि, इंडेक्स 24,400-24,300 के अहम सपोर्ट जोन के ऊपर बना हुआ है। यह स्तर पहले रेजिस्टेंस था और अब सपोर्ट की तरह काम कर रहा है। उनके मुताबिक, अगर निफ्टी इस स्तर तक फिसलता है तो यह खरीदारी का मौका हो सकता है। वहीं, ट्रेंड बदलने के लिए 24,700 के ऊपर निकलना जरूरी होगा।

Angel One के हितेश राठी के अनुसार, निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 24,450-24,350 के बीच है। इसके नीचे 24,000 बड़ा सपोर्ट रहेगा। वहीं, ऊपर की ओर 24,650-24,750 पहला रेजिस्टेंस और 24,800-24,850 अगला अहम स्तर होगा।

HDFC Securities के नंदीश शाह का कहना है कि पिछले तीन कारोबारी सत्रों से निफ्टी 24,400-24,700 के दायरे में कारोबार कर रहा है। इंडेक्स अभी भी अपने सभी प्रमुख मूविंग एवरेज के ऊपर है, इसलिए लंबी अवधि का ट्रेंड अब भी सकारात्मक बना हुआ है। उनके मुताबिक, ऊपर की ओर 24,770 और 25,000 रेजिस्टेंस रहेंगे। वहीं, गिरावट पर 24,430-24,380 का दायरा सपोर्ट देगा।

बैंक निफ्टी पर क्या राय है?

 

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक, पिछले पांच कारोबारी सत्रों से बैंक निफ्टी 58,248-57,353 के दायरे में कारोबार कर रहा है। इसके बावजूद इंडेक्स अभी भी अपने 20-डे EMA के ऊपर बना हुआ है।

उनके मुताबिक, ऊपर की ओर 58,200-58,300 का दायरा अहम रेजिस्टेंस है। इसके ऊपर निकलने पर बैंक निफ्टी 58,700 और फिर 59,100 तक जा सकता है। वहीं, नीचे की ओर 57,300-57,200 का दायरा मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।

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FMCG Price Hikes: महंगा होगा तेल, साबुन, चॉकलेट? Britannia, Dabur, और HUL समेत छह कंपनियों की ये है तैयारी

FMCG Price Hikes: एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के भाव बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। यह बढ़ोतरी इसी तिमाही में हो सकती है। इसकी वजह ये है कि कमोडिटी की बढ़ती लागत यानी कच्चे माल के महंगे होने और जियो-पॉलिटिकल लेवल पर अनिश्चितताओं के चलते कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां मांग को लेकर अभी भी पॉजिटिव बनी हुई हैं। उनका कहना है कि खपत मजबूत बनी हुई है, प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है और रेवेन्यू ग्रोथ में सुधार हो रहा है। इससे पहले जून तिमाही में एफएमसीजी सेक्टर ने औसतन 2-5% तक भाव बढ़ाए थे।

कंपनियां मार्जिन बचाने के लिए कुछ चीजों के दाम बढ़ाने के अलावा श्रिंकफ्लेशन का भी सहारा ले रही है। श्रिंकफ्लेशन का मतलब है कि किसी चीज के दाम को स्थिर रखने या हल्के बदलाव के साथ उसके पैकेट का वजन कम कर दिया जाता है। कंपनियों की नजर महंगाई, कच्चे तेल के भाव और मौसम से जुड़े रिस्क जैसे मानसून और अल नीनो (El Nino) पर भी है।

क्या है कंपनियों की तैयारी

दिग्गज बेकरी फूड कंपनी ब्रिटानिया (Britannia) को इस तिमाही भाव में 1.5-2% बढ़ोतरी की उम्मीद है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ₹5और ₹10 की बिस्किट वाले पैक में श्रिंकफ्लेशन के जरिए किया जा सकता है क्योंकि चीनी और पाम तेल की कीमतें अभी भी ऊंची हैं। कंपनी के एमडी और सीईओ रक्षित हरगवे के मुताबिक जून तिमाही में प्राइसिंग से जुड़ी ग्रोथ मुख्य रूप से श्रिंकफ्लेशन के जरिए आई थी और इसका ओवरऑल असर 1% था लेकिन सितंबर तिमाही में 1.5-2.0% तक अतिरिक्त प्राइसिंग एक्शन देखने को मिल सकता है।

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Godrej Consumer Products) ने जून तिमाही में औसतन लगभग 5% भाव बढ़ाए थे। साथ ही कंपनी ने सितंबर तिमाही में भाव में और बढ़ोतरी की भी बात कही। हालांकि कंपनी कच्चे माल के भाव के रुझान को लेकर ज्यादा स्पष्टता का इंतजार कर रही है। कंपनी के सीईओ सुधीर सीतापति का कहना है कि कंपनी के कई कच्चे माल की कीमतें कच्चे तेल से जुड़ी हुई हैं और इसके भाव में बदलाव का असर आमतौर पर 3-4 हफ्ते में दिखाई देता है। फिलहाल कच्चा तेल प्रति बैरल $80-85 के आसपास है और कंपनी का मानना है कि फिलहाल बहुत अधिक प्राइस हाइक की जरूरत नहीं है।

डाबर इंडिया (Dabur India) का मानना है कि इनपुट कॉस्ट यानी कच्चे माल और अन्य खर्च के ऊंचे बने रहने के आसार हैं। ऐसे में कंपनी का कहना है कि मार्जिन को बनाए रखने के लिए वह सोच-समझकर भाव बढ़ाएगी और साथ ही प्रोडक्टिविटी और कॉस्ट एफिशिएंसी पर अधिक ध्यान देगी। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ​​का कहना है कि ग्रोथ मुख्य रूप से रेवेन्यू और प्राइस से आएगी। अर्निंग्स कॉल में उन्होंने कहा कि महंगाई की वजह से इसका बोझ कंज्यूमर पर डालना पड़ा, वॉल्यूम ग्रोथ के मुकाबले प्राइस ग्रोथ और वैल्यू ग्रोथ ज़्यादा हो रही है और महंगाई बहुत अधिक होने के कारण वॉल्यूम पर दबाव रहेगा।

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) सितंबर तिमाही में कई प्रोडक्ट कैटेगरी में कीमतें बढ़ा सकती है, क्योंकि इसे तिमाही आधार पर 2-5% की इनफ्लेशन ग्रोथ की आशंका दिख रही है। कंपनी की सीईओ और एमडी प्रिया नायर का कहना है कि जून तिमाही में कीमतें 2-5% बढ़ाई गई थी और अब बढ़ती लागत को एडजस्ट करने और वॉल्यूम ग्रोथ को बनाए रखने के लिए सितंबर तिमाही में भी कीमतें बढ़ाई जाएगी।

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Tata Consumer Products) के एमडी सुनील डिसूजा ने जरूरत पड़ने पर कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं।

नेस्ले इंडिया (Nestle India) का कहना है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन और मानसून पर अलनीनो के असर पर नजर बनी हुई है।

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Hariyali Teej: हरियाली तीज की थाली में जरूर रखें ये 5 मिठाइयां, घरवालों से लेकर मेहमान तक पूछेंगे रेसिपी

सावन की फुहारों के बीच आने वाला हरियाली तीज का त्योहार भारतीय परंपरा, आस्था और उत्साह का खूबसूरत संगम माना जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित इस पर्व पर महिलाएं सजने-संवरने के साथ व्रत, पूजा और कई पारंपरिक रस्मों में शामिल होती हैं। हरी साड़ी, चूड़ियों की खनक, हाथों में रची मेहंदी और झूलों की मस्ती इस दिन के माहौल को और खास बना देती है। परिवार और सहेलियों के साथ मिलकर त्योहार मनाने की खुशी के बीच खानपान का भी अपना अलग महत्व रहता है। खासकर घर में तैयार की गई पारंपरिक मिठाइयां तीज की थाली को पूरा करती हैं और उत्सव में मिठास घोलती हैं।

अगर आप इस बार हरियाली तीज पर कुछ स्वादिष्ट और पारंपरिक बनाना चाहती हैं, तो कुछ ऐसी मिठाइयां हैं जिन्हें आसानी से सेलिब्रेशन का हिस्सा बनाया जा सकता है। ये विकल्प त्योहार के स्वाद के साथ देसी परंपरा का अहसास भी कराएंगे।

घर की बनी मिठाइयों से बढ़ाएं त्योहार की खुशी

हरियाली तीज पर गुड़, नारियल, मावा और सूजी जैसी चीजों से तैयार होने वाली देसी मिठाइयों का खास महत्व है। घर पर तैयार की गई मिठाई में स्वाद के साथ शुद्धता का भरोसा भी रहता है। यही वजह है कि आज भी कई घरों में तीज के मौके पर पारंपरिक मिठाइयां जरूर बनाई जाती हैं।

ओट्स बर्फी

अगर आप पारंपरिक मिठाई में थोड़ा मॉडर्न टच देना चाहती हैं, तो ओट्स बर्फी ट्राई कर सकती हैं। ओट्स, दूध पाउडर, देसी घी, गुड़, दूध, इलायची, काजू, बादाम और नारियल के बुरादे से तैयार होने वाली यह मिठाई स्वादिष्ट होने के साथ अलग विकल्प भी है। तीज पर परिवार वालों का मुंह मीठा कराने के लिए इसे बनाया जा सकता है।

नारियल लड्डू

हरियाली तीज के लिए नारियल के लड्डू भी बढ़िया विकल्प हैं। इन्हें बनाने में ज्यादा झंझट नहीं होती और स्वाद भी हल्का व स्वादिष्ट रहता है। अगर आप रिफाइंड चीनी से बचना चाहती हैं, तो लड्डुओं में गुड़ का इस्तेमाल कर सकती हैं। त्योहार के लिए यह झटपट तैयार होने वाली मिठाई है।

घेवर

हरियाली तीज और घेवर का रिश्ता काफी पुराना है। सावन आते ही बाजारों में घेवर की मांग बढ़ जाती है। कुरकुरा घेवर, ऊपर से मलाई या रबड़ी और ड्राई फ्रूट्स—त्योहार के मौके पर यह कॉम्बिनेशन मिठास को और खास बना देता है। हालांकि इसे घर पर बनाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन तीज की थाली में घेवर हो तो त्योहार का मजा दोगुना हो जाता है।

रबड़ी

सावन में रबड़ी का स्वाद भला कौन भूल सकता है। गाढ़े दूध से तैयार होने वाली यह पारंपरिक मिठाई खास मौकों पर खूब पसंद की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं भी अपनी पसंद और व्रत के नियमों के अनुसार इसका सेवन कर सकती हैं। इसे तैयार करने में थोड़ा समय जरूर लगता है, लेकिन इसका स्वाद मेहनत की पूरी भरपाई कर देता है।

मालपुआ

मालपुआ भी ऐसी पारंपरिक मिठाई है, जिसे कई जगह शुभ अवसरों से जोड़कर देखा जाता है। आटे या मैदे के घोल से तैयार होकर घी में सिकने वाला मालपुआ ऊपर से चाशनी या रबड़ी के साथ परोसा जाए तो इसका स्वाद और बढ़ जाता है। हरियाली तीज पर घरवालों के लिए इसे बनाकर त्योहार की मिठास बढ़ाई जा सकती है।

इस तीज पर थाली में परोसें परंपरा और स्वाद

हरियाली तीज सिर्फ व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि परिवार के साथ खुशियां बांटने का अवसर भी है। ऐसे में घर पर तैयार की गई पारंपरिक मिठाइयां त्योहार के स्वाद को खास बना सकती हैं। चाहे आप ओट्स बर्फी जैसे नए विकल्प को चुनें या घेवर, रबड़ी और मालपुआ जैसी सदाबहार मिठाइयों को हर विकल्प तीज के जश्न में अपनी अलग मिठास घोल सकता है।

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संडे प्रोफाइल : मोहम्मद बिन सलमान:सुधारों, कूटनीति से सल्तनत का चेहरा बदलते एमबीएस

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इन दिनों सक्रिय कूटनीति को लेकर चर्चा में हैं। जुलाई में अमेरिका से परमाणु समझौते और 7 अगस्त को सऊदी, पाकिस्तान व तुर्किये के रक्षा करार में उनकी सक्रियता दिखी है। राजनेता को कई चेहरे लगाकर राजकाज चलाना पड़ता है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) इसका उदाहरण हैं। एक तरफ वे सऊदी समाज में बदलाव और आधुनिकता लाने की कोशिश करते हैं तो दूसरी तरफ सत्ता पर पकड़ मजबूत रखने के लिए सख्त फैसलों को लेकर चर्चा में रहते हैं। जनवरी 2015 में किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद के सत्ता संभालने के बाद एमबीएस को अहम जिम्मेदारियां मिलीं। इसके बाद वे तेजी से सत्ता के केंद्र में पहुंचे। आज 41 साल की उम्र में वे देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं। हाल के दिनों में अमेरिका के साथ परमाणु समझौते और पाकिस्तान-तुर्किये के साथ रक्षा गठजोड़ ने उनकी सक्रिय कूटनीति को फिर चर्चा में ला दिया है। इन कदमों के जरिए वे एक तरफ ईरान जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी का मुकाबला करना चाहते हैं तो दूसरी तरफ चीन, रूस और अमेरिका के बीच संतुलन साधते नजर आते हैं। एमबीएस ने सत्ता में आने के बाद सामाजिक बदलावों पर भी जोर दिया। धार्मिक पुलिस के अधिकार सीमित किए गए। महिलाओं को लेकर कई पुरानी पाबंदियां हटाई गईं। स्कूलों में लड़कियों के खेलने पर लगी रोक खत्म हुई और करीब 40 साल बाद 2018 में देश में सिनेमा फिर शुरू हुआ। 2019 में महिलाओं को पुरुष अभिभावक के बिना यात्रा और काम करने की ज्यादा स्वतंत्रता मिली। विश्व बैंक के अनुसार 2025 में सऊदी अरब की लेबर फोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 35% थी। आर्थिक मोर्चे पर एमबीएस ने तेल पर निर्भरता घटाने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू कीं। निओम का हाईटेक शहर, लाल सागर के पर्यटन प्रोजेक्ट और खेलों को बढ़ावा देना इसी रणनीति का हिस्सा हैं। रियाद में 2024 में ई-स्पोर्ट्स वर्ल्ड कप हुआ। सऊदी अरब 2030 में एक्सपो और 2034 में फुटबॉल विश्व कप की मेजबानी की तैयारी भी कर रहा है। हालांकि एमबीएस का दूसरा चेहरा विवादों से जुड़ा है। सत्ता मजबूत करने के दौरान उनके कई रिश्तेदारों और विरोधियों पर कार्रवाई हुई। पत्रकार जमाल खाशोगी की 2018 में हत्या के मामले में भी उन पर गंभीर आरोप लगे। मानवाधिकार संगठनों ने सऊदी सरकार की आलोचना की है। एमबीएस की निजी छवि भी पारंपरिक सऊदी शासकों से अलग है। उन्हें वीडियो गेम, फॉर्मूला-1 और मोटरसाइकिलों में दिलचस्पी है। वे आम लोगों के साथ सेल्फी लेते भी नजर आते हैं। हालांकि, एक दशक से अधिक समय से सत्ता के केंद्र में रहने के बावजूद सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था अब भी तेल पर काफी निर्भर है। यही उनकी महत्वाकांक्षी योजनाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।

नेपाल PM बालेन सोमवार को पहले भारतीय राजदूत से मिलेंगे:बाद में चीन के दूत से बात होगी, अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से वन-टू-वन बैठक

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह सोमवार को सबसे पहले भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे चीन के राजदूत झांग माओमिंग से बातचीत करेंगे। मंगलवार को शाह अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी स्कॉट अर्बोम से वन-टू-वन बैठक करेंगे। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहली बार होगा, जब बालेन किसी विदेशी राजदूत से अकेले में मुलाकात करेंगे। इससे पहले वे विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते रहे हैं। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव सोमवार को दिन के पहले हिस्से में प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचेंगे। इसके बाद चीनी राजदूत झांग माओमिंग से मुलाकात होगी। एक ही दिन भारत और चीन के राजदूतों से बैठक के बाद अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से बातचीत होगी। इन बैठकों में नेपाल के इन तीनों देशों के साथ रिश्तों और मौजूदा मुद्दों पर बात होने की संभावना है। दो हफ्ते पहले होनी थी मुलाकात शाह की भारत, चीन और अमेरिका के प्रतिनिधियों से मुलाकात करीब दो हफ्ते पहले ही होने वाली थी। लेकिन सुनसरी और दूसरे इलाकों में हुई हिंसा के बाद कार्यक्रम टाल दिया गया था। 27 मार्च को प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह ने विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने से दूरी बनाए रखी थी। उन्होंने अमेरिका के कुछ बड़े अधिकारियों से मिलने के अनुरोध भी स्वीकार नहीं किए थे। इसके बजाय शाह ने काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ सामूहिक बैठक की थी। ऐसी बैठकें 9 अप्रैल और 26 मई को हुई थीं। उस समय शाह की इस नीति को नेपाल के कई राजनयिकों और विदेश नीति के जानकारों ने अच्छा कदम बताया था। उनका कहना था कि इससे सभी देशों को बराबर महत्व देने का संदेश जाता है। 100 दिन बाद बदला शाह का तरीका सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद शाह के सलाहकारों ने उन्हें अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इसके बाद शाह ने मधेश के नेताओं और सांसदों के साथ बातचीत की। वे कारोबारियों, ठेकेदारों, उद्योगपतियों और निर्यातकों से भी मिल रहे हैं। अब विदेशी राजदूतों के साथ अलग-अलग मुलाकात भी इसी बदलाव का हिस्सा है।

नेपाल PM बालेन सोमवार को पहले भारतीय राजदूत से मिलेंगे:बाद में चीन के दूत से बात होगी, अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से वन-टू-वन बैठक

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह सोमवार को सबसे पहले भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे चीन के राजदूत झांग माओमिंग से बातचीत करेंगे। मंगलवार को शाह अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी स्कॉट अर्बोम से वन-टू-वन बैठक करेंगे। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहली बार होगा, जब बालेन किसी विदेशी राजदूत से अकेले में मुलाकात करेंगे। इससे पहले वे विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते रहे हैं।। एक ही दिन भारत और चीन के राजदूतों से बैठक के बाद अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से बातचीत होगी। इन बैठकों में नेपाल के इन तीनों देशों के साथ रिश्तों और मौजूदा मुद्दों पर बात होने की संभावना है। दो हफ्ते पहले होनी थी मुलाकात, हिंसा के बाद टली शाह की इन राजदूतों से मुलाकात करीब दो हफ्ते पहले ही तय थी। लेकिन सुनसरी और दूसरे जिलों में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद कार्यक्रम टाल दिया गया था। अब सरकार ने फिर से इन मुलाकातों का कार्यक्रम बनाया है। प्रधानमंत्री के एक सलाहकार के मुताबिक, दोनों देशों के दूतावासों को मुलाकात का समय बता दिया गया है। पहले बालेन ने भारतीय विदेश सचिव से मिलने से किया था इनकार बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दौर में नेपाल और भारत के रिश्तों में कुछ दूरी नजर आई थी। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक उस समय भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की नेपाल यात्रा भी टल गई थी। मिस्री को 11-12 मई को काठमांडू जाना था। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक, यात्रा टलने की एक वजह बालेन का मिस्री से वन-टू-वन मुलाकात नहीं करना भी थी। बालेन ने उस समय विदेश मंत्री के स्तर से नीचे के विदेशी अधिकारियों से अकेले में मुलाकात नहीं करने की नीति अपनाई थी। बालेन अकेले में मुलाकात से बचते रहे प्रधानमंत्री बनने के बाद शाह ने विदेशी राजदूतों और बड़े विदेशी अधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात नहीं करने का तरीका अपनाया था। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी दूतावास की कई मुलाकात की रिक्वेस्ट भी नहीं मानीं। इनमें अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विशेष दूत सर्जियो गोर से मुलाकात शामिल थी। अमेरिकी विदेश विभाग की पब्लिक डिप्लोमेसी की अंडर सेक्रेटरी सारा बी. रोजर्स भी नेपाल दौरे पर आई थीं, लेकिन शाह से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बजाय शाह ने काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ साथ बैठकर बैठकें की थीं। ऐसी बैठकें 9 अप्रैल और 26 मई को हुई थीं। अकेले विदेशी राजदूतों से क्यों नहीं मिलते थे बालेन? बालेन की राजदूतों के साथ सामूहिक बैठक करने की नीति को नेपाल के कई राजनयिकों और विदेश नीति के जानकारों ने अच्छा कदम बताया था। उनका मानना था कि सभी राजदूतों से एक साथ मिलने पर किसी एक देश को ज्यादा तवज्जो देने का संदेश नहीं जाता। इससे नेपाल सभी देशों के साथ बराबरी का व्यवहार करता दिखता था और बातचीत भी ज्यादा साफ तरीके से होती थी। हालांकि, बाद में बालेन ने नेपाल के घरेलू मामलों से जुड़े लोगों से अलग-अलग मुलाकातें शुरू कर दीं। ऐसे में विदेशी राजदूतों के साथ भी पहले वाली सामूहिक बैठक की नीति को लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल हो गया। 100 दिन बाद बालेन ने बदला अपना तरीका शाह की सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद उनके राजनीतिक सलाहकार आसिम शाह और दूसरे सलाहकारों ने उन्हें देश के अंदर भी अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इनमें कारोबारी, मीडिया से जुड़े लोग, ठेकेदार और दूसरे बड़े लोग शामिल थे। इसके साथ ही काठमांडू में तैनात विदेशी राजदूतों से भी अलग-अलग मुलाकात शुरू करने की तैयारी हुई। हाल के हफ्तों में शाह का तरीका बदला हुआ नजर आया है। वे अब अलग-अलग लोगों से मिलकर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने मधेश के राजनीतिक दलों और सांसदों के साथ बैठकें की हैं। इसके अलावा कारोबारियों, ठेकेदारों, उद्योगपतियों और निर्यातकों से भी अलग-अलग मुलाकात की है।

पीएम मोदी ने अमेरिकी उप-राष्ट्रपति से फोन पर बात की:भारत-अमेरिका साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा; वेंस को बेटे के जन्म पर बधाई दी

पीएम मोदी ने शनिवार रात अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से फोन पर बातचीत की। मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। मोदी ने लिखा, “अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का फोन आया। हमने प्रमुख क्षेत्रों में भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।” उन्होंने वेंस को बेटे के जन्म पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। दरअसल, 19 जुलाई को जेडी वेंस चौथी बार पिता बने थे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति पिछले साल भारत दौरे पर आए थे अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 3 से 7 मार्च 2025 तक भारत में थे। उनके साथ-साथ उनकी पत्नी उषा और तीनों बच्चे- इवान, विवेक और मिराबेल भी भारत आए थे। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उन्हें दिल्ली में रिसीव किया था। एयरपोर्ट पर ही उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था। उन्होंने PM मोदी से भी मुलाकात की थी। उपराष्ट्रपति बनने के बाद यह जेडी वेंस की पहली आधिकारिक भारत यात्रा थी। ट्रम्प भी 2027 की शुरुआत में भारत आ सकते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प साल 2027 की शुरुआत में भारत आ सकते हैं। 27 जून को व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ये बयान दिया। ये ट्रम्प की राष्ट्रपति रहते हुए दूसरी भारत यात्रा हो सकती है। इससे पहले ट्रम्प साल 2020 में पहली बार भारत यात्रा पर आए थे। वे अहमदाबाद में ‘नमस्ते ट्रम्प’ कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उषा वेंस के माता-पिता आंध्र प्रदेश से थे जेडी वेंस की पत्नी ऊषा का जन्म और स्कूली शिक्षा सैन डिएगो में हुआ है। उनके माता-पिता 1980 के दौरान आंध्र से अमेरिका आकर बसे गए थे। अमेरिका में रहने के बावजूद उनके माता-पिता ने वहां की मॉडर्न संस्कृति से प्रभावित हुए बिना उन्हें भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म के अनुसार शिक्षा और संस्कार दिए। बाद में वेंस भी इन संस्कारों से प्रभावित हुए। ऊषा की मां एक बायोलॉजिस्ट हैं और पिता इंजीनियर। ऊषा कहती हैं कि उन्होंने अपने माता-पिता के आदर्शों को ध्यान में रखते हुए ही पढ़ाई की है। येल से बैचलर की डिग्री हासिल करने के बाद ऊषा ने गेट्स कैम्ब्रिज स्कॉलरशिप की मदद से कैम्ब्रिज से मास्टर ऑफ फिलॉसफी की डिग्री हासिल की। ऊषा ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के लिए क्लर्क के रूप में काम किया। कल ही भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिका में पास हुआ अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार रात 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। यह बिल रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से लाया गया। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। 23 जुलाई को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। हालांकि, अभी ये कानून नहीं बना है। अभी इसे अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा। अगर वहां भी बिल पास हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति ट्रम्प के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून बनेगा। पूरी खबर पढ़ें… ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में पहली बार ‘बर्थ टूरिज्म’ पर रोक:यहां पैदा हुए विदेशियों के बच्चे को नागरिकता नहीं मिलेगी; ट्रम्प बोले- बर्थराइट सिटीजनशिप मजाक बनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर अमेरिका में जन्म लेने वाले लोगों को नागरिकता मिलने के दायरे को सीमित करने की कोशिश की है। पूरी खबर पढ़ें…

111 साल की महिला ने बताया लंबी उम्र का राज, रोज खाती हैं मछली और लेती हैं 2 झपकी

सोशल मीडिया पर चीन की वांग गेयिंग की कहानी काफी वायरल हो रही है। 111 साल की चीनी महिला वांग गेयिंग की लंबी उम्र लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। गेयिंग ने बताया कि, लंबी उम्र के लिए हमेशा कोई खास या मुश्किल तरीका अपनाना जरूरी नहीं होता। उनके रोजमर्रा के जीवन की साधारण आदतें और आसान दिनचर्या ही उनकी लंबी और स्वस्थ जिंदगी का हिस्सा रही हैं। सोशल मीडिया पर ये कहानी काफी वायरल हो रही है। आइए जानते हैं इनकी पूरी कहानी

चीन के जिआंग्सू प्रांत के रुगाओ शहर की रहने वाली वांग गेयिंग 111 साल की उम्र में भी अपने रोजमर्रा के काम खुद करने की कोशिश करती हैं। 100 साल की उम्र पार करने के बाद भी उनकी एक्टिव बनी हुई है। उनकी दिनचर्या की आदतें उन्हें इस उम्र में भी एक्टिव और आत्मनिर्भर रखती हैं।

100 साल की उम्र में करती है काम

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, वांग गेयिंग उम्र बढ़ने के बावजूद काफी एक्टिव रही हैं। 100 साल की उम्र में भी वह खेतों में काम करती थीं और मूंगफली व तरबूज तोड़ने जैसे कामों में हाथ बंटाती थीं। 111 साल की वांग आज भी घर के छोटे-मोटे काम खुद करती हैं। वह टेबल साफ करती हैं, कपड़े तह करती हैं और घर के दूसरे हल्के कामों में हाथ बंटाती हैं। परिवार के लोग उन्हें कई बार आराम करने की सलाह देते हैं, लेकिन वांग के मुताबिक, शरीर को एक्टिव रखना जरूरी है। वह किसी खास एक्सरसाइज रूटीन का पालन नहीं करतीं, बल्कि घर के काम करते हुए ही उनका शरीर चलता-फिरता रहता है। उनका कहना है कि इससे शरीर के अंग सक्रिय रहते हैं और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर बना रहता है।

वांग की लंबी उम्र को उनके शहर रुगाओ से भी जोड़कर देखा जाता है। चीन के पूर्वी हिस्से में स्थित जिआंग्सू प्रांत का ये शहर लंबे समय से अपनी ज्यादा उम्र तक जीने वाली आबादी के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिन्होंने 100 साल या उससे ज्यादा की उम्र पूरी की है।

रुगाओ में 672 लोग है 100 के पार

जियांगहाई इवनिंग न्यूज के मुताबिक, फरवरी तक रुगाओ में 100 साल या उससे ज्यादा उम्र के 672 लोग जीवित थे। इसी वजह से यह शहर चीन के उन इलाकों में शामिल है, जहां इतनी ज्यादा उम्र तक पहुंचने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक है। शोध में रुगाओ की मिट्टी में मौजूद खनिजों और स्थानीय वातावरण में पाए जाने वाले सूक्ष्म तत्वों का भी अध्ययन किया गया है। साइंटिस्ट्स ने रुगाओ के वातावरण को समझने के लिए वहां की मिट्टी, फसलों और पीने के पानी की जांच की है।

खान-पान का रखती है ध्यान

शोध के मुताबिक, रुगाओ का स्थानीय वातावरण लोगों की सेहत और लंबी उम्र से जुड़ा हो सकता है, हालांकि इसकी कोई एक वजह साफ नहीं है। वहीं, वांग कम मात्रा में अलग-अलग तरह का खाना खाती हैं। उन्हें मछली पसंद है और वह ज्यादा खाने से बचती हैं। वांग की दिनचर्या में सिर्फ खान-पान और शारीरिक गतिविधियां ही शामिल नहीं हैं, बल्कि वह छोटी-छोटी खुशियों को भी महत्व देती हैं। वह हर दिन कोई न कोई अच्छा काम करने की कोशिश करती हैं। कभी वह परिवार के किसी सदस्य की तारीफ करती हैं तो कभी किसी पुराने दोस्त को छोटा सा संदेश भेजती हैं। जब कोई बात वांग को परेशान करती है, तो वह उसे लेकर रातभर चिंता करने के बजाय सो जाना पसंद करती हैं।

वांग का सोने-जागने का समय भी तय है। वह शाम 7 बजे सोती हैं और सुबह 7 बजे उठती हैं। दिन में एक-दो बार आराम भी करती हैं। वांग अपने परिवार की पांच पीढ़ियों के साथ रहती हैं और उनका एक पोता 60 साल का है। पांच पीढ़ियों के परिवार के साथ रहते हुए भी वह अपनी क्षमता के अनुसार रोजमर्रा के काम खुद करती हैं।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

कोरिया मास्टर्स के एतिहासिक मुकाबले में रक्षिता को हराकर अश्मिता फाइनल में

Badminton tournament

भारत की अश्मिता चालिहा ने शनिवार को कोरिया मास्टर्स 2026 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला एकल के सेमीफाइनल में हमवतन रक्षिता रामराज को हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। आज आसन यी सन-सिन जिम्नेजियम में भारतीयों के बीच हुए इस सेमीफाइनल में, महिला एकल बैडमिंटन रैंकिंग में 50वें स्थान पर मौजूद अश्मिता चालिहा ने दुनिया की 49वें नंबर की खिलाड़ी रक्षिता रामराज को 48 मिनट तक चले मुकाबले में 21-13, 16-21, 21-13 से हराया।

26 साल की अश्मिता चालिहा ने शुरुआत से ही पहले गेम पर अपना दबदबा बनाए रखा; इंटरवल तक वह 11-6 से आगे थीं और अंत में पहला गेम जीत लिया। रक्षिता रामराज ने दूसरे गेम में ज़बरदस्त वापसी की। उन्होंने 11-6 की बढ़त बनाई और अश्मिता चालिहा की वापसी की कोशिशों को नाकाम करते हुए मैच को बराबरी पर ला दिया, जिससे मुकाबला निर्णायक गेम तक पहुंच गया।

इसके बाद निर्णायक गेम में अश्मिता चालिहा ने खेल पर पकड़ बनाई और लगातार छह पॉइंट जीतकर इंटरवल तक 11-3 की बढ़त हासिल कर ली। ब्रेक के बाद भी उन्होंने अपनी बढ़त बनाए रखी और जीत पक्की करते हुए फ़ाइनल में अपनी जगह बना ली।

कोरिया मास्टर्स में अश्मिता चालिहा पहली बार बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फ़ाइनल में पहुंची। इससे पहले यह भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी जून में मकाऊ ओपन के सेमीफ़ाइनल से बाहर हो गई थीं। अब फाइनल में उनका सामना चीन की हान कियानक्सी से होगा, जो चौथी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी और 2026 जर्मन ओपन चैंपियन हैं।

कोरिया मास्टर्स फ़ाइनल में जीत के साथ ही वह इस साल एकल बीडब्ल्यूएफ ख़िताब जीतने वाली चौथी भारतीय महिला बन जाएंगी। उनसे पहले ताइपे ओपन में तन्वी शर्मा, जापान ओपन में पीवी सिंधु और थाईलैंड मास्टर्स में देविका सिहाग ने यह उपलब्धि हासिल की है।